Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 12 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2591, दिनांक 27.07.2018
VCD 2591, Dated 27.07.2018
प्रातः क्लास 24.8.1967
Morning Class dated 24.8.1967
VCD-2591-extracts-Bilingual

समय- 00.01-16.50
Time- 00.01-16.50


प्रातः क्लास चल रहा था - 24.8.1967. गुरुवार को पांचवें पेज के दूसरी लाइन में बात चल रही थी – कि जो समझानी है, ये तो बाप देते हैं कि शान्त रहना है। सुख-शान्ति की दुनिया आने वाली है। तो बताया कि बाबा का आज समझानी के ऊपर ही चला गया सारा रुझान। बाप वहाँ तो शिवबाबा की, कृष्ण की जन्माष्टमी के लिए रात को समझाया। तो उस समय में प्रेरणा आई जो समझाय देवें। सुबह को उनका समाचार भेज देवें जो ये कैसे समझाओ। समझाने की तो बहुत ही युक्तियां हैं। कोई एक युक्ति थोड़ेही है। बाबा ने आते ही कहा – देखो, विश्व में शान्ति। अच्छा, कृष्ण का फिर से जन्म। चलो भला देखो ना - अभी कलियुग का अंत है। ये कृष्ण आ रहा है क्योंकि सतयुग आने वाला है। तो कलाहीन कलियुग का अंत और कृष्ण के लिए 16 कला संपूर्ण सतयुग सामने खड़ा है। परन्तु इससे पहले लड़ाई तो जरूर लगेगी क्योंकि अशान्ति बहुत है ना। बहुत धर्म हो गए हैं। तो आपस में एक-दूसरे की धारणाएं टकराती हैं। परन्तु फिर कृष्ण तो आ रहे हैं ना। और अभी लड़ाई है तो कृष्ण तो आएंगे ना। क्योंकि महाभारत में तो लिखा है - गांधारी ने कहा कृष्ण से - आपने लड़ाई लड़ाई। चलो। हँ।

तो बाबा तो बोलते हैं संगमयुग की बात कि कृष्ण आ रहे हैं। अब ब्रह्मा बाबा बीच में लगाय देते हैं सतयुग की बात कि सतयुग में कृष्ण आय रहे हैं। तो बाबा ने बोला बहुत धर्म भी हैं क्योंकि कृष्ण तो आ रहे हैं। हँ? कब आते हैं कृष्ण लडाई लगवाने के लिए? संगमयुग में। संगमयुग में होता ही है कलियुग का अंत जहाँ बहुत धर्म होते हैं, बहुत अशान्ति, तो कृष्ण तो आ रहे हैं ना। अभी लड़ाई है तो कृष्ण तो आएंगे ना। फिर ब्रह्मा बाबा बोले - सतयुग में आएंगे। और कोई जगह में थोड़ेही आएंगे कृष्ण। कृष्ण वो कहा जाता है ना बच्ची। हँ? वो माने? कृष्ण वो कहा जाता है ना बच्ची। हँ?

देवताओं का परछाईं, पाछा। इस कलियुग की दुनिया में देवताओं का पाछा नहीं पड़ता, परछाई नहीं पड़ती। इस धरती पर यानि वो खड़ा रहे और पाछा पड़े, वो तो हो नहीं सकता है। अभी साक्षात्कार भी करें तो भी पाछा थोड़ेही पड़ सकता है। कोई नहीं। देखो, जैसे हम लोग मंगाते थे नारायण को, लक्ष्मी को मंगाते थे, मंगाते थे ना साक्षात्कार में। पीछे उनका पाछा थोड़ेही पड़ता था। पाछा तो उन दूसरे शरीर का पड़ता था जो साक्षात्कार करते थे। ऐसे तो नाटक जभी करते हैं, लक्ष्मी-नारायण बनाते हैं तब तो उनका पाछा पड़ता है। वो तो आर्टिफिशियल बात हो गई। हँ? नाटकबाजी करते हैं, तो पाछा पड़ता है। वो सचपच पाछा थोड़ेही पड़ता है लक्ष्मी-नारायण का। तो सचेपचे का भी पाछा नहीं पड़ सकता है। बाकि आर्टिफिशियल का तो बहतु ही पड़ सकता है। देखो, इनका पाछा पड़ सकता है। किनका? इनको बाहर में, मन्दिर में, बाहर में निकालो। तो देखो इनका पाछा पड़ेगा। परन्तु ये मन्दिर में तो जड़ हैं ना। चैतन्य थोड़ेही हैं। चैतन्य का तो पाछा नहीं इस सृष्टि में पड़ सकता। तो ये सभी बातें तुम बच्चे सुन रहे हो। क्या बातें सुनी? हँ? चैतन्य का पाछा नहीं पड़ सकता। चैतन्य ब्रह्मा बाबा के हिसाब से सतयुग में होते हैं कृष्ण और लक्ष्मी-नारायण। इस सृष्टि में उनका पाछा नहीं पड़ सकता क्योंकि ये तो सृष्टि पतित है।

लेकिन ये बातें तुम किससे सुन रहे हो? माना सुनने वालों की बुद्धि में भेद पैदा हो रहा है। तो बाबा ने बोल दिया। निराकार से, शिव से सुन रहे हो या साकार से सुन रहे हो? ये जानते हो कि शिवबाबा हमको भिन्न-भिन्न रीति से पढ़ाय के, समझाय के, ताडना करते-करते सारी आयु लग जाती है। किसको? बाबा की भी आयु होती है? हँ? शिवबाबा की आयु होती है या नहीं? बाप की आयु नहीं होती, शिव ज्योतिबिन्दु निराकार आत्माओं का बाप। किन्तु जिसमें प्रवेश करते हैं वो तो साकार हुआ ना। तो बोला इनकी आयु होती है। बुड्ढे बाप बन जाते हैं। कोई तो मरने तक भी बाप बन जाते। कई ऐसे उनके कुटुम्बी होते हैं जो बोलते हैं – भई हम तो सारी उम्र उनको समझाया। ये तो समझते ही नहीं हैं। ऐसे कहते हैं ना बुड्ढे-बुड्ढे। बहुत समझाते हैं। तंग हो जाते हैं बुड्ढेपन में तो ऐसे कहते हैं। शुरु से ही इनने तंग किया है। किसने? इनने। इनने माने? हँ? और शुरू से माने कबसे? यज्ञ के आदि से ही। इनने तंग किया है। पिछाड़ी तक भी तंग करते हैं। मरने का समय आया तभी भी ये बच्चे तंग करते हैं। ये छोकरे तंग करते ही हैं तो ये बाप भी ऐसा ही करते हैं। अरे! छोकरे तंग करते हैं तो बाप क्या करते हैं? ऐसे ही है। जैसे वो बाप तंग करते, तंग करके-करके चले जाते हैं। और बाप तो कहते ही हैं ना। वो बोलता है हम भी इनको समझाते-समझाते तंग हो जाते हैं। और समझ ही नहीं सकते हैं। कितना समझाते। हँ? कितना समझाते हैं? और कितने साल समझाते हैं? हँ? 50 साल समझाते हैं। तो जैसे लौकिक बाप की एक्टिविटी वैसे फिर पारलौकिक बाप की भी एक्टिविटी। क्योंकि वो बाप तो है ना। और बाप की फिर एक्टिविटी तो चाहिए ना। तो समझाते रहते हैं।

उन लौकिक बाप की होती है हद की एक्टिविटी, तो फिर इनकी है बेहद की एक्टिविटी। किनकी? इनकी माने किनकी? हँ? हाँ।
(किसी ने कुछ कहा।) शिव की? शिव बाबा की? शिवबाबा एक हैं कि दो हैं? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) अलौकिक बाप की? इनकी क्यों कहा? अलौकिक बाप एक है या दो हैं? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) एक है? दो हैं बापदादा। हँ? जिनकी आयु होती है। बुड्ढे-शुड्ढे होने की। शिव की तो आयु होती नहीं। उनका अपना शरीर ही नहीं तो आयु कहाँ से होगी? तो इनकी बेहद की एक्टिविटी है। ये बेहद में बच्चों को भी समझाते हैं। हँ? खुद भी बेहद में आत्मिक स्थिति में रहते हैं और बच्चों को भी उन्हीं को समझाते हैं जो आत्मिक स्थिति में रहने की प्रैक्टिस करते हैं। क्योंकि पढ़ाई भी उनको करानी है। आत्मिक स्थिति में ठहरने की पढ़ाई भी तो पढ़ानी है ना। तो ये पढ़ावें अच्छी तरह से तो इनको समझाया जाता है। किनको? यही दोनों को। बापदादा को। कौनसे बापदादा? साकार, जिनकी आयु होती है। इनको समझाया जाता है पढ़ाओ अच्छी तरह से। हँ? एक तो बड़ी बात समझाओ कि भई ज्ञान अलग चीज़ है। हँ? कैसे अलग है? क्योंकि ज्ञान एक से आता है और भक्ति अलग चीज़ है। कैसे अलग है? हँ? भक्ति अनेकों से आती है। रावण से आती है भक्ति। तो रावण के कितने सिर हुए? दस सिर हुए। तो दस धर्म हैं जो अपनी-अपनी अलग-अलग बातें बताते हैं। तो वो सारा भक्ति हो गया। भक्ति को ज्ञान नहीं कहा जाता है। कभी इसके पीछे भागो। कभी उसके पीछे भागो। उसको भक्ति कहा जाता है। भागते रहते हैं। देखो इस ब्रह्मा ने 12-12 गुरु किये। मिला कुछ भी नहीं। तो देखो भक्ति अंधश्रद्धा की चीज़ है। अंधे होकर भागते रहते हैं। इसलिए ज्ञान को भक्ति नहीं कहा जाता क्योंकि ज्ञान है जानकारी। जानकारी किसकी मुख्य? अपनी और अपने बाप की।

A morning class dated 24.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the second line of the fifth page was that it is the Father who gives the explanation that you have to be peaceful. The world of happiness and peace is going to arrive. So, it was told that Baba was entirely inclined towards the explanation today. The Father had explained in the night about ShivBaba and Krishna's Janmashtami (birthday). So, at that time He got an inspiration that He should explain. In the morning I should send the message that how should you explain. There are many tactics to explain. There is not a single tact. Baba said as soon as He came - Look, peace in the world. Achcha, birth of Krishna once again. Okay, look, now it is the end of the Iron Age. This Krishna is coming because the Golden Age is going to arrive. So, the end of the Iron Age devoid of celestial degrees and the Golden Age, perfect in 16 celestial degrees, is standing in front of Krishna for him. But before this, the war will definitely break out because there is a lot of disturbance, isn’t it? There are many religions. So, the inculcations of one another clash. But then Krishna is coming, is not he? And now when there is war, Krishna will come, will he not? It is because it has been written in the Mahabharata - Gandhari said to Krishna - You have caused this war. Okay. Hm.

So, Baba speaks about the Confluence Age that Krishna is coming. Well, Brahma Baba adds the topic of Golden Age in between that Krishna of the Golden Age is coming. So, Baba said there are many religions also because Krishna is coming. Hm? When does Krishna come to cause a war? In the Confluence Age. In the Confluence Age, there is the end of the Iron Age when there are many religions, lot of disturbance; so, Krishna is coming, is not he? There is war now; so, Krishna will come, will he not? Then Brahma Baba said - He will come in the Golden Age. Krishna will not come at any other place. He is called Krishna, is not he daughter? Hm? What is meant by 'he'? He is called Krishna, is not he daughter? Hm?

Shadow (parchaai, pacha) of deities. The shadow of deities does not fall in this world of Iron Age. It is not possible that he stands on this Earth and his shadow falls on it. Even if someone has vision (saakshaatkaar) [of a deity], his/her shadow cannot fall. Not at all. Look, for example, we people used to invoke Narayan, Lakshmi; we used to invoke in visions, did not we? Their shadow did not used to fall at the back. The shadow of another body, who had visions, used to fall. When people perform drama, when they enact Lakshmi-Narayan, then their shadow falls. That is an artificial thing. Hm? When they enact dramas, then their shadow falls. That is not the real shadow of Lakshmi-Narayan. The shadow of the real ones cannot fall. But the shadow of the artificial ones can fall a lot. Look, their shadow can fall. Whose? If you take them out from the temple, then look, their shadow will fall. But they are non-living [idols] in the temple, aren't they? They are not living (chaitanya). The shadow of the living ones cannot fall on this world. So, you children are listening to all these topics. What topics did you listen? Hm? The shadow of the living ones cannot fall. From the point of view of Brahma Baba the living ones in the Golden Age are Krishna and Lakshmi-Narayan. Their shadow cannot fall on this world because this world is sinful.

But from whom are you listening to these topics? It means that a doubt is arising in the intellect of the listeners. So, Baba spoke. Are you listening from the incorporeal, from Shiv or are you listening from the corporeal? You know that it takes an entire lifetime for ShivBaba in teaching us in different ways, in explaining, in scolding. Who? Does Baba also have an age (aayu)? Hm? Does ShivBaba have an age or not? The Father, the point of light incorporeal Father of souls does not have an age. But the one in whom He enters is corporeal, is not he? So, it was said - This one has an age. Old men become fathers. Some become a Father some time before death. They have many such relatives who tell them - Brother, I explained to him throughout my life. This one does not understand at all. They say - 'buddhey-buddhey' (old man), don't they? They explain a lot. When they are frustrated in the old age, they say like this. These (innay) have troubled from the beginning itself. Who? 'Innay' refers to whom? Hm? And 'from the beginning' refers to which time? From the beginning of the Yagya itself. These have troubled. They trouble even till the end. These children trouble even till the time of death arrives. These sons trouble; so, these fathers also do like this. Arey! When the sons trouble, then what do the fathers do? It is like this only. Just as those fathers cause troubles, and they depart [i.e. die] while causing troubles. And the Father says, doesn't He? He says that I also feel frustrated while explaining to these people. And they cannot understand at all. He explains so much. Hm? To what extent does He explain? And for how many years does He explain? Hm? He explains for 50 years. So, the activity of the Paarlokik Father is also just like the activity of the worldly Father because He is a Father, is not He? And then the activity of a Father is required, is not it? So, He keeps on explaining.

Those lokik fathers have a limited activity and these (inki) have an unlimited activity. Who? 'Inki' refers to whom? Hm? Yes.
(Someone said something.) Of Shiv? Of ShivBaba? Is ShivBaba one or two? Hm? (Someone said something.) Of the alokik Father? Why was it said 'inki'? Is the alokik Father one or two? Hm? (Someone said something.) Is it one? BapDada are two. Hm? Those who have an age of growing old. Shiv doesn't have an age. He does not have an body of His own at all; so, how will He have an age? So, these have an unlimited activity. This one explains to the children also in an unlimited sense. Hm? He Himself remains in a soul conscious stage in an unlimited sense and even in case of children He explains only to those who practice remaining in soul conscious stage because it is He who has to teach. The knowledge of becoming constant in soul conscious stage is also to be taught, is not it? So, these are explained so that these can teach well. Who? These two. BapDada. Which BapDada? Corporeal, who have an age. These are explained - Teach nicely. Hm? One big thing that you should explain is that brother, knowledge is different. Hm? How is it different? It is because knowledge comes from one. And Bhakti is a different thing. How is it different? Hm? Bhakti comes from many. Bhakti comes from Ravan. So, how many heads does Ravan have? He has ten heads. So, there are ten religions which narrate their own different topics. So, all that is Bhakti. Bhakti is not called knowledge. Run after this one sometimes. Run after that one sometimes. That is called Bhakti. They keep on running. Look, this Brahma had 12 gurus. He did not get anything. So, look, it is a thing of blind faith. They keep on running blindly. This is why knowledge is not called Bhakti because knowledge is information. Information mainly of what? Of oneself and of one's Father.
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नोटः यह केवल एक प्रारूप है। उक्त वीसीडी के संपूर्ण मूल पाठ या मूल आडियो, वीडियो के लिए www.adhyatmik-vidyalaya.com देखिये।
Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 14 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2592, दिनांक 28.07.2018
VCD 2592, Dated 28.07.2018
प्रातः क्लास 24.8.1967
Morning Class dated 24.8.1967
VCD-2592-extracts-Bilingual

समय- 00.01-18.43
Time- 00.01-18.43


प्रातः क्लास चल रहा था - 24.8.1967. गुरुवार को छठे पेज के अंत में बात चल रही थी – आपे ही पूज्य आपेही पुजारी। पर ये कैसे बनते हैं? हँ? कौन बनाता है? बोला भगवान तो पुजारी नहीं बनाते हैं ना बच्चे। तो कौन बनाता है? हँ? जो पूज्य सो पुजारी। तो पूज्य कौन बनाता है? सवाल ये है। पुजारी बनाने का सवाल नहीं है। पूज्य कौन बनाता है? शिवबाबा पूज्य बनाता है। शिवबाबा जिसे कहा जाता है तो वो परम पूज्य है? हँ? और सदा पूज्य है? हँ? सदा पूज्य तो नहीं है। कभी पूज्य तो कभी पुजारी। तो सदा पूज्य कौन है? उसकी पूजा होती है? हँ? उसको याद करते हैं या पूजा होती है? पूजा साकार की की जाती है या निराकार की की जाती है? निराकार को तो याद किया जा सकता है। उसे पूजा कैसे करेंगे? बिन्दी की पूजा करेंगे, जल चढ़ाएंगे, फूल-पत्र, लुढ़क जाएगी। पता ही नहीं चलेगा कहाँ गया? वो तो दिखाई भी नहीं पड़ती। इन आँखें से दिखाई पड़ती है क्या? तो किसके ऊपर जल चढ़ाएंगे, फूल-पत्र चढ़ाएंगे?

जो निराकार जो एवर प्योर है, वो ही वास्तव में भगवान है ना। जो साकार शरीर में प्रवेश करके जैसा नाम वैसा काम करके दिखाता है। क्या काम करके दिखाता है? जो मनुष्यों के बस की बात ही नहीं है। ये विष पीना, कोई मनुष्य मात्र इस दुनिया में नहीं है जो विष पीके जिन्दा रहे। काला सांप काटता है ना। शरीर में विष छोड़ता है तो कोई जिन्दा रहता है क्या? नहीं। तो ये तो भगवान है। भगवान पुजारी बनाते हैं या पूज्य बनाते हैं? हँ? भगवान तो पुजारी नहीं बनाते। पूज्य बनाते हैं? अच्छा पूज्य बनते कौन हैं? भगवान पुजारी बनते हैं? हँ? भगवान पुजारी नहीं बनते? तो दूसरों को कैसे बनाएंगे? तो भगवान तो पूज्य है, पूजने योग्य है। तो वो तो पूज्य ही बनते हैं। पुजारी बनाने वाला कोई और है क्या? हँ? कौन? अभी प्रश्न दूसरा है। ये रावण है। कहते हैं राम ही रावण बनता है।

तो ये सभी कितनी-कितनी उनके अनेक प्रकार की ढ़ेर की ढ़ेर प्वाइंट्स तुम बच्चों को समझाई जाती हैं। जभी-जभी बड़े दिन होते हैं तभी-तभी समझाया जाता है। कृष्ण आ रहे हैं। जो तुम लोग लिखा हुआ है। कहाँ लिखा हुआ है? हँ? सन् 67 की बात बताई। हर सेन्टर में मोस्टली जो मुख्य मेन गेट होता था उसके ऊपर गेट पर ही लिखा हुआ होता था मोटे-मोटे अक्षरों में। चित्र दिया श्री कृष्ण का। हँ? और दिखाते हैं कि एक हाथ में स्वर्ग का गोला और लात में दिखाई गई नरक का गोला, नरक की दुनिया। नरक की दुनिया को लात मार रहे हैं, हँ, और स्वर्ग की दुनिया को हथेली पे दिखाया जाता है, बुद्धि रूपी हथेली में। तो तुमने वो चित्र लिखा हुआ है। वो तो उनको बताओ। देखो ये कृष्ण आएगा ना। तो सतयुग में तो जरूर फिर कृष्ण होगा। वर्ल्ड की हिस्ट्री, जॉग्राफी कैसे फिरेगी? पहले भी सतयुग की आदि में आया था। फिर आएगा। तो हिस्ट्री, जॉग्राफी फिरेगी ना। पहले-पहले नई दुनिया होती है, फिर पुरानी होती है। पहले 16 कला संपूर्ण फिर कलाहीन। तो ये 16 कला संपूर्ण में, नई दुनिया में सतयुग में जाएगा जरूर। और फिर वो पुरानी दुनिया में जैसे कहाँ वो तमोप्रधान हो जाते हैं तो उनको काला दिखाते हैं।

अब अकेले कृष्ण को काला दिखाते हैं या राम को भी काला दिखाते हैं? कहते हैं राम भगवान, कृष्ण भगवान। काले बनते हैं तो पुजारी बन जाते है। तो उनको भगवान कहेंगे क्या? और फिर एक राम-कृष्ण ही थोड़ेही हैं जिनको काला दिखाते हैं? 24.8.67 की वाणी का सातवाँ पेज। एक कृष्ण को थोड़ेही दिखाते हैं। नहीं। यथा राजा रानी तथा प्रजा। तो पहला-पहला राजा इस दुनिया का कौन हुआ? कहेंगे कृष्ण। बचपन में नाम कृष्ण का, बड़ा होता है तो नारायण टाइटल मिल जाता है। लेकिन ये टाइटल क्यों मिला नारायण का? हँ? क्या सतयुग के आदि में वो ज्ञान जल में रहते हैं? नार माने तो ज्ञान जल। अयन माने घर। रहते हैं क्या? ज्ञान जल में नहीं रहते हैं। लेकिन जो ज्ञान का सार है मैं आत्मा ज्योतिबिन्दु उस सार में तो टिके हुए रहते हैं ना। तो सारी प्रजा यथा राजा रानी तथा प्रजा, सारी प्रजा उसी स्टेज में टिकती है। कोई में देहभान का नाम निशान नहीं। तो देखो, उन कृष्ण में भी बहुत समझ है कि सार की बात में टिकते हैं। तो जानते हैं ना कि विस्तार में सार नहीं दिखाई देता। छुप जाता है। और सार में ही सब कुछ है। श्री कृष्ण पुरी में भी सब कोई 84 जन्म नहीं लेंगे। हँ? क्या कहा? भले श्री कृष्णपुरी में पहले जनम में आवेंगे फिर भी पूरे 84 जन्म लेंगे क्या? हँ? नहीं लेंगे। कृष्ण का ही 84 जन्म नहीं होता है पूरा। हँ? 84 जन्म तो होता है लेकिन पूरे कल्प में उनका कितना टाइम कम हो जाता है? 50 साल कम हो जाता है। तो पूरे 84 जन्म कहेंगे क्या? नहीं। तो फिर कौन है? कोई है भी या नहीं जिसके पूरे 84 जन्म कहें? आल राउण्ड पार्टधारी।

तो सवाल आता है कि सतयुग के जो कृष्ण हैं उसको जन्म देने वाला कौन? जो जन्म देने वाला है वो ही पूरे 84 जन्म लेगा। तो फिर उसी का नाम होना चाहिए श्री कृष्ण। परन्तु वो तो संगमयुग का है। संगमयुग की बात तो दुनिया में किसी को याद नहीं। शास्त्रों में है सारी संगमयुग की बातें, लेकिन ये किसी की बुद्धि में नहीं है कि ये संगमयुग भी कोई युग होता है जिसमें पुरुषोत्तम युग भी होता है। है ना? ये भी तो हिसाब है ना कि 100 बरस ये तो, ये तो, ये तो 1250 वर्ष है ना। हँ? सतयुग के, त्रेता के, द्वापर, कलियुग के एक-एक युग के 1250 वर्ष हैं ना। तो ये 100 वर्ष का क्या हिसाब? इन 100 वर्षों में चारों युगों की शूटिंग होती है। हाँ, सतयुग में 100 बरस, 150 बरस की आयु होती है ना बच्चे। फिर जरूर वो आयु खलास हुई। अगला जनम आया तो आयु कम होगी ना। क्यों? क्यों कम होगी? हँ? कोई एक सौ
(किसी ने कुछ कहा) हाँ, क्यों कला कम होती? (किसी ने कुछ कहा।) आत्मिक स्थिति कम हो जाती? अरे! आयु कम होने का कला कम होने का कारण हुआ भोग वासना। देवताओं भी तो भोगी होते हैं ना। हँ? कर्मेन्द्रियों से सुख नहीं भोगते भ्रष्ट इन्द्रियों से। ज्ञानेन्द्रियों से तो सुख भोगते हैं ना। ज्ञानेन्द्रियों में भी नंबरवार।

तो सतयुग के पहले जनम के बाद कुछ न कुछ आयु कम हो जाती है। कोई की एक बरस, एक आयु होगी। तो कहेंगे कम हो गई। तो 84 जनम की आयु। तो 83 जनम की भी तो आयु वो आने वाले होंगे ना। फिर 82 जन्म भी आने वाले होंगे। जो 83 जन्म में आने वाले होंगे वो तो अगली पीढ़ी हो गई ना। और 82 जन्म में आने वाले होंगे वो और भी अगली पीढी हो गई। तो ऐसे-ऐसे सतयुग की आठ पीढियों में कम होते जाएंगे। लास्ट वाला नारायण। पूरी दो कला कम हो जावेगी। सतयुग की सात जन्म कम हो जावेंगे। आठवें नारायण की। तो वो आने वाले जो होंगे वो ऐसे-ऐसे होंगे कम, कम, कम। तो उनमें आयु भी कम होगी। आत्मा की शक्ति, पावर भी? कम होगी। तो 1250 वर्ष, फिर 1200 वर्ष भी और फिर 12 सदियाँ भी तो कम हो जाएंगी। सदियाँ माने सौ साल। कि एक दो के पीछे आएंगे। कोई 84 तो कोई 83 तो कोई 12 कम हो जावेंगे। है ना? 84, 83, 82, 81, 80, ऐसे भी चले जाएंगे। नीचे में आते जाते हैं। अगर पूरा 84 जन्म कहें वो तो फिर कृष्ण का ही कहेंगे जरूर। और उनके साथ जो फर्स्ट पीढ़ी में आने वाले होंगे या तो उनके साथ जो रहने वाले होंगे उनके ही 84 जन्म कहेंगे।

A morning class dated 24.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the sixth page on Thursday was - Aapey hi poojya, aapey hi pujaari (You yourself are worshipworthy and you yourself are the worshipper). But how do you become this? Hm? Who makes? It was said - God doesn't make worshippers, does He children? So, who makes? Hm? The one who is worshipworthy becomes a worshipper. So, who makes you worshipworthy? The question is this. The question is not about making a worshipper. Who makes you worshipworthy? ShivBaba makes you worshipworthy. Is the one who is called ShivBaba the most worshipworthy one? Hm? And is he forever worshipworthy? Hm? He is not forever worshipworthy. Sometimes worshipworthy and sometimes worshipper. So, who is forever worshipworthy? Is He worshipped? Hm? Is He remembered or is He worshipped? Is a corporeal worshipped or is an incorporeal worshipped? The incorporeal can be remembered. How can He be worshipped? If you worship a point, if you pour water over it, if you put flowers, leaves on it, then it will roll down. You cannot know at all as to where it slipped away. It is not visible as well. Can it be seen through these eyes? So, on what will you pour water or put flowers, leaves?

The incorporeal, who is ever pure, is actually God, is not He? He enters in the corporeal body and performs tasks in accordance with His name. Which task does He perform? That which is not possible for the human beings at all. To drink this poison; there is no human being in this world who could remain alive after drinking poison. A black snakes bites, doesn't it? When it injects poison in the body, then does anyone remain alive? No. So, this is God. Does God make you worshipper or worshipworthy? Hm? God does not make you a worshipper. Does He make you worshipworthy? Achcha, who becomes worshipworthy? Does God become a worshipper? Hm? Doesn't God become a worshipper? So, how will He make others? So, God is worshipworthy, worthy of being worshipped. So, He becomes worshipworthy only. Is there anyone else who makes you a worshipper? Hm? Who? Now the question is different. This is Ravan. He says Ram himself becomes Ravan.

So, you children are explained all these different kinds of numerous points. Whenever there are big days (festivals), you are explained. Krishna is coming. You people have written. Where is it written? Hm? The topic of 67 was mentioned. In every center mostly it used to be written on the main gate in bold letters. The picture of Shri Krishna was depicted. Hm? And it is shown that there is a ball of heaven in one hand and at the foot was depicted the ball of hell, the world of hell. He is kicking the world of hell, hm, and the world of heaven is shown on the palm, on the intellect like palm. So, you have written that picture. Tell them about it. Look, this Krishna will come, will he not? So, definitely there will definitely be Krishna in the Golden Age. How will the history, geography of the world repeat? He had come in the beginning of the Golden Age in the past as well. He will come again. So, the history, geography will repeat, will it not? First of all the world is new, then it becomes old. Initially the world is new, and then it becomes old. Initially it is perfect in 16 celestial degrees, then completely devoid of celestial degrees (kalaaheen). So, this one will definitely go to the stage of being perfect in 16 celestial degrees, to the new world, to the Golden Age. And then in that old world, when they become tamopradhan, then they are depicted as dark ones.

Well, is Krishna alone shown to be dark or is Ram also shown to be dark? People say God Ram, God Krishna. When they become dark, they become worshippers. So, will they be called God? And then is it Ram and Krishna alone who are shown to be dark? Seventh page of the Vani dated 24.8.67. Krishna alone is not shown [to be dark]. No. As is the king and queen, so are the subjects. So, who is the first and foremost king in this world? It will be said Krishna. In the childhood the name is Krishna and when he grows up, then he gets the title of Narayan. But why did he get this title of Narayan? Hm? Does he remain in the water of knowledge in the beginning of the Golden Age? Naar means the water of knowledge. Ayan means house. Does he remain? He does not remain in the water of knowledge. But he remains constant in the essence of knowledge, i.e. I am a point of light soul, doesn't he? So, as is the king and queen, so do all the subjects remain in the same stage. There is no name or trace of body consciousness in anyone. So, look, that Krishna is also very intelligent because he remains constant in the topic of essence. So, you know that the essence is not visible in expanse. It gets hidden. And there is everything in the essence only. Everyone will not get 84 births in the abode of Shri Krishna. Hm? What has been said? Although someone may come in the first birth of the abode of Shri Krishna, yet, will they get complete 84 births? Hm? They will not get. Krishna himself does not get complete 84 births. Hm? He does get 84 births, but how much time is reduced in his case in the entire Kalpa? 50 years are reduced. So, will it be called complete 84 births? No. So, then who is it? Is there anyone or not who can be said to get complete 84 births? All round actor.

