Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 30 Sep 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2620, दिनांक 25.08.2018
VCD 2620, Dated 25.08.2018
प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning Class dated 26.8.1967
VCD-2620-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-19.06
Time- 00.01-19.06


प्रातः क्लास चल रहा था 26.08.1967. शनिवार को छठे पेज के मध्यांत में बात चल रही थी रखड़ीबंधन की। बताया - तुम रखड़ी बंधन बांधने जाते हो, तो बहुत सब करके जो अच्छे मनुष्य होंगे वो तो मान देंगे, आदर देंगे। देखो तुमको कितना-कितना मान मिलता है। तो बाबा समझाते हैं क्यों नहीं। किसको कोई भी रखड़ी बांधना है। क्योंकि ये तो तुम्हारा लक्ष्य है उनको पैगाम देने का। रखड़ी बांधने का भाव क्या है? उनको बाबा का पैगाम देना कि बाप आया हुआ है एवर प्योर। पवित्र बनाने के लिए आया हुआ है तो हम पवित्रता की राखी बांध रहे हैं। आपको संदेश देने इसी बहाने आए हैं। बाकी भाव पैसा लेने का नहीं होना चाहिए।

बाबा कहते हैं सबको तुमको पैगाम ही देने का है। जो आवें उनको पैगाम देना है कि भई ये जो लड़ाई है ये लड़ाई बहिश्त का दरवाजा खोलती है। कहते हैं ना गेट वे टू हैविन इज महाभारत। और उस लड़ाई में जो पतित आत्माएं होती हैं सो पावन बनती हैं। कैसे बनती हैं? हम तो पतित-पावन बाप को याद करते हैं क्योंकि हमें तो निश्चय है कि पतित-पावन बाप आया हुआ है। हम कोई देहधारी को याद नहीं करते हैं। और हम कोई देहधारी की महिमा भी नहीं कर सकते। चाहे वो कितने भी ग्रेट फादर्स कहे जाते हों। इब्राहिम, बुद्ध, क्राईस्ट, बड़े-बड़े ग्रेट फादर्स हैं। परंतु हम उनकी महिमा नहीं कर सकते सिवाय एक के। कौन एक? जो ग्रेट फादर्स का भी फादर है ग्रेट ग्रेट ग्रैंडफादर। उसमें बाप आए हैं। सुप्रीम सोल। वो एक ही है जो सर्व की सद्गति करते हैं। तो एक सर्व की सद्गति करते हैं। सिख लोग भी गाते हैं, हिंदू लोग भी गाते हैं - सबका सद्गति दाता राम।

एक सद्गुरु निराकार सबकी सद्गति करते हैं। तो बाकी सब क्या करते हैं? बाकी सब गुरु तो दुर्गति ही करते हैं ना। वो बरोबर जब कलियुग आता है, नरक आता है, तब सभी दुर्गति को पाय जाते हैं बरोबर। ऐसे तो नहीं है कि नर्क नहीं है। इसका नाम ही है कलहयुग। कलह-कलेश का युग। जैसा नाम है वैसा ही काम होगा ना। यह आयरन-एज्ड वर्ल्ड है। सतयुगी दुनिया गोल्डन ऐज थी। धीरे-धीरे दुनिया नीचे उतरती गई, रहने वाले भी नीचे उतरते गए। दुनिया का हिसाब ही ऐसा है। सतोप्रधान, फिर रजोप्रधान, फिर तमोप्रधान। ये दुनिया बनी ही है प्रकृति के तीन गुणों से भरी-पूरी - सत, रज, तम। तो जब तमोप्रधान बनती है तो आयरन ऐज्ड वर्ल्ड के मनुष्य ठहरे। फिर कोई तो गोल्डन ऐज्ड मनुष्य भी होंगे ना। तो ये क्या है? कौन हैं ऐसे जो फिर आयरन ऐज से गोल्डन ऐज में ले जाते हैं? कोई को भी बुद्धि में नहीं आता है।

26.07.1967 की वाणी का सातवां पेज। अब तुम बच्चों की बुद्धि में है नंबरवार। सो भी कहेंगे नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार। कोई को बहुत फर्स्ट क्लास बुद्धि मैं बैठा हुआ है। जैसे वो लौकिक दुनिया के स्कूल होते हैं ना बच्ची। बहुत एकदम आगे ही वो खुशी ही खुशी जो है ना टीचर की वो जा करके सामने बैठते हैं। अच्छे पढ़ने वाले होते हैं ना। जो ठीक से नहीं पढ़ते हैं उनको शर्म आ जाती है। लज्जा हो जाती है। जब कोई नीचे में, सवाल में नीचे चले जाते हैं, तो अंदर में उनको टहक होती रहती है। टहकते रहते है। और फिर ईर्ष्या करते हैं एक-दूसरे से कि ये हमारे को जीत गया और हमने तो पढ़ाई को मिस कर दिया। तो फिर अंदर में आता है कि अब हम, हम फिर आगे चलकर के ऐसे पढ़ाई पढूंगा जो मेरे को कभी कोई जीत ना सके। अरे! अच्छे से पढेंगे तभी तो स्कॉलरशिप मिलती है ना। और स्कॉलरशिप लेना कोई मासी का घर थोड़े ही है, हँ, कि मां-बाप से नाराज हुए और फट से जाके मासी के घर में बैठ गए। बड़ी मेहनत करते हैं तब स्कॉलरशिप मिलती है। अब तुम बताओ यहां कितनी स्कॉलरशिप हैं। हँ? 8 स्कॉलरशिप हैं। उससे क्या फायदा होता है? हं? उससे ये फायदा होता है कि वो जन्म-जन्मांतर सुखी रहते हैं। यहां भी सजा नहीं खाते हैं। धर्मराज की सजाओं से मुक्त हो जाते। और क्योंकि स्टूडेंटस तो बहुत हैं, ढेर के ढेर हैं। तो उनमें से चुनाव करके स्कॉलरशिप भी तो उनकी जास्ती होना चाहिए ना बच्चे।

तो किसको भी, तुम किस को भी समझा सकते हो। किसको भी जा करके रखड़ी बाँध सकते हो कि हैविनली गॉडफादर आया हुआ है। नई दुनिया स्थापन हो रही है। नई दुनिया में पद तो होंगे ना। तुम भी आके पढ़ो। आकर स्कॉलरशिप ले लो। ऊँच से ऊँच सुप्रीम टीचर पढ़ाय रहा है। बाकी मुसलमानों को तो तुम ये भी समझाय सकते हो। ये क्या है ये सभी? यानी ये क्या? हिंदू लोग तो नहीं समझते हैं। हं? क्योंकि हिंदू तो कोई धर्म ही नहीं तो है ना बरोबर। हिंदू अगर धर्म है तो धरमपिता कौन है? बौद्धी धर्म है तो धर्मपिता बुद्ध है। क्रिश्चियन धर्म है तो धर्मपिता क्राइस्ट है। मुस्लिम धर्म है तो मोहम्मद धर्मपिता है। इनका तो कोई धर्म पिता ही पक्का नहीं है। कभी कहते हैं राम भगवान, कभी कहते हैं कृष्ण भगवान, कभी गणेश भगवान, तो कभी बंदर भगवान, क्या क्या बोलते रहते हैं।

असल तो, असल तो आदि सनातन भारत में ही देवी-देवता धर्म था। अभी भी गायन है। महाभारत में बताते हैं कि अर्जुन को गीता ज्ञान दिया तो दोनों सेनाओं ने कोई ने उतना नहीं गहराई से समझा जितना अर्जुन ने समझा। और वो बहुत पुरानी बात है ना इसलिए नाम धर दिया है सनातन धर्म। ऐसा ज्ञान दिया कि नर अर्जुन नारायण जैसा देवी-देवता बनता है। और उस समय दुनिया में कोई भी धर्म नहीं था। एक ही देवी-देवता धर्म। आज तो देखो दुनिया में कितने धर्म फैले हुए हैं। इसीलिए भगवान को आके कहना पड़ता है - सर्व धर्मान परित्यज्य। (गीता 18/66) ये ढेर के ढेर धर्मों को छोड़ दो। धर्मों को छोड़ेंगे तो धर्म पिताओं को नहीं छोड़ेंगे? धर्मपिताओं को भी छोडेंगे, उनके धर्मशास्त्रों को भी छोड़ेंगे। हिंदुओं के तो ढेर के ढेर सब धर्मशास्त्र। कोई एक पे तो विश्वास है नहीं। और और धरम वालों के एक धर्म शास्त्र पक्के हैं। तो उनकी देखो कितनी सद्गति हो रही है। हँ? दुनिया में उनका नाम बाला हो रहा है। तो दुर्गति हो रही है कि सद्गति हो रही है दुनिया के, भारत के हिसाब से खास? तो कहेंगे, हां, हमारे मुकाबले उनकी जास्ती सद्गति है।

तो झाड़ के ऊपर उन इस्लामियो को भी समझाय सकते हो। मुसलमानों को भी समझा सकते हो। उस झाड़ के ऊपर बिल्कुल समझाय सकते हो अच्छी तरह से। उनको झाड़ के ऊपर समझाऐंगे तो उनको उमंग आयेगा। समझा ना। क्यों उमंग आयेगा? उनको झाड मे समझ में आएगा कि हमारा धर्म तो ढाई हजार साल पुराना है। उससे पहले तो जरूर कोई धर्म था ना इस दुनिया में। ऐसे तो नहीं ये दुनिया ढाई हजार साल की ही है। तो बुद्धि में आता है कि हां, हमसे पहले कोई एक ही धर्म था दुनिया में। इस्लामी तो पक्का समझेंगे कि जब हमारा धर्म आया तो दुनिया में एक ही धरम था।

बाबा खुद कहना होता है कि चलो हम भी जा करके उनको सिखलाऐं। परंतु बाबा कहते हैं कि हम तो उनसे जाकर के मिल नहीं सकते। हम जायके सिखलाय नहीं सकते। क्योंकि ऐसे तो बहुत पतित भी आते हैं मनुष्य अंदर में। और वो तुमको ही गाली देते हैं। हं? चलो, मुझको गाली देंगे तो क्या शिवबाबा को गाली खिलाने के लिए मैं उनके सामने जाऊंगा? और बहुत ही कुदृष्टि भी रखते हैं। ये गंदे-गंदे भी जाते हैं या कुछ उल्टा-सुल्टा बोलने में देरी नहीं करते हैं। कोई गाली दे देंवे, पत्थर भी मार देवे। आज की दुनिया में तो कोई का मान नहीं है। देखो, इंदिरा गांधी को पत्थर मारके नाक तोड़ दी। प्लास्टिक सर्जरी करानी पड़ी। तो ये तो शिव बाबा की बेज्जती हो जाएगी ना। पत्थर लगाय देंगे। क्योंकि ये तो वो ही है ना बोलेंगे ये वही है जो हमारे जो विख पीने का जो नशा है वो हमारा नशा ही उडाय देना चाहते हैं। ये वो ही लोग हैं जो हमारा नशा तोड़ देते हैं। हमको विख से वो करते हैं एकदम; क्या? दूर कर देते हैं। समझा ना। ये विख-विख की बातें करते रहते हैं। ये तो हमारे लिए तो ये एक बहिश्त का रास्ता है खुशी है तो इस विख को छोडेंगे तो बहिश्त मे जाऐंगे। बिल्कुल ही जाएंगे। कहानी भी बनाई हुई रखी है उन्होंने। खुदा ने आदम को कहा गंद नहीं खाना गंदुम नहीं खाना और उसने गंदुम खा लिया तो बहिश्त से नीचे ढकेल दिया।

अब तुम बच्चों को तो बहुत खुशी है। ये चोपचीनी है। क्योंकि ये ऊंच ते ऊंच भगवान की मत चोपचीनी है। उनके लिए मूत चोपचीनी है। किनके लिए? दूसरे धर्म वालों के लिए। समझा ना। हां, ये अमृत का प्याला है। वो ऐसे समझते हैं। तो उनकी बुद्धि में आता है ये हमारा अमृत का प्याला बंद कर देते हैं। समझा ना। तो ऐसे जो बोलते हैं ये कौन ठहरा? उनको समझाने के लिए बच्चों को कितना समझना पड़ता है और समझाना पड़ता है बच्चों को। (क्रमशः)

A morning class dated 26.08.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the middle portion of the sixth page was about rakhribandhan. It was told – You go to tie rakhri (rakhi); so, mostly those who are good people will give you respect, regard. Look, you get so much respect. So, Baba explains, why not? You can tie rakhi to anyone because this is your aim to give them message. What is the purpose of tying rakhri? To give them Baba’s message that the ever pure Father has come. He has come to purify us; so we are tying the rakhi of purity. We have come to give you message under this pretext. But you should not have the intention to seek money.

Baba says that you have to give message to everyone. You have to give message to all those who come that brother, this war opens the gateway to heaven. It is said, isn’t it, that the gateway to heaven is Mahabharata. And in that war, the sinful souls become pure. How do they become? We remember the Father, the purifier of the sinful ones because we have faith that the Father, the purifier of the sinful ones, has come. We do not remember any bodily being. And we cannot praise any bodily being. They may be called however much great fathers. There are big great fathers like Ibrahim, Buddha, Christ. But we cannot praise them except one. Which one? The one who is the Father of the great fathers as well, the great-great-grandfather. The Father has come in him. The Supreme Soul. He is the only one who causes true salvation of everyone. So, One causes the true salvation of everyone. Sikhs also sing, Hindus also sing – Ram, the bestower of true salvation upon everyone.

One incorporeal Sadguru causes the true salvation of everyone. So, what do all others do? All other gurus cause degradation (durgati) only, don't they? Definitely, when the Iron Age comes, when the hell starts then everyone certainly undergoes degradation. It is not as if it is not a hell. Its name itself is Kalahyug. An age of disputes and despair. As is the name so shall be the task, will it not be? This is an Iron-Aged world. The Satyugi world was Golden Age. Gradually the world underwent downfall; its residents also underwent downfall. The account of the world is like this only. Satopradhan, then rajopradhan, then tamopradhan. This world is made up of the three aspects of nature - sat, raj, tam. So, when it becomes tamopradhan, then they happen to be human beings of the Iron-Aged world. Then some will be Golden Aged human beings also, will they not be? So, what is this? Who are such persons who then take you from the Iron Age to the Golden Age? It does not strike anyone's intellect.

Seventh page of the Vani dated 26.10.1967. Now it is numberwise in the intellect of you children. That too it will be said numberwise, as per individual purusharth. In case of some, it has sit in the intellect in a first class manner. For example, daughter, there are schools of the lokik world, aren't there? Those who sit right in front of the teacher feel very happy. They study well, don’t they? Those who do not study well feel shy. They feel shy. If anyone goes down on being asked questions, then they feel bad. They feel bad. And then they feel jealous of each other that this one conquered me and I missed the teachings. So, then one feels inside that now I will study in such a way in future that nobody can win me. Arey! You get scholarship only when you study well. And getting the scholarship is not as easy as visiting maternal aunt's house that you get angry with the parents and go and sit in maternal aunt's house immediately. One gets scholarship only when you work very hard. Well, you tell how many scholarships are there here? Hm? There are eight scholarships. What is the benefit from it? Hm? The benefit is that they remain happy birth by birth. They do not suffer punishments here as well. They become free from the punishments of Dharmaraj. And because students are many, numerous. So, children, the scholarship should be more for those who are chosen from among them.

So, you can explain to anyone. You can go and tie rakhri to anyone that the heavenly God Father has come. A new world is being established. There will be posts in the new world, will there not be? You too come and study. Come and obtain the scholarship. The highest on high supreme teacher is teaching. You can also explain this to the Muslims. What is all this? What does it mean? Hindus do not understand. Hm? It is because there is rightly no Hindu religion as such. If there is Hindu religion then who is its founder? If there is Buddhist religion then the founder of the religion is Buddha. If there is Christian religion then the founder of the religion is Christ. If there is Muslim religion then the founder of the religion is Mohammed. There is no firm founder of these people (the Hindus) at all. Sometimes they say God Ram, sometimes they say God Krishna, sometimes God Ganesha, and sometimes monkey God; what all do they keep uttering!

Actually, actually the Aadi Sanatan Devi Devata Dharma was in India only. It is praised even now. It is said in the Mahabharata that when Arjuna was given the knowledge of the Gita, then none from both the armies understood as deeply as Arjuna. And that is a very old topic, is not it? This is why the name has been coined as Sanatan Dharma. He gave such knowledge that man Arjun becomes a Narayan-like deity. And at that time there was no [other] religion in the world. There was only one deity religion. Look, today there are so many religions spread all over the world. This is why God has to come and say - Sarva dharmaan parityajya. (Gita 18/66) Leave these numerous religions. If you leave the religions, will you not leave the founders of the religions? You will leave the founders of the religions as well as their religious texts. There are numerous religious scriptures of the Hindus. They do not believe in any one [book]. People of other religions have one firm religious text. So, look, they are prospering so much. Hm? They are becoming famous in the world. So, are they undergoing degradation or true salvation from the point of view of the world, from the point of view of India? So, it will be said that when compared to us, they are prospering more.

So, you can explain to those Islamic people also on the Tree. You can explain to the Muslims also. You can definitely explain very well on that Tree. If you explain to them on the Tree then they will feel enthusiastic. Did you understand? Why will they feel enthusiastic? They will understand from the Tree that our religion is 2500 years old. Before that there was definitely one or the other religion in this world. It is not as if this world is only 2500 years old. So, it comes to the intellect that yes, there was only one religion in the world before us. Islamic people will certainly understand that when our religion started, there was only one religion in the world.

Baba Himself says that let Me also go and teach them. But Baba says that I cannot go and meet them. I cannot go and teach them because many such sinful people also come inside. And they abuse you. Hm? Okay, if they abuse me, then will I go in front of them to get ShivBaba abused? And they also have an evil eye. Such dirty ones also go or they do not hesitate to speak inappropriately. Someone may abuse, someone may throw a stone at you. Nobody has got respect in today's world. Look, they threw a stone at Indira Gandhi and broke her nose. She had to undergo plastic surgery. So, this will be like disrespect to ShivBaba, will it not be? They will throw a stone. It is because they will say this is the same person who wants to deprive us of the intoxication of drinking the poison [of lust]. These are the same persons who break our intoxication. They deprive us completely of poison; what? They deprive us. Did you understand? They keep on speaking about poison. This is a path to heaven for us; there is joy in it; so if we leave this poison we will go to heaven. We will definitely go. They have also made a story. Khuda (God) said to Aadam - Do not eat gand (dirt), the gandum [fruit]; and he ate the Gandum; so, he was pushed down from the heaven.

Now you children have a lot of joy. This is chopchini. It is because this direction of the highest on high God is chopchini. For them urine is chopchini. For whom? For people of other religions. Did you understand? Yes, this is a saucer of nectar. They think like that. So, their intellect thinks that these people stop our saucer of nectar. Did you understand? So, who are those who say like this? Children have to understand so much to explain to them; children have to explain so much. (Continued)

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नोटः यह केवल एक प्रारूप है। उक्त वीसीडी के संपूर्ण मूल पाठ या मूल आडियो, वीडियो के लिए www.adhyatmik-vidyalaya.com देखिये।
Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 02 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2620, दिनांक 25.08.2018
VCD 2620, Dated 25.08.2018
प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning class dated 26.8.1967
VCD-2620-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 19.07-34.12
Time- 19.07-34.12


बड़े-बड़े आते हैं दिन। उन दिनों में कितना मगज खुला हुआ रहना चाहिए। अगर कोई सारा दिन ये सर्विस नहीं होगा तो जरूर घर में झरमुई-झरमुई कर रहा होगा। और उन बिचारों का झरमुई-झरमुई करने वालों का दिमाग ही नहीं खुलेगा। झरमुई-झरमुई करते रहेंगे तो उस समय फट से दिमाग कैसे खुलेगा जो ये बातें याद आवें और जाकर के ईश्वरीय ज्ञान की सर्विस करें? नहीं तो बच्ची ये सर्विस जो है बहुत इजी से इज़ी है। अरे घर में माईयां भी बूढ़ी-बूढ़ी माईया भी ये सर्विस कर सकती हैं। देखो पूना है, बाम्बे है, दिल्ली है। ये जो माईयां हैं ना। वो भी उनको ये चित्र लेकर के समझाय सकती हैं।

उनको चित्र के ऊपर जाकर समझावें कि देखो कृष्ण को काला क्यों दिखाय दिया है? अरे कृष्ण को तो क्या सब देवताओं को काला दिखाय दिया है। नारायण को काला बताय दिया। कृष्ण को तो काला दिखाय दिया। राम को काला दिखाय दिया। जो ढेर के ढेर मंदिर बने हुए हैं शिव के, उस शिव के लिंग को भी काला दिखाय दिया। तो तीनों ही चित्र काले वाले उठावें। चाहें वो कृष्ण का हो, नारायण का हो, रामचन्द्र का हो। वो काले ही काले उठावें। और उनका भी काला उठावें। नारायण का भी काला, कृष्ण का भी काला, शिव का भी काला। काला पत्थर है ना। समझा ना। हं? काला पत्थर क्यों है? हं? और कुछ होता। पत्थर ही क्यों बनाय दिया? हं? क्योंकि उनको समझाना होता है ना कि जो सतयुग में गोरा था, 16 कला सम्पूर्ण नारायण था, वो ही कलियुग मे आके पत्थरबुद्धि बना।

तो ये काला चित्र उठाय कर के और फिर सबको समझायें। समझायें कि ये देवताओं को काला क्यों कर दिया है? ये कहां की यादगार है? कृष्ण बेचारे को काला क्यों कर दिया? इसको क्यो कहते हैं कृष्ण काला, काला, काला? वो बंगाल में भी कहते हैं काला किष्टो। कृष्ण को किष्टो कहते हैं। है ना। तो ये काला। काला ही कहते हैं बच्चे। नहीं तो काला कहा जाता है श्याम सुन्दर को। तो उसमें तो सुन्दर नाम भी आता है। अब श्याम सुन्दर नाम दिया है तो उसको काला ही तो नहीं कहेंगे। थोडा बदलना चाहिए ना। परन्तु उनका नाम रख दिया है काला किष्टो। बंगाली लोग कहते हैं ना। वो ऐसे ही समझते हैं। काला ही दिखाते हैं। और है भी बरोबर काला। और कोई-कोई जगह में तो बहुत ही काला दिखाय दिया है। श्रीनाथ द्वारे में जाओ तो वहां भी एकदम काली मूरत। नाम रख दिया है श्री नाथ। अरे श्री तो देवताओं को कहा जाता है ना। देवताऐं तो इतने सुन्दर होते हैं, उनकी पूजा करते हैं, मंदिर बनाते हैं, तो मूरत एकदम काली क्यों बनाय दी? श्री नाथ द्वारे में भी काली। बिल्कुल काली मूरत। और तुम उनको चित्रों पर भी देखते होंगे। उस श्री नाथ द्वारे के, जगन्नाथ द्वारे के चित्र भी तो छपते हैं ना। बहुत छपते हैं।

देखो उनका चित्र काला कृष्ण का ऐसी टेढी-टेढी बनाय देते हैं नाम रख देते है त्रिभंगीलाल। तीन जगह से टेढा। उसकी, श्री नाथ द्वारे की चित्र देखो और मुंह एकदम काला। मैं तो समझता हूं ये जो उसके साथ राधे है, कृष्ण के साथ या श्री नाथ के साथ कहो, तो मैं समझता हूं श्री नाथ भी काली मुझे देखने में आती है। या देखा तो है। अभी हमें स्मृति नहीं है कि श्री नाथनी काली थी या गोरी थी। परन्तु कोई भी ये उदयपुर की तरफ में है। समझा ना। वहां चित्र भी मिलते हैं। बहुत श्री नाथ जी के चित्र मिलते हैं। शायद कोई गौरा भी रखा हो। उनकी इज्जत रखी होए। किनकी? हं? श्री नाथ का मुंह काला और श्री नाथ की गोरा चित्र रखा हो। 26.08.1967 की वाणी का आठवां पेज। या उनको काला मुंह दिया हुआ हो और पूरा वो स्त्रियों को काला मुंह नहीं किया हुआ हो। है ना। क्या है? यादगार है ना। कहां की यादगार है? हं? काला मुंह पुरुषों के रुप में दिखाया। राधा को गोरा दिखाते हैं। और नारायण को, कृष्ण को, राम को, काला दिखाते हैं। ये भी तो अभी समझाय सकते हो ना। संगमयुग में टैली करके समझाय सकते हो ना।

तो वो सारे चित्र इकट्ठे करने चाहिए। कौन से चित्र? राम के, राधा के, नारायण के इकट्ठे करने चाहिए। और दिखाओ कि ये देखो है ना बरोबर काले। अब आओ तो हम तुम्हें श्याम-सुन्दर का अर्थ समझायें। क्या समझायेंगे? कि जो सुन्दर बनाने वाला है, गोरा बनाने वाला है, मनुष्य को देवता बनाने वाला है वो आते ही हैं काले कलयुग में। तो काले ही होंगे ना। फिर वो सुप्रीम टीचर बनके पढाई पढाते हैं। तो समझ में आती है बात। तो काले से गोरे बन जाते हैं सतयुग में। तो काले कलियुग को, काले धंधे जहां होते हैं उसको गोरा युग बनाने वाला कौन हुआ? अरे बहुत-बहुत ईजी है सर्विस में ये सब समझाना। और जन्माष्टमी के दिन तो अच्छा समझाय सकते हैं। हं? क्यों? क्यों अच्छा समझाय सकते है? कि दुनिया में जो काले बनाने वाले जो सात धर्म हैं वो ये हैं। बताओ - इस्लामी, बौद्धी, क्रश्चियन और उनके सहयोगी धर्म। तो इनके जो धर्म पिताऐं जब से आते हैं तब से ये दुनिया काले कर्म करने वाली बन जाती है। उससे पहले तो गोरे देवताऐं थे सतयुग त्रेता में। भारत में ही स्वर्ग था।

तो अष्टमी के दिन बहुत अच्छी सेवा कर सकते हैं। दीपावली में भी इतनी अच्छी सर्विस कर सकते हैं। बताओ ये दीवाली नाम क्यों दिया? ये बिगडा हुआ रुप है नाम असली है दीप अवली। जो आत्मा रुपी दीपक जलते हैं उनकी लाईन तैयार हो जाती है। हं? तो समझाओ कि जब ऊंच ते ऊंच बाप आते हैं तो आत्मा का दीपक जगाते हैं। आत्मा अपने आप को भूल चुकी कि मैं आत्मा हूं। सब अपन को देह समझते हैं। तो हां, इसमें सेवा कर सकते हैं। परन्तु कृष्ण को हाथ में लेकर के तुम गोरे बन जाऐंगे। कृष्ण को हाथ में लेकर के कैसे गोरे बन जायेंगे? समझाओ बुद्धि रुपी हाथ में लेंगे। इस हाथ की बात नहीं है। अभी तो काला मुंह है। गोरा बन जाएगा। अगर ये पवित्रता की रखडी बांधेगे और ज्ञान की चिता पर बैठेंगे। क्या? ज्ञानाग्नि, योगाग्नि कहते हैं ना। तो ये समझानी है ना। तो बाप समझानी तो देते हैं ना। अभी सुनते तो हैं। सिर्फ एक्सप्रेशन्स तुम देखते हो। बाकी सुनते तो सब सुने हैं अभी बिचारे। अब ये तो चली गई। यहां तो कोई ऐसा है नहीं जो सर्विस जाकर के करके समझाय सकें। या कोई सर्विस करते भी होंगे। अभी करते होंगे तो बाबा को तो जैसे समाचार लिखते हैं। वो अब समाचार सुनाते होंगे। परन्तु बाबा को तो कोई उम्मीद नहीं है कि यहां कोई जाकर के सर्विस कर सकते हैं। अच्छा, ओम शान्ति।

Big days arrive. In those days the intellect should remain so open. If there is no service throughout the day, then definitely he must be speaking wastefully at home. And the intellect of those poor people who speak wastefully will not open up at all. If they keep on speaking wastefully, then how will the intellect open up immediately at that time to recollect these topics and go and do the service of Godly knowledge? Otherwise, daughter, this service is easiest. Arey, even mothers, old mothers can do this service at home. Look, there is Poona, Bombay, Delhi. These mothers can also take these pictures and explain to them.

You should go and explain on the picture that why has Krishna been shown to be dark? Arey, not just Krishna, but all the deities have been shown to be dark. Narayan has been mentioned to be dark. Krishna has been shown to be dark. Ram has been shown to be dark. Among the numerous temples of Shiv that have been built, that ling of Shiv has also been shown to be dark. So, pick up all the three dark pictures. Be it of Krishna, be it of Narayan or be it of Ramchandra. You should pick up the dark ones only. And pick up His also in a dark form. Dark one of Narayan, dark one of Krishna and dark one of Shiv as well. It is a black stone, is not it? Did you understand? Hm? Why is it a black stone? Hm? It could be something else. Why was it made of stone only? Hm? It is because they have to be explained that the one who was fair in the Golden Age, was Narayan perfect in 16 celestial degrees, the same soul became a person with stone-like intellect in the Iron Age.

