Q&A: PBK Murli discussions

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 02 Jun 2010

वार्तालाप नं.473, हैदराबाद-3, दिनांक 27.12.07
उद्धरण-भाग-2


समयः 02.53-06.28
जिज्ञासुः बाबा, एक बाप की श्रीमत चाहिए ना? तो हिन्दी भाषा न आने के कारण जो ट्रांस्लेशन करते हैं ना कभी-2 उनके ऊपर भी विश्वास नहीं होता है। तो दूसरे से तीसरे से पूछते रहना? तो मेन तो हिन्दी आनी चाहिए न पहले?

बाबा: बिल्कुल आनी चाहिए। बाप का बच्चा, माँ-बाप का बच्चा बने और बच्चा बड़ा हो जाए और गूँ-6 करता रहे तो बड़ा बच्चा कहा जायेगा या छोटा बच्चा है? छोटा बच्चा है। होशियार तो है नहीं। विदेशी लोग आते हैं, बेसिक में भी 2-4 साल से चले हुए है और यहाँ से भट्टी करके जाते हैं और एक साल के अन्दर भाषण देना शुरू हिन्दी में। ट्रांस्लेशन करना शुरु और लिट्रेचर अपनी भाषा में लिखना शुरु कर देते हैं। अपनी भाषा में- पॉलिश भाषा में। इंटरनेट में लिट्रेचर डालना शुरु कर देते हैं। बाप को हिन्दी में लेटर लिखते हैं और हिन्दी में लेटर मंगाते हैं। ये भाषा के लिए दोष कहें या आत्मा के कर्मों के लिए दोष कहे? हाँ?

वो विदेशी लोग, इतनी दूर की भाषा, और ये तो भारत की भाषा है, जहाँ की राजधानी हैदराबाद आधा हिन्दी और आधा उर्दू और आधा तेलुगु।
(किसी ने कुछ कहा) हाँ, तीनों भाषायें अच्छे खासे जानकार है, वो क्या हिन्दी नहीं सीख सकते हैं? जब विदेशी लोग एक साल में हिन्दी सीख सकते हैं तो यहाँ के जो ए.पी (A.P) के लोग है, तेलुगु भाषा वासी है वो हिन्दी नहीं सीख सकते हैं? सीख सकते हैं। कोई कहे- नहीं सीख सकते हैं तो प्रूफ मौजूद है। एक बहन ऐसी है जो क, ख, ग नहीं जानती, ए, बी, सी, डी नहीं जानती थी हिन्दी की। सरेण्डर होने के बाद रो रही थी कि मैं बाबा से बात नहीं कर सकती हूँ। क्या? आँसू बह रहे थे और एक साल के अन्दर भाषण देना शुरु कर दिया। तो फिर? ये तो नहीं कहा जा सकता कि भाषा प्रॉब्लम की वजह से हम पीछे रह गए।

समयः 14.45-18.57
जिज्ञासुः बाबा, एक वी.सी.डी में कहा है जिसका नम्बर डिक्लैर हो जाता है वो विरोधी बन जाता है। 8 देवों में तो ऐसा नहीं हुआ।

बाबा: जिनका नम्बर डिक्लैर होता है वो विरोधी बन जाते है?
जिज्ञासु: एक सी.डी में कहा है।
बाबा: नहीं। ये कहा है जो पहले जन्म लेते हैं... क्या? जिनका जन्म पहले होता है वो असुर है। माना जो अपने को पहले प्रत्यक्ष करते हैं; जन्म लेना माना प्रत्यक्ष करना। जो अपने को पहले प्रत्यक्ष कर देते हैं वो स्वदेशी है या विदेशी है? विदेशी अपने को पहले प्रत्यक्ष करते हैं। कामी, क्रोधि, लोभी, मोही, अहंकारी ये विदेशी है या स्वदेशी है? विदेशी है। तो जो असुर होते हैं वो प्रत्यक्षता रूपी जन्म अपना पहले मनाते हैं और जो स्वदेशी है वो अपने को प्रत्यक्ष नहीं करते, पान्डवों की तरह गुप्त रहते हैं। जैसे बाप गुप्त, बाप के बच्चे भी गुप्त। इसलिए 8 देव भले उनके नम्बर कोई भी प्रत्यक्ष करे लेकिन वो अपने को भगवान मानने वाले या भगवान का बच्चा मानने वाले या 8 देव अपन को कहने वाले नहीं है। अगर कहते हैं तो वो बाप के अव्वल नम्बर बच्चे नहीं है।

थोथा चना बाजे घना। अध जल गगरी छलकत जाए। आधा जल से भरी हुई गगरी ज्यादा छलकती है या पूरी भरी हुई गगरी ज्यादा छलकती है?
(सभी: आधे जल वाली) तो जो गहरे होते हैं, भरे पूरे होते हैं वो अपने को अपने आप प्रत्यक्ष नहीं करते। ये भारत की परम्परा है...। क्या? कोई दुकान खोलेंगे तो बाप का नाम दुकान में डालेंगे या बच्चों का नाम दुकान में डालेंगे?....एण्ड सन्स कम्पनी। एण्ड के पहले बाप का नाम होगा। पहले बाप को प्रत्यक्ष करे तो 8 देव की लिस्ट में आए और जो अपने को प्रत्यक्ष कर दे... क्या? मेगा प्रोग्राम बनाओ, बड़े-2 पोस्टर्स छपाओ, बड़े-2 पोस्टर में अपना चित्र, अपना फोटो डाल दो, त्रिमूर्ति शिव प्रत्यक्ष हो जाओ “भगवान की ये तीनों मूर्तियाँ है। जो स्थापना, पालना और विनाशकारी है।” तो पोस्टर्स छपा करके अपने को प्रत्यक्ष करने वाले वो देवता है या असुर है? हाँ? क्या है? वो तो असुर हो गए। पान्डव तो गुप्त होते हैं, गुप्त रह करके पुरुषार्थ करते हैं। उनका दान, मान, पद, सेवा सब गुप्त रहती है। ये स्वदेशी और विदेशी की खास पहचान है। ये आत्मा में स्वदेशी के गुण होने चाहिए। ऐसे नहीं कि शरीर विदेश में जन्म लिया है तो विदेशी है। गुणों, अवगुणों के आधार पर स्वदेशी विदेशी साबित होगा।

समयः 19.00-23.20
जिज्ञासुः बाबा, जब मुसलमान नमाज पढ़ने बैठते हैं तो अल्लाह-हू-अकबर बोलते हैं। अल्लाह हू माना शिवोहम हुआ। तो फिर अकबर माना क्या है?
बाबा: अक माने अक्कौआ। अक; अक का जो फूल होता है ना वो दुर्गन्ध छोड़ता है या सुगन्ध छोड़ता है? दुर्गन्ध छोड़ने वाला होता है। माना ग्लानि की दुर्गन्ध है या दिव्य गुणों की दुर्गन्ध कही जाती है? ग्लानि की दुर्गन्ध। तो जितने भी विदेशी है, खास करके मुसलमान और खास करके क्रिश्चियन्स उन्होने हिन्दुओं की और हिन्दु शास्त्रों की ज्यादा ग्लानि की या बौद्धियों ने की है? सिक्ख धर्म वालों ने की है? मुसलमान और क्रिश्चियन्स ने ज्यादा ग्लानि की है। इसलिए वो अक के फूल है और उन अक के फूलों में वर, वर माने श्रेष्ठ। क्या? उन अक के फूलों में, दुर्गन्ध फैलाने वालों में, ग्लानि करने वालों में जो श्रेष्ठ है, ऊँचे ते ऊँचे हैं वो है अकबर। क्या? तो मुसलमान धर्म की जो प्रजावर्ग वाले हैं, फॉलोवर्स है वो अल्लाह के साथ किसका नाम जोडेंगे? अकबर का नाम जोडेंगे।
जिज्ञासु: बौद्ध धर्म वालों ने इतना ग्लानि तो नहीं किया फिर भी उसको भारत से क्यों निकाला?
बाबा: कोई ग्लानि न करे लेकिन भगवान को न माने, भगवान की रचना को भी न माने; विदेशी है भगवान को मानता है। अल्लाह-2 मुँह से तो करता है। ओ गॉड फादर! ऊपर करके मुँह तो करता है? मानता तो है, जन्नत को, पैरडाईज को मानता तो है, अल्लाह की रचना तो मानता है? ये तो नहीं कहता कि क्राईस्ट ने पैरडाईज स्थापन किया। ये तो नहीं कहता कि मोहम्मद ने जन्नत बनाई। कहता है? गॉड फादर को ही मानता है ना? तो बौद्ध ज्यादा श्रेष्ठ हुए, बौद्धी ज्यादा श्रेष्ठ हुए या भगवान को और भगवान की रचना को मानने वाले ज्यादा श्रेष्ठ हुए? नास्तिक कौन हुए और आस्तिक कौन हुए?
जिज्ञासु: जो मानने वाले हैं...
बाबा: वो आस्तिक हैं और जो नहीं मानने वाले हैं वो नास्तिक है। इसलिए नास्तिक धर्म कौनसे धर्म से शुरु हुआ? बौद्ध धर्म ही है जहाँ से नास्तिकता की शुरुआत होती है। क्या? एक बौद्ध धर्म ही ऐसा है जिसमें भगवान क्या होता है ये नहीं बताया गया, स्वर्ग क्या होता है ये नहीं बताया गया, आत्मा क्या होती है वो नहीं बताया गया। न आत्मा को मानते, न परमात्मा बाप को मानते, न उसकी रचना स्वर्ग को मानते तो वो नास्तिक हैं या आस्तिक हैं? नास्तिक ठहरे। नास्तिकों से दूर रहना चाहिए या परिवार को खराब कर देंगे?
जिज्ञासु: दूर रखना चाहिए।
बाबा: नास्तिकों को दूर ही रखना चाहिए? तो देश निकाला कर दिया। क्या बुरा कर दिया क्या?
जिज्ञासु: फिर भी उन लोगों ने हिंसा तो नहीं किया ना?
बाबा: हिंसा का असली अर्थ मालूम है?

Disc.CD No.473, dated 27.12.07 at Hyderabad
Extracts-Part-2


Time: 02.53-06.28
Student: Baba, Shrimat should be obtained only from one Father, is not it? So, because of the lack of knowledge of Hindi, sometimes people do not believe in the translation done by the translators. So, should we keep seeking a second or third opinion? So, the main thing is that we should know Hindi, shouldn't we?

Baba: You should certainly know. If someone becomes the Father's child, parents' child and if the child grows up and still keeps mumbling 'gun, gun' (i.e. does not know how to speak), will he be called a grown up child or a small child? He is a small child. He is not intelligent. Foreigners come (to the Advance Party); they have also followed the basic (knowledge) for 2-4 years and after they undergo the bhatti here, they start delivering lectures in Hindi within a year. They start translating (Baba’s class) and start writing literature in their own language, in their language, i.e. Polish language. They start uploading literature in internet. They write letter to the Father in Hindi and they request for replies to be given in Hindi. Should it be called a shortcoming of the language or the shortcoming of a soul’s karmic accounts? Hm?

For those foreigners, this language is so alien and this is a language of India, in the capital of this place, i.e. Hyderabad, the people speak half Hindi, half Urdu and half Telugu.
(Someone said something) Yes, people know all the three languages very well; cannot they learn Hindi? When foreigners can learn Hindi within a year, then cannot the people of this place, A.P. (Andhra Pradesh State situated in South India), the Telugu speakers learn Hindi? They can learn. If someone says that he cannot learn it, then there is a proof available. A sister, who did not know ka, kha, Golden Age (alphabets of Hindi language), A, B, C, D of Hindi, was crying after surrendering, that she cannot speak to Baba. What? Tears were flowing down her cheeks and within a year she started delivering lectures (in Hindi). So, then? It cannot be said: we lagged behind due to language problem.

Time: 14.45-18.57
Student: Baba, it was said in a VCD: the one whose number is declared becomes opponent. It has not happened in the case of the eight deities.

Baba: Do those whose numbers are declared become opponents?
Student: It has been said so in a CD.
Baba: No. It has been said that those who are born first....what? Those who are born first are demons. It means that those who reveal themselves first; to be born means to reveal oneself. Are those who reveal themselves first swadeshis or videshis? Videshis reveal themselves first. Are the lustful ones, wrathful ones, greedy ones, those with attachment, the egotistic ones videshis or swadeshis? They are videshis. So, the demons celebrate their birth-like revelation first and the swadeshis do not reveal themselves; they remain hidden like the Pandavas. Just as the Father is hidden, the Father's children are also hidden. This is why although anyone may declare the numbers (i.e. ranks) of the eight deities, but they will not consider themselves to be God or God's child or will not declare themselves to be among the eight deities. If they say, then they are not the number one children of the Father.

Empty vessels make more noise (Thotha chana baajey ghanaa. Adhjal gagari chalkat jaaye.) Does a half-filled pot splash more or a completely filled pot splash more?
(Everyone said - the one partially filled with water) So, those who are deep, fulfilled, do not reveal themselves. This is the tradition of India....What? If they open a shop, will they display the name of their Father on the shop or will they display the name of the children on the shop? ... & sons company. '&' will be prefixed by the name of the Father. If they reveal the Father first, they will come in the list of eight deities and the one who reveals himself.....what? ‘Organize mega programmes, print big posters, insert your pictures, your photos in them; reveal yourself as Trimurti Shiv - these are the three personalities of Shiv, which cause establishment, sustenance and destruction’. So, do the ones who print posters and reveal themselves demons or deities? Hm? What are they? All of them are demons. Pandavas are hidden. They make purusharth (spiritual effort) while remaining hidden. Their donation, their respect, position, service, everything is hidden. This is the special sign of swadeshi and videshi. The soul should have these virtues of swadeshis. It is not that if the body was born in foreign countries, then it is foreigner. Swadeshi, videshi is proved on the basis of virtues and vices.

Time: 19.00-23.20
Student: Baba, when Muslims sit down to offer Namaz, they say - Allah-hu-Akbar. Allah-hu (I am Allah) means 'I am Shiv'. So, then what is meant by Akbar?

Baba: Ak means Akkaua (calotropis). Ak; does the flower of Ak emanate bad odour (durgandh) or fragrance (sugandh)? It emanates bad odour. Is it a bad odour of defamation or is it said to be a bad odour of divine virtues? A bad odour of defamation. Have the foreigners, especially the Muslims and especially Christians defamed the Hindus and Hindu scriptures more or have the Buddhists defamed them more? Have the Sikhs defamed them more? The Muslims and the Christians have defamed them more. This is why they are flowers of Ak and var, i.e. righteous among them. What? Among those flowers of Ak, among those who spread the bad odour, among those who cause defamation, the one who is righteous, the one who is the highest on high is Akbar. What? So, the subject category, the followers among the Muslim religion will suffix whose name with Allah? They will suffix the name of Akbar.
Student: The Buddhists have not defamed so much; even so why were they banished from India?
Baba: If someone does not defame, and does not accept God, does not accept God's creation either; suppose there is a foreigner; he believes in God. He at least utters the name of Allah; ‘O God Father’ through the mouth. He looks up, doesn't he? He at least believes in heaven, paradise; he has belief in the creation of Allah. He does not say that Christ established paradise. He does not say that Mohammad created Jannat (heaven). Does he say? He accepts only God the Father, does he not? So, is Buddha more righteous, are Buddhists more righteous, or those who accept God and God’s creation more righteous? Who are atheists and who are theists?
Student: Those who accept…..
Baba: They are theists and those who do not accept (God) are atheists. This is why which religion started atheism? It was Buddhism itself through which atheism started . What? It is only Buddhism in which it was not mentioned what is God, what is heaven, what is soul. They neither accept the soul nor the Supreme Soul Father. They do not accept His creation, i.e. heaven; so are they atheists or theists? They are atheists. Should we maintain a distance from the atheists or will they spoil the family?
Student: We should maintain a distance (from atheists).
Baba: Should the atheists be kept at a distance? So, if they (i.e. the Buddhists) were banished, was it a wrong step?
Student: Even so they did not indulge in violence, did they?
Baba: Do they know the real meaning of violence? ...(to be continued)
.....................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 03 Jun 2010

वार्तालाप नं.473, हैदराबाद-3, दिनांक 27.12.07
उद्धरण-भाग-३


समयः 52.45-01.03.05
जिज्ञासुः बाबा, कहते हैं अच्छे-2 बच्चों का भी आँखों से दिनभर में 10, 20, 50 भूले होती है। तो आँखों से कैसे भूल होती है?- पहला प्रश्न। और उसे कैसे सुधारना है?

बाबा: क्या? अच्छे-2 बच्चों से 10, 20, 50 भूले होती है दृष्टि से, आँखों से । माना आँख व्यभिचारी बनती है। व्यभिचारी बनती है माना? एक को देखना नहीं चाहती। क्या चाहती है? अनेकों की तरफ दृष्टि जाती है और अनेकों को “देखते ही रहे-2”, मन की आँखों से भी देखते रहे और तन की आँखे हैं वो भी ललचायमान रहती है- हाय-2 हमको ये ही ले जाता, इसीसे हो जाती, कहाँ फस गए आ करके। तो ये व्यभिचारी आँखे 10, 20, 25 बार होती है सिर्फ कन्याओं, माताओं की ही नहीं कुमारों और अधरकुमारों की भी यही हालत है| जिनको अच्छे-2 बच्चों की लिस्ट में डाला जाता है माना सर्विसेबल है।

तो समझ में तो आ गया होगा कि आँखे कैसे ललचायमान होती है, व्यभिचारी बनती है? आँखों से भूल होती है या नहीं होती है? अरे, न समझ में आया हो तो बता दो। प्रश्न है- कैसे भूल होती हैं आँखों से? आँखों से पाप कैसे बनता है? सबसे जास्ती अन्धा बनाने वाला अंग कौनसा है? सबसे जास्ती धोखा देने वाला अंग कौनसा है? आँखे हैं सबसे जास्ती धोखा देने वाली। पता ही नहीं चलता हम धोखा खा गए। ऐसा धोखा खा जाते हैं कि जिसको आँख से 1 सेकेण्ड, 10 सेकेण्ड भी देख लिया बस उधर ही बुद्धि जाती रहती है। बार-2 रोकना चाहे, बार-2 उधर जाती है। क्योंकि पूर्व जन्म का हिसाब किताब होगा तो 1, 2, 10 सेकेण्ड भी अगर देखेंगे... ज्यादा जन्मों का हिसाब किताब होगा तो जल्दी भूलेगा नहीं। वो याद जरूर आता रहेगा। कितनी भी मेहनत करे, अनेक जन्मों का संग किया है तो वो 10 सेकेण्ड का जो संग हुआ वो जरूर याद आवेगा। अगर ऐसा न हो तो बाबा को मुरली में ये डायरेक्शन देने की जरूरत नहीं हैं कि जिससे लगाव लग जाए उसका तो मुँह भी नहीं देखना चाहिए। ये डायरेक्शन क्यों दिया बाबा ने?

जिज्ञासु: नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा बनने के लिए।
बाबा: नहीं। इसलिए दिया कि 10 सेकेण्ड जिसको देखा है ब्राह्मण जीवन में सिर्फ एक बार और वो लगातार याद आ रहा है अगर उसको दुबारा फिर देख लिया तो क्या हो जायेगा? वो अटैचमेंट और पक्का हो जायेगा। क्योंकि श्रीमत की बरखिलाफी की। श्रीमत क्या है? क्या श्रीमत है? जिससे लगाव लग जाए, जिससे अटैचमेंट हो जाए उसका मुँह भी नहीं देखना चाहिए। मुँह देखेंगे तो आँखे जरूर देखने में आ जायेंगी और आँखे फिर धोखा दे देगी। तो पता चल गया कि आँखों से 10, 20, 50 बार भूले कैसे होती है?
जिज्ञासु: बाबा कहते हैं ना सर्वइन्‍द्रियां नैन प्रधान।
बाबा: अरे, प्रधान मंत्री कहाँ बैठता है? ऊपर राजा है, प्रधान मंत्री कहाँ बैठेगा? राजा के आस पास ही बैठेगा ना? तो आँखे हैं प्रधान मंत्री। अगर धोखा देने पे आ जाए तो ये जितना धोखा राजा को दे सकते हैं उतना और कोई व्यक्ति धोखेबाज नहीं बनेगा। तो एक प्रश्न का समाधान हो गया। क्या? आँखे धोखा कैसे देती है 10, 20, 50 बार? वो व्यक्ति 10, 20, 50 बार देखने को नहीं मिलता है। क्या? एक ही बार भले देखा हो लेकिन वो आँखे, चेहरा सामने आ जाता है। (किसीने कुछ कहा) हाँ-2 जो साकार आँखे हैं उनके सामने वो चेहरा सामने आ जाता है। बार-2 सामने आता है।
जिज्ञासु: बाबा, उससे बचने के लिए बाबा ने कहा है ना देखते हुए न देखो।
बाबा: वो तो ठीक है देखते हुए न देखे। वो तो ठीक है लेकिन जो श्रीमत मिली हुई है... क्या? जो बार-2 याद आए माने अटैचमेंट हो गया। लगाव की निशानी क्या है? लगाव की निशानी है- जिससे लगाव लग जावेगा वो बार-2 बुद्धि में, स्मृति में आवेगा। आँखों के सामने आ जावेगा। तो क्या करना है? (किसीने कहा- उसका मूँह भी नहीं देखना है।) हाँ जिससे लगाव लग जाए उसका मुँह भी नहीं देखना है। चलो, इन आँखों से हम मुँह नहीं देखेंगे लेकिन अन्दर की आँखों से मुँह मुँह और आँखे याद आती रहे तो क्या करे? क्या करे उसी समय? बाप की आँख देखे, बाप का चेहरा देखे तो काट हो जावेगा। क्योंकि बाप से बड़ी चुम्बक और कोई है नहीं। लेकिन कोई लोहा ऐसा होता है जिसको चुम्बक तुरंत पकड़ लेती है और कोई लोहा ऐसा होता है कि उसपे पॉलिश चढ़ा दी। चढ़ाई जाती है कि नहीं? उसपे कुछ कवर चढ़ा दिया जाता है, भले पतला कवर है लेकिन ऐसा कवर चढ़ जाता है कि वो उसको खींचता ही नहीं। तो टाईम लगेगा ना?

