Q&A: PBK Murli discussions

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 28 Mar 2014

वार्तालाप-618, नेल्लूर, दिनांक 25.08.08
उद्धरण-भाग- 1


समयः 00.03-04.20
जिज्ञासुः माउंट आबू में जो अव्यक्त वाणियां अभी आ रहे हैं वो शिवबाबा बोल रहे हैं या ब्रह्मा बाबा बोल रहे हैं?

बाबाः एडवांस पार्टी वालों को अभी तक ये ही पता नहीं है? पहली बात तो शिव सुप्रीम सोल पतित में आते हैं या पावन में आते हैं? (जिज्ञासु - पतित तन में आते हैं।) गुल्ज़ार दादी तो बचपन से ही आश्रम में पली है, बचपन से ही कन्या है। पतित तन है या पावन तन है? (जिज्ञासु – पावन।) तो उसमें शिवबाबा प्रवेश होगा? (जिज्ञासु – नहीं होगा।) जब शिवबाबा प्रवेश ही नहीं होगा तो फिर वाणी कहाँ से चलावेगा? हाँ, ब्रह्मा की सोल की आसक्ति जरूर गुल्ज़ार दादी में बचपन से ही लगी हुई थी। ब्रह्मा बाबा बार-बार गुल्ज़ार दादी को बुलाते थे अपने पास, वो भाग जाती थी। बाबा के नज़दीक आती ही नहीं थी। बड़े होने तक वो दूर-दूर भागती रही। बाबा ने शरीर छोड़ दिया। वो आसक्ति पूरी करने के लिए उस तन में उनका प्रवेश होता है। मनुष्यात्मा प्रवेश करती है या भगवान प्रवेश करता है? मनुष्यात्मा प्रवेश करती है।

पहचान क्या है कि मनुष्यात्मा प्रवेश करती है कि भगवान प्रवेश करता है? मनुष्यात्मा सुधरती है तो देवात्मा बन जाती है। और वो तो है ही कृष्ण की आत्मा, देवात्मा। तो देवात्मा जब प्रवेश करेगी तो दिव्य गुणों की वाणी चलाएगी या ज्ञान सुनाएगी? दिव्य गुणों की वाणी चलती है। शिवबाबा ब्रह्मा के तन में प्रवेश करते थे तो ज्ञान की वाणी सुनाते थे। ये पहचान है। गुल्ज़ार दादी में श्रेष्ठ मनुष्यात्मा है, जो 16 कला संपूर्ण बनने वाली कृष्ण की आत्मा है, वो प्रवेश करती है। वो दिव्य गुणों की वाणी चलाती है। बाकी बाबा की याद में रह करके चलाती है। इसलिए उस वाणी का कोई भी एक वाक्य मुरली के महावाक्यों के खिलाफत में नहीं निकलता। सारे ही महावाक्य मुरली के अनुकूल हैं। कोई महावाक्य प्रतिकूल नहीं है।

जिज्ञासुः लेकिन गुल्ज़ार दादी की आत्मा ने भी 84 जन्म लिये हैं ना। इसलिए पतित है ना जन्म से ही ।
बाबाः जन्म तो भ्रष्टाचार से होता है सभी का। जितने भी मनुष्य मात्र इस कलियुगी दुनिया में हैं सबका जन्म भ्रष्टेन्द्रियों से ही होता है। बाकी पूर्व जन्मों के जो हिसाब-किताब हैं वो तो पूरे करने पड़ेंगे। भले कन्या का चोला है। लेकिन पूर्व जन्म के हिसाब-किताब तो उसके भी हैं। पूरे करने पड़ते हैं।

समयः 04.22-06.22
जिज्ञासुः वन्दे मातरम का अर्थ क्या है?

बाबाः वन्दे माना वन्दना करना, झुकना। वन्दना अथवा झुकना अथवा पूज्य मानना वो उसी के लिए होता है जो पवित्र होता है। वन्दे पितरम नहीं कहा जाता क्योंकि पिता जितने भी बनने वाले हैं वो सब दुर्योधन-दुःशासन हैं। दुष्ट युद्ध करते हैं। जोर-जबरदस्ती करने वाले होते हैं। उनमें पवित्रता की धारणा उतनी नहीं होती जितनी कन्याओं-माताओं में होती है। इसलिए कन्याओं-माताओं में भी नम्बरवार हैं। कोई फिर सूपनखा, पूतना भी होती है। कोई कम, कोई ज्यादा। लेकिन उनमें कोई ऐसी माता, कन्या भी है जो सौ परसेन्ट पवित्रता वाली है। 84 जन्मों में भी एक के साथ कनेक्शन रखा है, देह का कनेक्शन, इन्द्रियों का कनेक्शन। अनेकों के साथ उसका कनेक्शन नहीं हुआ है। इसलिए उसका नाम पड़ गया भारत माता। वन्दे मातरम। इसलिए अव्यक्त वाणी में बोला है भारत माता शिव शक्ति अवतार अन्त का यही नारा है। अन्त में कौनसा पार्ट प्रत्यक्ष होगा? वैष्णवी शक्ति का पार्ट प्रत्यक्ष होगा। वो ही भारत माता है। विष्णु देवता भारत में गाया हुआ है। भारत में प्रवृत्तिमार्ग को मानते हैं। विष्णु है ही प्रवृत्तिमार्ग की यादगार।

समयः 06.26-09.26
जिज्ञासुः वैष्णवी देवी और गंगा। दोनों अलग-अलग आत्माएं हैं या एक ही आत्मा है बाबा?

बाबाः गंगा और?
जिज्ञासुः वैष्णवी देवी।
बाबाः गंगा भी अलग है, यमुना भी अलग है, सरस्वती भी अलग है और वैष्णवी भी अलग है। अलग-अलग नहीं होती तो उनका अलग-अलग जो गायन चला आ रहा है भक्तिमार्ग में गंगा, यमुना, सरस्वती, तीनों नदियों का जाकर इलाहाबाद में मेल होता है।
जिज्ञासुः गंगा अभी मैदान में आ गई या नहीं आ गई?
बाबाः गंगा तो गंगा है ही। गंगा कभी उड़ नहीं जाती। सदैव गंगा रहती है। कभी पतित और कभी पावन। यमुना भी ऐसे ही। यमुना नदी भी सदैव है ही है। ऐसे नहीं सतयुग त्रेता में यमुना, गंगा नहीं थी। थी। वहाँ पावन थी। और यहाँ कलियुग में आकर उनमें कचड़ा पड़ जाता है।
तीनों जड़ नदियाँ थीं। तो तीनों नदियां इलाहाबाद में इकट्ठी होती हुई दिखाई गई हैं। फिर जा करके बंगाल में ब्रह्मपुत्रा नदी के साथ मिलती है। ब्रह्मा और उसकी पुत्री कौन है? ब्रह्मा चन्द्रमाँ है ना। तो चन्द्रमाँ की पुत्री कौन वंश की हुई? (जिज्ञासु - चन्द्र वंश।) चन्द्रवंशी हुई। चन्द्रवंश की सबसे श्रेष्ठ पुत्री का नाम क्या है? कृष्ण सूर्यवंश का, और राधा? राधा चन्द्रवंश की। चन्द्रमाँ के कुल में सबसे श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ कन्या ने, जिसने जन्म लिया उसका नाम पड़ा राधा। तो राधा ही वैष्णवी शक्ति है, ब्रह्मपुत्रा नदी है। उसको भक्तिमार्ग में कहते हैं ब्रह्मपुत्री। ब्रह्मा की क्या है? पुत्री है। ये चारों ही नदियाँ चैतन्य में भी हैं और उनकी यादगार भक्तिमार्ग में चार जड़ नदियाँ भी हैं। सबसे लंबी और सबसे बड़ी नदी है ब्रह्मपुत्रा नदी। इसलिए गंगा, यमुना, सरस्वती ये नदियाँ सब कौनसी नदी में जाके मिलती हैं? ब्रह्मपुत्रा में जाकर मिलती है। फिर ब्रह्मपुत्रा जाकरके सागर में मिलती है।

Disc.CD No.618, dated 25.08.08 at Nellore
Extracts-Part-1


Time: 00.03-04.20
Student: Is it ShivBaba or Brahma Baba who narrates the Avyakt Vanis at Mount Abu?

Baba: Don’t the people of the Advance Party know even this? First of all does the Supreme Soul Shiva enter a sinful [body] or a pure [body]? (Student: He comes in a sinful body.) Gulzar Dadi has been brought up in an ashram since childhood; she is a virgin since childhood. Is her body sinful or pure? (Student: Pure.) Will ShivBaba enter her? (Student: No.) When ShivBaba does not enter her at all, then how can He narrate the Vani? Yes, the soul of Brahma was definitely attached to Gulzar Dadi since her childhood. Brahma Baba used to call Gulzar Dadi near him again and again, [but] she used to run away. She did not come close to Baba at all. Until she grew up she kept running away from him. Baba left his body. So, in order to fulfil that attachment, he enters that body. Does a human soul enter or does God enter? A human soul enters.

How do we recognize whether a human soul enters or God enters? When a human soul reforms, it becomes a deity soul. And he is any way the soul of Krishna, a deity soul. So, when a deity soul enters, will it narrate the Vani of divine virtues or will it narrate knowledge? It narrates the Vani of divine virtues. When ShivBaba entered the body of Brahma, He narrated the Vani of knowledge. This is the indication. There is a righteous human soul in Gulzar Dadi, [there is] the soul of Krishna which becomes perfect with 16 celestial degrees, it is he who enters. It narrates Vani of divine virtues. But he narrates it in the remembrance of Baba. This is why no sentence of that Vani goes against the great versions of the Murlis. All the great versions are in accordance with the Murlis. No version is against the Murlis.

Student: But Gulzar Dadi's soul also had 84 births, didn’t it? This is why she is sinful by birth, is not she?
Baba: Everyone is born through unrighteousness. All the human beings in this Iron Age world are born through unrighteous indriyas itself. But the karmic accounts of the past births will certainly have to be cleared. Although, it is the body of a virgin, she too has karmic accounts of the past births. She has to clear them.

Time: 04.22-06.22
Student: What is meant by Vande Mataram?

Baba: Vande means to praise, to bow. To praise, to bow or to consider [someone] worship worthy is for the one who is pure. It is not said Vande Pitaram (I bow to you O Father) because all those who become fathers are Duryodhans and Dushasans . They wage a wicked war (dusht yuddh). They use force. The do not assimilate purity to the extent the virgins and mothers assimilate it. This is why the virgins and mothers are also number wise . Some are Surpanakha , Pootna as well; some to a lesser extent and some to a greater extent. But there is also such a mother, virgin among them who is hundred percent pure. She has maintained connection, the physical connection, the connection of the indriyas with one for 84 births. She did not have connection with many. This is why she has been named Mother India. Vande Mataram. This is why it has been said in the Avyakt Vani: Mother India, the incarnation of Shivshakti is the slogan of the end. Which part will be revealed in the end? The part of Vaishnavi shakti will be revealed. She herself is Mother India. The deity Vishnu is famous in Bharat. People believe in the path of household in Bharat. Vishnu himself is a memorial of the path of household.

Time: 06.26-09.26
Student: Vaishnavi Devi and Ganga; are both of them separate souls or the same soul Baba?

Baba: Ganga and?
Student: Vaishnavi Devi.
Baba: Ganga , Yamuna , Saraswati as well as Vaishnavi are separate. Had they not been separate, then [there wouldn’t have been] their separate glories in the path of Bhakti. All the three rivers, i.e. Ganga, Yamuna and Saraswati meet at Allahabad .
Student: Has Ganga come to the field now or not?
Baba: Ganga is anyway Ganga. Ganga never vanishes. Ganga always exists. Sometimes it is sinful and sometimes it is pure. Yamuna is also like this. The river Yamuna also always exists. It is not that Yamuna, Ganga did not exist in the Golden and Silver Ages. They did exist. It was pure there and here in the Iron Age garbage falls into it.

There were all the three rivers. Those three rivers have been shown to be coming together in Allahabad. Then they go and meet with river Brahmaputra in Bengal. [There is] Brahma and who is his daughter (putri)? Brahma is the Moon, is not he? So, to which dynasty does his daughter belong?
(Student: The Moon Dynasty.) She is Candravanshi . What is the name of the most elevated daughter of the Moon Dynasty? Krishna belongs to the Sun Dynasty and what about Radha? Radha belongs to the Moon Dynasty. The most elevated virgin who was born in the dynasty of the Moon was named Radha. So, Radha herself Vaishnavi shakti, the river Brahmaputra. In the path of Bhakti they say Brahmaputri. What is her relationship with Brahma? She is his daughter. All these four rivers are in a living form as well and their memorials in the form four inert rivers are also present in the path of Bhakti. The longest and the biggest river is Brahmaputra. This is why, with which river do Ganga, Yamuna, Saraswati meet? (Student: Brahmaputra.) They merge with Brahmaputra. Then Brahmaputra merges with the ocean. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 29 Mar 2014

वार्तालाप-618, नेल्लूर, दिनांक 25.08.08
उद्धरण-भाग- 2


समयः 09.28-10.48
जिज्ञासुः बाबा, पाण्डवों का मय सभा क्या है?