So, pick up this dark picture and then explain to everyone. You should explain that why these deities have been made dark? This is a memorial of which place? Why has poor Krishna been made dark? Why is he called the dark, dark, dark Krishna? In Bengal also they call him 'black Kishto'. They call Krishna as Kishto. is not it? So, this dark one. Children, he is called a dark one only, is not he? Otherwise Shyamsundar is called dark. So, the name 'sundar' (fair/beautiful) is also included in it. Well when the name Shyamsundar has been coined, then he will not be called a dark one only. It should be changed a little, shouldn't it be? But he has been named 'black Kishto'. Bengalis say, don't they? They think like that only. He is shown to be dark only. And he is rightly dark. And in some places he is shown to be very dark. Go to Shrinath Dwarey (a temple dedicated to Krishna in western India); even there, the idol is completely black. The name has been coined as Shrinath. Arey, the deities are called Shri, aren't they? Deities are so beautiful; they are worshipped; temples are built for them; so, why has their idol been made completely black? It is black in Shrinath Dwarey also. Completely dark idol. And you must be seeing him on the pictures also. Pictures of Shrinath Dwarey and Jagannath Dwaraey are also printed, aren't they? Numerous pictures are printed.

Look, his picture, the picture of the dark Krishna is made such twisted one and he is named Tribhangilaal, twisted from three sides. Look at his picture, the picture of Shrinath Dwarey; and the face is completely black. I feel that Radhey, who is with Krishna or with Shri Nath, I feel, I find Shri Nath also to be dark. Or I have seen so. Well, I don't remember if Shri Nathni (consort of Shrinath) was dark or fair. But it is perhaps towards Udaipur. Did you understand? Pictures are also available there. Many pictures of Shri Nathji are available. Perhaps a fair one is also available. He must have been given respect. Who? Hm? Shrinath's face dark; and a picture of the fair Shrinath must be available. Eighth page of the Vani dated 26.08.1967. Or perhaps he has been depicted with a black face and perhaps the women have not been depicted with a complete black face. is not it? What is it? It is a memorial, is not it? It is a memorial of which place? Hm? Black face has been shown in the form of men. Radha is shown to be fair. And Narayan, Krishna, Ram is shown to be dark. You can now explain this as well, cannot you? You can explain by tallying with the Confluence Age, cannot you?

So, you should collect all those pictures. Which pictures? You should collect the pictures of Ram, Radha, Narayan. And show that look, they are definitely dark. Well, if you come we will explain to you the meaning of Shyamsundar. What will you explain? The one who makes you beautiful, makes you fair, the one who transforms human beings to deities comes only in the dark Iron Age. So, you will be dark only, will they not be? Then He teaches knowledge in the form of a Supreme Teacher. So, the topic can be understood. So, you become fair from dark in the Golden Age. So, who is the one who transforms the dark Iron Age, the Age where dark occupations are practiced, to a fair Age? Arey, it is very, very easy to explain all this in service. And you can explain well on the day of Janmashtami. Hm? Why? Why can you explain well? These are the seven religions which make you dark in the world. Tell them - Islamic, Buddhist, Christian and their helper religions. So, ever since the founders of these religions come, this world becomes one that performs dark actions. Before that there were fair deities in the Golden Age and Silver Age. There was heaven only in India.

So, you can do very good service on the day of Ashtami. You can also do very nice service on Deepawali. Tell them, why was this name Diwali coined? This is a corrupt form of the word; the original name is Deep Avali. A line of the soul-like lamps gets ready. Hm? So, explain that when the highest on high Father comes then He lights the lamp of the soul. The soul has forgotten itself that I am a soul. Everyone considers himself to be a body. So, yes, you can do service in it. But you will become fair by taking Krishna in your hand. How will you become fair by holding Krishna in your hand? Explain - You will hold him in the intellect-like hand. It is not about this hand. Now he has a black face. He will become fair. If you tie this rakhri of purity and if you sit on the pyre of knowledge. What? It is said - fire of knowledge, fire of Yoga, is not it? So, this is an explanation, is not it? So, the Father gives an explanation, doesn't He? Now you do listen. You observe just the expressions. But you listen to everything. Everyone listens; poor fellows listen now. Well, she has gone. There is nobody here who could do service and explain. Or someone must be doing service also. Well, if they do service, they report to Baba. They must be narrating the news now. But Baba does not have any hope that someone can go here and do service. Achcha, Om Shanti.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 04 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2621, दिनांक 26.08.2018
VCD 2621, Date 26.08.2018
प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning class dated 26.8.1967
VCD-2621-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-18.54
Time- 00.01-18.54


प्रातः क्लास चल रहा था - 26.8.1967. शनिवार को आठवें पेज के मध्यादि में बात चल रही थी रखड़ी बांधने के बारे में। बच्चे सुनते तो हैं। एक्सप्रेशन उनके तुम देखते भी हो। अब ये तो चली गई। और यहाँ तो कोई ऐसा है नहीं। माने विदेश की सेवा करने वाली चली गई। और यहाँ कोई है नहीं सारे तमोप्रधान बने पड़े हैं इंडिया में जो सर्विस जाकर कर सकें रखड़ी बंधन की। जैसे समाचार सुनाते हैं वो आकरके समाचार सुनाते होंगे, परन्तु बाबा को तो कोई उम्मीद नहीं है। क्या? वो विदेश की सेवा करने वाली तो चली गई। और यहाँ वालों में तो कोई उम्मीद नहीं है। यहाँ कोई सर्विस का जाकरके कर सकते हैं। जन्माष्टमी है ना। यहाँ तो कर सकते हैं। क्योंकि विदेशों में तो जन्माष्टमी मनाई नहीं जाती है। तो यहाँ करें। नीचे भी कर सकते हैं। ऊपर में भी कर सकते हैं। नीचे आबू रोड में चित्र लेकरके जाएं। ये चित्र तो अपने पास है ही। कौनसा चित्र? हँ? कृष्ण आ रहे हैं। हँ? सीधे हाथ में स्वर्ग का गोला है। और पाँव में लात मार रहे हैं नरक की दुनिया को। वो चित्र तो है अपने पास। और उसके साथ हमारे पास जो चित्र है वो गोरे मुँह का है। काला भी एक चित्र उठाय लेना चाहिए। और उस चित्र के साथ राम का भी उठाना चाहिए। क्या? राम का क्यों? काले चित्र के साथ राम का चित्र क्यों उठाएं? हँ? राम का भी उठाओ और उन कृष्ण का भी उठाओ काला चित्र। क्योंकि राम बाप को कहा जाता है। कृष्ण बच्चे को कहा जाता है। इसलिए तो यादगार मन्दिर जो बने हैं कृष्ण के उनमें बच्चा कृष्ण दिखाया जाता है ना।

तो दोनों का चित्र दिखाओ। हाँ, बहुत से मन्दिर हैं जिनमें राम का भी चित्र मिल सकता है। वो राम के चित्र बहुत देते हैं। आने-आने या दो-दो आने के देते हैं। क्या? वो चित्र लेकरके फिर वो यहाँ भी भाषण कर सकते हैं कि यहाँ आओ तो हम तुमको बतावें कि ये रामचन्द्र को और ये कृष्ण को और नारायण को ये काला क्यों बनाय दिया? क्योंकि; क्यों काला बनाय दिया है? क्योंकि इनके पुरुषार्थी जीवन की यादगार है। जब पुरुषार्थ करते थे तब काले थे। काले करम करते थे। तो उनका चित्र भी; चित्र चरित्र की यादगार होती है ना। तो रामचन्द्र बाप को भी काला और कृष्णचन्द्र को भी काला। और कृष्ण बड़ा बनता है तो नारायण तो काला होगा ही। कृष्ण बच्चे का नाम है। स्वयंवर के बाद नारायण नाम पड़ता है। अब समझा काला क्यों किया है? पहले काला और फिर पुरुषार्थ पूरा होता है तो गोरा बन जाता है।

देखो, चलो अब इन देवताओं को तो काला कर दिया। मनुष्य ही देवताएं बनते हैं, नर नारायण बनता है। परन्तु ये शिवलिंग को काला क्यों कर दिया है? हँ? क्या हमेशा काला है? या सुन्दर भी है? है? उसकी यादगार क्या है? हँ? काले की ही यादगार है। कहीं भी किसी भी मन्दिर में चले जाओ काला ही पत्थर रखा होगा शिवलिंग का। गोरे की यादगार है सोमनाथ मन्दिर। तो सोमनाथ मन्दिर जब बना था तब तो द्वापरयुग था। द्वैतवादी युग था जब भक्ति शुरू हुई। उससे पहले तो देवताएं भक्ति करते नहीं थे। देवताएं तो स्वयं ही पवित्र हैं। अपवित्र पवित्र की भक्ति करते हैं। चलो, द्वैतवादी द्वापरयुग शुरू हुआ तो द्वैतवादी धरमपिताएं आ गए। दूसरा-दूसरा धरम लेकरके आ गए, हँ, उनके धरम के स्थापन होने के बाद फिर दूसरा राज्य भी स्थापन हो गया। दूसरी भाषा भी स्थापन हो गई। दूसरा कुल भी स्थापन हो गया। तो द्वैतवादी हो गया ना। देवताओं को कहते हैं अद्वैत। अद्वैत का मतलब एक को मानने वाले। एक को मानेंगे तो देवता बनेंगे। एक को नहीं मानेंगे, दो-दो को मानेंगे; क्या? तो देवता नहीं बनने वाले।

तो द्वैतवादी द्वापरयुग जब धरमपिताएं आए तो शिवलिंग क्यों काला बनाय दिया? शिव तो सारे संसार को गोरा बनाने वाला है। और वो तो सदा गोरा है। शिव कभी काला बनता है क्या? काला तो नहीं बनता। परन्तु जो काला नहीं बनता, जो गोरा नहीं बनता, सदैव एकरस है, तो उसकी पूजा होती है क्या? हँ? शिव की पूजा नहीं होती? होती है या नहीं होती है? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) अच्छा? शिव पूज्य, पुजारी बनता है? वाह पट्ठे, भूल गए। हँ? शिव पूज्य बनता है? पुजारी बनता है? पूज्य क्यों नहीं बनता? हँ? पूज्य क्यों नहीं बनता? पुजारी क्यों नहीं बनता? जब पवित्र है, सदा पवित्र है, एवर प्योर है, तो एवर प्योर की तो सदा पूजा होनी चाहिए। हँ? (किसी ने कुछ कहा) शिवलिंग में हीरा? शिवलिंग में हीरे की पूजा होती है? अरे? हीरा तो पत्थर है। शिवबाबा कभी पत्थर बनता है क्या? हँ? शिव ज्योतिबिन्दु जो सदा शिव कहा जाता है, सदा कल्याणकारी कहा जाता है, वो कभी अकल्याणकारी बनता है, काला बनता है क्या? काले कर्म करता है, चोरी छुपेरी, डकोरी तो फिर काला चित्र बनाय दिया। क्या? जो स्मगलर होते हैं ना, हँ, काला काम करते हैं छुपके काम करते हैं गोर्मेन्ट से या मैदान में करते हैं दुकान खोल के? नहीं। काला काम करते हैं पीछे से।

तो ये जो शिवलिंग है वो क्यों काला बनाय दिया? वो पूज्य बनता है? बनता है? पुजारी भी बनता होगा फिर? जो पूज्य बनता है सो पुजारी बनता है। पूज्य नहीं बनेगा तो पुजारी भी नहीं बनेगा। तो शिव जिस आत्मा का नाम है वो पूज्य पुजारी बनता है? शिव जिस आत्मा का नाम है सुप्रीम सोल गॉड फादर का, हँ, वो जब आता है, अपनी इच्छा से आता है, खुदा नाम रखा है, खुद आता है, तो जब वो अकर्ता है, अकर्ता बताया ना, अकर्ता है, कुछ करता ही नहीं है तो उसका गायन होगा, पूजन होगा? क्या? अरे? वो जब निराकार है तो न पूज्य है, न पुजारी है। फिर जब साकार शरीर में प्रवेश करता है, आदम में कहो, अर्जुन में कहो, हँ, आदिनाथ में कहो, क्योंकि सारी सृष्टि का नाथ बनता है, विश्वनाथ कहा जाता है, तो उसमें प्रवेश करता है, तो भी कहता है न मैं पूज्य बनता हूँ, न मैं पुजारी बनता हूँ। हाँ, जिसमें प्रवेश करता है तो वो संग के रंग से, याद से शिव समान बन जाता है। क्या? शिव नहीं बन जाता। शिव बन जाए तब तो क्या होगा? हँ? वो 5000 साल इस सृष्टि पर रहना ही नहीं पड़े। शिव तो 5000 साल इस सृष्टि पर पार्ट शिव की आत्मा नहीं बजाती। वो तो सिर्फ कलियुग के अंत और सतयुग के आदि में आती है जिसे कहते हैं दोनों युगों का संगम। बोला ना गीता में संभवामि युगे युगे। हर युग में आता हूँ। तो उन्होंने ये अर्थ लगा दिया युगे-युगे का। लेकिन असली अर्थ है सतयुग और कलियुग, दो युगों के बीच में आता हूँ।

तो आता हूँ का मतलब क्या? जैसे बच्चा संसार में आता है तो प्रत्यक्ष होता है ना। तो ऐसे ही कलियुग का अंत और सतयुग की आदि। वो घड़ी में वो प्रत्यक्ष होता है। तो कलियुग की शूटिंग में भी आता है और सतयुगी शूटिंग में भी आता है। दोनों का मेल हुआ ना। तो जब मेल हुआ तो कलियुगी शूटिंग में जिसमें आता है वो काला पार्ट बजाता होगा या गोरा पार्ट बजाता होगा? कलियुगी शूटिंग में। हँ? काला ही पार्ट बजाता होगा। क्योंकि जब शिव बाप प्रत्यक्ष हो संसार में तो जिसमें प्रवेश करता है वो बच्चा भी प्रत्यक्ष हो। बाप और बच्चे का जन्म इकट्ठा है ना। तो दोनों को काला दिखाय दिया। क्योंकि जो लिंग है, बड़ा रूप, वो है जिसमें प्रवेश करता है, शरीरधारी, वो शरीर की यादगार, रथ की यादगार है काला लिंग। और सोमनाथ मन्दिर में द्वापर के आदि में जब द्वापर सात्विक था, सात्विक, सतोप्रधान स्टेज थी, तो उस समय ऋषियों-मुनियों ने वो उसमें हीरा दिखाया। हीरा दिखाने का मतलब है, जो इस सृष्टि का हीरो पार्टधारी है, जो सृष्टि के आदि में हीरो और सृष्टि के अंतिम जन्मों तक भी हीरो, जब तक शिव बाप प्रवेश न करे। शिव बाप के प्रवेश करते ही वो जीरो बनना शुरू हो जाता है।

तो देखा, शिव को भी समझते हैं काला। इसलिए ऋषियों-मुनियों ने बनाय दिया उसको भी काला। अब वास्तव में शिव काला नहीं बनता। शिव जिस आदम में प्रवेश करता है, जो इस मनुष्य सृष्टि का पहला आदमी है, पहला इंसान है जो आत्मिक स्थिति की शान में सबसे पहले टिक जाता है, तो उस इंसान की यादगार है शिवलिंग। क्या? हाँ, उसमें जो हीरा है वो बाप समान बनने की यादगार है। बाकि ऐसे नहीं कि बाप है। इसलिए मुसलमान लोग भी कहते हैं आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं, लेकिन खुदा के नूर से आदम जुदा भी नहीं।

तो बाबा ने प्रश्न किया। क्या हमेशा काला है या सुन्दर भी है शिवलिंग? हँ? हँ? शिव का लिंग हमेशा काला है या सुन्दर भी है? सुन्दर भी है और फिर काला भी है। बाकि शिव न काला बनता है न गोरा बनता है। अच्छा, जब काला भी नहीं बनता, गोरा भी नहीं बनता, तो नाम शिवलिंग क्यों दे दिया? फिर तो उस बच्चे का नाम देना चाहिए जो शिव का बड़ा बच्चा है, शिव को पहले पहचानता है, शिव से पहले वर्सा लेता है आत्मिक स्थिति का, विश्व की बादशाही का। तो इसका क्या राज़ है? हँ? शिव निराकार के मुकर्रर रथ है। कौन? आदम। और जो हैं वो टेम्पररी रथ हैं। इसीलिए बाप कहते मैं जिसमें आता हूँ, तो जिसमें प्रवेश करूंगा ज्ञान का बीज डालने के लिए, बाप का काम क्या होता है? माता में बीज डालना। तो जिसमें ज्ञान का बीज डालने के लिए प्रवेश करता हूँ पहले-पहले वो बड़ी माता हो गई। बाद में खुदा-न-खास्ता अगर उसकी लाश गुम हो जाए, शरीर छूट जाए, कोई बात हो जाए, तो दूसरे जिनमें प्रवेश करता हूँ उनका नाम भी ब्रह्मा देता हूँ। तो उनका नाम ब्रह्मा तो देता हूँ परन्तु उनको मुकर्रर रथ नहीं कहा जाएगा। क्यों? जो आदि सो अंत। आदि नहीं तो अंत भी नहीं। जब अंत भी नहीं, आदि भी नहीं तो मुकर्रर कैसे? आदि होगा तो मध्य में भी होगा, तो अंत में भी होगा। इसलिए वो मुकर्रर रथ पहला। तो ये परंपरा पड़ गई भारतवर्ष में। क्या? कि जो भी भारतवासी हैं वो जीवन में एक स्त्री करते हैं, वो शरीर छोड़ जाए तो दूसरी स्त्री कर लेते हैं। इसलिए मुरली में बोला कि भारत में तो पुरुष स्त्री को जूती समझते हैं। एक जूती गई, दूसरी लेते हैं। दूसरी गई तीसरी लेते हैं, चौथी लेते हैं। तो किसको फालो करते हैं? हँ? उस बाप ने आके जो परंपरा डाल दी उसी परंपरा को फालो (करते हैं)। (क्रमशः)

A morning class dated 26.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the eighth page on Saturday was about rakhribandhan. Children do listen. You also observe their expressions. Well, she left. And here, there is no such person. It means that the one who serves the foreign countries has left. And there is nobody here. Everyone has become too tamopradhan in India to go and do the service of rakhribandhan. For example, they narrate news; they must be coming and narrating the news, but Baba does not have any hope. What? That lady who serves the foreign countries has left. And among those living here, there is no hope. Someone can go and do service here. There is Janmashtami, is not it? You can do here. It is because Janmashtami is not celebrated in the foreign countries. So, you should do here (in Mount Abu). You can do below (in Aburoad, on the foothills of Mount Abu). You can do up [here] also. You can take the pictures to Abu Road. We have these pictures. Which picture? Hm? Krishna is coming. Hm? There is the sphere of heaven in the right hand. And he is kicking the world of hell with his leg. That picture is with us. And the picture that we have along with it is of a fair face. You should pick up one dark picture also. And along with that picture you should pick up a picture of Ram also. What? Why of Ram? Why should you pick up the picture of Ram along with the dark picture? Hm? Pick up the picture of Ram also and pick up the dark picture of that Krishna also because the Father is called Ram. Child is called Krishna. This is why in the memorial temples that have been built for Krishna, the child Krishna is depicted, is not he?

So, show the picture of both of them. Yes, there are many temples where you can find the picture of Ram also. They give many pictures of Ram. They sell it for an Anna or two Annas. What? Take those pictures and then you can also deliver lectures here that come here so that we could tell you as to why this Ramchandra and this Krishna and Narayan have been made dark? It is because; why have they been made dark? It is because it is a memorial of their purusharthi life. They were dark when they used to make purusharth. They used to perform dark actions. So, their pictures also; pictures (chitra) are memorials of the character (charitra), aren't they? So, the Father Ramchandra has also been made dark and Krishnachandra has also been made dark. And when Krishna grows up, then Narayan will be dark only. Krishna is the name of the child. He gets the name Narayan after marriage. Well, did you understand why he has been made dark? First dark and then, when his purusharth is completed, then he becomes fair.

Look, okay, well, these deities have been made dark. It is the human beings only who become deities; a man becomes Narayan. But why has this Shivling been made dark? Hm? Is he dark forever? Or is he fair as well? Is he? What is his memorial? Hm? There is a memorial of the dark one only. Go anywhere to any temple, the Shivling placed there will be of a black stone only. The memorial of the fair one is the temple of Somnath. So, when the temple of Somnath was built, then it was the Copper Age. When Bhakti started it was a dualistic Age. Before that the deities did not used to do Bhakti. Deities are themselves pure. Impure ones do the Bhakti of the pure ones. Okay, when the dualistic Copper Age started, then the dualistic founders of religions came. They came along with different religions; after the establishment of their religion, another kingdom was also established. Another language also started. Another clan was also established. So, they became dualistic, did not they? Deities are called advait (non-dualist). Adwait means those who believe in one. If you believe in one, you will become deities. If you do not believe in one, if you believe in two; what? Then you will not become deities.

So, why was the Shivling made black when the founders of religions came in the dualistic Copper Age? Shiv is the one who makes the entire world fair. And He is ever fair. Does Shiv ever become dark? He does not become dark. But the one who does not become dark, the one who does not become fair, remains uniform always, is He worshipped? is not Shiv worshipped? Is He worshipped or is not He? Hm?
(Someone said something.) Achcha? Does Shiv become worshipworthy, worshipper? Wow lad, you have forgotten. Hm? Does Shiv become worshipworthy? Does He become a worshipper? Why doesn't He become worshipworthy? Hm? Why doesn't He become worshipworthy? Why doesn't He become a worshipper? When He is pure, when He is ever pure, then the ever pure one should be worshipped forever. Hm? (Someone said something.) Diamond in the Shivling? Is the diamond in the Shivling worshipped? Arey? The diamond is a stone. Does ShivBaba ever become a stone? Hm? The point of light Shiv, who is called Sadaa (forever) Shiv, forever benevolent, does He ever become non-benevolent, does He become dark? Does He perform dark actions like stealing, hiding, dacoity because of which His picture has been made dark? What? Do the smugglers perform dark actions, work stealthily hiding from the government or do they do it in an open ground by opening a shop? No. They perform dark actions from behind.

So, why has this Shivling been made dark? Does He become worshipworthy? Does He become? Then does He also become worshipper? The one who becomes worshipworthy becomes a worshipper. If he does not become worshipworthy, then he will not become a worshipper as well. So, does the soul whose name is Shiv become worshipworthy or worshipper? When the soul, the Supreme Soul God Father whose name is Shiv comes, does He come out of His own desire? He has been named Khuda; He comes on His own (khud); so, when He is akarta (non-doer), He was mentioned to be akarta, wasn't He? He does not do anything at all; so, will He be praised, worshipped? What? Arey? When He is incorporeal, He is neither worshipworthy nor a worshipper. Then, when He enters in a corporeal body, call him Aadam, call him Arjun, call him Aadinath, because he becomes the lord (naath) of the entire world, doesn't he? He is called Vishwanath; so, when He enters in him, at that time also He says that I neither become worshipworthy nor do I become a worshipper. Yes, the one in whom He enters, He becomes equal to Shiv through the colour of His company, through remembrance. What? He doesn't become Shiv. What will happen if He becomes Shiv? Hm? He will not have to remain in this world for 5000 years. Shiv's soul does not play a part in this world for 5000 years. It comes only in the end of the Iron Age and the beginning of the Golden Age, which is called the confluence of both the Ages. It was said in the Gita - Sambhavaami yugey-yugey. I come in every Age. So, they interpreted 'yugey-yugey' to be this. But the true meaning is that I come in between both the Ages.

So, what is meant by 'I come'? For example, when a child comes in the world, he is revealed, is not he? So, similarly, the end of the Iron Age and the beginning of the Golden Age. He is revealed in that moment. So, He comes in the shooting of the Iron Age also and He comes in the Golden Aged shooting also. It is a combination of both the Ages, is not it? So, when it is a combination of both the Ages, then the one in whom he comes in the Iron Aged shooting, does he play a dark part or a fair part? In the Iron Age shooting. Hm? He must be playing a dark part only. It is because when Father Shiv is revealed in the world then the one in whom He enters, that child should also be revealed. The birth of the Father and the child is simultaneous, is not it? So, both have been shown to be dark. It is because the ling, the big form in whom He enters, the bodily being; the dark ling is the memorial of that body, the Chariot. And in the temple of Somnath in the beginning of the Copper Age when the Copper Age was pure, in a satopradhan stage, then at that time the sages and saints depicted the diamond in it. The meaning of showing the diamond, the hero actor of this world, who is a hero in the beginning of the world and a hero in the last births of the world as well until Father Shiv enters in him. As soon as Father Shiv enters in him, he starts becoming zero.

So, did you see, Shiv is also considered to be dark. This is why the sages and saints made Him also black. Well, actually Shiv doesn't become dark. The Aadam in whom Shiv enters, and who is the first man of this human world, who becomes constant in the magnificence (shaan) of soul conscious stage first of all, Shivling is a memorial of that person. What? Yes, the diamond in it is a memorial of becoming equal to the Father. But it is not as if he is the Father. This is why Muslims also say that do not call Aadam as Khuda (God); Aadam is not Khuda, but Aadam is not separate from the light of Khuda either.

