Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 13 Jan 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2651, दिनांक 25.09.2018
VCD 2651, Dated 25.09.2018
प्रातः क्लास 28.8.1967
Morning Class dated 28.8.1967
VCD-2651-extracts-Bilingual

समय- 00.01-22.50
Time- 00.01-22.50


प्रातः क्लास चल रहा था - 28.8.1967. सोमवार को सातवें पेज के मध्यादि में बात चल रही थी – पहले-पहले जो पार्ट बजाने वाले होते हैं, वो आते हैं सतोप्रधान से तमोप्रधान में। बतावेंगे इतना जन्म लेकरके आते हैं। तो दूसरे भी तो तमोप्रधान में आते होंगे ना जो बाद में आते हैं। जो इस समय में हैं वो तमोप्रधान हैं। पुनर्जन्म लेंगे तमोप्रधान से। सतोप्रधान से तो जन्म मिल न सके। भ्रष्टाचार से ही जन्म लेंगे क्योंकि रावण राज्य है ना। तो ये समझाना होता है। रावण राज्य और राम राज्य। तो कोई वहाँ कान्फ्रेन्स में जाना चाहिए। तो भी संस्कृत गीता अच्छी जानते हों। तो वो बहुत अच्छा समझाय सकते हैं। और तुम्हारी तो सच्ची गीता है। हँ? वो संस्कृत गीता झूठी क्यों है? क्योंकि ढ़ेर सारे टीकाएं हो गईं। ढ़ेर सारी व्याख्याएं हो गईं। तुंडे-तुंडे मतिर्भिन्ना। यहाँ तो एक सुप्रीम सोल गॉड फादर है जो समझाते हैं। समझा ना?

यहाँ कोई वो कृष्ण नहीं समझाते हैं। तो दुनिया में कोई भी धरमवाले कृष्ण को गॉड फादर नहीं कहेंगे। नहीं। तो इससे साबित होता है कि उनको कोई भगवान नहीं कहा जाता। जिस भगवान के सभी आत्माएं बच्चे हैं। वो आत्माएं जो बच्चे हैं गॉड फादर के वो उनको गॉड फादर ही कहके बुलाते हैं। कोई बाप को थोड़े ही बुलाते हैं। या धरमपिता को थोड़ेही बुलाते हैं। जिसम को कभी भी गॉड नहीं कहा जा सकता है। तुम जभी वहाँ हो; कहाँ? आत्मलोक में, हँ, कोई तुमको फादर, बाबा, परमात्मा थोड़े ही कहेंगे। वो तो इस दुनिया की बात है। परमात्मा परम पार्टधारी। और वो परमात्मा तो एक ही है। जो आत्माओं के सिजरे में जो आत्माएं पार्ट बजाने वाली हैं, ऊपर में रहेंगी ना। शास्त्रों में भी दिखाया है। कहाँ रहते हैं? कैलाश पर्वत पर रहेंगे। देखो है ना। और उनका है आत्माओं का सिजरा। बाकि ऐसे थोड़ेही है कि सब आत्मिक स्थिति में स्थित हो जाते हैं।

तो आत्माओं के सिजरे में ऊपर है शिवबाबा। ऊँचे ते ऊँचा भगवंत। पीछे सब हैं बच्चे; कितने? 500 करोड़। तो ये भी आत्माएं हैं ना। सभी 500 करोड़ अपने ओ माइ गॉड फादर! ओ अल्ला! ओ फलाना! तो सबका बाप है ना बच्चे। उन धरमपिताओं को तो नहीं कहेंगे कि वो सबके बाप हैं। अच्छा! वो सबको फिर सर्व की सद्गति करने के लिए आते हैं। तो ये नाटक बना हुआ है। उन धरमपिताओं को, बिचारों को, उनके फालोअर्स को ये नाटक का किसको भी मालूम नहीं है। अगर नाटक का किसको भी मालूम पड़े तो फिर वो जरूर समझावें अच्छी तरह से। अभी तुम बच्चे नाटक को समझाते हो बहुत अच्छी तरह से। शुरू से लेकरके समझाते हो। जहाँ होता है ऊँचे ते ऊँचा भगवंत। बस। और शुरू-शुरू में ऐसा कोई दूसरा होता नहीं है सिवाय ऊँचे ते ऊँचे भगवंत के। पीछे आओ नीचे। पीछे कहेंगे किसको ऊँचा? देवताएं। वो ऊँचे ते ऊँचे वहाँ फिर हैं देवताएं। और उन देवताओं में नंबरवन? देवताओं में नंबरवन? हँ? देवताओं में नंबर, ओहो, देवताओं में नंबरवन है श्री कृष्ण।
(किसी ने कुछ कहा।) हँ? वो तो भगवान-भगवती हो जाते हैं। ऊँचे ते ऊँचा भगवंत। श्री कृष्ण नंबरवन एक दम। क्योंकि उन देवताओं को कहा ही जाता है 16 कला संपूर्ण। जो हैं ये ब्राह्मण परन्तु ये ब्राह्मण ऊँचे ते ऊँचे तो नहीं ठहरे ना। और वो तो आत्माएं भी प्योर हो गईं। हँ? ‘भी’ क्यों लगा दिया? क्योंकि शरीर भी प्योर और आत्मा भी प्योर। ब्राह्मणों के ऐसे थोड़ेही कहेंगे शरीर प्योर हो गए?