दूसरा जिज्ञासुः कौरव-पांडव सभी हैं ना। तो शास्त्रों में दिखाया है पाण्डवों का जो मय सभा है उसमें दुर्योधन जाता है तो... कथा-कहानियाँ बना दिया है। यहाँ ही चलता है क्या पूछ रहे हैं। कहाँ चलता है?
बाबाः पाण्डवों का अभी किला तैयार हो रहा है। जिस किले के लिए कहा है कि पाण्डवों का किला ऐसा बन जावेगा जिसमें एक भी विकारी पांव नहीं रख सकेगा। अभी बना नहीं है। बन जावेगा। उसका नाम रखा जाता है इन्द्रप्रस्थ। पाण्डवों के किले का नाम? इन्द्रप्रस्थ।

समयः 10.48-12.46
जिज्ञासुः बाबा, यमुना की आत्मा, सरस्वती की आत्मा तो प्रत्यक्ष हुई। लेकिन गंगा की आत्मा अभी प्रत्यक्ष हुई या नहीं?

बाबाः गंगाएं निकली हैं सबसे बाद में। ज्ञान गंगा निकलती है सबसे बाद में। ज्ञान गंगा के किनारे, गंगा के किनारे चौकड़ी मार करके कौन बैठते हैं? सन्यासी लोग। जब सन्यासी निकलेंगे तब तुम बच्चों की विजय हो जावेगी। अभी विजय हो रही है कि हार भी हो रही है? अभी तो हार हो रही है। लेकिन जब सन्यासी इस बात को समझ जाएंगे तो तुम बच्चों की विजय हो जावेगी। जो गंगा के किनारे-किनारे बैठे-2 जो सन्यासी हैं, उनमें प्योरिटी की पावर जन्म-जन्मान्तर की बहुत है। वो जब सहयोगी बनेंगे तो चारों तरफ आवाज़ फैल जावेगी। लेकिन वो निकलेंगे तब जब गंगा निकलेगी। एक गंगा नहीं है। ज्ञान गंगाओं का भी हुजूम है। और वो निकलती हैं उत्तर भारत से। आदि में भी ज्ञान गंगा और अंत में भी ज्ञान गंगा। बेसिक में भी आदि में गंगा थी। गंगे दादी नाम सुना होगा। बहुत शास्त्रवादी थी। ऐसे एडवांस में भी सबसे पहले एडवांस ज्ञान वो ही कन्या सुनती है। सतोप्रधान ज्ञान उसी की बुद्धि में पहले पल्ले पड़ता है। बाद में और दूसरी-दूसरी नदियां सुनती हैं। तो जो आदि में सो अंत में निकलती है। अभी निकली नहीं है। निकलने वाली है।

समयः 12.49-13.34
जिज्ञासुः अभी नए संगठन एन.एस. में रहने वाले जो भी आत्माएं है, सभी देवता बनेंगे?

बाबाः और जो एडवांस में चल रहे हैं, बेसिक में चल रहे हैं, वो देवता नहीं बनेंगे? बेसिक में जो नारायण वाली आत्माएं हैं, जो कम कला वाले नारायण बनेंगे, वो स्वर्ग में नहीं आवेंगे? अव्वल नंबर जो देवता बनेंगे वो 84 जन्म लेंगे। जो नंबरवार बनेंगे वो 84 जन्म नहीं लेंगे। कम कला के देवता बनेंगे। कमजोरी रह जावेगी तो दूसरे धर्म में द्वापरयुग से कंवर्ट हो जावेंगे।

समयः 14.28-16.13
जिज्ञासुः संगमयुग में...फकीर और अमीर...

बाबाः संगमयुग के आदि में जब हर आत्मा का पार्ट खुलता है, तो अमीर बन जाती हैं। क्या? फिर चार अवस्थाओं से गुज़रना होता है। सतोप्रधान, सतोसामान्य, रजो और तमो। धीरे-धीरे अनेकों के संग के रंग में आ करके फकीर बन जाते हैं। संगमयुग में ही चार अवस्थाओं से पसार होना हो जाता है। अनेकों के संग के रंग में आने से फकीर बन जाते हैं और एक के संग के रंग में आने से अमीर बन जाते हैं। अभी एक शिवबाबा दूसरा न कोई - ऐसी स्टेज में कितनी देर टिकते हैं?

समयः 17.01-18.07
जिज्ञासुः इस दुनिया में शैव और वैष्णव होते हैं। दोनों में श्रेष्ठ कौन है?

बाबाः शिव के फालोअर्स शैव और विष्णु के फालोअर वैष्णव। शिव की डायरेक्ट संतान बनते हैं तो शैव संप्रदाय कहे जाते हैं। और विष्णु की डायरेक्ट संतान बनें तो वैष्णव संप्रदाय कहे जाते हैं। शिव की जो संतान बनते हैं वो रुद्रमाला है। वो रुद्रमाला राजाई पद पाती है। और विष्णु माला जो बनती है पहले-पहले वो राजा पद नहीं पाते हैं। उनको कौनसा पद मिलता है? रानियाँ बन सकती हैं। माना रानियां भी आधीन रहती हैं। राजा किसी के आधीन नहीं रहता है। ऊँच पद किससे मिलता है? विष्णु से या शिव से? शिव से ऊँच पद मिलता है।

समयः 18.48-23.14
जिज्ञासुः बाबा, एक कन्या पूछ रही है - एक कैसेट में बाबा ने कहा है जो भी अभी का धन-दौलत सब भूकम्प द्वारा, अग्नि में और चोर द्वारा, डकैत द्वारा...

बाबाः खलास हो जाता है।
जिज्ञासुः खलास हो जाता है। इसलिए ईश्वरीय कार्य में लगाने से...
बाबा: सफल हो जायेगा
जिज्ञासु: सफल हो जाएगा और आपको रिटर्न भी मिलेगा। वो रिटर्न मिलेगा इसी जन्म में?
बाबाः इस जन्म में भी रिटर्न मिलेगा और 21 जन्म के लिए ब्याज भी मिलेगा और फिर 63 जन्म लिए ब्याज के ऊपर भी ब्याज मिलेगा। क्योंकि 21 जन्म के आधार पर 63 जन्मों का भी हिसाब-किताब बन जाता है।

अभी जो ईश्वरीय यज्ञ में दे रहे हैं, जब अकाल पड़ेगा, पानी की एक बूंद भी तरसेंगे लोग और रोटी का एक टुकड़ा भी नहीं मिलेगा लोगों को खाने के लिए उस समय ईश्वरीय यज्ञ में पलने वाले बच्चे भूख नहीं मरेंगे। उस समय इतनी महंगाई बढ़ जाएगी कि जो अभी एक नोट काम करता है वो नोटों की गड्डी वो काम नहीं कर सकेगी। तो कितनी वैल्यू बढ़ जाएगी? यज्ञ में जो अन्न होगा उसकी बहुत वैल्यू बढ़ जाएगी। अभी भी दुनिया में खाद्यान्न बहुत कम हो गया है। बड़ी-2 फैक्टरियाँ बनती चली जा रही हैं। बड़े-बड़े कारखाने तैयार होते चले जा रहे हैं। लेकिन अनाज कोई नहीं पैदा करना चाहता। क्योंकि खेती में कुछ पैदा ही नहीं होता। मेहनत कोई करना नहीं चाहता। ऐसे होते-होते-होते जब अकाल पड़ेगा तो चारों तरफ भुखमरी फैल जाएगी। उस समय बाबा के बच्चों को जरूर मिलेगा।

तो जितना दिया है उतना सब वापस मिल जाएगा। जिन्होंने दिया होगा उनको मिलेगा। जिन्होंगे बाबा के बैंक में जमा किया होगा, उनको मिलेगा। नहीं किया होगा, बैंक में डाल के रखा होगा तो बैंके फेल हो जाएगी। जमीन में गाढ़ के रखा होगा, भूकम्प आएगा, जाने कहाँ का कहाँ चला जाएगा। आग जला देगी। घर में दबा के, छुपा के रखा होगा, चोर ले जाएंगे। लेकिन बाबा के भण्डारे में जिन्होंने ईश्वरीय सेवा में लगाया... ईश्वरीय सेवा में लगाने का मतलब ये नहीं कि ब्रह्माकुमार-कुमारियों को दे देना। क्या? भागदौड़ करके ईश्वरीय सेवा में लगाया जा सकता है। चक्कर काटेंगे ईश्वरीय सेवा में तो खर्चा होता है कि नहीं होता है? होता है। उस तरीके से जो ईश्वरीय सेवा में खर्च करेंगे उनको रिटर्न में जरूर मिलेगा। और इसी जन्म में मिलेगा। ऐसे नहीं अगले जन्म में मिलेगा। जितना लेंगे शिवबाबा उतना इस जन्म में रिटर्न भी कर देंगे और 21 जन्मों के लिए ब्याज भी मिलेगा। इतना बड़ा ब्याज दुनिया में और कोई दे ही नहीं सकता। और फिर ब्याज के ऊपर भी ब्याज मिलता है, वो 63 जन्म मिलता रहेगा।


Disc.CD No.618, dated 25.08.08 at Nellore
Extracts-Part-2


Time: 09.28-10.48
Student: Baba, what is the May Sabhaa (Court room) of the Pandavas?

Another student: There are the Kaurvas and the Pandavas, aren't there? So, it has been shown in the scriptures that when Duryodhan goes to the May sabha of the Pandavas… such stories have been made. She is asking, is it here that [the shooting] takes place? Where does it take place?
Baba: The fort of the Pandavas is becoming ready now for which it has been said that the fort of the Pandavas will become such that no vicious person will be able to step into it. It has not become ready yet. It will become. It's named as Indraprasth. What is the name of the fort of the Pandvas? Indraprasth.

Time: 10.48-12.46
Student: Baba, the soul of Yamuna, the soul of Saraswati is revealed. But has the soul of Ganga been revealed now or not?

Baba: The Ganges have emerged in the last. The Ganges of knowledge emerges in the last. Who squat with legs folded on the banks of the Ganges of knowledge, on the banks of the Ganges? The Sanyasis. When the Sanyasis emerge, then you children will become victorious. Are you becoming victorious or are you suffering defeat as well now? Now you are suffering defeat. But when the Sanyasis understand this, then you children will gain victory. The Sanyasis sitting on the banks of the Ganges have a lot of power of purity of many births. When they become helpers, then the sound will spread everywhere. But they will emerge only when the Ganges emerges. The Ganges is not one. There is a group of the Ganges of knowledge as well. And they emerge from north India. There is the Ganges of knowledge in the beginning as well in the end. In the beginning there was a Ganges in the basic [knowledge] as well. You must have heard the name of Gangey Dadi. She was well-versed in scriptures. Similarly, the same virgin listens to the advance knowledge first of all in the advance [party]. It was she who understands the satopradhan knowledge first of all. Later on the other rivers listen [to the knowledge]. So, as in the beginning, so she emerges in the end. She has not emerged yet. She is going to emerge.

Time: 12.49-13.34
Student: Will all the souls living in the new gathering, NS become deities?

Baba: And will those who are following the advance [knowledge], the basic [knowledge] not become deities? In the basic [knowledge] the souls who are going to become Narayans, who will become Narayans with fewer celestial degrees not go to heaven? Those who become No.1 deities will have 84 births. Those who become number wise [deities] will not have 84 births. They will become deities with fewer celestial degrees. If they have any weakness left in them, they will convert to the other religions from the Copper Age.

Time: 14.28-16.13
Student: Fakir (beggar) and Amir (rich) in the Confluence Age...

Baba: When the part of every soul is revealed in the beginning of the Confluence Age, then it becomes amir . What? Then it has to pass through the four stages. Satopradhan, satosamanya, rajo and tamo. Slowly, they become fakir by coming in the colour of the company of many. One passes through the four stages in the Confluence Age itself. You become fakirs by coming in the colour of the company of many and you become amir by coming in the colour of the company of One. For how long do you remain constant in the stage of one ShivBaba and no one else?

Time: 17.01-18.07
Student: There are Shaivites (worshippers of Shiva) and Vaishnavites (worshippers of Vishnu) in this world. Who is elevated between both?

Baba: The followers of Shiva are Shaiv. And the followers of Vishnu are Vaishnav. Those who become the direct progeny of Shiva are called [the ones who belong to] the Shaiv community. And those who become the direct progeny of Vishnu are called [the ones who belong to] the Vaishnav community. Those who become the progeny of Shiva are [part of] the Rudramala. That Rudramala obtains the royal position. And [those who become part of] the Vishnumala first of all do not get the position of kings; which position do they get? They can become queens. It means that the queens are also subordinates. A king does not remain under anyone’s control. From whom do we get a high position? From Vishnu or from Shiva? You obtain a high position from Shiva.

Time: 18.48-23.14
Student: Baba, a girl is asking: Baba has said in a cassette that whatever wealth and property there is now [will be lost] in the earthquakes, fire, thieves and dacoits...

Baba: It will perish.
Student: It perishes. That is why if you use it in a Divine (iishwariya) purpose...
Baba: It will prove useful.
Student: It will prove useful and you will get its return as well. Will we get that return in this very birth?
Baba: You will get its return in this birth, you will also receive an interest for 21 births and then you will get an interest on interest for 63 births because the karmic accounts of 63 births are created on the basis of the 21 births.

Those who are giving [their wealth] in the Yagya of God, when there is a drought , when people will suffer to get even a drop of water and when they will not find even a piece of roti to eat, then the children who are sustained in the Yagya of God will not die of hunger. At that time the prices will rise so high that the task that is accomplished with just one note now will not be possible even with a bundle of notes. So, its value will increase so much! The food in the Yagya will become very valuable. Even now [the amount of] food grains has decreased a lot in the world. Big factories are being built. Big plants are being constructed. But nobody wants to grow food grains because nothing is produced in the fields at all. Nobody wants to work hard. When this continues, and there is a drought, there will be starvation everywhere. At that time Baba's children will definitely get [food].