हिम्मत नहीं हारना चाहिए कि हमने तो इतनी बार काँट कर दिया, इतनी बार बाबा को याद किया फिर भी याद आ जाता है। जितनी बार याद आए उतनी बार बाप को लिख करके देना चाहिए। लेकिन बाप तो कहते हैं- एक बार लिख करके दिया- माफ। दूसरी बार लिखकरके दिया- माफ। तीसरी बार माफ नहीं होगा। ज्यादा से ज्यादा तीन बार माफ होगा फिर माफ नहीं होगा। तो फिर बार-2 लिखने से फायदा क्या?
(किसी ने कुछ कहा) नहीं। बाप का डायरेक्शन है कि कर्मेन्द्रियों से जो कर्म करते हैं... क्या? कर्मेन्द्रियों से जो कर्म करते हैं उसका पाप बन जाता है। अगर मन के अन्दर संकल्प आया, उससे पाप नहीं बनता। तो भले मन में बार-2 वो चेहरा और आँखे याद आती है लेकिन सच्चे दिल से बाप को अपने संकल्पों तक पोतामेल देते रहे तो आखरीन क्या होगा? आखरीन याद आना बन्द हो जावेगा। तो ये ही सुधार का तरीका है। याद के सिवाय और दूसरे तरीके से पाप और पापियों से छुटकारा मिल नहीं सकता।
जिज्ञासु: खूबसूरत शक्ल विनाशी है ना ...।
बाबा: हाँ वो तो सभी जानते हैं। वो तो सभी जानते हैं कि जो भी रूप है, इस दुनिया में बाप के अलावा जो भी हम इन आँखों से देखते हैं वो सब विनाशी है। कोई नई बात नहीं।
जिज्ञासु: सिर्फ बाबा को याद करने से होगा या ये समझना कि ये सब विनाशी है?
बाबा: देहभान होगा तो विनाशी मालूम ही नहीं पड़ता है। देहभान होगा तब ही तो देहवाला याद आयेगा। अपने को आत्मा समझकरके जो पक्का बैठ गया उसको देहधारी याद क्यों आयेगा? एक तो ये भूल कैसे होती है बार-2 और भूल को कैसे सुधारना है वो बाबा ने मुरली में बताय दिया। अपन को आत्मा समझ बाप को याद करो। बार-2 भूलता है बार-2 याद करो। दूसरा कोई तरीका ये पाप और पापियों से छुटकरा पाने का नहीं है। पापी पीछे पड़ गया न कोई? तो पापी से छुटकारा कैसे मिले? हिसाब-किताब तो हमने जोड़ा या कोई दूसरे ने जोड़ा? हमने जोड़ा तो हमने जो हिसाब-किताब जोड़ा है वो हमको ही काटना पड़ेगा।

समयः 01.04.10-01.09.15
जिज्ञासुः ब्रह्मा भोजन के लिए देवतायें तडपते हैं। इसका मतलब क्या है?

बाबा: देवतायें जो है वो ब्रह्मा भोजन के लिए तडपते हैं। (किसीने कहा- देवता बनने के बाद ब्रह्मा नहीं रहता है।) ब्रह्मा भोजन तो रहता है। हाँ? कि वो भी खत्म हो जाता है? ब्रह्मा ने जो भोजन खाया, चाहे हद का भोजन है और चाहे बेहद का भोजन है खाया किसके द्वारा? प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा खाया न? तो जो भी भोजन खाया उस भोजन के लिए देवतायें, देवात्मायें तडपती है। “हे! भगवान जल्दी मिले... क्या? कल मिले सो आज ही मिल जाए।” हाँ? अभी मिल जाए। कल करे सो आज कर। आज करे सो अब। तो समझ में आ जानी चाहिए बात। आ गई ना? तुम उनको समझाओ। वो भाषा नहीं जानते हैं, तो बता दो कान में। समझ में आ गया कि नहीं? नहीं आया? अरे?

जो भी असली देवतायें हैं जो नर से नारायण जैसे बनने वाले हैं वो देवतायें रुद्रमाला के मणके हैं या विजयमाला के मणके विशेष है? रुद्रमाला के मणके हैं और उन रुद्रमाला के मणकों को इस आखरी जन्म में जो पुरुषार्थ में सहयोगी मिले हैं उन सहयोगियों से वो संतुष्ट है या असंतुष्ट है? असंतुष्ट है मोस्टली... कोई संतुष्ट हो तो हाथ उठा दो। आखरी जन्म में सब असंतुष्ट है और ये उनकी बुद्धि में हैं...; उनकी बुद्धि में ये हैं कि 21 जन्मों का जो पुरुषार्थी सहयोगी हमे मिलने वाला है उसके बजाए हमारा उद्धार होने वाला नहीं है और जो भी सहयोगी मिलेगा वो भगवान से सम्बन्ध पहले जोड़ने वाला होगा या उस देवता से पहले सम्बन्ध जोड़ने वाला होगा? भगवान से पहले सम्बन्ध जोड़ने वाला होगा। अगर कहीं खुदा-न-खास्ता देवता से सम्बन्ध जोड़ बैठा तो और ही गढ्ढ़े में जायेगा या ऊपर उठेगा? और ही गढ्ढ़े में चला जायेगा।

इसलिए भक्तिमार्ग में गायन है कि शिव के ऊपर जो नैवेद्य चढ़ाया जाता है, भोग चढ़ाया जाता है... यहाँ भोग की ही बात हो रही है ना? हाँ? क्या बात हो रही है? भोजन, भोग की बात हो रही है ना? तो जो भी शिव के ऊपर नैवेद्य या भोग चढ़ाया जाता है अगर कोई खा ले तो क्या हो जायेगा? वो विषय-वासना वाला गढ्ढ़े में चला जायेगा, विधर्मी बन जायेगा। इसलिए कोई भी शिव के ऊपर चढ़ाए हुए नैवेद्य को, भोग को भोगता नहीं है कि भोगता हैं? डरते हैं। अरे, ये तो विषैला हो गया। अगर हमने विष खा लिया तो क्या हो जायेगा? गढ्ढ़े में जायेंगे या ऊपर जायेंगे? ग़ढ्ढ़े में चले जायेंगे। इसलिए सब डरते हैं। कम से कम ज्ञानी तो डरते रहेंगे कि नहीं डरेंगे? ज्ञानी तो डरेंगे। लेकिन ज्यादातर अभी संख्या ज्ञानियों की है कि अज्ञानियों की? अभी मोस्ली संख्या अज्ञानियों की बहुत है। क्या कहा?
(किसी भाई की ओर देखते हुए कहा:) सुन रहे हो कि नहीं? अरे, हाँ तो करो।

तो जो भी अज्ञानी है उनकी बुद्धि में जल्दी ये बात बैठती नहीं। तो उनको ये आस बनी रहती है कि जो ब्रह्मा भोग है, ब्रह्मा, प्रजापिता ब्रह्मा ने जिन-2 का भोग लगाया है, अच्छे-2 नैवेद्यों का उनका भोग हमको जल्दी मिल जाए तो हम भी संग के रंग से... क्या हो जाए? हमारा भी उद्धार हो जाए। लेकिन ऐसा कुछ होना नहीं है। क्यों नहीं होना है? वो भी एक गुह्य राज है।


Disc.CD No.473, dated 27.12.07 at Hyderabad
Extracts-Part-3


Time: 52.45-01.03.05
Student: Baba says that even the nice children commit 10, 20, 50 mistakes throughout the dayए through the eyes. So, how are mistakes committed through the eyes? This is the first question. And then, how should we correct it?

Baba: What? Nice children commit 10, 20, 50 mistakes through vision, through eyes, i.e. the eyes become adulterous. What is meant by the eyes becoming adulterous? It does not want to see one. What does it want? The eyes see many and they wish ‘let us keep seeing, let us keep seeing [many]’ . They [wish to] see through the eyes of the mind, and the eyes of the body also remain greedy thinking, ‘this person should have taken me [with him]; I should have [married] this person; I have been entangled [myself] by coming here’. So, these eyes become adulterous 10, 20, 25 times. It is not just the virgins, the mothers; the condition of the kumars (unmarried men) and the adharkumars (men who have been married) is also the same, the ones who are put in the list of ‘nice children’, i.e. the ones who are serviceable.

So, you must have understood how the eyes become greedy, adulterous? Do the eyes commit mistakes or not? Arey, if you haven't understood, then tell me. The question is: how do the eyes commit mistakes? How do the eyes commit sins? Which organ makes us blind to the maximum extent? Which organ deceives us the most? The eyes deceive us the most. We do not know at all that we have been deceived. We are deceived in such a way that even if we see someone for a second or ten seconds, the intellect keeps going there. We try to stop it again and again, it goes there repeatedly because if there is a karmic account of past births, then, even if we see [someone] for 1, 2, 10 seconds ... if the karmic account is of more number of births, then we will not forget [that one] soon. He will continue to come in our thoughts definitely. To whatever extent we work hard; if we have kept his company for many births, then that company of 10 seconds will certainly come to our mind. If it is not so, then there is no need for Baba to give directions in the Murlis that we should not even see the face of the one with whom we become attached. Why did Baba give this direction?

Student: To become nashtomoha smritilabdha (victory over attachment and the awareness of the Father and the self).
Baba: No. This direction was given because the person whom we have seen once for 10 seconds in our Brahmin life and if that person comes to our mind continuously, and if we see him again, then what will happen? That attachment will become stronger because we have violated the Shrimat. What is the Shrimat? What is the Shrimat? We should not even see the face of the one for whom we develop attachment. If we see the face, then the eyes will definitely be visible and the eyes will deceive us once again. So, did you come to know how the eyes commit mistakes 10, 20, 50 times?
Student: Baba, it is said ‘eyes are the main organs among all the organs’, isn’t it?
Baba: Arey, where does the Prime Minister sit? The king is at the top; so, where will the Prime Minister sit? He will sit near the king only, will he not? So, the eyes are the Prime Minister. If the eyes start deceiving, then no other person can deceive the king more than this one (the eyes). So, you have received reply for one question. What? How do the eyes deceive 10, 20, 50 times? That person is not visible 10, 20, 50 times. What? Even if we have seen him once, those eyes, that face comes in front of them. (Someone said something) Yes, yes, that face comes in front of the corporeal eyes. It comes in front of them again and again.
Student: Baba, in order to avoid that Baba has said that you should not see while seeing.
Baba: That is all right. We should not see while seeing. That is all right. But as regards the Shrimat that you have received.... what? The one who comes to the mind again and again, it means that there is attachment. What is the indication of attachment? The indication of attachment is, the one for whom we develop attachment will come to our mind again and again. He will come in front of our eyes. So, what should we do? (Someone said - We should not even see his face) Yes, we should not even see his face. OK, we will not see the face through these eyes, but if we continue to see the face and eyes through the inner eyes, then what should we do? What should we do at that time? We should see the Father's eyes, we should see the Father's face; then the effect will be overcome because there is no magnet stronger than the Father. But one kind of iron is such that it is pulled to the magnet immediately, and one kind of iron is such that it is polished (with some paint). Is it polished or not? It is covered by something. The cover may be thin, but the cover is such that it does not pull the magnet at all. So, it will take time, will it not?

You should not lose courage (thinking): I have cut (the thoughts of the person for whom I developed attachment) so many times, I remembered Baba so many times, even so he/she comes to my mind. As many times he/she comes to your mind, you should write to Baba. But the Father says, ‘if you give it in writing once, it will be pardoned. If you give it in writing for the second time, it will be pardoned. It will not be pardoned the third time. At the most it will be pardoned thrice; then it will not be pardoned’. So, what is the use of giving it in writing again and again?
(Someone said something) No. The Father's direction is that the actions that you perform through the bodily organs....what? The actions that you perform through the bodily organs.....what? Whatever actions that you perform through the bodily organs lead to accumulation of sins; if you just have a thought then it does not accumulate sins. So, although the same face and eyes come to your mind again and again, if you keep giving potamail to the Father with a true heart about your thoughts, then what will happen ultimately? Ultimately, the thoughts will stop emerging in your thoughts. So, this is the method of correction. Except remembrance there is no other method by which you can be liberated from the sins and sinful ones.
Student: Beautiful face is destructible, is not it?
Baba: Yes, everyone knows that. Everyone knows that whatever forms exist in this world except the Father, whatever we see through these eyes is destructible. It is not a new thing.
Student: Will we forget just by remembering Baba or should we think that all this is destructible?
Baba: If there is body consciousness, then you will not find them to be destructible. Only if there is body consciousness, the one with body will come to your mind. Why will the one who considers himself to be a soul remember the body? One thing is that Baba has said in the Murli as to how this mistake occurs repeatedly and how we have to correct it. Think yourself to be a soul and remember the Father. If you forget again and again, then remember [this] again and again. There is no other way to be liberated from sins and sinful ones. Some sinful soul has started chasing you, is not it? So, how can you save yourself from the sinful one? Did we create the karmic account or did anyone else create the karmic account? We created it; so, the karmic account that we have created should be cut only by us .

Time: 01.04.10-01.09.15
Student: Deities long for Brahma bhojan (food). What is meant by this?

Baba: The deities long for Brahma bhojan. (Someone said - Once we become deities, Brahma does not exist) But Brahma bhojan does exist. Hm? Or does even that perish? The food that was consumed by Brahma, whether it is in a limited sense or in an unlimited sense, through whom was it eaten? It was eaten through Prajapita Brahma, wasn't it? So, whatever food He ate; the deities, the deity souls long for it. O God! We should get it soon. ....What? We should receive today whatever we are supposed to get tomorrow. Hm? We should get it now. ‘Do today whatever you have to do tomorrow. Do now whatever you have to do today’. So, you should understand now. You have understood, haven't you? (Student said: Mataji didn’t understand) Explain to her; she does not understand the language; so, put it in her ears in whispers. Did she understand or not? did not she? Arey?

The true deities, who change from a man to Narayan, are they the beads of the rosary of Rudra or are they the special beads of the rosary of victory? They are beads of Rudramala. And the helper souls that those beads of Rudramala have received in this last birth to make spiritual effort (purusharth), are they satisfied with those helpers or are they dissatisfied with them? They are mostly dissatisfied.... If anyone is satisfied, raise your hands. In the last birth everyone is dissatisfied and it is in their intellect.....It is in their intellect that without the purusharthi helper that they are going to receive for 21 births, they are not going to be uplifted. And whichever other helper they get, will he first establish connection with God or with that deity first? He will establish connection with God first. If, by chance he establishes connection with the deity, then will he go deeper into the pit or will he be uplifted? He will fall deeper into the pit.

This is why it is famous in the path of Bhakti that the offerings (naivaidya) made to Shiv, the Bhog (offering) offered to Shiv.....Here you are talking about Bhog , aren't you? Hm? What are you talking about? You are talking about food, Bhog, aren't you? So, whatever naivaidya or Bhog is offered to Shiv; what will happen if someone eats it? He will fall into the pit of lust and vices; he will become vidharmi . This is why nobody eats the naivaidya, Bhog offered to Shiv; or does anyone eat it? They fear. Arey, this has become poisonous. If we eat the poison, then what will happen? Will we fall into the pit or will we rise? We will go into the pit. This is why everyone fears. At least the knowledgeable ones will fear or not? The knowledgeable ones will fear. But now is the number of knowledgeable ones more or is the number of ignorant ones more? Now mostly, the number of ignorant ones is more. What was said? (Baba looked at a brother and asked) Are you listening or not? Arey, at least say ‘yes’.

So, this does not fit in the intellect of all those who are ignorant. They continue to nurture the hope that the Brahma Bhog, all those whose Bhog has been accepted by Brahma, Prajapita Brahma, if we too get to taste those nice offerings soon, then what will happen to us if we are colored by their company? We will be uplifted as well. But no such thing is going to happen. Why is not going to happen? That is also a deep secret.
(concluded)
......................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 04 Jun 2010

वार्तालाप नं.476, मैसूर, दिनांक 31.12.07
उद्धरण-भाग-१


समयः 6.48-11.30
जिज्ञासु- बाबा, हिमालय पहाड़ तो अविनाशी है लेकिन वो सतयुग में होता है क्‍या?

बाबा- हिमालय पहाड़ अविनाशी है?
जिज्ञासु- हाँ। वो विनाश के टाईम पे उसको कुछ भी नहीं होगा ऐसे बाबा ने...।
बाबा- हिम-आलय। हिम माना बर्फ, आलय माना घर। जो बर्फ का घर है। माना कोई मौसम ऐसा नहीं होता जहाँ, वहाँ बर्फ न हो। गरमियों में वहाँ पहुँच जाओ तो वहाँ चोटियों पर क्‍या दिखाई पड़ेगी? बर्फ ही बर्फ दिखाई पड़ेगी। और सर्दी में तो होती ही होती है। बरसात के दिनों में भी वहाँ बर्फ ही बर्फ। तो बर्फ का घर है। वो तो जड़ हिमालय है। जड़ हिमालय है तो कोई चैतन्‍य हिमालय भी तो होगा?
जिज्ञासु- हाँ, बाबा।
बाबा- कौन?
जिज्ञासु- बाप।
बाबा- बाप! अरे! जो जड़ हिमालय होगा। उसपर बर्फ जमी रहती है जड़। और जो चैतन्‍य हिमालय होगा वो मन-बुद्धिरूपी आत्‍मा होगी या कोई जड़त्‍वमई आत्‍मा होगी? मन-बुद्धिरूपी आत्‍मा तो होगी; लेकिन वो मन-बुद्धि रूपी आत्‍मा जाम होगी बर्फ की तरह या चलायमान होगी? मनन-चिंतन-मंथन करने वाली होगी कैसी होगी? हिमालय की। जो चैतन्‍य हिमालय होगा उसकी आत्‍मा किस कैटगरी की होगी? बर्फ की तरह जाम होगी? बर्फ कैसी होती है? जाम हो जाती है। तो उसकी आत्‍मा जाम होगी या मनन-चिंतन-मंथन करने वाली होगी? जाम होगी। तो कौन है वो आत्‍मा?
जिज्ञासु- बाप। बाबा- cki! बाप की आत्‍मा बिल्‍कुल चलती नहीं है। मनन-चिंतन-मंथन करने वाली बिल्‍कुल नहीं है। जाम रहती है उसकी बुद्धि। बाप की बुद्धि जाम रहती है और कृष्‍ण बच्‍चे की बुद्धि चलायमान रहती है?
(किसी ने कहा कृष्‍ण बच्‍चा है हिमालय ।) हाँ। हिमालय माना पार्वती का बाप। शास्‍त्रों में हिमालय किसका नाम दिया है? हिमालय राज। किसके बाप का नाम हिमालय राज है? पार्वती के बाप का नाम हिमालय राज दिया है। तो शास्‍त्रों में जो भी नाम हैं काम के आधार पर हैं या ऐसे ही नाम दे दिए हैं? काम के आधार पर है। क्‍या काम किया? इतनी मुरली सुनी कानों से। और सबसे पहले मुरली उन्‍हीं की आत्‍मा ने सुनी। लेकिन बुद्धि जाम। मुरली का कोई असर नहीं।
भले मुरली में 66 में ही, 65 में ही बोल दिया कि प्रजापिता श‍ब्‍द ज़रूर लगाना चाहिए। अपने नाम के आगे क्‍या लगाना चाहिए? प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारी। लेकिन आज तक भी वो हिमालय और हिमालय के जो भी बच्‍चे हैं, चंद्रवंशी। आज तक भी उन्‍होंने इस बात गौर नहीं किया। क्‍या लिखते हैं अपने नाम के आगे? ब्रह्माकुमार-कुमारी। प्रजापिता शब्‍द लगाया? नहीं लगाया। माना मनन-चिंतन-मंथन उनकी बुद्धि करती ही नहीं। जामड़ी बुद्धि है। जाम रहती है। तो ऐसों के बाप का नाम है हिमालय। दुनियाँ का सबसे ऊचाँ पहाड़ है। तो वो हिमालय इस सृष्टि पर सदा काल रहता है, अविनाशी है या विनाशी है?

जिज्ञासु- अविनाशी है।
बाबा- एक बात बताओ। अविनाशी है? एक ने कहा अविनाशी है, एक कहते हैं विनाशी है। बाबा ने कहा है इन आँखों से जो कुछ भी देखते हो वो सब विनाश हो जावेगा। हिमालय वो विनाशी है या अविनाशी है? इन आँखों से देखने में आता है ना।
जिज्ञासु- आता है।
बाबा- जब इन आँखों से देखने में आता है तो विनाशी हुआ ना। अविनाशी कैसे होगा?

समयः 11.32-14.28
जिज्ञासु- बाबा, हम हिस्‍ट्री में देखते हैं कोई-2 राजा होते हैं अपना राज्‍य खो बैठते हैं। ऐसे ही बिज़नसमैन भी अपना बिज़नस खो बैठते हैं। वो क्‍या गलती किया है इस संगमयुग में?

बाबा- इस संगम में माना उनका एक ही जन्‍म होता है?
जिज्ञासु- नहीं।
बाबा- नहीं? तो पूर्व जन्‍मों का हिसाब-किताब आता है ना उनके सामने।
जिज्ञासु- पर राजाई बनाने वाला बाप ही है ना।
बाबा- राजा कोई 21 जन्‍मों का श्रेष्ठ जन्‍मों का बनाता है या ये द्वापर, कलियुग के भ्रष्ट जन्‍मों का राजा बनाता है?
जिज्ञासु- पर उसके आधार पर ही....
बाबा- नहीं, नहीं। वो नहीं बनाता है भ्रष्ट जन्‍मों का राजा। वो अपवित्र दुनियाँ का राजा बनाता है या पवित्र दुनियाँ का राजा बनाता है? वो तो 21 जन्‍मों की पवित्र दुनियाँ का राजा बनाता है। और खुद बनाता भी नहीं है। जो ऑटोमेटिक उसके कहे अनुसार पुरूषार्थ करेगा वो बनेगा।
जिज्ञासु- तो उसका कोई पुरूषार्थ नहीं है राजा बनने में?
बाबा- वो तो पिछले जन्‍म में उसने पुरूषार्थ किया है। जिज्ञासु- इसीलिए बनता है। बाबा- हाँ। डिफेक्‍टेड पुरूषार्थ किया है इसीलिए डिफेक्‍टेड राजा बना है।
जिज्ञासु- और राज्‍य खोने का क्‍या कारण है?
बाबा- राज्‍य खोने का यही कारण है कि पुरूषार्थ डि‍फेक्‍टेड है। श्रीमत के अनुकूल पुरूषार्थ नहीं किया। पिछले जन्‍म में पुरूषार्थ तो किया है। अच्‍छा पुरूषार्थ किया है, तपस्‍वी है। तपस्‍या की है लेकिन वो तपस्‍या अल्‍पकालीन की तपस्‍या है। अपन को आत्‍मा समझकर बाप को याद करने की अविनाशी तपस्‍या नहीं है।
जिज्ञासु- पर उधर श्रीमत नहीं होता है ना बाबा।
बाबा- कहाँ?
जिज्ञासु- द्वापर या कलियुग में।
बाबा- द्वापर, कलियुग में कहाँ श्रीमत है? श्रीमत नहीं है तभी तो डिफेक्‍टेड तपस्‍या है।
जिज्ञासु- तो गलती क्‍या होती है? श्रीमत तो वो जानते ही नहीं।
बाबा- उनकी गलती संगमयुग में हुई। कि संगमयुग में उन आत्‍माओं ने जब बाप ने आकरके अपनी पहचान दी और रास्‍ता बताया कि इस रास्‍ते पर चलो तो उसपर ध्‍यान नहीं दिया श्रीमत पर। अपनी मनमत पर चलाया तो उनकी द्वापर, कलियुग की शूटिंग उसी समय हो गई। नहीं समझ में आया?
जिज्ञासु- थोड़ा-2 समझा।
बाबा- थोड़ा-2 क्‍यों? अरे! अभी हम जो पुरूषार्थ कर रहे हैं। वो अपनी मनमत पर पुरूषार्थ करते हैं या नहीं? करते हैं। और दूसरे मनुष्‍यों की मत पर पुरूषार्थ करते हैं या नहीं, दूसरों से प्रभावित होकरके? वो भी करते हैं। और श्रीमत पर पूरा पुरूषार्थ कभी-2 करते हैं या नहीं? वो भी करते हैं। तो श्रीमत के अनुकूल हम जो भी कर्म करते हैं, पुरूषार्थ करते हैं। उसका फल हमको सतयुग, त्रेतायुग में प्राप्‍त होगा। क्‍या? और मनुष्‍यों की मत पर या मनमत पर जो कार्य करते हैं उसका ऊजूरा हमें कहाँ मिलेगा? द्वापर, कलियुग में मिलेगा।

Disc.CD No.476, dated 31.12.07 at Mysore
Extracts-Part-1


Time: 6.48-11.30
Student: Baba, the Himalayan Mountains are imperishable, but do they exist in the Golden Age?