So, the question arises that who gives birth to the Krishna of the Golden Age? The one who gives birth [to him] will only get complete 84 births. So, then he himself should be named Shri Krishna. But he belongs to the Confluence Age. Nobody in the world remembers the topic of Confluence Age. All the topics mentioned in the scriptures pertain to the Confluence Age, but nobody's intellect is aware that there is also an Age named Confluence Age (Sangamyug), in which there is a Purushottam Age also. Is it not? This is also an account that these 100 years, these are 1250 years, aren't they? Hm? There are 1250 years in each of the Golden Age, Silver Age, Copper Age, Iron Age, aren't there? So, what is the account of these 100 years? During these 100 years, the shooting of all the four Ages takes place. Yes, there is an age of 100 years, 150 years in the Golden Age, is not it children? Then definitely that age ends. When the next birth starts then the age will decrease, will it not? Why? Why does it decrease? Hm? About a hundred
(Someone said something.) Yes, why does the age decrease? (Someone said something.) Does the soul conscious stage decrease? Arey! The reason for decrease in age, decrease in celestial degrees is indulgence (Bhog-vaasanaa). Deities are also indulgent (bhogi), aren't they? Hm? They do not seek pleasure through the organs of action, through the unrighteous organs. They do seek pleasure through the sense organs, don't they? Even among the sense organs it is numberwise.

So, the age decreases to some extent or the other after the first birth of the Golden Age. In case of some it decreases by one year, one age, so, it will be said that it decreased. So, the age of 84 births. So, there will also be those who will have 83 births age, will there not be? Then there will also be those who get 82 births. Those who get 83 births will be the next generation, will it not be? And those who get 82 births will be further next generation. So, in this manner, the age will go on decreasing in the eight generations of the Golden Age. Last Narayan. In his case entire two celestial degrees will be reduced. It will be reduced by seven births of the Golden Age. In case of eighth Narayan. So, those who go on coming will be like this less, lesser, lesser. So, they will also have lesser age. The power of the soul will also be less. So, 1250 years, then 1200 years also and then 12 centuries (sadiyaan) will reduce. Sadiyaan means hundred years. They will come one after the other. Some 84, some 83 and in case of some 12 will be reduced. Is it not? 84, 83, 82, 81, 80; they will decrease like this. They go on declining. If it is said 'complete 84 births', then that will definitely be said to be of Krishna only. And those who come with him in the first generation or those who live with him will only be said to get 84 births.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 16 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2593, दिनांक 29.07.2018
VCD 2593, Dated 29.07.2018
प्रातः क्लास 24.8.1967
Morning Class dated 24.8.1967
VCD-2593-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-18.42
Time- 00.01-18.42


प्रातः क्लास चल रहा था - 24.8.1967. गुरुवार को सातवें पेज के मध्यादि में बात चल रही थी – युधिष्ठिर की बात चल रही थी – हँ, मनुष्य तो हैं अंधे की औलाद अंधे। तो सज्जे किसको कहेंगे? ब्रह्मा को कहेंगे। कहेंगे या कहते हैं? हँ? किसको कहेंगे युधिष्ठिर? सज्जे। सज्जे माने सोझरे। ब्रह्मा को कहेंगे। यहाँ प्रजापिता शब्द तो लगाया ही नहीं है। ब्रह्मा ही बोला है सिर्फ। तो ब्रह्मा को युधिष्ठिर भी कहते हैं ना। क्योंकि औलाद हो ना। औलाद तब होते हैं जब; क्या? औलाद तब कहे जाते हैं जब, जब बच्चे बनता है। बच्चे कब बनता है? हँ? कल बताया था – औलाद तब बनते हैं जब जन्म लेते हैं। वो है हद का बच्चा दुनिया में जो माँ के पेट से जन्म लेता है। और यहाँ है बेहद के बच्चे की बात। बेसिक में भी माँ के पेट से जन्म लेता है। तो एडवांस में भी माँ ही आती है तो जन्म होता है। पहचानता है पक्का-पक्का मेरी, मेरा स्टेटस क्या है?

तो, ब्रह्मा को युधिष्ठिर भी कहते हैं ना बच्चे। कहते हैं माने कौन कहते हैं? हँ? मैं कहता हूँ या दुनिया वाले कहते हैं या बच्चे कहते हैं? बच्चे कहते हैं ब्रह्मा बाबा युधिष्ठिर है क्योंकि औलाद हो ना। औलाद कब हो? हँ? उसको जो है उसको औलाद नहीं कहेंगे। कौन है? उसको कहके किसकी तरफ इशारा किया? कौन? उधर पीछे है कोई खड़ा? हँ? जो है उसको औलाद नहीं कहेंगे। कौन है?
(किसी ने कुछ कहा।) भविष्य? ये कोई आदमी है जो? बाबा पूछते हैं कौन है? (किसी ने कुछ कहा।) आने वाला पार्ट है। हँ? कौन है का मतलब बताना चाहिए ना आत्मा का नाम, किस रूप में पार्ट बजाता है, बजा रहा है? (किसी ने कुछ कहा।) परमब्रह्म। ओह! न परमब्रह्म अभी जनम लिया, न ब्रह्मा ने जनम लिया। परमब्रह्म तो सब कुछ है। उसकी बात क्या है। उसके लिए तो बोल दिया दुनिया की ऐसी कोई बात नहीं जो तेरे पर लागू न होती हो। तो कोई का भी पार्ट पूछना हो तो कह दो परमब्रह्म। दुनिया का बड़े ते बड़ा पापी कौन? कह दो परमब्रह्म। दुनिया का बड़े ते बड़ा पुण्यात्मा कौन? कह दो परमब्रह्म। दुनिया में सबसे बड़ा हिंसक कौन? परमब्रह्म। ये कोई बात हुई? बात किसकी हो रही है? अभी-अभी बोला, अभी-अभी भूल गए। हँ? दुनिया में हैं अंधे की औलाद अंधे।

तो युधिष्ठिर फिर ये ब्रह्मा को कहेंगे। अभी नहीं कह सकते। क्यों? ब्रह्मा को युधिष्ठिर कहेंगे भविष्य में मानेंगे कि ये युधिष्ठिर है युद्धि में स्थिर रहने वाला है। नहीं तो पहले भगोड़ा ही था अभी भी भगोड़ा है। हार्ट फेल होकरके भाग जाता है।
(किसी ने कुछ कहा।) संपूर्ण नहीं हुआ। अरे, कौन नहीं हुआ? बाबा पूछ रहे हैं कौन? ब्रह्मा को युधिष्ठिर भी कहते हैं ना बच्चे, क्योंकि औलाद हो ना बच्ची। उसको जो है उसको औलाद नहीं कहेंगे। किसको नहीं औलाद कहेंगे? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, अधूरा चन्द्रमा है तो उसको औलाद नहीं कहेंगे। अभी पेट में है ना। तो बच्चा अधूरा ही होता है। भ्रूण तैयार होता है तो उसमें हाथ, पांव, नाक, आँख, कान, दस इन्द्रियाँ थोड़ेही होती हैं। बाद में उस भ्रूण में इन्द्रियाँ भी आती हैं और संपन्न बनके पैदा होता है।

तो जब जन्म होता है तो औलाद कहा जाता है। अभी औलाद तो थोड़ेही कहेंगे। अभी प्रत्यक्षता हो गई? प्रत्यक्षता रूपी जन्म तो हुआ नहीं ब्रह्मा का। तो अभी युधिष्ठिर कैसे कहेंगे? क्योंकि औलाद हो ना। जन्म लेता है तो औलाद कहा जाता है। जबकि उसका जन्म होता है तभी कहा जाता है ना। आत्माएं औलाद थोड़ेही कहेंगे। क्या? औलाद कब कहेंगे? आत्मा ने प्रवेश कर लिया गर्भ में तो उसे औलाद हो गई? नहीं। कुछ पता नहीं पेट में ही मर जाए, क्या हो जाए, कुछ हो जाए, कुछ नहीं मालूम। कभी-कभी तो कैसे-कैसे पैदा हो जाते हैं दो-दो, तीन-तीन, चार-चार मुख वाले पैदा हो जाते हैं। जैसे रावण के अनेक मुख। हँ? अनेक मुख का भी हिसाब है ना। ब्रह्मा को मुख दिखाते हैं अनेक। और विष्णु को भुजाएं दिखाते हैं। क्या अंतर है? हँ? वो विष्णु के साथी, संगी-साथी जितने हैं वो सब सहयोगी बनते हैं। और जो रावण के संगी-साथी हैं वो मुख ज्यादा चलाते हैं, ज्ञान ज्यादा झाड़ते हैं। हम बड़े विद्वान, पण्डित, आचार्य, दुनिया के सबसे बड़े ब्राह्मण हम ही हैं। और मुख ज्यादा चलाते हैं। तो उनके अनेक प्रकार के मुख दे दिये गये हैं। एक बात नहीं कहेंगे। एक मुख एक बात कहेगा। दूसरा मुख दूसरी बात कहेगा। तो ब्रह्मा का भी ऐसे ही। मुख बहुत चलाते हैं। ज्ञान सुनते बहुत हैं, सुनाते बहुत हैं। ढ़ेर सारी पब्लिक इकट्ठी कर लेंगे।

तो बताया – उस ब्रह्मा को जो है अभी उसको औलाद नहीं कहेंगे। नहीं। औलाद कहा ही जाता है जब किसी का जन्म होता है। वो तो दुनिया में जन्म होता है स्थूल रूप में बच्चे का। और यहाँ तो आत्मा की प्रत्यक्षता की बात है ना। तो आत्मा इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर सारी दुनिया के सामने जब प्रत्यक्ष होती है और सभी मानते हैं कि हाँ, इस आत्मा का यही पार्ट है। तो प्रत्यक्षता रूपी जन्म होता है। जैसे बच्चा पैदा होता है तो दुनिया में सभी मानेंगे। जो देखेगा सो कहेगा हाँ, बच्चा आ गया। पड़ौसी भी सुनेगा, ऊँआँ-ऊँआँ की आवाज़ तो कहेगा हाँ, पड़ौस में बच्चा आया। देखा भी नहीं है तो भी कहेगा आवाज़ सुनके कि हाँ, जरूर यही है। तो ऐसे ही अखबारों में आवाज़ तो सुनेंगे कि हाँ, ये ब्रह्मा की बोली हुई आवाज़ है। तो उनको विश्वास होगा। लेकिन तब होगा जब औलाद बनके पैदा होंगे। बेहद की प्रत्यक्षता होगी अर्थात् उनकी आत्मा का क्या पार्ट है जन्म-जन्मान्तर का खास-खास वो बुद्धि में बैठेगा सभी को।

तो बोला उनको, उसको। उसको माना किसको? औलाद अक्षर भी नहीं दे सकेंगे। किसको? ब्रह्मा को? कब तक नहीं दे सकेंगे? जब तक संसार में पूरी प्रत्यक्षता नहीं होती है। क्योंकि सृष्टि रूपी रंगमंच पर वो पहला बच्चा है ना। तो बाप और बच्चे की प्रत्यक्षता इकट्ठी है। हम कहेंगे हम शिवबाबा के बच्चे हैं। हँ? हम ये थोड़ेही कहेंगे कि हम ब्रह्मा के बच्चे हैं ब्रह्माकुमार। नहीं। शिवबाबा मुकर्रर रथ किसका लेता है? ब्रह्मा का नहीं लेता। ब्रह्मा अनेकों के नाम हैं। सिर्फ प्रजापिता ब्रह्मा का रथ लेता है। और प्रजापिता तो एक ही होता है। बाप एक ही होता है। माताएं अनेक हो सकती हैं। क्योंकि शिवबाबा अनादि है। क्या? शिवबाबा का कभी आदि होता नहीं है। अंत भी नहीं होता तो आदि भी नहीं। बाबा माने साकार। माने ग्रैण्डफादर है सारी सृष्टि का। कोई नया पैदा नहीं है ना कि नया बच्चा पैदा हुआ। नहीं। ये तो कल्प-कल्पांतर का पुराना बच्चा है। पैदा नहीं हुआ। हँ? वो औलाद पैदा नहीं होती है। कौनसी? तुमको परमानेन्ट औलाद कहेंगे। अगर तुमको औलाद कहेंगे तो शिवबाबा के बच्चों को औलाद थोड़ेही कहेंगे। हँ? ये क्या बोला? अगर तुमको औलाद कहेंगे माने ब्रह्माकुमार-कुमारियों के सामने भी बोला जा रहा है। अगर तुमको औलाद कहेंगे; तुमको माने? कौन? तुमको कहा ही जाता है जो रुद्रमाला के मणके हैं उनको ही तुम कहा जाता है। या अथवा जो विजयमाला के बाद में निकलेंगे उनको तुम कहा जा सकता है।

तो बोला, तुमको औलाद कहेंगे तो शिवबाबा के जो बच्चे हैं, उन बच्चों को औलाद थोड़ेही कहेंगे। ये क्या मतलब हुआ? हँ? माने शिवबाबा अलग और शिव बाप अलग। शिव बाप का तो एक ही बच्चा है। और शिवबाबा के तो सारी दुनिया उनके बच्चे हैं। तो उनको औलाद थोड़ेही कहेंगे। ना। ये औलाद अक्षर गृहस्थी का है। और मैं तो परमानेन्ट सन्यासी हूँ। सन्यासी हूँ, गृहस्थी हूँ? अरे! गिरी हस्ती वालों के बीच में हूँ। गृहस्थी माने? बताया गिरी हस्ती। गिरी हस्ती माने नाक रगड़ते रहते हैं। गिरी हस्ती में ही नाक रगड़ेंगे। ऊँचे उठेंगे ही नहीं। जैसे धरमपिताएं ऊँच उठ जाते हैं। तो बताया ये औलाद अक्षर गृहस्थी का अक्षर है। गृहस्थी तो गिरे हुए हुए ना। ऊँची हस्ती कौन हुई? जो गृहस्थी से बढ़करके वानप्रस्थी बने। वानप्रस्थी से बढ़करके सन्यासी बने। चार आश्रम बताए ना जिंदगी के। तो वो तो सभी भाई-भाई हैं आपस में। कौन? हँ? प्रजापिता के बच्चे कहो या शिवबाबा के बच्चे कहो, वो आपस में क्या हैं? भाई-भाई हैं आपस में। और ये जानते हो कि वो तो हैं ही उनका और ये तो मुख वंशावली हैं। हँ? उनका किसका कह दिया? न इनका कहा, न तुम्हारा कहा। उनका कह दिया। कौन? जो भी दूसरे धरम वाले हैं। उनका कह दिया। और ये तो मुख वंशावली हैं। कौन? हँ? ये। ये माने कौन? ये। किसको कहा मुख वंशावली? हां। हँ? ब्रह्मा। ब्रह्मा भी तो मुख वंशावली है। पहला-पहला मुख वंशावली तो ये हो गया। किसके मुख से सुना? हँ? प्रजापिता ब्रह्मा के मुख से सुना। पहला-पहला मुख वंशावली हो गया।

तो ऐसे कहते हैं ना। उसको मुख वंशावली नहीं कहेंगे, जो औलाद कह सकें। किसको नहीं कह सकेंगे? हँ? और कौन नहीं कह सकेंगे? हँ? ये औलाद अक्षर गृहस्थी का है। उसको मुख वंशावली भी नहीं कहेंगे जो औलाद कह सकें। हँ? मुख वंशावली किसको नहीं कह सकेंगे?
(किसी ने कुछ कहा।) दूसरे धरम वालों को? वो तो ठीक है। वो मुख से पैदा नहीं होते? दूसरे धरम वाले कोई से सुनकरके ज्ञान नहीं लेते हैं? वंशावली। वंश। एक पीढ़ी। फिर उसके बाद दूसरी पीढ़ी हुई, तीसरी पीढ़ी हुई। उसमें जो भी पीढ़ियाँ पैदा हुईं वो वंश है। तो उनकी वंशावली नहीं है सारी दुनिया? ब्रह्मा की वंशावली है या नहीं? तो फिर? उसको मुख वंशावली नहीं कहेंगे जो औलाद कह सकें। किसको? हँ? वो तो अनादि है ही। किसको बोला? अरे, प्रजापिता कोई मुख से पैदा होता है क्या? हँ? किसके मुख से पैदा होता है? कह देते हैं जगदंबा ने सुनाया तो बच्चा बना। तो क्या पैदा हुआ, औलाद हुई? हँ? प्रत्यक्षता हो गई? हँ? अरे, आत्मा की प्रत्यक्षता हुई? नहीं हुई। तो औलाद कहाँ से हुआ? तो मुख वंशावली कहेंगे तब जब पैदा हो।

वो तो अनादि है ही। कौन? पैदा तो तब हो जब किसी से जन्म ले। वो अनादि है, अनंत है तो पैदा होने का सवाल पैदा होता है? नहीं। शिवबाबा। शिवबाबा के बच्चे हैं सारी दुनिया। तो ये भी दुनिया को तो मालूम नहीं है ना कि कौन अनादि है? कौन अनन्त है। कथा कहानियां लिख रखी हैं। इस दुनिया में कौनसा ऐसा देवता है जो कैलाश पर्वत पर भी दिखाते हैं, हिमालय पहाड़ पर भी दिखाते हैं और दुनिया के भांति-भांति के क्षेत्रों में उसको दिखा दिया। हँ? तो स्वर्ग कोई कैलाश में होता है क्या? हिमालय पहाड़ पे होता है क्या? नहीं। ये तो यहाँ की बात है ना। इस संसार की चारों युगों की बात है ना। वो तो चारों युगों में आल राउण्ड पार्ट बजाने वाली आत्मा है ना। कौन? शिवबाबा।

तो ये भी दुनिया को पता नहीं है। अगर पता होता तो पहचान लेते। क्या? कि वो 500-700 करोड़ की दुनिया है। उसमें दुनिया पहचान सकती थी ना कि सतयुग, त्रेता, द्वापर, सतयुग, त्रेता में तो पहचानने की बात ही नहीं। वहाँ तो जानना और पहचानना, और ज्ञान होती ही नहीं। होता कहाँ है? द्वापर में। तो द्वापर में ऋषि-मुनियों ने भी नेति-नेति कहते गए। पहचाना थोड़ेही कि हम जिस दुनिया में रहते हैं उस दुनिया में वो भी रहता है। कौन? जो अनादि है और अनन्त है। ऐसे तो सारी दुनिया शिवबाबा के बच्चे। परन्तु दुनिया को नहीं मालूम है। वो तो हैं ही हैं। कहते ही नहीं हैं। दूसरे तो भगवान ही भगवान हैं। ऐसे कह देते हैं। (क्रमशः)


A morning class dated 24.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the seventh page on Thursday was - The topic of Yudhishthir was being discussed - hm, human beings are the blind (andhey) children of the blind ones. So, who will be called the eyed ones (sajjey)? Brahma. Will he be called or do they call him [they eyed one]? Hm? Who will be called Yudhishthir? Sajjey. Sajjey means sojhrey (the enlightened ones). Brahma will be called. Here the word 'Prajapita' has not been added at all. It has been said just for Brahma. So, Brahma is also called Yudhishthir, is not he? It is because you are children, aren't you? Someone is a child when; what? Someone is called a child only when he becomes a child. When does one become a child? Hm? It was told yesterday - Someone becomes a child when he/she gets birth. That is a limited child in the world who gets birth from the mother's womb. And here it is about the unlimited child. Even in basic he gets birth from the mother's womb. So, even in advance, one gets birth when the mother comes. It is when he recognizes firmly that what is my status.

So, Brahma is also called Yudhishthir, is not he child? He is called; it means who calls? Hm? Do I say or do the people of the world say or do the children say? Children say that Brahma Baba is Yudhishthir because you are children, aren't you? When are you children? Hm? He will not be called a child. Who is it? Towards whom was a gesture made by saying 'he'? Who? Is there anyone standing there at the backside? He will not be called a child. Who?
(Someone said something.) Future? Is it a person? Baba is asking 'who'? (Someone said something.) It is a part that is going to be played in future. Hm? You should tell the meaning of 'who' as to the name of the soul, the form in which he/she plays part or is playing part? (Someone said something.) Parambrahm. Oh! Neither Parambrahm has got birth now, nor has Brahma got birth. Parambrahm is everything. It is not about him. For him it has been said that there is nothing in the world which is not applicable to you. So, if you want to ask about anyone's part, then say Parambrahm. Who is the most sinful one in the world? Tell Parambrahm. Who is the noblest soul of the world? Tell Parambrahm. Who is the most violent person of the world? Parambrahm. Is this meaningful? Whose topic is being discussed? Just now it was told and just now you forgot. Hm? There are blind children of the blind ones in the world.

So, then this Brahma will be called Yudhishthir. He cannot be called now. Why? Brahma will be called Yudhishthir in future; people will accept that he is Yudhishthir, the one who remains stable (sthir) in war (yuddh). Otherwise, he was a runaway (bhagoda) in the past and is runaway even now. He runs away due to heartfail.
(Someone said something.) He has not become complete. Arey, who hasn't become? Baba is asking - Who? Brahma is also called Yudhishthir, is not he child because you are children, aren't you daughter? He will not be called a child. Who will not be called a child? (Someone said something.) Yes, when he is an incomplete moon, he will not be called a child. He is now in the womb, is not he? So, a child is incomplete only. When the foetus (bhroon) gets ready, then it does not have arms, legs, nose, eyes, ears, ten organs, does it have? Later on, that foetus develops organs also and is born in a complete form.

So, when he is born, then he is called a child. He will not be called a child now. Has the revelation taken place now? The revelation like birth of Brahma has not taken place. So, how will he be called Yudhishthir now? It is because you are a child, aren't you? When he gets birth, he is called a child. He is called so only when he is born, is not he? Souls will not be called children. What? When will they be called a child? Will it be called a child when the soul enters the womb? No. Who knows he may die in the womb itself; something may happen, nothing is sure. Sometimes children are born in different shapes; children with two, three, four heads are born just like the several heads of Ravan. Hm? There is an account of the many heads as well, isn’t it? Brahma is shown to have several heads. And Vishnu is shown to have several arms. What is the difference? Hm? The companions of Vishnu become helpers. And the companions of Ravan use the mouth more (i.e. speak more), show-off their knowledge more. We are big scholars, pundits, teachers; we alone are the highest Brahmins of the world. And they use their mouth more. So, many kinds of heads have been depicted for him. They will not speak about one topic. One head will speak one topic. Another head will speak another topic. So, the Brahmas are also like this only. They use their mouth a lot. They listen to a lot of knowledge; they narrate a lot. They will gather a lot of public.


So, it was told - That Brahma will not be called a child (aulaad) now. No. Someone is called a child only when he/she is born. In the world a physical child gets birth. And here it is about the revelation of the soul, is not it? So, when the soul is revealed in front of the entire world on this world stage and when everyone accepts that yes, this soul has this part only, then it gets the revelation like birth. For example, when a child is born, then everyone accepts. Whoever sees will say that yes a child has arrived. When the neighbour also hears the sound ‘uaan, uaan’ (cries) of the child, then he will say yes, a child has arrived in the neighbourhood. Even if he hasn't seen, after listening to the sounds, he will say that yes, it is definitely this. So, similarly, when they listen to the sound through the newspapers, then they will say yes, this is the voice of Brahma. Then they will believe. But it will happen when they are born as children. Unlimited revelation will take place, i.e. it will sit in everyone's intellect that what is the special part of his soul since many births.

So, it was said - They (unko), he (usko). 'He' (usko) refers to whom? He will not be referred to even by the word 'aulaad' (child). Who? Brahma? Until when will he not be referred to as a child? Until complete revelation takes place in the world because he is the first child on the world stage, is not he? So, the revelation of the Father and the child is simultaneous. We will say we are ShivBaba's children. Hm? We will not say that we are Brahma's children, Brahmakumar. No. Whose permanent Chariot does ShivBaba adopt? He does not adopt Brahma's Chariot. Brahma is the name of many. He adopts only the Chariot of Prajapita Brahma. And Prajapita is only one. The Father is only one. Mothers can be many. It is because ShivBaba is eternal (anaadi). What? ShivBaba does not have a beginning. He does not have an end as well as a beginning. Baba means corporeal. It means that he is the grandfather of the entire world. He has not been born newly that a new child has been born. No. This is an old child of many kalpas (cycles). He has not been born. Hm? That child is not born. Which one? You will be called a permanent child. If you are called a child, then ShivBaba's children will not be called children. Hm? What has been said? If you are called a child, i.e., this sentence is being spoken in front of the Brahmakumar-kumaris also. If you are called child; what is meant by 'you'? Who? Only those who are the beads of the Rudramala are called 'you'. Or those who emerge later on from the Vijaymala can be called 'you'.

So, it was said - If you are called child, then the children of ShivBaba will not be called children. What does it mean? Hm? It means that ShivBaba is different and Father Shiv is different. Father Shiv has only one child. And entire world is the progeny of ShivBaba. So, they will not be called children. No. This word 'aulaad' (child) is of a household (grihasthi). And I am a permanent sanyasi (renunciate). Am I a sanyasi or a grihasthi (householder)? Arey! I am amidst the 'giri hastis' (fallen personalities). What is meant by grihasthi? It was told 'giri hasti'. Giri hasti means they keep on rubbing the nose. They will keep on rubbing their noses as a fallen personality only. They will not rise high at all just as the founders of religions rise. So, it was told that this word 'aulaad' (child) is a word of the householders. Grihasthis (householders) are fallen personalities, aren't they? Who is a high personality? The one who rises from being a grihasthi to become a vaanprasthi (retired/one who achieves a stage beyond speech). The one who rises from being a vaanprasthi to become a sanyasi. Four ashrams (stages) of a life have been mentioned, haven't they been? So, they all are brothers. Who? Hm? Call them the children of Prajapita or the children of ShivBaba. How are they related to each other? They are related as brothers. And you know that they belong to them (unka). Who? All those who belong to other religions. They were referred to as 'unka'. And these are mouth born progeny. Who? Hm? 'These' (ye) refers to whom? These. Who were referred to as the mouth born progeny? Yes. Hm? Brahma. Brahma is also a mouth born progeny. The first and foremost mouth born progeny is this one. Through whose mouth did he listen? Hm? He heard through the mouth of Prajapita Brahma. He is the first and foremost mouth born progeny.

So, you say like this, don't you? He will not be called a mouth born progeny who could be called a child. Who cannot be called? Hm? And who will not be able to say? Hm? This word 'aulaad' (child) is from a household. He will not be called a mouth born progeny as well so that he could be called a child. Hm? Who cannot be called a mouth born progeny?
(Someone said something.) The people of other religions? That is correct. Are they not born through the mouth? Don't the people of other religions listen from someone and obtain knowledge? Descendents (vanshavali). Dynasty (vansh). One generation. Then after that the second generation, the third generation. The generations that were born in it are the dynasties. So, is not the entire world their descendent? Are they the descendents of Brahma or not? So, then? He will not be called a mouth born progeny who could be called a child. Who? Hm? He is anyways eternal. Who was mentioned? Arey, is Prajapita born through a mouth? Hm? Through whose mouth is he born? It is said that he became a child when Jagdamba narrated to him. So, was he born? Is he a child? Hm? Was he revealed? Hm? Arey, was the soul revealed? It wasn't. So, how can he be called a child? So, he will be called a mouth born progeny when he is born.

He is anyways eternal. Who? He will be born when He gets birth from someone. He is without a beginning (anaadi), never ending (anant); so, does the question of His birth arise? No. The entire world is the progeny of ShivBaba. So, the world does not know that who is anaadi, who is anant? They have written stories. Which deity in the world is shown on the Mount Kailash also, on the Himalayan Mountains also and has been shown in different areas of the world also? Hm? So, is there any Kailash in heaven? Does it exist on the Himalayan Mountain? No. This is about this place, is not it? There is a topic of four Ages in this world, is not it? He is a soul, which plays all round part in all the four Ages, is not he? Who? ShivBaba.