So, you will get back whatever you have given. Those who gave will get back. Those who deposited in Baba’s bank will get [the return]. If they did not give, if they kept it in banks, all the banks will fail. If they have hidden it underground, then earthquakes will occur and who knows where it will go. The fire will burn it. If they have buried it, hidden it at home, the thieves will take it away. But those who invested it in Baba's bhandara (store house), those who invested it in the service of God; investing in the service of God does not mean that you should give it to the Brahmakumar-Kumaris. What? You can use it in running around for the service of God. If you travel around for the service of God, does it involve expenditure or not? It does. In that way, those who spend it in the service of God, will definitely get in return. And they will get it in this very birth . It is not that they will get it in the next birth. ShivBaba will return in this birth whatever He takes and you will also get interest for 21 births. Nobody else in the world can give such a big interest. And then you get interest upon interest too. You will continue to get it for 63 births.
... (to be continued.)

Shivaka.bachha
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by Shivaka.bachha » 31 Mar 2014

Arjun,
Can U Post old Murlis as it is on this site

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 31 Mar 2014

Can U Post old Murlis as it is on this site
shivaka.bachcha,
Om Shanti. I don't have the scanned copies of the old Murlis that you seek.
I suppose you are new to this forum. Therefore, you are requested to avoid posting questions in this thread. There are other threads for posting any question.
The Admin is requested to kindly move/delete the post of shivaka.bachcha and my reply from this thread as this thread is not meant for discussions but for only posting extracts of BK Murlis.
OGS,
Arjun

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 31 Mar 2014

वार्तालाप-618, नेल्लूर, दिनांक 25.08.08
उद्धरण-भाग- 3


समयः 23.18-27.20
जिज्ञासुः बाबा, विष्णु को गरुड़ मंथन के ऊपर दिखाते हैं ना। ...

बाबाः तेलुगु लो चेप्पू। (तेलुगु में बोलो)।
दूसरा जिज्ञासुः गरुड़ वाहन के ऊपर विष्णु को दिखाते हैं।
बाबाः गरुड़?
दूसरा जिज्ञासुः आधीन होता है क्या?
बाबाः गरुड़ जो है... मोर को भी गरुड़ कहते हैं। गरुड़ माने जो सांपों को खा जाता है। सर्प, बिच्छू, टिण्डन को खा जाता है। तो दुनिया में जितने भी दु:खदायी हैं, राक्षस, उन राक्षसों को निगल जाने वाला, वो पक्षी है। ऊँची स्टेज में उड़ता है। वो कोई पक्षी गरुड़ कोई और है नहीं दूसरा। शिव बाप जिसमें प्रवेश करते हैं वो ही गरुड़ पक्षी है। और जो इस दुनिया में पवित्र रहने वाली कन्याएं हैं, माताएं हैं, उनके आधीन होकर रहता है। क्या? माने वो कन्याएं, माताएं जो पवित्रता का आगार हैं, उनके अंडर में रहता है। दूसरों के अंडर में नहीं रहता। जैसे कि देवी की सवारी किसके ऊपर दिखाई है? शेर के ऊपर। तो शेर कोई दूसरा नहीं है। ये कांटों का जंगल है दुनिया। इस कांटों के जंगल में तीन शेर हैं विशेष। बाबा कहते हैं तीन शेर नहीं हैं। उनमें एक घोड़ा है, एक बकरी है, एक शेर है।

तो जो एक शेर है वो शंकर के ऊपर ही देवी की सवारी होती है। अब वो सवारी दिखाएं और चाहे छाती के ऊपर शंकर के... शंकर की छाती के ऊपर देवी का पांव दिखाते हैं। पांव दिखाना माना आधीन कर लेना। भगवान तो प्यार के आधीन होता है। जोर जबरदस्ती के आधीन नहीं होता। भगवान का जो काम करेगा, भगवान को वो प्यारा लगेगा। शंकर का काम क्या है? दुनिया का, पतित आसुरी दुनिया का विनाश। और शंकर करता है या असुर संहारणियाँ शक्ति करती हैं? शक्तियाँ करती हैं। तो जो शक्ति ये कार्य करके दिखाये उसके सामने झुक जाते हैं। कौन? शंकर। उनका काम तो सहज हो गया ना। कोई गाय है, लात मारती है, लेकिन दूध तो देती है। तो दूध देने वाली गाय का लात खाना खराब बात है क्या? ऐसे ही है। प्यार के भूखे हैं भगवान। सच्चा प्यार दुनिया में कोई नहीं देता। सब स्वार्थी हैं। रथ का सुख भोगने वाले हैं।


समयः 28.50-32.20
जिज्ञासुः नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी कहते हैं ना। जो रुद्रमाला के मणकों में भी जो महिलाएं, माताएं हैं वो भी लक्ष्मी बनेंगे क्या?

बाबाः जो रुद्रमाला में हैं कन्याएं-माताएं वो जगदम्बा की भुजाएं हैं या जगतपिता की भुजाएं हैं? किसकी भुजाएं हैं? (सभी ने कहा – जगतपिता।) जगतपिता की भुजाएं हैं? रुद्रमाला में जो कन्याएं-माताएं हैं, वो जगदम्बा की भुजाएं हैं या जगतपिता की भुजाएं हैं? (जिज्ञासु – जगदम्बा।) जगतपिता तो पुरुष है। पुरुष की भुजाएं भी पुरुष हैं। और जगदम्बा की भुजाएं? जगदम्बा कन्या माता है, तो भुजाएं भी? कन्याओं-माताओं की हैं। न जगदम्बा को पुरुषों की भुजाएं लग जाएंगी? भाव, स्वभाव, संस्कार जो होंगे वो जगदम्बा जैसे होंगे ना। ऐसे ही है। जो जगदम्बा है वो पार्ट रुद्रमाला में कन्याओं-माताओं का है क्योंकि घर गृहस्थ की कीचड़ में रह करके कुछ न कुछ दुनिया की छींट लगती जरूर है। और वो विजयमाला? विजयमाला में से अगर कन्याएं-माताएं चाहें तो उनको पवित्र रहने से कोई रोक नहीं सकता। पवित्र रहती हैं। पवित्र रहने वाली...

पवित्रता बड़ी चीज़ नहीं है। अगर पवित्रता ही बड़ी चीज़ होती तो भगवान को इस सृष्टि पर आने की दरकार होती? भगवान अपवित्र के लिए आता है या पवित्र के लिए आता है?
(जिज्ञासु - अपवित्र के लिए।) अपवित्र को पवित्र बनाने के लिए आता है। तो रुद्रमाला में जो कन्याएं हैं, माताएं हैं, वो भी कीचड़ की दुनिया में हैं। और पुरुष तो हैं ही कीचड़ की दुनिया में जिनके लिए भगवान आया हुआ है। अब कन्याएं-माताएं हैं उनमें से कोई के स्वभाव-संस्कार बदल जावेंगे, पूरा पुरुषार्थ कर लेंगी तो हो सकता है उनके हॉरमोन्स भी चेंज हो जाएं, वो स्त्री चोले से पलट कर पुरुष चोला बन जाएंगे। पुरुष चोला बन जाएंगी तो नर से क्या बन जाएंगी फिर? नारायण बन जावेंगी। ऐसे विजयमाला में भी होगा। विजयमाला में भी ऐसे नहीं कि सब कन्याएं-माताएं ही होंगी। कोई-कोई पुरुष भी होंगे लेकिन उनका स्वभाव-संस्कार कैसा होगा? कन्याओं-माताओं जैसा। उनके भी हॉरमोन्स बदलेंगे। कन्याओं-माताओं के जैसे स्वभाव-संस्कार लचीले हो जाएंगे। वो विजयमाला में आ सकते हैं।

समयः 32.30-36.50
जिज्ञासुः आत्मिक स्थिति में स्थित होने में मन काम नहीं कर रहा है। मेहनत करना पड़ता है। क्या करें?

बाबाः जैसा संग वैसा रंग लगता है। जैसा अन्न खाएंगे वैसा मन बनेगा। विकारियों का संग करेंगे तो विकार पीछा करेंगे। तन को ईश्वरीय कार्य में, सेवा में लगावेंगे तो ईश्वर उजूरा देगा। जहाँ हमारा तन होगा, वहाँ हमारा मन होगा। भगवान, ईश्वर मन हमारे को खींच लेगा। माया नहीं खींच पाएगी।
जिज्ञासुः तन को ईश्वरीय सेवा में लगाना कैसे?
बाबाः तन को ईश्वरीय सेवा में कैसे लगाना? आसुरी सेवा में कैसे लगा रहे हैं? असुरों की सेवा में लगा रहे हैं कि नहीं लगा रहे हैं? तो ईश्वर के बच्चों की सेवा में भी लगा सकते हैं। ईश्वर की सेवा में डायरेक्ट लगा सकते हैं।
जिज्ञासुः हम सभी को सुनाते हैं, कुछ सुनने वाले नहीं हैं। तो किसको सुनाएं?
बाबाः न सुनाओ किसी को। ईश्वरीय कार्य तो चल रहा है। परिवार है कि नहीं ईश्वर का? ईश्वरीय परिवार में बच्चे हैं कि नहीं? उन बच्चों की सेवा करो। माताओं की तो बहुत जरूरत है। कन्याओं को तो ढ़ेर की ढ़ेर अर्पण कर देते हैं। माताओं को तो कोई अर्पण नहीं करता। जितना गुड़ डालेंगे उतना मीठा होगा। जितना तन, मन, धन ईश्वरीय सेवा में स्वाहा करेंगे उतना मन ईश्वरीय सेवा में लगेगा। तन और धन असुरों की सेवा में जाएगा तो मन भी असुरों में जा करके चिपक जाएगा। असुर ही याद आते रहेंगे।

Disc.CD No.618, dated 25.08.08 at Nellore
Extracts-Part-3


Time: 23.18-27.20
Student: Baba, Vishnu is shown to be sitting on Garud manthan. ...

Baba: Telugu lo ceppu (speak in Telugu). :D
Another student: Vishnu is shown to be sitting on the Garud (eagle).
Baba: Garud?
The other student: Is it under his control?
Baba: As regards Garud... a peacock is also called Garud. Garud means the one who eats snakes. It eats snakes, scorpions and spiders. So, it is that bird that gobbles up all the demons who give sorrow. He flies in a high stage. Garud is no some other bird. The one in whom the Father Shiva enters is himself the bird Garud. And he remains under the control of the virgins and mothers who remain pure in this world. What? It means that he remains under the control of the virgins and mothers who are a store house of purity. He does not remain under the control anyone else. For example, a devi (female deity) is shown to be riding what? A lion. So, the lion is not someone else. This world is a forest of thorns. There are three special lions in this forest of thorns. Baba says, there aren’t three lions. Among them one is a horse, one is a goat and one is a lion (tiger).

So, the one who is a lion (tiger); the devi rides on that Shankar himself. Well, whether they show him as a mount or whether they show [the leg of the devi] on Shankar’s chest. The leg of the devi is shown on the chest of Shankar. To show the leg [on the chest] means to take him under control. God bows before love. He does not bow before force. The one who performs the task of God will be loved by God. What is Shankar’s task? Destruction of the world, the sinful demonic world. And does Shankar perform [this task] or do the shaktis , the slayer of demons perform [this task]? The shaktis perform it. So, he bows before the shakti who performs this task. Who? Shankar. His task was simplified, wasn’t it? Suppose there is a cow; she kicks, but she does give milk, [doesn’t she?] So, is it something bad to tolerate the kicks of a cow that gives milk? It is the similar thing [here]. God is hungry for love. Nobody gives [Him] true love in the world. Everyone is selfish (swaarthi). They enjoy the pleasures of the Chariot (rath, i.e. body).


Time: 28.50-32.20
Student: It is said Narayan from a man and Lakshmi from a woman. Will the women, mothers among the beads of the Rudramala also become Lakshmi?

Baba: Are the virgins and mothers in the Rudramala the arms of Jagdamba or the arms of Jagatpita (World Father)? Whose arms are they? (Everyone said: Jagatpita.) Are they the arms of Jagatpita? Are the virgins and mothers in the Rudramala the arms of Jagdamba or Jagatpita? (Student: Jagdamba.) Jagatpita is a man. The arms of a man are also men. And what about the arms of Jagdamba? Jagdamba is a virgin, a mother; so, what about her arms as well? They are virgins and mothers. Or will Jagdamba have the arms of men? They will have feelings, nature and sanskars like Jagdamba , will they not? It is a similar case. As regards Jagdamba... it is the part of virgins and mothers in the Rudramala because when they live in the mire of the household, then the drops of [the mire] of the world certainly falls on them to some extent. And what about that Vijaymala ? If the virgins and mothers from the Vijaymala wish to lead a pure life, nobody can stop them. They remain pure. Those who lead a pure life...

Purity is not a great thing. Had just purity been a great thing, would there be a need for God to come in this world? Does God come for the impure ones or for the pure ones?
(Student: For the impure ones.) He comes to purify the impure ones. So, the virgins and mothers in the Rudramala are also in the world of mire. And the men, for whom God has come, are anyway in a world of mire. Well, if the nature and sanskars of any of the virgins and mothers change, when they make complete purusharth (spiritual effort), then it is possible that their hormones may change; they may change from females to males. If they become males then what will they change from a man to? Then they will become Narayan. A similar thing will happen in the Vijaymala as well. Even in the Vijaymala it is not that there will be just virgins and mothers. There will be some men as well. But how will their nature and sanskars be? It will be like virgins and mothers. Their hormones will also change. Their nature and sanskars will become flexible like the virgins and mothers. They can also come in the Vijaymala.

Time: 32.30-36.50
Student: The mind is unable to become constant in the soul conscious stage. We have to work hard [for it]. What should we do?

