Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 21 Jan 2013

वी.सी.ड़ी नं.260 कैसेट नं.741 अहमदाबाद मु. 10.10.66 ता.23.07.05
उद्धरण-भाग-8


मैं तो ज्ञान का सागर हूँ। तुम समझते हो प्रदर्शनी से बहुतों का कल्याण होता है। कौनसी प्रदर्शनी? तो उन्होंने ढ़ेर सारे चित्र निकाल दिए। अरे, ढेर सारे चित्रों की बात नहीं है। बाबा कहते है इन चार चित्रों को ही छत इतना ऊँचा बनाओ। बड़े-बड़े चित्र बनावेंगे तो अंधें की औलाद अंधों की आँखें खुलेंगी। तो उनको समझाने में सहज हो जावेगा। प्रदर्शनी से बहुतों का कल्याण हो सकता है। लेकिन....(किसी ने कहा – ये चार चित्रों में।) हाँ, चार चित्रों में समझाने में बहुत कल्याण होगा। ईश्वकर कल्याणकारी है ना। तुम्हारा भी कल्याण हो रहा है। परंतु फिर इसमें विचार सागर मंथन जरूर चाहिए। क्या? इन चार चित्रों में बहुत विचार सागर मंथन करना चाहिए। विचार सागर मंथन करते रहें, स्मृति में लाते रहें तो बहुत फायदा होगा।

उल्टी-सुल्टी बातें तो एक कान से सुनो और दुसरे कान से निकाल दो। उल्टी-सुल्टी माना? जो बाबा की मुरली में बोली हुई बातों के बरखिलाफ और दूसरी-दूसरी बातें हैं उनमें जास्ति ध्यान नहीं देना चाहिए। बाप कहते हैं, हम तुमको बहुत अच्छी बातें सुनाता हूँ। दूसरे-दूसरे जो कुछ सुनाते है वो सब उल्टी–सुल्टी बातें हैं। मनुष्यों से जो कुछ आता है वो अज्ञान आता है। मैं जो कुछ तुमको सुनाता हूँ, वो ज्ञान सुनाता हूँ। अपने मुँह मियाँ मिट्ठू सबसे ज्यादा कौन बनता है?
(किसी ने कुछ कहा।) नहीं। सबसे ज्यादा बड़ा मुँह मियाँ मिट्ठू है शिवबाबा। वो गीता में भी ऐसे ही है – मैं ये हूँ, मैं वो हूँ। (किसी ने कहा – हाँ, सबमें बताया है।) हाँ, सबमें श्रेष्ठ मैं हूँ। (किसी ने कुछ कहा।) नहीं तो बात तो सच्ची बताते हैं ना। झूठी बात तो नहीं बताते हैं? (किसी ने कहा – नहीं राईट बात है।) हाँ जी। कितनी अच्छी–अच्छी बातें सुनाते है!

नम्बर वन मुख्य बात एक है; क्या? कोई को भी जो भी आये उसके बाप का परिचय देते रहो। जब है ही नम्बर वन तो नम्बर वन का परिचय देंगे तो नम्बर वन लिस्ट में आ जावेंगे। नम्बर वन लिस्ट कौनसी है? सूर्यवंशियों की। नम्बर दो की लिस्ट कौनसी है? चंद्रवंशियों की। फिर नम्बर तीन, नम्बर चार, इस्लामी, बौद्धी, क्रिश्चियन। तो कोई को भी बाप का परिचय दो। बस! एक बाप को याद करो। वो ही सब कुछ है। सारी डोरी उस एक के हाथ में है। क्या? कठपु‍तलियों का खेल देखा है कभी? कठपुतलियों का खेल जब दिखाते हैं तो पर्दा पड़ा हुआ होता है, कठपुतलियाँ ऊपर आकर के नाचती है, हाथ-पांव डुलाती हैं। तो उसमें धागे लगे हुए होते हैं महीन-महीन। और वो धागे जो होते हैं दसों ऊँगलियों से वो नचाने में बहुत प्रैक्टिस....पक्की प्रैक्टिस होती है उनकी। वो यूं-यूं करके, यूं-यूं करके नचाता रहता है। तो हम सब क्‍या हैं उसकी? हम उसकी कठपुतलियाँ हैं। वो जैसे-जैसे नचाता है वैसे नाचते रहते हैं। कहते हैं एक-एक पत्ते? को, पत्तें-पत्ते को हिलाने वाला एक है।
(किसी ने कहा – बाबा, तो ये निराकार के लिए बोला कि ...?) निराकार कैसे हिलायेगा? साकार के द्वारा ज्ञान देगा ना।

अंगुली से इशारा करेंगे – सब कुछ परमात्मा करते हैं। कहते हैं ना (ऊपर की ओर इशारा), उसको याद करो। वो सबका कल्याणकारी। ऊपर रहते हैं। तो वो समझते हैं कोई ऊपर रहता होगा। अब ऊपर, उन्हें ये पता ही नहीं है कि वो ऊपर वाला ही ऊँचे से ऊँचा कर्म करके नीचे दिखाता है। नीचे आता जरूर है लेकिन नीचे आते हुए भी जो भी कर्म करता है ऊँचा कर्म करता है, जो भी बात बोलता है, ऊँची बात बोलता है। जो भी संकल्प करता है, ऊँचा संकल्प करता है। तो वो सबका कल्याणकारी ऊपर रहते हैं। रहती तो तुम आत्मायें भी वहाँ हो। तुम आत्मायें भी वहाँ ऊपर की रहने वाली हो। ये सारी ज्ञान की बातें अब तुम्हारी बुद्धि में बैठी है। क्या‍? कि हम सब भी वहाँ के रहने वाले हैं लेकिन कोई ज्यादा लंबे समय तक ऊँची स्टेज में रहते हैं और कोई थोड़े समय तक ऊँची स्टेज में रहते हैं। ये सारी ज्ञान की बातें तुम्हारी बुद्धि में हैं। बाकि सबके पास तो भक्ति का भूसा है। तुम्हारे पास ज्ञान का धन है। वहाँ फिर ज्ञान कहाँ से आवेगा? कहाँ? जो नयी दुनियां होगी वहाँ ज्ञान नहीं होगा।

ज्ञान तो है सद्गति करने वाला। ज्ञान से ही सद्गति होती है। योग से सद्गति नहीं होती। ये क्यान बात है? जितने भी धर्मपितायें हैं, उनकी शरीर से सद्गति होती है या शरीर छोड़ करके ऊपर चले जाते हैं? शरीर छोड़ करके ऊपर चले जाते हैं। तो जो शरीर छोड़ करके ऊपर चले जाते हैं, उनको गति मिलती है। सद्गति उसे कहेंगे कि शरीर से जिंदा भी रहे इस दुनियां में, सुख भोगें, दु:ख न भोगें। वो सद्गति भी दो प्रकार की होती है। एक सद्बति वो होती है कि हम इस जन्म में ही पुरूषार्थ कर रहे है और इसी जन्म में इसी शरीर से हम ऐसी दुनियां में पहुँच जायें जहाँ हम सुख भोगेंगे, दु:ख नहीं भोगेंगे।
(किसी ने कहा – कंचन काया।) हाँ, कंचन काया बनानेवाली। और दुसरी सद्बति उनकी होती है, शरीर तो यहाँ छोड़ देंगे लेकिन अगली आनेवाली जो नयी दुनियां है उसमें जन्म ऐसे लेंगे शरीर के कि वो शरीर से सुखी रहेंगे लेकिन दु:खी नहीं रहेंगे। तो ज्ञान से सद्गति होती है। भक्ति है दुर्गति करने वाली। ज्ञान से सद्गति होती है, भक्ति से दुर्गति होती है। तो फिर गति काहे से होती है? सिर्फ योग करेंगे और ज्ञान बिल्कुल धारण नहीं करेंगे तो क्या होगा? गति होगी; सद्गति नहीं होगी, दुर्गति भी नहीं होगी। गति हो जाएगी। ओम् शान्ति। (किसी ने कहा – मोक्ष मिलेगा।) मोक्ष। जैसे रावण को मोक्ष मिला।

VCD No.260, Cassette No.741, dated 23.07.05 at Ahmedabad
Clarification of Murli dated 10.10.66
Part-8


I am indeed the Ocean of knowledge. You understand: many are benefitted through the exhibitions (pradarshani). Which exhibition? So, they made numerous pictures. Arey, it is not about numerous pictures. Baba says: make these very four pictures as high as the roof. If you make big pictures, the eyes of the blind children of the blind ones will open. It will become easy for you to explain. Many can be benefitted through the exhibitions. But... (Someone said: in these four pictures.) Yes, there will be a lot of benefit by explaining the four pictures. God is benevolent, isn’t He? You are also being benefitted. But you are definitely supposed to churn the ocean of thoughts in this. What? You should churn the ocean of thoughts a lot in these four pictures. If you keep churning the ocean of thoughts, if you keep thinking about it, you will be benefitted a lot.

As regards opposing (ulti-sulti) topics, listen to them through one ear and leave them out through the other. What does opposing topics mean? You should not pay much attention to the topics which are against the topics of the Murlis of Baba and the other topics. The Father says, I narrate very good things to you. All that the others narrate are opposing topics. Whatever comes from the human beings is ignorance. Whatever I narrate to you is knowledge. Who becomes muuh miya mitthu the most?
(Someone said something.) No. The biggest muh miya mitthu is ShivBaba. It is also [written] like this in the Gita: “I am this, I am that”. (Someone said: Yes, he is [said to be great] in everything.) Yes, I am the elevated one in everything. (Someone said something.) No, they certainly tell the truth, don’t they? They don’t speak a lie, do they? (Someone said: no, it is correct.) Yes. I narrate such nice things.

There is only one No.1 main thing. What? Keep giving the introduction of the Father to anyone who comes. When He is indeed No.1.... so, if you give the introduction of the one who is No.1, you will come in the No.1 list. Which is the No.1 list? [It is] of the Suryavanshis. Which is the No.2 list? [It is] of the Chandravanshis. Then is the No.3, No.4
  • the people of Islam, the Buddhist, the Christians. So, give the introduction of the Father to anyone; that’s all. Remember the one Father. He alone is everything. The entire string is in the hand of Him alone. What? Have you ever seen a puppet show? (Someone said: Yes.) When they show a puppet show, a curtain is drawn. The puppets come up and dance; they move their hands and legs. There are fine threads attached to them and he (the puppet master) is very experienced in making them dance by holding the threads in his ten fingers. He keeps making them dance like this (Baba is showing with gestures). So, what are we all to Him? We all are his puppets. We keep dancing in the way He makes us dance. It is said that the one who shakes every leaf is One. (Someone asked: Baba is this said for the incorporeal one or...?) How will the incorporeal one shake [them]? He will give knowledge through the corporeal one, will He not?

    They indicate with the finger: The Supreme Soul does everything. They say, don’t they (pointing upwards): Remember Him. He brings benefit to everyone. He stays above. So, they think that He must be staying above. Well, they don’t know at all that the one who stays above does the highest on high deeds below (in this world). He certainly comes down, but despite coming down whatever action He performs is high, whatever He speaks is high, whatever He thinks is high. So, He who brings benefit to all stays above. You souls also live there. You souls are also the dwellers of above. All these topics of knowledge have sat in your intellect now. What? [The topic:] all of us are also the dwellers of that place but some remain in the high stage for a long time and some remain in the high stage for a short time. All these topics of knowledge are in your intellect. As for the rest, all the others have the husk of Bhakti. You have the wealth of knowledge. Where will knowledge come from over there? Where? There won’t be knowledge in the new world.

    Knowledge is that which brings liberation in life. Knowledge itself brings liberation in life. Liberation in life is not achieved through Yoga. What is this? Do all the religious fathers achieve liberation in life through the body or do they leave their body and go above? They leave their body and go above. So, those who leave their body and go above achieve liberation (gati). Liberation in life means: you should remain alive with the body in this world [and] experience happiness, you should not experience sorrow. That liberation in life is also of two kinds. One [kind of] liberation in life is such that we are making purusharth in this birth and in this very birth, with this very body we should reach such a world where we will experience happiness, we will not experience sorrow.
    (Someone said: kancan kaayaa.) Yes, [the liberation in life] which rejuvenates our body. And the ones who attain the second kind of liberation in life are those who will leave their bodies here, but they will be born in such a way in the coming new world that they will remain happy with the body, they will not remain sorrowful. So, knowledge leads to liberation in life, Bhakti leads to degradation. Knowledge leads to liberation in life, Bhakti leads to degradation, then what leads to liberation? If you practice only Yoga, if you do not assimilate knowledge at all, then what will happen? You will attain liberation, you will not attain liberation in life; you will not undergo degradation either. You will attain liberation. Om Shanti. (Someone said: you will receive moksh .) Moksh. Just as Ravan received moksh. (Concluded.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 05 Feb 2013

वी.सी.डी. नं.266, कैसेट नं.747, मैसूर,
मु.14.10.66, ता.28.07.05
भाग-1


ओम शान्ति। आज है 14 अक्टूबर 1966 का प्रात: क्लास। रुहानी बाप रुहानी बच्चों को समझाते हैं। रुहानी बाप सिर्फ रुहानी बच्चों को समझाते हैं। और जिस्मानी बाप? (किसी ने कहा- जिस्मानी स्टेज के बच्चों को समझाते हैं।) जिस्मानी स्टेज वाले बच्चों को समझाते नहीं सुनाते हैं। क्या? (किसी ने कहा- समझाते नहीं है, सुनाते हैं।) कौन रुहानी बाप हुआ और कौन जिस्मानी बाप हुआ? वो पूर्व जन्म तो भूल गया। अब तो नए जन्म में नए बच्चे बन गये ना, रुहानी बच्चे बन गये। तो जिस्मानी बाप कौन? (किसी ने कहा- प्रजापिता।) प्रजापिता। प्रजापिता तो यज्ञ के आदि में था, गया। उसके बाद टाईटल किसको मिला? ब्रह्मा बाबा को। और वाणी कब की है? 66 की। 66 की वाणी है। 66 की वाणी बोलने वाली आत्मा कौन है? (किसी ने कहा- ब्रह्मा।) नहीं। (दूसरा जिज्ञासु-सुप्रीम सोल।) सुप्रीमसोल। सुप्रीमसोल बोल रहे हैं। क्या बोल रहे हैं? रुहानी बाप रुहानी बच्चों को समझाय रहे हैं। अच्छा। तो उस समय समझाय रहे थे या सुनाय रहे थे? (किसी ने कहा- सुना रहे थे।) सुना रहे थे। फिर ये क्यों कहा समझाय रहे हैं? (किसी ने कहा- अभी का है।) रुहानी बाप रुहानी बच्चों को समझाते हैं ये बोला, ‘रहे हैं’ नहीं बोला। क्या बोला? समझाते हैं। माना एक सामान्य बात बोल दी। क्या? कि रुहानी बाप जब कभी भी बच्चों को समझाते हैं तो रुहानियत की स्टेज में रह करके समझाते हैं और समझ माना ज्ञान। ज्ञान की बात ही समझाते हैं। ज्ञान माना जानकारी। असलियत की जानकारी। समझाते तो रोज हैं, ऐसे नहीं, आज ही समझाते हैं। फिर भी कर्इ बातें बच्चे भूल जाते हैं। तो दुबारा-2 समझाना पड़ता है।

बच्चों को बुद्धि में ये तो रखना है कि ये संगमयुग है। क्या? ये कलियुग नहीं है। अभी हम कलियुगी बच्चे भी नहीं हैं। हमें संगमयुग में बाप मिला है और हम संगमयुगी बच्चे हैं। हम संगमयुग पर हैं बाप भी आते हैं संगम पर। कब आते हैं? संगम पर। संगम माना? कलियुग का अंत और सतयुग का आदि। तो एक्युरेट कब हुआ?
(किसी ने कहा-36 में।) 36 में? 36 में सतयुग का आदि हुआ? (किसी ने कहा- नहीं बाबा।) तो संगम कैसे हुआ? (किसी ने कहा- 76 से।) 76 में? 76 में सतयुग का आदि कहें? (किसी ने कहा- हाँ बाबा।) कहें? कैसे? (किसी ने कहा- एक आत्मा के लिए।) अच्छा। तो एक आत्मा अकेली चना भाड़ फोडे़गी क्या? अकेली आत्मा के लिए सतयुग आया जंगल में मोर नाचा किसने देखा? वो सतयुग किस काम का? कि एक आत्मा के लिए, दो आत्मा के लिए सतयुग आ जाये। लक्ष्मी तो साक्षात्कार की दुनियां में मस्त रहती है तो वो साक्षात्कार के आधार पर खुश रहती है। नारायण की आत्मा ज्ञान के आधार पर खुश रहती है, प्रसन्न रहती है। तो उन दो के लिए अगर स्वर्ग आ जाये तो कहेंगे कि स्वर्ग आ गया, सतयुग आ गया? (किसी ने कहा- शुरुआत हो गया, पुरुषोत्तम संगम प्ररंभ हो गया सभी आत्मायें आने लगे ।) अच्छा, बीज पड़ गया? (किसी ने कहा: हाँ।) अच्छा।

तो बच्चों की बुद्धि में ये रखना है कि संगमयुग पर बाप आते हैं और कलियुग अंत और सतयुग आदि का संगम गाया हुआ है। गाया हुआ माना किस समय का गाया हुआ है? गायन, पूजन आदि किस समय की यादगार है?
(किसी ने कहा- द्वापरयुग।) नहीं। द्वापरयुग में तो गाते हैं। (किसी ने कहा- संगमयुग की यादगार है।) संगमयुग की यादगार है ना। तो संगम जो कलियुग का अंत और सतयुग की आदि कही जाती है जिसका गायन होता है भक्तिमार्ग में... और बुलाते भी हैं इस समय, कब बुलाते हैं? (किसी ने कहा- संगम में।) संगम में कहाँ बुलाते हैं? संगम में तो ज्ञानी आत्मा हो जाते हैं। ज्ञानी आत्माओं को बुलाने की दरकार ही नहीं। वो तो जानते हैं बाबा बुलाने से आते नहीं। वो तो बिना बुलाये आते हैं। शिवबाबा तो आत्माभिमानी हैं उनको मान मर्तबा लेने की दरकार नहीं है। वो तो बिना बुलाये आते हैं, जब जरुरत होती है तब आते हैं। बुलाते भी इस समय हैं। किस समय? जब भक्तिमार्ग का टाइम होता है तब बुलाते हैं। (किसी ने कहा- द्वापरयुग में।) द्वापरयुग में। हाँ, द्वापरयुग, कलियुग में बुलाते हैं। सतयुग और त्रेता और त्रेता द्वापर के संगम पर कोर्इ बाप को बुलाते नहीं। सतयुग त्रेता के संगम पर भी नहीं बुलाते, त्रेता-द्वापर के संगम पर भी नहीं बुलाते।

पतित दुनियां कहा जाता है कलियुग को। इसलिए और कोर्इ टाइम पर बुलावेंगे नहीं। बाप आवेंगे भी नहीं। जब कलियुग का अंत होता है तब बुलाते हैं। भारतवासियों की बात बतार्इ। महात्मा गाँधी के साथ ढेरों ने आवाज लगार्इ एक साथ- हे! पतित पावन आओ, रघुपति राघव राजाराम पतित पावन सीताराम। सारे भारतवासियों की आवाज थी। तो जब बुलाते हैं तो बाबा को...
(किसी ने कहा- आना पड़ता है।) नहीं-2 उस समय नहीं आना पड़ता है जब बुलाते हैं। उनका अपना टाइम निश्चित है। बाबा हम पतितों को पावन बनाने के लिए आओ बुलाते तो हैं। परन्तु उनको पता नहीं है कि कल्प की आयु कितनी है। जब टाइम पूरा होगा तभी तो आयेंगे।

समझते हैं भक्ति करते-2 धक्का खाते-2 आखिर परमात्मा से मिल जावेंगे। कल्प की अंत कब होगी ये कुछ भी पता नहीं है। याद करते ही तब हैं जब कलियुग का अंत होता है, दु:ख होता है। सतयुग त्रेता में तो है ही सुख। द्वापर में भी इतना दु:ख नहीं होता। कलियुग में मनुष्य बहुत दु:खी होते हैं। तब बाप को चिल्लाना शुरु करते हैं। कब? कलियुग के अंत में। अच्छा, तो बुद्धि चली गर्इ वहाँ पास्ट की दुनियां में। लेकिन शूटिंग पीरियड में भी तो कलियुग होता है। होता है या नहीं होता है?
(किसी ने कहा- होता है।) कलियुग होता है, कलियुगी शूटिंग भी होती है। लेकिन वो किसके लिए होती है? ब्राह्मणों के लिए होती है। जब ब्राह्मणों की दुनियां में बहुत तामसी स्टेज की शूटिंग शुरु हो जाती है तो अंदर से आत्मा पुकारती है कि अब तो प्रत्यक्ष हो जाओ। जयंती का मतलब क्या है? जयंती माना जन्म लेना। तो सन् 36 में जन्म नहीं लिया क्या? कहेंगे जन्म लिया? (किसीने कहा-नहीं कहेंगे।) 36 में प्रवेश किया, जैसे गर्भ में आत्मा प्रवेश करती है जब गर्भ में आत्मा प्रवेश करती है तो उसको ये नहीं कहा जाता कि जन्म लिया। उसे जन्म लेना नहीं कहेंगे क्योंकि संसार के सामने प्रत्यक्ष नहीं हुर्इ, बाहर नहीं आर्इ आत्मा, शरीर धारण करके नहीं आर्इ। जब सारे संसार में प्रैक्टिकल में प्रत्यक्षता होती है अखबारों के द्वारा, टी.वी. के द्वारा, रेडियो के द्वारा हर बच्चे के सामने जैसे बाप प्रत्यक्ष होता है तब कहा जाता है कि हाँ वो बाप आया।

VCD No.266, C.No.747, Mysore,
Mu.14.10.66, Dt.28.07.05
Part-1


Om Shanti. Today’s morning class is dated 14th October 1966. The Spiritual (ruhaani) Father teaches the spiritual children. The Spiritual Father explains only to the spiritual children, and [what about] the bodily (jismaani) Father? (Someone said: He explains to the children who are in the body conscious stage.) He doesn’t explain [but] He narrates [the knowledge] to the children who are in the body conscious stage. What? (Someone said: He doesn’t explain, He narrates [the knowledge] to them.) Who is the Spiritual Father and who is the bodily Father? You have forgotten that previous birth; now in [this] new birth, you have become the new children, haven’t you? You have become the spiritual children, then, who is the bodily Father? (Someone said: Prajapita.) Prajapita. Prajapita was present at the beginning of the Yagya [and later] he went away. Who received his title after that? Brahma Baba received it. And [this] Vani is of which year? It is of 66. The Vani is of 66. Who is the soul who is narrating the Vani of 66? (Someone said: Brahma.) No. (Another student: The Supreme Soul.) Supreme Soul. The Supreme Soul is saying; what is He saying? The Spiritual Father is explaining to the spiritual children. Accha! Was He explaining or narrating at that time? (Someone said: He was narrating.) He was [just] narrating. Then why was it said that He is explaining? (Someone said: It is about now.) Hum? It was said: The Spiritual Father explains to the spiritual children. It was not said, He is explaining. What was said? He explains. It means He spoke about a general topic. What? Whenever the Spiritual Father explains to the children, He explains while being in the spiritual stage. And understanding means knowledge. He explains only the concepts of knowledge (gyaan). Knowledge means information, the information of truth. He certainly explains daily. It is not that He explains only today, still there are many things which the children forget. Therefore, He has to explain to [them] repeatedly.