So, Baba raised a question. Is the Shivling forever dark or is it fair also? Hm? Is Shiv's ling forever dark or is it fair also? It is fair also and then it is dark also. But Shiv neither becomes dark nor fair. Achcha, when He neither becomes dark nor fair, then why was it named Shivling? Then it should be assigned the name of the child, the eldest child of Shiv, recognizes Shiv first of all and obtains the inheritance of soul conscious stage, of the emperorship of the world first of all from Shiv. So, what is its secret? Hm? There is a permanent Chariot of incorporeal Shiv. Who? Aadam. Others are temporary chariots. This is why the Father says - the one in whom I come, the one in whom I enter to sow the seed of knowledge; what is the task of the Father? To sow the seed in the mother. So, the one in whom I enter to sow the seed of knowledge first of all happens to be the senior mother. Later on, by chance if his corpse vanishes, if he leaves his body, if anything happens, then the other persons in whom I enter, I name them also Brahma. So, I do name them Brahma, but they will not be called the permanent Chariot. Why? Whatever happens in the beginning happens in the end. If there is no beginning, then there is no end as well. When there is no end, no beginning, then how is he permanent? If there is a beginning, then there will be middle also and there will be an end also. This is why that permanent Chariot is first. So, this tradition was started in the Indian region. What? That the residents of India marry once in their life; if she leaves her body, then they marry another woman. This is why it was said in the Murli that in India men consider women to be their shoe. If one shoe is gone, they take up another one. If the second one is gone, they take a third one, fourth one. So, whom do they follow? Hm? They follow the tradition which that Father came and started. (Continued)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 06 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2621, दिनांक 26.08.2018
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प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning class dated 26.8.1967
VCD-2621-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 18.55-37.15
Time- 18.55-37.15


तो पूछा – हमेशा काला है शिवलिंग या सुन्दर भी है? तो जवाब आया – सुन्दर भी है, काला भी है। लेकिन शिव का लिंग; लिंग माने यादगार, निशानी। क्योंकि शिव तो निराकार है, उसकी निशानी साकार रह जाती है इस सृष्टि में। तो वो शिवलिंग कहा गया। वो है काला माने आदम वाली आत्मा। काले ते काली भी बनती है कलियुग के अंत में और सतयुग के आदि में सुन्दर भी बनती है।

तो ये कृष्ण को भी सुन्दर और फिर श्याम को क्यों श्याम कह देते हैं? सुन्दर और श्याम। कृष्ण को दोनों नाम क्यों दे दिया? हँ? तो वो तो समझते हैं शास्त्रकार और उनके फालोअर्स कि सृष्टि जब शुरू हुई तो पहले-पहले कोई नहीं था। पहले कृष्ण आया इस सृष्टि पर। तो कृष्ण को कह देते हैं लेकिन कहते हैं सागर में आया। और उनकी बुद्धि में ये नहीं आता है कि सागर कोई स्थूल सागर की बात है या ये दुनिया कलियुग के अंत में विषय सागर बन जाती है; क्या? कि क्षीर सागर बन जाती? क्या बनती है? विषय सागर बन जाती है। तो उस विषय सागर में जहाँ खूब जोर से हिलोरें आती हैं ज्ञान की, हँ, जब शिव बाप प्रवेश करते हैं, उस समय घोर कलियुग चलता है। तो प्रत्यक्ष होते हैं तब भी घोर कलियुग। तो सागर में ही प्रवेश करेंगे ना। सागर है धरणी से सदैव अटैच रहने वाला। वो तो स्वयं तो प्रवेश करने वाला कौन है? सूर्य है। वो तो सदैव रोशनी देने वाला है। वो तो कभी अंधकार में? सूर्य कभी अंधकार में आता है? कभी नहीं आता।

तो अब सवाल ये है कि चलो शिवलिंग को तो काला और गोरा बनाय दिया। द्वापर के आदि में जब भक्ति शुरू की तो गोरा भी है उसमें और वो जिसमें प्रवेश किया वो लाल-लाल लाइट का गोला भी है। ऐसे दिखाते हैं ना। तो लाल लाल गोला का मतलब है जब प्रत्यक्ष होता है उस समय ज्ञान और योग का आग का गोला बन जाता है। क्या? ज्ञानाग्नि से भरपूर और योगाग्नि से भरपूर। तो द्वापरयुग में यादगार बनाई गई द्वापर की आदि में सोमनाथ मन्दिर में वो ऐसी ही बनाई गई कि उसमें वो शिव का जो बच्चा, बड़ा बच्चा है जिसकी यादगार है शिवलिंग, जो शिव समान बनता है, तो वो लिंग भी गोरा है माने लाल-लाल है। जैसे आदमी नौजवान बनता है ना, आदमी हो, कन्या हो, औरत हो, तो जब एकदम नौजवानी चढ़ती है तो चेहरा कैसा हो जाता है? हँ? लाल-लाल हो जाता है। रूहानियत चढ़ जाती है ना। तो ऐसे ही वो लाल लिंग दिखाया है।

अच्छा श्याम क्यों कह देते हैं फिर? श्याम इसलिए कह देते हैं कि जब वो ही देहधारी आत्मा आदम की कलियुग के अंत में काली बनती है, तमोप्रधान बनती है, छुप-छुप के कर्म करती होगी; दुनिया से चोरी करके करती होगी कि साहूकार बनके करती होगी? हँ? चोरी से करती होगी। उन्होंने लिख दिया मक्खन चुराया। अरे, क्या मक्खन चुराया? समाज से भी चोरी, परिवारवालों से भी चोरी; और? और गोर्मेन्ट से भी, गोर्मेन्ट से क्या? गोर्मेन्ट से भी चोरी। तो उसे श्याम कहेंगे? काला कर्म करने वाला कहेंगे कि गोरा कहेंगे? काला कर्म करने वाला। तो श्याम सुन्दर नाम पड़ गया। श्याम नाम पहले; पहले होता है काला। तो शिव बाप प्रवेश करते हैं तो धीरे-धीरे पुरुषार्थ करते-करते कलियुग के अंत की शूटिंग होते-होते उस आत्मा के लिए आगे आ जाता है सुप्रीम बाप। तो गोरा, लाल-लाल लिंग बन जाता है।

हँ, तो कृष्ण को भी श्याम सुन्दर कह दिया। तो रामचन्द्र को भी सुन्दर और श्याम क्यों कहते हैं? हँ? आओ तो हम इसको भी समझाएं। क्योंकि राम वाली आत्मा भी बाप का पार्ट है ना। राम बाप को कहा जाता है, कृष्ण बच्चे को कहा जाता है। तो वो राम वाली आत्मा इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर आदि से लेकरके, पहले जनम से लेकरके और 82-83 जनम तक भी सुख में, शान्ति में रहती है। कोई दुख-अशान्ति महसूस नहीं करती। तो वो गोरी हुई या काली हुई? क्या कहेंगे? हँ? 82, 83वें जनम में गोरी कहेंगे। तो राम को भी काला दिखाय दिया। क्यों? क्योंकि 84वें जनम जब शुरू होता है, शिव बाप प्रवेश करते हैं, तभी 84वां जनम शुरू हो जाता है। उस समय से काले कलियुग की शूटिंग उस आत्मा के लिए जोर से शुरू होती है। तो समझा? क्या? शिव को भी काला, कृष्ण को भी काला, नारायण को भी काला और रामचन्द्र को भी काला। फिर? फिर सबको गोरा भी दिखाते हैं।

अभी ये समझाने में तो कोई नाराज़ नहीं होगा। क्या? इसमें कोई नाराज़ होने की बात है? नहीं। ये तो क्लीयर बात है। क्या? कि जो निराकार शिव है, सदा निराकार है, सदा निराकारी, निर्विकारी, निरहंकारी है, वो तो कभी बदलता ही नहीं। तो उसकी यादगार नहीं है गोरा और काला। ये जो मन्दिरों में रामचन्द्र के गोरे भी चित्र रखे हैं, काले भी चित्र रखे हैं, तो वो इस शूटिंग के समय की यादगार है। तो इनके ऊपर समझाना चाहिए। इसके ऊपर तो यहाँ भी टॉपिक के ऊपर बहुत सहज है समझाना। क्या? यहाँ माने? बाबा जहाँ रहते, जहाँ मुरली चल रही माउंट आबू में, तो यहाँ भी टॉपिक के ऊपर बहुत सहज समझाना है। नीचे में भी कोई जाकरके टॉपिक लेकरके ऊपर समझावे। हँ, पर यहाँ कोई में ज्ञान तो है नहीं। क्या कहा? हँ? कोई में ज्ञान नहीं माना? क्या कुमारिका दादी ज्ञानी नहीं थी? हँ? ऐसे क्यों कह दिया - पर यहाँ कोई में ज्ञान तो है नहीं? कुछ भी नहीं है। क्या? एकदम बुद्धू के बुद्धू। कुमारिका दादी को बुद्धू कहेंगे? हँ? क्यों? पहचान ही नहीं। किसकी पहचान नहीं? हाँ। शिव बाप की पहचान ही नहीं। ब्रह्मा को पहचान लिया दादा लेखराज को गोरे-चिट्ठे, लंबे-चौड़े, हट्टे-कट्टे को बस पकड़ लिया, बस देहधारी को पकड़ लिया। उसमें वो जो निराकार शिव आकरके वाणी चलाता है उसको तो पहचाना ही नहीं।

अच्छा, फिर बाद में उन्होंने शरीर छोड़ दिया। 67 की वाणी है ना। 68 बीता और 18 दिन के बाद 69 में शरीर छोड़ दिया। तो पहचानने का सवाल ही नहीं असली चीज़ क्या है? तो जब पहचाना ही नहीं तो फिर किसकी वाणी पे ध्यान देंगे? जिसमें प्रवेश किया दादा लेखराज में उसकी बातों पे चलेंगे या शिव की जो वाणी चली है उस मुख के द्वारा वो पकड़ेंगे? क्या पकड़ा? बुद्धि ने क्या कैच किया? हँ? कुमारिका दादी हों, हँ, और चाहे वर्ल्ड रिनिवल ट्रस्ट का बनाने वाले बड़े-बड़े धुरंधर कहे जाते हों उन्होंने पहचाना किसको? हँ? हाँ, दाढ़ी-मूँछ वाले को पहचाना, ब्रह्मा को। बस उसी की गोद में मगन रहे। ठीक है। गोद के लिए भी बाप बोलते हैं अगर गोद आते समय ये याद रहा कि हम शिवबाबा की गोद में आए हैं तो तो अच्छी बात है। हमारा कल्याण होगा। मुक्ति-जीवनमुक्ति मिलेगी। लेकिन अगर ये याद आ गया ये तो गोरा-चिट्ठा, लंबा-चौड़ा, हट्टा-कट्टा आदमी मिल गया गोद में बैठने के लिए तो फिर उसकी सब इन्द्रियाँ याद आवेंगी कि नहीं? सारी इन्द्रियाँ याद आवेंगी। भ्रष्ट इन्द्रियाँ भी याद आ जाएंगी।

तो फिर देखो इसलिए बाबा कहते हैं शिवबाबा कि इनका चित्र भी न रखो। अरे, इतनी नफरत क्यों? हँ? इनका चित्र भी रखेंगे, फोटो भी रखेंगे तो पतित हो पड़ेंगे। ऐसे बोल दिया। इतनी नफरत से क्यों बोल दिया? क्योंकि ये आत्मा ऐसा पार्ट बजाने वाली है नई सृष्टि में जबसे जन्म लेगी तब से अधोमुखी होके पैदा होगी कि ऊर्ध्वमुखी होगी? अधोमुखी पैदा होगी। खुद भी नीचे जाएगी और अपनी पीढ़ियों को भी नीचे ले जाएगी। और अपने फालोअर्स जो प्रजा है उसको भी गड्ढे में ले जाएगी। गड्ढ़ा क्या होता है? नीचे गिरना क्या होता है? शूटिंग पीरियड में कहाँ से नीचे गिरा? दादा लेखराज वाली आत्मा जो सतयुग में पहला नारायण बनती है, पहली गद्दी का मालिक, कहाँ से गिरना शुरू हुआ? अरे, हाथ-पाँव बांध के बैठ गए।
(किसी ने कुछ कहा।) द्वापर में गिरा? अच्छा? गिरना और उठना शूटिंग में होता है कि द्वापर में होता है? (किसी ने कुछ कहा।) द्वापर में गिरा? द्वापर की शूटिंग में गिरा? कबसे है द्वापर की शूटिंग? हँ? संगमयुग तो 100 साल का है। तो उसका गिरना कब शुरू हुआ? जो उसको फालो करने वाले उसके नक्शे कदम पे चलने वाले सब नीचे गिर गए। बुद्धू के बुद्धू। कुछ भी ज्ञान नहीं।

(किसी ने कुछ कहा।) जबसे बाप गुप्त हो गया। कबसे हो गया गुप्त? अरे, 100 साल में कबसे गुप्त हुआ? मम्मा ने शरीर छोड़ा तबसे गुप्त हुआ। माने उससे पहले? उससे पहले वो औंधे मुख का नहीं था? हँ? उससे पहले कभी नीचे नहीं गिरा? अरे? (किसी ने कुछ कहा।) एक का कंट्रोल था इसलिए कभी नीचे ही नहीं गिरा? फिर हार्ट फेल क्यों हो गया जब एक का कंट्रोल था तो? हँ? फिर जिनको बोल रहे थे कि इनकी बुद्धि में यहाँ कोई को ज्ञान तो है नहीं, कुछ भी नहीं, एकदम बुद्धू के बुद्धू यहाँ के लोग, माउंट आबू मधुबन के वासी? तो जब सारे के सारे ही बुद्धू हैं तो कुमारिका दादी की इतनी खातरी क्यों? मम्मा की जगह उनको क्यों समझ लिया? जो मम्मा को रिगार्ड देते थे ओम राधे मम्मा को वो रिगार्ड कुमारिका दादी को कैसे मिलने लगा? दिया तब मिलने लगा कि बिना दिये मिलने लगा? तो कबसे गिरावट शुरू हुई होगी? (किसी ने कुछ कहा।) जब ज्ञान यज्ञ पिता से लड़ पड़ी। लगभग सामने कहाँ इतनी ताकत थी जो सामने लड़ पड़े? लड़ने की तो बात ही नहीं। सिवा अज्ञानता के बस बोलते थे। ऐसा करम मत करो। वैसा करम मत करो। और गुरु बनके बैठे रहे। मैं कृष्ण की आत्मा हूँ। मैं कृष्ण भगवान हूँ। मैं गीता का भगवान हूँ। मेरी बात मान लो। ऐसे करम मत करो। समझाते थे। ऐसे थोड़ेही कभी लड़ पड़े? उनके सामने लड़ सकता है कोई? हँ? कोई नहीं लड़ सकता।

तो कबसे, गिरावट कबसे आई?
(किसी ने कुछ कहा।) 1969 से गिरावट आई। उससे पहले गिरावट नहीं आई? धत् तुम्हारा... । जब कराची में भागे थे तब गिरावट नहीं आई थी? धोखा देके नहीं भागे? 69 से पहले नहीं गिरावट हुई? हँ? हुई ना गिरावट। कराची में जब अकेले चुपचाप भाग गए पूरे परिवार को छोड़करके तो फिर जो भी परिवार था उसका क्या हाल होगा? परिवार में माँ ही छोड़के चली जाए, बाप और बच्चे रह जाएं, तो बच्चों का क्या हाल होगा? हँ? तो तभी से गिरावट शुरू हो गई। और उस गिरावट का अंत कब हुआ? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) नहीं। 1947 में जब दूसरे ब्रह्मा नामधारियों से सुना। कराची में सुना था कि नहीं सुना था? किससे? दो से सुना। दो माताओं से सुना। तो उन से सुनते-सुनते फिर बुद्धि शुद्ध हुई। फिर 1947 में शिव बाप ने प्रवेश किया तब चढना शुरू हुआ। बाप समझाते तो रहते हैं सर्विस के लिए कि बात, बात है उसको कैसे समझाएं? ऐसे ही समझाएंगे ना। जैसे बताया। ओमशान्ति।

So, it was asked – Is Shivling dark forever or is it fair also? So, the reply came – He is fair as well as dark. But Shiv’s ling; ling means memorial, symbol. It is because Shiv is incorporeal; His symbol, the corporeal remains in the world. So, he was called Shivling. He, i.e. the soul of Aadam is dark. It becomes the darkest one in the end of the Iron Age and also becomes fair in the beginning of the Golden Age.

So, this Krishna is also fair and then why is Shyam called Shyam? Sundar (fair) and Shyam (dark). Why was Krishna given both the names? Hm? So, those writers of the scriptures and their followers think that when the world started, then there was nobody first of all. First Krishna came in this world. So, it is said for Krishna; but they say that he came in the ocean. And it does not strike their intellect that is it about any physical ocean or whether this world becomes an ocean of vices in the end of the Iron Age. What? Or does it become an ocean of milk (ksheer saagar)? What does it become? It becomes an ocean of vices. So, in that ocean of vices, where big waves of knowledge occur, when Father Shiv enters at that time it is complete Iron Age. So, it is complete Iron Age even when He is revealed. So, He will enter in an ocean only, will He not? Ocean remains attached with the Earth always. Who is the one who enters Himself? It is the Sun. He is the one who gives light forever. Does He ever come under darkness? Does the Sun ever come under darkness? He never comes [under darkness].

So, now the question is that okay Shivling has been made dark and fair. In the beginning of the Copper Age, when the Bhakti started, then He is fair also and the one in whom He entered, he is a ball of red light also. It is shown like this, isn’t it? So, the meaning of red ball is that when he is revealed, at that time he becomes a ball of knowledge and Yoga. What? Full of the fire of knowledge and full of the fire of Yoga. So, a memorial was made in the Copper Age, in the beginning of the Copper Age it was made like this in the temple of Somnath that in it the son, the eldest son of Shiv, whose memorial is the Shivling, who becomes equal to Shiv, so that ling is also fair, i.e. red. For example, when a man grows into a youth, be it a man, be it a virgin, be it a woman, when the youth reaches its peak, then how does the face become? It becomes red. The soul consciousness increases, doesn’t it? So, similarly, that red ling has been depicted.

Achcha, why is he then called Shyam? He is called Shyam because when that bodily being soul of Aadam becomes dark, tamopradhan in the end of the Iron Age, it must be performing dark actions stealthily. Would it do so hiding from the world [like a thief] or would it do [openly] like a prosperous person? Hm? It must be doing stealthily. They have written that he stole butter. Arey, which butter did he steal? He stole from the society also, he stole from the family members also; and? And from the government also; what did he do with the government? He stole from the government also. So, will he be called Shyam, will he be called a person who performs dark actions or will he be called a fair one? The one who performs dark actions. So, he got the name Shyamsundar. The name Shyam (dark) is first; first he is black. So, when Father Shiv enters, then while making purusharth gradually, by the end of the shooting of the end of the Iron Age, the Supreme Father comes in the front for that soul. So, he becomes a fair, red ling.

Hm, so, Krishna has also been named Shyam Sundar. So, why is Ramchandra also called Sundar (fair) and Shyam (dark)? Hm? Come, so that we can explain about this as well. It is because the soul of Ram is also the part of the Father, is not it? Father is called Ram. Child is called Krishna. So, that soul of Ram remains in happiness, in peace on this world stage from the beginning, from the first birth to 82-83 births. It does not experience any sorrow or disturbance. So, is it fair or dark? What will be said? Hm? It will be called fair in the 82nd, 83rd birth. So, Ram has also been shown to be dark. Why? It is because when the 84th birth starts, when Father Shiv enters, at that time the 84th birth starts. From that time the shooting of the Iron Age starts for that soul in a strong way. So, did you understand? What? Shiv has also been shown to be dark, Krishna has also been shown to be dark, Narayan has also been shown to be dark and Ramchandra has also been shown to be dark. Then? Then all of them are also shown to be fair.

Well, nobody will be angry if you explain this. What? Is there anything to get angry in this? No. This is a clear thing. What? That the incorporeal Shiv, the forever incorporeal one, forever incorporeal, viceless and egoless never changes at all. Fair and dark is not His memorial. The fair as well as dark pictures of Ramchandra which have been kept in the temples are the memorial of this time of shooting. So, you should explain on this. It is very easy to explain on this topic here as well. What? What is meant by ‘here’? The place where Baba lives, where the Murli is being narrated in Mount Abu, so, it is very easy to explain on this topic here as well. Someone may go and explain on this topic below [i.e. in Aburoad located on the foot hills of Mount Abu] as well. Hm. But, here nobody has the knowledge. What did He say? Hm? What is meant by 'nobody has the knowledge'? Wasn't Kumarika Dadi a knowledgeable person? Hm? Why did He say - nobody has the knowledge here? Nothing. What? Complete fools. Will Kumarika Dadi be called a fool? Hm? Why? There is no realization at all. Whose realization is not there? Yes. There is no realization of Father Shiv at all. She recognized Brahma, Dada Lekhraj, the fair, tall, sturdy, strong one; she just caught the bodily being. She did not recognize at all the incorporeal Shiv who comes and narrates Vani in him.

Achcha, then later he left his body. It is a Vani dated 67, is not it? 68 passed and 18 days later he left his body in 69. So, there is no question of recognizing at all as to what is the real thing. So, when they did not recognize at all, then whose Vani will they pay attention to? Will they follow the words of the one in whom He entered, i.e. Dada Lekhraj or will they catch the Vani that was narrated by Shiv through that mouth? What did they catch? What did their intellect catch? Hm? Be it Kumarika Dadi, hm, and be it those bigwigs who established the World Renewal Trust, whom did they recognize? Hm? Yes, they recognized Brahma, the one with beard and moustache. That is all; they remained immersed in his lap. It is correct. Even for the lap, the Father says - If you remember, while coming to the lap, that we have come to the lap of ShivBaba, then it is a good thing. It will benefit us. We will get mukti-jeevanmukti. But if someone remembers that this is a fair and handsome, tall and sturdy, well-built man that we have found to sit in his lap, then will all his organs come to your mind or not? All the organs will come to the mind. The unrighteous organs will also come to the mind.

So, then look, this is why Baba, ShivBaba says - Do not keep even the photo of this one. Arey, why so much hatred? Hm? If you keep even his picture, even if you keep his photo, you will become sinful. It was said like this. Why was this said with so much hatred? It is because this soul is going to play such part that ever since it is born in the new world, will it be born with a declining stage (adhomukhi) or a rising stage (oordhwamukhi)? It will be born as adhomukhi. It will itself go down and take its generations also downwards. And it will take its followers, the subjects also to the pit. What is a pit? What is meant by downfall? From where did he fall in the shooting period? The soul of Dada Lekhraj who becomes the first Narayan in the Golden Age, the master of the first throne, where did it start falling from? Arey, you are sitting with your hands and legs tied.
(Someone said something.) Did he fall in the Copper Age? Achcha? Does downfall and rise take place during the shooting or in the Copper Age? (Someone said something.) Did he fall in the Copper Age? Did he fall in the shooting of the Copper Age? Since when does the shooting of the Copper Age start? Hm? The Confluence Age is of 100 years. So, when did he start falling? So, all those who follow him, follow his footsteps underwent downfall. They remained fools only. No knowledge.

(Someone said something.) Ever since the Father became incognito. Since when did he become incognito? Arey, since when did He become incognito in 100 years? He became incognito ever since Mama left her body. So, before that? Did he never face downwards before that? Hm? Did he never fall before that? Arey? (Someone said something.) Did he never fall because there was the control of one? Then why did he suffer heart fail when he was under the control of one? Hm? Then the ones whom it was being told that their intellect does not have any knowledge here, nothing, the people here are complete fools, the residents of Mount Abu, Madhuban? So, when all are fools, then why was Kumarika Dadi given special treatment? Why was she considered to be in place of Mama? How did Kumarika Dadi start getting the regard that Mama, Om Radhey Mama used to get? Did she start getting when she was given or did she start getting without being given regard? So, since when did the downfall begin? (Someone said something.) When she started fighting with the Father of the Gyan Yagya. They did not have the power to fight face to face? There is no question of fighting at all. They used to speak out of ignorance. Do not perform such actions. Do not perform such actions. And they continue to sit as gurus. I am the soul of Krishna. I am God Krishna. I am the God of Gita. Believe in me. Do not perform such actions. He used to explain. Did he ever start fighting? Can anyone fight in front of him? Hm? Nobody can fight.

So, since when did the downfall start?
(Someone said something.) The downfall began from 1969. did not downfall begin before that? Damn it.... did not downfall start when he had run away to Karachi? Did he not dupe and run away? did not downfall take place before 69? Hm? Downfall did take place, didn’t it? When he silently ran away to Karachi by leaving the entire family, then what would have been the condition of the family? If the mother herself leaves the family; if the Father and children are left alone, then what will be the condition of the children? Hm? So, the downfall started from there itself. And when did that downfall stop? Hm? (Someone said something.) No. When they heard from other titleholders of Brahma in 1947. Did they hear in Karachi or not? From whom? They heard from two mothers. So, while listening from them, the intellect became pure once again. Then, when Father Shiv entered in 1947, then they started rising. The Father does keep on narrating for service that how should we explain the topic to him? It will be explained like this only, will it not be? Just as it was mentioned. Om Shanti.
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 08 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2622, दिनांक 27.08.2018
VCD 2622, Dated 27.08.2018
प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning Class dated 26.08.1967
VCD-2622-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-22.05
Time- 00.01-22.05

प्रातः क्लास चल रहा था - 26.8.1967. शनिवार को आठवें पेज के मध्य में बात चल रही थी - ये श्याम और सुन्दर के ऊपर समझाना तो बहुत सहज है। नीचे में भी कोई जाकरके इस टॉपिक के ऊपर समझाय सकते हैं। नीचे माने क्या? हँ? ऊँचे तो हुआ सूर्यवंशी जिन्हें विष्णुवंशी कहें। उसके बाद हुआ देवता कुल। फिर उससे नीचे हुआ दैत्य कुल। तो नीचे वालों को भी कोई जाके समझाय सकते हैं। परन्तु यहाँ तो सारे बुद्धू के बुद्धू। यहाँ कोई में ज्ञान है नहीं। यहाँ माने कहाँ? जहाँ बाबा वाणी चलाय रहे हैं वहाँ बाबा के सामने ऐसे कोई बच्चे कुछ भी नहीं हैं जो बाहरवालों को, नीचेवालों को, नीची स्टेज वालों को समझाय सकें। बाकि बाप तो समझाते रहते हैं सर्विस के लिए ऐसे-ऐसे सर्विस करो, कैसे समझाना चाहिए। बाप तो ऐसे ही समझाएंगे ना। बच्चों को लौकिक बाप तो ऐसे समझाते हैं ना। बच्चों को समझाते हैं कि अच्छे गुण धारण करो। बाप का नाम बाला करो। घर का नाम बाला करो। अपने कुल का नाम बाला करो।

देखो, कुल भी तो होते हैं ना। अब तुमको मालूम पड़ा कि हम किस कुल के हैं? हँ? मालूम पड़ा या नहीं मालूम पड़ा? किस कुल के हैं? हँ? सूर्यवंशी कुल के हैं। हँ? हम कोई देवता कुल के नहीं हैं। देवता तो सूर्य, जो ज्ञान सूर्य है, हँ, उससे भी नीचे होते हैं। वो तो बाद वाली पीढ़ी है। ब्राह्मणों की भी पीढ़ियाँ होती हैं ना। नौ कुरी के ब्राह्मण हैं। तो नौ प्रकार के धरम हैं। तुम्हारा ऊँचे ते ऊँचा ब्राह्मण कुल है। क्या? ऊँचे ते ऊँचा ब्राह्मण कुल। ब्राह्मण सो देवता कहे जाते हैं। अब जिस कुल के ब्राह्मण, जिस कुरी के, उसी कुल के देवता बनते हैं। ऊँच ते ऊँच देवता है विष्णु कुल। पीछ होता है दूसरा देवता कुल। और तुम बच्चे हो। नई दुनिया बनेगी, पहला युग शुरू होगा तो तुम बच्चे देवता कुल में होंगे। फिर क्षत्रीय कुल में तुम जन्मते हो, जाते हो। बाकि तो दुनिया नई बनती है ना यहाँ। यहाँ बाप कौनसी दुनिया बनाते हैं? हँ? नई दुनिया स्वर्ग की बनाते हैं ना। नरक की दुनिया तो बाप नहीं बनाते ना।

बाकि दुनिया वालों को तुम रखड़ीबंधन का भी समझाओ। क्या समझाओ? कि बाप आया था, कोई ब्राह्मण के तन में, जिसे शूद्र से ब्राह्मण बनाया, ब्रह्मा द्वारा। फिर वो ब्राह्मण के द्वारा रखड़ी बांधी पवित्रता की। पवित्रता के सूत्र में बांधा। अब सब तो नहीं बंधेंगे। जो देवता कुल की आत्माएं हैं वो ही बांधेंगी, नंबरवार वो भी। तो तुम समझाय सकते हो कि पहले ब्राह्मण राखी बांधता था। हँ? किसकी यादगार? जरूर शिव बाप जिस ब्राह्मण में आते हैं उसके द्वारा सूर्यवंशी बच्चों को पवित्रता की राखी बांधी थी। बाद में फिर ये कन्याएं निकलती हैं पैसा लेने के लिए। आत्मा-आत्मा भाई-भाई। तो हम कन्या हैं तो हम तुम्हें राखी बांधने आए हैं तो कुछ पैसा-वैसा मिल जाएगा। वो सब नीचे गिरते हैं तब होता है। सतयुग में कोई किसी को राखी बंधन बांधने के लिए थोड़ेही जाती है। भाई को भी, कोई को भी हो। पारसी हो, कोई भी हो, सबको भी रक्षाबंधन बांध सकते हो।

ये राखीबंधन का जो बाबा सेवा करने के लिए कहते हैं ना, वैश्याओं की भी सर्विस करो। हँ? वैश्याओं को भी समझाओ कि पवित्र बनेंगी तो तुम मनुष्य से देवता बन जाएंगी। वहाँ तो फिर स्वर्ग में तो जन्म-जन्मान्तर पवित्र रहेंगी। तो समझाय करके फिर बांधना होता है। ऐसे नहीं कि पहले रखड़ी बांधी, फिर समझाया। और रखड़ी बांधने जाओ तो चित्र भी ले जाना चाहिए रखड़ी के साथ में कि देखो ये लक्ष्मी-नारायण हैं ना। भगवान आया था तो राजयोग सिखा के नर अर्जुन को नारायण बनाया था। कोई एक अर्जुन को नारायण थोड़ेही बनाया था। ज्ञान अर्जन करने वाले ढ़ेर थे ना। तो उन सबको पवित्रता की राखी बांधी। पवित्र बने। काले से गोरे हो गए। पहले काले कर्म करते थे, काला मुँह हो गया संसार के सामने, अभी बाप कहते हैं कि मैं आता हूँ तो तुम सबको गोरे कर्म करना सिखाता हूँ। क्या? काला कर्म और सफेद कर्म होता है ना। काली बातें – झूठ-वूठ बोलते रहते हैं तो काली बातें हो गईं। काले संकल्प भी होते हैं। अच्छे शुभ भावना के संकल्प भी होते हैं। गोरे संकल्प। देखो, ये रखड़ी बांधने से पवित्रता की राखी की यादगार है तुम गोरे बन जाएंगे। अभी तो तुम काली हो गई। संसार में तुम्हारा काला मुँह देखते हैं। ये तो नहीं समझते कि ये तो गोरा बनाती हैं, देवता बनाती हैं। जो तुम्हारे पास आते हैं, उनको भी समझते हैं ये गंदे लोग हैं। अच्छी नजर से नहीं देखते हैं। तो अगर नहीं ये बंधन बांधेंगे तो फिर काली की काली ही रह जाएंगी। वैश्य की वैश्या ही रह जाएंगी। विष पीती रहेंगी। मूत पलीती बनती जाएंगी। पद मिलेगा नहीं। स्वर्ग में जाय नहीं सकेंगी।

तो वो बहुत युक्तियाँ हैं बच्ची समझाने की। कोई को भी जाके समझाय सकती हो। सर्विस करने की युक्तियाँ हैं। परन्तु ये ऐसी सेवा करने वाला भी तो कोई हो ना। कुछ विशालबुद्धि हो जो गहराई से एक-एक बात रखड़ीबंधन की, कृष्ण जन्माष्टमी की, हँ, रामनवमी की, दशहरा की, ये सब बातें विशालबुद्धि से समझाय सके। वो ही समझाय सकेगा जिनको सर्विस का शौक होगा। और तो कुछ भी नहीं है। शौक होना चाहिए सेवा करने का। बस। जैसे बाप भी तो सर्विस करने आए हैं ना। हँ? बाप कोई झरमुई-झगमुई करने थोड़ेही आए हैं। हँ? बाप ब्रह्मा के तन में आते हैं तो कोई को तुमने झरमुई-झगमुई करते-करते देखा क्या? हँ? किसी से लड़ाई-झगड़ा करते देखा क्या? नहीं। सर्विस ही समझाते रहें। इतना सहज समझाते हैं बिल्कुल ही।

