Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 10 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2628, दिनांक 02.09.2018
VCD 2628, Dated 02.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning class dated 27.8.1967
VCD-2628-extracts-Bilingual-Part-3

समय- 23.53-40.23
Time- 23.53-40.23


और ये भी बाप ने समझाया कि ये जो जन्माष्टमी या बर्थडे मनाते हैं, हँ, वो सबसे ऊंचा ते ऊंचा भगवंत है जिसकी जन्माष्टमी मनाते हैं। है? कौन है? जिसकी जन्माष्टमी मनाते हैं वो सबसे ऊंचे ते ऊंचा भगवंत है। अरे, जन्मदिन किसका बनाया जाता है? जिसका मनाया जाता है उसकी बायोग्राफी में कुछ खास काम हुआ होगा तो जन्मदिन मनाते हैं। सबका थोड़ी मनाती है पब्लिक। मनाती है? सबका तो नहीं मनाती है। तो ये ऊंचे ते ऊंचा भगवंत कैसे हुआ? तथाकथित ब्रह्मा कुमारियां क्या जवाब देंगी? कि जन्माष्टमी जो है वो ऊंचे ते ऊंचे भगवान की यादगार है। सबसे ऊंचे ते ऊंचा भगवंत। दुनिया वालों से टैली किया गया। जितने भी भगवंत हुए उन सब से टैली किया गया। सबसे ऊंचा। कौन है? हँ? जन्माष्टमी किसकी यादगार है? ब्रह्मा कुमारियां क्या कहेंगीं किसकी यादगार है? कौन सी आत्मा की यादगार है? वो कृष्ण की यादगार बताएंगी। वर्तमान शूटिंग पीरियड में उसका नाम क्या? दादा लेखराज। (किसी ने कुछ कहा।) अरे, शिव बाबा कृष्ण है? धत् तुम्हारी! फिर बाप कौन है कृष्ण का? संगम युगी कृष्ण। हँ। वो समझती हैं कि सतयुग का जो कृष्ण है पहले जन्म का पहली पीढ़ी का वो उसकी यादगार जन्माष्टमी है। लेकिन ऐसे नहीं है।

ये सारी यादगार, त्योहार जो मनाए जाते हैं वो कहां की यादगार हैं? कोई सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग की यादगार नहीं है। वो तो जब भगवान इस सृष्टि पर आते हैं कलयुग के अंत, सतयुग के आदि के संगम पर, उस पुरुषोत्तम संगम युग की यादगार है। क्या? तो जो यादगार बनी है वो पहला प्रत्यक्षता किस बच्चे की होती है? हँ? शिव तो आत्माओं का बाप है। उसका पहला बच्चा कौन है? हँ? पहला बच्चा मनुष्य सृष्टि का बाप। तो मनुष्य सृष्टि का बाप जो सबसे पतित, वर्थ नॉट पेनी बन जाता है, उसको बाप आकर के क्या बनाते हैं? बैगर टू, हँ, उसी जन्म में बैगर, उसी जन्म में प्रिंस बनाय देते हैं। फर्स्ट प्रिंस ऑफ द वर्ल्ड। उसका बर्थडे मनाते हैं। वो है सबसे ऊंचे ते ऊंचा भगवंत। और ये भी तो सब कोई कहेंगे। क्या? क्या? कि सबसे ऊंचे ऊंचे भगवंत कौन है? सब कहेंगे। सब कब कहेंगे? गे क्यों कर दिया? भविष्य में कहेंगे जब समझेंगे। और फिर सब का। क्या? एक, दो चार का नहीं, एक धर्म वाले का नहीं। सबका सद्गति दाता है। हँ? सद्गति दाता तो सद्गुरु कहा जाता है। सद्गुरु जो सबका सद्गति दाता है, सतगुरु साकार होता है या निराकार होता है? सद्गुरु तो साकार होता है। सुंदर मेला कर दिया जब सतगुरु मिला दलाल। तो दलाल तो बीच में बिचौलिया हुआ ना। हं? गति सद्गति करने का। सबका दुख हर्ता सुख कर्ता। हं? जो मुक्ति जीवनमुक्ति लेते हैं और जो निराकार बाप आकर के देह के बंधन से, दुनिया के बंधनों से छुड़ाते हैं, ज्ञान देते हैं, उन दोनों के बीच में सतगुरु क्या है? बिचौलिया है, मीडिया है। तो साकार हुआ या निराकार हुआ? साकार हुआ।

तो ऐसे जरूर कहेंगे कि उनकी जो शिवजयंती गाई हुई है तो जरूर ऐसे कहेंगे कि इसकी शिव की जयंती भई सबसे ऊँची है। किसकी? इसकी किसके लिए कहा? हँ? इसकी शिवजयंती सबसे ऊंची है क्योंकि सबसे ऊंचा तो है ही ना बच्चे। किससे टैली किया? हं? अभी जयंती किसकी मनाई जाती है? शिव की तो जयंती दुनिया वाले नहीं मनाते हैं, मनाते हैं? वो तो ब्रह्मा कुमारी मनाती हैं। और वो जानती भी नहीं हैं कि शिव साकार भी बनता है। निराकार भी है। साकार निराकार दोनों रूप धारण करता है। तो भी शिवजयंती नाम दे देती हैं। अब ना शिव की जयंती होती है न मरंती होती है। क्या? जैसे ब्रह्मा बाबा की मरंती मनाते हैं। मनाते हैं ना। दुनिया में भी पुण्यतिथि मनाते हैं। हँ? तो देहधारी की मनाते हैं या निराकार की मनाते हैं? निराकार का तो पता ही नहीं चलता तिथी तारीख का। जो जयन्ती होती है वो साकार की होती है। जन्मदिन किसका मनाया जाता है? साकार का मनाते हैं या निराकार का मनाते हैं? निराकार का तो पता ही नहीं चलता है कब जन्म लेता है, कब आया, कब गया।

तो इसकी शिवजयंती भई सबसे ऊंची। इसकी कहके किस तरफ इशारा किया? कृष्ण जन्माष्टमी नाम दिया ना। नाम ही है कृष्ण जन्माष्टमी। राम जन्म नौमी। नाम तो लेते हैं ना। तो इसकी शिवजयंती भई सबसे ऊंची क्योंकि सबसे तो ऊंचा तो है ही ना बच्चे। कौन? हं? सबसे ऊंचा तो है ही ना बच्चे। कौन है? जो विश्व का मालिक है वो सबसे ऊंचा। विश्वनाथ का मंदिर भी बनाया है ना। क्या? कहां बनाया है? काशी विश्वनाथ कहते हैं ना। काशी में बनाया है। सबसे ऊंचा तो है ही। सबसे ऊंचा माने सबसे बडा। बडा किसको कहेंगे? छोटा किसको कहेंगे? हं?
(किसी ने कुछ कहा।) काम करे? ज्ञान नहीं? जो ज्ञान में बडा हम समझते हैं ये बडा बनने वाला है बडा काम करने के लिए। अभी वर्तमान में देखेंगे ना कि भविष्य की बात देखेंगे? अभी क्या है? अभी ज्ञान में बडा तो बडा बनने वाला है। और ज्ञान नहीं है छोटा बनने वाला है। सबसे ऊंचा तो है ही ना बच्चे। तो है ही। है ही कि होगा? हँ? होगा तब कहा जाएगा जब प्रेक्टिकल में काम करके दिखायेगा तब होगा। अभी कैसे ऊंचा है? किस आधार पर? ज्ञान के आधार पर ऊंचा है। तो सबसे ऊंची है? क्या? क्या सबसे ऊंची है? जन्माष्टमी। सबसे। ज्ञान। ज्ञान को ऊंची कहेंगे कि ऊंचा कहेंगे? हँ? सबसे ऊंची है। क्या? जन्माष्टमी की बात हो रही है ना।

तो भला जब सबसे ऊंचा है बाप उसे सब याद करते हैं। खास भारत में उनकी जयंती है। हं? उनकी क्यों कह दिया? हं? एक है कि दो हैं? दो हैं ना। शिव निराकार है। उनकी जयंती कैसे होगी? वो जिस समय प्रवेश करते हैं उसके द्वारा पहले गुप्त पार्ट बजाते हैं। गर्भ महल में। कि प्रत्यक्ष दुनिया के सामने? गुप्त पार्ट बजाते हैं। और फिर बाद में। बाद में फिर प्रत्यक्ष होते हैं तो सारी दुनिया जान जाती है। तो किसमें प्रत्यक्ष होते हैं? भारत में। क्या नाम दिया? भा माने ज्ञान की रोशनी, रत माने लगा रहने वाला। जो जन्म-जन्मांतर ज्ञान की रोशनी में लगा रहता है। किस? जिस-जिस की राजधानी में जिस-जिस ऊंच पुरुष की या किसी की भी पास्ट में हिस्ट्री अच्छी है। उनका तो स्टैम्प्स भी बनाते हैं। हं? बनाते है ना। दूसरी जगह में तो जो-जो प्रेसिडेंन्ट होते हैं या बादशाह हैं उनकी जयंती मनाते हैं। परन्तु भारत में? भारत में तो शिव की जयंती मनाते हैं। हं? अब जिसको शिव की जयंती कह दिया, तो नाम शिव की जयंती क्यों दे दिया? शिव तो जन्म लेता ही नहीं। जयंती तो साकार की मनायी जाती है। तो जिसमें प्रवेश करते हैं उसको आप समान शिव माने कल्याणकारी निराकारी बनाय देते हैं। हं।

तो ये समझना चाहिए कि सबसे जास्ती अच्छे में अच्छी ऊँचे में ऊँची जयंती किसकी हुई? हं? जय-जयकार किसकी हुई? जय-जयकार हुई का मतलब पहले हार थी ना। कि हमेशा जीत थी? हमेशा जीत थी तो जय-जयकार करने की क्या दरकार? पहले हार थी या जीत थी? पहले हार थी फिर बाद में जीत हुई। तो किस आत्मा के लिए कहेंगे? हं? हाँ। संगमयुगी कृष्ण के लिए कहेंगें। क्योंकि कृष्ण की तिथि-तारीख, जयंती की तो तिथि तारीख होती है ना। नहीं होती? जयंती की तिथि, तारीख घड़ी, नक्षत्र सब दिखाते हैं। कृष्ण का दिखाते हैं। उन्होने समझ लिया सतयुग का प्रिंस कृष्ण। लेकिन उस कृष्ष की बात थोडे ही है। ये तो संगमयुगी कृष्ण की बात है। हां, सतयुग में जो फर्स्ट कृष्ण है पहली गद्दी का हां तो जो पहली गद्दी का प्रिंस है। वो संगमयुग में भी प्रवेश करता है। किसमें? क्या? शंकर में। जो शिव का बडा बच्चा है। जिस बडे बच्चे का नाम शिव के साथ जोडा जाता है। और किसी का जोडा जाता है? नहीं। सिर्फ शंकर का नाम जोडा जाता है। बताते भी हैं कि ऊंच ते ऊंच देवताऐं हैं ब्रहमा, विष्णु, शंकर। फिर उनको कहते हैं देव-देव महादेव। ब्रहमा देव, विष्णु देव और उन दोनों देवों से देव-देव महादेव बडा है। तो बडा बच्चा कौन हुआ? तो महादेव ही बडा बच्चा हुआ ना। तो अच्छे में अच्छी, ऊंचे में ऊंची जयंती किसकी हुई? वो ही जो शंकर कहा गया है जो लिंग के रुप में दिखाया गया है। वो लिंग ही साकार होता है इस सृष्टि में उसकी जयंती हुई। कृष्ण की जयंती के रुप में मनाते हैं परन्तु दुनिया नहीं जानती कि ये कृष्ण सतयुग के आदि का है या संगमयुग का है। हं।

तो ये बात तो बुद्धि मे है ही नहीं पत्थरबुद्धियों को। क्या? कि कौन से कृष्ण की यादगार है? हं? संगमयगी कृष्ण की यादगार है या सतयुगी कृष्ण की यादगार है। क्योंकि जयंती भी होती है भारत में। वो तो अनेक साधु-संतों की भी होती है। ये सिक्खों का, ये फलाने मुसलमानों का, ये फलाने अंग्रेजों का, राजा का, कोई-कोई फिलासॉफर्स होकर के गये हैं उनका। कोई अच्छा होकर के गये हैं या जैसे ये आजकल निकली है राणा प्रताप की जयंती। हं? निकली है ना। उनका भी स्टाम्प बनाय देते हैं। अभी वास्तव में स्टाम्प भारत में किसका होना चाहिये? हं? स्थायी स्टाम्प होना चाहिए। हँ? और किसका भी स्टाम्प नहीं वास्तव में होना चाहिए। लेकिन ब्रहमा कुमारियों ने किसका बनाय दिया? हं? बाबा कहते हैं किसका भी स्टाम्प नहीं होना चाहिये। ब्रहमा कुमारियों ने ब्रहमा का बनाय दिया। सारे भारत में ब्रहमा का स्टाम्प चल गया पोस्ट आफिस में। हं? ओम शान्ति।

And the Father has also explained that this Janmashtami or birthday that is celebrated, it is the Janmashtami of the highest on high God. Is it? Who is it? The one whose Janmashtami is celebrated is the highest on high God. Arey, whose birthday is celebrated? Some special task must have been performed in the biography of the one whose birthday is celebrated. That is why the birthday is celebrated. The public does not celebrate everyone’s birthday. Does it celebrate? It does not celebrate everyone’s [birthday]. So, how is this one the highest on high God? What reply would the so-called Brahmakumaris give? Janmashtami is the memorial of the highest on high God. The highest on high God. He was tallied with the people of the world. He was tallied with all the Gods who have existed. The highest one. Who is it? Hm? Whose memorial is Janmashtami? What would the Brahmakumaris say, whose memorial is it? It is a memorial of which soul? They will mention it to be the memorial of Krishna. What is his name in the present shooting period? Dada Lekhraj.
(Someone said something.) Arey, is ShivBaba Krishna? Damn it. Then who is Krishna’s Father? The Confluence Age Krishna. They think that Janmashtami is the memorial of the Krishna of the Golden Age of the first birth, of the first generation. But it is not so.

All these memorials, festivals which are celebrated are memorials of which place? It is not a memorial of the Golden Age, Silver Age, Copper Age, and Iron Age. When God comes to this world in the confluence of the end of the Iron Age and the beginning of the Golden Age, it is a memorial of that Purushottam Sangamyug (elevated Confluence Age). What? So, the memorial which is formed, so, which child is revealed first? Hm? Shiv is the Father of souls. Who is his first child? Hm? First child is the Father of the human world. So, what does the Father come and make the Father of the human world, who becomes most sinful, worth not a penny? Beggar to, hm, he is beggar in the same birth and makes him a prince in the same birth. First prince of the world. His birthday is celebrated. He is the highest on high God. And everyone will say this. What? What? That who is the highest on high God? Everyone will say. When will everyone say? Why was it said in future tense? They will say when they understand in future. And then everyone’s. What? Not of one, two, four; not of people of one religion. He is the bestower of true salvation upon everyone. Hm? The sadguru is called Sadgati Daataa (bestower of true salvation). The Sadguru who causes true salvation of everyone, is that Sadguru corporeal or incorporeal? Sadguru is corporeal. A beautiful meeting took place when the Satguru was found in the form of a middleman (dalaal). So, dalaal is a middleman in between, isn’t he? Hm? To cause gati (salvation), sadgati (true salvation). Remover of sorrows of everyone and giver of happiness. Hm? Those who obtain mukti, jeevanmukti and the incorporeal Father who comes and liberates you from the bondage of the body, from the bondages of the world, gives knowledge, what is the Satguru among both? He is a middleman, media. So, is he corporeal or incorporeal? He is corporeal.

So, it will definitely be said that His Shivjayanti which is praised, then it will definitely be said that brother, the Jayanti of this one, Shiv’s Jayanti is highest. Whose? Why was it said ‘of this one’ (iski)? Hm? The Shivjayanti of this one is highest because he is highest, isn’t he child? With whom was he tallied? Hm? Whose Shivjayanti is celebrated now? The people of the world do not celebrate Shiv’s Jayanti. Do they celebrate? It is the Brahmakumaris who celebrate. And they do not even know that Shiv also becomes corporeal. He is also incorporeal. He assumes corporeal as well as incorporeal forms. Yet, they assign it the name Shivjayanti. Well, neither does Shiv get birth nor does He die. What? For example, they celebrate the death anniversary (maranti) of Brahma Baba. They celebrate, don’t they? They celebrate death anniversaries (punyatithi) in the world as well. Hm? So, do they celebrate of the bodily being or of the incorporeal? One cannot know about the day and date of the incorporeal. The birthday (jayanti) is of the corporeal. Whose birthday is celebrated? Is it celebrated for the corporeal or of the incorporeal? One cannot know about the incorporeal at all as to when He gets birth, when He came and when He departed.

So, the Shivjayanti of this one is the highest one. Towards whom was a gesture made by uttering ‘this one’ (iski)? The name was coined as Krishna Janmashtami, wasn’t it? The name itself is Krishna Janmashtami (eighth day). Ram’s birth is naumi (ninth day). The name is uttered, isn’t it? So, the Shivjayanti of this one is highest because he is the highest one, isn’t he child? Who? Hm? He is the highest one, isn’t he child? Who? The one who is the master of the world is the highest one. The temple of Vishwanath has also been built, isn’t it? What? Where has it been built? It is said – Kashi Vishwanath, isn’t it? It has been built in Kashi. He is anyways the highest one. Highest means biggest. Who will be called big? Who will be called small? Hm?
(Someone said something.) Should he perform the task? Not knowledge? We feel that the one who is bigger in knowledge is going to become big (great) in order to perform a big task. Will we observe now in present time or will we observe a topic in future? What is he now? If he is big in knowledge now, then he is going to become big. And if there is no knowledge, then he is going to become small. He is the highest one, isn’t he child? So, he indeed is. Is he indeed or will he be [in future]? Hm? It will be said ‘he will be’ when he performs the task in practical. How is he high now? On the basis of what? He is high on the basis of knowledge. So, what is highest? What? What is highest? Janmashtami. Of all. Knowledge. Will knowledge be called ‘oonchi’ (highest in feminine gender) or ‘ooncha’ (highest in masculine gender)? Hm? It is highest of all (in feminine gender). What? The topic of Janmashtami is being discussed, isn’t it?

So, when the Father is highest, everyone remembers Him. Their birthday is celebrated especially in India. Hm? Why was it said ‘unki’ (their)? Is it one or are there two? There are two, aren’t there? Shiv is incorporeal. How will there be His birthday? When He enters, then He plays an incognito part through him initially. In the womb like palace. Or directly in front of the world? He plays an incognito part. And then later on. Later on, when He is revealed, then the entire world gets to know. So, in whom is He revealed? In Bhaarat. What was the name assigned? Bha means the light of knowledge, rat means ‘the one who remains engaged’.The one who remains engaged in the light of knowledge birth by birth. Whose? In whosoever’s kingdom, whichever great person or whosoever’s past history is good, their stamps are also prepared. Hm? They are prepared, aren’t they? In other places, the birthday of the Presidents or the emperors is celebrated. But in India? In India the birthday of Shiv is celebrated. Hm? Well, when Shiv’s Jayanti was uttered, then why was the name Shiv’s Jayanti coined? Shiv doesn’t get birth at all. It is the corporeal whose birthday is celebrated. So, the one in whom He enters, He makes him Shiv like Himself, i.e. benevolent, incorporeal. Hm.

So, you should understand that whose birthday is the best and highest one? Hm? Whose victory was hailed? Victory was hailed means that earlier there was defeat, wasn’t it? Or was there a win always? If there was a win always, then where is the need to hail the victory? Was there defeat earlier or was there victory? There was a defeat earlier and then victory happened. So, for which soul will it be said? Hm? Yes. It will be said for the Confluence Age Krishna because there is a day and date for Krishna, day and date for birthday, isn’t it? Is it not there? The day, date, moment, constellations, everything of the birth is depicted. They depict for Krishna. They thought of the Prince Krishna of the Golden Age. But it is not about that Krishna. It is about the Confluence Age Krishna. Yes, the first Krishna of the first throne in the Golden Age, yes, so, the Prince of the first throne. He enters in the Confluence Age also. In whom? What? In Shankar. The one who is the eldest child of Shiv. The name of that eldest child is joined with that of Shiv. Is it joined with any other name? No. Only the name of Shankar is joined. It is also told that the highest on high deities are Brahma, Vishnu and Shankar. Then they are called Dev-Dev-Mahadev. Brahma the deity, Vishnu the deity, and Dev-Dev-Mahadev is higher than both of those deities. So, who is the eldest child? So, Mahadev is the eldest child, isn’t he? So, whose birthday is the best, highest one? The same Shankar who has been shown in the form of a ling. That ling himself is corporeal in this world. It is his birthday. It is celebrated in the form of Krishna’s birthday, but the world doesn’t know whether this Krishna is of the beginning of the Golden Age or of the Confluence Age? Hm.

So, this topic is not at all there in the intellect of those with a stone-like intellect. What? It is a memorial of which Krishna? Hm? Is it a memorial of the Confluence Age Krishna or the Golden Age Krishna? It is because birthday is also celebrated in India. Birthday of numerous sages and saints is also celebrated. That of these Sikhs, of such and such Muslims, of such and such Britishers, of Kings, of some Philosophers of the past. There have been some good persons in the past; or just as it has started now-a-days – the birthday of Rana Pratap. Hm? It has started, hasn’t it? His stamp is also prepared. Well, whose stamp should actually be prepared in India? Hm? There should be a permanent stamp. Hm? There should not be the stamp of anyone else in reality. But whose stamp did the Brahmakumaris prepare? Hm? Baba says- There should not be the stamp of anyone. Brahmakumaris got the stamp of Brahma Baba prepared. The stamp of Brahma was circulated all over India in the Post Offices. Hm? Om Shanti.