Baba: As is the company so is the colour that is applied on you. As is the food you eat so shall your mind become. If you remain in the company of vicious people, the vices will chase you. If you engage your body in the work of God, the service of God, then God will give you its return. Our mind will be wherever our body is. God, Ishwar will pull our mind. Maya will not be able to pull it.
Student: How should we use our body in the service of God?
Baba: How should you use your body in the service of God? How are you using it in the demonic service? Are you using it in the demonic service or not? So, you can use it in the service of God's children as well. You can use it in the service of God directly.
Student: I narrate [the knowledge] to everyone; but they do not listen. Whom should I narrate it to?
Baba: Do not narrate it to anyone. The work of God is certainly going on. Is there a family of God or not? Are there children in the family of God or not? Serve those children. The mothers are needed a lot. People surrender many virgins. Nobody surrenders the mothers. [Something] will become sweet to the extent you add molasses to it. The more you sacrifice your body, mind, wealth in the service of God, the more your mind will be busy in the service of God. If the body and wealth is used in the service of demons, the mind will also stick to the demons. Only demons will come to your mind. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 01 Apr 2014

वार्तालाप-618, नेल्लूर, दिनांक 25.08.08
उद्धरण-भाग- 4


समयः 38.55-39.35
जिज्ञासुः बाबा, आदि में जो माताएं थी एक है गीता माता। बाकी दूसरी माता है। वो माता कितने जन्म लेती है? ...क्या-2 नाम होता है?

बाबाः आदि में दो माताएं थीं। दोनों ही गीता माता। एक सच्ची गीता और एक झूठी गीता। मनुष्य बनाते हैं झूठी गीता और भगवान आ करके बना देते हैं सच्ची गीता।

समयः 40.20-42.10
जिज्ञासुः सबसे पहले माया सरेन्डर होगी, ऐसे बोला है ना। तो माया वाली आत्मा अभी शरीर से नहीं है ना।

बाबाः शरीर नहीं है। वो माया आधारमूर्त जड़ थी या बीज थी? जिस माया की बात कर रहे हैं कि शरीर नहीं है, शरीर छोड़ दिया। वो शरीर छोड़ने वाली माया वो जड़ थी , आधारमूर्त जड़ थी या बीज थी? (जिज्ञासु - आधारमूर्त जड़ थी।) आधारमूर्त जड़ थी। जड़ से भी ज्यादा पावरफुल कौन होता है? (जिज्ञासु – बीज।) वो बीज अभी जिन्दा है कि मर गया? (जिज्ञासु - बीज जिन्दा है।) तो बीज की बात करो। (जिज्ञासु - वो बीजरूप आत्मा कौन है?) एडवांस के आदि में वो बीज कौन थी जो जगदम्बा से भी पहले निकली थी? बेसिक में भी ओम राधे जगदम्बा तो बाद में आई। उससे भी पहले कुमारिका दादी निकली थी? ऐसे ही एडवांस में भी जो जगदम्बा है वो तो बाद में आती है। बाद में सरेण्डर होती है। पहले उससे भी पहले कौन सरेण्डर हो गई थी? अरे, बड़ी मम्मी से भी पहले सरेण्डर कोई कन्या हुई थी? (जिज्ञासु – यमुना।) हाँ, यमुना सरेण्डर हुई थी ना। वो ही बीज है।

वार्तालाप-618, निलंगा, दिनांक 19.08.08

समयः 00.01-01.35
जिज्ञासुः बाबा, ब्रह्मा की आयु 100 साल मानी जाती है। ब्रह्मा तो चार-पाँच हैं जिनमें से दो ब्रह्मा की अमरलोक का प्रवास तो मालूम हो चुका है। अमरलोक का प्रवास मतलब 100 साल। अन्य जो 2-3 ब्रह्मा बचते हैं, उनके अमरलोक का प्रवास कब से शुरु होता है?

बाबाः अव्वल नंबर और द्वयम नंबर को ही पकड़ा जाता है। कहते हैं फर्स्ट क्लास, सेकण्ड क्लास अथवा ज्यादा से ज्यादा थर्ड क्लास, फिर फोर्थ क्लास, फिफ्थ क्लास कोई पकड़ता है क्या?
जिज्ञासुः थर्ड क्लास का भी पता नहीं चला ना।
बाबाः थर्ड क्लास तो क्लीयर हो गया। यज्ञ के आदि में था कि नहीं? तीनों जो ब्रह्मा हैं वो यज्ञ के आदि में थे या नहीं? शिव बाप अकेले तो आते नहीं। किसके साथ आते हैं? तीन मूर्तियों के साथ आते हैं। तो तीन मूर्तियों में प्रवेश तो करते होंगे ना। चलो विष्णु में प्रवेश नहीं करते, मालूम नहीं पड़ता कि प्रवेश करते कि नहीं करते क्योंकि बोलते तो कुछ है नहीं। विष्णु के द्वारा ज्ञान तो नहीं सुनाते हैं। सुनाते हैं या प्रैक्टिकल एक्ट करके दिखाते हैं?
जिज्ञासुः प्रैक्टिकल एक्ट करके दिखाते हैं।
बाबाः अगर विष्णु वाली आत्मा ने 63 जन्म में ही प्रैक्टिकल एक्ट करके दिखाई होती तो फिर भगवान को आने की दरकार थी नहीं।

समयः 01.38-03.40
जिज्ञासुः बाबा, सीढ़ी के चित्र में जो चार धर्म की चार आत्माएं दिखाई हैं - देवता धर्म, इस्लाम धर्म, बौद्धी और क्रिश्चियन धर्म। उनके साथ 3 सहयोगी शक्तियाँ दिखाई गई हैं। वो चार और तीन सात हो गए और माँ-बाप दो। नौ रत्न जो हैं वो 8 रत्न में गिने जाते हैं कि नहीं?

बाबाः रतन तो नौ ही होते हैं। लेकिन उनमें एक वैल्यूएबल मोस्ट होता है और एक नॉन वैल्यूएबल होता है। इसलिए वो नॉन वैल्यूएबल सिर्फ औरों की वैल्यू दिखाने के लिए है। बाकी उसका कोई प्रयोजन है नहीं। उसकी कोई मान्यता नहीं है। तो 9 ही मुख्य हैं। बाकी दसवां तो कुछ प्राप्ति ही नहीं करता भगवान से। योग सीखता ही नहीं यूं कहें। योग से तो राजाई प्राप्त होती है। और नास्तिकों को राजाई मिलती है? मिलती ही नहीं है क्योंकि वो योगी बनते ही नहीं हैं। उनका तो जीवन का ध्येय होता है यावत् जीवेत सुखम जीवेत। जब तक जीयो सुख से जीयो। ऋणम् कृत्वा घृतम् पीवेत्। उधार लेते जाओ घी पीये जाओ। शरीर छूट जाएगा, खलास हो जाएंगे फिर तो कौन किसका लेता है, कौन किसको देता है? वो आत्मा को ही नहीं मानते।
जिज्ञासुः अष्ट रत्न में गिने नहीं जाते?
बाबाः दसवाँ नहीं रतन में गिना जाता है। न रतन में न अष्टदेव में। नौवां कम से कम रतन तो गिना जाता है।

समयः 03.46-04.55
जिज्ञासुः बाबा, स्थूल सूर्य रोज़ उगता है और डूब जाता है। तो इसका बेहद में अर्थ क्या है?

बाबाः रोज़ सतयुग के आदि में सवेरा होता है और कलियुग की रात्रि में अंधेरा हो जाता है। तो ये बेहद का दिन और बेहद की रात रोज़ ही चलती है। दिन है सतयुग त्रेता और रात है द्वापर कलियुग। द्वापर कलियुग के अंत में माउंट आबू में यादगार क्या बनी हुई है? ज्ञान सूर्य अस्त हो जाता है। अभी तो उदय की भी यादगार बन रही है वहाँ। क्या? पहले सिर्फ एक ही यादगार थी। क्या? सूर्योदय की यादगार नहीं थी। कौनसी थी? (जिज्ञासु – सूर्यास्त।) हाँ, सनसेट प्वाइंट की यादगार थी। अभी? हाँ, अभी यादगार बनी। लोग जा करके देख रहे हैं कि सूर्योदय हो रहा है।

Disc.CD No.618, dated 25.08.08 at Nellore
Extracts-Part-4


Time: 38. 53-39.35
Student: Baba, there were two mothers in the beginning. [Among them] one is the Mother Gita and there is another mother. How many births does she have? ...what are her names [in those births]?

Baba: There were two mothers in the beginning. Both were Mother Gitas. One was the true Gita and the other was the false Gita. People make false Gita and God comes and makes the true Gita.

Time: 40.20-42.10
Student: First of all Maya will surrender [herself]. It has been said like this, hasn't it? The soul of Maya does not have her body now, does she?

Baba: Her body is not present. Was that Maya aadhaarmuurt (base like [soul]), a root or was she a seed? The Maya about whom you are speaking that she does not have a body, she has left the body, was that Maya who left her body a root, an aadhaarmuurt (base like) root or a seed? (Student: She was an aadhaarmuurt root.) She was an aadhaarmuurt root. Who is more powerful than the root? (Student: Seed.) Is that seed alive now or has she died? (Student: The seed is alive.) So, speak about the seed. (Student: Who is that seed form soul?) Who was that seed in the beginning of the advance [party] who came even before Jagdamba? Even in the basic [knowledge] Om Radhey Jagdamba came later on. Did Dadi Kumarika come before her? Similarly in the advance [party] Jagadamba comes later on. She surrenders [herself] later on. Who surrendered [herself] before her? Arey, did any virgin surrender [herself] even before the senior mother? (Student: Yamuna.) Yes, Yamuna surrendered [herself], did not she? She herself is the seed.

Disc.CD No.618, dated 19.08.08 at Nilanga

Time: 00.01-01.35
Student: Baba, Brahma's age is believed to be 100 years. There are four-five Brahmas. Out of them we have come to know about the journey of two Brahmas to the immortal world (amarlok) . Journey to the amarlok [i.e.] 100 years. When does the journey of the other two-three Brahmas to the amarlok begin?

Baba: Only the number one and number two are taken into account. It is said first class, second class or at the most third class; does anyone take fourth class or fifth class into account?
Student: We did not come to know of the third class either, did we?
Baba: The third class [Brahma] has become clear. Was it present in the beginning of the Yagya or not? Were all the three Brahmas present in the beginning of the Yagya or not? The Father Shiva doesn't come alone. With whom does He come? He comes with the three personalities. So, He will enter the three personalities, won’t He? OK, He does not enter Vishnu; it is not know whether He enters or not because He does not speak anything. He does not narrate knowledge through Vishnu. Does He narrate [through Vishnu] or does He act in practice?
Student: He acts in practice.
Baba: Had the soul of Vishnu performed the task in practice in the 63 births, there wouldn’t have been the need for God to come.

Time: 01.38-03.40
Student: Baba, the four souls of four religions that have been depicted in the picture of the Ladder: the Deity Religion, the Islam, Buddhism and Christianity, three helper shaktis have been depicted with them. Those four [males] and three [females] make seven and two parents. So, are those nine gems counted among the eight gems or not?

Baba: There are only nine gems. But among them one is the most valuable. And one is non-valuable. This is why that non-valuable is present only to show the value of others. It does not serve any other purpose. It does not command any respect. So, only nine are the main ones. The tenth one does not receive any attainment from God at all. Or we could say that he does not learn Yoga at all. Yoga leads to the attainment of kingship. And do the atheists get kingship? They do not get it at all because they do not become yogis at all. The aim of their life is - Yaavat jeevet sukham jeevet [i.e.] live comfortably as long as you are alive. Rinam kritwa ghritam peevet [i.e.] go on taking loan and drink ghee (clarified butter). When the body perishes, when we perish, then who will take from whom, who will give to whom? They do not believe in the soul at all.
Student: Are they not counted among the eight gems?
Baba: The tenth one is not counted among gems. [He is counted] neither among gems nor among the eight deities. The ninth one is at least counted among gems.

Time: 03.46-04.55
Student: Baba, the physical Sun rises and sets every day. So, what does it mean in the unlimited?

Baba: In the beginning of the Golden Age there is dawn everyday and in the night of the Iron Age there is darkness. So, this unlimited day and unlimited night continues every day. The Golden and Silver Ages are day and the Copper and Iron Ages are night. What memorial is built in Mount Abu in the end of the Copper and Iron Ages? The Sun of Knowledge sets. Now the memorial of the rise [of the Sun] is also becoming ready there. What? Earlier there was only one memorial. What? There wasn't a memorial of the Sunrise. Which [memorial] was present? (Student: Sunset.) Yes, there was a memorial of the sunset point. Now? Yes, now the memorial has become ready. People go and see that the Sun is rising. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 02 Apr 2014

वार्तालाप-618, निलंगा, दिनांक 19.08.08
उद्धरण-भाग- 5


समयः 04.56-08.00
जिज्ञासुः बाबा, मुरली में बोलते हैं रचयिता को पहचानना इतना मुश्किल नहीं है, लेकिन रचना जगदम्बा को पहचानना बहुत मुश्किल होता है।

बाबाः फिर?
जिज्ञासुः जबकि जगदम्बा तो बाप की रचना है।
बाबाः हाँ। तो रचना में ज्यादा ताकत भरी गई है या रचयिता में ज्यादा ताकत भरी गई है? (किसीने कहा – रचयिता।) रचयिता में ज्यादा [ताकत है]? किसने भरी रचयिता में ज्यादा ताकत? रचयिता तो जितना याद कर लेगा, खुद जितना याद करेगा, उतनी तो ताकत भरेगी कि कोई दूसरा ताकत भरेगा?