तो तुम किसको भी समझाय सकते हो। हँ? मैं तो बाहर की दुनिया में जाकरके नहीं समझाऊँगा। हँ? मैं किसको समझाता हूँ? हँ? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ। किसको समझाता हूँ? ब्राह्मणों को समझाता हूँ। हँ? शूद्रों को नहीं समझाता हूँ। शूद्रों की सेवा करके बुलाके लाना और ब्रह्मा का बच्चा बनाना तब वो ब्राह्मण बने। और जब ब्राह्मण बने, पवित्र रहने की प्रतिज्ञा करें, तब फिर उनको मैं पढ़ाता हूँ। तो तुम तो किसी को भी जाके समझा सकते हो। क्या? मैं तो सारी दुनिया के सामने नहीं जाऊँगा ना। और तुम जाओगे तो कोई रखड़ी बंधन के लिए जाओगे, समझाने के लिए जाओगे, जन्माष्टमी की बातें, दशहरे की बात, तो कोई नाराज़ भी नहीं होगा। बिल्कुल नाराज़ नहीं होगा।

हाँ, तो तुम ये जब समझाएंगे ना कि इस दुनिया में कोई मनुष्य मात्र नहीं है जो किसी की सद्गति कर सके। हँ? हज़ारों साल से हिस्ट्री रखी हुई है मनुष्यों की, कोई मनुष्य ऐसे निकला जिसने कोई की सद्गति की हो? हँ? कोई की सद्गति नहीं हुई। बस एक भगवान ही है जो आकरके मनुष्य से देवता बनाते हैं, सद्गति करते हैं। मनुष्य तो किसी का सद्गति नहीं कर सकते। क्यों नहीं कर सकते? हँ? क्योंकि उनका नाम ही है मनुष्य। मनुष्य माने मनु की औलाद। मनु ने क्या किया? उसका मनुआ बहुत चलता था। मन बहुत तीखा दौड़ता था। कभी इधर की बात, कभी उधर की बात। एक जगह, जैसे घोड़ा होता है बिना लगाम का, इधर-उधर दौड़ता ही रहता है। तो ऐसे ही तुम मनु की औलाद हो गए। मनु ब्रह्मा को कहा जाता है। वो तो गड्ढे में ले जाएगा। घोड़े को बुद्धि की लगाम नहीं होगी तो क्या करेगा? गड्ढ़े में ले जाता है। तो उनकी औलाद जो हुए मनु की वो मनुष्य कहे गए।

इस दुनिया में कोई मनुष्य मात्र किसी का सद्गति नहीं कर सकता। कोई भी धरम का हो। क्या? सारी दुनिया के ऊपर अपना वर्चस्व जमाने वाला हो, हँ, लेकिन वो भी किसी की सद्गति नहीं कर सकता। किसके ऊपर भी नहीं सद्गति कर सकता। एक दो के ऊपर रहम कर ही नहीं सकते हैं तो सद्गति क्या करेंगे? ये तो सिवाय एक बाप के कोई रहमदिल नहीं है। हँ? क्यों? एक बाप में ऐसी क्या खास बात? उस बाप को अपना रथ शरीर है ही नहीं। जिनको रथ होता है उनको स्वारथ रहता है। स्वार्थ की पूर्ति होगी तो फिर रहम करेंगे। और स्वार्थ की पूर्ति नहीं होगी और किसी ने थोड़ी गल्ती कर दी तो बस चढ़ बैठेंगे। गुस्सा आ जाएगा। हिंसा करने लग पड़ेंगे। तो एक बाप ही है जो सारी दुनिया के ऊपर रहम करता है। उस एक बाप के सिवाय और दुनिया में रहमदिल कोई है ही नहीं। तो एक की जो महिमा करने वाले हैं तो उस महिमा को सुन करके कौन नाराज़ होगा? हँ? कोई होगा? कोई नाराज़ नहीं होगा। परन्तु फिर उनको समझाना है कि एक कौन? कौन भगवान? कौन खुदा? कौन हैविनली गॉड फादर? तो कहेंगे निराकार क्योंकि सब धरमवाले निराकार को मानते हैं। भारत में भी निराकार को मानते हैं। भले साकार को भी मानते हैं लेकिन निराकार को भी मानते हैं। तुलसीदास ने लिख दिया – सगुणहि अगुणहि नहि कछु भेदा। उभय हरैं भव संभव खेदा। चाहे सगुण साकार हो क्योंकि साकार में ही गुण-अवगुण होते हैं, निराकार तो निर्गुण होता है, उसमें तो कोई गुण नहीं।

तो बताया कि एक जो है उसको पहचानेंगे कौन उस निराकार को? हँ? आत्मा भी तो निराकार है। कब पहचानी जाती है? हँ? आत्मा निराकार गरभ में जो बच्चा होता है उसमें प्रवेश न करे तो कोई पहचान होगी? नहीं। आत्मा तो निराकार ज्योतिबिन्दु, जैसे शिव ज्योतिबिन्दु, उसके बच्चे आत्माएं भी ज्योतिबिन्दु। तो जब तक शरीर धारण न करे तब तक आत्मा भी निर्गुण और उनका बाप जो सुप्रीम सोल है वो भी निर्गुण है। तो उसको पहचानने की बात नहीं होती। पहचाना किसको जाएगा? जब शरीर धारण करेगा तो पहचाना जाएगा। तो ऐसे ही वो सुप्रीम सोल बाप भल निराकार है परन्तु जैसे और मनुष्यात्माएं हैं, भूत-प्रेत होते हैं ना, बन जाते हैं। पाप करते हैं तो भूत-प्रेत भी बनते हैं। और इस दुनिया में तो कोई ऐसा है ही नहीं जो पाप न करता हो। मनसा से पाप करेंगे, संकल्प गंदे-गंदे चलाएंगे, वायब्रेशन खराब करेंगे दुनिया का। वाचा गंदी चलाएंगे। चलाएंगे ना। चलाते हैं। कर्मेन्द्रियों से भी खराब-खराब काम करते हैं दुख देने का।

तो ऐसा तो कोई है ही नहीं जो पाप न करता हो। और पाप करेंगे तो रिजल्ट क्या आएगा? भूत-प्रेत बनते हैं। बहुत पाप करते हैं तो फिर उनको अचानक शरीर छोड़ना पड़ता है। जो दूसरों की हत्याएं करेंगे गुस्से में आकर तो उनकी भी कोई हत्या कर देगा। तो हत्या करने वाले या अपनी हत्या, सुइसाइड करने वाले उनको भूत-प्रेत का जनम मिलता है। तो जैसे वो भूत-प्रेत प्रवेश कर सकते हैं, तो क्या निराकार भगवान प्रवेश नहीं कर सकता? और ये तो गीता में भी लिखा हुआ है – प्रविष्टुम। मैं प्रवेश करने योग्य हूँ। क्या? ज्ञातुम। मैं जानने योग्य भी हूँ। ऐसे नहीं कि भूत-प्रेत कोई प्रवेश करता है तो कोई पहचान नहीं पाता। पहचान है। क्या पहचान है? पहचान ये है कि वो जिसमें प्रवेश किया वो जैसे कर्म करता था, बात करता था, हँ, जैसे दृष्टि-वृत्ति उसकी थी वो दृष्टि-वृत्ति कुछ चेंज आ जाता है। आचार-व्यवहार में चेंज आ जाता है। तो पता तो लग जाता है ना।

तो बताते हैं कि जब मैं प्रवेश करता हूँ तो सवाल पैदा होता है किसमें प्रवेश करूँ? हँ? तो? किसमें प्रवेश करता है? तो क्या जवाब देंगे? हँ? दुनिया में तो 500 करोड़ मनुष्य। और आत्माएं तो प्राणियों के रूप में ढ़ेर की ढ़ेर, 84 लाख तो योनियां ही हैं। हं?
(किसी ने कुछ कहा।) कौन है मुकर्रर रथ? कैसे पता चले? हँ? ये तो कह दिया मुकर्रर रथ में प्रवेश करते हैं। अब ये कैसे पता चले एक रथ में प्रवेश करेंगे, दूसरा कहेगा – हैं, हम भी तो मुकर्रर रथ बन सकते हैं। तो? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) 20-25 साल की आयु वाले में प्रवेश करते हैं? वानप्रस्थ अवस्था में प्रवेश नहीं करते? अरे, ये क्या बोल दिया? अनुभवी तन में प्रवेश करता है या छोटे बच्चे में प्रवेश करेगा? छोटे बच्चे में प्रवेश करेगा या कम अनुभवी में प्रवेश? बूढ़ा ज्यादा अनुभवी होता है कि कम उमर वाला ज्यादा अनुभवी होता है? बुढ़ापे पे आ जाते हैं, जिंदगी देखी हुई है तो उसमें ही प्रवेश करते हैं। लेकिन ऐसे तो दुनिया में बहुत हैं ना। ऐसे-ऐसे साठ साल के तो बहुत हैं। बूढ़े-बूढ़े लोग बहुत हैं। तो? उनके प्रवेश करने का वो कुछ नियम है, कानून है? कोई नियम कानून नहीं? जिसको चाहेंगे उसी में प्रवेश कर जाएगा? अरे नहीं। धरमपिताएं आते हैं। तो जितना ऊँच धरमपिता होगा उतने ही ऊँच रथ में प्रवेश करेगा। क्या? नियम है ना। बताया ना कि जो सेकण्ड नारायण है सतयुग का उसमें दुनिया का सेकण्ड नंबर का धरमपिता प्रवेश करता है। थर्ड नारायण है उसमें थर्ड नंबर का धरमपिता प्रवेश करेगा। फोर्थ क्लास नारायण है, तो फोर्थ नारायण में प्रवेश करता है। जैसे हर धरम की डिनायस्टी चलती है ना। ऐसे ही देवताओं की भी डिनायस्टी चली है। तो ये नियम हुआ कि जो जितना ऊँचा धरमपिता होगा उतने ऊँच ते ऊँच में प्रवेश करेगा। ऊँच किसे कहते हैं? ऊँचे करम करे तो ऊँचा। नीच करम करे तो नीचा। (क्रमशः)

A morning class dated 26.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the middle of the eighth page on Saturday was – It is very easy to explain on this Shyam (dark) and Sundar (fair). Someone can go down [to Abu Road] and explain on this topic. What is meant by ‘down’? Hm? Highest are the Suryavanshis, who could be called Vishnuvanshis. After that is the deity clan. Then below that is the demoniac clan. So, someone can go and explain to the below ones also. But here everyone is a fool. Nobody has knowledge here. Here refers to which place? The place where Baba is narrating the Vani, there are no children in front of Baba who could explain to the outsiders, to the lower ones, to those in a lower stage. But the Father keeps on explaining about service that you should do service in such and such manner and how you should explain. The Father will explain like this only, will He not? The lokik (worldly/physical) Father explains to the children like this only, doesn’t he? He explains to the children that you should inculcate good virtues. Make your Father famous. Make your family famous. Make your clan famous.

Look, there are clans as well, aren’t there? Now you have come to know that you belong to which clan. Hm? Did you get to know or not? To which clan do you belong? Hm? You belong to the Suryavanshi clan. Hm? We do not belong to the deity clan. Deities are below the Sun, the Sun of Knowledge. That is a latter generation. There are generations of Brahmins also, aren’t there? There are nine categories of Brahmins. So, there are nine types of religions. Yours is the highest on high Brahmin clan. What? The highest on high Brahmin clan. You are called Brahmins who become deities. Well, whichever clan, category of Brahmin someone is, he/she will become the deity of the same clan. The highest on high deity is Vishnu clan. Next is the second deity clan. And you are children. When the new world is established, when the first Age begins, then you children will be in the deity clan. Then you are born, you go in the Kshatriya clan. But the world becomes new here, doesn’t it? Which world does the Father establish here? Hm? He establishes the new world of heaven, doesn’t He? The Father does not establish a world of hell, does He?

You explain to the people of the world about rakhribandhan also. What should you explain? That the Father had come in a Brahmin’s body, who was made Brahmin from Shudra through Brahma. Then he tied the rakhri of purity through a Brahmin. He tied them in the thread of purity. Well, everyone will not be tied. Only the souls of the deity clan will tie that too numberwise. So, you can explain that earlier Brahmins used to tie rakhi. Hm? Whose memorial? Definitely, the Brahmin in whom the Father Shiv comes, He had tied the rakhi of purity to the Suryavanshi children. Later on these virgins emerge to seek money. Souls are brothers. So, we are virgins, we have come to tie rakhi to you so that we could get some money. All that happens when downfall takes place. Nobody goes to tie rakhi to anyone in the Golden Age. Be it the brother; be it anyone. Be it a Parsi, be it anyone. You can tie the rakshabandhan to anyone.

This service of Rakhibandhan that Baba asks you to do, doesn’t He? You should do the service of the prostitutes also. Hm? Explain to the prostitutes also that if you become pure, then you will become deities from human beings. There then you will remain pure birth by birth in heaven. So, you have to tie [the rakhi] after explaining. It is not as if you tie the rakhi first and then explain. And when you go to tie a rakhi, you should carry the picture along with the rakhi that look, these are Lakshmi-Narayan, aren’t they? When God had come, He taught Rajyog and transformed man Arjun to Narayan. He had not made one Arjun as Narayan. There were numerous persons who had earned knowledge. So, He tied the rakhi of purity to all of them. They became pure. They became fair from dark ones. Earlier they used to perform dark actions; their face became black in front of the world; now the Father says that when I come I teach you all to perform fair actions. What? There are dark actions and fair actions, aren’t there? Dark topics – they keep on speaking lies – so, they are dark topics aren’t they? There are dark thoughts as well. There are thoughts with good intentions also. Fair thoughts. Look, by tying this rakhri, it is a memorial of the rakhi of purity that you will become fair. Now you have become dark. The world sees your dark face. They do not feel that these ladies make us fair, make us deities. They also think about those who come to you that they are dirty people. They do not view them with a good eye. So, if you do not tie this bond then you will remain dark only. You will remain a prostitute only. You will continue to drink poison. You will become moot-paleeti (becoming sinful due to lust). You will not achieve the post. You will not be able to go to heaven.

So daughter, there are many tactics to explain. You can go and explain to anyone. There are tactics to do service. But there should be someone to do such service. He/she should have such broad intellect that he/she could explain each topic of rakhribandhan, Krishna Janmashtami, hm, Ramnavami, Dushehra deeply and with a broad intellect. Only the one who has interest to do service will be able to explain. There is nothing else. One should have interest in doing service. For example, the Father has also come to do service, hasn’t He? Hm? The Father hasn’t come to talk wastefully. Hm? When the Father comes in the body of Brahma, have you observed Him speaking wastefully? Hm? Have you seen Him fighting with anyone? No. He keeps on explaining about service only. He explains in such an easy manner.

So, you can explain to anyone. Hm? I will not go to the outside world and explain. Hm? Do I explain to anyone? Hm? Hm?
(Someone said something.) Yes. Do I explain to anyone? I explain to the Brahmins. Hm? I do not explain to the Shudras. You have to serve the Shudras and bring them and make them Brahma’s child; only then will he become a Brahmin. And when he becomes a Brahmin, when he vows to remain pure, then I teach them. So, you can go and explain to anyone. What? I will not go in front of the entire world, will I? And if you go, you will go for rakhribandhan, you will go to explain the topics of Janmashtami, the topic of Dussehra; so, nobody will get angry. He will not be angry at all.

Yes, so when you explain that there are no human beings in this world who could cause the true salvation of anyone. Hm? History of thousands of years of human beings is available; did any human being emerge who caused true salvation (sadgati) of anyone? Hm? Nobody achieved sadgati. It is God alone who comes and makes you deities from human beings and causes your true salvation. Human beings cannot cause sadgati of anyone. Why can’t they cause? Hm? It is because their name itself is manushya. Manushya means child of Manu. What did Manu do? His mind used to work a lot. His mind used to run very fast. Sometimes a topic of this side; sometimes a topic of that side. One place; for example, there is a horse without reins; it keeps on running here and there. So, similarly, you are children of Manu. Brahma is called Manu. So, he will take you to the pit. If the horse does not have the reins of intellect, then what will it do? It takes you to the pit. So, the children of Manu were called Manushya (human beings).

In this world, no human being can cause the sadgati of anyone. Be it a person from any religion. What? Be it someone who exerts his domination over the entire world, hm, but he cannot cause sadgati of anyone. He cannot cause anyone’s sadgati. When they cannot show mercy upon each other, then how will they cause sadgati? Nobody except one Father is merciful. Hm? Why? What is the special thing in one Father? That Father does not have a Chariot, body of His own at all. Those who have a Chariot (rath or body) have selfishness (swaarth). If their selfishness is fulfilled, then they will show mercy. And if their selfishness is not fulfilled and if anyone commits a little mistake, then they will sit on him. They will become angry. They will start indulging in violence. So, there is only one Father who shows mercy upon the entire world. Nobody except that one Father is merciful in the world. So, if you praise that One, who will be angry on listening to that praise? Hm? Will anyone be angry? Nobody will be angry. But then they should be explained that who is that One? Which God? Which Khuda? Which Heavenly God Father? So, they say incorporeal because people of all the religions believe in the incorporeal. In India also people believe in the incorporeal. Although they believe in the corporeal also, yet they believe in the incorporeal also. Tulsidas wrote – Sagunahi agunahi nahi kachu bheda. Ubhay harain bhav sambhav kheda. Be it a virtuous corporeal person because it is the corporeal person only who has virtues or vices; incorporeal one is nirgun (one without any attributes); He does not have any attributes (gun).

So, it was told that if you recognize that One; who? That incorporeal? Hm? The soul is also incorporeal. When is it recognized? Hm? If the soul does not enter in a child in a womb will it be recognized? No. The soul is incorporeal point of light. Just as Shiv is a point of light, His children, the souls are also points of light. So, unless it assumes a body, the soul is also nirgun (without any attributes) and their Father, the Supreme Soul is also nirgun. So, there is no question of recognizing Him. Who will be recognized? When He assumes a body, then He will be recognized. So, similarly, although that Supreme Soul Father is incorporeal, yet, just as there are other human souls, there are ghosts and devils, they become. When they commit sins, they become ghosts and devils as well. And in this world there is no such person who does not commit any sin. They commit sins through the mind, create dirty thoughts, and spoil the vibrations of the world. They speak dirty words. They speak, don’t they? They speak. Even through the organs of action they perform evil acts of giving sorrows.

So, there is none who doesn’t commit any sin. And if you commit sins, what will be the result? You become ghosts and devils. If they commit a lot of sins, then they have to leave their body suddenly. Those who murder others in a fit of anger will be murdered by someone, too. So, those who murder others or kill themselves, commit suicide get the birth of a ghost or a devil. So, just as those ghosts and devils can enter, can’t the incorporeal God enter? And it has also been written in the Gita – Praveshtum. I am capable of entering. What? Gyaatum. I can also be known. It is not as if someone cannot recognize if a ghost or devil has entered in someone. One can recognize. What is the indication? The indication is that there is some change in the way the person in whom it has entered used to perform actions, speak, hm, see or create vibrations. There occurs a change in the behavior and activity. So, you can know, can’t you?

So, He says that when I enter, then a question arises as to which person should I enter? Hm? So? In whom does He enter? So, what is the reply you will give? Hm? There are 500 crore human beings in the world. And the souls in the form of living beings are numerous; there are 84 lakh species itself. Hm?
(Someone said something.) Who is the permanent Chariot? How can you know? You said that He enters in the permanent Chariot. Well, how can you know? If He enters in one Chariot, the other one will say – Hm, I can also become a permanent Chariot. So? Hm? (Someone said something.) Does He enter in someone in the age group of 20-25? Doesn’t He enter in someone who is in the vaanprasth (retired) stage? Arey, what did you say? Does He enter in an experienced body or will He enter in a small child? Will He enter in a small child or in a less experienced person? Is an old man more experienced or a young man more experienced? When someone becomes old, when he has seen the entire life, then He enters in that person only. But there are many such persons in the world, aren’t there? There are many such sixty year olds. There are many old persons. So? Is there any rule, any law for His entry? Is there no rule, law? Will He enter in any person that He wishes? Arey, no. Founders of religions come. So, the higher the founder of religion, the higher the Chariot that He enters. What? There is a rule, isn’t it? It was told that the second number founder of religion enters in the second Narayan of the Golden Age. The third number founder of religion will enter in the third Narayan. If it’s fourth class Narayan, he enters in the fourth Narayan. It is as if there is a dynasty of every religion, isn’t it? Similarly, there was a dynasty of the deities also. So, the rule is that the higher the founder of religion, the higher the person that he will enter. Who is called high? If someone performs high actions, he is high. If he performs lowly actions he is low. (Continued)
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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 09 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2622, दिनांक 27.08.2018
VCD 2622, Dated 27.08.2018
प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning Class dated 26.8.1967
VCD-2622-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 22.06-40.17
Time- 22.06-40.17


तो बताया कि मैं उसमें प्रवेश करता हूँ जिसने पूरे 84 जनम, एक जनम भी कम नहीं, आलराउंड पार्ट बजाया। और वो तो मैं ही जान सकता हूँ कि वो निराकार भगवान जो जन्म-मरण के चक्र से न्यारा है वो तो जानता है कि वो आत्मा कौनसी है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर जो आलराउंड पार्ट बजाती है और क्या पार्ट बजाती है, कैसा पार्ट बजाती है? अच्छे पार्टधारी में प्रवेश करेगी या पापी में प्रवेश करेगी जन्म-जन्मान्तर जिसने पाप किये हों? भले अंतिम जनम में तो आकरके सबको नीचे गिरना ही है। नीचे नहीं गिरेंगे तो ऊपर भी नहीं उठेंगे। क्या? गेंद है, पत्थर है, ऊपर फेंक दो। जितनी ऊँचा जाएगा उतना? उतना नीचे भी गिरेगा। तो जो नीच ते नीच गिरते हैं, मैं उसमें प्रवेश करता हूँ। अब सवाल ये है नीचे तो बहुत गिरते हैं। पापी तो बहुत बनते हैं। उस एक ही पापी की क्या बात है? हिसाब ये है कि कोई तो संग के रंग से पापी बनते हैं। क्या? और कोई हैं ही पापी। जैसे बिच्छू है। वो क्या करेगा? वो तो उसको जिसके पास पहुँचेगा उधर डंक मारेगा। सांप है, कितना भी उसको दूध पिलाओ, पालो, मौका लगेगा, वो उसके ऊपर कहीं गल्ती से भी उंगली या पांव लग गया और फट से काट लेगा। जोर से क्रोध आ जाता है।

तो; क्या? नियम क्या हुआ? कोई नियम कानून हुआ? नियम कानून ये हुआ – जैसे माताएं होती हैं ना, तो माताएं बच्चे जब बड़े हो जाते हैं, होशियार हो जाते हैं, तो उनके संग के रंग में आती हैं, रंगती हैं या नहीं रंगती हैं? हँ? रंग जाती हैं ना। सुनी-सुनाई बातों में माताओं को जैसे बहुत विश्वास हो जाता है ना। बच्चों की बात पे तो और ज्यादा विश्वास हो जाता है। तो ऐसे ही वो उसमें प्रवेश करता है जिसका नाम रखता है ब्रह्मा। अब ये तो प्रसिद्ध है भारत में कि चार मुखों वाला ब्रह्मा, पांच मुखों वाला ब्रह्मा। माने चार-पांच नाम के नामधारी कोई हुए हैं ब्रह्मा के रूप में। तो उनमें जो अव्वल नंबर ब्रह्मा है उसी में प्रवेश करेगा। अव्वल नंबर ब्रह्मा है तो माँ का काम क्या है? माँ में कौनसा गुण विशेष होता है? माँ में कोई खास गुण होता है या नहीं बाप के मुकाबले? हँ? सहनशक्ति। तो सहनशक्ति जो है वो माताओं में बड़ी प्रबल होती है। बच्चे कितना भी परेशान करते हैं, तो भी सहन करती है।

तो वो निराकार शिव जिसमें प्रवेश करता है, और उसको जब ज्ञान होता है, भगवान जो ज्ञान सुनाते हैं सृष्टि के आदि, मध्य, अंत का, उस ज्ञान के आधार पर उसको निश्चय होता है कि मेरा ये पार्ट है। क्या? क्या पार्ट है? क्या पार्ट है खास? अरे?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, परमब्रह्म का पार्ट है, ब्रह्मा नामधारियों में परम। परम पार्टधारी। तो फिर वैसा काम भी करना। नाम क्यों रखा? नाम इसीलिए रखा कि वैसा काम करके दिखाए। है ना? आज की कलियुगी दुनिया में तो नाम कुछ और है और काम कुछ और होते हैं। ये तो है ही तमोप्रधान दुनिया। हँ? वो कहते हैं ना, हाँ, बंसी न पुंगो, नाम है बंसीधर। जल की न बूंदो, नाम है गंगाधरा। हा, हा। थोड़ा भी स्नेह का जल नहीं है। लेकिन नाम ऐसा रख दिया। तो ये तो कलियुग की बात हुई। भगवान तो कलियुग को पलटकरके क्या बनाने आता है? सत्य की दुनिया, सत्य युग बनाने आता है। झूठे मनुष्य को नर से क्या बनाने आता है? नारायण बनाने आता है। झूठा कौन? झूठा कैसे? झूठा माना काले कर्म करेगा तो झूठा हुआ या सच्चा हुआ? क्या हुआ? झूठा हुआ ना। तो झूठे से झूठे में प्रवेश करता है। और फिर उसको सच्चे में सच्चा ऐसा बनाता है जो दुनिया में उसकी कथा लोग गाते हैं। कौनसी कथा? कौनसी कथा गाते हैं? गाते भी हैं, सुनते भी हैं, सुनाते भी हैं। और भारत में तो घर-घर में कथा, सत्यनारायण की, हाँ, सत्य नारायण की कथा, सत्य हरिश्चन्द्र की कथा; नाटकबाजी बहुत दिखाते हैं सत्य हरिश्चन्द्र की।

तो कितना समझाते हैं। तो ये चित्र ले जाओ। कौनसा? लक्ष्मी-नारायण का। सत्यनारायण का चित्र ले जाओ। समझाओ कि बाप आकरके ऐसा नर से नारायण बनाते हैं। एक की महिमा करेंगे कि वो एक बाप आते हैं और एक मनुष्य तन में प्रवेश करके, मुकर्रर रथ में प्रवेश करके उसको नर से नारायण बनाते हैं। तो महाभारत में उस मनुष्य का नाम दे दिया है; क्या? जो बहुत समझने वाला मनुष्य है उसका नाम क्या दे दिया? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) सत्य नारायण? सत्य नारायण नाम दिया? विदुर नाम दिया? अरे? वि। विदु माने तो है जानकार। जाना तो उसने, लेकिन भगवान ने जिसको समझाया, जैसे बाप तुम बच्चों को कहते हैं कि मैं तो तुम बच्चों को समझाता हूँ, ये तो बीच में सुन लेता है। क्यों भई? इसको क्यों नहीं समझाता हूँ? क्योंकि ये तो बच्चा बुद्धि। अर्जुन को समझाता हूँ। अर्जुन अर्थात् जिसने ज्ञान का बहुत अर्जन किया, बहुत ज्ञान की कमाई की हो ज्ञान धन की। तो जो अव्वल नंबर होता है उसका नाम गाया जाता है। तो बताया ये अर्जुन है जो नर से क्या बनता है? अव्वल नंबर नारायण बनता है।

तो वो चक्र दिखलाया है। और समझाया कि ऐसा जाओ और समझाओ। तो रखड़ी का भी बहुत समझाया। अच्छा, रखड़ी का वो बंधन नहीं है जो हाथ में धागा बांध देते हैं। उसका क्या मतलब है? भक्तिमार्ग में तो स्थूल बातें करते रहे। मतलब क्या है हाथ में धागा बांधने का? हँ? स्नेह का धागा। पवित्रता का धागा। स्नेह भी कैसा? हँ? बंटा हुआ स्नेह? कहते हैं ना। इस दिल के टुकड़े हज़ार हुए, कोई यहाँ गिरा इस जनम में कोई वहाँ गिरा। अब बताओ। सच्चा स्नेह होगा? हँ? वो सच्चा स्नेह तो नहीं। ऐसा धागा बांधना है कि वो स्नेह का धागा एक को प्यार करने वाला हो। जैसे तुम बच्चों को समझाया गया - एक शिवबाबा दूसरा न कोई। तो ये रखड़ी का बंधन नहीं है जो धागा बांध दिया। और कहाँ बांध दिया? हाथ में बांध दिया। हत्। ये हाथ में धागा बांधने से क्या होगा? कुछ होगा क्या? अरे, हाथ माने बुद्धि रूपी हाथ। क्या? बुद्धि जो है वो हाथ का काम करती है। जैसे बुद्धि से कोई बात कैच की जाती है। है ना? समझी जाती है ना। कैच की जाती है। ऐसे ही हाथ से भी कोई चीज़ पकड़ी जाती है। होता है ना। तो हाथ में धागा बांधते हैं।

