Q&A: PBK Murli discussions

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 25 Sep 2013

वार्तालाप नं. 1344, पूणे, भाग-1, ता.25.06.12
उद्धरण-भाग-2


समय:19.41-22.19
प्रश्न: बाप से सदा की कशिश के लिए और निरंतर याद की अवस्था बनी रहे इसके लिए क्या करना होगा?

बाबा: क्या करना होगा? यही करना होगा कि जो भी तन है, जो भी मन है, जो भी धन है, जो भी समय है, जो भी हमारे पास सम्पर्क की शक्ति है, जो भी संबंधों की शक्तियां हैं वो सारी शक्तियां यज्ञ में स्वाहा करनी हैं। नाम क्या रख दिया? स्वा ... (सभी ने कहा –... हा।) स्व का जो कुछ भी है, स्व माना अपना जो कुछ भी है सब यज्ञ में समर्पित करना है। भले थोड़े देर के लिए लगेगा- हा! हाय! हम ये क्या कर रहे हैं? कहीं ऐसा न हो जाए, कहीं वैसा न हो जाए लेकिन इतनी बात निश्चित है कि स्वाहा करने के साथ ही साथ वो अवस्था बनने लगेगी। कौनसी अवस्था्? निरंतर याद करने की अवस्था। निरंतर योगी की पहचान क्या होगी? (किसी ने कहा – चेहरा...।) हाँ, चलन और चहरे से खुशी दिखाई देगी यही पहचान होगी। उसके कर्म कैसे होंगे? उसके कर्मों में अलौकिकता होगी। लौकिक दुनियां के जो कर्म होते हैं उनका भी रिज़ल्ट होता है और अलौकिक जो कर्म होते हैं उनका भी रिज़ल्ट देखने में आता है।

समय: 22.24-22.55
प्रश्न: बाबा, माया किसीको छोड़ेगी नहीं। छोड़ती ही नहीं है। तो माया पर जीत पाने के लिए क्या पुरूषार्थ करना होगा?

बाबा: क्या पुरूषार्थ करना होगा? मेरा तो एक शिवबाबा... (सभी ने कहा – ... दूसरा न कोई।)जब माया से कोई संबंध ही नहीं है तो उससे लेना-देना ही क्या है?

समय: 23.03-25.30
प्रश्न: अमृतवेला उठने के बाद समय को सफल कैसे बनायें?

बाबा: अमृतवेला उठ तो गए। क्योंकि बाबा ने कहा अमृतवेला ही उठो। उठ गए लेकिन जो भी समय अमृतवेले का है वो दुनियांवी संकल्पों में, दुनियांवी बातों में और दुनियां में जो कर्म करते हैं उन्हींल कर्मों में लगा दिया... दुनियां वाले जो कर्म करते हैं, बातें करते हैं, संकल्प करते हैं उन्हींल बातों में अगर लगा दिया तो समय सफल होगा या विफल होगा? (सभी ने कहा – विफल होगा।) उठना तो है लेकिन उठने के साथ-साथ समय को, संकल्प को, वाचा को और कर्मेन्द्रियों के कर्मों को श्रीमत के अनुकूल लगाना है। उसके लिए पहला-2 फाऊन्डेशन बाबा ने बताया अपन को आत्मा समझो। ये पहले सीढ़ी पक्की करनी है फिर सब कुछ अच्छा हो जावेगा। आत्मिक स्थिती बन गई तो संकल्प भी अच्छेी ही आयेंगे श्रीमत के अनुकूल आयेंगे, वाचा भी श्रीमत के अनुकूल बनेगी और कर्म भी श्रीमत के अनुकूल होंगे।
प्रश्न: सफल अमृतवेला की निशानी क्या होगी?
बाबा: अमृतवेला फाऊन्डेशन का वेला है। अगर फाऊन्डेशन अच्छा होता है तो बिल्डिंग भी मजबूत बनती है। तो निशानी यही है कि सारा दिन ऑटो‍मेटिक अवस्था बनेगी। सारा दिन आत्मिक स्थिति बनी रहेगी। बहुत अच्छा अमृतवेला होगा, बहुत अच्छी आत्मिक स्मृति पक्की की होगी, मैं आत्मा हूँ ये फाऊन्डेशन पक्का पड़ गया होगा तो सारा दिन आत्मिक स्मृ‍ति याद आती रहेगी।

समय: 25.31-26.59
जिज्ञासु: बाबा, कलंकी अवतार बाबा का है या सब बच्चोंो को भी कलंक लगता है?

बाबा: सबसे ज्यादा कलंक शिवबाबा को लगते हैं। शिवबाप को लगते हैं या शिवबाबा को लगते हैं? दुनियां में सबसे जास्ती कलंक शिवबाबा को लगते हैं। तो सबसे जास्ती ऊँचा पद किसका बनता है? (सभी ने कहा- शिवबाबा।) उसके बाद सबसे जास्ती कलंक ब्रह्मा को लगते हैं। तो ऊँचा पद किसका बनता है? ब्रह्मा का ही बनता है। फिर नंबरवार बच्चों को कलंक लगते हैं। तो कलंक जिसको लगते हैं, ग्लानि जिसकी होती है, ज़रूर उसका गायन भी होता है। जितना ज्यादा गायन होता है उतना ज्यादा ग्लानि भी होती है। जितना ज्यादा आत्मा सतोप्रधान बनती है उतना ज्यादा आत्मा तमोप्रधान भी बनती है। जितना ज्या दा आत्मा ऊँची सीट पर बैठती है उतना ज्यादा दुनियां की नज़रों में नीचे की सीट भी मिलती है। तो ये तो ड्रामा है बना हुआ।

समय: 27.05-30.02
प्रश्न: मैं कौन इस पहेली को, अपने 84 जन्मों को जानने के लिए क्या पुरूषार्थ करना है?

बाबा: क्या पुरूषार्थ करना है? (किसी ने कहा – मैं आत्मा ज्योतिबिंदु।) हाँ, एक ही प्रैक्टिस पक्कीन करनी है। देह को भुलना और आत्मा ज्योतिबिंदु को याद करना। आत्मा बनेंगे तब ही तो आत्मा् को पढ़ेंगे। आत्मा अर्थात् बिंदु माना ज्योति बिंदु माना बीज। बीज बनेंगे तो बीज के झाड़ को देखेंगे क्योंाकि बीज में सारा झाड़ समाया हुआ है। और बीज बनेंगे ही नहीं तो झाड़ को...। जो बीज डिफेक्ट होता है। बीज डिफेक्टेड होता है कि नहीं? तो उसका पौधा सरसब्ज नहीं होता है। पौधा सरसब्ज ही नहीं होगा तो पूरा पौधा जैसा देखने में आना चाहिए स्वास्थ वैसा स्वस्थ पौधा देखने में आएगा? नहीं आएगा। तो क्या करना है? अमृतवेले उठते ही और कुछ याद न आए, कुछ याद न आए माना निल भी न रहे। कि सोते-2, उठ के तो बैठ गए। नहीं। वो स्टा र देखने में आवे। क्या ? स्टाभर देखने में आवे। इन आँखों से नहीं देखने में आवेगा। लेकिन बुद्धि के तीसरे नेत्र से ऐसी पक्की प्रैक्टिस हो जावे कि भृ‍कुटि के मध्य में स्टार ही दिखे। ऐसी प्रैक्टिस कि जिसमें स्टार ही देखने में आवे, कोई दूसरा संकल्प न आवे। अगर लम्बे टाईम की बनती है तो अनेक जन्मों को देख भी सकेंगे। अगर नहीं बनती है तो नहीं देख सकेंगे। (किसी ने कहा- पहले ज्ञान के आधार पर ही दिखाई देगा ना।) जितना ज्ञान गहरा होगा उतना आत्मिक स्थिति में ज्यादा टिकेंगे। बाप की याद भी जास्ती आएगी।

Discussion No. 1344, Pune, Part-1, Dt. 25.06.12
Extracts Part-2


Time: 19.41-22.19
Question: What will we have to do to always be attracted to the Father and to attain the stage of constant remembrance?

Baba: What will you have to do? You will have to do this very thing: your whole body, whole mind, all your wealth, all your time, all the power of contacts that you have, all the power of relationships that you have; you have to sacrifice (swaahaa) all those powers in the Yagya. What was it named? Swaa... (Everyone said: ...haa.) Whatever belongs to swa (the self), swa means whatever belongs to you, you have to surrender all that in the Yagya. Although you will feel for a while: Oh! Alas! What am I doing? I am afraid, it may it happen like this, I am afraid, it may happen like that. But this much is sure that along with sacrificing [everything], you will start to attain that stage. Which stage? The stage of constant remembrance. What will be the identification of constant a yogi? (Someone said: the face...) Yes, happiness will be visible on his face and in his conduct. This itself will be the identification. How will his actions be? There will be alokik qualities in his actions. There is a result of the actions performed in the lokik world and the result of the alokik actions is also visible.

Time: 22.24-22.55
Question: Baba, Maya won’t leave anyone. She doesn’t leave at all. So what purushaarth will we have to make to gain victory over Maya?

Baba: What purushaarth will we have to make? Mine is one ShivBaba… (Students: ... and no one else.) When we don’t have any relation with Maya at all, what have we got to do with her?

Time: 23.03-25.30
Question: How should we make the time fruitful after waking up at amritvelaa (early morning hours)?

Baba: You did wake up at amritvelaa because Baba has said, wake up at amritvelaa. You did wake up but if you spent the entire time of amritvelaa in worldly thoughts, worldly things and the actions that are performed in the world... If we spend it in the actions, talks and thoughts that the worldly people do, then will the time be fruitful or will it go to waste? (Everyone said: It will go to waste.) We do have to wake up but along with waking up we should use our time, thoughts, speech and actions performed through the karmendriya according to Shrimat. The first foundation that has Baba mentioned for it is: consider yourself to be a soul. You have to firm up this first step then everything will become good. When you have attained the soul conscious stage, the thoughts that emerge will also be good, they will be in accordance with Shrimat, the speech will also be in accordance with Shrimat and the actions will also be in accordance with Shrimat.
Question: What will be the identification of a fruitful amritvelaa?
Baba: Amritvelaa is the foundation time. If the foundation is firm, the building that is built is also strong. So, the identification is that your stage will be good automatically for the whole day. You will remain in the soul conscious stage for the whole day. If your amritvelaa is very nice, if you have made the awareness of the soul firm very nicely, if the foundation: ‘I am a soul’ is laid firmly, then you will be in the awareness of the soul for the whole day.

Time: 25.31-26.59
Student: Baba, does Baba take on the kalanki avtaar or are all the children disgraced as well?

Baba: ShivBaba is disgraced the most. Is Shivbaap (the Father Shiva) disgraced or is ShivBaba disgraced? In the world ShivBaba is disgraced the most, so who attains the highest position? (Everyone said: ShivBaba.) After Him, Brahma is disgraced the most. So, who attains the high position? Brahma himself attains it. Then the children are disgraced number wise . So the one who is disgraced, the one who is defamed, he is certainly praised as well. The more someone is praised, he is also disgraced to that extent. The more a soul becomes satopradhaan, it also becomes tamopradhaan to that extent. The higher the position a soul receives, it also receives a lower position in the eyes of world to that extent. So this is a preordained drama.

Time: 27.05-30.02
Question: What purushaarth do we have to make to solve the riddle: Who am I? [And] to know about our 84 births?

Baba: What purushaarth do we have to make? (Someone said: I, the soul am a point of light.) Yes, you have to make just one practice firm: to forget the body and remember the point of light soul. You will study about the soul only when you become a soul. The soul means a point, a point of light, a seed. If you become a seed, you will see the entire tree of the seed, it is because the entire tree is enclosed in the seed. And if you don’t become a seed at all, then the tree… a defected seed... Is a seed defected or not? Its plant doesn’t flourish. If the plant doesn’t flourish at all, will the plant be visible to be healthy as it should be? It won’t. So what should you do? You should not remember anything else after waking up at amritvelaa. You should not remember anything doesn’t mean you should remain nil. It shouldn’t be the case that you did wake up and sit from a sleeping stage... (Baba is demonstrating the way of dozing off.) …and you are nil. No. You should see that star. What? You should see star. You won’t be able to see it through these eyes but you should make the practice so firm that through the third eye of the intellect you see only the star in the bhrikuti . [There should be] such a practice that only the star should be visible, no other thought should emerge. If you develop [this practice] for a long time, then you will be able to see the many births as well. If you don’t develop [this practice], you won’t be able to see it. (Someone said: First we will see it on the basis of knowledge itself, won’t we?) The deeper the knowledge you have, you will become stable in the soul conscious stage to that extent. You will also remember the Father more. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 26 Sep 2013

वार्तालाप नं. 1344, पूणे, भाग-1, ता.25.06.12
भाग-3


समय:30.05-32.29
प्रश्न: अभी स्थूल कॉटन में मंदी और महंगाई बढ़ती जा रही है।

बाबा: मंदी माना? (किसी ने कहा- माना क़ीमत कम हो रही है।) ये तो इन्होंने दोनों बातें लिख दीं। दोनों बातें एक साथ कैसे होंगी? या तो महंगाई होगी या तो सस्ताई होगी।
प्रश्न: इसमें आगे चल हम बच्चों को किस प्रकार से चलना चाहिए?
बाबा: विदेशीयता को ग्रहण करना चाहिए या स्वदेशी को ग्रहण करना चाहिए? (‍सभी ने कहा- स्वदेशी।) स्वदेशी को ग्रहण करेंगे तो कॉटन की महिमा बढ़ेगी। कॉटन अर्थात् स्वेदेशी जिससे खादी बनती है। खादी के राजा रानी कौन है? राम-सीता को खादी का राजा रानी कहेंगे खास संगमयुग में। जो सूती कपड़ा होता है वो सर्दी में गरमी देता है और गरमी में ठंडक देता है, बरसात में चिपक जाता है, भीग जाता है, गंदा जल्दी् हो जाता है। तो क्या बनना है? सिंथेटिक बनना है या सूती कपड़ा बनना है? (किसी ने कहा- सूती कपड़ा।) सूती कपड़ा की महिमा है।

समय: 32.40-37.35
प्रश्न: बेहद में पूना का अर्थ क्या( है?

बाबा: अरे, पूना का अर्थ है पूर्णा। पूर्ण और अपूर्ण। पूर्णमासी और अमावस्या; क्याक अच्छी है? पूर्णमासी बनना अच्छा है। और अमावस्या? अमावस्या में तो अंधेरा बढ़ जाता है। तो पूर्ण बनना है या अधूरा बनना है? (सभी ने कहा-पूर्ण।) अछी़ बात है ना।
प्रश्न: तो पूनावासियों से बाबा आपकी क्या उम्मीद है?
बाबा: अरे! जैसा नाम है वैसी ही उम्मीद होगी कि दूसरी उम्मीद होगी?
प्रश्न: और उस उम्मीद पर खरे उतरने के लिए क्या करें?
बाबा: भक्तिमार्ग में जब थेठ भक्तिमार्ग चलता है कलियुग में तो पूनावासियों से क्या उम्मीद होती है? अच्छा शिवाजी की क्या उम्मीद थी? ( सभी ने कहा- स्वाराज।) स्व राज्यद प्राप्ते करें। शिवाजी अकेले प्राप्ता करें या पूनावासियों के सहयोग से प्राप्तर करें? (सभी ने कहा- सहयोग से।) सहयोग से प्राप्त करें। तो ये उम्मीद है। क्या? परतंत्रता से पीछा छूटे और स्वतंत्रता को प्राप्त करें। स्व माना आत्मा। कलियुग के शिवाजी में और संगमयुग के शिवाजी में कोई अंतर होगा या नहीं होगा? (किसी ने कहा- होगा।) क्या अंतर होगा? कलियुग के शिवाजी को स्व की सही पहचान नहीं थी। और संगमयुग में? संगमयुग में तो सही पहचान है। सही पहचान नहीं थी तो हिंसा का आधार लिया। और यहाँ? सही पहचान है। तो हिंसा तो शरीर से होती है। यहाँ तो आत्मिक स्थिति की बात है। आत्मा का राज्य और देह का राज्य, देहअभिमानियों का राज्य। दोनों बातें अलग-2 हैं। कलियुग में भारतवासी विदेशियों के पूरे प्रभाव में आ जाते हैं। रावण के पूरे प्रभाव में आ जाते हैं इसीलिए शिवाजी ने हिंसा का आधार लिया। अभी हमको क्या करना है? माया हमारी परीक्षा लेगी, मायावी हमारी परीक्षा लेंगे कि देखें इनको देहअभिमान आता है या नहीं आता है? ये बाहुबल चलाते हैं या नहीं चलाते हैं? तो हम उस परीक्षा में पास हो के दिखायें। ऐसे नहीं कि उन्होंने बाहुबल चलाया तो हमने भी चला दिया, हमारी कोई गलती नहीं। तो ये बाबा की उम्मीद है। किससे? पूर्णावासियों से।
प्रश्न: और इस उम्मीद पर खरे उतरने के लिए क्या करें?
बाबा: आत्मिक स्थिति में रहें। आत्मिक स्थिति में रहेंगे तो योगबल से काम लेंगे या बाहुबल से काम लेंगे? (सभी ने कहा- योगबल से काम लेंगे।) योगबल से काम लेंगे। और देहभान आया तो? हे, मेरे पास करोड़ों रुपए हैं, मैं अभी पुलिस को इतना पैसा देके अभी काम कराता हूँ चुटकियों में। तो ये क्या हुआ? ये तो बाहुबल हो गया।

समय:37.43-40.46
प्रश्नो: अभी वक्त के अनुसार पुरूषार्थ किस प्रकार का होना चाहिए और कितना होना चाहिए? और वो पुरूषार्थ कैसे हो?

बाबा: अरे, पुरूषार्थ का अर्थ क्या है? अर्थ माना लिए, पुरूष माना आत्मा। काहे के लिए? आत्मा में लिए। तो आत्मा का कनेक्शन इसी एक जन्म से है या 84 जन्म से है? 84 जन्मों से कनेक्शेन है। तो आत्मा का उत्थान करने के लिए क्या करना है? आत्मा का उत्थान करने के लिए आत्मिक स्थिति में टिकना है। ये है सबसे बड़ा पुरूषार्थ। फाऊन्डेशन का पुरूषार्थ। जितना आत्मिक स्थिति में टिके हुए होंगे उतना आत्मा के बाप की भी स्मृति आवेगी। और बाप से पूरी पावर की प्राप्ति होगी। पूरी शक्ति मिलेगी आत्मिक स्थिती में रहने से। तो कितना पुरूषार्थ करना चाहिए? निरंतर करना है या थोड़े समय करना है? निरंतर करना है। निरंतर करने के लिए मोटे से मोटा मुद्दा बता दिया। क्या? अमृतवेला पक्का करो आत्मिक स्थिति का तो सारा दिन आत्मिक स्थिति बनी रहेगी। और किस प्रकार से करना चाहिए? आत्मिक स्थिती बनी रहे ये कैसे करें? हमारे पास कुछ होगा तो याद आएगा। कुछ होगा ही नहीं तो याद क्या आएगा? इसीलिए जो भी है सब स्वा हा। तो आत्मिक स्थिति पक्की बनेगी। अगर कुछ अपने पास रखेंगे तो बार-2 उसमें बुद्धि ज़रूर जाएगी। अरे, सब बातों का एक ही जवाब है जितना गुड़ डालेंगे उतना मीठा होगा। वो ही वो ही बात घुमा फिरा के बार-2 वही पूछ रहे हैं।

Discussion No. 1344, Pune, Part-1, Dt. 25.06.12
Extracts Part-3


Time: 30.05-32.29
Question: Now the rate of physical cotton is decreasing (mandi) and increasing.

Baba: What does mandi mean? (Someone said: it means its rate is decreasing.) This person has written both the things. How will both the things happen at the same time? Either it will be expensive or cheap.
Question: In such a case, how should we children live in the future?
Baba: Should we adopt the foreign culture or the swadeshi [culture]? (Everyone said: swadeshi.) If we adopt the swadeshi culture, cotton will become more famous. Cotton means swadeshi; khaadi is made out of it. Who are the khaadi king and queen? Ram-Sita will be said to be the khaadi king and queen especially in the Confluence Age. Cotton cloth keeps us warm in the winter and keeps us cool in the summer, and it sticks [to the body], becomes wet and dirty very soon in the rainy season. So, what should we become? Do we have to become synthetic or cotton cloth? (Someone said: cotton cloth.) Cotton cloth is praised.

Time: 32.40-37.35
Question: What is the meaning of Puna (name of a district in Maharashtra) in an unlimited sense?

Baba: Arey, Puna means puurnaa (complete). [It is said,] complete and incomplete. What is good between Purnamaasi and Amaavasyaa ? It is good to become purnamaasi (complete). And what about amaavasyaa? During amaavasyaa the darkness increases. So, do you have to become complete or incomplete? (Someone said: complete.) It is good, isn’t it?
Question: So, Baba, what do you expect from the residents of Puna?
Baba: Arey! Will the expectation be as per the name or will there be some other expectation?
Question: And what should we do to fulfill that expectation?
Baba: In the path of Bhakti, when it is genuine path of Bhakti in the Iron Age, what is expected from the residents of Puna at that time? Acchaa, what did Shivaji expect? (Everyone said: [To attain] swaraaj [the self sovereignty].) To attain self sovereignty. [Did he expect] to attain it alone or with the cooperation of the residents of Puna? (Someone said: With the cooperation.) [He expected] to attain it with cooperation. So, this is the expectation. What? We should be liberated from being dependent and gain independence. Swa means the soul. Will there be any difference between the Shivaji of the Iron Age and the Shivaji of the Confluence Age or not? (Someone said: There will be.) What difference will there be? The Shivaji of the Iron Age did not have the correct recognition of swa. And in the Confluence Age? In the Confluence Age there is the correct recognition. He did not have the correct recognition so he took the support of violence. And here? There is the correct recognition. In fact, violence is done through the body. Here it is about the soul conscious stage. The rule of the soul and the rule of the body [meaning] the rule of body conscious ones; both are the different topics. In the Iron Age, Bharatwaasis come under the influence of the foreigners completely. They come under the influence of Ravan completely this is why Shivaji took the support of violence. What should we do now? Maya will test us, deceptive people will test us [thinking]: let us see whether these ones become body conscious or not? Whether they use physical power (baahubal) or not? So, we should pass in that test. It should not be that they used physical power so, we too use it; [and say,] it is not our fault. So this is Baba’s expectation. From whom? From the Puraanaawaasis (residents of Puna).
Question: And what should we do to fulfill this expectation?
Baba: You should remain in the soul conscious stage. If you remain in the soul conscious stage will you use the power of Yoga or the physical power? (Everyone said: We will use the power of Yoga.) You will use the power of Yoga. And what if body consciousness arises? [You will say:] Hey, I posses billions of rupees, I will give the police this much money and get the work done in snaps. So, what is this? This is baahubal.

Time: 37.43-40.46
Question: Now, according to the [present] time what kind of purushaarth should we make and how much? And how will we be able to make that purushaarth?