So, the world does not know this as well. Had they been aware, they would have recognized. What? It is a world of 500-700 crores. The world could have recognized that there is no question of recognizing in the Golden Age, Silver Age, Copper Age, Golden Age, Silver Age at all. There is no question of knowing and recognizing there; and there is no knowledge at all. Where do they know? In the Copper Age. So, the sages and saints also went on saying neti-neti in the Copper Age. They did not recognize that He too lives in the world in which we live. Who? The one who is anaadi and anant. In a way the entire world is the progeny of ShivBaba. But the world does not know. They indeed exist. They do not say at all. Others say that there is God everywhere. (continued)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 17 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2593, दिनांक 29.07.2018
VCD 2593, Dated 29.07.2018
प्रातः क्लास 24.8.1967
Morning Class dated 24.8.1967
VCD-2593-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 18.43-34.00
Time- 18.43-34.00


तो सब और तुम बच्चे तो अच्छी तरह से समझते हो कि हम बाप के बच्चे हैं। दुनिया वाले तो समझते हैं; क्या? जो सब भगवान ही भगवान हैं। भगवान कोई एक नहीं है। अनेक भगवान हैं। जो भी दुनिया है, उसमें जो भी मनुष्य मात्र हैं, अभी ऐसे नहीं कहेंगे कि जानवर भी बाप के बच्चे हैं। हँ? ऐसा बाप होता है कोई जिससे जानवर पैदा हों? हँ? 84 लाख योनियों में जाता है प्राणी, मनुष्य। अरे, तो क्या बाप ने आकर 84 लाख योनियाँ पैदा कीं? नहीं। ऐसे नहीं कहेंगे कि जानवर भी बाप के बच्चे हैं सुप्रीम। नहीं। सुप्रीम गॉड फादर के जानवर बच्चे हैं ऐसे तो थोड़ेही कहेंगे। ये बाप के बच्चे हैं। अभी बाप के बच्चे हैं। अभी सभी को सुख चाहिए। ऐसा तो कोई बच्चा नहीं है जो बाप के यहाँ पैदा हो और सुख-शान्ति न चाहता हो। तो अभी सभी को सुख चाहिए। परन्तु ऐसा नहीं है कि सभी स्वर्ग में आ सकते हैं। टोटल सुख में आ जाएं। 100 परसेन्ट सुख की दुनिया में आ जाएं। और न तो सभी त्रेता में आ सकते हैं। सेमी स्वर्ग में। हँ? 24.8.1967 के प्रातः क्लास का आठवाँ पेज।

हाँ, द्वापर में आ सकते हैं सभी बच्चे क्योंकि दुनिया में अनेक धर्म हैं ना। तो जो धर्म और उनके फालोअर्स और धरमपिताएं, एक धरम में आकरके दूसरा धरम पैदा कर देते हैं, दूसरी धारणाएं बना देते हैं सिखाना लग पड़ते हैं, तो द्वैतवादी दैत्य हो गए ना। तो वो दैत्यों की संख्या तो ढ़ेर सारी है। दुनिया में अच्छे ज्यादा होते हैं या बुरे ज्यादा होते हैं? हँ? बुरे ज्यादा होते हैं। अच्छों की संख्या, जितने ज्यादा अच्छे होंगे उतने थोड़े होंगे। और जितने ज्यादा बुरे होंगे उतनी संख्या उनकी ढ़ेर की ढ़ेर होगी। जैसे अभी सारी दुनिया नास्तिक बन रही है कि आस्तिक बन रही है? हँ? क्या बन गई सारी दुनिया? नास्तिक बन गई। तो नास्तिकों की संख्या बहुत ज्यादा हो गई ना। कितने हो गए? हँ? सारी दुनिया में जब नास्तिकता फैल जाती है तब बाप को आना पड़ता है अपनी पहचान देने के लिए।

तो ये सब द्वापर में आ सकते हैं। जो अनेकता फैलाने वाले हैं या जो नास्तिक बनाने वाले हैं ये जो युग बने हैं उनमें तो वृद्धि को पाएंगे ना। हँ? पहला युग है तो सतोप्रधान है। वहाँ तो थोड़े होंगे। फिर सतोसामान्य है तो वृद्धि होगी ना। ऐसे ही जैसे-जैसे युग बढ़ते जाएंगे, वृद्धि होती जाएगी। ड्रामा है ना। ड्रामा में पहले सीन में थोड़े एक्टर्स रंगमंच पर आते हैं कि इकट्ठे आ जाते हैं? थोड़े आते हैं। और अंत में? अंत में सारे ही इकट्ठे हो जाते हैं। वृद्धि को पाएंगे और फिर ये झाड़ भी है। हँ। झाड़ भी कोई होता है। कोई भी बीज डालो, कोई भी बीज का झाड़ हो तो पहले छोटा होगा तो थोड़े पत्ते। फिर जैसे-जैसे बढ़ता जाएगा, पत्तों की संख्या बढ़ती जाएगी। सो भी तो वृद्धि को जरूर पाएंगे ना। हँ? तो देखो, द्वापरयुग से भी जो भी धर्म आते हैं सब बेतहाशा वृद्धि को पाते रहते हैं।

तो देखो, ये झाड़ कैसे बढ़ता है। कैसे होते हैं झाड़। जैसे झाड़ होते हैं वैसे ये मनुष्य सृष्टि का झाड़ भी है। जिसको गीता में कहा गया अश्वत्थ वृक्ष। अश्व इत्थ, वृक्ष। नाम इसका अश्वत्थ वृक्ष क्यों रखा? क्योंकि जो नई सृष्टि सतयुग से शुरू होती है उसमें जो मन-रूपी घोड़ा है; क्या? बहुत चंचल। बन्दर की तरह। क्या रूप दिखाया? हनूमान का रूप दिखाय दिया। बहुत पावरफुल भी है। इन्द्रियों को, सब इन्द्रियों को, ज्ञानेन्द्रियां हों, चाहे कर्मेन्द्रियां हों, सबको कंट्रोल करने वाला है। तो उसका नाम रख दिया अश्व। अश्व माने घोड़ा। मन रूपी घोड़ा। घोड़े दिखाते हैं ना अर्जुन के रथ में। कितने घोड़े दिखाते हैं? चार घोड़े दिखाए। तो कौन हुए वो चार घोड़े? हँ? ब्रह्मा का मन्दिर बनाते हैं ना तो चौमुखी ब्रह्मा भी कहते हैं। चार भुजाओं वाला। तो विष्णु कहते हैं। लेकिन चार मुखों वाला ब्रह्मा कहा जाता है। तो वो चार अश्व हैं। और वो तो आधारमूर्त ही होंगे। हँ? उनके बीज भी तो होंगे ना।

तो बताया, वृद्धि को जरूर पाएंगे। कौन? वो मन रूपी घोड़ा जो मुख्य अव्वल नंबर होगा न कोई चारों घोड़ों में से, वो वृद्धि को जरूर पाएगा। तो देखो, फिर कौनसे हैं जो वृद्धि को नहीं पाएंगे इतना इस दुनिया में? हँ? कहेंगे देवी-देवता सनातन धर्म। अरे देवी-देवताएं भी तो भोगी होते हैं ना। हँ? पक्के योगी कौन बनते हैं? क्यों? भोगियों के भी बाप, तो योगियों के भी बाप बन जाते हैं। लेकिन, इस सृष्टि में अंत में उनकी वृद्धि नहीं होती है। प्रायःलोप देखे जाते हैं। तो देखो, ये झाड़ कैसे होते हैं? बाप द्वारा, पहले ब्रह्मा द्वारा स्थापना होती है। किसकी? नई सृष्टि की स्थापना की शूटिंग होती है। नई सृष्टि फिर बाद में पुरानी भी होनी है। तो सारी शूटिंग चारों युगों की कहाँ होगी? हँ? संगमयुग में ही होगी।

अच्छा, अब मनुष्य सृष्टि का झाड़ चाहिए ना। ब्रह्मा द्वारा स्थापना। तो सृष्टि की स्थापना हुई ना। और सृष्टि में तो सब चाहिए। ब्राह्मण भी चाहिए, क्षत्रीय भी चाहिए, वैश्य भी चाहिए, हँ, शूद्र भी चाहिए। कलियुग में सब शूद्र हो जाते हैं। हँ? तुलसीदास ने पहले ही लिख दिया था 400-500 वर्ष (पहले) भये वर्णसंकर सबै। सब व्यभिचारी बन गए। शूद्रों का धंधा ही होता है। उनके घर परिवार में रहकरके कभी कोई देखे तो पता चलेगा। न इनके घर में कोई अम्मा को मानता। अम्मा को पत्नी बना लेंगे। बहू को पत्नी बनाय लेंगे। बहन को पत्नी बनाय लेंगे। क्या-क्या लगा रहता है। तो दुनिया में गालियाँ चल गई हैं – मादर, बहन, बेटी, डॉट-3. ऐसी-ऐसी गालियाँ कहाँ से आईं? हँ? क्या द्वापर में ये गालियाँ थीं? थी। क्यों? इस्लामी बहनों से फिर शादी नहीं करते थे? करते थे।

तो ये मनुष्य सृष्टि का झाड़ भी ऐसे ही है। जब वृद्धि होती है तो तामस बढ़ता है। वो जो आत्माओं का झाड़ है वो तो इस सृष्टि में नहीं होता है। वो कहाँ होता है? आत्माओं का झाड़ कहाँ होता है? यहाँ नहीं होता इस दुनिया में, तो कहाँ होता है? अंडे-अंडे आत्माएं सब। तो उसको कहते हैं ब्रह्माण्ड। क्या? सारी दुनिया के जो भी प्राणी मात्र हैं, उनकी जो भी आत्माएं हैं, चाहे मनुष्य हों, देवताएं हों, हँ, राक्षस हों, दैत्य हों, प्राणी जैसे जानवर हैं, और पक्षी हैं, जो ये छोटे-छोटे इन्सेक्ट हैं, छोटे-छोटे कीटाणु, मक्खी, मच्छर, ये सबकी आत्माएं कहाँ रहती हैं? हँ? हाँ, यहाँ तो उनके शरीर के साथ, उनको कहेंगे प्राणी। उनमें प्राण होता है। प्राणवायु जिनमें काम करे तो कहेंगे प्राणी। जब प्राणवायु निकल जाती है तो कहते हैं मुर्दा हो गया। तो यहाँ नहीं होती हैं आत्माएं। जो आत्माओं का झाड़ है वो कहाँ है? आत्माओँ का झाड़ आत्मलोक में, ब्रह्माण्ड में। अण्डे-अण्डे मिसल आत्माएं वहाँ रहती हैं। वहाँ हाथ, पांव, नाक, आँख कान थोड़ेही अण्डे को दिखाए जाते हैं। आत्माओं का झाड़ वहाँ है। ये मनुष्य सृष्टि का झाड़ यहाँ है।

तो उनकी कैसे उत्पत्ति होती है? किसकी? झाड़ की कैसे उत्पत्ति होती है? कैसे पालना होती है? कैसे प्रलय होती है? वो तो इसमें लिखा हुआ ही है ब्रह्मा द्वारा उत्पत्ति। फिर शंकर द्वारा विनाश। ऐसे नहीं जैसे समझते हैं लोग – ब्रह्मा द्वारा स्थापना भी है, तो विष्णु द्वारा पालना भी है, तो शंकर द्वारा विनाश बाद में रख देते हैं। नहीं। पीछे चाहिए विष्णु। पहले ब्रह्मा द्वारा जो पक्के ब्राह्मण हैं उनकी स्थापना। वो ब्राह्मण भी तो नौ कुरियों के होते हैं ना। जैसे नौ धरम हैं दुनिया में आस्तिक। तो ऐसे ही ब्रह्मा के द्वारा ब्रह्मा को मानने वाले ब्राह्मण भी नौ प्रकार के हैं। और वो ही ब्राह्मण जाकरके फिर और-और धर्मों के नंबरवार आधार बन जाते हैं। और फिर विनाश। विनाश किसका? जो ब्राह्मण नहीं बनते हैं पक्के-पक्के 100 परसेन्ट। कौनसे ब्राह्मण? ऐसे आस्तिक ब्राह्मण जो एकदम बीज की तरह कड़क हों। झाड़ में कौनसा हिस्सा बहुत कड़क होता है? बीज भी होता है, जड़ें भी होती हैं, तना भी होता है, डालियाँ भी होती हैं, पत्ते भी होते हैं, फूल भी होते हैं, कलियाँ भी होती हैं। फल भी होते हैं।

सबसे जास्ती कड़क चीज़ कौनसी है? ऐसे तो कोई-कोई झाड़ की जो लकड़ी है वो अन्दर की लकड़ी बहुत कड़क होती है। जैसे ये बैड पड़ा है। इसमें जो काला, लाल-लाल हिस्सा दिखाई पड़ता है ना बहुत कड़क लकड़ी है। जैसे शीशम का पेड़। उसमें ऊपर-ऊपर सफेद लकड़ी होगी। दो, चार इंच, आठ इंच और अन्दर का जो हिस्सा होगा वो भले पतला हो या थोड़ा मोटा भी हो सकता है, बहुत कड़क। तो ऐसे-ऐसे हड्डी वाले भी हैं। हड्डी धर्म हैं। किसी के चेंज करने से चेंज होने वाले नहीं। मर जाएंगे। क्या? लेकिन चेंज नहीं होंगे। उसको क्या कहते हैं? हँ? 12 साल डंडे में बांध के रखो तो क्या होगा? पूंछ कुत्ते की। तो ऐसे धरम वाले भी हैं। बड़े हड्डी के मजबूत हैं। नहीं। वो तो कहते हैं हम सिवाय एक अल्ला मियाँ के और कोई हमको नहीं बदल सकता। क्या? हम तो आतंकवादी बनेंगे ही बनेंगे। कोई हमको रोक नहीं सकता। ऐसे दृढ़ होते हैं। तो इन सबका विनाश। और एक सत धर्म की स्थापना। तो पहले पालना नहीं कहनी चाहिए। क्या? नहीं। ओमशान्ति।

So, all and you children understand well that we are the Father's children. People of the world think; what? That everyone is God. No one person is God. There are many Gods. The entire world and all the human beings living in it; now it will not be said that the animals are also the Father's children. Hm? Is there any Father who gives birth to animals? Hm? [People say] A living being, a human being passes through 84 lakh species. Arey, so did the Father come and give birth to 84 lakh species? No. It will not be said that the animals are also the children of the Supreme Father. No. It will not be said that the animals are the children of the Supreme God Father. These are the children of the Father. Now you are the Father's children. Now everyone requires happiness. There is no child who is born at the Father's place and does not want happiness and peace. So, now everyone wants happiness. But it is not true that everyone can come to heaven, come in total happiness, come in the world of 100 percent happiness. And neither can everyone come in the Silver Age. In semi heaven. Hm? Eighth page of the Morning Class dated 24.8.1967.

Yes, all the children can come in the Copper Age because there are different religions in the world, aren't there? So, the religions and their followers and their founders who come in one religion and create one more religion, create and start teaching separate inculcations then they are dualistic demons, aren't they? So, that number of demons is huge. Are there more good people or more bad people in the world? Hm? The bad people are more. The number of good people; the better the character of people, their number will be accordingly less. And the more someone is evil, their number will be more. For example, is the entire world now becoming atheist or theist? Hm? What did the entire world become? It became atheist. So, the number of atheists has grown a lot, hasn't it? How many of them are there? Hm? When atheism spreads in the entire world, then the Father has to come to give His introduction.

So, all these can come in the Copper Age. Those who spread disunity or those who make others atheists will grow in numbers in these Ages, will they not? Hm? The first Age is satopradhan. There will be very few there. Then, when they become satosaamaanya, then the numbers will grow, will they not? Similarly, as and when the Ages increase, numbers will grow. It is a drama, is not it? In a drama, do a few actors come to the stage in the first scene or do they all come together? A few come. And in the end? In the end all of them come together. They will grow in numbers and then this is also a Tree. Hm. There are some trees also. If you sow any seed, be it a tree of any seed, it will be initially small; so it will have a few leaves. Then, as it grows, the number of leaves will go on increasing. They will also grow in numbers, will they not? Hm? So, look, all the religions which come from the Copper Age increase steeply.

So, look, how this tree grows! How the trees are! Just as there are trees, similarly, this is a tree of the human world also. It has been called Ashwath Vriksh in the Gita. Ashwa itth, vriksh. Why was it named Ashwatth Vriksh? It is because in the new world that starts from the Golden Age, the mind-like horse; what? It is very inconstant. Like a monkey. Which form was depicted? The form of Hanuman has been depicted. It (mind) is also very powerful. It controls the organs, all the organs, be it the sense organs, be it the organs of action; it controls everyone. So, it was named Ashwa. Ashwa means horse. Mind-like horse. Horses are depicted in the Chariot of Arjun, aren't they? How many horses are depicted? Four horses were depicted. So, who are those four horses? Hm? Brahma's temple is built, is not it? So, he is also called four headed Brahma. The one who has four arms is called Vishnu. But the one with four heads is called Brahma. So, they are the four horses. And they will be aadhaarmoort (base-like souls) only. Hm? There will be their seeds also, will there not be?

So, it was told that they will definitely grow. Who? That mind like horse who is number one among the four horses will definitely grow. So, look, then who will not grow so much in this world? Hm? It will be said - Devi Devata Sanatan Dharma. Arey, the deities are also pleasure seekers (bhogis) aren’t they? Hm? Who become firm yogis? Why? They become the fathers of the bhogis as well as the fathers of yogis, but, they do not grow in this world in the end. They are seen to have almost disappeared (praayahlop). So, look how is this tree? Establishment takes place first through the Father, through Brahma. What is established? The shooting of the establishment of the new world takes place. Then the new world is also supposed to become old later on. So, where will the entire shooting of all the four Ages take place? Hm? It will take place in the Confluence Age only.

Achcha, now the tree of the human world is required, is not it? Establishment through Brahma. So, establishment of the world took place, did not it? And all are required in the world. Brahmins are also required, Kshatriyas are also required, Vaishyas are also required, hm, Shudras are also required. Everyone becomes a Shudra in the Iron Age. Hm? Tulsidas wrote beforehand, 400-500 years ago - Bhaye varnasankar sabai. All have become adulterous (vyabhichaari). The business of the Shudras itself is this. If anyone lives in their house and family, then they will know. Neither does anyone believe in the mother in their home. They make their mother as their wife. They make their daughter-in-law as their wife. They make their sister as their wife. What all takes place! So, there are cuss words in the world - Mother, sister, daughter ... (dot, dot, dot). Where did such cuss words (gaaliyaan) emerge from? Hm? Did such cuss words exist in the Copper Age? They existed. Why? did not the Islamic people used to marry their sisters? They used to.

So, the tree of the human world is also like this only. When it grows, then degradation (taamas) increases. That tree of souls does not exist in this world. Where does it exist? Where does the tree of souls exist? If it does not exist here in this world, then where does it exist? All the souls are like eggs (andey). So, that is called Brahmaand. What? The souls of all the living beings of the entire world, be it the human beings, be it the deities, be it the demons, be it living beings like animals and birds, these small insects, the small microbes, flies, mosquitoes, where do the souls of all these live? Hm? Yes, here they will be called a living being (praani) along with their body. They have the life-force (praan). The one in whom the praanvaayu (life giving air) works is called a praani. When the praanvaayu is gone, then it is said that he/she has become a corpse. So, the souls do not exist here. Where does the tree of souls exist? The tree of souls in the Soul World, in Brahmaand. The egg-like souls live there. The egg is not shown to have hands, legs, nose, eyes, ears there. The tree of souls exists there. This tree of human world exists here.

So, how does it originate? What? How does the Tree originate? How is it sustained? How does destruction take place? That has been written in it that generation takes place through Brahma. Then destruction through Shankar. It is not as if people think – There is establishment through Brahma also; there is sustenance through Vishnu also and later on they place ‘destruction through Shankar’. No. Later on Vishnu is required. First establishment of firm Brahmins through Brahma. Those Brahmins are also of nine categories, aren’t they? Just as there are nine religions in the world which are theists. So, similarly, the Brahmins who believe in Brahma through Brahma are also of nine categories. And the same Brahmins go and then become numberwise bases of other religions. And then destruction. Whose destruction? Those who do not become firm 100 percent Brahmins. Which Brahmins? Such theist Brahmins who are completely hard (kadak) like a seed. Which part of a tree is very hard? There is a seed also, there are roots also, there is a stem also, there are branches also, there are leaves also, there are flowers also, there are buds also, and there are fruits also.

Which thing is the hardest thing [among the above]? In a way, the wood of some trees, the inner wood is very hard. For example, this bed. The black, red part which is visible is very hard wood. For example, the Sheesham (Rosewood) tree. It outer wood is white. The part which is two, four inches, eight inches inside may be thin or may be thick, but it is very hard. So, there are persons with such bones also. There are bone-like religions. They will not change on being changed by anyone. They will die. What? But they will not change. What is it called? Hm? Even if you tie it with a stick for 12 years, what will happen? A dog’s tail. So, there are people of such religions also. They have a strong bone. No. They say that except one Allah Miyaan nobody else can change us. What? We will definitely become terrorists. Nobody can stop us. They are so resolute. So, destruction of all such people. And establishment of one true religion. So, one should not say ‘sustenance’ first. What? No. Om Shanti.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 20 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2594, दिनांक 30.07.2018
VCD 2594, Dated 30.07.2018
प्रातः क्लास 24.8.1967
Morning Class dated 24.8.1967
VCD-2594-extracts-Bilingual

समय- 00.01-14.20
Time- 00.01-14.20


प्रातः क्लास चल रहा था - 24.8.1967. आठवें पेज के मध्यादि के आरम्भ में बात चल रही थी कि – आत्माओं का झाड़ तो ऊपर है। कहाँ? उसे कहते हैं आत्मलोक। सोल वर्ल्ड। परमधाम। क्योंकि वो स्थायी धाम है जहाँ आत्माएं बाप के साथ रहती हैं। कोई पूछता है तुम्हारा परमानेन्ट घर कहाँ है, टेम्पररी घर कहाँ है, तो बताया जाता है ना। तो आत्माओं का झाड़ है वहाँ। और यहाँ है ये मनुष्य सृष्टि का झाड़। उनकी पालना कैसे होती है? किनकी? उनकी। यहाँ वालों की नहीं। कैसे होती है पालना? हँ? बुद्धि में आता है? उनकी पालना कैसे होती है? हँ? उनकी पालना होती है (किसी ने कुछ कहा।) शिव बाप पालना करते हैं वहाँ? वाह भाई। स्थापना, पालना और विनाश होता कहाँ है? इसी सृष्टि में होता है ना। तो इसी सृष्टि की बात है। शिव बाप भी इसी सृष्टि पर परमानेन्ट रहता होगा कोई तन में। उनको अपना तन तो है ही नहीं। तो किस तन में रहता है परमानेन्ट जो नाम दिया है शिवबाबा इस सृष्टि पर सदा कायम है? और कोई चीज़ है नहीं जो इस सृष्टि पर सदा कायम है। तो जब सदा कायम है तो बाप के बुद्धि रूपी पेट में वो आत्माएं भी तो बैठी होंगी। हँ? लौकिक बाप बच्चा पैदा करता है तो कहाँ से आता है? हँ? बीज कौन डालता है? हँ? तो इस सृष्टि में जो भी प्राणी मात्र पार्ट बजाते हैं उन प्राणियों की बीज रूप आत्मा जिसे कारण रूप आत्मा कहें, कारण रूप शरीर कहें, वो कहाँ से आती है? बाप के कहाँ से? बुद्धि रूपी पेट से आती है।

तो बाप के बुद्धि रूपी पेट में 500 करोड़ भी होंगे क्या? होंगे? हँ? हाँ। जब विनाश होगा इस सृष्टि का, साकार सृष्टि का यहाँ, तो सभी आत्माएं किसकी याद में शरीर छोड़ेंगी? हँ? सबकी सद्गति, गति किसके द्वारा होगी? वो ही शिवबाबा। तो जिसे कहा जाता है परमब्रह्म, बड़े ते बड़ा ब्रह्म। अरे, बच्चे आते कहाँ से हैं? अम्मा के पेट से आते हैं ना। तो वो मनुष्य सृष्टि का बाप परमब्रह्म हुआ। अम्माएं जितनी हैं उनमें परम। हँ? तो उसे कहा जाता है कैसा धाम? परमधाम। तो परमधाम में जो भी आत्माएं हैं वो मनमनाभव की स्टेज लेकरके आगे-पीछे कोई पहले, कोई बाद में वो उसी परमधाम में टिक जाती हैं। लेकिन उनका कोई क्रम तो होगा पहले टिकने का और बाद में टिकने का? तो जो पहले टिकती हैं वो हैं बीज रूप आत्माएं। हँ? बाप के डायरेक्ट बच्चे। बाप ज्ञान सूर्य है तो बच्चे भी सूर्यवंशी हैं। तो वो बच्चे जन्म कहाँ से लेंगे फिर? बीजों में तो सारे वृक्ष समाए हुए हैं। कोई भी बीज ले लो। किसी झाड़ का ले लो, उसमें सारा वृक्ष समाया हुआ है या नहीं? कोई-कोई देखा होगा, कोई वृक्ष ऐसे होते हैं एक ही वृक्ष में दो-तीन-चार तरह के वृक्ष पैदा हो जाते हैं। पीपल में देखा जाता है कि नीम भी पैदा हो गया, आम भी पैदा हो गया। तो ऐसे ही है। ये बीजरूप आत्माएं जो हैं जिन्हें सूर्यवंशी आत्माएं कहें, सूर्य से डायरेक्ट पालना लेने वाली, वो पहले-पहले मनमनाभव की स्टेज में स्थित हो जाती हैं।

तो अब समझ में आया? कि उत्पत्ति कहाँ से होती है? हँ? बीज की उत्पत्ति होती है तो सभी आत्माएं आ जाएंगी। तो बीज की उत्पत्ति कहाँ से होती है बीजों की? हँ? कैसे का जवाब दो। क्योंकि जो पांच तत्वों के शरीर हैं वो तो इसी दुनिया में रहते हैं। जैसे बाप का शरीर इसी दुनिया में रहता है। परन्तु अन्तर ये है वो सब बर्फ में दब जाते हैं। कौन? कौन? जो भी बीज रूप आत्माओं के शरीर हैं, शरीर छोड़ने, अंतिम शरीर छोड़ने से पहले वो सब बरफ में दब जावेंगे। और हम वहाँ से वो आत्मा को जो वायब्रेशन है, जब बरफ जब तक हटेगी, टाइम आएगा कि नहीं हटने का तो वो आत्माएं फिर शरीर में प्रवेश कर जाएंगी। तो पहले शरीर प्रत्यक्ष होता है इस दुनिया में, आत्मा प्रत्यक्ष होती है? हँ? शरीर प्रत्यक्ष होता है ना। प्रत्यक्ष का मतलब ये है शरीर पहले माँ के पेट में आता है ना। माँ को तो प्रत्यक्ष होता है। तो ऐसे ही है। जो भी माताएं थीं यज्ञ के आदि में ढ़ेर की ढ़ेर, कन्याएं-माताएं, उन्होंने किसको पहचाना? हँ? ब्रह्मा बाबा को प्रियरटी दी पहचानने में या प्रजापिता को प्रियरटी दी? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) पी आई वी? पीयू को पहचाना? धत तेरे की। पीयू को पहचाना होता तो पीयू को साथ देते। साथ तो कोई ने। (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, माता को पहचाना। ब्रह्मा बाबा को, जो प्रैक्टिकल में इस शरीर में रहकरके इस दुनिया में सारी दुनिया के सामने प्रत्यक्ष होता है। सारी दुनिया का जन्मदाता साबित होता है उसको पहचाना।

तो ब्रह्मा द्वारा उत्पत्ति। और फिर? ये नूंधा हुआ है – शंकर द्वारा विनाश। तो जब विनाश कह दिया है वो बीच में क्यों कह दिया? बोलते तो ऐसे हैं ब्रह्मा, विष्णु, शंकर। ब्रह्मा, शंकर, विष्णु तो नहीं बोलते। तो इसका कारण यही है कि जो ब्रह्मा द्वारा स्थापना होती है, परमब्रह्म कहो यज्ञ के आदि में, तो बीज रूप आत्माएं पहले निकलती हैं ज्ञान में। और फिर बाद में जब ओम मण्डली का उनका ध्वंस होता है हीरोशमा का, नागासाकी का तो फिर विनाश भी हो जाता है। बीजों का विनाश होगा तो जैसे सारी दुनिया का विनाश हो गया। पीछे कौन चाहिए? पीछे विष्णु चाहिए ना। हँ? कौन रह गए? वो ही विष्णु के फालोअर रह गए ना। तो ओम मण्डली की समाप्ति कब कहें?
(किसी ने कुछ कहा।) 47 में कहें ओम मण्डली की समाप्ति? हँ? जहाँ ओम ही नहीं रहा आ, ऊ, म का संगठित रूप; आ माने ब्रह्मा, ऊ माने विष्णु, म माने महेश। तीनों का संगठित रूप है ओम। वो ही नहीं रहा तो फिर ये कहाँ से आ जाएंगे? हँ? जो ब्रह्मा, विष्णु, शंकर तीनों का रचयिता है जहाँ से अ भी निकलता है, ऊ भी निकलता है, म महेश भी निकलता है तो फिर वो आएंगे कहाँ से? जो ओम वास्तव में था पहली-पहली आत्मा, मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, सुख स्वरूप हूँ, आनन्द स्वरूप हूँ। वो आत्मा ही चली गई शरीर छोड़करके तो फिर कौन रह जाएंगे? हँ? अंधश्रद्धालु रह जाएंगे या ज्ञान का मनन-चिंतन-मंथन करने वाले रह जाएंगे? हाँ, जो कन्याएं-माताएं रह गईं जिनको सात-सात तालों के अन्दर बन्द किया गया था, तो उन्हीं के द्वारा उनकी फिर पालना हुई।

विष्णु द्वारा पालना। पहले स्थापना फिर पालना। ऐसे नहीं कहना चाहिए। नहीं, पहले स्थापना और पीछे विनाश। बाद में पालना। अगर पहले स्थापना और फिर विनाश कह दिया; क्या? ऐसे ही कहते हैं ना - स्थापना, पालना, विनाश। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर। अगर ऐसे कह दिया कि पहले स्थापना, फिर विनाश कह दिया तो रांग हो जाता है। क्यों? तो ये सभी समझ की बात है। क्यों रांग हो जाता है? हँ? अरे, दुनिया में पहले स्थापना होती है बच्चे की पेट में, फिर उसके बाद जन्म होने के बाद उसकी पालना होती है। पालना होने के बाद फिर, फिर विनाश होता है। ऐसे ही तो दुनिया जानती है। सभी के लिए ये समझ की बात है ना। तो बच्चों को बुद्धि में ये सारा ज्ञान नशा चढ़ा हुआ रहे कि सृष्टि का चक्कर कैसे फिरता है। बस। सारी दुनिया का नाम ही है कि सृष्टि का चक्कर कैसे फिरता है? सृष्टि चक्कर। नाम क्या है? दुनिया का नाम क्या हुआ? सृष्टि का चक्र, समय चक्र। काल चक्र। असली नाम क्या हुआ? काल माने समय। तो काल चक्र में वो काल कैसे फिरता है? तो कौन हुआ काल चक्र? अरे, उसे कहते ही हैं महाकाल। कालों का काल महाकाल जिसको कोई काल खा नहीं सकता। तो सारी दुनिया का नाम ही है सृष्टि चक्कर।

A morning class dated 24.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the eighth page was - The tree of souls is above. Where? It is called the aatmalok. Soul World. The Supreme Abode (Paramdhaam). It is because that is a permanent abode where the souls live with the Father. If anyone asks, where is your permanent home, where is your temporary home, then you tell, don't you? So, the tree of souls is present there. And here is this tree of human world. How are they sustained? Who? They. Not of the ones living here. How does the sustenance take place? Hm? Does your intellect recollect? How are they sustained? Hm? They are sustained
(Someone said something.) Does the Father Shiv sustain there? Wow brother! Where do establishment, sustenance and destruction take place? It takes place here in this world itself, doesn't it? So, it is about this world itself. Father Shiv also must be living here in this world itself in a body in a permanent way. He does not have a body of His own at all. So, in whose body does he live in a permanent manner for which it has been said ShivBaba is permanent (sadaa kaayam) in this world? There is no other thing which is permanent in this world. So, when he is permanent, then those souls must also be sitting in the womb like intellect of the Father. Hm? When a worldly Father gives birth to a child, where does the child come from? Hm? Who sows the seed? Hm? So, all the living beings who play their parts in this world, the seed form soul of those living beings, which may be called the causal soul (kaaran roop aatma), causal body, where does it come from? Where from the Father? It comes from the womb like intellect.