तो ये कोई रखड़ी का बंधन नहीं है कि स्थूल धागा ले लिया, स्थूल हाथ ले लिया और उसमें बांध दिया। नहीं। और वो भी धागा दायें हाथ में बांधते हैं या बायें हाथ में? हँ? दायें हाथ में। क्यों? दायें में ही क्यों बांधते हैं? हँ? क्योंकि अच्छे काम करने वाला दायां हाथ होता है। तो क्या इस हाथ की बात है? नहीं। ये तो जो मनुष्य हैं उनमें अपने-अपने तरह की बुद्धि है। कोई अपनी बुद्धि से अच्छे काम समझके करता है। कोई बिना सोचे समझे ऐसे ही काम करने लग पड़ता है। तो परख के धागा बांधना चाहिए। क्या? अच्छा आदमी है तो उसको धागा बांधना है। गंदा आदमी है, कीचक है, तो, तो बांधने जाएगा तो वो उल्टा ही संकल्प करेगा। तो इस धागे की बात नहीं है। इस हाथ की बात नहीं है। हँ? सीधे-सादे व्यक्ति की बात है। परख करके बांधने की बात है। तो भी बंधन तो है ना राखी का। वो जाकरके बांध तो सकते हैं ना। चलो, जाओ। तुम रखड़ी बंधन में बांधने के लिए जाओ। अरे भई, अभी तो रखड़ी बंधन नहीं है। अभी जाने की बात नही है। 26.8.1967 की वाणी का नौवां पेज। अरे, रखड़ी बंधन का अर्थ समझना ना। क्योंकि रखड़ी कोई रोज़ थोड़ेही बांधी जाती है? रोज़ बांधते हैं? क्यों? रोज क्यों नहीं बांध सकते? अच्छा काम तो कभी भी करो। समझाओ जाके। रोज रखड़ी बांधो। रोज क्यों नहीं बांधते? कारण क्या है? हँ? अरे! अरे! दम।

अरे भाई रखड़ी बरसात के दिनों में बांधी जाती है खास जब ज्ञान जल की रिमझिम लगी रहती है। ज्ञान बरसात होती रहती है ना। कौनसे महीने में? सावन के महीने में। हँ। तो रोज नहीं बांधते हैं। सावन का महीना आता है। तो ये श्रावण के महीने में ही क्यों? वो तो पता चल गया कि ज्ञान की बरसात बाप आते हैं तब वो सावन का महीना कहा जाता है, बरसात का मौसम कहा जाता है। बरसात, ज्ञान बरसात के मौसम में ही रखड़ी होती है बंधन और ज्ञान बरसात के मौसम में ही कृष्ण जन्म होता है। क्या? वो उसकी यादगार है। क्या? भक्तों ने मनाई। क्या? बरसात के दिनों में और सावन के दिनों में, श्रावण के महीने में रक्षाबंधन और कृष्ण जन्माष्टमी मनाते हैं। खास एक दिन रखड़ी बंधन होती है। क्या? रोज़-रोज़ होती है क्या? हँ? नहीं। तो रखड़ी सभी चाहिए। और जब चाहिए तभी बांधी जाती है। रोज़-रोज़ थोड़ेही बांधी जाती है। क्या? साल भर कोई रखड़ी बंधन बांधता है क्या?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, वो नज़दीक ही तो। ऐसा थोड़ेही कि भद्रपद आया तो एकदम बरसात खतम हो गई। हो गई क्या? और ये महीने तो जो हिन्दी के हैं वो आगे-पीछे बहुत होते रहते हैं। होते हैं कि नहीं? हँ? जब वो आता है ना कौनसा महीना? हँ? अदिक महीना आता है ना। क्या कहते हैं उसको? हँ? पुरुषोत्तम मास। हँ? तो तो एक महीने का अंतर पड़ जाता है। कोई भी महीना हो।

तो तुम रखड़ी, तुम तो रखड़ी रोज बांधते रहते हो। क्या? जिस दिन रखड़ी का दिन आया उस दिन भी बांधते, उससे पहले भी बांधना शुरू कर देते और उसके बाद सप्ताह तक बांधते ही रहते। हँ? क्यों? रोज क्यों बांधते रहते? तुम्हारा धंधा ही है। क्या? हँ? रोज़ बांधते रहना। और रोज़ कोई न कोई जगह में जाकरके समझाते रहते हो। रोज़ जाके समझाते तो कोई रखड़ी थोड़ेही बांधते हो? हँ? बांधते हो? नहीं। बताते थोड़े हो पहले से कि पवित्र रहना है, पवित्रता की राखी होती है। भगवान आते हैं तो रखड़ी बंधन के मौसम में आते हैं। तुम्हें डर रहता है कि पहले से बताय देंगे तो, तो फिर ये आएगा ही नहीं। हँ? तो हमारा धंधा बंद हो जाएगा। कोई पैसे-वैसे नहीं देगा। तो वो तुम रोज़ समझाते हो। अब बाप से प्रतिज्ञा करो। बाप कहते हैं मामेकम याद करो। क्या? तो क्या होगा? मुझ एक को याद करेंगे तो जैसे मैं परम पवित्र हूँ; क्या? अपवित्र हूँ कि परमपवित्र हूँ? परमपवित्र हूँ। कैसे? धरमपिताएं तो संग के रंग में आते हैं तो सब नीचे गिर जाते हैं। और मैं तो इस सृष्टि पर आता हूँ तो इतने बच्चों के संग के रंग में आता हूँ, हज़ारों बच्चों के संग के रंग में लेकिन मैं क्या नीचे गिरता हूँ? अपवित्र बन जाता हूँ? नहीं। मैं तो अपवित्र काला नहीं बनता। तो मेरे को याद करेंगे तो मेरे जैसे बनेंगे। औरों को याद करेंगे तो फिर गारंटी नहीं है। पतित के पतित ही रह जावेंगे। तो मैं आर्डिनेन्स निकालता हूँ। क्या? कि तुम अगर मेरे को याद करेंगे तो तुम जरूर देवताओं की तरह गोरे बन जाएंगे। प्योर आत्मा बन जाएगी। पवित्र आत्मा बन जाएगी। तो पवित्र से पवित्र देवता बन जावेंगे। देवताओं भी नंबरवार होते हैं ना। नंबरवार पीढ़ियाँ होती हैं देवताओं की। नंबरवार जनम होते हैं। ओमशान्ति।


So, it was told that I enter in the one who has taken complete 84 births, not even a single birth less and has played an allround part. And I alone can know that; the incorporeal God, who is beyond the cycle of birth and death knows that who is that soul on this world stage which plays an allround part and which part does it play, what kind of a part does it play? Will it enter in a good actor or will it enter in a sinful one who has committed sins birth by birth? Although everyone has to fall down in the last birth; if they do not fall, then they will not rise as well. What? There is a ball, there is a stone; throw it up. The higher it goes, the lower it will fall. So, I enter in the one who falls the lowest. Now the question is that many fall down. Many become sinful. What is special about that one sinful person? The account is that some become sinful on being coloured by company. What? And some are already sinful. For example, there is a scorpion. What will it do? Whichever person it meets it will sting. There is a snake; howevermuch milk you feed it, you may take care of it, but as soon as it gets a chance, if anyone puts his finger or foot on it even by mistake, it will bite him/her immediately. It gets angry immediately.

So, what? What is the rule? Is there any rule, law? The rule, law is that just as there are mothers, so, when the children grow up, when they become intelligent, then the mothers get coloured by their company. Do they get coloured or not? Hm? They get coloured, don't they? The mothers believe hearsay a lot, don't they? They believe even more the words of the children. So, similarly, He enters in the one whom He names Brahma. Well, it is famous in India that there is a four-headed, five-headed Brahma. It means there have been four-five persons with the name Brahma. So, He will enter in the one who is number one Brahma. If he is the number one Brahma, then what is the task of a mother? Which special virtue does a mother have? Does a mother have any special virtue in comparison to the Father or not? Hm? Tolerance. So, mothers have strong power of tolerance. Howevermuch the children trouble her, she tolerates.

So, the one in whom that incorporeal Shiv enters, and when he gets knowledge, when he develops faith that this is my part based on the knowledge of the beginning, middle and end of the world narrated by God; what? What is the part? What is the special part? Arey?
(Someone said something.) Yes, it is the part of Parambrahm; Param (supreme) among the titleholders of Brahma. The Supreme Actor. So, he will also have to act accordingly. Why was the name coined? The name was coined because he should perform such task and show. Is it not? In today's Iron Age world, the name is something else and the deeds are something else. So, this is anyways a tamopradhan (degraded) world. Hm? They say, don't they, yes, bansi na pungo, naam hai Bansidhar (the one who does not have any flute has been named Bansidhar, i.e. holder of flute). Jal kii na bundo, naam hai Gangadharaa (the one who does not possess a drop of water has been named Gangadharaa, i.e. holder of the river Ganges) Ha, ha. There is no water of affection. But the name has been coined like this. So, this is about the Iron Age. God comes to transform the Iron Age to which Age? He comes to transform it to a world of truth, an Age of truth. What does He come to transform the false human being from a man to? He comes to make him Narayan. Who is false? How is he false? If he is false, i.e. the one who performs dark actions, then is he false or true? What is he? He is false, is not he? So, he enters in the one who is falsest. And then He transforms him to such truest one that people sing his story in the world. Which story? Which story do they sing? They sing and listen and also narrate. And in India, the story of Satya Narayana (true Narayana), the story of the true Harishchandra is narrated in every home; dramas of true Harishchandra are enacted a lot.

So, He explains so much. So, bring this picture. Which one? Of Lakshmi-Narayan. Take the picture of Satyanarayan. Explain that the Father comes and makes you such Narayan from nar (man). You will praise One that that One Father comes and enters in a human body, enters in a permanent Chariot and makes him Narayan from nar (man). So, that human being has been named in the Mahabharata; what? What is the name assigned to the human being who understands a lot? Hm?
(Someone said something.) True Narayan? Was he given the name True Narayan? Was he named Vidur? Arey? Vi. Vidu means knowledgeable. He did know; but the one whom God explained; just as the Father tells you children that I explain to you children and this one listens in between. Why brother? Why don't I explain to this one? It is because this one has a child-like intellect. I explain to Arjun. Arjun means the one who earned knowledge a lot, earned the wealth of knowledge a lot. So, the name of the number one is praised. So, it was told what does this Arjun become from a man? He becomes number one Narayan.

So, that Chakra has been depicted. And it was explained that go and explain like this. So, a lot of explanation has been given about Rakhri also. Achcha, it is not that bond of rakhri that is tied with a thread around the wrist. What does it mean? On the path of Bhakti you talked about physical things. What is the meaning of tying the thread around the wrist? The thread of affection. The thread of purity. What kind of affection? Hm? Divided affection? It is said, is not it? This heart broke into a thousand pieces; one piece fell here in this birth and one piece fell there. Now tell. Will it be a true love? Hm? That is not true love. You have to tie such a thread that the thread of love should love one. For example, it was explained to you children - One ShivBaba and none else. So, this is not a bond of rakhri that you tied the thread. And where did you tie? You tied it around the wrist. Damn. What would happen by tying this thread around the wrist? Will anything happen? Arey, wrist means intellect-like wrist. What? The intellect works like a hand. For example, you catch (grasp) any subject with the intellect. is not it? It is understood, is not it? You catch (grasp) it. Similarly, a thing is caught (grasped) with the hand. It happens so, doesn't it? So, a thread is tied around the wrist.

So, this is not a bond of rakhri that you took the physical thread, you took a physical hand and tied around it. No. And is that thread also tied around the right hand wrist or around the left hand wrist? Hm? Around the right hand wrist. Why? Why is it tied around the right hand only? Hm? It is because the right hand performs the good deeds. So, is it about this hand? No. Human beings have their individual intellects. Someone understands through his intellect and performs good tasks. Someone starts working simply without thinking. So, one should judge and then tie. What? If a person is good, he should be tied the thread. If a person is dirty, Keechak, and if you go to tie to him, then he will create opposite thoughts. So, it is not about this thread. It is not about this hand/wrist. Hm? It is about a simple person. It is about tying after judging. However it is a bond of rakhi, is not it? You can go and tie that, cannot you? Okay, go. You go to tie on Rakhribandhan. Arey, brother, now it is not Rakhribandhan. It is not about going now. Ninth page of the Vani dated 26.8.1967. Arey, understand the meaning of rakhribandhan because rakhri is not tied every day. Is it tied every day? Why? Why cannot you tie it every day? You can do a good work any time. Go and explain. Tie rakhri everyday. Why don't you tie every day? What is the reason? Hm? Arey! Arey! Dam.

Arey brother, rakhri is tied in the rainy season especially when there is a continuous rain of knowledge. The rainfall of knowledge keeps on taking place, doesn't it? In which month? In the month of Saavan (a month of the Indian calendar that coincides with rainy season). Hm. So, it is not tied every day. The month of Saavan starts. So, why in this month of Shraavan only? You have come to know that when the Father comes then the rainfall of knowledge takes place; then it is called the month of Saavan, the rainy season. The rakhri bandhan is celebrated in the season of rain of knowledge and Krishna's birth also takes place in the season of rain of knowledge. What? It is its memorial. What? It was celebrated by the devotees. What? In the days of rain and in the days of Saavan, in the month of Shraavan, Rakshabandhan and Janmashtami is celebrated. Rakhri bandhan is celebrated on a special day. What? Is it celebrated every day? Hm? No. So, all rakhris are required. And it is tied only when required. It is not tied every day. What? Does anyone tie throughout the year?
(Someone said something.) Yes, that is close. It is not as if when the Bhaadrapad (another month in the Indian calendar) starts then the rain stops altogether. Does it stop? And these Hindi months keep on changing. Do they or don't they? Hm? When that month comes; which month? Hm? When the Adik month comes, doesn't it? What is it called? Hm? Purushottam month. Hm? So, a difference of one month occurs. Be it any month.

So, you tie rakhri everyday. What? You tie on the day of Rakhri also; you start tying before that also and you keep on tying for a week even after that day. Hm? Why? Why do you keep on tying every day? It is your business itself. What? Hm? To keep on tying every day. And you keep on going to one place or the other and keep on explaining. When you go and explain every day, do you tie rakhri? Hm? Do you tie? No. Do you tell in advance that you have to lead a pure life; it is a rakhi of purity. When God comes, He comes in the season of rakhribandhan. You fear that if you inform in advance, then this person will not come at all. Hm? So, our business will close. Nobody will give any money. So, you explain every day. Now promise the Father. The Father says - Remember Me alone. What? What will happen then? If you remember me alone; then, just as I am supremely pure (param pavitra); what? Am I impure or supremely pure? I am supremely pure. How? When the founders of religions get coloured by company, they all suffer downfall. And when I come to this world, I come in the company of so many children, thousands of children, yet do I suffer downfall? Do I become impure? No. I do not become impure, dark. So, if you remember Me, then you will become like Me. If you remember others, then there is no guarantee. You will remain sinful only. So, I issue an ordinance. What? That if you remember Me, then you will definitely become fair like deities. The soul will become pure. The soul will become pure. So, you will become purest deities. Deities are also numberwise, aren't they? There are numberwise generations of deities. There are numberwise births. Om Shanti.

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 11 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2623, दिनांक 28.08.2018
VCD 2623, Dated 28.08.2018
प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning class dated 26.8.1967
VCD-2623-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-16.10
Time- 00.01-16.10

प्रातः क्लास चल रहा था - 26.8.1967. शनिवार को नौवें पेज के मध्यादि में बात चल रही थी – बाप कहते हैं मैं आर्डिनेन्स निकालता हूँ कि माम एकम् याद करो। तो तुम अगर मेरे को याद करेंगे तो सब गोरे बन जाएंगे। आत्माएं सब प्योर बन जाएंगी। इतनी सहज, बिल्कुल सहज बात बतलाते हैं। हँ? बहुत सहज बात है? कठिन है? हँ? कठिन तो तब होती है, जब ज्ञान की गहराई में नहीं गए और जैसे दुनिया समझती है, दुनिया का हुजूम तो विधर्मियों का है। वो तो निराकार ही मानते हैं। निराकार मान करके सहज कैसे है याद करना? समझते हैं ब्रह्मा के तन में निराकार आया है। तो कहता है मुझे याद करना बहुत सहज है। माम एकम याद करो। तुम एक ही बिन्दी को तो याद करते हो। अरे! पता कैसे चलेगा कि वो एक ही बिन्दी है, वो ही शिव बाप है? बिन्दी-बिन्दी तो सभी बिन्दी। प्राणीमात्र की आत्माएं बिन्दी हैं मनुष्य मात्र की तो क्या। सहज तब है जब ये जान लें गहराई में; क्या? कि जो बाप का पार्ट है जो ज्ञान का बीज बोने वाला है आदि में, और अंत में वर्सा देने वाला है मुक्ति जीवन का, मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा देने वाला है, यहीं देने वाला है इसी जनम में, अगले जनम में नहीं। बोलते तो हैं ना तुम्हारा जन्मसिद्ध अधिकार है। बाप से जन्म लिया तो अधिकार जन्मसिद्ध हो गया जन्म लेने से ही।

उस बाप को प्रैक्टिकल में पहचानने की बात है कि कौनसा बाप है जो वर्सा देनेवाला है। माँ से तो वर्सा नहीं मिलता है। ये ब्रह्मा तो माँ है। इनके मुख से तो ज्ञान की लोरी सुनाते हैं। वो तो गीता ज्ञान है। गीता ज्ञान की गहराई तो, अमृत तो नहीं है। तो ज्ञान की गहराई में जाएंगे, मनन-चिंतन-मंथन करेंगे तो पहचान लेंगे कि जरूर यज्ञ की आदि में जो ज्ञान का बीज डालने वाला था, दादा लेखराज के अंदर भी बीज जिसने डाला था वो ही बाप है। तो सहज हो जाएगा। तो कहते हैं उसे याद करना तो बिल्कुल सहज। भले शरीर छोड़ दिया यज्ञ के आदि में तो भी तो बाप कहते हैं कि जो यज्ञ में, ज्ञान में चलते-चलते शरीर छोड़ते हैं दुबारा जन्म लेके आते हैं। और बोला भी है मुरली में कोई 20, कोई 25 वर्ष के हो गए होंगे। तो स्पेशल बच्चे होंगे तभी तो उनकी उमर याद रखी। ऐसे थोड़ेही याद रखेंगे। लेकिन बुद्धि ही नहीं चलती ज्ञान की गहराइयों में। बस, गोरा-चिट्ठा, लंबा-चौड़ा ब्रह्मा बाबा ही याद आता है। चलो बच्ची जो है।

तभी बाप एक दिन कहते हैं कि मैं कितना समझाता हूँ। हँ? मुरलियों में समझाता हूँ कि नहीं? और कितना समझाऊँ? अरे, एक ही बात मुख्य है। इतनी ढ़ेर सारी बातें समझाईं। उनमें करके तो देखो कोई बात। अरे, इतना समझाया तो उनमें से कुछ तो करके देखो। अभी कुछ करके देखो तो जाकिर हुसैन को जाके नहीं समझाना। क्यों? एक तो उनको ऊँची गद्दी मिली हुई है। दूसरे वो मुसलमान धरम की आत्मा है। तो तुम बाप का परिचय दोगे। पहले तो तुम्हें पक्का निश्चय होना चाहिए कि बाप इस सृष्टि पर साकार में ही पार्ट बजाने वाला है। तो जब तुम्हें चलो निश्चय हो भी जाए तो तुम जाकिर हुसैन को सुनाओगे कि वो निराकार बाप साकार में आया। वो बिल्कुल नहीं मानेगा। क्या? अल्ला मियाँ तो निराकार है।

तो कोई ने चिट्ठी लिख करके पूछा था जरूर। बाबा को नाम नहीं याद आया कि चिट्ठी लिख करके किसने पूछा था कि जाकिर हुसैन को जाके ज्ञान सुनाऊँ। अरे, जरूर जिसने चिट्ठी लिखी होगी वो जाकिर हुसैन जहाँ रहता होगा, मुख्य गद्दी जहाँ होगी, वहीं का होगा, दिल्ली का ही होगा। तो बाबा की बुद्धि नहीं चली। हाँ, लिखके पूछा था जरूर कि यहीं पूछा था या कहाँ पूछा था। पता नहीं सेमीनार में पूछा था। तो किसी ने कहा – सुन्दरलाल ने पूछा था। पटेल नगर का सेन्टर है ना। तो वहाँ के मुख्य भाई हैं – सुन्दरलाल, जिनको गंधर्वी विवाह करने के लिए परमीशन दे दी थी। तो उनकी युगल सेन्टर चलाती थी। और वो सेन्टर में वो भी रहते थे। तो किसी ने बताया – अच्छा, सुन्दरलाल ने पूछा था। तो फिर बाबा ने क्या उनको जवाब दिया? कोई था उस समय जब बाबा ने जवाब दिया? कोई है यहाँ? तो किसी ने कहा – उस समय आपने जवाब दिया था कि जा सकते हैं। तो अभी मना किसने किया जाकिर हुसैन के पास नहीं जाना? हँ? बाबा से तो अचानक पूछा तो ब्रह्मा बाबा ने कह दिया – जा सकते हैं। फिर शिवबाबा तो हिसाब से बताएंगे – अभी वो नहीं आने वाले। एक तो सबसे बड़ी बात क्या? क्यों नहीं सुनेगा? हँ? हँ। एक तो मुसलमान है। चलो। दूसरी बात, ऊँची गद्दी मिली हुई है। जिनको ऊँची गद्दी मिली हुई होती है वो अपनी गद्दी के नशे में रहते हैं। तो बाबा ने कहा - अच्छा? ये बोला – जा सकते हैं? तो अभी देखें समाचार आते हैं पता नहीं वहाँ हो या न हो। सुन्दरलाल का बाबा को याद भी नहीं रहा। पटेल नगर में सेन्टर चलाते थे। पर होगा जरूर शायद।

अरे, पर किसको भी, कोई भी बड़ा आदमी हो, अरे, वो जो बड़ी मस्जिद है ना वहाँ; अब बाबा को नाम नहीं याद आया, बड़ी मस्जिद का। हँ? कौनसी बड़ी मस्जिद बाबा को याद आई होगी? दिल्ली में बड़ी मस्जिद है जामा मस्जिद। तो कोई ने कहा – जामा मस्जिद। जामा मस्जिद। बहुत मस्जिदें हैं ना। अरे, वहाँ जा करके भी, उनसे टाइम ले करके कि आज रखड़ी बंधन है, हम उनसे मिलना चाहती हैं। यहाँ का बड़ा है ना। वो तो जो समझू होता है जानते हैं पूछकरके पीछे तो जाते हैं ना। हम आए हैं रखड़ी बंधन के लिए। और रखड़ी का क्या है? रखड़ी की हिस्ट्री क्या है रक्षाबंधन की वो मैं तुमको समझाऊं। हँ? ये कहाँ से ये परंपरा शुरू हुई रक्षाबंधन की, रखड़ी बांधने की? तो समझू होगा तो समझाएगा कि शिव बाप जब आया था तो ये पवित्रता की रक्षा का सूत्र में बांधा था। हँ? कब बांधा था? जब नई सृष्टि शुरू हुई थी तो वो अल्ला ताला ने, खुदा ने आकरके खुद ही पवित्रता की बुद्धि में, बुद्धि रूपी हाथ में ये रक्षा सूत्र बांधा था। सूत्र क्यों बांधा था? धागा क्यों? स्नेह के धागे में लेकरके ही वो रक्षा बांधी जा सकती है। तो मैं तुमको समझाऊँ। तुमको भी ये बात समझने का हक है कि अल्ला ताला आते हैं तो क्या करते हैं? जैसे इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट आए तो कह देते हम खुदा के मैसेन्जर हैं, परन्तु मैसेन्जर होते तो मैसेज खुदा की देते तो दुनिया में किसी का उद्धार होता। दुनिया तो नीचे गिरती जा रही है। अब हम हैं मैसेंजर तो हम आपको असली बात बताते हैं कि ये रक्षाबंधन का परंपरा कबसे शुरू हुई? आज से कलप पूर्व शुरू हुई।

तो हम उस पैगम्बर का पैगाम देते हैं। वो बड़े ते बड़ा पैगम्बर है। दुनिया में पैगम्बर तो बहुत आए, इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट, वगैरा-वगैरा। लेकिन वो खुदा सबसे बड़ा पैगम्बर है। क्या पैगाम लेके आया है? तुम आत्माएं पतित बन गई हो। पावन बनोगी तो फिर तुम जन्नत में जाओगी। तुम्हें जन्नत में भेज देंगे। ये पैगाम लेके आया है। क्योंकि वो तो बेहद का बाप है ना। हद का बाप तो है नहीं जो धन-संपत्ति, प्रापर्टी का वर्सा देगा। बेहद का बाप है तो बेहद का वर्सा देगा ना। तो उसका बेहद का वर्सा है जन्म-जन्मान्तर के लिए सुख की दुनिया बनाना और उस सुख की दुनिया में भेजना। वो बेहद का बाप कहते हैं मुझे कि माम एकम याद करो। मुझ एक को पहचान करके याद करेंगे तो तुम पवित्र जरूर बन जावेंगे। और कोई मनुष्यों को याद न करो। क्योंकि और सब पतित हैं। तुमको और भी पतित बनाय देंगे। उनकी तुम बुद्धि से संग का रंग लगे ना उनको याद करेंगे तो जैसा उनका वायब्रेशन वैसा तुम्हारा भी बन जाएगा। तुम मुझ एक को याद करो तो तुम्हारा जो पाप का विनाश है वो हो जाएगा। वो पाप हुए हैं ना। गल्ती से कुछ न कुछ पाप होते हैं, दूसरों को दुख देने के तो वो सब कट जाएंगे। इसलिए मैं तुम्हारे पास प्रतिज्ञा लेने आई हूँ कि तुम प्रतिज्ञा करो कि मैं बाप से वो जन्नत का वर्सा जरूर लूंगा। और उसके लिए पवित्र भी बनूंगा क्योंकि अभी तो पतित दुनिया है।

तो पतित दुनिया पावन कैसे बनेगी? पतितों के संग में आते-आते दुनिया पतित बन गई। तो एक पावन बाप आया हुआ है, एवर प्योर है, सुप्रीम सोल, भले आत्माएँ निराकार हैं, तो बाप भी निराकार है। आत्माओं का बाप है ना। परन्तु वो ऐसा बाप है आत्माओं का, वो जन्म-मरण के चक्र में नहीं आता। गर्भ से जन्म नहीं लेता। वो प्रवेश करता है। तो आदम में प्रवेश किया है। क्या? जो सृष्टि के आदि में आदम था, उसी आदम वाली आत्मा ने जनम बाई जनम, जनम लेते-लेते अभी कलियुग के अंत में पतित बन गई। और सबसे जास्ती पतित बनती है। तो पावन दुनिया में जाने के लिए उसको भी पावन बनना है। और साथ-साथ जो भी बच्चे हैं सबको पावन बनना है। तो संग के रंग से ही बनेगी ना।

A morning class dated 26.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the ninth page on Saturday was - The Father says - I issue an ordinance - remember Me alone. So, if you remember Me, then you all will become fair. All the souls will become pure. He narrates such an easy, completely easy topic. Hm? Is it very easy topic? Is it difficult? Hm? It appears difficult when you have not gone into the depth of knowledge and just as the world thinks; the crowd of the world is of vidharmis. So, they believe in the incorporeal only. How is it easy to remember by considering Him to be incorporeal? They think that the incorporeal has come in the body of Brahma. So, He says it is very easy to remember Me. Remember Me alone. You remember only one point. Arey! How will you know that that point alone is Father Shiv? All points are points. The souls of all the living beings are points, not just those of the human beings. It is easy when you know this in depth; what? That the part of the Father who sows the seed of knowledge in the beginning and gives the inheritance of mukti-jeevanmukti in the end; He is going to give here itself in this birth itself, not in the next birth. It is said that it is your birth right. When you got birth from the Father, then it became your birthright just by getting birth.

It is about recognizing that Father in practical that who is that Father who gives the inheritance. One does not get inheritance from the mother. This Brahma is a mother. He narrates the lullaby (lori) of knowledge through his mouth. That is knowledge of the Gita. It is not the depth, nectar of the knowledge of Gita. So, if you go into the depths of knowledge, if you think and churn, then you will recognize that definitely in the beginning of the Yagya the one who sowed the seed of knowledge, the one who sowed the seed in Dada Lekhraj as well, is the Father. Then it will become easy. So, He says that it is very easy to remember Him. Although he left his body in the beginning of the Yagya, yet the Father says that whoever leaves his body in the Yagya, while treading the path of knowledge, he gets rebirth and comes again. And it has also been said in the Murli that someone must have become 20 years old, someone must have grown 25 years old. So, they must have been special children; only then did He remember their age. Will someone remember otherwise? But the intellect itself doesn't work in the depths of knowledge. That is all; only the fair and handsome, tall and sturdy Brahma Baba comes to the mind. Okay, daughter, whatever it is.