Baba: Arey, what is the meaning of purushaarth? Arth means for the sake of, purush means the soul. For the sake of what? For the sake of the soul. So, is the soul connected only with this one birth or with the 84 births? It has connection with the 84 births. So, what should we do to uplift the soul? To uplift the soul we have to become stable in the soul conscious stage. This is the greatest purushaarth. The foundation of purushaarth. The more we become stable in the soul conscious stage; we will have the awareness of the Father of the soul to that extent. And we will receive the complete power from the Father. We will receive complete power by remaining in the soul conscious stage. So, how much purushaarth should we make? Should we make [purushaarth] continuously or for some time? We have to make continuous [purushaarth]. To make continuous [purushaarth] the biggest point was told. What? Make the soul conscious stage firm at amritvelaa then the soul conscious stage will last for the whole day. And how should we make it? How should we maintain the soul conscious stage? If we have something with us, we will remember that. If we don’t have anything at all, what will we remember? This is why whatever we have, we should sacrifice it then the soul conscious stage will become firm. If we keep anything with us, the intellect will certainly go towards it again and again. Arey, all the question have only one answer, the more we add molasses to something, the sweeter it will become. They are asking the same thing again and again in different ways. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 27 Sep 2013

वार्तालाप नं. 1344, पूणे, भाग-1, ता.25.06.12
भाग-4


समय: 41.09-45.13
प्रश्न: मुरली में आया है कि जो सर्विस नहीं करते हैं ज़रूर डिससर्विस ही करते हैं। इसका अर्थ स्पशष्ट: नहीं हुआ।

बाबा: अरे, सर्विस किसकी करनी है? सर्विस किसकी करनी है? भ्रष्टाचारी गवर्मेंट की सर्विस करनी है या विदेशियों की सर्विस करनी है? किसकी सेवा करनी है? अरे? (किसी ने कहा- आत्मा ...।) आत्मा की सेवा करनी है? (बहुतों ने कहा- ईश्व र की सेवा करनी है।) ईश्वरीय सेवा करनी है। किसकी सेवा करनी है? (सभी ने कहा – ईश्वर की।) जिसकी सेवा करनी होती है उसके डायरेक्शन पर चलना पड़ता है। तो हम किसकी सेवा में हैं? ईश्व र की सेवा में हैं। तो जैसी ईश्वर की मत, जैसी श्रीमत मिले, उसी अनुसार हमको चलना है। उसी अनुसार चलते हैं तो सर्विस है। अगर उसके विपरीत माना डिस, डिससर्विस है। या तो ईश्वरीय सर्विस पर हैं या तो आसुरी सर्विस पर हैं। आसुरी सर्विस है देह, देह के संबंधियों, देह के पदार्थों की और ईश्वारीय सर्विस है आत्मा की, परमात्मा की। दोनों में कन्ट्रास्ट हो गया ये बात समझ में क्यों नहीं आती? या तो हम सविर्स पर हैं या तो डिससर्विस पर है। या तो सेवाधारी के लिस्ट में हैं या तो डिससर्विस करने वालों के लिस्ट में। जैसे कर्म हम करेंगे हमें देख दूसरे करेंगे। हम धंधे-धोरी में लगे हुए हैं। कोई कहे ब्राह्मण तुम तो धंधे-धोरी में लगे हुए हो तुम तो डिससर्विस कर रहे हो। तो क्या जवाब दें? (किसी ने कहा- जवाब क्यों देना?) नहीं, नहीं। ईश्वरीय धंधा और आसुरी धंधा दो ही धंधे हैं। ईश्वरीय धंधे में हैं तो ईश्वरीय धंधे में रहने वालों को पेट की चिंता होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए? (बहुतों ने कहा- नहीं होनी चाहिए।) और जिनको पेट की चिंता है, चाहे अपना पेट, चाहे पत्नि का पेट, चाहे बाल-बच्चों का पेट उसकी चिंता है इससे साबित होता है कि लौकिक धंधे में लगेंगे या ईश्वरीय धंधे में लगेंगे? लौकिक धंधे में लगेंगे। आज की मुरली में भी क्या आया? लौकिक धंधा-धोरी दुनियां में खत्म होनी है या बढ़ती रहेगी? (सभी ने कहा – खत्म होनी है।) वैसे भी देखा जाए तो सच्चाई से लौकिक धंधे चल रहे हैं या टूट रहे हैं? (बहुतों ने कहा- टूट रहे हैं।) जो सच्चाई से लौकिक धंधे में लगते हैं उनके धंधे फेल हो रहे हैं। सब धंधों में है नुकसान सिवाए एक ईश्वरीय धंधे के।

समय:45.23-49.29
प्रश्नी: बोला है मुरलियाँ भी बहुत चलाए लीं। ए, तुमने मुरलियाँ भी बहुत चलाए लीं। माखन भी बहुत खा लिया। लीलायें भी बहुत दिखा दीं। अब वो कार्य कब शुरू करेंगे जिसके लिए आप धरती पर आए हो?

बाबा: तो लड़ाई शुरू हो जाए? स्वर्ग स्थापन करने के लिए आए हैं शिवबाबा। स्वर्ग कब प्रत्यक्ष होगा? गेट वे तो हेवन इज़? (सभी ने कहा- महाभारत।) तो महाभारत युद्ध शुरू हो जाए? तैयार हैं? तैयार हैं? बैंक बैलेंस बढ़ाते चले जा रहे हैं कहते हैं तैयार हैं। (‍किसी ने कहा- समय पर होगा।) समय पर होगा? पहले नहीं होगा? बोरिया-बिस्तार समेटना समय पर होगा? अच्छा समय पर होगा तो समय की बलिहारी होगी या आत्मा की बलिहारी होगी? (सभी ने कहा- समय की बलिहारी।) फिर तो समय की बलिहारी। समय जड़ है या चैतन्य है? (सभी ने कहा- जड़ है।) समय तो चैतन्य नहीं है। समय तो जड़ है। तो जड़ की बलिहारी करनी है या आत्मा की बलिहारी करनी है? आत्मा की बलिहारी करनी है। समय को महाकाल कहा जाता है। क्या ? कहते हैं समय बड़ा बलवान है। जो ये कहते हैं समय बड़ा बलवान है तो सच्ची बात कहते हैं या झूठी बात कहते हैं? (बहुतों ने कहा- सच्ची बात है।) सच्ची कहते बात है? माना भगवान बड़ा बलवान नहीं है? ईश्वर सर्वशक्तिवान नहीं है समय सर्वशक्तिवान है? (किसी ने कहा- ईश्वर सर्वशक्तिवान है।) ईश्वर सर्वशक्तिवान है। तो ड्रामा को आगे नहीं रखना चाहिए। पुरूषार्थ को आगे रखना चाहिए। आत्मा को बलवती बनाना चाहिए। फिर क्या करें? प्रश्न। करने वाले से ये पूछें कि बोरिया-बिस्तार सब समेट लिया? समेटने की निशानी है चौबीस घंटे ईश्वरीय सेवा में लगे रहें। क्या? स्वप्न भी? (किसी ने कहा- न आए।) नहीं। स्वप्न भी ईश्वरीय सेवा के आने लगें। नहीं तो कपड़े की दुकान वाला बजाज होता है। वो सारा दिन कपड़े फाड़ता है रात में अपनी धोती फाड़ देता है। तो भगवान से तो ये प्रश्न किया कि अब वो काम कब शुरू करेंगे जिसके लिए आप धरती पर आए हो? तो भगवान क्या कहते हैं? आप अपना काम जब शुरू करेंगे तो हम भी अपना काम शुरू कर देंगे। क्या‍ काम शुरू करेंगे आप? बोरिया बिस्तहर... (बहुतों ने कहा – समेटना।) जो भी देहअभिमान का बोरिया-बिस्तार है वो सब... (जिज्ञासुओं ने कुछ कहा।) बन जाओ लंगोटिया। भक्तिमार्ग में तो कहते हैं शंकरजी की भक्ति करेंगे तो क्या होगा? लंगोटिया बना देगा। सिवाय लंगोट के और तुम्हारे पास कुछ रहने वाला नहीं ।

समय: 49.33-51.05
प्रश्नु: शक्ति लेना कठिन है।

बाबा: शक्ति लेना कठिन है या सहज भी है? (बहुतों ने कहा- सहज भी है।) कठिन भी है उनके लिए जो त्याग नहीं कर सकते और सहज है उनके लिए जो त्यागी हैं।
प्रश्नु: शक्ति लेना कठिन है परंतु ज्ञान और योग सहज है।
बाबा: ज्ञान सहज है या योग सहज है? (किसी ने कहा- ज्ञान।) ज्ञान बहुत सहज है। परंतु याद में माया विघ्न बहुत डालती है इसीलिए कठिन हो जाता है।
प्रश्नु: तो शक्ति लेना कठिन है परंतु ज्ञान और योग सहज है ऐसा बैंगलोर की एक मुरली में आया है। तो इसका मतलब क्या है?
बाबा: कठिन उनके लिए है जो त्याग नहीं कर सकते हैं। और त्याग कौन नहीं कर सकते हैं? जो देहअभिमानी है तो त्याग नहीं कर सकते हैं। आत्माभिमानी हैं तो त्याग भी कर सकते हैं।

Discussion No. 1344, Pune, Part-1, Dt. 25.06.12
Extracts Part-4


Time: 41.09-45.13
Question: It is said in the Murli: those who don’t do service certainly do just disservice. Its meaning is not clear to me.

Baba: Arey, whose service do we have to do? Whose service do we have to do? Do we have to do the service of the unrighteous government or the service of foreigners? Whose service do we have to do? Arey? (Someone said: The soul...) We have to do the service of soul? (Many said: We have to do the service of God.) We have to do the service of God. Whose service do we have to do? We have to follow the direction of the one whose service we do. So, we are in whose service? We are in the service of God. So we have to act only according to the direction of God, the Shrimat that we receive. If we act according to it, it is service. If we act opposite to it i.e. dis, it is disservice. Either we are on the service of God or on the demonic service. The demonic service is of the body, the bodily relatives and the things related to the body and the Divine (iishwariya) service is [the service] of the soul and the Supreme Soul. There is contrast between both; why don’t you understand this? Either we are doing service or disservice. Either we are in the list of servants (sevaadhaaris) or in the list of the ones who do disservice. The way we act, others will observe us and act similarly. If we are engaged in [worldly] business; if some Brahmin says, you are engaged in business, you are doing disservice. So, what should you answer them? (Someone said: Why should we answer them?) No, no. The Divine business and the demonic business; there are only two businesses. If we are engaged in the Divine business, then should the ones who are engaged in the Divine service worry about their stomach or not? (Many said: They should not.) And those who are worried about the stomach, whether it is their own stomach, their wife’s or children’s stomach, if they are worried about it, [then] this proves... Will they be engaged in the lokik business or in the Divine business? They will be engaged in the lokik business. What was said in today’s Murli as well? Will the lokik business in the world end or will it flourish? (Everyone said: It will end.) If it is observed, are the lokik businesses running truthfully or are they failing? (Many said: They are failing.) Those who engage in lokik business truthfully, their businesses are failing. There is loss in all the businesses except the one Divine business.

Time: 45.23-49.29
Question: It is said [here]: You narrated Murlis a lot. Hey! You narrated Murlis a lot. You also ate a lot of butter. You also showed many plays. Now, when will you start the work for which you have come on this earth?

Baba: Then, should the war begin? ShivBaba has come to establish heaven. When will heaven be revealed? Gateway to heaven is...? (Everyone said: Mahabharat.) So, should the war of Mahabharat begin? Are you ready? You are ready? You are continuously increasing your bank balance and saying: We are ready. (Someone said: It will happen at that time.) It will happen at that time (when the war begins)? Will it not happen before that? Will you pack up the bag and baggage at that time? Acchaa, if it happens at that time then will the credit go to the time or to the soul? (Everyone said: The credit will go to the time.) Then the credit will go to the time. Is the time non-living or living? (Everyone said: It is non-living.) Time is certainly not living. It is non-living. So, should the credit go to something that is non-living or to the soul? The credit should go to the soul. Time is called mahaakaal. What? It is said: Time is very powerful. Those who say: Time is very powerful, do they say the truth or do they say false? (Many said: They say truth.) Do they say the truth? Does it mean God is not more powerful? [Does it mean] God is not Almighty, time is almighty? (Someone said: God is Almighty.) God is Almighty. So, you should not keep drama ahead. You should keep purushaarth ahead. You have to make the soul powerful. Then, what should we do? The one who has asked this question should be questioned: Have you winded up your bag and baggage? The sign of the one who has winded it up [his bag and baggage] is that he will be engaged in the Divine service for 24 hours. What? Even the dreams…? (Someone said: Should not come.) No. He should also dream about the Divine service. [For example,] a cloth merchant tears clothes for the whole day and [as a result of it] tears his own dhoti at night (while sleeping). So, you asked God: when will You start the work for which You have come to this world. So, what does God say? When you start your work, I will also start My work. What work will you start? Bag and baggage… (Many said: [we should] wind it up.) Whatever bag and baggage of body consciousness you have, all that... (Students said something.) Become a langotiaa :D . It is said in the path of Bhakti: if you worship Shankarji, what will happen? He will make you a langotiaa. Nothing will be left with you except a langot.

Time: 49.33-51.05
Question: It is difficult to take the power.

Baba: Is it difficult to take the power or is it easy as well? (Many said: It is easy as well.) It is difficult for those who cannot sacrifice (the body, mind, wealth and everything) and it is easy for those who sacrifice.
Question: It is difficult to take the power but the knowledge and remembrance is easy.
Baba: Is the knowledge easy or is remembrance easy? (Someone said: Knowledge.) Knowledge is very easy. But Maya creates many obstacles in remembrance; this is why it becomes difficult.
Question: To take the power is difficult but the knowledge and remembrance is easy. This was said in a Murli narrated at Bangalore. So, what does this mean?
Baba: It is difficult for those who cannot sacrifice. And who are the ones who can’t sacrifice? Those who are body conscious cannot sacrifice. If they are soul conscious, they can sacrifice as well. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 28 Sep 2013

वार्तालाप नं. 1344, पूणे, भाग-1, ता.25.06.12
उद्धरण-भाग-5


समय: 51.11-53.06
प्रश्न: वो राजा, राजा नहीं जो अपने अस्त्र शस्त्र बेच देता है। तो इसका बेहद में अर्थ क्या है?

बाबा: हमारे अस्त्र-शस्त्र क्या, हैं? ज्ञान और याद। यहाँ अस्त्र-शस्त्र बेचे कैसे जाते हैं? कैसे बेचे जाते हैं? जो सतयुग में टीचर बन करके रह जायेंगे राजा या राजघराने में नहीं आवेंगे वो यहाँ क्या करते होंगे? वो अपन अस्त्र-शस्त्र बेचते हैं। बाबा जिस काम के लिए आए हैं वो काम नहीं करते। बाबा किसलिए आए हैं? हमको राजा-महाराजा बनाने के लिए, राजाई प्राप्त कराने के लिए आए हैं। और हम राजाई प्राप्त न करें सिर्फ ज्ञान-योग का प्रदर्शन भर करते रहें। न ज्ञान को खुद धारण करें और न याद की शक्ति धारण करें। तो ऐसी आत्मायें राजा नहीं बन पायेंगीं। क्या। बनेंगी? टीचर बनके रह जायेंगे।

समय:53.10-54.54
प्रश्न: नौकरी में प्रमोशन नहीं देते हैं। तो सच्चाई प्राप्त। करने के लिए कोर्ट में जाना है या नहीं जाना है?

बाबा: पूछने वाले से प्रश्न करना चाहिए प्रमोशन किसलिए चाहिए? किसलिए चाहिए? प्रमोशन चाहिए मान मर्तबा पाने के लिए। अगर मान मर्तबा पाने के लिए प्रमोशन चाहिए तो कोर्ट में जाने की ज़रूरत नहीं है। अगर प्रमोशन चाहिए कि ईश्व‍रीय सेवा में काम आवे। ईश्वरीय सेवा हमारे प्रमोशन से काम में आ जावे। प्रमोशन होते-2 प्रधानमंत्री बन जायें। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद लौकिक दुनियां की एषणा, लौकिक दुनियां का मान मर्तबा बिल्कुल धारण न करे, अगर ये पक्का किया है कि ईश्वरीय सेवा ही करेंगे इसके लिए हमने ये प्रमोशन लेना है तो कोर्ट में ज़रूर जाना है। वरना नहीं जाना है।

समय:55.02-56.22
प्रश्न: अज्ञान की रात्री में जो महाशिवरात्री होती है, उस समय जिनका भक्तिमार्ग में पूजन करते हैं तो क्या वो आत्मायें हैं?

बाबा: भक्तिमार्ग में जब घोर अंधियारा होता है तो पूजन किसका होता है? जड़त्व का पूजन करते हैं या चैतन्य का पूजन करते हैं? पूजन भी जड़त्वमइयों का होता है। कोई पेड़ की पूजा करते हैं। कोई साँप की पूजा करते हैं। कोई पत्थर की पूजा करते हैं। तो क्या वो आत्मायें हैं? (किसी ने कहा- नहीं है।) नहीं। पेड़ आत्मायें नहीं हैं? आत्मारयें तो हैं लेकिन जड़त्वमयी आत्मायें हैं। क्या ? जड़त्वमयी आत्मायें हैं। उनमें चैतन्यता नहीं है।

समय: 56.32-57.56
प्रश्न: जो सम्पन्न स्टे‍ज अर्थात् फाईनल परिक्षा में पास होते हैं...

बाबा: नंबरवार पास होते हैं या एक जैसे पास होते हैं? (सभी ने कहा – नम्बरवार।)
प्रश्न: अथवा जो अनिश्चय में आ जाते हैं। जब सारी दुनियां एक तरफ हो जाती है और एक बाप एक तरफ हो जाता है तो शालिग्रामों का गायन कैसे होता है?

बाबा: जो शालिग्राम रूपी आत्मायें हैं वो एक साथ निश्चय में आती हैं या नंबरवार एक के बाद एक निश्चय में आती हैं? (सभी ने कहा- नंबरवार।) रूद्र ज्ञान यज्ञ रचते हैं तो सब शालिग्राम एक साथ बनाए देते हैं या सुबह से लेकर शाम तक नंबरवार बनाते रहते हैं? (सभीं ने कहा- नंबरवार।) तो नंबरवार ही गायन होगा कि एक जैसा गायन होगा? नंबरवार गायन होगा।

समय: 58.03-01.02.44
प्रश्नर: माया बहुत अपोजिशन करती है। बहुत वार करती है अभी तो अंत में तो और ज्यादा वार करेगी। तो इसके लिए क्या करना है?

बाबा: अरे, जब जानते हैं कि दुश्मन का, मुसलमान का वार होने वाला है तो भारत के राजायें क्या् करते थे? (किसी ने कहा- तैयारी।) क्या तैयारी करते थे? और क्या तैयारी करने से वो सफल हो सकते थे? (किसी ने कहा-संगठीत करने से।) संगठित करने से सफल हो सकते थे। लेकिन देहअभिमान होने के कारण संगठित नहीं हुए। क्यों संगठित नहीं हो पाए? क्योंकि इतनी प्योरिटी की पावर नहीं थी जो युनिटी बनाए सकें। और अभी? अभी वो प्योरिटी की पावर हम इकट्ठी कर सकते हैं। कैसे? (किसी ने कहा- एक की याद से।) आत्मिक स्मृ‍ति में रहने से बाप की स्मृ ति में रहने से, और बाप की स्मृति उनको जास्ति होगी जिनको बाप याद करेगा। बाप किनको याद करेगा? जो ईश्वरीय सेवा में ही रहेंगे। शरीर अर्थात्‍ पेट की सेवा में ज्यादा टाईम नहीं लगावेंगे, ईश्व र की ही सेवा में रहेंगे तो उनको ईश्वर बाप याद करेगा। बड़ा आदमी किसी को कनेक्शन लगाना चाहता है टेलिफोन का तो जल्दी लगावेगा या छोटा आदमी बड़े आदमी को कनेक्शन जल्दी लगावेगा? बड़ा आदमी छोटे से छोटे आदमी से फोन का कनेक्शन जल्दी कर सकता है। तो शिवबाबा तो ऊँच ते ऊँच है। वो जिसको याद करना चाहे तो उसकी याद का कनेक्शन बहुत जल्दी जुड़ जावेगा और जो आत्मायें हैं वो तो नंबरवार हैं। वो चाहें कि ऊँच ते ऊँच बाप से जल्दी से कनेक्शन जुड़ जाए तो जुड़ जावेगा? नहीं जुड़ेगा। इसीलिए बाबा कहते हैं जो मेरे सर्विसएबुल बच्चे हैं कैसे सर्विसएबुल? जिन्होंने अपना तन जब से सेवा में आए हैं, जब से ज्ञान में आए हैं, तभी से तन तेरा, मन तेरा, दूसरी सेवा में न मन लगेगा, न ये तन जाएगा। चाहे बाप ही क्यों न हो, चाहे कोई प्या रे ते प्यारा लौकिक संबंधी ही क्यों न हो, तन और धन एक की सेवा में जाएगा। जब से ज्ञान में आए हैं तभी से ऐसा देखने में आ रहा है। तो बाप उनको याद करेगा, उनको टाईम पहले देगा, या दूसरों को टाईम देगा? (सभी ने कहा – उनको पहले देगा।) फिर नाराज हो जाते हैं बाबा तो कहते हैं कदम-2 पर श्रीमत लेना है। अब कदम-2 पर श्रीमत कैसे लें टेलिफोन का तो नंबर ही नहीं देते। मोबाईल का नंबर देते ही नहीं। बाबा तो पार्शलिटी करते हैं। तो जितना गुड़ डालेंगे उतना ही मीठा होगा। माया बहुत वार करती है, दुश्मन बहुत वार करता है, तो बड़े राजा का आधार लिया जाता है। जो बड़े ते बड़ा राजा होता है, ज्यादा पावरफुल होता है तो अपनी धन सम्पत्ति, रानियाँ सब उसको सौंप देते हैं। और सौंप के उसकी सेवा में हाजिर हो जाते हैं जैसे आप चलाओगे वैसे हम चलेंगे। तो ऐसी युनिटी बनाने से प्योरिटी की पावर भी आ जाती है और प्योरिटी की पावर से दुनियां में सब काम होते हैं।

Discussion No. 1344, Pune, Part-1, Dt. 25.06.12
Extracts Part-5


Time: 51.11-53.06
Question: A king who sells his weapons and arms (astra-shastra) is not a king. So, what does this mean in an unlimited sense?

Baba: What are our weapons and arms? Knowledge and remembrance. How are the weapons and arms sold here? How are they sold? The ones who will become teachers and just remain so in the Golden Age, who won’t become kings or come in the royal family; what would they be doing here? They sell their weapons and arms. They don’t do the task for which Baba has come. For what purpose has Baba come? To make us a king, an emperor, He has come to make us achieve kingship. And if we don’t achieve kingship and just keep showing off knowledge and remembrance. If we neither assimilate knowledge [in] ourselves nor do we assimilate the power of remembrance; so, such souls won’t be able to become kings. What will they become? They will become a teacher and just remain so.

Time: 53.10-54.54
Question: We are not given a promotion in job. So should we go to the court for the truth or not?

Baba: The one who is asking the question should be asked: Why do you need promotion?  Why do you need it? You want promotion to receive respect and honour. If you want promotion to receive respect and honour, there is no need to go to the court. If you need the promotion so that it comes in use for the Divine service, [if you think:] my promotion should be useful in the Divine service... If you become the Prime Minister after being promoted [from one status to another status] but after becoming a Prime Minister [you should not] desire [for the things] of the lokik world, you should not take the respect and honour of lokik world at all. If you have made this firm: I have to take this promotion only to do the Divine service, then you should certainly go to the court otherwise you shouldn’t.

Time: 55.02-56.22
Question: The Mahaashivraatri that is celebrated in the night of ignorance; the souls which are worshipped at that time in the path of Bhakti are they souls?

Baba: When there is stark darkness in the path of Bhakti; who is worshipped? Is something inert worshipped or is something living worshipped? They worship something inert. Some worship a tree. Some worship a snake. Some worship a stone. So, are they souls? (Someone said: They are not.) No. Aren’t the trees souls? They are certainly souls but they are inert souls. What? They are inert souls. There is no consciousness in them.

Time: 56.32-57.56
Question: Those who pass in a complete stage meaning in the final exam…

Baba: Do they pass number wise (according to their capacity) or do they pass alike? (Everyone said: Number wise.)
Question: Or those who become doubtful. When the entire world comes on one side and the one Father is on the other side, then how are the shaaligraams praised?
Baba: Do the shaaligraam like souls have faith at the same or do they have faith number wise, one after the other? (Students said: Number wise.) When the Rudra Gyan Yagya (Yagya of the knowledge of Rudra) is organized; do they make all the shaaligraams together or do they keep making them number wise from the morning till the evening? (Everyone said: Number wise.) So their praise will also be number wise or will their praise be alike? They will be praised number wise.

Time: 58.03-01.02.44
Question: Maya opposes a lot. She attacks a lot now. She will attack even more in the end. So, what should we do for this?