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नोटः यह केवल एक प्रारूप है। उक्त वीसीडी के संपूर्ण मूल पाठ या मूल आडियो, वीडियो के लिए www.adhyatmik-vidyalaya.com देखिये।
Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 12 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2629, दिनांक 03.09.2018
VCD 2629, Dated 03.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated 27.8.1967
VCD-2629-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-09.59
Time- 00.01-09.59


प्रातः क्लास चल रहा था। 27.08.1967. रविवार को पहले पेज के मध्यान्त में बात चल रही थी। क्या प्रसंग चल रहा था? हं? कृष्ण जन्माष्टमी की बात चल रही थी। तो, वो तो कृष्ण का नाम दे देते है जन्माष्टमी में। और कृष्ण की बात तो है नहीं क्योंकि जन्म तो साकार शरीर का माना जाता है। जयन्ती भी साकार की होती है या निराकार की होती है? साकार की होती है। तो लोगों को पता नहीं है जिस साकार की जयन्ती होनी चाहिए, मनानी चाहिए वो किसी की बुद्धि में नही है क्योंकि सब समझते हैं कि सतयुग के पहले जन्म का जो प्रिंस है वो वो ही कृष्ण है। हं? जब से नया कल्प शुरु होता है, चतुर्युगी शुरु होती है, उस चतुर्युगी से पहले तो भारी विनाश हो गया था। उसके बारे में तो किसी को पता ही नहीं है। बडा ऐक्सीडेंन्ट हो गया। तो सब भूल गये। तो बाप बताते हैं कि दुनिया में जितने भी बडे-बडे हो गये अंग्रेजो के, मुसलमानों के, सिक्खों के या साध-सन्त कोई भी फिलोसफर हो गये, तो उनकी जयन्ती मनाते हैं। और अभी आजकल तो निकले हैं राणा प्रताप की स्टैंप। उनका स्टैंप बनाते हैं। अभी वास्तव में स्टैंप तो होना चाहिए स्थाई। क्या? स्थाई कौन है। इस सृष्टि पर कोई तो स्थाई होगा। राणा प्रताप तो कलयुग के अंत में आता है। इस सृष्टि पे स्थाई जो हो, उसकी जयंती मनाओ।

तो बताया - चिरस्थाई जयंती है, वास्तव में होना चाहिए। और किसी का नहीं होना चाहिए क्योंकि जिससे सबको फायदा होता है उसकी मनानी चाहिए। तो सबको किससे फायदा होता है? हँ? अरे गायन क्या है? सबका सद्गति दाता एक। कौन? और सब हैं दुर्गतिदाता। एक है सद्गति दाता। शिव भोला भगवान। शिव जिसका नाम है वो तो निराकार है। हं? वो सद्गति करता है? सद्गति करनेवाला तो सतगुरु कहा जाता है। और सद्गुरु तो सत माने सच्चा। और सच्चा और झूठे की पहचान तो क्या सत्यधाम में रहने वाले के द्वारा होगी? करेगा कौन? नीचे वाला करेगा। लेकिन नीचेवाले को भी अपनी सद्गति पहले करनी पड़े कि दूसरों की करेगा? तो वो कौन बनता है? हं? वो भी शिव बाप ही करते हैं।

शिव बाप जब साकार तन में प्रवेश करते हैं तो वो ही वास्तव में देव देव महादेव हैं। कहते भी हैं, दुनियावाले कह रहे हैं कि देव देव महादेव। वो भी मैं हूं। क्या? अगर वो देव देव महादेव होता जिसमें मैं प्रवेश करता हूं तो 84 जन्मों में और भी कभी की होती सदगति किसी की। कर सकता था कि नहीं? तो इसका मतलब वो देव देव महादेव का पार्ट बजाने वाली आत्मा वो नहीं है जिसमें प्रवेश करता हूं। मैं प्रवेश करता हूं शिव ज्योतिबिंदु। और वो क्या देता है? कहते हैं रिते ज्ञानान् न मुक्ति। बिना ज्ञान के मुक्ति नहीं हो सकती। और जब मुक्ति ही नहीं हो सकती तो जीवनमुक्ति कैसे होगी? पहले मुक्ति या जीवनमुक्ति? पहले तो मुक्ति हो, दुखों से मुक्ति हो, उसके बाद सुख लेने की इच्छा होती है। ऐसे थोड़ेही कि 106-7 डिग्री बुखार हो गया, सारा नस-नस टूट रही है शरीर की, हं, बड़ी अशांति हो रही है, तो वो उसके मुंह में कोई रसगुल्ला डाले कि भई रसगुल्ला खा लो सुखी रहो, प्रसन्न हो जाओ, तो खाएगा? बिल्कुल नहीं खाएगा। अच्छा ही नहीं लगेगा। तो उसे क्या चाहिए पहले? दुख से मुक्ति चाहिए।

तो दुख तो तभी तक है जब तक ये शरीर है। शरीर में ही दुख होता है शरीर के द्वारा ही सुख होता है। तो वो जो ज्ञान का अखूट भंडारी है, जिसका ज्ञान कभी खूटता ही नहीं वो कौन? शिव। वो इस सृष्टि पर जब आते हैं और आकरके क्या देते हैं? अखूट ज्ञान के भंडार में से थोड़ा-2 देना शुरू करते हैं। तो उस ज्ञान से आत्मा की बुद्धि में बैठता है कि मैं तो देह हूं ही नहीं। देह समझी बैठी हूँ। देह समझा इसलिए दुख हो रहा है। अगर पक्का-पक्का स्मृति आ जाए कि मैं आत्मा हूं, ये देह तो विनाशी है। आज है कल? कल नहीं रहेगी। कौन रहेगी फिर? अविनाशी आत्मा तो रहेगी ना। तो वो अविनाशी आत्मा का ज्ञान जो है वो देता है आकर। तो जैसे ज्ञान की एक बूंद दे दी। क्या? बिंदु दे दिया कि तुम ज्योतिबिंदु आत्मा हो, निराकार बिंदु। वो चाहे जितना छोटा बना दो। हँ? गीता में लिखा अणोणीयांसम। अणु से भी अणु। तो ये पहचान दी कि मैं, मैं भी ज्योतिबिंदु आत्मा, और तुम बच्चे भी ज्योतिबिंदु आत्मा। मुझ आत्मा का भी कभी विनाश नहीं होता। तुम आत्माओं का भी कभी विनाश नहीं होता। अविनाशी बाप के निराकार के अविनाशी बच्चे निराकारी बच्चे हो तुम। लेकिन जन्म-जन्मांतर से प्रैक्टिस क्या पड़ी हुई है? हं? देह का सुख लेने की प्रैक्टिस पड़ी हुई है। तो देह ही समझ लिया।

तो बाप बताते हैं कि ये प्रैक्टिस करो। क्या? कि मैं देह नहीं हूं। मैं तो इतना बड़ा दुंब नहीं हूं। मैं तो सूक्ष्म ज्योतिबिंदु आत्मा हूं। और वो सूक्ष्म ज्योतिबिंदु जो आत्मा जो सारे शरीर को कंट्रोल करने वाली है। जैसे राजा पूरे राज्य को कंट्रोल करता है तो ऊंची गद्दी पर बैठता है ना। हँ? उसके सामने कोई और ज्यादा ऊंची गद्दी पर बैठेगा? नहीं बैठेगा ना। और बैठेगा तो, लड़ाई हो जाएगी। जैसे रावण की हनुमान से लड़ाई हो गई। हो गई ना। तो वो तो नहीं बैठने देगा। तो ऊंची गद्दी कौनसी है इस देह में? ऊंची गद्दी है उसको कहते हैं उत्तमांग। उत्तम अंग। इससे उत्तम और अंग कोई होता नहीं है। उस उत्तमांग में जो खास-खास, बड़े-बड़े मंत्री-महामंत्री बैठे हुए हैं बड़े-बड़े राज्याधिकारी। हँ? इस शरीर के बड़े-बड़े राज्याधिकारी कौन हैं? हँ? सभी ज्ञानेंद्रियां। और सभी नंबरवार हैं। उनमें मुख्य? आंखें। तो उन दो आंखों के बीच में वो बैठता है। कौन? आत्मा। और शिव भी इस सृष्टि पर आते हैं तो उनकी भी दो आंखें हैं। हैं या नहीं? कौनसी दो आंखें हैं? हँ? एक राइटियस आंख, एक लेफ़्टिस्ट आंख। राइटियस तो राइट काम ही करती है। और लेफ़्टिस्ट? गंदा काम भी करती है।

A morning class was being narrated. 27.08.1967. A topic was being discussed in the end of the middle portion of the first page on Sunday. What was the context? Hm? The topic of Krishna Janmashtami was being discussed. So, they utter the name of Krishna in Janmashtami. And it is not about Krishna because it is the corporeal body which is believed to get birth. Is the birth also of the corporeal or of the incorporeal? It is of the corporeal. So, people do not know the corporeal, whose birthday should be celebrated; that is not in anyone’s intellect because everyone thinks that the Prince of the first birth of the Golden Age is Krishna. Hm? Ever since the new Kalpa starts, when the four Ages begin, then before those four Ages, a big destruction had taken place. Nobody knows about it at all. A big accident had taken place. So, they forgot everything. So, the Father narrates that all the big personalities who have existed among the Britishers, Muslims, Sikhs or any sage, saint or philosopher, their birthday is celebrated. And now-a-days the stamp of Rana Pratap has emerged. His stamp is printed. Well, actually, the stamp should be permanent. What? Who is permanent? There must be someone who is permanent in this world. Rana Pratap comes in the end of the Iron Age. You should celebrate the birthday of the one who remains permanently in this world.

So, it was told – The permanent birthday should be celebrated actually. The birthday of nobody else should be celebrated because the birthday of the one through whom everyone is benefited should be celebrated. So, through whom does everyone benefit? Hm? Arey, what is sung? The bestower of true salvation upon everyone is one. Who? All others are bestowers of degradation (durgati daataa). One is the bestower of true salvation (sadgati daataa). Shiv bhola bhagwaan (Shiv the innocent God). The one whose name is Shiv is incorporeal. Hm? Does He cause sadgati (true salvation)? The one who causes sadgati is called Satguru. And the Sadguru is Sat, i.e. true. And will the true and false one be recognized through the one who lives in the abode of truth? Who will cause? The below one (neecheyvala) will cause. But, will the below one also have to cause his own true salvation first or will he cause the true salvation of others? So, who becomes that? Hm? It is Father Shiv who causes that as well.

When the Father Shiv enters in a corporeal body, then actually He Himself is Dev-Dev-Mahadev (highest among all deities). It is also said; people of the world say Dev-Dev-Mahadev. It is I who is that as well. What? Had he, the one in whom I enter been Dev-Dev-Mahadev, then he would have caused true salvation (sadgati) of someone in 84 births. Could he do or not? So, it means that the soul in whom I enter is not the one who plays the part of Dev-Dev-Mahadev. I, Shiv, the point of light enter. And what does He give? It is said – Ritey gyaanaan na mukti. There cannot be liberation without knowledge. And when there cannot be liberation (mukti) itself, then how can there be liberation in life (jeevanmukti)? Is mukti first or is jeevanmukti first? First there should be liberation, first there should be liberation from sorrows; after that there is a desire to experience happiness. It is not as if someone suffers from 106-7 degrees fever, there is pain in all the nerves of the body, there is a lot of restlessness; and if someone puts a rasgulla (a sweet) in his mouth, [saying] brother, eat rasgulla; be happy; be joyful; so, will he eat? He will not eat at all. He will not like it at all. What does he want first? He wants liberation from sorrows first.

So, there is sorrow until there is this body. There is sorrow in the body only and there is happiness through the body only. So, who is that inexhaustible stock house of knowledge, whose knowledge never exhausts at all? Shiv. When He comes to this world and after coming what does He give? He starts giving little quantities from the inexhaustible stock house of knowledge. So, through that knowledge it sits in the intellect of the soul that I am not a body at all. I have considered myself to be a body. I considered myself to be a body; this is why I am experiencing sorrows. If there is firm remembrance that I am a soul, this body is perishable. It exists today; tomorrow? It will not exist tomorrow. Who will remain then? The imperishable soul will remain, will it not? So, He comes and gives the knowledge of the imperishable soul. So, it is as if He gave a drop of knowledge. What? He gave a point that you are a point of light soul, incorporeal point. Make it howevermuch small. Hm? It has been written in the Gita – Anoneeyaamsam. It is minuter than an atom. So, He gave a realization that I, I am also a point of light soul, and you children are also points of light, souls. I, the soul also never get destroyed. You souls also never get destroyed. You are imperishable children, incorporeal children of the imperishable, incorporeal Father. But what is the practice since many births? Hm? There is a practice of seeking pleasures of the body. So, you considered yourself to be a body only.

So, the Father tells – Practice this. What? That I am not a body. I am not such a long tail. I am a subtle point of light soul. And that subtle point of light soul which controls the entire body. For example, a king controls the entire kingdom; so, he sits on a high throne, doesn’t he? Hm? Will anyone sit on a higher seat in front of him? He will not sit, will he? And if anyone sits, there will be a fight. For example, Ravan had a fight with Hanuman, didn’t he? It happened, didn’t it? So, he will not allow him to sit [on a higher seat]. So, which is the high seat in this body? The high seat is called the uttamaang. The highest organ. There is no organ higher than this. In this highest organ, the special, senior ministers and senior officers are sitting. Hm? Who are the senior officers in this body? Hm? All the sense organs. And all are numberwise. Which are the main ones among them? The eyes. So, he sits between the two eyes. Who? The soul. And when Shiv also comes in this world, then He too has two eyes. Does He have or not? Which are the two eyes? Hm? One is a righteous eye and one is a leftist eye. The righteous eye performs right task only. And the leftist? It performs dirty task as well.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 14 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2629, दिनांक 03.09.2018
VCD 2629, Dated 03.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated 27.8.1967
VCD-2629-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 10.00-20.57
Time- 10.00-20.57


तो दिखाया कि तुम बच्चों को भी, तुम बच्चे आत्मा हो ना। ज्योतिबिन्दु हो ना। तुम्हारी भी ऊँचे ते ऊंचे अधिकारी दो हैं। क्या? दो आंखें। इनसे तुम सारी सृष्टि देखते हो। आँखें तुम्हारी खुली हुई हैं तो दुनिया है, देखने में आती है। आँखे बंद कर लो, दुनिया खत्म। तो ऐसे ही मैं आता हूँ तो उन दो आँखों को खोलता हूँ। हैं दोनो आत्माऐं। हं? कौन-2 सी दो आत्माऐं? लक्ष्मी और नारायण। तो जयन्ती मनानी है तो दो की मनानी है क्या? नहीं। उनमें भी तो राइट और लेफ्ट का अंतर है ना। हं? ज्यादा महत्व राईट हैन्ड को दिया जाता है या लैफ्ट हैन्ड को? राइट हैन्ड को दिया जाता है। तो उनमें जो राइटियस हाथ है वो है नारायण। और वो नारायण वाली आत्मा, नाम ही पडता है नार अयण। कहां रहती है? नार माने ज्ञान जल, अयन माने घर। तो मैं जब से ज्ञान देता हूँ कि तुम ज्योतिर्बिंन्दु आत्मा हो तब से वो कहां निवास करती है? हं? ज्ञान जल में ही निवास करती है। क्या? दुनियावी धंधे-धोरी की ऊँची ते ऊँची पढाई हो वो भूल जाऐगी। पहले क्या करेगी? जो मैं ज्ञान देता हूँ, हँ, शुद्ध ज्ञान तो मैं ही देता हूँ ना। सौ परसेन्ट शुद्ध। मेरे जैसा शुद्ध ज्ञान तो और कोई दे ही नहीं सकता। तो उस ज्ञान में वो रमण करती है। और जब तक वो इस सृष्टि रुपी रंगमंच पर ब्राहमण का पार्ट बजाएगी तब तक क्या करेगी? हँ? ब्रहमा के मुख से जो ज्ञान निकला है उसमें ही रमण करती है।

तो उसकी जयन्ती मनानी चाहिए। हं? मेरी क्यों नहीं मनानी चाहिए? और शिव कहते हैं कि मेरी जयन्ती क्यों नहीं मनानी चाहिए? और मनाई भी नहीं जाती। महाशिवरात्रि कहते हैं उसको। जयन्ती कहाँ कहते हैं भक्ति मार्ग में? शास्त्रों में कहीं जयन्ती नाम है? हं? ये तो ब्रहमाकुमारियों ने नाम रखा है गलतफहमी से कि ओम मंडली में शिव बाबा प्रत्यक्ष हुआ, तब हम भागी थीं। तो वो शिव बाबा कहते हैं कि मैं तो इस दुनियावी संसार-चक्र में आता ही नही हूँ। जो चक्कर में आये वो गिनती में भी आये। तो मुझे अव्वल नंबर गिनती में भी नहीं आना है, और लास्ट नंबर भी नहीं आना है, मध्य में भी नहीं आना है। मेरा नम्बर नहीं बनता। मैं तो नम्बर-वम्बर से परे हूँ। मुझे कोई मान-मर्तबा नहीं चाहिए। जो यहां मान-मर्तबा लेंगे शूटिंग पिरियड में भी, उनका वहां ब्रॉ़ड ड्रामा में मान-मर्तबा खतम। तो इसलिए संसार में भी जो सब कुछ त्याग देते हैं, खास भारतवर्ष में। क्या कहते हैं उनको? भारत में खास जो सब कुछ त्याग देते हैं उनको कहते हैं संन्यासी। और उनका कितना मान-मर्तबा है! हं? मान्यता ज्ञान सुनेंगे तो किससे जाके सुनेंगे? संन्यासी? उन्होने क्या किया? त्याग किया, है ना। त्याग से ये ऐसा भाग्य बनता है कि सारी दुनिया उनके चरणों में झकुती है। और मेरे तो चरण भी नहीं हैं। हाँ, उन चरणों से भेंट की जाती है, जो स्थूल चरण हैं, उनसे भेंट की जाती है। क्या भेंट की जाती है? उन संन्यसियों के पांव धोके पीते हैं। क्या? संन्यासियों के पांव धोये और जो मैल माटी गंद है, वो सब पानी में आ गयी। और वो उन्होंने पी लिया। अब मेरे अंदर तो मैल माटी भी नहीं है। मेरे पांव हैं क्या जो मैल-माटी लगे?

तो फिर मैं जिसमें प्रवेश करता हूं उसकी बात है। उसी की जयंती की बात है। उसी की प्रत्यक्षता की बात है, क्योंकि प्रत्यक्षता होने से पहले वो इस संसार में, भारतवर्ष में खास, 24वें अवतार रूप में प्रसिद्ध है। वैसे 10 अवतार भी माने जाते हैं। उनमें भी प्रसिद्ध है। कौनसा अवतार? क्या नाम दिया? हं?
(किसी ने कुछ कहा।) रावण का अवतार, महावीर का अवतार? धत्त तेरे की। राम का अवतार। कंस। क्या? कंस अवतार? नही। कंस का गायन थोडे ही है भगवान के रूप में? भगवान के रुप में जो आएगा अवतार उसका तो गायन होगा ना। (किसी ने कुछ कहा।) कलंकीधर। क्या गायन है? कलंकीधर। मैं आखरी अवतार में जब जिस तन में प्रवेश करता हूं उसके द्वारा प्रत्यक्ष होता हूं, तो मैं कलंकीधर नाम से प्रत्यक्ष होता हूं। और कहां से प्रत्यक्ष होता हूं? हं? प्रत्यक्ष कहां से होता हूं? भारत में प्रत्यक्ष होता हूं। भारत का मुख्य स्थान कौनसा? भारत की भी कोई राजधानी होगी ना। दिल्ली। तो दिल्ली से मैं प्रत्यक्ष होता हूं। किस रूप में? कलंकीधर रुप में। बड़े-बड़े भयंकर कलंक लगाए जाते हैं। तो वो तो लास्ट अवतार हुआ ना। कलंक लगेंगे, उसको दुनिया थोड़ेही पूजेगी? कब पूजेगी? जब कलंक साफ हो जाएं।

तो वो आत्मा जो है, जो अपन को समझ जाती है कि मैं ज्योतिबिंदु आत्मा हूं, तो ऊर्ध्वगति में जाएगी, ऊंचे जाएगी या अधोगति में जाएगी? ऊँची जाएगी ना। 84 जन्मों की सीढ़ी ऊपर चढ़ेगी कि नीचे गिरेगी? ऊपर चढ़ेगी। तो कहां से शुरू करेगी? कौनसे जन्म से? हं? लास्ट 84वें जन्म से सीढ़ी ऊपर चढ़ना शुरू करेगी। और नीचे से लेकरके ऊपर तक जब तक पूरी चढ जाएगी तब कहेंगे उसकी पूरी आत्मा की बायोग्राफी। वो हुई ना बायोग्राफी। और वो जो बायोग्राफी है वो मनुष्यों की होती है, देहधारियों की होती है, देवताओं की होती है या जो सदा निराकार है उसकी होती है? हं? निराकार की? उस निराकार को तो सौ परसेंट सिर्फ वो ही पहचान पाता है जिसमें वो प्रवेश करता है। बाकी उसके अलावा और कोई पूरा पहचान नहीं पाता। इसलिए दुनिया में मान्यता किसकी होती है? कृष्ण की। क्या? अगर दुनिया में कोई शख्सियत है, कोई नामधारी है, कोई देहधारी है, तो सबसे ज्यादा मान-मर्तबा शास्त्रों में किसका दिखाया गया? किसकी महिमा दिखाई गई? कृष्ण की महिमा दिखाई गई। बड़े-बड़े चरित्र दिखाए गए। क्या? क्योंकि नारायण तो बड़ा का नाम है। तो नारायण नाम पड़ता है तो वो तो ज्ञान जल में रहे लगातार, तो नारायण नाम पड़े, विष्णु नाम पड़े। बच्चा है. तो उसका मनन,चिंतन, मंथन चलेगा? चलेगा? बच्चे का? नहीं चलेगा। तो वो ज्यादा शुद्ध हुआ बच्चा या बड़ा होने के बाद शुद्ध हुआ? बच्चा है महात्मा कहा जाता है, महान आत्मा।

तो उसकी जयंती मनाई जाती है जो परमपवित्र है। हं? साकार शरीरधारियों के बीच में, इस दुनिया में जितने भी चाहें देवताएं हो, चाहे ऋषि-मुनि हों, चाहे राक्षस हों, उनमें सबसे जास्ती पवित्र स्टेज जो बनाता है, उसकी बात दिखाई कि उसका स्टैंप बनना चाहिए। क्या? ठप्पा। पोस्ट ऑफिस में कोई लेटर डाला जाता है, तो उस पर जब तक ठप्पा नहीं लगेगा वो जाएगा ही नहीं, फेंक देंगे उसको, डुप्लीकेट है। तो वो स्टैंप बनाना चाहिए क्योंकि वो स्टैंप स्थाई है। इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर रहनेवाली आत्मा की। और जो आगे-पीछे जन्म लेते हैं वो स्थाई हैं क्या? वो तो स्थाई नहीं हैं। तो उसके लिए बाप बैठ समझाते हैं। क्या? समझाने का काम कौन करता है? समझाने का काम टीचर करता है। टीचर क्या करता है? विस्तार से बताता है।

So, it was depicted that you children also; you children are souls, aren’t you? You are points of light, aren’t you? Your highest on high officers are also two. What? Two eyes. You see the entire world through them. The world is existent and visible when your eyes are open. If you close the eyes, the world ends. So, similarly when I come, I open those two eyes. Both are souls. Hm? Which two eyes? Lakshmi and Narayan. So, if you have to celebrate birthday (jayanti), then should you celebrate for two? No. Even among them there is a difference of right and left, isn’t it? Hm? Is more importance given to the right hand or to the left hand? It is given to the right hand. So, even among them the righteous hand is Narayan. And that soul of Narayan; the name itself is coined as Naar ayan. Where does it live? Naar means the water of knowledge; ayan means home. So, ever since I give knowledge that you are point of light soul, where does it reside? Hm? It resides in water of knowledge only. What? It will forget the highest on high education of the worldly businesses. What will it do first? The knowledge that I give; hm, I alone give the pure knowledge, don’t I? Hundred percent pure. Nobody can give pure knowledge like Me at all. So, it enjoys that knowledge. And what will it do until it plays the part of a Brahmin on this world stage? Hm? It enjoys the knowledge that emerged from the mouth of Brahma.

So, his birthday should be celebrated. Hm? Why shouldn’t you celebrate Mine? And Shiv says that why shouldn’t you celebrate My birthday? And it is not celebrated as well. It is called Mahashivratri. Is it called Jayanti (birthday) on the path of Bhakti? Is there the name of Jayanti anywhere in the scriptures? Hm? It is the Brahmakumaris who have coined the name due to misunderstanding that we had run away [from homes] when ShivBaba was revealed in Om Mandali. So, that ShivBaba says I do not pass through this worldly world-cycle at all. The one who passes through the cycle will be included in counting as well. So, I have to neither come in the counting of the number one nor in the last number nor in the middle. I do not get any number. I am beyond numbers. I do not require any respect and position. Those who obtain respect and position here in the shooting period also, their respect and position will end there in the broad drama as well. So, this is why those who renounce everything in the world, especially in India. What are they called? Especially in India, those who renounce everything are called Sanyasis. And they command so much respect and position! Hm? Respect; If they listen to knowledge, then from whom do they go and listen? Sanyasis? What did they do? They sacrificed, didn’t they? They earn such fortune (bhaagya) through sacrifice (tyaag) that the entire world bows at their feet. And I do not have feet as well. Yes, a comparison is made with those feet, the physical feet. What comparison is made? They wash the feet of those Sanyasis and drink that water. What? They wash the feet of the Sanyasis and all that dirt and soil collects in the water. And they drink that. Well, there is no dirt or soil in Me. Do I have feet that dirt and soil sticks to it?

So, then it is about the one in whom I enter. It is about his birthday (jayanti). It is about his revelation because before his revelation, in this world, especially in India he is famous as the 24th incarnation. Otherwise 10 incarnations are also famous. Even among them one is famous. Which incarnation? Which name was assigned to it? Hm?
(Someone said something.) Ravan’s incarnation? Mahaveer’s incarnation? Damn it. Ram’s incarnation. Kans. Incarnation of Kansa? No. Kansa is not praised as God. Incarnation of the one who comes as God will be praised, will it not be? (Someone said something.) Kalankidhar (the stained one). What is praised? Kalankidhar. In My last incarnation, the body in which I enter, I am revealed through him, so, I am revealed by the name of Kalankidhar. And from where am I revealed? Hm? From where am I revealed? I am revealed in India. Which is the main place in India? There must be a capital of India as well, isn’t it? Delhi (Dilli). So, I am revealed from Delhi. In which form? In the form of Kalankidhar (the stained one). Big, dangerous stains (kalank) are thrown at him. So, that is the last incarnation, isn’t it? Stains will be thrown at him; will the world worship him? When will it worship? It is when the stains are cleared.