Only then does the Father say one day that I explain so much. Hm? Do I explain in the Murlis or not? And how far should I explain? Arey, only one topic is important. So many topics have been explained. Try out any topic. Arey, you were explained so much. Try something out of it. Now try something; so, do not go and explain to Zakir Hussain (the former President of India). Why? Firstly, he holds a high seat. Secondly, he is a soul from Muslim religion. So, you will give the introduction of the Father. First you should have firm faith that the Father plays His part in a corporeal form in this world itself. So, when even if you develop faith, you will go and narrate to Zakir Hussain that the incorporeal Father has come in corporeal form. He will not accept at all. What? [He will say] Allah Miyaan is incorporeal.

So, someone had written a letter and definitely asked. Baba did not recollect the name as to who wrote a letter and sought permission to narrate the knowledge to Zakir Hussain. Arey, the person who wrote the letter must definitely be from the place where Zakir Hussain lives, the place where his main seat is located, he must be from Delhi only. So, Baba's intellect did not work. Yes, he had definitely asked; whether he had asked here or somewhere else. Perhaps he had asked in a seminar. So, someone said - Sundarlal had asked. There is a center in Patel Nagar, is not it? So, the main brother there is Sundarlal, who was given the permission for Gandharva marriage. So, his wife used to run the center. And he also used to live in that center. So, someone said - Achcha, Sundarlal had asked. So, then what reply did Baba give him? Was anyone present when Baba had replied? Is there anyone here? So someone said - At that time you had replied that he can go. So, now who prohibited you from going to Zakir Hussain? Hm? Baba was asked suddenly; so, Brahma Baba said - You can go. Then ShivBaba will tell properly - He is not going to come now. Firstly, what is the big thing? Why will he not listen? Hm? Hm. Firstly, he is a Muslim. Okay. Secondly, he holds a high office (seat). Those who hold high offices remain in the intoxication of their seat. So, Baba said - Achcha? Did He say that you can go? So, let us see whether any news comes if he visited or not? Baba did not remember about Sundarlal. He used to run a center in Patel Nagar. But perhaps he must be definitely available.

Arey, but anyone, be it any big personality, arey, whichever big mosque exists there, doesn't it? Well, Baba did not recollect the name of the big mosque. Hm? Which big mosque must have come to Baba's mind? The big mosque in Delhi is the Jama Masjid. So, someone said - Jama Masjid. Jama Masjid. There are many mosques, aren't they? Arey, you could go there also by seeking time that today it is Rakhribandhan; we want to meet him. He is the big person of this place, is not he? So, the one who is wise knows; he seeks permission and then goes, doesn't he? We have come for rakhri bandhan. And what is all about rakhri? What is the history of rakhri, of rakshabandhan; let me explain to you. Hm? Where did this tradition of rakshabandhan, of tying rakhiis start? So, if he is wise, he will explain that when Father Shiv had come, He had tied you in thread of protection of purity. Hm? When did He tie? When the new world started, then that Allah Tala, Khuda (God) had come and tied this thread of purity, thread of safety around the wrist of intellect. Why did He tie? Why thread? That raksha can be tied only with a thread of love. So, let me explain to you. You also have a right to understand that when Allah Tala comes, what does He do? For example, when Ibrahim, Buddha, Christ came, they say that they are messengers of God, but had they been messengers, they would have given the message of God and would have caused the salvation of someone in the world. The world has been undergoing downfall. Well, we are messengers; so, we tell you the truth that when did this tradition of Rakshabandhan start. It started Kalpa ago from this day.

So, we give the message (paigaam) of that Paigambar (Prophet/Messenger). He is the biggest Paigambar. Many Prophets came in the world, like Ibrahim, Buddha, Christ, etc. But that God is the biggest messenger. Which message has He brought? You souls have become sinful. When you become pure, then you will go to heaven. You will be sent to heaven. He has brought this message. It is because He is the unlimited Father, is not He? He is not a limited Father that He will give the inheritance of wealth and property. When He is an unlimited Father, He will give unlimited inheritance, will He not? So, His unlimited inheritance is to establish the world of happiness for many births and to send you to that world of happiness. That unlimited Father says - Remember Me alone. If you recognize Me and remember Me, then you will definitely become pure. Do not remember any other human being because all others are sinful. They will make you even more sinful. If you keep their company through your intellect, if you remember them, then as is their vibration, so shall be your vibration. If you remember Me alone, then your sins will be destroyed. You have committed sins, haven't you? You commit one or the other sin of giving sorrows to others by mistake; all those sins will be destroyed. This is why I have come to make you promise me that you will take a vow that I will definitely obtain that inheritance of Jannat (heaven) from the Father. And for that I will also become pure because now the world is sinful.

So, how will the sinful world become pure? The world has become sinful while coming in the company of the sinful ones. So, one pure Father has come; He is ever pure, the Supreme Soul; although the souls are incorporeal, yet the Father is also incorporeal. He is the Father of souls, is not He? But He is such a Father of souls, who does not pass through the cycle of birth and death. He does not take birth through womb. He enters. So, He has entered in Aadam. What? The Aadam who existed in the beginning of the world, the same soul of Aadam, while being born birth by birth, has become sinful in the end of the Iron Age. And it becomes most sinful. So, in order to go to the pure world, he too has to become pure. And along with him all the children have to become pure. So, they will become through the colour of company only, will they not?

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 12 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2623, दिनांक 28.08.2018
VCD-2623, Date 28.08.2018
प्रातः क्लास 26.8.1967
Morning Class dated 26.08.2018
VCD-2623-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 16.11-29.26
Time- 16.11-29.26


तो वो आदम जो है, सृष्टि के आदि में था, वो उसमें अभी फिर बाप आया है। लोग कहते भी हैं – आदम को खुदा मत कहो, आदम खुदा नहीं, लेकिन खुदा के नूर से आदम जुदा नहीं। जैसे खुदा का नूर है वैसे ही आदम का नूर बन जाता है खुदा को याद करते-करते। ऐसे दुनिया पावन बनेगी। वो मनुष्य सृष्टि का बाप है खुदा। तो वो सबको पावन बना लेता है बाप की याद से। लेकिन एक की याद करनी पड़ेगी। एक बाप दूसरा न कोई। तो, तो क्या तुम पावन नहीं बनेंगे? जन्नत में नहीं जाएंगे? तो बस, जो पावन बनेंगे उनके लिए नई दुनिया बनाने के लिए खुदा आया है। अंग्रेज लोग भी कहते हैं हैविनली गॉड फादर। तो हैविनली गॉड फादर नाम है, टाइटल है, तो जरूर हैविन स्थापन किया होगा ना। तो वो ही बाप आया हुआ है। हँ? इस दोजख की दुनिया को जन्नत बनाने के लिए आया है। पहले भी तो जन्नत बनाई थी ना ये दुनिया। तो जब जन्नत बनाई थी तो आदम से कहा था, हिदायत दी थी – ये अपवित्र काम नहीं करना। ये बॉडी के बीच का फल नहीं खाना। हँ? मूत-पलीती नहीं बनना। तो उसको याद नहीं रहा। किसको? आदम को। तो वो उसको दोजख में ढकेल दिया खुदा ने। और अब जो जब पहला मनुष्य सृष्टि का जो आदमी है वो ही नीचे गिर गया तो उसके पीछे-पीछे सब नीचे गिर गए।

तो अब पावन दुनिया जरूर चाहिए जहाँ सब देवताएं प्रसन्न रहते हैं। वहाँ कोई दुख की बात होती नहीं है। खुदा रचता है तो खुदा की रचना में सुख ही होगा ना। वो सुख का सागर है ना। तो बाप को तो बेहद का सुख देना ही है। हरेक बाप चाहता है। लौकिक दुनिया के जो बाप हैं हद के वो भी चाहते हैं हमारे बच्चे, क्या, सुखी रहें। तो वो बेहद का बाप भी बेहद का सुख देके जाता है। राम-कृष्ण की दुनिया में सुख ही सुख रहेगा। वो राम-कृष्ण की दुनिया सतयुग, त्रेता में होती है। अभी तो द्वैतवादी द्वापरयुग चल रहा है जबसे तबसे लेकर गिरते-गिरते कलियुग आ गया। द्वैतवादी इसलिए कि दूसरे-दूसरे धरमपिताएं आ गए। उन्होंने दो-दो बातें चला दीं। दो-दो बातें चला दीं। दो से चार, चार से आठ धरम हो गए, इतने ही राज्य हो गए। इतनी भाषाएं हो गईं। तो आपस में सब लड़ मरे। तो बाप को तो एक धर्म, एक राज्य, एक कुल, एक भाषा वाली दुनिया जहाँ सब प्यार से रहें वो बनाकरके देनी जरूर है। तो जो बनेंगे पावन उसके लिए पावन दुनिया जरूर चाहिए।

तो पावन देखो दुनिया स्थापन हो रही है। क्या? नई दुनिया पावन स्थापन हो रही है, तब तो हम उसी काम में लगे हुए हैं। नहीं तो हम आपके पास पेट का धंधाधोरी छोड़करके क्यों आते? तो अब एटम बम तो बन ही चुके हैं। ये तो आपको पता ही है। ये कोई घर में रखकरके सजावट के खिलौने थोड़ेही हैं। हँ? ये तो बने हैं तो काहे के लिए? आज नहीं तो कल फटेंगे जरूर। तो विनाश भी होता है। जब तक पुरानी दुनिया का विनाश नहीं होगा तो नई दुनिया आएगी कैसे? क्योंकि ये तो सब जानते हैं कि जो खुदा जन्नत में नई दुनिया बनाता है वो जन्नत की दुनिया में सब तो नहीं जाएंगे। सब तो पवित्र नहीं बनेंगे। तो जो पवित्र बनते हैं उनके लिए फिर ये विनाश भी चाहिए। इस पतितों की दुनिया का विनाश होगा। जो हुजूम के हुजूम हैं इस दुनिया में और जो देवता बनेंगे पावन वो पावन दुनिया थी जिसको गोल्डेन एज कहा जाता है। अभी तो ये दुनिया आयरन एज है। क्या? क्या फर्क है आयरन एज, आयरन में और गोल्डन में? गोल्डन की कीमत बहुत होती है, गोल्ड की। और लोहे की कीमत तो उतनी नहीं हो सकती। तो तुमको क्या गोल्डन एज में नहीं जाना है? हँ? जो बाप आकर के गोल्डन एज की दुनिया बनाय रहे हैं तुम खुदा के पास नहीं जाना चाहते हो? नहीं जाना चाहते हो, नहीं जाय सकेंगे। और नहीं जाय सकेंगे तो तुम्हारी आत्मा पवित्र नहीं बनेगी। अरे, ये जाकरके बताओ उनको। कि वो जो मुल्ला है ना, वो मुल्ले भी उनके चरणों में गिरेंगे। क्योंकि मुल्ला लोगों को भी पता नहीं है हमारा नाम मुल्ला क्यों है? मूत और ला। क्या? ऐसी उल्टी-उल्टी समझानी लोगों को दे-दे करके उन्होंने सारी दुनिया मूत पलीती बनाय दी।

तो वो मुल्ला भी आपके पांव पड़ेंगे। क्या? जिन्होंने ढ़ेर सारे प्रवचन दे-दे करके लोगों को नीचे गिराया है। कहते हैं ना खुदा जर्रे-जर्रे में है। अरे! खुदा जर्रे-जर्रे में क्यों पांव के नीचे आएगा कण-कण में? खुदा तो सबसे ऊँचा है ना। हँ? जो आत्मा निराकार है वो भी तो इस शरीर में अन्दर सबसे ऊँची स्टेज में रहती है ना। दो आँखों के बीच में, भृकुटि के बीच में भारतवासी माताएं आज भी बिन्दी लगाती हैं। पुरुष लोग टीका लगाते हैं। तो भारतवासियों को पता है क्योंकि भारत में ही तो जन्नत स्थापन होती है। आप भी भारत के राष्ट्रपति हैं। तो आप मानेंगे तो आपके पीछे-पीछे ढ़ेर के लोग निकलेंगे। तो यहाँ से जो जाते हैं वो तो मुल्लों के चरणों में गिरते हैं। क्या? ये वज़ीर और ये अमीर लोग, ये फलाना मुल्लों के चरणों में जाते हैं ना। तुम्हारे ऊपर तुम बच्चों को पता है कि तुम्हारे ऊपर, माताओं के ऊपर तो गिरेंगे ही। परन्तु हिम्मत चाहिए उनको समझाने की। क्या? डरपोक नहीं बनना है। अरे, ये मुसलमान है। ये तो हमको भी ले डूबेंगे। हँ? हिम्मत चाहिए। अकल चाहिए उन्हें समझाने की। विशाल बुद्धि चाहिए। हँ? विशालबुद्धि क्या करेगी? जो-जो बातें हैं समझाने की, उन समझाने की बातों को गहराई में ले जाके समझाएंगे तो उनकी बुद्धि में बैठेगा। बुद्धि बेहद की चाहिए। हद की दुनिया की बुद्धि नहीं चाहिए।

बाकि जो आपस में लड़ते-झगड़ते हैं, मरते रहेंगे। वो क्या ये सर्विस कर सकते हैं? हाँ, जिनका पूरा योग ही नहीं शिवबाबा के साथ उनकी बुद्धि पारसबुद्धि कैसे बन सकती है? क्या? पारसबुद्धि किनकी बनेगी? जिनका एक बाप दूसरा न कोई ऐसा बुद्धियोग बन जाएगा। नहीं तो ये कौन आया है? कौन हमको पढ़ाते हैं? कितनी इनकी, पढाने वाले की, सुप्रीम टीचर की परवाह रखी है। कोई की भी, किसी की भी बुद्धि में अच्छे से नहीं बैठता। वो थोड़ेही समझते हैं दुनियावाले कि ये ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ पवित्र रहती हैं। इन्होंने दुनिया से सन्यास किया हुआ है। क्या? ये तो गृहस्थी वाली दुनिया जो गिरी हस्ती वाले बन गए वो तो खलास होनी ही होनी है। और जो गृहस्थी नहीं भी हैं, गृहस्थी को छोड़-छाड़ करके सन्यासी बन गए हैं, उनको भी समझाओ। क्या? ये घरबार छोड़ने की बात नहीं है। हँ? भगवान तो कहते हैं घरबार में रहते-रहते बुद्धि से मेरे को याद करो और सबको घरबार के जो मित्र-संबंधी, संबंधी हैं, उन सबको भूल जाओ। समझो। क्या? कि मैं आत्मा निराकार हूँ। मैं देह नहीं हूँ। ऐसे थोड़ेही कि स्त्री मर गई तो फिर उसको नहीं बांध सकते हो। हँ? किसको? मरने वाले को कोई बांध करके रख सकता है? नहीं। तो स्त्री मर गई तो बस घरघाट छोड़करके जंगल में चले सन्यासी बनके। हँ! जैसे तुलसीदास ने लिखा है – नारी मुई घर संपत्ति नासी। नारी मर गई और घर की संपत्ति बाल-बच्चों ने बर्बाद करना शुरू कर दी। मूढ़ मुड़ाय भये सन्यासी। हँ। या कोई का पति मर गया है। तो पति को कोई बांध सकता है मरने वाले को? हँ।

तो तुम सबको ये संदेश दो। क्या? गृहस्थी में पत्नी, बीबी, बाल-बच्चों से मोह छोड़ो। अब ये दुनिया खलास होने वाली है। अभी जितना बाप को याद कर लेंगे तो अंत समय में बाप ही याद आवेगा। बाप याद आएगा तो बाप तो इस दुनिया में रहता नहीं है। वो तो इस दुनिया से पार, फर्श का रहने वाला तो है नहीं, अर्श का रहने वाला है। वो तो वहाँ वापस चला जाएगा नई दुनिया बनाके। लेकिन नई दुनिया में सबको थोड़ेही जाना होगा। जो उसके डायरेक्शन पर चलेंगे, मत मानेंगे, उन सबको भेज देंगे। इसमें सब समझ चाहिए। बुद्धि चाहिए। मीठे-मीठे रूहानी बच्चों के प्रति बापदादा का यादप्यार गुडमार्निंग। ओमशान्ति।

So, that Aadam was in the beginning of the world; now the Father has come once again in him. People also say – Do not call Aadam as Khuda (God); Aadam is not Khuda, but Aadam is not separate from the light of Khuda. Aadam’s light (noor) becomes like the light of Khuda while remembering Khuda. The world will become pure like this. Khuda is the Father of that human world. So, he makes everyone pure through the remembrance of the Father. But you will have to remember One. One Father and none else. So, so, will you not become pure? Will you not go to Jannat (heaven)? So, that is it; Khuda has come to establish the new world for those who become pure. Britishers also say – Heavenly God Father. So, when there is a name, a title ‘Heavenly God Father’, so, He must have definitely established heaven, would He not have? So, that Father Himself has come. Hm? He has come to make this world of hell (dojakh) into heaven (jannat). He had transformed this world into heaven in the past as well. So, when He had made it a heaven, He had told, cautioned Aadam – Do not perform this impure task. Do not eat this fruit located in the middle of the body. Hm? Do not become moot-paleeti (spoilt by urine, i.e. lust). So, he did not remember it. Who? Aadam. So, Khuda pushed him into hell. And well, when the first man of the human world himself fell down, then all others fell behind him.

So, now the pure world is definitely required where all the deities remain happy. There is no question of sorrows there. When God creates then there will be only happiness in the creation of God. He is an ocean of happiness, isn’t He? So, the Father has to definitely give unlimited happiness. Every Father wants. The limited fathers of the lokik world also want their children to be happy. So, that unlimited Father also gives unlimited happiness and then departs. There will be just happiness in the world of Ram and Krishna. That world of Ram and Krishna exists in the Golden Age, Silver Age. Now while undergoing downfall from the dualistic Copper Age now the Iron Age started. It’s dualistic because other founders of religions came. They started double speak. They started two-two topics. Two gave rise to four; four gave rise to eight religions; as many kingdoms started. As many languages started. So, everyone fought with each other and died. So, the Father has to definitely establish a world of one religion, one kingdom, one clan, one language where everyone lives happily. So, those who become pure will definitely require a pure world.

So, look, a pure world is being established. What? A new pure world is being established; only then are we engaged in that task. Otherwise, why would we leave the businesses to fill our stomachs and come to you? So, now atom bombs have already been produced. You already know this. These are not toys to be kept at home for decoration. Hm? Why have these been produced? If not today, they will definitely explode tomorrow. So, destruction also takes place. Until the destruction of the old world does not take place, how will the new world emerge? It is because everyone knows that the new world which Khuda (God) creates in Jannat (heaven), everyone will not go to that heavenly world. All will not become pure. So, for those who become pure, this destruction is also required. This world of sinful ones will be destroyed. The crowd in this world. And those who become pure deities; there was a pure world which is called Golden Age. Now this world is Iron Age. What? What is the difference between Iron Age, iron and golden? The price of golden, gold is more. And the price of iron cannot be that much. So, don’t you wish to go to the Golden Age? Hm? Do you not want to go to the world of Golden Age which the Father, God has come to establish? If you don’t want to go, you will not be able to go. And if you are unable to go, then your soul will not become pure. Arey, go and tell this to them. Those Mullahs will also fall to at their feet because even the Mullahs don’t know as to why have they been named Mullah? Moot (urine) and La (bring). What? They gave such opposite explanations to the people and made the entire world moot-paleeti (spoilt by urine, i.e. lust)

So, those Mullahs will also touch your feet. What? Those who have caused the downfall of people by delivering a lot of lectures. They say that God is in every particle, don’t they? Arey! Why will God be in every particle and come under your feet? God is the highest one, isn’t He? Hm? The soul which is incorporeal also lives in the highest stage in this body, doesn’t it? Indian mothers apply bindi in the middle of two eyes, in the middle of the forehead between the eyebrows (bhrikuti). Men apply teeka. So, Indians know because heaven is established in India only. You are also the President of India. So, if you accept then numerous people will emerge behind you. So, those who go from here fall at the feet of the Mullahs. What? These Wazirs (Ministers) and these Emirs (prosperous people), etc. fall at the feet of the Mullahs, don’t they? You children know that they will definitely fall at your feet, at the feet of the mothers. But you should have the courage to explain to them. What? You shouldn’t become afraid. Arey, this one is a Muslim. This one will drown along with me. Hm? You should have courage. You should have wisdom to explain to them. You require a broad intellect. Hm? What will a broad intellect do? If you explain deeply all the topics that have to be explained, then it will sit in their intellect. Unlimited intellect is required. Intellect of the limited world is not required.

As regards those who fight with each other, they will keep on dying. Can they do this service? Yes, those who do not have complete Yoga with ShivBaba, how can their intellect become paarasbuddhi? What? Whose intellect will become paarasbuddhi? Those who have one Father and none else will have such intellect. Otherwise, who has come? Who teaches us? How far do you care for the teacher, the Supreme Teacher. It does not sit properly in anyone’s intellect. Those people of the world do not think that these Brahmakumars and Kumaris lead a pure life. They have renounced the world. What? This world of household (grihasthi), who have become fallen personalities (giri hastis) is to definitely end. And you should explain even those who are not householders, those who have become Sanyasis by renouncing the household. What? It is not about leaving this household. Hm? God says that you should remember Me through the intellect while living in a household and forget all the friends and relatives of the family. Understand. What? That I, the soul am incorporeal. I am not a body. It is not as if when the wife dies then you cannot bind her. Hm? Whom? Can anyone bind the person who is going to die? No. So, when the wife dies, then they leave the household, become sanyasis and go to the jungles. Hm! For example, Tulsidas wrote – Naari mui ghar sampatti naasi. When the wife dies, then the children start spoiling the property of the house. Moodh mudaay bhaye sanyaasi (the husband shaves his head and becomes a sanyasi). Or if someone’s husband dies, then can someone tie a dying husband (i.e. prevent him from dying)? Hm.

So, you give this message to everyone. What? Leave the attachment for the wife and children. Now this world is going to end. The more you remember the Father now; you will remember the Father alone in the end. If the Father comes to your mind, then the Father does not live in this world. He lives beyond this world; He doesn’t live on this land (farsh); He is a resident of the other world (arsh). He will establish the new world and go back there. But everyone will not go to the new world. He will send all those who follow, accept His directions. Wisdom is required in this. Intellect is required. Remembrance, love and good morning of BapDada to the sweet, sweet spiritual children. Om Shanti.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 14 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2624, दिनांक 29.08.2018
VCD 2624, Dated 29.08.2018
रात्रि क्लास 26.8.1967
Night Class dated 26.8.1967
VCD-2624-extracts-Bilingual

समय- 00.01-15.33
Time- 00.01-15.33


आज का रात्रि क्लास है- 26.8.1967. ये एक कृष्ण ही है जिसको वास्तव में श्याम सुन्दर नाम रखा है। हँ? रामचन्द्र को श्याम सुन्दर नहीं कहते हैं। क्यों? हँ? कहते क्यों नहीं? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) मर्यादा पुरुषोत्तम है? तो क्या आदि में भी मर्यादा पुरुषोत्तम और अंत में भी मर्यादा पुरुषोत्तम? श्याम सुन्दर नाम तो ये साबित करता है कि पहले श्याम, फिर सुन्दर। ऐसे थोड़ेही कहते हैं सुन्दर श्याम? तो क्या राम सदा मर्यादा पुरुषोत्तम था? सदा? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) बुद्धि से? अच्छा? ओम मण्डली में कैसा था? बताओ, जल्दी बता दो। ओम मण्डली में गोरा था? अच्छा? गोरा है? अभी की थोड़ेही बात है? ओम मण्डली की बात पूछी। नो जवाब। अच्छा? (किसी ने कुछ कहा।) मर्यादा पुरुषोत्तम त्रेता का राम। अच्छा, सतयुग में था ही नहीं? हँ? सतयुग में वैष्णवी देवी थी? अरे, वो तो संस्कार तो दोनों के मिलके एक हो जाते हैं पति-पत्नी के। तब फिर उनको विष्णु के रूप में दिखाते हैं। ये एक हैं। हँ? उसके तो संस्कार ही एक हो गए तो, तो जैसा काम वैसा ही नाम हो गया ना। फिर आगे पीछे की बात रह गई।

तो जिसे वैष्णो देवी नाम दिया है, वो देवी नाम दिया है। है तो विष्णु देवता। पुरुष रूप में दिखाते हैं चित्रों में या स्त्री चोले में दिखाते हैं? पुरुष रूप में दिखाते हैं। और वैष्णो देवी नाम बाला भी होता है तो पहले द्वापर में नाम बाला होता है या कलियुग में नाम बाला होता है? कलियुग में नाम बाला होता है वैष्णो देवी का। बाकि द्वापर में तो विष्णु तो था ही शास्त्रों में। द्वापर कहा ही जाता है जब द्वैतवादी युग हो। द्वैतवादी का मतलब देवात्माएं भी हों और दैत्य भी हों। एक धर्म न हो। एक धर्मवाले तो देवता होते हैं। उन्हें तो अद्वैत कहा जाता है। द्वापर में तो दो-दो, तीन-तीन, चार-चार कितने धर्म हो जाते हो जाते हैं, कितने राज्य हो जाते हैं, कितनी भाषाएं, कितने कुल हो जाते हैं। इसलिए द्वैतवाद कहा जाता है।

तो रामचन्द्र को पुरुष के रूप में दिखाया है। और जो दिखाया है वो यादगार कहाँ की है? त्रेता की यादगार है? वो तो ऋषि-मुनियों ने समझ लिया कि त्रेता में रामचन्द्र की यादगार शास्त्रों में हमने दिखाई है। वास्तव में यादगार तो उस समय की है जिस समय भगवान साक्षात इस सृष्टि पर आता है और पर्दे के पीछे रहके सदा पार्ट बजाता है डायरेक्टर का। और सारी सृष्टि को परिवर्तन कर देता है। किसके द्वारा? कोई एक को निमित्त बनाता है या बहुतों को निमित्त बनाता है? दो-चार को निमित्त बनाता है? हँ? एक कोई निमित्त हुआ। एक को आदि में निमित्त बनाता है। परन्तु आदि में जिसको निमित्त बनाता है और उसके द्वारा वाणी भी सुनाता है तो उस वाणी को शास्त्रों में क्या नाम दिया है? जो ज्ञान सुनाता है उस वाणी का नाम क्या दिया है?
(किसी ने कुछ कहा।) वेद वाणी? अँहँ, नहीं। मुरली? हँ? उस वाणी का नाम गीता दिया है। क्योंकि सबसे पहले शास्त्र कौनसा आता है संसार में? गीता आती है या वेद आते हैं? गीता आती है।

तो गीता का ज्ञान तो सुनाया लेकिन जिसके मुख से सुनाया गया उसको पता ही नहीं है कि वो ज्ञान सुनाने वाला आत्मा कौन है? पता था? नहीं पता था। क्यों नहीं पता था? क्योंकि सुप्रीम सोल बाप कहते हैं मैं जिस तन में भी प्रवेश करता हूँ उसको पता ही नहीं चलता कि मैं कब आया, कब गया। इसीलिए मेरा दिव्य जन्म कहते हैं। ऐसे भूत-प्रेत और फरिश्ते भी प्रवेश करते हैं परन्तु जिसमें प्रवेश करते हैं उनका चेहरा-मोहरा बदल जाता है। तो दिव्य प्रवेश नहीं कहेंगे। क्योंकि वो आत्माएं जो होती हैं सूक्ष्म शरीरधारी, वो आत्माएं अपनी पावर दिखाती है। क्या? दिखावा। वो अपना अहंकार जरूर दिखाएगी। उनका अहंकार जाता नहीं है किसी तरह। चाहे फरिश्ताएं हों और चाहे कोई अच्छे भूत-प्रेत हों, चाहे ईविल सोल हों। तो ये अंतर है। इसलिए भगवान को गीता में कहा है मैं दिव्य प्रवेश, दिव्य जन्म लेता हूँ। जन्म माने प्रत्यक्ष होना। तो काहे से प्रत्यक्ष होता हूँ? किस बात से प्रत्यक्ष होता हूँ? वो तो निराकार है। जब ज्ञान सुनाते हैं तो पता लगता है कि ऐसा ज्ञान गीता का तो किसी ने सुनाया ही नहीं था। लेकिन जिसके मुख से सुनाते हैं वो ये समझता है मैं सुनाता हूँ। क्या? वो ये समझता है कि कोई निराकार शिव ने आकरके ये वाणी चलाई? नहीं समझता। तो जब पहचाना ही नहीं बाप को, हाँ, यज्ञ के आदि में, तो पहचाना ही नहीं कि ये वाणी कौन चला रहा है, उन्होंने समझा हम ही चलाय रहे हैं। लेकिन वास्तव में वो नहीं चला रहा। अगर चला रहा होता तो जो वाणी में क्लेरिफिकेशन आए पवित्रता के बारे में उसको फालो भी करता। क्या? आया ना। याद कैसी होनी चाहिए? अव्यभिचारी।