So, will there be 500 crores also in the womb-like intellect of the Father? Will they be? Hm? Yes. When this world, this corporeal world is destroyed, then in whose remembrance will all the souls leave their bodies? Hm? Through whom will the sadgati, gati take place? The same ShivBaba. So, the one who is called Parambrahm, the highest Brahm. Arey, where do the children come from? They come from the mother's womb only, don't they? So, that Father of human world is the Parambrahm. Supreme among all the mothers. Hm? So, what kind of an abode is he called? The Supreme Abode. So, all the souls of the Supreme Abode become constant in that very Supreme Abode by achieving the stage of Manmanaabhav, some early and some late. But there must be a serial order in which they become constant early or late? So, those who become constant first are the seed form souls. Hm? The direct children of the Father. When the Father is the Sun of Knowledge, then the children are also Suryavanshis. So, where will those children get birth? The entire tree is contained in the seeds. Take any seed. Take the seed of any tree; is the entire tree contained in it or not? You must have observed some trees; there are some such trees where two-three-four kinds of trees develop on the same tree. It is observed that a Neem tree also grows on the fig tree, Mango tree also grows on it. So, it is the same case. These seed form souls, which can be called the Suryavanshi souls, those which obtain direct sustenance from the Sun, they become constant in the stage of Manmanaabhav first of all.

So, did you now understand as to where does it originate from? Hm? When the seed originates, then all the souls will be included. So, where does the seed, seeds originate? Hm? Give reply to the question of 'how'? It is because the bodies made up of the five elements live in this world itself. For example, the body of the Father remains in this world itself. But the difference is that they all get buried in the ice. Who? Who? All the bodies of the seed form souls will be buried in ice before leaving their bodies, the last body. And, from there, we, the vibrations of that soul, by the time the ice melts; will the time for its melting come or not? Then those souls will enter in the body again. So, is the body revealed first in this world or is the soul revealed first? Hm? The body is revealed, is not it? Revelation means that first the body enters in the mother's womb, doesn't it? It is revealed to the mother. So, it is the same case. Whom did the numerous mothers, the virgins and mothers recognize in the beginning of the Yagya? Hm? Did they give priority to Brahma Baba in recognizing or did they give priority to Prajapita? Hm?
(Someone said something.) PIV? Did they recognize Piu? Dhat terey ki (damn). Had they recognized Piu, they would have sided with him. Nobody sided with him. (Someone said something.) Yes, they recognized the mother, Brahma Baba, who is revealed in front of the entire world while living in this world in this body. They recognized the one who is proved to be the Father (janmadaataa) of the entire world.

So, generation through Brahma. And then? It is fixed - Destruction through Shankar. So, when destruction has been said then why was it said in between? It is said - Brahma, Vishnu, Shankar. It is not said - Brahma, Shankar, Vishnu. So, its reason is that the establishment that takes place through Brahma, call him Parambrahm in the beginning of the Yagya, so, first the seed form souls emerge in knowledge. And then, when the destruction of Om Mandali, of Hiroshima, of Nagasaki takes place, then destruction also takes place. When the seeds are destroyed, then it is as if the entire world was destroyed. Who are required after that? Later Vishnu is required, is not he? Hm? Who remained? The same followers of Vishnu remained, did not they? So, when can the end of Om Mandali be said to have taken place?
(Someone said something.) Can the Om Mandali be said to have ended in 47? Hm? The time when Om (Aum), the combined form of A, U, M itself doesn't exist, then where will they come from? Hm? The one who is the creator of Brahma, Vishnu, Shankar, the one from whom A also emerges, the one from whom U also emerges, the one from whom Ma Mahesh also emerges, then where will they come from? The first and foremost soul who was Om in reality; I am a peaceful soul, I am a joyful soul, I am a blissful soul. When that soul itself left its body and departed, then who will remain? Hm? Will those with blind faith remain or will those who think and churn the knowledge remain? Yes, the virgins and mothers who remained, who were locked up behind seven locks, so, the sustenance took place through them only.

Sustenance through Vishnu. First establishment, then sustenance. You should not say like this. No, first establishment and then destruction. Later sustenance. If you say establishment first and then destruction; what? You say like this only, don't you? Establishent, sustenance, destruction. Brahma, Vishnu, Shankar. If you say that first is establishment, then if you say destruction, then it is wrong. Why? So, all this is a matter to be understood. Why is it wrong? Hm? Arey, in the world, first the establishment of a child takes place in the womb; then after that, after the birth, it is sustained. After sustenance, the destruction takes place. The world knows like this only. This is a matter to be understood by everyone, is not it? So, the intellect of the children should remain intoxicated about this entire knowledge that how this cycle of the world rotates. That is all. The name of the world itself is; How does the cycle of the world rotate? World cycle. What is the name? What is the name of the world? The world cycle, the time cycle (kaal chakra). What is the actual name? Kaal means time. So, how does that time rotate in the time cycle? So, who is kaal chakra? Arey, he is called Mahakaal. The 'kaalon ka kaal Mahakaal' who cannot be devoured by death (kaal). So, the name of the entire world itself is world cycle.

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 22 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2595, दिनांक 31.07.2018
VCD 2595, Dated 31.07.2018
प्रातः क्लास 24.8.1967
Morning Class dated 24.8.1967
VCD-2595-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-22.50
Time- 00.01-22.50


प्रातः क्लास चल रहा था - 24.8.1967. गुरुवार को आठवें पेज के मध्य में बात चल रही थी – जो विराट रूप का चित्र है, ये भी तुम्हारे काम का चित्र है। ये यहाँ होना चाहिए। समझाने के लिए बहुत ईज़ी है। वैराइटी मनुष्य और वैराइटी रूप। तो अक्षर तो एक है परन्तु चक्कर कितना बड़ा है। इस चक्कर को समझाने कितना मज़ा आता है। तो वो भी होना चाहिए। क्या? विराट रूप का चित्र। म्यूजियम में या किसमें होना चाहिए। ये बाबा कहते रहते हैं ना। तो होना चाहिए। होगा तो समझाय सकेंगे अच्छी तरह से। बहुत अच्छी तरह समझाय सकेंगे। जब ब्राह्मण हैं और ब्राह्मण जब हैं तब तो सभी धर्म जैसे हैं। हँ? तो ब्राह्मण धरम में ब्राह्मण धरम की जो नई दुनिया स्थापना होती है, जो ऊँच ते ऊँच धर्म है ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण धर्म, तो वो ऊँच ते ऊँच धर्म अभी कहेंगे? हँ? सन् 67 की बात है। ऊँच ते ऊँच धर्म कहेंगे? नहीं। ब्राह्मणों की दुनिया में ही हो-हल्ला मचा हुआ है। और जब ब्राह्मण धर्म है तो सभी धरम मौजूद होते हैं। समझा ना। क्योंकि शूद्र से ब्राह्मण बनते हैं ना। और सारी दुनिया शूद्र है और सारी दुनिया को ब्राह्मण बनना है नंबरवार। तो सैम्पलिंग लगती है बच्ची। जैसे अभी सैम्पलिंग लगाते हैं तो जो खास झाड़ होते हैं उनकी सैम्पलिंग लगाते हैं। तो ये भी बाप आकरके खास सैम्पलिंग लगाते हैं।

पहले-पहले क्या होना चाहिए? पहले-पहले विश्व में होना चाहिए शान्ति का धर्म। इन जैसे शान्त धर्म, ब्राह्मणों जैसा शान्त धर्म, सो भी नौ कुरियों के ब्राह्मण नहीं, एकदम अव्वल नंबर सूर्यवंशी कुरी के ब्राह्मण। क्या? हम एकदम शान्ति की स्टेज में चन्द्रवंशियों को भी नहीं ले जा सकते हैं। हँ? क्यों? उन सूर्यवंशियों का ब्राह्मण धर्म का शान्त धर्म है, उसमें चन्द्रवंशियों को क्यों नहीं ले जा सकते? हँ? कोई चन्द्रवंशी कन्वर्ट होना चाहें सूर्यवंश में तो नहीं आने देंगे? हँ? जाने देंगे ना। फिर वो धर्मवंश वाले भी कहेंगे हम भी कन्वर्ट होना चाहते हैं। वो तो कन्वर्ट होंगे ही नहीं। वो सब होते हैं अपने धरम के पक्के। तो जो चोटी का स्वर्ग है उसमें चन्द्रवंशी नहीं जाय सकते। लॉ नहीं है। क्योंकि भेंट होती है ना। नरक और स्वर्ग। नरक में कौन वास करते हैं? फिर स्वर्ग की स्थिति में कौन रहते हैं? हँ? नरक की दुनिया में भी कोई-कोई स्वर्ग का अनुभव करते हैं या नहीं करते हैं? तो वास्ट डिफरेंस हो जाता है। और इसी नरक और स्वर्ग को कहा जाता है शिवालय और वैश्यालय। शिवालय में क्या होता है? हँ? एक की ही मान्यता। एक की ही पूजा। एक की ही याद। एक का ही संग। और वैश्यालय में ठीक इसका उल्टा। एक को नहीं मान सकेंगे। तो वो चन्द्रवंशी हैं वो किसको मानेंगे? ज्ञान चन्द्रमा को छोड़ नहीं सकते। इसलिए वो भी कहेंगे वैश्यालय में ज्यादा हैं।

ये पुरानी दुनिया और वो नई दुनिया। क्या? ये माने कौनसी? चन्द्रवंशी कहाँ तक जाते हैं नीचे? एकदम पुरानी दुनिया तक नीचे जाते हैं। और ये चोटी वाले सूर्यवंशी? वो नई दुनिया। एक शिवबाबा दूसरा न कोई। तो लॉ मुजीब उनकी आत्माओं में इतनी ताकत है। हँ? एक को मानते हैं ना। इसलिए एकाग्रता की ताकत आ जाती है, एकता की ताकत आ जाती है, जो अभी तलक भी देखो राज्य कर रहे हैं। कौन? हँ? अभी तलक माने? सन् 67 तक भी राजाओं का कुछ न कुछ वर्चस्व रहता है। सन् 67, कोई राजा थे? हँ? कौन थे? किस देश के थे? नेपाल में था ना। भूटान में राजा था ना। वहाँ प्रजातंत्र राज्य थोड़े ही था उस समय। तो बताया अभी तलक भी वो राज्य कर रहे हैं। और इनकी ताकत इतनी कम हो गई है। किनकी? इनकी। इनकी तरफ किसकी तरफ इशारा किया? इनकी। बाजू में बैठे हुए। कौन? ब्रह्मा और ब्रह्माकुमार-कुमारी। जिन्होंने अपन को पक्का कर लिया है कि हम तो ब्रह्मा की औलाद हैं। वो ही हमारा माई, वो ही हमारा बाप। तो इनकी ताकत इतनी कम हो गई है। देखो, अब इनका तो ये राज्य ही खतम हो गया। राजाई खतम हुई। प्रजा के ऊपर प्रजा का राज्य हो गया एकदम।

तो देखो, पार्ट तो तुम बच्चों को समझाया गया है ना सभी। अच्छे ते अच्छा पार्ट कौनसा है और नंबरवार में कौनसे हैं, और नीचे-नीचे कौन हैं। तो सुख बहुत देखे हैं, परन्तु एक बात पक्की है। चाहे वो भले सूर्यवंशी हों, चोटी के ब्राह्मण हों, तो भी जिन्होंने सुख बहुत देखा है, नियमानुसार उनको दुख जरूर बहुत देखना है। अरे! अन्तिम जनम में या बीच वाले जन्मों में? हँ? अन्तिम जनम में जब प्रजातंत्र सरकार आती है तो बहुत दुःख देखना है। हँ? क्यों? क्योंकि जो दुखी नहीं होगा बहुत वो दुखी लोगों के दुख-दर्द को कैसे समझेगा? और बाप तो आते ही हैं किसके लिए? गरीबनिवाज बन करके। तो जिसमें प्रवेश करेंगे वो भी बहुत दुखी होना चाहिए अन्तिम जनम में। तो ये गायन है इनका कि इन जैसा गरीब। किन जैसा गरीब? हँ? लक्ष्मी-नारायण जैसा गरीब, इन जैसा ये दुक्कड अन्न का और कोई नहीं। सबसे जास्ती भारत वो अन्न खरीदता है। क्योंकि यहाँ सबसे जास्ती दुकाल पड़ता है। अकाल, दुकाल, अतिवृष्ट, अनावृष्ट, खूनरेज़ी सबसे जास्ती भारत में। और कोई जगह कोई देश में ऐसा दुक्कड की रड़ियाँ नहीं आती हैं कि दुकाल पड़ गया, हाय, अकाल पड़ गया। और समय प्रति समय भारत में दुक्कड़ पड़ते ही आए हैं। जब राजाओं ने बहुत अत्याचार किए तो फिर दुकाल पड़ता है।

तो देखो, अथाह भारत में है। और तुम कितने सुनते हो, कितने थोड़े-थोड़े सैम्पलिंग आहिस्ते-आहिस्ते, छन पड़ते हैं। तो ये झाड़ स्थापन करने में मेहनत तो लगेगी ना। कितने सैम्पलिंग झड़ पड़ते हैं। थोड़े-थोड़े सैम्पलिंग आप धीरे-धीरे लगते हैं। कोई तो तूफानों में मुरझा जाते हैं। तो ये झाड़ स्थापन करने में जो मेहनत होती है और दूसरे धर्मों में इतनी मेहनत तो नहीं होती है। कौनसा धर्म स्थापन करने में? हँ? ये देवी-देवता सनातन धर्म में, चोटी के ब्राह्मणों का धर्म है वो स्थापन करने में बहुत मेहनत लगती है। समझा ना? इसलिए इसमें बाप का पार्ट है। हँ? किसमें? और धर्मों में बाप का पार्ट नहीं है। कौनसे बाप का? हँ? कौनसे बाप का पार्ट है? अरे, निराकार बाप का पार्ट है जो असल ज्ञान सूर्य है, त्रिकालदर्शी है, अखूट ज्ञान का भण्डार है। ज्ञान का प्रकाश जितना उस ज्ञान सूर्य में है उतना और कोई आत्मा में थोड़ेही रहता है। इसलिए ये चोटी का जो ब्राह्मण धर्म है और चोटी की जो स्थापना होती है नई दुनिया की जिसे वैकुण्ठ कहा जाता है, इसमें बाप का पार्ट है। आत्माओं का बाप सुप्रीम सोल। क्या मनुष्य सृष्टि के बाप का पार्ट नहीं है? हँ? है। परन्तु वो तो और धर्मों में भी स्थापना करने जाता है ना राज्य की। और धर्मों की स्थापना जो ऊँचे ते ऊँची आत्मा है, परमपुरुष जिसे कहा जाता है, वो तो नहीं करेगी। वो कौनसे धर्म की स्थापना करती है? असल सूर्यवंशी देवताओं की, जो चोटी के ब्राह्मण बनते हैं। तो कब बने थे चोटी के ब्राह्मण? आरम्भ कब हुआ था? कोई टाइम निश्चित है? हँ? 1936 में पहले-पहले चोटी के ब्राह्मण तैयार हुए थे।

तो चोटी के ब्राह्मण है ही रुद्र माला। रुद्र ज्ञान यज्ञ है ना। तो रुद्र के बच्चे सब रुद्र जैसे रौद्र रूप धारण करने वाले। और फिर शान्त भी अति के रहने वाले। अति की शान्ति, अति की अशान्ति इस दुनिया में फैलाय सकते हैं। और वो स्थापन करने में बहुत मेहनत कर सकते हैं। ऊँच ते ऊँच ब्राह्मण धर्म। 24.8.1967 की वाणी का नौवां पेज। गुरुवार का प्रातः क्लास। वही क्यों स्थापन कर सकते हैं? क्योंकि वो एक ही सोल है, एक ही सुप्रीम आत्मा है जो ऊँचे ते ऊँची है। हँ? वो ऊँचे ते ऊँची मेहनत भी करनी पड़े। दूसरा क्या करते हैं? स्थापना करते हैं तो क्या करते हैं? कुछ भी नहीं है। उसको कोई सैम्पलिंग थोड़ेही कहेंगे। ये क्या बात हुई? जो चोटी का ब्राह्मण धर्म है उनकी सैम्पलिंग क्यों नहीं कहेंगे? हँ? अरे! अरे, वो तो एक ही चोटी के ब्राह्मण का तैयार करते हैं ना। जो भी ज्ञान देने का काम करते हैं तो एक को करते हैं या ढ़ेर सारी चोटी के जितने भी बाल हैं उन सबको करते हैं? हँ? बाल हैं चोटी के तो कोई बाल सबसे लंबा होगा कि नहीं? कोई छोटा होगा, कोई लंबा होगा। कोई बहुत मजबूत होगा। कोई जल्दी से उखड़ पड़ता होगा। उसमें भी तो नंबरवार होंगे ना। तो उसको सैम्पलिंग नहीं कहेंगे क्योंकि पुराना झाड़ तो कोई है? जब उसकी ब्राह्मण चोटी, जो अव्वल नंबर चोटी का है, उसकी स्थापना करते हैं तो कोई सैम्पलिंग लगाते हैं क्या? पुराना झाड़ कोई है ही नहीं। किसके साथ सैम्पलिंग लगाएंगे? लगेगी? हाँ, भविष्य में लगेगी।

तो ये तो बच्चे समझ गए हैं कि हाँ, वहाँ सेक्शन ही इनका अलग है। कहाँ? ब्रह्म लोक, ब्रह्म लोक में, परमब्रह्म में इनका सेक्शन ही अलग है। वो आते हैं। उनका एक धर्म स्थापन कर फिर दूसरा आते ही रहते हैं। कौन? अरे, दूसरे धरम वाले धरमपिताएं। वो एक आते हैं, एक धर्म स्थापन हुआ, मान लो इस्लाम धर्म स्थापन हुआ, फिर बौद्धी धर्म आ जाता है, क्रिश्चियन धर्म आ जाता है। वो तो आते ही रहते हैं। आते रहते हैं, आते रहते हैं और इनको, इन सभी धरम में जो ये धरम दूसरे-दूसरे धरम चले आए हैं उनमें से ये सभी निकलने वाले हैं। मठ, पंथ, संप्रदाय, कमेटियाँ। क्या-क्या निकलने वाले हैं। तो ये भी एक कुदरत है ना कि वो कैसे फिर वो ही आएंगे। सिक्ख बहुत बने हैं। मुसलमान बहुत बने हैं। उनमें जो मुख्य-मुख्य धर्म जो हैं बड़े-बड़े अभी ऐसे नहीं कहते हैं गुजराती, मराठी, फरेटी, फरेटी। ना। ये धर्म के ऊपर है सारा। इस्लामी, बौद्धी, क्रिश्चियन, आदि, आदि। बाकि कोई मराठी, गुजराती, ये कोई धरम थोड़ेही है। हँ? हिन्दुस्तानी हिन्दू कह दिया। ये कोई बात हुई? धरम का नाम धरमपिता के ऊपर पड़ता है ना।

तो ये वास्तव में गुजराती कोई धरम नहीं है। गुजरात में रहने वाले को गुजराती कहा जाता है। यू.पी. में रहने वाले को यू.पी. कहा जाता है। पंजाब में रहने वाले को पंजाबी कहा जाएगा। कहते हैं ना पंजाबी ब्राह्मण। गुजराती ब्राह्मण। बंगाली ब्राह्मण। बाकी अभी ये पंजाबी कोई धरम नहीं है ना। ये तो यही भारतवासियों ने हिन्दुस्तान में रहने वाले का धर्म हिन्दू कह दिया। क्योंकि बहुत पुराना है ना। तो जो बहुत पुराने हैं तो पुरानी बात भूल गई। धरमपिता को भूल गए। तो बस हिन्दुस्तान का नाम उठाय लिया। हिन्दू कह दिया। ये तो विदेशी लोग आए हैं, वो सिंधु नदी को क्रॉस करके आते हैं ना भारत में आक्रमण करने के लिए, तो सिंधु का नाम उन्होंने हिन्दू पड़ गया धीरे से। सिन्धु देश को हिन्दू देश। हिन्दू से हिन्दू बनाय दिया। हिन्दू ही कह दिया। (क्रमशः)

A morning class dated 24.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the middle of the eighth page on Thursday was - The picture of the Gigantic form (Viraat roop) is also a useful picture for you. This should be here. It is very easy to explain. Variety human beings and variety form. So, the word is one, but the cycle is so big. Explaining this cycle is so enjoyable. So, that should also be there. What? The picture of the Gigantic form (viraat roop). It should be in the museum or somewhere. This Baba keeps on telling, doesn't he? So, it should be there. If it is available, then you will be able to explain very well. You will be able to explain very well. When we are Brahmins and when we are Brahmins, then all the religions exist. Hm? So, in the Brahmin religion, the new world of Brahmin religion which is established, the highest on high religion, Brahmin religion through Brahma, so, will that highest on high religion be said to exist now? Hm? It is about 1967. Will it be called the highest on high religion? No. There is uproar in the world of Brahmins itself. And when there is Brahmin religion, then all the religions are present. Did you understand? It is because you become Brahmins from Shudras, don't you? And the entire world is Shudra and the entire world has to become numberwise Brahmin. So, sampling (sapling) is planted daughter. Just as the sampling (sapling) is planted now, so, the sampling of the special trees is planted. So, the Father also comes and plants this special sampling.

What should happen first of all in the world? First of all there should be religion of peace in the world. A peaceful religion like this; a peaceful religion like that of Brahmins; that too, not just of the nine categories of Brahmins, but Brahmins of the number one Suryavanshi category. What? We cannot take even the Chandravanshis to the complete stage of peace. Hm? Why? The Brahmin religion of those Suryavanshis is a peaceful religion; why cannot you take the Chandravanshis in that? Hm? If any Chandravanshi (member of the Moon dynasty) wants to convert to Suryavansh (Sun dynasty) will you not allow them to enter? Hm? You will allow them to enter, will you not? Then the descendents of those religions will also say that we also want to convert. They will not convert at all. All those are firm in their religion. So, the Chandravanshis cannot go to that peak-like heaven. It is not the law because a comparison is made, is not it? Hell and heaven. Who resides in hell? Then who remains in the stage of heaven? Hm? Does anyone experience heaven even in the world of hell or not? There is a vast difference. And this hell and heaven itself is called Shivalay (temple of Shiv) and Vaishyalay (brothel). What happens in the Shivaalay? Hm? There is belief in only one. There is worship of only one. Remembrance of only one. Company of only one. And in the Vaishyalay it is just opposite. They will not be able to accept one person. So, they are the Chandravanshis; whom will they believe? They cannot leave the Moon of knowledge at all. This is why it will be said that they too are more in vaishyalay.

This is the old world and that is a new world. What? 'This' refers to which one? To what extent do the Chandravanshis go down? They go down completely to the old world. And these peak Suryavanshis? That is the new world. One ShivBaba and none else. So, as per law their souls have so much power. Hm? They believe in one, don't they? This is why they get the power of concentration, power of unity because of which they are ruling even now. Who? Hm? What is meant by 'till now'? Even until 67 there is dominance of kings to some extent. 1967; were there any kings? Hm? Who were there? They were of which country? There was a king in Nepal, wasn't he? There was a king in Bhutan, wasn't he? It was not a democratic state there at that time. So, it was told that they are ruling even now. And the power of these people (inki) power has decreased so much. Whose? These people (inki). Towards whom was a gesture made by uttering 'these people'? Inki. The one who is sitting adjacent. Who? Brahma and Brahmakumar-kumaris. The ones who have developed a firm belief that we are the children of Brahma. He is our mother as well as Father. So, the power of these people has reduced so much. Look, their rule has ended now. Their kingship has ended. There is a rule of subjects (praja) over subjects.

So, look, you children have been explained about all the parts. Which is the best part and which are the numberwise parts and which are the lowly parts? So, you have experienced a lot of happiness, but one thing is sure. Be it the Suryavanshis, be it the peak Brahmins, those who have experienced a lot of happiness will have to experience a lot of sorrows as per rule. Arey! In the last birth or in the middle births? Hm? When the democratic government starts in the last birth, then you have to experience a lot of sorrows. Hm? Why? It is because how will the one who hasn't experienced sorrows understand the pains of sorrowful people? And why does the Father come basically? He comes as a garibniwaz (friend of the poor). So, the one in whom He enters should also be very sorrowful in the last birth. So, it famous about this one - ‘A poor person like this one’. A poor person like whom? Hm? A poor person like Lakshmi-Narayan; nobody is as hungry for food grains like this one. It is Bhaarat (India) who purchases the maximum food grains because it is here that the bad times (dukaal) are experienced the most. It is in India that maximum droughts (akaal), bad times (dukaal), too much rainfall (ativrisht), too less rainfall (anavrisht), bloodshed (khoonrezi) are experienced. People of no other place, no other country cry in such despair that we are experiencing bad times, oh, we are experiencing drought. And sorrows are experienced in India from time to time. When the kings unleashed a lot of tortures, then bad times are experienced.

So, look, there are immense [sorrows] in India. And how many of you listen? Very few samplings are planted gradually and they get sieved. So, hard work is involved in establishing this tree, is not it? So many samplings fall. Some samplings get planted automatically and gradually. Some wilt in storms. So, the hard work involved in establishing this tree is not experienced in the establishment of other religions. In the establishment of which religion? Hm? It involves a lot of hard work in establishing this ancient deity religion, the peak Brahmin religion. Did you understand? This is why the Father's part is involved in it. Hm? In what? The Father's part is not involved in other religions. Of which Father? Hm? The part of which Father is involved? Arey, the part of the incorporeal Father, who is the actual Sun of Knowledge, Trikaaldarshi, inexhaustible stockhouse of knowledge. The extent, to which the light of knowledge is contained in Him, does not exist in any other soul. This is why this peak Brahmin religion and the peak of New World, which is called Vaikunth that is established involves the Father's part. The Father of souls, the Supreme Soul. is not the part of the Father of the human world involved? Hm? It is involved. But he goes to other religions to establish their kingdom, doesn't he? The highest on high soul, who is called Parampursh will not establish other religions. Which religion does it establish? It establishes the true Suryavanshi deities who become the peak Brahmins. So, when did they become peak Brahmins? When did it start? Is any time fixed? Hm? The peak Brahmins were first of all established in 1936.

So, the peak (choti) Brahmins are the Rudramala. It is a Rudra Gyan Yagya, is not it? So, all the children of Rudra assume a fierce (raudra) form like Rudra. And then they also remain in extreme peace. They can spread extreme peace, extreme disturbance in this world. And they can work very hard in establishing it. The highest on high Brahmin religion. Ninth page of the Vani dated 24.8.1967. Morning class of Thursday. Why can they alone establish? It is because there is only one soul, only one Supreme Soul which is highest on high. Hm? They will have to make the highest on high efforts as well. What else do they do? When they establish, what do they do? It is nothing. It will not be called a sampling. What is this? Why will they not be called the sampling of the peak Brahmin religion? Hm? Arey! Arey, He prepares only one peak Brahmin, doesn't He? Whatever task of giving knowledge that He performs, does He do for one [hair] or does He do for all the hairs of the choti (the highest hairlock at the back of the head)? Hm? When there are hairs of the choti, then will there be a longest hair or not? One hair may be small, one hair may be long. There might be one which is strong. There might be one which gets plucked easily. They will also be numberwise, will they not be? So, that will not be called a sampling because is there any old tree? When He establishes that Brahmin choti, who is the number one choti, then does He plant any sampling? There is no older tree at all. With what will He plant a sampling (sapling)? Can it be planted? Yes, it will be planted in future.

So, children have understood that yes, their section is separate there. Where? In the Brahmlok, in Parambrahm their section is separate. They come. After one religion is established, the others keep on coming. Who? Arey, the founders of other religions. One of them comes, one religion is established, suppose Islam was established, then Buddhist religion comes, Christianity comes. They keep on coming. They keep on coming, keep on coming, and they, in all these religions, the other religions which have continued, among them all these are going to emerge. The sects, communities, committees. What all are going to emerge! So, this is also a nature that how they will only come again. Many have become Sikhs. Many have become Muslims. Among them the main big religions; now they do not say Gujarati, Marathi, fareti, fareti. No. All this is based on the religion. Islamic, Buddhist, Christian, etc. etc. As regards Marathi, Gujarati, these are not religions. Hm? They said – Hindustani Hindus. Is this any special thing? The name of the religion is based on the founder of the religion, isn’t it?

So, actually this Gujarati is not a religion. Those living in Gujarat are called Gujaratis. Those living in U.P. are called [residents of] U.P. Those living in Punjab will be called Punjabis. People say Punjabi Brahmins, don’t they? Gujarati Brahmins. Bengali Brahmins. But well this Punjabi is not a religion, is it? It is these residents of Bhaarat, who named the religion of those living in Hindustan as Hindu because it is very old, isn’t it? So, those who are very old have forgotten the old topic. They have forgotten the founder of the religion. So, they have picked up the name of Hindustan. They called them Hindus. It is these foreigners (videshis) who came, they cross the river Sindhu and come, to attack India, don’t they? So they gradually started naming Sindhu as Hindu. Hindu country from Sindhu country. They made them Hindus from Hindu. They called them Hindus only.(Continued)

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 23 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2595, दिनांक 31.07.2018
VCD 2595, Dated 31.07.2018
प्रातः क्लास 24.8.1967
Morning Class dated 24.8.1967
VCD-2595-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 22.51-36.49
Time- 22.51-36.49


ये एक भारत की भूल है। बड़े ते बड़ी भूल है। क्या? और धरम वालों की ऐसी ये भूलें नहीं हैं। मुसलमान धरम वाले जानते हैं हमारे धरमपिता का नाम क्या है, हमारे धरमग्रंथ का नाम क्या है, हमारा जो धर्मखण्ड है वो कौनसा है? सब पक्का पता है ना। तो उनमें एकता है। और हिन्दुओं को ये ही पता नहीं रहा कि हमारे धरमपिता का नाम क्या है। हमारा धर्मग्रंथ कौनसा है। धरमपिता ने क्या-क्या बातें समझाईं उसका कोई धरमग्रंथ बना या नहीं बना। जैसे मुसलमानों का कुरान बना। क्रिश्चियन्स की बाइबल बनी। हँ? और सिक्खों का वो गुरु ग्रंथ साहब बना। बाकि ऐसे नहीं है कि पंजाब में रहने वाले पंजाबी। नहीं। वो तो सिक्ख धर्म है। हाँ, सिक्ख धर्म का धर्मखंड कहेंगे पंजाब। और यहाँ भारत में रहने वाले हिन्दुस्तान में वरी धर्म हिन्दू कह दिया। और ये बात कोई की बुद्धि में नहीं आती है। क्या? कि और-और धरम जो हैं उनके धरमपिता का उनको नाम पता है। तो जिस परिवार में बाप का नाम चलता हो तो परिवार में एकता होगी या नहीं होगी? होगी। और बाप ने परिवार चलाने के लिए क्या-क्या नियम-कानून बनाए हैं वो भी सबको मालूम होगा। उससे भी प्यार होगा। तो एकता बनी रहेगी ना।

इन हिन्दुस्तान वालों को अपन को हिन्दू कह देने से उन्हें यही पता नहीं है हमारा धरमपिता कौन है। कभी कहते हैं भगवान है। कौन भगवान? कभी हिन्दू राम भगवान, कभी कृष्ण भगवान, कभी हनूमान, कहां गणेश भगवान। महाराष्ट्र में किसको मानते हैं? गणेश भगवान को। अरे, बुद्धि में ही नहीं आता है कि ये हम क्या किया? ये तो बड़ी भारी भूल हो गई। देखते भी हैं कि जिन धर्मों में एक धरमपिता बहुत मान्यता प्राप्त हुआ पड़ा है तो उनमें एकता है। धर्मग्रंथ एक है तो भी एकता है धर्मग्रंथ के आधार पर। और धर्मखंड भी उनका पक्का है। तो अपने धर्मखंड को समृद्ध करने के लिए भले दूसरों देशों से आक्रमण करना पड़े, लूट-लपाट करनी पड़े, अपने देश के लिए बहुत मान रहता है। तो एकता जो है वो उनमें बनी रहती है। एक धर्म और एक ही तीर्थ स्थान। क्या? कौन है? मुसलमानों का कौनसा है? क्रिश्चियंस का कौनसा है?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ। मक्का-मदीना। मक्का खास। और क्रिश्चियन्स का कुछ पता नहीं। ओहो! रोम में भी कोई जगह होगी ना। हँ?