The children do have to keep this in their intellect: this is the Confluence Age. What? This is not the Iron Age [for us], now we are not the Iron Age children either. We have found the Father in the Confluence Age and we are the Confluence Age children. We are in the Confluence Age and the Father also comes in the Confluence [Age]. When does He come? In the Confluence [Age]; what does confluence mean? [It means] the end of the Iron Age and the beginning of the Golden Age. So, when is it the accurate [Confluence Age]?
(Someone said: In 1936.) Is it in 1936? Did the Golden Age begin in 1936? (Someone said: It did not.) Then how is it the Confluence [Age]? (Someone said: In 76.) Is it in 76?Can we say, the Golden Age began in 76? (Someone said: Yes, Baba.) Can we say [that it began]? How? (Someone said: For one soul.) Accha!  Will that one soul accomplish a big task alone? If the Golden Age begins for one soul... Jungle me mor naaca kisne dekhaa? What is the value of such a Golden Age which has started [only] for one or two souls? Lakshmi remains engrossed in the world of visions; so she remains happy on the basis of vision. The soul of Narayan remains happy and cheerful on the basis of knowledge. So, if heaven begins for those two [souls], can we say that heaven, the Golden Age began? (Someone said: It began; the elevated Confluence Age began and all the souls started to come.) Accha, the seed was sown? (Someone said: Yes.) Accha.

So, the children should keep this in their intellect: The Father comes in the Confluence Age and the confluence of the end of the Iron Age and the beginning of the Golden Age is praised. If it is praised, it is a praise of which period? The praises and worship etc. are the memorials of which period?
(Someone said: Of the Copper Age and...) No, they praise in the Copper Age. (Someone said: It is the memorial of the Confluence Age.) It is the memorial of the Confluence Age, isn’t it? So, the Confluence [Age] which is called the end of the Iron Age and the beginning of the Golden Age, which is praised in the path of Bhakti (devotion)... And it is at this time that they call [Him]. When do they call? (Someone said: In the Confluence Age.) Where do they call in the Confluence [Age]? In the Confluence Age, they become knowledgeable souls and there is no need for the knowledgeable souls to call [God] at all. In fact, they know that Baba doesn’t come on being called; He comes without being called. ShivBaba is soul conscious; He does not expect honour and respect, He comes without being called. He comes when there is necessity. It is at this time that they call Him. When? They call Him when it is the period of the path of Bhakti (Someone said: In the Copper Age and...) In the Copper Age. Yes, they call Him in the Copper and the Iron Ages. No one calls the Father at the confluence of the Golden Age and the Silver Age, and [at the confluence of] the Silver [Age] and the Copper [Age]. They don’t call Him at the confluence of the Golden Age and the Silver [Age] and they do not call Him at the confluence of the Silver [Age] and the Copper [Age] either.

The Iron Age is said to be the impure world. This is why, [the people] will not call Him at any other time. The Father will not come [at any other time] either. They call Him when it is the end of the Iron Age. He said about the Bharatvaasis (the residents of Bharat). Along with Mahatma Gandhi, many raised their voice together: ‘Oh Purifier of the sinful ones, come! Raghupati Raaghav Raajaa Ram, Patit Paavan Sita Ram.’ It was the voice of all the Bharatvaasis. So, when they call [Him], Baba has to…
(Someone said: He has to come.) No, no, He does not have to come when they call [Him]. He has His own fixed time. They do call: Baba come to make us sinful ones pure. However, they do not know what the [total] age of the cycle is. He will come only when the time is complete.

They think that while doing Bhakti, while suffering blows finally we will find the Supreme Soul. They do not know anything about when the cycle will the end. They remember only when it is the end of the Iron Age; when there is sorrow. There is only happiness in the Golden and the Silver Ages. There is not much sorrow in the Copper Age either. In the Iron Age the human beings become very sorrowful, then they start to call out for the Father. When? At the end of the Iron Age. Accha. So, the intellect went there, in the past world, but there is the Iron Age in the shooting period as well. Is it there or not?
(Someone said: It is there.) There is the Iron Age. The shooting of the Iron Age also takes place. However, it takes place for whom? It takes place for the Brahmins. When the shooting of very degraded stage starts in the Brahmin world, then the soul calls out from within: Now, do reveal Yourself. What does jayanti (birthday) mean? Jayanti means to be born. So, was He not born in the year 1936? Will it be said that He was born? (Someone said: No, it won’t be said [so].) He entered in 1936. Just as a soul enters the womb; when a soul enters the womb, it is not said that he is born. He will not be said to be born, because [the soul] was not revealed in front of the world. The soul did not come out taking on the body. When the revelation takes place in the entire world in practice through the newspapers, television, radio, it is just like the Father is revealed in front of every child, then it is said, ‘yes that Father has come’. ... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 06 Feb 2013

वी.सी.डी. नं.266, कैसेट नं.747, मैसूर,
मु.14.10.66, ता.28.07.05
उद्धरण-भाग-2


तो बोला जब कलियुग का अंत होता है तो बहुत दु:खी होते हैं। तो शूटिंग पीरियड में भी क्या होता है? बहुत दु:खी होते हैं। कौन दु:खी होते हैं? सबसे ज्यादा दु:खी कौन होता है? (किसी ने कहा- भारतवासी।) भारतवासियों में भी कौन? भारतवासियों में भी कन्यायें भी हैं, मातायें भी हैं, पुरुष भी हैं, अधर कुमार भी हैं। (किसी ने कहा- मातायें।) मातायें बहुत (दु:खी होती हैं) और माताओं में भी कौन दु:खी होती है? (किसी ने कहा- जगतमाता।) जगतमाता सबसे ज्यादा दु:खी होती है। क्योंकि वो ज्यादा बड़ी माता है और जगदम्बा है। तो जितना बड़ा कहावना उतना दु:ख पावना। तो जब जास्ती पुकार होती है अंदरुनी - क्योंकि बाहर की दुनियां में तो आवाज की पुकार होती है, और ब्राह्मणों की दुनियां में अंदरुनी पुकार होती है - तब मैं आता हूँ। माना स्थूल रुप में जब बुलाते हैं तब नहीं आता हूँ लेकिन जो अंदरुनी पुकार है तब मैं संसार के सामने प्रत्यक्ष हो जाता हूँ माना असली जयंती होती है। तो दुनियां वाले तो याद करते हैं, दु:ख बहुत बढ़ता है...। सतयुग त्रेता में सुख और द्वापर कलियुग में दु:ख।

कलियुग अंत में बहुत चिल्लाना शुरु करते हैं। तमोप्रधान माना दु:खी। क्या कहा? शूटिंग पीरियड में भी आत्मा जब जास्ती तामसी स्टेज बढ़ती है तो बहुत दु:खी होती है। दु:ख का कारण क्या?
(किसी ने कहा- अपवित्रता।) अपवित्रता, तामसी होना। और सुख का कारण क्या? (किसी ने कहा-पवित्रता।) प्यूरिटी। तो प्यूरिटी का फाउण्डेशन भी कहाँ से शुरु होता है? मन से, बुद्धि से। बुद्धि में पक्का फाउण्डेशन अगर बैठ जाये दृढ़ निश्चय हो जाये कि अब हमें मनसा, वाचा, कर्मणा कोर्इ भी प्रकार की इम्प्यूरिटी नहीं लानी है, तो आत्मा सुखमय हो जावेगी। सुख काहे से आता है? प्यूरिटी से। और दु:ख आता है इम्प्यूरिटी से।

तो पुकारते हैं जब बहुत दु:खी होते हैं। भगवान दु:ख हरो, सुख दो। दु:ख के बंधन तो बहुत हैं। दु:ख के टाइम वही परमात्मा को पुकारते हैं कि इस बंधन से छुड़ाओ। और पुकारते कौन हैं? ज्ञानी पुकारेंगे या भक्त पुकारेंगे?
(किसीने कहा-भक्त।) भक्त पुकारते हैं। तो बडे़ ते बड़ा भक्त कौन हुआ? नारद को भक्त कहा? नारद को क्या कहा? भक्ता कहा। अच्छा, कितने नारद होते हैं? (किसी ने कहा- एक।) एक ही नारद होता है? नार माना ज्ञान, द माना देने वाला। ज्ञान देने वाला जो नारद कहा जाता है वो एक ही होता है? (किसी ने कहा- 108।) 108? (किसी ने कहा: हाँ बाबा।) अच्छा, सतयुग में नारायण कितने बनेंगे? सतयुग में 8 नारायण बनेंगे तो 8 नम्बरवार ज्ञान देने वाले भी तो हुये। (किसी ने कहा- नहीं हुये।) क्यों? सात सागर नहीं हैं? (किसी ने कहा- नहीं।) सागर नहीं है सात? सात सागर डिवाइड किये हुये हैं? (किसी ने कहा: है बाबा।) हाँ, सबको मिलाके एक सागर कहा जाता है। है ना। तो जो सात सागर हैं वो ज्ञान देने की स्टेज में भी तो आते होंगे संगमयुग में? लेकिन उनमें कुछ न कुछ भक्ति के संस्कार रहते हैं। सम्पूर्ण ज्ञानी नहीं होते। अच्छा। उन नारायणों में पहला नारायण कौन है? (किसी ने कहा- संगमयुगी नारायण।) संगमयुगी नारायण!

वो तो प्रजापिता है, प्रजापिता का दिन और प्रजापिता की रात गाई जाती है क्या? ब्रह्मा का दिन और ब्रह्मा की रात गाई जाती है। किसकी गाई जाती है? ब्रह्मा का दिन भी होता है, ब्रह्मा की रात भी। ब्रह्मा का दिन होता है तो ब्रह्मा सो विष्णु बन जाता है, सुख में आ जाता है। और ब्रह्मा जब दु:ख में होता है तो ब्रह्मा की रात आ जाती है। ब्रह्मा की रात तो सारे ही ब्राह्मणों की रात। क्या? एक के पतित होने से सारी दुनियां पतित हो जाती है और एक के पावन बनने से सारी दुनियां पावन बन जाती है। प्रजापिता के लिए कभी बोला कि प्रजापिता का दिन और प्रजापिता की रात?
(किसीने कहा-नहीं।) क्यों? क्यों नहीं बोला? (किसी ने कहा- वो हमेशा ज्ञान में रहता है ना।) (किसी दूसरे ने कहा- ध्रुव तारा है वो।) हाँ, सन् 76 से जब से बाप का प्रत्यक्षता वर्ष मनाया गया, तब से ले करके और अंत तक वो आत्मा डायरेक्टर के रुप में हो गई। क्या? दु:ख, सुख का पार्ट कौन बजायेंगे रंगमंच पर? आत्मायें। आत्मा रुपी पार्टधारी पार्ट बजाते हैं, और उनमें ब्रह्मा भी है। ब्रह्मा जो है वो भी प्रवेश करके कोई बड़ी माँ में पार्ट बजाता है जिसे जगदम्बा कहा जाता है। तो ब्रह्मा की रात कहो या जगदम्बा की रात कहो वो दु:ख में आते हैं। जिसमें ज्ञान है, पराकाष्ठा का ज्ञान होगा तो वो कभी दु:खी नहीं हो सकता।

तो बोला जब तमोप्रधान हो जाते हैं, आत्मा जब तामसी बन जाती है तो बहुत दु:खी होती है। पुकारते हैं, बहुत धक्के खाते हैं। जब कोर्इ रास्ता नहीं मिलता तो जोर से पुकारते हैं। एक होती है बाहर की पुकार आवाज की, और एक होती है अंदरुनी पुकार। पुकारते तो हैं परंतु फिर भी पाते नहीं हैं। जहाँ से भी जाते हैं रास्ता नहीं मिलता है। जब थक जाते हैं तो बहुत चिल्लाते हैं - रास्ता बताओ।

आगे एग्जि़बिशन में मेज रखते थे। अभी शायद गवर्मेन्‍ट ने बंद कर दिया है। तो ये भी मनुष्य जब दु:खी होते हैं तो चिल्लाते हैं- हे दु:खहर्ता, हे अंधों की लाठी। इस समय ही पुकारते हैं- हे अंधों की लाठी, फिर धृतराष्ट्र और युद्धिष्ठिर दिखाते हैं। क्या? रास्ता जब नहीं मिलता है तो अंधे जैसे हो गये ना। तो उनमें अंधों में मुखिया किसको दिखाते हैं? धृतराष्ट्र को। सारी दुनियां की धन संपत्ति, मान मर्तबा सब खींच करके धर लिया। राष्ट्र माना धन संपत्ति तो हुआ धृतराष्ट्र। और उनको फॉलो करने वाली (को) क्या कहते हैं? ध्रातराष्ट्री, गाँधारी। तो धृतराष्ट्र दिखाते हैं एक तरफ और दूसरी तरफ दिखाते हैं अपोजिशन में...
(किसी ने कहा - युद्धिष्ठिर।) वो तो कौरवों का मुखिया हुआ और पाण्डवों का मुखिया किसको दिखाते हैं? युधिष्ठिर। वो स्थिर रहता है, धक्के नहीं खाता है। माना जो धक्के खाता है वो उतना ही बड़ा अंधा है। और जो जितने कम धक्के खाता है वो उतना ही ज्ञान का कम अंधा है। और जो बिल्कुल धक्के नहीं खाता वो युद्ध में स्थिर है। उसे कहीं धक्के खाने की दरकार नहीं है। नहीं तो क्या होता है? बुद्धि एक जगह भटकती है, फिर दूसरी जगह भटकती है, फिर तीसरी जगह भटकती है, भटकते-3 आखरीन क्या अंत होता है दुनियां का? नास्तिक बनने लग पड़ते हैं। कोई भगवान वगवान नहीं। जब भगवान नहीं कहीं, तो क्या हो गये? नास्तिक। बाप कहते हैं कि जो साकार में मुझे जानते हैं कि मैं एकव्यापी होकर कैसे आता हूँ, अटल निश्चयबुद्धि हैं तो वो हैं आस्तिक। और जो भगवान को नहीं जानते वो हैं नास्तिक।

VCD No.266, C.No.747, Mysore,
Mu.14.10.66, Dt.28.07.05
Part-2


So, it was said, when it is the end of the Iron Age they (people) become very sorrowful, so what happens in the shooting period as well? They become very sorrowful. Who becomes sorrowful? Who becomes sorrowful the most? (Someone said: Bharatvaasi.) Who even among the Bharatvaasis (residents of Bharat)? Among the Bharatvaasis there are the virgins, the mothers, the males as well as the adharkumaars. (Someone said: The mothers.) The mothers become very [sorrowful]; and who becomes more sorrowful even among the mothers? (Someone said: Jagatmaataa [the World Mother].) The World Mother becomes sorrowful the most, because she is the senior most mother and she is Jagadamba. So, the more senior someone is said to be, they will experience sorrow to that extent . So when they call a lot from within - because in the outside world they call [God] with the [physical] voice, while they call from within in the Brahmin world - then I come. It means I don’t come when they call [Me] physically (by voice) but when they call [Me] from within, I am revealed in front of the world meaning the real birthday (jayanti) takes place. So, the people in the world certainly remember [when] the sorrow increases more. There is happiness in the Golden and Silver Ages, and there is sorrow in the Copper and Iron Ages.

At the end of the Iron Age, they start shouting a lot. Tamopradhan means sorrowful. What was said? In the shooting period too, when the degraded stage increases more, the soul becomes very sorrowful. What is the reason for sorrow?
(Someone said: Impurity.) [The reason for sorrow is] impurity and becoming degraded. And what is the reason for happiness? Purity. Where is the foundation of purity laid at first? In the mind and the intellect. If the foundation is laid firmly in the intellect, if you have firm faith: now, we should not bring any kind of impurity in our thoughts, words or deeds, then the soul will become joyful. Happiness comes through what? Through purity, and sorrow comes from impurity.

So, they call [God] when they become very sorrowful: Oh God! Liberate us from sorrow and give us happiness. There are many bondages of sorrow. At the time of sorrow, they themselves call the Supreme Soul: Liberate us from this bondage. And who call [Him]? Will the knowledgeable ones call [Him] or will the devotees call [Him]?
(Someone said: Devotees.) The devotees call [Him]. So, who is the biggest devotee? Was Narad said to be a devotee? What was Narad said to be? He was said to be a devotee. Accha. How many Narads are there? (Someone said: One.) Is there only one Narad? ‘Naar’ means knowledge and ‘da’ means the one who gives. Is there only one Narad who gives the knowledge? (Someone said: One hundred and eight.) One hundred and eight? (Someone said: Yes Baba.) Accha, how many will become Narayan in the Golden Age? (Someone said: Eight Narayan.) There will be eight Narayans in the Golden Age. So, there are eight [souls] also who give knowledge number wise (according to their capacity). (Someone said: There aren’t.) Why? Aren’t there seven oceans? (Someone said: No.) Aren’t there seven oceans? Aren’t seven oceans demarcated? (Someone said: They are, Baba.) Yes, all of them together are called one Ocean, isn’t it? So the seven oceans will also attain the stage of giving knowledge in the Confluence Age, [won’t they?]. But they have the sanskaars of Bhakti to some extent; they are not completely knowledgeable [souls]. Accha. Who is the first Narayan among those Narayans? (Someone said: The Confluence Age Narayan.) Eh! The Confluence Age Narayan!

He is Prajapita. Is the day of Prajapita and night of Prajapita praised? Brahma’s day and Brahma’s night is praised. Whose [day and night] is praised?
(Someone said: Of Brahma.) There is the day as well as the night of Brahma. When it is Brahma’s day, he becomes Vishnu from Brahma [and] he comes into happiness. And when Brahma is in sorrow, the night of Brahma comes. When it is Brahma’s night, it is the night for all the Brahmins. What? When one becomes sinful, the entire world becomes sinful and when one becomes pure, the entire world becomes pure. Was it ever said for Prajapita: ‘the day of Prajapita and the night of Prajapita’? (Someone said: No.) Why? Why wasn’t it said so? (Someone said: He always remains in knowledge, doesn’t he?) (Another student said: He is the Pole star.) Yes, from the year 76, from the time the year of the Father’s revelation was celebrated, till the end, that soul is in the form of the director. What? Who will play the role of sorrow and happiness on the stage? The souls; the souls in the form of actor play the role and Brahma is also included among them. Brahma also enters and performs the role through the senior mother, who is called Jagadamba. Hence, call it the night of Brahma or the night of Jagadamba [it is the same]. They experience sorrow. The one who has knowledge, the one who has knowledge of peak level can never become sorrowful.

So it was said, when they become tamopradhan, when the soul becomes degraded, then it becomes very sorrowful. They call [God], they suffer many blows. When they don’t find any way, they call loudly. One is to call externally, [meaning] by voice and the other is to call from within. Even though they call [Him], they don’t find [Him]. Wherever they go, they don’t find the way. When they become tired, they shout a lot: Show [us] the path.

Earlier they used to set a maze in the exhibitions [but] probably, the government has banned it now. So, here also (in the path of Bhakti), when the human beings become sorrowful, they shout: Oh! Remover of sorrow, O walking stick for the blind ones! They call [Him] only at this time: O walking stick of the blind ones! Then they show Dhritrashtra and Yuddhishthir . What? When they don’t find the way, they became like a blind one, didn’t they? So, whom do they show as the chief among the blind ones? Dhritrashtra. He snatched and kept under his control the wealth, property, respect and position of the entire world. ‘Raashtra’ means wealth and property; thus he is Dhritrashtra. And what is the one who follows him called? [She is called] Dhaatraashtri; Gandhari (his wife). So, on the one hand, they show Dhritrashtra and whom do they show on the other hand, in opposition to him?
(Someone said something.) He is the chief of the Kauravas . And who is shown as the chief of the Pandavas ? Yuddhishthir; he remains steady, he does not suffer blows. It means, the one who suffers blows [more], he is blind to that extent. And whoever suffers lesser blows, the lesser he is blind in knowledge. And the one who doesn’t suffer blows at all is steady in the battle [field]. There is no need for him to suffer blows anywhere. Or else what happens? The intellect wanders at one place, then at a second place and then at a third place. At last, what happens to [the people of] the world after wandering continuously? They start to become an atheist (naastik). [They think:] there is no God at all. When they [consider] that there is no God anywhere, what did they become? [They became] an atheist. The Father says, those who know Me in the corporeal form that how do I come being ekvyapi (present in one); those who have a firm faithful intellect, they are theists (aastik). And the ones who do not know God are atheists. ... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 07 Feb 2013

वी.सी.डी. नं.266, कैसेट नं.747, मैसूर,
मु.14.10.66, ता.28.07.05
भाग-3


तो दिखाते हैं कि धृतराष्ट्र और युधिष्ठर हैं। वो अंधे और वो सोझरे। उनको कुछ दिखाई नहीं पड़ता, धक्के खाते रहते हैं और वो स्थिर बुद्धि। इसलिए गाया हुआ है एक तरफ है अंधे की औलाद अंधे कौरव सम्प्रदाय। किस समय का गाया हुआ है? जरुर ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनियां में ब्राह्मणों की एक दुनियां ऐसी है जहाँ सब अंधे की औलाद अंधे हैं। और दूसरी तरफ सोझरे की औलाद सोझरे हैं। माने उन्हें धक्का खाने की दरकार नहीं है। अच्छा। तो कौन-2 हैं? वो दो ग्रुप कौन-2 हैं? (किसी ने कहा- प्रैक्टिकल पार्टी और प्लैनिंग पार्टी।) प्लैनिंग पार्टी और...। प्लैनिंग पार्टी धक्के खाती है? (किसी ने कहा- नहीं बाबा।) हाँ, प्लैनिंग पार्टी में जगदम्बा नहीं है? प्लैनिंग पार्टी में जगदम्बा नहीं है? (किसी ने कहा-है बाबा।) अच्छा। उसमें इन्सपिरेटिंग पार्टी नहीं काम करती है? (किसी ने कहा- काम करती है।) यहाँ तो सारी बातें जो संसार में गायन होती हैं वो साकार की गायन होती हैं या आकारी और निराकारी की गायन होती है? (किसी ने कहा- साकार।) तो पार्टी तो सिर्फ प्रैक्टिकल पार्टी या जो प्लैनिंग पार्टी है वो ही गाई जायेगी ना। इन्सपिरेटिंग पार्टी की तो बात ही नहीं।

तो ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनियां में दो ग्रुप हुये। एक अंधों का ग्रुप कौरव और दूसरा पाण्डवों का ग्रुप, सोझरे का ग्रुप। तो प्रजापिता हुआ सोझरा और ब्रह्मा हुआ अभी भी अंधे की औलाद अंधे गाये जाते हैं। उन्हें स्थान ही नहीं दिखाई पड़ रहा है। अगर दिखाई पडे़ तो बार-2 बुलाने पर उसी जगह क्यों पहुँच जाते हैं? कहाँ? कुमारका दादी बुलाती है गुलज़ार दादी से कहती है ध्यान में जाओ और गुलज़ार दादी ध्यान में जाके बाबा को निमंत्रण देकर आ जाती है। वो टाइम बता देते हैं, और बाबा बंधे हुये हैं आने के लिए। तो इसका मतलब अभी भी उन्हें ठिकाना पक्का मिला नहीं है। अगर पक्का ठिकाना मिल जाये तो फिर इधर उधर भटकने की दरकार नहीं होगी। फिर क्या दरकार होगी?
(किसी ने कहा: फिर यहाँ आए।) फिर एक ही जगह स्थिर हो जायेंगे। और जैसे ही एक जगह स्थिर हो जायेगी वो आत्मा, ज्ञान चन्द्रमाँ की आत्मा वैसे ही ब्रह्मा सो विष्णु बन जाती है। माना एक सेकेण्ड लगता है ब्रह्मा को विष्णु बनने में। जब तक निश्चयबुद्धि नहीं है तब तक धक्के खाने की बात (है)। तो बडे़ ते बड़ा भक्त कौन हुआ, और बडे़ ते बड़ा ज्ञानी कौन हुआ? राम हुआ ज्ञानी, और कृष्ण हुआ भक्त।