Baba: Is the Himalayan Mountain imperishable?
Student: Yes. Nothing will happen to it at the time of destruction. Baba has said like this….
Baba: Him-aalay. Him means ice; aalay means house. It is a house of ice, i.e. there is no climate when it will not be covered by ice. Even if you reach there in summers, what will you find on the peaks there? You will see only ice. And in the winters it exists anyway. Even in the days of rainy season, there is only ice there. So, it is a house of ice. That is a non-living Himalaya. If there is a non-living Himalaya, then there must be some living Himalaya as well?
Student: Yes, Baba.
Baba: Who?
Student: The Father.
Baba: The Father! Arey! The non-living Himalaya is covered by non-living ice. And will the living Himalaya be a soul in the form of mind and intellect or a non-living soul? It will no doubt be a soul in the form of mind and intellect, but will that soul in the form of mind and intellect be frozen like ice or will it be dynamic? Will it think and churn or what will it be like? Himalay’s. The soul of living Himalaya will be of which category? Will it be frozen like ice? What is ice like? It is frozen. So, will its soul be frozen or will it think and churn? It will be frozen. So, who is that soul?
Student: The Father.
Baba: The Father! The Father’s soul does not work at all. It does not think and churn at all. Its intellect remains frozen. The Father’s intellect remains frozen and does the child Krishna’s intellect remain dynamic? (Someone said the child Krishna is Himalaya) Yes. Himalaya means Parvati’s Father. Who has been named Himalaya in the scriptures? Himalay Raj. Whose Father’s name is Himalay Raj? Parvati’s Father has been named Himalay Raj. So, are the names mentioned in the scriptures based on the task performed or have they simply been given the names? It is on the basis of tasks. Which task did he perform? He heard so many Murlis through the ears. And first of all it was his soul that heard the Murli. But the intellect was frozen. There was no effect of the Murli.

Although in (19)66 itself, in (19)65 itself, it was said in the Murlis that the word ‘Prajapita’ should certainly be added. What should be prefixed to one’s name? Prajapita Brahmakumar-kumari. But till date that Himalay and all the children of Himalay, the Chandravanshis (those who belong to the Moon dynasty), they have not paid attention to these words till date. What do they prefix to their name? Brahma Kumar-Kumari. Did they add the word ‘Prajapita’? They did not. It means that their intellect does not think or churn at all. The intellect is jammed. It remains frozen. So, the name of the Father of such ones is Himalay. It is the highest mountain of the world. So, does that Himalay remain forever in this world? Is it imperishable or is it perishable?

Student: It is imperishable.
Baba: Tell me one thing. Is it imperishable? One of you said that he is imperishable; another one is saying that he is perishable. Baba has said that whatever you see through these eyes, all that will perish. Is Himalay perishable or imperishable? He is visible to these eyes, isn’t he?
Student: He is.
Baba: When he is visible to these eyes, he is perishable, isn’t he? How can he be imperishable?

Time: 11.32-14.28
Student: Baba, we see in the history that there are some kings who lose their kingship. Similarly, some businessmen lose their business. What mistake did they commit in this Confluence Age?

Baba: In this Confluence Age? Does it mean they take only one birth?
Student: No.
Baba: No? So, the karmic account of the past births comes in front of them.
Student: But only the Father establishes kingships, doesn’t he?
Baba: Does He make us kings for 21 births, for righteous births or does He make us kings of the unrighteous births of this Copper Age, Iron Age?
Student: But on the basis of that itself…....
Baba: No, no. He does not make a king in the unrighteous births. Does He make us king of the impure world or of the pure world? He makes us king of the pure world of 21 births. And He does not make it Himself either. The one who makes purusharth (spiritual effort) automatically according to His versions will become (king).
Student: So, does he not make any purusharth to become a king?
Baba: He has made purusharth in his past birth.
Student: This is why he becomes (such king).
Baba: Yes. He has made defected purusharth. This is why he has become a defected king.
Student: And what is the reason for losing the kingdom?
Baba: The reason for losing the kingdom is that the purusharth are defected. He did not make purusharth according to Shrimat. He no doubt made purusharth in the past birth. He made good purusharth; he is a tapasvi (the one who does tapasya ). He did tapasya, but that tapasya is temporary. He did not make imperishable tapasya of remembering the Father by considering the self to be a soul.
Student: But there is no Shrimat there Baba, isn’t it?
Baba: Where?
Student: In the Copper Age or in the Iron Age.
Baba: Where is the Shrimat in the Copper Age and Iron Age? There is no Shrimat, this is why the tapasya is defected.
Student: So, what mistake do they commit? They do not know Shrimat at all.
Baba: They committed mistake in the Confluence Age. In the Confluence Age when the Father came and gave His introduction and showed the path asking them to follow the path, those souls did not pay attention to the Shrimat. They followed the opinion of their mind. So, they performed the shooting of the Copper Age and Iron Age at that time. Did you not understand?
Student: I understood to some extent.
Baba: Why a little? Arey! The purusharth that we are making now, do we make purusharth on the opinion of our mind or not? We do. And do we make purusharth on the opinion of other human beings or not, by becoming influenced by others? We do that as well. And do we sometimes make complete purusharth on Shrimat or not? We do that too. So, whatever actions we perform in accordance with Shrimat, whatever purusharth we make. We will get its fruits in the Golden Age and in the Silver Age. What? And where will we get the returns for the tasks that we perform on the opinion of the human beings or on the opinion of our mind? We will get in the Copper Age, Iron Age.....(to be continued)
.....................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 05 Jun 2010

वार्तालाप नं.476, मैसूर, दिनांक 31.12.07
उद्धरण-भाग-२


समय-15.50-16.42
जिज्ञासु- बाबा, इनका पूछना है कि सूक्ष्‍म शरीरधारी कैसे देखते हैं?

बाबा- सूक्ष्‍म शरीरधारी कैसे देखते हैं? शरीर में प्रवेश करके देखते हैं।
जिज्ञासु- बिना शरीर के भी वो देख सकते हैं क्‍या?
बाबा- हाँ। जिसमें प्रवेश करते हैं उसके द्वारा देखते हैं।
जिज्ञासु- नहीं वो जहाँ भी चाहे जा सकते हैं ना। इसीलिए वो पूछ रहे हैं।
बाबा- हाँ जा सकते हैं। जिज्ञासु- वो कैसे देखती है उस समय? बाबा- जैसे आत्‍मा जाती है वैसे सूक्ष्‍म शरीर भी जाता है। जैसे हम रात में सोते हैं और सोते-2 कहाँ-2 घूम आते हैं। घूमे आते हैं ना। वो पूर्व जन्‍म की स्‍मृति है ना शरीर के द्वारा। उस स्‍मृति के आधार पर उनको स्‍मृति आती है।
जिज्ञासु- बिना शरीर के वो देख नहीं सकती।
बाबा- बिना शरीर के कोई काम नहीं होता दुनियाँ में।
जिज्ञासु- शरीर के द्वारा ही देख सकती है।
बाबा- हाँ।

समय-16.45-21.47
(किसी जिज्ञासु ने कोई संस्कृत श्लोक पढ़कर सुनाया)

बाबा- एक-एक बात पूछो तो बात क्लियर हो। पूरा श्‍लोक पढ़ दिया। जिज्ञासु- कालहर। बाबा- काल हर। काल का हरण कर ले माना काल के ऊपर विजय प्राप्‍त कर ले। किसी का हरण कर लिया ना। तो जिसका हरण किया उसकी हार हो गई या जीत हो गई? उसकी हार हो गई। तो कालहर का मतलब है जो काल है उसका भी हरण कर ले। काल को भी जीत ले। हरण कर ले माना उसके ऊपर विजय हो गई। तो इस दुनियाँ में काल किसको कहा जाता है? समय को। काल माना? काल माना समय। अभी जो कलियुग का समय है। वो कलियुग के समय को हरण कर लिया जाए। पाप का युग हरण कर लिया जाए। तो पाप के युग को हरण करने में जो अव्‍वल नंबर जाता है उसको कहते हैं हर-हर महादेव। क्‍या? काल को परिवर्तित करने में सबसे आगे जाने वाली आत्‍मा का गायन हो गया। हर-हर महादेव। जिज्ञासु- कलातीत। बाबा- कलातीत। कलाओं के ऊपर भी अतीत हो जाता है और काल ऊपर भी विजय प्राप्‍त करता है। माना काल तो जड़ है और आत्‍मा चैतन्‍य है। ज्‍यादा पावरफुल कौन है? चैतन्‍य आत्‍मायें ज्‍यादा पावरफुल हैं;लेकिन माया के प्रभाव में है तो चैतन्‍य नहीं है। माया रावण जो है। वो माया रावण काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार। और साथ-साथ पृथ्‍वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश। पाँच तत्‍वों का भी आवरण और पाँच विकारों को भी आवरण। इसीलिए आत्‍मायें चैतन्‍य होते हुए भी काल के ऊपर विजय प्राप्‍त नहीं कर सकतीं; लेकिन काल के ऊपर आत्‍मा विजय प्राप्‍त कर सकती है। कब? जब पाँच विकारों पर भी विजय प्राप्‍त करे। और पृथ्‍वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश ये पाँच तत्‍व उसको आकर्षित न कर सके। तो ऐसी स्‍टेज में जो आत्‍मा पहले-पहले पहुँचती है...। क्‍या? आठ आत्‍माओं को पहले-पहले विजयी बनाए लेती है। अपने वायब्रेशन से। 12 आत्‍माओं को पहले-पहले विजयी बनाए लेती है। 100 आत्मायें पहले-पहले विजयी बन जायेंगी। 108 आत्‍मायें पहले-पहले विजयी बन जायेंगी। वो किसके आकर्षण से विजयी बनी? किसके योगबल से विजयी बनी? महाकाल जिसको कहा जाता है।

कौन है महाकाल? जो पहला-पहला नंबर है वो ही महाकाल है। तो कहते हैं कालहर। काल को भी हरण कर लिया। काल तो जड़ है। ये सृष्टिचक्र क्‍या है? ये कालचक्र है। सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग ये क्‍या है? काल चक्र है। इस कालचक्र को भी परिवर्तित करने में जो आगे बढ़े। हनुमान चालीसा में हनुमान को भगवान बना दिया। चारों युग प्रताप तुम्‍हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा। चारों युगों में हनुमान का प्रताप है। क्‍या प्रताप है? कि हर युग को परिवर्तन करने में वो आत्‍मा आगे है। प्रजापिता वाली आत्‍मा सतयुग में है पहला देवता। सतयुग आएगा तो पहला देवता कौन होगा? नर-नारायण। त्रेता में पहला क्षत्रिय, द्वापर में पहला वैश्‍य, कलियुग में पहला शुद्र। तो उन्‍होंने हनुमान चालीसा बना दी। चारों ओर प्रताप तुम्‍हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा। तो काल को परिवर्तित करने वाला कौन हुआ? महाकाल। ये कालहर का अर्थ हुआ।

जिज्ञासु- और पूर्व जन्‍म निवारक कैसे?
बाबा- पूर्व जन्‍म निवारक। जो भी हमने 63 जन्‍म लिए हैं। उन 63 जन्‍मों के पापों का निवारण कर दे। बाप की याद से ही 63 जन्‍मों के पाप का निवारण होता है ना। तो जो पहले-2 हो वो पूर्व जन्‍म निवारक हो गया। जन्‍म-मरण के चक्र से, पाप से मुक्‍त हो गया। बाकी 21 जन्‍मों को तो निवारण करने की बात ही नहीं। दुख का निवारण करना होता है या सुख का निवारण करना होता है? दुख का निवारण करना होता है। तो दुखी जन्‍म कितने हैं? 63 जन्‍म। तो वो ही पूर्व जन्‍मों की बात है। बाकी 21 जन्‍मों की बात नहीं है।

Disc.CD No.476, dated 31.12.07 at Mysore
Extracts-Part-2


Time: 15.50-16.42
Student: Baba, he wants to ask how the subtle bodied souls see.

Baba: How do subtle bodied souls see? They enter a body and see.
Student: Can they see even without the body?
Baba: Yes. They see through the ones in whom they enter.
Student: No, they can go wherever they wish, cannot they? This is why he is asking.
Baba: Yes, they can go.
Student: How do they see at that time?
Baba: Just as a soul goes, the subtle body also goes. Just as when we sleep in the night and during our sleep we travel so many places. We travel, don't we? There is a memory of the past birth through the body. They recollect on the basis of that memory.
Student: They cannot see without the body.
Baba: No task can be performed without a body in the world.
Student: They can see only through the body.
Baba: Yes.

Time: 16.45-21.47
(A Student read out a Sanskrit Shloka)

Baba: Ask one by one so that it could be clarified. You have read out the entire shloka.
Student: Kaalhar.
Baba: Kaal har. The one who controls (haran) time (kaal), i.e. the one who conquers time. Someone has been seized , hasn't he? So, did the one who has been seized lose or win? He lost. So, kaalhar means the one who controls even time, the one who conquers even time. Seizing (of time) means gaining victory over it. So, what is called kaal in this world? Time. What does kaal mean? Kaal means time. Now it is Iron Age. If the period of the Iron Age is conquered, if the Age of sins is conquered; so the one who becomes number one in conquering the age of sins is called Har-Har-Mahadev. What? The soul who went ahead of everyone in transforming the time was glorified as Har-Har-Mahadev.
Student: Kalaateet.
Baba: Kalaateet. He goes beyond the stage of celestial degrees and gains victory over time as well. It means that time is non-living and the soul is living. Who is more powerful? The living souls are more powerful, but if they are under the influence of Maya, they are not living. The Maya Ravan. That Maya Ravan i.e. lust, anger, greed, attachment, ego; and along with that, earth, water, wind, fire and sky; the envelope of five elements as well as the envelope of five vices. This is why despite the souls being living-souls, they cannot gain victory over time, but a soul can gain victory over time. When? When it conquers even the five vices. And the earth, water, wind, fire, sky - these five elements are not be able to attract it. So, the soul which reaches such a stage first of all… what? It first of all makes eight souls victorious through its vibrations. It first of all makes 12 souls victorious. 100 souls will first of all become victorious. 108 souls will first of all become victorious. Through whose attraction did they become victorious? Through whose power of Yoga did they become victorious? [Through] the one who is called Mahaakaal.

Who is Mahakaal? The one who is number one is himself Mahakaal. So, He is called Kaalhar. He seized time as well. Time is non-living. What is this world cycle? This is a cycle of time (kaal chakkra). What is this Golden Age, Silver Age, Copper Age, Iron Age? It is a cycle of time. The one who goes ahead in transforming the cycle of time (kaalchakra) as well [is Kaalhar]. Hanuman has been made God in Hanuman Chaalisa . 'Chaaron yug prataap tumhara, hai prasiddh jagat ujiyara'. (There is your glory in all the four ages. Your radiance is famous in the entire world) There is glory of Hanuman in all the four ages. What is the glory? That soul is ahead in transforming every age. The soul of Prajapita is the first deity in the Golden Age. When Golden Age comes, who will be the first deity? Nar-Narayan. [He is the] first Kshatriya in the Silver Age, first Vaishya in the Copper Age, first Shudra in the Iron Age. So, they prepared the Hanuman Chaalisa. 'Chaaron yug prataap tumhara, hai prasiddh jagat ujiyara'. So, who transforms the time? Mahaakaal. This is the meaning of Kaalhar.

Student: And how is He 'poorva janma nivaarak' (liberator of the previous births)?
Baba: Poorva janma nivaarak. The one who liberates us from the sins of the past 63 births we took . It is only through the remembrance of the Father that the sins of 63 births are burnt. So, the one who is ahead of everyone (in this task) is poorva janma nivaarak. He became free from the cycle of birth and death, from sins. As regards the 21 births, there is no question of becoming free from them. Should we be liberated from sorrow or from happiness ? We should be liberated from sorrow . So, in how many births do we experience sorrow? 63 births. So, it is about those past births. It is not about the 21 births....(to be continued)
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Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 06 Jun 2010

वार्तालाप नं.476, मैसूर, दिनांक 31.12.07
उद्धरण-भाग-३


समय: 21.49-23.12
जिज्ञासु- बाबा, देवासुर संग्राम में देवतायें और असुर सागर मंथन करते हुए दिखाते हैं चित्रों में।

बाबा- हाँ। चित्रों में दिखाते हैं इस समय की यादगार।
जिज्ञासु- पर इधर हम देखते हैं सिर्फ एक पर्सनालिटी सागर मंथन करता है।
बाबा- ऐसी बात तो नहीं है। बहुत से ऐसे प्‍वाईन्‍ट हैं जो सिर्फ एक ने तो नहीं निकाले हैं। और सबका भी कुछ न कुछ योगदान है।
जिज्ञासु- परंतु उस एक को नहीं दिखाते हैं। जो अव्‍वल नंबर है, जो बहुत सागर मंथन किया है उसको नहीं दिखाते हैं। सिर्फ सागर मंथन में असुर एक तरफ होते हैं और....
बाबा- जो दिखाने वाले हैं। जिन्‍होंने सागर मंथन दिखाया है, चित्र बनाया है। वो दिखाने वाली आत्‍मायें हैं या परमात्‍मा है? आत्‍मायें हैं। तो जो दिखाने वाली हैं सागर मंथन वो आत्‍मायें हैं। और आत्‍मायें जो हैं वो...।
जिज्ञासु- वो परमात्‍मा को गुम कर दिया।
बाबा- हाँ। चाहे विष्‍णु का चित्र बनाया हो, चाहे सागर मंथन का चित्र दिखाया हो। उन्‍होंने अपने को दिखाए दिया है सागर मंथन करते हुए। बाप को गुम कर दिया और ब्राह्मणों को गुम कर दिया। असली बात है बाप की और ब्राह्मणों की।

समय: 23.13-25.00
जिज्ञासु- बाबा, अष्‍टदेव तो अंत में कोई ने कोई धर्म में जाकर गिरते हैं। अंतिम जन्‍म में। पर वे लोग इसके पहले जन्‍म में भी बाप के साथ जाकर जन्‍म लेते हैं। राजाई स्‍थापन करने के लिए।

बाबा- ठीक है।
जिज्ञासु- तो क्‍या उस समय उनको संग का रंग.....
बाबा- नहीं। बाप है ना साथ में। सेनापति कौन है?
जिज्ञासु- उसका प्रभाव नहीं होता।
बाबा- हाँ। साथ में है तो प्रभाव कैसे होगा?
जिज्ञासु- बाबा, उस समय सभी अष्‍टदेव पुरूष रूप में ही होते हैं क्‍या?
बाबा- जब युद्ध करेंगे तो देव ही होंगे। देवियाँ थोड़े ही युद्ध करने जाती हैं।
जिज्ञासु- हाँ। इसीलिए पूछा बाबा। पर इस संगमयुग में तो स्‍त्री रूप में भी है। अष्‍टदेव जो बनते हैं यहाँ।
बाबा- वो देवी रूप में भी हैं वो स्‍वभाव संस्‍कार से कैसे हैं?
जिज्ञासु- पुरूष।
बाबा- यहाँ तो आत्‍मा का स्‍वभाव संस्‍कार देखा जाता है। देह थोड़े ही देखी जाती है।
जिज्ञासु- तो सभी जब राजाई स्‍थापन करते हैं, सभी अष्‍टदेव पुरूष रूप में ही होते हैं।
बाबा- ज़रूर होंगे। वो राजाई की स्‍थापना जो है वो देहअभिमानी राजाई है या आत्‍माभिमानियों की राजाई है?
जिज्ञासु- आत्‍माभिमानी।
बाबा- आत्‍माभिमानियों की राजाई होती है 63 जन्‍मों में?
जिज्ञासु- 63 जन्‍म में देहअभिमानियों की।
बाबा- देहअभिमानियों की राजाई है। देहअभिमानियों की राजाई की स्‍थापना देहअभिमानी बाप करेगा या रूहानी बाप करेगा? देहअभिमानियों का बाप जो है वो देहअभिमान की राजाई की स्‍थापना करता है। और आत्‍माभिमानी बाप जो है वो आत्‍माभिमानी दुनियाँ सतयुग, त्रेता की राजाई की स्‍थापना करता है।

समय-25.02-26.28
जिज्ञासु- बाबा, अष्‍टदेव में सभी ब्राह्मण जन्‍म ही ले‍ते हैं या अलग-अलग जन्‍म लेते हैं।

बाबा- वो तो अष्‍टदेव प्रत्‍यक्ष हों तब पता चले ना। अभी से कैसे बता दें। अभी तो दो ही प्रत्‍यक्ष हुए हैं ना। ये नहीं देखा जाता है कि जन्‍म से ब्राह्मण हैं वो बात पक्‍की करनी है या कर्म से ब्राह्मण हैं वो बात देखनी है?
जिज्ञासु- जन्‍म से भी, कर्म से भी।
बाबा- दोनों से होना चाहिए?
जिज्ञासु- हाँ।
बाबा- ये कोई बात नहीं होती। कलियुग के अंत में कर्म से ब्राह्मण होते हैं या जन्‍म से ब्राह्मण होते हैं? मोस्‍टली किससे होते हैं?
जिज्ञासु- बाबा, पहला अष्‍टदेव तो जन्‍म से, कर्म से दोनों से ही...।
बाबा- अच्‍छा जो अष्‍टदेवों के लिस्‍ट में नहीं होते हैं। अष्‍टदेवों के लिस्‍ट में नहीं हैं। क्‍या? लेकिन फिर भी ब्राह्मण हैं। जैसे तीन मूर्तियाँ हैं। तीनों मूर्तियाँ अष्‍टदेवों के लिस्‍ट में हैं?
जिज्ञासु- एक मूर्ति।
बाबा- एक मूर्ति अष्‍टदेव के लिस्‍ट में है। बाकी दो मूर्तियाँ अष्‍टदेव के लिस्‍ट में नहीं है। लेकिन फिर ब्राह्मण हैं या नहीं?
जिज्ञासु- ब्राह्मण हैं।
बाबा- ब्राह्मण हैं। जगदम्‍बा अष्‍टदेवों के लिस्‍ट में नहीं है। फिर भी ब्राह्मण है या नहीं? ब्राह्मण है।


Disc.CD No.476, dated 31.12.07 at Mysore
Extracts-Part-3


Time: 21.49-23.12
Student: Baba, deities and demons are shown to be churning the ocean during the war between the deities and the demons in the pictures.