Baba: Arey, what did the kings of Bharat use to do when they came to know that the enemy, the Muslims are about to attack? (Someone said: Preparation.) What preparation did they use to make? And by making what preparation could they have achieved success? (Someone said: By being united.) They could have achieved success by uniting [everyone]. However they didn’t unite due to body consciousness. Why couldn’t they unite? It is because they didn’t have that much power of purity so that they could make unity. And now? Now we can gather that power of purity. How? (Someone said: Through the remembrance of one.) By being in the awareness of the soul, the Father and the ones whom the Father remembers will have the awareness of the Father more. Whom will the Father remember? Those who will remain busy only in the Divine service. If they do not spend more time in serving the body meaning the stomach, if they remain only in the service of God, then God the Father will remember them. If a big person wants to contact someone through the telephone, will he contact him soon or will a small person contact a big person soon? A big person can contact the smallest person through the phone soon. So, ShivBaba is the highest on high. If He wants to remember someone, He can make a connection of remembrance very soon. And as regards the souls, they are number wise. If they wish to make a connection with the highest on high Father soon, will that happen? It won’t. This is why Baba says: Those who are My serviceable children… What kind of serviceable [children]? Ever since they have come in the service, ever since they have come in knowledge, they have made the body Yours (ShivBaba’s), the mind Yours, neither the mind nor the body will be engaged in any other service. Whether it is their [lokik] Father himself or any loving lokik relative, the body and wealth will be engaged in the service of One. This is observed ever since they have entered [the path of] knowledge. So, will the Father remember them, will He give them time first or will He give time to the others? Then, they (the children) become displeased [and say], ‘Baba says: You should take the Shrimat at every step. Now how will we take Shrimat at every step? He doesn’t give the telephone number at all. He doesn’t give the mobile number at all. Baba does partiality.’ So, the more the jaggery you add, it will become sweet to that extent. When Maya attacks a lot, the enemy attacks a lot, then the support of a big king is taken. They (those who are attacked by enemies) entrust their wealth and property, queens and everything to the biggest king who is more powerful. And after entrusting it to him they present themselves in his service [saying], “We will act as you say”. So, by making such unity, the power of purity also comes and all the tasks in the world are done through the power of purity. (Concluded.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 08 Oct 2013

वार्तालाप-598, पोखरा (नेपाल), दिनांक 07.07.08
उद्धरण-भाग- 1


समयः 03.40-05.20
जिज्ञासुः विष्णु सहस्त्रनाम गाया हुआ है।

बाबाः विष्णु के सहस्त्रनाम इसलिए गाए हुए हैं कि ब्रह्मा की हज़ार भुजाएं गाई हुई हैं। ब्रह्मा की कितनी भुजाएं हैं? (जिज्ञासु – हज़ार) हज़ार सहयोगी बनते हैं तो ब्रह्मा सो क्या बन जाता है? (जिज्ञासु – विष्णु) विष्णु बन जाता है। तो ब्रह्मा कहता है कि, अरे हम अकेले क्यों विष्णु बनें? हज़ार लोगों ने हमें सहयोग किया है। तो उन लोगों का भी नाम अपने (नाम के) साथ जोड़ के रखेंगे। अकेले नहीं। जैसे शिवबाबा कहते हैं ना, शिवबाबा कहते हैं, अरे हम अकेले अपना नाम क्यों रखें दुनिया में? शंकर ने भी तो हमको बहुत सहयोग दिया ना। तो जी जान से सहयोग दिया है तो शंकर का नाम अपने साथ ही साथ ही रख लेंगे। तो शिव-शंकर ऐसे कहा जाता है ना। तो ऐसे ही विष्णुजी महाराज ने क्या सोचा? अरे हम अकेला अपना नाम क्यों बाला करें? अपने नाम के साथ जो हज़ार सहयोगी बनें हैं, बने कि नहीं बने? (जिज्ञासु – बने) जब ब्रह्मा के रूप में हज़ार ब्रह्मा की भुजाएं सहयोगी बनीं। तो उनको भी साथ ले लिया। इसलिए विष्णु सहस्त्रनाम का गायन है। नाम कब पड़ता है? (जिज्ञासु – काम) कुछ काम किया होगा तभी तो नाम पड़ेगा। तो विष्णु के साथ वो हज़ार भुजाओं ने काम किया। ब्रह्मा की भुजाओं के रूप में। इसलिए विष्णु सहस्त्रनाम पड़ा हुआ है।

शंकरजी का सहस्त्र नाम नहीं है। वो बिचारे अकेले रह गए। शंकरजी को भुजाएं दिखाई जाती हैं क्या? (जिज्ञासु - नहीं) नहीं। ज्यादा से ज्यादा चार भुजाएं दिखाई गई हैं। दो शंकरजी की, दो पार्वती की। बस। इससे ज्यादा नहीं।

समयः 07.50-10.20
जिज्ञासुः लक्ष्मी को राइट हैंड साइड में क्यों दिखाते हैं?

बाबाः एक होते हैं लेफ्ट भुजा, बाईं भुजा। और एक होती है दायीं भुजा। झाड़ के चित्र में जैसे कि बाईं ओर के धर्म हैं। कौन-कौन से? इस्लाम धर्म, क्रिश्चियन धर्म, मुस्लिम धर्म, ये बायीं ओर के धर्मों में ज्यादा व्यभिचार है या जो दायीं ओर के धर्म हैं – बौद्धी धर्म, सन्यास धर्म, सिक्ख धर्म, इनमें ज्यादा व्यभिचार है? ज्यादा तलाक प्रथा कौनसे धर्मों में है? (जिज्ञासु – बायीं ओर) वो गंदे हैं या ये गंदे हैं? (जिज्ञासु – वो गंदे हैं) वो गंदे हो गए बाईं ओर वाले। बाएं हाथ से गंदा काम किया जाता है, गंदगी सफाई की जाती है या दायें हाथ से गंदगी सफाई की जाती है? (जिज्ञासु – बाएं हाथ से) बाएं हाथ से गंदगी की सफाई करते हैं।

तो लक्ष्मी अच्छा काम करती है या खराब काम करती है?
(जिज्ञासु – अच्छा काम) वो तो पवित्र रहने वाली है। और जन्म-जन्मान्तर लक्ष्मीी पवित्र रहती है। एक जन्म की तो बात नहीं। पार्वती का तो विरुद ही था जन्म-जन्म लगी रगर हमारी वरौं शंभु न तु रहुँ कुंवारी। या तो शंकरजी का वरण करूंगी और नहीं तो कुंवारी रहना अच्छा है। मैं किसी दूसरे के साथ शादी, दूसरी आत्मा के साथ मेरा वरण नहीं होना चाहिए। तो अनेक जन्मों की जो प्योरिटी है जिसमें आत्मा में भरी हुई होगी उसको राइट हैंड की तरफ रखना चाहिए कि लैफ्ट हैंड की तरफ रखना चाहिए? (जिज्ञासु – राइट हैंड) इसलिए रखा हुआ है। खराब काम कर दिया? हँ? नारायण ने खराब काम कर दिया क्या? (जिज्ञासु – नहीं।) नहीं।
दूसरा जिज्ञासुः लेकिन चरण दबाते हुए तो वो चित्र जब ब्रम्हा बाबा ने शुरु में देखा था...
बाबाः वो तो संगमयुग का चित्र है न कि सतयुग का?
दूसरा जिज्ञासुः वो उनको पसन्द नहीं आया था ना बाबा।
बाबाः ब्रह्मा बाबा को इतनी अकल ही नहीं थी कि कौनसे चरण हैं। ये तो बुद्धि रूपी पांव दबाने की बात है। सारी दुनिया की आनियां-परेशानियां, सब अपनी-अपनी समस्याएं उनको सुनाएंगे, विश्व महाराजन को तो माथा नहीं दर्द करने लगेगा?
दूसरा जिज्ञासुः वो चित्र को हटा दिया ना उन्होंयने।
बाबाः उन्हें इतनी अकल नहीं थी ना। वो समझते थे स्थूल पांव दबा रही होगी। स्थूल पांव दबाने की तो बात ही नहीं है। कौन से पांव दबा रही है? (जिज्ञासु – बुद्धि रूपी पांव) वो बुद्धि रूपी पांव को दबाती है। अपनी पवित्रता के बल से।

समयः 10.25-11.05
जिज्ञासुः बाबा ये जब नया दुनिया आने वाला है। उस टाइम मुरली में बोला है राजस्थान सभी को ले जाएंगे।

बाबाः राजाओं के स्थान में ले जाएंगे। वो राजस्थान तो स्थूल है। राजाओं के स्थान में ले जाएंगे। राजाओं के स्थान की राजधानी वहाँ जयपुर होगी। वहाँ फिर किसी की हार? हार नहीं होगी। जय ही जय होती रहेगी। कहते हैं ना, जय श्री राम।
जिज्ञासुः स्थूल में भी जयपुर है ना बाबा।
बाबाः बिल्कुल-बिल्कुल। स्थूल में है तो सूक्ष्म में भी होगा।

समयः 11.05 -12.50
जिज्ञासुः जरासिंध को भीम ने युद्ध में दो टुकड़े कर दिया। बीच में से फाड़ दिया। फिर आकर जुड़ता है। फिर जिन्दा हो जाता है। और कृष्ण ने उसको इशारा दिया उसको ऐसे फेंक दो अलग-अलग।

बाबाः कृष्ण ने इशारा दिया भीम को कि तुम इसको बीच से अलग-अलग करके और उल्टी दिशा में फेंक दो। क्या? (जिज्ञासु – इसका अर्था क्या?) इसका अर्थ ये कि वो दोनों तरफ का है। जरासिंधी। क्या? नया सिंधी थोड़े ही है। कैसा सिंधी है? जरा माने पुराना। पुराना सिंधी है। बहुत पावरफुल है। ये दोनों तरफ से तैयार होता है। जब ब्रह्मा बाबा सिंध, हैदराबाद छोड़ के आये और दुकान उन्होंने अपनी कहाँ रखी? कलकत्ते में। तो पूरब साईड में आ गए कि पश्चिमी सभ्यता के रह गए? (जिज्ञासु – पश्चिमी) नहीं। कलकत्ता है पूरब में। पूरब में आ गए। तो दो हिस्से हो गए। प्रजापिता तो था ही पूरब का। लेकिन वो भी किधर आ गए? पूरब में आ गए। तो दोनों मिलकरके एक हो गए। तो दोनों क्या हुए वास्तव में? दोनों ही मिलकरके जरासिंधी हो गए। पुराने सिंधी कौन हुए? एक ब्रह्मा बाबा ही पुराना सिंधी नहीं है। राम वाली आत्मा भी पुराना सिंधी है।

Disc.CD No.598, dated 07.07.08 Pokhra (Nepal)
Extracts-Part-1


Time: 03.40-05.20
Student: Vishnu Sahastrnaam (thousand names of Vishnu) is famous.

Baba: Thousand names of Vishnu are famous because the thousand arms of Brahma are famous. How many arms does Brahma have? (Student: Thousand.) Thousand [arms] become helpers. So, what does Brahma become? (Student: Vishnu.) He becomes Vishnu. So, Brahma says: Why should I alone become Vishnu? A thousand people have helped me. So, I will adjoin the names of those people also with my name. I will not [become well known] alone. For example, ShivBaba says: Arey, why should I make only My name well known in the world? Shankar has also helped Me a lot, hasn’t he? He has helped Me heartily, so I will adjoin Shankar’s name with Mine. So, it is said Shiva Shankar, isn’t it? Similarly, what did Vishnuji mahaaraaj think? Arey, why should I make only my name famous? Along with my name, the thousand [arms] who have become helpers; have they become or not? (Student: They have.) When thousand arms of Brahma have become helpers in the form of Brahma, so he also took them (their name) along [with his name]. This is why there is the praise of Vishnu sahastrnaam. When is a name given? (Student: Task.) They must have performed some task only then will they be given name. So, along with Vishnu those thousand arms have performed the task in the form of the arms of Brahma. This is why the name Vishnu Sahastranaam has been given.

Shankarji does not have thousand names. Poor fellow, he remained alone. Is Shankarji shown with arms? (Student: No.) No. At the most four arms are shown [to him]. Two of Shankarji and two of Parvati. That is all. Not more than that.

Time: 07.50-10.20
Student: Why is Lakshmi shown at the right hand side?

Baba: One kind is of left arm. And one is right arm. For example, in the picture of the Kalpa Tree, there are religions on the left side. Which ones? Islam religion, Christian religion, Muslim religion; is there more adultery in these religions on the left side or is there more adultery in the religions on the right side, [i.e.] the Buddhist religion, Sanyas religion, Sikh religion? In which religions is the practice of divorce more prevalent? (Student: On the left side.) Are those (left side religions) dirty or are these (right side religions) dirty? (Student: They are dirty.) Those on the left side are dirty. Are dirty tasks performed, is dirt cleaned with the left hand or is dirt cleaned with right hand? (Student: With left hand.) Dirt is cleaned with the left hand.

So, does Lakshmi perform good task or does she perform bad task?
(Student: Good task.) She remains pure. And Lakshmi leads a pure life for birth after births. It is not about one birth. The very oath of Parvati was, birth after birth this is my vow that either I will marry Shambhu or I will remain unmarried (janam janam lagi ragar hamaari varau Shambhu na tu rahuun kuwaari). Either I will marry Shankarji or it is better for me to remain unmarried. I will not marry any other person; I should not be married to any other soul. So, should the soul which is full of purity for many births be kept on the right hand side or on the left hand side? (Student: Right hand.) This is why she has been placed [on the right hand side]. Was something wrong done? Did Narayan do something wrong? (Student: No.) No.
Second student: But the picture that Brahma Baba saw in the beginning which showed her pressing the feet [of Narayan]..
Baba: Is it a picture of the Confluence Age or of the Golden Age?
Second student: Baba, he did not like that, did he?
Baba: Brahma Baba did not have so much intelligence [that he would understand] which feet they were? It is about pressing the feet like intellect. When everyone tells his/her problems, difficulties to the world emperor, will his head not ache?
Second student: He removed that picture, didn’t he?
Baba: He did not have so much intelligence. He used to think that she must be pressing his physical feet. It is not about pressing the physical feet at all. Which feet was she pressing? (Student: The feet like intellect.) She presses the feet like intellect through her power of purity.

Time: 10.25-11.05
Student: Baba, the new world is going to come. It has been said in the Murli that everyone will be taken to Rajasthan at that time.

Baba: You will be taken to the place of kings (rajaon ke sthaan). That Rajasthan is physical. You will be taken to the place of kings. The capital of that place of kings will be Jaipur (abode of victory). Nobody will suffer defeat there. They will become only victorious there. It is said: ‘Jai Shri Ram ’, isn’t it?
Student: Baba, there is Jaipur in physical form as well, isn’t there?
Baba: Definitely. When it (Jaipur) is in physical form it will be in subtle form as well.

Time: 11.05 -12.50
Student: Bhim tore Jarasindh into two pieces in the war. He tore him apart from the middle. Then it joins once again. He becomes alive once again. And Krishna hinted to him (Bhim), to throw it (the two pieces of body) like this separately (in opposite directions).

Baba: Krishna gave a hint to Bhim, ‘separate him from the center and throw the two halves [of the body] in opposite directions’. What? (Student: What does it mean?) It means that he is from both sides. Jarasindhi. What? He is not a new Sindhi. What kind of Sindhi is he? Jara means old. He is an old Sindhi. He is very powerful. He is formed from both sides. When Brahma Baba left Sindh Hyderabad, where did he establish his shop? In Calcutta. So, did he come to the East or did he remain of the Western culture? (Student: Western.) No. Calcutta is in the East. He came to the East. So, two parts were formed. Prajapita was already from East. But where did he (Brahma Baba) too reach? He too came to East. So, both became one. So, what are both of them in reality? Both of them together are Jarasindhi. Who are the old Sindhis? Brahma Baba alone is not an old Sindhi. The soul of Ram is also an old Sindhi. ...(to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 09 Oct 2013

वार्तालाप-598, पोखरा (नेपाल), दिनांक 07.07.08
उद्धरण-भाग-२


समयः 12.50-17.08
जिज्ञासुः धृतराष्ट्र अंधा कैसे हो गया? किसका सूचक है?

बाबाः अज्ञान का अंधा हुआ। जिसने सारी धन-संपत्ति हड़प करके अपने कब्जे में ले ली। वो धृतराष्ट्र हो गया। क्या? यज्ञ में भी ऐसे ही हुआ। अलफ को मिला अल्लाह, बे को मिली बादशाही। तो अलफ कौन है? अलफ कौन है जो पुरुषार्थ में खड़ा रहता है? (जिज्ञासु – राम बाप) राम वाली आत्मा आदि में भी पुरुषार्थ में खड़ी थी और अंत में भी अभी? पुरुषार्थ में खड़ी है और अंत तक भी पुरुषार्थ में खड़ी रहेगी। इसलिए वो खड़ा डंडा हो गया। अलफ को मिला अल्लाह। उसको क्या मिल गया? अल्लाह। और बे? जो पड़ा डंडा होता है उसको कहते हैं बे उर्दू में। वो ब्रह्मा बाबा। आदि में तो खड़े थे, लेकिन 68 में क्या हुआ 69 में? हार्ट फेल हुआ और गिर गए। तो पड़ा डंडा हो गया। बे को मिली बादशाही। क्यों पड़ा डंडा हुआ? क्योंकि उनको इतना ज्ञान नहीं था कि ईश्वर आया हुआ है, भगवान आया हुआ है। भगवान आया हुआ है तो आपाधापी नहीं करना चाहिए। ये भी मेरा, वो भी मेरा, वो भी मेरा। नहीं। सब कुछ तेरा। यज्ञ की सारी संपत्ति जो है, सारा जो मान मर्तबा है वो खुद लेकरके बैठ गए। देना चाहिए था प्रजापिता को।

उनके साक्षात्कारों का रहस्य किसके द्वारा मिला? प्रजापिता के द्वारा। तो उसको गुरु मानना चाहिए ना। लेकिन ये बात उनकी बुद्धि में नहीं आई। क्यों नहीं आई? इसलिए नहीं आई कि ब्रह्मा बाबा की तो बड़ी दुकान थी। और भागीदार की? छोटी सी दुकान थी। तो छोटी सी दुकान छोड़ करके उनकी बड़ी दुकान में आकरके नौकर बना था। तो नौकर को गुरु कैसे मान लें? ये मान मर्तबा आ गया। तो अज्ञान के अंधे हुए या ज्ञान हुआ? अज्ञान के अंधे हुए। बाप को नहीं पहचाना। ये बाप का पार्ट है। इसलिए धृतराष्ट्र कहा जाता है। धृत माने धर ले। राष्ट्र माने धन संपत्ति। माने यज्ञ की सारी धन-संपत्ति उन्होंने अपने कब्जे में कर ली।

जिज्ञासुः फिर गांधारी ने पट्टी बांधा था ना ।
बाबाः तो कुमारका दादी ने अपने अज्ञान की पट्टी नहीं बांधी अपनी आँखों पे? हँ? बांधी कि नहीं बांधी? (जिज्ञासु: हाँ।) जानबूझकर सारा, सब कुछ समझती थी कि सच्चाई क्या है? फिर भी आँखों पे पट्टी बांध करके बैठ गई कि ये ज्ञान झूठा है। कौनसा ज्ञान? एडवांस ज्ञान। सबसे पहले तो एडवांस ज्ञान दादी के सामने रखा गया। जो जो बातें निकलती गईं एडवान्से ज्ञान में सारी लिख-लिखकरके हेड आफिस में भेजी जाती रही रजिस्टर्ड पोस्ट से। आँखों पे पट्टी बांध ली। नहीं, झूठा है। नहीं, गलत है। हम नहीं सुनेंगे। मुसलमान लोग क्या करते हैं? भगवान को याद करते हैं और कान में? कान में उंगली दे देते हैं। हम सच्चाई को सुनेंगे ही नहीं। उनके यहाँ मान्यता भी है, कि अगर गंगाजी का जल काबा में जाके कोई चढ़ा देगा तो दुनिया का, हमारे कुल का विनाश हो जाएगा। इसलिए बहुत मिलेट्री रखते हैं इस बात के लिए। असली बात क्या है? ये जो ज्ञान जल है, अगर माउंट आबू में पहुँच जाए और वहाँ के सब भाई बहनों को सुना दिया जाए, तो क्या होगा? इस्लाम धर्म का खात्मा हो जाएगा। ये जो कान में उंगली देने वाले हैं, हम नहीं सुनेंगे किसी की बात। वो सब नष्ट हो जाएंगे। अभी बीके में मुसलमानों की संख्या ज्यादा है या देवता धर्म की संख्या है? (जिज्ञासु – मुसलमानों की) सब मुसलमान हैं। कान में उंगली दे देंगे। हम नहीं सुनेंगे। हमको मत सुनाओ।

समयः 17.10-18.05
जिज्ञासुः बाबा, ये नीली मक्खी का अर्थ? किस समय का सूचक है बाबा?

बाबाः नीलिमा?
जिज्ञासुः नीली मक्खी।
बाबाः नीली मक्खी। हाँ।
दूसरा जिज्ञासुः अभी जो बाबा ने बताया मिठाई पर नीली मक्खी होती है। ... वो पूछ रही है कि नीली मक्खी किस बात का सूचक है?
बाबाः नीली मक्खी विषैली मक्खी का सूचक है। विषैली मक्खी है।
दूसरा जिज्ञासुः बेहद में पूछ रही है।
बाबाः हाँ, यहाँ भी विषैले, ज्ञान में चलने वाले विषैले, ज्ञान में भी चलते हैं और व्यभिचार में भी चलते रहते हैं।
जिज्ञासुः किस समय का माना जाएगा ?
बाबाः जो विषैली मक्खी होगी वो व्यभिचारिणी होती है। व्यभिचारिणी होने के कारण वो सत्यानाश करेगी। बीमारियाँ फैलायेगी। शहद की मक्खी अच्छी होती है।

समयः 18.12-19.55
जिज्ञासुः बाबा, भक्तिमार्ग में तुलसी और पीपल को भी पूजते हैं। उसका भी तो कोई अर्थ होगा?

बाबाः हाँ। तुलसी को भी पूजते हैं इसलिए कि तुलसी दो तरह की होती है। एक तुलसी होती है हरित तुलसी और दूसरी तुलसी होती है काले पत्तों वाली। तो काले पत्तों वाली जंगल में पनपती है। कांटों के जंगल में। और जो हरित तुलसी होती है उसको घर में रखते हैं। आँगन में रखी जाती है। तो वास्तव में दो माताएं हैं। क्या? काला पार्ट बजाने वाली दो माताएं हैं – एक काली और एक महाकाली। जो महाकाली है वो तो काली तुलसी हो गई। और एक काली है। जो काली है वो इतनी काली नहीं बनती है। माना हरे पत्ते वाली होती है। उसको घरों में पूजा जाता है। पूजा जाता है। पूजनीय तो है। भगवान के साथ रहकरके उसने पवित्रता तो थोड़े समय तक धारण की। लेकिन उसको दरवाज़े के बाहर रखा जाता है। कमरे के अन्दर? कमरे के अन्दर नहीं लाते हैं। क्यों? घर परिवार में दरवाज़े के बाहर आंगन में कौन बैठता है? और अन्दर कौन बैठता है? अन्दर राजा-रानी बैठते हैं। और बाहर? दास-दासियाँ बैठते हैं। तो तुलसी से थोड़ी बेवफाई हो गई ज्ञान में चलते-चलते। इसलिए वो दासी का पद मिल गया।

समयः 20.06-20.50
जिज्ञासुः इस तन से कभी शिव बाप बोलते हैं, कभी ब्रह्मा। कैसे पहचानेंगे कौन बोल रहा है?

बाबाः क्या?
जिज्ञासुः इस तन से कभी शिवबाबा बोलते हैं और...?
बाबाः लेकिन मुरली में क्या बोला? मुरली में तुमको डायरेक्शन क्या दिया? तुम क्या समझो? मुरली में तो डायरेक्शन दिया तुम सदैव यही समझो कि शिवबाबा बोलते हैं। क्या? इससे तुमको शिवबाबा ही याद रहेगा। तुम ऐसा क्यों समझते हो ये ब्रह्मा बाबा बोलते हैं, ये राम वाली आत्मा बोलती है? राम वाली आत्मा और कृष्ण वाली आत्मा तो 63 जन्म में बुद्धु बनके रहती है। अज्ञानी बन जाती है। किसको याद करना चाहिए? तुम हमेशा ये ही समझो कि हमको शिवबाबा मिल गया। राम-कृष्ण की आत्माएं हमें पढ़ाई पढ़ाने वाली नहीं हैं। हमको पढ़ाई पढ़ाने वाला कौन है? (जिज्ञासु – शिव बाप) राम-कृष्ण से भी जो ऊँच है।

Disc.CD No.598, dated 07.07.08 Pokhra (Nepal)
Extracts-Part-2


Time: 12.50-17.08
Student: How did Dhritrashtra (Father of Kauravas) become blind? Whom does it indicate?

Baba: He is blind due to ignorance. The one who usurped and took the entire wealth and property in his possession happens to be Dhritrashtra. What? It happened like this in the Yagya as well. Alaf got Allah (God). Be got emperorship (baadshaahi). So, who is Alaf? Who is the Alaf who remains standing in purusharth (spiritual effort)? (Student: Father Ram.) The soul of Ram remained standing in purusharth in the beginning [of the Yagya] as well as now in the end? It is standing in purusharth and it will remain standing in purusharth till the end as well. This is why he happens to be the vertical line. Alaf got Allah. What did he get? Allah. And Be? The horizontal line is called Be in Urdu. That is Brahma Baba. He was standing in the beginning. But what happened in 68 - 69? He suffered heart failure and [he] fell down. So, he happened to be the horizontal line. Be got the emperorship. Why is he the horizontal line? It is because he did not have the knowledge that God has come. When God has come, you should not become selfish (aapadhaapi). This is also mine, that is also mine; that also is mine. No. Everything is Yours (God’s). He took the entire property of the Yagya, the entire respect and position for himself. He should have given it to Prajapita.