तुम यहाँ संगमयुगी हो जो बाप की संतान बनते हो। 28.8.1967 की वाणी का आठवां पेज। और बाप यहाँ तुमको संगमयुग में पढ़ाते हैं। हाँ, इसलिए तुम्हारा जीवन अमूल्य कहा जाता है। हँ? इनका जीवन नहीं अमूल्य गाया जाता है। किनका? हँ? लक्ष्मी-नारायण की तरफ इशारा किया। या ब्रह्मा के ऊपर इशारा किया। ऐसे नहीं है कहेंगे कि देवताओं का जीवन अमूल्य है। नहीं। मनुष्य का जीवन अमूल्य है। क्यों? हँ? मनुष्य का जीवन अमूल्य क्यों कहते हैं? भक्तिमार्ग में भी कहते हैं – बड़े भाग मानुष तन पावा। हँ? क्यों कहते हैं? क्योंकि इस जनम में तुम वास्तव में मनु की औलाद मनुष्य बनते हो, हँ, जिस मनु को ब्रह्मा कहा जाता है। तो ब्रह्मा के बच्चे ब्राह्मण हो। और ब्रह्मा में भगवान पढ़ाते हैं। इसलिए तुम्हारा जीवन अमूल्य है। कितने अमूल्य हो? बिल्कुल ही अमूल्य। अरे, तुमको अपना बच्चा बनाय बाप और फिर बैठकरके तुम्हारे ऊपर मेहनत करते हैं। अरे, देवताएं ऐसे थोड़ेही करते हैं। वो कोई ऐसा पुरुषार्थ थोड़ेही करते हैं। और तुमको तो बाप पुरुषार्थ कराते हैं। ये लक्ष्मी-नारायण को बच्चा होता होगा तो उनको बैठकरके पढ़ाएंगे थोड़ेही। वो पढ़ाएंगे क्या? यहाँ तो बाप तुमको पढ़ाते हैं। वहाँ तो भेज देंगे स्कूल में। और पढ़ाने वाला टीचर फिर दूसरा।

यहाँ तो देखो संगमयुग में बाप तुमको बैठ करके पढ़ाते हैं। तो ऐसे बाप का कितना बच्चों को रिगार्ड चाहिए। और कितना याद करना चाहिए। इसीलिए तो तीन संबंध बताय दिये ना। हँ? वो तुम्हारा बाप भी है, टीचर भी है, गुरु भी है। तो कोई तो याद पड़े। गुरु तो याद पड़े इनको। परन्तु माया ऐसी प्रबल है जो याद करने ही नहीं देती। याद की बदली में और ही रोला डाल देती है। बाबा जैसे समझाते हैं ना। तो जो सर्विसेबल बच्चा होगा उसको तो सर्विस का ही शौक होगा। सर्विस में लगे रहेंगे। हँ? माया रोला किसमें डालती है? चार सब्जेक्ट हैं ना। ज्ञान, योग, धारणा, सेवा। माया किसमें, कौनसे सब्जेक्ट में रोला डालती है? याद में। हँ? तो जो सर्विसेबुल बच्चा होगा, सर्विस का शौक होगा, वो तो कितने हर्षित रहेंगे। उनका मनन-चिंतन-मंथन भी चलता रहेगा।

ऐसे बहुत बच्चे हैं जो कहते हैं बाबा हमको नौकरी से छुड़ाओ। ये नौकरी की टोकरी से छुड़ाओ तो हम सर्विस में लग जाएं। कितना खींच होती है सर्विस में लग जाने के लिए! हँ? बाबा पूछते हैं कितनी नौकरी है? आठ-आठ सौ, हजार रुपया भी पघार किसी को मिलता है। माने? उस समय का हजार रुपया, आठ सौ रूपया भी बहुत होता था। हँ? तो वो भी कहते हैं नौकरी से छुड़ाओ। हँ? किसलिए? कि हम इस ईश्वरीय सेवा में लग जावें। क्योंकि मैं कहता हूँ कि बिगर पूछे नौकरी छोड़ नहीं सकते। क्या? बाप से पूछना पड़े। तो हो सकता है आगे चलकरके सर्विस में जरूरत होगी तो फिर बुलावेंगे। इस समय में तो बहुत कम है। ऐसे बच्चे जो सर्विस में बहुत होशियार हों। और जो होशियार हैं वो फिर कोई आफिसों में हैं, कोई किस सर्विस में हैं। कई बच्चियाँ भी हैं जो सर्विस में हैं। कोई नर्स हैं, कोई ड़ॉक्टर हैं, फलाना हैं। तो वो बच्चा बोलता है हमको नौकरी से छुड़ाय दियो। तो फिर हम इस ईश्वरीय सेवा में लग जाएं। है ना? तो उनको भी ऐसे ही पुरुषार्थ कराया जाएगा। कैसे? कि नौकरी भी करो और जो टाइम मिले तो सेवा करो।