Baba: Yes. The memorial of the present time is shown in the pictures.
Student: But here we see that only one personality churns the ocean.
Baba: It is not so. There are many points that only one (personality) has not produced. All others have some or the other contribution too.
Student: But that ‘one’ is not shown. The number one soul, who has churned the ocean a lot, is not shown. During the churning of the ocean (in the pictures) there are demons on the one side and....
Baba: Those who have shown; those who have shown the churning of ocean, those who have prepared the picture. Are the ones who have shown souls or is it the Supreme Soul? They are souls. So, those who show the churning of ocean are souls. And the souls...
Student: They have hidden the Supreme Soul.
Baba: Yes. Whether they have prepared the picture of Vishnu or the picture of churning of ocean; they have shown themselves churning the ocean. They have hidden the Father and they have hidden the Brahmins. Actually it is about the Father and the Brahmins.

Time: 23.13-25.00
Student: Baba, the eight deities fall into some religion or the other in the end. In the last birth. But these people are born with the Father also in the previous births to establish kingship.

Baba: It is correct.
Student: So, are they coloured by the company at that time...
Baba: No. The Father is with them, is not he? Who is the commander of the army?
Student: It (i.e. the company of other religions) does not cast any influence.
Baba: Yes. When he is with them, how will it influence them?
Student: Baba, at that time do all the eight deities exist in male form?
Baba: When they fight a war, they will be male deities only. Do the female deities go to wage a war?
Student: Yes. This is why I asked Baba. But in this Confluence Age they are also in a female form. Those who become eight deities here.
Baba: They are also in the form of female deities; but, how is their nature and sanskar?
Student: Male.
Baba: Here, the nature and sanskars of the soul are observed. The body is not observed.
Student: So, when all of them establish a kingship, all the eight deities are in a male form only.
Baba: Certainly. Is the kingship that is established a kingship of body consciousness or a kingship of soul conscious people?
Student: Soul conscious.
Baba: Do the soul conscious people rule in 63 births?
Student: The body conscious people rule in 63 births.
Baba: It is a kingship of body conscious ones. Will the kingship of body conscious ones be established by the body conscious Father or the spiritual Father? The Father of body conscious ones establishes a kingship of body consciousness. And the soul conscious Father establishes the soul conscious kingship of Golden Age and Silver Age.

Time: 25.02-26.28
Student: Baba, do all the eight deities take birth only as Brahmins or do they take different births (i.e. in different classes)?

Baba: That will be known only when those eight deities are revealed. How can we say that now itself? Only two have been revealed so far. It is not seen whether he is Brahmin by birth (or not). Should we become firm in that aspect (of physical birth) or should we observe whether someone is Brahmin by act?
Student: Both by birth and by act.
Baba: Should it be in both the ways?
Student : Yes.
Baba: That is not true. In the end of the Iron Age, are people Brahmins by act or Brahmins by birth? What are they mostly?
Student: Baba, the first deity among the eight deities is (a Brahmin) by birth as well as by act.....
Baba: OK, those who are not included in the list of eight deities, those who are not in the list of eight deities. What? But even so they are Brahmins. For example, the three personalities. Are all the three personalities in the list of eight deities?
Student: One personality.
Baba: One personality is in the list of eight deities. Rest two personalities are not in the list of eight deities. But still, are they Brahmins or not?
Student: They are Brahmins.
Baba: They are Brahmins. Jagadamba is not in the list of eight deities. Yet, is she a Brahmin or not? She is a Brahmin.....(to be continued)
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Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 07 Jun 2010

वार्तालाप नं.476, मैसूर, दिनांक 31.12.07
उद्धरण-भाग-4


समय-26.31-29.00
जिज्ञासु- बाबा, बाप का संग का रंग बिना मिले ही, केवल याद के बल से ले सकते हैं?

बाबा-आँखों ने जिसका संग किया होगा वो ही याद आवेगा या आँखों ने जिसका संग ही नहीं किया वो याद आवेगा? आँख देखती है ना। तो आँखों ने जिसको देखा है वो ही याद आवेगा या जिसको देखा ही नहीं है वो याद आवेगा? अच्छा , ऐसे समझ लो ब्रह्माबाबा थे। उनमें शिवबाबा आते थे। प्रजापिता वाली आत्मा ने ब्रह्मा बाबा को देखा ही नहीं होगा क्योंमकि जब तक ब्रह्मा साकार में रहता है तब तक वो आत्मा‍ ज्ञान में नहीं आती। जब वो शरीर छोड़ जाता है उसी साल ज्ञान में आती है। तो आँखों से देखा ही नहीं तो निराकार ज्या दा याद आता है या साकार ज्यादा आता है उसे?
जिज्ञासु- निराकार।
बाबा- क्यों? क्योंकि इन आँखों से देखा ही नहीं। जब आँखों से देखा ही नहीं है तो वो याद ही नहीं आता। और जिन्हों ने गोद में पालना ली है, आँखों से उसको ही देखते रहे हैं। उनको इतना याद आता है कि उनकी बुद्धि में साकार सो निराकार बैठता ही नहीं। तो प्रश्न का जवाब मिला?
जिज्ञासु- हाँ।
बाबा- क्या?
जिज्ञासु- एक बार मिलना ही चाहिए।
बाबा- कम से कम।
जिज्ञासु- लेकिन बाद में बिना मिले भी...।
बाबा- कम से कम एक बार देखना ज़रूरी है।
जिज्ञासु- इन आँखों से।
बाबा- इन आँखों से। अगर 63 जन्मों. का साथ रहा होगा। तो एक बार का, एक सेकण्ड का देखना ही इतना तीखा असर करेगा कि वो भूलेगा नहीं। माना अव्यक्त वाणी में बोला है- एक बार की स्मृति सदाकाल के लिए स्थाई बनाई जा सकती है। क्या? एक बार की स्मृति। स्मृति का अनुभव जो है वो एक बार स्मृति का अनुभव किया। एक बार की स्मृति का अनुभव सदा काल के लिए स्थाई बन सकता है।

समयः 29.05-29.45
जिज्ञासु- बाबा, बेसिकली कट उतरना मतलब क्या?

बाबा- बेसिकली माना प्राईमरिली।
जिज्ञासु- मतलब उधर कौनसी कट उतर जाती है?
बाबा- माना ब्रह्मा बाबा को याद करने की ज्यादा उनको वो नहीं रहती। बस बिंदु को याद किया। वो बुद्धि (में) बिंदु बैठ जाता है। आत्मिक स्थिति पक्की होने लगती है, निराकार याद आने लगता है। आत्मान की कट उतरी माना आत्मा की याद आने लगी। ये नहीं मालूम पड़ता है कि आत्मा ने कितने जन्म लिए; लेकिन आत्मिक स्थिति बन जाती है। मैं आत्मा हूँ, मैं स्टार हूँ।

समय:30.00-30.52
जिज्ञासु- बाबा, जब शारीरिक रोग आता है डॉक्ट्र अलग-अलग औषधि देते हैं। वैसे ही श्रीमत भी अलग-अलग होते है? एक आत्मा5 को अलग और दूसरी आत्मा को अलग।

बाबा- मनुष्य मत में और श्रीमत में अंतर नहीं होगा?
जिज्ञासु- अंतर होगा।
बाबा- मनुष्य ढेर के ढेर हैं। और श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ एक ही है। तो जो श्रेष्ठ तो श्रेष्ठ। है वो जो दवाईयाँ बताता है वो एक ही बताता है। मूल दवाई है याद की। और वो अलग-अलग नहीं बताता है। एक ही दवाई बताता है। साकार में, साकार को पहचानो और निराकार बाप को याद करो। याद के बिगर और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। जन्म-जन्मांतर के लिए निरोगी काया बनाने के लिए।

समय:30.55-33.50
जिज्ञासु- जीसस को विरोधि सूली पर चढ़ाते हैं बेहद में इसकी शूटिंग संगमयुगी पिरियड में कैसे होती है?

बाबा- जीसस वो है जिसमें वो अधूरी आत्मास, अधूरा धर्मपिता प्रवेश करता है। जो प्रवेश करने वाला है उसको सूली का दुख नहीं होता। और जिसमें प्रवेश करता है उसको सूली का दुख होता है।
जिज्ञासु- इसीलिए वो कहता है बाबा कि इसको क्षमा करो एक बार। जो सूली पर चढ़ाता है उनको क्षमा करने के लिए भगवान से प्रार्थना करता है।
बाबा- यहाँ उल्टा होता है। क्यार? जीसस, जिसमें क्राइस्टै की आत्माय ने प्रवेश किया। उसने प्रवेश करके उसको दुख दिया। क्यों कि जितना भी प्रेशर पड़ा समाज का वो प्रवेश करने वाली आत्माश के ऊपर प्रेशर पड़ा या जिसमें प्रवेश हुआ जीसस के ऊपर प्रेशर पड़ा? जीसस के ऊपर समाज की विरोधाभास को सारा प्रेशर पड़ा गया। तो दुःख कौन भोगता है? जीसस ने भोगा। अब जो दुख भोगा उसने। उसको फाँसी की सजा दी गई। उसका हिसाब-किताब कब पूरा होगा? संगमयुग में यहाँ सारा लास्‍ट आखरी जन्म में आकरके वो हिसाब-किताब पूरा हो जाता है। वो जीसस बनने वाली आत्माप जो नारायण बनने वाली आत्मा है। अधूरा नारायण बनता है ना। वो अधूरा नारायण कनवर्ट होने वाली आत्मा है या कनवर्ट न होने वाली आत्मा है? कनवर्ट होने वाली आत्मा है। वो कनवर्ट होने वाली आत्मा सम्पूार्ण बनती है या नहीं बनती?
जिज्ञासु- नहीं बनती।
बाबा- नहीं। अपने नंबर पर सम्पूर्ण बनेगी कि नहीं बनेगी?
जिज्ञासु- नहीं बनेगी।
बाबा- अरे! सजायें खाकर सम्पूर्ण बनेगी या नहीं बनेगी? सजायें खाकर सम्पूार्ण तो बनेगी? यहीं संगम में ही बनेगी? जब वो सम्पूर्ण बनेगी तो उस क्राइस्ट में जो इसी दुनियाँ में कहीं होगा। जो ऊपर से आती है आत्मा द्वापरयुग में। उसमें प्रवेश करगी कि नहीं और उससे ज़बरदस्ती सनातन धर्म की स्थापना कराएगी या नहीं? और एक बाप की पहचान कराएगी। निमित्त बनेगी। तब जाकरके नारायण बनेगा सतयुग में। नहीं तो नारायण नहीं बनेगा।
जिज्ञासु- बाबा, ऐसे ही कुमारिका को भी होगा क्या?
बाबा- बिल्कुल होगा।

समय:35.40-37.09
जिज्ञासु- बाबा, धर्मराज की सजा आठ के अलावा सबको भुगतना पड़ता है। वो भुगतने का समय कितने दिन या साल तक रहेगी?

बाबा- एक सेकण्ड में भी जन्म-जन्मांतर की सजा का भी अनुभव करेंगे।
जिज्ञासु- फिर वो सेकण्डस् कितना सेकण्डस हैं?
बाबा- फिर कितना सेकण्डस? वो इतनी मतलब...। जैसे कहते हैं ना दुख जो है वो थोड़े समय मिलता है तो लम्बा टाईम मालूम पड़ता है या छोटा टाईम मालूम पड़ता है? लम्बा टाईम मालूम पड़ता है। गीत भी बनाया हुआ है। क्या ? भक्तिमार्ग वालों ने एक गीत बनाया है। ‘‘समय तू जल्दी -जल्दी बीत। सुख में तो बिल्कुल नहीं ठहरे, लाख बिठायें तुझपर पहरे और दुःख में तो बिल्कुल रूक जाए। कैसी तेरी रीत? समय तू जल्दी-जल्दी बीत।’’ तो ये हिसाब है।

धर्मराज की सजायें इतनी कड़ी हैं कि लोग बीमार पड़ते हैं ना। कैंसर के मरीज कितने तड़पते हैं। उनको वो दुःख बड़ा दुख नहीं है। बाबा ने कहा है कैंसर का मर्ज बन जाए, वो सहन कर ले वो अच्छा। लेकिन धर्मराज की सजाओं से बच जायें।

किसी ने कुछ कहा।
बाबा- हाँ। वो धर्मराज की सजाओं का एक सेकण्ड भी बहुत लम्बा है। बहुत तकलीफ है। जन्म -जन्मांतर की तकलीफ महसूस होती है।

Disc.CD No.476, dated 31.12.07 at Mysore
Extracts-Part-4


Time: 26.31-29.00
Student: Baba, can we be colored by the Father’s company without meeting Him, only through the power of remembrance?

Baba: Will we remember someone in whose company our eyes have been or will be remember someone in whose company our eyes have not been at all? It is the eyes which see, is not it? So, will someone whom our eyes have seen come to the mind or will someone whom our eyes have not seen at all come to the mind? OK, suppose, there was Brahma Baba ; ShivBaba used to come in him. The soul of Prajapita will not have seen Brahma Baba at all because as long as Brahma was in corporeal form, that soul did not enter the path of knowledge. When he left the body, he entered the path of knowledge in the same year. So, when he has not seen (Brahma Baba) through the eyes at all, then does he remember the incorporeal more or the corporeal more?
Student: The incorporeal one.
Baba: Why? Because he did not see (Brahma Baba) through these eyes at all. When he did not see through the eyes at all, then he does not remember him at all. And those who have obtained sustenance in the lap (of Brahma), those who have been seeing only him through the eyes, he comes to their mind to such an extent that the idea of incorporeal one within the corporeal one does not sit in their intellect at all. So, did you get the reply to your question?
Student: Yes.
Baba: What?
Student: We should definitely meet once.
Baba: At least.
Student: But later on ( we can remember) even without meeting....
Baba: It is necessary to see at least once.
Student: Through these eyes.
Baba: Through these eyes. If we had been in his company for 63 births, then just a onetime glance, a glance of just one second will also have such a strong influence that we cannot forget it. It means that it has been said in an Avyakt Vani that the memory of a moment can be made permanent. What? One time memory. The experience of memory was obtained once. The one-time experience of memory can become permanent.

Time: 29.05-29.45
Student: Baba, what is meant by removal of the cut (i.e. rust) basically?

Baba: Basically means primarily.
Student: I mean to ask, which cut (i.e. rust) is removed?
Baba: It means that he does not need to remember Brahma Baba more. He remembers just the point. That point sits in the intellect. The soul conscious stage starts becoming firm; the incorporeal one starts coming to the mind. Removal of the cut (i.e. rust) of the soul means he started remembering the soul. He does not come to know how many births a soul has taken, but he attains the soul conscious stage. I am a soul; I am a star.

Time: 30.00-30.52
Student: Baba, when someone is afflicted by a physical disease, the doctor gives different medicines. Similarly, is Shrimat also of different kinds? One kind of Shrimat for one soul and another kind of Shrimat for another soul.

Baba: Will there not be any difference between the opinion of a human being and Shrimat?
Student: There will be a difference.
Baba: There are numerous human beings. And the most righteous one is only one. So, the medicine that the most righteous one prescribes is only one. The original medicine is of remembrance. And He does not say it differently to different persons. He prescribes only one medicine. Recognize the corporeal one and remember the incorporeal Father. There is no way other than remembrance to become healthy for many births.

Time: 30.55-33.50
Student: Jesus was crucified by his opponents; how does its shooting take place in the Confluence Age period in an unlimited sense?

Baba: Jesus is the one in whom the incomplete soul, the incomplete religious Father enters. The one who enters does not experience the sorrow of the being crucified. And the one in whom he enters experiences the sorrow of being crucified.
Student: This is why Baba he says: pardon him once; He prays to God to pardon the one who crucified him.
Baba: Here the opposite thing happens. What? Jesus, in whom the soul of Christ entered; he entered and gave him sorrow because was the pressure that was exerted by the society experienced by the soul that enters or by the one in which it entered, i.e. Jesus? Jesus experienced the pressure of the opposition by the society. So, who experiences sorrow? Jesus experienced sorrow. Well the sorrow that he experienced, he was hanged, when will that karmic account be settled? In the Confluence Age, here, in the last birth all the karmic accounts are settled. That soul which becomes Jesus, which becomes Narayan; he becomes an incomplete Narayan, doesn't he? Is that incomplete Narayan a soul that will convert or is it a soul that will not convert? It is a soul that will convert. Does that soul which converts become complete or not?
Student: It does not.
Baba: No. Will it become complete in its number or not?
Student: It will not.
Baba: Arey! Will it become complete after suffering punishments or not? Will it not become complete after suffering punishments? Will it become (complete) here in the Confluence Age itself? When it becomes complete, will it enter (the present body of the soul of) that Christ, who is somewhere in this world, who comes from above in the Copper Age or not? And will it force it to establish Sanatan Dharma or not? And it will cause the recognition of one Father. It will become an instrument. Only then he will become Narayan in the Golden Age. Otherwise, he will not become Narayan.
Student: Baba, will it be the same case with Kumarika (Dadi)?
Baba: Certainly.

Time: 35.40-37.09
Student: Baba, everyone except the eight suffer the punishments of Dharmaraj. How many days or years will that period of suffering last?

Baba: Even in a second, they will experience the punishment of many births.
Student: Then, how many seconds does it last?
Baba: Then how many seconds? That will last….... For example, it is said that when someone experiences sorrow for a short period, does it appear to be a long time or a short time? It appears to be a long time. A song has also been made. What? The people of the path of Bhakti have made a song. ‘Samay tu jaldi-jaldi beet, sukhh mein toh bilkul nahi thahrey, laakh bithaen tujh par pehrey aur dukh mein toh bilkul ruk jaaye. Kaisi teri reet? Samay tu jaldi-jaldi beet.’ (Time, pass quickly. In happiness you do not stay at all, even if we put you under a hundred thousand custody . And in sorrow you stop moving. What are your ways! Time, pass quickly). So, this is the calculation.

The punishments of Dharmaraj are so harsh that people fall sick, don’t they? The patients of cancer suffer so much. Their pain is not such severe pain. Baba has said that it is better if we become a cancer patient and tolerate it. But we should avoid the punishments of Dharmaraj.

Someone said something.
Baba: Yes. That one second of punishments of Dharmaraj is very long. It causes a lot of pain. It feels like pain of many births. ...(to be continued)
.....................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 08 Jun 2010

वार्तालाप नं.476, मैसूर, दिनांक 31.12.07
उद्धरण-भाग-5


समय:37.11-38.22
जिज्ञासु- बाबा, मंदिरों में देवताओं को सुबह-सुबह जगाते हैं, उसको नहलाते हैं और रात में उनको सुलाते हैं। ये सभी करते हैं ऐसा क्यों होता है?

बाबा- जो भक्तिमार्ग में देवतायें हैं। उनकी सतयुग त्रेता की सवेरे की शूटिंग होती है कि नहीं? वो सतोप्रधान, सतोसामान्य पुरूषार्थ करते हैं कि नहीं संगमयुग में?
जिज्ञासु- करते हैं।
बाबा- तो वो उनका सवेरा हो गया। और रजोप्रधान और तमोप्रधान सोने की शूटिंग करते हैं कि नहीं संगमयुग में?
जिज्ञासु- करते हैं।
बाबा- करते हैं। तो वो उनका सोना हो गया। अज्ञान की नींद मे सोना, श्रीमत के बरखिलाफ कर्म करना, तमोप्रधान अवस्था बनाना, खुद दुःखी रहना और दूसरों को भी दुःखी करना। खुद भगवान को भूल जाना और दूसरों को भी भगवान को भुलाना। तो उसीकी आवृत्ति करते हैं।

समय: 38.24-40.16
जिज्ञासु- ज्ञान में आने के बाद मरने के बाद कौन सूक्ष्म (शरीर) धारी बनते हैं? कौन-2 अलग जन्म लेते हैं?

बाबा- जो बेसिक नालेज तक सीमित रहते हैं। जिन्होंने सिर्फ अम्मा को ही पहचाना। अम्मा को ही गीता का भगवान समझ लिया। बड़े ते बड़ा साकार भगवान, ऊँच ते ऊँच भगवान- ब्रह्मा। बस। उनको शरीर छोड़ना पड़ेगा।
जिज्ञासु- शरीर छोड़ना पड़ेगा। ब्रह्मा शरीर छोड़ गया मगर वो सूक्ष्म शरीर धारी बन गया ना।
बाबा- सूक्ष्म शरीरधारी बन गया। ऐसे ही जो भी ब्रह्मा को फॉलो करने वाले होंगे उनको सूक्ष्म शरीरधारी बनना पड़ेगा।
जिज्ञासु- दादी?
बाबा- उनको भी सूक्ष्म शरीरधारी बनना पड़ेगा।
जिज्ञासु- वो अलग जन्म नहीं लेते हैं।
बाबा- साकार शरीर का जन्मम नहीं ले सकते। अरे! अपने जीवन काल में उन्हों ने अपना सरपरस्त किसको माना मरते दम तक? अपने से ऊँच किसको माना?
जिज्ञासु- ब्रह्मा को।
बाबा- ब्रह्मा को माना। तो जिंदगी भर उन्हों ने अपने सारे पुरूषार्थी जीवन में जिसको ऊँच माना। अंत समय में वो आत्मा किसको ऊँच समझेगी? अंत मते सो गते क्या होगी? ब्रह्मा को ही ऊँच मानेगी। ब्रह्मा का ही जब शरीर छूट गया तो उनका शरीर रह जाएगा क्या?
जिज्ञासु- नहीं।
बाबा- सवाल ही पैदा नहीं होता।
जिज्ञासु- मेरा प्रश्न। ऐसा नहीं है। कौन-कौन सूक्ष्मधारी बनते हैं और कौन-2 अलग जन्म लेता है? ऐसा मेरा प्रश्न था।
बाबा- जो दुबारा जन्म लेते हैं। वो वही व्यक्ति दुबारा जन्म ले सकते हैं जिन्हों ने एडवांस नालेज ली हो। बाप से सन्मुख सुना हो।
जिज्ञासु- वो अलग जन्मा लेगा।
बाबा- वो अलग जन्म ज़रूर लेंगे। भले अकाले मौत हो जाए बाई चाँस। तो भी उनको दुबारा जन्म लेना पड़ेगा।

समय: 40.20 – 41.26
जिज्ञासु- भारत में ज्योतिर्लिंग बहुत है। बद्रीनाथ, रामेश्वर, काशी, ओंकारेश्व र ये सभी बताते हैं। मगर ये सोमनाथ मंदिर का लिंग बहुत मानते हैं। ऐसा क्यों ?