Through whom did he get the [explanation of the] secrets of his visions? Through Prajapita. So, he should have considered him guru, shouldn’t he? But this did not come in his intellect. Why not? It did not come [in his intellect] because Brahma Baba had a bigger shop. And what about the partner? He had a small shop. So, he had left his small shop and became a servant in his bigger shop. So, [he thought], how can I accept a servant as guru? He became conscious of his position. So, was he blind due to ignorance or did he have knowledge? He was blind due to ignorant. He did not recognize the Father, [that] this is the Father’s part. This is why he is called Dhritrashtra. Dhrit means the one who takes into his possession. Rashtra means wealth and property. It means that he took under his possession the entire wealth and property of the Yagya.

Student: Then Gandhari blindfolded herself, didn’t she?
Baba: So, didn’t Dadi Kumarika blindfold her eyes with ignorance? Did she tie it or not? (Student: Yes.) [She blindfolded herself] deliberately; she understood everything regarding what truth is. Yet, she blindfolded her eyes, [saying] this knowledge is false. Which knowledge? The advance knowledge. In fact, the advance knowledge was presented before Dadi first. Whichever [new] topic emerged in the advance knowledge was written and sent by register post to the head office. She blindfolded herself [saying]: No, it is false. No, it is wrong. I will not listen to it. What do Muslims do? They remember God and what do they do to their ears? They put a finger in their ears. We will not listen to truth at all. They (people of Islam) also have a belief among them that if someone makes a religious offering of the water of the Ganges at Kaaba , then their clan will be destroyed. This is why they keep a big military (security) for this purpose. What is the truth [behind that belief]? What will happen if this water of knowledge reaches Mount Abu and all the brothers and sisters there are explained that? Islam religion will be destroyed. All these people who put a finger in their ears that we will not listen to anyone will be destroyed. Is the number of Muslims more among the BKs or is the number of [followers of] deity religion more? (Student: Number of Muslims.) All are Muslims [there]. They will put a finger in the ears [and say:] I will not listen. Don’t narrate to me.

Time: 17.10-18.05
Student: Baba, what is the meaning of this blue fly (neeli makkhi)? Baba, it is a memorial of which time?

Baba: Neelima (blueness)?
Student: Neeli makkhi (blue fly).
Baba: Neeli makkhi? Yes.
Second student: Baba said just now that blue flies sit on sweets. ... She wants to ask what does the blue fly indicate.
Baba: The blue fly is an indication of a poisonous fly. It is a poisonous fly.
Second student: She is asking in an unlimited sense.
Baba: Yes. There are poisonous ones here as well. There are poisonous ones among those who follow the knowledge. They follow the knowledge as well as practice adultery simultaneously.
Student: It will be considered of which time?
Baba: The poisonous fly is adulterous. Because of being adulterous it will bring ruination. It will spread diseases. The honey bee is good.

Time: 18.12-19.55
Student: Baba, Tulsi and Peepal (the holy fig tree) are also worshipped in the path of Bhakti. There must be some meaning in that too, mustn’t there?

Baba: Yes. Tulsi is also worshipped because… Tulsi is of two kinds. One is green Tulsi and the other Tulsi has dark leaves. The one with dark leaves flourishes in jungle, in the jungle of thorns. And the green Tulsi is kept at home. It is kept in the courtyard (of the house). Actually there are two mothers. What? There are two mothers who play a dark role – One is Kaali and the other is Mahakaali. Mahakaali is the dark Tulsi and the other is [just] Kaali. Kaali does not become so dark. It means that it has green leaves. It is worshipped in homes. It is worshipped [that means] it is indeed worship worthy. It certainly imbibed purity for some time while staying with God. But it is kept outside the door. Is it kept inside the room? It is not brought inside the room. Why? Who sits in the courtyard outside the door in a household? And who sits inside? The king and the queen sit inside. And outside? The maids and servants sit [outside]. So, Tulsi showed some unfaithfulness (bevafaai) while following the path of knowledge. This is why she got the position of a maid (daasi).

Time: 20.06-20.50
Student: Sometimes the Father Shiva and sometimes Brahma speaks through this body. How will we recognize that who is speaking?

Baba: What?
Student: Sometimes ShivBaba speaks through this body and….
Baba: But, what was said in the Murli? What direction is given to you in the Murli? What should you think? The direction given in the Murli is: always think that it is ShivBaba who speaks. What? This way you will remember only ShivBaba. Why do you think, this is Brahma Baba speaking and this is the soul of Ram speaking? The soul of Ram and the soul of Krishna have been unintelligent in the 63 births. They become ignorant. Whom should you remember? You always think that you have found ShivBaba. The souls of Ram and Krishna do not teach us knowledge. Who teaches us the knowledge? (Student: The Father Shiva.) The one who is greater than Ram and Krishna... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 10 Oct 2013

वार्तालाप-598, पोखरा (नेपाल), दिनांक 07.07.08
उद्धरण-भाग- 3


समयः 20.55-21.35
जिज्ञासुः बाबा, एक मुरली में बोला है ब्रह्मा, विष्णु, शंकर पहले जरूर ब्रह्मा की औलाद बने होंगे।

बाबाः जरूर। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर पहले जरूर ब्रह्मा की औलाद बने होंगे। बिल्कुल सही बात। अभी जो ब्रह्मा का पार्ट है। कौन है? जगदम्बा। है कि नहीं? विष्णु का पार्ट है (जिज्ञासु – वैष्णवी) वैष्णवी। शंकर का जो पार्ट है, राम वाली आत्मा। ये तीनों बेसिक नालेज में पढ़ाई पढ़ते रहे हैं कि नहीं? (जिज्ञासु – पढ़ते रहे हैं) तो ब्रह्मा की औलाद बने कि नहीं?

समयः 21.40-25.30
जिज्ञासुः बाबा, जैसे अभी नेपाल एरिया है। यहाँ तो दिल्ली वगैरह का फोन लगता नहीं है। बाबा से कनेक्शन हो नहीं पाता।

बाबाः नेपाल में...।
जिज्ञासुः जितना नेपाल है ये। आई.एस.डी. फोन लग जाता है। और बाप से सारी बात माताएं कन्याएं करना चाहती हैं सलाह करके। वो फिर बाबा जब आते हैं तो जिस स्पीड से आते हैं, उसमें सब बोल नहीं पाती हैं माताएं कन्याएं।
बाबाः तो ईमेल तो चला है। ई-मेल तो...
जिज्ञासुः ई-मेल भी तो, माता-कन्याएं तो इतना फ्री नहीं हैं। ये बंधन में हैं मोस्ट्ली करके।
बाबाः क्या बंधन है? ईमेल में तो उतना पैसा भी खर्च नहीं होता।
जिज्ञासुः बंधन में तो हैं ना यहाँ पर।
बाबाः तो क्या हुआ? मार्केट नहीं जाती हैं क्या? माताएं मार्केट नहीं जाती हैं?
जिज्ञासुः मार्केट में तो जाती हैं।
बाबाः तो मार्केट में ही दुकान भी होती है कंप्यूटर की।
दूसरा जिज्ञासुः चलाना नहीं आता।
बाबाः चलाने की जरूरत नहीं। लिख करके ले जाएं और उसे दे दें वो (दुकानदार) छाप करके भेज देगा।
जिज्ञासुः वो तो अज्ञानी आत्मा है। उसको पढ़के लिखेगी फिर तो। जो अज्ञानी आत्माएं हैं बाहर की तो वो बाबा के सामने जो लिखेंगे वो तो अज्ञानी आत्माएं पढ़ लेंगी सारा।
बाबाः माना पोतामेल की बात कर रहे?
जिज्ञासुः जो अपने मन की कोई भी बात पूछना चाहती है, कोई सलाह लेना चाहती हैं तो निमित्त रूप में तो यहाँ भाई हैं मोस्ट्ली करके मैसेज दे देता है, या कोर्स कराने या भट्ठी के लिए ले जाने के निमित्त।
बाबाः हाँ, हाँ। तो जल्दी-जल्दी सर्विस करो। जल्दी-जल्दी पार्टियाँ जाएं। उनके द्वारा भेज दो। क्यों नहीं सर्विस करते? क्यों घर में बैठे रहते? बाबा ने मना कर दिया है क्या सर्विस मत करो?
तीसरा जिज्ञासुः हिसाब-किताब है ना बाबा।
बाबाः इतनी ढ़ेर सारी ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ दुनिया में फैले हुए हैं। इतनी ढ़ेर सारी बाहरी दुनिया में पब्लिक फैली हुई है। किसी की भी सेवा करो। सेवा करके उनको तैयार कर दो। पार्टी तैयार हो जाए, नेपाल से पार्टियाँ जाती रहेगी तो साथ-साथ चिट्ठियाँ भी जाती रहेंगी।
जिज्ञासुः नहीं, चिट्ठियाँ तो जाती हैं। मान लो कोई सलाह लेनी है, अभी तुरंत सलाह लेनी है, निमित्त भाई से लेती है ना।
बाबाः क्या लेनी है?
जिज्ञासु: कोई भी सलाह लेनी है...
बाबा: मुरली में बोला है हर समस्या का समाधान मुरली से मिल सकता है। ज्यादा अज्ञान मत फैलाओ।
जिज्ञासुः तो भाईयों से सलाह लेती है ना तो ।
बाबाः क्यों लेती हैं जब मुरली से सलाह मिलती है हर चीज़ की? रोज की मुरली को ध्यान से नहीं पढ़ते हैं, ध्यान से अपने जीवन में टैली नहीं करते हैं तो कोई समस्या का समाधान नहीं मिल पाता।
जिज्ञासुः सारी बातें हैं मगर निमित्त भाई है, कोर्स करा दिया, मैसेज दे दिया, भट्ठी कर ली। ठीक हो गया।
बाबाः यहाँ (एडवांस पार्टी में) निमित्त भाई है ही नहीं। ये ब्रह्माकुमारियों की तरफ से बनाए जाते हैं। बाबा की तरफ से नहीं बनाए जाते।
जिज्ञासुः तो सारी बातें उनको बताती हैं। उनसे पूछती हैं।
बाबाः क्यों बताती हैं जब मुरली में बाबा ने...?
जिज्ञासु: हो रहा है ना, हो तो रहा है ना सभी जगह।
बाबा: मुरली में तो बाबा ने मना कर दिया है कि भाईयों को निमित्त नहीं बनाना है। बाबा ने तो गीता पाठशाला की इन्चार्ज किसको बनाया?
जिज्ञासुः ये तो बाप से साफ-2 बोले ना। बाप से बोलना चाहिए बाप साकार में है तो।
बाबाः क्या?
जिज्ञासुः कोई भी बात पूछनी है, राय लेनी है...।
बाबाः अमृतवेले बैठते हैं याद में?
जिज्ञासुः ये तो।
बाबाः ये तो। ये तो क्या होता है, अमृतवेले याद में बैठो। बाबा ने कहा अव्यक्त हो जाओ। अव्यक्त होकरके बाबा से डायरेक्ट बात करो। डायरेक्ट बात का जवाब मिलेगा। जवाब सही भी होता है जो याद में बैठ करके जवाब लिया जाता है। लेकिन याद में बैठते ही नहीं। अमृतवेले ही सारा डब्बा गोल हुआ पड़ा है।
जिज्ञासुः और पार्टियां ले जाने के लिए मान लो मोस्टली करके भी नेपाल में ये ही हो रहा है। पार्टियाँ भी जो भी ले जाते हैं तो एक ही भाई पश्चिम में जाएगा, एक ही भाई पूरब में जाएगा। एक ही भाई बीच में जाएगा। एक ही भाई, तो वो...
बाबाः तो माताएं नहीं जाती भाईयों के साथ?
जिज्ञासु: हाँ जी?
बाबा: भाई के साथ माताएं भी तो जातीं हैं?
जिज्ञासुः वो एक भाई जब तक नहीं आएगा तब तक पार्टी नहीं जाती है।
बाबाः हाँ तो माताएं भी तो जाती हैं भाई के साथ। भाई के साथ माताएं जाती हैं कि नहीं?
जिज्ञासुः और भी तो हैं ना वहाँ पर। और भी लोकल में भाई बहन भी तो हैं ना। वो पार्टी ले जा सकते हैं।
बाबाः नहीं। भाई भले ज्ञान भी सुनाए लेकिन माता को बीच में रखे। भाई भाई को ज्ञान सुनाए, उसमें तो कोई आपत्ति ही नहीं। लेकिन भाई अगर माता को ज्ञान सुनाता है कम उमर की माता है, वो कोई कन्या है तो बीच में माता को रख दे। ऐसी बात तो नहीं कि भाई ज्ञान सुना ही नहीं सकता।

Disc.CD No.598, dated 07.07.08 Pokhra (Nepal)
Extracts-Part-3


Time: 20.55-21.35
Student: Baba, it has been said in a Murli that Brahma, Vishnu and Shankar will have definitely become Brahma’s children first of all.

Baba: Definitely. Brahma, Vishnu and Shankar will have definitely become Brahma’s children first of all. It is absolutely correct. Who is [playing] Brahma’s role at present? Jagadamba. Is she [present] or is she not? Vishnu’s role is… (Student: Vaishnavi). Vaishnavi. Shankar’s role is [played by] the soul of Ram. Did all the three of them kept studying the basic knowledge or not? (Student: They kept studying.) So, did they become Brahma’s children or not?

Time: 21.40-25.30
Student: Baba, for example, this is the Nepal area. Here, we are unable to make a call to Delhi, and so on. We are unable to make a connection with Baba.

Baba: In Nepal…
Student: This entire area of Nepal…, we have to make ISD (International Subscribers Dialing) phone call [to speak in India]. And all the mothers and virgins want to talk to the Father and seek advice. When Baba comes, the speed at which he comes [and goes] all the mothers and virgins are unable to talk [to Baba].
Baba: The email is in use, isn’t it? Email can...
Student: As regards email also, mothers and virgins are not so free. Mostly they are in bondage.
Baba: What is the bondage? Sending email does not involve much expenditure either.
Student: But they are in bondage here, aren’t they?
Baba: So, what? Don’t they go to the market? Don’t the mothers go to the market?
Student: They do go to the market.
Baba: So, there is computer shop (cyber café) also in the market.
Second student: They do not know how to operate [computers].
Baba: There is no need to operate. Write it on a paper and take it. Give it to him. He (the shopkeeper) will type it and send it.
Student: He is an ignorant soul. He will read it and type it. The outsiders, the ignorant souls will read whatever we wish to write in front of Baba.
Baba: Are you talking about potamail ?
Student: Anything that is in their heart which they want to ask or wish to take advice, so here, mostly brothers are instrument who give message or give course or take them to bhatti.
Baba: Yes, yes. So, do service quickly. If the parties go in quick succession, send [letters] with them. Why don’t you do service? Why do you sit at home? Has Baba forbidden you from doing service?
Third Student: Baba, there are karmic accounts, aren’t there?
Baba: There are so many Brahmakumar-kumaris spread all over the world. There is so much expansion of public in the outside world. You can serve (tell the knowledge to) anyone. Serve them and prepare them [for bhatti]. When the parties become ready; if parties keep going from Nepal [to India], then the letters will also go along with them.
Student: No. Letters are certainly sent. Suppose they wish to seek advice, they wish to seek advice just now; they seek it from the brothers who are instrument.
Baba: What do they wish to seek?
Student: If they want to take any advice…
Baba: It has been said in the Murli that the solution for every problem can be obtained from Murli. Do not spread more ignorance.
Student: [But] they seek advice from the brothers.
Baba: Why do they seek [advice from them] when advice on everything is received through Murli? If you do not read the daily Murli carefully, you don’t tally (compare) it carefully with your life, then you are unable to get the solution to any problem.
Student: Everything is definitely there [in the Murli] but there are brothers who are instrument; they give the course, the message, do the bhatti. [So, everyone thinks], all is fine.
Baba: Here [in the Advance Party] no brother is instrument at all. They are appointed by Brahmakumaris. They are not appointed by Baba.
Student: So, they tell them everything. They ask them.
Baba: So, why do they tell them when Baba has said in the Murli…?
Student: It is happening like that. It is happening like that everywhere.
Baba: Baba has prohibited in the Murlis that brothers should not be made instrument? Whom has Baba make in charge of the Gitapathshalas ?
Student: They should tell Baba clearly. When the Father is present in corporeal form they should tell Him.
Baba: What?
Student: If they wish to ask anything or seek advice...
Baba: Do you sit in remembrance at Amrit Vela ?
Student: Now regarding this...
Baba: Now regarding this ... What does ‘regarding this’ mean? Sit in remembrance at Amrit Vela. Baba has said to become Avyakt (subtle). Become Avyakt and talk to Baba directly. You will get the reply directly. The reply that is taken while sitting in remembrance is correct too. But you don’t sit in remembrance at all. The Amrit Vela itself is completely ruined.
Student: And as regards taking parties, mostly this very thing is happening in Nepal. Whoever takes the parties [for bhatti], the same brother goes in the west, the same brother goes in the east; the same brother will go in the center. The same brother...
Baba: So, don’t the mothers go along with the brother?
Student: What?
Baba: The mothers also go along with the brother, don’t they?
Student: Until that particular brother comes, the party does not go.
Baba: Yes, so, the mothers also go along with the brother, don’t they? Do mothers go along with the brother or not?
Student: There are others also over there, aren’t there? There are other brothers and sisters of the local area over there, aren’t there? They can take the party.
Baba: No. The brothers may narrate knowledge but they should keep a mother along with them. If a brother narrates knowledge to another brother, there is no objection to that at all. But if the brother narrates knowledge to a mother; if the mother is young, if she is a virgin, then he should keep a mother along with him. It is not that brother cannot narrate knowledge at all... (to be concluded)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 11 Oct 2013

वार्तालाप-598, पोखरा (नेपाल), दिनांक 07.07.08
उद्धरण-भाग-4


समयः 28.00-31.45
जिज्ञासुः कोई मात-पिता की इकलौती बेटी होती है ना बाबा। उसको माता-पिता भी पढ़ाते लिखाते हैं। फिर बाद में वो लड़की को जिम्मेवारी संभालना पड़ता है मात-पिता का। फिर नौकरी करने के लिए मना क्यों है बाबा?

बाबाः कन्या को तो नौकरी करनी नहीं। कन्या माँ-बाप की परवरिश करेगी?
जिज्ञासुः इकलौती होती है ना।
बाबाः इकलौती होती है सो क्या हुआ? इकलौती होती है, कन्या दूसरे घर की होती है, पराये घर की। कन्या को घर में डाल के रखेंगे वो पतित नहीं बन पड़गी? वेश्या बन जाएगी। ये गलत बात है। ये तो गंदा धंधा हो गया। कोई भी कन्या को घर में डाल करके माँ-बाप नहीं रखते।
दूसरा जिज्ञासुः वो कहना चाह रही है कि माँ-बाप बहुत लाचार हैं। बेटा नहीं है।
बाबाः क्या लाचार हैं?
दूसरा जिज्ञासुः वो काम ही नहीं कर सकते। रोटी खाने को भी नहीं है।
बाबाः ये पूर्व जन्मों का किसका हिसाब-किताब है?
दूसरा जिज्ञासुः ये माँ-बाप का है।
बाबाः बच्ची का है?
दूसरा जिज्ञासुः नहीं।
बाबाः फिर बच्ची के सर के ऊपर क्यों डालना?
दूसरा जिज्ञासुः तो बच्ची उनको पैदा हुई है।
बाबाः पैदा होने का मतलब ये हुआ कि उसके ऊपर चढ़ बैठो? ये कोई बात नहीं होती है।
दूसरा जिज्ञासुः नौकरी नहीं करनी है?
बाबाः न। कन्या को नौकरी नहीं करनी है। कन्या नौकरी करेगी तो वेश्या बनेगी। दुनिया नहीं छोड़ेगी उसे। और इसका पाप किसके ऊपर चढ़ेगा?
दूसरा जिज्ञासुः माँ-बाप पर।
बाबाः माँ-बाप के ऊपर चढ़ेगा। पहले पूर्वजन्म में पाप करके तो आए ही हैं जो निपूते हुए। और फिर और दूसरा पाप कर दो। विदेशों में ऐसा होता है कि कन्या को महारानी बनाके बैठा देंगे पढ़ा-लिखा के। विदेशों की तो बात ही दूसरी है। वहाँ तो वेश्यालय ही चलता है। धड़ाधड़ डायवोर्स दो और धड़ाधड़ दूसरी शादियाँ करो। वेश्या के ऊपर वेश्या बनाते चले जाओ।
दूसरा जिज्ञासुः तो कुछ माताएं ऐसे दुकान के लिए पूछते हैं, मजबूरी है।
बाबाः दुकान पे बैठा देंगे? अरे दुकान पे बैठा दो चाहे नौकरी करा दो, बात तो एक ही है। जात-जात के लोगों की नज़र पड़ेगी उसके ऊपर। वो तो कोमल कन्या है। (जिज्ञासु : माता को भी दुकान में रखना नहीं चाहिए।) माता की बात अलग है। माता मेच्योर्ड हो चुकी है, बैठ सकती है। घर में कोई कमाने वाला नहीं है तो माता बच्चों की परवरिश करेगी ही। कोई-कोई पति ऐसे होते हैं काम ही नहीं करते कुछ भी। कोई काम नहीं करेंगे सुबह से शाम तक। घर में बैठे, निठल्ले बैठे रहेंगे। शराब पीते रहेंगे और खींच-खींच के खाते रहेंगे। अब माता बिचारी क्या करे? उसे तो बच्चों को पालना ही है।
दूसरा जिज्ञासुः कुमार है कोई 12 साल का, कोई 13 साल का और उनका यहाँ कोई नहीं है मान लो। और वो चाहते हैं बाबा के पास बाबा तो भाईयों को सरेण्डर करते नहीं हैं। तो वो कुमार कहाँ जाएगा?
बाबाः कही नौकरी करने दो। कही दुकान पे नौकरी कर ले।
दूसरा जिज्ञासुः यहाँ कोई नहीं है। रहना ही नहीं चाहते बाहर की दुनिया में।
बाबाः नहीं रहना चाहते तो सबको बाबा थोड़े ही रखेंगे। काम का होगा कुमार तो रखेंगे। और वहाँ जाके सांडगिरी करने लगा तो कैसे रखेंगे? अरे कन्याओं की परवरिश करने के लिए रखा हुआ है आश्रम, न कि कुमारों के लिए रखा है। कुमार चौराहे पर पड़ा रहे, कहीं भी सेवा करता रहे किसी दुकान पे। अपनी रोटी दाल कमाता रहेगा। कन्या रहेगी चौराहे पर? कन्याओं के लिए तो शरण चाहिए। और शरण दुनिया में कोई देता नहीं है। गउशाला गाई हुई है। बैलशाला नहीं गाई हुई है। हाँ, कोई सचरित्र अच्छा कुमार हो तो...
दूसरा जिज्ञासुः एक बार सेवा के लिए तो जा सकते हैं ना। कम्पिल में सेवा में जाएंगे, बाबा देखेंगे, फिर अपनेआप ही उनको रख लेंगे।
बाबाः हाँ,जी। हाँ, जी।

समयः 32.50-34.50
जिज्ञासुः बाबा, कृष्ण के सर में जो मोर का पंख दिखाते हैं वो क्यों दिखाते हैं?

बाबाः श्री कृष्ण ने जैसी पवित्रता धारण की होगी ऐसी पवित्रता धारण करने का पुरुषार्थ और किसी ने नहीं किया। क्या? इसलिए पवित्रता की निशानी मोर दिखाते हैं क्योंकि मोर पवित्र पक्षी है। व्यभिचार में जाने की तो बात दूर, वो तो विकार में भी नहीं जाता। क्या? (जिज्ञासु: शास्त्रोंभ में लिखा होता है ना बाबा 16000 गोपी उनको होता है) 16000 गोपियों का मतलब ये थोड़े ही है को वो पतित बनता था। उसकी शक्ति क्षीण होती थी क्या? जब शक्ति क्षीण नहीं होती तो पतित किस बात का? शिवबाबा को पतित कहेंगे? (जिज्ञासु – नहीं कहेंगे) फिर?
दूसरा जिज्ञासुः शास्त्रों में लिखा है ना।
बाबाः शास्त्रों में लिखा है तो मन्दिरों में रोज जाके देखते भी तो हो वो शिवलिंग कहाँ बैठा हुआ है? देखते हो? तो पतित है कि पावन है? (जिज्ञासु – पावन है) माथा क्यों टिकाते हो? क्योंकि वहाँ होते हुए भी वो इन्द्रियों से पतित नहीं है। शक्ति क्षीण नहीं होती है। अमोघवीर्य कहा जाता है। इतनी सी बात लोगों को समझ में नहीं आती है। तो फिर विरोध करते हैं।

Disc.CD No.598, dated 07.07.08 Pokhra (Nepal)
Extracts-Part-4


Time: 28.00-31.45
Student: Baba, suppose a daughter is the only child of her parents. The parents educate her. Later that girl has to take the responsibility of the parents. Then Baba, why is she prohibited to do job?