अव्यभिचारी का मतलब क्या? एक की याद। तो एक की याद, एक का संग का रंग में बुद्धि रमी रहेगी, मन-बुद्धि रहेगी तो एक की याद आएगी या मन-बुद्धि अनेकों में रमी रहेगी तो एक की याद आएगी? मन-बुद्धि अनेकों में रमी रहेगी तब जब कर्मेन्द्रियों का भी संग हो। क्या? क्योंकि कर्मेन्द्रियों का, ज्ञानेन्द्रियों का संग का रंग जरूर लगता है। किसको नहीं लगता है? एक सुप्रीम सोल है जिसका नाम है शिव। शिव माने कल्याणकारी। उसको नहीं लगता है। बाकि तो सबको लगता है। तो पहले-पहले जिसमें प्रवेश करता है, उसको भी लगता है। तो लगता है तो काला बन रहा है कि गोरा बन रहा है? काला बन रहा है। पर आदि में जो काला वो आदि सो अंत ये नियम है। आदि में काला, बहुत काला, पूरे सत्संग में सबसेजास्ती काला, तो अंत में भी, अंत में बड़ा रूप हो जाएगा यज्ञ का तो वहाँ भी काला। तो राम को न आदि में काला, वो गोरा कहेंगे, न मध्य पुरुषार्थी जीवन में गोरा कहेंगे और न अंत में गोरा। क्यों? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) हँ। ओहो। आदि में ज्ञान नहीं था? और अंत में ज्ञान है? अच्छा? क्या-क्या ज्ञान है? अपने 84 जन्मों का ज्ञान है? हँ? कि नीम-हकीमे खतरे जान। हँ? ओह! एक मिसाल दिया जाता है। चुहरे को हल्दी की गांठ मिल गई तो वो पंसारी बनके बैठ गया। ज्ञानी है? ज्ञान कहेंगे? हँ? कोई डॉक्टर होते हैं ना आजकल झोलाछाप। थोड़ा बहुत डॉक्टरी सीख लेते हैं, कोई डॉक्टर से, बस, वो डॉक्टरी करना शुरू कर दिया। तो गोर्मेन्ट उनको पकड़ लेती है। जेल में डाल देती है। तो ऐसे ही है।

(किसी ने कुछ कहा।) शिव समान बन जाएगा। अपने पुरुषार्थ से बन जाएगा? अपने पुरुषार्थ से? अच्छा? मुझ निर्गुणहारे में कोई गुण नाहि। आपेही तरस परोई। ये किसका गायन है? हँ? बताओ? अरे किसका गायन है? कौनसे? अच्छा ग्रुप का नाम बता दो। (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, रुद्रगणों का गायन है ना। और रुद्रगणों का जो गायन होगा उनके मुखिया में तो वो गायन जरूर होगा। वो क्वालिटी जो रुद्रगणों में आती है, रुद्रगणों का जो मुखिया महारुद्र होगा, उसमें वो क्वालिटी होगी कि नहीं? होगी ना। हँ? तो नाम ही देते हैं रुद्र। रुद्र माने रौद्र रूप तो धारण किया। लेकिन जब प्रत्यक्ष हुए संसार के सामने तो रोते-रोते पैदा हुए। क्या? इसीलिए उनको कहा जाता है रुद्र। रौद्र रूप खुद दिखाया। अब बाबा जो भगवान वास्तव में है ऊँच ते ऊँच भगवन्त आत्मा वो शिव ये कहता है कि तुम क्रोध दिखाओ? रौद्र रूप दिखाओ? कहता है? सिखाता है? उसने क्या किया? दिखाया। तो काला बनेगा कि गोरा बनेगा? काला बन गया ना। तो रामचन्द्र को काला ही दिखाते हैं। और ये नहीं कहते सुन्दर बना। अपने पुरुषार्थ से सुन्दर नहीं बना। आपेही तरस परोहि। तो तरस आ गया तो शिवबाबा ने काले से गोरा बना दिया। गोरा क्या बनाय दिया? गोरा शरीर को बनाया जाता है कि आत्मा को? आत्मा को गोरा बनाया जाता है। तो आत्मा को गोरा बनाया। शरीर को तो गोरा नहीं बनाया। हँ? शरीर तुरन्त गोरा बन जाता है? नहीं। वो तो जब पांच तत्व गोरे बनें, तब शरीर भी गोरा बने। तो रामचन्द्र को नहीं कहते हैं श्यामसुन्दर।

Today's night class is dated 26.8.1967. It is Krishna alone who has been actually named Shyam Sundar. Hm? Ramchandra is not called Shyam Sundar. Why? Hm? Why is not he called? Hm?
(Someone said something.) Is he Maryadas Purushottam (highest among all souls in following the code of conduct)? So, is he Maryadas Purushottam in the beginning and Maryadas Purushottam in the end as well? The name Shyam Sundar proves that he is first Shyam (dark) and then Sundar (fair). Is it said Sundar Shyam? So, was Ram always Maryadas Purushottam? Forever? Hm? (Someone said something.) Through intellect? Achcha? How was he in the Om Mandali? Tell; tell fast. Was he fair in the Om Mandali? Achcha? Is he fair? Is it about the present time? A topic about the Om Mandali was raised. No reply. Achcha? (Someone said something.) Maryadas Purushottam Ram of the Silver Age. Achcha, did he not exist in the Golden Age at all? Hm? Was there Vaishnavi Devi in the Golden Age? Arey, the sanskars of both of them, the husband and wife become one. Then they are shown in the form of Vishnu. They are one. Hm? Their sanskars became one, so, as is the task, so is the name. Then the topic of sooner or later remains.

So, the one who has been named Vaishno Devi has been named a Devi (a female deity). But it is Vishnu Devata (a male deity). Is he shown in a male form in the pictures or in a female body? He is shown in a male form. And even if the name Vaishno Devi becomes famous, does it become famous initially in the Copper Age or in the Iron Age? Vaishno Devi's name becomes famous in the Iron Age. As regards the Copper Age, Vishnu was already there in the scriptures. It is called Copper Age (Dwapar), only when it is a dualistic Age (dwaitwaadi yug). Dualistic means there should be deity souls as well as demons. There should not be one religion. Those having one religion are deities. They are called adwait (non-dualist/monoist). Two, three, four religions emerge in the Copper Age; so many kingdoms, so many languages, so many clans emerge. This is why it is called dualism (dwaitwaad).

So, Ramchandra has been shown in male form. And whatever has been shown is a memorial of which place? Is it a memorial of the Silver Age? The sages and saints thought that we have shown the memorial of the Ramchandra of the Silver Age in the scriptures. Actually, it is a memorial of that time when God Himself comes to this world and always plays the part of a director while remaining behind the curtains. And he changes the entire world. Through whom? Does He make any one person instrumental or does He make many persons instrumental? Does He make two-four instrumental? Hm? One person is instrumental. He makes one person instrumental in the beginning. But the one whom He makes instrumental in the beginning and also narrates Vani through him, then what is that Vani named in the scriptures? What is the name given to the knowledge, the Vani that He narrates?
(Someone said something.) Ved Vani? Anhn. No. Murli? Hm? That Vani has been named the Gita because which scripture comes first of all in the world? Does the Gita come or do the Vedas come? The Gita comes.

So, He did narrate the knowledge of the Gita, but the one through whose mouth it was narrated, does not know at all as to which soul narrates that knowledge. Did he know? He did not know. Why did he not know? It is because the Supreme Soul Father says – Whichever body I enter, he/she does not know as to when I entered and when I departed. This is why My birth is said to be divine. Ghosts and devils and angels also enter, but the facial expressions of the ones in whom they enter change. So, it will not be called divine entry (divya pravesh). It is because those subtle bodied souls show their power. What? Show off. They will definitely show their ego. Their ego does not wane away in any manner. Be it the angels and be it good ghosts and devils or be it the evil souls. So, this is the difference. This is why it has been said about God in the Gita – I enter in a divine manner, I get a divine birth. Birth means revelation. So, how am I revealed? Through which topic do I get revealed? He is incorporeal. When He narrates knowledge, then one can know that nobody had narrated such knowledge of the Gita at all. But the one through whose mouth it is narrated thinks that I narrate. What? Does he think that incorporeal Shiv came and narrated this Vani? He does not think. So, when he did not recognize the Father at all in the beginning of the Yagya, when he did not recognize at all that who is narrating this Vani; he thought that he himself is narrating. But actually, it is not he who is narrating. Had he been narrating then he would have also followed the clarifications regarding purity in the Vani. What? It was mentioned, wasn’t it? How should be the remembrance? Unadulterated (avyabhichaari).

What is meant by avyabhichaari? Remembrance of one. So, will there be remembrance of one if there is remembrance of one, if the intellect, the mind and intellect remains engrossed in the colour of company of one, or will someone remember one if the mind and intellect is engrossed in the remembrance of many? The mind and intellect will remain engrossed in many when there is a company of the organs of action as well. What? It is because the colour of company of the organs of action, the sense organs is definitely applied. On whom is it not applied? There is only one Supreme Soul whose name is Shiv. Shiv means benevolent. It is not applied to Him. It is applied to all others. So, it is applied even to the one in whom He enters first of all. So, when it is applied, is he becoming dark or fair? He is becoming dark. But the one who was dark in the beginning; it is a rule that whatever happens in the beginning happens in the end. If he is dark in the beginning, very dark, darkest one in the entire satsang (spiritual gathering), so, in the end also; in the end when the Yagya grows big, then he is dark there as well. So, Ram is neither called dark in the beginning, no, fair, nor will he be called fair in the middle of the purusharthi life and nor is he fair in the end. Why? Hm?
(Someone said something.) Hm. Oho. Was not there knowledge in the beginning? And is there knowledge in the end? Achcha? What all knowledge is there? Does he have knowledge of his 84 births? Hm? Or is it Neem Hameemey Khatrey Jaan (half knowledge is dangerous). Hm? Oh! An example is given. When the mouse found a lump of turmeric, he sat as a grocery shopkeeper. Is he knowledgeable? Will it be called knowledge? Hm? There are some doctors who are quacks now-a-days. They learn a little medical knowledge from a doctor and that is it, they start medical practice. So, government catches them. It puts them in jail. So, it is like this.

(Someone said something.) He will become equal to Shiv. Will he become through his efforts? Through his purusharth? Achcha? I, the virtueless one, do not have any virtues. Please show mercy upon me. Whose praise is this? Hm? Speak up. Arey, whose praise is this? Whose? Achcha, name the group. (Someone said something.) Yes, it is the praise of the Rudragans, isn’t it? And the praise of the Rudragans will definitely be the praise of their chief as well. The quality that the Rudragans inculcate, will that quality not be found in the chief of the Rudragans, the Maharudra? It will be found, will it not be? Hm? So, the name itself is given as Rudra. Rudra means that he did assume a fierce form (raudra roop). But when they were revealed in front of the world, they were born crying. What? This is why they are called Rudra. He himself showed the fierce form. Well, does Baba who is actually the highest on high God, the soul of God, that Shiv say that you should show your anger? Should you show your fierce form? Does He say? Does He teach? What did he (Rudra) do? He showed. So, will he become dark or fair? He became dark, didn’t he? So, Ramchandra is shown to be dark only. And it is not said that he became fair (sundar). He did not become fair with his own purusharth. You yourself show mercy upon me. So, when ShivBaba showed mercy, He made him fair from dark. What did He make fair? Is the body made fair or is the soul made fair? The soul is made fair. So, the soul was made fair. The body was not made fair. Hm? Does the body become fair immediately? No. When the five elements become fair, then the body will also become fair. So, Ramchandra is not called Shyamsundar.
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 16 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2625, दिनांक 30.08.2018
VCD 2625, Dated 30.08.2018
रात्रि क्लास 26.8.1967
Night Class dated 26.8.1967
VCD-2625-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-21.41
Time- 00.01-21.41


रात्रि क्लास चल रहा था - 26.8.1967. पहले पेज के लगभग मध्यादि में बात चल रही थी। क्या प्रसंग चल रहा था? काला ही काला। हँ? उसमें कृष्ण को काले की बात चल रही थी। सूर्यवंशी का तो रामचन्द्र। वो छोटेपन का तो है ही नहीं। हँ? कृष्ण को तो छोटेपन का दिखाते हैं मन्दिरों में। रामचन्द्र को तो बड़ा दिखाते हैं। और वो तो छोटे से ही राम उसका नाम है शायद। लेकिन छोटा तो नहीं दिखाते। क्यों? कहाँ की यादगार है? संगम की यादगार है। क्योंकि वो तो डायरेक्ट नर से नारायण बनता है ना। तो नारायण तो बड़ा होगा ना। छोटा थोड़ेही होगा। प्रिंस छोटा होता है। तो कृष्ण को प्रिंस के रूप में दिखाते हैं और नारायण को बड़े रूप में दिखाते हैं। यादगार हुई संगमयुग की। बाकि नाम छोटे से ही है। उसका नाम शायद राम। नाम किसकी यादगार में होता है? काम की यादगार में। तो ये काले ही काले बनाते हैं। तो उसपे समझाना होता है कि यही श्याम सुन्दर। कोई इनका नाम रखा है श्यामसुन्दर। ये क्यों रखा गया है? हँ? क्योंकि सतयुग में तो सुन्दर ही सुन्दर होता है। श्याम तो होता नहीं। सत्वप्रधान युग है। सत्तयुग ही कहा जाता है। कलियुग में सब आत्माएं आके काली बनती हैं। तो वो पहले काला बनता होगा कि बाद में? पहले काला बनता है। तो सतयुग में कहेंगे पहले सुन्दर और कलियुग में कहेंगे पहले काला।

तो नाम रख दिया है श्यामसुन्दर। अब ये आत्मा की बात है या शरीर की बात है? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) शरीर की बात है? तो श्यामसुन्दर एक आदमी का नाम कैसे हुआ? एक व्यक्ति का नाम तो श्यामसुन्दर नहीं हो सकता है। कलियुग के अंत में है दूसरा शरीर, दूसरा व्यक्तित्व। और सतयुग के आदि में है दूसरा व्यक्तित्व। तो श्यामसुन्दर जो नाम है वो शरीर के ऊपर रखा जाता है या आत्मा के ऊपर रखा जाता है? आत्मा का तो सिर्फ एक ही आत्मा है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने वाली जिसका नाम आत्मा के ऊपर है। कौन? शिव। वो उनकी आत्मा का ही नाम होता है। बाकि तो सबके शरीर का नाम पड़ता है। तो श्याम सुन्दर नाम क्यों रखा गया? और अपने पास चित्र भी श्याम का है। है कोई श्याम का चित्र? किसी ने कहा – अपने पास जो चित्र है वो तो गोरा है कृष्ण। क्या? सतयुग आने वाला है, कलियुग जाने वाला है। श्री कृष्ण आ रहे हैं। तो हाथ में, बुद्धि रूपी हथेली में नई दुनिया का नक्शा लेके आ रहे हैं। हमारे पास तो गोरा है। क्या? किसी ने कहा – गोरे हैं, श्याम तो नहीं हैं। गोरे हैं। श्याम नहीं हैं। श्याम होना चाहिए। हँ? क्यों? अभी तो जो सतयुग में कृष्ण पैदा होता है उसकी आत्मा जहाँ भी पार्ट बजाय रही होगी कलियुग में, श्याम है। तो श्याम होना चाहिए। और रामचन्द्र भी श्याम होना चाहिए।

तो ये चित्र ले आकरके रखना चाहिए समझाने के लिए। रघुनाथ से रामचन्द्र का चित्र मिल ही जाएंगे। और बाजार में कृष्ण सांवरे का भी मिल सकते हैं। तो जरूर समझाना पड़े कि ये सुन्दर भी तो है। है? हँ? अभी सुन्दर है? कहाँ से सुन्दर हो गया? हँ? जब जन्म होता है, प्रत्यक्षता होती है;
(किसी ने कुछ कहा।) बन रहे हैं, बने तो नहीं ना। लेकिन हमारा चित्र सुन्दर, गोरे कृष्ण का है। फिर नारायण को, ये भी नारायण वो भी नारायण। नारायण को काला दिखा दिया। नारायण तो ये सतयुग का भी है। और वो आदि नारायण भी है। वो तो सतयुग का नहीं है। सृष्टि जब आरंभ होती है, क्योंकि वो वैकुण्ठ लोक से आरम्भ होती है। हँ? तो वहाँ भी नारायण गोरा होता है वैकुण्ठ में या काला होता है? वहाँ तो गोरा होता है ना। और रामचन्द्र को अपने पास तो वो सुन्दर ही है। तो ये सुन्दर और श्याम। कि इसका अर्थ क्या है श्यामसुन्दर का? तो उनको बैठकरके समझाना चाहिए कि एक ही व्यक्तित्व का नाम है श्यामसुन्दर। परन्तु गलतफहमी से बोल दिया है क्योंकि उनकी बुद्धि में तो, शास्त्रकारों की बुद्धि में तो सतयुग के आदि का कृष्ण है। सतयुग से पहले उनकी बुद्धि जाती ही नहीं। क्यों? क्योंकि बड़ा भारी विनाश हो गया था सारी सृष्टि का। बहुत बड़ा एक्सिडेन्ट हो गया। उससे बड़ा एक्सिडेन्ट कभी भी इस सृष्टि में होता ही नहीं है। तो सब भूल गए कि इसका अर्थ क्या है श्यामसुन्दर का।

तो उनको बैठकरके समझाना चाहिए। क्योंकि सुन्दर और श्याम। इसको भी कहा जाता है श्याम को आयरन एजड माना काली दुनिया। और फिर काली दुनिया के बाद जरूर गोरी दुनिया बनेगी। सफेद दुनिया या गौरी दुनिया बात एक ही है। तुम बच्चे तो अच्छी तरह से जानते हो कि नई दुनिया गोरी होगी। हँ? पुरानी दुनिया को काली दुनिया कहेंगे। हँ? तो शूटिंग पीरियड में कैसे कहेंगे पुरानी दुनिया काली दुनिया? नई दुनिया गोरी दुनिया? कृष्ण और क्राइस्ट की राशि मिलाते हैं। तो कृष्ण कहेंगे; सतयुग में तो कृष्ण गोरा ही होता है। तो क्रिश्चियन्स का भी जब राज्य शुरू होता है तो क्रिश्चियन्स गोरे होंगे या काले होंगे? राशि मिली ना। तो गोरे ही होंगे ना। अच्छा, जब इनकी दुनिया नई दुनिया होगी, गोरे होंगे, वहाँ सुख ज्यादा होगा तो फिर जो भारत में पुरानी दुनिया है उसका क्या हाल होगा? गोरे होंगे कि काले होंगे? हँ? कैसे होंगे? पुराने हैं ना। तो काले। तो बराबर है। पुरानी दुनिया को काली दुनिया कहेंगे।

और कृष्ण को भी जो पहला है तो 84 जन्म तो जरूर चाहिए। क्योंकि पहले-पहले सृष्टि पे आया तो ज्यादा जन्म होंगे ना। पुनर्जन्म तो सभी लेते हैं। इस सृष्टि में जो बाद में आते हैं वो भी पुनर्जन्म लेते। और जो पहले-पहले आते हैं वो भी पुनर्जन्म लेते हैं। सिर्फ एक ही है, क्या, जो पुनर्जन्म रहित है। पुनर्जन्म उसका होता ही नहीं। तुम्हारे लिए कोई पूछे क्या भला ब्रह्मा? अरे, वो जो देवता है अभी जिसके ऊपर में शरीर है। और उनको तो पुनर्जन्म कहेंगे ही। क्योंकि ऊपर सतयुग में है ना। पहले-पहले आया तो पुनर्जन्म। क्योंकि बाबा ने इसलिए शंकर को उड़ाय दिया। क्यों? उनका तो कोई जन्म ही नहीं। किससे जन्म लेता है? उनके माँ-बाप का ही किसी को पता नहीं। न उनका जन्म दिखाते हैं, न मरण दिखाते हैं। क्या? ध्रुवम जन्म मृतस्य च। (गीता 2/27) गीता में भी तो लिखा हुआ है ना। भगवान ने बोला - जिसका जन्म है उसकी मृत्यु होगी। जिसकी मृत्यु होती है उसका जनम होता है। तो कौन है जिसका न जन्म है न मृत्यु है? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) शिव है? शंकर है? अरे। शिव है तो शंकर कहेंगे। शंकर है तो शिव कहेंगे। शिव नहीं तो शंकर नहीं। शंकर नहीं तो शिव नहीं। क्या? शिवबाबा कह दो। क्योंकि साकार में आते हैं तो उनके संबंध बनते हैं। उनमें ग्रांडफादर का भी संबंध है। तो शिवबाबा कह दो। परिवार में बाबा सबसे पुराना होता है।

तो शंकर का न जन्म है न मृत्यु है। है कहाँ की यादगार? ये शूटिंग पीरियड की यादगार है कि वो आत्मा मृत्यु नहीं होती तो जन्म भी नहीं होता। जिसकी मृत्यु होती है वो तो दुखी होता है। हँ? और जनम भी होता है इस पाप की दुनिया में खास, तो भी रोते-रोते पैदा होता है। तो उसका न कोई जनम है न मृत्यु है। शिव का तो फिर भी जनम है। हँ? शिवजयन्ती मनाई जाती है ना। जनम है? गरभ से? गरभ से जन्म नहीं है। हँ? बुद्धि रूपी पेट की बात है। और ब्रह्मा का भी जन्म है। अच्छा, उसका, शिव का जनम है तो शिव जयन्ती कहते हैं, शंकर जयन्ती तो नहीं कहते हैं। क्यों? हँ? शंकर की प्रत्यक्षता नहीं होती? शिव की होती है? बाबा ने तो कहा- बाप और बच्चे का जनम इकट्ठा है। बाप प्रत्यक्ष होता है तो बच्चा भी प्रत्यक्ष होता है। बच्चा प्रत्यक्ष होता है तो बाप की प्रत्यक्षता भी है। माना बच्चे के शरीर में ही शिव आता है ना। तो बड़ा बच्चा है।

तो बताया कि शिव का भी जनम है। परन्तु गाई नहीं जाती है शंकर की जयन्ती। जयन्ती किसकी गाई जाती है? शिव की जयन्ती गाई जाती है। अब जयन्ती साकार की होती है या निराकार की होती है? जयन्ती तो साकार की होती है। समझा ना? विष्णु में लक्ष्मी-नारायण की जयन्ती हो गई। कि वो तो कम्बिनेशन, कम्बाइन्ड रूप है ना लक्ष्मी-नारायण का। तो चार भुजाएं दिखाते हैं। दो लक्ष्मी की, दो नारायण की। और ब्रह्मा में तो फिर जरूर साथ ही है। ब्रह्मा तो मशहूर ही है। बहुत अच्छी तरह से मशहूर है। सारी दुनिया ब्रह्मा की संतान है। तो प्रजापिता ब्रह्मा भी है और ब्राह्मण कुल भी जरूर चाहिए। समझा ना? कुल की रचना माता और पिता दोनों से होती है ना। अभी ब्राह्मण कुल दो ही पड़ते हैं। हँ? एक है डायरेक्ट प्रजापिता ब्रह्मा। उन द्वारा ब्रह्मा मुख वंशावली। क्या? डायरेक्ट प्रजापिता के द्वारा मुख वंशावली। और दूसरा है अभी के ब्राह्मण। वो कौनसे वंशावली? मुख वंशावली नहीं कहेंगे? क्योंकि वो तो मुख की बात पे ध्यान ही नहीं देते। वो तो गोद का ज्यादा महत्व रहता है उनका। बड़ा फखुर रहता है। हमने ब्रह्मा बाबा की गोद ली। तुम तो अभी आए हो। तुमने तो गोद भी नहीं ली। अभी तो बाबा का, ब्रह्मा बाबा का शरीर ही छूट गया। तुम तो गोद लेने के अधिकारी नहीं हुए ना। और हम तो अधिकारी हो गए। तो बड़ा फखुर रहता है। तो उनको क्या कहेंगे? ब्रह्मा मुख वंशावली कहेंगे या प्रजापिता ब्रह्मा मुख वंशावली कहेंगे? हँ? सिर्फ ब्रह्मा मुख वंशावली। अम्मा का बड़ा फखुर है।

तो उन द्वारा, जिनके द्वारा ब्रह्मा मुख वंशावली बनते हैं वो माता और पिता, दोनों की? दोनों की संतान हैं। तो वो हो गए दूसरे। नंबर दो का कुल। कौनसा? जो अपन को ब्राह्मण तो कहते हैं लेकिन मुख वंशावली नहीं कह सकते क्योंकि मुख से निकली हुई बातों के ऊपर उनको फखुर? फखुर नहीं है। वो अभी के ब्राह्मणों की बात है। क्या? 67 में ही बोल दिया। अभी जो ब्राह्मण हैं ब्रह्मा की औलाद वो दूसरे कुल के हैं। अव्वल नंबर कुल के नहीं। डायरेक्ट प्रजापिता ब्रह्मा के मुख वंशावली नहीं। तो पहले तो ब्रह्मा मुख वंशावली। वो तो हो गया ब्राह्मण। क्योंकि ये धर्म तो है ना ब्राह्मणों का। कौनसे ब्राह्मणों का? प्रजापिता ब्रह्मा का। वो ही हैं असली ब्राह्मण जो माई और बाप दोनों से पैदा होते हैं। तो अभी तो बहुत हो गए। तो जरूर ब्राह्मण धर्म तो है। मुख वंशावली ब्रह्मा के। ऐसे नहीं कि वो है ही नहीं। और वो तो ब्राह्मण हैं। सिर्फ ब्राह्मण मुख वंशावली तो हैं नहीं। मुख वंशावली ब्रह्मा के नहीं कहेंगे। क्यों? क्योंकि मुख की निकली हुई बात को ध्यान ही नहीं देते। गोद का बड़ा फखुर है। (क्रमशः)

A night class dated 26.8.1967 was being narrated. A topic was being discussed in about beginning of the middle portion of the first page. What was the context? Dark and dark. Hm? In that the topic of Krishna being dark was being discussed. Ramchandra is of the Sun dynasty. He is not from the childhood. Hm? Krishna is shown to be of childhood in the temples. Ramchandra is shown to be grown-up. And his name is perhaps Ram only from the childhood itself. But he is not shown to be young (a child). Why? It is a memorial of which place? It is the memorial of the Confluence Age. It is because he becomes direct Narayan from nar (man), doesn’t he? So, Narayan will be grown-up, will he not be? He must not be young. A Prince is young. So, Krishna is shown in the form of a Prince and Narayan is shown to be in a grown-up form. The memorial is of the Confluence Age. But the name is from the childhood itself. Perhaps his name is Ram. Whose memorial is the name? In the memorial of the task performed. So, they become dark and dark only. So, you should explain on that – It is this very Shyamsundar. He has been named Shyamsundar. Why was this coined? Hm? It is because he is just fair in the Golden Age. He is not dark (shyaam). It is a satwapradhan (pure) age. It is called Sattyug (age of truth). All the souls become dark when they reach the Iron Age. So, does he become dark first or later on? First he becomes dark. So, he will be called sundar (fair) first in the Golden Age and in the Iron Age he will be first called dark.

So, the name has been coined as Shyamsundar. Well, is it a topic of the soul or the body? Hm?
(Someone said something.) Is it a topic of the body? So, how is Shyamsundar the name of one person? One person cannot have the name Shyamsundar. In the end of the Iron Age it is a different body, a different personality. And in the beginning of the Golden Age it is another personality. So, is the name Shyamsundar assigned to the body or to the soul? In case of soul, there is only one soul playing its part on this world stage, which is named based on the soul. Who? Shiv. So, only His soul has a name. Names of all others are based on the body. So, why was the name Shyamsundar coined? And we also have the picture of Shyam. Is there any picture of Shyam? Someone said – The picture that we have is of a fair Krishna. What? The Golden Age is going to arrive; the Iron Age is going to depart. Shri Krishna is coming. So, He is coming with the map of the new world in his hand, his intellect like hand. We have a fair one. What? Someone said – He is fair; he is not dark. He is fair. He is not dark. He should be dark. Hm? Why? Well, the Krishna who is born ine Golden Age, wherever its soul is playing its part in the Iron Age, it is Shyam. So, he should be Shyam (dark). And Ramchandra should also be Shyam (dark).

So, you should bring and keep these pictures for explaining. You will definitely get the picture of Ramchandra from [the temple of] Raghunath. And you can also get the picture of dark Krishna in the market. So, you will definitely have to explain that this one is fair as well. Is he? Hm? Is he fair now? How did he become fair? Hm? When he is born, when he is revealed;
(Someone said something.) He is becoming; he hasn’t yet become, has he? But our picture is of the handsome, fair Krishna. Then Narayan; this one is also Narayan, that one is also Narayan. Narayan has been shown to be dark. There is a Narayan of the Golden Age as well. And there is that Aadi (first) Narayan as well. He does not belong to the Golden Age. When the world begins, because it begins from the Vaikunth lok (Confluence Age heaven). Hm? So, is Narayan fair there also in Vaikunth or is he dark? He is fair there, isn’t he? And our Ramchandra is fair only. So, this Sundar (fair) and Shyaam (dark). What is the meaning of this Shyamsundar? So, you should sit and explain to them that Shyamsundar is the name of only one personality. But due to misunderstanding they have said so because there is the Krishna of the beginning of the Golden Age in their intellect, in the intellect of the writers of scriptures. Their intellect does not go to the time before the Golden Age. Why? It is because a very huge destruction of the entire world had taken place. A very big accident had taken place. No accident bigger than that ever happens in this world at all. So, everyone has forgotten the meaning of Shyamsundar.