शिवबाबा भरेगा रचयिता में ताकत? ब्रह्मा बाबा को कभी ज्यादा ताकत भर दी? जिस दिन शरीर छोड़ा उस दिन भी खांसी, खांसते-खांसते और हार्टफेल हो करके शरीर छोड़ा। तो शिवबाबा तो पार्शियालिटी करता नहीं। पार्शियालिटी देहधारी करेगा या निराकार करेगा?
(सभी ने कहा – देहधारी।) हाँ। तो जगदम्बा को प्राप्ति कराने में जो सहयोगी बनता है वो कोई देहधारी भी होता है या सिर्फ निराकार होता है? ( किसीने कहा – देहधारी।) देहधारी भी होता है। एडी से लेकर चोटी की सारी ताकत किसमें भर देता है संग के रंग की? जगदम्बा में। जितनी जगदम्बा ताकत भरती है इतनी ताकत संग के रंग की और कोई आत्मा नहीं भरती। इसलिए लक्ष्मी से भी ज्यादा पावरफुल हो जाती है। पद नहीं मिलता। लेकिन पावरफुल बहुत होती है। कोई राज्य होता है तो राज्य में जो महारानी होती है वो ज्यादा पावरफुल होती है या जो सेनानायक होता है वो ज्यादा पावरफुल होता है? ज्यादा पावरफुल कौन होता है? सेनानायक ज्यादा पावरफुल होता है। अगर सेनानायक की नीयत खराब हो जाए तो राजा के ऊपर भी क्या करे? कंट्रोल कर ले। और ऐसा हुआ है कि नहीं हुआ है हिस्ट्री में? हुआ है। राज करेगा खालसा। कौनसे धर्म में मान्यता है? सिक्ख धर्म में। सिक्ख धर्म में ही क्यों मान्यता है? सिक्ख धर्म हिन्दू धर्म की बातों को तो मानता नहीं। लेकिन फिर देवियों को क्यों मानते हैं वो लोग? क्योंकि देवियों में जो मुख्य देवी का पार्ट बजाने वाली है वो उनके कुल से आती है। इसलिए उनके कुल में आज तक ये मान्यता है राज करेगा खालसा।

समयः 08.02-08.45
जिज्ञासुः बाबा, जैसे सनातन धर्म का [नाम] सनत कुमार से पड़ता है तो वैसे और धर्मों का नाम किस आधार पे पड़ता है?

बाबाः क्रिश्चियन नाम है। उनका धर्मपिता कौन है? (जिज्ञासु – क्राइस्ट।) क्राइस्ट है ना। इब्राहिम है। राशि का पहला अक्षर क्या है? (जिज्ञासु – इ।) इ। उनके धर्म का नाम क्या है? (जिज्ञासु – इस्लाम।) इस्लाम। मुस्लिम धर्म है। उनके धर्मपिता का नाम क्या है? (जिज्ञासु – मोहम्मद।) मोहम्मद। बुद्ध धर्म है।

समयः 08.48-09.10
जिज्ञासुः बाबा, मुरलियां रिवाइज़ करते हैं बाबा। तो अव्यक्त वाणियां क्यों रिवाइज़ नहीं करते?

बाबाः अव्यक्त वाणियां रिवाइज़ नहीं हो रही हैं? (सभी ने कहा - हो रही हैं।) हो रही हैं। आप सुनते नहीं हैं। वो बात अलग है। आपने सबके सामने ये बता दिया कि हम अव्यक्त वाणियां कभी सुनते ही नहीं।

समयः 09.12-10.28
जिज्ञासुः बाबा, अव्यक्त वाणियों में इतनी मिठास नहीं होती जितनी मुरलियों में होती है रोज़।

बाबाः शिवबाबा ज्यादा मीठा है या ब्रह्मा बाबा ज्यादा मीठा है? (सभी ने कहा – शिवबाबा।) शिवबाबा ज्यादा मीठा है। ब्रह्मा बाबा शिवबाबा जितना मीठा कैसे हो सकता है? ब्रह्मा बाबा जो है वो अपनी जगह पर और शिवबाबा अपनी जगह पर। मिठास में अंतर होगा ना। एक ज्ञान की वाणी सुनाता है और एक धारणा की वाणी सुनाता है। तो धारणा की वाणी ये तो गुरु लोग भी सुनाते रहे हैं। आज की दुनिया के जो गुरु हैं, उनमें भी ज्यादा धारणा है। ब्रह्माकुमार-कुमारियों से कहीं ज्यादा धारणा गुरुओं में है। लेकिन वो भी मीठे नहीं हैं। धारणा, सुनना-सुनाना, धारण करना अलग बात और ज्ञान की गहराई को दूसरों को धारण कराना और प्यार से धारण कराना, मारपीट करने की कोई दरकार न पड़े। तो ये मिठास की बात बाबा में ही है। और कोई ज्ञान को धारण कराय नहीं सकता।

समयः 10.28-11.35
जिज्ञासुः बाबा, बीज जमीन में बोया जाता है। बोये जाने के बाद एक पार्ट उसका धरती के ऊपर आता है तने के रूप में और दूसरा एक पार्ट जमीन के अन्दर जड़ों के रूप में जाता है। तो इसका बेहद में कुछ अर्थ हो सकता है?

बाबाः एक धरणी बनती है एक बाप बनता है। धरणी माना नीची स्टेज में अम्मा जाती है। आज ज्यादा दुर्गति किसकी हुई है? माताओं की हुई है या पिताओं की हुई है? (जिज्ञासु – माताओं की।) माताएं धरणी में जाती हैं, नीचे चली जाती हैं, पाताल में। सारी बंधन में हैं। और पिता? पिता बंधन में हैं, निर्बंधन हैं? (जिज्ञासु – निर्बंधन।) आखरी जन्म में भी निर्बंधन है। बीज ऊपर जाता है और धरणी भारी होती है। देहभान के कारण नीचे जाती है। देहभान माताओं में ज्यादा होता है या पिताओं में ज्यादा होता है? देह का ओना ज्यादा किसको होता है? माताओं में होता है। इसलिए ज्यादा दु:खी होती हैं।

समयः 11.36-13.19
जिज्ञासुः बाबा, कृष्ण जब स्वदर्शन चक्र छोड़कर फिर वापस करते हैं तब उंगली नहीं कटती। लेकिन शिशुपाल को मार के जब सुदर्शन चक्र वापस करते हैं तब क्यों अंगुली कट जाती है?

बाबाः वो पापी को मार दिया ना, भयंकर पापी था। भगवान को भी सामने खड़े-खड़े गाली देता था। कोई कम पापी था? वो भी भरी सभा के बीच में। भीष्म पितामह भी कुछ नहीं बिगाड़ पाए उसका। बड़े-बड़े योद्धा ज्यों के त्यों बैठे रहे। पाण्डवों को भी सबको चुप करा दिया। किसी को नहीं बोलने दिया। दुनिया का कोई और आदमी होता तो गुस्सा आ जाता। शिशुपाल की दुर्गति कर देता कि सद्गति कर देता? (किसीने कहा – दुर्गति।) और भगवान ने तो उसकी फिर भी क्या की? सद्गति कर दी। ये विचार-सागर-मंथन की कमाल है। सांप मरे न लाठी टूटे।

Disc.CD No.618, dated 19.08.08 at Nilanga
Extracts-Part-5


Time: 04.56-08.00
Student: Baba, it is said in the Murli that it is not so difficult to recognize the Creator, but it is very difficult to recognize the creation Jagdamba.

Baba: Then?
Student: Whereas Jagdamba is the creation of the Father.
Baba: Yes. So, is the creation filled with more power or is the creator filled with more power? (Student: The creator.) [Is there more power] in the creator? Who filled power in the creator? The creator will be filled with power to the extent he remembers [ShivBaba] or will anyone else fill him with power?

Will ShivBaba fill power in the creator? Did He ever fill more power in Brahma Baba? Even on the day he left his body [he had] a cough, he left the body while coughing and due to heart failure. So, ShivBaba does not show partiality [for anyone]. Will a bodily being show partiality or will the incorporeal One show partiality?
(Everyone said: The bodily being.) Yes. So, is the one who helps Jagdamba in obtaining attainments also a bodily being or is it just the incorporeal One? (Someone said: Bodily being.) There is a bodily being as well. In whom does he fill the power of the colour of the company from head to toe? In Jagdamba. No soul is filled up with the power of the colour of the company to the extent Jagdamba is filled. This is why she becomes more powerful than even Lakshmi. She does not get [a high] position, but is very powerful. In a kingdom is the Maharani (Queen) of the kingdom more powerful or the Commander of the army more powerful? Who is more powerful? The commander of the army is more powerful. If the intentions of the commander of the army turn bad, then what will he do to the King as well? He will control him. And has it happened like this in the history or not? It has happened. Raaj karegaa khaalsaa (The pure one will rule). Which religion has this belief? Sikhism. Why is it believed only in Sikhism? Sikhism does not accept the concepts of Hinduism. But then why do those people believe in devis? It is because the one who plays the part of the main devi among the devis comes from their clan. This is why it is believed in their clan till today that Raaj karegaa khaalsaa.

Time: 08.02-08.45
Student: Baba, just as [the name] Sanaatan Dharma is based on Sanat Kumar similarly on what basis are other religions named?

Baba: There is the name 'Christian' [religion]. Who is their religious Father? (Student: Christ.) It is Christ, is not it? There is Ibrahim. What is the first alphabet of the word? (Student: I) I. What is the name of their religion? (Student: Islam.) Islam. There is the Muslim religion. What is the name of their religious Father? (Student: Mohammad.) Mohammad. There is Buddhism.

Time: 08.48-09.10
Student: Baba, Baba revises the Murlis. But why doesn't He revise the Avyakt Vanis?

Baba: Are the Avyakt Vanis not being revised? (Everyone said: They are being revised.) They are being revised. You (the student) do not listen to it. That is a different issue. You have declared before everyone that you do not listen to the Avyakt Vanis at all. :D

Time: 09.12-10.28
Student: Baba, there is not as much sweetness (mithaas) in the Avyakt Vanis as in the Murlis [we listen to] daily.

Baba: Is ShivBaba sweeter or is Brahma Baba sweeter? ShivBaba is sweeter. How can Brahma Baba be as sweet as ShivBaba? Brahma Baba has his own specialty and ShivBaba has His own specialty. There will be a difference in sweetness, will it not ? One narrates the versions of knowledge and the other narrates the versions of dhaaranaa . So, even the gurus have been narrating the versions of dhaarnaa. There is more dhaaranaa even in the gurus of today. There is much more dhaaranaa in the gurus when compared to the Brahmakumar-kumaris. But they are not sweet either. Dhaaranaa, to listen and narrate, to assimilate is a different topic and to make others assimilate the depth of knowledge and that too affectionately, there should not be any need to beat. So, this sweetness is present only in Baba. Anyone else cannot make [others] assimilate the knowledge.

Time: 10.28-11.35
Student: Baba, seed is sowed in the land. After being sowed, one of its part comes above the Earth in the form of the trunk and another part goes into the Earth in the form of roots. Can this have any meaning in the unlimited?

Baba: One becomes the Earth and the other becomes the Father. The mother goes into the Earth i.e. in the low stage. Who has experienced more degradation today? Have the mothers (females) experienced [degradation] or have the fathers (males) experienced [degradation]? (Student: The mothers.) Mothers go into the Earth; they go down, to the nadir (paataal). All of them are in bondage. And what about the Father? Is the Father in bondage or is he free? (Student: Free.) He is free even in the last birth. The seed goes up. And what about the Earth? It is heavy. It goes down due to body consciousness. Do the mothers have more body consciousness or do the fathers have more body consciousness? Who is more conscious of the body? The mothers. This is why they become more sorrowful.

Time: 11.36-13.19
Student: Baba, when Krishna throws his swadarshan cakra [at someone] and recalls it, his finger is not cut. But when the swadarshan cakra returned after killing Shishupal , why did his finger get cut?

Baba: [It is because] a sinner was killed, wasn't he? He was an extreme sinner. He used to hurl abuses even at God while standing in front of him - Was he any less sinner? That too in the midst of a packed gathering - Even Bhishma Pitamah could not harm him in any way. Big warriors remained seated. He made even the Pandavas and everyone silent. He did not allow anyone to speak. Had it been any other person of the world, he would have become angry. Would he have brought the degradation or true liberation of Shishupal? (Someone said: Degradation.) And what did God still do to him? He brought about his true liberation. This is the wonder of churning of the ocean of thoughts. The snake should be killed and the stick should not break either. ...(to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 03 Apr 2014

वार्तालाप-618, निलंगा, दिनांक 19.08.08
उद्धरण-भाग- 6


समयः 13.20-14.40
जिज्ञासुः बाबा ने बोला डायरेक्ट कनेक्शन रखना है बाप से, आज की मुरली में। डायरेक्ट कनेक्शन रखना है। इसका बेहद का अर्थ क्या?

बाबाः किसी ने मना किया क्या? डायरेक्ट कनेक्शन रखने के लिए किसी ने मना कर दिया क्या? अच्छा हाथापाई करो, शिशुपाल की तरह गाली दो तो डायरेक्ट कनेक्शन होगा? तो शिशुपाल को कोई ने मना कर दिया था क्या कि डायरेक्ट कनेक्शन न रखे, अपनी अम्मा के थ्रू ही रखे? जैसे ब्रह्माकुमार-कुमारी ब्रह्मा के थ्रू रखते हैं। वो गालियां देते हैं कि नहीं भगवान को? (जिज्ञासु – देते हैं।) हाँ, जी। डायरेक्ट कनेक्शन का मतलब है बीच में कोई मीडिया न हो। इतना नज़दीकी संबंध हो। और संबंध भी अल्पकाल का न हो। कैसा हो? सदाकाल का हो।

समयः 14.48-17.00
जिज्ञासुः मुरली में कहते हैं ना - सौ बगुलों के बीच में रह करके एक हंस पवित्र रह सकता है। फिर ...