So, that soul, which realizes that I am a point of light soul, then will it go to a higher stage (oordhwagati), go up or go to a lower stage (adhogati)? It will go up, will it not? Will it climb up the Ladder of 84 births or will it fall? It will rise. So, where will it begin from? From which birth? Hm? It will start climbing up the Ladder from the last 84th birth onwards. And when it has completely climbed from bottom to top, then it will be said the complete biography of his soul. That is biography, isn’t it? And is that biography of the human beings, of the bodily beings, of the deities or of the one who is forever incorporeal? Hm? Of the incorporeal? Only the one in whom He enters is able to recognize that incorporeal hundred percent. No person other than him is able to recognize Him completely. This is why who is recognized in the world? Krishna. What? If there is any personality, titleholder, any bodily being, then who is depicted to have the most respect and position in the scriptures? Whose glory has been depicted? Krishna’s glory has been depicted. Big acts have been depicted. What? It is because Narayan’s name is very famous. So, when he gets the name Narayan, then he gets the name Narayan, gets the name Vishnu when he lives in the water of knowledge continuously. If he is a child, will he be able to think and churn? Will he? The child? He will not. So, is that child purer or is he pure after growing up? When he is a child he is called mahatma (saint), great soul.

So, the one who is supremely pure (param pavitra), his birthday is celebrated. Hm? Among the corporeal bodily beings, in this world, be it the deities, be it the sages and saints, be it the demons, among them the one who develops the purest stage, his topic has been depicted that his stamp should be prepared. What? Stamp (thappa). Whenever a letter is posted in a Post Office, then until it is stamped, it will not be dispatched at all; it will be thrown away; it is duplicate. So, that stamp should be prepared because that stamp is permanent. Of the soul who remains on this world stage. And are the ones who get birth sooner or later permanent? They are not permanent. So, the Father sits and explains for him. What? Who performs the task of explaining? The teacher performs the task of explaining. What does the teacher do? He tells in detail.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 16 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2630, दिनांक 04.09.2018
VCD 2630, Dated 04.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning class dated 27.8.1967
VCD-2630-extracts-Bilingual

समय- 00.01-15.50
Time- 00.01-15.50

प्रातः क्लास चल रहा था – 27.8.1967. रविवार को पहले पेज के अंत में बात चल रही थी कि इस समय जो दुर्गति में हैं उन सबका जो भी बड़े-बड़े होकर गए हैं, स्टाम्प बनाते हैं। बाप बैठ समझाते हैं सबका सद्गति दाता तो एक है। अगर अब इस समय कलियुग का अंत आकर हुआ है, तमोप्रधान कलियुग है, पाप की दुनिया है, इस समय अगर बाप न आए तो जैसे कि ये नरक में गोता खाय रहे हैं, रौरव नरक में, खाते ही रहेंगे। अभी तो जिन-जिन की भी जयन्ती मनाते हैं वो सारे के सारे नरक में गोते खाय रहे हैं। एक भी बाहर नहीं है। सब, जो भी हों सारी दुनिया के। इसलिए बाप कहते हैं कि सारी दुनिया की तो बात छोड़ दो। अपने घर की तो बात करो। अपना घर कौनसा है? हँ? और सारी दुनिया का घर कौनसा है? कि अंतर है? हाँ, अपना घर है, जिसे कहा जाता है परमब्रह्म। क्योंकि ब्रह्मा नामधारी तो बहुत हैं, चतुर्मुखी ब्रह्मा, पंचमुखी ब्रह्मा। और उनके मुख भी अलग-अलग हैं तो उनमें, मुखों में आत्माएं भी अलग-अलग होंगी। तो नंबरवार अम्माएं हुई ना। बड़े बाप की बड़ी अम्माएं होंगी।

तो बताया, वो सब रौरव नरक में हैं। तुम अपनी अम्मा के बच्चे हो, परमब्रह्म के, तो तुम अपना घर की बात तो करो। वो तो समझो। अपने घर की बात समझने से बरोबर बुद्धि में आएगा भारत में सबसे ऊँचे-ऊँचे कौन होकर गए हैं? और सबसे ऊँचा कौन होकर गया है? कब गया? भई कहेंगे शिवबाबा होकर गए। जरूर वो ही है। क्योंकि वो शिवबाबा ही पतित-पावन है। हँ? शिव बाप है पतित-पावन या शिवबाबा है पतित-पावन? हँ? कोई अंतर है शिवबाबा में और शिव बाप में? शिव बाप है बिन्दु-बिन्दु आत्माओं का बाप। उसको अपना शरीर होता ही नहीं है। इसलिए वो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर आते हैं तब जब सब रौरव नरक में गोते खाते हैं। तो इस सृष्टि पर आकर, इस सृष्टि में जो रंगमंच है ना ये दुनिया, इस रंगमंच में जो हीरो पार्टधारी के रूप में पार्टधारी है। हर युग के आदि में हीरो पार्ट के रूप में तो प्रत्यक्ष होता ही है। सतयुग के आदि में भी वो आया था। तो शिवबाबा के रूप में प्रसिद्ध है। गांव-गांव में, शहर-शहर में, भारत में तो मन्दिर बने ही हुए हैं। विदेशों में भी यादगार बनी हुई हैं और जो खुदाइयाँ देश-विदेश में हुई हैं उनमें भी वो शिव के मन्दिर के अन्दर जो शिवलिंग रखा रहता है उसकी यादगार मिल रही है।

तो ढ़ेर के ढ़ेर शिव मन्दिर भी हैं। 27.8.1967 की वाणी का दूसरा पेज। और वो मन्दिर अक्सर करके ऊँची पहाड़ियों पर बनाए जाते हैं। क्यों? ये यादगार क्यों? क्योंकि ऊँची स्टेज में रहता है। ऐसे नहीं पतितों को पावन बनाने के लिए कोई पहाड़ पे जाके बैठेगा। ऊँची तकड़ियों पर मन्दिर बनाते हैं। है ही ऊँचे ते ऊँचा। अच्छा, ये तो बाप को भूल गए हैं भारतवासी। क्या? भारतवासी माने जो भारत के दिल में रहने वाले हैं; क्या? कहाँ के वासी हैं? वो ही भारत जिसका नाम दिया परमब्रह्म। परमब्रह्म के वासी हुए ना। बच्चे कहाँ से पैदा होते हैं? माँ से पैदा होते हैं। तो वो है महान ते महान ब्रह्मा। हँ? ये भारतवासी उनकी संतान हैं। और ये भूल गए हैं। क्या? भूल गए हैं कि नहीं भूल गए हैं? कैसे पता चलता है कि भूल गए? कैसे पता चलता है कि वो भूलते ही रहते हैं? भारत माता की जय, भारत माता की जय। अरे, भारत माता की जय बोलते रहते। पिताजी कहाँ चले गए? अरे, भारत में तो सधवाओं की पूजा होती है, सधवाओं की मान्यता है। विधवाओं को तो माना नहीं जाता है, मानते नहीं हैं। तो भूले हुए हैं ना। तब तो बाप की बात नहीं बोलते कुछ भी। वो ही बाप भारत को स्वर्ग का मालिक बनाते हैं, जिसको इतना महत्व देते हैं। कितना महत्व? हँ? यादगार मन्दिर बनाए हैं सारी दुनिया में।

तो जब वो आते हैं तब सबकी सद्गति करते हैं। हँ? कहाँ से आते हैं? वो तो है ही आत्मा। उनको अपना शरीर तो है नहीं शिव को। तो वो तो आत्मलोक से ही आएंगे ना। और सब आत्माएं उनके बच्चे हैं। ऐसे तो नहीं कि मनुष्यात्माएं ही उनके बच्चे हैं। हाँ, ये है कि मनुष्य तन जो है वो मन वाला है। मनन-चिंतन-मंथन कर सकता है। और प्राणी उतना मनन-चिंतन-मंथन तो नहीं कर सकते क्योंकि जडत्व बुद्धि वाले होते हैं। तो कोई मनुष्य में ही आवेंगे ना। तो जब किसी मनुष्य में आते हैं, ज्ञान देते हैं; कैसा ज्ञान देते हैं? थोक देते हैं कि रीटेल देते हैं? थोक माल देते हैं। उस थोक माल को फिर वो जिसमें आते हैं वो मनन-चिंतन-मंथन करके विस्तार कर देता है। विस्तार करेंगे तो सबको समझ में आएगा। नहीं तो सार की बात सबको समझ में तो आती नहीं। तो जब विस्तार हो जाता है, तो जैसे इस दुनिया के वृक्ष का विस्तार होता है, तो जो भी 500-700 करोड़ मनुष्यात्माएं हैं इस सृष्टि रूपी वृक्ष में, चाहे थोड़ा पार्ट बजाने वाली हैं चाहे 84 पूरे जन्मों का चक्कर लगाने वाली हैं, सब समझ जाते हैं।

सबकी सद्गति दाता है। सद्गति का मतलब क्या है? हँ? दुर्गति का मतलब क्या है? पहले तो आत्मा की सद्गति होगी ना। आत्मा की दुर्गति हुई पड़ी है तो रौरव नरक में पड़े हैं। आत्मा की सद्गति होती है तो आत्मा सतधाम की ओर झुकेगी, सतधाम को याद करेगी, सतधाम की ओर दौड़ लगाएगी कि नरक में गोते खाएगी? हँ? सतधाम में जाएगी ना। तो जिनको बुद्धि है, नहीं है, जिनको मन है, नहीं है, सबकी आकर सद्गति करते हैं क्योंकि हैं तो सब चैतन्य आत्माएं ना। चैतन्य किसको कहा जाता है? जो बोलता है, चालता है, उसको चैतन्य कहा जाता है। कोई आवाज़ नहीं करता, हँ, चलन-फिरन, हलन-चलन नहीं करता, तो पत्थर हुआ। एक जगह पड़ा रहेगा। तो सबकी सद्गति करते हैं। अगर वो सद्गति सबकी न करे तो कुछ भी नहीं होता। तो जो सबकी सद्गति करते हैं उनकी तो याद होनी चाहिए। और याद कौन करेंगे? पहले तो याद वो ही करेंगे जिनको मन-बुद्धि प्रबल है। हँ? मन से ही तो याद करना होता है। तो याद होनी चाहिए। और याद करने के लिए फिर कोई फोटो होना चाहिए। तो स्टैम्प बनाएंगे तो सारी दुनिया में वो स्टैम्प कम से कम जिस देश में बनाएंगे उस देश में तो फैलेगा ना।

तो समझा ना किसका स्टैम्प बनाना चाहिए? तो उनकी तो कोई याद भी नहीं करता है। स्टैम्प बनाना तो दूर क्योंकि पहचान ही नहीं है। जानते ही नहीं हैं। बहुत पुरानी बात हो गई ना। कितनी पुरानी बात हो गई? हँ? वो तो आकरके हैविनली गॉड फादर हैविन बनाते हैं ना। तो हैविन को तो बहुत पुराना टाइम हो गया। आधा टाइम होता है स्वर्ग इस दुनिया में जो भगवान बनाते हैं सद्गति करके। और आधा टाइम होता है नरक इस दुनिया में। जैसे रात दिन होते हैं ना। आधा-आधा होते हैं। आधा टाइम दिन, आधा टाइम रात। तो जब रात होती है तो अंधेरा छा जाता है। काहे का अंधेरा? अज्ञान का अंधेरा। क्या अज्ञान? सब बाप को भूलने लगते हैं। कोई को याद नहीं रहती कि बाप क्या है? अब ये स्टैम्प बनाएंगे ऊँच ते ऊँच शिवबाबा का तो सब याद करेंगे, देखेंगे। क्योंकि ज्ञान तो है नहीं। फिर भी भक्तिमार्ग में जो लिंग बनाते हैं तो यादगार है ना। और सबसे जास्ती यादगार है उनकी मन्दिरों में। तो वो ऊँचे ते ऊँची आत्मा ठहरी ना, हँ, जिनका यादगार बनाते हैं। उनको तो शिव का मन्दिर भी तो बनाते हैं। हँ? ऐसे तो नहीं कहेंगे शंकर का ही मन्दिर है। भले शिव शंकर को मिलाय देते हैं। उससे तो ये साबित होता है कि शंकर ने बहुत याद किया, इतना याद किया तो याद में लीन हो गया। लीन हो गया माना एकाकार हो गया। तो अगर मन्दिरों में विचार करो तो भी मन्दिर ऊँचे ते ऊँचा शिव का ही मानेंगे। एक तो ऊँचे स्थानों पर बनाते हैं। उससे साबित होता है कि हाँ, ऊँचा। दूसरे, ऊँची स्टेज के साथ-साथ करम भी ऊँची स्टेज के करते हैं।

A morning class dated 27.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the first page on Sunday was that stamps are prepared for those who are in degradation at this time and all the big personalities who have existed in the past. The Father sits and explains that the bestower of true salvation upon everyone is one. If at this time the end of the Iron Age has come, when it is tamopradhan Iron Age, when it is a world of sins, at this time if the Father does not come, then just as these people are diving in the hell, in the complete hell (raurav narak), they will continue to dive. At this time all those whose birthdays are being celebrated are diving in hell. None of them are out of it. All, whoever exists in the world. This is why the Father says that leave aside the topic of the entire world. Talk about your home. Which is your home? Hm? And which is the home of the entire world? Or is there any difference? Yes, our home is the one which is called Parambrahm. It is because there are many people with the name Brahma; four headed Brahma, five headed Brahma. And their heads are also different; so, among them, among the heads, the souls will also be different. So, they are numberwise mothers, aren’t they? The senior Father will have senior mothers.

So, it was told that all are in complete hell. You are the children of your mother, of Parambrahm; so you talk of your home. Understand that. By understanding the topic of your home it will strike the intellect that who all great persons have existed in the past in India? And who was the highest one to exist? When did he depart? Brother, it will be said that ShivBaba had existed. It was definitely Him. It is because that ShivBaba Himself is the purifier of the sinful ones (patit-paavan). Hm? Is Father Shiv patit-paavan or is ShivBaba patit-paavan? Hm? Is there any difference between ShivBaba and Father Shiv? Father Shiv is the Father of point-like souls. He does not have a body of His own at all. This is why He comes to this world stage when everyone is swimming in the complete hell. So, after coming to this world, this world is a stage, isn’t it? The actor who acts as the hero actor on this stage, and is revealed as a hero part in the beginning of every Age. He had come in the beginning of the Golden Age as well. So, He is famous in the form of ShivBaba. Temples are built in every village, every city in India. The memorial is formed in foreign countries as well and in the excavations that have been undertaken in the country and abroad, the memorials of the Shivling that is placed in the temple of Shiva are being found.

So, there are numerous temples of Shiv as well. Second page of the Vani dated 27.8.1967. And those temples are mostly built on high mountains. Why? Why this memorial? It is because He lives in a high stage. It is not as if He will go and sit on a mountain to purify the sinful ones. Temples are built on high pedestals. He is highest on high. Achcha, these residents of India (Bhaaratwaasis) have forgotten the Father. What? Bhaaratwaasis means those who live in the heart of Bhaarat; What? They are residents of which place? The same Bhaarat, who has been named Parambrahm. They are residents of Parambrahm, aren’t they? From where are the children born? They are born from the mother. So, he is the greatest of all Brahmas. Hm? These residents of India are his children. And they have forgotten. What? Have they forgotten or not? How does one know that they have forgotten? How does one know that they keep on forgetting? Hail the victory of Mother India. Hail the victory of Mother India. Arey, you keep on hailing the victory of Mother India. Where did the Father go? Arey, it is the married women who are worshipped, recognized in India. Widows are not recognized, respected. So, they have forgotten, haven’t they? That is why they do not speak about the Father’s topic. The same Father who makes Bhaarat the master of heaven who is given so much importance. How much importance? Hm? The memorial temples have been built in the entire world.

So, when He comes, He causes the true salvation of everyone. Hm? From where does He come? He is already a soul. He, Shiv does not have a body of His own. He will come only from the Soul World, will He not? And all the souls are His children. It is not as if only the human souls are His children. Yes, it is true that this human body possesses a mind. It can think and churn. Other living beings cannot think and churn to that extent because their intellect is inert. So, He will come in a human being only, will He not? So, when He comes in a human being, gives knowledge; what kind of knowledge does He give? Does He give in wholesale or in retail? He gives wholesale material. The one in whom He comes, thinks and churns that wholesale material and makes it elaborate. When he elaborates, then it will be understood by everyone. Otherwise, the topic of essence is not understood by everyone. So, when elaboration takes place, then just as the tree of this world expands, then all the 500-700 crore human souls of this world tree, be it those who play a little part, be it those who pass through the cycle of entire 84 births, everyone understands.

He is the bestower of true salvation (sadgati) upon everyone. What is meant by Sadgati? Hm? What is meant by durgati (degradation)? First the sadgati of the soul will be caused, will it not be? When the soul has undergone degradation, then we are in complete hell (raurav narak). When the soul undergoes true salvation, will the soul incline towards the abode of truth, remember the abode of truth, will it run towards the abode of truth or will it swim in the hell? Hm? It will go to the abode of truth, will it not? So, He comes and causes the true salvation of all those who have intellect, those who do not have intellect, those who have mind, those who do not have mind because all are living souls, aren’t they? Who is called living (chaitanya)? The one who speaks, walks is called living. If it does not produce any sound, hm, does not move, then it is a stone. It will keep lying at one place. So, He causes sadgati of everyone. If He does not cause everyone’s sadgati, then nothing happens. So, one should remember the One who causes everyone’s sadgati. And who will remember? First only they, who have a strong mind and intellect, will remember. Hm? One remembers through the mind only. So, there should be remembrance. And a photo is required to remember. So, if you prepare a stamp, then the stamp will spread all over the world, at least in the country where it has been prepared.

So, did you understand whose stamp should be prepared? So, nobody remembers Him. Preparing His stamp is a far-off proposition because there is no realization at all. They do not know [Him] at all. It is a very old topic, isn’t it? How old a topic is it? Hm? He, the heavenly God Father comes and establishes heaven, doesn’t He? So, it has been a long time since heaven existed. For half the time in this world there is heaven which God establishes by causing true salvation. And for half the time there is hell in this world. Just as there is night and day, isn’t it? They are half each. Half the the time day and half the time night. So, when there is night, then there is darkness. Darkness of what? Darkness of ignorance. Which ignorance? Everyone starts forgetting the Father. Nobody remembers as to what the Father is? Well, if they prepare this stamp of the highest on high ShivBaba, then everyone will remember, see because there is no knowledge. Yet, the ling that is sculpted on the path of Bhakti is a memorial, isn’t it? And the maximum memorials are in His temples. He is the highest on high soul whose memorial is formed, isn’t He? Shiv’s temple is also built. Hm? It will not be said that it is Shankar’s temple only. Although they mix up Shiv and Shankar. It proves that Shankar remembered a lot, he remembered so much that he became immersed in remembrance. He was immersed means that he became one with Him. So, if you ponder, among the temples, the highest on high temple will be considered to be the temple of Shiv only. Firstly, it is built on high places. It proves that yes, He is high. Secondly, along with a high stage, the actions that He performs are also in a high stage.
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नोटः यह केवल एक प्रारूप है। उक्त वीसीडी के संपूर्ण मूल पाठ या मूल आडियो, वीडियो के लिए www.adhyatmik-vidyalaya.com देखिये।
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 16 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2630, दिनांक 04.09.2018
VCD 2630, Dated 04.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning class dated 27.8.1967
VCD-2630-extracts-Bilingual

समय- 00.01-15.50
Time- 00.01-15.50


प्रातः क्लास चल रहा था – 27.8.1967. रविवार को पहले पेज के अंत में बात चल रही थी कि इस समय जो दुर्गति में हैं उन सबका जो भी बड़े-बड़े होकर गए हैं, स्टाम्प बनाते हैं। बाप बैठ समझाते हैं सबका सद्गति दाता तो एक है। अगर अब इस समय कलियुग का अंत आकर हुआ है, तमोप्रधान कलियुग है, पाप की दुनिया है, इस समय अगर बाप न आए तो जैसे कि ये नरक में गोता खाय रहे हैं, रौरव नरक में, खाते ही रहेंगे। अभी तो जिन-जिन की भी जयन्ती मनाते हैं वो सारे के सारे नरक में गोते खाय रहे हैं। एक भी बाहर नहीं है। सब, जो भी हों सारी दुनिया के। इसलिए बाप कहते हैं कि सारी दुनिया की तो बात छोड़ दो। अपने घर की तो बात करो। अपना घर कौनसा है? हँ? और सारी दुनिया का घर कौनसा है? कि अंतर है? हाँ, अपना घर है, जिसे कहा जाता है परमब्रह्म। क्योंकि ब्रह्मा नामधारी तो बहुत हैं, चतुर्मुखी ब्रह्मा, पंचमुखी ब्रह्मा। और उनके मुख भी अलग-अलग हैं तो उनमें, मुखों में आत्माएं भी अलग-अलग होंगी। तो नंबरवार अम्माएं हुई ना। बड़े बाप की बड़ी अम्माएं होंगी।

तो बताया, वो सब रौरव नरक में हैं। तुम अपनी अम्मा के बच्चे हो, परमब्रह्म के, तो तुम अपना घर की बात तो करो। वो तो समझो। अपने घर की बात समझने से बरोबर बुद्धि में आएगा भारत में सबसे ऊँचे-ऊँचे कौन होकर गए हैं? और सबसे ऊँचा कौन होकर गया है? कब गया? भई कहेंगे शिवबाबा होकर गए। जरूर वो ही है। क्योंकि वो शिवबाबा ही पतित-पावन है। हँ? शिव बाप है पतित-पावन या शिवबाबा है पतित-पावन? हँ? कोई अंतर है शिवबाबा में और शिव बाप में? शिव बाप है बिन्दु-बिन्दु आत्माओं का बाप। उसको अपना शरीर होता ही नहीं है। इसलिए वो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर आते हैं तब जब सब रौरव नरक में गोते खाते हैं। तो इस सृष्टि पर आकर, इस सृष्टि में जो रंगमंच है ना ये दुनिया, इस रंगमंच में जो हीरो पार्टधारी के रूप में पार्टधारी है। हर युग के आदि में हीरो पार्ट के रूप में तो प्रत्यक्ष होता ही है। सतयुग के आदि में भी वो आया था। तो शिवबाबा के रूप में प्रसिद्ध है। गांव-गांव में, शहर-शहर में, भारत में तो मन्दिर बने ही हुए हैं। विदेशों में भी यादगार बनी हुई हैं और जो खुदाइयाँ देश-विदेश में हुई हैं उनमें भी वो शिव के मन्दिर के अन्दर जो शिवलिंग रखा रहता है उसकी यादगार मिल रही है।

तो ढ़ेर के ढ़ेर शिव मन्दिर भी हैं। 27.8.1967 की वाणी का दूसरा पेज। और वो मन्दिर अक्सर करके ऊँची पहाड़ियों पर बनाए जाते हैं। क्यों? ये यादगार क्यों? क्योंकि ऊँची स्टेज में रहता है। ऐसे नहीं पतितों को पावन बनाने के लिए कोई पहाड़ पे जाके बैठेगा। ऊँची तकड़ियों पर मन्दिर बनाते हैं। है ही ऊँचे ते ऊँचा। अच्छा, ये तो बाप को भूल गए हैं भारतवासी। क्या? भारतवासी माने जो भारत के दिल में रहने वाले हैं; क्या? कहाँ के वासी हैं? वो ही भारत जिसका नाम दिया परमब्रह्म। परमब्रह्म के वासी हुए ना। बच्चे कहाँ से पैदा होते हैं? माँ से पैदा होते हैं। तो वो है महान ते महान ब्रह्मा। हँ? ये भारतवासी उनकी संतान हैं। और ये भूल गए हैं। क्या? भूल गए हैं कि नहीं भूल गए हैं? कैसे पता चलता है कि भूल गए? कैसे पता चलता है कि वो भूलते ही रहते हैं? भारत माता की जय, भारत माता की जय। अरे, भारत माता की जय बोलते रहते। पिताजी कहाँ चले गए? अरे, भारत में तो सधवाओं की पूजा होती है, सधवाओं की मान्यता है। विधवाओं को तो माना नहीं जाता है, मानते नहीं हैं। तो भूले हुए हैं ना। तब तो बाप की बात नहीं बोलते कुछ भी। वो ही बाप भारत को स्वर्ग का मालिक बनाते हैं, जिसको इतना महत्व देते हैं। कितना महत्व? हँ? यादगार मन्दिर बनाए हैं सारी दुनिया में।