बाकि आगे चलकरके सर्विस जब बहुत बढ़ेगी तो नौकरी छोड़नी पड़ेगी। हँ? क्योंकि उस समय तो फिर बाबा को बहुत हैंड्स चाहिए। जैसे लड़ाई के लिए फिर देखो आर्डिनेन्स निकालते हैं ना। हँ? कि नहीं, अब घर में नहीं बैठना है। सब आ जाओ। हँ? मिलेट्री में आ जाओ। अभी तो घर में बैठने का टाइम नहीं। लड़ाई के मैदान पर आ जाओ। ऐसे आर्डिनेन्स निकालते हैं ना। तो वो नौकरी चाकरी तो छुड़ाय देते हैं ना बच्ची। वो सभी नौकरी-चाकरी करने वाले बाबा की लिस्ट में होते हैं। कोई विलायत में हैं। यहाँ इतना नहीं हैं। विलायत में तो सबकी लिस्ट रहती है। कोई भले कोई कुछ भी धंधा करता हो।

देखो, एक विलायत में है या अमेरिका में है, वो एक तो वो था वो कुश्ती लड़ने वाला। एकदम मजबूत। है ना। क्या कहते हैं उनको? रेसलर। बहुत होशियार था एकदम। तो उनको नोटिस निकला – चलो, तैयार हो जाओ। लड़ाई छिड़ गई है। अभी लड़ाई में जाने का है। तो उसने फिर रिफ्यूज़ लिख दिया कि हम नहीं आवेंगे। तो फिर क्या किया? उनको जेल में डाल दिया। ऐसे टाइम पर कोई रिफ्यूज़ कर नहीं सकते हैं। उनको जेल दे दिया। क्योंकि ऐसे टाइम पर भी रिफ्यूज़ किया ना। तो ये रिफ्यूज़ करने का कायदा नहीं है कि वो मिलिट्री को रिफ्यूज कर दें क्योंकि उन लोगों को ड्रिल मिलती रहती है। और ड्रिल देते ही तब हंt जबकि जब उनको जरूरत पड़ेगी तो फिर बुला लेंगे। है ना। तो यहाँ भी ऐसा होता है ना बच्चे। कोई पेंशनर होते हैं ना। जब जरूरत ऐसी कोई होती है तो उनको बुला लेते हैं। तो फिर वो आने के लिए बंधा हुआ है। जरूर आना पड़े। और अगर नहीं आवे तो फिर कोर्ट मार्शल कर देवें। कोर्ट मार्शल माना ये केस चलाए, तो केस चलाय के फिर शूट भी कर देते हैं। मिलेट्री के कायदे बहुत कड़े होते हैं। वो केस चलाय लेते हैं। कभी ऐसे बहुत नाज़ुक टाइम होते हैं ना, तो ऐसे नाज़ुक टाइम में रिफ्यूज कर दें तो शूट भी कर देवें। अगर सर्विस पर न चले तो। तो यहाँ तो बच्चे हैं। शूट की तो बात ही नहीं है इसमें। हाँ, बाकि अच्छा जो अच्छी तरह से नहीं सर्विस कर सकते हैं तो उनका यह पद भ्रष्ट हो जाता है। तो यहाँ और तो कोई कायदे हैं नहीं।


A morning class dated 28.8.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the seventh page on Monday was – Those who play the part first of all move from being satopradhan (pure) to being tamopradhan (degraded or impure). It will be told that they have been taking such and such number of births. So, others, who come later, must also be coming to the stage of being tamopradhan, don’t they? Those who are living at present are tamopradhan. They will get rebirth from tamopradhan ones. They cannot get birth through satopradhan ones. They will get birth through unrighteousness only because it is a kingdom of Ravan, isn’t it? So, you have to explain this. Kingdom of Ravan and the kingdom of Ram. So, you should go there to attend the conference. Still, those who know the Sanskrit Gita nicely can explain very well. And yours is the true Gita. Hm? Why is that Sanskrit Gita false? It is because numerous commentaries have been made on it. Numerous interpretations have been made. Tundey tundey matirbhinna (there are as many opinions as the number of people). Here, there is one Supreme Soul God Father who explains. Did you understand?

That Krishna doesn’t explain here. So, people belonging to any religion will not call Krishna as God Father. No. So, it proves that he is not called God, the God whose children are all the souls. Those souls who are children of God Father call Him as God Father only. They do not call the Father. Or they do not call the founder of the religion. The body can never be called God. When you are there; where? In the Soul World, hm, you will not be called Father, Baba, Supreme Soul. That is about this world. The Supreme Soul, the supreme actor. And that Supreme Soul is only one. In the tree of souls, the souls playing their part will live above, will they not? It has also been shown in the scriptures. Where do they live? They will live on the Mount Kailash. Look, it exists, doesn’t it? And theirs’ is the tree of souls. But it is not as if everyone becomes constant in the soul conscious stage.