तो देखो बाद में कितनी डाल-डालियाँ निकल पड़ती हैं। तो देखो ड्रामा के प्लैन अनुसार ये हिन्दू धरम भी होना है ना। प्रायः असली धरम लोप हो गया। प्रायः करके। पूरा लोप नहीं हुआ। इसलिए वट के वृक्ष को वट का झाड़, ये जो बड़ का झाड़ कहा जाता है ना। बड़ा झाड़ होता है। और यहाँ भी है नीचे। जो मुख्य जड़ है उसके नीचे, मुख्य तने के नीचे कुछ भी जड़ नहीं है। और-और टाल-टालियों की जड़ें खड़ी हुई हैं। फाउण्डेशन है। पक्का फाउण्डेशन देखने में आता है। और जो सनातन पुराना धर्म है, हँ, भारतवासियों का, उसका कोई फाउण्डेशन ही नहीं। तो उसके लिए कहा जाता है कि देखो थुर कट गया है। थुर में जो एकता होती है, कोई दूसरी डाल-डालियाँ होती हैं थुर में नीचे? होती हैं? नहीं होती हैं। तो जो एकता होती है, वो भंग हो गयी। थुर कट गया। और फिर भी वो झाड़ बिल्कुल सब्ज रहता है एकदम। ऊपर का हिस्सा। जो नीचे से लेके ऊपर तक तना जाता है ना, सरसब्ज रहता है।

तो मिसाल भी देखो कितना अच्छा है बड़ झाड़ का। और है भी भारत में। क्या? फाउण्डेशन कहाँ पड़ा देवी-देवता सनातन धर्म का? बड़े ते बड़ा धर्म। जो लंबे से लंबे समय तक चलता है। हँ? वो है ही भारत में। और भारत में भी कहाँ यादगार है बड़ वृक्ष की? कलकत्ते में यादगार है बनियन ट्री की। तो जरूर जब यादगार ऐसी पक्की है तो साबित क्या होता है? साबित होता है कि कलकत्ते में जो बनियन ट्री है वहाँ से ही इस देवी-देवता सनातन धर्म का फाऊण्डेशन पड़ा था। और जब फाउण्डेशन पड़ा था तो ब्राह्मणों में कौनसी कुरी के ब्राह्मणों का फाउण्डेशन पहले पड़ा होगा? जरूर कहेंगे सूर्य के द्वारा फाउण्डेशन पड़ा है तो सूर्यवंशियों का फाउण्डेशन पड़ा। वो तो जो तुम ज्ञानवान हैं उनकी अच्छी तरह से देखना चाहिए। वहाँ जाकरके देखना चाहिए। तुमने देखा है? अरे! तुमने देखा? अरे! ये तो देखना चाहिए। क्या? बनियन ट्री कलकत्ते का। कितना कुदरती झाड़ है। कितना बड़ा उनका थुर होना चाहिए। हँ? कितना मोटा-मोटा, बड़ा-बड़ा, बड़ा थुर होना चाहिए। परन्तु देखो, थुर बीच में है ही नहीं। और टाल-टालियाँ कितनी खड़ी हैं और-और धर्मों की।

अरे! मोटर में बुड्ढे बिचारे पैदल नहीं कर सकते हैं। मोटर होना चाहिए। तो बुड्ढे बिचारे मोटर में बैठकरके चक्कर लगाते हैं। कौन? जो पुराने-पुराने बुड्ढे होते हैं ना वो कौन से धरम में सबसे पुराने होंगे? देवी-देवता सनातन धर्म में सबसे पुराने होंगे। तो ये वंडरफुल झाड़ है। इसका अगर पूरा चक्कर लगाना पड़े तो बूढों को तो मोटर में बैठ के ही चक्कर लगाना पड़ेगा। इतना बड़ा झाड़ है कि उसका चक्कर लगाते ही लगाते टांगें थक जाएंगी, कमर टूट जाएंगी। तो उनको मोटर में घुमाया जाता है। वंडरफुल झाड़ है। क्या? और वो देखने में आता है। अपने इस घराने का उससे भेंट हो जाता है। कौनसा घराना? ज्ञान सूर्य के बच्चे ज्ञान सूर्यवंशी बच्चों का जो घराना है उससे उसकी भेंट हो जाती है बरोबर। हमारा जो देवी-देवता धरम का घराना है तो देखो प्रायः करके लोप हो गया। बाकि सब धर्म खड़े हैं। अभी जब फिर हमारा धर्म स्थापन होगा तो फिर ये दूसरे धर्म जिनकी जड़ें इतनी दिखाई पड़ रही हैं, फाउण्डेशन पक्का मालूम पड़ रहा है, ये सब नहीं दिखाई पड़ेंगी। होंगी ही नहीं। क्या? ये इस्लामी धरमखण्ड, अरब देश, अफ्रीका, ये सब समुद्र के गर्त में समा जाएंगे। अमेरिका, यूरोप, ये क्रिश्चियन खण्ड रहेंगे ही नहीं। चीन, जापान, ये जो भी पूर्वीय देश हैं; क्या? वो कुछ भी नहीं रहेंगे। सब समुद्र के तल में डूब जाएंगे।

देखो, ये भी तुम बच्चों की बुद्धि में है। दुनियावालों की तो बुद्धि में ही नहीं है। क्या? कि अब जल्दी ही सब धर्मों का खलासा होने वाला है। और कोई के भी मनुष्य मात्र की बुद्धि में नहीं है। बल्कि तुम्हारे में भी कभी-कभी ये बात बुद्धि से निकल जाती है। क्या? निकल जाती है तो बड़े-बड़े गहरे-गहरे कंक्रीट के फाउण्डेशन डालने वाले मकान तैयार करते रहते हैं। क्या? कई-कई मार की मंजिलें तुम बच्चे भी तैयार करने में लगे रहते हो। और उसमें फिर क्या होता है? बाप की याद निकल जाती है। जैसे ज्ञान की प्वाइंट भी बुद्धि में से निकल जाती है। क्यों? क्योंकि जो स्थायी सर्विस है उस सेवा में नहीं हैं। सर्विस करते ही नहीं हैं। बिल्कुल ही नहीं करते। और सर्विस करना जानते ही नहीं हैं। तो न जानते हैं, तो न सीखते हैं, न धारणा होती है। भले वो धारणा नहीं है, बाकि पुरानी सभी दुनिया की धारणाएं हैं, झगडा, झंटा, लड़ना-झगड़ना, लटकना, गिरना, झुकना, मरना - ये सब धारणाएं रहती हैं। गीत चला – धरती को आकाश पुकारे। आजा-आजा प्रेम दुलारे। आना ही होगा। आज गुरुवार है। सदगुरुवार का डे है। क्या? अभी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण कुल भूषण सुदर्शन चक्रधारी सर्विसेबुल बच्चों के प्रति रूहानी बापदादा और रूहानी बच्चों का यादप्यार स्वीकार करना। ओमशान्ति।

This is India's mistake. It is the biggest mistake. What? People of other religions do not commit such mistakes. People of Muslim religion know as to what is the name of the founder of our religion, what is the name of our religious text, what is our religious land. They know everything firmly, don't they? So, they have unity. And Hindus do not know at all as to what is the name of the founder of our religion, what is our religious text. What all topics did the founder of [our] religion explain and whether it was written as any religious book or not? For example, Koran of Muslims was written. Bible of Christians was written. Hm? And that Guru Granth Sahib of Sikhs was written. But it is not as if those who live in Punjab are Punjabis. No. That is Sikhism. Yes, the religious land of Sikhism will be said to be Punjab. And here, those living in India, in Hindustan were said to be Hindus. And this topic does not come in anyone's intellect. What? That the people of other religions know the name of the founder of their religion. So, will there be unity in the family in which the Father's name continues or not? There will be. And everyone will also know as to what all rules and laws have been made by the Father to run the family. They will love that also. So, unity will be formed, will it not be?

As the people of Hindustan call themselves as Hindus, they do not know as to who the founder of our religion is. Sometimes they say it is God. Which God? Sometimes Hindus say - God Ram, sometimes they say God Krishna, sometimes Hanuman, sometimes God Ganesha. Who do they believe in Maharashtra? God Ganesha. Arey, it does not strike their intellect at all that what have we done? This is the biggest mistake. They also observe that there is unity in the religions in which one founder of religion has a lot of recognition. Even if there is one religious text, then there is unity on the basis of the religious text. And their religious land is also firm. So, in order to make their religious land richer, they may have to attack other countries, they may have to loot, but they have a lot of respect for their country. So, they maintain their unity. One religion and one pilgrimage center. What? Who is it? Which is the one [pilgrimage center] of Muslims? Which is the one of Christians?
(Someone said something.) Yes. Mecca-Medina. Especially Meccca. And nothing is known about the Christians. Oho! There must be a place in Rome as well, will it not be? Hm?

So, look, so many branches and sub-branches emerge. So, look, as per drama plan, this Hindu religion is also supposed to be established. Mostly the original religion has disappeared. Mostly. It has not disappeared completely. This is why the banyan tree, which is called vat vriksha, is a huge tree and it is here below as well. Below the main root, below the main stem, there is no root. The roots of other branches and sub branches are available. The foundation exists. A firm foundation is visible. And the foundation of the ancient Sanatan Dharma, hm, of the residents of India does not exist at all. So, it is said for it that look, the stem has been cut-off. The unity that exists in the stem; do other branches and sub-branches exist on the stem below? Do they exist? They don't exist. So, the unity was broken. The stem was cut-off. And yet, that tree remains completely green. The above portion. The stem that grows from bottom to top remains green.

So, look the example of the banyan tree is also so nice. And it also is in India. What? Where was the foundation of the ancient deity religion laid? The biggest religion which continues for the longest time. Hm? That is in India only. And even in India where is the memorial of the banyan tree? The memorial of the banyan tree is in Calcutta. So, definitely when the memorial is so strong, then what does it prove? It proves that the Banyan tree that exists in Calcutta, the foundation of this ancient deity religion was laid from that place only. And when the foundation was laid, then the foundation of which category of Brahmins must have been laid first? It will definitely be said that the foundation has been laid through the Sun; so, the foundation of the Suryavanshis was laid. You, the knowledgeable ones should see properly. You should go there and see. Have you seen? Arey! Have you seen? Arey! You should see this. What? The Banyan tree of Calcutta. It is such a natural tree. Its stem should be so big! Hm? The stem should be so fat, so big. But look, the stem does not exist in the center at all. All other branches and sub branches of other religions are standing.

Arey! Poor old people cannot walk without motor (vehicle). Motor is required. So, the poor old people sit on a motor and go around [the tree]. Who? As regards the old, aged ones, in which religion will they be the oldest? They will be oldest in the ancient deity religion. So, this is a wonderful tree. If you have to go around it completely, then the old ones will have to go around only by sitting in the motor. It is such a big tree that your legs will pain, your back will break just by going around it. So, they are taken around it in a motor. It is a wonderful tree. What? And that is visible. This clan of ours is rightly compared with that. Which clan? The clan of the children of the Sun of Knowledge, the descendents of the Sun of Knowledge is rightly compared with it. Look, our clan of the deity religion has almost disappeared. All other religions are standing. Now when our religion is established again, then these other religions, whose numerous roots are visible, their foundation appears to be strong, will not be visible. They will not exist at all. What? This Islamic religious land, Arab country, Africa, all these will merge into the depths of ocean. The Christian lands like America, Europe will not exist at all. These Eastern nations like China, Japan; what? All of them will not remain. All will drown in the depths of the ocean.

Look, this is also in the intellect of you children. It is not at all in the intellect of the people of the world. What? That now all the religions are going to perish soon. It is not in the intellect of any other human being. Rather, even among you, sometimes this topic slips from the intellect. What? When it slips, then they start building houses with big, deep, concrete foundations. What? You children also remain busy in building multistoreyed buildings. And what happens in it? The Father's remembrance vanishes. It is as if the points of knowledge also slip from the intellect. Why? It is because they are not engaged in the permanent service. They do not do service at all. They don't do at all. And they do not know how to do service at all. So, neither do they know, neither do they learn, nor do they inculcate. Although that inculcation is not there, all other old inculcations of the world are there like fighting, quarelling, hanging, falling, bending, dying - all these inculcations remain. A song was played - Dharti ko aakaash pukaarey. Aaja aaja prem dulaarey. Aana hi hoga (The Sky calls the Earth. Come O dearest one. You will have to come.). Today is Thursday. It is a day of Sadguruwar (Sadguru's day). What? Now accept the remembrance and love of spiritual BapDada and spiritual children for the Brahma's mouth born progeny of the Ishwariya Vishwavidyalaya, decorations of the Brahmin clan, the Sudarshan Chakdradhari serviceable children. Om Shanti.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 25 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2596, दिनांक 01.08.2018
VCD 2596, Dated 01.08.2018
रात्रि क्लास 24.8.1967
Night Class dated 24.8.1967
VCD-2596-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-15.16
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आज का रात्रि क्लास है - 24.8.1967. ज्ञान, योग की बात चल रही है। ज्ञान तो है ही समझाने का। और कोई डिफिकल्ट, समझाने की कोई डिफिकल्ट बात नहीं है। बहुत सहज ज्ञान है। बाकि याद में रहना इसमें थोड़ी डिफिकल्टी है बच्चों को। पता है क्या डिफिकल्टी है? हँ? याद में रहने में डिफिकल्टी है कि माया बार-बार भुलाय देती है। याद करते हो, माया भुलाय देती है। और-और जगहों में ले जाती है। बाबा के घर से, बाबा के वर्से से, बाबा की याद से बुद्धि हटाय देती है। कोई सुबह को भी याद करने बैठते हैं कि भई शान्त वातावरण होता है, एकाग्रता अच्छी होगी। तो भी ऐसे ही होता है। कहाँ न कहाँ, और कोई तरफ में बुद्धि, फिर वहाँ से भी छूट करके और तरफ में ले जाती है। एक बाबा की याद में बुद्धि टिकने ही नहीं देती। बुद्धि नहीं टिकती है, इसको कहते हैं माया से हार खाई। हँ? क्योंकि हम चाहते हैं कि हम याद में रहें। याद का कवच होता है ना। तो भई सुरक्षा रहेगी। कोई घाव नहीं लगेगा। कोई कितना भी आक्रमण करता रहे। और माया हमें याद में याद के कवच पहन कर रहने नहीं देती। तो भला हार हो जाती है।

यानि माया कोई न कोई वो विघन डालती है याद में। या तो यूं कहें कि माया जीत लेती है। हँ? ये कब तक विघन डालती रहेगी? तब तक विघन डालेगी जब तक हम उल्टी सीढ़ी चढ़ते-चढ़ते 84 जन्मों की द्वापर युग को क्रॉस नहीं कर लेंगे। द्वापर-कलियुग में 63 जनम होते हैं ना। तो ये उल्टी सीढ़ी में ये माया रावण है ना। रावण के अनेक मुख हैं। कोई न कोई मुख और उसके फालोअर्स आक्रामक होते रहते हैं। हिंसक धरम है ना। तो माया उनको सपोर्ट करती है। क्योंकि माया रावण के साथ नाम है ना। काम भी रावण के साथ है उसका। वो द्वापर कलियुग में तुमको बहुत घाव लगाती है, जीत लेती है। बाकि तो ये ज्ञान सारा बहुत सहज है। सेवा करना भी सहज है। धारणा का सब्जेक्ट भी सहज है। याद में बहुत गड़बड़ करती है। पर सुनाते हैं ज्ञान और तुम ज्ञान की बातें सुनती हो, तो कहते हैं कि हम समझते हैं ज्ञान। जल्दी-जल्दी हो जावेगा पुरुषार्थ। क्योंकि समझाने वाले उऩको भिन्न प्रकार के मिलते हैं। कोई तो खुद भी कहते हैं कि जल्दी से रामराज्य स्थापन हो जाए तो बहुत अच्छा।

और तुम्हारे पास तो समझाने के लिए ये चित्र हैं। हँ? इन चित्रों में साबित होता है कि इनका राज्य है। किनका? झाड़ के चित्र में चित्र दिये हुए हैं ना विधर्मियों के और तुम्हारा भी राज्य है। देवता धर्म का भी राज्य है ना। सतयुग, त्रेता इसको ही रामराज्य कहा जाता है। रामराज्य क्यों कहा जाता है? कृष्ण राज्य क्यों नहीं कहते? क्योंकि ये स्वर्ग की राजाई की स्थापना करने वाला मुख्य राम वाली आत्मा है क्योंकि ये तो हम जानते हैं कृष्ण की आत्मा जो सतयुग के आदि में प्रिंस बनके जन्म लेती है वो ब्रह्मा का पार्ट बजाती है।

तीन मूर्तियाँ हैं ना। तो ब्रह्मा का पार्ट बजाने वाली सतयुगी कृष्ण की आत्मा। तो फिर शंकर का पार्ट कौन बजाता है? बीच में रहा विष्णु। परन्तु विष्णु तो कोई चार हाथ का, चार भुजा का होता ही नहीं। ये तो ब्रह्मा सो विष्णु बनते हैं। हँ? जिस नंबर के ब्रह्मा के मुख होंगे उसी नंबर की भुजाएं होंगी। चार भुजाएं दिखाते हैं विष्णु की। तो जरूर ब्रह्मा के रूप में चार मुख होंगे। ब्रह्मा के द्वारा सुनना-सुनाना होता है ना। समझना-समझाना तो होता नहीं। क्योंकि चार मुखी वाला ब्रह्मा तो बच्चा बुद्धि है। तो ब्रह्मा सो विष्णु बनते हैं। बच्चा तो इन्नोसेन्ट होता है ना। कि विकारों की बात में रचा-पचा होता है? नहीं। तो वो तो विष्णु बन जाता है। हँ? जैसे विष्णु के राज्य को कहा जाता है रामराज्य। और रामराज्य देता कौन है? ब्रह्मा सो विष्णु। और इन दोनों का जो सम्मिलित रूप से राज्य बनता है नई दुनिया का तो राम राज्य बाप ही दे सकते हैं। कौनसा बाप? जो सतयुग स्थापन करने वाला बाप है। सतयुग स्थापन किया होगा तो झूठखण्ड का विनाश भी किया होगा। झूठखण्ड कलियुग को कहा जाता है। झूठ का अंत, तो सत्य, सत्य ही रह जाएगा। लड़ाई झगड़े की कोई बात ही नहीं। नई दुनिया में, स्वर्ग में कोई लड़ाई-झगड़ा थोड़ेही होता है। वो तो है ही सत्य का राज्य।

तो यहाँ बैठे-बैठे भी बहुतों के दिल में आता होगा कि हम कहाँ जाकरके प्रदर्शनी करें इन चित्रों की। या इन चित्रों को कहीं भी बैठकरके रूहानी सर्विस में समझाय सकते हैं। ऐसे नहीं है कि चित्रों पे कोई समझते नहीं हैं। समझते हैं, क्योंकि चित्रों पर समझाना तो बहुत इज़ी है। कोई छोटे बच्चे होते हैं ना। तो उनको समझाया जाता है। वो भी समझ जाते हैं। क से कबूतर, ख से खरगोश, ग से गधा। तो समझ जाता है ना। बाकि जो श्रुड बुद्धि हैं उनको तो चित्रों की दरकार भी? दरकार भी नहीं है। तीक्ष्ण बुद्धि हैं तो वो तो बिना चित्रों के भी समझ जाते हैं। तो चित्रों पर समझाना सहज इसलिए है कि बच्चाबुद्धि भी समझ सकता है क्योंकि इस रामराज्य के दिखाने से ही सबकुछ समझ में आ जाता है। ये स्वर्ग में जो राज्य स्थापन किया होगा; किसने स्थापन किया होगा? हँ? कोई राज्य स्थापन होता है तो राजा लड़ाई लड़ता है ना। जीत पाता है तो फिर स्वर्ग बन जाता है। अंग्रेज लोगों ने नाम भी एक्यूरेट रख दिया - हैविन। क्या? विन किया हुआ है। तब राज्य स्थापन हुआ।

तो सबको समझाने से, ये चित्र दिखाने से बहुत इज़ी हो जाएगा। बच्चा बुद्धि भी हों, सालिम बुद्धि भी हों, सब समझेंगे। बताओ, जब इनका राज्य था; इनका माने किनका? हँ? कोई राम-कृष्ण का राज्य था, तो और कोई राज्य नहीं था। न इस्लामियों का, न बौद्धियों का, न क्रिश्चियन्स का, कोई विधर्मियों, विदेशियों का राज्य नहीं था। और इतने सभी ढ़ेर के ढ़ेर धर्म आज की दुनिया में हैं। और इतने ढ़ेर के ढ़ेर राजाएं। एक ही राज्य में कितने राजा बने बैठे हैं। जो कुर्सी पर सरकार में बैठ गया गोर्मेन्ट में वो बस राजा हो गया। ढ़ेर के ढ़ेर। अरे, सतयुग में, त्रेता में, स्वर्ग में इतने करोड़ों मनुष्य तो थे ही नहीं। वहाँ तो करोड़ों नहीं थे। तो कितने थे? लाखों नहीं बताया। माने लाखों थे। सतयुग में करोड़ों थे कि लाखों थे? सतयुग में तो ज्यादा से ज्यादा दो करोड़। हाँ, त्रेता में संख्या बढ़ जाती है। क्योंकि वहाँ जनम ज्यादा होते हैं। इसलिए नाम ही पड़ गया त्रेता। तेरह जनम होते हैं। तो त्रेता में जो 13 जनम होते हैं उसमें जनसंख्या बहुत बढ़ती है सतयुग के मुकाबले। तो वहाँ करोड़ों मनुष्य हो जाते हैं त्रेता के अंत में। 8-10 करोड़ तो हो ही जाते होंगे। बाकि आज की तरह तो नहीं है कि 500-700-750 करोड़ मनुष्यात्माएं हो जाएंगी विनाश के अंत तक। (क्रमशः)

Today's night class is dated 24.8.1967. The topic of knowledge and Yoga is being discussed. The knowledge is for explaining. And it is not difficult; it is not difficult to explain. It is a very easy knowledge. But as regards being in remembrance, there is a little difficulty for the children. Do you know what the difficulty is? Hm? The difficulty involved in remembrance is that Maya makes you forget again and again. You remember [Baba] and Maya makes you forget. It takes you to other places. She deflects the intellect from Baba's home, from Baba's inheritance, from Baba's remembrance. Some sit to remember in the morning that brother, the atmosphere is peaceful and I will be able to concentrate nicely. Still, it happens like this only. The intellect wanders somewhere or the other to other sides; then it deflects it from there as well to other places. It does not allow the intellect to become constant in Baba's remembrance. The intellect doesn't become constant. This is called suffering defeat at the hands of Maya. Hm? It is because we want to remain in remembrance. There is an armour (kavach) of remembrance, is not it? Then you will remain safe. You will not suffer any injury, howevermuch someone may attack. And Maya does not allow us to wear the armour of remembrance. So, we suffer defeat.

It means that Maya creates one or the other obstacle in remembrance. Or we may say that Maya conquers. Hm? How long will it keep on creating obstacles? She will create obstacles until we cross the Copper Age while climbing reverse ladder (upstairs) the Ladder of 84 births. There are 63 births in the Copper Age and Iron Age, aren't there? So, there is this Maya Ravan in this reverse ladder. There are many heads of Ravan. One or the other head and its followers keep on becoming aggressive. It is a violent religion, is not it? So, Maya keeps on supporting them because Maya's name is along with Ravan, is not it? Its task is also with Ravan. It causes a lot of injuries to you in the Copper Age and Iron Age. It conquers you. As regards this knowledge, it is very easy. It is also easy to do service. The subject of inculcation (dhaarana) is also easy. It creates a lot of troubles in remembrance. But they narrate knowledge and you listen to topics of knowledge; so they say that we understand knowledge. The purusharth will be made fast because they get different kinds of explainers. Some themselves say that it is better if the kingdom of Ram is established quickly.

And you have these pictures to explain. Hm? It is proved in these pictures that there is the rule of these persons. Whose? It has been mentioned in the picture of the Tree that there is a kingdom of vidharmis as well as your kingdom. There is a rule of deity religion as well, is not it? The Golden Age and the Silver Age are called the kingdom of Ram. Why is it called the kingdom of Ram? Why is not it called the kingdom of Krishna? It is because the main soul that establishes the kingdom of heaven is the soul of Ram because we know that the soul of Krishna which gets birth as a Prince in the beginning of the Golden Age plays the part of Brahma.

There are three personalities, aren't there? So, the soul of Golden Age Krishna plays the part of Brahma. So, then who plays the part of Shankar? In between is Vishnu. But there is no Vishnu with four arms, four hands at all. It is Brahma who becomes Vishnu. Hm? As is the serial number of the head of Brahma so is their number among the arms [of Vishnu]. Vishnu is shown to have four arms. So, definitely there will be four heads in the form of Brahma. Listening and narrating takes place through Brahma, doesn't it? Understanding and explaining doesn't take place because the Brahma with four heads has a child-like intellect. So, Brahma becomes Vishnu. A child is innocent, is not he? Or is he immersed in vices? No. So, he becomes Vishnu. Hm? For example, the kingdom of Vishnu is called Ramrajya. And who gives the kingdom of Ram? Brahma becomes Vishnu. And the kingdom of New World, the Ramrajya that is established through the combined form of both of them can be given only by the Father. Which Father? The Father who establishes the Golden Age. If He had established the Golden Age, then He would have also destroyed the false land (jhoothkhand). The Iron Age is called jhoothkhand. When the falsehood ends, then there will be only truth. There is no question of fights and quarrels at all. There is no fight or quarrel in the new world, in heaven. That is a kingdom of truth.

So, even while sitting here, many must be thinking that we should go somewhere and organize an exhibition of these pictures. Or you can sit and explain these pictures anywhere as part of spiritual service. It is not as if nobody understands these pictures. They do understand because it is very easy to explain on these pictures. There are some small children, aren't there? So, they are explained. They too understand. Ka for kabootar (pigeon), Kha for khargosh (rabbit), Golden Age for gadhaa (donkey). So, he understands, doesn't he? As regards those who are clever, do they need pictures? They don't need. If someone is clever, he can understand even without pictures. So, it is easy to explain on the pictures because even the one with a child-like intellect can understand because one can understand everything just by showing this kingdom of Ram. The kingdom that would have been established in heaven; who must have established? Hm? When a kingdom is established, the king wages a war, doesn't he? When he conquers then heaven is established. The Britishers have coined an accurate name - heaven. What? He has achieved a win (vin kiya hua hai). Then the kingdom was established.