बाबा- क्योंकि पहला है ना।
जिज्ञासु- पहला है। मगर ये भी ईक्वल स्टेटस है ना।
बाबा- ये बाद में तैयार हुए हैं। 2500 वर्ष पहले जब राजा विक्रमादित्य का शासन था। तो राजा विक्रमादित्य ने सोमनाथ की पूजा की वो पहला-पहला मंदिर हुआ। माना जो भी सूर्यवंशी 12 विशेष आत्मायें हैं। जिनकी यादगार में वो शिवलिंग बनाए गए, ज्योतिर्लिंग उन्होंने अपने को लिंग स्वारूप में स्थिर कर। लिया। तो नंबरवार स्थिर किया होगा या एक टाईम पर स्थिर कर लिया?
जिज्ञासु- नंबरवार।
बाबा- तो जिसने पहले स्थिर कर लिया उसका नाम पड़ गया सोमनाथ। सोम माना चंद्रमाँ। और नाथ माना उसका स्वामी। तो चंद्रमाँ का स्वामी कौन हुआ?
जिज्ञासु- प्रजापिता।

समय: 41.28-42.19
जिज्ञासु- बाबा, द्वापर में पावन सोल्सम आकर पतित शरीर का आधार ले‍ती है। पावन सोल्स आते हैं ना वो यहाँ पतित शरीर में प्रवेश करते हैं। केवल सुख ही सुख भोगते हैं।

बाबा- पहले जन्मि में।
जिज्ञासु- पहले जन्मर में जब वो शरीरधारी दुःख भोगता है तब वो पावन सोल उसी शरीर में होता है या शरीर को छोड़ ...
बाबा- दुःख भोगता है तो उसे रहने की क्या दरकार वो तो जब चाहे तब निकल जाए।
जिज्ञासु- निकल सकता है।
बाबा- हाँ। क्राइस्ट को जब सूली लगी, सूली पर चढ़ाया गया। तो जीसस ने दुख भोगा या प्रवेश करने वाले क्राइस्ट ने दुःख भोगा?
जिज्ञासु- जीसस ने।
बाबा- जीसस ने।
जिज्ञासु- माना उस समय क्राइस्ट की आत्मा शरीर छोड़कर भाग जाती है।
बाबा- निकल जाती है। तुम्हारे साथ हमारा ऐसा हिसाब किताब है तुम भोगो।

Disc.CD No.476, dated 31.12.07 at Mysore
Extracts-Part-5


Time: 37.11-38.22
Student: Baba, deities are awakened, bathed early in the mornings and made to sleep in the nights at the temples. They do all these things; why does it happen?

Baba: Does the shooting of the mornings of Golden Age and Silver Age take place for the deities of the path of Bhakti or not? Do they make satopradhan , satosamanya purusharth (spiritual effort) in the Confluence Age or not?
Student: They do.
Baba: So, that is their morning. And do they perform the shooting of sleeping in the rajopradhan and tamopradhan stage during the Confluence Age or not?
Student: They do.
Baba: They do. So, that is their sleep. The sleep in ignorance, act against the Shrimat, make the stage tamopradhan; remain sorrowful and make others sorrowful too; they themselves forget God and make others also forget God. So, they repeat that.

Time: 38.24-40.16
Student: After entering the path of knowledge, who takes a subtle body after death? Who take a separate birth?

Baba: Those who remain limited to the basic knowledge, those who have recognized only the mother, those who have considered only the mother the God of the Gita, those who consider Brahma e the highest corporeal God, the highest God, will have to leave their body.
Student: They will have to leave their body. Brahma left his body, but he took on a subtle body, didn’t he?
Baba: He took on a subtle body. Similarly whoever follows Brahma will have to take on a subtle body.
Student: Kumarika Dadi?
Baba: She will also have to take on a subtle body.
Student: Does she not take a separate birth?
Baba: She cannot take a corporeal birth. Arey! During her entire lifetime whom did she consider her chief till her last breath? Whom did she consider greater than herself?
Student: Brahma.
Baba: She considered Brahma (to be greater than herself). So, the one whom she considered to be greater than herself throughout her purusharthi life (the life in which we make spiritual effort); whom will that soul consider great in the end? As her thoughts in the end, what shall be her fate? She will consider Brahma higher. When Brahma himself left his body, will her body survive?
Student: No.
Baba: The question does not arise at all.
Student: My question is not this. Who all become subtle bodied and who all take a separate birth? This was my question.
Baba: Those who take rebirth; only those people, who have obtained advance knowledge and have heard face to face from the Father, can take rebirth.
Student: He will take a separate birth.
Baba: He will certainly take a separate birth. Even if he meets an untimely death, by chance, he will have to take rebirth.

Time: 40.20-41.26
Student: There are a lot of jyotirlings in India. Badrinath, Rameshwar, Kashi, Omkareshwar; all these are said to be jyotirlings. But the ling at Somnath temple is very famous. Why is it so?

Baba: Because it is the first one, isn’t it?
Student: It is the first one. But others also have an equal status, don't they?
Baba: They have been built later on. 2500 years ago, when there was a rule of King Vikramaditya, he worshipped Somnath; so, that was the first temple. It means that all the 12 special Suryavanshi souls, in whose memory, those Shivlings, the jyotirlings were built, made themselves constant in the ling form. So, would they have made themselves constant numberwise or at the same time?
Student: Numberwise.
Baba: So, the one who became constant first of all was named Somnath. Som means moon. And nath means his lord. So, who is the lord of the Moon?
Student: Prajapita.

Time: 41.28-42.19
Student: Baba, pure souls come in the Copper Age and take the support of a sinful body. Pure souls come, don’t they? They enter here in a sinful body. They enjoy only happiness.

Baba: In the first birth.
Student: In the first birth, when that bodily being experiences sorrow, does that pure soul (which comes from above) remain in the body or leave the body…..
Baba: When he (i.e. the soul who owns the body) is experiencing sorrow, where is the need for him (the soul which has come from above) to remain (in that body); it can leave whenever it wishes.
Student: It can go out.
Baba: Yes. When Christ was crucified, when he was put on the cross, did Jesus experience sorrow or did Christ, who entered (from above), experience sorrow?
Student: Jesus.
Baba: Jesus.
Student: It means that at that time the soul of Christ runs away from the body.
Baba: It goes out. (It tells the soul in whose body it entered) My karmic account with you is like this. You, suffer......................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 09 Jun 2010

वार्तालाप नं.476, मैसूर, दिनांक 31.12.07
उद्धरण-भाग-६


समय: 42.20-45.00
जिज्ञासु- बाबा, इस धरती पर जो चीज है। हम सब देख रहे हैं। तो आपने बताया- इन आँखों से हम जो देखते हैं वो सब खतम हो जाएगा।

बाबा- सब खलास हो जाएगा।
जिज्ञासु- मगर बचेगा क्‍या?
बाबा- बचेगा क्‍या। आत्‍मा। अविनाशी आत्‍मायें बचेंगी।
जिज्ञासु- अविनाशी आत्‍मायें बचती हैं। वो कहाँ रहेंगी? सब खतम हो जाता है ना।
बाबा- बर्फ में जाम हो जायेंगी।
जिज्ञासु- बर्फ के बाद?
बाबा- बर्फ के बाद बर्फ पानी बन जाएगा हम निकल आयेंगे।
जिज्ञासु- हम आते हैं। मगर ये सब खतम हो जाता है ना। ये पेड़, ये घर, ये सब।
बाबा- हाँ। जो अणु जहाँ से साईकल लगाना शुरू किया है। वो 5000 वर्ष का अणु साईकल लगाकरके फिर वहीं जाएगा। अणु-अणु। आत्‍मा भी अणु है। आत्‍मा जहाँ से साईकल लगाना शुरू किया। इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर जहाँ से आई फिर वहाँ चक्‍कर लगाकरके वहीं उस मंच पर पहुँच करके फिर परमधाम वापस जाएगी। हर चीज का साईकल है।
जिज्ञासु- सब खतम होने के बाद हम कहाँ होते है?
बाबा- जो अविनाशी आत्‍मायें हैं। वो अविनाशी आत्‍माओं के शरीर भी अविनाशी हो जावेंगे; लेकिन तत्‍व बदल जायेंगे उनके। बर्फ में रखने के कारण। जैसे कोई साँप काट लेता है और साँप का विष पूरा चढ़ जाता है। शरीर नीला पड़ जाता है। तो जो साँप के काटे को सुधार देते हैं वो कहाँ रख देते हैं उसे। बर्फ में रख देते हैं या नदी की धारा के बीच ले जाकर रख देते हैं । धुलते धुलते धुलते धुलते कोई जिंदा भी हो जाता है। अभी अखबारों में निकाला था। कि कोई युगल जोड़ा निकल पड़ा बर्फ में से। कई जन्‍म पीछे की बात बताई कि ऐसे-2 हुआ। माना बर्फ में शरीर सुरक्षित रहते हैं।
जिज्ञासु- बर्फ में कितने लोग जाते हैं?
बाबा- जो शालिग्राम बनाए जाते हैं। रूद्रयज्ञ रचते हैं, शालिग्राम बनाते हैं तो ज्यादा से ज्‍यादा कितने शालिग्राम बनाते होंगे?
जिज्ञासु- लाख, दो लाख।
बाबा- इससे ज्‍यादा नहीं बनाते। सूर्यवंशी और चंद्रवंशी बस।
जिज्ञासु- और 2½ लाख शरीर छोड़ देंगे।
बाबा- वो तो दूसरे धर्म में कनवर्ट होने वाले बीज हैं ना। जो दूसरे धर्म के बीज हैं उनको तो फिर जाना ही जाना है।

समय:45.05-46.40
जिज्ञासु- बाबा, अशोक चक्र में 24 लाईन्‍स दिखाते हैं ना। भारत के झंडे में भी है। उनमें से 12 सूर्यवंशी है और 12 चंद्रवंशी है। वो चंद्रवंशी कौनसी माला वाले हैं रूद्रमाला वाले हैं या विजयमाला वाले?

बाबा- सूर्यवंशी और चंद्रवंशी। जो सूर्यवंशी 12 हैं वो अशोक चक्र में दिखाए गए हैं। और चंद्रवंशी अशोक चक्र में दिखाए गए हैं। 24 दिखाए हैं ।
जिज्ञासु- 24
बाबा- अच्‍छा। जो 24 दिखाए गए हैं वो 24 अवतारों में से तो नहीं हैं? अवतार कितने माने जाते हैं? 24 अवतार माने जाते हैं। 24 अवतार जो माने गए हैं उनमें 12 तो हो गए सूर्यवंशी और 12 हो गए चंद्रवंशी। तो चंद्रवंशी, सूर्यवंशी ठेठ सूर्यवंशी, चंद्रवंशियों की बात है या रूद्रमाला में ही सूर्यवंशी, चंद्रवंशी हैं?
जिज्ञासु- रूद्रमाला में भी है ।
बाबा- रूद्रमाला में ही थेट सूर्यवंशी भी हैं और ठेठ चंद्रवंशी जो हैं वो भी रूद्रमाला में हैं।
जिज्ञासु- हाँ जी। जगतम्‍बा। तो उन्‍हीं को दिखाया है।
बाबा- उन्‍हीं को दिखाया है। चक्र घूमता रहता है।

समय:46.45-47.44
जिज्ञासु- बाबा, संस्‍कृत भाषा कब से शुरू हुई? उसकी शुरूवात कब से हुई?

बाबा- संस्‍कृत माना सुधारी हुई।
जिज्ञासु- वो द्वापर के आदि में हुई....
बाबा- द्वापर के आदि में माना त्रेता के अंत में भाषा होती ही नहीं है इतनी। इशारे की भाषा होती है। क्‍या? इशारे की भाषा होती है। उनकी आत्‍मा ही इतनी तीव्र गति वाली होती है, एकाग्र होती है। कि थोड़ा सा इशारा किया दूसरे ने समझ लिया। और यहाँ? यहाँ तो हम कोई को इशारे करें दूसरा दूसरा समझ ले‍ता है। क्‍योंकि आत्‍मा-2 से मेल ही नहीं खा रही है। कभी ऐसे होता है ना? कोई आदमी कुछ बात कहता है दूसरा आदमी उसका दूसरा अर्थ लगा लेता है। बाबा बोलते हैं। बाबा की बात का एक अर्थ ज्‍यों‍ का त्‍यों समझ लेता है। और दूसरे उस अर्थ को समझ ही नहीं पा रहे। ऐसा क्‍यों होता है?
जिज्ञासु- देहअभिमान।
बाबा- हाँ।

Disc.CD No.476, dated 31.12.07 at Mysore
Extracts-Part-6


Time: 42.20-45.00
Student: Baba, we all see whatever things are present on this Earth. So, you said that whatever we see through these eyes will perish.

Baba: Everything will perish.
Student: But what will survive?
Baba: What will survive? The soul. The imperishable souls will survive.
Student: The imperishable souls survive. Where will they live? Everything perishes, doesn’t it?
Baba: They will freeze in ice.
Student: After ice?
Baba: After the stage of ice, the ice will melt and we will come out.
Student: We come (out). But all this perishes, doesn’t it? These trees, these houses, all these.
Baba: Yes. From whichever point an atom starts its cycle; the atom will go to the same place after passing through the cycle of 5000 years. Every atom. A soul is also an atom. From whichever point a soul started its cycle, from whichever point it came on this world stage, it will pass through the cycle and return to the same stage and then go back to the Supreme Abode. Everything has a cycle.
Student: Where will we live after everything perishes?
Baba: The bodies of those imperishable souls will also become imperishable, but their elements will change because of being kept in ice. For example, if someone is bitten by a snake and if the snake’s poison spreads (all over the body), the body turns blue; so, where do those who treat snake-bite cases, keep the body? They keep it in the body or else they keep it in the middle of a river’s stream? Some people come back to life after being washed repeatedly (in the river stream). Recently it was published in the newspapers that a couple emerged from ice. They spoke about their experiences many births ago. It means that the bodies remain safe in ice.
Student: How many people are buried under ice?
Baba: Shaligrams are prepared. When a Rudra Yagya is organized, shaligrams are prepared. So, at the most how many shaligrams are prepared?
Student: A lakh or two.
Baba: Not more than that. Suryavanshi and Chandravanshi. That is all.
Student: And two and a half lakh will leave their bodies.
Baba: So, they are seeds, who are converted to other religions, don’t they? Those who are seeds of other religions have to definitely go.

Time: 45.05-46.40
Student: Baba, 24 lines are shown in the Ashok Chakra, aren't they? They are shown in India's flag as well. Among them 12 are Suryavanshis and 12 are Chandravanshis. Do those Chandravanshis belong to the Rudramala or to the Vijaymala?

Baba: Suryavanshis and Chandravanshis. The 12 Suryavanshi have been shown in the Ashok Chakra. And Chandravanshis have been shown in the Ashok Chakra. 24 have been shown?
Student: 24.
Baba: OK. Are those 24 not the same as the 24 incarnations? How many incarnations are there believed to be? There are believed to be 24 incarnations. Among the 24 incarnations 12 are Suryavanshis and 12 are Chandravanshis. So, as regards the Chandravanshis and Suryavanshis, is it about the actual Suryavanshis and Chandravanshis or are the Suryavanshis and Chandravanshis in the Rudramala itself?
Student: It is also in the Rudramala.
Baba: In the Rudramala itself there are actual Suryavanshis and the actual Chandravanshis are also in the Rudramala itself.
Student: Yes. Jagadamba. So, they have been shown.
Baba: They have been shown. The cycle keeps revolving.

Time: 46.45-47.44
Student: Baba, when did Sanskrit language begin? When did it start?

Baba: Sanskrit means refined.
Student: In the beginning of the Copper Age…..
Baba: In the beginning of the Copper Age, i.e. in the end of the Silver Age there is not much language. There is a language of signs. What? There is a language of signs. Their soul is so dynamic, so concentrated that the other person understands just by gestures. And here? Here, if we make a gesture to someone the other person interprets it in a different way because one soul does not match with the other. Sometimes it happens like this, doesn’t it? One person says something; the other person interprets it in a different way. Baba speaks. One person understands the meaning of Baba’s versions as it is. And others are not able to understand that meaning at all. Why does it happen?
Student: Body consciousness.
Baba: Yes.
.....................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 10 Jun 2010

वार्तालाप नं.476, मैसूर, दिनांक 31.12.07
उद्धरण-भाग-7


समय:47.45-48.22
जिज्ञासु- बाबा, जैसे हम शरीर छोड़ते हैं ना। शरीर छोड़ने से पहले हमको अनुभव होता है क्याञ?

बाबा- सबको अनुभव नहीं होता। जो देवतायें होते हैं। देवात्मायें होते हैं शरीर छोड़ते हैं तो उनको अनुभव हो जाता है। मैं ऐसे-2 जाकर जन्मं लूँगा, ये शरीर छोड़ना है। यहाँ भी ऐसे होते हैं कोई-कोई का, पहले से उनको पता चल जाता है और बोल भी देते हैं। कि हमें ये शरीर छोड़ना है। छोड़ देते हैं। ये आत्मा की स्टेज की बात है।

समय: 48.25-50.00
जिज्ञासु- बाबा, जिन आत्माओं ने ब्रह्मा को फॉलो किया है। वो अलग जन्म नहीं लेते हैं अगर अचानक मर जाते हैं।

बाबा- हाँ।
जिज्ञासु- वो अलग जन्म लेते हैं।
बाबा- अलग जन्म माना शरीर से जन्म नहीं मिलता उनको।
जिज्ञासु- एक एक्जाम्पल- एक बी.के है वो ब्रह्मा को फॉलो कर रहे थे। अभी मर जाएगा वो सूक्ष्मधारी बन जाता है या ...?
बाबा- हाँ, सूक्ष्म शरीरधारी बनता है।
जिज्ञासु- वो अलग जन्म नहीं लेता है अब। अभी टाईम है। तो अलग जन्म। लेने का...।
बाबा- नहीं। क्योंकि उसे निश्चलय ही वहाँ पर है बेसिक नालेज में। उससे ऊँच ते ऊँच जो भगवान हैं। वो उनका कहाँ तक है? ब्रह्मा। ब्रह्मा ऊँच ते ऊँच भगवान उनका है। उन्हें पता ही नहीं कि इससे भी ऊँचा कोई भगवान का स्वरूप है। ऐसे ही दूसरे धर्मों में भी हैं। जो क्राइस्ट को ही भगवान माने बैठे हैं। क्राइस्ट को ही ऊँच ते ऊँच माने बैठे हैं। वो क्राइस्ट तक ही सीमित रहेंगे। जिज्ञासु- और लौकिक के लोग ज्ञान में नहीं आए हैं। वो मरते हैं तो जन्म लेते हैं या नहीं। बाबा- उनकी तो बात ही मत पूछो। वो तो जन्म-मरण का चक्र उनका चल ही रहा है। उनका तो जन्म-मरण का चक्र चल ही रहा है। जो ज्ञान ले चुके हैं भगवान को जिन्हों ने बेसिकली और एडवांस के तरीके से पहचाना है उनकी बात करें। दुनियाँ वालों की तो बात ही नहीं।

समय:51.51-53.12
जिज्ञासु- ये एडवांस आत्मायें कब से माऊण्ट आबू जाना प्रारम्भ होते हैं?

बाबा- जब से सजा खाने की शुरूवात होती है।
जिज्ञासु - सन बताइए बाबा।
बाबा- ऐसे नहीं। हर चीज स्पष्ट थोड़े ही ...। आखरीन सजा खाने की शुरूवात किससे होगी? कौनसे नंबर मणके से सजा खाने की शुरूवात होगी? नौवां नंबर।
जिज्ञासु - नौवां मणका।
बाबा- नौवां मणका है। नौवां मणका है सजा खाना शुरू करेगी। तो नौवां मणका वो माऊण्ट में जाकर सजा खाएगा या इस दुनियाँ में सजा खाएगा? इसी दुनियाँ में सजा खाएगा। सद्गुरू निंदक ठौर न पावे। कैसा ठौर? जहाँ सजा खानी पड़े? कौनसे ठौर का गायन है? ठौर माना स्थान। ऐसे ठौर का गायन है जहाँ सजा खानी पड़े? सद्गुरू की जो निंदा कराते हैं। वो सद्गुरू ने जो ठौर बनाया वो ठौर नहीं प्राप्त कर सकते। तो कहाँ जायेंगे? ऐसी विनाशी दुनियाँ में जायेंगे जहाँ उनको सजायें खानी पड़े। वहाँ जाकर सेवा करेंगे। तब उनके पाप भस्म होते हैं।

समय: 59.15-1.00.05
जिज्ञासु- ये बोल रहा है। वो याद कर रहा है वो याद बाप को टच करता है या नहीं?

बाबा- जो बहुत याद करें...। अभी तो बोला जो बहुत याद करते हैं जिनकी अडोल याद होती है। वो याद टच करती है। याद से याद मिलती है। अरे! टेलीफोन का कनेक्शन भिड़ाया और बीच में कहीं डिस्टर्ब हो गया। तो कनेक्शन जुड़ेगा?
जिज्ञासु- नहीं जुड़ेगा।
बाबा- ये भी कनेक्श़न है। कनेक्श्न एकाग्र होगा। क्या? तो याद से याद मिलेगी। अभी हम इधर याद कर रहें हैं। और इधर कोई दूसरा इंटरफियर कर गया ऊंगली लगाके। याद डिस्टर्ब हो गई। तो याद से याद कैसे मिलेगी? अडोल याद होनी चाहिए।

समय:01.00.09-01.00.50
जिज्ञासु- बाबा, ये बीजरूप आत्मानओं में भी कनवर्ट हो जाते हैं क्याो?

बाबा- बीज एक तरह के हैं क्या ? बीज अनेक प्रकार के हैं कि एक प्रकार के हैं?
जिज्ञासु- अनेक प्रकार के।
बाबा- अनेक प्रकार के हैं तो कोई का मोटा छिल्का, कोई का बहुत महीन छिल्का। जो मोटा छिल्का वाले हैं वो देर में अपना छिल्का उतार पाते हैं देहभान का। जो महीन छिल्के वाले हैं उनका छिल्का जल्दी उतार जाता है। जिनका जल्दीक छिल्का उतर जाता है वो श्रेष्ठ हैं। जिनका देहभान का छिल्का बाद में उतरता है वो निकृष्ठ हैं।

समय:01.00.52-01.01.35
जिज्ञासु- बाबा, अंत में करोड़ों आत्माव सतोप्रधान बनता है। आटोमेटिकली वायब्रेशन से सभी जीव जंतु भी सतोप्रधान बनता है। मगर हम सब याद करने के बाद सतोप्रधान बनते हैं। धर्मराज की शिक्षा अनुभव करने के बाद सतोप्रधान बनते हैं। मगर वो प्राणी, जंतु किसी की शिक्षा अनुभव करके सतोप्रधान नहीं बनते हैं।

बाबा- बात ये है कि ज्यादा पाप मनुष्य करता है या दूसरे जीव-जंतु पाप ज्यादा करते हैं।
जिज्ञासु- मनुष्य।
बाबा- याद भी तो ज्यादा करना पड़े।

Disc.CD No.476, dated 31.12.07 at Mysore
Extracts-Part-7


Time: 47.45-48.22
Student: Baba, for example we leave the body, don’t we? Before leaving the body, do we have any experience (that we are going to leave the body)?