Baba: A virgin should never do job. Will a virgin sustain her parents?
Student: She is the only child.
Baba: She is the only child? So, what? If she is the only child, a virgin belongs to another home, another family. If the virgin is kept at home, will she not become degraded? She will become a prostitute. This is wrong. This is a bad business. No virgin is kept at home by the parents.
Second student: She wants to say that the parents are very helpless (laachaar). They do not have a son.
Baba: How are they helpless?
Second student: They cannot work at all. They do not even have rotis (bread) to eat.
Baba: Whose karmic account of the past births is this?
Second student: It is of the parents.
Baba: Is it of the daughter?
Second student: No.
Baba: Then why do you put it (the responsibility) on the head of the daughter?
Second student: The daughter has born to them.
Baba: If she is born [to them] does it mean that they should sit on her head (force the responsibility on her)? This is not proper.
Second student: She should not do a job?
Baba: No. A virgin should not do a job. If a virgin does a job, she will become a prostitute. The world will not spare her. And who will accumulate that sin?
Second student: The parents.
Baba: The parents will accumulate [its sin]. They have already committed sins in the previous births because of which they did not give birth to a son. And then they perform another sin [by asking the daughter to do jobs]. It happens in the foreign countries that the daughter is made a queen by being educated. The topic of foreign countries is totally different. Prostitution is practiced there. They give divorce quickly and get married quickly. They go on making prostitutes.
Second student: Some mothers ask whether the daughters can be made to sit in the shop if there is helplessness.
Baba: Will you make her sit in a shop? Arey, whether you make her sit at the shop or whether you ask her to do a job, it is one and the same. People of different categories will look at her. She is a delicate virgin. (A student: Mother should not be made to sit at shop either.) The topic of a mother [sitting at the shop] is different. If the mother has become mature she can sit. If there is no one earning at home the mother will definitely sustain the children. There are some husbands who don’t do any job. They don’t any work from morning till the evening. They sit idly at home. They keep drinking [alcohol] and eat by seizing forcibly. What can the poor mother do? She has to sustain the children in any way.
Second student: If there is a 12 years old, 13 years old kumar (bachelor) and suppose he does not have any relative here. And if he wishes to go to Baba, but Baba does not allow brothers to surrender. So, where will that kumar go?
Baba: Let him do some job at some place. He can work at a shop somewhere.
Second student: He does not have any relative here. He does not wish to live in the outside world at all.
Baba: If he does not wish to stay [in the outside world], then Baba will not keep everyone. If the kumar is useful, then he will be kept. And if he goes there [to the mini-Madhubans] and shows the bull instinct, then how can he be kept there? Arey, the ashram is meant to take care of the virgins or is it meant for the kumars? Kumar may lie on the crossroads; he can serve at any shop. He will keep earning bread for him. Can a virgin live on the crossroads? Virgins definitely require asylum. And nobody gives asylum in the world. Gaushaala (cowshed) is famous. Bailshaala (bull shed) is not famous. Yes, if there is a kumar with a good character (sacharitra)...
Second student: He can go once for service, can’t he? If he goes to Kampil for service; Baba will observe and he himself will keep him.
Baba: Yes. Yes.

Time: 32.50-34.50
Student: Baba, the peacock feather that is shown on the head of Krishna; why is it shown?

Baba: Nobody made purusharth of assimilating purity like Krishna did. What? This is why the sign of purity is shown in the form of peacock [feather] because peacock is a pure bird. The question of indulging in adultery is a far-off thing; it does not even indulge in lust. What? (Student said: it is written in the scriptures that he has 16000 gopis. ) 16000 gopis does not mean that he used to become sinful? Did he used to lose his vigour? When he did not lose vigour at all, how can he be sinful? Will ShivBaba be called sinful? (Student: He will not.) Then?
Second student: It has been written in the scriptures, isn’t it?
Baba: It has been written in the scriptures; then you also go daily and see in the temples where that Shivling is placed? Do you see? So, is he sinful or is he pure? (Student: Pure.) Why do you bow your head? It is because despite being there, He is not sinful through the parts of the body. The vigour does not decrease. He is called Amoghveerya (the one whose vigour does not drain downwards). People don’t understand this simple thing therefore, they oppose... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 12 Oct 2013

वार्तालाप-598, पोखरा (नेपाल), दिनांक 07.07.08
उद्धरण-भाग - 5


समयः 34.40-38.35
जिज्ञासुः दुनिया में कोई वध का काम करते हैं।

बाबाः हत्या कर देते हैं। दुनिया में हत्या कर देते हैं।
जिज्ञासुः उसको सज़ा मिलेगा कि नहीं बाबा?
बाबाः क्यों नहीं मिलेगा?
जिज्ञासुः इस जन्म में तो वो लोग कहते हैं कि हमारा पेशा है।
दूसरा जिज्ञासुः हमारा धंधा है ये।
बाबाः हाँ, हाँ। राजाओँ के जमाने में राजा आर्डर करता था इसको फांसी दे दी जाए। और उसको फाँसी देने का काम राजा तो नहीं करता था। जो वध करने वाले चाण्डाल होते हैं वो चाण्डाल का धंधा था वध करना। तो वो फाँसी लगाता था। उसका धंधा है। वो थोड़ेही फाँसी लगाता है। जो फाँसी लगाने का आर्डर दे रहा है...
जिज्ञासुः वो लगाने का दोष है या?
बाबाः उसका कोई दोष-वोष (नहीं)। उसका तो धंधा है।
दूसरा जिज्ञासुः नहीं बाबा, वो जो कह रहा है लगाने के लिए वो उसका कर्म देख के बोल रहा है, वो बाजार में किसी को मार रहा है, किसी की हत्या की है। कोर्ट ने क्लीयर कर दिया कि इसको फाँसी दिला दो। तो फिर उसको आर्डर देने वाले को कैसे लगेगा दोष फिर?
बाबाः जो फाँसी देने का आर्डर दिया है वो तो कोर्ट ने दिया।
दूसरा जिज्ञासुः तो उसको लगेगा ना दोष।
बाबाः नहीं। कोर्ट को नहीं लगा।
दूसरा जिज्ञासुः नहीं, जो कह रहा है कि इसको फाँसी दे दो।
बाबाः जो कह रहा है तो उसको दोष क्यों लगेगा? उसने जो पाप कर्म किया है उस पाप कर्म की सज़ा दी गई।
दूसरा जिज्ञासुः तो उसको भी तो लगेगा ना।
बाबाः नहीं। न कोर्ट को फाँसी की सज़ा है न जो वध करने वाला है उसको कोई सज़ा मिलेगी।
दूसरा जिज्ञासुः जो कर्म किया उसी को लगेगी।
बाबाः कर्म किसने किया? कर्म तो उसी ने किया। गलत काम क्यों किया? गलत काम किया तो कोर्ट ने सज़ा सुना दी। हत्या कर दो इसकी। और जो हत्या करने वाला चाण्डाल है, उसको तो पैसा मिलता है, रोटी दाल मिलती है इसी बात की।
तीसरा जिज्ञासुः बाबा ऐसा शरीर छोड़ता है वध करने के बाद। जैसे वो फाँसी देने के बाद आत्मा निकल जाती है तो उनको जल्दी पुनर्जन्मस मिलता है या वो क्या प्रेत बनके घूमती है?
बाबाः हत्या तो अकाले मौत हो गई। हत्या जो हुई वो तो अकाले मौत हो गई। उसकी थी थोड़ेही? जिसकी अकाले मौत होती है उसको सूक्ष्म शरीर धारण करना पड़ता है।
जिज्ञासुः जबरदस्ती किसी ने हत्या किया है उसका इच्छा नहीं था ना बाबा। उसका आत्महत्या करने का इच्छा तो नहीं था ना ।
बाबाः आत्म हत्या? अपने आप हत्या कर दी अपनी?
जिज्ञासुः नहीं, दूसरे ने हत्या किया है।
बाबाः उसे आत्महत्या थोड़ेही कहा जाता है। जो अपने आप अपनी हत्या कर ले उसको (आत्म)हत्या कहा जाता है। और दूसरे ने कोई ने हत्या कर दी उसको आत्महत्या नहीं कहा जाता है।
जिज्ञासुः फिर वो आत्मा तड़पने का क्यों?
बाबाः ये कहना क्या चाहते हैं?
दूसरा जिज्ञासुः मतलब कि जो मरना नहीं चाहता, किसी और ने मार दिया, तो वो तड़प क्यों रहा है?
तीसरा जिज्ञासुः ईविल सोल के रूप में भटकती क्यों है? उसको जल्दीर पुनर्जन्मत मिलना चाहिए ना।
बाबाः जिसने और ने मारा है पूर्व जन्म का हिसाब-किताब है ना तभी तो मारा। पूर्व जन्म का कोई हिसाब-किताब है कि उसने उसको हत्या कर दी। ऐसे थोड़ेही कोई किसी को मार देगा। या इस जन्म का हिसाब-किताब है। इसलिए मारा।
तीसरा जिज्ञासुः तो उसका पुनर्जन्म कब तक नहीं होगा?
बाबाः ये कोई निश्चित नहीं होता है। किसी को जल्दी मिल जाता है किसी को देर में मिलता है। वो भी पूर्व जन्मों के हिसाब-किताब के अनुसार। लेकिन ये हत्या करना, अपनी आत्महत्या करना, ये सब गंदे काम हैं। ये अच्छी आत्माओं के काम नहीं हैं। जो अच्छी आत्माएं होती हैं, न किसी की हत्या करती हैं, और न खुद अपनी हत्या करती हैं।

समयः 38.40-43.21
जिज्ञासुः बाबा, वेदान्ती कब और कैसे आएगी?

बाबाः वेदान्ती से ही क्यों लेना-देना? और ढ़ेर सारी ब्रह्माकुमारियाँ हैं, उनका नाम क्यों नहीं लिया? आपने वेदान्ती का नाम क्यों ले लिया, दूसरी ब्रह्माकुमारियों का नाम क्यों नहीं ले रहे हो?
जिज्ञासुः दूसरे नाम जानते नहीं हैं।
बाबाः और दूसरी ब्रह्माकुमारियों को जानते ही नहीं? शालू को देखो, शालू सामने बैठी है। आप जानते हैं। झूठ बोलते है।
दूसरा जिज्ञासुः वो बात तो अलग है।
बाबाः क्या अलग है? अरे वेदान्ती का नाम कहाँ से आ गया? सो तो बताओ। किसने बताया?
तीसरा जिज्ञासुः ये सभी ने बताया है बाबा। दो, चार साले आगे से...
बाबाः जिन्होंने बताया उनसे जाके पूछो – ये तुमने नाम कहाँ से निकाला? बाबा ने तो बोला नहीं है किसी कैसट में, किसी वीसीडी में, किसी मुरली में, या बाबा ने किसी वार्तालाप में बोला हो तो बताओ।
चौथा जिज्ञासुः बाबा, ने नाम नहीं लिया किसी का।
जिज्ञासुः लक्ष्मी बोलना चाहिए।
बाबाः हाँ, ये बोलो। ये सही बात बोली।
जिज्ञासु: मिस्टेक हो गया बाबा।
जिज्ञासुः लक्ष्मी कब और कैसे आएगी?
बाबाः आवाहन करोगे तो आएगी। बड़ा आदमी होता है तो उसको बुलाने पे आता है कि बिना बुलाए आता है? बुलाने पे आता है। उनका बाप, लक्ष्मी का बाप कौन है? तो ब्रह्मा बाबा बाप है ना। ब्रह्मा बाबा गुल्ज़ार दादी में बुलाने से आते हैं (या) बिना बुलाए आते हैं? (जिज्ञासु – बुलाने से) उनका बाप भी बुलाने से आता है तो लक्ष्मी बिना बुलाए आ जाएगी क्या(? तो आप आवाहन करो।
पांचवां जिज्ञासुः फिर बाबा, लक्ष्मी का आवाहन करने के लिए तो घर की सफाई करनी पड़ती है।
बाबाः हाँ, तो करो ना। महाकाली बनो। सफाई करो। तुम्हारा काम है तो तुम सफाई करो। महाकाली के संग झाड़ू उठाओ हाथ में। महाकाली दोनों हाथों में लेकरके झाड़ू खड़ी हुई है। सफाई करने के लिए तैयार है।
चौथा जिज्ञासुः कोई सफाई के निमित्त है, कोई स्थापना के निमित्त हैं इन्हींड बच्चोंई मे से ही।
बाबाः विनाश के निमित्त बनोगे?
पांचवां जिज्ञासुः हाँ, बनेंगे बाबा।
बाबाः कीड़े-मकोड़े साफ करेगा। कीड़े-मकोड़े टट्टी पेशाब सब साफ करेगा। गंदा काम करना अच्छा या अच्छा काम करना अच्छा? सूर्यवंशी बनना है या भटकवंशी बनना है? (सबने कहा – सूर्यवंशी)
पांचवां जिज्ञासुः बाबा ... जरूरी है ना सफाई करना।
बाबाः हाँ, है तो जरूरी। लेकिन घर की सफाई जो है वो दास-दासी करते हैं या महाराजा-महारानी करते हैं? (सबने कहा: दास दासी।) दास-दासी करते हैं।
पांचवां जिज्ञासुः जगदम्बा के हाथ में झाड़ू दिया है तो दासी है जगदम्बा?
बाबाः प्रकृति के हाथ में अगर दास-दासी है तो... प्रकृति दासी नहीं होती है? देवताओं की दासी कौन होती है? (जिज्ञासु – प्रकृति) प्रकृति दासी होती है। प्रकृति जड़बुद्धि होती है या चैतन्य बुद्धि होती है? (जिज्ञासु – जड़) जगदम्बा बाप को पूरा पहचानती है या अधूरा पहचानती है? (जिज्ञासु – अधूरा) इन्हें बोलने दो ना। बोलो। अरे जगदम्बा बाप को पूरा पहचानती है या अधूरा पहचानती है? जड़ बुद्धि है या चैतन्य बुद्धि है? (जिज्ञासु – चैतन्य बुद्धि है) चैतन्य बुद्धि? पूरा पहचानती है?
पांचवां जिज्ञासुः पहचानके फिर छोड़ देती है।
बाबाः छोड़ देती है तो पहचाना कहाँ से? पूरा पहचानने वाला क्यों छोड़ेगा?
छठा जिज्ञासुः वेदान्ती नाम क्या है और इसका अर्थ क्या है?
बाबाः ये तो इनसे पूछो। मुरली में तो सिर्फ इतना आया है कि बापदादा ने, ब्रह्मा बाबा ने रंजना नाम की कोई कन्या थी अहमदाबाद की, वो सरेन्डर हो गई। तो उसको एग्जाम में प्रश्न आया गीता के भगवान कौन? तो उसने नाम लिख दिया गीता का भगवान शिवबाबा। गीता का भगवान कृष्ण नहीं है। तो उसको फेल कर दिया। तो बाबा ने कहा ये तो बच्ची बहुत ज्ञानी है। बहुत शास्त्रों की जानकारी, इसने सच्ची बात लिखी तो भी इसको फेल कर दिया। आगे चलके बच्ची का नाम बाला होगा। और ये बच्ची जो है, इसका नाम रंजना बदल देते हैं। इसका नाम वेदान्ती रखते हैं। बाबा खुश हो गए इस बात पर कि बाबा की बात को उसने एग्जाम में लिख दिया। बेधड़क लिख दिया, भल फेल हो जाओ। कोई हर्जा नहीं। तो उसका नाम वेदान्ती रखा। जाओ, तुम वेदों, शास्त्रों का अन्त करो। अन्त करने वाली हो।

Disc.CD No.598, dated 07.07.08 Pokhra (Nepal)
Extracts-Part-5


Time: 34.40-38.35
Student: Someone kills (vadh) people in the world.

Baba: People kill (hatya) someone. People are killed in the world.
Student: Baba, will they get punishment or not?
Baba: Why will they not get punishment?
Student: They say: this is our job (pesha) in this birth.
Second student: This is our occupation (dhandha).
Baba: Yes, yes. During the age of the kings, a king used to give order that this person should be hanged to death. And the king did not perform the task of hanging him to death. The chandaal who performed the task of killing; it was his occupation to kill. So, he used to hang [people to death]. That was his occupation. He did not hang anyone [willingly]. [It is the guilt of] the one who is giving the order to hang someone to death.
Student: Is the one who is hanging him to death guilty or...
Baba: He is not guilty. It is his occupation.
Second student: No Baba, the one who is giving the order is giving it by seeing his deeds; that one (who is given sentence) was beating someone in the market; he killed someone. So, the court made it clear that this person should be hanged to death. So, how will the one who gives order be guilty?
Baba: The order to hang someone to death has been issued by the court.
Second student: So, it will not be held guilty, will it?
Baba: No. The court will not be guilty.
Second student: No, the one who is saying that this person should be hanged to death.
Baba: Why will the one who is saying it be held guilty? He was punished for the sin that he committed.
Second student: So, he will not be held guilty either, will he?
Baba: No. Neither the court is guilty for [giving the punishment of] hanging him to death, nor is the one who executes him will be punished.
Second student: The one who has performed that deed (sin) will be guilty.
Baba: Who performed that deed? The deed was performed by him (who was hanged to death). Why did he perform a wrong deed? He performed a wrong deed so the court announced the punishment to kill him. And as regards the chandaal who kills, he gets money, food for that very task.
Third student: Baba, it [the soul] leaves the body after being killed. When the soul departs after being hanged to death, does it take rebirth again quickly or does it wander as a spirit (prêt)?
Baba: Killing is an untimely death (akaale maut). The killing that took place was an untimely death. It was not destined. The one who meets an untimely death has to take on a subtle body.
Student: Suppose someone forcibly killed (hatya) someone. Baba, he did not wish to kill himself, did he? He did not want to commit suicide (aatmahatya), did he?
Baba: Aatmahatya (suicide)? Did he kill himself voluntarily?
Student: No, someone else killed him.
Baba: That is not called suicide. The one who kills himself is called suicide. And if someone else killed him, it is not called suicide.
Student: Then why does that soul suffer?
Baba: What does she wish to say?
Second student: She means to say that if someone does not want to die, [but] someone else has killed him; then why is he suffering?
Third student: Why does it (the one who is killed) wander in the form of an evil soul? He should be reborn again, shouldn’t he?
Baba: The other person, who killed him, he killed him only because there is the karmic account of the previous births. There is some karmic account of the previous birth because of which he killed him. Nobody will kill someone without any reason. Or else there must be some karmic account of this birth. That is why he was killed.
Third student: So, until when will he not take rebirth?
Baba: This is not fixed. Someone has birth quickly and someone has it late. That is also in accordance with the karmic account of the previous births. But this killing, committing suicide, all these are dirty tasks. These are not the deeds of good souls. Good souls neither kill anyone nor do they kill themselves.

Time: 38.40-43.21
Student: Baba, when and how will Vedanti come?

Baba: Why are you concerned only with Vedanti? There are many more Brahmakumaris; why didn’t you take their names? Why did you take the name of Vedanti [alone]? Why aren’t you taking the name of other Brahmakumaris?
Student: I don’t know other names.
Baba: Don’t you know other Brahmakumaris at all? Look at Shalu (a PBK sister), she is sitting in the front. You know her. You are telling a lie.
Second student: That is a different topic.
Baba: How is it different? Arey, where did the name of Vedanti come from? Tell me that. Who gave you [that name]?
Third student: Baba, everyone has said this, since two, four years…
Baba: Ask those who gave you [that name] – where did you get this name from? Baba did not say it in any cassette, in any VCD, in any Murli, or if Baba has said in any discussion, tell me.
Fourth student: Baba did not take anybody’s name.
Student: We should say ‘Lakshmi’.
Baba: Yes, say this [name]. You have said this correctly.
Student: Baba, I made a mistake.
Student: When and how will Lakshmi come?

Baba: She will come if you invoke her. Does a big person (having big status) come on being invited or does he come without invitation? He comes on being invited. Her Father; who is Lakshmi’s Father? So, Brahma Baba is her Father, isn’t he? Does Brahma Baba come in Dadi Gulzar on being invited (or) does he come without invitation? (Student: On being invited.) Even her Father comes on being invited, so will Lakshmi come without being invited? Hence, you invoke her.
Fifth student: Baba, the house has to be cleaned in order to invoke Lakshmi.
Baba: Yes, so do it, won’t you? Become Mahakali (goddess of great death) and do the cleaning. If it is your task, then do the cleaning. Hold the broom in your hand along with Mahakali. Mahakali is standing with broom in both hands. She is ready to clean.
Fourth student: Someone is instrument for cleaning and someone is instrument for establishment among these children.
Baba: Will you become instrument for destruction?
Fifth student: Yes Baba, I will become.
Baba: [Indicating towards the fifth student:] He will clean the insects and spiders. He will clean the insects and spiders, excrement and urine and everything? Is it good to perform a bad deed or is it good to perform a good deed? Do you wish to become Suryavanshi or a bhatakvanshi ? (Everyone said: Suryavanshi.)
Fifth Student: Baba …it is necessary to do the cleaning, isn’t it?
Baba: Yes, it is indeed necessary, but do servants and maids clean the house or do the king and queen clean it? (Everyone said: servants.) The servants and maids clean it.
Fifth student: A broom is shown in the hands of Jagdamba so is Jagdamba a maid?
Baba: In the hands of nature (prakriti); is nature not a maid? Who is the maid of deities? (Student: Nature.) Nature is the maid. Does nature have an inert intellect or does she have a conscious intellect? (Student: Inert.) Does Jagdamba recognize the Father completely or incompletely? (Student: Incompletely.) Let him speak, will you not? Speak up. Arey, does Jagdamba recognize the Father completely or incompletely? Does she have an inert intellect or a conscious intellect? (Student: a conscious intellect.) Conscious intellect? Does she recognize him completely?
Fifth student: She recognizes him and then she leaves him.
Baba: When she leaves him, how did she recognize him? Why will someone who has recognized him completely leave him?
Sixth student: What is the meaning of the name Vedanti?
Baba: Ask this person. Just this much has been mentioned in the Murli that BapDada, Brahma Baba; there was a virgin named Ranjana from Ahmedabad who surrendered. So, she got a question in the exam: who is God of Gita? So, she wrote the name, ShivBaba is God of the Gita. God of the Gita is not Krishna. So, she was failed. Baba said [for her,] this daughter (bachchi) is very knowledgeable. She has a lot of knowledge of the scriptures; although she wrote the truth, she was failed. This daughter will become famous in future. And let’s change this daughter Ranjana’s name. Let us name her Vedanti. Baba was happy that she wrote Baba’s words in the exam. She wrote it fearlessly. [She thought,] let me fail, it doesn’t matter. So, she was named Vedanti. Go and end the Vedas and scriptures. You are the one to put an end to them... (to be continued)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 13 Oct 2013

वार्तालाप-598, पोखरा (नेपाल), दिनांक 07.07.08
उद्धरण-भाग-6


समयः 43.22-43.50
जिज्ञासुः बाबा, प्रेमकान्ता बहन थी ना । वो अब कहाँ है, कैसी है, क्याn हम पूछ सकते हैं बाबा से ?