So, by explaining to everyone, by showing them these pictures, it will become very easy. Even if they have a child-like intellect, even if they have a matured intellect, all will understand. Tell them, when there was the kingdom of these persons; 'these persons' refers to whom? Hm? When there was the kingdom of Ram and Krishna, there was no other kingdom. There was a kingdom of neither the Islamic people, neither the Buddhists nor the Christians or vidharmis (heretics), videshis (foreigners). And there are numerous religions in today's world. And there are so many kings. So many kings are sitting in only one kingdom. Whoever occupies the seat in the government becomes the king. Numerous. Arey, there weren't crores of human beings in the Golden Age, in the Silver Age, in heaven. There weren't crores there. So, how many existed there? It was not mentioned as lakhs. It means there were lakhs. Were there crores or lakhs in the Golden Age? There were at the most two crores in the Golden Age. Yes, the number increases in the Silver Age because there are more births there. This is why the name itself is Treta (Silver Age). There are thirteen births. So, the population increases a lot in the 13 births that exist in the Silver Age when compared to the Golden Age. So, in the end of the Silver Age the number of human beings grows to crores. It must have grown to 8-10 crores. But it is not like today when there will be 500-700-750 crore human souls by the end of destruction. (Continued)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 26 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2596, दिनांक 01.08.2018
VCD 2596, Dated 01.08.2018
रात्रि क्लास 24.8.1967
Night Class dated 24.8.1967
VCD-2596-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 15.17-27.35
Time- 15.17-27.35


तो खास जब इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था, हँ, किन लक्ष्मी-नारायण का? किस तरफ इशारा किया? हँ? क्योंकि लक्ष्मी-नारायण टाइटलधारी तो सतयुग में बहुत होते हैं। जैसे क्रिश्चियन्स में चला – किंग एडवर्ड दि फर्स्ट, सेकण्ड, थर्ड। ऐसे ही सतयुग में 8 पीढ़ियों में 8 नारायण होते हैं। और इनका राज्य बताया, जब राज्य की शुरुआत हुई थी तो किनका राज्य था? सभी नारायणों का राज्य था क्या? नहीं। किसका राज्य था? इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य। किस तरफ इशारा किया? हाँ। पीछे बाबा के लक्ष्मी-नारायण का चित्र रहता था। उनकी तरफ इशारा किया। उनमें क्या खास बात? और दूसरे नारायणों में क्या खास बात जो उनका राज्य नहीं होता है शुरू में? तो बताया इनके चारों ओर प्रकाश का वलय दिखाया है। ये ज्ञान की रोशनी की दुनिया में रहते हैं। क्या? ज्ञान ही ज्ञान। अज्ञान की बात ही नहीं। इसलिए विष्णु को चित्र बनाते हैं भक्तिमार्ग में तो नेपाल में तालाब में दिखाया गया। क्या? नाम ही उनका रख दिया है – नारायण। नार माने ज्ञान जल; अयन माने घर। कहाँ रहते हैं? ज्ञान जल के तालाब में रहते हैं।

तो ये लक्ष्मी-नारायण हैं। बाकि सब लक्ष्मी-नारायण की बुद्धि इतनी नहीं चलती ज्ञान में। चलेगी, जो कुछ भी सुना-सुनाया है, रटा-रटाया है, वो उसी बातों में चलती है। बाकि मनन-चिंतन-मंथन करें, नए-नए प्वाइंट निकालें, वो नहीं होता है। क्योंकि जब पहले-पहले इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था तो पहली-पहली डिनायस्टी में तो पहला-पहला ही होगा ना। पीछे वाली डिनायस्टी में दूसरे होंगे, अंतिम डिनायस्टी में कमजोर होगा। तो पीछे जब दूसरा राजा, सतयुग में दूसरा राजा कौन हुआ जो गद्दी पे बैठेगा? कृष्ण वाली आत्मा। तो बच्चा बैठेगा तख्त में। तब कहेंगे कि अच्छा भई अब राज्य में बढ़ोतरी होती है। संख्या की वृद्धि होने लगती है। कितनी वृद्धि हो जाती है? हँ? सतयुग में जब दूसरी राजाई चलेगी तो 9 लाख आबादी हो जाएगी दूसरे राज्य में, कृष्ण के राज्य में। अंत तक। तो जो पहली सीढ़ी होती है, पहला राज्य होता है जिसके बारे में किसी को पता ही नहीं है क्योंकि वो तो एक्स्ट्राआर्डिनरी राज्य है ना। जो सुख वहाँ मिलता है पहले-पहले राज्य में, जिसको कहें आदिनारारयण के राज्य में, वो सुख तो और धरम वालों को मिल ही नहीं सकता। ऐसा क्या सुख होता है? वहाँ ऐसा सुख होता है कलातीत। क्या? उसको 16 कलाओं में नहीं बांधा जा सकता। सूर्यवंशी हैं ना। सूर्य को कोई कलाओं में बांधा जाता है? नहीं। चन्द्रमा की कलाएं होती हैं। चन्द्रमा 16 कला संपूर्ण, चन्द्रमा कलाहीन।

तो वहाँ अतीन्द्रिय सुख होता है। क्यों कलातीत? इसलिए कलातीत कि वहाँ इन्द्रियों के सुख की दरकार रहती ही नहीं। इन्द्रियों का सुख जो होता है वो फिर भोगी देवताओं के लिए गाया हुआ है। उन्हें भोग जरूर चाहिए। इसलिए देवताओं की जब पूजा करते हैं तो भोग जरूर लगाते हैं। हाँ। तो अब वो भोग कोई भी इन्द्रियों का हो। मोस्ट्ली तो वो त्रेता के अंत तक भी ज्ञानेन्द्रियों का ही भोग लगाते हैं। त्रेता के अंतिम सीढ़ियों में कर्मेन्द्रियों का परिवर्तन होने लगता है। तब ही आधा विनाश हो जाता है दुनिया का।

तो बताया कि कृष्ण के राज्य से पहले जो राज्य होगा ना, सतयुग से पहले, उसको कहते हैं विष्णु पद। विष्णु का राज्य। उसमें तो बहुत थोड़ी जनसंख्या होती है। कितनी होती होगी? विष्णु के राज्य में टोटल जनसंख्या कितनी होती होगी? जब राधा-कृष्ण का जन्म होगा, उससे पहले-पहले, हँ,
(किसी ने कुछ कहा।) अरे, विष्णु के राज्य में बोल रहे हैं तो 700 करोड़ बताय दिया। 9 लाख कहाँ से हो जाएंगे? 9 लाख तो तब होते हैं जब राधा-कृष्ण जैसे बच्चे पूरी पीढ़ी में, पहली पीढ़ी में सतयुग में जन्म लें तो साढ़े चार लाख राधा-कृष्ण जैसे बच्चे और साढ़े चार लाख उनको जन्म देने वाले माँ-बाप। तो टोटल मिलाकरके नौ लाख जनसंख्या तो सतयुग के आदि के जन्म में होती है। लेकिन सतयुग से पहले जो राज्य स्थापन होता है वहाँ तो साढ़े चार लाख आबादी। सवा दो लाख मेल और सवा दो लाख फीमेल।

तो देखो, दूसरी पीढ़ी में राज्य बढ़ जाता है। तो कहेंगे राज्य बढ़ गया। तो पहले-पहले तो यही होगा ना। क्या? पहले जनसंख्या थोड़ी बढ़ी। फिर बाद में जैसे-जैसे जनम बढ़ते जाते हैं जनसंख्या भी बढ़ती जाती है। और योनियों की संख्या भी बढ़ती जाती है। वो तो 84 लाख योनियां कह देते हैं। हैं तो 84 लाख योनियां। बाकि ऐसे नहीं है कि मनुष्य 84 लाख योनियों में जाता है। हाँ, 84 जन्मों में 84 लाख योनियों की वृद्धि हो जाती है। 84 जनम हैं और 84 लाख योनियाँ हैं। तो सतयुग के आदि में बहुत थोड़े आदमी। हँ? और वहाँ बहुत शान्ति भी होगी। तो वहाँ सुख और शान्ति दोनों होती है। स्वर्ग भी इसको कहा जाता है। क्या? क्यों कहा जाता है? क्योंकि सभी देवताएं वहाँ स्वस्थिति में स्थित रहते हैं। अपनी ज्योतिबिन्दु आत्मा को भृकुटि में याद करते हैं। और लगातार याद बनी रहती है उन्हें। देह का भान, देह की याद रहती ही नहीं। इसलिए उसको हैविन कहा जाता है। क्यों? कि देहभान में रहेंगे तो माया हराती रहती है। हारेंगे तो हैविन कहाँ से विन करेंगे? स्वर्ग के ऊपर जीत पा ही नहीं सकते। और देहभान को छोड़करके आत्माभिमान में टिक जाएंगे, प्रैक्टिस करते-करते, हँ, भृकुटि के मध्य में अपनी ज्योतिबिन्दु आत्मा को याद करते-करते जब आत्मिक स्थिति में लगातार टिक जाएंगे तो फिर कहेंगे हैविन। जीत लिया। इसके चित्र पर ही समझाना है। हँ?

इस समय में तुम बच्चों को जबकि समझ है कि सतयुग में इन लक्ष्मी-नारायण का माना कौन लक्ष्मी-नारायण का? इन लक्ष्मी-नारायण का। किन लक्ष्मी-नारायण का?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, आदि लक्ष्मी-नारायण का एकदम सतयुग के आदि में राज्य था। और वहाँ पवित्रता भी थी। ऐसे नहीं कि इन्द्रियों का सुख नहीं भोगते थे। तो पवित्रता की बात ही नहीं। नहीं। वहाँ तो वायब्रेशन की भी पवित्रता। ऐसा बढ़िया वायब्रेशन होता था कि वहाँ दूसरे धरम में कन्वर्ट होने वाली आत्माएं भी पांव नहीं रख सकेंगी। पवित्रता भी थी, शान्ति भी थी, सुख भी था। और फिर ये भी नहीं कि वो पुनर्जन्म में नहीं आते हैं। वो फिर पुनर्जन्म में भी जरूर आए हैं। क्या? कौन? हँ? सतयुग का नारायण राधा-कृष्ण पुनर्जन्म में तो आते ही हैं। लेकिन उनको जन्म देने वाले जो हैं राधा-कृष्ण जैसे बच्चों को, साढ़े चार लाख को, उनके माँ-बाप जो आदि राज्य में, विष्णु के राज्य में होते हैं, सृष्टि के आदि काल में वो भी पुनर्जन्म में जरूर आते हैं। इसलिए कहेंगे कि 84 जनम भी इसने लिए। किसने? किसकी तरफ इशारा किया? हँ? ब्रह्मा की तरफ इशारा किया। भी क्यों लगा दिया? माने इसने भी लिये हैं और इसके माँ-बाप ने भी लिये हैं। ओमशान्ति।

So, especially, when there was a rule of these Lakshmi and Narayan; hm? Of which Lakshmi and Narayan? In which direction was a gesture made? Hm? It is because there are many persons holding the title of Lakshmi and Narayan in the Golden Age. For example, there was King Edward the first, second, third among the Christians. Similarly, there are 8 Narayans in the 8 generations. And it was told that when their rule began, who was ruling? Was there a rule of all the Narayans? No. Who was ruling? The rule of these Lakshmi and Narayan. In which direction was a gesture made? Yes. There used to be a picture of Lakshmi-Narayan behind Baba. A gesture was made towards them. What is the special thing about them? What is the specialty in other Narayans that their rule does not exist in the beginning? So, it was told that a halo of light has been depicted all around them. They live in the light of knowledge. What? Just knowledge. There is no question of ignorance at all. This is why when the picture of Vishnu is prepared on the path of Bhakti, then he was shown in a pond in Nepal. What? His name itself was coined as Narayan. Naar means the water of knowledge; Ayan means house. Where does he live? He lives in the pond of knowledge.

So, these are the Lakshmi and Narayan. The intellect of all other Lakshmi-Narayans does not work to that extent in knowledge. It will work; it works only in the topics that has been narrated or heard, learnt by heart. As regards thinking and churning, causing new points to emerge, that does not happen because when first of all there was a rule of these Lakshmi and Narayan, then there will be the first one in the first and foremost dynasty, will there not be? There will be others in the latter dynasties; the one in the last dynasty will be weak. So, later, when the second king; who will be the second king in the Golden Age to occupy the throne? The soul of Krishna. So, the child will sit on the throne. Then it will be said - Achcha, brother, now the kingdom grows. The number starts growing. How much increase takes place? Hm? When the second kingship starts in the Golden Age, then the population will grow to nine lakhs in the second kingdom, in the rule of Krishna by the end. So, the first step (seedhi), the first kingdom about which nobody knows because that is an extraordinary kingdom, is not it? The happiness that is enjoyed there in the first kingdom, which could be called the kingdom of Aadi Narayan, that happiness cannot be experienced by people of other religions at all. What kind of happiness is it? There the happiness is kalaateet (beyond celestial degrees). What? It cannot be bound in 16 celestial degrees. They are Suryavanshis, aren't they? Is the Sun bound in celestial degrees? No. There are celestial degrees of the Moon. The Moon is [sometimes] perfect in 16 celestial degrees and the Moon is [sometimes] devoid of celestial degrees.

So, there is supersensuous joy there. Why is it beyond celestial degrees (kalaateet)? It is kalaateet because there is no need of pleasure of organs there. The pleasure of the organs is famous for the pleasure-seeking deities. They definitely need pleasure (Bhog). This is why whenever deities are worshipped, then they are definitely offered Bhog (holy eatables). Yes. So, well, it could be a Bhog (offering) of any organ. Mostly, even till the end of the Silver Age, they offer the Bhog of sense organs only. In the last steps of the Silver Age, the organs of action begin to transform. At that time only the semi-destruction of the world takes place.

So, it was told that the kingdom before the kingdom of Krishna, before the Golden Age is called the Vishnu Pad (post of Vishnu). The kingdom of Vishnu. Very less population lives there. What would have been the number? What must have been the total population in the kingdom of Vishnu? When Radha and Krishna are born, just before that, hm,
(Someone said something.) Arey, when I am speaking of the kingdom of Vishnu, you have mentioned ‘700 crores’. How will there be 9 lakhs? 9 lakhs are at a time when the children like Radha and Krishna in the complete generation, in the first generation, in the Golden Age get birth. Then four and a half lakhs children like Radha and Krishna and four and a half lakh parents, who give birth to them. So, totally, nine lakhs population exists in the first birth of the Golden Age. But in the kingdom that is established before the Golden Age, there will be four and a half lakhs population. Two lakh twenty five thousand males and two lakh twenty five thousand females.

So, look, the kingdom grows in the second generation. So, it will be said that the kingdom grew. So, first of all this will only happen, will it not? Initially the population increased slightly. Then later on as the number of births increase, the population also increases. And the number of species also increases. They say 84 lakh species. There are 84 lakh species. But it is not that the human being passes through 84 lakh species. Yes, 84 lakh species increase in 84 births. There are 84 births and 84 lakh species. So, there will be very few people in the beginning of the Golden Age. Hm? And there will also be a lot of peace there. So, there is both happiness and peace there. This is called heaven (swarg). What? Why is it called? It is because all the deities remain constant in swasthiti (soul conscious stage) there. They remember their point of light soul in the bhrikuti (middle of the forehead between the brows). And they remember [the soul] continuously. They do not have the consciousness of the body, remembrance of the body at all. This is why it is called heaven. Why? It is because if they remain in body consciousness, then Maya keeps on defeating them. If they suffer defeat, then from where will they win heaven? They cannot conquer heaven at all. And if they leave the body consciousness and become constant in soul consciousness while practicing, while remembering their point of light soul in the middle of the bhrikuti, when they become continuously constant in the soul conscious stage, then it will be called heaven. Achieved a win. You have to explain on this picture only. Hm?

At this time when you children have understood that in the Golden Age, of these Lakshmi-Narayan, i.e. of which Lakshmi-Narayan? Of these Lakshmi-Narayan. Of which Lakshmi-Narayan?
(Someone said something.) Yes, there was a rule of the first Lakshmi-Narayan in the very beginning of the Golden Age. And there was also purity there. It is not as if they did not used to enjoy the pleasure of the organs. So, there is no question of purity at all. No. There was purity of the vibrations as well. There used to be such fine vibrations that the souls that convert to other religions will not be able to even step into it. There was purity also, there was peace also and there was happiness also. And then it is not as if they do not get rebirth. They have then definitely been reborn. What? Who? Hm? The Narayan, Radha-Krishna of the Golden Age do get rebirth. But those who give birth to them, to the children like Radha and Krishna, to the four and half lakhs, their parents, who are in the first kingdom, in the kingdom of Vishnu, in the beginning of the world; they too definitely get rebirth. This is why it will be said that it is this one who also got 84 births. Who? Towards whom was a gesture made? Hm? A gesture was made towards Brahma. Why was 'also' added? It means that this one has also taken [84 births] and his parents have also taken [84 births]. Om Shanti.
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 28 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2597, दिनांक 02.08.2018
VCD 2597, Dated 02.08.2018
रात्रि क्लास 24.8.1967
Night Class dated 24.8.1967
VCD-2597-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-17.02
Time- 00.01-17.02


रात्रि क्लास चल रहा था - 24.8.1967. पहले पेज के मध्य में बात चल रही थी कि चित्र पर ही इस समय तुम बच्चों को जबकि समझ है सतयुग में इनका राज्य था। और वहाँ पवित्रता भी थी। शांति, सुख भी था। और फिर ये पुनर्जन्म में भी जरूर आए हैं। और 84 जन्म भी इसने लिये हैं। तुम्हारा भी तो विचार चलता होगा सुनकरके। बहुत समझाने का है। विचार चलेगा तो समझाएंगे। हां, ये बात जरूर है कि हम नीचे गिरना कहां से शुरू कर देते हैं? हँ? तुम्हारा विचार तो चलता होगा कि ये लक्ष्मी-नारायण सतयुग में आते हैं। इसने 84 जन्म भी लिया है। इसने माने? ब्रह्मा ने। तुम्हारा भी तो विचार चलता होगा। किसका? बाबा के सन्मुख में, बाबा जिनसे बात करते हैं उनके लिए बताया कि तुम्हारा भी विचार चलता होगा सुनकर के। क्या विचार चलता होगा? क्योंकि विचार चलेगा तो समझाने में सहज होगा। विचार चलेगा कि इन से लेकर के हम नीचे गिरना शुरू होते हैं। किनसे लेकर? हँ? कृष्ण से लेकर के हम नीचे गिरना शुरू कर देते हैं। कृष्ण बच्चे में लगाव लग जाता है क्या? कि भाई, 84 जन्म इन से लेकर के पूरे होते हैं। इनसे माना किनसे? ब्रह्मा बाबा से।

तो, तो ये, ये, ये तो फिर 84 जन्म के बाद तमोप्रधान बन जाते हैं। क्या? ये। कौन? ब्रह्मा बाबा तो उनके 84 जन्म पूरे होते हैं तो तमोप्रधान बन जाते। तो इस समय ये तमोप्रधान हैं ही। इस समय माना किस समय? जब ये वाणी चल रही है उस समय। हँ। किनकी तमोप्रधानता की बात हुई? ब्रह्मा बाबा के तमोप्रधानता की बात हुई। इस समय तो ये तमोप्रधान है। तो जरूर भिन्न नाम-रूप में ये तमोप्रधान होंगे जिसको फिर सतोप्रधान बहुत होना है। अभी ये जो तमोप्रधान बन गया है ये ब्रह्मा दादा लेखराज, ये सतोप्रधान कैसे बने? क्योंकि इनको भी जरूर कोई सिखलाने वाला चाहिए ना। हँ? तो कौन सिखलाएगा? कौन बताएगा ये बात कि तुम सतयुग में जब से जन्म लिया तब से नीचे गिरना शुरू हुए। अभी इनको सिखलाने वाला तो और तो कोई हो नहीं सकता सिवाय बाप के। हँ? कौन से बाप के? बेहद के बाप तो दो हैं। तो इनको सिखलाने वाला कौन सा बाप होगा? हँ? जो इनको सिखलाय करके बताए कि तुम सतोप्रधान कैसे बने? किसने सिखलाया? और तमोप्रधान कैसे बने? तो इनको सिखलाने वाला तो बाप बताया। तो ये बाप इनको कैसे सिखलाते हैं? हँ? ये कहके किस तरफ इशारा दिया? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) हां। राम बाप को कहा जाता है। कृष्ण बच्चे को कहा जाता है। माने कृष्ण वाली आत्मा बच्चा बुद्धि है। राम वाली आत्मा समझदार है तो सिखाय सकती है। पहले खुद समझे फिर सिखाए।

तो ये तो सिर्फ तुम बच्चे ही जानते हो कि इनको ये बाप कैसे सिखलाते हैं। ये बाप कहके किसकी तरफ इशारा किया? चित्र की तरफ बाबा इशारा करते हैं ना। तो किस तरफ इशारा किया?
(किसी ने कुछ कहा।) लक्ष्मी-नारायण बाप हैं? हँ? वो खुद ही सीखने वाले हैं, वो खुद ही नर से नारायण बनते हैं, नारी से लक्ष्मी बनते हैं, तो कोई सिखाता है तब बनते हैं कि अपने आप बन जाते? हँ? जो विष्णु लोक में लक्ष्मी-नारायण होंगे उनको सिखाने वाला बाप कौन होगा? ये बाप माने त्रिमूर्ति में शंकर की तरफ इशारा किया। (किसी ने कुछ कहा।) शिव बाबा। हां। ये बाप इनको सिखलाते हैं और ये बात तो सिर्फ तुम बच्चे ही जानते हो कि बरोबर शिव बाबा ये इनमें बहुत जन्म के अंत के अंत में ये जो शरीर है ना भले इस समय इनका नाम दूसरा है। कृष्ण नाम नहीं है पहले से ही। सतो तो जरूर होगा। पीछे इनमें प्रवेश करते हैं तमोप्रधान बनने पर। तो जभी कहते हैं बाप कि मैं पुराने तन में प्रवेश करता हूँ, बहुत जन्म के अंत के जन्म में भी अंत में प्रवेश करता हूँ। तो ये कौन से बाप कहते हैं? हँ? शिव बाप कहते हैं कि मैं पुराने तन में प्रवेश करता हूं। बहुत जनम के अंत के जन्म के भी अंत में। बहुत जन्म कितने हुए? 84 जन्म। तो 84 जन्म में अंत में माना 60 साल की अवस्था हो जाए तब वानप्रस्थ अवस्था। बहुत जन्म के अंत के अंत में भी, अंत के जनम के भी अंत में। इसका मतलब वो वानप्रस्थ अवस्था जब हो जाती है तो तो शरीर छूट जाता है। भले शरीर छूट जाता है लेकिन ब्रह्मा की आयु तो साठ साल थोड़े ही गाई जाती है। 100 साल गाई जाती है। तो 40 साल और जोड़े जाते हैं। 40 साल जब जोड़े जाते हैं तो बहुत जन्मों के अंत के भी जन्म का भी अंत साबित हो गया।

तो बहुत जनम के अंत के जन्म के भी अंत में तो आत्मा के बहुत जन्म हुए ना बच्चे। किस आत्मा के बहुत जन्म हुए? हँ? कृष्ण वाली आत्मा के बहुत जन्म हुए या कोई और आत्मा है जिसके बहुत जन्म हुए? कृष्ण वाली आत्मा तो 68-69 में शरीर छोड़ देती है।
(किसी ने कुछ कहा।) हां। आदिनारायण का तो पहला जनम कहेंगे। बहुत जनम नहीं कहेंगे। आत्मा के बहुत जनम के अंत के भी अंत में। तो जरूर उनमें आत्मा अपनी है। इनमें नहीं। उनमें माने किनमें? हँ? उनमें माने लक्ष्मी-नारायण में? (किसी ने कुछ कहा।) प्रजापिता में? हां। उनमें अपनी आत्मा है। फिर उनमें कहके बहुवचन क्यों किया? हँ? उनमें कह के दूर क्यों कर दिया? क्योंकि भविष्य में 76 में वो बात प्रत्यक्ष होती है ना। 100 साल पूरे होते हैं पहले ब्रह्मा की। उनमें अपनी आत्मा है। उनमें इसलिए कि सन् 76 से वो पार्ट ही बदल जाता है। चंद्रमा वाली आत्मा भी प्रवेश कर जाती है। फिर जब मैं उनमें प्रवेश करता हूँ। फिर माना दोबारा। उनमें प्रवेश करता हूँ तो जरूर उनका नाम भी हमको दूसरा रखना होगा। तो क्या नाम पड़ जाता है? हँ? नाम क्या पड़ जाता है फिर 76 के बाद? शिव बाबा कहो, शंकर कहो क्योंकि मिक्स पार्ट हो गया ना। शिव बाबा में भी मिक्स है। शिव अलग आत्मा और बाबा साकार अलग आत्मा। तो उनका बोल दिया। बहुवचन हुआ ना। उनका नाम हमको दूसरा रखना होगा। तो क्या नाम रखा? हँ? हमको। मुझको नहीं कहा। हमको। माना ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ भी शामिल कर दिये। हँ? और उन्होने नाम क्या रख दिया? हँ? उस सारे ग्रुप का नाम रख दिया शंकर पार्टी। उस पार्टी को चलाने वाला फिर कौन हुआ? शंकर। हँ।

तो हमको दूसरा नाम रखना होगा। नहीं तो, हँ, दूसरा नाम नहीं रखा, ये ब्रह्मा आया कहाँ से? हँ? ब्रह्मा का भी कोई बाप होता है कि नहीं होता है? बाप से ही हर बच्चा आता है ना। बाबा ने तो समझाय दिया ना कि शंकर को तो उड़ाय दियो। यानि ऐसे नहीं कि न समझाओ। समझाओ तो। लेकिन उनको ऊँची स्टेज में उडाय दियो। हँ? उड़ाय दियो का मतलब क्या? हँ? गोली से मत मार दियो। क्या कर दियो? हाँ। उड़ाय दियो ऊँची स्टेज में। चित्र पर समझाना जरूर पड़े कि इस द्वारा स्थापना। त्रिमूर्ति के चित्र पर इस माना ब्रह्मा द्वारा स्थापना। और इन द्वारा विनाश। इन कहके बहुवचन क्यों किया? हँ? क्योंकि एक आत्मा नहीं है। दादा लेखराज ब्रह्मा की आत्मा भी पहले शरीर छोड़ती हार्टफेल होकरके फिर सूक्ष्म शरीर धारण करती है फरिश्ता का। फिर जब समझ जाती है, हँ, तो समझने के बाद सहयोगी बन जाती है शंकर का।

तो इन द्वारा विनाश। किन द्वारा विनाश? हँ? राम और कृष्ण दोनों आत्माएं मिलकरके एक हो जाती हैं। उनको तुम कहते हो बापदादा। ऐसे नहीं कि बाबा उड़ाय देते हैं। नहीं। ऐसे मत समझो कि ये ब्रह्मा बाबा उड़ाय देते हैं। नहीं। तो ऐसे समझाओगे तो कभी समझाय नहीं सकोगे कि असली बात क्या है? नहीं। अगर इनको उड़ाय देंगे तो त्रिमूर्ति कहाँ से ले आएंगे? किनको? शंकर को उडाय देंगे तो तीसरी मूर्ति, तीसरी मूर्ति साबित कैसे होगी? इसलिए एक मुरली में तो बताय दिया अगर शंकर को तीसरी मूर्ति नहीं रखेंगे तो त्रिमूर्ति की शोभा ही नहीं होगी। और निराकार बाप को तो रखेंगे कैसे? वो कोई मूर्ति थोड़ेही है। तो त्रिमूर्ति चाहिए। विनाश कैसे होगा त्रिमूर्ति में से शंकर को उड़ाय देंगे तो? तो ऐसे कोई बाबा नहीं बैठ के कहते हैं कि इनको उड़ाय दियो। हँ? इनको उड़ाय दियो। क्या? बाबा ये नहीं कहते कि तुम उड़ाय दियो। नहीं। इनकी बैठकरके समझानी देते हैं। उड़ाय दियो का मतलब? ऊँची स्टेज में उड़ जाते हैं।

A night class dated 24.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the middle of the first page was that at this time you children have understood the picture that there was the rule of these persons in the Golden Age. And there was purity also there. There was peace, happiness as well. And then these persons have also definitely taken rebirth. And it is this one who has taken 84 births. You too must be thinking after listening. You have to explain a lot. You will explain when you think. Yes, it is sure that from where do we start experiencing downfall? Hm? You must be pondering that Lakshmi-Narayan come in the Golden Age. This one has also taken 84 births. What is meant by ‘this one’? Brahma Baba. You must also be thinking. Who? In front of Baba; the ones with whom Baba speaks, it was said for them that you too must be thinking after listening. What do you think? It is because when you think, then it will be easier to explain. You will think that we start experiencing downfall from this one onwards. From which person onwards? Hm? We start experiencing downfall from Krishna onwards. Do you develop attachment in child Krishna? Brother, the 84 births are completed from this one onwards. 'This one' refers to whom? From Brahma Baba onwards.

So, so, this one, this one, this one then becomes tamopradhan after 84 births. What? This one. Who? Brahma Baba becomes tamopradhan when his 84 births are completed. So, at this time this one is indeed tamopradhan. 'This time' refers to which time? At the time when this Vani is being narrated. Hm. Whose degradation (tamopradhaanata) is being discussed? The degradation of Brahma Baba is being discussed. At this time this one is tamopradhan. So, definitely he must have become tamopradhan with different names and forms; this one is to then become very satopradhan. Now, this one, who has become tamopradhan, this Brahma, Dada Lekhraj, how can he become satopradhan? It is because this one also needs someone to teach him, doesn't he? Hm? So, who will teach? Who will tell that you have started experiencing downfall ever since you were born in the Golden Age? Now there cannot be anyone except the Father who can teach this one. Hm? Except which Father? There are two unlimited Fathers. So, which Father will teach this one? Hm? The one who could teach this one as to how you could become satopradhan? Who taught? And how did he become tamopradhan? So, the one who taught him was mentioned to be the Father. So, how does this Father teach this one? Hm? Towards whom was a gesture made by uttering the words 'this one'? Hm?
(Someone said something.) Yes. Father is called Ram. Child is called Krishna. It means that the soul of Krishna has a child-like intellect. The soul of Ram is wise; so it can teach. First it should itself understand and then teach others.

So, only you children know that how this Father teaches this one. Towards whom was a gesture made by uttering the words 'this Father'? Baba makes a gesture towards the picture, doesn't He? So, in which direction was the gesture made?
(Someone said something.) Are Lakshmi and Narayan Fathers? Hm? They are themselves learners; they themselves become Narayan from nar (man) and Lakshmi from naari (woman); so do they become when someone teaches or do they become on their own? Hm? Who will be the Father who teaches the Lakshmi-Narayan in Vishnu lok (abode of Vishnu)? This Father means that a gesture was made towards Shankar in the Trimurti. (Someone said something.) ShivBaba. Yes. This Father teaches this one and only you children know this topic that definitely ShivBaba in this one, this body in the end of the last one of many births, although the name of this one is different at this time. The name is not Krishna from the beginning. He will definitely become sato (pure). Later He enters in this one when he becomes tamopradhan. So, when the Father says that I enter in an old body, I enter in the end of the last one of many births. So, which Father says this? Hm? Father Shiv says that I enter in an old body. In the end of the last one of many births. How many births are 'many births'? 84 births. So, in the end of the 84 births means vaanprasth stage when he attains the age of 60 years. In the end of the last one of many births; in the end of the last birth. It means when that vaanprastha stage is achieved, then the body perishes. Although the body perishes, but the age of Brahma is not known to be 60 years. It is sung to be 100 years. So, 40 more years are added. When 40 years are added, then the end of the last birth of many births is proved.

So, in the end of the last one of many births. So, there are many births of the soul, aren't there children? Which soul gets many births? Hm? Does the soul of Krishna get many births or is there any other soul which gets many births? The soul of Krishna leaves its body in 68-69.
(Someone said something.) Yes. Aadinarayan's (first Narayan’s) birth will be said to be the first birth. It will not be called many births. In the end of the last one of many births. So, they (unmein) definitely have their own soul. Not in this one (inmein). 'Unmein' refers to whom? Hm? Does 'unmein' refers to Lakshmi-Narayan? (Someone said something.) In Prajapita? Yes. He has his own soul. Then why was it made plural by uttering 'unmein' (they)? Hm? Why was it made distant by uttering 'unmein'? It is because that topic is revealed in future in 76, is not it? 100 years of the first Brahma are completed. They have their own soul. It is 'unmein' because that part changes from 76. The soul of the Moon also enters. Again (fir), when I enter in him. ‘Fir’ means again. When I enter in him, then definitely I will have to give him another name. So, what is the name that he gets? Hm? What is the name that he gets after 76? Call him ShivBaba, call him Shankar because it is a mix part, is not it? It is mix in ShivBaba as well. The soul Shiv is different and corporeal Baba is a different soul. So, it was told 'unka' (their). It is plural, is not it? We (humko) will have to give them another name. So, what was the name assigned? Hm? Humko (we). It was not said mujhko (I). It means that Brahmakumar-kumaris were also included. Hm? And what is the name that they coined? Hm? They named that entire group as Shankar Party. Who is the one who runs that party? Shankar. Hm.