यज्ञ के आदि में भी परमात्मा शिव आते हैं तो दो आत्माओं का आधार लेते हैं एक साथ। कौन-कौनसी दो आत्मायें?
(किसी ने कहा- राम, कृष्णै।) नहीं। जगदम्बा और जगतपिता। जगतपिता में आते हैं तो ज्ञान सुनाते हैं, समझ देते हैं, समझाते हैं और जगदम्बा में आते हैं (तो) सुनते हैं और सुनाते हैं। सुनते भी हैं, पहले ब्रह्मा से साक्षात्कार सुने, और प्रजापिता को साक्षात्कार सुनाये। तो सुनना भी हुआ, और सुनाना भी हुआ। सुनाये भी और फिर उसका जो अर्थ बताया गया उसका रहस्य बताया गया वो सुना भी। तो सुनना और सुनाना तो हुआ, लेकिन बुद्धि में इस समय उस समय या अभी भी ये नहीं बैठा कि गीता का भगवान कौन? असली गीता ज्ञान दाता कौन? आदि में तो बैठने की बात नहीं, अभी अंत में भी एक आत्मा की बुद्धि में अगर ये बैठ जाये; क्या? जिसके लिए बोला एक के पतित बनने से सब पतित हो जाते हैं, एक के पावन बनने से सब पावन हो जाते हैं। उस एक आत्मा की बुद्धि में भी अगर बैठ जाये तो गेट खुल जायेगा। तो गेट खुलने में क्यों रुका हुआ है? क्योंकि गीता का भगवान अभी साबित नहीं हो रहा है।

तो एक तरफ है सोझरे, दूसरी तरफ हैं अंधे। लाठी के लिए चिल्लाते हैं। कौनसी लाठी? ज्ञान की लाठी... अंधों का आसरा क्या होता है? लाठी। लाठी के लिए चिल्लाते हैं। दूसरी तरफ है पाण्डव जो चिल्लाते नहीं हैं। ये तो सब ब्राह्मणों की बड़ी दुनियां की बात हो गर्इ उनमें रावण, कुम्भकर्ण, मेघनाथ जैसे भी ब्राह्मण दिखाये और गुरु वशिष्ठ, विश्वा़मित्र जैसे भी ब्राह्मण दिखाये माना एडवान्स पार्टी और बेसिक पार्टी। अच्छा। अब एडवान्स पार्टी में भी जितनी भी, जो भी बीजरुप आत्मायें है उनमें सब एक जैसी हैं या उनमें भी दो ग्रुप हैं?
(किसी ने कहा- उनमें भी दो ग्रूप हैं।) कौन कौनसे दो ग्रुप हैं? वहाँ भी जब यज्ञ का आरंभ हुआ तो भी दो ग्रुप हुये थे। एक ग्रुप पहले ही छोड़ के चला गया। सन् 36-47 के बीच ही चला गया। जो सूर्यवंशी ग्रुप था वो गया और बाकी चन्द्रवंशी और चन्द्रवंशियों के जितने भी चेले, चपाटे, या बाल, बच्चे थे वो सब यज्ञ में रह गये।

वो तो वहाँ की बात हुई। अब बीजरुप आत्माओं की एडवान्स पार्टी की दुनियां की बात। यहाँ भी बीजरुप आत्माओं में दो ग्रुप। कौन कौनसे? एक सूर्यवंशी ग्रुप और दूसरा चन्द्रवंशी ग्रुप। क्योंकि ज्ञान चन्द्रमाँ माँ है तो उस माँ की गोदी में कौन पलते हैं? जो संसार को दु:ख देने वाली आत्मायें हैं वो माँ की गोद ही जास्ती पसंद करती है, बाप का कड़कपन, तीखापन उनको पसंद नहीं है। यज्ञ के आदि में भी ऐसे ही हुआ और अभी अंत में भी ऐसे ही हो रहा है। कुछ आत्मायें हैं माँ को फॉलो करने वाले, माँ को पसंद करने वाले और कुछ आत्मायें है बाप को पसंद करने वाले। जो बाप को पसंद करने वाली (है) वो बहुत थोड़ी हैं, और फॉलो करती भी हैं। रिगार्ड माँ को भी देती हैं क्योंकि माँ के बिगैर भी गति नहीं है। क्यों? माता गुरु बिगर उद्धार हो न सके। माता भी चाहिए। माता का अगर स्नेह न मिले बचपन में तो बच्चे ठीक से पालना प्राप्त नहीं कर सकते। जिन बच्चों को बचपन में प्यार नहीं मिलता तो बच्चे आगे चल करके बहुत आततायी बन जाते हैं क्योंकि प्यार के भूखे रहते हैं। तो फाउन्डेशन तो माँ का प्यार का मिलता है।

जैसे यज्ञ के आदि में भी जो सूर्यवंशी हैं क्या उनको माँ का प्यार नहीं मिला? मिला। ऐसे ही यहाँ भी सूर्यवंशी बच्चे का मतलब ये नहीं कि माँ का प्यार नहीं पाते हैं, जन्म नहीं पाते हैं वो भी पाते हैं लेकिन वो अल्पकाल में ही प्रसन्न हो जाते हैं, तुष्ट हो जाते हैं। और जो इस्लामी, बौद्धी, क्रिश्चियन धर्म की बीजरुप आत्मायें हैं दूसरे-दूसरे धर्म की बीजरुप आत्मायें वो प्यार ही प्यार पसंद करती हैं वो लॉ को पसंद नहीं करती हैं। यही कारण है कि लॉ को पसंद न करने वाली आत्मायें माँ की गोद पसंद करती हैं। माँ की रहबरी में रहना चाहती हैं सिर्फ। इसलिए मुरली में बोला हुआ है जगदम्बा के पुजारी हैं सब रावण सम्प्रदाय। क्या बोला? जगदम्बा के पुजारी हैं रावण सम्प्रदाय, और सूर्य की पूजा करने वाले राम सम्प्रदाय। सूर्य और चन्द्रमाँ। सूर्य जितना ही तीखा और जितना ही गर्म है चन्द्रमाँ उतना ही शीतल है, ठण्डा है।


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Mu.14.10.66, Dt.28.07.05
Part-3


So, they show Dhritrashtra and Yudhisthir; he is blind and he is the one with sight. He (Dhritrashtra) cannot see anything and keeps suffering blows while he (Yudhishthir) is the one with a steady intellect. Hence, it is praised that on one side there are the blind children of the blind one, [i.e.] the community of Kaurava. It is the praise of which period? (Someone said: The Confluence Age.) Definitely, in the Confluence Age world of Brahmins, one world of Brahmins is such where all are the blind children of the blind one and on the other side there are the children with sight of the one with sight. This means there is no need for them to suffer blows. Accha. So, who are they? Which are those two groups? (Someone said: Practical party and Planning party.) Planning Party and... Does the Planning party suffer blows? (Someone said: No, Baba.) Is Jagadamba not included in the Planning party? (Someone said: She is.) Accha, doesn’t the Inspiring party work in her? (Someone said: It does work.) Whatever is praised in the world, is it a praise of [the part played by] the corporeal one or the subtle and incorporeal one? (Someone said: The corporeal one.) So, only the Practical party or the Planning party will be praised, won’t it? There is no question of the Inspiriting party [being praised] at all.

So there are two groups in the Confluence Age world of Brahmins. One is the group of the blind ones [i.e.] the Kauravas and the other is the group of the Pandavas [i.e.] the group of the ones with sight. Hence, Prajapita is the one with sight and Brahma is still... It is praised: The blind children of the blind one. He is unable to find the destination. If he has found it, why does he reach that very place on being called repeatedly? Where? Dadi Kumaraka calls [him]; she asks Dadi Gulzar to go in trance, Dadi Gulzar goes in trance, gives the invitation to Baba and comes back. He gives the time [of his arrival]. And [Brahma] Baba is bound to come. So this means, he has not found the proper destination yet. If he finds the proper destination then there will not be any need to wander here and there. Then what will he need?
(Someone said: Then he will come here.) Then he will become constant at just one place. And as soon as that soul, the soul of the Moon of knowledge becomes stable at one place, he becomes Vishnu from Brahma. That means it requires [only] one second for Brahma to become Vishnu. He has to suffer blows until he has a faithful intellect So, who is the biggest devotee and who is the biggest knowledgeable one? Ram is the knowledgeable one and Krishna is the devotee.

Even in the beginning of the Yagya, when the Supreme Soul Shiva comes, He takes the support of two souls simultaneously. Who are the two souls?
(Someone said: Ram and Krishna.) No. They are Jagadamba and Jagatpita (Father of the world). When He comes in Jagatpita, He narrates the knowledge, He gives [us] a good sense, He explains [the knowledge]. And when He comes in Jagadamba, He listens and narrates. He also listens. First He heard about the visions from Brahma and related the visions to Prajapita. Thus both listening and narrating took place. He narrated [the visions] and also listened to its meaning, its secret which was explained. Therefore, [the task of] listening and narrating certainly took place but neither at this time nor at that time did it sit in his (Brahma’s) intellect, who the God of the Gita is. Who is the actual Giver of the knowledge of the Gita? There is no question of [this fact] sitting [in his intellect] in the beginning. [However,] even now, in the end, if it sits in the intellect of [that] one soul... What? The one for whom it has been said: When one becomes sinful everyone becomes sinful [and] when one becomes pure everyone becomes pure. Even if it sits in the intellect of that one soul, the gate will open. So, why is the opening of the gate held up? It is because God of the Gita is not becoming confirmed [in his intellect] now.

Thus, on one side there are the ones with sight and on the other side there are the blind ones. They scream for the stick. Which stick? The stick of knowledge... What is the support of the blind ones? A stick. They scream for the stick. On the other side are the Pandavas who don’t scream. All this is about the big world of the Brahmins. The Brahmins like Ravan, Kumbhakaran and Meghnad (villainous characters in the epic Ramayana) as well as the Brahmin like Guru Vashishtha and Vishwamitra (two of the great sages mentioned in Hindu mythology) are shown in it; it means the Advance Party and the basic party. Accha. Even in the Advance Party are all the seed form souls alike or are there two groups among them too?
(Someone said: There are two groups among them too.) Which are the two groups? (Someone said: Suryavanshi and Chandravanshi.) There too, when the Yagya began, two groups were formed. [Between them] one group left and went away in the beginning itself; it went away between the year 1936-47. The Suryavanshi group went away and the remaining ones [i.e.] the Chandravanshis and all their disciples or children stayed back in the Yagya.

This is about that time. Now let us consider the Advance Party of the seed form souls. Here too, there two groups among the seed form souls. Which are they? One is the Suryavanshi group and the other is the Chandravanshi group. It is because if the Moon of knowledge is the mother, then who receive sustenance in the lap of that mother?
(Someone said: The souls like insects and spiders.) The souls who give sorrow to the world like just the lap of the mother more, they don’t like the strictness, the sharp nature of the Father. It happened just like this in the beginning of the Yagya as well as even now in the end, it is happening the same way. There are some souls who follow the mother, who like the mother, whereas there are some souls who like the Father. Those who like the Father are very few and they also follow Him. They give regard to the mother too, because liberation is not obtained even without the mother. Why? The liberation is not possible without the mother as a guru. The mother is also required. If the children don’t receive mother’s affection in their childhood, they cannot receive the sustenance properly. The children who do not receive love in their childhood become very oppressive in the future because they remain hungry for love. So, they (Suryavanshi children) do receive mother’s love as the foundation.

Just as in the beginning of the Yagya too, didn’t the Suryanvanshi receive the love of the mother? They did receive it. It is the same over here too, by being the Suryavanshi children, it doesn’t mean that they don’t receive the mother’s love, that they are not born from the mother. They too receive it, but they become happy and contented just within a short time. Whereas, the seed form souls of the Islam, the Buddhist and the Christian religion [i.e.] the seed form souls of the other religions like only love, they do not like law. This is the very reason that the souls who do not like law, like the lap of the mother. They wish to remain only under the guidance of the mother. Hence, it is said in the Murli: All the worshippers of Jagadamba belong to Ravan’s community. What was said? The worshippers of Jagadamba belong to Ravan’s community and the worshippers of Sun belong to Ram’s community. The Sun and the Moon; the more intense and hotter the Sun is, the Moon is calmer [and] cooler to that extent.
... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 08 Feb 2013

वी.सी.डी. नं.266, कैसेट नं.747, मैसूर,
मु.14.10.66, ता.28.07.05
भाग-4


तो एडवान्स पार्टी में भी अभी दो ग्रुप हैं। एक ग्रुप सूर्यवंशी बच्चों का, जिसके लिए बोला है एक भी पॉवरफुल संगठन तैयार होने पर एक दूसरे को खींचते हुये अंत में 108 की माला का संगठन एक हो जावेगा। इसका मतलब कितने ग्रूप हैं? 108 की माला में कितने ग्रुप हैं? 9 ग्रुप हैं। नास्तिक धर्म को तो निकाल दो। वो तो माला में आता ही नहीं, वो संगठन बनाता ही नहीं। वो क्या करता है? सारी दुनियां का संगठन बिगाड़ देता है। तो 9 जो ग्रुप हैं उन 9 ग्रुप्स में पहले-2 कौनसा तैयार होना है? (किसी न कहा- चन्द्रवंशी।) चन्द्रवंशी? चन्द्रवंशी कहाँ से पहले तैयार हो जावेगा? जब मुरली में बोला हुआ है चन्द्रवंशी राधा, सूर्यवंशी कृष्ण। सूर्यवंशी कृष्ण तो चन्द्रवंशी राधा के यहाँ जा न सके तो बड़ी मुंझ हो गई है। आखिरीन राधा को ही सूर्यवंशी कृष्ण के यहाँ आना पड़ता है। क्या? (किसी ने कहा- राधा को ही आना पड़ता है।) आना पड़ता है। या तो उनके परिवार वालों को आना पडे़।

तो... माना अपनी जगह पर दृढ़ रहने वाला कभी भी उसको हिलने की दरकार नहीं है। किसीके सामने जाकर के माथा टेकने की दरकार नहीं है। इससे पहले जो वाणी चली है उसमें बाबा ने यही बात विशेष इशारा दिया कि अगर एक को पहचाना है तो एक से ही सुनना है और कहीं भी धक्के नहीं खाना है। एक शिवबाबा दूसरा न कोई। क्या? अगर कहीं दूसरी जगह धक्का खाने जाते हैं या दूसरे से सुनने जाते हैं इससे क्या साबित होता है? इससे साबित होता है कि एक के ऊपर पूरा निश्चय नहीं बैठा है। नहीं तो टाइम वेस्ट करने क्यों जाया जाये? कहीं जायेंगे तो टाइम भी वेस्ट होगा, जाने आने में धन भी वेस्ट होगा और एनर्जी भी वेस्ट होगी। तो भक्तिमार्ग में होता है वेस्टेज, और ज्ञानमार्ग में होता है स्टोरेज। ज्ञानमार्ग में स्टोर करना है, इकट्ठा करना है सब प्रकार की शक्तियाँ। और भक्तिमार्ग में? सब कुछ वेस्ट होता रहता है। जैसे 2500 वर्ष हमने सारा टाइम गँवाया जो भी धन गँवाया वो सारा धन भक्तिमार्ग में ऐसे ही बिखेर दिया है। एनर्जी सारी खत्म कर दी। शरीर टिर्रिया से पैदा होने लगे। शरीर में ताकत भारतवासियों की नहीं रही।

जो दूसरी-2 धर्म की आत्मायें ऊपर से डायरेक्ट आ रही हैं उनके लम्बे चौडे़ हट्टे-कट्टे स्वस्थ शरीर होते हैं। लम्बी आयु होती है। रशियन्स की एज अभी सबसे जास्ती (है) एवरेज एज । क्यों? क्यों है उनकी सबसे जास्ती एज?
(किसीने कहा-नई आत्मायें।) हाँ, क्योंकि नर्इ-2 आत्मायें (है।) लास्ट धर्म की नई आत्मायें आईं तो उनकी ज्यादा एज। और भारतवासी? भारतवासियों की एवरेज एज 30 से भी कम रह गई अब। कारण क्या हुआ? एनर्जी शरीर की वेस्ट करते रहे भक्तिमार्ग में। सबसे ज्यादा भक्ति भारतवासियों ने की या दूसरे धर्म वालों ने या दूसरे देश वालों ने? भारत में ही सबसे ज्यादा भक्ति होती है। भक्ति माना अंधश्रद्धा। तो अंधश्रद्धा युक्त भक्ति करते-2 नीचे गिरते गये।

अब आ जाइये संगमयुग में। संगमयुग में भी यही हाल होता है। ज्ञान चन्द्रमाँ ब्रह्मा और ब्रह्मा के फॉलोअर्स ज्ञान मिल चुका है ज्ञान मिलने के बावजूद भी अंधश्रद्धा युक्त भक्ति अभी भी कर रहे हैं। कोई-2 आत्मायें ऐसे होती हैं ज्ञान में भी चलती हैं और पूरा निश्चय न होने की वजह से भक्ति भी करती रहती हैं। माना एक से पूरा लेन देन नहीं करेंगी। जब एक से पूरा लेन देन नहीं करती हैं तो उनको उतनी प्राप्ति नहीं होती। उतनी शक्ति नहीं भरती आत्मा में। जब आत्मा में शक्ति नहीं भरेगी तो आत्मा कमजोर हो जाती है। और जब आत्मा कमजोर हो जाती है तो जो रावण सम्प्रदाय हैं वो उसके ऊपर हावी हो जाते हैं। जैसे बेसिक नालेज में हुआ। ब्रह्मा के ऊपर कौन हावी हो गया? जो दूसरे-2 धर्म के बच्चे यज्ञ के अंदर घुसे हुये थे वो उनके ऊपर हावी हो गये और उनको रावण के जेल में डाल दिया। रावण की जेल कौनसी है? ब्रह्मा बाबा ने शरीर छोड़ा तो सूक्ष्म शरीर धारण कर लिया?
(किसीने कहा-हाँ।) ये सूक्ष्म शरीर ही वास्तव में रावण की जेल है।

ये तांत्रिक प्रक्रियायें कहाँ चलती हैं, किनके आधार पर चलती हैं? साकार शरीरधारियों के आधार पर चलती हैं कि सूक्ष्म शरीरधारियों के आधार पर चलती हैं
? (कईयों ने कहा-सूक्ष्म शरीर।) जितनी भी सूक्ष्म शरीरधारी आत्मायें इधर उधर संसार में मंडराय रही हैं वो एक प्रकार से भूत-प्रेत हैं। उन भूत-प्रेत आत्माओं के जो भी बनने वाले हैं या जो बनाने वाले हैं वो सब रावण सम्प्रदाय हैं। उन भूत-प्रेतों को कंट्रोल करना भूतनाथ का काम है। भूतनाथ का काम है तो भूतनाथ के बच्चे भी होंगे। वो भी कंट्रोल करेंगे या उनके आधीन हो जायेंगे? उनको कंट्रोल करेंगे। अभी रावण सम्प्रदाय का ग्रुप माना तांत्रिक ग्रुप... ब्रह्मा कुमारियाँ तांत्रिकों का आधार लेती चली जा रही हैं और जो बीजरुप सूर्यवंशी आत्मायें हैं वो कभी भी तांत्रिकों का आधार लेने वाली नहीं हैं। क्योंकि उन्हें पक्का निश्चय है एक शिवबाबा दूसरा न कोई। दुनियां की सारी डोरी एक बाप के हाथ में है। कब? अभी संगमयुग में। हाँ, जो हिम्मत करेगा उसको मदद मिलेगी। और निश्चय ही नहीं होगा तो हिम्मत भी नहीं करेगा। निश्चय होगा तो एक से मदद लेने की पूरी हिम्मत भी करेगा।

तो जो चिल्लाते हैं वो हैं सब भक्त, और जो चिल्लाते नहीं हैं कि जो पाना था सो पा लिया हमें तो जो एक मिलना था सो एक मिल गया। अब हमें यहाँ कहीं इधर उधर भटकने की दरकार...,
(किसी ने कहा: नहीं है।) किसीका आसरा लेने की दरकार नहीं है। तो पाण्डव चिल्लाते नहीं हैं। उन्हों की तरफ साक्षात् परमपिता परमात्मा है। साक्षात्। साक्षात् माना? साकार में, अव्यक्त माना आकार में या निराकार में और व्यक्त माना साक्षात्। तो उन्हों की तरफ साक्षात् परमपिता परमात्मा है जो रास्ता बताते हैं। ऐसे नहीं कि सन् 68 तक ही रास्ता बताया था साक्षात् परमपिता परमात्मा ने। उस समय तो वास्तव में परमात्मा ने रास्ता बताया भी नहीं था। सिर्फ सुनाया था और सुनी हुई बातों को बहुतों ने समझा ही नहीं। बहुतों ने क्या, जिसके तन में प्रवेश किया उसने ही नहीं समझा तो दूसरे कैसे समझेंगे? और क्यों नहीं समझा? क्यों नहीं समझा? क्योंकि भक्ति का पार्ट है। भक्त... वो जितने भी सतयुग में नरायण बनते हैं वो सब भक्त आत्मायें हैं। वो सतयुग में जो भी प्राप्ति करते हैं, वो साकार से प्राप्ति करते हैं साकार के द्वारा जन्म लेकर। और सूर्यवंशी बच्चे? डायरेक्ट सुप्रीम सोल से प्राप्ति करते हैं। तो फर्क होगा कि नहीं होगा? जरुर फर्क होगा।

VCD No.266, C.No.747, Mysore,
Mu.14.10.66, Dt.28.07.05
Part-4


So, now there are two groups in the Advance Party too. One is the group of the Suryavanshi children, for which it is said that even if one powerful gathering becomes ready, then by pulling one another, the gathering of the rosary of the108 [beads] will become ready at the end. It means, how many groups are there? How many groups are there in the rosary of 108 [beads]? (Someone said: There are nine groups.) There are nine groups. Take away the Atheist religion, it is not included in the rosary at all, it doesn’t form a gathering at all. What does it do? It destroys the gathering of the entire world. So, among the nine groups, which one has to become ready first of all? (Someone said: The Chandravanshi.) Chandravanshi? How will the Candravanshi [group] become ready first? When it is said in the Murli: Radha is Chandravanshi and Krishna is Suryavanshi. Suryavanshi Krishna cannot go to Chandravanshi Radha. So, there is a great confusion. At last Radha herself has to come to Suryavanshi Krishna. What? (Someone said: Radha herself has to come.) [She] has to come or else her family members will have to come.

So… It means the one who is constant in his place doesn’t need to move at all, he does not need to go and bow before anyone. In the Vani which was narrated before this [Murli], Baba gave special hint regarding this very topic that if you have recognised the One, you have to listen to only the One and should not suffer blows anywhere. One ShivBaba and no one else. What? If you go to any other place to suffer blows or to listen to someone else, what does it prove? This proves that you don’t have complete faith on the One, otherwise why would you go [there] to waste your time? If you go somewhere, your time will go to waste, your money will go to waste for travelling and your energy will go to waste as well. So, there is wastage [of time, money and energy] in the path of Bhakti; and there is storage in the path of knowledge. You have to store, you have to collect all kinds of powers in the path of knowledge. And what is it in the path of Bhakti? Everything is wasted. Just as we wasted all our time for 2500 years, whatever money we wasted, we simply squandered all of it in path of Bhakti. We finished all our energy [and] we started to have feeble bodies. There is no strength left in the bodies of the Bharatvaasis.

The souls of the other religions who are coming directly from above have tall, well built and healthy bodies. They have long life span. At present, the average life span of the Russians is the longest. Why? Why do they have the longest life span?
(Someone said: New souls.) Yes, they are the new souls. They are the new souls of the last religion who have descended therefore, their life span is long. And what about the Bharatvaasis? The average life span of the Bharatvaasis is even lesser than thirty years. What is the reason? They kept wasting the energy of their body in the path of Bhakti. Did the Bharatvaasis do Bhakti the most or did those belonging to the other religions or other countries [do Bhakti the most]? Bhakti is done the most in Bharat (India); Bhakti means blind faith. So, they continued to fall down by doing Bhakti full of blind faith.