So, in the tree of souls ShivBaba is at the top. The highest on high God (Bhagwant). Later are all the children; How many? 500 crores. So, these are also souls, aren’t they? All the 500 crore say ‘O my God Father’. O Allah! O such and such! So, children, He is the Father of everyone, isn’t He? Those founders of religions will not be called the Father of everyone. Achcha! He then comes to cause the true salvation of everyone. So, this drama is already pre-ordained. Those founders of religions, poor fellows, their followers, nobody knows about this drama. If anyone comes to know of this drama, then they will definitely explain nicely. Now you children explain about the drama very nicely. You explain from the beginning. It is the place where there is highest on high God. That is it. And in the very beginning there is none else except the highest on high God. Later come down. Later on who will be called great? The deities. Then there the highest on high are deities. And who is number one among those deities? Number one among the deities? Hm? Number [one] among the deities, oho, number one among the deities is Shri Krishna.
(Someone said something.) Hm? They are Bhagwaan-Bhagwati. Highest on high God. Shri Krishna is completely number one. It is because those deities are said to be perfect in 16 celestial degrees. They are these Brahmins but these Brahmins are not highest on high, are they? And those souls are also pure. Hm? Why was ‘also’ added? It is because the body is also pure and the soul is also pure. Will it be said for the Brahmins that the bodies have become pure?

You, who become children of the Father, are Confluence Aged here. Eighth page of the Vani dated 28.8.1967. And the Father teaches you here in the Confluence Age. Yes, this is why your life is called valuable. Hm? The life of these is not praised as valuable. Whose? Hm? A gesture was made towards Lakshmi-Narayan. Or a gesture was made towards Brahma. It will not be said that the life of deities is valuable. No. The life of human beings is valuable. Why? Hm? Why is the life of human beings called valuable? It is said on the path of Bhakti also – Badey bhaag maanush tan paava (the human body was acquired due to great fortune). Hm? Why do they say? It is because actually you become the children of Manu, i.e. manushya (human beings) in this birth. The Manu who is called Brahma. So, you are Brahma’s children, i.e. Brahmins. And God teaches in Brahma. This is why your life is valuable. How valuable are you? Completely valuable. Arey, the Father makes you His children and then sits and works hard on you. Arey, deities don’t do like this. They do not make such purusharth. And the Father makes you do purusharth. If these Lakshmi and Narayan have children, then will they sit and teach them? Will they teach? Here the Father teaches you. There they will send them to the school. And the teacher who teaches is different.

Look here the Father sits and teaches you in the Confluence Age. So, children should have so much regard for such Father. And you should remember Him so much. This is why three relationships have been mentioned, weren’t they? Hm? He is your Father also, teacher also, Guru also. So, someone should come to the mind. The guru should come to their mind. But Maya is so strong that it does not allow you to remember at all. Instead of allowing you to remember, it creates even more obstacles. It is as if Baba explains, doesn’t He? So, the serviceable child will have the interest for service only. He will remain engaged in service. Hm? In what does Maya create obstacle? There are four subjects, aren’t there? Knowledge, Yoga, dhaarana (inculcation of virtues) and service. In what, in which subject does Maya create obstacles? In remembrance. Hm? So, the serviceable child who has interest in service will be so happy. He will keep on thinking and churning.

There are many such children who say – Baba, liberate us from job. Liberate us from this basket (tokri) of job (naukari) so that we could engage ourselves in service. They feel so much pull to get engaged in service. Hm? Baba asks – You are left with how many years of job? Some get even 800, 1000 rupees salary. What does it mean? Thousand, eight hundred rupees of that time used to be a lot. Hm? So, they too say – Liberate us from the job. Hm? Why? So that we could engage ourselves in Godly service. It is because I say that you cannot leave the job without asking. What? You will have to ask the Father. So, it is possible that in future if there is requirement in service, then you will be called. At this time they are very few. Such children who are very clever in service. And those who are intelligent are working in some offices; some are in some other service. There are many daughters also who are in service (jobs). Some are nurses, some are doctors, and some are something else. So, that child says – Liberate me from this job so that I could engage myself in this Godly service. Isn’t it? So, they will also be made to do such purusharth. How? So that they could do their jobs also and do service in the time that they get.

In future when the service increases a lot, then you will have to leave the job. Hm? It is because at that time Baba will require a lot of hands. For example, you see ordinance is issued for wars, isn’t it? Hm? No, now you don’t have to sit at home. Everyone come over. Hm? Join the military. Now it is not the time to sit at home. Come to the battlefield. They issue such ordinance, don’t they? So, daughter, they make them leave their jobs, etc., don’t they? All those who are doing jobs are in Baba’s list. Some are abroad. There are not many here. In the foreign countries they have the list of everyone. Someone may be doing any business.