तो जब वो आते हैं तब सबकी सद्गति करते हैं। हँ? कहाँ से आते हैं? वो तो है ही आत्मा। उनको अपना शरीर तो है नहीं शिव को। तो वो तो आत्मलोक से ही आएंगे ना। और सब आत्माएं उनके बच्चे हैं। ऐसे तो नहीं कि मनुष्यात्माएं ही उनके बच्चे हैं। हाँ, ये है कि मनुष्य तन जो है वो मन वाला है। मनन-चिंतन-मंथन कर सकता है। और प्राणी उतना मनन-चिंतन-मंथन तो नहीं कर सकते क्योंकि जडत्व बुद्धि वाले होते हैं। तो कोई मनुष्य में ही आवेंगे ना। तो जब किसी मनुष्य में आते हैं, ज्ञान देते हैं; कैसा ज्ञान देते हैं? थोक देते हैं कि रीटेल देते हैं? थोक माल देते हैं। उस थोक माल को फिर वो जिसमें आते हैं वो मनन-चिंतन-मंथन करके विस्तार कर देता है। विस्तार करेंगे तो सबको समझ में आएगा। नहीं तो सार की बात सबको समझ में तो आती नहीं। तो जब विस्तार हो जाता है, तो जैसे इस दुनिया के वृक्ष का विस्तार होता है, तो जो भी 500-700 करोड़ मनुष्यात्माएं हैं इस सृष्टि रूपी वृक्ष में, चाहे थोड़ा पार्ट बजाने वाली हैं चाहे 84 पूरे जन्मों का चक्कर लगाने वाली हैं, सब समझ जाते हैं।

सबकी सद्गति दाता है। सद्गति का मतलब क्या है? हँ? दुर्गति का मतलब क्या है? पहले तो आत्मा की सद्गति होगी ना। आत्मा की दुर्गति हुई पड़ी है तो रौरव नरक में पड़े हैं। आत्मा की सद्गति होती है तो आत्मा सतधाम की ओर झुकेगी, सतधाम को याद करेगी, सतधाम की ओर दौड़ लगाएगी कि नरक में गोते खाएगी? हँ? सतधाम में जाएगी ना। तो जिनको बुद्धि है, नहीं है, जिनको मन है, नहीं है, सबकी आकर सद्गति करते हैं क्योंकि हैं तो सब चैतन्य आत्माएं ना। चैतन्य किसको कहा जाता है? जो बोलता है, चालता है, उसको चैतन्य कहा जाता है। कोई आवाज़ नहीं करता, हँ, चलन-फिरन, हलन-चलन नहीं करता, तो पत्थर हुआ। एक जगह पड़ा रहेगा। तो सबकी सद्गति करते हैं। अगर वो सद्गति सबकी न करे तो कुछ भी नहीं होता। तो जो सबकी सद्गति करते हैं उनकी तो याद होनी चाहिए। और याद कौन करेंगे? पहले तो याद वो ही करेंगे जिनको मन-बुद्धि प्रबल है। हँ? मन से ही तो याद करना होता है। तो याद होनी चाहिए। और याद करने के लिए फिर कोई फोटो होना चाहिए। तो स्टैम्प बनाएंगे तो सारी दुनिया में वो स्टैम्प कम से कम जिस देश में बनाएंगे उस देश में तो फैलेगा ना।

तो समझा ना किसका स्टैम्प बनाना चाहिए? तो उनकी तो कोई याद भी नहीं करता है। स्टैम्प बनाना तो दूर क्योंकि पहचान ही नहीं है। जानते ही नहीं हैं। बहुत पुरानी बात हो गई ना। कितनी पुरानी बात हो गई? हँ? वो तो आकरके हैविनली गॉड फादर हैविन बनाते हैं ना। तो हैविन को तो बहुत पुराना टाइम हो गया। आधा टाइम होता है स्वर्ग इस दुनिया में जो भगवान बनाते हैं सद्गति करके। और आधा टाइम होता है नरक इस दुनिया में। जैसे रात दिन होते हैं ना। आधा-आधा होते हैं। आधा टाइम दिन, आधा टाइम रात। तो जब रात होती है तो अंधेरा छा जाता है। काहे का अंधेरा? अज्ञान का अंधेरा। क्या अज्ञान? सब बाप को भूलने लगते हैं। कोई को याद नहीं रहती कि बाप क्या है? अब ये स्टैम्प बनाएंगे ऊँच ते ऊँच शिवबाबा का तो सब याद करेंगे, देखेंगे। क्योंकि ज्ञान तो है नहीं। फिर भी भक्तिमार्ग में जो लिंग बनाते हैं तो यादगार है ना। और सबसे जास्ती यादगार है उनकी मन्दिरों में। तो वो ऊँचे ते ऊँची आत्मा ठहरी ना, हँ, जिनका यादगार बनाते हैं। उनको तो शिव का मन्दिर भी तो बनाते हैं। हँ? ऐसे तो नहीं कहेंगे शंकर का ही मन्दिर है। भले शिव शंकर को मिलाय देते हैं। उससे तो ये साबित होता है कि शंकर ने बहुत याद किया, इतना याद किया तो याद में लीन हो गया। लीन हो गया माना एकाकार हो गया। तो अगर मन्दिरों में विचार करो तो भी मन्दिर ऊँचे ते ऊँचा शिव का ही मानेंगे। एक तो ऊँचे स्थानों पर बनाते हैं। उससे साबित होता है कि हाँ, ऊँचा। दूसरे, ऊँची स्टेज के साथ-साथ करम भी ऊँची स्टेज के करते हैं।

A morning class dated 27.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the first page on Sunday was that stamps are prepared for those who are in degradation at this time and all the big personalities who have existed in the past. The Father sits and explains that the bestower of true salvation upon everyone is one. If at this time the end of the Iron Age has come, when it is tamopradhan Iron Age, when it is a world of sins, at this time if the Father does not come, then just as these people are diving in the hell, in the complete hell (raurav narak), they will continue to dive. At this time all those whose birthdays are being celebrated are diving in hell. None of them are out of it. All, whoever exists in the world. This is why the Father says that leave aside the topic of the entire world. Talk about your home. Which is your home? Hm? And which is the home of the entire world? Or is there any difference? Yes, our home is the one which is called Parambrahm. It is because there are many people with the name Brahma; four headed Brahma, five headed Brahma. And their heads are also different; so, among them, among the heads, the souls will also be different. So, they are numberwise mothers, aren’t they? The senior Father will have senior mothers.

So, it was told that all are in complete hell. You are the children of your mother, of Parambrahm; so you talk of your home. Understand that. By understanding the topic of your home it will strike the intellect that who all great persons have existed in the past in India? And who was the highest one to exist? When did he depart? Brother, it will be said that ShivBaba had existed. It was definitely Him. It is because that ShivBaba Himself is the purifier of the sinful ones (patit-paavan). Hm? Is Father Shiv patit-paavan or is ShivBaba patit-paavan? Hm? Is there any difference between ShivBaba and Father Shiv? Father Shiv is the Father of point-like souls. He does not have a body of His own at all. This is why He comes to this world stage when everyone is swimming in the complete hell. So, after coming to this world, this world is a stage, isn’t it? The actor who acts as the hero actor on this stage, and is revealed as a hero part in the beginning of every Age. He had come in the beginning of the Golden Age as well. So, He is famous in the form of ShivBaba. Temples are built in every village, every city in India. The memorial is formed in foreign countries as well and in the excavations that have been undertaken in the country and abroad, the memorials of the Shivling that is placed in the temple of Shiva are being found.

So, there are numerous temples of Shiv as well. Second page of the Vani dated 27.8.1967. And those temples are mostly built on high mountains. Why? Why this memorial? It is because He lives in a high stage. It is not as if He will go and sit on a mountain to purify the sinful ones. Temples are built on high pedestals. He is highest on high. Achcha, these residents of India (Bhaaratwaasis) have forgotten the Father. What? Bhaaratwaasis means those who live in the heart of Bhaarat; What? They are residents of which place? The same Bhaarat, who has been named Parambrahm. They are residents of Parambrahm, aren’t they? From where are the children born? They are born from the mother. So, he is the greatest of all Brahmas. Hm? These residents of India are his children. And they have forgotten. What? Have they forgotten or not? How does one know that they have forgotten? How does one know that they keep on forgetting? Hail the victory of Mother India. Hail the victory of Mother India. Arey, you keep on hailing the victory of Mother India. Where did the Father go? Arey, it is the married women who are worshipped, recognized in India. Widows are not recognized, respected. So, they have forgotten, haven’t they? That is why they do not speak about the Father’s topic. The same Father who makes Bhaarat the master of heaven who is given so much importance. How much importance? Hm? The memorial temples have been built in the entire world.

So, when He comes, He causes the true salvation of everyone. Hm? From where does He come? He is already a soul. He, Shiv does not have a body of His own. He will come only from the Soul World, will He not? And all the souls are His children. It is not as if only the human souls are His children. Yes, it is true that this human body possesses a mind. It can think and churn. Other living beings cannot think and churn to that extent because their intellect is inert. So, He will come in a human being only, will He not? So, when He comes in a human being, gives knowledge; what kind of knowledge does He give? Does He give in wholesale or in retail? He gives wholesale material. The one in whom He comes, thinks and churns that wholesale material and makes it elaborate. When he elaborates, then it will be understood by everyone. Otherwise, the topic of essence is not understood by everyone. So, when elaboration takes place, then just as the tree of this world expands, then all the 500-700 crore human souls of this world tree, be it those who play a little part, be it those who pass through the cycle of entire 84 births, everyone understands.

He is the bestower of true salvation (sadgati) upon everyone. What is meant by Sadgati? Hm? What is meant by durgati (degradation)? First the sadgati of the soul will be caused, will it not be? When the soul has undergone degradation, then we are in complete hell (raurav narak). When the soul undergoes true salvation, will the soul incline towards the abode of truth, remember the abode of truth, will it run towards the abode of truth or will it swim in the hell? Hm? It will go to the abode of truth, will it not? So, He comes and causes the true salvation of all those who have intellect, those who do not have intellect, those who have mind, those who do not have mind because all are living souls, aren’t they? Who is called living (chaitanya)? The one who speaks, walks is called living. If it does not produce any sound, hm, does not move, then it is a stone. It will keep lying at one place. So, He causes sadgati of everyone. If He does not cause everyone’s sadgati, then nothing happens. So, one should remember the One who causes everyone’s sadgati. And who will remember? First only they, who have a strong mind and intellect, will remember. Hm? One remembers through the mind only. So, there should be remembrance. And a photo is required to remember. So, if you prepare a stamp, then the stamp will spread all over the world, at least in the country where it has been prepared.

So, did you understand whose stamp should be prepared? So, nobody remembers Him. Preparing His stamp is a far-off proposition because there is no realization at all. They do not know [Him] at all. It is a very old topic, isn’t it? How old a topic is it? Hm? He, the heavenly God Father comes and establishes heaven, doesn’t He? So, it has been a long time since heaven existed. For half the time in this world there is heaven which God establishes by causing true salvation. And for half the time there is hell in this world. Just as there is night and day, isn’t it? They are half each. Half the the time day and half the time night. So, when there is night, then there is darkness. Darkness of what? Darkness of ignorance. Which ignorance? Everyone starts forgetting the Father. Nobody remembers as to what the Father is? Well, if they prepare this stamp of the highest on high ShivBaba, then everyone will remember, see because there is no knowledge. Yet, the ling that is sculpted on the path of Bhakti is a memorial, isn’t it? And the maximum memorials are in His temples. He is the highest on high soul whose memorial is formed, isn’t He? Shiv’s temple is also built. Hm? It will not be said that it is Shankar’s temple only. Although they mix up Shiv and Shankar. It proves that Shankar remembered a lot, he remembered so much that he became immersed in remembrance. He was immersed means that he became one with Him. So, if you ponder, among the temples, the highest on high temple will be considered to be the temple of Shiv only. Firstly, it is built on high places. It proves that yes, He is high. Secondly, along with a high stage, the actions that He performs are also in a high stage.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 19 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2631, दिनांक 05.09.2018
VCD 2631, Dated 05.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated 27.8.1967
VCD-2631-extracts-Bilingual

समय- 00.01-15.45
Time- 00.01-15.45


प्रातः क्लास चल रहा था - 27.8.1967. रविवार को दूसरे पेज के मध्य में बात चल रही थी - शिव का यादगार मन्दिर है। और सबसे जास्ती तादाद में है। भारत में भी, दुनिया में भी। और कोई दूसरे का तो मन्दिर इतना तादाद में नहीं है। और फिर भी भारतवासियों में भले कोई बुद्धि नहीं है, पत्थरबुद्धि हैं, तो उनको तो ये पता ही नहीं पड़ता शिव कौन है, सोमनाथ कौन है, बबूलनाथ कौन है। अब नाम अलग-अलग हैं तो काम भी ऐसे किये होंगे ना। हँ? सोमनाथ जो काम करेगा वो काम शिव करेगा क्या? हँ? शिव इस सृष्टि पर आकरके, वो तो आत्मिक स्थिति से देखा जाए तो वो तो सबसे ऊँची आत्मा है। परमपुरुष है। और वो परमपुरुष निराकार ही है और सदा निराकार है। और पुरुषों के मुकाबले, आत्माओं के मुकाबले ज्यादा शक्तिशाली है, सर्वशक्तिवान कहा जाता है या कम शक्तिशाली है? तो ज्यादा सूक्ष्म होगा या स्थूल होगा? ज्यादा ही सूक्ष्म होगा ना। तो अति सूक्ष्म को और स्थूल को, किसको याद करने में सहज होता है, किसको याद करने में बहुत कठिन होता है? हँ? स्थूल को याद करने में सहज हो जाता है। क्योंकि देह स्थूल है और जन्म-जन्मान्तर द्वापरयुग से, जबसे ये देहधारी धरमपिताएं आए, तो देह को, और देह की स्थूल कर्मेन्द्रियों को ही याद करते आए। तो टेव पड़ी हुई है। आदत पड़ी हुई है स्थूल को, बड़े रूप को याद करने की।

तो शिव बाप जब आते हैं निराकार इस सृष्टि पर तो किसको ढूंढेंगे? हँ? किसको निमित्त बनाएंगे? सृष्टि रूपी रंगमंच पर एक को निमित्त बनाएंगे या प्रजातंत्र शासन चलाएंगे ढ़ेर के ढ़ेर? हँ? एक को ही निमित्त बनाएंगे ना। हँ? जैसे जंगल का राजा शेर होता है। और प्राणी तो उसके मुकाबले इतने ताकतवर नहीं होते। तो शेर बच्चे तो बहुत पैदा करता है। लेकिन उनमें शेर एक ही होता है कि ढ़ेर होते हैं? एक ही शेर होता है। ऐसे ही शिव बाप आते हैं तो इस सृष्टि पर आत्मा का ज्ञान तो देते हैं लेकिन उनको तो पता है ना कि इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर कौनसी आत्मा आत्मिक स्टेज में ज्यादा से ज्यादा जन्म तक रही। उसी आत्मा को निमित्त बनाएंगे। और वो ही ज्यादा से ज्यादा लम्बे समय तक रंगमंच पर चार युगों में आत्मिक स्टेज में टिकेगी जो शूटिंग पीरियड में टिकी होगी कि दूसरी हो जाएगी? दूसरी नहीं होगी। तो वो उसी में परमानेन्टली कहो, मुकर्रर रूप से कहो प्रवेश करता है। फिर भी पार्शलिटी नहीं करता। क्या? वो बोलता है कि ऐसे नहीं कि मैंने मुकर्रर रूप से किसी रथ में प्रवेश कर लिया तो मैंने पार्शलिटी कर दी, नहीं, कि मेरे प्रवेश करने के कारण वो ज्यादा याद आएगा। नहीं। नियम बताय दिया। क्या नियम बताया? तुम मुझे जितना याद करेंगे उतना मैं तुम्हारे साथ रहूंगा। क्या? याद नहीं करेंगे तो तुम्हारे साथ नहीं हूँ।

तो याद करने वाले तो नंबरवार होते हैं। और नंबरवार क्यों बनते हैं? हँ? नंबरवार बनने का कारण क्या? वो ही शूटिंग पीरियड। शूटिंग पीरियड में जिन्होंने वो अव्वल नंबर को जास्ती याद किया, जास्ती संग लिया जन्म-जन्मान्तर, तो उनको ज्यादा याद रहेगा, कम याद रहेगा? उनको ज्यादा याद रहेगा। चलो वो तो उसके फालोअर्स की बात हुई। उसकी क्या बात हुई? हँ? उसको ये आत्मिक स्थिति में ज्यादा टिकना क्यों होता है? बिना कारण के? कोई कारण होगा? क्या कारण? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) अरे, मुकर्रर रथ है, वो तो बता दिया तुम जितना याद करोगे उतना ही मैं तुम्हारे साथ हूँ। उतना ही संग का रंग लगेगा। क्या? हँ? हाँ, तेरी बुद्धि में बाबा कहने से बिन्दी ही याद आवेगी। तो तेरी जिसको कहा उसको कैसे पता चलेगा कि मेरी? हँ? ब्रह्मा के तन में आके वेदवाणी चलाई, हँ, गीता ज्ञान दिया, तो कोई एक को कैसे मालूम पड़ जाएगा कि तेरी शब्द मेरे ही लिए बोला? सुनने वाले तो ढ़ेर बैठे हैं। हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) सदा कायम एक शिवबाबा। तो उसे पता चलेगा कि मैं ही शिवबाबा हूँ इस सृष्टि पर सदा कायम? उसे कैसे पता चल जाएगा? वो इसलिए कि आत्मिक स्थिति में ज्यादा इसलिए टिकती है, कारण ये हुआ कि जो आत्मा इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर आलराउंड पार्ट बजाएगी वो ही तो पावरफुल बनेगी। और पावरफुल उतनी ही बनेगी जितना सूक्ष्म स्टेज वाली होगी। क्या? कम सूक्ष्म स्टेज वाली तो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर कम टिकेगी। ज्यादा पावर वाली है बैटरी, जैसे बैटरी होती है ना। छोटी भी होती है। लेकिन पावर? अब नहीं होती है? छोटी बैटरी में भी कोई में बड़ी-बड़ी पावर होती है। कोई बड़ा सैल होता है उतनी पावर वाला, देखने में बड़ा लग रहा है, पावर वाला नहीं है। तो जो जितना सूक्ष्म होता है उसको ज्यादा पावरफुल कहेंगे ना। और सूक्ष्म उतना ही आत्मा बनेगी जितना आत्माओं के बाप को जो सूक्ष्मातिसूक्ष्म है उसको याद करेगी।

तो बताया कि बबूलनाथ अलग नाम, बड़े ते बड़े कांटे बनते हैं, दुखदायी कांटे बनते हैं, उनको नाथने वाला। और शिव अलग नाम। शिव किसको नाथता है? बड़े से बड़े कांटे को नहीं नाथता? हँ? लेकिन वो अनेक जन्मों में बड़े से बड़ा कांटा रहता है कि एक जनम में ही आके बनता है? हँ? और एक जनम में भी आके तब बनता है लास्ट जनम में बनता है। वो भी तब बनता है जब संग का रंग लेते-3 लास्ट में आकरके शिव बाप जब आते हैं, और आने का उनका हिसाब ये बता दिया दिव्य जन्म का कि औरों के आत्माओं के मुकाबले उनका दिव्य जन्म कैसा है? और आत्माएं जो प्रवेश करती हैं भूत-प्रेत वगैरा भी प्रवेश करते हैं, या आत्मा गर्भ में भी प्रवेश करती है, तो प्रवेश करने का उनका तरीका अलग है सबसे। क्या? माता के गर्भ में आत्मा प्रवेश करती है तो माता को तो पता चलता है। और शिव आते हैं तो? हँ? किसी को पता नहीं चलता। इसलिए जब शिव आया उस मुकर्रर रथ में तो उसको भी, उसको भी पता नहीं चलता। जब पता ही नहीं चलता तो पुरानी परंपराएं जो चली आ रही हैं समाज में, दुनिया में; क्या? क्या परंपरा चली आ रही है? कि भगवान सर्वव्यापी है। क्या? मेरे में है, तेरे में है। अब जो ज्यादा तपस्या करेगा, ज्यादा पुरुषार्थी होगा, मेहनत ज्यादा करेगा तो वो ही शिवोहम् हो गए, जो सबको पढ़ाई पढ़ाय सकें। तो अब ये तो शास्त्रों के पढ़ने की बात हुई। जिन्होंने जितने शास्त्रों का अध्ययन किया होगा, तो सबको बुद्धू बनाय लेते हैं। कम अध्ययन किया होगा तो कम बुद्धू बना पाएंगे।

तो बताया कि शिव बाप प्रवेश करते हैं तो वो, वो ही बात; क्या? उसको पता ही नहीं चलता। तो पता ही नहीं चलता तो शिवोहम बनके बैठेगा कि नहीं? जब ढ़ेर के ढ़ेर हुजूम के हुजूम इकट्ठे हो जाएंगे, सैंकड़ों की तादाद में तो वो अपने को शिव समझ करके पतितों को, तमोप्रधान को सतोप्रधान बनाने के लिए संग का रंग दिलाने के लिए अपना पुरुषार्थ करेगा कि नहीं? और ये समझेगा कि मैं सच्चा काम कर रहा हूँ कि झूठा काम कर रहा हूँ? हँ? सच्चा ही, सच्चा ही समझ के करेगा ना। तो उस समय की बात नहीं है। बात तबकी है जब उसे आत्मा का परिचय मिलता है और बाप का भी परिचय मिलता है कि इस मनुष्य सृष्टि में जो भी पार्टधारी आत्माएं हैं, चारों सीन में या कोई एक सीन में या कम या ज्यादा, तो वो सब पार्टधारी आत्माएं बिन्दु हैं। और उन बिन्दु का बाप भी बिन्दु। चींटी का बाप चींटी जैसा। हाथी का बाप हाथी जैसा डौल-डील वाला। सांप का बाप? सांप जैसा लंबा-लंबा। तो आत्मा बिन्दु है तो बिन्दु आत्मा का बाप भी बिन्दु जैसा।

तो माताओं में भक्ति भावना ज्यादा होती है, खास करके भारत की माताओं में, तो वो परंपरा प्राचीन काल से चल गई ऋषियों-मुनियों ने बनाय दी; क्या? जो गीता में लिखा हुआ है - भ्रुवोर्मध्येप्राणमावेश्यसम्यक। (गीता 8/10) भृकुटि के बीच में आत्मा को याद करो। प्राणी को याद करो। तो जो परंपरा डाल दी कि भृकुटि के बीच में ज्योतिबिन्दु आत्मा रहती है तो माताएं तो पक्की हैं आज तक भी। क्या करती हैं? हँ? भृकुटि में बिन्दु लगाती हैं। अभी तो विदेशियों का प्रभाव पड़ गया, हँ, तो खान-पान, रहन-सहन, सब कुछ बदल गया भारतवासियों में। क्योंकि भारतवासी कन्वर्ट भी तो जल्दी होते हैं संग के रंग में। तो अभी तो, कोई-कोई तो अभी भी लगाती हैं। लगाती हैं कि नहीं? देखा है? हँ? दुनिया में खास करके भारत में कोई-कोई माताएं आज भी बिन्दी लगाती हैं। पता नहीं है इसीलिए बड़ा बिन्दा भी लगा लेती हैं। तो बाप आके बताते हैं - बच्चे, तुम ज्योतिबिन्दु आत्मा हो। तो दूसरा कोई तुम्हें देखे तो उसे तुम्हारी भृकुटि में बिन्दु याद पड़े। तो अच्छा ही है ना। तो डायरेक्शन दे दिया कि छोटा सा स्टार सफेद वाला बिन्दी लगानी चाहिए।

A morning class dated 27.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the middle of the second page on Sunday was - There is a memorial temple of Shiv. And its number is maximum. In India and in the world as well. Temples of no one else are in such large numbers. And yet the intellect of the residents of India is not aware; they have a stone-like intellect; so, they do not understand as to who is Shiv, who is Somnath, who is Baboolnath. Well, the names are different; so, the tasks performed will also be accordingly, will they not be? Hm? Will Shiv perform the task that Somnath performs? Hm? Shiv comes to this world; if you look from the point of view of soul consciousness, then He is the highest soul. He is the Parampurush (highest soul). And that Parampurush is incorporeal only and is forever incorporeal. When compared to other souls, when compared to souls, is He more powerful, is He called Almighty or is He less powerful? So, will He be subtler or physical? He will be subtler, will He not be? So, among the subtlest one and the physical one, who is easier to remember and who is very difficult to remember? Hm? It is easier to remember the physical one. It is because the body is physical and birth by birth, from the Copper Age, ever since these bodily founders of religions have come, you have been remembering the body and the physical organs of action of the body. So, there is a habit. There is a habit to remember the physical, the big form.