Now, come in the Confluence Age. It happens the same in the Confluence Age too. The Moon of knowledge, Brahma and his followers have received the knowledge [but] even after receiving the knowledge they are still doing the Bhakti that has blind faith. There are some souls who follow the knowledge and because they do not have complete faith, they also do Bhakti simultaneously. It means they do not have all the dealings with the One. When they do not have all the dealings with the one, they don’t obtain much attainments, the soul is not filled with much power. When the soul is not filled with power, it becomes weak. And when the soul becomes weak, those belonging to Ravan’s community dominate it. Just as it happened in the basic knowledge; who dominated Brahma? The children of the other religions who had entered forcibly in the Yagya dominated him and they put him in Ravan’s jail. What is the jail of Ravan? After Brahma Baba left his body, he took on the subtle body, [didn’t he?]
(Someone said: Yes.) Actually, this subtle body itself is the jail of Ravan.

Where and on the basis of whom does this black magic work? Does it work on the basis of the physical bodily beings or the subtle bodily beings?
(Someone said: The subtle bodied beings.) All the subtle bodied souls which are wandering here and there in the world are ghosts and spirits in a way. All those who become ghosts and spirits or create ghosts and spirits [by killing others] belong to Ravan’s community. To control those ghosts and spirits is the task of Bhootnath . If it is the task of Bhootnath, there will be the children of Bhootnath as well. Will they too, control them or will they come under their dominance? They will control them. Now, the group of Ravan’s community meaning the group of tantriks ... Brahma Kumaris are taking more and more support of the tantriks whereas the seed form Suryavanshi souls will never take the support of tantriks. It is because they have firm faith: One ShivBaba and no one else. The entire thread (full control) of the world is in the hands of the One Father. When? Now, in the Confluence Age. Yes, the one who displays courage will receive help. And if someone doesn’t have faith at all, he will not display courage either. If he has faith, he will also display complete courage to take help from the One.

So, all those who shout are devotees. And those who don’t shout [thinking:] We have attained what was to be attained, we have found the One whom we had to find; now the need for us to wander here and there...
(Someone said: ... is not there) ... we don’t need to take the shelter of anyone. So, the Pandavas don’t shout. The Supreme Father Supreme Soul is on their side in a visible form (saakshaat). Saakshaat means? In the corporeal form. Avyakt means in the subtle form or in the incorporeal form and vyakt means saakshaat. So, the Supreme Father Supreme Soul who shows the way is on their side in a visible form. It is not that the Supreme Father Supreme Soul showed the way only till the year 68 in a visible form. In fact, the Supreme Soul did not show the way at all at that time. He just narrated [the knowledge] and many didn’t understand whatever they listened to at all. Leave aside [the topic of] many, the one in whose body He entered himself did not understand it, then how will the others understand it? And why didn’t he understand it? Why didn’t he understand? It is because his part is of Bhakti. Devotees... All those who become Narayan in the Golden Age are devotee souls. Whatever attainment they obtain in the Golden Age, they obtain it from the corporeal ones by being born to the corporeal ones. And what about the Suryavanshi children? They obtain attainments directly from the Supreme Soul. So, will there be a difference or not? There will certainly be a difference. ... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 09 Feb 2013

वी.सी.डी. नं.266, कैसेट नं.747, मैसूर,
मु.14.10.66, ता.28.07.05
भाग-5


कह देते हैं ... साक्षात् परमपिता परमात्मा पाण्डवों के सामने है गीता में है परन्तु गीता को खण्डन कर दिया है। गीता में ये बात है कि पाण्डवों के सामने साक्षात् परमपिता परमात्मा था। लेकिन गीता में खण्डन कर दिया किस बात को? कि गीता का भगवान कृष्ण है। तो गीता का भगवान ही जो भक्त है उसको जो बडे़ ते बड़ा भक्त है दुनियां का उसको ही उन्होंने गीता का भगवान साबित कर दिया। अब भक्ति कहाँ से आती है? भक्ति आती है रावण से। रावण के सर के ऊपर किसका सर दिखाया जाता है? (किसी ने कहा- गधे का।) ये क्यों? (किसी ने कहा - देहअभिमान।) देहअभिमान रुपी गधा है? अच्छा। उसके नीचे दस सिर हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार; पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश; पाँच तत्व और पाँच विकार; दस मिल करके ये रावण का रुप हुआ और उनका कंट्रोलर ऊपर गधा? अच्छा। तो चित्र दिखाया है तो चरित्र करने वाले भी तो कोई होंगे? कौन हुये? (किसीने कहा-गधा।) अरे, वो दस जो चित्र दिखाये हैं पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश प्रकृति के पाँच तत्व और माया के पाँच रुप काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार ये दस चरित्र करने वाले कोई दस चेहरे भी तो होंगे। और उनके ऊपर जो गधे का सिर दिखाया है वो भी तो कोई होगा? तो कौन होगा? ये विचार करने की बात नहीं है? चित्र है तो चरित्र करने वाला कोई होना चाहिए या नहीं होना चाहीए? (किसी ने कहा- होना चाहिए।) तो कौन है? वो है रावण का रुप।

रावण से आती है भक्ति और राम से आता है ज्ञान। राम में भी दो हैं, एक है साकार, एक है निराकार। साकार भी आख्रिर रावण के चम्बे में आता है या नहीं आता है?
(किसी ने कहा- नहीं आता।) नहीं आता है? क्यों? कलियुग में और द्वापर में राम की आत्मा जो साकार बनती है वो रावण के चम्बे में नहीं आती? (किसी ने कहा- आती है।) आती है ना। अच्छा, तो फिर शूटिंग पीरियड में आयेगी या नहीं आयेगी? (किसी ने कहा- अभी नहीं बाबा।) अभी नहीं? (किसी ने कहा- शूटिंग में नहीं।) क्यों? ऐसा कैसे होगा ? शूटिंग में जो शूट नहीं होगा वो ब्रॉड ड्रामा में नहीं होगा? (किसी ने कुछ कहा।) नहीं। बात समझने की है। शूटिंग पीरियड में जो शूट होगा वो ही तो ब्रॉड ड्रामा में होगा। (किसी ने कहा- लेकिन वो तो अब डायरेक्टर बन गया ना।) डायरेक्टर बन गया? वो डायरेक्टर तो सुप्रीमसोल जिसमें (जो) प्रवेश करता है वो डायरेक्टर है।

कठपुतलियों का खेल होता है तो एक बैठता है पर्दे के पीछे वो दस उंगलियों से कठपुतलियों को नचाता रहता है। है ना। तो दस उंगलियाँ है वो तो साकार में है। दस उंगलियाँ क्या हैं? साकार में। उनमें एक उंगली तो ज्यादा मजबूत होगी न कोई? कौनसी है? उन दस उंगलियों में दसों एक जैसी होंगी या नम्बरवार होंगी?
(कइयों ने कहा- नम्बरवार ।) ताकत तो नम्बरवार होती है ना। अच्छा, दाये हाथ में ज्यादा ताकत होती है या बायें हाथ में ज्यादा ताकत होती है? (कइयों ने कहा-बाये हाथ में।) बाये हाथ में ज्यादा ताकत होती है? (किसीने कहा-दाये।) दाये हाथ में ज्यादा ताकत होती है। और दाया हाथ में भी जो ताकत होती है उसमें भी सब उंगलियों में एक जैसी ताकत होती है या एक उंगली में ज्यादा ताकत होती है? (कइयों ने कहा- एक उंगली में ।) तो स्पष्ट हो गया? कि दस उंगलियाँ हैं जैसे वैसे ही दस धर्म हैं, और दस धर्मों के दस साकार रुप में मुखिया हैं। हुआ कि नहीं? (किसी ने कहा- दस बीज हैं।) दस बीज हुये ना। तो उन दस बीजों में दसों बीज जो हैं वो रावण के सर हो गये कि नहीं? अरे! (किसी ने कहा: हो गये।) दसों बीज रावण के सर हैं। उनमें शिव सुप्रीमसोल ज्योति बिंदु नहीं है।

लेकिन मुसीबत ये है कि वो ज्योति बिंदु का जब तक वो साकार में प्रवेश न करे तब तक उसका कोई मूल्य नहीं। वो सुप्रीमसोल जब तक साकार में प्रवेश करना नहीं होता तब तक दुनियां में उसका कोई अस्तित्व होता नहीं। और जब प्रवेश करता है तब उसका अस्तित्व शुरु होता है। उसकी भी पहचान शुरु होती है, निराकार की, ज्योति बिंदु की, और जिसमें प्रवेश करता है उसकी भी पहचान होती है। उसके बिगर वो नहीं और उसके बिगर वो नहीं। इसलिए बोला कि वो निराकार आता तो है लेकिन क्या बैल पर हमेशा सवारी होती है? बैल पर सदाकाल तो सवारी होती नहीं। फिर सुप्रीमसोल शिव को मुकर्रर रथ भले है लेकिन क्या एक में ही हमेशा प्रवेश रहता है, या दूसरे बच्चों में भी प्रवेश करके पार्ट बजाता है?
(किसी ने कहा- दूसरे बच्चोंत में भी प्रवेश करता है।) माना नम्बरवार 108 बच्चे भी हैं, जिनमें प्रवेश करके बीजरुप आत्माओं में प्रवेश करके वो शिव सुप्रीम सोल पार्ट बजाता है। इसका मतलब ये हुआ कि जो सूर्यवंशी ग्रूप है... वो सूर्यवंशी ग्रूप जिसमें मुकर्रर रुप से शिव एक रथ में प्रवेश करते हैं, उस एक रथ के नजदीक रहने वाले जो विशेष बच्चे हैं वो हुये सूर्यवंशी। क्या? बाकी तो फिर कुछ न कुछ दूरी होगी ना। तो जो बिल्कुल नजदीक रहने वाले जो बच्चे हैं उनका संगठन पहले तैयार हो जाता है। और वो बच्चे ऐसे हैं जो गीता का भगवान... जब ज्ञान मिल जाता है, जब वाणी मिल जाती है तो उस वाणी का आधार ले करके मजबूती से चलते हैं। उनकी बुद्धि में से ये बात नहीं निकलती कि गीता का भगवान कृष्ण की सोल (नहीं) है। उनकी बुद्धि में ये बात पक्की रहती है और यही बात पक्की होने के वजह से वो ज्यादा पॉवरफुल बन जाती हैं।

दुनियां के पतन का मूल कारण क्या हुआ? गीता का भगवान। गीता का भगवान जिनकी बुद्धि से निकल गया उनकी ताकत कम हो गई। क्योंकि ये बहुत बड़ी गाली हो गई। क्या? गीता है माता, और गीता पति भगवान की जगह नाम डाल दिया बच्चे का। तो बच्चा अगर माता का पति बन जाये तो बड़ी ते बड़ी दुनियां की गाली हो गई ना। तो गाली देने वालों का क्या असर होगा? और वो भी भगवान को गाली देते हैं।
(किसीने कहा-वो विनाश को पायेंगे।) तो विनाश को पाते हैं। विनाश को पाने का मतलब बीजरुप आत्माओं में ये नहीं है कि वो कोर्इ शरीर छोड देंगे। लेकिन उनका पद भ्रष्ठ हो जाता है।

तो पहली-2 बात बुद्धि में ये बैठने की है कि गीता का भगवान अभी वर्तमान में कौन? अभी भी गीता माता की बुद्धि में ये बात नहीं बैठी है कि गीता का भगवान शिव शंकर भोलेनाथ है। शिव शंकर भोलेनाथ गीता का भगवान है ये जिनकी-2 बुद्धि में अभी बैठ रहा है वो सूर्यवंशी साबित हो जावेंगे। नहीं बैठ रहा है वो चन्द्रवंश में चले जावेंगे। चन्द्रवंश में फिर सारे इस्लामी, बौद्धी, क्रिश्चियन ये सारे ही उस रहबरी में पलते हैं। बेसिक नालेज में भी अभी तक पल रहे हैं और एडवान्स नालेज में भी अभी तक पल रहे हैं।


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Mu.14.10.66, Dt.28.07.05
Part-5


They say,... It is mentioned in the Gita that the Supreme Father Supreme Soul is in front of the Pandavas in a visible form, but they have ruined the Gita. It is mentioned in the Gita that the Supreme Father Supreme Soul was in front of the Pandavas in a visible form. But they have ruined the Gita [by saying] what? [By saying] that God of the Gita is Krishna. As regards God of the Gita, they have proved the biggest devotee of the world himself to be God of the Gita. Well, from where does Bhakti come? Bhakti comes from Ravan. And whose head is shown over the head of Ravan? (Someone said: The head of the donkey.) Why this? (Someone said: Body consciousness.) Is it donkey in the form of body consciousness? Accha! There are ten heads below it - lust, anger, greed, attachment and ego; earth, water, air, fire and sky - they are the five elements and the five vices. These ten combine and become the form of Ravan, and their controller is [shown] above as the donkey? Accha! So, when they have shown the picture, there will certainly be some [souls] who play those parts, [won’t there?] Who are they? (Someone said: The donkey.) Arey! The picture of the ten [heads] that has been shown: earth, water, air, fire, sky [i.e.] the five elements of nature and the five forms of Maya [i.e.] lust, anger, greed, attachment and ego; there will also be ten faces, which play these ten parts [in practical, won’t there?]. And there will also be someone who has been shown as the donkey’s heads above them, [won’t there?]. So, who will he be? Is it not something to think over? If there is the picture, should there be someone who plays that part or not? (Someone said: There should be.) Then, who is he? That is the form of Ravan.

Bhakti comes from Ravan and knowledge comes from Ram. Even in case of Ram, there are two Rams, one is the corporeal one and the other is the incorporeal One. Ultimately, does even the corporeal one come in the clutches of Ravan or not?
(Someone said: He doesn’t come.) He doesn’t come? Why? Doesn’t the soul of Ram who becomes corporeal come in the clutches of Ravan in the Iron Age and the Copper Age? (Someone said: He comes.) He comes, doesn’t he? Accha, then, will he come [in his clutches] in the shooting period or not? (Someone said: Baba, not now.) Not now? (Someone said: Not in the shooting [period].) Why? How is it possible? How will something that is not shot in the shooting be enacted in the broad drama? (Someone said something.) No. This is something to understand. Whatever is shot in the shooting period, that itself will happen in the broad drama. (Someone said: But, now he has become the director, hasn’t he?) He has become a director? As regards the director... the Supreme Soul who enters him is the Director.

[For example], in a puppet show, a person sits behind the screen, he makes the puppets dance with all his ten fingers. Isn’t it? So, the ten fingers are in a corporeal form. How are the ten fingers? They are in a corporeal form. Among them, one finger will be the strongest, won’t it? Which finger is it? Among those ten fingers, will all the ten be alike or will they be number wise (according to their strength)? (Many said: Number wise.) Their strength is indeed number wise, isn’t it? Accha, is there more strength in the right hand or in the left hand? (Many said: In the left hand.) Is there more strength in the left hand? (Someone said: In the right.) There is more strength in the right hand. Even in the right hand, is there the same amount of strength in all the fingers or is there more strength in one of the fingers? (Many said: In one finger.) So, has it become clear? Just as there are ten fingers, there are the ten religions and there are ten chiefs in the corporeal form of the ten religions. Aren’t there? (Someone said: Ten seeds.) There are ten seeds, aren’t there? So, among those ten seeds... did all the ten seeds become the heads of Ravan or not? Arey! (Someone said: They became.) All the ten seeds are the heads of Ravan; the Supreme Soul Shiva, the Point of light is not present in them.

However, the problem is, until that Point of light enters a corporeal one He has no value. Until that Supreme Soul enters a corporeal one, He does not have any existence (astitva) in the world and when He enters [a body], He comes into existence. People start recognizing that incorporeal One, the Point of light and the one whom He enters is also recognized. He (the corporeal one) is nothing without Him (the incorporeal One) and He (the incorporeal One) is nothing without him (the corporeal one). Hence, it is said: That incorporeal One does come [to this world] but does He always ride on the bull. He certainly does not always ride the bull . Then, although the Supreme Soul Shiva has a permanent Chariot, does He enter and remain only in one all the time or does He enter the other children and play a part too?
(Someone said: He enters the other children as well.) It means, there are the number wise 108 children [according to their spiritual effort] as well, after entering them, after entering those seed form souls the Supreme Soul Shiva plays a role. This means, the Suryanvanshi group... the one Chariot in whom Shiva enters in a permanent way in that Suryavanshi group, the special children who remain close to that one Chariot are the Suryavanshis. What? All the rest will certainly be distant to some extent, won’t they? So, the gathering of the children who stay very near [to him] becomes ready first. And those children are such... God of the Gita... When they get the knowledge, when they get the Vani (Murli), then they take the support of that Vani and follow [the knowledge] firmly. This fact does not go out of their intellect that the God of the Gita is [not] the soul of Krishna. This concept remains firm in their intellect; and due to having this very concept firm [in their intellect] they become more powerful.

What is the main reason for the degradation of the world? [The concept of] the God of the Gita. The ones from whose intellect the concept regarding the God of the Gita went away, their strength has reduced, because this is a big abuse. What? Gita is the mother and in the place of God, the husband of the Gita, they inserted the name of the child. Thus, if a child becomes the husband of the mother, it is the biggest abuse in the world, isn’t it? So, what will be the condition of those who abuse? And that too, they abuse God.
(Someone said: They will be destroyed.) So, they are destroyed. For the seed form souls, ‘to be destroyed’ does not mean that they will leave their body, but they lose their status.

So, the first topic that should sit in the intellect is: Who is God of the Gita at present? Even till now, this concept has not sat in the intellect of the mother Gita that God of the Gita is Shiva Shankar Bholenath’ . Shiva Shankar Bholenath is God of the Gita; all those in whose intellect this topic sits now will be proved to be Suryavanshis. [The ones in whose intellect] it does not sit will go in the Moon dynasty. The people of Islam, the Buddhists, the Christians, all of them receive sustenance under the guidance of the Chandravanshis. They are receiving sustenance in the basic knowledge as well as they are receiving sustenance in the advance knowledge up until now
. ... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 11 Feb 2013

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उद्धरण-भाग-6


अभी बोला हुआ है पिछले वर्ष अव्यक्त वाणी में। क्या बोला है? ऐसे तो पहले भी इशारा दिया था। एक भी संगठन पावरफुल होने से अंत में एक दूसरे को खींचते हुये ... (किसी ने कहा: 108...) ...हाँ, 108 का संगठन एक हो जावेगा। माना ग्रुप्स अलग-2 हैं। एक ग्रुप पहले तैयार होता है और दूसरों को खींचते रहते हैं। तो सूर्यवंशी ग्रुप सबसे पहले किसको खींचेगा? चन्द्रवंशी को खींचेगा। क्योंकि बाप के सबसे जास्ती नजदीक कौन होती है? (किसीने कहा- सूर्यवंशी।) बाप के नजदीक कौन होती है? (किसीने कहा-चन्द्रमाँ।) परिवार है, परिवार में बाप के नजदीक, सबसे ज्यादा नजदीक कौन होता है? (किसी ने कहा- माँ होती है।) माँ होती है। चन्द्रवंशी शब्द कहने से भी समझ में नहीं आएगा। परिवार में ...जो भी वसुधैव कुटुम्बकम् की स्थापना होनी है उस पहली-2 इकाई वाले परिवार में सबसे जास्ती बाप के नजदीक होती है माँ। माँ के लिए कहा जाता है घर की धरणी अगर अच्छी हो तो घर स्वर्ग बन जाये और घर की धरणी अगर बिगडैल हो तो घर नर्क बन जाता है।

तो नर्क में अभी जो पुकार रहे हैं आओ-3 वो अपनी अज्ञानता के कारण पुकार रहे हैं या ज्ञान बुद्धि में बैठा हुआ है इसलिए पुकार रहे हैं?
(किसीने कहा-अज्ञानता से।) भारी अज्ञानता बुद्धि में बैठी हुर्इ है। वो अज्ञानाता का पर्दा हटेगा और उद्धार हो जायेगा। उत माना ऊपर, हर माना हरण। भगवान भी नीचे गिरी हुई आत्माओं को ऊपर नहीं ले जा सकता, जब तक उनकी बुद्धि में असलियत की बात न बैठे, ज्ञान न बैठे। ज्ञान है ही गीता का भगवान, उसकी पहचान। गीता के भगवान को ही अगर न पहचाना तो समझो ज्ञान बुद्धि में बैठा ही नहीं। अभी गीता के अलावा कोई दूसरा शास्त्र नहीं है। क्या? जिसमें भगवानुवाच लिखा हुआ हो। क्या? इस्लाम धर्म का शास्त्र है, क्रिश्चियन धर्म का शास्त्र है, बौद्धियों का भी शास्त्र है, सन्यासियों का भी शास्त्र है, लेकिन कोई शास्त्र में ये नहीं लिखा कि गीता का भगवान उस शास्त्र का सरपरस्त है । सिर्फ एक ही है श्रीमद्भगवद् गीता।

तो वो श्रीमद्भगवद् गीता साकार में होगी या निराकार में होगी?
(किसीने कहा-साकार में।) शास्त्र। शास्त्र माना क्या? शासन करने वाला। शास माना शासन, शास्त्र माना शासन करने वाला ग्रंथ। वो तो उन्होंने कागज बनाय दिया, कागज की किताब बना दी। उसको ग्रथित कर दिया। क्या? कोई किताब होती है ना तो मोटा ग्रंथ बनाते हैं तो उसके जुज़ होते हैं तो जुज़ों को धागे से सिल-2 करके उसको इकट्ठा कर देते हैं उसको कहते हैं ग्रंथ। तो ये भी गीता माता है। गीता माता के सारी सृष्टि बच्चे हैं। लेकिन सब बिखरे हुये हैं। जितने भी बिखरे हुये सारे ग्रुप हैं वो बीजरुप एडवान्स पार्टी में वह अब सब ग्रथित होने हैं। माँ से पूरी तरह जुडे़ और माँ बाप के साथ जुडे़।

क्या? सरस्वती को जगदम्बा कहते हैं ना, क्या कहते हैं? जगत की अम्बा। तो जो जगत की अम्बा है वो जगदम्बा सरस्वती को सब नदियों के बीच में लोप नदी दिखा दिया है। क्या? लोप हो गई। ये गायन किस समय का है?
(किसीने कहा- संगमयुग।) नहीं, गायन तो सारे संगमयुग के ही हैं। लेकिन सम्पन्न स्टेज के गायन हैं, अंत समय के गायन हैं, या जब संगमयुग शुरु होता है उस समय के गायन हैं? अंत समय का गायन है। बेसिक नालेज का भी जब अंत हुआ तो सरस्वती लोप हो गर्इ। एडवान्स नालेज का भी जब अंत होने को आता है तो जगदम्बा किसीको दिखाई नहीं पड़ती। इसलिए सरस्वती नदी को क्या दिखा दिया? गंगा को दिखाते हैं, यमुना को दिखाते हैं, लेकिन सरस्वती को दिखाते नहीं। वो गुप्त नदी हो गर्इ, लोप हो गई। लोप नहीं हो जाती है क्योंकि रुद्रमाला का मुख्य मणका है। क्या? रुद्रमाला में जो भी 108 मणके हैं उनमें सुप्रीम सोल के नजदीक मणके कौनसे हैं? माँ और बाप। तो जो नजदीक मणके हैं वो शरीर छोड़ करके लोप हो जायेंगे या रहेंगे? (किसीने कहा-रहेंगे।) रहेंगे ना। उनको तो कंचनकाया बनानी है ना कि नहीं बनायेगी? कुछ मणकों की कंचनकाया बनेगी, कुछ की नहीं बनेगी? कंचनकाया तो सभी की बनेगी। लेकिन वो लोप हो जाते हैं माना देखने में सबको आते नहीं हैं। लुप्त नदी दिखाई गई है। है तो, लेकिन गुफा में दिखाई जाती है। कौन? (किसी ने कहा: सरस्वती।) जो देवी है उसको गुफा के अंदर स्वरुप दिखाया। जैसे शिव को एक मंदिर ऐसा बनाया अमरनाथ में कि गुफा के अंदर शिव दिखाया जाता है। ऐसे ही उससे नीचे दूसरा मंदिर है देवी का उसको गुफा के अंदर दिखाया है वैष्णव देवी ।

VCD No.266, C.No.747, Mysore,
Mu.14.10.66, Dt.28.07.05
Part-6


It has been said now in the Avyakt Vani last year. What has been said? As such a hint was given earlier as well: Even if one gathering is powerful, by pulling each other... (Someone said: 108...) ... Yes, the gathering of the 108 [beads] will become one. It means there are different groups; one group becomes ready first and it keeps pulling others. So, whom will the Suryavanshi group pull first of all? It will pull the Chandravanshis. It is because who is the closest to the Father? (Someone said: Suryavanshi.) Who is close to the Father? (Someone said: The Moon.) The Father... For example, there is a family; in a family who is the closest to the Father? (Someone said: It is the mother.) It is the mother. It won’t be understood even if you say the word ‘Chandravanshi’. In the family... the establishment of Vasudhaiv Kutumbkam that has to take place, in that first family unit, it is the mother who is the closest to the Father. For the mother it is said: If the lady of the house is good, the house becomes heaven, and if the lady of the house is spoilt, the house becomes hell.