बाबाः पहले भी दिल्ली में थी। अभी भी दिल्ली में है।
जिज्ञासुः बाहर है बाबा?
बाबाः नहीं, दिल्ली में है।
जिज्ञासुः ज्ञान से बाहर है, एडवांस से बाहर है या...?
बाबाः एडवांस ज्ञान से बाहर है। मिलो, मिलो, मिलो।

समयः 43.52-45.30
जिज्ञासुः बाबा, ऐसा आत्मा निकला है पोखरा में। उसके बारे में हम पूछना चाहते हैं बाबा, छोटा शरीर होते हुए भी नाम बाला हो गया है अभी।

बाबाः क्या छोटा शरीर होते हुए भी?
जिज्ञासुः एक छोटा सा बालक है बाबा। उसने एक कन्या सेती के उस किनारे में गिरी, उस बालक ने निकाला।
बाबाः उस छोटे बालक ने उस कन्या को नदी में से निकाल लिया?
जिज्ञासुः निकाल लिया बाबा। और उसका बहुत नाम बाला हो गया।
बाबाः उसका नाम बाला हो गया?
जिज्ञासुः उसका विशेष पार्ट था या विशेष आत्मा है?
बाबाः पूर्वजन्म का हिसाब-किताब है उस कन्या के साथ, तो गिर गई तो फटाक से हिम्मत करके निकाल लाया।
दूसरा जिज्ञासुः कोई निकाल नहीं सका। वो ही जाकर निकाला ।
बाबाः देख लो। उसका पूर्व जन्म का कोई हिसाब-किताब होगा आत्मा का। तो वो ही निकाल के ले आया।
जिज्ञासुः अभी तो उसको राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय वाले सब मानते हैं।
बाबाः हाँ, तो अच्छी बात है ना। छोटा बच्चा भी कोई अच्छा हिम्मत का काम करके दिखाए तो दूसरों को प्रेरणा मिलती है ना।
जिज्ञासुः वो कैसा आत्मा होगा बाबा?
बाबाः अच्छी आत्मा होगा। नहीं तो अपनी मौत से तो सब डरते हैं। अरे हम न कहीं डूब जाएं।
जिज्ञासुः उससे पहले तो वो चोरी करके सड़क में घूम के खाता था।
बाबाः ये थोड़ेही देखा जाता है। वाल्मीकि पहले क्या करता था? डकैती डालता था। फिर? इतना बड़ा कवि बन गया। क्या आदमी सुधर नहीं सकता? बिगड़ा हुआ आदमी सुधर भी तो सकता है।

समयः 45.58-46.45
जिज्ञासुः बाबा, लक्ष्मी का आवाहन करने के लिए घर की सफाई चाहिए।

बाबाः लक्ष्मी का आवाहन करने के लिए महाकाली आएगी और सफाई कर देगी। लक्ष्मी का आवाहन करना माने महाकाली अपने आप ही आ जाएगी।
जिज्ञासुः महाकाली का आवाहन करना नहीं पड़ेगा?
बाबाः महाकाली का आवाहन करोगे तो महाकाली तुम्हारे ऊपर सवार होगी।
जिज्ञासुः वो अपने आप आके झाडू लगाएगी?
बाबाः बिल्कुल। वो तो दासी है। दासी क्या करती है? दासी को बुलाना पड़ता है कि अपने आप आती है? अपने आप आती है। और वो तो तैयार खड़ी है। दोनों हाथों में झाडू ले करके (किसी कुछ कहा।) हाँ, तैयार खड़ी है, हमको जरूरत पड़े तो हम काम करेंगे।

समयः 46.50-49.35
जिज्ञासुः बाबा ने मुरली में बोला है कोई भी सवार सवारी में सारा दिन सवार नहीं करता है।

बाबाः ठीक है।
जिज्ञासुः तो शिवबाबा भी जब नंदीगण में आते हैं।
बाबाः शिवबाबा नंदीगण में नहीं आते हैं। शिवबाबा बैल में प्रवेश करते हैं जानवरों में?
जिज्ञासुः माना जिस रथ में आते हैं, उसको नंदीगण लिखा हुआ है उसमें।
बाबाः शिवबाबा बैल में सवारी नहीं करते। ये भक्तिमार्ग वाले कहते हैं। वास्तव में शिवबाबा तो मनुष्य तन में आते हैं। जो मनन-चिंतन-मंथन करने वाला है। जिसको तीसरा नेत्र दिखाया जाता है। लेकिन जिसमें आते हैं शिव बाप, वो व्यक्ति, वो मुकर्रर रथधारी जो है वो बैल पर सवारी करता है। बैल है ब्रह्मा। जो मनन-चिंतन-मंथन नहीं करता है।
जिज्ञासुः तो सारा दिन सवारी नहीं करते।
बाबाः सारा दिन सवारी थोड़ेही होती है।
जिज्ञासुः तो शिवबाबा भी जो मुकर्रर रथ में आते हैं वो सारा दिन तो नहीं रहते।
बाबाः शिवबाबा जिस रथ में आते हैं वो कोई बैल है क्या? अपने रथ पर जब आत्मा सवार हो सकती है तो दूसरी आत्मा उस पर सवार नहीं हो सकती है?
जिज्ञासुः तो सारा दिन सवार होती है कि थोड़ी देर के लिए?
बाबाः वो तो बैल के ऊपर बताया। वो कोई सवारी थोड़ेही है? वो तो आत्मा शरीरधारी है। मनुष्य तन है।
जिज्ञासुः तो कंटीन्यू हर टाइम वो उसमें साथ रहते हैं।
बाबाः बिल्कुल। ऐसे ही समझना चाहिए कि शिवबाबा सदैव है ही है। अगर ये समझेंगे अभी इसमें शिवबाबा है, अभी इसमें बैल है तो बैल याद आ गया तो पतित, हमारा संग बैल के साथ हुआ या परमात्मा बाप के साथ हुआ? बैल के साथ संग हो जाएगा। संग का रंग बैल का लग जाएगा। किसका संग चाहिए तुमको?
जिज्ञासुः शिवबाबा का।
बाबाः शिवबाबा का संग चाहिए तो बैल को क्यों याद करते हो?
जिज्ञासुः नहीं वो साकार मुरली में सुनाते हैं ना।
बाबाः साकार मुरली में ये भी तो सुनाते हैं कि तुमको सदैव यही समझना चाहिए कि शिवबाबा ही है।
जिज्ञासुः माउंट आबू में ब्रह्मा के शरीर के लिए नंदीगण बोलते हैं। सवार हो गया, शिवबाबा को जैसे सवार हो गए। तो शिवबाबा सारा दिन कोई सवार पर सवार नहीं होते। जब मुरली चलाने का टाइम होता है तो बाबा आते हैं।
बाबाः पास्ट की बात क्यों याद करते? अभी तुम्हें ज्ञान मिल गया नया। नये ज्ञान में तो तुमने जान लिया कि शिवबाबा कोई जानवर में नहीं आते।
जिज्ञासुः जानवर में नहीं आते, लेकिन जिस रथ में आते हैं...।
बाबाः जिस रथ में आते हैं मुकर्रर रथ मनुष्य तन है।
जिज्ञासुः मनुष्य तन है। उसमें सारा दिन सवार होते हैं?
बाबाः हाँ, बिल्कुल। शिवबाबा ऐसे ही समझ लिजिए शिवबाबा सदैव है ही है। मुकर्रर रथ है। मुकर्रर रथ है तो मुकर्रर का मतलब क्या हुआ? मुकर्रर का मतलब क्या हुआ? मुकर्रर माना परमानेंट। परमानेन्ट माने? सदाकाल। सदैव है ही है।

Disc.CD No.598, dated 07.07.08 Pokhra (Nepal)
Extracts-Part-6


Time: 43.22-43.50
Student: Baba, there was a sister Premkanta, wasn’t there? Where is she now? How is she? Can we ask Baba about her?

Baba: She was in Delhi in the past as well. She is in Delhi even now.
Student: Baba, is she outside?
Baba: No, she is in Delhi.
Student: Has she left the knowledge, the advance [knowledge] or…?
Baba: She has left the advance knowledge. [Go and] meet [her].

Time: 43.52-45.30
Student: Baba, a soul has emerged in Pokhra. Baba, I want to ask about him that he has become famous despite having a small body.

Baba: What? Despite having a small body?
Student: Baba, there is a small child. He saved a girl from drowning, who fell in the river Seti.
Baba: That small boy took that girl out from the river?
Student: Baba, he took her out [of the river]. And he became very famous.
Baba: He became famous?
Student: Did he have a special part or is he a special soul?
Baba: He has karmic accounts of previous births with that virgin; so, when she fell [in the river], he brought her out immediately courageously.
Another student: Nobody was able to bring her out. He brought her out.
Baba: Look! There must be some karmic accounts of past birth with that soul. So, he himself brought her out.
Student: Now he is recognized nationally and internationally.
Baba: Yes. So, it is good, isn’t it? Even if a small child performs a courageous task, it gives inspiration to others, doesn’t it?
Student: Baba, what kind of a soul he will be?
Baba: He will be a good soul. Otherwise, everyone fears his death [and think:] Arey, I should not drown.
Student: Prior to that he used to survive by stealing and wandering on the street.
Baba: This is not considered. What did Valmiki use to do earlier? He used to indulge in robbery. Then? He became such a big poet. Can’t a person reform? A spoilt person can also reform.

Time: 45.58-46.45
Student: Baba, the house is required to be cleaned in order to invoke Lakshmi.

Baba: To invoke Lakshmi, Mahakali will come and do the cleaning. To invoke Lakshmi means that Mahakali will come automatically.
Student: Will we not have to invoke Mahakali?
Baba: If you invoke Mahakali, then Mahakali will ride on you.
Student: She will automatically come and sweep?
Baba: Certainly. She is a maid. What does a maid do? Is a maid required to be called or does she come automatically? She comes on her own. And she is standing ready. She is standing ready with a broom in each hand. (Someone said something.) Yes. She is standing ready that if required she will work.

Time: 46.50-49.35
Student: Baba has said in a Murli that no passenger rides on the vehicle throughout the day.

Baba: It is correct.
Student: So, when ShivBaba also comes in Nandigan (group of bulls)...
Baba: ShivBaba does not come in Nandigan. Does ShivBaba enter bull, an animal?
Student: I mean, the Chariot in which He comes has been mentioned as Nandigan in it.
Baba: ShivBaba does not ride on a bull. The people of the path of Bhakti say this. Actually, ShivBaba comes in a human body who thinks and churns, the one who has been shown to have the third eye. But the one in whom the Father Shiva comes, that person, that permanent Chariot rides on the bull. Brahma is the bull who does not think and churn.
Student: So, He does not ride throughout the day.
Baba: He does not ride throughout the day.
Student: So, ShivBaba also does not stay throughout the day in the permanent Chariot in which He comes.
Baba: Is the Chariot in which ShivBaba comes, a bull? When a soul can ride on its Chariot, can’t another soul ride on it?
Student: So, does it ride throughout the day or for some time?
Baba: That has been mentioned about the bull. He (the Chariot) is not a vehicle. He is a soul with a body. It is a human body.
Student: So, He remains continuously in him.
Baba: Definitely. You should think only this: ShivBaba is always present [in him]. If you think that now ShivBaba is present in this one; now the bull is in this one, then if we remember the bull, did we keep the company with the sinful one, the bull or with the Supreme Soul Father? You will establish company with the bull. You will be coloured by the company of the bull. Whose company do you wish to have?
Student: ShivBaba’s.
Baba: You wish to have the company of ShivBaba; so, why do you remember the bull?
Student: No, it is narrated in the Sakar Murli, isn’t it?
Baba: It is also narrated in the Sakar Murli that you should always think that he is ShivBaba.
Student: Brahma’s body is called Nandigan in Mount Abu. He is the vehicle. He is like the vehicle of ShivBaba. So, ShivBaba does not ride the vehicle throughout the day. Baba comes when it is time to narrate the Murli.
Baba: Why do you remember the topics of the past? Now you have received the new knowledge. You have come to know in the new knowledge that ShivBaba does not come in an animal.
Student: He does not come in an animal, but the Chariot in which He comes...
Baba: The Chariot in which He comes is the permanent Chariot, a human body.
Student: It is a human body. Does He ride on him throughout the day?
Baba: Yes, definitely. You should think that ShivBaba is always present. He is the permanent Chariot (mukarrar rath). When he is the permanent Chariot, then what is meant by permanent (mukarrar)? What is meant by mukarrar? Mukarrar means permanent. What is meant by permanent? Forever; He is always present. ...(to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 14 Oct 2013

वार्तालाप-598, पोखरा (नेपाल), दिनांक 07.07.08
उद्धरण-भाग-7


समयः 51.48-52.40
जिज्ञासुः बाबा, स्वर्ग स्थापन के लिए भारत को ही क्यों चुना गया?

बाबाः भारत को इसलिए चुना गया कि भारत में ही भगवान इसलिए आते हैं कि भारत सदैव पवित्र रहता है। कन्याओं-माताओं का जितना मान भारत में है, उतना और किसी दूसरे देश में नहीं है। कन्याओं के लिए पवित्रता के लिए यहाँ घर-घर में कितना महत्व दिया जाता है। कन्याओं की सुरक्षा के लिए माँ-बाप जान भी दे देते हैं। ऐसा दूसरे देशों में तो नहीं होता। कन्याओं को खुला छोड़ देते हैं – जाओ, अपना पति चुनो जाके।
दूसरा जिज्ञासुः दायित्व ज्यादा लेता है ना बाबा।
बाबाः हाँ, ज्यादा जिम्मेवारी लेते हैं भारतवासी कन्याओं की। दूसरे देश वाले कन्याओं की इतनी जिम्मेवारी नहीं लेते हैं। बड़ी हो जाएंगी तो धक्का देके निकालेंगे बाहर जाओ। चाहे जहाँ मरो जाके।

समयः 53.06-54.40
जिज्ञासुः लड़के की शादी होती है तो भारत की परंपरा है कि लड़केवाले लड़कीवालों से दहेज मांगते हैं। ये क्यों परंपरा ऐसी चली?

बाबाः लड़कीवाले मांगते हैं?
जिज्ञासुः लड़केवाले। क्यों टीका वगैरा मांगना, वो दहेज मांगना। ये सब क्यों मांगते हैं?
बाबाः ये तो भक्तिमार्ग की परंपराएं हैं। ब्रह्माकुमारियों ने ये शुरु कर दिया। फाउन्डेशन ऐसा डाल दिया है। जब कन्या सरेन्डर होगी तो लाख रुपया दो, दो लाख रुपया दो, चार लाख रुपया दो। तब सरेन्डर करेंगे। ये गलत परंपराएं उन लोगों ने डाल दी झूठे ब्राह्मणों ने। तो वो ही झूठे ब्राह्मणों की परंपरा भक्तिमार्ग में चल रही है। शिवबाबा थोड़ेही कहते हैं कि कन्या के साथ इतना देना, उतना देना? जब कन्या ही दे दी तो और क्या चाहिए?
दूसरा जिज्ञासुः बीके सेन्टर में जो कन्या जाती है उनकी शादी में दुनियां में जितना खर्चा होता उतना पैसा चाहिए बोलते हैं।
बाबाः चाहिए – तो ये फाउन्डेशन डाल दिया ना दहेज देने का। तो कौन मांगता है?
दूसरा जिज्ञासुः तुम्हारा बेटी कौन पालेगा? कैसे पालेंगे?
बाबाः हाँ, तो कौन मांगता है? ये मांगने की परंपरा किसने डाली?
दूसरा जिज्ञासुः बी.के सिस्टर्स।
बाबाः बी.के सिस्टर्स नहीं। बी.के सिस्टर्स के पीछे जो ब्रदर बैठे हुए हैं, उनको पैसा चाहिए। हाँ। वो सारे उल्टे-पुल्टे काम कराते हैं। ये परंपरा जो चली आ रही है भक्तिमार्ग में कि कन्या से दहेज लेना है, कन्या के घरवालों से, ये परंपरा बीके में डाली जाती है। हर बात की परंपरा संगमयुग में डाली जाती है। बाबा तो नहीं कहते कि कन्या के साथ इतना धन देना है। बाबा कहते हैं क्या? नहीं।

समयः 01.02.20-01.03.53
जिज्ञासुः बाबा, आपने कहा विस्तार में नहीं जाना, सार में जाना है।

बाबाः ठीक है।
जिज्ञासुः विचार सागर मंथन करेंगे तो विस्तार में जाएंगे ना।
बाबाः ठीक है विस्तार में जाके फिर जब मौका मिले तो फिर सार में, बिन्दी में टिक जाओ। जितना बिन्दी को याद करेंगे, उतना विस्तार में बुद्धि अपने आप भागेगी। 63 जन्म आत्मा का क्या प्रैक्टिस है? आत्मा की प्रैक्टिस है विस्तार में जाने की। अब बाबा क्या करा रहे हैं? वो 63 जन्मों के विस्तार से हटकरके कहाँ जाओ? (जिज्ञासु – सार में।) सतयुग त्रेता के बिन्दी आत्मा। मैं आत्मा क्या हूँ? बिन्दी आत्मा हूँ। वहाँ सबको आत्मा याद रहेगी। कहाँ? सतयुग त्रेता में। वहाँ किसी को देह याद आएगी ही नहीं। देह याद आएगी भी तो भी उस आत्मा के साथ देह याद आएगी। जैसे कृष्ण राधा को याद करता है, राधा के ऊपर दृष्टि जाती है। राधा की दृष्टि कृष्ण के ऊपर जाती है। तो देह तो है लेकिन साथ-साथ क्या है? आत्मा भी है। कोई दूसरी आत्मा याद नहीं आएगी। इसलिए सार में जाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। और विस्तार में जाने के लिए कोई मेहनत की दरकार नहीं है।

समयः 01.06.10-01.09.50
जिज्ञासुः बाबा, पीपल के पेड़ के नीचे बैठ के पूजा करने का अर्थ क्या है?

बाबाः हाँ। कहते हैं कि जब नई सृष्टि रची गई तो पहले-पहले सागर में पीपल के पत्ते पर श्री कृष्ण बच्चा आया। सृष्टि का पहला पत्ता कौन? (जिज्ञासु – श्रीकृष्ण।) श्रीकृष्ण। तो श्रीकृष्ण वाली आत्मा माने ब्रह्मा वाली आत्मा। सन् सत्तासी में, 87 में पीपल के पत्ते में गर्भ के रूप में विराजमान आई। इसका मतलब पीपल का पत्ता कोई दूसरी आत्मा है। कौन है सबसे ज्यादा हिलने-डुलने वाला पत्ता कौनसा होता है? (जिज्ञासु – पीपल का।) पीपल का। जैसे और पत्ते इतने हवा के झोंके से नहीं हिलेंगे। लेकिन पीपल का पत्ता? ज्यादा हिलेगा। क्योंकि 84 जन्म लेने वाला है कृष्ण। तो वो जो आत्मा है जगदम्बा की या ब्रह्मा वाली आत्मा, जो उसमें प्रवेश करती है, वो माया के झोंके ज्यादा आते हैं। सबसे ज्यादा हिलती-डुलती है। वो हिलने-डुलने वाली आत्मा है। इसलिए पीपल का पत्ता नवैया के रूप में दिखाया है। उस नवैया में, यानी जगदम्बा के व्यक्तित्व में वो कृष्ण की सोल प्रवेश होती है। प्रवेश होती है माना गर्भ महल दिखाया गया है। वो गर्भ महल में वो कृष्ण वाली आत्मा आराम से अपने स्मृति रूपी अंगूठा चूसते हुए दिखाई गई। संसार सागर में पड़ी हुई है। सागर कैसा है? विषय सागर। उस विषय सागर में जगदम्बा की सोल अपना पार्ट बजाती है। किसके बीच में है? विधर्मियों के बीच में है, विकारियों के बीच में है कि निर्विकारियों के बीच में है? (जिज्ञासु – विकारियों के बीच में।) विकारियों के बीच में। तो विषय सागर हो गया।

उस विषय सागर में रहते हुए भी वो नैया डोलेगी, हिलेगी, डुलेगी, लेकिन डूबेगी नहीं। क्यों नहीं डूबेगी? क्योंकि उसमें कृष्ण जैसी श्रेष्ठ आत्मा, पवित्र आत्मा विराजमान है। इसलिए पीपल के पत्ते पर कृष्ण को दिखाते हैं। नांव बनाई हुई है। इतनी हलकी नांव होती है कोई? और दूसरे रुद्र माला के मणके हैं। वो फिर भी मजबूत हैं। लेकिन वो पत्ता बहुत हल्का फुल्का है। लेकिन डूबेगा नहीं। क्योंकि पावरफुल सोल उसमें विराजमान है।

जिज्ञासुः उसमें हर घड़ी विराजमान रहता है या कभी-कभी?
बाबाः तुम्हारी यही समस्या है। हर घड़ी विराजमान समझ लो। ऐसे तो उस आत्मा का पार्ट दो तरफा है।
जिज्ञासुः आपके पास भी आता है ना।
बाबाः दो तरफा पार्ट ये है कि जब बीजरूपी स्टेज में होता है तो राम वाली आत्मा में प्रवेश करता है। जब सूक्ष्म शरीर से होता है तो दूसरे शरीरों में प्रवेश करता है। जैसे गुल्ज़ार दादी में भी प्रवेश करता है। गुल्ज़ार दादी में प्रवेश अब धीरे-धीरे बंद होता जाएगा। (किसी ने कहा- कम हो रहा है।) हाँ, जो बेहद की गुल्जार है उसमें प्रवेश होता जाएगा।
दूसरा जिज्ञासुः बेहद की गुल्जार क्या नंबर वन गुल्ज़ार बन जाएगी?
बाबाः बिल्कुल।
दूसरा जिज्ञासु : ब्रह्मा बाबा अंत तक प्रवेश करते रहेंगे।
बाबा: प्रत्यक्ष होने से पहले, संगमयुगी कृष्ण की प्रत्यक्षता होने से पहले प्रवेश होता ही रहेगा।

समयः 01.11.50-01.12.40
जिज्ञासुः बाबा, जब राम सीता को वरण करने के लिए जाता है, वो घनुष जब वो उठाता है तो वो धनुष टूट जाता है। इसका बेहद में अर्थ क्या है?

बाबाः टूट नहीं जाता है अपने आप। तोड़ देता है। वो शिव का धनुष जो है... शिव का धनुष था। किसका धनुष था? शिव का धनुष था। दधीची ऋषि की हड्डियों से बनाया गया था। अपने ज्ञान में दधीची ऋषि कौन है? ब्रह्मा बाबा। ब्रह्मा बाबा ने जो पुरुषार्थ किया, उस पुरुषार्थ को भी तोड़ करके आगे कौन चला गया? राम वाली आत्मा। उस पुरुषार्थ रूपी धनुष को भी तोड़ दिया। (जिज्ञासु : उससे भी आगे गया।) हाँ। उसको भी क्रास कर गया। आगे निकल गया।

समयः 01.13.00-01.14.30
जिज्ञासुः बाबा, हर घर में जो दुःशासन है उसको भगाने के लिए कैसे शक्ति जमा करें?

बाबाः ये कहाँ कहा भगाने ? पिछले जन्म में तुम नहीं थे दुःशासन-दुर्योधन थे? थे कि नहीं? (जिज्ञासु – थे।) हाँ तो भगाने की क्या बात? भगाना क्यों है? अपने मन को कंट्रोल करना है। ये दुर्योधन-दुःशासन घर-2 में बैठे हुए हैं। दुर्योधन-दुःशासन अपनी पत्नी के ऊपर कुछ अत्याचार करता है, जोर जबरदस्ती करता है, तो पत्नी का काम है सहन करना। क्या सहन करना ? अपने मन को बाबा की याद में ऊपर उड़ा दो। खुद मुर्दा बन जाओ। मुर्दे से कोई कब तक प्यार करेगा? करेगा? एक बार करेगा, दो बार करेगा, चार बार। हट! मुर्दा है। छोड़-छाड़ के भाग खड़ा होगा। भगाने की क्या बात है?
बड़ी मुश्किल काम है।☺ अरे कंट्रोल अपने मन को करना है, कोई दूसरे को थोड़ेही कंट्रोल करना है?

दूसरा जिज्ञासुः बाबा ने एक कैसट में कहा कि जब तुम दूर्गा बन जाओगी या पूरा शक्तियाँ धारण करोगी तो कोई दुर्योधन-दुःशासन पास में आ ही नहीं सकेगा, ठहर ही नहीं सकेंगे। वो खुद ही चले जाएंगे।
बाबाः ब्रह्माकुमारियों की शादी नहीं हुई, इसीलिए गंछे मार रहीं हैं।
दूसरा जिज्ञासुः बाबा ने कहा ये बोल रहे हैं हम।

Disc.CD No.598, dated 07.07.08 Pokhra (Nepal)
Extracts-Part-7


Time: 51.48-52.40
Student: Baba, why was only India chosen for the establishment of heaven?

Baba: India was chosen and God comes only in India because India always remains pure. The extent to which virgins and mothers are respected in India, they are not respected in any other country to that extent. Here, so much importance is given for the purity of virgins in every home. Parents sacrifice even their lives for the safety of virgins. It does not happen in other countries. They let the virgins free: Go and choose your husband.
Another student: Baba, they take more responsibility (daaitva), don’t they?
Baba: Yes, the Indians take more responsibility (jimmevari) of the virgins. People of other countries do not take the responsibility of the virgins to that extent. When they grow up, they are pushed out. Get out. Go and die wherever you wish.

Time: 53.06-54.40
Student: It is an Indian tradition that when a son’s marriage is performed, the bridegroom’s Father seeks dowry from the bride’s Father. Why did such a tradition start?

Baba: Does the bride’s Father seek?
Student: The bridegroom’s Father. Why do they seek teeka (wedding gifts), dowry (dahej)?
Baba: These are traditions of the path of Bhakti. Brahmakumaris started this. They have laid such a foundation. When the virgin is surrendered, [they seek:] Give one lakh rupees, give two lakh rupees, give four lakh rupees; then we will allow her to surrender. Those people, the false Brahmins have laid these wrong traditions. So, the same tradition of false Brahmins is continuing in the path of Bhakti. ShivBaba does not say that you should give this much or that much [money] along with the virgin? When you have given the daughter herself, what else is required?
Another student: They say that they want the money that would have been spent in the world for marriage of the virgin who goes to the BK center.
Baba: ‘Want’... so, they laid this foundation of giving dowry, didn’t they? So, who seeks?
Another student: [They say:] who will sustain your daughter? How will we sustain [her]?
Baba: Yes, so, who seeks? Who laid the tradition of seeking?
Another student: BK Sisters.
Baba: Not the BK sisters. The brothers who are behind the BK sisters require the money. Yes. They make them do all the wrong tasks. The tradition that is going on in the path of Bhakti that dowry should be taken from the virgin, from the family members of the virgin is laid in the BK (basic knowledge). The tradition for everything is laid in the Confluence Age. Baba does not say to give so much money along with the virgin. Does Baba say? No.