Baba: Everyone does not experience it. Those who are deities, those who are deity souls, when they leave their bodies, they experience: I will go and be born like this; I have to leave this body. Even here, there are people, there are some people who know beforehand and even tell [others] about it, ‘I have to leave this body’. They leave it. It is about the stage of the soul.

Time: 48.25-50.00
Student: Baba, the souls which have followed Brahma do not take a separate birth if they die suddenly.

Baba: Yes.
Student: They take a different birth.
Baba: Different birth means that they do not take a physical birth.
Student: For example – Suppose there is a BK and he follows Brahma. If he dies now, does he take on a subtle body or….?
Baba: Yes, he takes on a subtle body.
Student: He does not take a separate birth now. Now it is the time. So, taking a separate birth….
Baba: No because he has faith only there in the basic knowledge. For them who is the highest God? Brahma. Brahma is their highest God. They do not at all know that there is a form of God higher than this one. Similar is the case with other religions. Those who consider Christ to be God, those who consider Christ to be the highest among all will be limited to Christ only.
Student: And worldly people have not entered the path of knowledge. When they die, do they take birth or not?
Baba: Their question does not arise at all. They are anyway passing through the cycle of birth and death. They are definitely passing through the cycle of birth and death. Talk about those who have obtained knowledge, those who have recognized God basically and through advance knowledge. There is no question of the people of the world.

Time: 51.51-53.12
Student: When do these advance (party) souls start going to Mount Abu?

Baba: From the time when they start suffering punishments.
Student : tell me the year Baba.
Baba: No. Not everything is said clearly….. Ultimately, from whom will the suffering begin? From which number bead the punishments begin? From the ninth [bead].
Student:Ninth bead.
Baba: The ninth bead. The ninth bead will start suffering punishments. So, will the ninth bead go to Mt. Abu and suffer punishments or will it suffer punishments in this world? It will suffer punishments in this world itself. The one who defames the sadguru will not find the destination. What kind of destination? Is it the destination where it suffers punishments? Which destination is famous? Destination means place. Is any place for punishments famous? Those who cause defamation of the sadguru, they cannot reach the destination which the sadguru has fixed. So, where will they go? They will go to such a perishable world where they have to suffer punishments. They will go there and serve. Then their sins are burnt.

Time: 59.15-01.00.05
Student: This brother is telling that if he remembers (the Father), do those thoughts touch the Father or not?

Baba: The one who remembers a lot.....Just now you were told that those who remember (Baba) a lot, those whose remembrance is unshakeable, that remembrance touches (Baba). Thoughts meet thoughts. Arey! If you connect the telephone and if it is disturbed somewhere in between, then will the connection work?
Student: It will not.
Baba: This is also a connection. (If) The connection is focused. What? Then, the thoughts will meet thoughts. Now, here, we are remembering. And if someone else interferes, pokes his finger, the remembrance is disturbed; so how the thoughts will meet thoughts? The remembrance should be unshakeable.

Time: 01.00.09-01.00.50
Student: Baba, do the seed-form souls also convert?

Baba: Are the seeds only of one kind? Are the seeds of different kinds or of one kind?
Student: Of different kinds.
Baba: They are of different kinds. So, some have a thick peel and some have a very thin peel. So, those who have a thick peel are able to shed their peel of body consciousness late. Those who have a thin peel shed their peel easily. Those who are able to shed their peel easily are righteous. Those, whose peel of body consciousness is removed late, are degraded.

Time: 01.00.52-01.01.35
Student: Baba, in the end millions of souls become pure. Through their vibrations, all the living beings become pure automatically. But we all become pure through remembrance. We become pure after suffering the punishments of Dharmaraj. But those living beings do not become pure after suffering punishments.

Baba: The main issue is does a human being commit more sins or do other living beings commit more sins?
Student: The human beings.
Baba: So, it is they who will have to remember more. (concluded)
.....................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 20 Jun 2010

वार्तालाप नं.470, कलकत्ता-2, दिनांक 25.12.07
उद्धरण-भाग-१


समयः 01.10-04.36
जिज्ञासुः - 234 नं. की कैसेट वार्तालाप में बोला है कि आज के समय में कोई भी कन्‍या को पुरूष के आधीन में रहना चाहिए।

बाबा - पुरूष के आधीन में रहे, माता के आधीन रहे। माना अगर तलवार है, कन्‍या है तो उसको कम से कम कोई ढ़ाल के आधीन में रहना ही चाहिए। ऐसे नहीं कि स्‍वंतत्र रहे।
जिज्ञासु - पुरूष को दुर्योधन-दु:शासन कहा गया है।
बाबा - हमने कहाँ कहा कि पुरूष के ही आधीन में ही रहना चाहिए, हमने कहा क्‍या?
जिज्ञासु- कन्‍या अगर किसी ए‍क पुरूष के आधीन न रहे तो दुनियाँ उसको वैश्‍या बना देगा वो पुरूषों के संग में आ जायेगा। इसलिए उसको एक पुरूष के अण्‍डर में रहना चाहिए।

बाबा- मूल प्‍वाइन्‍ट निकलता हैं इस वाक्‍य से कि कन्‍या को या माँ-बाप के पास रहना है या तो पति के पास रहना है। आज की इस भ्रष्‍ट दुनियाँ में कन्‍याओं का कोई भी दोस्त नहीं है इनके अलावा। सब दुश्मन बन पड़ते हैं। बाप बच्‍ची को गंदा करता है। बोला कि नहीं महावाक्‍य में? भाई बहन को गंदा करता है, जीजा साली को गंदा करता है, चाचा भतीजी को गंदा करता है। माना कोई पुरूष तन जो है कन्‍या को छोड़ता ही नहीं है सब कन्‍याओं के दुश्‍मन बन पड़ते है। ये मुरली में बोला है या नहीं बोला हैं? बोला है। इस आधार पर बोला।

जिज्ञासु - बाबा, 240 कैसेट ... में सुना कि कन्‍या सबसे ज्‍यादा स्‍वतंत्र रह सकती है । जहाँ चाहे जा सकती है। वो कैसे बाबा?
बाबा – क्‍या ऐसी कन्‍यायें नहीं है आज दुनियाँ में जो किसी पुरूष के कन्‍ट्रोल में नहीं है? ऐसी भी कन्‍यायें दुनियाँ में देख रहे हैं कि नहीं जो किसी पुरूष के कन्‍ट्रोल में नहीं है और अपने लौकिक माँ-बाप के भी कन्‍ट्रोल में नहीं है। क्‍योंकि मुरली में बोला है लौकिक संबंधियों से न ही कुछ पूछना हैं और न उनकी मत पर चलना है।
जिज्ञासु- जो इधर-उधर घूमती हैं उसे सुर्पनखा कहते हैं।
बाबा- बाहर की दुनियाँ में अगर घूमती है तो वो इस लिस्‍ट में नहीं हो सकती जो लिस्‍ट अभी बताई गई। हाँ, बाप अगर उनको परमिशन दे दे कि तुम में वो औकात है फिर तुम बाहर की दुनियाँ में जाके अकेले सर्विस कर सकती हो। तो दूसरी बात है।
जिज्ञासु- पर अभी की दुनिया बहुत इनसेक्‍यूर है बाबा ।
बाबा – हाँ जी।

समयः 23.24-28.10
जिज्ञासुः-आज की मुरली में बोला कृष्‍ण वाली आत्‍मा राम के अंदर प्रवेश करती है उसी तरह देवात्‍माओं के अंदर आसुरी स्‍वभाव की आत्‍मा प्रवेश उनमें करते है जो अच्‍छे से योग नहीं करते। तो उल्‍टा-सीधा काम सारा कौन करते हैं वो प्रवेश करने वाली आत्‍मा करती है या हम लोग ब्राह्मण के अंदर करते हैं?

बाबा- आज की दुनियाँ में जो भी प्रवेश करने वाली आत्‍मायें हैं वो सूक्ष्‍म शरीरधारी आत्‍मायें है या आत्मिक स्‍टेज को सीधा धारण करने वाली आत्‍मायें है?
जिज्ञासु – सूक्ष्‍म शरीरधारी आत्‍मा।
बाबा – और सूक्ष्‍म शरीर जो धारण करती है आत्‍मायें जिनके पापकर्म रह जाते हैं वो सूक्ष्‍म शरीर से काम करते हैं या जो महापापी के लिस्ट में नहीं आती हैं वो कही जाती हैं?

जिज्ञासु- जो महापापी के लिस्‍ट में नहीं आती वो सूक्ष्‍म शरीर धारण करती हैं।
बाबा – वो सूक्ष्‍म शरीर धारण करते हैं? नियम ये है - जो बहुत पाप करने के आदी होते हैं उन आत्‍माओं के ऊपर पाप का बोझ जास्‍ती न चढ़ जाये इसलिए उनको बीच में ही शरीर छोड़ना पड़ता है। अकाले मौत होती है। और जिनकी अकाले मौत होती है वो सूक्ष्‍म शरीर धारण करते हैं और सूक्ष्‍म शरीर धारण करके दूसरे के शरीर में प्रवेश करते हैं। तो शरीर से पाप पुण्‍य बनता है या सिर्फ आत्‍मा से पाप पुण्‍य बनता है? शरीर से पाप पुण्‍य बनता है। तो शरीर प्रवेश करने वाली आत्‍मा का है या जिस शरीर में प्रवेश हुआ है उस आत्‍मा का शरीर है? शरीर किसका है?

जिज्ञासु- जिसमें प्रवेश करते हैं।
बाबा -जिसमें प्रवेश हुई आत्‍मा सूक्ष्‍म शरीरधारी उसका अपना शरीर है। तो जिसका अपना शरीर है उस आत्‍मा को, अपने शरीर को, अपने रथ को अपने कन्‍ट्रोल में रखना चाहिए या रथ को दूसरे के कन्‍ट्रोल में दे देना चाहिए? अपने कन्‍ट्रोल में रखना उसका फर्ज़ है लेकिन दूसरे ने आकर के उस रथ को कन्‍ट्रोल कर लिया और अपने तरीके से चलाया तो गलती किसकी हुई? मूल गलती किसकी मानी जायेगी? रथी की गलती मानी जायेगी या जिसने रथ के ऊपर कन्‍ट्रोल कर लिया उसकी गलती मानी जायेगी? जो उस रथ का मालिक हैं वो उस रथ के मालिक बनने योग्‍य नहीं हैं इसलिए उसकी गलती है।
जिज्ञासु – बाबा इतना ज्ञान सुनने के बजाए भी ऐसे-2 कोई होता हैं जो भट्ठी कर के भी आता है।
बाबा - वो भट्ठी में इतना ज्ञान थोड़े ही सुन लेते हैं। भट्ठी करने मे कोई तो बहुत ज्‍यादा ध्‍यान देते हैं, बहुत नियमों का पालन करते हैं, बहुत पवित्र रहते हैं। दृष्टि से भी पवित्र रहते है। भट्ठी करते समय इतना भी ध्‍यान रखते हैं कि कहीं कन्‍या-माताओं में दृष्टि न उलझ जाये। हमारा कोई वायब्रेशन कोई गंदा न हो जाये जिससे ज्ञान सुन रहे हैं। इतना तक ध्‍यान रखते हैं वो ज्‍यादा धारणा करेंगे या जो इन बातों का ध्‍यान नहीं देते कि भट्ठी के क्‍या नियम हैं, उनको ज्‍यादा धारणा हो जायेगी? भट्ठी के भी नियम होते हैं ना। पहला नियम क्‍या है? भट्ठी का पहला नियम क्‍या हैं? पहला नियम हैं मन-वचन-कर्म से पवित्र रहना। ये फाउन्‍डेश्‍न का टाईम हैं। सात दिन के फाउन्‍डेशन के टाईम में अपना-2 याद करें कि हमारी वृत्ति कैसी थी? ब्रहमाकुमारी से या ब्रहमाकुमार से जब हमने ज्ञान सुना संदेश लिया या भट्ठी की तो उसमें हमारी वृत्ति क्‍या थी फाउन्‍डेशन पिरियड में। गंदी वृत्ति तो नहीं थी? अगर उस फाउन्‍डेशन पिरियड में ही गंदी वृत्ति थी तो असुर बनेगा या देवता बनेगा? असुर बनेगा।

Disc.CD No.470, dated 25.12.07 at Calcutta, Part-2
Extracts-Part-1


Time: 01.10-04.36
Student: It has been said in the Discussion Cassette no.234 that in the present time a virgin (kanya) should remain under the control of a man.

Baba: She may remain under the control of a man, she may remain under the control of a mother, i.e. if she is a sword, if she is a virgin, she should remain at least under the protection of a shield (dhaal). It should not happen that she remains independent.
Student: Men have been said to be Duryodhans and Dushasans.
Baba: When did I say that she should remain only under the control of men?
Student: (It has been said that) If a virgin does not remain under the control of a man, then the world will make her a prostitute. She will be influenced by the company of men. This is why she should remain under the control of one man.
Baba: The main point that comes out from this sentence is that a kanya should either live with her parents or with her husband. In today’s unrighteous world except these people nobody is a friend of kanya. Everyone becomes an enemy. A Father makes his daughter dirty – has it not been said so in the Murlis? A brother makes his sister dirty, a brother-in-law makes his sister-in-law dirty, a paternal uncle makes his niece dirty. It means that no male body leaves a kanya alone; everyone becomes an enemy of the kanyas. Has it been said in the Murli or not? It has been said. It was said on this basis. (The student said something).
Student: I have heard in cassette no. 240 that a kanya can become the most independent. She can go wherever she wishes. How is that [possible] Baba?
Baba: Are there not such kanyas in today’s world who are not in any man’s control? Are we not seeing such kanyas in the world who are not in any man’s control and are not in the control of their lokik parents as well? Because it has been said in the Murlis that we should neither consult the lokik relatives nor follow their opinion.
Student: The one who wanders is called Surpankha.
Baba: If she roams in the outside world, then she cannot be included in the list that has been mentioned just now. Yes, if the Father gives her permission, ‘you have the capacity to go and serve alone in the outside world, then it is a different thing’.
Student: But today’s world is very insecure Baba?
Baba: Yes.

Time: 23.24-28.10
Student: It was said in today’s Murli that the soul of Krishna enters (the body of) Ram; similarly, the souls with demoniac nature enter (the bodies of) those deity souls, who do not do Yoga properly. So, who performs the opposite actions; do the souls which enter perform such acts or do we Brahmins perform?

Baba: In today’s world, are the souls which enter, subtle bodied souls or are they souls which assume a soul conscious stage directly?
Student: They are subtle bodied souls.
Baba: And do the souls which take on subtle bodies…, do those souls whose sins remain to be burnt work through subtle body or are they the ones who are not included in the list of the most sinful ones?
Student: Those who are not included in the list of most sinful ones take on a subtle body.
Baba: Do they take on a subtle body? The rule is : those who are more habituated to committing a lot of sins have to leave the body in between so that they do not accumulate more burdens of sins. They meet an untimely death and those who meet an untimely death take on a subtle body and after taking a subtle body they enter the body of others. So, does someone accumulate charity and sins through the body or just through the soul? The charity and sins are accumulated through the body. So, does the body belong to the soul which enters or to the soul in whose body it has entered? Whose body is it?
Student: Of the soul in whose body it enters.
Baba: The body belongs to the soul in which the subtle-bodied soul has entered. So, should the soul to whom the body belongs, keep its body, its Chariot under its control or should it let it go under the control of someone else? It is its duty to keep it under its control, but another soul came and took that Chariot under its control and made it act according to its wishes, so whose mistake is it? Whose mistake is it originally? Will it be considered to be the mistake of the soul to whom the Chariot belongs or is it the mistake of the soul which has taken the Chariot under its control? The owner of the Chariot is not worthy of becoming its owner, this is why it is his mistake.
Student: Baba, despite listening to so much knowledge, there are some who undergo bhatti as well.
Baba: They do not listen to so much knowledge in the bhatti. Some pay a lot of attention during bhatti, they follow the rules meticulously , they remain very pure. They remain pure through the vision as well. While doing bhatti, they pay so much attention that their eyes should not be entangled in kanyas and mothers. They take care that their vibrations should not become dirty towards the person from whom they are listening to knowledge. Will those who pay attention to such an extent inculcate (knowledge) more or do those who do not care for these things what the rules of bhatti are, inculcate more? There are rules of bhatti as well, aren’t there? What is the first rule? What is the first rule of bhatti? The first rule is to remain pure through mind, words and actions. This is the foundation time. We should recollect how our vibrations during the seven days foundation time were. When we heard knowledge, got message from the Brahmakumari or Brahma kumar or when we underwent bhatti, how were our vibrations? Were the vibrations dirty during the foundation period? If the vibrations were dirty during that foundation period itself, then will he become a demon or a deity? He will become a demon........(to be continued)
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Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 21 Jun 2010

वार्तालाप नं.470, कलकत्ता-2, दिनांक 25.12.07
उद्धरण-भाग-2


समयः 43.03-43.30
जिज्ञासुः- बाबा मुरली का प्वाइन्ट है बाबा ने बोला हैं विनाश के टाईम पे एक-2 आत्मा् में चौदह-2 आत्मा प्रवेश करेगी। तो क्या हम ब्राह्मणों बच्चों की ही बात हैं?

बाबा- पहले हर बात ब्राह्मणों से शुरू होती है दुनियाँ की। दुनियाँ में जो भी कर्म हो रहे हैं उन कर्मों के लिए जिम्मेवार कौन? पहले तो ब्राह्मण।

समयः 43.35-45.45
जिज्ञासुः- जो स्त्री चोला है अभी रूद्रमाला के मणके में उनका शरीर रिज्युनेट होगा कि नहीं? चेन्ज होगा कि नहीं?

बाबा- क्यों नहीं रिज्युनेट होगा? उनके संकल्प नहीं चलते हैं? उन्‍होंने जो एडवान्स ज्ञान लिया है उस एडवान्स ज्ञान की धारणा के अनुसार उनके ये संकल्प नहीं है क्या कि हम इस शरीर से ही अपने शरीर को कंचनकाया बनायेंगे? इस शरीर से ऐसा पुरूषार्थ करें जो हमारा शरीर जीवन के रहते-2 ही कंचनकाया बने। उनके अंदर ये धारणा नहीं है? जो भी स्त्री चोले है रूद्रमाला में उनके अंदर भी ये धारणा पक्कीक हैं, वो उनका विश्वास है। विश्वासम् फल दायकम्। ये श्रद्धा विश्वास पक्का है कि हम जीवन रहते हुए ही प्राप्ति करें, शरीर को कंचन बनायें। तो खुदा-न-खास्ता अगर उनका शरीर छूट भी जाता है तो वो अगला जन्म लेंगे या नहीं लेंगे? लेंगे। और अगले शरीर से, अगले जन्म में वो ऐसा पुरूषार्थ करेंगे जिससे उनकी कंचनकाया बनेगी जरूर। तो पुरूष चोला लेंगे या स्त्री चोला लेंगे? पुरूष चोला लेंगे।
जिज्ञासु – उस कैसेट में बोला है कि वो लोग चोला चेन्ज नहीं करेंगे।
बाबा- अगर चोला चेन्जे नहीं करेंगे तो आज की दुनियाँ में बहुत से ऐसे उदाहरण हैं जिनकी पुरूष वृत्ति बन जाती हैं, वायब्रेशन जिनके पुरूषों जैसे बन जाते हैं, स्वैभाव संस्कार पुरूषों जैसे बन जाते हैं तो उनका शरीर भी।
जिज्ञासु – पुरूष बन जाते हैं।
बाबा –हाँ, कनवर्ट हो जाता हैं। पुरूष से स्त्री बन जाते हैं, स्त्रीं से पुरूष बन जाते हैं ये भी कोई बड़ी बात नहीं हैं। और महाभारत में इसका मिसाल भी आया हुआ हैं। क्याब मिसाल आया? शिखंडी का। छोटी-2 कन्याओं के द्वारा बड़े-2 धर्मगुरूओं को बाण मारेंगे।

समयः 58.28-01.01.45
जिज्ञासुः- कोई भी स्त्री पुरूष हो वो दो जन्म ले सकते हैं?

बाबा – कोई भी स्त्री या कोई भी पुरूष लगातर दो जन्म समलिंग में जन्म ले सकता हैं। स्त्री दो जन्मु स्त्री बन सकती है और पुरूष दो जन्म पुरूष बन सकता है। ठीक है।
जिज्ञासु – राम वाली आत्मा के 5-7 जन्मम क्लीयर हो रहे हैं तो ये सारे केवल पुरूष का ही क्लीयर हो रहे हैं?
बाबा –हाँ, तो क्या बड़ी बात हो गई?
जिज्ञासु – स्त्रीं के बारे में तो एक भी क्लीयर नहीं हुआ?
बाबा – पहले पॉवरफुल जन्म् ज्यादा क्लीयर होंगे या कमजोर जन्मल पहले क्ली यर होगा? जो पॉवरफुल जन्म हैं वो पहले क्लीयर होने चाहिए।
जिज्ञासु - तो क्या स्त्रियाँ पॉवरफुल नहीं होती?
बाबा - होती हैं। होती हैं लेकिन वही स्त्रियाँ पॉवरफुल कही जायेंगी जिनमें वो स्व भाव संस्काोर राजाई के ज्याादा हो। राजयोग के संस्कालर जिनमें ज्यावदा होंगे वो स्त्रियाँ भी संसार में प्रत्यवक्ष होती हैं। शक्ति किससे मिलती हैं? ज्ञान से शक्ति मिलती हैं या योग से शक्ति मिलती हैं? योगबल से शक्ति मिलती हैं। संगमयुगी ब्राहमणों की दुनियाँ में जिसमें जितना जास्ती योगबल होगा। इससे साबित होता हैं कि जिसमें योगबल जास्ती होगा उसमे पहचान भी जास्ती होगी। अरे, बाप की पहचान होगी या नहीं होगी उसमें? तो जिसने बाप को जितना जास्तीो पहचाना होगा वो उतना ही ज्याकदा योगी भी होगा और जितना ज्या दा योगी होगा उतना बड़ा राजा भी बनेगा। और रानी बनना ये आधीनता की निशानी हैं या स्वायधीन बनने वाले राजा की निशानी हैं?
जिज्ञासु – आधीनता की निशानी हैं।
बाबा – फिर भी मान लो झाँसी की रानी का जन्म हो गया, हैं ही स्त्री चोला है कि नहीं? तो उस स्त्री चोले का जो जन्म मिला है वो ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनियाँ में ऐसा पुरूषार्थ किया हैं जिससे स्त्री चोले का जन्म मिला हैं या द्वापर-कलियुग में ऐसा कर्म किया हैं जिसके आधार पर राजाई की ताकत होते हुए भी स्त्री चोला मिल गया? द्वापर-कलियुग में ऐसा पुरूषार्थ किया हैं। संगमयुग में बाप जो हैं जिनको राजा बनाता है, वो रानी बनाने के लिए आया हैं या राजा बनाने के लिए आया हैं?
जिज्ञासु – राजा बनाने के लिए आया हैं।
बाबा - झाँसी की रानी भले रानी बने फिर भी बच्चा पैदा करेगी कि नहीं?
जिज्ञासु- करेगी।
बाबा – तो कोई सवारी करेगा या ऐसे ही बच्चा पैदा करेगी?
जिज्ञासु- कोई सवारी करेगा।
बाबा – तो फिर कौन बड़ा हो गया? कौन पॉवरफुल हो गया? उस समय तो पुरूष ही पॉवरफुल हो गया।

Disc.CD No.470, dated 25.12.07 at Calcutta, Part-2
Extracts-Part-2


Time: 43.03-43.30
Student: Baba, there is a Murli point , Baba has said that at the time of destruction, about fourteen souls will enter (the bodies of) every soul. So, is it about us Brahmin children only?