Look, one is in a foreign country or in America; one was that person who used to wrestle. Completely strong. Wasn’t he? What is he called? Wrestler. He was very intelligent; completely. So, he was issued a notice – come on, get ready. War has broken out. Now you have to go to war. So, then he refused in writing that he will not come. So, then what was done? He was put in jail. At such time nobody can refuse. He was sentenced to jail. It is because he refused at such time, didn’t he? So, it is against the rule to refuse that they refuse [joining] the military because those people keep on receiving drill (military training). And drill is imparted only because whenever there is requirement they will be called. Isn’t it? So, it happens like this here as well children, doesn’t it? Some are pensioners, aren’t they? When there is any such requirement, then they are called. So, then he is bound to come. He will have to definitely come. And if he does not come, then he will be court marshaled. Court Marshall means that this case will be filed; and after filing the case they also shoot him. The rules of military are very strict. They file cases. Sometimes there are very delicate times; so, at such delicate times, if someone refuses, then they also shoot if they do not follow service [rules]. So, here [on the path of knowledge] there are children. There is no question of shooting here. Yes, those who cannot do service well, then their post becomes degraded. So, there are no other rules here.

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नोटः यह केवल एक प्रारूप है। उक्त वीसीडी के संपूर्ण मूल पाठ या मूल आडियो, वीडियो के लिए www.adhyatmik-vidyalaya.com देखिये।
Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 15 Jan 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2652, दिनांक 26.09.2018
VCD 2652, Dated 26.09.2018
रात्रि क्लास 28.8.1967
Night Class dated 28.8.1967
VCD-2652-extracts-Bilingual

समय- 00.01-15.25
Time- 00.01-15.25


आज का रात्रि क्लास है - 28.8.1967. जो मुख्य फायदा है वर्सा पाने का मुक्ति और जीवनमुक्ति का, उनसे कोई कनेक्शन नहीं है वास्तव में। ये क्या बोल दिया? हँ? हँ? मुख्य फायदा है, हँ, उसका कनेक्शन नहीं है? मुक्ति-जीवनमुक्ति का कनेक्शन नहीं है? नहीं है? अरे? माने मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा नहीं पाना? फिर कनेक्शन नहीं है? हँ? क्यों बोला ऐसे? मुख्य फायदा फिर क्या है? हँ? मुख्य फायदा है। क्या है फिर मुख्य फायदा? हँ? मुक्ति-जीवनमुक्ति का तो मुख्य फायदा नहीं है। क्योंकि वर्तमान में जो पुरुषार्थी जीवन है, और पुरुषार्थी जीवन पूरा होगा तब मुक्ति मिलेगी या अभी मिल जाएगी जीवनमुक्ति भी? पहले मुक्ति, फिर जीवनमुक्ति। (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, जीवनमुक्ति वैकुण्ठ में जीवन नहीं होगा? मरे हुए होंगे क्या? हँ? वैकुण्ठ में मुर्दे होंगे क्या? जीवन होगा ना। हँ। तो मुक्ति-जीवनमुक्ति का मुख्य फायदा नहीं है? हँ? है। माने मुक्ति-जीवनमुक्ति का मुख्य फायदा है अभी? है? चुप! कुछ पता नहीं। हँ? कोई फायदा नहीं? अरे, अभी जीवनमुक्ति-मुक्ति मिल जाएगी जो समझते हैं? पुरुषार्थ पूरा होगा तब मुक्ति-जीवनमुक्ति मिलेगी या अभी मिलेगी? अभी है? है? अभी तो नहीं। फिर क्या फायदा है? फिर मुख्य फायदा क्या है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) याद का मुख्य फायदा है? अच्छा? वर्सा याद का लेना है? हँ? याद वर्सा है बाप का?

ये तो भगत भी कहते हैं कि कोई न कोई रूप में भगवान आएगा। और वो ही आकरके भक्ति का फल देगा। क्या है भक्ति का फल? हँ? भगवान आएगा तो भक्ति का फल देगा ज्ञान। ज्ञान देगा तो कौन देगा? ज्ञान देने वाला कौन है? हँ? कहेंगे सुप्रीम सोल बाप है। जो जन्म-मरण के चक्र में नहीं आता, वो ही ज्ञान दाता है। हँ? वो ज्ञान दाता उसको कहा शिवबाबा। वो भक्ति का फल देगा। हँ? क्या देगा भक्ति का फल? सवाल तो ये है। हँ? भक्ति का फल क्या देगा? (किसी ने कुछ कहा।) ज्ञान देगा। तो ज्ञान मिल नहीं रहा है क्या? हँ? मिल रहा है? किसको मिल रहा है? ब्रह्माकुमारियों को मिल रहा है ज्ञान या प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारियों को ज्ञान मिल रहा है? ज्ञान किसको मिल रहा है? क्योंकि पहले ज्ञान आता है फिर ज्ञान दाता आता है बुद्धि में। तो अभी ज्ञान आ रहा है, ज्ञान का वर्सा मिल रहा है क्योंकि ज्ञान देने वाला निराकार बाप है। तो उसका वर्सा भी निराकार ही होगा। निराकारी बाप का निराकारी वर्सा ज्ञान। तो मुख्य फायदा क्या हुआ? हँ? क्या मुख्य फायदा हुआ? अरे, बाप से क्या मुख्य फायदा हुआ? क्या मिलता है? ज्ञान मिलता है। तो अब तो प्राप्ति हो गई ना। जो पाना था सो पा लिया ना। हँ? प्राप्ति हो गई ना। और पुरुषार्थ खतम। हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) ज्ञान दाता चाहिए? अच्छा? तो ज्ञान मिल गया पूरा? ज्ञान पूरा मिल गया माना ज्ञान दाता भी समझ में आ जाता है। क्या? वो निराकार बाप आता ही इसलिए है कि ज्ञान दाता का प्रैक्टिकल रूप में परिचय मिले। तो ज्ञान दाता से क्या मिलेगा? हँ? निराकार से तो निराकारी वर्सा ज्ञान का मिलता है। हँ? और ज्ञान पहले आता है। ज्ञान दाता बाद में आता है।