So, you should sit and explain to them because Sundar and Shyam. This Shyam is also called Iron-Aged, i.e. dark world. And then after the dark world it will definitely become a fair world. White world or fair world; it is one and the same. You children know very well that the new world will be fair. Hm? The old world will be called a dark world. Hm? So, how will you call the old world as a dark world in the shooting period? How is the new world a fair world? The horoscope (raashi) of Krishna and Christ are matched. So, he will be called Krishna; Krishna is only fair in the Golden Age. So, even when the kingdom of the Christians starts, then will the Christians be fair or dark? Their horoscopes matched, didn’t they? So, they will be fair only, will they not be? Achcha, when their world is a new world, they will be fair, enjoy more happiness; then what will be the condition of the old world in India? Will they be fair or dark? Hm? How will they be? They are old, aren’t they? So, they are dark. So, it is correct. The old world will be called a dark world.

So, 84 births are definitely required for Krishna also, who is first. It is because he came first of all in the world; so, he will have more births, will he not? Everyone gets rebirth. Those who come later on in this world also get rebirth. And those who come first of all also get rebirth. There is only one who is devoid of rebirth. He does not get rebirth at all. If anyone asks you what about Brahma? Arey, that deity, whose body is now above. And he will indeed be said to get rebirth. It is because he is in the Golden Age above, isn’t he? When he came first of all he gets rebirth. It is because this is why Baba made Shankar to vanish. Why? He does not have any birth at all. From whom does he get birth? Nobody knows about his parents. Neither is his birth depicted nor is his death depicted. What? Dhruvam janma mritasya cha. (Gita 2/27) It has been written in the Gita as well. God said – The one who is born will die. The one who dies will be born. So, who is the one who is neither born nor dies? Hm?
(Someone said something.) Is it Shiv? Is it Shankar? Arey! If I say Shiv you will say Shankar. If I say Shankar, you will say Shiv. If not Shiv, if not Shankar. If not Shankar, if not Shiv. What? Call him ShivBaba. It is because when He comes in a corporeal form then he develops relationships. The relation of grandfather is also included in it. So, call Him ShivBaba. Baba (grandfather) is the oldest one in the family.

So, Shankar is neither born nor does he die. It is a memorial of which place? It is a memorial of the shooting period that that soul neither dies nor is it born. The one who dies becomes sorrowful. Hm? And even when he is born especially in this world of sins, he is born crying. So, he is neither born nor does he die. Shiv has a birth. Hm? Shivjayanti (Shiv’s birthday) is celebrated, isn’t it? Is there birth? Through the womb? He is not born through the womb. Hm? It is about the intellect-like womb. And Brahma is also born. Achcha, He, Shiv is born, so, it is said ‘Shivjayanti’. It is not said ‘Shankarjayanti’ (Shankar’s birthday). Why? Hm? Isn’t Shankar revealed? Is Shiv revealed? Baba has said – The birth of the Father and the child is simultaneous. When the Father is revealed, the child is also revealed. When the child is revealed, then there is revelation of the Father as well. It means that Shiv comes in the body of the child only, doesn’t He? So, he is the eldest child.

So, it was told that there is a birth of Shiv as well. But Shankar’s birthday is not praised. Whose birth is praised? Shiv’s birth is praised. Well, is the corporeal or the incorporeal born? It is the corporeal which gets birth. Did you understand? The birth of Lakshmi-Narayan is included in Vishnu. It is because the form of Lakshmi-Narayan is a combination, combined form, isn’t it? So, four arms are depicted. Two of Lakshmi, two of Narayan. And in Brahma he is definitely with him. Brahma is famous. He is very well-known. The entire world is Brahma’s progeny. So, there is Prajapita Brahma also; and Brahmin clan is also certainly required. Did you understand? A clan is created by the mother as well as the Father, isn’t it? Now there are only two Brahmin clans. Hm? One is direct Prajapita Brahma. Brahma’s mouth born progeny through him. What? Mouth born progeny direct through Prajapita. And the other is the present day Brahmins. Which kind of progeny are they? Will they not be called mouth born progeny? It is because they do not pay attention to the words emerging from the mouth at all. They give more importance to the lap. They feel very intoxicated about this. We have been in the lap of Brahma Baba. You have come just now. You haven’t even been in his lap. Now Baba’s body, Brahma Baba’s body is gone. You are not entitled to seek his lap, are you? And we are entitled. So, they feel very intoxicated. So, what will they be called? Will they be called Brahma’s mouth born progeny or Prajapita Brahma’s mouth born progeny? Hm? Just Brahma’s mouth born progeny. They feel very intoxicated about the mother.

So, through them, through whom we become Brahma’s mouth born progeny, we are the children of both that mother and Father?. So, they are the second ones. Number two clan. Which one? Those who call themselves Brahmins, but cannot be called mouth born progeny because they do not feel intoxicated of the topics that emerge from the mouth. That is about the present day Brahmins. What? It was said in 67 itself. The present day Brahmins, the children of Brahma belong to a different clan. They do not belong to the number one clan. They are not the mouth born progeny of direct Prajapita Brahma. So, first are Brahma’s mouth born progeny. That is Brahmin. It is because this is a religion of the Brahmins, isn’t it? Of which Brahmins? Of Prajapita Brahma. They are the true Brahmins who are born both from mother and Father. So, now there are many. So, definitely there is a Brahmin religion. Brahma’s mouth born progeny. It is not as if they do not exist. And they are Brahmins. They are not just Brahmins, the mouth born progeny. They will not be said to be Brahma’s mouth born progeny. Why? It is because they do not pay attention to the topic that emerges from the mouth. They feel very intoxicated about the lap. (Continued).

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 18 Oct 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2625, दिनांक 30.08.2018
VCD 2625, dated 30.08.2018
रात्रि क्लास 26.8.1967
Night Class dated 26.8.1967
VCD-2625-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 21.42-41.19
Time- 21.42-41.19


तो तुम बच्चों को तो बहुत सहज है बताने के लिए कि भई पहले-पहले तो संगमयुग में ब्राह्मण बनते हैं। और जिस कैटागरी के ब्राह्मण बनेंगे उस कैटागरी के फिर सतयुग में देवता बनेंगे। पक्के ब्राह्मण तो अव्वल नंबर जनम। और सेकण्ड क्लास, थर्ड क्लास, तो वैसे नारायण के राज्य में आएंगे। दुनिया में नौ धरम हैं ना। हँ? तो उन नौ धर्मों में, जैसे आसमान में नौ क्या हैं? ग्रह हैं, नवग्रह पूजन करते हैं। ऐसे ही इस दुनिया में नौ ग्रह हैं। वो हैं नौ धरम। ग्रह माने घर। वो भी अपना परिवार बनाते हैं। लेकिन उनमें भारतवासी कन्वर्ट होते हैं। कोई दूसरे देश के लोग कन्वर्ट नहीं होते। क्यों? क्योंकि भारत में सतयुग के आदि में सतयुग के मध्य में, अंत में देवताएं थे। और देवताएं तो सीधे-सादे होते हैं। और द्वैतवादी द्वापरयुग से जो दैत्य आते हैं वो बड़े तिकड़मी होते हैं। दुनिया भर का छल-छिद्र कपट। हँ? हिंसा। तो बताया कि वो देवताएं कमजोर होते हैं। लेकिन भगवान किसका सपोर्ट करता है? हँ? कमजोरों को सपोर्ट करता है, गरीबों को सपोर्ट करता है या पावरफुल को सपोर्ट करता है? साहूकारों को सपोर्ट करता है? हँ?

तो ये बात तुम बच्चों को सहज है बताने के लिए। पहले-पहले तो संगमयुग में ब्राह्मण बनते हैं जो पहले नंबर के ब्राह्मण बनते हैं वो फिर पीछे देवता बनते हैं। और देवता बनने के बाद जब द्वैतवादी द्वापरयुग शुरू होता है, दूसरे-दूसरे धर्म आते हैं, तो वो ही देव आत्माएं जितनी नीची क्वालिटी के ब्राह्मण होंगे, उतना ज्यादा कन्वर्ट होंगे। और जितनी ऊँची क्वालिटी के ब्राह्मण होंगे तो ऊँची क्वालिटी के सूर्यवंशी देवता मुख वंशावली तो वो उतना कन्वर्ट, कन्वर्शन में नहीं आते हैं। और कन्वर्शन उसे कहा जाता है कि जहाँ जाके जन्म लें और उस जनम में ही कन्वर्ट हो जाएं तो कन्वर्शन। बाकि ऐसे तो है नहीं कि शरीर छोड़ने के बाद जनम लिया। क्या? शरीर छोड़ने के बाद जनम ले लिया विधर्मियों में तो उसको कन्वर्शन कहेंगे? नहीं। तो वो जो कमजोर देवताएं होते हैं वो कमजोर ब्राह्मण बनने के कारण कमजोर देवताएं बनते हैं। और वो नंबरवार कमजोर होते हैं। जो ज्यादा कमजोर होते हैं वो पहले से ही कन्वर्ट होना शुरू हो जाते हैं। पहले-पहले जो विधर्मियों में इस्लाम धर्म आता है, तो जहाँ देखी तवा बारात, वहीं बिताई सारी रात।। वो सतोप्रधान आईं तो उनमें कन्वर्ट हो गए। आगा-पीछा तो देखा नहीं। इतना ज्ञान तो है नहीं। तो कोई भी झाड़ में नए-नए पत्ते आते हैं, बाद में भी आते हैं। झाड़ बड़ा हो जाता है तो नए-नए पत्ते आते हैं ना। तो बड़े शोभनीक लगते हैं। लेकिन जो बाद में आएंगे वो उनकी एज और इनकी आयु कम होगी कि लंबी होगी? कम आयु होती है। तो ये बात तो बुद्धि में बैठी नहीं है।

तो बताया कि संगमयुग में सारा फाउण्डेशन पड़ता है। अभी के पुरुषार्थ के आधार पर सारे कल्प की प्राप्ति है। अभी संगमयुग में पुरुषोत्तम बनते हैं। पुरुषों में, आत्माओं में उत्तम आत्माएं बनते हैं। हँ? और शूद्र से पक्के ब्राह्मण बनते हैं। पुरुषोत्तम माने? जितनी भी आत्माएं हैं, उनमें उत्तम ते उत्तम पुरुषार्थ करने वाली। और तुम ब्राह्मण तो उत्तम हैं ना बच्चे। तुम किसको कहा जाता है? जिनसे सन्मुख बात की जाती है, प्रैक्टिकल में रूबरू तो उनको कहते हैं तुम। तो तुम ब्राह्मण बच्चे तो उत्तम हैं। हँ? और ये ब्राह्मण और वो ब्राह्मण जो दूर वाले हैं, नीची कुरी के हैं, वो उतने उत्तम थोड़़ेही बनते हैं? देवता तो बनते हैं लेकिन द्वैतवादी द्वापरयुग से दूसरे-दूसरे धर्मों में प्रभावित हो जाते हैं, कन्वर्ट हो जाते हैं। तो ये हो गया पुरुषोत्तम संगमयुग जहाँ पुरुषों में उत्तम आत्मा की प्रत्यक्षता होती है। कबसे होती है? हँ? संगमयुग में कबसे होती है? अरे वो तो मुरली में ही घोषणा कर दी। इन लक्ष्मी-नारायण का जन्म कब हुआ? आज से दस वर्ष कम 5000 वर्ष हुआ। तो 66 में बोला तो 76 आता है। तो 76 में उनका प्रत्यक्षता रूपी जन्म हो जाता है। डायरेक्ट नर से डायरेक्ट नारायण। प्रिंस बनने की बात ही नहीं। तो वो शूद्र से ब्राह्मण बनते हैं ना। फिर उससे भी उत्तम चले जाते हैं। क्या? शूद्र से ब्राह्मण बने और फिर ब्राह्मण से भी उत्तम? देवता। और देवता वास्तव में किनको कहा जाता है? 16 कला संपूर्ण को कहा जाता है या पौने 16, पौने, सवा चौदह कला, उनको कहेंगे? क्या? उनको उत्तम ते उत्तम कहेंगे? नहीं।

तो ऐसे कहेंगे बच्चे। क्योंकि पीछे जो देवता बनते हैं, नहीं तो उत्तम ते उत्तम तो सबसे ऊँचे हैं ही। वो संगमयुग में ही तैयार हो जाते हैं क्योंकि सर्विस करते हैं और बापदादा के साथ हैं। क्या? सेवा भी बहुत करते हैं। और साथ किसके हैं? बापदादा के। किसको कहा बापदादा? हँ? और ये किसने कहा बापदादा के साथ भी हैं? कौनसी आत्मा ने कहा? शिव ने कहा कि वो बापदादा के साथ हैं? बापदादा किसको कहा शिव ने? हँ? ब्रह्मा ने कहा। ब्रह्मा की बुद्धि में है कि शिव निराकार है बाप और मेरे में प्रवेश होता है तो मैं हो गया अम्मा, ब्रह्मा। तो ये दोनों हो गए बापदादा। कम्बाइन्ड हैं। तो बापदादा के साथ है कौन? पुरुषोत्तम। 76 से अगर पुरुषोत्तम प्रत्यक्ष होने की घोषणा हुई 66 में तो किसके साथ होंगे वो? हँ? जो नर से नारायण बनने वाले सारी मनु्ष्य सृष्टि में जितने भी पुरुष हैं, जितनी भी आत्माएं हैं मनुष्यों की, उनमें उत्तम ते उत्तम पार्ट बजाने वाले किसके साथ हैं? कहेंगे बापदादा के साथ। बाप हुआ शिव और दादा हुआ ब्रह्मा। तो बापदादा के साथ हैं, इसलिए उनको ऊँचा कहा जाता है। अच्छा? पर इनको फिर संगम कहा जाता है। हँ? क्योंकि छोटा युग है ना। शास्त्रों में इस युग का कोई वृत्तांत नहीं है। क्या? है कोई वृत्तांत? हँ? लीप इयर नहीं मनाते? हर चौथी वर्ष नहीं आता? पुरुषोत्तम मास नहीं मनाते? हँ? मास मनाते हैं। लेकिन युग का नाम तो नहीं है।

तो शास्त्रों में इनका कोई भी वृत्तांत नहीं है पुरुषोत्तम संगमयुग का। कोई भी, किसी भी शास्त्र में नहीं है। कहाँ भी नहीं है। हँ? न सब धर्म, देवी देवता सनातन धर्म है न दूसरे धर्म हैं। इसलिए विराट रूप में ब्राह्मण और शिवबाबा है ही नहीं। क्या? जो गीता में भगवान का विराट रूप दिखाया उसमें से ब्राह्मण चोटी भी उड़ा दी। और, और शिवबाबा भी उड़ा दिया। नहीं तो? शिवबाबा है बनाने वाला पुरुषोत्तम। वो बनाने वाले को ही उड़ा दिया। और जो बनने वाला है, अव्वल नंबर मुख वंशावली, उसको भी उड़ा दिया। विराट रूप देखा है? उसमें मस्तक समान देवताएं दिखाए हैं। लेकिन चोटी नहीं दिखाई है। तो देखो, विराट रूप में न ब्राह्मण हैं न शिवबाबा है। क्यों? क्योंकि पुरुषोत्तम युग का किसी को ज्ञान ही नहीं है। सबकी बुद्धि में से उड़ा हुआ है। बाकि न देवता हैं, क्षत्रीय, वैश्य, शूद्र हैं, वो तो बिल्कुल कॉमन बात है। क्या? देवता, क्षत्रीय, वैश्य, शूद्र, ये तो चारों युगों में होते ही हैं। पक्के-पक्के देवताएं सतयुग में। फिर कहेंगे क्षत्रीय राम के राज्य में। त्रेता में। फिर वैश्य विशियस कर्म करते हैं, विषय-विकार भोगते हैं तो द्वापरयुग में हुए वैश्य। और शूद्र कलियुग में तो सब नौकर-चाकर बनना पसन्द करते हैं। पढ़ेंगे, लिखेंगे, समझेंगे हमने बहुत ऊँची पढाई पढ़ी है। और फिर काहे के लिए पढ़ी है? नौकरी के लिए। तो सब क्या हो गए? नौकर। कोई राजा है? कोई राजा नहीं है। हं? सब शूद्र हो गए कलियुग में। ये बिल्कुल कॉमन बात है। जो देवताएं थे सतयुग में वो भी शूद्र हो गए। जो क्षत्रीय थे त्रेता में वो भी शूद्र हो गए। बस। क्या? क्यों हो गए शूद्र? हँ? क्योंकि विधर्मियों के संग के रंग में आते-आते ऐसा हो जाता है।

तो बच्चों को इन सब बातों का ध्यान में रखना चाहिए। तो ये सब बातें आज बैठ करके लिखी थीं क्योंकि कृष्ण जन्माष्टमी है ना सोमवार के दिन। क्या? खास सोमवार के दिन? हँ? सोमवार से जन्माष्टमी का क्या कनेक्शन? हँ? क्योंकि सोम कहते हैं चन्द्रमा को। हँ? और चन्द्रमा का पार्ट है ब्रह्मा का। क्योंकि चन्द्रमा क्षीण होता है फिर चन्द्रमा संपूर्ण होता है। जब धरती माता कन्याओं का प्रभाव पड़ता है, परछाया पड़ता है, तो क्षीण हो जाता है। क्या? और जब इनका परछाया, उनका प्रभाव से दूर होता है, तो सारा चन्द्रमा गोरा हो जाता है। तो ये बात किसकी है? कौनसी आत्मा की बात है? हँ? दादा लेखराज ब्रह्मा की बात है जब ज्ञान सूर्य का जो प्रैक्टिकल पार्ट है, उसका असर पड़ता है तो गोरा। और कन्याओं-माताओं के प्रभाव में रहता है तो धीरे-धीरे कालापन बढ़ता जाता है। यहाँ तक बढ़ते-बढ़ते अमावस्या के दिन पूरा काला। उस काले को कहते हैं कृष्ण पक्ष। काला पक्ष। दक्षिणायन मार्ग। हँ? वो अंधकार का मार्ग है। ऐसे गीता में बताया – अंधकार का मतलब भूत-प्रेत बहुत काम करते हैं। जो दूसरे धर्म की आत्माएं हैं ना विधर्मी उनका बहुत वर्चस्व रहता है। फिर कोई रविवार मनाते हैं, कोई सोमवार मनाते हैं। आजकल तो ये दिन बिगड़ पड़े हैं। क्या? अभी तो दो-दो दिन भी हो जाते हैं। क्या मतलब? पहले क्रिश्चियन्स की तिथि तो नहीं चलती थी। हँ? पहले तो विक्रम संवत चलता था, शक संवत, हूण संवत चलता था। तो कोई तिथि वो जो आती थी ना, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी तो वो दो-दो दिन तक भी चलती थी।

26.8.1967 की वाणी का रात्रि क्लास का दूसरा पेज। कभी तो ये जो संगम होते हैं ना, त्रिवेणी का संगम या क्या बोलते हैं? किसी ने कहा – कुंभ का मेला। हाँ, कुंभ का मेला। तो वो भी कभी-कभी इनका पड़ जाता है संगम। पीछे आपस में लड़ाइयाँ करते हैं। एक-दूसरे को धोखा देते हैं। कहाँ? कुंभ के मेले में जो नागा बाबा होते हैं वो बहुत लड़ते हैं कि हम पहले स्नान करेंगे। दूसरों को स्नान करने में फिर लड़ाई करते हैं। है तो ये कहां की बात? संगमयुग की बात है। जो आत्माएं देह अभिमान का छिलका पहले छोड़ती हैं वो पहले ज्ञान स्नान करती हैं। और जिन विधर्मियों में ज्यादा समय कन्वर्ट होकरके जो आत्माएं रही हैं, द्वापरयुग से कलियुग के अंत तक, उनका देहभान का छिलका जल्दी छूटता ही नहीं। तो उनके लिए तो कहते हैं कि तुमको स्नान नहीं करने देंगे। तो सारी यादगार यहाँ की है। कहाँ की? संगमयुग की। ओमशान्ति।

So, it is very easy for you children to tell that brother, first of all you become Brahmins in the Confluence Age. And the category of Brahmins that you become, you will become the same category of deities in the Golden Age. If you are firm Brahmins, then you will get number one birth. And if you are second class, third class, then you will come to the kingdom of equivalent Narayan. There are nine religions in the world, aren’t there? So, among those nine religions, for example, what nine things exist in the sky? There are planets; nine planets are worshipped. Similarly there are nine planets (nav grah) in this world. Those are nine religions. Planet (grah) means home. They too build their family. But the Indians convert to them. People of other religions do not convert. Why? It is because in India, in the beginning of the Golden Age, in the middle and end of the Golden Age there were deities. And deities are very simple. And the demons who come from the dualistic Copper Age are very maneuvering (tikadami). They are full of all the deceit of the world in them. Hm? Violence. So, it was told that those deities are weak. But whom does God support? Hm? Does He support the weak ones, does He support the poor or does He support the powerful? Does He support the rich ones? Hm?

So, this topic is easy for you children to tell. First of all you become Brahmins in the Confluence Age. Those who become number one Brahmins then become deities. And after becoming deities when the dualist Copper Age starts, when other religions come, then the same deity souls, the lower the quality of Brahmins, the more they will convert. And the higher the quality of Brahmins, they will become higher quality Suryavanshi deities, the mouth born progeny. So, they do not convert that much, do not get affected by conversion. And conversion means that the place where you go and get birth and if you get converted in the same birth, then it is called conversion. But it is not that they get birth after leaving the body. What? If they get birth among the vidharmis after leaving their body, will it be called conversion? No. So, those who are weak deities become weak deities because they became weak Brahmins. And they are numberwise weak. Those who weaker start converting first. Islam comes first of all among the vidharmis; so, jahaan dekhi tawaa baaraat, vahin bitaai saari raat (Spending the entire night wherever one finds fry pan and a marriage party) So, when they (the Islamic people) came in a satopradhan stage, then they convert among them. They did not see the past and future. They do not have that much knowledge. So, whenever new leaves emerge in a tree; they emerge later on also. When the tree grows big, then the new leaves arrive, don’t they? So, they appear very beautiful. But will the age of those who come later on be less or more? Their age is less. So, this topic did not sit in the intellect.

So, it was told that the entire foundation is laid in the Confluence Age. The attainments of the entire Kalpa are based on the purusharth of the present time. You become purushottam now in the Confluence Age. You become best souls among the purush, among the souls. Hm? And you become firm Brahmins from Shudras. What is meant by Purushottam? Those who make the best purusharth (efforts) among all the souls. And children, you Brahmins are best, aren’t you? Who is called ‘you’? Those who are addressed face to face, directly in practical are called ‘you’. So, you Brahmin children are best. Hm? And these Brahmins and those far-away Brahmins belonging to the lower categories; do they become best to that extent? They do become deities, but they are influenced by other religions and convert from the Copper Age. So, this is the Purushottam Sangamyug where the best soul among the souls (purush) is revealed. From when is it revealed? Hm? Since when is it revealed in the Confluence Age? Arey, that has been declared in the Murli itself. When were these Lakshmi and Narayan born? Ten years less than 5000 years from this day. So, it was said in 66. So, it comes to 76. So, their revelation like birth takes place in 76. From direct man to direct Narayan. There is no question of becoming a prince at all. So, they become Brahmins from Shudras, don’t they? Then they go higher than that. What? They became Brahmins from Shudras and then higher than the Brahmins? The deities. And who are actually called deities? Are those who are perfect in 16 celestial degrees called deities or are those who are perfect in 15.75, 13.75, 14.25 celestial degrees called deities? What? Will they be called the best of all? No.

So, children, it will be said like this because those who become deities later on are otherwise highest on high, highest only. They get ready in the Confluence Age itself because they do service and are with BapDada. What? They do a lot of service also. And with whom are they? With BapDada. Who was called BapDada? Hm? Who said they are also with BapDada? Which soul said? Did Shiv say that He is with BapDada? Who did Shiv refer as BapDada? Hm? Brahma said. It is in the intellect of Brahma that incorporeal Shiv is Father and because He enters in me, so I am the mother Brahma. So, these two are BapDada. They are combined. So, who is with BapDada? Purushottam. If it was declared in [19]66 that the Purushottam will be revealed in [19]76, then with whom will they be? Hm? With whom are all the Purush (souls), all the souls of human beings in the entire human world who become Narayan from nar (man), and play the highest on high part? It will be said that they are with BapDada. Baap (Father) is Shiv and Dada is Brahma. So, they are with BapDada; this is why they are called highest. Achcha? But then this is called the Confluence Age. Hm? It is because it is a small Age, isn’t it? There is no description of this Age in the scriptures. What? Is there any description? Hm? Don’t you celebrate leap year? Doesn’t it come every fourth year? Don’t you celebrate the Purushottam month? Hm? You celebrate the month. But the [Purushottam] Age (yug) is not famous.

So, there is no description of the Purushottam Sangamyug in the scriptures. It is not mentioned in any scripture. It is not mentioned anywhere. Hm? Neither are there all the religions, neither the ancient deity religion nor other religions [in the gigantic form]. This is why the Brahmins and ShivBaba are not there in the gigantic form (viraat roop) at all. What? The gigantic form of God which was depicted in the Gita, the Brahmin choti (peak) was also made to vanish from it. And, and ShivBaba was also made to vanish. Otherwise? ShivBaba is the one who makes you Purushottam. That maker Himself has been made to vanish. And the one who becomes, the number one mouth born progeny has also been made to vanish. Have you seen the gigantic form? In it, the forehead-like deities have been shown. But the choti (peak) has not been shown. So, look, there are neither Brahmins nor ShivBaba in the gigantic form. Why? It is because nobody knows about the Purushottam Age. It has vanished from everyone's intellect. There are deities, Kshatriyas, Vaishyas, Shudras; that is a very common thing. What? Deities, Kshatriyas, Vaishyas, Shudras are present in all the Ages. Firm deities are in the Golden Age. Then it will be said that the Kshatriyas are in the kingdom of Ram, in the Silver Age. Then Vaishyas perform vicious actions; they enjoy lustful pleasure; so, there are Vaishyas in the Copper Age. And there are Shudras in the Iron Age where everyone wants to be servants. They read and write; they think that they have studied a very high course. And then why have they studied? For a job (naukari). So, what is everyone? Naukar (servant). Is there any king? Nobody is a king. Hm? All have become Shudras in the Iron Age. This is a very common thing. Those who were deities in the Golden Age have also become Shudras. Those who were Kshatriyas in the Silver Age have also become Shudras. That is all. What? Why did they become Shudras? Hm? It is because while getting coloured in the company of the vidharmis, it happens like this.

So, children should keep all these topics in mind. So, all these topics were written today because it is Krishna Janmashtami on Monday. What? Especially on Monday (Somvaar)? Hm? What is the connection of Somvaar with Janmashtami? Hm? It is because the Moon is called Som. Hm? And Brahma's part is of the Moon. It is because the Moon becomes weak and then the Moon becomes perfect. When there is an influence, shadow of the Earth-like mothers and virgins, then he becomes weak. What? And when he goes away from their shadow, their influence, the entire Moon becomes fair. So, whose topic is this? It is about which soul? Hm? It is about Dada Lekhraj Brahma; when he is influenced by the practical part of the Sun of Knowledge, then he is fair. And when he remains under the influence of the virgins and mothers, then the darkness gradually increases. It increases to the extent that it becomes completely dark on the day of no-Moon (Amavasya). That dark one is called Krishna Paksh. The dark phase. The Dakshinayan Marg (the south-bound path). Hm? That is a path of darkness. It has been said so in the Gita - Darkness means that the ghosts and devils work a lot. The vidharmi souls of other religions are very dominant. Then, some celebrate it on Sunday, some on Monday. Now-a-days these days have gone haywire. What? Now they are celebrated on two days also. What does it mean? Earlier the Christian dates were not prevalent. Hm? Earlier the Vikram Era was prevalent; Saka Era, Hun Era was prevalent. So, the days which used to be observed, ekadashi, dwadashi, trayodashi, used to be observed on two days as well.

The second page of the night class dated 26.8.1967. Sometimes, these confluences, Triveni sangam (confluence of three rivers in north India) or what do they call it? Someone said - the fair of Kumbha (Kumbh mela). Yes, the fair of Kumbha. So, sometimes that is also organized at the confluence. Later, they fight with each other. They dupe each other. Where? The Naga sages in the Kumbh melas fight a lot that they will bathe first [in the river on the auspicious date and time]. They fight with others who wish to bathe. It is about which place? It is about the Confluence Age. The souls which shed the peel of body consciousness first take the bath of knowledge first. And those souls which have been converted among the vidharmis for more time, from the Copper Age to the Iron Age, their peel of body consciousness does not get removed soon. So, it is said for them that we will not allow you to bathe. So, it is entirely a memorial of the present time. Of which time? Of the Confluence Age. Om Shanti.

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