Baba: Everything in the world begins with the Brahmins first. Who is responsible for all the actions that are being performed in the world? First it is the Brahmins.

Time: 43.35-45.45
Student: Will the bodies of the souls with female bodies among the beads of Rudramala be rejuvenated or not? Will they change or not?

Baba: Why will they not be rejuvenated? Do they not have thoughts? According to the practice of the advance knowledge that they have obtained, don’t they think that they will make their body kanchankaya through the same body? Don’t they have this thought in their mind? All the females within the Rudramala also have this firm thought, firm faith. Vishwaasam fal daayakam (faith gives fruits). They have this firm devotion and faith that we should make attainments; we should make the body kanchan while being alive. So, even if by chance they leave their body, will they take the next birth or not? They will. And through the next body, in the next birth, they will make such spiritual efforts that they will certainly achieve kanchankaya. So, will they take a male birth or a female birth? They will take a male birth.Student: It has been said in that cassette that those people will not change their body.
Baba: If they do not change their body, then there are many such examples in today’s world that those who develop a male attitude, those who develop male vibrations, those who develop male nature and sanskars, then their body also….
Student: becomes male.
Baba: Yes, it transforms. They change from male to female, from female to male. This is not a big thing. And its example has been mentioned in Mahabharata as well. What is the example? Shikhandi’s example is mentioned. Arrows will be shot at the big religious gurus through small kanyas (virgins).

Time: 58.28-01.01.45
Student: Can any female or male take two [consecutive] births (as females or males)?

Baba: A female or a male can take two consecutive births in the same gender. A female can become female for two (consecutive) births and a male can become male for two (consecutive) births. That is correct.
Student: 5-7 births of the soul of Ram are becoming clear, but all these are only male births.
Baba: Yes, so what is the big deal?
Student: None of his female births have been clarified.
Baba: Will the powerful births become clear or will the weak births become clear? The powerful births should become clear first.
Student: So, are the women not powerful?
Baba: They are. They are, but only those women will be said to be powerful, who have more nature and sanskars of kingship. Those women who have more sanskars of rajyog are also revealed in the world. Where do they get the power? Do they get the power through knowledge or through Yoga? They get power through Yoga. In the Confluence Age world of Brahmins, the more someone has power of Yoga…, it proves that the one who has more power of Yoga, will recognize (the Father) more. Arey, will he recognize the Father or not? So, the more someone has recognized the Father, he will be more yogi and the more yogi someone is, the bigger king he will become. And becoming a queen is an indication of subordination or of an independent king?
Student: It is an indication of subordination.
Baba: Even so, suppose it is the birth of Queen of Jhansi, is it a female body or not? So, that soul taking a female birth has made such spiritual efforts in the Confluence Age world of Brahmins because of which it has a female birth or has it performed such actions in the Copper Age and Iron Age due to which it has a female birth despite having the power of kingship? It has made such spiritual efforts in the Copper Age and Iron Age. Does the Father come to make us kings or queens in the Confluence Age?
Student: He has come to make us kings.
Baba: The Queen of Jhansi may be a queen but will she give birth to a child or not?
Student: She will.
Baba: So, will someone ride on her or will she simply give birth?
Student: Someone will ride (on her).
Baba: So, who is greater? Who is more powerful? At that time the male (i.e. her husband) himself was powerful ........(to be continued)
.....................................................................................................................
Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 22 Jun 2010

वार्तालाप नं.470, कलकत्ता-2, दिनांक 25.12.07
उद्धरण-भाग-३


समयः 01.01.50-01.08.18
जिज्ञासु - प्रशांत महासागर का बेहद का अर्थ क्‍या हैं?

बाबा - सागर हैं सात। कितने सागर माने जाते हैं? सात। और महाद्वीप। महाद्वीप कितने हैं? वो भी सात ही हैं। सागरों में सबसे बड़े सागर का नाम हैं प्रशांत महासागर। ‘प्र’ माना प्रकष्ठ रूप से और ‘शांत’ माना शांत रहने वाला सागर। क्‍या? सागर हैं, ज्ञान का सागर तो है लेकिन उस ज्ञान सागर में सबसे बड़ी स्‍टेज क्‍या हैं? शांत रहने की। और शांत जो उथला होगा माना गहरा कम होगा वो ज्‍यादा शांत रहेगा या जो ज्‍यादा गहरा होगा वो ज्‍यादा शांत रहेगा? जो ज्‍यादा गहरा होगा वो ज्‍यादा शांत होगा। इसलिए प्रशांत महासागर जो है वो सागर है या पृथ्‍वी कही जाती है? सागर ज्ञान सागर बाप कहा जाता हैं या महाद्वीप पृथ्‍वी का अंश माता कहा जाता है या पिता कहा जाता हैं? पृथ्‍वी का द्वीप। पृथ्‍वी का कोई बड़ा हिस्‍सा है जो महाद्वीप कहा जाता है वो माँ है या बाप है?
जिज्ञासु – बाप है।
बाबा – चल। क्‍या बोल रहे हो? जो द्वीप है वो धरनी का हिस्‍सा है। वो धरनी माता है उनमें देह अभिमान की मिट्टी ज्‍यादा है और सागर में ज्ञान जल ज्‍यादा हैं। तो जो ज्ञान जल वाले ज्‍यादा हैं वो है सागर उन सागरों में सबसे बड़ा सागर हैं प्रशांत महासागर। बहुत शांत रहने वाला‍ हैं। उससे पैदा होने वाला बच्‍चा कौन हैं? चंद्रमा उसका बच्‍चा है। वो चंद्रमा बच्‍चा सतयुग-त्रेता में कहाँ समा जायेगा?
जिज्ञासु – प्रशांत महासागर।
बाबा – समा जायेगा। तो वो सागर है, बहुत गहरा है। धरनी ज्‍यादा गहरी होती है या सागर गहरा होता है? सागर गहरा होता है। तो जितने भी सागर हैं माने वो मानिंद हैं जैसे कि विधर्मि धर्मपिताओं के। छोटे-2 सागर और वो बड़ा सागर है। उसको कहा जाता हैं प्रशांत महासागर।
जिज्ञासु – बाबा ये चंद्रमा विनाश के टाईम में प्रशांत महासागर में समा जायेगा फिर ऊपर में कब जायेगा अर्धविनाश के टाईम में?
बाबा – जब विनाश होता हैं तो टकराहट होती है या नहीं होती है? टकराहट होती है और टकराहट में टुकड़े-2 होते हैं कि नहीं होते हैं? टुकड़े भी हो जाते हैं।
जिज्ञासु – विनाश के टाईम में सभी ग्रह टकरायेंगे तो यहाँ पर कैसे शूटिंग होगा?
बाबा – जो भी अष्‍टदेव हैं या जो भी अष्‍टग्रह हैं या जो भी अष्‍टरत्‍न हैं वो सब आपस में टकराते हैं।
जिज्ञासु- ज्ञान से टकरायेंगे?
बाबा – और क्‍या तीर तलवार से टकराते हैं?
जिज्ञासु – टकराहट होती है तो द्वापरयुग में होगा तो चंद्रमा निकल जायेगा कहाँ किसके साथ टकराहट होती हैं?
बाबा – आधा विनाश होता हैं तो आधी टकराहट होती हैं।
जिज्ञासु – किसके साथ?
बाबा – विधर्मियों के साथ।
जिज्ञासु- स्‍थूल में?
बाबा – वो हद में सारी में टकराहट होती है। जो देवत्‍मायें हैं जो देवत्‍माओं के संस्‍कार हैं उनके संस्‍कारों से किस से टकराहट होगी? आसुरी आत्‍माओं के साथ संस्‍कार की टकराहट होती हैं।
जिज्ञासु- वो तो सूक्ष्‍म में हैं?
बाबा –वो सूक्ष्‍म में क्‍यों? प्रैक्टिकल में अभी टकराहट नहीं होगी? बाबा ने वाणी में बोला हुआ हैं जब द्वापर शुरू होता हैं भारत में तो पहले-2 जो दूसरे धर्म की आत्‍माये हैं वो विरोधी हो जाती हैं। इस्‍लाम धर्म की जब आत्‍मायें होंगी तो दो खंड हो जायेंगे। धर्मखंड ही दो हो जायेंगे। राज्‍य खंड ही दो हो जाते हैं। उसको कहते हैं द्वापुरयुग। दो पुर क्‍यों कहा गया? कि दुनियाँ में दो धर्म हो गये, दो प्रकार की धारणायें हो गई। एक धारणा कहती हैं नहीं, दृष्टि का व्‍याभिचार नहीं होना चाहिए, कर्मेन्द्रियों का व्‍याभिचार नहीं होना चाहिए। और दूसरे जो भी दूसरे धर्म में कनवर्ट होने वाले हैं या दूसरे धर्म वाले हैं उनकी धारणा होती है - नहीं व्‍याभिचार जरूर होना चाहिए नहीं तो हम सुखी कैसे रहेंगे? वो देवताई सृष्टि को नहीं मानेंगे।
जिज्ञासु – तब से चंद्रमा निकल जाता है तब से चंद्रमा पृथ्‍वी से प्रशांत महासागर बन जाता हैं।
बाबा - अर्धविनाश होता है तो उसमें अलग हो जाता है।
(जिज्ञासु ने कुछ कहा)-
बाबा – हाँ जी।

Disc.CD No.470, dated 25.12.07 at Calcutta, Part-2
Extracts-Part-3


Time: 01.01.50-01.08.18
Student: What is meant by Prashaant Mahasagar (Pacific Ocean) in an unlimited sense?

Baba: There are seven oceans. How many oceans are there believed to be? Seven. And continents? How many continents there are ? They are also seven. The name of the biggest ocean is the Pacific ocean (Prashaant Mahasagar). Pra means prakashth roop se (in best way) and shaant means 'the ocean which remains calm'. What? He is an ocean; He is no doubt an ocean of knowledge, but what is the highest stage of that ocean of knowledge? The stage of remaining calm. And will the one who is shallow be calmer or will the one who is deep be calmer? The one who is deeper will be calmer. This is why, is the Pacific Ocean an ocean or is it called the Earth? Is the ocean of knowledge called a Father or is the part of the Earth, i.e. continent called a mother or a Father? A continent on the Earth. There is a big part of the Earth which is called continent. Is it a mother or a Father?
Student: It is a Father.
Baba: Come on, what are you speaking? The continent is a part of the Earth. It is Mother Earth; it has more soil of body consciousness and the ocean contains more water of knowledge. So, those which contain more water of knowledge are the oceans and among those oceans the biggest ocean is the Pacific Ocean (prashaant mahasaagar). It is the one that remains very calm (shaant). Who is the child born from him? The Moon is its child. Where will that child Moon merge in the Golden Age and Silver Age?
Student: The Pacific Ocean.
Baba: He will merge (in the Pacific Ocean). So, it is an ocean, very deep. Is the land deeper or the ocean deeper? The ocean is deep. So, all the oceans, i.e. they are man made, like the religious fathers. They are small oceans and he is a big ocean. He is called Pacific Ocean.
Student: Baba, this Moon will merge into the Pacific Ocean at the time of destruction, then when will it emerge out? Will it emerge out at the time of semi-destruction?
Baba: When destruction takes place, does collision take place or not? Collision takes place and in that collision, do pieces emerge out or not? Pieces also emerge out.
Student: All the planets will collide at the time of destruction; so how will the shooting take place here?
Baba: The eight deities, the eight planets, or the eight gems clash with each other.
Student: Will they clash on the basis of knowledge?
Baba: If not, do they clash with the help of arrows and swords?
Student: When the clash takes place in the Copper Age, the Moon will come out, how and with whom does the clash take place?
Baba: When semi destruction takes place, semi-clash takes place.
Student: With whom?
Baba: With the vidharmis (those of the religion opposite to the Father’s religion).
Student: In physical form?
Baba: That clash takes place in a limited sense between everyone. The deity souls, with the sanskars of deity souls, their sanskars will clash with whom? The clash takes place with the sanskars of the demoniac souls.
Student: Does it take place in a subtle form?
Baba: Why in a subtle form? Will the clash not take place now in practical? Baba has said in a Vani that when the Copper Age starts in India, first of all the souls belonging to the other religions become opponents. When the souls of Islam come, then the land will be divided into two. There will be two religious lands. There will be division of the kingdom. That is called Dwapuryug (the Copper Age). Why has it been called ‘do pur’? It is because there were two religions in the world; there were two kinds of beliefs (dharanas)? One kind of dharana says , no, there should not be adultery of vision, there should not be adultery of bodily organs. And the other, who convert to other religions or those who belong to the other religions, they believe , no, there should definitely be adultery; otherwise, how will we remain happy? They will not believe in the deity world.
Student: From that time the Moon comes out. When the Moon separates from the Earth, the Pacific Ocean is created.
Baba: When the semi-destruction takes place, then it separates from it.
(Student said something.)
Baba: Yes.
(Concluded)
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 23 Jun 2010

वार्तालाप नं.477, पालकोड (तमिलनाडु), दिनांक 01.01.08
उद्धरण-भाग-१


समय:07.02-09.30
जिज्ञासु- बाबा, भक्ति में रामायण बोलते हैं ना। वो रामायण में रावण तो श्रीलंका में था। वो सीता को हरण करके लेकर गया। तब ये राम का ब्रिज (bridge) बनाया था।

बाबा- हाँ। राम सेतु बनाया।
जिज्ञासु- राम सेतु बनाया। उसका और अभी का...। अभी राम सेतु के बारे में लड़ाई...।
बाबा- अभी यहाँ जो एडवांस ज्ञान चल रहा है। राम की पार्टी के द्वारा और एडवांस पार्टी के द्वारा। वो जो ज्ञान रत्‍नों का पुल है। वो पत्‍थर बुद्धियों का है या पारस बुद्धियों का है? पत्‍थर बुद्धि हैं। उन पत्‍थर बुद्धियों के द्वारा जो ज्ञान है। वो माऊण्‍ट आबू तक पहुँच रहा है कि नहीं? पहुँच रहा है ना। वो राम सेतु हो गया। जो लंका में रावण की लंका कहो, अभी माऊण्‍ट आबू कहो। रावण का देश हो गया ना। उस देश में जो भी एडवांस नालेज पहुँच रही है वो राम सेतु हो गया। तो लंका वाले चाहते हैं? लंका वाले नहीं चाहते। यहाँ भारत की जो मायावी गवर्मेन्‍ट है वो भी नहीं चाहती कि राम सेतु रहे। और राम सम्‍प्रदाय वाले क्‍या चाहते हैं? राम सेतु रहे। जनता पार्टी क्‍या चाहती है? राम सेतु चाहिए या नहीं चाहिए? नहीं चाहिए तो यहाँ तो स्‍वर्ग स्‍थापन ही नहीं होगा। इसीलिए राम सेतु चाहे हद में हो और चाहे बेहद में हो दोनों में एक ही बात है लागू होने वाली। वहाँ भी रामायण में दिखाते हैं कि राम सेतु जब बनाया गया तो दो बंदर थे। उनके हाथ से जो पत्‍थर डाले जाते थे वो तैरने लगते थे डूबते नहीं थे। तो यहाँ दो बंदर कौन हैं? राम और कृष्‍ण। ये राम और कृष्‍ण दो बंदर हैं जिनकी बुद्धि रूपी हाथों से जिन पत्‍थर बुद्धियों को तैराया जाता है ज्ञान जल में। वो ऊपर ही ऊपर रहते हैं डूबते नहीं हैं।

समय:10.36-11.43
जिज्ञासु- रंगेश्‍वर का मीनिंग क्‍या है?

बाबा- रंग। रंग माना ज्ञान का रंग। जो ज्ञान के रंग लगाने वाला ईश्‍वर है। क्‍या? ऐसा ईश्‍वर जो ज्ञान का रंग चढ़ाए देता है। अब रंग एक तरह का होता है या अनेक प्रकार के रंग होते हैं? रंग चढ़ाने वाला रंगेश्‍वर एक ही है। लेकिन रंग अनेक प्रकार के चढ़ जाते हैं। इसीलिए सात रंग माने जाते हैं। मुख्‍य रंग कितने माने जाते हैं? सात रंग होते हैं। तो सात ही नारायण निकलते हैं। क्‍या? सात नारायण निकलते हैं जो रंगीन होते हैं मिजाज के। रंगीन मिजाज होता है तो वो दूसरे-2 धर्मों में कनवर्ट हो जाते हैं। एक रंग ऐसा है जिसको रंगीन नहीं कहेंगे उसको कहेंगे सफेद। इसीलिए जो तीन मूर्तियों का झंडा यादगार बना हुआ है। उसमें बीच का रंग कैसा है? सफेद है।

समय: 12.34-18.18
जिज्ञासु- बाबा, कर्ण है ना वो तो सूर्य का बच्‍चा है। इधर एडवांस में कर्ण कौन है?

बाबा- जो कर्ण है। कर्ण का अर्थ क्‍या होता है? कर्ण माना कान। क्‍या? कर्ण माना कान। कान का काम क्‍या होता है? सुनना। कान से सुना जाता है और कान को सुनाया जाता है। तो यहाँ कौन है कर्ण? ज्ञान की भाषा में जिसने सुनना बहुत किया और सुनाना बहुत किया। वो कौन है कर्ण? लेकिन उसने कौरवों का साथ ज्‍यादा दिया। पांडवों का साथ नहीं दिया। और बहुत पावरफुल था। कौरवों को उसकी पावर के ऊपर नाज़ था। अरे! कर्ण हमारे साथ है। क्‍या? उनको क्‍या नाज़ था, कौरवों को? कर्ण हमारे साथ है हमारी विजय ज़रूर होगी। सूर्य का पुत्र है। किसका पुत्र है? सूर्य का पुत्र है।

और कर्ण एक बात और विशेषता है बहुत दानी था महादानी। उसने जितना दान किया उतना और किसीने दान नहीं किया। तो ये बात बिल्‍कुल क्लियर है कि ब्राह्मणों की दुनियाँ में तन का दान, धन का दान और मन जो लगाया वो दुनियाँ में नहीं लगाया। कहाँ लगाया? ज्ञान में लगाया। भले बुद्धि में नई बात नहीं निकली। लेकिन फिर भी जो भगवान ने सुनाया सो ही सुना। वो ही दूसरों को सुनाया। तो तन से, मन से, धन से, वाचा से सबसे ज्‍यादा दान किया कि नहीं किया? किया। तो वो कर्ण हो गया। अच्‍छा। और पांडव पहले प्रत्‍यक्षता रूपी जन्‍म लेते हैं या कर्ण पहले जन्‍म लेता है?

जिज्ञासु- कर्ण।
बाबा- सूर्य का पुत्र तो है। लेकिन सूर्य का पुत्र कैसा है पहले जन्‍म लेने वाला या बाद मे जन्‍म लेने वाला? पहले जन्‍म लेने वाला। पहले उसकी प्रत्‍यक्षता होती है। तो प्रत्‍यक्ष हो गया। और उस कर्ण की पालना करने वाले कौन हैं?
जिज्ञासु- कौरव।
बाबा- नहीं, नहीं। कौरव नहीं हैं। (जो) पालना करने वाले हैं - वो दास-दासी बनने वाले ज्‍यादा स्‍वभाव के हैं या राजा बनने वाले स्‍वभाव के हैं? जिन्‍होंने भी पालना की है वो विधर्मी हैं या स्‍वधर्मी हैं? विधर्मी हैं। जितने भी विधर्मी दूसरे धर्म में कनवर्ट होने वाले हैं। वो भारत को धोखा देने वाले हैं। जो धोखा देने वाले हैं वो दास-दासी बनेंगे, दास-दासी स्‍वभाव के होंगे या राजा रानी स्‍वभाव के होंगे? दास-दासी स्‍वभाव के होंगे। तो कर्ण की पालना किसने की? दासी पुत्र कहा जाता है- सूतपुत्र। रथ हाँकने वाला। जो रथ चलाता है, कार चलाने वाला होता है, वो सर्वेन्‍ट होता है या कि मालिक होता है?
जिज्ञासु- सर्वेन्‍ट होता है।
बाबा- सर्वेन्‍ट होता है। तो सूतपुत्र था। किसका पुत्र था? सूतपुत्र था। माना दास का पुत्र था। राजा नहीं था। उसको राजाई दी कौरवों ने। दुर्योधन ने कर्ण को अंग देश का राजा बनाया। कौनसे देश का राजा बनाया? अंग देश। ये अंग होते हैं ना। इनका राजा बना दिया। देखो! शास्‍त्रों में कैसे-कैसे शब्‍द यूज़ किए हैं।
जिज्ञासु- अंगराज।
बाबा- अंगराज। अंग देश का राजा। ये अंग जो हैं वो आत्‍मा से कनेक्‍टेड बात है, आत्‍मा से कनेक्‍टेड बात है अंग या देह से कनेक्‍टेड है? देह से कनेक्‍टेड है। माना देहभान अंग देश के राजा में ज्‍यादा होगा या दूसरों में होगा? अंग देश का जो राजा होगा उसमें सबसे ज्‍यादा देहभान होगा।

Disc.CD No.477, dated 01.10.08 at Palakode (Tamilnadu)
Extracts-Part-1


Time: 07.02-09.30
Student: Baba, they recite the Ramayana in Bhakti, don’t they? In that Ramayana, Ravana was in Sri Lanka. He abducted Sita. Then this bridge of Ram was built.