Time: 01.02.20-01.03.53
Student: Baba, you said that we should not go into details (expanse), we should go into essence.

Baba: It is correct.
Student: If we think and churn we will go into details, won’t we?
Baba: OK, go into the details and then whenever you get a chance, become constant in the essence, on the point again. The more you remember the point, the more your intellect will run into the details automatically. What has been the practice of the soul for 63 births? The soul’s practice is to go into details. What is Baba making us do now? Divert yourself from the expanse of 63 births to what? (Student: To the essence.) [The stage of being a] point soul [like in] the Golden and Silver Ages. What am I, the soul? I am a point soul. There, everyone will remember the soul. Where? In the Golden Silver Ages. There, nobody will remember the body at all. Even if we remember the body, we will remember the body along with the soul. For example, Krishna remembers Radha; he looks at Radha. Radha looks at Krishna. So, the body does exist, but what is there along with it? The soul also exists. No other soul will come to the mind. This is why you have to work hard to go into the essence. And there is no need for any hard work to go into the details.

Time: 01.06.10-01.09.50
Student: Baba, what is meant by sitting under the fig (peepal) tree and worshipping it?

Baba: Yes. It is said that when the new world was created, first of all child Shri Krishna came on a fig leaf in the ocean. Who is the first leaf of the world? (Student: Shri Krishna.) Shri Krishna. So, the soul of Shri Krishna means the soul of Brahma. It came sitting on a fig leaf in the form of a fetus in the year 87. It means that the fig leaf is some other soul. Who is it? Which leaf shakes the most? (Student: The fig leaf.) The fig [leaf]. Other leaves do not shake so much when the wind blows. But what about the fig leaf? It will shake more because Krishna has 84 births. So, the soul of Jagdamba or the soul of Brahma, which enters her, faces blows of Maya more. It shakes the most. It is a soul that shakes. This is why the fig leaf is shown as a boat. The soul of Krishna enters that boat, i.e. the personality of Jagdamba. It enters, i.e. a palace like womb has been depicted. That soul of Krishna has been shown sucking the thumb like remembrance comfortably in the palace like womb. It is lying in the ocean like world. How is the ocean? It is an ocean of vices. In that ocean of vices, the soul of Jagdamba plays her part. She is among whom? Is it among the vidharmis , among the vicious ones or is she among the ones without vice? (Student: Among the vicious ones.) Among the vicious ones, so, it is an ocean of vices.

Despite being in that ocean of vices, that boat will shake, waver, but it will not sink. Why will it not sink? It is because a righteous soul, pure soul like Krishna is present in it. This is why Krishna is shown on the fig leaf. A boat [of fig leaf] has been prepared. Is any boat so light? Other beads of the rosary of Rudra are anyway strong. But that leaf is very light. But it will not sink because a powerful soul is present in it.

Student: Is it present in her every moment or sometimes?
Baba: This is the only problem of yours. Think that it is present every moment. In a way, that soul has a two sided role.
Student: It comes to you as well, doesn’t it?
Baba: Its two sided part is that when it is in a seed form stage it enters the soul of Ram. When it is in a subtle body, it enters other bodies. For example, it enters Dadi Gulzar as well. Now, the entrance in Dadi Gulzar will stop gradually. It will start entering the unlimited Gulzar.
Another student: Will the unlimited Gulzar become number one Gulzar (garden)?
Baba: Definitely.
Another student: Brahma Baba will enter her till the end.
Baba: Before being revealed, up until the revelation of the Confluence Age Krishna, he will continue to enter.

Time: 01.11.50-01.12.40
Student: Baba, when Ram goes to marry Sita, when he lifts the bow, that bow breaks. What does it mean in an unlimited sense?

Baba: It does not break on its own. He breaks it. That bow of Shiva… It was Shiva’s bow. Whose bow was it? It was Shiva’s bow. It was made of the bones of sage Dadhici. Who is sage Dadhici in the knowledge? Brahma Baba. Who crossed the purushaarth (spiritual effort) made by Brahma Baba and leaped ahead of him? The soul of Ram. He broke that purushaarth in the form of bow as well. (Student: He went ahead him.) Yes. He crossed him as well. He went ahead of him.

Time: 01.13.00-01.14.30
Student: Baba, how should we accumulate strength to chase away the Dushasans in every home?

Baba: Who said to chase them away? Were you not Dushasan-Duryodhan in the past births? Were you or not? (Student: We were.) Yes, so where is the question of chasing them away? Why to chase them away? You have to control your mind. These Duryodhans and Dushasans are sitting in every home. If Duryodhan-Dushasan makes his wife suffer atrocity, if he acts forcibly, then it is the task of the wife to tolerate. How to tolerate? Make your mind fly above in Baba’s remembrance. Become a corpse. How long will someone love the corpse? Will he? He will love once; he will love twice, four times. [Then he will think:] Out of the way! She is a corpse. He will leave you and run away. Where is the need to chase him away? [You think:] it is a very difficult task.☺ Arey, you have to control your own mind. You don’t have to control someone else.
Second student: Baba has said in a cassette that when you become Durga (a goddess) or will assimilate all the powers, no Duryodhan-Dushasan will be able to come closer to you at all, they will not be able to stay at all. They will leave automatically.
Baba: Brahmakumaris are not married this is why she is boasting.☺
Second student: I am saying that ‘Baba has said this’. :D (Concluded).

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 21 Oct 2013

वार्तालाप.600, हाँसूपुर, दिनांक. 11.07.08
उद्धरण-भाग-1


समयः 00:30 - 02:28
जिज्ञासुः हालत बहुत खराब हो गई बाबा।

बाबाः हालत बहुत खराब हो गई? किस बात में?
जिज्ञासुः आलस।
बाबाः आलस?
जिज्ञासु: याद में बैठते हैं तो याद नहीं करने देती।
बाबा: हाँ, पाँच विकार तो आक्रमण कर चुके बहुत। छटा आलस की बारी है। रावण के साथ कुम्भकर्ण भी तो है ना। क्या हुआ सारा गोरखपुर ठण्डा हो गया क्या? रमेश भाई, क्या कर दिया?
दूसरा जिज्ञासुः बाबा, संतुष्टता आती जा रही है।
बाबाः संतोष हो गया?
दूसरा जिज्ञासुः नहीं।
बाबाः जो पाना था सो पा लिया?
जिज्ञासुः पा रहे है।
बाबाः पा रहे है? आलस्य आ रहा है।
जिज्ञासुः सब लोग कह रहे हैं कि शिवबाबा तो जाके मक्का मदिना में बैठे है तो भारत में कैसे आ गए?
बाबाः माउन्ट आबू मक्का मदीना है ना।

समयः 02:45 – 04:48
जिज्ञासुः बाबा एक बात हम पूछ रहे है कि भक्तिमार्ग में लोग दिखाते हैं कि कृष्ण आठवा अवतार है।

बाबाः भक्तिमार्ग में कहते है कृष्ण आठवा बच्चा पैदा हुआ। वो पहले काहे नहीं पैदा हो गया? बाबा तो बताते हैं लास्ट सो फास्ट और फास्ट सो फर्स्ट । पहले असुर आते हैं दुनियां में, कि पहले देवता आते हैं? पहले असुर आते हैं। सात नारायण जो और-2 धर्मों में कन्वर्ट होने वाले हैं कम कला वाले, वो कच्ची आत्माएँ पहले जन्म लेती हैं। कच्चे होने के कारण कंस उनको कोसघर में कोस लेता है। विकारों की जेल में डाल देता है, मार देता है। तब आठवा नंबर कृष्ण बच्चा पैदा होता है, जो कंस के हाथ से निकल जाता है। बातें कहाँ की है? संगमयुग की सारी बातें है। नहीं तो जैसे सात नारायण जैसे कृष्ण बच्चों को सरेण्डर कर लिया ऐसे ही वो आठवे को भी सरेण्डर करके कोसघर में कोस देता। लेकिन ड्रामा ऐसा नहीं बना हुआ है। जाको राखे साइया मार सके न कोय।

समयः 05:18 – 08:25
बाबाः आज भाइयों का डब्बा गोल करके माता बोल रही है।
जिज्ञासुः बाबा, सर्विस किस चीज की करनी है? सर्विस किस तरह करनी है?
बाबाः किस तरह करनी है? पहले घर का सुधार फिर पर का सुधार। पहले अपनी सेवा, फिर पर की सेवा। अपने अंदर कोई खामी तो नहीं रह गई? कोई कमी दिखाई पड़ती है? नहीं? कमी नहीं दिखाई पड़ती? अपने अंदर कोई कमी नहीं रह गई?
जिज्ञासुः कमी तो रह गई बाबा।
बाबाः रह गई तो पहले वो पूरी करो, तो जैसे से तैसे की पैदाइश होगी। जैसा बाप वैसा बच्चा बनेगा। अभी पैदाइश बिच्छू, टिण्डन की हो रही है, या देवताओं की पैदाइश हो रही है?
दूसरा जिज्ञासुः बिच्छू, टिण्डन ।
बाबाः दुनियां में तो बिच्छू टिण्डन जैसे बच्चे पैदा हो ही रहे हैं। लेकिन ब्राह्मणों की दुनियां में बिच्छू टिण्डन पैदा हो रहे हैं, या देवात्मायें पैदा हो रही हैं?
जिज्ञासुः देवात्मायें पैदा हो रही हैं।
बाबाः देवात्मायें पैदा हो रही हैं?
जिज्ञासुः कुछ कह रहे है।
बाबाः लगता है? ऐसा लगता है?
जिज्ञासुः ऐसा लगता है कि बाबा, आज एक मुरली में चला है कि बिच्छू टिण्डन घर वाले हो गये अगर ब्राह्मणों की दुनियां में आ गये तो घर छोड़ करके भागो-2 अब 60 वर्ष की अवस्था में भागो-2...
बाबाः भागो-2 का मतलब वैराग। वैराग आता है किसीको? बाबा तो कहते हैं सबकी वानप्रस्थ अवस्था है। चाहे छोटा बच्चा भी है, ज्ञान में चलने वाला चाहे छोटा बच्चा भी है उसकी भी कौनसी अवस्था है? उसकी भी वानप्रस्थ अवस्था है। ये सब 84 जन्म लेने वाले बैठे हैं।
जिज्ञासुः जिसके घर में और चलने वाले नहीं है बाबा, एक ही अगर चलने वाला है...
बाबाः तो सब चल पडेंगे।
जिज्ञासुः तब तक तो बिच्छू टिण्डन का क्या करना पडे? घर में रह करके ही लात जूता सहना पडेगा क्या?
बाबाः ये तो अपने हाथ में है। बाबा तो गैरंटी देते हैं मेरे बच्चे भूख नहीं मरेंगे। फिर भी कसके अगर पकड़ा हुआ है घर परिवार को, मित्र, संबंधियों को, तो इसमें बाबा क्या करे?

Disc.CD No.600, dated 11.07.08 at Hansupur
Part-1


Time: 00:30 – 02:28
Student: Baba, the condition has worsened.

Baba: The condition has worsened? In what?
Student: Laziness.
Baba: Laziness?
Student: It does not let us sit in remembrance.
Baba: Yes. The five vices have attacked a lot. Sixth is the turn of laziness. Kumbhkarna is also there with Ravan, isn’t he? What happened? Has the entire Gorakhpur become cold? Ramesh Bhai, what did you do?
Another Student: Baba, we are becoming contented.
Baba: Have you become contented?
Student: No.
Baba: Did you receive what you wanted?
Student: We are receiving it.
Baba: Are you receiving it? You are feeling lazy.
Student: Everyone is saying that ShivBaba is sitting in Mecca Madini, then how did He come in Bharat?
Baba: Yes,  Mount Abu is Mecca Madina, isn’t it?

Time: 02:45 – 04:48
Student: Baba, I am asking a question, people in the path of Bhakti show Krishna to be the eighth incarnation.

Baba: It is said in the path of Bhakti that Krishna was born as the eighth child. Why was he not born earlier? Baba does say last so fast and fast so first. Do demons come first in the world or do deities come first? Demons come first. The seven Narayans who convert in other religions, those with fewer celestial degrees, the weak souls are born first. Because of being weak, Kansa slaughters them in the slaughterhouse. He puts them in the jail of vices; he kills them. Then the eighth child Krishna is born, he comes out of the hands of Kansa. Of when are these topics? All the topics are of the Confluence Age. Otherwise, just as the seven Narayans, the children who are like Krishna were surrendered, he (Kansa) would have also surrendered the eighth child and slaughtered him in a slaughterhouse. However, this is not pre-ordained in the drama. Nobody can kill the one whom God protects.

Time: 05:18 – 08:25
Baba: Today, a mother is speaking by proving the brothers unsuccessful.
Student: Baba, what service do we have to do? How should we do the service?
Baba: How should you do [the service]? First the reformation of the house and then the reformation of others. First self-service and then the service of others. Isn’t there any flaw left in you? Is any shortcoming visible? No? Is no shortcoming visible? Is there no shortcoming left in you?
Student: Baba, there is certainly some shortcoming.
Baba: If there is any, first make up for it; so, as the creator so will be his creation. As is the Father, so will be the child. Now, are scorpions and spiders being born or are deities been born?
Another student: Scorpions and spiders.
Baba: Children like scorpions and spiders are certainly being born in the world. But, are scorpions and spiders being born in the Brahmin world or are deity souls being born?
Student: Deity souls are being born.
Baba: Are deity souls being born? (Student is saying something.)
Baba: Do you think so? Do you think so?
Student: Baba, I think that it has come in one of today’s Murli that the family members are scorpions and spiders; if someone comes in the Brahmin world, leave the house and run away at the age of 60 years. Run away...
Baba: Run away means develop detachment. Does anyone develop detachment? Baba does say: It is everybody’s vanprastha stage. Although it is even a small child, a small child following the knowledge, what is his stage too? His is also in the vanprastha stage. All those who are sitting here are the ones who have 84 births.
Student: Baba, the one in whose family no other member is [in knowledge], if only one member is [in knowledge]...
Baba: All will come [in knowledge].
Student: Until then what should we do with the scorpions and spiders? Do we have to tolerate the kicks and insult living in the house itself?
Baba: This is in your hands. Baba indeed guarantees: “My children will not die of hunger”. Even then, if someone has caught hold of the house [and] family, friends [and] relatives tightly, what can Baba do in this? ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 22 Oct 2013

वार्तालाप.600, हाँसूपुर, दिनांक. 11.07.08
उद्धरण-भाग-2


समयः 08:26 – 11:42
जिज्ञासुः वैराग आने का मतलब कि घर छोड करके भागो-2?

बाबाः घर छोड़ने की बात नहीं कही। भल घर गृहस्थ में रहो] भल लगा दिया।
जिज्ञासुः हाँ, तो भल में भाला हो गया। तो भाला का अब सामना भाला से करना पडेगा।
बाबाः अब भाला तो आयेगा ही सामने। अगर नहीं होगा, अगर सीधे तरीके से घी नहीं निकलेगा तो वैराग तो इस दुनियां से लाना ही लाना है। ऐसी परिस्थितियाँ आ जायेंगी तो इस दुनियां से वैराग आयेगा।
जिज्ञासुः तो विष से विष कटेगा और लोहा लोहा से कटेगा बाबा।
बाबाः बिल्कुल।
जिज्ञासुः तो अब तो विष के साथ विष बने और लोहा के साथ लोहा बने तभी तो कटेगा?
बाबाः तो लोहा बने कौन? बनो तुम। हैं दम?
जिज्ञासुः है ही है, बाबा है ही है। तब लोहा लग जायेगा परिवार में।
बाबाः कहाँ लोहा लग जायेगा?
जिज्ञासुः ब्रह्मा कुमारियों में लोहा नहीं लग जायेगा?
बाबाः वो तो लोहा है ही, लग क्या जायेगा? लोहा और पत्थर एक ही बात तो।
जिज्ञासुः ज्ञान के आधार पर तो बाबा ये कहा गया कि ज्ञानबल और योगबल से अब लड़ाई होगी और वो बाहुबल से लड़ेंगे तो क्या करें?
बाबाः बाहुबल से लड़ाई लड़ेंगे तो हम अपना योगबल दिखाये और बाबा ने तो तरीका बताय दिया अगर तुम्हारे ऊपर कोई हाथ, पाँव चलाता है, मार पीट करता है तो क्या करो? भाग जाओ। लेकिन देहभान आता है, भाग कैसे जायें? अच्छा, हम (ने) 63 जन्म राजा बनके लड़ाई लड़ी, हम कैसे भाग जायें?
जिज्ञासुः भाग जायेंगे तब तो भगा ही देंगे बाबा।
बाबाः हाँ, तो भाग जायेंगे तो उस समय भाग जायेंगे। फिर लड़ाई लड़ेंगे।
जिज्ञासुः मोहम्मद गोरी की तरह से लड़ेंगे तब?
बाबाः मोहम्मद गोरी की तरह से कैसे लड़ेंगे? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) हमारा बाहुबल का आक्रमण है नहीं ना। हमारी लड़ाई बाहुबल की नहीं है।
जिज्ञासुः हाँ, इसीलिए तो बाबा, आज तक रुका है। नहीं तो केस वेस हो गई होती आज तक तो लड़ाई लग गई होती। अब तो ज्ञानबल और योगबल से ...
बाबाः वो लड़ाई लड़ने से हमारा फायदा होगा या नुकसान होगा? (किसीने कहा-नुकसान।) उनके पास तो ढेरों पैसा है, उनके पास ढेरों गुण्डे हैं, गुण्डों को 4 पैसे दे दो कोई की भी हत्या करवा दो। हमारे पास तो इतने पैसे नहीं है कि हम हत्यायें करवा दें पैसे दिलवा करके। तो नुकसान किसका होगा? (किसीने कहा-हमारा नुकसान होगा।) इसलिए बाबा ने हमें तो सहज रास्ता बताया है। साँप मरे, न लाठी टूटे। पाण्डव लड़ाई नहीं लड़ते हैं। लड़ाई लड़ने वाले हैं कौरव, लड़ाई लड़ने वाले हैं यादव। जो दूसरे धर्म की आत्मायें हैं, दूसरे धर्म में कन्वर्ट होने वाली है वो ही लड़ाई की बात करेंगी। हमें तो पक्का बुद्धि में बैठ गया कि 63 जन्म से हिंसा के आधार पर भारत के राजाओं ने जीत नहीं पाई। अब जीत पालेंगे? अब तो भगवान बाप आया हुआ है। जो रास्ता बता रहा है वो ही सच्चा रास्ता है।

समयः 11:43 – 12:37
जिज्ञासुः ...बाबा, 5,6, महीना तो हो गया अकेले तो लड़ाई की प्रैक्टिस कर रहा हूँ, अकेले दौड़ रहा हूँ, और जो है, संगठन का मजबूती नहीं देवरिया में आ रही है।

बाबाः सेवा में अगर रिजल्ट नहीं निकलता है तो जरुर कहीं देहभिमान छुपा हुआ बैठा है। प्यूरिटी होती है तो घर बैठ जाओ, प्योर आत्मा के पास आत्मायें स्वतः ही आना शुरु हो जायेंगी। जैसे सन्यासी होते थे, जंगल में रहते थे राजायें, महाराजायें उनके चक्कर काटते रहते थे। मूल बात है अपन को पवित्र बनाने की। कोई न कोई ज्ञानमार्ग में चलते-2 ऐसी भूलें हो रही है देहभिमान की जिससे सौ गुणा बोझ चढ़ जाता है।

समयः 12:47 – 13:18
जिज्ञासुः बाबा, वैराग शब्द जो है ये दो तरह के हैं एक वैराग है, एक वैराग्य है। वैराग होगा तो आग से वैर होगा। और वैराग्य होगा तो मूढ़ता से वैर होगा। ये क्या शब्द है?

बाबाः राग बिगड़ा हुआ शब्द है। वि माना विशेष और वि माना विपरीत। राग के जो विपरीत है वो है वैराग।

समयः 13:24 – 13:45
जिज्ञासुः ऐसे ही सत्य है और सद है।

बाबाः असत्य?
जिज्ञासुः नहीं। सत्... त का द बन जाता है, और सद हो जाता है। और एक सत्य है।
बाबाः वो एक ही बात है। शब्दों के चक्कर में न फँसो। ये संस्कृत के शब्दों की बातें है।
जिज्ञासुः अच्छा।
बाबाः सत्य का बिगड़ा हुआ रुप सत है।

समयः 13:58 – 17:14
जिज्ञासुः बाबा, पहले घर का सुधार है। घर में सहयोग नहीं मिलता माताओं का...

बाबाः सहयोग, स्नेह, सहानुभूति, संगठन ये कम्पलेंट करने से नहीं मिलता है। इनका तरीका है हम जितना देते जायेंगे उतना हमको जरुर मिलेगा। अभी हमारा 63 जन्म का देने का जो हिसाब है ना वो खाली हुआ पड़ा है। हमने 63 जन्म दिया ही नहीं। इसलिए रिटर्न सर्विस हो रही है। नहीं समझ में आया? इसलिए हम अभी भी देते जायें, देते जायें, देते जायें। कोई दें या न दें, हम सहयोग देते जायें, हम स्नेह देते जायें, हम सहानुभूति देते जायें। हमारा स्टॉदक जब भरपूर होगा तो स्वतः ही हमारी बात सब मानेंगे। चलते रहो, चलते रहो, चलते रहो। “हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम।” कर्मों की गति को भूलना नहीं चाहिए।
जिज्ञासुः इस तरह कि बात होती है ना कि संगठन में नहीं जाओ यहाँ, सेवा में नहीं जाओ।
बाबाः किसी के कहने से कोई मान जाने वाली बात है क्या?
जिज्ञासुः नहीं मानने में तो गड़बड़ हो रहा है परिवार में। नहीं मानने में गड़बड़ हो रहा है ना।
बाबाः जो परिवार को हम परिवार कहते हैं वो सनातन परिवार है, या आसुरी परिवार बन गया है? (किसीने कहा-आसुरी परिवार।) मुरली में तो बोला है देहधारी संबंधियों से न कुछ पूछना है, और न उनकी मत पर चलना है। जब लौकिक संबंधियों से कुछ पूछना ही नहीं है, और उनकी मत पर चलना ही नहीं है... तो पावरफुल आत्मा तो उसे फॉलो करेगी। आ जाओ मैदान में। ये तो मुरली का महावाक्य है।
जिज्ञासुः फॉलो तो उसको किया जा रहा है।
बाबाः तो फिर कम्पलेंट कहाँ है? कोई चले या न चले। लौकिक परिवार वालों में न चले, लौकिक संबंधी वालों में न चले, गाँव वालों में न चले, लेकिन हमें तो चलना है। शुरुआत में एक ही निकलता है चलने वाला या अनेक निकलते हैं?
जिज्ञासुः एक ही निकलता है।
बाबाः शुरुआत में एक निकलेगा। फिर बाद में सहयोग देने वाले अनेक हो जाते हैं। कोई तेरा साथ न दें तो, तो तू क्या कर? अकेला चलो रे।

Disc.CD No.600, dated 11.07.08 at Hansupur
Part-2


Time: 08:26 – 11:42
Student: Does developing detachment mean that we should leave the house and run away?