So, when the incorporeal Father Shiv comes to this world, whom will He search? Hm? Whom will He make instrumental? Will He make one as instrumental on the world stage or will He start a democratic rule of numerous persons? Hm? He will make only one person instrumental, will He not? Hm? For example, there is lion, the king of the forest. Other living beings are not as powerful as it. Lion does give birth to many young ones, but among them is lion only one or numerous? There is only one lion. Similarly, when Father Shiv comes to this world, then He does give the knowledge of the soul, but He knows that which soul has been in more soul conscious stage on this world stage for more number of births. He will make that soul itself instrumental. And will the one who has become constant in soul conscious stage in the shooting period become constant in the soul conscious stage for the maximum period on this stage in the four Ages or will anyone else become constant? The other ones will not become constant. So, He enters in him only permanently, in a permanent manner. However, He does not show partiality. What? He says that it is not as if when I entered in a Chariot in a permanent manner I showed partiality, no, that because of My entry, He will come to his mind more. No. A rule has been told. Which rule was mentioned? The more you remember Me, the more I will be with you. What? If you don't remember Me, I am not with you.

So, those who remember are numberwise. And why do they become numberwise? Hm? What is the reason for becoming numberwise? The same shooting period. Those who have remembered the number one more during the shooting period, the more they have remained in his company birth by birth, will they remember more or will they remember less? They will remember more. Okay, that is about the followers. What about him? Hm? Why does he have to become more constant in soul conscious stage? Without reason? Will there be any reason? What reason? Hm? (Someone said something.) Arey, he is the permanent Chariot; for that it has already been told that the more you remember [Me], the more I am with you. The more colour of company will be applied. What? Hm? Yes, a point alone will come to your intellect when you utter Baba. So, the one who was called 'you', how will he know 'mine'? Hm? When He came in the body of Brahma and narrated Vedvani, hm, gave the knowledge of the Gita, then how will one person know that the word 'you' was uttered for me only? There are numerous persons sitting to listen. Hm?
(Someone said something.) One ShivBaba is permanent (sadaa kaayam). So, will he know that I alone am the ShivBaba who is permanent in this world? How will he know? That is because he becomes constant in the soul conscious stage more because the reason is that the soul which plays an allround part on this world stage will only become powerful. And it will become powerful to the extent it develops a subtle stage. What? If it is in a lesser subtle stage, then it will become constant in this world stage to a lesser extent. If the battery has more power; for example, there are batteries, aren't there? There are small ones also. But power? Doesn't it have now? Even in case of small batteries, some have huge power. There may be a big cell with corresponding power; it appears to be big, but it does not have that much power. So, the subtler something is, the more powerful it will be called, will it not be? And a soul will become subtle to the extent it remembers the subtlest Father of souls.

So, it was told that Baboolnath is a different name, the one who controls those who become the biggest thorns, sorrow-giving thorns. And the name Shiv is different. Whom does Shiv control? Doesn't He control the biggest thorn? Hm? But does he remain a biggest thorn in many births or does he become in one birth? Hm? And he becomes in the one birth in the last birth. That too he becomes [the biggest thorn] when while getting coloured by the company [of many], in the last; when Father Shiv comes and the account of His arrival, of His divine birth has been mentioned that when compared to other souls, what kind of a divine birth does He get? Other souls which enter; ghosts and devils also enter or the soul enters in the womb also; so, His method of entry is different from all others. What? When the soul enters in the womb of a mother, then the mother gets to know. And when Shiv comes? Hm? Nobody gets to know. This is why when Shiv came in that permanent Chariot, then he too, he too doesn't come to know. When he doesn't come to know at all, then the old traditions that have been continuing in the society, in the world; what? Which tradition has been continuing? That God is omnipresent. What? He is in Me, He is in You. Well, the one who does more tapasya (penance), the one who is more purusharthi, the one who works harder becomes Shivohum, who could teach the knowledge to everyone. So, well, this is a topic about reading the scriptures. The more scriptures someone has studied, the more fools they make everyone. The lesser they have studied, the lesser fools they can make.

So, it was told that when Father Shiv enters, it is the same case; what? He does not get to know. So, when he does not come to know at all, then will he sit as 'Shivohum' (I am Shiv) or not? When large crowds gather in hundreds, then he will consider himself to be Shiv and will he make purusharth to apply the colour of his company to transform the sinful ones, tamopradhan souls to satopradhan or not? And will he think that I am performing a true task or false task? Hm? He will do it considering it to be true task only, will he not? So, it is not about that time. It is about that time when he gets the introduction of the soul and the introduction of the Father also that all the actor souls in this human world, in all the four scenes or in any one scene or less or more, then all those actor souls are points. And the Father of those points is also a point. The Father of an ant is like an ant. Father of an elephant has a [huge] body like an elephant. Snake's Father? It is long like a snake. So, when the soul is a point, then the Father of the point like soul is also like a point.

So, there is more Bhakti (devotion) and feeling in mothers, especially in the mothers of India; so, that tradition started from the ancient times; the sages and saints started it; what? It has been written in the Gita - Bhruvormadhyapraanamaaveshyasamyak. (Gita 8/10) Remember the soul in the middle of the two eyebrows (bhrikuti). Remember the living being. So, the tradition was started that the point of light soul lives in the middle of the bhrikuti, so, the mothers are firm even to this date. What do they do? Hm? They apply a bindu in the bhrikuti. Now there is a influence of the foreigners, hm, so, the eating and living habits and everything has changed among the residents of India. It is because the residents of India convert faster in the colour of company. So, now, some apply even now. Do they apply or not? Have you seen? Hm? In the world, especially in India some mothers apply a bindi even today. They do not know; that is why they apply a big bindi also. So, the Father comes and tells - children, you are point of light souls. So, if anyone else sees you, he should remember the point in your bhrikuti. So, it is good, is not it? So, a direction was given that you should apply a small star, a white point [on your forehead in the middle of the two eyebrows].

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 22 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2632, दिनांक 06.09.2018
VCD 2632, Dated 06.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated 27.8.1967
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समय- 00.01-14.16
Time- 00.01-14.16


प्रातः क्लास चल रहा था - 27.8.1967. रविवार को दूसरे पेज में मध्यादि में बात चल रही थी - याद है क्या प्रसंग चल रहा था? कुछ याद नहीं। शिव कौन है? सोमनाथ कौन है? बबूलनाथ कौन है? ये बात भी उन दुनियावालों को पता नहीं है। तुमको तो पता है, वो भी नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार। हँ? तुम्हारे में भी दो प्रकार के ब्राह्मण हैं। एक तो बेसिक नॉलेज लेने वाले बच्चाबुद्धि ब्रह्मा के बच्चाबुद्धि बच्चे। उनसे पूछा जाए शिव कौन है? क्या जवाब देंगे? बिन्दी। अच्छा! बिन्दी है! शिव बिन्दी है तो क्या करती है? फुदुक-फुदुक करती रहती है? हँ? फुदुक-फुदुक के क्या काम करेगी? कहते हैं ब्रह्मा बाबा को साक्षात्कार कराती है। अच्छा? ब्रह्मा बाबा के सामने फुदुक-फुदुक करे तब साक्षात्कार होता है क्या? साक्षात्कार तो तुलसीदास को भी हुए, रैदास को भी हुए, मीरा को भी हुए, सूरदास को भी हुए। तो क्या उनको भी बिन्दी ने फुदुक-फुदुक के साक्षात्कार कराए क्या? नहीं। और साक्षात्कार कराने का अर्थ ये लगा लिया उन बच्चाबुद्धि ब्राह्मणों ने कि साक्षात्कार कराए माना शिव प्रवेश हो गया। अरे, शिव प्रवेश हो गया तो फिर साक्षात्कारों का अर्थ पूछने के लिए अपने दैहिक गुरु के पास क्यों डोलना? वाराणसी में विद्वान, पण्डित, आचार्यों के क्यों चक्कर लगाना?

तो ऐसे नहीं है कि शिव बिन्दी ही है और सदा बिन्दी है। नहीं। वो तो ये जो बेहद का सृष्टि में ड्रामा चलता है ना 4 सीन का सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग का, इस ड्रामाबाजी का एम.डी. है। एम.डी. तो जानते ही हैं ना। मैनेजिंग डायरेक्टर। तो वो, वो मैनेजिंग डायरेक्टर ज्यादा काम करता है कि डायरेक्टर ज्यादा काम करता है? हँ? ज्यादा माथामारी कौन करता है? ज्यादा दिमाग किसको होता है? एम.डी. को ज्यादा दिमाग होता है। तो वो दिमागी काम करेगा या भागदौड़ का काम करेगा? हँ? दिमागी काम काया (किया) करता है। डायरेक्शन देता है तो वाचा का काम करेगा।

तो वो शिव चारों युगों के इस ब्रॉड ड्रामा में इस सृष्टि पर नहीं आता है। क्या? कि लगातार इस सृष्टि पर कोई सर्वव्यापी होके काम करता होगा। नहीं। वो तो सिर्फ आता है कलियुग के अंत में जबकि पहले सीन सतयुग की आदि होने वाली होती है। नई दुनिया के आदि में और पुरानी दुनिया के अंत में। जैसे और धरमपिताएं आते हैं तो सौ वर्ष के अंदर अपना पूरा काम करते हैं। अपना धर्म स्थापन करते हैं। फिर शरीर छोड़ देते हैं। ऐसे ही हुआ ना हिस्ट्री में। तो ऐसे ही ये तो इन धरमपिताओं का भी जो बाप है, पुराने ते पुराना इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर, जिसको वो धरमपिताएं मानते भी हैं, आदम को याद करते हैं, बाबा आदम, हँ, तो वो, वो तो हुआ उनका बाप। पुराना हो गया ना। बाप तो पुराना ही होता है।

तो ये जो धरमपिताएं बाप हैं, उनका भी बाप है आदम जिसको मुसलमान आदम कहते हैं तो क्रिश्चियन एडम कहते हैं। भारत में उसे आदि देव कहते हैं। और जैनी लोग आदिनाथ कहते हैं। लेकिन जैनी लोग ये समझते हैं कि जो पुरुषार्थ करता है एकाग्रता का वो ही भगवान बन जाता है। तो उन्होंने 24-24 तीर्थंकर दिखाय दिये। अब जैन का तो मतलब ही है जिन्न की औलाद। जिन्न माने जिसने कर्मेन्द्रियों को, मन को जीत लिया। तो जिन्न अलग बात और उनको फालो करने वाले जैन अलग बात हुई। तो जैनी लोग ये समझते हैं कि हम जैनियों में से जो पुरुषार्थ करेगा मन-बुद्धि को एकाग्र करने का वो ही भगवान बन सकता है। अभी तक उन्होंने बताया कि आज से, ढ़ाई हज़ार, लगभग ढ़ाई हज़ार वर्ष पहले, ऐसे समझ लो कुछ कम महावीर तक अंतिम 24वें तीर्थंकर हुए। अब उनके अनुसार इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर छह सीन माने जाते हैं। जैसे भारत में हिन्दू लोग चार सीन मानते हैं - सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग। तो उनका कहना है कि अंतिम सीन में वो अंतिम जो वो तीर्थंकर हैं, वो चौबीसवें हैं। अब ऐसे तो है नहीं कि जैसे हिन्दुओं ने भी चौबीस अवतार मान लिए। ज्यादा में ज्यादा बताते हैं चौबीस और कम से कम बताते हैं दस अवतार।

तो अब सवाल ये है कि ये सृष्टि रूपी रंगमंच की ड्रामाबाजी करने के लिए वो ब्रॉड ड्रामा में जो मैनेजिंग डायरेक्टर है उसको बार-बार आने की क्या दरकार? हँ? कोई कारखाना है बड़ा। ये सृष्टि भी एक तरह का कारखाना समझ लो सुख-दुःख का। तो इस कारखाने को चलाने के लिए जो मुखिया है डायरेक्टर, वो 24 घंटे वर्कर्स के ऊपर चढ़ा रहे वो अच्छा या एक बार इंतजाम कर दे और उस कायदे कानून पर सारे चलते रहें, वो ज्यादा अच्छा? जैसे कुम्हार होता है ना। चाक होता है बर्तन बनाने का। वो तो मिट्टी के बर्तन हैं। इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर तो ये चैतन्य बर्तन हैं ना पात्र। सिनेमा में उनको क्या कहते हैं? पात्र। एक्टर्स। तो वो बर्तन बनाता है तो एक बार डंडा चाक में लगाया, बस, चाक घूमना शुरू कर देता है। और बहुत देर तक घूमता रहता है। जोर से डंडा लगाता है। धीरे-धीरे लगाना शुरू करता है, फिर जोर से लगाता है। तो ऐसे ही ये मैनेजिंग डायरेक्टर है इस सृष्टि रूपी रंगमंच का। वो इस सृष्टि पर कलियुग के अंत में आता है तो पहले-पहले ज्ञान का डंडा धीरे-धीरे लगाता है। हँ? और फिर अंत में तेजी से घुमाता है। उसका मतलब? पहले ज्ञान के हलके-हलके प्वाइंट फिर उसके बाद ज्ञान के तीखे-तीखे प्वाइंट क्लीयर करता है। ऐसे तीखे-तीखे प्वाइंट क्लीयर करता है कि जो भारत का आस्तिक, संपूर्ण आस्तिक समझो कोई धरम है तो सिक्ख धरम की आत्माएं भी जग जाती हैं। क्या? कब जगती हैं वो? जब सूरज, ज्ञान सूर्य मैनेजिंग डायरेक्टर बड़ी तेजी से चमकता है एक दम सर के ऊपर आकर, तो वो भी जग जाती हैं। हँ, लास्ट; क्या? कलियुग में गुरु नानक हुए ना।

तो वो मैनेजिंग डायरेक्टर कौन है इस सृष्टि का? वो मैनेजिंग डायरेक्टर है जो जन्म-मरण के चक्र में, इस सृष्टि में नहीं आता है। क्या? इस सृष्टि रूपी रंगमंच का जो ब्रॉड ड्रामा है चार सीन का उसमें नहीं आता है पूरे में बल्कि उसके चौथे सीन का जो अंतिम हिस्सा है उस अंतिम हिस्से में 100 साल के लिए इस सृष्टि पर आता है। कहाँ से आता है? वहाँ से आता है जहाँ पार्ट बजाने वाले एक्टर्स अपने घर में रहते हैं। भले नंगे होके रहें। फ्री। लेकिन वो आत्माएं जिनको शरीर रूपी कपड़ा उतर जाता है, वो आत्माएं उनका धाम है सतधाम। आत्मलोक। सोलवर्ल्ड। मुसलमान उसको कहते हैं अर्श। खुदा, पहले कहते थे - खुदा अर्श में रहता है, फर्श में नहीं रहता। फर्श माने ये दुनिया। जमीन। तो वो फिर आता है इस सृष्टि पर जो जन्म-मरण के चक्र में नहीं आता। और सब आत्माएं जो भी सतधाम की रहने वाली हैं, आत्मलोक की रहने वाली हैं, इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर, वो सुप्रीम एबोड से उतरकरके नंबरवार सृष्टि रूपी रंगमंच पार्ट बजाती हैं। ड्रामा है ना। कोई का तो पार्ट आदि से लेकर अंत तक होता है। उसको कहते हैं हीरो पार्टधारी। कोई का पार्ट बीच में से होता है। माने कोई-कोई आत्माएं सतयुग में आती हैं, कोई त्रेता में आती हैं, कोई द्वापर में आती हैं, कोई कलियुग में उतरती हैं, कलियुग के लास्ट तक उतरती रहती हैं।

A morning class dated 2.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the second page was; do you remember the context? Who is Shiv? Who is Somnath? Who is Baboolnath? Those people of the world do not know even this. You know; that too numberwise, as per your purusharth. Hm? Even among you there are two kinds of Brahmins. One is the children of Brahma having a child-like intellect, who have a child like intellect and obtain the basic knowledge. If they are asked - Who is Shiv? What reply would they give? Point. Achcha! Is He a point? If Shiv is a point what does it do? Does it keep on jumping? Hm? Will it jump and perform its task? They say that it causes visions to Brahma Baba. Achcha? Does Brahma Baba have visions if it jumps in front of him? Even Tulsidas, Raidas, Meera, Soordas had visions. So, did the point jump in front of them to cause visions? No. And the meaning of causing the visions was interpreted by those Brahmins with child-like intellect to mean that Shiv entered in him. Arey, if Shiv entered [in him], then why did he wander to meet his bodily gurus to seek the meanings of his visions? Why did he visit scholars, pundits, acharyas in Varanasi?

It is not as if Shiv is only a point and forever a point. No. He is the MD of dramatics of this unlimited drama that is enacted in the world consisting of four scenes of Golden Age, Silver Age, Copper Age, and Iron Age. You know what is meant by MD, don't you? Managing Director. So, does that Managing Director work more or does the Director work more? Hm? Who uses his brain more? Who is more intelligent? MD is more intelligent. So, will he perform the intellectual tasks or will he perform the task of running here and there? Hm? He performs more intellectual tasks. He gives directions. So, he will work through words.

So, that Shiv does not come to this world in this broad drama of four Ages. What? That He works as an omnipresent being in this world continuously. No. He just comes in the end of the Iron Age when the first scene of the Golden Age is to begin. In the beginning of the new world and in the end of the old world. Just as other founders of religions come and complete their tasks within hundred years. They establish their religion. Then they leave their body. Similar thing happened in the history. So, similarly, the Father of these founders of religions, the oldest one on this world stage, whom those founders of religions also believe, they remember Aadam, Baba Aadam, hm, so, he is their Father. He is old, is not he? The Father is old only.

So, Aadam, whom Muslims call Aadam, Christians call Adam is the Father of even these founders of religions, who are fathers. In India he is called Aadi Dev. And Jains call him Aadinath. But Jains think that the one who performs the task of concentration becomes God. So, they have shown 24 Teerthankars. Well, Jain means the child of Jinn. Jinn means the one who conquered his organs of action, conquered his mind. So, Jinn is a different thing and the Jains who follow him are different. So, Jain people think that the one among us Jains who does purusharth to concentrate his mind and intellect can become God. Till now they have told that the last 24th Teerthankar Mahaveer existed 2500 years ago, about 2500 years ago or may be a little less. Well, according to them, there are supposed to be six scenes on this world stage. For example, in India, Hindus believe in four scenes - Satyug, Treta, Dwapar, Kaliyug. So, they (the Jains) believe that the last Teerthankar in the last scene is the twenty fourth one. Well, it is not like the Hindus who also believed in 24 incarnations (avatars). At the most they describe 24 and at least ten.

So, now the question is that why does that Managing Director have to come again and again in the broad drama to enact the drama on this world stage? Hm? Suppose there is a big factory. Consider this world also to be a factory of happiness and sorrows. So, in order to run this factory, is it better if the head, the Director monitors the workers personally 24 hours a day or is it better if he makes arrangements once and everyone keeps on following that rule and law? For example, there is a potter. There is a potter's wheel (chaak) to mould the utensils. They are utensils made up of clay. These actors (paatra) are living utensils on this world stage, aren't they? What are they called in the cinema? Paatra. Actors. So, when he makes the utensils, then he rotates the wheel with his stick once and that's it; the wheel starts rotating. And it keeps on rotating for a long time. He hits the stick strongly. Initially he starts hitting it slowly and then he hits it strongly. So, similar is this Managing Director of this world stage. When He comes in the end of the Iron Age to this world He initially hits His stick of knowledge gradually. Hm? And then He rotates it quickly in the end. What does it mean? Initially He gives lighter points of knowledge and then He makes the sharper points of knowledge clear. He makes such sharp points clear that even the theist, completely theist religion of India, the souls of Sikh religion also awaken. What? When do they awaken? When the Sun, the Sun of Knowledge, the Managing Director shines very sharply by coming right above the head, then they also wake up. Hm; last; what? Guru Nanak had been in the Iron Age, hadn't he?

So, who’s that Managing Director of this world? The one who does not pass through the cycle of birth and death in this world is the Managing Director. What? He does not come in the broad drama consisting of the four scenes on this world stage; rather He comes to this world for 100 years in the last part of the fourth scene. From where does He come? He comes from the place where the actors playing their part remain at their home. They may remain naked. Free. But those souls, who have shed their body like cloth, the abode of those souls is the Satdhaam (abode of truth), aatmalok, Soul World. Muslims call it Arsh. They used to say earlier that Khuda lives in Arsh (heavenly abode), does not live on farsh (Earth). Farsh means this world. Land. So, then the one who does not pass through the cycle of birth and death comes to this world. All other souls which are residents of the Satdhaam, aatmalok, descend from the Supreme Abode to this world stage numberwise and play their parts on this world stage. It is a drama, isn’t it? The part (role) of someone is from the beginning to the end. He is called hero actor. The part of someone is from the middle. It means that some souls come in the Golden Age, some in the Silver Age, some in the Copper Age, some descend in the Iron Age; they keep on descending till the last part of the Iron Age.

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 24 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba's Murli
वीसीडी 2633, दिनांक 07.09.2018
VCD 2633, Dated 07.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated 27.8.1967
VCD-2633-extracts-Bilingual

समय- 00.01-20.22
Time- 00.01-20.22


प्रातः क्लास चल रहा था - 27.8.1967. रविवार को दूसरे पेज के मध्यादि में बात चल रही थी - शिव कौन है? उससे भी पहले पूछा था – सोमनाथ कौन है? बबूलनाथ कौन है? कोई के आक्यूपेशन को नहीं जानते हैं। बस, पूजा करते हैं। अरे, उन्होंने क्या किया, उनकी क्यों मूर्ति बनाते हैं? क्यों मन्दिर बनाते हैं, क्यों पूजा करते हैं? क्यों इतनी भक्ति भावना दिखाते हैं? इससे कोई मतलब नहीं वो क्या करते थे? बस। क्यों ऐसे करते हैं? क्योंकि भक्ति भी तमोप्रधान हो जाती है। सब तमोप्रधान। कलियुग के अंत में तो तमोप्रधानता ही हो जाती है ना। कोई सतयुग तो है नहीं, जो सतोप्रधानता आनी है। जिसकी भी पूजा करते हैं, हँ, सब इस दुनिया में जो भी, कोई भी धरम वाले हों; मान लो क्राइस्ट की पूजा करते हैं, चित्र टांगते हैं, हँ, जिसका चित्र टांगा जाता है वो तो याद करने के लिए ही टांगा जाता है, महिमा करने के लिए टांगा जाता है। तो ये भी नहीं जानते हैं। ये जो चित्र टांगा हुआ है ये कौनसी आत्मा का चित्र है? हँ? जानते हैं? चित्र किस आत्मा का है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) क्राइस्ट का जो चित्र है, वो शिवबाबा का चित्र है? हत् तुम्हारा। हँ? (किसी ने कुछ कहा।) भारतवासी का चित्र? अरे, भारतवासी तो 33 करोड़ देवताएं भी भारतवासी ही तो कहे जाते हैं। हँ? भले दुनिया में कहीं भी जाके किसी कोने में पार्ट बजाएं कलियुग के अंत में उनकी बुद्धि तो भारत में ही धरी रहती है। तो दिल और दिमाग भारत में रखा है तो भारतवासी हुए ना।

(किसी ने कुछ कहा।) जीसिस? अच्छा? तो जीसिस का जो चेहरा है वो वास्तव में किस आत्मा का चेहरा है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) अरे, जड़ें तो ढ़ेर सारी होती हैं, ऐसे कैसे पता चलेगा कौनसी जड़, कौनसा आधार? हँ? क्रिश्चियन धर्म के बीज रूप में प्रवेश करती है क्राइस्ट की आत्मा? हँ? हाँ, वो भी तो बता दिया ना जड़ में प्रवेश करती है आधारमूर्तों में प्रवेश करती है। वृक्ष की आधार तो जड़ें ही होती हैं ना। हँ? तो ढ़ेर जड़ें होती हैं। कौनसी जड़? (किसी ने कुछ कहा।) लो! बाबा कहते हैं वो तो भगत है, वो तो पता ही नहीं किसकी पूजा करते हैं? हँ? वो कहते हैं हमें ज्ञान मिल गया, भगवान ज्ञान देते हैं। (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, जो सतयुग का बुद्ध के बाद आने वाला नारायण है ना। बुद्ध का जो आधार बनता है ना उसके बाद जो नारायण आता है, है ना, चौथे नंबर का, बताओ, वो ही आधार हुई ना। वो ही जन्म लेते-लेते जब आज से 2000 साल पहले इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर जीसस नाम से उसने जन्म लिया। और उसमें क्राइस्ट की आत्मा ने प्रवेश किया सतधाम से आकर। तो वो शरीर क्राइस्ट ने आक्यूपाइ किया। बाकि है तो नहीं वो रथ उनका। हँ?