बाबाः सौ बगुलों के बीच में एक हंस अपनी मस्ती में रहे। पवित्र रहे, ये नहीं बोला।
जिज्ञासुः फिर ये भी कहते हैं काजल की कोठरी में कोई भी सयाना जाए तो भी एक...।
बाबाः वो बाबा ने नहीं बोला। वो मुरली की कहावत नहीं है। काजर की कोठरी में कैसो हू सयानो जाए, एक लीक काजर की लागे ही पे लागी है। ये मनुष्य गुरुओं की कविता है। क्या? वो मनुष्य गुरुओं की कविता जो मनुष्य हैं उनको लागू होती है। क्या? और सब मनुष्यों को लागू होती है कि सबको संग का रंग लगता है। ऐसा दुनिया में एक भी मनुष्य नहीं है जिसको संग का रंग न लगता हो। हां, अभी तो ज्ञान ले लिया। अभी हम मनुष्य बनें या मनुष्य से ऊँचा उठकर फरिश्ता बनें? क्या बनें? अब तो मनुष्य से ऊँची स्टेज होनी चाहिए। ब्राह्मणों की स्टेज होनी चाहिए। फर्स्ट क्लास ब्राह्मण वो जिनका इस दुनिया वालों से कोई रिश्ता नहीं। एक शिव बाबा दूसरा न कोई। तो जरूर ऐसी स्टेज बन जावेगी कि सौ बगुलों के बीच में रहे तो भी अपनी मस्ती में रहे। कोई दस बातें बोलता रहे, सौ बातें बोलता रहे, स्थिति डाउन करने की, एक कान से सुने और दूसरे कान से निकाल दे। हियर नो ईविल। शैतान बोल रहे हैं।

समयः 17.01-19.17
जिज्ञासुः बाबा, प्रवेश करने वाली आत्मा जिसमें प्रवेश करती है वो आत्मा कमजोर होती है।

बाबाः ठीक है।
जिज्ञासुः तो ब्रह्मा बाबा की आत्मा जिसमें प्रवेश करती है तो क्या वो आत्मा उनसे कमजोर है?
बाबाः ब्रह्मा बाबा जिनमें प्रवेश करता है? ब्रह्मा बाबा जिनमें प्रवेश करता है? (जिज्ञासु: हाँ।) वो कमजोर नहीं तो और क्या पावरफुल है? तभी तो कहा है शंकर की सवारी बैल के ऊपर। और शंकर में किसी सवारी? (जिज्ञासु – शिव।) शिव की सवारी। तो शंकर की सवारी अभी बैल पर है या बैल शंकर पर सवार होता है? हाई जम्प लगाकर बैल पर सवारी करते हैं। तो हाई जम्प प्रत्यक्षता की स्टेज हो जायेगी या वर्तमान की स्टेज है? प्रत्यक्षता की स्टेज है। हाई जम्प लगेगी और दुनिया में प्रत्यक्षता हो जाएगी।

अभी ब्रह्मा की आत्मा पढ़ाई पढ़ रही है? पढ़ रही है? ? जो पढ़ाई पढ़ाना चाहते हैं शिवबाबा वो पढ़ाई पढ़ती है? (जिज्ञासु – वो तो नहीं पढ़ती।) नहीं पढ़ती है तो सवार है कि नहीं? ब्रह्मा की आत्मा सवार है या राम की आत्मा ब्रह्मा के ऊपर सवार है? (जिज्ञासु - राम की आत्मा।) राम की आत्मा सवार है ब्रह्मा के ऊपर? (जिज्ञासु - वो प्रत्यक्षता के समय।) हाँ, ये अंतिम समय की, संपूर्णता की यादगार है। शास्त्रों में जो भी यादगारें हैं जो भी चित्र बने हुए हैं वो किस समय के बने हुए हैं? प्रत्यक्षता की यादगार के समय (के) बने हुए हैं। जब पूर्णमासी होगी; पूर्णमासी माने चन्द्रमाँ कैसा होगा? पूरा हो जाएगा, 16 कला संपूर्ण। अभी चन्द्रमाँ को 16 कला संपूर्ण कहें? नहीं। इसलिए अधूरा चन्द्रमाँ दिखाया जाता है मस्तक पर। संपूर्ण चन्द्रमाँ हो जाएगा तो फिर मस्तक पर नहीं बैठेगा।

समयः 19.19-21.05
जिज्ञासुः जगदम्बा ड्रामा चेंज कब तक करेगी?

बाबाः जगदम्बा ड्रामा को चेंज करती है?
जिज्ञासुः करेगी।
बाबाः करेगी? जगदम्बा ड्रामा को चेंज करेगी? ब्रह्मा सो विष्णु पहले बनता है या जगदम्बा सो विष्णु पहले बनता है? पहले विष्णु कौन बनता है? जो पहले बनता है वो ही चेंज करने के निमित्त बनेगा पहले। शास्त्रों में गायन है - बैल सींग पर पृथ्वी रखे हुए थक जाते हैं। तो झटकारा मारते हैं, दूसरे सींग पर ले लेते हैं। तो जगदम्बा पृथ्वी है या बैल है? (जिज्ञासु – पृथ्वी।) पृथ्वी है। (जिज्ञासु - धुरी बदलती है।) हाँ जी। ड्रामा को चेंज करने वाले बाप के बच्चे होंगे या जो बाप को पहचाने नहीं वो होंगे? (जिज्ञासु - बाप के बच्चे।) बाप के बच्चे ऐसे भी होंगे कि आज पहचानें और कल भूल जाएं? और जगदम्बा का पार्ट कैसा है? मेरे बच्चे ही मेरे को नहीं पहचान पाते। और नहीं पहचान पाते तो छोड़ के चले जाते हैं या रह जाते हैं? छोड़ के चले जाते हैं।

समयः 21.06-22.00
जिज्ञासुः बाबा, मुरली में बोला है गांधीजी ने गीता उठाई और पिछाड़ी में उल्टा भोग लगाते थे।

बाबाः उल्टा क्या किया?
जिज्ञासुः उल्टा भोग लगाते थे।
बाबाः उल्टा भोग?
जिज्ञासुः लगाते थे।
बाबाः ये क्या होता है?
जिज्ञासुः मुरली में आया।
बाबाः उल्टा योग लगाते थे।
जिज्ञासुः भोग।
बाबाः जोग लगाते थे उल्टा। गांधीजी बेहद की दुनिया के कौन हैं? ब्रह्मा बाबा। वो पहचानते थे बाप को? तो नहीं पहचानने के कारण उल्टा योग लगेगा या सुल्टा योग लगेगा? (जिज्ञासु – उल्टा।) उल्टा योग लगा तो हार्ट फेल हो गया। योगियों का तो हार्ट फेल होता नहीं। ये ही बात हद के गांधीजी के लिए।

Disc.CD No.618, dated 19.08.08 at Nilanga
Extracts-Part-6


Time: 13.20-14.40
Student: Baba has said in today's Murli: we should maintain a direct connection with the Father. We should have a direct connection. What does it mean in the unlimited?

Baba: Did anyone stop you [from doing so]? :D Did anyone stop you from maintaining a direct connection? Accha, if you use physical power, if you hurl abuses like Shishupal, then will you have a direct connection? So, did anyone stop Shishupal from having a direct connection or that he should have connection only through his mother? Just as the Brahmakumar-kumaris have [a connection] through Brahma. Do they hurl abuses at God or not? (Student: They do.) Yes. To have a direct connection means that there should not be any media in between. There should be such a close relationship. And the relationship should not be temporary. How should it be? It should be permanent.

Time: 14.48-17.00
Student: It is said in the Murli that a swan (hans) can remain pure amidst a hundred herons (baguley). Yet...

Baba: One swan should remain in his own intoxication amidst a hundred herons. It has not been said that he should remain pure.
Student: Then it is also said that if any intelligent person goes to a room full of soot (kaajal).
Baba: That has not been said by Baba. It is not the saying of Murli. Kaajar ki kothri me kaiso hu sayano jaye, ek leek kaajar ki laagey hi pe laagi hai. (A person entering a room full of soot may be however much intelligent, a speck of soot will definitely adhere to him) This is a poem of the human gurus. What? That poem of human gurus is applicable to the human beings. What? And is it applicable to all the human beings that everyone is coloured by the company. There is not a single human being in this world who is not coloured by the company. Yes, now we have obtained the knowledge. Have we become human beings now or have we risen high from [the stage of being] a human beings and become angels? What have we become? Now our stage should be higher than the human beings. It should be the stage of Brahmins. First class Brahmins are those who have no relationship with the people of the world. One ShivBaba and no one else. So, you will definitely attain such a stage that even if you remain amidst a hundred herons, you will remain in your own intoxication. Someone may keep saying ten things, a hundred things to bring down your stage; you should listen [to it] through one ear and leave it out through the other. Hear no evil. The devils are speaking.

Time: 17.01-19.17
Student: Baba, the soul in whose body a soul enters is weaker than the soul that enters.

Baba: It is correct.
Student: So, is the one in whom the soul of Brahma Baba enters weaker than him?
Baba: The one in whom Brahma Baba enters? The one in whom Brahma Baba enters? If not weak, is he powerful? That is why it has been said that Shankar rides on the bull. And who rides on Shankar? (Student: Shiva.) Shiva rides [him]. So is Shankar riding on the bull now or is the bull riding on Shankar? He takes a high jump and rides on the bull. So, is high jump the stage of revelation or the present stage? It is the stage of revelation. He will take a high jump and the revelation will take place in the world.

Is the soul of Brahma studying now? Is it studying? Does it study the knowledge that ShivBaba wishes to teach?
(Student: It doesn't study that.) It doesn't study; so, is it riding [on Shankar] or not? Is the soul of Brahma riding or is the soul of Ram riding over Brahma? (Student: The soul of Ram.) Is the soul of Ram riding on Brahma? (Student: At the time of revelation.) Yes, this is a memorial of the last period, the perfection. When were all the memorials, all the pictures mentioned in the scriptures prepared? They were prepared at the time of revelation. When it is full moon day; full moon day means that how will the Moon be? It will be complete, complete with 16 celestial degrees. Will the Moon be said to be complete in 16 celestial degrees? No. This is why an incomplete Moon is shown on the forehead. When the Moon becomes complete, it will not sit on the forehead.

Time: 19.19-21.05
Student: By when will Jagdamba change the drama?

Baba: Does Jagdamba change the drama?
Student: She will.
Baba: Will she? Will Jagdamba change the drama? Does Brahma become Vishnu first or does Jagdamba become Vishnu first? Who becomes Vishnu first? The one who becomes [Vishnu] first will himself become an instrument to bring the change first. There is a praise in the scriptures: The bull becomes tired carrying the Earth on one horn. So, he gives it a jerk and takes it on the other horn. So, is Jagdamba the Earth or the bull? (Student: The Earth.) It is the Earth. (Student: It changes the axis.) Yes. Will those who change the drama be the Father's children or will they be those who do not recognize the Father? (Student: The Father's children.) Will the Father's children also be such that they recognize today and forget tomorrow? And what kind of a part does Jagdamba play? My children themselves are unable to recognize me. And when they are unable to recognize do they leave and go away or do they stay back? They leave and go away.

Time: 21.06-22.00
Student: Baba, it has been said in the Murli that Gandhiji picked the Gita and offered Bhog in an opposite way.