So, the ones who are calling [God] in hell: ‘Come, come, come’; are they calling [Him] due to their ignorance or are they calling because the knowledge has sat in their intellect?
(Someone said: Due to ignorance.) There is a lot of ignorance in the intellect. When that curtain of ignorance is raised, they will be uplifted (uddhar). Ut means above and har means to abduct. Even God cannot uplift the souls who have fallen down until the truth, the knowledge sits in their intellect. The recognition of God of the Gita itself is knowledge. If you have not recognised the God of the Gita Himself, consider that the knowledge has not sat in your intellect at all. Now, there is no other scripture except the Gita - What? - Which has ‘Bhagwaanuvaac’ (God speaks) written in it. What? There is the scripture of the Islam, there is the scripture of the Christian religion, there is scripture of the Buddhists too, the Sanyasis also have scripture but it is not written in any scripture that God of the Gita is the guardian of that scripture. There is only one [scripture like this:] the Shrimad Bhagwad Gita.

So, will that Shrimad Bhagwad Gita be in a corporeal form or in an incorporeal form?
(Someone said: In the corporeal form.) Shaashtra (scripture). What does shaashtra mean? The one who rules (shaasan). Shaash means rule [and] shaashtra means the book which rules. They have made a book of paper; they have compiled it. What? For example, there is a book, isn’t there? When a thick book (granth) is made, it includes [many] bundles [of paper]; they bind them together with a thread and make it one, it called granth. So, this also is the mother Gita. The entire world is the progeny of the mother Gita. But all are scattered. All the scattered groups have to unite together now, in the Advance Party of the seed form [souls]. They should join with the mother completely and the mother should join with the Father.

What? Saraswati is called Jagadamba, isn’t she? What is she called? The Mother of the World. So, the one who is the Mother of the World, that Jagadamba Saraswati has been shown as a disappearing river among all the rivers. What? She disappeared. To which time does this praise belong?
(Someone said: The Confluence Age.) No. All the praises are of the Confluence Age itself, but are they the praise of the complete stage, of the last period or are they the praises of the time when the Confluence Age begins? It is the praise of the last period. Even when the basic knowledge came to an end, Saraswati disappeared. Also when the end of the advance knowledge is about to take place, Jagadamba is not visible to anyone. Hence, how did they show the river Saraswati? They show Ganga, they show Yamuna but they do not show Saraswati. She is the hidden river, she disappeared. She does not disappear [in reality] because she is the main bead of the Rudramala . What? Which beads are close to the Supreme Soul among the 108 beads of the Rudramala? The mother and the Father. So, will the close beads leave their body and disappear or will they survive? (Someone said: They will survive.) They will survive, won’t they? They have to rejuvenate their body (kanchan kaaya), haven’t they? Or will they not rejuvenate their body? Will the body of some rejuvenate and the body of some not rejuvenate? Everyone’s body will rejuvenate but, they disappear, meaning they are not visible to everyone. She is shown as a river that has disappeared. She does exist but she is shown in a cave. Who? (Someone said: Saraswati.) The devi (female deity) is shown inside a cave. Just as there is such a temple built at Amarnath , that Shiva is shown inside the cave. In the same way, below it, there is another temple is of a devi. She, Vaishnav devi is shown inside the cave. ... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 12 Feb 2013

वी.सी.डी. नं.266, कैसेट नं.747, मैसूर,
मु.14.10.66, ता.28.07.05
भाग-7


कोर्इ गया कि नहीं वैष्णव देवी? (किसी ने कहा- नहीं बाबा।) कोर्इ नहीं गया? अरे, ये तो बिल्कुल भक्ति नहीं की। (किसी ने कहा- सब दक्षिण भारत वाले।) दक्षिण भारत वाले वैष्णव देवी जाते ही नहीं कभी? (किसी ने कहा- बहुत दूर है ना।) दक्षिण भारत वालों के लिए तो खास वो एक दक्षिण भारत की एक हवार्इ कम्पनी निकली है ऐर डक्कन। उसने तो खास यात्रा बना दी है वहाँ के लिए। क्या? वैष्णव देवी के लिए यात्रा जाती है कटरा से। दक्षिण भारत में... कटरा कहाँ पर है? दक्षिण भारत वालों को कुछ पता ही नहीं। उत्तर भारत वाले ज्यादा भक्ति करते है लगता है। इसलिए भारत का स्वदेश कह दिया है। और दक्षिण भारत वालों को भारत का विदेश कह दिया ये भक्ति नहीं करते। अच्छा, आखिरी जन्म में भक्ति नहीं करते तो कोर्इ खराब थोडे़ ही है। भक्ति कब करनी चाहिए? शुरुआत के आदि के जन्मों में, द्वापरयुग में या कलियुग के अंत की भक्ति करना चाहिए? (किसी ने कहा-शुरूवात।) हाँ, जिन्होंने आदि में भक्ति की वो हैं श्रेष्ठ भक्त, सात्विक भक्त। और जिन्होंने अंत की भक्ति की वो है तामसी भक्त। जिन्होंने तामसी भक्ति की उनको कौनसी प्राप्ति होगी? ज्ञान की तामसी प्राप्ति होगी। और जिन्होंने सात्विक भक्ति की उनको ज्ञान की सात्विक प्राप्ति होती है।

अब आत्मा तो दक्षिण भारत, उत्तर भारत, स्वदेशी, विदेशी होती नहीं। क्या होता है? शरीर विदेशी होता है, स्वदेशी होता है, कि आत्मा स्वदेशी, विदेशी होती है?
(किसी ने कहा- शरीर।) शरीर स्वदेशी, विदेशी होता है। शरीर का कनेक्शन एक जन्म से और आत्मा का कनेक्शन अनेक जन्मों से। तो ये तो नहीं कह सकते कि जो दक्षिण भारत के हैं इस समय ब्राह्मण वो जन्म जन्मांतर दक्षिण भारत में ही जन्म लेते रहे होंगे। क्या कहेंगे? ऐसा पक्की बात है? नहीं। ये तो नहीं कह सकते। हाँ, इस आखिरी जन्म में आकर के भले डबल विदेशी बन जायें लेकिन इससे पहले के जन्मों में कहाँ के वासी थे? हो सकता है पक्के भारतवासी हों। नहीं हो सकता है? हो सकता है। हाँ।

तो बोला कि अभी तुम बच्चे समझते हो कि गीता का भगवान कृष्ण की सोल नहीं है, शिव शंकर भोलेनाथ गीता का भगवान है। तुम संगमयुग पर हो तो तुम समझते हो। क्या? संगमयुग माना? दु:ख का भी संगम, सुख का भी संगम, शान्ति का भी संगम, तिबाटा हो गया। शान्तिधाम, सुखधाम और दु:खधाम। त्रिमूर्ति में भी है। एक मूर्ति है दु:खधाम; जब तिबाटा है तो तिबाटा में एक मूर्ति है दु:खधाम की सरपरस्त, एक मूर्ति है सुखधाम की सरपरस्त और एक मूर्ति है शान्तिधाम की सरपरस्त। कौन कौनसी मूर्तियाँ हुर्इं? अगर बुद्धि में समझ में बैठा है तो अलग-2 कर सकते हैं। कौनसी मूर्ति कहाँ की सरपरस्त है? ब्रह्मा दु:खधाम, विष्णु सुखधाम, शंकर शान्तिदेवा, शान्तिधाम। तो तीनों के बीच में खडे़ हो। क्या? तीनों का अपना-2 महत्व है।

भक्ति नहीं होगी तो भगवान नहीं मिलेगा। क्या? माता के बिगर सद्गति नहीं हो सकती। क्या कहा? कोर्इ भी आत्मा शरीर छोड़ती है और शरीर छोड़ करके जाकर के नया जन्म लेगी तो माता के बिगर जन्म ले सकती है क्या? नहीं। उसको माता के गर्भ में जरुर पलना पडे़ जहाँ सबसे जास्ती दु:ख का भी महसूस करती है आत्मा, जीवन काल में सबसे ज्यादा दु:खी होती है आत्मा या गर्भकाल में सबसे ज्यादा दु:खी होती है, त्राहि-2 करती है? गर्भकाल में सबसे ज्यादा दु:खी होती है, त्राहि-2 करती है बाहर निकलने के लिए। जैसे कोर्इ जैल में पड़ा हुआ हो तो वो सोचता है कब बाहर निकलें, स्वतंत्र हो जायें। तो ऐसे ही ये दुनियां बनी हुर्इ है। अब ये बेहद के ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनियां है।

ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनियां में भी अब हम तिबाटे पर खडे़ हुये हैं। क्या? किस तरफ जाना है? सुखधाम जाना है। सुखधाम जाना है तो बुद्धि कहाँ जानी पडे़ किस मूर्ति की तरफ? किसका आवाहन करना पडे़? विष्णु मूर्ति का। आज से कर्इ साल पहले अव्यक्त वाणी में बोला था कि विजयमाला का आवाहन करो। क्या करो?
(किसी ने कहा- विजयमाला ।) वो बात बुद्धि में से सबकी निकल गर्इ। अब सब जो हैं चारों तरफ आवाहन कर रहें हैं जगदम्बा का। क्या? जो मूर्ति है जिससे प्रैक्टिकल में परिवर्तन होना है संस्कारों का उसके लिए अव्यक्त वाणी में बोल दिया है। क्या बोला है? कि जो असली सर्विस है वो करना अभी अफ्रिका ने शुरु किया है। भल मेगाप्रोग्राम करते रहें हों, प्रदर्शनी के प्रेग्राम करते रहें हों, मेले-मलाखडे़ कान्फरेन्स आदि करते रहें हों वो सब बेकार सर्विस है, नकली है, डूप्लिकेट है। उससे उद्धार नहीं होना है। असली सेवा अभी अफ्रीका में शुरु हुर्इ है। इसका मतलब एडवान्स की शुरुआत वहाँ हो चुकी है। और वहाँ से ये भी बताया है कि हीरे जैसी आत्मायें सबसे जास्ती निकलती है अफ्रिका से। क्यों? क्यों निकलती है? और शंकर की मूर्ति से बिच्छू-टिण्डन क्यों पैदा होते हैं? (किसीने कहा-पवित्रता।) हाँ, वो पार्ट है इम्प्यूरिटी से विनाश, और प्यूरिटी से स्थापना। वो भी माँ का स्वरुप है। वो छोटी माँ है और वो बड़ी माँ है। ब्रह्मा सो विष्णु दोनों हैं तो एक ही। ब्रह्मा है जगदम्बा, और उसके संस्कार पलट करके जब विष्णु जैसे बन जायेंगे, एक शिवबाबा दूसरा न कोर्इ, तो क्या होगा? सब एक हो जावेंगे फिर। ओम् शान्ति।

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Part-7


Has anyone [from among you] been to the Vaishnavi devi [temple] or not? (Someone said: No Baba.) Didn’t anyone go? Arey! You have not done Bhakti at all. (Someone said: All are South Indians.) Don’t the South Indians ever go to the Vaishnavi devi [temple]? (Someone said: It is very far, isn’t it?) Especially for the South Indians, an Airline company of South India [named] Air Deccan has come up; it has organised a special trip to go there. What? A trip goes to Vaishnavi devi [temple] from Katra . In South India ... Where is Katra? The South Indians do not know anything at all! :D It seems that the North Indians do more Bhakti; this is why it (North India) is called the swadesh (native land) of Bharat and South India is called the foreign land of India; they don’t do Bhakti. :D Accha! It is not a bad thing if someone doesn’t do Bhakti in the last birth. When should we do Bhakti? Should we do it in the births in the beginning of the Copper Age or should we do Bhakti in the end of the Iron Age? (Someone said: In the beginning.) Yes, the ones who did Bhakti in the beginning are elevated and pure (satvik) devotees and the ones who did the Bhakti in the end are the degraded devotees. What attainment will the ones who did degraded Bhakti have? They will attain the degraded knowledge. And the ones who did pure Bhakti attain pure knowledge.

Well, the soul does not belong to South India, North India, to one’s own country (swadeshi) or foreign country (videshi). What is it [then]? Is the body videshi and swadeshi or is the soul swadeshi and videshi?
(Someone said: The body.) The body is swadeshi and videshi. The body is connected with one birth whereas the soul is connected with many births. So, it can’t be said that the Brahmins who belong to South India now, would have been taking birth only in South India for many births. What will be said? Is this confirmed? No, we can’t say this. Yes, they may become double foreigners in this last birth but in the previous births they were the residents of which place? It is possible that they were the firm Bharatwaasis. Can’t this be possible? This is possible. Yes.

So, it was said: Now you children understand that the soul of Krishna is not God of the Gita, Shiva Shankar Bholenath is God of the Gita. You are in the Confluence Age, so you understand. What? The Confluence Age means the confluence of sorrow, happiness as well as peace. It became a junction of three roads (tibaata). The Abode of Peace, the abode of happiness and the abode of sorrow. This is [shown] in [the picture of] the Trimurti as well. One personality is [the chief of] the abode of sorrow; in the tibaata one personality is the chief of the abode of sorrow, one personality is the chief of the abode of happiness and one personality is the chief of the Abode of Peace. Which are those personalities? If it has sat in the intellect, you can differentiate them. Which personality is the chief of which [abode]? Brahma is [the chief] of the abode of sorrow, Vishnu is [the chief] of the abode of happiness and Shankar is the deity of peace (Shantideva), [the chief] of the Abode of Peace. So, you are standing in the confluence of the three. What? All the three have their own importance.

If there is no Bhakti, you will not find God. What? The true liberation cannot take place without the mother. What was said? When a soul leaves the body and after leaving the body when it has a new birth, can it be born without the mother? No. It will certainly have to take sustenance in the mother’s womb, where the soul also experiences a lot of sorrow. Does the soul become the most sorrowful in its lifetime or does it become the most sorrowful and cries for mercy when it is in the womb? It becomes the most sorrowful when it is in the womb, it cries to come out. Just as if a person is in jail, he thinks: When will I come out so that I become free? So, the world is also made similarly. Now this is the unlimited Confluence Age world of Brahmins.

Even in the Confluence Age world of Brahmins, we are standing on a tibaata now. What? In which direction do we have to go? We have to go to the abode of happiness. If we want to go to the abode of happiness, where should the intellect go, towards which personality? Whom should we invoke? The personality of Vishnu. Many years ago, it was said in the Avyakt Vani: Invoke the Vijaymala (the rosary of victory). What should you do?
(Someone said: Vijaymala.) That topic has vanished from everyone’s intellect. Now everyone is invoking Jagadamba in all the four directions. What? The personality through which the transformation of the sanskaars has to take place in practice, it has been said for her in the Avyakt Vani. What has been said? Africa has started to do the actual service now. Although they have been doing mega programs, the programs of exhibition, fairs, conferences etc., all that is useless service, it is fake, it is duplicate [service]. They won’t be uplifted through it. Africa has started the actual service now. It means, the advance [knowledge] has started [to spread] there. And it is also said about that place: Most number of diamond like souls come out from Africa. Why? Why do they come out? And why are scorpion and spiders born through Shankar’s personality? :D (Someone said: Purity.) Yes. That is the part [which brings] destruction through impurity and the establishment takes place through purity. She is also the form of the mother; that one (Vaishnavi devi) is the junior mother and this one (Jagadamba) is the senior mother. Brahma becomes Vishnu; both are one and the same. Brahma is Jagadamba and when her sanskaars change and become like that of Vishnu ‘one ShivBaba and no one else’, then what will happen? Then, all will become one. Om Shanti. (Concluded)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 19 Feb 2013

वी.सी.डी नं.278, कैसेट नं.759, अनंतपुर,
मु.30.10.66, ता.20.08.05
भाग-1


वाणी चल रही थी 30 अक्टूबर 1966 कि प्रात: क्लास। तीसरे पेज के मध्यांत में बात चल रही थी ये नालेज ब्रह्मा मुखवंशावली ब्राह्मण ब्राह्मणियाँ जानते हैं। कौन जानते हैं? जो ब्रह्मा के मुखवंशावली है। अच्छा? दीदी, दादी, दादाओं के मुखवंशावली हो तो नहीं जानते हैं? इस नालेज को सिर्फ ब्रह्मा मुखवंशावली ही जानते हैं या कोई और गुरु गोसाई के मुखवंशावली जानते हैं? कोई मनुष्य गुरु ऐसा नहीं है जिसके मुखवंशावली इस नालेज को जानते हो।

तुमको बाप ने ब्रह्मा द्वारा एडाप्ट किया है। वो जो गुरु गोसाइयों के चेले होते हैं उनको वो गुरु गोसाई एडाप्ट करते हैं। और तुमको किसने एडाप्ट किया है? शिव बाप ने ब्रह्मा द्वारा एडाप्ट किया है। ब्रह्मा द्वारा एडाप्ट किया है? यहाँ ब्रह्मा कौन? ब्रह्मा ने तो शरीर छोड़ दिया। 68-69 में ही ब्रह्मा ने शरीर छोड़ दिया। फिर एडाप्ट कैसे किया? उनको शरीर छोड़े हुये तो 32 और 5, 38 साल हो गये। फिर तुम ब्रह्मा मुखवंशावली कैसे हुये?
(किसीने कहा - जिस तन में भी प्रवेश करते है उसका नाम ब्रह्मा रखना पड़े।) हाँ, ब्रह्मा ने भल शरीर छोड़ा तो जिस तन में भी प्रवेश करूँगा उसका नाम ब्रह्मा रखना पड़े।

तो सन 76 में बाप का प्रत्यक्षता वर्ष मनाया। बाप तो ज़रुर कोई ब्राह्मण बच्चे के द्वारा ही प्रत्यक्ष होगा। तो जिस बच्चे के द्वारा प्रत्यक्ष होता है वो ही ब्रह्मा हो गया। कौनसा ब्रह्मा? जो यज्ञ के आदि में भी था प्रजापिता ब्रह्मा। वो ही आत्मा तब थी 60 साल की वानप्रस्थ अवस्था में। वानप्रस्थ अवस्था में 40 साल और एड हुये तो सन 76 आया। 76-77 में सम्पूर्णता वर्ष मनाया गया। वो किसका सम्पूर्णता वर्ष था? कौनसे ब्रह्मा का सम्पूर्णता वर्ष था? प्रजापिता ब्रह्मा। आदि ब्रह्मा का सम्पूर्णता वर्ष माना ब्रह्मा की आयु 100 वर्ष पूरी हुई और उस नये चोले में परमात्मा शिव ने प्रवेश किया। प्रत्यक्ष हुआ। जब प्रत्यक्ष हुआ तो एडवान्स पार्टी निकली, एडवान्स पार्टी के वत्सों के द्वारा बाप की प्रत्यक्षता हुई। तो तुमको बाप ने ब्रह्मा द्वारा एडाप्ट किया है।

भगवान तुमको पढ़ा करके यह बनाते हैं। तुमको पढ़ाकर, क्या बनाते हैं? यह। यह माने किसकी तरफ इशारा? लक्ष्मी-नारायण के चित्र की तरफ इशारा दिया कि तुमको यह बनाते हैं। उन ब्राह्मणों को नहीं बनाते । जो सन्मुख बैठ करके पढ़ते हैं उनको बनाते हैं। तो अच्छी रीति पढ़ना चाहिए ना। सन्मुख बैठ करके तुम पढ़ते हो। वो तो सन्मुख बैठ करके नहीं पढ़ते हैं। तो जो सन्मुख बैठ करके पढ़ते है उनको पढ़ाई बहुत अच्छी रीति पढ़नी चाहिए। सिर्फ बाप और नई दुनियां को याद करो। पढ़ार्इ बहुत कठिन नहीं है। क्या करना है? सिर्फ बाप को याद करो, और बाप जो नर्इ दुनियां रचने के लिए आया हुआ है उस नई दुनियां को याद करो। हाँ? अभी अव्यक्त वाणी में तो इस साल बोल दिया तुम बच्चों को नई दुनियां की सौगात बाप ने दी है। अरे, सैागात दी है तो सौगात याद नहीं आती है? याद आना चाहिए ना। नहीं याद आती है इसका मतलब अच्छी रीति पढ़ार्इ नहीं पढ़ी है। नहीं तो कोर्इ की दी हुई सौगात तो याद आनी चाहिए ना। अव्यक्त वाणी में बोल तो दिया इस साल, क्या बोला? कि बापदादा ने बच्चों को नई दुनियां की सौगात दी है। उस नई दुनियां में आना जाना करते हो ना। इसका मतलब जिन्होंने पढ़ाई पढ़ी अच्छी रीति वो आना जाना करते हैं। और जिन्होंने अच्छी रीति पढ़ाई नहीं पढ़ी वो आना जाना अभी भी नहीं करते हैं। उन्हे पता ही नहीं कि जो नई दुनियां की सौगात दी है वो नई दुनियां कहाँ स्थापन हो रही है। तो अच्छी रीति पढ़ना चाहिए।

सिर्फ बाप को याद करना है और नर्इ दुनियां को याद करना है। तो तुम स्वर्ग में चले जावेंगे। अभी स्वर्ग नहीं रचा गया है। क्या? स्वर्ग की सौगात नहीं दी है। स्वर्ग की सौगात तो तीरी पर बहिश्त करके दिखाते हैं। देखो ये स्वर्ग है। हथेली पर स्वर्ग दिखाते हैं। अभी बना नहीं है स्वर्ग। नई दुनियां की सौगात दी है। दुनियां में तो सब धर्म की आत्मायें होती हैं। भले हर धर्म की चुनी हुई श्रेष्ट-2 अच्छी-2 आत्मायें हो लेकिन वहाँ तो सब धर्म की आत्मायें होती हैं। तो अगर तुम अच्छी रीति पढ़ेंगे तो स्वर्ग में चले जावेंगे और बहुतों को पढ़ावेंगे तब जावेंगे। क्या? क्या कहा? अगर अच्छी रीति पढ़ेंगे और बहुतों को पढ़ावेंगे तो राजा रानी बन सकते हैं। अगर खुद अच्छी रीति नहीं पढ़ेंगे, बहुतों को नहीं पढ़ावेंगे तो स्वर्ग में तो जावेंगे लेकिन राजा रानी नहीं बनेंगे।

जितनी रुहानी सर्विस करेंगे उतना ऊँच पद पावेंगे। तुम हो रुहानी सोशल वर्कर। क्या? रुहानी सोसाइटी की तुम सेवा करने वाले हो। जिस्मानी सोसाइटी की सेवा करने वाले नहीं हो। बाकी सारी दुनियां में है जिस्मानी सोशल वर्कर। तुम आत्माओं को बाप रुह का ज्ञान देते हैं। आत्माओं की सेवा करते हैं। इसको कहा ही जाता है आत्माओं की सेवा, जो सिखाते भी स्प्रीचुअल फादर है। ये रुहानी सेवा रुहानी बाप ही आ करके सिखाते हैं।

मनुष्य को भगवान कहना तो महान पाप हो जाता है। क्या? कोर्इ मनुष्य भगवान बन करके बैठ जाय तो ये तो बहुत बड़ा पाप है। कहते है ना शिवोहम। माना हम ही शिव है। अब शिव आवेगा दुनियां की सबसे बड़ी हस्ती तो वो अपने मुख से बैठ कहेगा कि शिवोहम, मैं शिव हूँ? उन्होंने तो किताब में लिख दिया है सच्चिदानन्द स्वरुपम् शिवोहम्-2, निजानन्द स्वरुपम् शिवोहम्-2 ब्रह्माबाबा को साक्षात्कार हुये और इस तरह बोलने लगे। बाप कहते हैं जो अपन को अपने आप शिव कहते हैं वो बड़े ते बड़े क्या है? हिरण्याकश्यप है। अभी बोला मनुष्य को भगवान कहना तो महापाप है।


VCD No.278, C.No.759, Anantpur,
Mu.30.10.66, Dt.20.08.05
Part-1


The Vani which was going on is the morning class of 30th October 1966. The topic being discussed in the end of the middle part of the third page was: the brahmins and brahmanis who are the mouth born progeny of Brahma know this knowledge. Who knows it? Those who are the mouth born progeny of Brahma. Accha? Don’t those who are the mouth born progeny of the Didis, Dadis and dadas know [this knowledge]? Do only those who are the mouth born progeny of Brahma know this knowledge or do those who are the mouth born progeny of some other gurus and holy men know [this knowledge]? There is no human guru whose mouth born progeny know this knowledge.