अरे, अर्जुन के रथ में भगवान आया। रथ किसका कहा जाएगा? अर्जुन का रथ कहा जाएगा। ऐसे थोड़ेही कि भगवान का रथ। लो। भगवान तो निराकार। वो उसका रथ कहाँ से बन गया? निराकार आत्मा का रथ बनता है? ऐसे ही जो धरमपिताएं आते हैं तो निराकार आते हैं कि उनका पांच तत्वों का, जड़ तत्वों का शरीर बन जाता है अपना? बनता है? नहीं बनता। लंबे समय तक उस जीसिस में पार्ट बजाते हैं तो संग का रंग लगता है। तब कहीं जाकरके उनके पांच तत्वों का निर्माण, हँ, कि आते ही आते पांच तत्वों का निर्माण हो जाता है? हँ? वो भी अलग शरीर तब मिलेगा जब पांच तत्व के आधार पर वो कोई गरभ में, माता के गर्भ में वो आत्मा प्रवेश करेगी, तब शरीर मिलेगा जन्म होने के बाद कहते हैं।

तो आक्यूपेशन कुछ भी पता नहीं है। हँ? असलियत क्या है? बस पूजा करने से मतलब। जान-पहचान से गहराई से कोई मतलब नहीं। तो उसको कहते हैं अंधश्रद्धा, अंधविश्वास। अंधे हैं अंधे। अंधों की दुनिया। जैसे घोर अंधियारी रात हो जाती है ना। सूरज दिखाई पड़ता है? नहीं। ऐसे ही ये कलियुग के अंत में घोर अंधियारी रात। सब अंधे ही अंधे। सबमें तमोप्रधानता। तमोप्रधान भक्ति। कोई किसी भी धरम का हो। हँ? तमोप्रधान भक्ति। क्योंकि जिसकी पूजा करते हैं, हँ, पूजा में क्या करते हैं? हँ? अरे? कुछ करते हैं कि नहीं? हाँ, नहलाएंगे, धुलाएंगे, उन्हें खिलाएंगे, पिलाएंगे, हाँ-हाँ, कीर्तन करेंगे, उनकी महिमा करेंगे, तो ये सब करेंगे, लेकिन उनके बारे में असलियत कुछ भी, कुछ भी पता नहीं।

तो जिसकी पूजा करते हैं आक्यूपेशन को भी नहीं जानते। अभी राणा प्रताप को जानते हैं कि हाँ, भाई उन्होंने लड़ाई-लड़ी थी, हँ, मुसलमानों से। वो मुसलमान तो बाहर से आए थे। भारत में बस गए। और उन्होंने अत्याचार किये। धर्म परिवर्तन किए, जबरदस्ती भी की। तो उन्होंने लड़ाई लड़ी। क्योंकि भारत का धरम क्या कहता है? कोई पे आक्रमण करो अपनी तरफ से? हँ? भारत का धरम ये नहीं कहता है कि कोई के ऊपर आक्रमण करो। अपना राज्य विस्तार करने के लिए। नहीं। पूर्वजन्म के कर्मों से या कहें कि भगवान ने आकरके जो रिहर्सल की थी कलप पूर्व में कलियुग के अंत में, उस रिहर्सल में जैसा जिसने पार्ट बजाया, जैसा जिसने स्वभाव अपना स्वभाव के अनुसार कर्म किये, वैसा उनको शरीर मिलता रहता है।

तो बस इतना जानते हैं कि हाँ, उन्होंने लड़ाई की थी। अरे, लड़ाई की थी तो अच्छा काम किया क्या? हँ? लड़ाई माने लड़ाई में हिंसा होती है या प्यार बढ़ता है? हँ? हिंसा ही होती है ना। तो लड़ाई की थी। अभी वो हिंसा तो हुई ही हिंसा। हिंसा, तो हिंसा करने वालों की तो कोई स्टैम्प नहीं बनानी चाहिए। अब बताओ, कोई ने राज्य पे आक्रमण कर दिया, तो बड़ी भारी सेना लेके आक्रमण कर दिया और राजा है छोटा मुकाबला करने वाला, उसके पास सेना भी थोड़ी है। तो क्या लड़ाई न लड़े? हँ? लड़े। लड़ेंगे तो फिर हिंसा हो गई। हँ? हिंसा नहीं होगी लड़ाई लड़ेगा तो?
(किसी ने कुछ कहा।) भावना क्या? क्या भावना धारण करे? हँ? लड़ाई लड़े खदेड़ने के लिए? अरे; तो हिंसा तो होगी ना। हँ? उनके पास लाखों की सेना आक्रमण करने वालों के पास। उनके पास हज़ारों, हजार की भी सेना, हजारों की सेना भी कम है। कहाँ लाखों, कहाँ साठ हज़ार! तो छापामार युद्ध करे तो हिंसा नहीं है? हँ? और छुप-छुप के वार करना ये हिंसा नहीं है? हँ? छुप-छुप के वार करना वो अच्छा या सामने होके लड़ाई लड़ना? हँ? उनकी लाखों की सेना, आक्रमणकारियों की, और इनकी साठ हज़ार सेना और एक-एक इनका उनके दस-दस को मारेगा। (किसी ने कुछ कहा।) टाइगर जैसा व्यवहार करे? माने भाग जाए? हाँ, छुप जाए भाग करके। हँ? जैसे, अच्छा, राणा प्रताप ने तो ये भी किया था। लेकिन पहले युद्ध में तो लड़ाई लड़ी ना। हँ? जब हराया था पहली बार तब तो लड़ाई लड़ी थी ना। हिंसा की थी ना। दूसरी बार में भी हिंसा की थी, लड़ाई तो लड़ी थी। फिर देखा कि अब, अब हारे जा रहे हैं, हँ, राजा ही नहीं रहेगा तो राज्य खतम हो जाएगा। हँ? किसके ऊपर श्रद्धा रखेंगे लोग? तो फिर अपनी जान बचा ली। अपने परिवार को बचा लिया। जंगल में भाग गए। चलो। देर आयद दुरुस्त आयद। माना सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो भूला हुआ कहा जाता है या अभूल कहा जाता है? अभूल हो गया। लेकिन तुरंत कि तुरंत स्मृति आनी चाहिए थी। तुरंत समृति नहीं आई। बाद में आई। तो ये भी कमजोरी हुई ना। हँ?

तो फिर भी हाँ, अहंकार तो हर आत्मा में होता ही है। इस दुनिया में जितने भी पार्टधारी हैं, जन्म-जन्मान्तर पार्ट बजाने वाले उनमें सबमें अहंकार तो जरूर है। क्या-क्या होता है? बुद्धि होती है, मन होता है, अहंकार होता है। पंच महाभूत भी होते हैं। पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश। हँ? दस इन्द्रियाँ होती हैं। होती हैं ना? तो, और दस इन्द्रियों की जो इन्द्रियों से जो भोग मिलते हैं विषय भोग, हँ, जैसे आँखों, आँखों को क्या अच्छा लगता है? बढ़िया-बढ़िया रूप मिले। प्रकृति की छटा मिले, चाहे चैतन्य मिले, बढ़िया-बढ़िया रूप मिले। माना इन्द्रियों को जो है ना प्राप्ति, तो ये सभी आत्माओं के अन्दर, मनुष्यात्माओं के अन्दर खास। अहंकार तो होगा नहीं, अहंकार ही नहीं होगा; क्या अहंकार? कि मैं आत्मा भी कुछ हूँ। ये अहंकार नंबरवार होगा कि सबमें एक जैसा होगा? हँ? नंबरवार होगा। अव्वल नंबर किसमें होगा? अव्वल नंबर सबसे जास्ती अहंकार किसमें होगा?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, जो सारी मनुष्य सृष्टि का बाप है उसमें तो सबसे ज्यादा अहंकार होगा मैं किसका बच्चा हूँ? हँ? ऊँच ते ऊँच आत्मा का बच्चा हूँ कि छोटे-मोटे का बच्चा हूँ? कम शक्तिशाली का बच्चा हूँ? क्या अहंकार रहेगा? बड़ा स्वाभिमान।

तो वो क्या जो डायरेक्शन है, हँ, गीता का, गीता का संविधान क्या कहता है? अगर कोई आक्रमण करे तो क्या करो? हँ? भाग जाओ। अच्छा? भाग जाएंगे तो प्रजा का क्या हाल होगा? हँ? विधर्मी क्या करेंगे? लूट-खपोट करेंगे कि नहीं? नहीं करेंगे? लूट-खपोट करेंगे, बीबी-बाल-बच्चों को ले जाएंगे, दास-दासी बनाएंगे, सब उल्टे काम करेंगे ना। तो धर्म क्या कहता है? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) अच्छा? वो हिंसा नहीं हुई? स्त्रीयां जो हैं, वो दास-दासी जाके न बनें उनके, आक्रमणकारियों के घरों में जाके, वो अपने शरीर को आग में जला दें। जौहर कर लें। तो ये हिंसा नहीं हुई? हँ? शरीर की हिंसा हुई कि नहीं हुई? हिंसा तो बहुत भारी हो गई। अब ये सब है क्यों? है इसलिए कि उन्होंने यही नहीं समझा कि जौहर क्या करना है? ये जौ, जौ माने ये जो है, क्या है, ये शरीर, इसको हरण कर दो, आग में खतम कर दो। लेकिन नहीं। असली बात ये है कि भगवान की याद करना चाहिेए। क्या? कोई आपत्ति आ जाए तो क्या करें? हँ? भगवान को याद करें। भगवान रक्षा करो। वो भावना बुद्धि में रहती है कि भगवान भी कोई चीज़ है? हँ? रहती है? नहीं। भक्तों को भक्ति करते हैं भगवान की लेकिन ये थोड़ेही समझते हैं कि हाँ, भगवान भी कुछ है, कुछ कर सकता है। अब भगवान भी क्या करेगा? सोमनाथ मन्दिर के पुजारियों ने पब्लिक को मस्त कर दिया। अरे सोमनाथ रक्षा करेंगे। तुम चिंता क्यों? अरे, लोगों ने, जासूसों ने बताया आके राज्य में कि बड़ी भारी सेना लेकरके आ रहा है। अपनी सुरक्षा सोमनाथ मन्दिर की कैसे सुरक्षा होगी? इस धन-संपत्ति सारी लूट ले जाएगा। तो जो भी पुजारी थे उन्होंने क्या बोल दिया? अरे, सोमनाथ रक्षा करेंगे। और सोमनाथ को जानते हैं नहीं कि कौन है सोमनाथ? कुछ पता नहीं।

तो अंधश्रद्धा में ये सब ऐसे काम होते हैं। अंधश्रद्धा को ज्ञान से मिटाया जाता है। और ज्ञान भी किसके द्वारा दिया हुआ? कौन आके दे ज्ञान? ज्ञान भी वो भगवान ही आकरके सच्चा देता है। जब इस सृष्टि पर आता है तो भगवान क्या करता है? स्वर्ग बनाने के लिए आता है। क्या? जो मनुष्य हैं जिन्हें नर कहा जाता है वो तो नरक बनाते हैं इस दुनिया को। कबसे? ये दुनिया सुख-दुख की है ना। तो आधा समय सुख की दुनिया भगवान बनाके जाता है। खुद नहीं बनाता है। नंबरवार बच्चों को निमित्त बनाता है।

A morning class dated 27.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the second page on Sunday was - Who is Shiv? Even before that it was asked - Who is Somnath? Who is Baboolnath? They do not know anybody's occupation. They just worship. Arey, what did they do? Why is their idol sculpted? Why do they build temples? Why do they worship? Why do they show so much Bhakti and emotion? They do not wish to know as to what they used to do. That is it. Why do they do like this? It is because Bhakti also becomes tamopradhan. All are tamopradhan. In the end of the Iron Age there is degradation only, isn’t it? It is not the Golden Age where satopradhaanataa (purity) will come. All those whom they worship, hm, all those who exist in this world, they may belong to any religion. Suppose they worship Chris, hang his picture; hm, the one whose picture is hung, it is hung for remembering him only. It is hung for praising him only. So, they do not know even this. The picture that has been hung is of which soul? Hm? Do they know? The picture is of which soul? Hm?
(Someone said something.) Is the picture of Christ the picture of ShivBaba? Damn it. Hm? (Someone said something.) Picture of the resident of India (Bhaaratwaasi)? Arey, as regards Bhaaratwaasis, 33 crore deities are also called Bhaaratwaasis. Hm? They may go anywhere in the world in any corner to play their part in the end of the Iron Age, their intellect is focused on India only. So, if the heart and intellect is focused on India, then they are resident of India only, aren't they?

(Someone said something.) Jesus? Achcha? So, the face of Jesus is actually the face of which soul? Hm? (Someone said something.) Arey, the roots are numerous; how will you know as to which root (jad), which base (aadhaar)? Hm? Does the soul of Christ enter in the seed-form of Christianity? Hm? Yes, it has also been told that it enters in the root, in the base-like souls. It is the roots which are the base of the tree, aren't they? Hm? So, there are numerous roots. Which root? (Someone said something.) Look! Baba says he is a devotee; he does not know who he is worshipping. Hm? He says that I got knowledge, God gives us knowledge. (Someone said something.) Yes, the Narayan of the Golden Age who comes after Buddha; the one who becomes the base of Buddha; the Narayan who comes after him, doesn't he? The fourth number; speak up; he is the base, is not he? When the same soul continued to get birth and got birth by the name Jesus on this world stage 2000 years ago. And the soul of Christ entered in him after coming from the Satdhaam (abode of truth). So, Christ occupied that body. But it is not his Chariot. Hm?

Arey, God came in the Chariot of Arjun. The Chariot will be said to belong to whom? It will be called Arjun's Chariot. It is not as if it is God's Chariot. Look. God is incorporeal. How did it become His Chariot? Does an incorporeal soul have a Chariot? Similarly, the founders of religions who come, do they come in an incorporeal form or do they develop their own body made up of the five elements, the non-living elements? Do they? They don't. When he plays a part in that Jesus for a long time, then he gets coloured by the company. Only then are his five elements formed, hm, or do the five elements get formed as soon as he comes? Hm? He will get a separate body when that soul enters in a womb, in a mother's womb on the basis of the five elements after getting birth.

So, nothing is known about the occupation. Hm? What is the truth? They are concerned just with worshipping. They are not concerned about deeply knowing or recognizing. So, that is called blind faith, blind belief. They are blind. It is a world of blind people. For example, when it is a completely dark night, can you see the Sun? No. Similarly, in the end of the Iron Age there is a completely dark night. All are blind. There is degradation in everyone. Bhakti is degraded. One may belong to any religion. Hm? It is tamopradhan Bhakti. It is because whomsoever they worship; hm, what do they do in worship? Hm? Arey? Do they do anything or not? Yes, they bathe them, clean them [with water], they feed them, they offer them drinks, yes, yes, they sing songs, they praise them; so, they do all this, but they do not know any truth about them, they don't know anything.

So, they do not know about the occupation of those whom they worship. Now they know Rana Pratap that yes, brother, he had fought a war with Muslims. Those Muslims had come from outside. They settled in India. And they committed tortures. They converted people; they also forced them. So, they fought wars. It is because what does India's religion say? Should you attack anyone unilaterally? Hm? India's religion does not ask you to attack anyone to expand your kingdom. No. Each one gets a body according to the actions performed in the past births or you may say that when God had come and done the rehearsal Kalpa ago in the end of the Iron Age; in that rehearsal, whoever played whatever part, in whichever manner they performed actions as per their nature, and accordingly they keep on getting a body.

So, they just know that yes, they had fought war. Arey, if they had fought, did they perform a good task? Hm? War means is there violence in a war or does love increase? Hm? Violence only takes place, doesn't it? So, they had fought. Well, that violence is violence only. So, the stamps of those who indulge in violence should not be prepared. Well, tell, suppose someone attacked a kingdom, attacked with a very big army and if the king facing the attack is small and has a smaller army. So, should he not fight? Hm? He should fight. If they fight, they indulge in violence. Hm? Will there not be violence if he fights?
(Someone said something.) What feeling (bhaavnaa)? Which feeling should he inculcate? Hm? Should he fight to force them back? Arey; So, violence will take place, will it not? Hm? The attackers have armies numbering lakhs. They [the defenders] have armies numbering thousands; even the army numbering thousands is less. On the one side are lakhs and on the one side are sixty thousand! So, if they adopt proxy (chaapaamaar) war, is it not violence? Hm? And is it not violence to attack stealthily? Hm? Is it better to attack stealthily or to fight face to face? Hm? The attackers have army numbering lakhs and these people have an army of sixty thousand and each one of them will kill ten of those. (Someone said something.) Should he act like a tiger? Does it mean that he should run away? Yes, he should run away and hide. Hm? For example, achcha, Rana Pratap had also done this. But he fought the first war, did not he? Hm? When he defeated [the enemies] for the first time, he had fought the war, did not he? He had indulged in violence, did not he? Second time also he indulged in violence; he had indeed fought the war. Then he saw that now I am getting defeated, hm, when the king himself doesn't survive, then the kingdom will perish. Hm? On whom will people have faith? So, then he saved his life. He saved his family. He ran away to the forests. Okay. Der aayad durust aayad. It means that if a person who lost his way in the morning comes back home in the evening, will he be said to have forgotten (bhoola hua) or aware (abhool)? He is abhool only. But he should have recollected immediately. He did not recollect immediately. He recollected later. So, this is also a weakness, is not it? Hm?

So, however, yes, every soul has ego. All the actors in this world playing their parts birth by birth definitely have ego. What all do they have? They have intellect, they have mind, they have ego. They also have the five elements. Earth, water, air, fire, sky. Hm? There are ten organs. They have, don’t they? So, and the pleasures that are experienced through the ten organs; hm, for example, the eyes; what do the eyes like? They want nice forms [to see]. They want natural sceneries, be it living ones, they want nice forms [to see]. It means that the attainments of the organs; within all the souls, especially among the human souls. They will not have ego; they will not have ego at all; what ego? That I, the soul am also something. Will everyone have this ego numberwise or alike? Hm? It will be numberwise. Who will have number one [ego]? Who will have number one, the most ego?
(Someone said something.) Yes, the Father of the entire human world will have the maximum ego that whose child am I? Hm? Am I the child of the highest on high soul or am I a child of any small personality? Am I a child of the less powerful one? What ego will he have? He will have a lot of self-respect (swaabhimaan).

So, that direction, hm, what does the constitution of the Gita say? What should you do if anyone attacks? Hm? Run away. Achcha? If you run away, then what would be the fate of the subjects? Hm? What would the vidharmis do? Will they loot or not? Will they not? They will loot, they will take away the wives and children, make them servants and maids, and they will perform all opposite tasks, will they not? So, what does dharma say? Hm?
(Someone said something.) Achcha? Is it not violence? The women should not go and become servants and maids by going to the homes of the attackers; they should burn their body in fire. They should perform jauhar. So, is it not violence? Hm? Is it physical violence or not? It is very big violence. Well, why is all this for? It is because they did not understand as to which jauhar should they perform? This jau; jau means this body should be abducted; it should be made to perish in fire. But no. The truth is that you should remember God. What? What should you do if you face any difficulty? Hm? Remember God. God, save us. Does that feeling remain in your intellect that there is something called God? Hm? Does it remain? No. Devotees do Bhakti (devotion) of God, but they do not think that yes, God is also something, can do something. Well, what will God also do? The priests of the temple of Somnath made the public carefree. Arey, Somnath will save. Why do you worry? Arey, people, the spies came to the kingdom and informed that he [the attacker) is coming with a big army. How will we save ourselves, our Somnath temple? He will loot this wealth and property. So, what did the priests say? Arey, Somnath will save. And they do not know about Somnath as to who is Somnath? They no nothing.

So, all such tasks are performed in blind faith. Blind faith is removed through knowledge. And knowledge also given by whom? Who should come and give knowledge? That God Himself comes and gives true knowledge. What does God do when He comes to this world? He comes to establish heaven. What? The human beings who are called ‘nar’ make this world narak (hell). Since when? This world is a world of happiness and sorrows, isn’t it? So, God establishes the world of happiness for half the time. He does not make Himself. He makes the children instrumental numberwise.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 26 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2634, दिनांक 08.09.2018
VCD 2634, Dated 08.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated27.8.1967
VCD-2634-extracts-Bilingual

समय- 00.01-17.32
Time- 00.01-17.32


प्रातः क्लास चल रहा था - 27.8.1967. रविवार को दूसरे पेज के मध्यांत से आगे बात चल रही थी कि स्टाम्प किसका बनाना चाहिए? हँ? हिंसक का बनाना चाहिए या अहिंसक का बनाना चाहिए? परन्तु इस समय में सभी हिंसक होने के कारण किसी का भी स्टाम्प नहीं बनाया जा सकता। हिंसक भी कौनसे? देखो, एक होते हैं स्थूल हिंसा करने वाले। मारामारी चलती है। हथियार वगैरा बनाते रहते हैं। पूरा ही खतम कर देते हैं। और उससे भी बड़ी हिंसा क्या होती है? उससे भी बड़ी हिंसा है काम-कटारी की हिंसा। विकार में जाते हैं। विकार माने? कार माना कार्य; विकार माने विपरीत कार्य। भगवान ने गीता में बताया कि कर्मेन्द्रियाँ हैं ना, उनमें जो मुख्य काम की इन्द्रिय है वो बहुत विकृत बनाय देती है। उसी से ही पतित बनते हैं। तो वो भी हिंसा करते हैं ना। हँ? अपनी भी हिंसा करते, दूसरे की भी हिंसा करते। क्रोध, लोभ में इतनी हिंसा नहीं होती क्योंकि काम विकार में तो शक्ति क्षीण होती है ना तन की, मन की, धन की। तो ऐसी काम कटारी चलाते हैं। काम की छुरी चलाते हैं ना। हँ? एक तो होते हैं कसाई। वो धक् से मार देते हैं गडासे से। और एक होते हैं मुसलमान। हँ? वो धीरे-धीरे जिवा करते हैं। तुरंत नहीं काट देते। हाँ। तड़पा-तड़पा के मारते हैं।

बाप कहते हैं इस दुनिया में सिवाय देवताओं के कोई भी अहिंसक नहीं हो सकता। क्योंकि वहाँ स्वर्ग में न स्थूल हिंसा करते हैं और न कोई काम कटारी की हिंसा करते हैं। वहाँ तो ज्ञानेन्द्रियों की संतान हैं ना। ज्ञानेन्द्रियों के प्यार से सृष्टि चलती है। तो डबल अहिंसक ये ही हैं। ये कहके किस तरफ इशारा किया? हँ? लक्ष्मी-नारायण के चित्र की ओर इशारा किया कि जो नर से डायरेक्ट नारायण बनाते हैं वो कोई भी प्रकार की इन्द्रियों की हिंसा नहीं करते। अतीन्द्रिय सुख भोगते हैं ना। वो अतीन्द्रिय सुख भोगने वाले ऐसे तो नहीं कि सृष्टि नहीं चलती है। हँ? राधा कृष्ण सतयुग में 16 कला संपूर्ण पैदा हुए तो उनको जन्म देने वाले इन्द्रियों का सुख भोगते थे? हँ? भोगते थे? नहीं। वो तो वायब्रेशन का सुख भोगते हैं। मन को कंट्रोल किया। मन को एकाग्र किया। तो मन और बुद्धि दोनों की पावर मिलती है तो वायब्रेशन की ताकत पैदा हो जाती है। वो ही तो है योगबल की शक्ति। तो ये ही डबल अहिंसक हैं जो नर से नारायण डायरेक्ट बनते हैं। या तो फिर कहें नंबरवार। उनके बाद जो भी नारायण बनेंगे, जो भी पीढ़ियाँ आती जाएंगी तो नंबरवार होंगी ना।