Baba: What did he do in an opposite way?
Student: Offered Bhog in an opposite way.
Baba: Bhog in an opposite way?
Student: He used to it.
Baba: What is this?
Student: It has been mentioned in the Murli.
Baba: He used to do Yoga in an opposite manner.
Student: Bhog.
Baba: He used to have jog (Yoga) in an opposite manner. Who is Gandhiji in the unlimited world? Brahma Baba. Did he recognize the Father? So, as he did not recognize, did he used to have opposite Yoga or correct Yoga? (Student: Opposite.) When he had opposite Yoga, his heart failed. Yogis do not suffer heart failure. The same thing is applicable to Gandhiji in the limited. (Concluded.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 09 Apr 2014

वार्तालाप-619, नागपुर, दिनांक 21.08.08
उद्धरण-भाग- 1


समयः 00.01-09.00
जिज्ञासुः संगमयुग शूटिंग का पीरियड है।

दूसरा जिज्ञासुः बाबा ये पूछ रही हैं कि सौ वर्ष की शूटिंग में से सतयुग की शूटिंग हो गई। त्रेता की हो गई। द्वापर की हो गई। अभी कौनसी शूटिंग चल रही है?
बाबाः द्वापर की कब हो गई? मुरली रोज़ सुनते ही नहीं हैं। तो बात बुद्धि में कैसे बैठेगी कि द्वापरयुग की शूटिंग कब हो गई? द्वापर के बाद फिर कौनसे युग की शूटिंग होती है? कलियुग की।

द्वापर के अंत में कौनसे भगवान का गायन है? कृष्ण भगवान का गायन है। तो ये शूटिंग कब हुई? 1998 में कारागार में कृष्ण की प्रत्यक्षता हुई या नहीं हुई अखबारों में, रेडियो में, टी.वी में? लेकिन वो भक्तिमार्ग की प्रत्यक्षता है या ज्ञानमार्ग की प्रत्यक्षता है? भक्तिमार्ग वालों की प्रत्यक्षता है क्योंकि भक्ति में तो ये मानते हैं कि ब्राह्मणों का जन्म पक्का तब माना जाता है ब्राह्मणत्व में जब यज्ञोपवीत हो जाए। नहीं तो सिर्फ जन्म लेने को पक्का ब्राह्मण नहीं मानते। यज्ञोपवीत होना माना तीन देवताओं के ज्ञान सूत्र को पूरा-पूरा जीवन में धारण कर लेना।

पढ़ाई पढ़ने वाली है कृष्ण की सोल। पढ़ाने वाला है बाप। कृष्ण की सोल पूरी पढ़ाई पढ़ चुकी, अभी कहें या पढ़ेगी या पढ़ रही है? पढ़ रही है। कब तक नहीं कहें कि पूरी पढ़ाई हुई? जब तक बड़े ते बड़ी भूल बुद्धि में न बैठे। कौनसी भूल?
(सभी ने कहा – गीता का भगवान।) गीता का भगवान कौन? दादा लेखराज ब्रह्मा उर्फ कृष्ण या निराकारी स्टेज धारण करने वाला परमपिता परमात्मा शिव-शंकर भोलेनाथ? तो पक्का ब्राह्मणत्व का जन्म कैसे कहा जाए? वो जन्म होगा और भगवान बाप कलंकीधर के रूप में संसार में प्रत्यैक्ष हो जावेगा। कलंकीधर का अवतार कौनसे युग में है? कलियुग में। और कृष्ण का अवतार कौनसे युग में मानते हैं? (सभी ने कहा – द्वापर में।) द्वापर में।

यादगार मनाते रहते हैं। 15 अगस्त को क्या मानते हैं? स्वतंत्रता दिवस। कहते हैं ज्ञान गर्भ से बच्चा स्वतंत्र हुआ। परन्तु क्या स्वतंत्र हुआ? पूरा ज्ञान आया? नहीं आया। तो सन् 98 में द्वापरयुग की शूटिंग हुई। द्वापर के अंत में कृष्ण भगवान के रूप में शास्त्रों में दिखाया गया है कि महाभारी महाभारत गृह युद्ध कराया। उसे कहते हैं कलह कलेष का युग, लड़ाई-झगड़े का युग। बाकी ऐसे नहीं है कि भगवान द्वापर के अंत में आ करके कोई कलियुग लड़ाई-झगड़े की दुनियां की स्थापना कराता है, कोई हिंसक युद्ध आ करके कराता है। नहीं। तो चारों युगों की शूटिंग रुद्रमाला के बच्चों के लिए पूरी हुई। तीन मूर्तियाँ हैं। ब्रह्मा की मूर्ति, शंकर की मूर्ति। ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण धर्म की स्थापना। वो भी कार्य संपन्न हुआ। नंबरवार ब्राह्मण तैयार हुए बैठे हैं। बाप द्वारा रूद्र ज्ञान यज्ञ की स्थापना का कार्य चला। वो रुद्र ज्ञान यज्ञ विस्तार को पा गया। अभी क्या् रह गया है? ब्रह्मा द्वारा सुनने-सुनाने का काम हुआ। शंकर द्वारा समझने-समझाने तीसरे नेत्र का कार्य हुआ। अभी क्या काम रह गया है जो तीसरी मूर्ति के द्वारा होना है? तीसरी मूर्ति है प्रैक्टिकल मूर्ति। न सिर्फ सुनना-सुनाना, न सिर्फ समझना-समझाना। क्या करना है? प्रैक्टिकल जीवन में धारण करना और दूसरों को धारण कराना। ये शूटिंग अभी रही हुई है या हो चुकी? ये शूटिंग अभी भी रही हुई है। ये भी चार अवस्थाओं से पसार होगी। सतोप्रधान, सतोसामान्य, रजो और तमो। प्रैक्टिकल जीवन में चार प्रकार के धारण करने वाले प्रत्यक्ष दिखाई देंगे।

तो ऐसे नहीं कि चारों युगों की शूटिंग का कार्यकाल समाप्त हो गया। कोई भी ड्रामा की शूटिंग कहो, रिहर्सल कहो, रिकार्डिंग कहो अंत तक होती रहती है या बीच में खत्म हो जाती है? अंत तक, तब तक होती रहेगी, जब तक फाइनल न हो जाए। फाइनल हुआ और ब्रॉड ड्रामा शुरू हो जाता है। फिर शूटिंग समाप्त। तो ब्रॉड ड्रामा कब शुरु होगा? सौ साल का संगम पूरा होगा, उससे पहले ब्रॉड ड्रामा शुरु हो जाएगा 5000 साल का या बाद में ही शुरु होगा? बाद में ही शुरु होगा।


समयः 09.02-10.23
जिज्ञासुः बाबा, जिसने ज्यादा भक्ति की वो सबसे ज्यादा ज्ञान उठाएगा। फिर भक्ति को मुर्दाबाद क्यों कहते हैं?

बाबाः जिसने ज्यादा ज्ञान उठाया होगा उससे साबित होता है कि उसने सबसे ज्यादा भक्ति की है। तो उसने सबसे पहले भक्ति पूरी की होगी या बाद में भक्ति पूरी की होगी?
जिज्ञासुः भक्ति से जब फायदा हो रहा है तो उसको फिर मुर्दाबाद क्यों कह रहे हैं?
बाबाः नहीं-नहीं। हम जो पूछ रहे हैं वो बात बताओ। जिस व्यक्ति के लिए बोला जा रहा है, भक्ति से ज्ञान मिलता है, भक्ति पूरी होगी और ज्ञान मिलता है। उस भक्ति को पूरा करने वाला ज्ञान उठाने में सबसे पहले होगा या बाद में होगा? (जिज्ञासु – पहले होगा।) तो उसके लिए भक्ति मुर्दाबाद हो चुकी होगी या नहीं हो चुकी होगी? हो चुकी। तो बस तुम्हारा जवाब मिल गया। जिस नंबर का भक्त उसी नंबर का ज्ञानी। उसी नंबर से भक्ति को मुर्दाबाद करेगा। भक्ति का अगर कोई भी अंश रह जावेगा तो शरीर छोड़ना पड़ेगा। हाँ, अगली बात?

Disc.CD No.619, dated 21.08.08 at Nagpur
Part-1


Time: 00.01-09.00
Student: The Confluence Age is the period of shooting.

Another student: Baba she is asking that out of the hundred years of shooting, the shooting of the Golden Age is over. That of the Silver Ag is over. That of the Copper Age is [also] over. Which shooting is going on now?
Baba: When did the [shooting of] the Copper Age finish? You don't listen to the Murli daily, then how will the topic sit in your intellect that when the shooting of the Copper Age finish? The shooting of which age beings after the Copper Age? The Iron Age.

Which God is famous in the end of the Copper Age? God Krishna is famous. So, when was this shooting done? Was Krishna revealed in the jail in 1998 through newspapers, radio, TV or not? But was that a revelation in the path of Bhakti (devotion) or a revelation in the path of knowledge? It was a revelation by the people of the path of Bhakti because it is believed in [the path of] Bhakti that Brahmins are said to have been born firmly in Brahmin-hood only when they undergo the thread ceremony (yagyopavit). Otherwise, the one who is just born [in Brahmin-hood] is not considered to be a firm Brahmin. To undergo yagyopavit means to assimilate the thread of knowledge of the three deities completely in your life.

The soul of Krishna studies the knowledge. The teacher is the Father. Can we say that the soul of Krishna has studied the knowledge completely now or will it study? Or is he studying? He is studying. Until when can we say that his studies are not over? Until the biggest mistake sits in his intellect. Which mistake?
(Everyone said: The God of the Gita.) Who is the God of the Gita? Is it Dada Lekhraj Brahma alias Krishna or the Supreme Father Supreme Soul Shiva-Shankar Bholenath who takes on the incorporeal stage? So, how can it be called a firm birth in Brahmin-hood? That birth will take place and God the Father will be revealed as Kalankidhar in the world. In which age is the incarnation of Kalankidhar [shown]? In the Iron Age. And in which Age is Krishna believed to incarnate? (Everyone said: In the Copper [Age].) In the Copper [Age].

[People] celebrate memorials. What is celebrated on 15th August? Independence Day. It is said that the child became free from the womb of knowledge. But did he [really] become free? Did he receive the entire knowledge? He did not. So, the shooting of the Copper Age took place in the year 98. Krishna has been shown in the form of God in the scriptures in the end of the Copper Age that he waged the massive civil war of Mahabharata. That is called an age of dispute and distress, an age of fights and quarrels. But it is not true that God comes in the end of the Copper Age and establishes the Iron Age, a world of dispute and distress or that He wages a violent war after coming. No. So, the shooting of all the four ages is complete for the children of the Rudramala . There are three personalities. The personality of Brahma, the personality of Shankar. The establishment of the Brahmin religion through Brahma. That task was also completed. Number wise Brahmins have become ready. The task of the establishment of the Rudra Gyan Yagya took place through the Father. That Rudra Gyan Yagya went into expansion. What remains now? The task of listening and narrating was done through Brahma. Understanding and explaining, i.e. the task of the third eye was accomplished through Shankar. Which task remains to be accomplished through the third personality now? The third personality is the practical personality. Not just listening and narrating, not just understanding and explaining. What is to be done? To assimilate [divine virtues] in the life in practice and to make others assimilate it. Is this shooting yet to take place or has it taken place? This shooting is yet to take place. This will also pass through four stages. Satopradhaan, satosaamaanya, rajo and tamo. Four types of people who assimilate in four different ways in their practical life will be visible in the revealed form.

So, it is not that the period of the shooting of all the four ages is over. Whether it is the shooting, the rehearsal or the recording of any drama, does it continue to take place till the end or does it end in between? It will continue to take place till the end until the final phase is over. As soon as the final phase is over, the broad drama begins. Then the shooting ends. So, when will the broad drama begin? Will the broad drama of 5000 years begin before the completion of the hundred years of the Confluence Age or will it begin after that? It will begin after that.


Time: 09.02-10.23
Student: Baba, the one who did more Bhakti will grasp knowledge the most. Then, why is it said Bhakti murdaabaad?

Baba: If someone has grasped knowledge the most, it proves that he has done the most Bhakti. So, will he have completed Bhakti first of all or will he have completed Bhakti later?
Student: When we are reaping benefit from Bhakti, why do we call it murdaabaad?
Baba: No, no. First answer my question. The person for whom it is being said that Bhakti leads to knowledge, as soon as the Bhakti is over, he gets knowledge. Will the one who completes that Bhakti be ahead of everyone in grasping knowledge or will he lag behind? (Student: He will be ahead.) So, will Bhakti have become murdaabaad for him or not? It has become [murdaabaad]. That’s it, you got your answer. The higher the number (rank) a person holds as a devotee, the higher the number (rank) he will hold as a knowledgeable person. He will bring down Bhakti in the same serial order. If any trace of Bhakti remains, he will have to leave the body. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 10 Apr 2014

वार्तालाप-619, नागपुर, दिनांक 21.08.08
उद्धरण-भाग- 2


समयः 10.25-11.35
जिज्ञासुः जो वैष्णवी विष्णु बनने वाली है, जब वो विष्णु बन जाएगी तो लक्ष्मी कौन बनेगी फिर?

बाबाः जो वैष्णवी है वो ही चार भुजाओं वाली है। जो लक्ष्मी है वो ही महालक्ष्मी बनती है चार भूजाओं की। लक्ष्मी और वैष्णवी ये अलग-अलग नाम नहीं है। एक ही काम है, एक ही नाम है। लक्ष्मी लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। विष्णु की पत्नी वैष्णवी। विष्णु का अर्थ क्या है? जिसमें विषयविकार का नाम निशान न हो। तो अकेले से साबित होगा या संगिनी भी साथ होगी तब साबित होगा? (जिज्ञासु – संगिनी साथ होगी।) तो उसको कहते हैं वैष्णवी।

समयः 11.38-13.05
जिज्ञासुः बाबा, लक्ष्मी स्वदेशी होगी या विदेशी होगी?

बाबाः जगदम्बा स्वदेशी होगी या विदेशी? (जिज्ञासु – स्वदेशी।) हँ! जगत की अम्बा। सारा जगत् में इस्लामी, बौद्धी, क्रिश्चियन आएंगे या नहीं आएंगे? अरे, वो जगत् माने इस्लामी, बौद्धियों की अम्मा है कि नहीं है? (जिज्ञासु – सबकी अम्मा है।) सबकी अम्मा है तो जगत् की अम्बा है। और जो भारत माता है उसको भारतवासी ही मानेंगे या विदेशी भी मानेंगे? (जिज्ञासु – भारतवासी।) भारतवासी ही मानते हैं। तो भारतमाता अलग है और जगतमाता अलग है। भारतमाता शिव शक्ति अवतार अंत का यही नारा है। ये अव्यक्त वाणी में पहली में बोला गया। जगदम्बा शिवशक्ति अवतार तो नहीं कहा। कहा या नहीं कहा? नहीं कहा। क्योंकि ग्रेड में अंतर पड़ जाता है।

समयः 13.06-14.45
जिज्ञासुः बाबा, शिवबाबा साकार और आकार के मेल को कहा जाता है। फिर बिन्दु को ही शिवबाबा क्यों कहते हैं?