तो चलो ज्ञान दाता भी बुद्धि में आ गया कि ये है ज्ञान दाता प्रैक्टिकल में। तो उससे क्या मिलता है? अरे! उससे कुछ मिलता है या नहीं मिलता है? ऐसे ही ठन-ठन गोपाल? हँ? क्या मिलता है?
(किसी ने कुछ कहा।) वर्सा मिलता है? अरे! निराकार बाप से वर्सा नहीं मिला? मिल गया कि नहीं मिला? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) वर्सा साकार में चाहिए? साकार में क्या वर्सा होता है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) साकार में वैकुण्ठ होता है? वैकुण्ठ पहले मिल जाएगा? कि पहले मुक्ति? मुक्ति मिलेगी या पहले जीवनमुक्ति मिल जाएगी? हँ? पहले तो मुक्ति मिलती है ना। तो काहे से मुक्ति? मुक्ति काहे से? चोर डकैतों ने पकड़ लिया क्या? हँ? काहे से मुक्ति? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, दुख-दर्दों से मुक्ति। अच्छा! तो निराकार बाप से, निराकार बाप ने आकरके जो ज्ञान का वर्सा दिया, उससे दुख-दर्दों से मुक्ति नहीं होती? हँ? शास्त्रों में तो वैसे भी कहा है - रिते ज्ञानान् न मुक्ति। ज्ञान से ही मुक्ति होती है। तो मुक्ति हुई नहीं अभी? हँ? मुक्ति नहीं हुई? अरे? ज्ञान से मुक्ति नहीं होती है? अरे, होती है कि नहीं होती है? माने शास्त्रकारों ने झूठ बोल दिया कि ज्ञान से मुक्ति होती है। हँ? मुक्ति नहीं होती? कैसे? ज्ञान से कैसे मुक्ति होती है? हँ? हँ? कोई बड़ा ज्ञान बघारते रहते हैं। हँ? ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ और उनकी अम्मा जगदम्बा कितना ज्ञान बघारती है! उससे कोई मुकाबला भी नहीं कर सकता ज्ञान का। कर सकता है? नहीं। तो वाचा की देवी कही जाती है। फिर? हँ? मुक्ति का अनुभव ही नहीं हुआ दुख-दर्दों से? हुआ?

(किसी ने कुछ कहा।) वाह भाई! माताजी को तो मुक्ति मिल गई। हँ? हुआ? मुक्ति मिल गई? हँ? कुंभकरण से पूछो तो वो कहेगा - हाँ, हमको तो मुक्ति रोज मिलती, छह महीने की मुक्ति मिल जाती है। क्या? आराम से सो जाओ। मुक्ति। वाह भाई। अरे, ज्ञान से भी मुक्ति मिलती है या नहीं मिलती है? मिलती है? क्या मुक्ति मिलती है? हँ, बताओ, वो मुक्ति किससे? दुख-दर्दों से मुक्ति मिलती है? दुख-दर्दों से मुक्ति मिली? हँ? उन्हें मिली। तुम्हें क्या मुक्ति, फिर क्या मुक्ति मिलती है? हँ? अरे, बताओ, ज्ञानी नाम अग्रगण्यम? हँ? जो ज्ञानियों में आगे गिने जाते हैं उनको तो बताना चाहिए ना। हँ? (किसी ने कुछ कहा।) देह और देह के संबंध मिल जाते हैं? वाह भइया! ये तो बढ़िया, ये तो बढ़िया वर्सा मिला। हँ? देह मिल जाती है और देह, (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, क्या वर्सा मिलता है? देह और देह के संबंध नहीं। तो फिर क्या वर्सा मिलता है? (किसी ने कुछ कहा।) देह, देह के संबंधियों से मुक्ति मिल जाती है। मुक्ति मिल गई है। धत्, तुम्हारा भला हो। वो भी नहीं मिली? हँ? अरे, मिल गई? फिर ज्ञान का फायदा क्या हुआ? हँ? वो निराकार बाप आया और आकरके ज्ञान का वर्सा दिया और मुक्ति मिली नहीं। तो फायदा हुआ या नुकसान हुआ? हँ? फायदा तो कुछ नहीं हुआ। माना ज्ञान से मुक्ति मिलती नहीं है? हँ? मिलती है? बड़ी भारी मुझान है।