तो फिर इन बातों का भी जब ज्ञान हो फिर तो उनकी अर्थ सहित स्टैम्प निकालना चाहिए। हँ? क्या ज्ञान? ये जो नंबरवार सतयुग में नारायण बने अलग-अलग पीढ़ियों में, वो तो संगमयुग में अलग-अलग कुरी के ब्राह्मण बने थे। हँ? कितनी हैं ब्राह्मणों की कुरियाँ? नौ कुरियाँ गाई हुई हैं। तो संगमयुग में जब बाप आते हैं ब्रॉड ड्रामा की रिहर्सल कराने के लिए तो ब्रह्मा द्वारा नौ कुरी के ब्राह्मणों की रचना होती है। और वो नौ कुरियों के भी ब्राह्मणों के मुखिया होंगे ना कोई। वो ही सतयुग में जाके नारायण बनते हैं। तो वो कैसे-कैसे जन्म लेते हैं त्रेता में, द्वापर में, कलियुग में, ये कोई को ज्ञान है? हँ? ऐसे तो नहीं सतयुग में नारायण बनने के बाद वो और उनकी प्रजा ऊपर चली जाती है। इसी सृष्टि पे रहते हैं ना। जन्म तो लेते रहते हैं ना। तो इस बात का कोई को ज्ञान है? मुख्य-मुख्य का ही ज्ञान नहीं है तो फिर सारी सृष्टि का तो ज्ञान कैसे होगा? तो ये मनुष्य सृष्टि रूपी झाड़ है। इसका ज्ञान तो होना चाहिए ना। तब अर्थ सहित स्टैम्प निकले कि भई कलियुग के मध्य में जाकरके, मध्यांत में जाकरके महाराणा प्रताप की जो स्टैम्प निकाली है ये कौन थे? द्वापर में क्या थे? त्रेता में क्या थे? और? और सतयुग में क्या थे? क्या? तो सही स्टैम्प निकलेगी या गलत निकलेगी? हँ? ये पहचान में, ज्ञान आ जाएगा ना बुद्धि में। तब लोगों को समझा सकेंगे कि ऊँच ते ऊँच कौन है जिनकी स्टैम्प निकालनी चाहिए। वास्तविक स्टाम्प निकालनी चाहिए।

तो स्टैम्प तो सतयुग में तो इनके निकलते ही हैं। क्या? जो वहाँ पीढ़ी दर पीढ़ी नारायण की गद्दियाँ चलती हैं, तो वहाँ स्टाम्प उन्हीं नारायणों नारायणों का चलता है जो राजा बनते हैं जिस पीढ़ी में। क्योंकि इनको भी तो कोई; नारायण को ज्ञान होता है? सतयुग में जो भी पीढ़ी के नारायण बनते हैं पहले नंबर से लेकरके आठवें नंबर के नारायण, उनको ज्ञान होता है? उन्हों को तो ज्ञान तो होता ही नहीं है। अच्छा, ब्राड ड्रामा में ज्ञान नहीं होता है। संगमयुग के शूटिंग पीरियड में तो ज्ञान होता होगा। हँ? होता है? पहले नहीं होता। जब तक अव्वल नंबर जो है आदि नारायण प्रत्यक्ष न हो जाए संसार में तब तक उनको कोई ज्ञान नहीं हो सकता। ये तो है। पहचानने वाले तो पहले वो ही नंबरवार नारायण होंगे। वो नारायण पहले पहचानेंगे कि उनको जन्म देने वाली ज्ञान में बीज रूप आत्माएं पहले पहचानेंगी? उनके बाप पहले पहचानेंगे? कौन पहचानेंगे? बीज रूप बाप पहचानेंगे। और वो बीजरूप भी किससे पहचानते हैं? हँ? बीज रूप जो हैं उनका भी कोई एक बीज होगा। जैसे ये जो सृष्टि है वृक्ष कही जाती है। उस सृष्टि रूपी वृक्ष का यादगार है। कहाँ यादगार है? कलकत्ते में। तो जो भी वृक्ष होते हैं उनमें ये, ये बनियन ट्री तो ऐसा वृक्ष है जिसका पत्ता भी और उसकी डंडी भी बहुत मजबूत होती है। और उसके मुकाबले? दूसरा एक ऐसा भी वृक्ष है जिसका पत्ता भी बहुत हल्का और डंडी भी बहुत हिलने-डुलने वाली, पीपल का पत्ता।

तो ऋषि-मुनियों ने इस सृष्टि वृक्ष की यादगार क्या रखी शास्त्रों में? क्या नाम दिया? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) नहीं, अश्वत्थ वृक्ष। क्या नाम दिया? अश्व। इत्थ माने स्थिर रहनेवाला। अश्व को स्थिर किया गया। अश्व क्या है? मन रूपी घो़ड़ा। तो ये मन रूपी घोड़े को, जो बहुत चंचल होता है जब तक बुद्धि की लगाम न लगे तब तक कंट्रोल में नहीं आता। तो वो बुद्धिरूपी लगाम कौनसी है? क्या है बुद्धि रूपी लगाम? और वो लगाम किसके हाथ में रहती है? दिखाते हैं अर्जुन का रथ। हँ? अर्जुन के रथ में अर्जुन नहीं लगाम चला पाता रथ को। तो फिर भगवान बैठे हुए हैं उनके रथ को चलाने के लिए। वो उस लगाम को अपने हाथ में लेते हैं। तब वो घोड़े चलते हैं। तो वो घोड़े तो चार दिखाए हैं। राइटियस और लेफ्टिस्ट। नंबरवार हैं ना। तो वो कौन हैं? शास्त्रकारों ने तो कृष्ण को रख दिया। वास्तव में रखना चाहिए शिवबाबा को कि जो शिव है वो निराकार है, जन्म-मरण के चक्र में नहीं आता है। और जन्म-मरण के जो चक्र में नहीं आता है उसको तो सारा पता रहता है। पूरे ब्राड ड्रामा का पता रहता है। चारों सीन का पूरा पता रहता है। तो वो ही इस सृष्टि पर आकरके कंट्रोल कर सकता है। वो ही है सबसे जास्ती ज्ञानी आत्मा। उसके मुकाबले पार्टधारी आत्माओं में इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर कोई भी ज्ञानी तू आत्मा नहीं।

तो ज्ञान हो तो अर्थ सहित स्टॉम्प निकाली जाए कि ज्ञान ही नहीं है तो अर्थ सहित स्टाम्प निकाली जाएगी? तो वो बाप आकर सृष्टि रूपी रंगमंच पर जिस रथ में प्रवेश करते हैं उसका नाम दिया है शास्त्रों में अर्जुन। हँ? अर्जन करने वाला। क्या अर्जन करनेवाला? धन-संपत्ति, ज्ञान की धन-संपत्ति, जो बड़े ते बड़ी धन-संपत्ति है, जो ईश्वर आकरके देता है, वो अर्जन करता है। तो ब्रॉड ड्रामा में तो वो ही आत्मा है जिसको शास्त्रों में नाम दिया गया है आदि देव, हँ, शंकर के रूप में दिखाते हैं। आदीश्वर के रूप में दिखाते हैं। आदि नाथ कहते हैं। आदम कहते हैं। एडम कहते हैं। तो किसका स्टैम्प निकालना चाहिए? हँ? अब निराकार का तो स्टैम्प निकलेगा नहीं। कैसे? वो क्या है? बिन्दु है। बिन्दु का तो फोटो ही नहीं निकल सकता। तो स्टैम्प कैसे बनेगा? तो वो बिन्दु जिसमें प्रवेश करते हैं उसको आप समान बनाते हैं। हँ? तो जिसको आप समान बनाया, तो शिव है कल्याणकारी, तो वो भी क्या हुआ? कल्याणकारी हुआ ना।

A morning class dated 27.8.1967 was being narrated. The topic being discussed a little ahead of the end of the middle portion on the second page on Sunday was – Whose stamp should be prepared? Hm? Should the stamp of a violent person be prepared or should the stamp of the non-violent one be prepared? But as everyone is violent at this time, nobody’s stamp can be prepared. What kind of violent persons? Look, one is those who indulge in physical violence. Killings take place. They keep on producing arms, etc. They destroy completely. And what kind of violence is the bigger than that? Violence bigger than that is the violence through the dagger of lust. They indulge in lust (vikaar). What is meant by vikaar? Kaar means kaarya (work); vikaar means vipreet kaarya (opposite work). God said in the Gita that there are organs of action; among the main organ is of lust; it makes you very deformed (vikrut). You become sinful through that only. So, they also indulge in violence, don’t they? Hm? They use violence against themselves and also against others. There is not much violence involved in anger, greed because the vigour of the body, mind and wealth decreases in case of the vice of lust, doesn’t it? So, they use such dagger of lust. They use the dagger of lust, don’t they? Hm? One is butchers. They kill instantly with an axe (gadaasa). And one is Muslims. Hm? They kill gradually. They do not behead in one go. Yes. They kill while causing a lot of suffering.

The Father says that nobody except the deities can be non-violent in this world because there in the heaven they neither indulge in physical violence nor in violence through the dagger of lust. There are children born through the sense organs there, are they not? Procreation takes place through the love of the sense organs. So, these are anyways double-violent. Towards whom was a gesture made by uttering ‘these’? Hm? A gesture was made towards the picture of Lakshmi-Narayan that the one who makes you direct Narayan from nar (man) does not indulge in any kind of violence through organs. They experience super sensuous joy, don’t they? It is not as if procreation does not take place through those who experience super sensuous joy. Hm? Radha and Krishna were born in the Golden Age as perfect in 16 celestial degrees; so, do those who give birth to them experience the pleasure of the organs? Hm? Did they used to experience? No. They experience the joy of vibrations. They controlled the mind. They concentrated the mind. So, when they get the power of both mind and intellect, then the power of vibrations is created. That itself is the power of Yoga. So, it is these double non-violent ones who become direct Narayan from nar (man). Or we may say numberwise. After them all those who become Narayans, all the generations that come, will be numberwise only, will they not be?

So, then when you have knowledge of these topics, then you should release their stamp after understanding the meaning. Hm? Which knowledge? Those who became numberwise Narayans in the Golden Age, they had become Brahmins of different categories in the Confluence Age. Hm? How many categories of Brahmins are there? Nine categories are praised. So, when the Father comes to cause the rehearsal of the broad drama in the Confluence Age, then Brahmins of nine categories are created through Brahma. And there will be chiefs of those nine categories of Brahmins also. They themselves become Narayans in the Golden Age. So, does anyone know as to how they get births in the Silver Age, Copper Age, and Iron Age? Hm? It is not as if they and their subjects go up [to the Soul World] after becoming Narayan in the Golden Age. They remain in this world only, don’t they? They keep on getting birth, don’t they? So, does anyone have knowledge about this topic? When they do not have knowledge of the main topics itself, then how will they have the knowledge of the entire world? So, this is the human world tree. You should have its knowledge, shouldn’t you? Then a meaningful stamp could be released that brother, who was this Maharana Pratap who existed in the middle of the Iron Age, in the end of its middle, whose stamp has been released? What were they in the Copper Age? What were they in the Golden Age? What? So, will a correct stamp be released or will a wrong one be released? Hm? This realization, this knowledge will enter the intellect. Then people will be able to understand that who is the highest one whose stamp should be released, actual stamp should be released.

So, their stamp is released in the Golden Age. What? The thrones of generation-wise Narayans continue there; so, the stamps of the same Narayans who become Narayans in their respective generations are prevalent there because they too; does Narayan have knowledge? Whoever becomes Narayan of whichever generation in the Golden Age, from the first number to the eighth number Narayan, do they have knowledge? They do not have knowledge at all. Achcha, there is no knowledge in the broad drama. There must be knowledge in the shooting period of the Confluence Age. Hm? Is it there? It is not there in the beginning. Until the number one, the first Narayan is revealed in the world, they cannot have knowledge. This is true. The numberwise Narayans will only recognize first. Will those Narayans recognize first or will the seed form souls which give birth to them in knowledge recognize first? Will their fathers recognize? Who will recognize? The seed form fathers will recognize. And through whom do even those seed forms recognize? Hm? There must be a seed of those seed forms also. For example, this world is called a tree. It is a memorial of that world tree. Where is the memorial? In Calcutta. So, among all the trees, this Banyan tree is such a tree whose leaf and its twig is also very strong. And when compared to it? There is another tree whose leaf is also very light and its twig is also very shaky, the fig leaf.

So, what is the memorial of this world tree depicted by the sages and saints in the scriptures? Which name was assigned? Hm?
(Someone said something.) No, Ashwatth tree. Which name was assigned? Ashwa. Ithh means the one who remains constant. The ashwa (horse) was made constant. What is horse? Mind like horse. So, this mind like horse, which is very inconstant, does not come under control until the rein of intellect is used. So, which is that intellect-like rein? What is intellect-like rein? And in whose hands does that rein remain? Arjun’s Chariot is depicted. Hm? In Arjun’s Chariot, Arjun wasn’t able to use the rein of the Chariot. So, then God is sitting to drive his Chariot. He takes over the reins in his hands. Then those horses run. So, four horses have been depicted. Righteous and leftist. They are numberwise, aren’t they? So, who are they? The writers of the scriptures have placed Krishna. Actually they should place ShivBaba that Shiv is incorporeal; He does not pass through the cycle of birth and death. And the one who does not pass through the cycle of birth and death knows everything. He knows the entire broad drama. He knows completely about all the four scenes. So, He Himself comes to this world and can control. He is the most knowledgeable soul. When compared to him, no soul is knowledgeable among the actor souls on this world stage.

So, if there is knowledge then a meaningful stamp could be released or will a meaningful stamp be released if there is no knowledge? So, that Father comes to this world stage and the Chariot in which He enters has been named Arjun in the scriptures. Hm? The one who earns (arjan karney vala). The one who earns what? Wealth and property; he earns the wealth and property of knowledge which is the biggest wealth and property that God comes and gives. So, it is that soul only in the broad drama who has been named Aadi Dev in the scriptures and is shown as Shankar. He is shown as Aadishwar. He is called Aadinath. He is called Aadam. He is called Adam. So, whose stamp should be released? Hm? Well, the stamp of the incorporeal cannot be released. How? What is He? He is a point. The photo of a point cannot be released. So, how will the stamp be prepared? So, the one in whom that point enters, He makes him equal to Himself. Hm? So, the one whom He makes equal to Himself, then Shiv is benevolent. So, what is he too? He too is benevolent, isn’t he?

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 28 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2635, दिनांक 09.09.2018
VCD 2635, Dated 09.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated 27.8.1967
VCD-2635-extracts-Bilingual

समय- 00.01-14.53
Time- 00.01-14.53

प्रातः क्लास चल रहा था - 27.8.1967. रविवार को दूसरे पेज के मध्यांत में, मध्यादि में बात चल रही थी - क्या टॉपिक चल रहा था? स्टाम्प। स्टाम्प यहाँ भी नहीं लगाते हैं। ऊँच ते ऊँच का स्टाम्प लगना चाहिए। और वहाँ भी नहीं लगाते हैं। कहाँ? स्वर्ग में। तो पूछा - वहाँ नहीं लगाते हैं क्या? वहाँ स्टाम्प नहीं लगाते? हँ? स्वर्ग में स्टाम्प नहीं लगाते? अरे? स्वर्ग की स्थापना किसने की है? (किसी ने कुछ कहा।) आत्माभिमानी होते हैं तो? इसलिए स्टाम्प नहीं लगाते? अरे, पहली बात वहाँ स्टाम्प लगाते हैं कि नहीं लगाते हैं? नहीं लगाते। क्या? नहीं लगाते। माने सुप्रीम सोल ने जो स्वरग की स्थापना की वहाँ भी स्टाम्प नहीं लगाते तो नरक में लगाने की क्या दरकार? हँ? संगम में स्टाम्प लगाते हैं? लगाई? (किसी ने कुछ कहा।) दिमाग में लगाते हैं? ये कोई बात हुई? हँ? बाकि राणा प्रताप का लगा देते हैं, शिवाजी का लगाते हैं, कहीं किसी का लगाते हैं। हँ? कोई भी बडे-बड़े देहधारियों का लगा देते हैं। अरे, कल बताया स्वर्ग में भी स्टाम्प लगता है। वहाँ ज्ञान नहीं होता है शिवबाबा का।

तो, तो बताया, ज्ञान तो वहाँ भी नहीं है बच्चे। तो वहाँ के स्टाम्प कौनसे लगते होंगे? जरूर ऊँच ते ऊँच के लगने चाहिए। क्योंकि वहाँ ऊँचे ते ऊँचे उस समय में तो सिर्फ वो ही हैं। कौन? वो माने कौन? ऊँचे ते ऊँचे उस समय माने स्वर्ग में वो ही हैं। कौन वो ही? नारायण तो ढ़ेर सारे होते हैं। स्वर्ग में कोई एक नारायण होता है क्या? हँ? हाँ, तो ये बताओ ना कि वो जो आदि नारायण हुआ है, आदि नारायण को भी बनाया किसने? हँ? अरे, आदि नारायण जो बना नारायण, पहले तो नर था ना। तो किसका लगना चाहिए स्टाम्प? (किसी ने कुछ कहा।) आदि नारायण का स्टाम्प लगता था! आदि नारायण रचना है कि रचयिता है? अरे, क्या है? रचना है ना। तो नारायण बनने से तो पहले नर था ना। नर को नारायण बनाया लेकिन बनाया किसने? जिसने बनाया वो ऊँचा हुआ या जो बना वो ऊँचा हुआ? हँ? शिवबाबा ने बनाया क्योंकि रचयिता कौन होना चाहिए? हँ? साकार होना चाहिए। निराकार तो रचयिता हो ही नहीं सकता। ये सृष्टि ही साकार है। स्वर्ग की सृष्टि भी साकार है या निराकार है? साकार है। तो उसका रचयिता भी साकार।

तो साकार को, जैसे बताया, कि साकार रचयिता बनता है, तो उस साकार में ज्ञान था पहले? तो कहाँ से आया? शिव ने दिया। निराकार ने दिया। तो फिर ब्रह्माकुमारियाँ ठीक ही करती हैं ना। निराकार का स्टैम्प बनाती हैं। निराकार का झंडा लगाती हैं। गलत करती हैं या सही करती हैं? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) निराकार दिखता नहीं? जो चीज़ दिखती नहीं वो होती ही नहीं? हं? ऐसे तो नहीं जो चीज़ आँखों से दिखती है उसी को मानेंगे? नहीं दिखती है उसको नहीं मानेंगे। हँ? नहीं दिखती है उसको भी मानना तो पड़ेगा ना कि है, अनुभव में आती है तो मानना पड़ेगा ना।
(किसी ने कुछ कहा।) इतना लंबा चौड़ा! (किसी ने कुछ कहा।) निराकार तभी दिखता है जब साकार में आए। हाँ, तो ये बात बताओ ना कि वो निराकार साकार में प्रवेश करता है। हँ? तो साकार में प्रवेश करके वो सारा करनकरावनहार का काम कराते हैं। क्या? करनहार भी है और करावनहार भी है। लेकिन नाम क्या पड़ता है उस समय? हँ? नाम पड़ता है, जब प्रवेश करता है, तो नाम पड़ता है; क्या पड़ता है नाम? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, ब्रह्मा नाम पड़ता है? ये भी गडबड हो गया। अधूरी बात बताते। ब्रह्मा तो ढ़ेरों के नाम हैं। हाँ, परमब्रह्म।

जो पहला ब्रह्मा है उसको क्या कहेंगे? परमब्रह्म कहो। हँ? वो परम आत्मा भी है या नहीं? हँ? परमब्रह्म भी है, परमात्मा भी है। आत्मा माने पुरुष। पुरुष भी है। और बड़े ते बडा ब्रह्मा अम्मा भी है। ब्रह्म माने बड़ी, मा माने माँ। तो माँ-बाप दोनों हुआ ना। तो उसका नाम क्या देते हैं? नाम अलग होगा ना फिर? चलो मिल गए। अरे?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, शिवबाबा नाम देते हैं। क्या? मेरा नाम तो कहते हैं मेरा नाम तो शिव ही है असली। वो कभी नहीं बदलता। क्या? भले मैं प्रवेश भी करता हूँ तो जिसमें प्रवेश करता हूँ, उसके नाम में भी क्या नाम जुड़ा होता है? शिव। बाबा भी कहेंगे तो उससे पहले क्या जु़ड़ा हुआ है? शिवबाबा। ऐसे थोड़ेही कहते हैं शंकर बाबा? नहीं।

तो ऊँच ते ऊँच स्टाम्प किसकी लगनी चाहिए? और स्वर्ग में किसकी लगती थी? कोई भी नारायण का राज्य हो, स्टाम्प तो एक ही होनी चाहिए। हँ? ऐसे तो वो आज नरक की दुनिया में भी अंतिम जनम में वो स्टाम्प चलती जरूर है। क्या? भले गांधीजी का बड़ा-बड़ा मोहरा दिखा देते हैं, देहधारी का। लेकिन फिर भी नोटों में देखो, स्टाम्प पेपर में देखो वो कोई न कोई रूप में
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, तीन शेर का स्टाम्प दिखाते हैं। लेकिन लोगों को पता नहीं है। कहते हैं अशोक की लाट है। क्या? उसको अशोक की लाट के नीचे जो चक्र बना हुआ है वो अशोक चक्र है। अरे, ये अशोक तो यहाँ नरक की दुनिया में हुआ। वो ऊँच ते ऊँच है? फिर किसकी यादगार है अशोक, अशोक चक्र या अशोक स्टाम्प जो अशोक राज्य में चला था वो तीन शेरों का स्टाम्प किसकी यादगार है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) शिवबाबा की यादगार है? फिर तीन शेर क्यों दिखाए? अकेला शिवबाबा ही दिखाओ ना। हँ? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, त्रिमूर्ति की यादगार है।

तो त्रिमूर्ति में तो तीन मूर्तियाँ हुईं। तो वो त्रिमूर्ति शिव कहा जाता है। ऐसे थोड़ेही कहते त्रिमूर्ति शंकर? कहते हैं? क्या? त्रिमूर्ति शिव क्यों कहा जाता है? हँ? त्रिमूर्ति शंकर क्यों नहीं कहा जाता? अरे, शंकर नाम ही तब पड़ता है जब संकरण होता है आत्माओं का। एक आत्मा नहीं है उसमें। क्या? उसमें गंगाजी भी दिखाते हैं, उसमें चन्द्रमा भी दिखाते हैं। उसमें वासुकि नाग भी दिखाते हैं। हँ? और फिर मस्तक में सदा शिव भी दिखाते हैं। तीसरा नेत्र दिखाते हैं ना। तो वो तो संकरण हो गया कई आत्माओं का। क्या? तो शंकर की तीन मूर्तियाँ कहेंगे? शंकर पुरुषार्थी है या संपन्न है, परिपूर्ण है? पुरुषार्थी है ना। तो जो पुरुषार्थी है वो तो अधूरा है या संपूर्ण है? अधूरा हुआ ना। अधूरे की स्टाम्प लगानी चाहिए? नहीं। तो किसकी लगाना चाहिए? हँ? वो शंकर वाली आत्मा, उसमें जो मुख्य आत्मा है शंकर का पार्ट बजाने वाली त्रिमूर्ति में दिखाई गई वो बताया कि संसार में की बात छोड़ दो, खास भारत में ले लो, मुख्य दो ही अवतार मनुष्य के माने जाते हैं; कौन-कौन से? राम और कृष्ण। शंकर का तो अवतार ही नहीं दिखाते हैं। उनका जनम होता है? शंकर का जनम होता है? जनम ही नहीं। तो जनम ही नहीं तो शंकर की जयंती भी नहीं। शंकर तो अधूरा है ना। पुरुषार्थ, याद में बैठा हुआ है। याद में बैठा हुआ है माने अपने से ऊंचे की याद कर रहा है न कि नीचे की? हँ? अपने से ऊँचे को याद कर रहा है ऊँच बनने के लिए।

तो जरूर वो ही स्टाम्प होगा। कौनसा? क्या नाम बताया? हँ? जिसका नाम दिया शिवबाबा। माने जिस तन में प्रवेश करता है वो जब संपूर्ण बनता है, संपूर्ण माने याद करते-4, जिसको याद करता है उसी समान बन जाता है। क्या? भ्रमरी का मिसाल दिया। हँ? भ्रमरी क्या करती है? हँ? कीड़े को पकड़ लाती है। गंद के कीड़े को पकड़ लिया। और उसको अपने घर में लाके डाला और भूँ-4 करकरके उसको कीड़े को क्या बनाय देती? हँ? आप समान भ्रमरी बनाय देती। तो ये किस बात का कमाल है? हँ? क्या करने से ये हो गया? हँ? वो शिव समान शंकर वाली आत्मा जो पुरुषार्थी है शिव समान कैसे बन गई? ज्ञान से बन गई? हँ? ज्ञान में शिव जैसी शक्ति है? ज्ञान शक्ति है, ऊर्जा है या सिर्फ ऊर्जा को पचाने का साधन है? ज्ञान तो जल है।
(किसी ने कुछ कहा।) याद; तो याद भी कैसी? याद भी एक की होनी चाहिए। हँ? अव्यभिचारी याद होनी चाहिए।

A morning class dated 27.8.1967. In the end of the middle portion, beginning of the middle portion of the second page on Sunday was; which topic was being discussed? Stamp. Stamp is not affixed here as well. The stamp of the highest one should be affixed. And it is not affixed there as well. Where? In heaven. So, it was asked – Is it not affixed there? Is it not affixed there? Hm? Is the stamp not affixed in heaven? Arey? Who established heaven?
(Someone said something.) What if they are soul conscious? Is that the reason for not affixing the stamp? Arey, firstly, whether stamp is affixed there or not? It is not affixed. What? It is not affixed. It means that the heaven which the Supreme Soul established, the stamp is not affixed there also; so, where is the necessity to affix in hell? Hm? Is the stamp affixed in the Confluence Age? Was it affixed? (Someone said something.) Is it affixed in the brain? Is this meaningful? Hm? They affix that of Rana Pratap; they affix that of Shivaji; they affix of someone somewhere. Hm? They affix that of any big personality. Arey, it was told yesterday that stamp is affixed in heaven as well. There is no knowledge of ShivBaba there.