Baba: Yes. The Ram Setu (bridge) was built.
Student: The Ram Setu was built. That one and the present one…. There is a dispute on the Ram Setu now.
Baba: The advance knowledge that is going on now here through Ram’s party and through the Advance Party. That bridge of gems of knowledge, is it of souls with stone-like intellect or of souls with paras -like intellect? They have a stone-like intellect. Is the knowledge reaching Mt. Abu through those souls with a stone-like intellect or not? It is reaching there, isn’t it? That is the ‘Ram Setu ’ (Ram’s bridge). You may call (that place) it Ravan’s Lanka or you may call it Mt. Abu now. It is Ravan’s country, isn’t it? The advance knowledge that is reaching that country is [through] Ram Setu. So, do the Lankans (residents of Lanka) like it? The Lankans don’t like it. Here, the illusive government of India also does not want the Ram Setu to exist. And what does the Ram community want? The Ram Setu should exist. What does the Janata Party want? Is the Ram Setu required or not? If they don’t want it then the heaven will not be established here. This is why whether it is Ram Setu in a limited sense or an unlimited sense, the same is applicable to both. Even in the Ramayana it is shown that when the Ram Setu was built, there were two monkeys. Whatever stones used to be dropped (into the ocean) by them used to float; they did not sink. So, who are the two monkeys here? Ram and Krishna. These Ram and Krishna are two monkeys through whose hand of intellect the souls with stone-like intellect are made to float on the water of knowledge. They keep floating and do not sink.

Time: 10.36-11.43
Student: What is the meaning of Rangeshwar?

Baba: Rang (colour). Rang means the colour of knowledge. Ishwar (God) who applies the colour of knowledge. What? Ishwar, the one who applies the colour of knowledge. Well is there only one colour or are there different kinds of colours? Rangeshwar, the one who applies the colour is only one. But different kinds of colours are applied. This is why there are believed to be seven colours. How many are the main colours ? There are seven colours. So, seven Narayans emerge. What? Seven Narayans, who have a colourful attitude, emerge. They have a colourful attitude; so they convert to other religions. There is one colour which is not called colourful; it is called white. This is why in the memorial of the three personalities, i.e. the flag, which colour is shown in the center? It is white.

Time: 12.34-18.18
Student: Baba, Karna is son of the Sun. Here, in advance (party), who is Karna?

Baba: The one who is Karna; what is meant by Karna? Karna means ears. What? Karna means ears. What is the task of the ears? To listen. We listen through the ears and we say something into the ears. So, who is Karna here? In the language of knowledge, the one who listened a lot and the one who narrated a lot; who is that Karna? But he sided more with the Kauravas. He did not side with the Pandavas. And he was very powerful. Kauravas were very proud of his power. Arey! Karna is with us. What? What were the Kauravas proud of? Karna is with us. We will certainly win. He is the son of the Sun. Whose son is he? He is son of the Sun.

And there is one more specialty of Karna. He was a very great donor (mahaadaani). Nobody donated as much as he. So, it is very clear that nobody in the world donated as much as he donated his body, wealth and mind in the world of Brahmins. Where did he invest? He invested it in knowledge. Although nothing new emerged in the intellect he heard whatever God narrated. He narrated the same to others. So, did he donate the most through body, mind, wealth, words or not? He did. So, he is Karna. OK. And do the Pandavas take the revelation like birth first or does Karna take birth first?

Student: Karna.
Baba: He is no doubt son of the Sun . But what type of a son of the Sun is he? Does he take birth first or does he take birth later? He is the one who takes birth first. First he is revealed. So, he was revealed. And who takes care of that Karna?
Student: Kauravas.
Baba: No, no. It is not the Kauravas. Do those who take care (of Karna) have more sanskars of becoming servants or do they have the nature of becoming kings? All those who have given sustenance (to Karna) , are they vidharmis or swadharmis ? They are vidharmis. All the vidharmis convert to other religions. They deceive Bharat. Will those who deceive become servants, will they have the nature of servants or will they have the nature of kings and queens? They will have the nature of servants. So, who took care of Karna? He is called the son of a servant (daasiputra) , the son of a charioteer (sootputra), the one who drives a Chariot. The one who drives a Chariot, the one who drives a car , is he a servant or a master?
Student: He is a servant.
Baba: He is a servant. So, he was the son of a charioteer. Whose son was he? He was the son of a charioteer. It means that he was the son of a servant. He was not a king. Kauravas gave him kingship. Duryodhan made him the king of a state named Anga. Of which place was he made the king? Anga. These are ang (i.e. organs), aren’t they? He was made the king of these organs. Look! What kind of words have been used in the scriptures?
Student: Angraj (King of Anga , another name of Karna).
Baba: Angraj. King of the country named Anga. Are these organs connected to the soul or to the body? These are connected to the body. It means , will the king of the place Anga have more body consciousness or will others have more body consciousness? The one who is the king of the place Anga will have the most body consciousness. .......(to be continued)
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 24 Jun 2010

वार्तालाप नं.477, पालकोड (तमिलनाडु), दिनांक 01.01.08
उद्धरण-भाग-२


समय:01.00.22-01.02.22
जिज्ञासु- बाबा, दादा लेखराज ने साक्षात्‍कार का डाऊट क्लियर करने के लिए कलकत्‍ता आया बाबा को सुनाने। तभी दो मातायें थी एक गीता माता दूसरी राधा बच्‍ची। वो राधा बच्‍ची कन्‍या है या माता है?

बाबा- दोनों ही मातायें थीं। क्‍या? भारत माता भी थी और जगतम्‍बा भी थी। जगतम्‍बा माना? सभी देशों की अम्‍बा, सभी महाद्वीपों की अम्‍बा या सिर्फ भारत की अम्‍बा? सारे पृथ्‍वी की अम्‍बा। वो सारी पृथ्‍वी जो होती है तो उसमें देवात्‍मायें भी होती हैं और राक्षसी आत्‍मायें भी होती हैं। वो सब की अम्‍बा। और जो दूसरी माता थी वो अम्‍बा तो थी; लेकिन भारत की माता है। माना जो आदि से अंत तक भारतवासी बनके रहे हैं दूसरे धर्म में कनवर्ट नहीं हुए हैं। उनकी माता है भारत माता। जो अव्‍यक्‍त वाणी में पहली अव्‍यक्‍त वाणी में बोला है ना ‘‘भारतमाता शिव शक्ति अवतार अंत का यही नारा है।’’ माता तो है; लेकिन वो भारतमाता है नष्‍ट होने वाली माता है या अविनाशी माता है? भारत अविनाशी देश है, अविनाशी खंड है या विनाशी खंड है?
जिज्ञासु- अविनाशी।
बाबा- अ‍व्‍यभिचारीपने की जहाँ बहुत मान्‍यता है वो अविनाशी खंड है। और जिन विदेशों में व्‍यभिचार को मान्‍यता दे दी। क्‍या? व्‍यभिचार को मान्‍यता दे दी कि ज्‍यादा से ज्‍यादा शा‍दियाँ करो, खूब सुख भोगो, खूब बच्‍चे पैदा करो। तो वो विनाशी हो जाता है। व्‍यभिचार से होता है विनाश। अव्‍यभिचार से होता है स्‍थापना। प्‍योरिटी से होती है स्‍थापना, इमप्‍योरिटी से होता है विनाश।

समय:01.03.36-01.05.23
जिज्ञासु- भारतमाता बोला है तो उसका पति भी होगा। तो वो कौन है?

बाबा- अरे! आए भारत में भगवान। अरे! पति आता है तो किसका आधार लेता है, किसमें आता है? पति है तो किसका आधार लेता है? माता का आधार लेता है ना। आए भारत में भगवान तो किसका आधार लिया? माता का ही आधार लेता है।
जिज्ञासु- राम तो एक पत्नि वाला है। सेवकराम की पत्नि है क्‍या वो? किसकी पत्नि है?
बाबा- वो जो यज्ञ के आदि में दो मातायें थीं। कलियुग के अंत में सब पतित होते हैं कि कोई पावन भी बचता है? सब पतित होते हैं। क्‍या? सब पतित हैं। और ज्‍यादा पतितपना कौनसे देश में है? भारत में। और भारत में भी कौनसा ऐसा शहर है जहाँ ज्‍यादा से ज्‍यादा वेश्या वृत्ति चली है? कलकत्‍ता। महाकाली की पूजा कहाँ होती है? कलकत्‍ता में। महाकाली माँसखोर है या शाकाहारी है?
जिज्ञासु- माँस खाने वाली।
बाबा- दो प्रकार की देवियाँ हैं। एक माँसाहारी और एक शाकाहारी। तो माँसाहारी की पूजा कहाँ होती है? कलकत्‍ता में ही होती है। तो कलकत्‍ता जो है उसमें चाहे ब्रह्मा बाबा हो, चाहे उनका भागीदार हो। भागीदार है तो पतित पने में भी भागीदार है और पावन बनने में भी भागीदार है। तो ये पूछने की बात है क्‍या?

Disc.CD No.477, dated 01.10.08 at Palakode (Tamilnadu)
Extracts-Part-2


Time: 01.00.22-01.02.22
Student: Baba, Dada Lekhraj came to Calcutta to narrate (about his visions) to Baba (i.e. Dada Lekhraj’s partner) to clarify his doubts regarding visions. At that time there were two mothers , one was Gita mata and the other was Radha bachchi. Is that Radha bachchi a virgin or a mother?

Baba: Both were mothers. What? There was Mother India (Bharat Mata) as well as the World Mother (Jagatamba). What is meant by Jagatamba? Mother of all the countries, mother of all the continents or just the mother of India? The mother of entire Earth. In that entire Earth, there are deity souls as well as demoniac souls. She is the mother of everyone. And the other mother was no doubt a mother, but she is the mother of India. It means [the mother of] those who have remained Indians (Bhaaratwasis) since the beginning to the end; those who have not converted to other relgions. Their mother is Mother India, about whom it has been said in the first Avyakt Vani, “Bhaaratmata Shiv Shakti Avtaar anth ka yahi naaraa hai.’ (Mother India is the incarnation of Shiv shakti ; this is the slogan of the end) She is no doubt a mother, but she is Mother India; is she a perishable mother or an imperishable mother? Is India an imperishable county, an imperishable land or a perishable land?
Student: Imperishable.
Baba: The place where people have a lot of faith in purity is an imperishable land. And the foreign countries where adultery has been recognized. What? The place where adultery has been given recognition saying that a person can marry as many times as he wants, enjoy maximum pleasures, give birth to a lot of children; so, that (land) becomes destructible. Adultery leads to destruction. Purity brings about establishment. Purity brings about establishment; impurity brings about destruction.

Time: 01.03.36-01.05.23
Student: When it is said ‘Mother India’, she must have a husband, too. So, who is he?

Baba: Arey! (There is a song) Aaye Bhaarat me Bhagwaan (God comes in Bharat). Arey! When a husband comes, whose support does he take? In whom does He come? If He is the husband, whose support does He take? He takes the support of the mother, does He not? God came in Bharat; so whose support did He take? He takes the support of a mother only.
Student: Ram is monogamous (i.e. has one wife). Is she Sevakram’s wife? Whose wife is she?
Baba: Is it about the two mothers who were at the beginning of the Yagya? In the end of the Iron Age, is everyone sinful or is there anyone pure? Everyone is sinful. What? Everyone is sinful. And in which country is there more sinfulness? In Bharat. And even in Bharat, which city has witnessed maximum prostitution? Calcutta. Where is Mahakali worshipped? In Calcutta. Is Mahakali non-vegetarian or vegetarian?
Student: Non-vegetarian.
Baba: There are two kinds of female deities (devis). One is non-vegetarian (maansahaari) and one is vegetarian (shaakaahari). So, where is the non-vegetarian (devi) worshipped? In Calcutta. So, whether it is Brahma Baba or his partner in Calcutta; if he is a partner, he is a partner in sinfulness as well as in becoming pure. So, is there any need to ask about it? (concluded)
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 01 Jul 2010

वार्तालाप नं.483, मुम्बई, दिनांक 06.01.08
उद्धरण-भाग-1


समय: 00.01-01.40
जिज्ञासु- बाबा, राम की आत्मा. पहले नंबर का ब्राह्मण बनती है, फिर देवता बनती है। तो फिर पहले नंबर का विशियस और शूद्र पहले नंबर में कैसे कहेंगे?

बाबा- नर्क की दुनियाँ मेरी है तो स्वंर्ग की दुनियाँ भी मेरी है। ये किसके लिए बोला? मुरली में जो वाक्य- आया है- स्वर्ग की दुनियाँ मेरी है तो नर्क की दुनियाँ मेरी नहीं है क्या?
जिज्ञासु- बाप के लिए।
बाबा- बाप में सारी दुनियाँ का बीज समाया हुआ है। वो देवताओं का ही बाप नहीं है। किसका बाप है? असुरों का भी बाप है।
जिज्ञासु- बाबा, कहने का मतलब मेरा ये है कि इब्राहिम की आत्मां जो है वो पहला विकार में जाती है तो...
बाबा- वो व्यभिचार में ले जाती है। क्या? व्याभिचार में जाना ज्यादा खराब है या सिर्फ विकार में जाना ज्यादा खराब है? व्यभिचार में जाना वो रावण राज्य लाता है। अनेकों की मत पर चलना ये रावण राज्य बनाता है।

समय:2.15- 3.25
जिज्ञासु- जो जानवर हैं। जानवरों में विवेक शक्ति बहुत कम है। सोचने की, विचारने की शक्ति। तो मनुष्य उसके साथ जो ज्यादा अत्याचार कर रहा है तो जानवरों की आत्मा किस हिसाब से उसका हिसाब-किताब पूरा करेगी?

बाबा- जानवर दुख देने के निमित्त नहीं बन जाते हैं क्या?
जिज्ञासु- बनते तो हैं बाबा। परंतु ये जो छोटे जानवर हैं...
बाबा- छोटे हों या बड़े हों। छोटा-सा कीड़ा होता है, छोटा-सा मच्छर होता है। काट लेता है मलेारिया बुखार हो जाता है। कितनी तकलीफ होती है! इसीलिए जैन धर्म में कहते हैं ‘अहिंसा परमोधर्म’। जीव-जंतुओं की भी हत्या नहीं करनी है। उनमें भी आत्मा है। आत्मा- है या नहीं? आत्मा तो उनमें भी है। और वो है आत्माओं का बाप।

समय: 3.30-7.41
जिज्ञासु- बाबा, जो शंकर-पार्वती में शंकरजी का नाम पहले क्यों आ गया? जैसे लक्ष्मी –नारायण आ गया, सीता-राम आ गया।

बाबा- सीता-राम का जो गायन है वो त्रेता का गायन है भक्तिमार्ग में या ऊँचे ते ऊँचे युग का गायन है?
जिज्ञासु- संगम का गायन है बाबा।
बाबा- वो अधूरे पुरूषार्थ का गायन है या सम्पूार्ण स्टेज का गायन है राम-सीता? अधूरे पुरूषार्थ का गायन है। अधूरे पुरूषार्थ की प्रारब्ध भी सतयुग में मिलती है या त्रेता में मिलती है? त्रेता में मिलती है। जो सम्पन्न पुरूषार्थ है राम वाली आत्मा का। उस सम्पन्न पुरूषार्थ से सुप्रीम सोल प्रत्यक्ष होता है। तो उसे भगवान कहा जाता है। सीता देवी है या भगवान है? देवी है। तो देवियों को देवताओं से आगे रखना होता है। क्योंकि देवताओं की विजय तब ही होती है जब देवियाँ सहयोगी बनती हैं। नहीं तो जो भी देवतायें थे, नर रूप में थे। वो सब दुर्योधन दु:शासन वृत्ति वाले थे। देवियों ने ही हिम्मत की है तो उनकी हिम्मत से वो देवता बन गए। इसीलिए शंकर का नाम पहले है क्यों कि उसमें बाप भगवान प्रवेश है।

सीता में बाप भगवान तो प्रवेश नहीं है लेकिन भगवान का जो आर्डर है फर्स्टल पवित्र बनो। उसको सीता ने फॉलो किया। तो भगवान का जो काम करता है उसका नाम आगे। और जिसने वो काम बादमें किया उसका नाम पीछे। सीता का नाम आगे राम का नाम बाद में। लक्ष्मी का नाम पहले नारायण का नाम बाद में। जो भी देवतायें हैं उसमें स्त्री का आगे कर दिया है। लेकिन जहाँ भगवान की बात आती है। भगवान-भगवती वहाँ शंकर का नाम आगे होता है और पार्वती का नाम पीछे हो जाता है।

जिज्ञासु- बाबा, कई बार गौरी शंकर है ना। उसमें गौरी का नाम पहले है।
बाबा- वो है ही गौरी। जो गौरी है वो गोरी नाम पहले क्यों पड़ा? जहाँ गोरे और काले बनने की बात आती है तो कौन है पहले? गौरी तो 84 जन्मों की गौरी है कि लास्ट जन्म में भी गौरी है या काली है? लास्ट जन्म में भी एक आत्मा का ये पार्ट है कि वो व्यभिचारी कर्मेन्द्रियों से नहीं बनती। इसीलिए गौरी का नाम पवित्रता के आधार पर आगे है। शंकर को तो वैसे भी दिखाया जाता है विष पीते हैं।

समय:12.38-13.55
जिज्ञासु- बाबा, ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और सन्यासी इन तीनों में समानता क्या है और फर्क क्या है?

बाबा- ब्रह्मचारी भी सन्यासी होते हैं उनको पक्का‍ सन्या‍सी कहेंगे। जो घर-गृहस्थ बनाकरके सन्यास करते हैं वो हैं कच्चे सन्यासी हैं। जैसे भीष्म पितामह कैसे सन्यासी कहेंगे? पक्के या कच्चे?
जिज्ञासु- कच्चे।
बाबा- कच्चे सन्यासी भीष्म पितामह? भीष्म पितामह पक्के सन्या‍सी। तो सन्यासियों में और ब्रह्मचारियों में ये अंतर है। और?
जिज्ञासु- वानप्रस्थी ।
बाबा- वानप्रस्थी माना पूरा ही गृहस्थ जीवन बिताए लिया। और जब इन्द्रियाँ ठंडी होने का समय आया तो मजबूरी से वानप्रस्थ ले लिया। तो थर्ड क्लास सन्यासी हुए या फर्स्ट क्लास और सेकण्ड क्लास हुए? थर्ड क्लास हुए।

Disc.CD No.483, dated 06.01.08 at Mumbai
Extracts-Part-1


Time: 00.01-01.40
Student: Baba, Ram’s soul becomes the number one Brahmin; then he becomes a deity. So, how will he be called number one vicious and number one Shudra?

Baba: When the world of hell is mine, the world of heaven is also mine. For whom has this been said? The sentence that has been mentioned in the Murli, ‘when the world of heaven is mine, is the world of hell not mine?’
Student: For the Father.
Baba: The seed of the entire world is in the Father. He is not the Father of just the deities. Whose Father is He? He is the Father of demons as well.
Student: Baba, I mean to say that the soul of Abraham falls into lust first….
Baba: He initiates (others) into adultery. What? Is it worse to fall into adultery or is it worse to just fall into lust? Falling into adultery brings the kingdom of Ravan. Following the opinion of many makes the kingdom of Ravan.

Time: 2.15-3.25
Student: There is very little power of judgment in animals. [There is very little] power to think or ponder. So, when human beings are committing so much atrocity against the animals, how will the souls of animals settle their karmic accounts with them?

Baba: Don’t the animals become instruments in giving sorrow?
Student: They do become Baba. But these small animals…..
Baba: Whether they are small or big. There is a small insect. There is a small mosquito. If it bites, we suffer from malarial fever. We suffers so much. This is why it is said in Jainism – ‘Ahimsa Paramodharm’ (Non-violence is the greatest religion). We should not kill the living organisms too. They also have souls. Do they have souls or not? They have souls, too. And He is the Father of souls.

Time: 3.30-7.41
Student: Baba, why is the name of Shankarji mentioned first in ‘Shankar-Parvati’? For example, there is Lakshmi-Narayan, Sita-Ram.
Baba: In the path of Bhakti, the praises of Sita-Ram pertain to the Silver Age or to the highest Age?
Student: It is the glory of the Confluence Age Baba.
Baba: Is ‘Ram-Sita’ a praise of their incomplete purusharth (spiritual effort) or of their complete stage ? The incomplete purusharth is praised ( by the name Ram-Sita). Do we get the fruits of incomplete purusharth in the Golden Age or in the Silver Age? We get it in the Silver Age. The Supreme Soul is revealed through the complete purusharth of the soul of Ram. Then he is called Bhagwaan. Is Sita a devi (female deity) or Bhagwan? She is a Devi. So, devis are to be placed ahead of male deities (devata) because the deities become victorious only when the devis become helpful. Otherwise, all the deities who were in a male form had an attitude of Duryodhan and Dushasan. Devis showed courage; so, with the help of their courage they (i.e. the Duryodhans and Dushasans) became deities. This is why Shankar’s name is uttered first; …because God the Father has entered him.

God the Father has not entered Sita, but Sita followed God’s first order: become pure. So, the name of the one who accomplishes God’s task is placed ahead. And the name of the one who performed that task later on is placed later. Sita’s name [is taken] first and Ram’s name [is taken] later. Lakshmi’s name [is taken] first and Narayan’s name [is taken] later. Among all the deities, the female (deity) has been placed first. But when it comes to Bhagwan; when it is about Bhagwan-Bhagwati, Shankar’s name comes first and Parvati’s name later.

Student: Baba, many a times they say Gauri-Shankar, don’t they? In that Gauri’s name is first.
Baba: She is anyway gauri (fair). Why was that name Gori placed first? When it comes to the issue of becoming fair and dark, who is first? Is Gauri fair for 84 births; or in the last birth also is she fair or is she dark? Even in the last birth, it is the part of one soul that she does not become adulterous through bodily organs. This is why Gauri’s name is ahead on the basis of purity. Shankar is anyway shown to be drinking poison.

Time: 12.38-13.55
Student: Baba, what is the similarity and difference between Brahmachari (celibate by birth), vaanprasthi (a stage of retirement) and sanyasi (renunciate)?

Baba: Brahmacharis are also sanyasis; they will be called firm sanyasis. Those who first establish a household and then renounce it are weak sanyasis. For example, what kind of a sanyasi will Bhishma Pitamah be called? Firm or weak?
Student: Weak.
Baba: Is Bhishma Pitamah a weak sanyasi? Bhishma Pitamah is a firm sanyasi. So, this is the difference between the sanyasis and Brahmacharis. What else?
Student: Vanprasthi.
Baba: Vanprasthi means he has completed the household life. And when it is time for the organs to become calm (i.e. weak), he took retirement (from the pleasures of organs) under compulsion. So, are they third class sanyasis or first class or second class? They are third class [sanyasis].............(to be concluded)
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Note: The words in italics are Hindi words. Some words have been added in the brackets by the translator for better understanding of the translation.

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