The Father has adopted you through Brahma. The disciples of the gurus and holy men are adopted by those gurus and holy men. And who has adopted you? The Father Shiva has adopted [you] through Brahma. He has adopted [you] through Brahma? Who is Brahma here? Brahma left his body. Brahma left his body in 68-69 itself; then how did he adopt [you]? 32 and 5, 38 years have passed since he left his body. Then how did you become the mouth born progeny of Brahma?
(Student said: Whichever body He enters has to be named Brahma.) Yes, although Brahma left his body; whichever body I enter will have to be named Brahma.

So, the year of the revelation of the Father was celebrated in the year 76. The Father will certainly be revealed through some brahmin child. So, the child through whom He is revealed is Brahma. Which Brahma? The one who was present at the beginning of the Yagya as well; Prajapita Brahma. The same soul was 60 years old at that time, in the vaanprasth stage . If another 40 years are added to the vaanprastha stage, the year 76 comes. The year of completion was celebrated in 76-77. Whose year of completion was it? It was the year of completion of which Brahma? Prajapita Brahma. The year of completion of Adi Brahma (the first Brahma) means the 100 years of Brahma were complete and the Supreme Soul Shiva entered that new body. He was revealed. When He was revealed, the Advance Party emerged. The revelation of the Father took place through the children of the Advance Party. So, the Father has adopted you through Brahma.

God teaches you and makes [you] this. [After] teaching you; what does He make [you]? This. This, meaning whom did He indicate? He indicated the picture of Lakshmi-Narayan that He makes you this. He does not make those Brahmins [into Lakshmi-Narayan]. He makes those who sit face to face and study [into Lakshmi-Narayan]. So, you should study nicely, shouldn’t you? You study sitting face to face. They don’t study sitting face to face. So, those who study sitting face to face should study very nicely. Remember only the Father and the new world. The study is not very difficult. What should you do? Just remember the Father and remember the new world which the Father has come to establish. Now, it was said in the Avyakt Vani this year: the Father has given the gift of the new world to you children. Arey! If [you are] given the gift, don’t you remember it? You should remember it, shouldn’t you? If you don’t remember it, it means you have not studied well. Otherwise, you should remember a gift given by someone, shouldn’t you? It was certainly said in the Avyakt Vani this year, what was said? BapDada has given the children the gift of the new world. So, you certainly visit that new world, don’t you? It means those who have studied nicely, visit [the new world] and those who haven’t studied well; don’t visit [the new world] yet. They do not know at all about where the new world, which has been gifted, is being established. So, you should study well.

You should remember only the Father and the new world; then you will go to heaven. Heaven is not created now. What? He has not given the gift of heaven. The gift of heaven is shown on the palm, [saying:] See, this is heaven. Heaven is shown on the palm. It is not created now. He has given the gift of the new world. Souls belonging to all the religions are present in the world. Although there are the chosen elevated souls, good souls of all the religions but there are souls belonging to all the religions there. So, if you study nicely, you will go to heaven, moreover, you will go there if you teach many. What? What was said? If you study nicely, and teach many, you can become a king or a queen. If you yourself don’t study well; if you don’t teach many, you will certainly go to heaven but… But? You will not become a king or a queen.

The more spiritual service you do, the higher the position you will obtain. You are a spiritual social worker. What? You are the ones who serve the spiritual society. You are not the ones who serve the physical society. As for the rest there are physical social workers in the entire world. The Father gives the knowledge of ruh (spirit) to you souls. He serves the souls. This is certainly called the service of souls; which is taught by the Spiritual Father Himself. Only the Spiritual Father comes and teaches this spiritual service.

It is a great sin to call a human being God. What? It is a great sin if a human being sits as God. They do say, ‘Shivoham’, don’t they? Meaning I Myself am Shiva. Now if Shiva comes, the biggest personality of the world, will He say, ‘Shivoham’ [i.e.] I am Shiva through His own mouth? They have written in the book, sacchidaanand swaroopam Shivoham Shivoham , nijaanand swaroopam Shivoham Shivoham ; Brahma Baba had visions and he started saying this. The Father says: The one who calls himself Shiva is the biggest… What is he? Hiranyakashap . Now it was said: It is a great sin to call a human being God.
... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 20 Feb 2013

वी.सी.डी नं.278, कैसेट नं.759, अनंतपुर,
मु.30.10.66, ता.20.08.05
उद्धरण-भाग-2


तो ये है मनुष्य से देवता बनने की पाठशाला। क्या? ये पाठशाला कोई छोटी मोटी नहीं है। कैसी पाठशाला है? मनुष्य से देवता बनने की पाठशाला है। इतना ऊँच पद और कोई पाठशाला में और कोई स्कूल में, और कोर्इ कालेज में इतना ऊँच पद मिलता नहीं है। बनेंगे भी जरुर। क्या? देवता बनेंगे भी जरुर। 10 वर्ष के अंदर तुम पढ़ करके तैयार हो जावेंगे। और फिर विनाश शुरु होगा। कौनसे सन् की वाणी है? 66 की वाणी है। 66 में एड किया 10 साल तो कितना आया? यपतारो। क्या आया? क्या कहते हैं? कन्नड में क्या कहते हैं? (किसीने कहा – यपतारो।) यपतारो। 76 आया। तो सन् 76 में तुम पढ़ करके तैयार हो जावेंगे और विनाश शुरु हो जावेगा। माना तुम्हारी पढ़ाई पूरी हो जावेगी और विनाश शुरु हो जावेगा। ये किससे कहा? कोई न कोई बच्चे बाबा ने अपने सामने सन 66 में इमर्ज किये अपनी आँखों के सामने और उन बच्चों से बोला कि तुम 10 वर्ष में पढ करके तैयार हो जावेंगे और फिर उसके बाद विनाश शुरु हो जावेगा। अच्छा? कौन पढ़ करके तैयार हो गया? कौन देवता बन गये? दिखाई तो कुछ भी नहीं पड़ता। और कहाँ विनाश शुरु हो गया सन् 76 में? (किसीने कहा – ब्राह्मण परिवार में।) कहाँ विनाश शुरु हो गया ब्राह्मण तो और ज्यादा बढ़ते चले जा रहे हैं। विनाश कहाँ शुरु हो गया? (किसीने कुछ कहा।) पता नहीं? (किसीने कहा – प्रजापिता का...।) प्रजापिता का विनाश हो गया? (किसीने कहा – नहीं नहीं बाबा।) (किसीने कहा – भारत से।) नहीं। जो भी ब्राह्मणों की दुनियां तैयार हुई, उस ब्राह्मणों की दुनियां में जो नया संगठन तैयार हुआ वो तो बाप को जानते हैं।

ब्रह्मा से पढ़ाई पढ़ रहे हैं। ब्रह्मा के द्वारा वर्सा प्राप्त कर रहे हैं। बाकी जिनको पता नहीं है वो जैसे कि मर गये। अनिश्चय बुद्धि विनश्यते हो गये। उनकी बुद्धि में ये बात नहीं है कि हम इसी शरीर से लक्ष्मी-नारायण जैसे बनेंगे। तो बात उड़ गई ना। तो वो फेल हो गये। और तुम 10 वर्ष में तैयार हो जायेंगे। माना? कोई लक्ष्मी-नारायण बनने वाली आत्मायें बाबा के सामने मौजूद थी। इमर्ज हुई। उनके लिए बोला कि तुम 10 वर्ष में तैयार हो जावेंगे। तुम्हारा संगठन तैयार हो जायेगा। तुम्हारी नई दुनियां तैयार हो जावेंगे। और फिर विनाश शुरु होगा। किसका विनाश शुरु हुआ? 500 करोड़ की दुनिया तो अब 700 करोड़ की बन गर्इ। विनाश कहाँ हुआ? और ज्यादा बढ़ गई। अच्छा, ब्राह्मणों की दुनियां (में) पहले जितने ब्राह्मण थे उससे ज्यादा और बन गये ।
(किसीने कुछ कहा।) हाँ, विनाश होने का मतलब ये है कि जो अनिश्चय बुद्धि आत्मायें बनती जा रही हैं अंदर-2 जैसे भक्तिमार्ग में चलते हैं ऐसे ही चलने लग पड़े। उनका निश्चय उखड़ चुका है। निश्चय उखड़ चुका माना मर गये। मुर्दा हो करके चल रहे हैं। एक कान से ज्ञान सुनते हैं... जैसे भक्तिमार्ग में कथा सुनते हैं एक कान से सुनते हैं दूसरे कान से निकाल देते हैं। ऐसे ही वहाँ भी मुरली सुनते हैं एक कान से दूसरे कान से निकाल देते हैं। मुरली क्या कहती है, उसका क्या अर्थ है कोई बुद्धि नहीं चलती। मुर्दा की बुद्धि चलती है क्या? मुर्दा की तो कोई बुद्धि नहीं चलती। तो विनाश शुरु होगा... भल विनाश शुरु होगा तुम फिर भी स्वर्ग में जावेंगे। क्या? उन रावण, कुम्भकर्ण, मेघनाथ जैसे ब्राह्मणों का विनाश होगा, और तुम फिर भी स्वर्ग में जावेंगे।

कहते हैं राम गयो, रावण गयो जिनको बहु परिवार। सो तो थोड़े ही रहते हैं। जो फिर अदल - बदल होती रहती है। तुम फिर आवेंगे नई दुनियां स्वर्ग में। क्या? कहाँ आवेंगे? तुम आवेंगे स्वर्ग में। अब नई दुनियां स्थापन हो रही है। कब बोला? 66 में बोला अब नई दुनियां स्थापन हो रही है। इसका मतलब सन् 76 में ब्राह्मणों की नई दुनियां तैयार हुई । वो नई दुनियां जो तैयार हुई वो एडवान्स पार्टी बढ़ती रही। सन् 76 से ले करके कब तक? 2004-05 तक। कितनी साल बढ़ी? 30 साल। अभी तीसरी मूर्ति के प्रत्यक्ष होने में तीन साल और पड़े हैं। 33 साल हो जावेंगे। 100 साल का संगमयुग है। तीन मूर्तियाँ हैं। तीनों मूर्तियों के कार्यकाल 30-33, 30-33 साल के हो गये।

तो सन् 76 से ले करके अभी 2005 चल रहा है। अभी ब्राह्मणों की एडवान्स पार्टी में नई दुनियां का जो सॉलिड रुप है वो तैयार हुआ है या नहीं हुआ है? भले अव्यक्त वाणियों में बाबा ने ये बोल दिया। क्या बोला? नई दुनियां की सौगात तुम बच्चों को बापदादा ने दी है। माना तैयारी तो हो गई है। तैयारी हो गई है, नई दुनियां स्थापन भी हो चुकी है। अभी बाप आये हैं। इशारा दे रहे हैं बच्चों को पढ़ाई पढेंगे तो ऊँच पद पावेंगे। पढ़ाई पढ़ करके दूसरों को पढ़ावेंगे तो ऊँच पद पावेंगे। इस दुनियां में तो अभी नर्क है। अभी तुम ही हो जो सिर्फ संगमयुग पर हो। अगर संगम याद रहता है, भगवान याद रहता है तो तुम संगमयुग पर हो। बाप की याद नहीं रहती है, दु:खी होने लगते हो, माया तंग कर देती है, ज्ञान के पाइंट्स बुद्धि में से उड़ जाते हैं तो संगमयुग पर हो या नर्क में हो? नर्क में आत्मायें दु:खी होती हैं। बाकी सब कलियुग में है। तुम संगम पर हो। तुम न नर्कवासी हो, और न स्वर्गवासी हो।

भल नर्इ दुनियां की सौगात तुमको दी है। लेकिन तुम अभी स्वर्गवासी नहीं हो, और नर्कवासी भी नहीं हो। ये क्या बात? अब बीच में है। हम दु:खी भी नहीं होते, हम बहुत सुखी भी नहीं होते। कहते हैं ना सुख, दु:ख में कैसा रहना चाहिए? सुख दु:ख में समान रहना चाहिये। दु:ख पड़ता है तो रोना नहीं, दूसरों के सामने अपना दु:खडा रोना नहीं, और सुख मिलता है तो बहुत खुश नहीं होना। तो तुम अभी न नर्कवासी हो, न स्वर्गवासी हो। तुम संगमयुगवासी हो। अभी तुम ब्राह्मण हो। न शूद्र हो, न देवतायें हो। देवता कहा जाता है सम्पूर्ण ब्राह्मण को।


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Mu.30.10.66, Dt.20.08.05
Part-2


So, this is a pathashala (school) to become deities from human beings. What? This is not an ordinary [school]. What kind of a school is it? It is a school to become deities from human beings. Such a high position is not obtained in any other pathshala, school or college. You will certainly become… What? You will certainly become deities. You will become ready after studying within 10 years and then the destruction will begin. It is the Vani of which year? It is the Vani of 66. 10 years were added to the 66, so [which year] came? Yapataro. What came? What do you say? What do you say in Kannada? (Someone said: Yapataro.) Yapataro. 76 came. So, you will become ready in the year 76 after studying and destruction will begin. Meaning, your study will be complete and the destruction will begin. To whom was this said? Baba emerged some children in front of his eyes in the year 66 and said to them, you will become ready after studying in 10 years then the destruction will begin. Accha? Who became ready after studying, who became deities ; nothing like that is visible and where did the destruction begin in the year 76? (Someone said: In the brahmin family.) Where did the destruction begin? The [numbe of] brahmins is increasing even more. Where did the destruction begin? (Someone said something.) You do not know? (Someone said: ...of Prajapita.) Did the destruction of Prajapita take place? (Student said: No, no Baba.) (Someone said: From Bharat.) No. The world of brahmins that became ready, in that world of brahmins, the gathering of the new world that became ready; they know the Father.

They are studying from Brahma, they are receiving the inheritance through Brahma and the rest who don’t know, it is as if they are dead. They became anishcay buddhi vinashyate. It is not in their intellect: we will become like Lakshmi-Narayan with this very body. So, the topic went out [of the intellect], didn’t it? Therefore, they failed. And you will become ready within 10 years. Meaning, some souls who are going to become Lakshmi-Narayan were in front of Baba, they emerged [in front of him]. It was said for them: You will become ready in 10 years, your gathering will become ready. Your new world will become ready and then destruction will begin. Whose destruction will begin? The world of 5 billion [human souls] has now become of 7 billion [human souls]. Where did the destruction take place? It increased even more. Accha, the number of brahmins that were there [in] the world of Brahmins increased even more.
(Someone said something.) Yes. Destruction means, the souls who are becoming the ones with a doubting intellect within, who have started living like [the people] in the path of Bhakti; their faith is uprooted. Their faith has been uprooted meaning they are dead. They following [knowledge] like a corpse; they listen to the knowledge through one ear like they listen to the stories in the path of Bhakti and leave it out through the other . Similarly there also they listen to the Murli through one ear and leave it out through the other . Their intellect does not work about what the Murli says, what its meaning is. Does the intellect of a corpse work? The intellect of a corpse does not work. So, the destruction will begin... Although the destruction begins; you will still go to heaven. What? The destruction of the brahmins like Ravan, Kumbakaran [and] Meghnath will take place. And you will still go to heaven.

It is said: Ram gayo, Ravan gayo jinko bahu parivar (Ram departed, Ravan, who had a big family departed). [Ultimately] only few of them remain who are then transferred. You will then go to the new world, heaven. What? Where will you go? You will go to heaven. Now the new world is being established. When was it said? It was said in 66, the new world is being established. It means the new world of brahmins became ready in the year 76. The new world which became ready…that Advance Party kept increasing. From the year 76, till when? Till 2004-05. For how many years did it increase? [For] 30 years. Now, another three years are left for the revelation of the third murti (personality). It will become 33 years. The Confluence Age is of 100 years. There are three murtis. The working period of all the three murtis is 30 – 33 years.

So, from the year 76, 2005 is going on now; has the solid form of the new world in the Advance Party of the brahmins become ready now or not? Although Baba said this in the Avyakt Vanis, what did he say? ‘BapDada has given the gift of the new world to you children’. Meaning, the preparation has been done. The preparation has been done, the new world has also been established Now the Father has come. He is giving a hint to the children, ‘if you study, you will attain a high position. If you study and teach the others you will attain a high position’. Now, there is hell in this world. Now it is you alone who are in the Confluence Age. If you remember the Confluence [Age], if you remember God , you are in the Confluence Age. If you don’t remember the Father, if you start to become sorrowful, if Maya troubles you, if the points of knowledge vanish from your intellect, are you in the Confluence Age or hell? The souls become sorrowful in hell. All the others are in the Iron Age, you are in the Confluence [Age]. You are neither the residents of hell nor the residents of heaven.

Although you are given the gift of the new world , you are neither the residents of heaven nor the residents of hell yet. What is this? Now [we] are in the middle. We neither become sorrowful nor do we become very happy. It is said, isn’t it, how should we remain [at the times of] happiness and sorrow? We should remain uniform in happiness and sorrow. We should not cry in sorrow; we should not express our sorrow in front of others and we should not become very happy if we receive happiness. So, now you are neither the residents of hell nor the residents of heaven. You are the residents of the Confluence Age. Now you are brahmins. You are neither Shudra nor deities. A complete brahmin is called a deity.
... (to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 21 Feb 2013

वी.सी.डी नं.278, कैसेट नं.759, अनंतपुर,
मु.30.10.66, ता.20.08.05
भाग-3


तो माया अभी बीच-2 में खाती रहती है, अवस्था नीचे गिराय देती है, दु:खी कर देती है इसका मतलब अभी तुम पक्के ब्राह्मण नहीं बने। कहेंगे हाँ ब्राह्मण हो क्योंकि ब्राह्मणों की तो अनेक कुरियाँ होती हैं। ऊँचे ते ऊँचे ब्राह्मण भी होते हैं, और नीची कुरी के भी ब्राह्मण होते हैं। तो कहेंगे अभी तुम ब्राह्मण हो। जब तक ब्राह्मण पक्के न बने तब तक पक्के देवता भी बन नहीं सकते। पक्के ब्राह्मण का ठप्पा लगना चाहिए।

ब्रह्मा मुखवंशावली ब्राह्मण ब्राह्मणी बने ना। अगर बनेंगे तो शिवबाबा से वर्सा ले सकेंगे। नहीं बनेंगे तो शिवबाबा से वर्सा इस जीवन में नहीं ले सकेंगे। भल सतयुग के दूसरे, तीसरे, चौथे जन्म में वर्सा मिल जावेगा वो तो देवताओं से मिलेगा। लेकिन इस जन्म में जो बाप से डायरेक्ट पढ़ाई पढ़ते हो सन्मुख बैठ करके; अगर पूरी पढ़ाई न पढ़ी, पूरा पुरुषार्थ नहीं किया, गफलत करते रहे, तो बाप से पूरा वर्सा नहीं ले सकते। माना 16 कला सम्पूर्ण देवता इस जन्म में नहीं बन सकते। वर्सा ब्राह्मणों को मिलता है। क्या कहा? अगर शूद्रपना है तो वर्सा मिल नहीं सकता। पक्के ब्राह्मण है तो जरुर वर्सा मिलना है।

बाकी कुछ न कुछ सुना, थोड़ा बहुत जिन्होंने सुना है सन्मुख आ करके, बाप के सन्मुख आ करके जिन्होंने सुन लिया; माँ के सन्मुख नहीं। किसके सन्मुख? बाप के सन्मुख आकर जिन्होंने कुछ थोड़ा बहुत भी सुना है तो वो स्वर्ग में आ जावेंगे।

जितना याद करेंगे उतना आत्मा की खाद जलती जावेगी। कौनसी खाद होती है? आत्मा के अंदर कौनसी खाद है? देहभान की, विकारों की वो खाद जलती जावेगी। जैसे सोना होता है तो सोने में चाँदी की खाद डाल देते हैं, ताम्बे की खाद डाल देते हैं, लोहा मिक्स कर देते हैं, तो उसकी कीमत, सोने की कीमत कम हो जाती है। तो ऐसे ही ये आत्मा इसमें जैसे-2 विकारों की खाद पड़ती जाती है वैसे-2 आत्मा की पॉवर कम होती जाती है। त्रेतायुग शुरु हुआ कौनसी खाद पड़ गई? 2 कला कम हुई तो किस लिए कम हुई? जो ऊपर से आत्मायें आती है वो फेलियर आत्मायें आती हैं। क्या? पक्के ब्राह्मण नहीं बने। सेमी देवता बनते हैं वो। तो जो सेमी देवतायें ऊपर से आत्मायें उतरी वो ढेर के ढेर तादाद में उतरती हैं। 8 करोड़। सतयुग में सिर्फ 2 करोड़ आबादी थी। उनमें भी पक्के ब्राह्मण सिर्फ 9 लाख थे। 9 लाख में अधूरे ब्राह्मणों की खाद पड़ती है। फिर भी सोना कहा जाता है। फिर त्रेतायुग में चाँदी की खाद पड़ती है। चाँदी जैसी आत्मायें जिनकी कीमत बहुत कम। कहाँ सोना, और कहाँ चाँदी!