Baba: It was not said about leaving the house; you may live in the household, he said, ‘may’ (bhal).
Student: Yes, there is bhaalaa (a spear) in bhal (may). Therefore, a spear has to be tackled by a spear.
Baba: Now, a spear will certainly come in front [of you]. If ghee does not come out easily, you certainly have to become detached from this world. When such circumstances arise, you will become detached from this world.
Student: Baba, so poison will kill poison and iron will cut iron.
Baba: Definitely.
Student: So, one has to become poison against poison and iron against iron, only then will it be cut (made ineffective), won’t it?
Baba: So, who will become iron? Become that yourself. Do you have the spirit?
Student: Baba, I certainly have it. Then there will be a fight in the family.
Baba: Where will a fight take place?
Student: Won’t there be a fight in the Brahma Kumaris?
Baba: There is certainly a fight; there is no question of starting a fight. Call it iron or stone it is one and the same thing.
Student: Baba, according to the knowledge it is said: Now the fight will take place with the [help of] the power of knowledge and the power of Yoga [but] what should we do if they fight with physical power?
Baba: If they fight with physical power, we should show our power of Yoga. And Baba has given us the method: If someone uses physical power, if he beats you, then what should you do? Run away. But you become body conscious; [you think:] How can we run away? Accha, we have fought battles becoming kings for 63 births, how can we run away?
Student: Baba, if we run away, they will certainly chase us away.
Baba: Yes, you will run at that time [and] fight later on.
Student: Will we fight like Mohammad Ghori then?
Baba: How will you fight like Mohammad Ghori? (Student said something.) Ours is not the physical attack, is it? Ours is not the physical fight.
Student: Yes, Baba, this is why we have waited till now. Or else a case would have been filed; there would have been a fight by now. Now, with the power of knowledge and the power of Yoga...
Baba: Will we be benefited or will we incur a loss by fighting that war? (Someone said: Loss.) They have a lot of money; they have many goons; give some money to the goons and have anyone murdered. We don’t have so much money, so that we have someone murdered by giving them (the goons) money. So, who will incur a loss? (Someone said: We will incur a loss.) Therefore, Baba has shown us an easy way: “Make a gain without any loss”. Pandavas don’t fight. It is the Kauravas who fight; it is the Yadavas who fight. The souls of the other religions, who convert to other religions, only they will speak about fighting. It has sat firmly in our intellect that the kings of Bharat didn’t gain victory on the basis of violence for 63 births; will they gain victory now? Now, God the Father has come. The path which [He] is showing itself is the true path.

Time: 11:43 – 12:37
Student: ...Baba, it has been five-six months, I am practicing to fight alone, I alone am running [in purusharth]; but, the gathering at Devariya is not becoming strong.

Baba: If there is no result of service, then there is certainly body conscious hidden in you somewhere. If you have purity, sit at home. The souls will automatically start coming to the pure soul. Just as there were the sanyasis, they used to live in jungles; kings [and] emperors kept visiting them frequently. The main thing is to make one self pure. We are committing one or the other mistake becoming body conscious while following the path of knowledge, due to which we accumulate 100 times burden.

Time: 12:47 – 13:18
Student: Baba, the word vairaag (detachment) is of two types. One is vairaag [and] the other is vairaagya. If it is vairaag (detachment), there will be hostility towards anger. And if it is vairaagya, there will be hostility towards ignorance. What are these words?

Baba: Raag (attachment) is a deformed word. ‘Vi’ means special (vishesh) and opposite (vipariit). Something that is opposite to raag is vairaag (detachment).

Time: 13:24 – 13:45
Student: It is the same case with satya (truth) and sad (true).

Baba: Falsehood?
Student: No. Sat... the ‘t’ changes to ‘d’ and it becomes sad. And the other is satya.
Baba: That is the same thing. Don’t be entangled in words. This is about the Sanskrit words.
Student: Accha.
Baba: The deformed form of satya (truth) is sat.

Time: 13:58 – 17:14
Student: Baba, first is the reformation of the house; we don’t receive the co-operation of the mothers at home...

Baba: Co-operation, affection, sympathy, gathering all these are not achieved by complaining. The method [to achieve them] is that the more we keep giving [these things to others], we will certainly receive it to that extent. Now, our account of giving [these things] of 63 births is empty. We did not give [these things] for 63 births at all, hence, a return service is taking place. Didn’t you understand? This is why even now we should just keep on giving it doesn’t matter whether someone gives [them to us] or not. We should keep co-operating, we should keep giving affection, we should keep giving sympathy. When our stock becomes full, everyone will agree to what we say automatically. Just keep moving [ahead]. Don’t lose courage; don’t forget Ram (God). You should not forget the dynamics of actions.
Student: It happens that [they say]: Don’t go to the sangathan (gathering), don’t go for service.
Baba: Is this a matter to agree to whatever someone says?
Student: Because of not agreeing [with them] there is disorder in the family. Because of not agreeing with them, there is disorder.
Baba: Is the family which we call [our] family an ancient family or has it become a demonic family? (Someone said: Demonic family.) It is certainly said in the Murli: “You should neither ask anything to the bodily relatives, nor should you follow their opinion”. When you should not ask anything to the lokik relatives at all and you should not follow their opinion at all... a powerful soul will certainly follow [this direction]. Come on the battle field. This is a great version of the Murli.
Student: We are certainly following it.
Baba: Then, there is no question of complaining. It does not matter whether someone follows [the knowledge] or not. It does not matter whether the members of the lokik family, the lokik relatives or the villagers don’t follow [the knowledge], but we do have to follow [the knowledge]. Does only one person who follows [the knowledge] step ahead first, or do many step ahead?
Student: Only one steps ahead.
Baba: In the beginning one person will step ahead. Later, those who co-operate become many. What should you do if no one co-operates you? Walk alone. ... (to be continued.)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 23 Oct 2013

वार्तालाप. 600, हाँसूपुर, दिनांक 11.07.08
उद्धरण-भाग-3


समयः 17:16 – 18:58
जिज्ञासुः बाबा, लौकिक में भी नहीं कोई साथ देने वाला और अलौकिक ब्रह्माकुमारी में भी साथ देने वाला नहीं और अब एडवान्स में भी आये एडवान्स में भी साथ देने वाला नहीं है तो...

बाबाः अकेले चलो।
जिज्ञासुः तो बाबा तो देंगे ना?
बाबाः माना शंका है! बाबा बाबा नहीं है। लौकिक दुनियां का कोई आदमी है। बाबा हद की दुनियां में जैसे लोग होते हैं ऐसे आदमी है। बेहद का बाबा नहीं हैं।
जिज्ञासुः इसीमें तो बाबा ऊपर नीचे-नीचे ऊपर हो जाते है|
बाबाः और निश्चयबुद्धि बनना न बनना तुम्हारी बात है, या बाबा की बात है?
जिज्ञासुः हमारी बात है।
बाबाः हाँ, तो फिर? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) हाँ। निश्चयबुद्धि विजयते, अनिश्चय की बात ही क्यों करते हो? पकड़ में आ जाते हो। अगर ऐसा होता तो, अगर बाबा ऐसा करें तो। दुनियां हमारा साथ छोड दें लेकिन बाबा तो हमारा साथ नहीं छोड़ेगा? इस प्रश्न में निश्चय छुपा हुआ है, या अनिश्चय छुपा हुआ है? हमारी भाषा एकदम पक्की मजबूत होनी चाहिए। तो दूसरी आत्माओं के ऊपर भी असर पड़ेगा। दूसरी आत्मायें भी निश्चयबुद्धि होंगी। हमारी भाषा में ही कच्चापन होगा, अनिश्चय बुद्धि के शब्द होंगे तो दूसरी आत्माओं के ऊपर भी वैसा ही असर पड़ जाता है।

समयः 19:10 – 20:13
जिज्ञासुः बाबा, गायन है जिन रोया तिन खोया। इसका क्या अर्थ है बाबा?

बाबाः रोता आदमी कब है? कब रोता है? बच्चा कब रोता है, जवान कब रोता है, और बूढ़ा कब रोता है? कोई अप्राप्ति होती है, जो चाहना होती है वो चाहना पूरी नहीं होती है तो रोता है। और यहाँ तो? यहाँ क्या मिल गया? यहाँ तो जो पाना था सो पा लिया। सिर्फ कहने के लिए? भगवान के मिलने की कोई खुशी नहीं है? जैसे कि भगवान मिला ही नहीं। कहते हैं भगवान मिला लेकिन अंदर से समझते हैं हमें शैतान मिल गये चारों तरफ से।

समयः 20:48 – 25:27
जिज्ञासुः बाबा, कछुए और खरगोश का मिसाल देते है।

बाबा: हाँ।
जिज्ञासु: खरगोश चलता रहता है और बीच में जाकर रास्ते में सो जाता है और कछुआ लगातार चलता रहता है। तो बाबा इसका क्या अर्थ है?
बाबाः अंदर वाले रह जावेंगे, और बाहर वाले ले जावेंगे। तो उनमें कछुआ कौन हुआ, और खरगोश कौन हुआ? बाहर वाली है ब्रह्माकुमारियाँ और अंदर वाले है एडवान्स वाले। जब एडवान्स नहीं शुरु हुआ था तो ब्रह्माकुमार कुमारी थे अंदर वाले, और घर गृहस्थ में से जो चलने वाले ज्ञान में थे, वो कौन थे? बाहर वाले। तो उन दोनों के बीच में कौन कछुए की चाल वाले थे, और कौन खरगोश की चाल वाले थे? पहले बेसिक में देखो। ब्रह्मा बाबा के जमाने की बात लो। बोलो। अरे, ज्ञान में तीखे अंदर वाले थे, या बाहर वाले थे? ज्यादा दौड़ दौड़ने का, पुरुषार्थ करने का मौका अंदर वालों को मिल रहा था, या बाहर वालों को मिल रहा था? (किसीने कहा-बाहर वालों को।) बाहर वालों को मिल रहा था? बाहर वालों को मिल रहा था? अरे, अंदर वालों को तो कोई धंधा नहीं। कोई कमाने की चिंता नहीं, कोई बाल-बच्चों की चिंता नहीं, घर-मकान सम्भालने की चिंता नहीं। सारी दुनियावी चिंतायें उसके ऊपर डाल दी, सिर्फ पुरुषार्थ करो। तो अंदर वाले दौड़ने में तीखे होने चाहिए, या बाहर वाले होने चाहिए? अंदर वाले हो गये खरगोश। लेकिन क्या हुआ आज? जिस समय ब्रह्मा बाबा रहे तब तक तो दौड़ दौड़ली सो दौड़ली। उसके बाद अब? अब आराम से दुबक्के झाड़ी में बैठ गये, एयर कन्डिशन्ड में। तो रिज़ल्ट क्या हुआ? जो कछुए के चाल वाले थे घर गृहस्थ में रहने वाले, कीचड़ में रहने वाले वो ले गये, और अंदर वाले रह गये। यहाँ जितने सब बैठे हुये हैं वो घर गृहस्थ की कीचड़ वाले बैठे हैं या अंदर में रह कर निश्चिंत होकर पुरुषार्थ करने वाले थे? सब घर गृहस्थ की कीचड़ में रहने वाले पुरुषार्थी बैठे हुये हैं। यही बात फिर अंदर होनी है। जिनको पुरुषार्थ का, ज्ञान का बहुत घमण्ड होता है वही खरगोश है। कछुए को दौड़ का कोई घमण्ड नहीं है। एकरस चाल चलता है। तो विजयमाला आगे जावेगी या रूद्रमाला आगे जावेगी? पवित्रता के लिए चाल किसकी तीखी है?
सभीः विजयमाला ।
बाबाः क्यों तीखी जावेंगी? क्योंकि इतना ज्ञान उनके पास नहीं है। धीरे-2 पुरुषार्थ कर रहे हैं, धीरे-2 चाल चल रहे हैं। और यहाँ तो इतना ज्ञान मिला हुआ है।

Disc.CD No.600, dated 11.07.08 at Hansupur
Part-3


Time: 17:16 – 18:58
Student: Baba, there is no one to co-operate [me] in the lokik [family], there is no one to co-operate [me] in the alokik [family], the Brahma Kumaris either. Now, I came in the advance [knowledge], there is no one to co-operate [me] in the advance [knowledge] either. So...

Baba: So, walk alone.
Student: Baba will indeed co-operate, won’t He?
Baba: That means you have a doubt! [Ironically:] ‘Baba is not Baba. He is a person of the lokik world. Baba is like a person in the limited world. He is not the unlimited Baba. 
Student: Baba, this is the very subject in which we go up and down.
Baba: And is having a faithful intellect and not having [a faithful intellect]’, concerned to you or is it concerned to Baba?
Student: It depends on us.
Baba: Yes, then? (The student said something.) Yes. The one who has a faithful intellect, will gain victory. Why do you speak about faithlessness at all? You get caught. [You think:] If it happened like this..., if Baba did this... Let the world leave us but Baba won’t leave us, [will He]? Is faith hidden in this question or is a doubt hidden in it? Our language should be very firm, strong. Then, it will have an influence on the other souls as well. The other souls will also have a faithful intellect. If there is weakness in our language itself, if there are words [proving us to have] a doubting intellect, the other souls are also influenced in the same way.

Time: 19:10 – 20:13
Student: Baba, there is a saying: “The one who cried lost”. What is its meaning?

Baba: When does a person cry? When does he cry? When does a child cry, when does a youth cry and when does an old man cry? When something is not acquired, when he desires something and that desire is not fulfilled, he cries. And what about here? What did they achieve here? They have achieved whatever was to be achieved here. Is this just to say? They don’t have any joy of finding God. It is as if they have not found God at all. They say that they have found God but from within they think that they have found demons from all sides.

Time: 20:48 – 25:27
Student: Baba, the example of the tortoise and the hare is given. The hare keeps walking and goes and sleeps on the way in between. And the tortoise keeps walking continuously; Baba, what is its meaning?

Baba: The insiders will stay behind and the outsiders will take away [the inheritance]. So, who are the tortoise and who are the hare among them? The outsiders are the Brahma Kumaris and the insiders are those of the advance [party]. When the advance [party] had not begun, the Brahma Kumar-Kumaris were the insiders and who were the householders who were in knowledge? The outsiders. Between both of them, who were the ones with the speed of the tortoise and who were the ones with the speed of the hare? First look in the basic [knowledge]. Take the times of Brahma Baba as an example. Speak up. Arey, were the insiders or the outsiders sharp in knowledge? Where the insiders or the outsiders getting the chance of running more, of making more purusharth? (Someone said: The outsiders.) Where the outsiders getting it? Where the outsiders getting it? Arey, the insiders have no business. They don’t have any worry of earning [money], they don’t have any worry of [taking care of] children, they don’t have the worry of looking after the house; they have put all the worldly concerns on Him (Baba); just make purusharth. So, should the insiders or the outsiders be sharp in running [in purusharth]? The insiders became the hare. But what happened today? They (the Brahma Kumaris) ran in making purusharth as much as they could until Brahma Baba was alive. After that, now? Now, they have sat in a bush, in air conditioned [rooms] comfortably. So, what was the result? The ones with the speed of the tortoise, the ones staying in the household, in mire took away [the inheritance] and the insiders remained behind. Are all those who are sitting here the ones staying in the mire of the household or are they the ones who make purusharth staying inside remaining carefree? All those who are sitting are the purusharthis who stay in the mire of household. The same thing has to happen inside again. Those who have a lot of arrogance of their purusharth [and] knowledge themselves are the hare. The tortoise doesn’t have any arrogance of running. He walks at a constant speed. So, will the Vijaymala or the Rudramala go ahead? Whose speed is more with respect to purity?
Everybody: Vijaymala.
Baba: Why will it go ahead? It is because they do not have so much knowledge. They are making purusharth slowly, they are walking slowly. And here you have got so much of knowledge. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 24 Oct 2013

वार्तालाप-600, हाँसूपुर, दिनांक 11.07.08
उद्धरण-भाग-4


समयः 25:42 – 28:14
जिज्ञासुः बाबा, मुरली में बोला कि सात रोज धंधा-धोरी याद आया तो सात रोज फिर शुरु करो।

बाबाः हाँ, भट्ठी में जाये और दुनियांदारी याद आती रहे, या दुनियांदारी में चिट्ठी लिखता रहे या दुनियां वालों को फोन करता रहे तो इससे साबित है कि आत्मा गर्भ में पक नहीं रही है। क्या? भूत-प्रेत बन करके चारों तरफ दुनियां में डोल रही है। गर्भ पक नहीं रहा ठीक से। गर्भ में अच्छी तरह पकना चाहिए ना आत्मा को। तो ये 7 दिन की भट्ठी है। उसमें अच्छी तरह से पकने के लिए ये नियम रखा गया है। कोई भट्ठी के बाहर भी न जाये, कदम भी न रखे, फोन भी न करे, रिश्तेदारों से बात करने के लिए कहीं आना जाना बंद। जैसे गर्भ में अंदर ही खाना मिलता है, अंदर ही पीना मिलता है ऐसे ही 7 दिन की भट्ठी में अदंर ही खाना, पीना, भोजन सब कुछ। अगर किसीको शराब पीने की लत लगी हुई है और भट्ठी में पहुँच गया और 6 दिन तक तो अपने को कंट्रोल कर लिया सातवें दिन चला गया शराब पीने लेट्रिन आदि जाने के बहाने, या गुटका खाने या अफीम खाने, अंदर का भोजन नहीं लिया बाहर का ले लिया तो भट्ठी कैन्सिल। दुबारा करनी पड़ेगी।

समयः 28:24 – 29:30
जिज्ञासुः बाबा, संसार में अनेकों दरवाजा है तो क्या एक दरवाजा बंद हो जायेगा तो क्या सारे दरवाजे बंद हो जायेंगे? तो क्या बाबा का दरवाजा भी बंद हो जायेगा?

बाबाः कौनसे हैं अनेक दरवाजे, जिन दरवाजों से मुक्ति जीवनमक्ति में पहुँच जायेंगे? कोई दरवाजे हैं? ऐसे तो कोई दरवाजे नहीं हैं। सब नरक के दरवाजे हैं। नरक के दरवाजे हैं अनेक, और स्वर्ग का दरवाजा है एक। वो एक जन्म की सदगति कहो, स्वर्ग कहो सबको मिलता है।
जिज्ञासुः सुने हैं कि एक दरवाजा बंद हो जायेगा तो सारे दरवाजे बंद हो जायेंगे।
बाबाः सुने, तुम किससे सुने? मुरली में तो बोला नहीं है।
जिज्ञासुः नहीं। मुरली में नहीं बोला है।
बाबाः तो मुरली की बातें बोलो ना, ब्राह्मण बनके बोलो ना।

समयः 29:45 – 30:07
जिज्ञासुः बाबा, गोरखपुर वाले प्रश्नों से पार प्रसन्नचित्त हो गये।

बाबाः प्रसन्नचित्त हो गये? पाना था सो पा लिया? अब चुप। पाना था सो पा लिया? पक्का-2 निश्चय बुद्धि हो गये?
जिज्ञासु: जी।

समयः 30:20 – 30:20
जिज्ञासुः बाबा के साथ अकेले चलो, अब मैदान में तो चलना ही है।...

बाबाः हाँ, दरवाजा तो एक ही है।

समयः 30:26 – 33:34
जिज्ञासुः बाबा जब तक पढ़ाई पूरी नहीं होगी तब तक ज्ञान नहीं होगा।

बाबाः हाँ, और पढ़ाई तो अंत तक चलती रहेगी।
जिज्ञासुः तब अंत तक ज्ञान होगा।
बाबाः माना सन् 36 में तुम्हारा किनारा लगेगा अब।
जिज्ञासुः क्या करें बाबा। मुरलियाँ जितना आप चलाये हैं उतने नहीं सब सुन पाये तो प्रश्न एक से एक आप से करते गये और उत्तर फिर मिल रहे हैं। ...मुरली में आप कह चुके हैं सब पहले ही, सब बता चुके हैं।
बाबाः ज्ञान तो ऐसे है जैसे सागर। पोथी पढ़-2 जग भया पण्डित भया न कोय और एक की पहचान है वो एक पहचान पक्की हो गई, निश्चयबुद्धि हो गये तो आगे कोई पढ़ाई पढ़ने की दरकार नहीं। पल्ला पकड़ लिया एक का। जैसे चलाये वैसे चलना है।
जिज्ञासुः अब मुरलीयाँ हम सुनते हैं। अब पढ़ाई पढ़ने कि कोई इच्छा नहीं है। और जितना वार्तालाप आप बताये हैं सब निश्चयबुद्धि होती चली गई। सुनना बाकी है अब। सब मुरलियाँ और सब वार्तालाप कैसेट सुने ।
बाबाः एक होता है सुनना, एक होता है सुनने के बाद दूसरों को सुनाना। उससे अपना पक्का हो जाता है। फिर दूसरा होता है समझना, फिर दूसरे को समझाना। उससे अपनी समझ पक्की हो जाती है। लेकिन ये आखिरी स्टेज नहीं हैं। क्या? सुनना और सुनाना और समझना और समझाना। ये दो मूर्तियों का काम है। ब्रह्मा द्वारा सुनना और सुनाना शंकर द्वारा तीसरे नेत्र से समझना और समझाना लेकिन क्या रह गया? प्रैक्टिकल जीवन में सुन लिया लेकिन समझ लिया और धारण नहीं किया तो सारा ज्ञान रावण का ज्ञान हो जाता है। इसलिए मुरली में ये भी बोल दिया राम ही अंत में क्या बन जाता है? रावण बन जाता है। मैं सबसे जास्ती पतित में प्रवेश करता हूँ। उसको ही आकर के सबसे जास्ती क्या बनाता हूँ? सबसे जास्ती पावन बनाता हूँ। तो तीसरी सीढ़ी वो तीसरी मूर्ति की है। इसलिए ब्रह्मा सो विष्णु बनना ही श्रेष्ठ है।

Disc.CD No.600, dated 11.07.08 at Hansupur
Part-4


Time: 25:42 – 28:14
Student: Baba, it has been said in the Murli that if you remember business etc. in the seven days [bhatti], then start the seven days [bhatti] again.

Baba: Yes, if someone goes to do the bhatti and remembers the worldly affairs, if he keeps writing letters to the worldly [people], or keeps calling them, then it proves that the soul is not becoming mature in the womb. What? It is wandering everywhere in the world in the form of ghost and spirit. The [foetus] is not becoming mature properly in the womb. The soul should become mature properly in the womb, shouldn’t it? So this is a seven days bhatti. So, this rule has been made so that [the soul] becomes mature properly in it. No one should go out of the bhatti, he should not even step out, he should not even make a phone call; it is restricted to go anywhere to speak to the relatives. Just as [a baby] receives food and water inside the womb itself, you should have everything including food and drink inside itself in the seven days bhatti. If someone is addicted to alcohol and has come to do the bhatti; he controlled himself for six days [but] went to drink alcohol on the seventh day with the excuse of going to toilet etc., if he went to eat gutka or opium, if he didn’t eat the food prepared inside and ate the outside food, then his bhatti will be cancelled. He will have to do it again.

Time: 28:24 – 29:30
Student: Baba, there are many doors in the world. Will all doors close if one door closes? Will Baba’s door also close?

Baba: Which are the many doors through which you will attain liberation (mukti) and liberation in life (jiivanmukti)? Are there any doors? There aren't any doors like this. All doors lead to hell. The doors to hell are many and the door to heaven is one. Call it the sadgati (true liberation) of one birth, call it heaven, everyone gets it.
Student: I have heard that if one door closes, all doors will close.
Baba: You have heard it; from whom did you hear it? It hasn’t been said in the Murli.
Student: No. It has not been said in the Murli.
Baba: So, speak about the topics of the Murli, speak becoming a Brahmin.

Time: 29:45 – 30:06
Student: Baba, the residents of Gorakhpur have become joyful having gone beyond questions.

Baba: Have you become joyful? Did you achieve what you wanted? Now you are quiet. Did you achieve what you wanted? Did you become the one with a firm faithful intellect?
Student: Yes.

Time: 29:45 – 30:06
Student: Walk alone with Baba; we indeed have to come on the field now…

Baba: Yes, there is indeed only one door. :D

Time: 30:26 – 33:34
Student: Baba, until the studies are completed, one will not have knowledge.

Baba: Yes, and the studies will go on till the end.
Student: Then, we will take knowledge in the end.
Baba: That means you will reach the shore (of the ocean of the poison of vices) in 2036. :D
Student: Baba, what to do? :laugh: We have not been able to listen to all the Murlis which have been narrated; therefore we asked you questions one after the other and we are receiving the answers to them. ... You have narrated everything in the Murlis before itself.
Baba: The knowledge is like an ocean. No one became a pandit (scholar) reading many books in the world and if you have the recognition of the One, if that recognition has become firm, if you became the one with a faithful intellect, then there is no need to study further. You have taken the support of the One. You should live the way He makes you live.
Student: I listen to the Murlis, now I have no desire to study. And after all the discussions that I had [with Baba], now I have become the one with a faithful intellect. Now, we have to listen to them, we should listen to the Murli and discussion cassettes.
Baba: One thing is to listen [to the knowledge]; [and] the other thing is to narrate [the knowledge] to others after listening to it. By doing this our [knowledge] becomes firm. Then, another thing is to understand [the knowledge] and explain it to others. By doing this our understanding becomes firm. But this is not the final stage. What? To listen and narrate, to understand and to explain; this is the task of the two murtis (personalities). [The task of] listening and narrating [takes place] through Brahma and [the task of] understanding and explaining with the third eye through Shankar; but what is left? If someone listened to [the knowledge] in the practical life, if he understood it [but] did not assimilate it, then the entire knowledge becomes the knowledge of Ravan. For this reason it has also been said in the Murli: What does Ram himself become in the end? He becomes Ravan. I enter the most lustful one. What do I make him into after coming? I make him the purest. So the third ladder is of the third murti. That is why to become Vishnu from Brahma is the best. ... (to be continued.)

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