अरे, जो ऊँच ते ऊँच बाप कहा जाता है आत्माओं का उससे प्राप्ति नहीं होगी तो किससे प्राप्ति होगी? हँ? सुप्रीम सोल है, परमपिता जिसे कहा जाता है शिव, सदा शिव, हँ, वो, वो मुक्ति का अनुभव करता है कि नहीं? सदा मुक्त है या नहीं? हँ? और जो सदा मुक्त है वो आकरके दे रहा है अपना वर्सा तो नहीं मिला? अरे? अच्छा। जब मनन-चिंतन-मंथन की स्टेज में जाते हैं सूक्षम वतन जिसे कहा जाता है, ये दुनिया दुख-दर्दों की भूलने लगती है, स्वरग की नई दुनिया याद करते हैं, उस नई दुनिया में जाने के लिए जो हमें क्या पुरुषार्थ करना है, क्या प्रयत्न करना है वो सेवाएं याद आती हैं तो ये दीन-दुनिया भूलती नहीं है? तो मिला कि नहीं मिला? हँ? अरे, जब हम मनन-चिंतन-मंथन करते हैं ज्ञान का तो कितना समय मनन-चिंतन-मंथन में निकल जाता है तो वो सारा समय दुख-दर्दों से मुक्ति का अनुभव होता है या नहीं होता है? देह के संबंधियों से मुक्ति मिलती है या नहीं मिलती है? जो देह के संबंधी दुखदायी हैं, देह के पदार्थ जो दुखदायी हैं, हँ, तो उनसे मुक्ति नहीं मिलती है? हँ? तो ऐसे क्यों कहते हैं हमें कुछ भी वर्सा-पर्सा नहीं मिला? हँ? वो ज्ञान का वर्सा वर्सा नहीं है? मुख्य फायदा नहीं है? इस पुरुषार्थी जीवन में वो मुख्य फायदा नहीं है? हँ? वो ही तो मुख्य फायदा है। क्या? मनन-चिंतन-मंथन में, ज्ञान की बातों में इतनी बुद्धि लगी रहे कि हमारी आत्मा के, आत्मा रूपी रिकार्ड के जन्म-जन्मान्तर के पार्ट खुलते रहें तो खुशी नहीं आएगी?

Today’s night class is dated 28.8.1967. There is no connection with the main benefit of achieving the inheritance of mukti (liberation) and jeevanmukti (liberation in life). What has been said? Hm? Hm? Is there no connection with the main benefit? Is there no connection of mukti-jeevanmukti? Is there not? Arey? Does it mean that you don’t have to achieve the inheritance of mukti-jeevanmukti? Then is there no connection? Hm? Why was it said so? Then, what is the main benefit? Hm? There is a main benefit. What is then the main benefit? Hm? There is no main benefit of mukti-jeevanmukti. It is because in the purusharthi life at present and will you get mukti when the purusharthi life is over or will you get jeevanmukti also now? First mukti, then jeevanmukti.
(Someone said something.) Yes, jeevanmukti; will there not be life (jeevan) in Vaikunth? Will you be dead? Hm? Will you be corpses in Vaikunth? There will be life, will there not be? Yes. So, is there no main benefit of mukti-jeevanmukti? Hm? There is. Does it mean that there is a main benefit of mukti-jeevanmukti now? Is it there? Silent! You don’t know anything. Hm? Is there no benefit? Arey, do you think you will get jeevanmukti-mukti now? Will you get mukti-jeevanmukti when your purusharth is over or will you get it now? Do you have it now? Do you have? You don’t have now. Then what is the benefit? Then what is the main benefit? Hm? (Someone said something.) Is there the main benefit of remembrance? Achcha? Do you have to obtain the inheritance of remembrance? Hm? Does the Father give the inheritance of remembrance?

Even the devotees say that God will come in one form or the other. And He will only come and give the fruits of Bhakti (devotion). What is the fruit of Bhakti? Hm? If God comes, He will give the fruit of Bhakti, i.e. knowledge. If knowledge is to be given, who will give? Who is the giver of knowledge? Hm? It will be said – It is the Supreme Soul Father. The one who does not pass through the cycle of birth and death is the giver of knowledge. Hm? That giver of knowledge is called ShivBaba. He will give the fruits of Bhakti. Hm? What is the fruit of Bhakti that He will give? The question is this. Hm? What is the fruit of Bhakti that He will give?
(Someone said something.) He will give knowledge. So, are you not getting knowledge? Hm? Are you getting? Who is getting? Are the Brahmakumaris getting knowledge or are the Prajapita Brahmakumaris getting knowledge? Who is getting knowledge? It is because first the knowledge comes and then the giver of knowledge comes in the intellect. So, now the knowledge is coming, the inheritance of knowledge is being received because the giver of knowledge is the incorporeal Father. So, His inheritance will also be incorporeal only. The incorporeal inheritance of incorporeal Father is knowledge. So, what is the main benefit? What is the main benefit? Arey, what is the main benefit from the Father? What is received? Knowledge is received. So, now you have achieved it, haven’t you? You have achieved whatever you had to achieve, haven’t you? Hm? You have achieved, haven’t you? And the purusharth ends. Hm? (Someone said something.) Is the giver of knowledge required? Achcha? So, have you received the knowledge completely? If you receive the knowledge completely, then it means that the giver of knowledge is also understood. What? That incorporeal Father comes only to enable us to receive the introduction of the giver of knowledge in practical. So, what will be received from the giver of knowledge? Hm? One receives the incorporeal inheritance of knowledge from the incorporeal. Hm? And the knowledge comes first. The giver of knowledge comes later on.