So, we will have to give another name. Otherwise, hm, if another name is not assigned, then where did this Brahma come from? Hm? Is there a Father of Brahma as well or not? Every child comes from the Father only, doesn't he? Baba has explained that Shankar can be made to fly away (udaay diyo). It means that it is not as if you should not explain about him. Do explain. But make him fly in a high stage. Hm? What is the meaning of 'udaay diyo'? Hm? Do not kill him by shooting him. What should you do? Yes. Make him fly in a high stage. You will definitely have to explain on the picture that establishment through this one (is dwara). In the picture of Trimurti, 'this one' (is) means establishment through Brahma. And destruction through them (in dwara). Why was it made plural by uttering 'in' (them)? Hm? It is because there is not just one soul involved. The soul of Dada Lekhraj Brahma also leaves its body first by suffering a heart failure and then assumes a subtle body of an angel. Then, when it understands, hm, then after understanding, it becomes helpful to Shankar.

So, destruction through them. Destruction through whom? Hm? The souls of both Ram and Krishna become one. You call them BapDada. It is not as if Baba makes him fly away. No. Do not think as if this Brahma Baba makes him fly away. No. So, if you explain like this, then you will never be able to explain the true thing. No. If you make him fly away (vanish), then where will you bring the Trimurti (three personalities) from? Who? If you make Shankar to fly away (vanish), then how will the third personality be proved? This is why it has been told in a Murli that if you do not keep Shankar as the third personality, then there will not be any beauty in Trimurti at all. And how will you keep the incorporeal Father? He is not a personality. So, Trimurti (three personalities) are required. If you make Shankar to vanish from Trimurti, then how will destruction take place? So, Baba does not sit and say that make this one vanish. Hm? Make this one vanish. What? Baba does not say that you should make him vanish. No. He sits and gives explanation about them. What is meaning of 'udaay diyo'? He flies away in a high stage.

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 30 Jul 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2597, दिनांक 02.08.2018
VCD 2597, Dated 02.08.2018
रात्रि क्लास 24.8.1967
Night Class dated 24.08.1967
VCD-2597-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 17.03-31.30
Time- 17.03-31.30


तो वास्तव में कोई इनका ऐसा पार्ट नहीं है। ऐसा माने जैसा तुम समझते हो कि ये विनाश करवाते हैं, एटम बम फोड़ते हैं। इनका ऐसा पार्ट नहीं है। फिर कैसा पार्ट है? हँ? इनका पार्ट कैसा है? नारियल का पार्ट है। रियल पार्ट नहीं है। पार्ट अगर है तो इन दोनों का है। कौन दोनों? राम और कृष्ण। ब्रह्मा बाबा जो फरिश्ता बन जाते हैं और राम वाली आत्मा। दोनों के स्वभाव-संस्कार मिलकरके एक हो जाते हैं। जिन्हें तुम कहते हो बापदादा। तो इन दोनों का पार्ट है। क्या पार्ट है? विनाश का पार्ट इन दोनों का है। एक प्रत्यक्ष दिखाई पड़ता है। तो जो दिखाई पड़ता है उसका नाम देते हैं। नाम साकार का होता है या आकार का होता है या निराकार का होता है? साकार शरीरधारी का नाम होता है। तो पार्ट दोनों का है। क्या? राम बाप का भी है और इस सृष्टि पर, सृष्टि रूपी रंगमंच पर जो बच्चों के बीच, हँ, बेहद के बाप के बच्चे हैं ना, मनुष्य सृष्टि में, तो उन बच्चों के बीच जो बड़े भाई का पहला-पहला जन्म लेने वाला सतयुग में बच्चा है वो दादा हो गया।

तो बापदादा दोनों का पार्ट है। यहाँ। यहाँ माना इस सृष्टि में। सूक्ष्म वतन में नहीं। ना आत्मलोक की बात है क्योंकि लक्ष्मी-नारायण भी यहाँ। और प्रजापिता ब्रह्मा भी यहाँ। अभी उनका बाकि पार्ट क्या है? लक्ष्मी-नारायण का, प्रजापिता ब्रह्मा का। बाकि ठहरा विनाश। सो विनाश तो जरूर होना ही है ड्रामा के प्लैन अनुसार। 24.8.1967 की रात्रि क्लास का दूसरा पेज। पुरानी दुनिया को खतम करना ही है। नई दुनिया स्थापना हुई? हो गई? अगर नई दुनिया स्थापन हो गई तो पुरानी दुनिया तो जरूर विनाश होनी है। ऐसे थोड़ेही कि पुराना मकान भी बना रहे, हँ, टूटा-फूटा और नई दुनिया भी चलती रहे। नया मकान बन जाता है तो पूरा पुराना मकान तोड़ देते हैं। ऐसे क्यों कहें कि फलाने द्वारा विनाश हुआ? तब ही बाबा समझाने के लिए कहते हैं कि चित्र में तो बाकि रखना है ना जरूर समझाने के लिए कि किसके द्वारा स्थापना, किसके द्वारा विनाश, किसके द्वारा पालना? तो तुम बच्चे भी ऐसे ही समझो। समझ तो सकते हो ना कि ये ब्रह्मा कहाँ से आया? हँ? कहाँ से आया? तो जरूर बहुत जन्म के अंत के जनम में जब प्रवेश करते है जिस तन में उसको अपनी आत्मा है, उसका नाम दिया ब्रह्मा।

तो ये जरूर ये जो प्रवेश करेगा तो उनमें दो आत्माएं जरूर प्रवेश करेंगी। हँ? दो आत्माएं कौन-कौन? शिवबाबा कि शिव बाप? शिव बाप और ब्रह्मा बाबा। तो देखो, दो आत्माएं बरोबर प्रवेश हैं ना बच्चे। किसमें? शंकर में। क्या प्रूफ? चित्र बताय रहे हैं बाबा दिखाय रहे हैं चित्र में। हाँ, चित्र में दिखाते हैं ना। भक्तिमार्ग में भी चित्र बनाते हैं तो दिखाते हैं मस्तक में चन्द्रमा भी है। हँ? और? और शिव नेत्र भी है। तो शिव बाप भी है आत्माओं का बाप। और मनुष्य आत्माओं में जो सबसे बड़ा बच्चा है पहले-पहले इस सृष्टि पे जन्म लेने वाला वो बच्चा भी है। हँ।

तो अभी दो आत्माएं प्रवेश। अभी माने? हँ? वो ही संगमयुग की बात बताई। दो आत्माओं का प्रवेश चाहिए भी। ब्रह्मा का नाम जरूर चाहिए। क्योंकि ज्ञान चन्द्रमा ब्रह्मा हुआ ना। तो ज़रूर ब्रह्मा का नाम रखेगा। हँ? क्या नाम रखेगा? ज्ञान चन्द्रमा। उस पुराने तन में, क्योंकि पुराने तन का असुल ब्रह्मा। ये नाम पुराने तन का नहीं है। ओम मण्डली का पुराने ते पुराना तन कौनसा है? हँ? प्रजापिता ब्रह्मा। तो पुराने तन का, पुराने तन में, ये ब्रह्मा नाम नहीं है। क्या नाम है? हँ? वो तो बड़े ते बड़ा ब्रह्मा हो गया ना पहला-पहला। तो उसका नाम हुआ परमब्रह्म। किसका? प्रजापिता ब्रह्मा का। है ना? तो उनको जरूर रखना पड़े। किनको? हँ? ब्रह्मा को भी रखना पड़े त्रिमूर्ति में और शंकर को भी रखना पड़े।

अभी तुम बच्चों को तो निश्चय है ना। तुम बच्चों को। इनको निश्चय है बाजू वालों को, ब्रह्मा को और इनके फालोअर्स हो ये कोई पक्का नहीं है। सबको निश्चय है कि बरोबर हमें बाप द्वारा वर्सा मिलता है। और हम ब्राह्मण-ब्राह्मणियाँ हैं। हँ? पहला-पहला ऊँच ते ऊँच वर्सा किसको मिलता है? देवताओं को या ब्राह्मण-ब्राह्मणियों को या क्षत्रीयों को? हँ? ऊँच ते ऊँच वर्सा मिलता है ब्राह्मणों को। क्योंकि ब्राह्मण चोटी हैं ना। हँ? विराट रूप में सबसे ऊपर क्या? चोटी। परन्तु वो तो दिखाई ही नहीं गई है विराट रूप में भक्तिमार्ग में। भक्तिमार्ग में चोटी क्यों नहीं दिखाते? हँ? क्योंकि कलप पूर्व की बात है ना। जब सतयुगी सृष्टि शुरू हुई तो उससे पहले बड़ा भारी विनाश हो गया था। इतना बड़ा विनाश कभी सृष्टि में होता ही नहीं। उसको कहते हैं कल्पांत। पूरे कल्प का, चतुर्युगी का अंत हो जाता है। तो वो बात किसी को याद ही नहीं है। हँ? वो बात किसी को याद नहीं।

इस समय तो शरीर ही सबके खलास हो जाते हैं। तो ब्राह्मण-ब्राह्मणियाँ हैं जिनको ऊँच ते ऊँच वर्सा मिलता है। किसके द्वारा? बताओ। नई दुनिया की स्थापना होती है नई ते नई। सबसे नई दुनिया। हँ? इसे क्या कहते हैं? विष्णु लोक। वैकुण्ठ लोक। पैराडाइज़। कहते हैं ना। तो वो वर्सा किसके दवारा मिलता है? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) शिवबाबा द्वारा। शिवबाबा द्वारा है? बाप वर्सा देता है? बाप माँ को बीच में रखता है। माँ के द्वारा वर्सा देता है। नारायण कोई माँ है क्या? हँ? ब्रह्मा द्वारा वर्सा। नई दुनिया की स्थापना किसके द्वारा? ब्रह्मा द्वारा। तो ब्रह्मा ने तो शरीर छोड़ दिया। लो, चुप। अरे भले शरीर छोड़ दिया, हँ, (किसी ने कुछ कहा।) जगदम्बा द्वारा। जगदम्बा से सारी दुनिया को नंबरवार वर्सा मिलता है। क्या? क्या कहा? गई छोटी मम्मी। ये क्या हुआ? दुनिया पलट गई। जगदम्बा द्वारा सारी दुनिया को वर्सा, पहले भी बताया था। (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, हाँ, राज करेगा खालसा। वो तो करेगा। जब करेगा तो सबको, जबकि उनके ऊपर राज करेगा तो उनको नंबरवार पद भी तो देगा। कोई बड़ा अधिकारी, कोई छोटा अधिकारी।

तो बाप द्वारा वर्सा मिलता। पहले भी बताया था। क्या बताया था? शिवबाबा से वर्सा मिलता है प्रजापिता को। प्रजापिता से मिलता है जगदम्बा को। और जगदम्बा फिर सारी दुनिया को वर्सा देती है नंबरवार। अरे, प्रश्न दिमाग में आते हैं तो लिख लो डायरी में। फिर बाद में पूछ लो। और हम ब्राह्मण-ब्राह्मणियाँ हैं। और ब्रह्मा गाया हुआ है कि ब्रह्मा द्वारा नई दुनिया की स्थापना। ये ब्रह्मा तो शरीर छोड़ देते हैं। हार्ट फेल हो गया तो शरीर छूट गया। अब वही ब्रह्मा कहाँ से आएगा? ये ही सूक्ष्म शरीरधारी ब्रह्मा जिस साकार शरीरधारी में प्रवेश करता है, हँ, जिसके मस्तक पर चन्द्रमा दिखाया जाता है। किसके मस्तक पे दिखाते हैं? हँ? जगदम्बा के मस्तक पर, महाकाली ले मस्तक पर चन्द्रमा दिखाते हैं। तो वो ही चन्द्रमा साकार रूप में ज्ञान चन्द्रमा ब्रह्मा हुआ ना। उसके द्वारा तुम बच्चों को नंबरवार वर्सा मिलता है। ओमशान्ति।

So, actually, their part is not like this. 'Like this' means that just as you think that this one causes destruction, explodes atom bombs, his part is not like this. Then what kind of a part does he have? Hm? What kind of a part does he have? His part is that of a coconut (naariyal). The part is not real. If there is a part, it is of both of them. Who both? Ram and Krishna. Brahma Baba, who becomes an angel and the soul of Ram. The natures and sanskars of both of them merge to be one. You call them BapDada. So, it is a part of both of them. What is the part? The part of destruction is played by both of them. One appears revealed (pratyaksh). So, the one who is visible is named. Does a corporeal person have a name or does a subtle body has a name or does the incorporeal have a name? The corporeal bodily being has a name. So, it is a part of both of them. What? It is a part of the Father Ram also and in this world, on this world stage, among the children, hm, there are unlimited children in the human world, aren't there? So, among those children, the child who gets the first birth in the Golden Age in the form of eldest brother is Dada.

So, both play the part of BapDada. Here. Here means in this world. Not in the Subtle Region. Nor is it the topic of the Soul World because the Lakshmi and Narayan are also here. And Prajapita Brahma is also here. What is their part now? Of Lakshmi-Narayan, of Prajapita Brahma. As regards destruction, that destruction is bound to happen as per the drama plan. Second page of the night class dated 24.8.1967. The old world has to be finished. Has the new world been established? Has it been established? If the new world has been established, then the old world is bound to be destroyed. It is not as if the old house is also standing in a dilapidated condition and the new world also continues. When the construction of the new house is completed, then the old house is destroyed. Why should we say that destruction took place through a particular person? Only then does Baba tell regarding explanation that you should certainly keep [the picture of Shankar] to explain on the picture that through whom does establishment take place, through whom does destruction take place and through whom does sustenance take place. So, you children should also think like this. You can understand that where did this Brahma come from? Hm? Where did he come from? So, definitely when He enters in the last one of the many births, the body in which He enters has its own soul; that soul was named Brahma.

So, definitely when the entry takes place, then two souls will definitely enter in them. Hm? Which two souls? ShivBaba or Father Shiv? Father Shiv and Brahma Baba. So, look, two souls have definitely entered, haven't they children? In whom? In Shankar. Which proof? The pictures are speaking; Baba is showing in the picture. Yes, it is shown in the picture, is not it? When pictures are prepared on the path of Bhakti as well, then it is shown that there is the Moon also on the forehead. Hm? And? And there is the Shiv netra (Shiva's eye) as well. So, there is Father Shiv, the Father of souls also. And the eldest child among the human souls, the one who gets first and foremost birth in this world is also there. Hm.

So, two souls have entered now. Now refers to which time? Hm? The same topic of the Confluence Age was mentioned. The entry of two souls is also required. Name of Brahma is definitely required because the Moon of knowledge is Brahma, is not he? So, definitely Brahma will be named first. Hm? What will he be named? The Moon of knowledge. In that old body because the true Brahma of the old body. This name does not belong to the old body. Which is the oldest body of Om Mandali? Hm? Prajapita Brahma. So, the old body does not have this name Brahma. What is the name? Hm? He is the first and foremost biggest Brahma, is not he? So, his name is Parambrahm. Whose? Of Prajapita Brahma. is not it? So, he will definitely have to be kept. Who? Hm? Brahma will also have to be kept in Trimurti and Shankar will also have to be kept.

Now you children have developed faith, haven't you? You children. These adjacent ones have faith; it is not sure if Brahma and his followers have [faith]. Everyone has faith that we definitely get inheritance through the Father. And we are Brahmins and Brahmanis. Hm? Who gets the first and foremost highest inheritance? Is it the deities or the Brahmins and Brahmanis or the Kshatriyas? Hm? The Brahmins get the highest on high inheritance because Brahmins are the chotii, aren't they? Hm? What is at the top in the Viraat Roop (Gigantic form of Vishnu)? Choti (the hairlock at the peak of the head). But it has not been shown at all in the Gigantic form on the path of Bhakti. Why is not the choti depicted on the path of Bhakti? Hm? It is because it is a topic of the Kalpa ago, is not it? When the Golden Age world had started, then before that a huge destruction had taken place. Such huge destruction never takes place in the world [before that] at all. That is called the end of the Kalpa [cycle of 5000 years]. The entire Kalpa, the entire Chaturyugi (the cycle of four Ages) ends. So, nobody remembers that topic at all. Hm? Nobody remembers that topic.

At this time, everyone's body is going to perish. So, it is the Brahmins and Brahmanis who get the highest on high inheritance. Through whom? Speak up. The newest new world is established. The newest world. Hm? What is it called? Vishnu lok (abode of Vishnu). Vaikunth lok (heavenly abode). Paradise. It is called, is not it? So, through whom is that inheritance received? Hm?
(Someone said something.) Through ShivBaba. Is it through ShivBaba? Does the Father give inheritance? The Father keeps the Mother in between [as a mediator]. He gives inheritance through the mother. Is Narayan a mother? Hm? Inheritance through Brahma. Through whom is the new world established? Through Brahma. So, Brahma has left his body. Look, silence. Arey, although he left his body, hm, (someone said something.) Through Jagdamba. The entire world gets numberwise inheritance through Jagdamba. What? What has been said? The junior mother has gone. What is this? The world turned over. Inheritance to the entire world through Jagdamba; it was told in the past as well. (Someone said something.) Yes, yes, raaj karega khaalsaa (the pure one shall rule). He will do. When he does, when he rules over them, then he will also give numberwise post. Someone will be a big officer, someone will be a small officer.

So, you get inheritance through the Father. It was told in the past as well. What had been told? Prajapita gets inheritance from ShivBaba. Jagdamba gets [inheritance] from Prajapita. And then Jagdamba gives inheritance to the entire world numberwise. Arey, when questions emerge in your mind, write them in a diary. Then ask later on. And we are Brahmins and Brahmanis. And Brahma is well known that the establishment of new world through Brahma. This Brahma leaves his body. When he suffered heart failure, then the body perished. Now where will the same Brahma come from? The corporeal bodily being in whom the same subtle bodied Brahma enters, hm, on whose forehead the Moon is displayed. On whose forehead is it displayed? Hm? The Moon is displayed on the forehead of Jagdamba, on the forehead of Mahakali. So, the same Moon is the Moon of knowledge, Brahma in corporeal form, isn’t he? Through him you children get numberwise inheritance. Om Shanti.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 01 Aug 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2598, दिनांक 03.08.2018
VCD 2598, Dated 03.08.2018
रात्रि क्लास 24.8.1967
Night Class dated 24.8.1967
VCD-2598-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-22.30
Time- 00.01-22.30


रात्रि क्लास चल रहा था - 24.8.1967. दूसरे पेज के मध्यादि में बात चल रही थी ब्रह्मा के बारे में। बताया गया - पुराना ब्रह्मा। पुराना तन का असुल नाम ब्रह्मा नहीं है। पुराना तन कौनसा? हँ? और फिर उसका असुल नाम क्या है? ब्रह्मा नहीं है असुल नाम तो ब्रह्मा नामधारी इनको जरूर रखना पड़े। परमब्रह्म नाम है पुराने तन का। तो फिर इनको ब्रह्मा नाम रख दिया। अभी तुम बच्चों को निश्चय तो है ना। सबको निश्चय है कि बरोबर हमें बाप द्वारा वर्सा मिलता है। और हम ब्राह्मण-ब्राह्मणियाँ हैं। और ब्रह्मा गाया हुआ है। ब्रह्मा के बच्चे ब्राह्मण-ब्राह्मणियाँ। तो जबकि अभी सभी इतने ब्राह्मण और ब्राह्मणियाँ हैं और कोई भी तुम्हारे से पूछे कि तुमको क्या मिलता है यहाँ जाने से? तुम जाती कहाँ हो? यहाँ जाके तुम क्या लेती हो? तो तुम कहेंगे हम जाते हैं बाबा से विश्व की बादशाही लेने। हँ? बाबा से विश्व की बादशाही लेने? कौनसे बाबा से विश्व की बादशाही मिलती है? हँ? शिवबाबा से? तो पूछा किससे गया? हँ? और जवाब देने वाला दे रहा है ना जिससे पूछा गया कि हम बाबा से विश्व की बादशाही लेने जाते हैं। तो क्या ये सही बात है? हँ? सही बात है? पुराने तन की बात हो रही है या नए तन की बात हो रही है ब्रह्मा नामधारी? (किसी ने कुछ कहा।) पुराने तन की बात हो रही है?

कोई भी तुम्हारे से पूछे कि तुमको क्या मिलता है, कहाँ जाती हो, यहाँ क्या जाकरके लेते हो, तो तुम कहेंगे हम बाबा से विश्व की बादशाही लेने जाते हैं क्योंकि हम विश्व के बादशाह थे, मालिक थे। कौन? किसने जवाब दिया? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) प्रजापिता ने जवाब दिया? अच्छा? प्रजापिता पढ़ता था सडसठ में? और प्रजापिता से कैसे पूछेंगे दुनिया वाले तुम कहाँ जाते हो? हँ? क्या जाके लेते हो? दुनियावाले पूछ पाएंगे उससे?
(किसी ने कुछ कहा।) इमर्ज करके बाबा बोलते हैं उससे। फिर? हँ? फिर? गुत्थी सुलझाओ। माना कोई ब्रह्माकुमारी है जिसको बाबा कहते हैं तुम। क्या? कोई न कोई ब्रह्माकुमारी है ना जिसके लिए बोला – सोमनाथ मन्दिर है तो सोमनाथ में सोमनाथनी भी होगी। (किसी ने कुछ कहा।) लक्ष्मी, हाँ। विश्व की बादशाही लेने जाते हैं। तो क्या ये सही बात है या झूठ बात है? सही बात है। और बाबा से विश्व की बादशाही लेने जाते हैं। लेने। क्या? देने के लिए नहीं। किसलिए जाते हैं? लेने के लिए। अच्छा? लेओगे फिर देओगे नहीं किसी को? हँ? देओगे? (किसी ने कुछ कहा।) अच्छा, विश्व की बादशाही? हँ? विश्व की बादशाही लक्ष्मी देगी? हँ? क्योंकि हम विश्व के बादशाह थे, मालिक थे। भारत विश्व का मालिक था। क्या? कौन था? भारत। माता या पिता? कौन मालिक था? पिता विश्व का मालिक था। तो अब नहीं है। तो हम फिर विश्व का मालिक बनते हैं। क्योंकि हमने 84 जनम पूरा करके अभी हम फिर शुरु करते हैं पहले जनम से।

तो ये बात भी समझाय सकते हैं ना। और बोर्ड में भी लगवाय सकते हैं कि विश्व का, विश्व की दैवी बादशाही मिल रही है। या बाप द्वारा विश्व की बादशाही मिल रही है। दैवी राज्य का वर्सा मिल रहा है। ऐसा कुछ बनाय करकरके फिर बोर्ड भी लिख सकते हो। या ये कि हम अभी विश्व के फिर से देवी-देवता यानि लक्ष्मी-नारायण पद पाय रहे हैं। क्योंकि राजयोग सीख रहे हैं। ये भारत का राजयोग तो बहुत मशहूर है ना सारी दुनिया में। तो राजयोग से बादशाही मिलती है। और तो कोई पढ़ाई है नहीं दुनिया में। न किसी ने पढ़ाई है कि कोई बादशाही देवे, जन्म-जन्मान्तर की राजाई देवे। तो हम राजयोग सीख रहे हैं बादशाही के लिए।

तो ऐसा एक चित्र या बोर्ड बनावें। उस पर भी बैठकरके बहुत समझाया जा सकता है। और इन लक्ष्मी-नारायण की 84 जन्मों की जीवन कहानी भी बताय सकते हैं। और इनके जनम भी 84 बैठ करके समझाना पड़े। तो 84 जन्म के बाद ये फिर भी आएंगे जरूर ना। पहले जनम की विश्व की बादशाही लेने। ये तो चक्कर है दुनिया का। ये चक्कर घूमता रहता है। जनम भी बैठ करके समझाना तो 84 जन्मों के बाद ये पढ़ेंगे भी। जरूर पढ़ेंगे। क्या पढ़ेंगे? राजयोग की पढ़ाई पढ़ेंगे। पढ़ते भी हैं जरूर ब्रह्मा द्वारा। क्या? कौन? कौन पढ़ते हैं? कौन पढ़ते हैं ब्रह्मा द्वारा? हँ? इतनी सी। अरे! विश्व की बादशाही की बात हो रही है। वो एक हुआ कि सारे ही होंगे? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) विश्व की बादशाही लेने वाले। एक्जेक्ट नाम नहीं बताएंगे। पढ़ते भी हैं जरूर ब्रह्मा द्वारा। (किसी ने कुछ कहा।) हँ? लक्ष्मी पढ़ती है? अच्छा? नारायण नहीं पढ़ता ब्रह्मा द्वारा? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) परमब्रह्म के द्वारा पढ़ते हैं? अभी कहाँ धरा परमब्रह्म जो पढ़ेंगे? (किसी ने कुछ कहा।) राम बाप के द्वारा पढ़ रहे हैं? कि पढ़ने वाला राम बाप है? राम बाप बेसिक में आता है कि नहीं ब्रह्मा से पढ़ाई पढ़ने? लक्ष्मी-नारायण, दोनों की बात हुई ना।

तो बाप रथ द्वारा ही पढ़ाते हैं। क्या? कोई न कोई रथ तो ज़रूर चाहिए। तो तुम बच्चों को ये प्वाइंट्स अच्छी तरह बुद्धि में है कि जब बैठते हो और समझते हो। समझते हो ना। है तो बहुत ईजी समझाने के लिए। तो एक दिन आएगा जरूर जो ये समझाएंगे। हो सकता है यहाँ भी कोई समय में ये क्या कहते हैं म्यूजियम खुल जाए। और समय प्रति समय बच्चों को भेज देना पड़े – जाओ। तुम भी जाकरके ट्रायल करो समझाने के लिए। जाकरके कुछ समझाओ। कभी किसको समझाने के लिए भेज देवेंगे, कभी किसको भेज देवेंगे। तो हो सकता है। ऐसे नहीं कि नहीं हो सकता है। हाँ, अगर कोई पुरुषार्थ करे तो यहाँ जल्दी हो सकता है म्यूजियम के मुकाबले। क्यों? यहाँ जल्दी क्यों हो सकता है? हँ? और सभी जगहों से भी यहाँ जल्दी हो सकता है। क्यों हो सकता है? क्योंकि पढ़ाने वाला सामने मौजूद है। राजयोग की पढ़ाई पढ़ाने वाला सामने मौजूद है ना। हँ? कौन? ब्रह्मा है पढ़ाई पढ़ाने वाला या शिवबाबा? हँ? शिवबाबा है ना। तो यहाँ जल्दी हो सकता है। परन्तु यहाँ पुरुषार्थ करने वाला कोई है ही नहीं। धत् तेरा भला हो। 67 में विश्व की बादशाही लेने वाला, पुरुषार्थ करने वाला कोई था ही नहीं? हँ? था या नहीं था?
(किसी ने कुछ कहा।) था? कौन था? उसको ज्यादा मालूम होगा। (बाबा हंसे।) कौन था विश्व की बादशाही लेने वाला? (किसी ने कुछ कहा।) लक्ष्मी थी? वो विश्व की बादशाही लेती है? तो देती है किसी को? तो किससे लेती है? अरे, मूल चीज़ को पकड़ना चाहिए ना। हँ?

यहाँ पुरुषार्थ करने वाला कोई है ही नहीं विश्व की बादशाही लेने के लिए। कबकी बात? 67 की बात है। 67 में तो कोई था ही नहीं। तो फिर? 67 में नहीं था, इसका मतलब आगे आने वाला है। ब्रह्मा ने तो शरीर छोड़ दिया। पढ़ेगा किससे? हँ? किससे पढ़ाई पढ़ेगा? भले शरीर छोड़ दिया लेकिन शिव बाप कहाँ धरे थे 68 के बाद? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ। प्रजापिता से खुद ही? यहाँ आना पड़े। कहाँ आना पड़े? ब्रह्मा के दरबार में आना पड़े। दादा लेखराज का दरबारी था ना शरीर छोड़ने के बाद भी। किसका कहा जाएगा? तो पुरुषार्थ करने वाला अभी यहाँ कोई है नहीं। भले पुराने भी बहुत हैं। देखो, ये विश्व रतन दादा। कहते हैं ना इसे दादा। ये भी पुराना है। पर इनमें भी इतना तो है नहीं पुरुषार्थ का लगाव। कोई से बातचीत करकरके या ढूंढकरके ले आवे। अब न यहाँ कोई ऐसी माइयाँ हैं। क्या कहा? कहाँ की? माउंट आबू की। सन् 67 में। माइयों में चाहे मनमोहिनी दीदी हों, चाहे कुमारका दादी हों। ऐसी कोई माइयाँ नहीं हैं जो पुरुषार्थ करके जाके जांच करें तो कोई जगह मिलती है। नहीं तो ये चक्कर लगाती रहती हैं कि भई जांच करें कोई अच्छा। बाबा कहते रहते हैं कोई सेन्टर के लिए जांच करें। ऐसे भी कोई नहीं हैं। ऐसा कोई पुरुषार्थी ही नहीं है माउंट आबू में सन् 67 में। फिर समझते हैं कि पता नहीं ड्रामा में हैं या नहीं हैं? ऐसा हैंड कोई मिलेगा या नहीं मिलेगा? शायद कोई एक दिन जरूर निकल पड़ेगा। कैसा? हँ? कोई हैंड यहाँ आकरके जांच करेंगे। हँ? कि यहाँ क्या वास्तव में विश्व की बादशाही लेने की पढ़ाई पढ़ाई जाती है?