So, so, it was told that children, there is no knowledge there as well. So, which stamp used to be affixed there? Definitely that of the highest one should be affixed. It is because at that time they alone are the highest on high there. Who? ‘They’ refers to whom? They alone are the highest on high at that time in heaven. Who ‘they alone’? There are numerous Narayans. Is there any one Narayan in heaven? Hm? Yes, so tell, the first (Aadi) Narayan who existed, who made that Aadi Narayan as well? Hm? Arey, the Aadi Narayan who became Narayan was earlier a man (nar), wasn’t he? So, whose stamp should be affixed?
(Someone said something.) Did the stamp of Aadi Narayan used to be affixed? Is Aadi Narayan creation or creator? Arey, what is he? He is a creation, isn’t he? So, before becoming Narayan, he was a man (nar), wasn’t he? Nar was made Narayan, but who made him? Is the one who ‘made him’ greater or is the one who ‘became’ greater? Hm? ShivBaba made because who should be the creator? Hm? He should be corporeal. The incorporeal one cannot be the creator at all. This world itself is corporeal. Is the world of heaven also corporeal or incorporeal? It is corporeal. So, its creator is also corporeal.

So, the corporeal one, for example, it was told, that the corporeal becomes creator; so, did that corporeal have knowledge earlier? So, where did it come from? Shiv gave. The incorporeal gave. So, then the Brahmakumaris do the right thing, don’t they? They prepare the stamp of the incorporeal one. They hoist the flag of the incorporeal one. Do they do a wrong thing or a right thing? Hm?
(Someone said something.) Isn’t the incorporeal visible? Doesn’t something which is not visible does not exist at all? Hm? It is not as if you will believe only in something that is visible to the eyes? You will not accept something that is not visible. Hm? Even if it is not visible, you will have to believe that also that it exists, will you not? When it can be experienced, then it has to be believed. (Someone said something.) So long! (Someone said something.) The incorporeal is visible only when He comes in corporeal form. Yes, so, tell that that incorporeal enters in a corporeal. Hm? So, after entering the corporeal He performs the entire task of the doer and enabler (karankaraavanhaar). What? He is a doer (karanhaar) as well as an enabler (karaavanhaar). But what is the name assigned at that time? Hm? The name is assigned when He enters; then the name is assigned. What name is assigned? (Someone said something.) Yes, is the name assigned as Brahma? This is also a mistake. You tell an incomplete thing. Brahma is the name of numerous persons. Yes, Parambrahm.

What will be the first Brahma called? Call him Parambrahm. Hm? Is he the Param Aatma (Supreme Soul) also or not? Hm? He is Parambrahm as well as Paramatma. Aatma means purush (male). He is male also. And he is the senior most Brahma, the mother also. Brahm means senior; Ma means mother. So, he is mother as well as Father, isn’t he? So, what is he named? Then the name will be different, will it not be? Okay, they mixed up. Arey?
(someone said something.) Yes, they name him ShivBaba. What? He says My name, My true name is Shiv only. That never changes. What? Even if I enter, the one in whom I enter, what is connected with that name also? Shiv. Even if you say Baba, then what is prefixed to it? ShivBaba. Is it said Shankar Baba? No.

So, the stamp of which highest one should be affixed? And whose stamp used to be affixed in heaven? Be it the rule of any Narayan, the stamp should be of one only. Hm? In today’s world of hell also that stamp is definitely prevalent in the last birth. What? Although the big face of Gandhiji, the bodily being is depicted [on the stamp]. But however, look at the notes, look at the stamp paper, in one form or the other
(Someone said something.) Yes, the stamp of three lions is depicted. But people don’t know. They say it is ‘Ashok’s amblem’. What? The Wheel below the Ashoka’s Amblem is the Ashok Chakra. Arey, this Ashok existed here in this world of hell. Is he highest on high? Then whose memorial is Ashoka, Ashok Chakra or the Ashoka Stamp which was prevalent in the kingdom of Ashoka? Whose memorial is that stamp of three lions? Hm? (Someone said something.) Is it a memorial of ShivBaba? Then why were three lions depicted? Show ShivBaba alone, will you not? Hm? (Someone said something.) Yes, it is a memorial of Trimurti.

So, there are three personalities in the Trimurti. So, He is called Trimurti Shiv. Is it said ‘Trimurti Shiv’? Do they say? What? Why is it said ‘Trimurti Shiv’? Hm? Why it is not said ‘Trimurti Shiv’? Arey, the name Shankar is coined only when there is a combination of souls. There is not one soul in it. What? Gangaji is also shown in it; the Moon is also shown in it. Vasuki snake is also depicted in it. Hm? And then Sadaa Shiv is also depicted on the forehead. The third eye is depicted, isn’t it? So, that is a combination of many souls. What? So, will it be called ‘three personalities of Shankar’? Is Shankar purusharthi or perfect, complete? He is a purusharthi, isn’t he? So, is the purusharthi incomplete or complete? He is incomplete, isn’t he? Should the stamp of the incomplete one be affixed? No. So, whose stamp should be affixed? Hm? The soul of Shankar, the main soul playing the part of Shankar which was depicted in Trimurti; it was told that leave alone the topic of the world, take especially India, only two incarnations (avatar) are believed to have taken place in the form of human beings. Which ones? Ram and Krishna. Shankar’s avatar is not depicted at all. Is he born? Is Shankar born? He isn’t born at all. So, when he does not have a birth at all, then there is no birthday of Shankar as well. Shankar is incomplete, isn’t he? Purusharth; he is sitting in remembrance. He is sitting in remembrance means that is he remembering someone higher than himself or a lower one? Hm? He is remembering someone higher than himself in order to become high.

So, definitely that stamp will be there. Which one? Which name was mentioned? Hm? The one who was named ShivBaba. It means that the body in which He enters, when he becomes complete; complete means that while remembering continuously, he becomes equal to the one whom he remembers. What? An example of the bumble bee (bhramari) was given. Hm? What does the bumble bee do? Hm? It brings an insect. It catches an insect from dirt. And then after bringing it to her house, and while buzzing (creating a sound of bhoon-bhoon) around it, what does it make the insect? Hm? It makes it a bumble-bee equal to herself. So, whose miracle is it? Hm? How did this happen? Hm? That soul of Shankar equal to Shiv, who is purusharthi, how did it become equal to Shiv? Did it become through knowledge? Hm? Is there Shiv like power in knowledge? Is knowledge power, energy or is it a medium of digesting the energy? Knowledge is water.
(Someone said something.) Remembrance. So, how should the remembrance also be? The remembrance should also be of one. Hm? It should be unadulterated remembrance.
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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 30 Nov 2020

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2636, दिनांक 10.09.2018
VCD 2636, dated 10.09.2018
प्रातः क्लास 27.8.1967
Morning Class dated 27.8.1967
VCD-2636-extracts-Bilingual

समय- 00.01-15.47
Time- 00.01-15.47


प्रातः क्लास चल रहा था - 27.8.1967. रविवार को दूसरे पेज के मध्यांत में बात चल रही थी कि सबसे ऊँचे ते ऊँचा स्टैम्प तो है त्रिमूर्ति का। वो अविनाशी होना चाहिए। हँ? अविनाशी माने? सतयुग त्रेता में तो लगाते ही हैं, होता ही है, लेकिन द्वापर, कलियुग में भी होना चाहिए क्योंकि भारत को ही अविनाशी राजगद्दी देते हैं। तो भारत को तो मालूम ही नहीं है कि कोई परमपिता परमात्मा भारत को आय करके हैविन बनाते हैं। तो ऐसा कोई एक भी मनुष्य नहीं है। क्यों? भारत नहीं है तो कोई दूसरा हो जाए तो? हँ? क्योंकि भारत ही अविनाशी धर्मखण्ड है। अविनाशी धाम है। धाम माने? घर। तो निराकार बाप आते हैं तो बताते हैं कि मेरा भी घर वो ही भारत है जिसे कहते हैं परमब्रह्म। वो मेरा अविनाशी धाम है। बाकि तो टेम्पररी रथ हैं ना। परमानेन्ट तो हैं नहीं।

तो कोई को भी याद नहीं है। नहीं। तुमको भी घड़ी-घड़ी भूल जाता है कि बाबा आय करके हमको स्वर्ग का मालिक बनाते हैं। ये किसको कहा? हँ? कहा तो भारत को ही लेकिन जिस समय इमर्ज करके बोला उस समय बताया कि तुम भी तामसी बन गए हो। तो माया है ना, वो तुमको भुलाय देती है। ये लॉ है। कायदा है। समझे? क्या कायदा? जो बाप को याद नहीं करते हैं, हँ, तो वो बहुत भूलें करते हैं। और करते ही रहते हैं। देखो, बाबा की याद न होने से और बाबा के आक्यूपेशन को न जानने से भारत भूलें ही करते आए। क्या आक्यूपेशन? हँ? धंधा क्या है बाबा का? पतितों को पावन बनाने का धंधा है। हँ? इसमें बड़े ते बड़ी भूल तो बाप ने समझाय दी। हँ? बड़े ते बड़ी भूल क्या है? मुझको सर्वव्यापी बताय दिया, हँ, जबकि मैं तो एकव्यापी होकर आता हूँ। सिर्फ भारत में परमानेन्टली आता हूँ, हँ, मुकर्रर रथ बनाके आता हूँ। तो ये बड़ी ते बड़ी भूल हो गई। क्यों? क्योंकि सर्वव्यापी कहने से बुद्धि सब तरफ भटकेगी कि एक जगह एकाग्र होगी? सब जगह भटक गई। सबकी बुद्धि भटक गई। सारी दुनिया में सब धरम वाले ये ही बात मानने लगे। पहले तो मुसलमान भी कहते थे - अल्ला मियाँ अर्श में रहता है, फर्श में नहीं रहता। अब तो वो भी कहने लगे। क्या? हँ? ज़र्रे-ज़र्रे में है। जैसे भारतवासी कहते हैं कण-कण में भगवान।

तो देखो, कितनी भारी भूल कर दी। हँ? खुद आकर कहते हैं कि तुम भारतवासी मुझको बहुत गालियाँ देते हो - कुत्ते में है, बिल्ले में है, ये है, वो है, कहाँ-कहाँ डाल देते। कण-कण में है। मिट्टी में मिलाय दिया। जब बिल्कुल ही तमोप्रधान बन जाते हो एकदम; क्या? बिल्कुल ही तमोप्रधान, तब तुम भारतवासी वर्थ नॉट ए पैनी बन गए ना। हर एक बात में सौ परसेन्ट इन्सॉल्वेन्ट बन गए। देखो सब दुखी बन गए हैं। अभी। अभी फिर ड्रामा के प्लैन अनुसार फिर मुझे रहम आता है। देखो, कहते हैं रहम करो, रहम करो, ऐसे कहते हैं ना। सभी कहते हैं, सब। वास्तव में तो जब भारत इन्सॉल्वेन्ट बनता है तो सब कहते हैं रहम करो। परन्तु फिर रहम किस पर करते हैं? भारत पर तो खास रहम करते हैं और आम सारी दुनिया पर भी रहम करते हैं क्योंकि इनको तो फट से जीवनमुक्ति का वर्सा दे देते हैं। हँ? क्या गायन है? हँ? किसके लिए गायन है? शास्त्रों में भी गायन है जनक को एक सेकण्ड में जीवनमुक्ति मिली। और जनक किसको कह दिया है शास्त्रों में? शास्त्रों में तो काम के आधार पर नाम पड़े हैं। जन माने जनम। क माने करने वाला। हँ? सारे संसार की सर्व आत्माओं को जनम देने वाला कौन? हँ? वो ही मनुष्य सृष्टि का बाप। तो उनको तो फट से जीवनमुक्ति देते हैं। एक सेकण्ड में जीवनमुक्ति।

और तुम बच्चे जानते हो। क्या? कि दूसरा तो कोई धरम स्वर्ग में आता ही नहीं है। आता है? नहीं आता? हँ? दूसरे धरम के फाउण्डेशन, फाउण्डर जो हैं, वो स्वर्ग में होते नहीं हैं आत्माएं? हँ? नहीं होती? वो कम कला वाले जो ब्राह्मण बने वो सतयुग, त्रेता में जाके कम कला वाले नारायण और राम बनते हैं कि नहीं? लेकिन वो आत्माएं, उनका जो राक्षसी रूप है वो मर्ज रहता है। क्या? जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, पांच विकार सतयुग में, त्रेता में, स्वर्ग में मर्ज हो जाते हैं, ऐसे ही उनके वो अवगुण मर्ज रहते हैं। तो तुम अच्छी तरह से जानते हो। कोई दूसरा धर्म स्वर्ग में इमर्ज होता ही नहीं। आता ही नहीं। हँ?

तो जरूर है कि भारतवासियों को तो जरूर उनकी याद सबसे जास्ती आती होगी। किनकी? शिवबाबा की। जब उनकी याद सबसे जास्ती आती होगी। किनकी? शिवबाबा की। जब उनकी याद है शिव की तो फिर अभी क्या करता है? हँ? याद करते हैं तो जानना चाहिए कि वो क्या करता है? वो तो फिर पता ही नहीं है कि इतनी यादगारें बनाई हैं, इतने शिवलिंग बनाते हैं, पूजा भी होती है, लेकिन उनके आक्यूपेशन का नहीं पता। 27.8.67 की वाणी का तीसरा पेज। ऐसे तो शिवजयंती भी होती है। क्या? शिवजयन्ती होती है कि शिवरात्रि होती है? भारत में क्या प्रसिद्ध है? शिवरात्रि प्रसिद्ध है। तो बाबा ने शिवजयंती क्यों बोला? क्योंकि जो बच्चे सामने बैठे हैं वो क्या मनाते? वो शिवजयंती मनाते। तो बताया, शिव जयंती भी होती है तो जो शिव जयंती मनाते हैं उनको अभी याद थोड़ेही है? क्या? कि उनका क्या आक्यूपेशन है? सन् 67 में याद नहीं था। अब याद होगा? हँ? अब भी याद नहीं। कह देते हैं शिव जयंती। जयजयकार। हँ?

तो शिव ने आकर क्या किया जो जयंती मनाते हैं, जयजयकार मनाते हैं? जिनका-जिनका जन्मदिन मनाते हैं उन्होंने कुछ किया ना। तब तो जनमदिन मनाते हैं ना। तो ये उनको कोई को भी पता नहीं। उनको कहके दूर क्यों कर दिया? हँ? क्योंकि जिनको पता नहीं रहता, लंबे समय तक भी पता नहीं रहता। सन्मुख बैठकरके भी पता नहीं रहता। ब्रह्मा के तन में आकरके सुनाते थे ना ज्ञान। तो उनको पता रहता था? और अभी भी? अभी भी पता नहीं है। कोई भी पता नहीं रहता। उनको कहके दूर क्यों कर दिया? हँ? क्योंकि वो विदेशी विधर्मियों में कन्वर्ट होने वाली आत्माएं हैं ना। इसलिए उनको कह दिया। थोड़ा नज़दीक हों तो कहें इनको। हँ? और ज्यादा नज़दीक हों तो कहें तुमको। तो तुमको तो इन्ट्रोड्यूस तुम्हीं को करते हैं। न इनको करते, न उनको करते।

तो ये मालूम तो होना चाहिए ना कि शिव जयंती जिनकी मनाते हैं उनका क्या आक्यूपेशन है, उनका धंधा क्या है? परंतु ये बात कोई जानवरों को तो याद नहीं होगी। हँ? मनुष्य याद करेंगे कि जानवर याद करेंगे? हँ? क्या हो गए जिनको याद ही नहीं है? हँ? जानवर हैं। इसलिए बाबा कहते हैं जानवर से भी बदतर। क्योंकि जानते ही नहीं हैं शिव ने आकर क्या किया? परन्तु वो तो गाते हैं ना। ऋषि-मुनि सब गाते आए। और बाप भी समझाते हैं - ये जो नॉलेज अभी देता हूँ ये किसी को भी नहीं है। एकदम नहीं है। क्या? ऋषि-मुनि भी क्या कहते आए? नेति-नेति। हम उसके आदि और मध्य, अंत को नहीं जानते। तो नहीं जानते तो अज्ञानी हुए ना। पर तुम बच्चों को बैठकरके सब कुछ समझाते हैं। हँ? रचता कौन है इस सृ्ष्टि का, हँ, और उस रचता ने क्या-क्या रचना रची। समझाते रहते हैं। तो बाप कहते हैं जो तुमको समझाते, तुम औरों के ऊपर भी रहम करो। समझाओ। तुम्हारे ऊपर मैं रहम करता हूँ और फिर कह करके; कौनसा रहम करता हूँ? कि तुम पहले अपने आप अपने ऊपर रहम करो। और रहम करने के लिए युक्तियाँ बताता है। समझा ना। युक्ति की बातें बताते हैं। जैसे टीचर स्टूडेन्ट के ऊपर रहम करते हैं ना। पढ़ाते हैं। तो पढ़ाते हैं तो रहम हुआ ना। रहम करते हैं। क्योंकि फिर जो पढ़ते हैं उनको सोर्स आफ इनकम मिल जाती है।

A morning class dated 27.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the middle portion of the second page on Sunday was that the highest on high stamp is of Trimurti. That should be imperishable. Hm? What is meant by imperishable? It is anyways affixed, it exists in the Golden Age and Silver Age, but it should also be in the Copper Age and Iron Age because Bhaarat alone is given the imperishable throne. So, Bhaarat does not know that the Supreme Father Supreme Soul comes and turns Bhaarat into heaven. So, there is no such human being. Why? If not Bhaarat, what if there is someone else? Hm? It is because Bhaarat itself is an imperishable religious land. It is an imperishable abode. What is meant by abode? Home. So, when the incorporeal Father comes; He tells that My home is also that Bhaarat, which is called Parambrahm. That is My imperishable abode. All others are temporary chariots, aren’t they? They are not permanent.

So, nobody remembers. No. You too forget every moment that Baba comes and makes us the masters of heaven. Who was told this? Hm? He said to Bhaarat only, but when He caused him to emerge and said, it was told at that time that you too have become degraded (taamsi). So, there is Maya, isn’t it? It makes you forget. This is the law. It is the rule. Did you understand? Which rule? Those who do not remember the Father commit a lot of mistakes. And they keep on committing. Look, because of not remembering Baba and because of not knowing Baba’s occupataion, Bhaarat continued to commit mistakes. Which occupation? Hm? What is the occupation (dhandha) of Baba? He has the occupation of transforming the sinful ones to pure ones. Hm? The Father has explained the biggest mistake in it. Hm? What is the biggest mistake? I was said to be omnipresent (sarvavyaapi) whereas I come as ekvyaapi (present in one). I come only in Bhaarat permanently; I come by adopting a permanent Chariot (mukarrar rath). So, this is the biggest mistake. Why? It is because will the intellect wander everywhere by saying ‘omnipresent’ or will it concentrate on one place? It wandered everywhere. Everyone’s intellect wandered. People of all the religions started accepting this very topic in the entire world. Earlier Muslims also used to say – Allah Miyaan lives in Arsh (a celestial abode beyond the sky); He does not live on this land (farsh). Now they too have started telling. What? Hm? He is in every particle just as the residents of India say that God is in every particle.

So, look, they have committed such a big mistake. Hm? He Himself comes and says – You residents of India abuse Me a lot – He is in a dog, He is in a cat, He is this, He is that; You put Me in what all places. He is in every particle. You mixed Me in the soil. When you become completely tamopradhan (impure); what? Completely tamopradhan; then you residents of India became worth not a penny, didn’t you? You became hundred percent insolvent in every topic. Look, everyone has become sorrowful. Now. Now, then as per the drama plan, I show mercy. Look, people say – show mercy, show mercy; people say like this, don’t they? Everyone says. Everyone. Actually, when Bhaarat becomes insolvent, then everyone says – Show mercy. But then, on whom does He show mercy? He shows mercy especially upon Bhaarat and shows mercy in general on the entire world because the inheritance of jeevanmukti (liberation in life) is granted to this one immediately. Hm? What is famous? Hm? For whom is it famous? It is famous in the scriptures also that Janak got jeevanmukti in a second. And who was called Janak in the scriptures? The names have been coined in the scriptures on the basis of the tasks performed. Jan means janam (birth). Ka means ‘doer’. Hm? Who is the one who gives birth to all the souls of the entire world? Hm? The same Father of the human world. So, he is given jeevanmukti immediately. Jeevanmukti in a second.

And you children know. What? That no other religion comes in heaven at all. Does it come? Doesn’t it come? Hm? Doesn’t the foundation, don’t the founder souls of other religions exist in heaven? Hm? Don’t they exist? Do those who became Brahmins with fewer celestial degrees become Narayans and Rams with fewer celestial degrees in Golden Age and Silver Age or not? But those souls, their demoniac form remains in a ‘merge’ form. What? For example, the five vices lust, anger, greed, attachment, ego merge in the Golden Age, Silver Age, heaven. Similarly their vices remain in a merged form. So you know very well. No other religion emerges in the heaven. It does not come at all. Hm?

So, it is certain that the residents of India must be remembering Him the most. Whom? ShivBaba. When His thoughts come to the mind the most; whose? Of ShivBaba. When there is remembrance of Shiv, then what does he do now? Hm? When you remember [Him], then you should know as to what He does. They do not know at all that so many memorials have been built, so many Shivlings are sculpted; worship also takes place, but they do not know about His occupation. Third page of the Vani dated 27.8.67. In a way Shivjayanti also takes place. What? Is Shivjayanti celebrated or is Shivratri celebrated? What is famous in India? Shivratri is famous. So, why did Baba utter Shivjayanti? It is because what do the children sitting in front of Him celebrate? They celebrate Shivjayanti. So, it was told that Shivjayanti is also celebrated; so, when Shivjayanti is celebrated, then do they remember Him now? What? [Do they remember] as to what is His occupation? They did not remember in 67. Do they remember now? Hm? They do not remember even now. They say Shivjayanti. Jaijaikaar (Victory to Him). Hm?

So, what did Shiv come and do that His Jayanti (birthday) is celebrated and His victory is hailed? All those whose birthday is celebrated have done something, haven’t they? Only then do they celebrate birthday, don’t they? So, none of them knows. Why was it made distant by uttering ‘they’ (unko)? Hm? It is because those who are not aware, do not remain aware for a long time. They do not know even while sitting face to face. He used to come in the body of Brahma and narrate knowledge, didn’t He? So, did he (Brahma) know? And even now? He does not know even now. Nobody knows. Why was it made distant by uttering ‘they’ (unko)? Hm? It is because they are souls which convert as videshis, vidharmis, aren’t they? This is why it was said ‘unko’ (they). If they are a little closer, then it could be said ‘these’ (inko). Hm? And if they are much closer, then it could be said ‘you’ (tumko). So, He introduces you only when He utters ‘tumko’ (you). Neither these, nor those.

So, you should know as to what is the occupation of the one whose Shivjayanti is celebrated. But animals will not remember this topic. Hm? Will human beings remember or will animals remember? Hm? What are those who don’t remember at all? Hm? They are animals. This is why Baba says – Worse than animals. It is because they do not know at all as to what Shiv did after coming? But they sing, don’t they? All the sages and saints have been singing. And the Father also explains – Nobody possesses this knowledge that I give now. They don’t have at all. What? What have the sages and saints also been saying? Neti-neti (Neither this, nor that). We do not know about His beginning, middle and end. So, when they don’t know, they are ignorant, aren’t they? But He sits and explains everything to you children, Hm? Who is the creator of this world, hm, and what all creation did that Creator create? He keeps on explaining. So, the Father says – I explain to you; you show mercy upon others also. Explain [to them]. I show mercy upon you and then after saying; which mercy do I show? That you first show mercy upon yourself. And He reveals the tacts to show mercy. Did you understand? He narrates the topics of tacts. For example, teacher shows mercy upon the students, doesn’t he? He teaches. So, it is mercy, isn’t it? He shows mercy. It is because those who study get the source of income.

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