So, okay, the giver of knowledge was also understood by the intellect that this is the giver of knowledge in practical. So, what is received from Him? Arey! Is anything received from Him or not? Is He ‘than-than Gopal’ (penniless)? Hm? What is received?
(Someone said something.) Is inheritance received? Arey! Did you not receive inheritance from the incorporeal Father? Did you receive or not? Hm? (Someone said something.) Is the inheritance required in corporeal form? What is the inheritance in corporeal form? Hm? (Someone said something.) Is there Vaikunth in corporeal form? Will the Vaikunth be received first? Or will mukti be received first? Will you get mukti or will you get jeevanmukti first? Hm? First mukti is received, isn’t it? So, mukti (liberation) from what? Mukti from what? Have thieves and dacoits caught you? Hm? Liberation from what? (Someone said something.) Yes, liberation from sorrows and pains. Achcha! So, from the incorporeal Father; don’t you get liberation from sorrows and pains through the inheritance of knowledge that the incorporeal Father come and give? Hm? It has even otherwise been told in the scriptures – Ritey gyaanaan na mukti. One gets mukti only through knowledge. So, have you been liberated now or not? Hm? Haven’t you been liberated? Arey? Don’t you get liberation through knowledge? Arey, do you get or don’t you? Does it mean that the writers of the scriptures have spoken lies that mukti is caused through knowledge? Hm? Aren’t you liberated? How? How do you get mukti through knowledge? Hm? Hm? Some keep on narrating a lot of knowledge. Hm? Brahmakumar-kumaris and their mother Jagdamba narrates so much knowledge! Nobody can counter her in knowledge. Can anyone? No. So, she is called the Devi of speech. Then? Hm? Did you not experience liberation from sorrows and pains? Did you?

(Someone said something.) Wow brother! Mataji has been liberated. Hm? Has she? Did you receive mukti? Hm? If you ask Kumbhakarna, he will say – Yes, I get mukti everyday; I get mukti for six months. What? Sleep comfortably. Mukti. Wow brother! Arey, do you get mukti through knowledge also or not? Do you get? What mukti do you get? Hm, speak up; that mukti from what? Do you get mukti from sorrows and pains? Did you get mukti from sorrows and pains? Hm? They got. Do you get mukti? Then what mukti do you get? Hm? Arey, speak up, gyaani naam agraganyam (the name of knowledgeable person is at the forefront)? Hm? Those who are counted in the frontline among the knowledgeable ones should tell, shouldn’t they? Hm? (Someone said something.) Do you get the body and bodily relations? Wow brother! This is a nice, a nice inheritance that you received. Hm? You get body and body’s (Someone said something.) Yes, what inheritance do you receive? Not the body and bodily relations. So, then what inheritance do you receive? (Someone said something) You get liberation from the body and the relatives of the body. You have got liberated. Damn it; may you be blessed. Didn’t you receive even that? Hm? Arey, did you get? Then what is the benefit of knowledge? Hm? That incorporeal Father came and He gave the inheritance of knowledge after coming and you did not get mukti. So, were you benefitted or did you suffer loss? Hm? You did not get any benefit. Does it mean that you don’t get liberation through knowledge? Hm? Do you get? It is a big confusion.

Arey, if you do not achieve attainments from the one who is called the highest on high Father of souls, then from who else will you achieve? Hm? Does the Supreme Soul, who is called the Supreme Father, Sadaa Shiv experience mukti (liberation) or not? Is He forever liberated (mukt) or not? Hm? And if the one who is forever liberated has come and is giving His inheritance, then did you not get it? Arey? Achcha. When you go into the stage of thinking and churning, which is called the Subtle Region, when you start forgetting this world of sorrows and pains, when you remember the new world of heaven, when you remember the purusharth, the efforts, the services that you have to do to go to the new world, then don’t you forget this world? So, did you get it [the inheritance] or not? Hm? Arey, when you think and churn the knowledge, then so much time passes in thinking and churning; so, during that entire time do you experience liberation from sorrows and pains or not? Do you get mukti from the relatives of the body or not? Do you not get liberation from the relatives of the body who cause sorrows, the things related to the body that cause sorrows? Hm? Then why do you say that we did not get any inheritance? Hm? Is that not an inheritance of knowledge? Is it not the main benefit? Is it not a main benefit in this purusharthi life? Hm? That itself is the main benefit. What? If the intellect remains so busy in thinking and churning, in the topics of knowledge that the parts (roles) of many births of our soul, our soul-like record start getting revealed, then will you not get happiness?

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