सोना 5, 6 हजार का कितना मिलता है?
(किसी ने कहा - 10 ग्राम) 10 ग्राम। और चाँदी? 8,10 हजार की कितनी मिलेगी? एक किलो। तो बहुत फर्क पड़ गया। जब द्वापरयुग शुरु होता है तो ताम्बे जैसी आत्माओं की खाद पड़ जाती हैं। इब्राहीम आये, क्राइस्ट आये, जो व्यभिचार फैलाने वाली आत्मायें हैं, जो क्रोधी आत्मायें हैं क्रोध में आती हैं तो सारी दुनियां को एटम बम्बों से भून के रख देती हैं। ऐसे-2 कामी और क्रोधी आत्माओं के संग के रंग में देवताओं को आना पड़ता है तो संग के रंग की खाद पड़ जाती है। सोने में चाँदी, ताम्बा मिक्स किया जाता है ना। मिक्स किया गया माना संग का रंग लग गया। तो जितनी-2 अग्नि को तेज करेंगे... सोने में से खाद निकलती है तो कब निकलती है? धीमी आग से खाद नहीं निकलती, कोर्इ धीमी-2 आग सारा दिन जलाता रहे सोने में, वो खाद उसकी अलग नहीं होगी। कब अलग होगी? जब तीखी अग्नि जलेगी, तो तीखी अग्नि के जोर से उसमें जो चाँदी और ताम्बा मिक्स हुआ पड़ा है वो अलग हो जोयगा। ऐसे ही यहाँ भी।

यहाँ कौनसी अग्नि है? यहाँ योगाग्नि है। तो ये योगाग्नि जितनी-2 तीखी करेंगे; तीव्र अग्नि हो माना उस अग्नि में भी दूसरों की याद मिक्स नहीं होनी चाहिए। अगर दूसरों-2 की याद मिक्स हुई तो अग्नि तीव्र अग्नि नहीं कही जायेगी। इसलिए बाबा कहते हैं मामेकम याद करो तो तुम्हारी खाद निकलेगी। अगर एकम की जगह दूजम-2 को भी याद किया तो खाद नहीं निकलेगी। हो सकता और ही चढ़ जाये। तो अभी क्या हो रहा है? अभी अवस्था नीचे गिर रही है, या ऊपर उठ रही है? नीचे गिर रही है। ये क्या बात हो गई? इतने दिनों से पढ़ाई पढ़ रहे हैं और अवस्था नीचे गिर रही है? इसका मतलब क्या किया? दूसरों-2 की खाद मिक्स कर ली। माना दूसरों का संग का रंग बुद्धि में ज्यादा लगाया है। और बाप जो बोलते हैं मामेकम याद करो वो एकम की याद बहुत थोड़ी टिकी है। तो एकम की याद बहुत थोड़ी टिके और दूसरों-2 की याद में हम ज्यादा टाइम गॅवाया तो पाप का बोझा बढ़ेगा या घटेगा? बढ़ गया। अब क्या करना है?
(किसीने कहा – एक को याद करना है।) अब एक को याद करना है।

कैसे करेंगे? इतने साल में तो कर नहीं पाया।
(जिज्ञासु ने कुछ कहा।) क्या? (जिज्ञासु – एकांत में...) एकान्तवासी हो जायेंगे? एकदम माउन्ट आबू में चले जायेंगे क्या? इसलिए एक अव्यक्त वाणी में बोला है अपने फरिश्ता स्वरुप का अनावरण कब करेंगे? कोर्इ मूर्ति का उद्घाटन होता है तो मूर्ति के आगे परदा पड़ा हुआ होता है। फिर जब उद्गाटन करते हैं तो उसका परदा उठा देते हैं। तो पूछा। ब्राह्मण से फरिश्ता बनना है ना। इस फर्श की दुनियां वालों से रिश्ता तोड़ना है या और नये-2 रिश्ते जोड़ना है? क्या करना है? 63 जन्म तो नये-2 रिश्ते हर जन्म में जोड़ते रहे। बुद्धि अनेकों रिश्तों में भटकती रही, इतनी भटक गई कि अभी बाप आ करके इतने वर्षों से पढ़ाई पढ़ाय रहा है नष्टोमोहा स्मृतिर्लब्धा की बजाये मोह नष्ट होने के और ही ज्यादा अटैचमेन्ट होता जा रहा है। तो नष्टोमोहा कैसे बनेंगे? तो बोला अपने फरिश्ता स्वरुप का अनावरण कब करेंगे? धर्मराज को बुलावें क्या? जब धर्मराज आवेगा, चीफ जस्टिस होता है ना चीफ जस्टिस को बुलावेंगे क्या? चीफ जस्टिस कौन है? हमारे ब्राह्मणों की दुनियां का चीफ जस्टिस कौन है? धर्मराज। (किसीने कहा – ब्रह्मा।) हाँ-2 धर्मराज। ब्रह्मा वो तो अम्मा हो गई। वो तो बहुत प्यार देती है। तो जब तक प्यार देती है तब तक प्यार में तो और बिगड़ते ही रहते है। वो ही अम्मा क्या बने? चीफ जस्टिस बनके बैठ जाये।

तो चीफ जस्टिस को बुलावेंगे क्या अपने फरिश्ता स्वरुप का अनावरण करने के लिए? तब फरिश्ता बनेंगे? फरिश्ता माना? फर्श की दुनियां वालों से कोई रिश्ता नहीं। फरिश्ता माना इस जमीन कि दुनियां में जितने भी है उनसे हमारा कोई रिश्ता नहीं। ऐसे फरिश्ते कब बनेंगे? जब धर्मराज का पार्ट शुरु होगा तब? पहले से बन जाना चाहिए अगर धर्मराज के डण्डे लग गये तो पद नीचा हो जावेगा। धर्मराज के डण्डे लगने से पद नीचा होगा या ऊँचा होगा? पद नीचा हो जावेगा। डण्डे के डण्डे खाओ और पद भी नीचा मिले। तो डबल नुक्सान हो गया। तो घाटे का सौदा करेंगे या फायदे का सौदा करेंगे? बाप को तो अच्छा नहीं लगता है कि मेरे बच्चे जिनको मैंने इतनी पढ़ाई पढ़ाई और धर्मराज के डण्डे खाये। टीचर की तो थू-2 थय्या हो जायेगी।


VCD No.278, C.No.759, Anantpur,
Mu.30.10.66, Dt.20.08.05
Part-3


So, Maya keeps troubling you in between now, she makes your stage fall down, she makes you sorrowful, it means you have not become firm brahmins now. It will be said that yes, you are brahmins; because there are many categories of the Brahmins. There are brahmins of the highest category as well as of the lowest category. So, it will be said, you are brahmins now. You cannot become firm deities until you become firm brahmins. They should have an impression of a firm brahmin.

You have become the mouth born progeny brahmins of Brahma, haven’t you? If you become [ that], you will be able to take the inheritance from ShivBaba. If you do not become [ that], you will not be able to receive the inheritance from ShivBaba in this life. Although you will receive the inheritance in the second, third or fourth birth in the Golden Age; you will receive that through the deities. But the study that you are studying directly from the Father being face to face in this birth; if you don’t study it completely, if you don’t make the complete purusharth, if you show carelessness you cannot obtain the complete inheritance from the Father. It means you will not be able to become deities complete with 16 celestial degrees in this birth. It is the brahmins who receive the inheritance. What was said? If you have the quality of being a Shudra, you cannot receive the inheritance. If you are firm brahmins you will certainly receive the inheritance.

As for the rest [if someone] listens to something, those who have heard a little coming face to face , those who came face to face with the Father and heard [the knowledge]; not face to face with the mother. Face to face with whom? Those who have heard even a little coming face to face with the Father will come to heaven.

The more you remember [the Father], the more the impurities of the soul will be burnt. Which impurity is it? Which impurity is present in the soul? The impurity of body consciousness, of the vices; that impurity will be burnt. Just like there is gold, [people mix] silver , they mix copper [in it], they mix iron [in it]; then its price, the price of gold decreases. Similarly, this soul... as the impurity of vices is added in it, the power of the soul decreases gradually. The Silver Age began [and] which impurity was added? Two celestial degrees reduced, why did it reduce? The souls who descend from above are failure souls. What? They did not become firm brahmins. They become semi-deities. So, the souls of the semi-deities who descended from above; they descend in very large numbers; 80 million (8 crore). The population in the Golden Age was only 20 million (2 crore). Even among them only 900 thousand (9 lakh) were firm brahmins. The impurity of incomplete Brahmins is added in the 900 thousand [souls]. Still, it is called gold (the Golden Age). Then, the impurity of silver is added in the Silver Age; the silver like souls, whose value is very less. What a difference there is between gold and silver!
How much gold do you get for 5000-6000 rupees?
(Someone said: 10 grams.) 10 grams . And how much silver will you get for 8000-10000 rupees ? 1 kilo (1000 grams). So, there is a lot of difference. When the Copper Age starts, the impurity of the copper like souls is added. Abraham came, Christ came; the souls who spread adulteration , the angry souls burn the entire world with the atom bombs when they become angry. The deities have to come in the colour of the company of such lustful and angry souls. Therefore, the impurity of the colour of the company is added. Silver and copper are mixed in gold, aren’t they? They are mixed; it means, the colour of the company was applied. So, the more intense a fire is made; when are impurities separated from gold? Impurities are not separated in moderate fire. If someone melts gold in moderate fire the whole day, its impurities will not be separated. When will it be separated? When the fire burns intensely. So, the silver and copper which is mixed in it will be separated. It is the same case here as well.

Which fire is it here? Here it is the fire of Yoga. The more this fire of Yoga is made intense; it should be an intense fire, meaning the remembrance of others shouldn’t be mixed in that fire . If the remembrance of others is mixed, it will not be called an intense fire. That is why Baba says, remember Me alone, then your impurities will be separated. If you remember others, too, instead of [remembering] the One, the impurities will not be separated; it is possible that they increase even more. So, what is happening now? Is the stage falling down or is it rising up now? It is falling down, what is this ? You are studying for so many days and the stage is falling down? It means, what did you do? You mixed the impurities of others [in your remembrance]. It means the intellect is coloured by the company of others more. And ‘remember Me alone’ that the Father says; you have become stable in that remembrance of the One very less. So if we stabilize in the remembrance of the One very less and waste more time in the remembrance of others, then will the burden of sins increase or will it decrease? It increased. What should we do now?
(Someone said: We should remember the One.) Now, we should remember the one.

How will we do it? We were not able to do it for so many years.
(Someone said something.) What? (Someone said: In solitude.) Will you become ekantvaasi? Will you go to Mt. Abu straightaway? That is why it is said in an Avyakt Vani, when will you unveil your angelic form? When the disclosure of a statue takes place, there is a curtain in front of it and when it is disclosed, the curtain is lifted. So, it was asked. You have to become angels (farishtaa) from brahmins, haven’t you? Do you have to break the relationships with the people of this world or do you have to form new relationships? What should you do? We kept joining new relationships in every birth in the 63 births. The intellect kept wandering in many relationships. It wandered so much that now the Father is teaching the study of nashtomoha smritilabdha for so many years, instead of conquering attachment, the attachment is increasing even more. So, how will you become nashtomoha? So it was said, when will you unveil your angelic form? Should Dharmaraj (the Chief justice) be called? When Dharmaraj comes... there is the Chief justice, isn’t there? Will you call the Chief justice? Who is the Chief justice? Who is the Chief justice of our brahmin world? Dharmaraj. (Someone said: Brahma.) Yes, Dharmaraj. Brahma is the mother, she gives a lot of love. So, until she gives love; they (the children) spoil even more in love. What does the same mother become? She sits as the Chief justice.

So, will you call the Chief justice to unveil your angelic form? Will you became an angle then? What does farishtaa mean? The one who does not have any relationship with the people of the earth (farsh). Farishtaa means, we should not have any relationship with all those who live in this earthly world. When will you become such angles? Is it when the part of Dharmaraj starts? You should become that before itself. If you receive the beatings of Dharmaraj, your position will become low. Will your position become low or high by receiving the beatings of Dharmaraj? Your position will become low. Receive the beating as well as you will get a low position. So, you incurred double loss. So, will you make a deal of loss or will you make a deal of profit? The Father doesn’t like it; [He thinks:] My children whom I taught so much are receiving the beatings of Dharmaraj. The teacher will be disgraced.
...(to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 22 Feb 2013

वी.सी.डी नं.278, कैसेट नं.759, अनंतपुर,
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भाग-4


क्या? तो बाप कहते हैं शिवबाबा से वर्सा ले लो। ब्राह्मणों को वर्सा मिलता है। ब्राह्मण किनको कहा जाता है? जो ब्रह्मा मुख की बात को माने सो ब्राह्मण। और ब्रह्मा की पढ़ाई मुख्य किस बात की है? ब्राह्मणों की मुख्य किस बात की पढ़ाई है? कौनसी बात पर विशेष अटेन्शन दिया जाता है? पवित्रता के ऊपर । जो पवित्र है वो ब्राह्मण है, अपवित्र है तो शूद्र है। तो ब्राह्मणों को वर्सा मिलता है। बाकी कुछ न कुछ सुना तो प्रजा में आ जावेंगे।

जितना याद करेंगे उतना खाद जलती जावेगी। तुम विकर्माजीत बनेंगे। क्या? जब सारी खाद आत्मा की जल जावेगी तब तुम विकर्माजीत... विकर्माजीत माना? विकर्मों के ऊपर, विपरीत कर्मों के ऊपर जीत पावेंगे। विपरीत कर्म माना? श्रीमत के बरखिलाफ जो कर्म जो अभी 63 जन्मों से करते चले आये हैं उन पाप कार्मों के ऊपर हम जीत पालेंगे। हम से पाप कर्म नहीं होंगे जब हम पक्के ब्राह्मण बन जावेंगे। अभी तो घडी-2 देहभान में आते रहते हैं। देहभान में आने से माया हम से पाप कर्म कराय देती है। पाप कर्म नहीं होंगे, विकर्माजीत बनेंगे तो तुम स्वर्ग में चले जावेंगे। कब चले जावेंगे? जब कोई पाप कर्म नहीं होंगे।

देवताओं से कोर्इ पाप कर्म होते हैं क्या? देवताओं से न पुण्य कर्म होंगे, न पाप कर्म होंगे। उनको कहते हैं स्वर्गवासी देवता। न वो पुण्य कमाते हैं, न वो पाप कमाते हैं। और अभी हम क्या कर रहे हैं? हम श्रीमत पर चल करके पुण्य बहुत थोड़ा कमाय रहे हैं और माया के चपेटे में आ करके पाप ज्यादा कमा रहे हैं। कोई भी देहधारी को याद नहीं करना है। कोर्इ भी देहधारी को? अरे, जो 63 जन्म के ज्यादा-2 नजदीकी होंगे उनको तो याद करना ही पड़ेगा ना। 63 जन्म लिये हैं तो 63 जन्मों में कोई न कोई तो बहुत ज्यादा नजदीकी रहे होंगे; कैसे पता चले? इस बात का कैसे पता चले कि 63 जन्म में हमारे ज्यादा नजदीक कौन रहा?
(किसीने कहा - उनकी याद आती है।) हाँ, इस संगमयुगी ब्राह्मण जन्म में जो ज्यादा हमारा पीछा करता है, जिससे हम पीछा छुड़ाना चाहते हैं फिर भी पीछा छूटता नहीं, उसकी याद आ ही जाती है। क्या? उन्होंने फिल्म बनाने वालों ने गीत बना दिया। क्या गीत बनाया? जिन्हें हम भूलना चाहे वो अक्सर याद आते हैं।

एक दो बार याद नहीं आते हैं, अक्सर करके बार-2 याद आते हैं। तो क्या करे बार-2 याद न आये? उनसे कैसे पीछा छुटायें? घडी-2 धर्मराज को याद करें। वो मार-2 के सारा कुसंग झाड़ देगा। आत्मायें ये समझती हैं कि ये हमारे बड़े सहयोगी है। क्या समझती हैं आत्मायें? ये हमारे जन्म जन्मांतर के सहयोगी हैं। तब तो हमारा इनके साथ इतना ज्यादा हिसाब किताब है। धर्मराज कहेगा ये तुम्हारे सहयोगी नहीं हैं, ये तुमको जन्म जन्मांतर नीचे गिराने वाले है। इस दुनियां में ऊँचा चढ़ाने वाला कोई नहीं। सब नीचे गिराने वाले हैं। ऊँचा चढ़ाने वाला सिर्फ एक बाप है जो इस सृष्टि पर अंत में आता है। इसलिए वो कहता है मामेकम याद करो। मुझे याद करेंगे तो तुम्हारे पाप भस्म होंगे।

पाप भस्म होंगे तो पुण्य का खाता भारी हो जायेगा। तराजू होता है ना। तराजू में एक पलडे में पाप रखें जायें, एक पलडे में पुण्य रखें जायें तो पुण्यों का खाता भारी तब होगा जब पाप कर्म बाप की याद से सारे भस्म हो जायें। या तो याद से भस्म होंगे, नहीं तो धर्मराज के डण्डों से भस्म होंगे। याद से भस्म हो जाये उसमें फायदा ही फायदा है। पद भी ऊँच बनेगा।

इसलिए याद जो है वो याद का प्रोग्राम कभी छोड़ना नहीं चाहिए। ज्ञान और योग ये दोनों चीजें जो हैं जहाँ कहीं भी संगठन क्लास लगता हो तो संगठन क्लास ज़रुर अटेण्ड करना चाहिए। वहाँ सब मिल करके बाबा की याद में बैठते हैं। इकठ्ठे हो करके बाबा की याद में बैठेंगे तो स्मृति की डोरी सारी एक के साथ जुटेगी जाके तो वो मोटा रस्सा बन जावेगा। क्या? स्मृति के धागे सारे एक बाप के साथ जुटेंगे तो क्या बन जावेगा? मोटा रस्सा बन जावेगा। उसे दुनियां में कोई तोड़ नहीं सकेगा। और अकेले-2 घर में बैठ करके याद करेंगे तो माया आराम से तोड़ती रहती है। तोड़ रही है कि नहीं? तोड़ रही है। तो अभी कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। और ही उल्टी बात सोच लेते है क्या? अरे, वो क्लास में क्या होता है? गीता पाठशाला में जाके क्या करेंगे? वहाँ वो ही मुरली ही तो सुनाई जाती है। टी.वी. में वो ही तो देखा जाता है। हमारे घर में भी तो टी.वी. रखा है। हम अपने घर में टी.वी. देख लेंगे। बाबा को याद कर लेंगे अमृतवेले। लेकिन दिल से पूछो क्या अकेले-2 में बाबा की याद हो पाती है? मुरली जो सुनते हो उस मुरली में उतना मज़ा आता है जो संगठन में मज़ा आता है?
(सभी ने कहा - संगठन में मज़ा आता है।) संगठन में मुरली पढ़ते हैं, सुनते हैं तो जास्ती मज़ा आता है। जास्ती उमंग उत्साह बढ़ता है।

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Part-4


What? So, the Father says, take the inheritance from ShivBaba. Brahmins receive the inheritance. Who are called brahmins? Those who accept the versions spoken through the mouth of Brahma are brahmins. And the study of Brahma is mainly about which topic? The study of brahmins is mainly about which topic? Which subject is given special attention? Of purity; those who are pure are brahmins. [If] they are impure are shudras. So, brahmins receive the inheritance. As for the rest those who listen [to the knowledge] even a little will come in the category of subjects.

The more you remember [the Father], the more the impurities will go on being burnt. You will become vikarmajiit. What? When all the impurities of the soul are burnt, you will [become] vikarmajiit. What does vikarmajiit mean? You will gain victory over vikarm, opposite actions (vipariit karm). What does opposite action mean? The actions against the Shrimat, which we have been doing for 63 births… We will gain victory over those sinful actions. We will not perform any sinful action when we become firm brahmins. We keep becoming body conscious again and again now [and] because of becoming body conscious Maya makes us perform sinful actions. If you don’t perform sinful actions , if you become vikarmajiit, you will go to heaven. When will you go [to heaven]? When you don’t perform any sinful action.

Do they deities perform any sinful actions ? The deities will neither perform noble actions nor sinful actions . They are called the deities, who are the residents of heaven. They neither acquire merits nor do they acquire sins. And what are we doing now? We are earning very little merit by following Shrimat and more sins by coming in the clutches of Maya. You should not remember any bodily being. Any bodily being? Arey! We will certainly have to remember those who were very close [to us] in the 63 births, won’t we? We have had 63 births, so, some [people] will have remained very close [to us] in those births. How will we come to know [ them]? How will we come to know who remained closer to us in the 63 births?
(Someone said: They are remembered.) Yes, the one who pursues us more in this Confluence Age birth of a brahmin, the one whom we wish to get rid of and yet we are not able to do so is certainly remembered. What? The producers of a film have made a song over it . What song have they made? What? Jinhe ham bhulnaa caahe vo aksar Yaad aate hain (Those whom we wish to forget are often remembered).

They are not remembered once or twice but they are often remembered, they are remembered again and again. So, what should we do so that they are not remembered again and again? How should we get rid of them? Remember Dharmaraj again and again. He will remove the [influence of] bad company completely by beating. The souls also think, ‘ these people are very co-operative to us’. What do the souls think? ‘These people are co-operative to us for many births. This is the reason we have so many karmic accounts with them’. Dharmaraj will say, ‘these people are not your co-operatives; they are those who make you fall down birth after birth’. There is nobody in this world who raises [you] up . Everybody makes [you ] fall down. It is only the one Father who raises [ you] up, He comes to this world in the end. That is why He says, Remember Me alone. If you remember Me, your sins will be burnt to ashes.

If the sins are burnt to ashes, [the balance of] the account of merits will become heavier. There are weighing scales, aren’t there? If sins are kept on one pan of the scales and merits on the other ... [The balance of] the account of merits will become heavy when all the sinful actions are burnt to ashes through the remembrance of the Father. They will be burnt to ashes either through remembrance or through the beatings of Dharmaraj. There is just benefit if they are burnt to ashes through remembrance. Your position will also be high.