यहाँ जांच करके जमीनें भी ली जा सकती हैं। ली जा सकती हैं या पुराना किसी का हो तो लेकरके नया भी बनाय सकते हैं। क्या? यहाँ होना भी जरूर है। क्योंकि तुम हैं अभी चैतन्य दिलवाड़े। वो जड़ दिलवाड़ा मन्दिर है जड़ मूर्तियों का। वो यादगार, यादगार है। और तुम? तुम असली हो। वाह भई। ऐसा कोई पुरुषार्थी है भी नहीं और तुम दिलवाड़ा मन्दिर की मूर्ति हो गए! ये कैसे?
(किसी ने कुछ कहा।) अरे, हाँ। इमर्ज करके? माने लक्ष्मी नहीं थी उस समय? वो दिलवाड़ा मन्दिर की देवी नहीं है? (किसी ने कुछ कहा।) भविष्य की बात है? चलो। दिलवाड़ा अभी मन्दिर तो नहीं कहेंगे। क्योंकि ये तो चैतन्य दिलवाड़ा हुआ ना। ये तो चैतन्य दिलवाले हैं। इसको यूनीवर्सिटी कहेंगे। कैसी यूनीवर्सिटी? एक-एक की दिल लेने वाली यूनीवर्सिटी। कि विश्व की बादशाही लेने की दिल है? कि छोटी-मोटी बादशाही मिल जाए वो ही काफी है? अरे, कहाँ इतनी मुसीबत में पड़ेंगे? हँ? क्योंकि कॉलेज, स्कूल, वगैरा जो होते हैं, तो दिल लेने वाले हैं क्योंकि शिक्षा देते हैं कमाई के लिए। तो ये दिल लेने वाली यूनीवर्सिटी है।

और ये बैरिस्टर भी दिल लेने वाला ठहरा। हँ? किसको बैरिस्टर बताय दिया? क्योंकि दिल से पढ़ाते हैं। किसको बताया बैरिस्टर? जो दिल से पढ़ाते हैं। प्रजापिता कहाँ धरा था उस समय 67 में?
(किसी ने कुछ कहा।) हँ? लक्ष्मी को बैरिस्टर बताया? अच्छा? वो पढ़ाते हैं? कि पढ़ने वाली थी उस समय? क्योंकि पढ़ाते हैं दिल से। कौन? ब्रह्मा बाबा। (किसी ने कुछ कहा।) हँ? ब्रह्मा बाप? ब्रह्मा बाबा दिल से पढ़ाते हैं। वो पढ़ाय नहीं सकते क्या? दिल है शिवबाबा को? शिवबाबा को तो दिल ही नहीं है। तो दिल से कहाँ से पढ़ाएगा? तो ये है दिलवाड़ा मन्दिर। क्या? बैरिस्टर कैसे? वाह भई। दिल से नहीं पढाते? जो भी शिवबाबा बोलते हैं, वो सारी बोली हुई बातें दिल से नहीं पढ़ाते? हँ? दिल लगा के नहीं काम कर रहे हैं? फिर? तो ये भी है। ‘भी’ क्यों लगा दिया? ये भी है दिलवाड़ा मन्दिर। ये। ‘ये’ माने कौन? कौन? हँ? ब्रह्मा बाबा। ये भी दिलवाड़ा मन्दिर है। ‘भी’ क्यों लगा दिया? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ। इससे पहले कोई और भी हो चुका है। जो दिल लगाके पढ़ाई पढ़ाता था। परमब्रह्म। हाँ(क्रमशः)

A night class dated 24.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the second page was about Brahma. It was told – Old Brahma. The actual name of the old body is not Brahma. Which is the old body? Hm? And then what is his actual name? If Brahma is not the actual name, then he will definitely have to be named a Brahma. The name of the old body is Parambrahm. So, then this one was named Brahma. Now you children have faith, don’t you? Everyone has faith that definitely we get inheritance through the Father. And we are Brahmins and Brahmanis. And Brahma is well-known. Children of Brahma are Brahmins and Brahmanis. So, while there are so many Brahmins and Brahmanis at this time and if anyone asks you as to what you get by going here? Where do you go? What do you get by going here? So, you will say – We go to obtain the emperorship of the world from Baba. Hm? To obtain emperorship of the world from Baba? From which Baba do you get the emperorship of the world? Hm? From Shivbaab? So, who was asked? Hm? And the answerer, who is being asked is answering that we go to obtain emperorship of the world from Baba. So, is this correct? Hm? Is this correct? Is the old body being discussed or is the new body named Brahma being discussed? (Someone said something.) Is the old body being discussed?

If anyone asks you as to what you get, where you go, what do you obtain by going here, then you will say – we go to obtain emperorship of the world from Baba because we were emperors, masters of the world. Who? Who replied? Hm?
(Someone said something.) Did Prajapita reply? Achcha? Did Prajapita used to study in sixty seven? And how will the people of the world ask Prajapita as to where do you go? Hm? What do you obtain by going [there]? Will the people of the world be able to ask him? (Someone said something.) Does Baba cause him to emerge and speak to him? Then? Hm? Then? Solve the puzzle. It means that there is a Brahmakumari whom Baba says ‘you’. What? There is one or the other Brahmakumari for whom it was told – When there is a temple of Somnath, then there will also be a Somnathini. (Someone said something.) Lakshmi, yes. We go to obtain the emperorship of the world. So, is this true or false? It is true. And we go to obtain the emperorship of the world from Baba. To obtain. What? Not to give. Why do you go? To obtain. Achcha? If you obtain, then will you not give to anyone? Hm? Will you give? (Someone said something.) Achcha, emperorship of the world? Hm? Will Lakshmi give the emperorship of the world? Hm? It is because we were emperors, masters of the world. Bhaarat was the master of the world. What? Who? Bhaarat. Mother or Father? Who was the master? The Father was the master of the world. So, he isn’t now. So, we become the masters of the world once again because we have completed 84 births and now we start once again from the first birth.

So, you can also explain this topic, can’t you? And you can also display on the board that you are getting the emperorship of the world, the divine emperorship of the world. Or that we are getting the emperorship of the world through the Father. We are getting the inheritance of the divine kingdom. You can make some such thing and then you can also write on the board. Or that we are now once again obtaining the post of deities, i.e. Lakshmi and Narayan of the world because we are learning rajyog. This rajyog of India is very famous in the entire world, isn’t it? So, you get emperorship through rajyog. There is no other teaching in the world. Nor has anyone taught to give emperorship, kingship for many births. So, we are learning rajyog for emperorship.

So, we should prepare such a picture or board. You can sit and explain on that also. And you can also tell the life story of 84 births of these Lakshmi and Narayan. And you will also have to explain about their 84 births. So, after 84 births, they will definitely come again, in order to obtain the emperorship of the first birth will they not? This is the cycle of the world. This cycle keeps on rotating. You should also explain about their births that they will also study after 84 births. They will definitely study. What will they study? They will study the knowledge of Rajyog. They definitely study through Brahma. What? Who? Who studies? Who studies through Brahma? Hm? So little! Arey! The topic of the emperorship of the world is being discussed. Will that be one or will everyone be that? Hm?
(Someone said something.) Those who obtain the emperorship of the world? You don’t reveal the exact name. You definitely study through Brahma. (Someone said something.) Hm? Does Lakshmi study? Achcha? Doesn’t Narayan study through Brahma? Hm? (Someone said something.) Does He teach through Parambrahm? Where is Parambrahm now so that you could study? (Someone said something.) Are you studying through Father Ram? Or is the Father Ram student? Does Father Ram come in basic [knowledge] or not to study knowledge from Brahma? It is a topic of Lakshmi as well as Narayan, isn’t it?

So, the Father teaches through the Chariot only. What? One or the other Chariot is definitely required. So, these points are nicely in the intellect of you children that when you sit and understand; you understand, don’t you? It is very easy to explain. So, a day will definitely come when you will explain this. It is possible that at one point of time a museum may also be opened here as well. And children will have to be sent from time to time – Go. You too go and make trials of explaining. Go and explain something. Sometimes someone will be sent and sometime else someone else will be sent. So, it is possible. It is not that it is not possible. Yes, if anyone makes purusharth, then it can happen quickly here when compared to the museum. Why? Why can it happen soon here? Hm? It can happen here sooner than other places. Why can it happen? It is because the teacher is present in front of you. The one who teaches rajyog is present in front of you, isn’t He? Hm? Who? Is Brahma the teacher or is it ShivBaba? Hm? It is ShivBaba, isn’t He? So, it can happen sooner here. But there is nobody who can make purusharth here at all. Damn, be blessed. Was there nobody in 67 who could obtain the emperorship of the world or could make purusharth? Hm? Was there anyone or wasn’t there?
(Someone said something.) Was there anyone? Who was it? That person must be more knowledgeable. (Baba laughed.) Who was the one who could obtain the emperorship of the world? (Someone said something.) Was it Lakshmi? Does she obtain the emperorship of the world? So, does she give to anyone? So, from whom does she obtain? Arey, you should catch the original thing, shouldn’t you? Hm?

There is no one to enable you to make purusharth to obtain the emperorship of the world. It is about which time? It is about 67. There was nobody at all in 67. So, then? There was nobody in 67. It means that he is going to come in future. Brahma left his body. From whom will he study? Hm? From whom will he study the knowledge? Although he left his body, but where was Father Shiv after 68? Hm?
(Someone said something.) Yes. From Prajapita himself? He will have to come here. Where will he have to come? He will have to come to the court of Brahma. He was the courtier of Dada Lekhraj even after leaving his body, wasn’t he? He would be said to belong to whom? So, there is nobody to enable you to make purusharth here now. Although there are many old ones also. Look, this Vishwa Ratan Dada. He is called Dada, isn’t he? This one is also old. But even in him, there is no affinity for purusharth to that extent. He should talk to someone and search and bring. Now there are no such ladies (maaiyaan). What has been said? Of which place? Of Mount Abu. In 1967. Be it Manmohini Didi, be it Kumarika Dadi among the ladies. There are no such ladies who could make purusharth and go and check whether we can get any place (land). Otherwise they keep on touring. They could search for a nice one. Baba keeps on telling that someone should search for a center. There are no such persons. There is no such purusharthi at all in Mount Abu in 67. Then I doubt whether it is fixed in the drama or not? Whether we will get such a hand or not? Perhaps someone will emerge one day. Of what kind? Hm? A hand may come here and search, hm, that whether knowledge is actually taught here for obtaining the emperorship of the world.

You can search here and purchase lands as well. You can purchase or you can take over an old one belonging to someone and renovate it. What? It is bound to happen here because you are now the living Dilwara. That non-living Dilwara temple is of non-living idols. That is a memorial, a memorial. And you? You are the true ones. Wow brother! There is no such purusharthi and you became the idol of Dilwara temple. How is this possible?
(Someone said something.) Arey, yes. By causing someone to emerge? Does it mean that Lakshmi wasn’t there at that time? Is she not a Devi (female deity) of the Dilwara temple? (Someone said something.) Is it a topic of the future? Okay. It will not be called a Dilwara temple now because this is a living Dilwara, isn’t it? These are living Dilwaaleys (ones with heart). This will be called a University. What kind of a University? A University that wins the heart of each and everyone. Do you have the heart to obtain the emperorship of the world? Or is it enough if you get a small and sundry emperorship? Arey, why should I take so much trouble? Hm? It is because the colleges, schools, etc. win hearts because they give teachings for income. So, this is a University that wins hearts.

And this Barrister also wins hearts. Hm? Who was described as a Barrister? It is because he teaches from his heart. Who was described as a Barrister? The one who teaches from his heart. Was Prajapita present at that time in 67?
(Someone said something.) Hm? Was Lakshmi described as a Barrister? Achcha? Does she teach? Or was she a student at that time? It is because he teaches from his heart. Who? Brahma Baba. (Someone said something.) Hm? Father Brahma? Brahma Baba teaches from his heart. Can’t he teach? Does ShivBaba have a heart? ShivBaba does not have a heart at all. So, how will He teach from his heart? So, this is Dilwara temple. What? How is he a Barrister? Wow brother! Does he not teach from his heart? Whatever ShivBaba speaks, does He not teach all those topics from his heart? Hm? Is he not working from his heart? Then? So, this one is also there. Why was ‘also’ added? This one is also a Dilwara Temple. This one (ye). Ye refers to whom? Who? Hm? Brahma Baba. This one is also a Dilwara temple. Why was ‘also’ added? (Someone said something.) Yes. There has been someone else also who used to teach from his heart. Parambrahm. Yes. (Continued)
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 02 Aug 2020

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समय- 22.31-38.46
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24.8.1967 की रात्रि क्लास का तीसरा पेज। क्या होता है कि शिवबाबा ब्रह्मा द्वारा पढ़ाते हैं। अभी तो किसको भी बताय सकते हो कि हम इस समय में जो सर्विस कर रहे हैं उसका यादगार मन्दिर बना हुआ है आबू में। हँ? जितनी आत्माओं ने सर्विस की है, हँ, ब्राह्मण सो देवता बनने की, वो ब्राह्मण बैठ करके नीचे पुरुषार्थ करते हैं। फिर ऊँची स्टेज में देवता बनते हैं। तो दिलवाड़ा मन्दिर में एक्यूरेट दिखाया गया ना ऊपर छत में देवताएं ऊपर हैं ना ऊँची स्टेज में। तो उनका मन्दिर बना हुआ है यादगार। दिलवाला मन्दिर। क्या? एक-एक की दिल लेने वाला और फिर दिल देने वाला। अभी दिल लेने वाला तो है ही बाप। हँ? कौनसा? शिव बाप। आत्माओं का बाप। एक-एक की दिल ले रहा है। बाप लेते हैं जबकि बैठकरके राजयोग सिखलाते हैं। तब एक-एक की दिल लेते हैं कि कौन राजाई लेने के लिए बाप से, बाप से पूरा वर्सा लेने के लिए कौन-कौन पुरुषार्थ करते हैं। एक-एक की दिल बैठकरके लेते हैं ना। क्या? उनकी दिल किधर है देखो तो। इधर है कि उधर है कि किधर है? कि विश्व की बादशाही लेने में दिल है? तो दिल लेता है एक-एक की? दिल लेते हैं बच्चों की। और बच्चों की दिल ले बापदादा।

तो गुरु क्या देंगे? अरे! जरूर यही बैठकरके ऊँच पद देंगे। कौन? यही नहीं। वही। कौन वही? सदगुरु। क्योंकि एक ही बाप है, एक ही टीचर है, और एक ही सदगुरु है। सद्गुरु ऊँच पद देंगे। तो कौन हुआ सदगुरु? शिवबाबा। शिव बाप को तो सदगुरु नहीं कहेंगे। क्योंकि शिव बाप तो बिन्दी का नाम है। सद्गुरु तो साकार होना चाहिए। तो देखो ऊपर में है कि ये-ये वैकुण्ठ की बादशाही दी है। छत में दिखाई है दिलवाड़ा मन्दिर में। ऊपर में कैसे? आज भी तो दुनिया वाले समझते हैं ना कि स्वर्ग कोई ऊपर है। क्या? ये मनुष्य लोक है। और पाताल लोक में नरक लोक है। वहाँ राक्षस ही राक्षस हैं। ऐसे समझते हैं कि ऊपर में वैकुण्ठ है। वो वैकुण्ठ की बादशाही शिव बाप ने दी थी कि शिवबाबा ने दी थी? हँ? शिवबाबा ने वैकुण्ठ की बादशाही दी थी गुरु के रूप में बैठकर।

और यहाँ अभी गुजरातियों में भी समझाया जा सकता है। अभी। इसका मतलब? कोई गुजराती है ना बैठा हुआ? हँ? तो ‘गुजरातियों’ बहुवचन क्यों बोला? लक्ष्मी एक ही है तो बहुवचन नहीं बोलना चाहिए।
(किसी ने कुछ कहा।) नारायण भी है? अच्छा? 67 में नारायण भी था? गुजराती था? कि यू.पी. था? हँ? अरे, नारायण मान लो इमर्ज करके था भी तो वो यू.पी. का था कि गुजराती था? वो तो यू.पी. का हुआ। यू.पी. में ही भगवान के प्रत्यक्ष होने के प्रमाण हैं भक्तिमार्ग में भी। शंकर भगवान के रूप में दिखाते हैं तो भी काशी विश्वनाथ गंगे कहते हैं। काशी में शंकर भगवान का वास बताते हैं। राम भगवान के रूप में दिखाते हैं तो भी यू.पी. में अयोध्या और कृष्ण भगवान के रूप में दिखाते हैं तो भी मथुरा में कृष्ण भगवान का यादगार बना हुआ है बड़ा। तो वो तो यू.पी. का हो गया ना भगवान। तो भगवती कहाँ से आई? हँ? गुजरात से। तो ‘गुजरातियों’ क्यों कह दिया? अभी गुजरातियों में ये भी समझाया जा सकता है अभी? इसका मतलब वो आई होगी तो उसके साथ पार्टी भी आई होगी ना गुजरातियों की। इसलिए बोला। अभी यहाँ। अभी यहाँ गुजरातियों में भी ये समझाया जा सकता है। क्या? कि देखो वो दिलवाड़ा मन्दिर वो तो यादगार है। वहाँ तो जड़ मूर्तियाँ रखी हैं। वो जड़ मूर्तियाँ कोई को समझाय थोड़ेही सकती हैं। असली समझाने वाले तो यहाँ बैठे हैं। अच्छी तरह समझाय सकते हैं।

खास अहमदाबाद में दिलवाड़ा मन्दिर जो है स्वामी नारायण का मन्दिर है ना एक, वो दिलवाला मन्दिर हमारी यादगार है। हँ? हमारी क्यों कहा? हँ? ब्रह्मा के मुख से कहा। हमारी क्यों कह दिया? क्योंकि वो दिलवाड़ा मन्दिर जो अहमदाबाद में भी है उसमें कोई अकेली राम वाली आत्मा सदगुरु के रूप में थोड़ेही पार्ट बजाती है? उसमें प्रवेश होके ब्रह्मा की सोल भी तो पार्ट बजाती है चन्द्रमा के रूप में। क्योंकि वो यादगार है। 5000 वर्ष पहले ये हुआ था। ऐसे समझाय सकते हैं। क्या हुआ था? वैकुण्ठ की स्थापना हुई थी। और स्थापना हुई थी। उसके लिए लड़ाई लगी थी। क्योंकि पक्की स्थापना के लिए पक्का राज्य लेने के लिए संसार में वो राज्य प्रत्यक्ष हो उसकी लड़ाई तो जरूर चाहिए। और राजयोग भी सीखेंगे। लड़ाई के बिगर तो राजाई मिलती नहीं। क्या? मिलती है? हत तेरे की। लड़ाई के बिगर राजाई मिलती है? नहीं मिलती। लड़ाई के बाद राजाई। हँ?

तो देखो, तो बरोबर वो राजयोग सीखते हैं। और जरूर लड़ाई लगी होगी तो वैकुण्ठ की स्थापना हुई होगी। तभी तो अंग्रेज लोग कहते हैं। क्या? उस वैकुण्ठ का नाम क्या कहते हैं? हैविन। विन किया ना। तो विन किया है तो नाम है विन रख दिया। तो वो वहाँ भी समझाय सकते हैं। कहाँ? कहाँ समझाय सकते हैं? भूल गए। सुनते-सुनते ही भूल गए। कहाँ समझाय सकते हैं? तो वो वहाँ भी समझाय सकते हैं। कहाँ के दिलवाड़ा मन्दिर? दिलवाड़ा मन्दिर ढ़ेर सारे बना दिये।
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ। हँ? अहमदाबाद में। वहाँ भी समझाय सकते हैं। परन्तु बाबा समझते हैं युक्ति से वहाँ इतना नहीं समझाय सकते हैं क्योंकि वहाँ जैनियों का बड़ा हुजूम है। क्योंकि तुम बच्चे तो जानते हो ना कि ये हमारा यादगार है। उनकी बुद्धि में थोडे ही बैठेगा? वो तो लड़ जाएंगे तुम्हारा यादगार कहाँ से आ गया? हँ? ये तो जिन्होंने जीत पाई इन्द्रियों पर वो जिनेन्द्रजी महाराज का यादगार है। हँ? जिनेन्द्र तो भगवान को कहते हैं जिन्होंने इन्द्रियों पर जीत पाई। तुम कैसे भगवान हो सकते हो?

तो अभी नहीं समझाय सकेंगे क्योंकि तुम बच्चे तो जानते हो ना। हँ? कि वास्तव में तो ये हमारा ही यादगार है। और ये पिछाड़ी है। और तो ऊपर में, नीचे में पिछाड़ी है। और ऊपर में आगे अगाड़ी है। ऐसे कहेंगे ना। ऊपर में जो दिलवाड़ा मन्दिर में स्वर्ग में देवताएं छत में दिखाए गए हैं वो आगे की बात। और अभी? पीछे की बात। तो नीचे में नरक है। नरक में रहकरके स्वर्ग की बादशाही मिलती है। तो नीचे में नरक। ऐसे तो नीचे में कोई नरक नहीं है। वो लोग समझते हैं कि पाताल में नरक है। भारतवासी ऐसे समझते हैं क्योंकि जानते तो हैं नहीं (कि) पृथ्वी गोल है। हँ? गोल पृथ्वी में इस ओर भारत है, जहाँ स्वर्ग स्थापन होता है और दूसरी ओर? अमेरिका है। तो वहाँ को बोल दिया वो पाताल लोक है। पर पुरुषोत्तम संगमयुग है। क्या? नरक भी और स्वरग का भी मेल है। संगम है। और पुरुषों में उत्तम संगमयुग। यहाँ पुरुष माने मनुष्य आत्माएं। उन पुरुषों में उत्तम ते उत्तम पार्ट बजाने वाली आत्मा कौन है वो इस युग में प्रत्यक्ष होता है। तो ऊपर में सतयुग है। ये तो समझ सकते हो ना बच्चे कि नीचे में संगम, पुरुषोत्तम संगमयुग है और ऊपर में वो ही पुरुषोत्तम देवी-देवताओं का युग है।

अभी ऐसे भी तो बच्चे बहुत समझाय सकते हैं। खास करके किसको समझाय सकते हैं? हँ? अरे? खास करके किसको समझाय सकते हैं ऐसे-ऐसे दिलवाड़ा मन्दिर के बारे में? कृष्ण को समझाय सकते हैं? हँ? खास करके। गुजरातियों को समझाय सकते हैं। गुजरातियों की ही तो बात हो रही थी। वहाँ क्यों समझाय सकते हैं? क्योंकि वहीं बड़ा जखीरा है। वो जो ट्रस्टी है ना दिलवाड़ा मन्दिर के माउंट आबू के वो कहाँ के हैं? वो अहमदाबाद के। और वहाँ बहुत बड़ा जमावडा है उनका। और वो जो दिलवाडा का नाम से दिल लेने वाले हैं वो भी वहीं से प्रत्यक्ष होते हैं। कहाँ से? हँ? सोमनाथ मन्दिर जो यादगार बनता है संगमयुग में। हँ? अहमदाबाद है सर्व सेन्टर्स का बीजरूप। बोला ना। तो सर्व सेन्टर्स का बीज रूप। अरे! गुजरात में तो बाद में सेन्टर खुले हैं। बीज रूप कहाँ से हो गया? जो पहले खोला होगा सो बीजरूप होना चाहिए। इस हिसाब से नहीं बताया। बताया इस हिसाब से कि वो संसार की बीजरूप आत्माएं वहाँ से निकलती हैं अहमदाबाद से। अहमदाबाद से ही निकलती हैं इसलिए अहमदाबाद में वो यादगार मन्दिर संगमयुग में ही शूटिंग हुई और वो आत्माएं वहाँ से निकलती हैं।

Third page of the night class dated 24.8.1967. What happens is that ShivBaba teaches through Brahma. Now you can tell anyone that the service which we are doing now, its memorial temple has been built in Abu. Hm? The extent to which the souls have done service of becoming deities from Brahmins, those Brahmins sit and make purusharth below. Then they become deities in a high stage. So, it has been shown accurately in the temple of Dilwara that the deities above in the ceiling are in a high stage, aren’t they? So, their temple has been built as a memorial. Dilwara temple. What? The one who wins each one’s heart and then gives His heart. Now the one who takes your heart is the Father only. Hm? Which one? Father Shiv. The Father of souls. He is winning the heart of each one, isn’t He? The Father wins the heart when He sits and teaches Rajyog. Then He seeks each one’s heart that who all make purusharth to obtain kingship from the Father, to obtain complete inheritance from the Father. He sits and wins each one’s heart, doesn’t He? What? Look, where is his heart focused? Is it here or there or where? Or is he interested in obtaining the emperorship of the world? So, does he obtain each one’s heart? He wins the heart of the children. And BapDada wins the heart of the children.

So, what will the guru give? Arey! Definitely this one will only sit and give you a high post? Who? Not this one. That one. Who that one? Sadguru. It is because there is only one Father, only one teacher and only one Sadguru. The Sadguru will give a high post. So, who is the Sadguru? ShivBaba. Father Shiv will not be called Sadguru because Father Shiv is the name of the point. Sadguru should be corporeal. So, look, above it has been shown that such and such emperorship has been given. It has been shown on the ceiling in the Dilwara Temple. How above? Even today people of the world think that the heaven exists somewhere above. What? This is the human world. And there is hell in the nether world (paataal lok). There are just demons there. It is thought that the heaven exists above. Had Father Shiv or ShivBaba given the emperorship of that Vaikunth (heaven)? Hm? ShivBaba had given the emperorship of Vaikunth while sitting in the form of a Guru.

And now here you can explain amongst the Gujaratis as well. Now. What does it mean? There is a Gujarati sitting, isn’t he? Hm? So, why was it uttered in plural ‘Gujaratis’? When Lakshmi is alone, then one should not speak in plural.
(Someone said something.) Is there Narayan also? Achcha? Did Narayan also exist in 67? Was he a Gujarati? Or was he from U.P.? Hm? Arey, suppose even if Narayan existed by being made to ‘emerge’, did he belong to U.P. or was he a Gujarati? He is from U.P. only. Even on the path of Bhakti there are proofs of God’s revelation in U.P. only. Even if He is shown in the form of God Shankar, they say ‘Kashi Vishwanath Gange’. They describe the residence of God Shankar in Kashi. Even if He is shown in the form of God Ram, it is in U.P. in Ayodhya and even if He is shown in the form of God Krishna, it is in Mathura that the big memorial of God Krishna is built. So, that God (Bhagwaan) is from U.P. isn’t He? So, where did Goddess (Bhagwati) emerge from? Hm? From Gujarat. So, why was it said ‘Gujaratis’? Can this also be explained now among the Gujaratis now? It means that when she must have come, then a party of Gujaratis must also have come. This is why it was told. Now here. This can be explained now here among the Gujaratis also. What? That look, that Dilwara Temple is a memorial. Non-living idols are placed there. Those non-living idols cannot explain to anyone. The actual persons who explain are sitting here. You can explain very well.

The Dilwara Temple, Swami Narayan temple in Ahmedabad, that Dilwala temple is our memorial. Hm? Why was it called ‘our’? Hm? It was said through the mouth of Brahma. Why was it called ‘our’? It is because the Dilwara temple which is in Ahmedabad also, does the soul of Ram alone play the part in the form of Sadguru in it? The soul of Brahma also enters in it and plays a part in the form of the Moon because it is a memorial. This had happened 5000 years ago. You can explain like this. What had happened? Vaikunth (heaven) was established. And establishment had taken place. A war had broken out for it because for firm establishment to take place, to obtain the firm kingdom, for the sake of revelation of that kingdom in the world, war is definitely required. And you will also learn rajyog. Kingship is not obtained without war. What? Is it obtained? Damn it. Is kingship received without a war? It is not received. Kingship after war. Hm?

So, look, so, definitely they learn rajyog. And definitely when the war must have broken out, then Vaikunth (heaven) would also have been established. Only then do the Britishers say. What? What do they name that Vaikunth? Heaven. A ‘win’ was achieved, wasn’t it? So, when a ‘win’ was achieved, then the name was coined as ‘hai win’ (heaven). So, you can explain there as well. Where? Where can you explain? You have forgotten. You have forgotten while listening. Where can you explain? So, you can there as well. Dilwara temple of which place? Numerous Dilwara temples have been built.
(Someone said something.) Yes. Hm? In Ahmedabad. You can explain there as well. But Baba thinks that you cannot explain so much tactfully there because there is a big gathering of Jains there. Because you children know that this is our memorial, don’t you? Will it sit in their intellect? They will start fighting - how is this your memorial? Hm? This is the memorial of Jinendra ji Maharaj, who achieved victory over organs. Hm? It is God who is called Jinendra who conquered the organs. How can you be God?

So, you will not be able to explain now because you children know, don’t you, hm, that actually this is our memorial only. And this is the end. And above; it is the end below. And there is the beginning above. It will be said so, will it not be? The deities in heaven who have been depicted on the ceiling above are a topic of future. And now? It is about the end. So, there is hell below. You obtain the emperorship of heaven while living in heaven. So, there is hell below. Actually there is no hell below. Those people think that there is hell in the nether world (paataal). Bhaaratwasis (residents of India) think so because they do not know that the Earth is spherical. Hm? In the spherical Earth, there is India on this side where heaven is established and on the other side? There is America. So, it was said about that place that it is a nether world. But it is Purushottam Sangamyug (elevated Confluence Age). What? It is a combination of hell as well as heaven. It is a confluence. And highest Confluence Age among souls (purush). Here purush means human souls. The soul which plays the highest on high (uttam te uttam) part among those souls (purush) is revealed in this Age. So, there is Golden Age above. You can understand children that there is confluence, Purushottam Sangamyug below and there the Age of the same purushottam (highest on high) deities above.

Now children can also explain a lot like this. To whom can they explain especially? Hm? Arey? To whom can they explain especially like this about Dilwara Temple? Can they explain to Krishna? Hm? Especially. They can explain to the Gujaratis. The topic of the Gujaratis itself was being discussed. Why can they explain there? It is because the big gathering is there only. Those trustees of Dilwara temple of Mount Abu belong to which place? To Ahmedabad. And there is a very big gathering of those people there. And those who win hearts in the name of Dilwara are also revealed from there only. From where? Hm? Somnath temple, the memorial which is formed in the Confluence Age. Hm? Ahmedabad is the seed-form of all the centers. It was told, wasn’t it? So, seed form of all the centers. Arey! Centers have been opened in Gujarat later on. How did it become seed form? The one which was opened first of all should be seed form. It was not described in this way. It was told that the seed form souls of the world emerge from there, from Ahmedabad. They emerge from Ahmedabad only. This is why the shooting took place in that memorial temple in Ahmedabad in the Confluence Age only and those souls emerge from there.

So, a very big gathering is formed there because at this time people come from this side also, don’t they? From where? From where do people come the most to the Dilwara Temple? They come from Gujarat. In Gujarat also big prosperous persons keep on coming from Ahmedabad. Although they come below mostly to Jagdamba because the temple of Jagdamba is built on the foothills of Mount Abu. But the special full temple that is built is this [Dilwara Temple] only, isn’t it? Jagdamba is also here and Jagatpita is also here. The dark deity (kala dev) is also sitting in the corner in the Dilwara Temple. What? Why the dark deity? There the dark mother (Kaali maai) is also sitting in the corner. She is sitting in the incognito place because Jagdamba plays an incognito part, doesn’ she? It is said Jagdamba Saraswati. River Saraswati comes in between and departs in between. It plays an incognito part. So, there is Jagdamba also in the memorial of Dilwara Temple here because there is Aadi Dev as well as Aadi Devi. Aadi Dev. Aadi Dev means that he is the seed, isn’t he? Hm? Both are there. Here in the Temple of Dilwara. Where? In Mount Abu. So, children get numerous points. They get numerous points to explain about Dilwara Temple and to explain to Gujaratis. Om Shanti.

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