That is why remembrance; you should never miss the program of remembrance . Knowledge and Yoga, both these things… Wherever a gathering class is organized, you should definitely attend it. There, everyone get together and sit in the remembrance of Baba. If we get together and sit in the remembrance of Baba, everybody’s thread of remembrance will join with the One. Therefore, a thick rope will be formed. What? What will happen when all threads of remembrance join with the one Father? A thick rope will be formed. Nobody in the world will be able to break it and if we remember sitting alone at home... Maya keeps breaking it easily. Is she breaking it or not? She is breaking it. So, nobody is paying attention now; they think in an opposite way even more. What? [They think:] Arey! What happens in the class? What will we do going to the gitapathshala? The same Murli is played there, they watch the same thing on TV. There is a TV in our house too; we will watch TV in our house. We will remember Baba at Amrit Vela . But ask your heart is the remembrance [of Baba] possible while sitting alone? Do you enjoy the Murli to the extent to enjoy [listening to it] in a gathering?
(Everyone said: We enjoy [listening to it] in a gathering.) You enjoy it more when you read it, listen to it in a gathering; your zeal and enthusiasm increases more. ...(to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 23 Feb 2013

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और ये बात तो शास्त्रों में भी लिखी है कि कलियुग में संगठन में बहुत ताकत होती है खास करके। मुसलमान लोग, इस्लामी लोग इन्होंने दुनियां में ज्यादा से ज्यादा हिस्से में राज्य किया। और लम्बे समय तक राज्य किया। अभी क्रिश्चियन्स बढ़ गये हैं सौ दो सौ साल से। उससे पहले 2500 साल से मुसलमानों का ही राज्य बना रहा। कारण क्या हुआ? उन मुसलमानों का ज्ञान हमारे शास्त्रों से ज्यादा ज्ञान है क्या? नहीं। फिर? उनकी बुद्धि का योग जो है सारे मुसलमानों कि बुद्धि का योग दुनिया के किसी भी हिस्से में रहेंगे उनका बुद्धि का योग मक्का मदीना में लगा होता है।

सारी जिन्दगी उनकी बुद्धि में ये ललक लगी रहती है कि हम मक्का मदीना पहुँचे और वहाँ जाके हज यात्रा करें तो हमें बहुत सवाब मिल जायेगा। वो समझते हैं इस बात को। उनमें ये मान्यता है; क्या? कि घर में बैठके जो नमाज पढ़ेंगे तो एक गुना फायदा, मस्जिद में जाके नमाज पढ़ेंगे तो दस गुना फायदा, जामामस्जिद में जाके पढ़ेंगे तो सौ गुना फायदा, अजमेर शरीफ में जाके पढ़ेंगे तो हजार गुना फायदा। हजार गुना सबाब मिलता है। और काबा में जाके नमाज पढ़ेंगे तो लाख गुना सबाब मिलता है एक ही बार। तो जितना बड़ा संगठन होगा उतना बड़ा नशा चढ़ेगा।

अच्छा उनकी बात छोड़ दो। वो तथा कथित ब्राह्मणों की बात ले लो वो एक-2 पाण्डाल में हजारों की तादाद में इकठ्ठे होते हैं या नहीं होते हैं? होते हैं। उनको बाप मिला है क्या? नहीं मिला है। उनको सच्चा ज्ञान मिला है क्या? सच्चा ज्ञान भी नहीं मिला है। उनको इतना नशा क्यों चढ़ा रहता है कि हमारी एक बात भी सुनने के लिए तैयार नहीं ? क्या कारण है? अरे, इतना बड़ा हुजूम इकठ्ठा किये हुये हैं। इकठ्ठे बैठते हैं, इकठ्ठे खाते हैं, इकठ्ठे सोते हैं, तो संगठन की जो पॉवर है वो उनको मिल रही है।

यहाँ थोड़े से मुठ्ठी भर ब्राह्मण, पाँच ब्राह्मण। एक-2 गीता पाठशाला में... कहाँ गई रजिस्टर? 4-5 की बड़ी मुश्किल से हस्ताक्षर है। कितने की हस्ताक्षर है? संगठन क्लास में? (रजिस्‍टर देखते हुए) एक, कनकदुर्गा माता। दूसरी, वेंकटलक्ष्‍मी माता। तीसरी, तुलसम्‍मा माता। चौथी, नागम्‍मा माता। और पाँचवें, कोटेश्‍वर राव भाई। वो संगठन का हिसाब है। संगठन क्‍लास का, रोज़ का नहीं। रोज़ बस, एक कनकदुर्गा माता। माताजी के पिताजी भी गायब। फिर? तो क्‍या हाल लगा पड़ा है?
(किसी माता ने कहा – बाबा, कदिरी का...) कदिरी? कदिरी में भी... (एक माता ने कहा: डेली क्‍लास बाबा।) डेली क्‍लास? अच्‍छा? सुबह-शाम दोनों टाईम क्‍लास होता है? (माताजी: हाँ, दोनों टाईम।) ठीक है। नाम क्‍या है? वो टीचर का नाम क्‍या है? (जिज्ञासु: मल्‍लेश्‍वरी माता।) मल्‍ल युध्‍द करने वाली ईश्‍वरी। क्‍यों? भाई से मल्‍लयुध्‍द होता रहता है क्‍या? (माताजी:... शाम को एक घंटा।) शाम को एक घंटा क्‍लास होता है? आधा घंटा याद, आधा घंटा...? (माताजी: मुरली।) ठीक है। मुरली।

और एक जगह की बात नहीं है। ऑल इंडिया में ऐसे ही चल रहा है; क्‍या? पाँच पांडव भी गीता पाठशालाओं में मुश्किल से इकट्ठे हो रहे हैं। बाबा पहुंच जायेंगे तो सब इकट्ठे हो जायेंगे। तो संगठन के हिसाब से डब्‍बा गोल होता जा रहा है। क्‍यों? ये युनिटी क्‍यों नहीं बन रही है? जरूर कही न कही वानर सेना में प्‍योरिटी की लीकेज हो रही है। फिर बाबा देखेंगे कि नहीं सुधर रहे हैं तो फिर बाबा पाला बदल देते हैं। क्‍या? पहले भी बेसिक नॉलेज में क्‍या किया? साफ बता दिया, अंदर वाले रह जावेंगे और बाहर वाले ले जावेंगे। अब यहां एडवांस पार्टी में भी ऐसे ही। बाबा का नियम, उसूल तो एक ही है ना। अगर ठीक से पढ़ाई पढ़ेंगे तो क्‍या करेंगे? एडवांस पार्टी वाले सब अंदर वाले है ना। तो ले जावेंगे। नहीं पढ़ाई पढ़ेंगे तो अंदर वाले रह जावेंगे और… बाहर वाले कौन?

बी.के में से जो निकलेंगे... जो बी.के में से निकलेंगे... आगे चलके निकलने तो है ना। विजयमाला निकलेगी कि नहीं निकलेगी?
(किसी ने कहा: निकलेगी।) क्या इशारा दिया उसके लिए? विजयमाला निकलेगी उसके लिए मुरली में क्‍या इशारा दिया है? एक रानी मक्‍खी निकलेगी तो उसके पीछे-पीछे सारा झाड़ जावेगा। तो वो संगठन की ताकत निकल आयेगी बाहर। फिर क्या हुआ? अन्दर वाले रह जावेंगे और बाहर वाले, चन्द्रवंशी ले जावेंगे। ये तो बहुत भद्द हो गई।

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Part-5


Moreover this is written in the scriptures too; there is lot of power in gathering especially in the Iron Age. The Muslims, the people of Islam have ruled over a large part of the world and they ruled over it for a long time. Now the Christians have increased in 100-150 years. Before that only the rule of the Muslims was prevalent for 2500 years. What was the reason? Do the Muslims have knowledge more than the knowledge of our scriptures? No. Then? The connection of their intellect... the connection of the intellect of all the Muslims… They may live in any part of the world; the connection of their intellect remains towards Mecca Medina.

There have this desire in their intellect the entire life that they should go to Mecca Medina and complete the Hajj pilgrimage so that they receive a lot of reward. They think, they have this belief; what? They will receive one time benefit if they say prayers (namaaz) sitting at home; there is 10 times benefit if they say prayers in the mosque, there is 100 times benefit if they say prayers in the Jama masjid , there is 1000 times benefit if they say it in Ajmer Sharif , they receive 1000 times reward and if they say prayers in Kaba just once, they receive a lakh (hundred thousand) times reward. So, the bigger the gathering is, the more the intoxication will rise.

Accha, leave their topic. Take those so-called brahmins as an example. Do they get together in lakhs in one pavilion (pandal) or not? They do. Have they found the Father? They haven’t. Have they received the true knowledge? They haven’t received the true knowledge either. Why do they have so much intoxication that they are not ready to listen to even a single word from us? What is the reason? Arey! They have gathered such a big crowd, they sit together, they eat together [and] sleep together. So, they are receiving the power of gathering.

Here, there are few, handful of brahmins. There are five brahmins in a gitapathshala. Where is the register? There are the signatures of hardly four-five [people]. There are signatures of how many people? In a sangathan (gathering) class? (Baba is seeing the register:) One, Kanakdurga mata; two, Venkatlakshmi mata; three, Tulsamma mata; four, Nagamma mata; and five, Kotteshwarrao Bhai. This is the account of sangathan [class]. Of sangathan class not of daily [class]. There is only one [person], Kanakdurga mata, in daily [class]. The mother’s husband is not present either. Then? So, what is the condition?
(A mother said: Baba, Kadri ...) Kadri? :D In Kadri also… (A mother said: Baba, we have class daily.) Daily class? Accha? Does the class take place both, in the morning and evening? (The mother: Yes, both time.) Alright. What is the name? What is the teacher’s name? (A student: Malleshwari mata.) The goddess who fights. :D Why? Do you keep having a fight with your husband? (The mother: …for one hour in the evening.) Does the class take place for one hour in the evening? Remembrance for half an hour and for the other half hour…? (The mother: Murli.) Alright. Murli.

And this is not about [just] one place. It is the same thing going on in all India; what? Hardly five Pandavas get together in the gitapathshalas. If Baba reaches there, everyone will get together. So, with respect to the sangathan [the Advance Party] is proving to be unsuccessful. Why? Why are they unable to form this unity? There is certainly a leakage of purity somewhere in the army of monkeys. When Baba sees that they are not improving, He changes sides. What? What did He do in the basic knowledge earlier as well? He said clearly: The insiders will remain as they are and the outsiders will take away [the inheritance]. Now it is the same thing here, in the Advance Party as well. Baba has the same rule and principles, doesn’t He? What will they do if they study well? – All those who belong to the Advance Party are the insiders, aren’t they? – So, they will take away [the inheritance]. If they don’t study the knowledge, the insiders will remain as they are and… who are the outsiders?

Those who will come from the BKs... Those who will come from the BKs... They have to come in the end, haven’t they? Will the Vijaymala come or not?
(Someone said: It will emerge.) What hint was give for it? What hint has been given in the Murli for the Vijaymala that is going to emerge? If one queen bee emerges, the entire tree (gathering) will go after her. So, that power of gathering will come out. Then, what happened? The insiders will remain as they are and the outsiders, the Chandravanshi will take away [the inheritance]. This is a great insult ...(to be continued.)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 24 Feb 2013

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भाग-6


अरे, सूर्य तो जलता है। उसमें तो आग भरी पड़ी है। जो सूर्य के बच्चे हैं उनको थोड़े ही जलना चाहिए। ये उनमें काम विकार की आग भरी पड़ी है, क्रोध विकार की आग भरी पड़ी है। इसलिए फिर बोल दिया। क्या बोला है? बोला है – रुद्रमाला पहले तैयार तो होती है लेकिन रुद्रमाला का पूजन नहीं होता। क्या? पूजन का आधार क्या है? प्युरिटी। लंगडे हैं। विजयमाला अन्धी है, उनमें ज्ञान नहीं है। उनमें प्युरिटी है लेकिन ज्ञान के अन्धे हैं। और रुद्रमाला? ज्ञान है, सोझरे हैं लेकिन पति चलता है तो पत्नी नहीं चलती, पत्नी चलती है तो पति नहीं चलता ठीक से। चाल ठीक नहीं है। एक टांग कोई न कोई टूटी हुई है। रुद्रमाला का चाहे बढ़िया से बढ़िया मणका हो, चाहे प्रजापिता ही क्यों न हो - क्या? - एक बढ़िया चलेगा तो दूसरा डब्बा गोल करता है।

क्या? तीन टांग की दौड़ देखी है? दो इकठ्ठे होते हैं, उनकी एक-एक टांग बान्ध दी जाती है। क्या? दो को इकठ्ठा करके और उनकी एक-एक टांग बान्ध दी जाती है। एक टांग से... एक की एक टांग, दूसरे की दूसरी टांग और बान्ध देते हैं। फिर कहते हैं दौड़ो। तो क्या करना पड़े? जो दौड़ने वाले हैं उनको साथ-साथ टांग उठानी पड़े ना। जितना एक दौड़ता है उतना ही फिर दूसरे को भी दौड़ना पड़े, तब ही तो दौड़ में आगे जायेगा। नहीं तो पीछे रह जायेगा। ये भी गृहस्थी की गाड़ी है। गृहस्थी की गाड़ी में एक पहिया जहाँ का तहा घूमता रहे, चले ही नहीं और दूसरा पहिया तेज़ी से घूमे, तो क्या होगा? गाड़ी आगे जायेगी या एक जगह रुक जायेगी? आगे नहीं जायेगी ना। एक ही जगह घूमती रहेगी।

तो इसलिए बोल दिया कि रुद्रमाला के मणके बादमें विजयमाला में एड किये जावेंगे। तब विजयी बनेंगे। जब तक विजयी नहीं बनेंगे विकारों के ऊपर तब तक स्वर्ग का मूँह नहीं देख सकेंगे। ये तो बहुत बड़ा घाटा हो गया। घाटा मारना चाहिए? बाप मिला है तो फायदे के लिए मिला है या घाटा मारने के लिए मिला है?
(सभी ने कहा – फायदे के लिए।) फायदे के लिए मिला है, तो फायदा लेना चाहिये ना। कि आठ ही लेंगे सारा फायदा? आठ को ही पूरा फायदा लेने देंगे?

... दस मिनट में किसी को कुछ पूछना करना हो तो पूछ लो।

जिज्ञासु: बाबा, शास्त्रों में कौरव-पांडवों का युद्ध दिखाते हैं।
बाबा: हाँ।
जिज्ञासु: लेकिन हमारे बाबा बोलते हैं कि पांडव संकल्प से भी युद्ध नहीं करेंगे।
बाबा: हाँ, संकल्प से भी युद्ध नहीं करते... करते नहीं है क्या?
जिज्ञासु: लेकिन बाबा बोलते हैं ना...
बाबा: लेकिन बाबा बोलते हैं। लेकिन जब पक्के पांडव बनेंगे तब ही तो नहीं करेंगे। अभी पक्के पांडव बने हैं क्या?
जिज्ञासु: नहीं बने हैं।
बाबा: अभी वाचा से भी युद्ध करने लग पड़ते हैं। संकल्पों से भी युद्ध करने लग पड़ते हैं। अभी तक ये खबर नहीं आयी है कि किसी एडवांस पार्टी वाले ने बाहुबल चला दिया हो। बेसिक वालों ने बाहुबल चलाया है एडवांस वालों के ऊपर। तो चलो उतनी ही ग़नीमत। बाकी युद्ध तो कर रहे हैं ना। फिर? जब बिल्कुल युद्ध न करे, अपने सुधार में लग जाये तो दुनिया अपने आप सुधरेगी। हम लक्ष्मी-नारायण जैसे बन जायेंगे तो हमारे सामने कोई विरोध करने वाला आयेगा ही नहीं।

एटम बम्ब फटते हैं दुनिया में, भारत के ऊपर एटम बम्बों का सेंक क्यों नहीं आता? भारत कैसे बच जाता है? भारत अविनाशी खंड बना रहता है। और सारी दुनिया एटम बम्बों के विस्फोट से समुद्र के अन्दर डूब जाती है। क्यों? कारण क्या है? क्यों? ये कारण है कि भारत जो है वो ये पसन्द ही नहीं करता कि हम दुनिया को भस्म कर दे। भारत के अन्दर तो पहले ही खूँखार युद्ध हो जाता है। महाभारी-महाभारत लड़ाई हो जाती है हिन्दू मुसलमानों में। इनके पास तो वो एटमिक शक्ति है ही नहीं, छोटी-छोटी बम्बियाँ है। तो हिन्दुस्तान पाकिस्तान आपस में एक दूसरे को दिखाते रहते हैं – देखो हमारे पास इतनी ताकत है। है कुछ भी नहीं। किसीके पास बन्दूक होगी तो दूसरा बन्दूक ले करके आयेगा। और जिसके पास बन्दूक नहीं है, तमंचा नहीं है, कुछ भी नहीं है तो उसके ऊपर कोई क्यों ले करके आयेगा? इसलिए भारत के पास एटमिक एनर्जी नहीं है तो भारत के ऊपर एटम बम्बों का विस्फोट होना भी नहीं है।

अरे मातायें हिन्दी नहीं जानती है तो बोलना तो चाहती हैं। हिन्दी न जानने की वजह से...।


VCD No.278, C.No.759, Anantpur,
Mu.30.10.66, Dt.20.08.05
Part-6


Arey, the Sun certainly burns. He is full of fire. The children of the Sun should not burn. They are full of the fire of lust, the fire of anger. This is why, it was said; what has been said? It has been said, the Rudramala certainly becomes ready first but it is not worshipped. What? What is the basis of worship? Purity. They are lame. The Vijaymala is blind. They do not have the knowledge. They do have purity but are blind with respect to the knowledge. And what about the Rudramala? They do have knowledge, they have eyesight but if the husband follows [the knowledge], his wife doesn’t [and] if the wife follows [the knowledge], her husband doesn’t follow [the knowledge] properly. Their behaviour is not proper. A leg is broken. Let it be the best bead of the Rudramala, let it be Prajapita himself – What? – One follows [the knowledge] well while the other one will be unsuccessful [to follow].

What? Have you seen a three-legged race? Two people get together and one of their legs is tied together. What? Two people are made to stand together and one leg of both of them is tied together. With one leg... One leg of the first one and one leg of the second one are tied together. Then they are asked to run. So, what should be done? Those who run should raise their legs together, shouldn’t they? The other person also will have to run to the same extent as the first person. It is only then that he will go ahead in the race. Otherwise he will lag behind. This is also a car of the household. In the car of the household, if one wheel keeps running in the same place, does not move ahead at all and the other wheel runs very fast, then what will happen? Will the car move ahead or will it stop in one place? It won’t move ahead, will it? It will keep moving in the same place.

This is why it was said that the beads of the Rudramala will be added in the Vijaymala later. It is then that they will become victorious. Unless they become victorious over the vices, they won’t be able to see the face of heaven (go to heaven). This is a great loss. Should you incur a loss? Have you found the Father for benefit or to incur a loss?
(Everyone said: For benefit.) You have found Him for benefit, so you should take the benefit, should you? Or is it that only the eight [beads] will take all the benefit? Will you let only the eight [beads] to take all the benefit?

... If anybody has to ask anything, he can in 10 minutes.

Student: Baba the war between the Kauravas and the Pandavas is shown in the scriptures.
Baba: Yes.
Student: But our Baba says that the Pandavas will not fight even through thoughts.
Baba: Yes, they do not fight even through thoughts... Don’t they fight?
Student: But Baba says, doesn’t He...?
Baba: But Baba says. But they will not fight only when they become firm Pandavas. Have they become firm Pandavas now?
Student: They haven’t become [that].
Baba: Now, they start fighting through speech as well. They start fighting through thoughts too. Until now there has been no news of anyone from the Advance Party using physical power. Those from the basic [knowledge] have used physical power over those from the advance [party]. Alright, at least this is a piece of good fortune. As for the rest, they are certainly fighting, aren’t they? Then? When they don’t fight at all, when they become engaged in their own reformation, the world will reform automatically. When we become like Lakshmi-Narayan, no opponent will come in front of us at all.

The atom bombs explode in the world, why doesn’t Bharat feel the warmth of the atom bombs? How does Bharat survive? Bharat remains an imperishable land. Rest of the world drowns in the ocean due to the atomic explosions. Why? What is the reason? Why? The reason is that Bharat does not like to burn the world to ashes at all. A fierce war takes place in Bharat beforehand . The massive war of Mahabharata takes place between the Hindus and the Muslims. They don’t have atomic energy at all, they have small bombs. So, Hindustan and Pakistan keep showing each other: Look, we have so much power. [In reality,] they have nothing. If a person has a gun, another person will come to him with a gun. And a person who doesn’t have a gun, a pistol at all, who doesn’t have anything; why will someone come with something (any weapon) to him? This is why; Bharat does not have atomic energy, so the atomic explosions will not take place in Bharat either.

Arey, the mothers don’t know Hindi, but they do want to speak. Because they don’t know Hindi
... (Concluded.)

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 08 Mar 2013

VCD No. 504, Cass. No. 990 dated 26.08.06 at Vishakhapatnam
Clarification of Murli dated 18.04.67
Part – 1


Om Shanti. The Vani that was narrated in Bhilai was the morning class dated 18th April 1967. The topic discussed in the end of the middle part of the first page was: I don’t come in Krishna. Why did He take the name of Krishna alone? Ram is also called God. Why does He repeat this: I don’t come in Krishna? He should also say this sometimes: I don’t come in Ram. ‘Krishna is not the God of the Gita,’ saying the same thing again and again… He should also say: Ram is not God. Has it been mentioned anywhere in the Murli… What? That Ram is not God or Ram is not called the Father. Krishna is called child, meaning the one with a child like intellect. This was said indeed. But it wasn’t said Ram is called child, the one with child like intellect. Child means creation and Father means creator. This proves that the incorporeal Point of light Shiva comes in the form of God the Father in [the body] of the Father Ram. He doesn’t come in the form of God in [the body of] Krishna alias Dada Lekhraj. He doesn’t come in the form of God the Father [in him]. The worldly people also see Brahma, Vishnu, Shankar. They also say: Dev Dev Mahaadev (the greatest deity). The deity Brahma, the deity Vishnu and the deity Mahaadev; still, they are unable to recognize. The human beings with worthless intellect don’t know these topics because Maya has made everyone worthless.

They think Vishnu is the resident of the Subtle Region. If Brahma, Vishnu, Shankar were the residents of the Subtle Region, how did their pictures come in this world? Many pictures of Vishnu are shown. So, he is not proved to be the resident of the Subtle Region. In reality, that couple form is [the form] of the household path. The souls who play the role in the form of the mother and the Father in practice, the role that they play with their co-operative powers, the combination of their sanskars is called Vishnu Caturbhuj . This is why Vishnu is shown with four arms. Four arms means there are four souls in the form of helpers. Saraswati [is shown] with Brahma and Parvati [is shown] with Shankar. But the role of Shankar… Shankar doesn’t play the role of destruction. Shakti is called asur sanghaarinii (the destroyer of demons). She is worshipped in the form of Mahaakaali, asur sanghaarinii. She is the form of Jagadamba. That Jagadamba is the mother of the entire world.

If we consider, even the first Brahma [i.e.] Prajapita Brahma, is called Prajapita…, he becomes a Brahmin only when he listens to the words through the mouth of Brahma. He can’t be Prajapita without becoming a Brahmin. He becomes Brahmin only when he listens through the mouth of Brahma. So, who is the aadi Brahma (first Brahma)? It is the Brahma through whose mouth Prajapita heard first of all. So, Prajapita became Brahma mukhvanshaavli (the mouth born progeny), the first Brahmin. But Brahma is not worshipped, his idols are not made, his temples are not built, among the three levels [of the Subtle Region], Brahma is shown in the lowest level. After the departure of the mother who played the role in the form of the first Brahma, the Brahma who was the acting [as mother] is the soul of the child Krishna. The child Krishna plays first class role of the mother.

He plays the role after becoming the store house of the power of tolerance, the special quality that a mother possesses. So, it is said in the Murli: in reality, this Brahma is your Jagadamba. The one who played the first class role of tolerance power in the form of the mother, the acting [mother] is Jagadamba; but until it is a male body… all the men are Duryodhan Dushaasan . This is why it is not worshipped; because the Supreme Soul played the role in the form of the mother through his body when the same Brahma leaves his body, then after leaving the body, he plays role in a Brahmin daughter, the daughter who was Jagadamba at the beginning of the Yagya, who was the first Brahma. She herself becomes a mother (female) after leaving the body, in the next birth. She is recognized in the world in the form of Jagadamba (the world mother) along with Jagatpita (the world Father). The acting [mother] Brahma, who plays the role of the mother in the most elevated way enters her.

So, who should be recognized in the form of Jagadamba? Just as Shiva entered the body of Brahma, Shiva entered the body of Ram. He plays the role of the Father, the Teacher and the Sadguru after entering the body of Ram. He plays the role of the mother in the body of Brahma. So, for whom is it praised, ‘twamev maataa Copper Age pitaa twamev’? Twam means one. It is said in Sanskrit: ‘twam’, ‘yuyaam’ means you two and ‘yuyam’ means all of you. Twam, yuyaam, yuyam. So, twam means you, thou. Who is that one for whom they sing ‘You alone are my mother and You alone are my Father’? Who is that soul? The soul is Shiva. Similarly, the one who is praised in the form of Jagadamba, who played the role in practice; who is that soul?
(A student said: Brahma.) Is the soul praised or is the body praised? The soul is praised. When he played the role of power of tolerance through the form of the one with a beard and a moustache, he wasn’t praised as Jagadamba. It is because Om Radhe Jagadamba became instrument to take care of the virgins and the mothers. She too was the acting [mother]. In reality, she was not the original Jagadamba . But, along with Brahma… The one who is given the title of Jagadamba in the Murli [by mentioning:] in reality, this Brahma is your Jagadamba; who played the role of following him at every step? Who proved herself first in the Brahmin world by harmonizing the sanskars [with him]? Om Radhe Jagadamba. This is why, among the female deities (devi), she is proved as the main devi.....(to be continued)

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