बाबाः बाबा कहा ही तब जाता है जब वो बिन्दु-बिन्दु आत्माओं का बाप कोई शरीर में प्रवेश करता है। जिनकी बुद्धि में शिवबाबा कहने से बिन्दी याद आती है तो उन्होंने अर्थ को ही नहीं समझा कि बिन्दी का नाम शिव है। वो कभी बदलता नहीं है। शिव जो सदैव ज्योतिबिन्दु है, सदैव निराकारी है, कभी भी साकारी नहीं बनता, वो सिर्फ बिन्दु-बिन्दु आत्माओं का बाप है। ग्रैण्डफादर अर्थात् बाबा नहीं है। ये व्याख्या ही गलत हो जाती है। शिवबाबा कहना शिव माना ज्योतिबिन्दु, बाबा माना साकार। साकार और निराकार के मेल को बाबा कहा जाता है। ऐसा मुरली में बोला है। इसलिए अगर कोई समझते हैं शिवबाबा बिन्दु को तो अज्ञानी हैं या ज्ञानी हैं? अज्ञानी हैं।

समयः 14.50-15.53
जिज्ञासुः बाबा, मुरली में कहा है कि बाबा अंतर्यामी नहीं है। पर हम तो कहते हैं बाबा अंतर्यामी है। ये कैसा?

बाबाः शिवबाबा अंतर्यामी है या शिव बाप अंतर्यामी है? बाप कहा जाता है बिन्दु-बिन्दु आत्माओं का बाप। और बाबा कहा जाता है साकार और निराकार के मेल को। अगर शिवबाबा अंतर्यामी है तो उसे पोतामेल देने की क्या ज़रूरत? लेकिन मुरली में बोला है। क्या बोला है? पोतामेल किसको देना है? शिव बाप को या शिवबाबा को? शिवबाबा को पोतामेल देना है ताकि साकार को पता चले। बाकी जो सदैव साक्षीदृष्टा है उसको तो पोतामेल देने-लेने की दरकार है ही नहीं। वो तो त्रिकालदर्शी सदैव ही है।

समयः 15.56-18.10
जिज्ञासुः सतयुग और त्रेतायुग में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी वाले ही आत्मा आएंगे या दूसरे बाहर वाले सुधांशु है, राम-कृष्ण है, आसाराम वो सभी संस्थायें...

बाबाः क्या पूछा?
दूसरा जिज्ञासुः ये पूछ रहीं हैं बाबा, सतयुग और त्रेता में केवल प्रजापिता ब्रह्माकुमारी इसी संस्था की आत्माएं आएंगी या फिर जैसे बाहर की दुनिया में आसाराम बापू, या सुधांशु महाराज या अन्य जो आत्माएं हैं भक्तिमार्ग की वो भी आएंगी?
बाबाः सतयुग त्रेता की आबादी होती है 10 करोड़। कितनी होगी? 10 करोड़। और 10 करोड़ की आबादी जब पूरी होगी तब द्वैतवादी दुनियां शुरू होगी। अद्वैत देवताओं की दुनिया खलास हो जावेगी। तो जो पक्के-पक्के भक्त हैं वो कब आवेंगे? द्वापर के आदि में। द्वैतवादी। और जो नम्बरवार ज्ञानी तू आत्माएं हैं प्रजापिता बाप को पहचानने वाली और उसके बताए हुए रास्ते पर चलने वाली, वो कब तक आवेंगी? त्रेता के अंत तक आती रहेंगी। प्रजापिता ब्रह्मा में शिव को पहचानना और पहचानने के साथ-साथ मानना और प्रैक्टिकल जीवन बिताना ये त्रेता के अंत तक ऐसी आत्माओं का हिसाब-किताब है। जो यहाँ शूट होता है।

समयः 18.18-20.38
जिज्ञासुः बाबा, रामराज्य के रचता राम हैं और रावण राज्य के रचता नंबरवार बच्चे हैं ऐसा मुरली में कहा है। ये कैसे?

बाबाः राम एक सिर वाला होता है या अनेक सिर वाला होता है? एक सिर वाला माना एक बात करने वाला। छह सिर वाला माना छह मुँह से बातें करने वाला। और 10 सिरवाला माना 10 मुख से बातें करने वाला। राम भी अंतिम जन्म में क्या बनता है? रावण बनता है। तो राम वाली आत्मा भी रावण के चंबे में आती है या नहीं आती है? आती है। लेकिन कब तक? तब तक आती है जब तक वो निराकार राम बाप शिव बाप, टीचर, सद्गुरू के रूप में प्रत्यक्ष नहीं होता। जब प्रत्यक्ष हो जाता है तो रावण संप्रदाय से टक्कर लेने वाली बनेगी। हारने वाली नहीं बनेगी। इसलिए शास्त्रों में लिखा है कि एक ही नारायण है जो सदैव विजय को प्राप्त होता है। उसकी कभी भी हार नहीं होती है। रावण के अनेक रूप। राम का एक रूप। रामलीला जब खेलते हैं तो क्या दिखाते हैं? रावण को अनेक मुख, राम एक मुख से। एक बात कहने वाले को राम कहा जाता है। अनेक तरह की बातें बनाने वाले को झूठा कहा जाता है।

Disc.CD No.619, dated 21.08.08 at Nagpur
Part-2


Time: 10.25-11.35
Student: When Vaishnavi, who is supposed to become Vishnu will become Vishnu, who will become Lakshmi?

Baba: Vaishnavi herself is four-armed. Lakshmi herself becomes the four-armed Mahalakshmi. Lakshmi and Vaishnavi are not separate names. Their task as well as their name is the same. Lakshmi [means] the one who achieved the target. Vishnu's wife is Vaishnavi. What is meant by Vishnu? The one in whom there is no name or trace of the poison of vices. So, will it be proved by him alone or will it be proved when his companion is also with him? (Student: When the companion is with him.) So, she is called Vaishnavi.

Time: 11.38-13.05
Student: Baba, will Lakshmi be swadeshi or videshi (foreigner)?

Baba: Will Jagdamba be swadeshi or videshi? (Student: Swadeshi.) Hm! The Mother of the World. Will the people of Islam, the Buddhists, the Christians be included in the entire world or not? Arey, is she the Mother of the World, meaning [the mother] of the people of Islam, the Buddhists or not? (Student: She is everybody's mother.) When she is everybody's mother, she is the Mother of the World. And will only the Bharatwasis (residents of Bharat) accept in mother India or will the foreigners also accept her? (Student: The Bharatwasis.) Only the Bharatwasis accept her. So, mother India and the world mother are separate. Mother India the incarnation of Shivshakti is the very slogan of the end. This was said in the first Avyakt Vani. It was not said: Jagdamba the incarnation of Shivshakti. Was it said or not? It wasn’t, because there is a difference in the grade.

Time: 13.06-14.45
Student: Baba, the combination of the corporeal one and the subtle one is called ShivBaba. Then why is the Point called ShivBaba?

Baba: It is said ‘Baba’ only when that Father of the point souls enters a body. Those whose intellect remembers only the Point when it is said ShivBaba; they did not understand the meaning at all that the name of the Point is Shiva. It never changes. Shiva, who is always a point of light, always incorporeal, who never becomes corporeal, is just the Father of the point souls. He is not grandfather, i.e. Baba. This explanation itself is wrong. To say ShivBaba; Shiva means the point of light, Baba means the corporeal one. The combination of the corporeal one and the incorporeal one is called Baba. It has been said so in the Murlis. So, if anyone thinks the point to be ShivBaba , is he ignorant or knowledgeable? He is ignorant.

Time: 14.50-15.53
Student: Baba, it has been said in the Murli that Baba is not antaryaami. But we say that Baba is antaryaami. Why is it so?

Baba: Is ShivBaba or the Father Shiva antaryami? The Father means the Father of the point souls. And Baba means the combination of the corporeal one and the incorporeal one. If ShivBaba is antaryaami, where is the need for us to give Him potamail ? But it has been said in the Murli. What has been said? Who should be given the potamail? Is it to the Father Shiva or to ShivBaba? ShivBaba has to be given the potamail so that the corporeal one comes to know. As regards the one who is always a detached observer (saakshi drishtaa), there is no need for Him to take or to give potamail at all. He is always trikaaldarshi.

Time: 15.56-18.10
Student: Will only the souls of the Prajapita Brahmakumaris come in the Golden and Silver Ages or will the outsiders like the followers of Sudhanshu, Ramkrishna, Asaram, all those institutions…

Baba: What did she ask?
Another student: Baba, she is asking will only the souls belonging to the Prajapita Brahmakumari institution come to the Golden and Silver Ages or will the souls of the outside world like [the followers of] Asaram Bapu or Sudhanshu Maharaj or other souls of the path of Bhakti also come?
Baba: The population of the Golden and Silver Ages is 100 million (ten crore). How much will it be? 100 million. And when the population of the 100 million is completed, then the dualistic world will begin. The world of the non-dualistic deities will end. So, when will the firm devotees come? In the beginning of the Copper Age. [In] the dualistic [age]. And by when will the number wise knowledgeable souls, who recognize the Father Prajapita and follow the path shown by him, come? They will keep coming till the end of the Silver Age. To recognize Shiva in Prajapita Brahma, to accept Him along with recognizing and to lead a life in practice [with Him] is the karmic account of the souls [which come] till the end of the Silver Age. Its shooting takes place here.

Time: 18.18-20.38
Student: Baba, Ram is the creator of the kingdom of Ram and the creators of the kingdom of Ravan are the number wise children. It has been said like this in the Murli. How is this possible?

Baba: Does Ram have one head or many heads? The one who has one head means the one who speaks in one way. The one who has six heads means the one who speaks through six mouths. And the one who has ten heads means the one who speaks through ten mouths. What does Ram also become in the last birth? He becomes Ravan. So, does the soul of Ram also come in the clutches of Ravan or not? He comes. But until when? He comes until that incorporeal Ram, the Father Shiva is revealed in the form of the Father, Teacher and Sadguru. When He is revealed, he will clash with the community of Ravan . He will not be defeated. This is why it has been written in the scriptures that it is Narayan alone who always gains victory. He is never defeated. There are many forms of Ravan and one form of Ram. What is shown when the Ramleela is enacted? Ravan is shown to have many heads and Ram is shown to have one head. The one who speaks in one way is called Ram. The one who speaks in different ways is called a liar. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 11 Apr 2014

वार्तालाप-619, नागपुर, दिनांक 21.08.08
उद्धरण-भाग- 3


समयः 20.42.22.10
जिज्ञासुः बाबा, सीढ़ी के चित्र में तीन माता और चार भाई बताए गये हैं। और त्रिमूर्ति के चित्र में चार माता और चार भाई बताए गए। तो वो चौथी माता कौन?
बाबाः स्वर्ग में जाना कोई बड़ी बात नहीं है। क्या? स्वर्ग में तो प्रजावर्ग की आत्माएं भी जावेंगी। परन्तु जो लक्ष्मी नारायण बनने वाले हैं उनके सहयोगी बन करके रहना, ये बड़ी बात है। जिन्होंने शूटिंग पीरियड में भगवान बाप के बने बनाए घर को बिगाड़ने का संकल्प किया उनका चित्र कहां से आ जावेगा? इसलिए तीन ही दिखाए जाते हैं। बाकी स्वर्ग में तो प्रजा आएगी। वो आत्माएं भी आवेंगी जो चारों धर्मों की बीज हैं और उनके फालोअर्स भी आवेंगे। स्वर्ग में आना कोई बड़ी बात नहीं है। इसलिए त्रिमूर्ति के चित्र में चारों आत्माएं दिखाई गई हैं।

समयः 22.05.24.50
जिज्ञासुः बाबा, राम ही भगवान बनते हैं और रावण शैतान बनते हैं। ये राम ही रावण बनने का ये जो पुरूषार्थ है ये कैसा?
बाबाः दुनियां की ऐसी कोई बात नहीं जो तेरे पर लागू न होती हो। क्या? दुनियां का ऐसा कोई पार्ट नहीं जो तेरे पर लागू न होता हो। स्वर्ग की दुनियां मेरी है तो नर्क की दुनियां मेरी नहीं है क्या? तो जब स्वर्ग की दुनियां का बीज भी एक ही है और नर्क की दुनियां का बीज भी एक ही है, तो जो एक बीज है बाप। बीज आदि में भी होता है। भक्तिमार्ग के आदि में भी क्या होगा? बीज होगा या नहीं होगा? सबसे पहला-2 भक्‍त कौन बनेगा? वो ही बीज। वो ही पहले वैश्य बनेगा। पहला-पहला विशियस एडम बनेगा, ईव बनेगी कि कोई दूसरा बन जाएगा? एडम ईव ही सबसे पहले-पहले विशियस बनेंगे। व्यभिचारी नहीं बनेंगे, लेकिन क्या बनेंगे? विशियस बनेंगे। विषय विकारों का भोग करने वाले बनेंगे। तो जो आदि है सो अंत है। अंत माने कब? जब 700, 500 करोड़ जो भी मनुष्यात्माएं हैं, सब अपने-अपने करिश्मे दिखाके बैठ जाएं, स्थापना, पालना, और विनाश का करिश्मा, कोई से वो कार्य संपन्न नहीं होता, तब अंत में वो आत्मा अपना कार्य संपन्न करती है। इसलिए बोला है बाप आए ही हैं पाप में पाप बढ़ाने के लिए। तुम बच्चों में इतनी ताकत नहीं है कि इतना पाप बढ़ा सको जो अति हो जाए और अंत हो जाए। इसलिए बाप को रहम करना पड़ता है कि जल्दी से अति हो जाए और अंत हो जाए। तुम तो ऐसे ही रेगड़ियां पहनते रहोगे। :D

समयः 24.55.26.20
जिज्ञासुः बाबा ट्रिब्युनल बैठेगी। वो ऐसा कौनसा समय होगा? वो कब बैठेगी और कैसे बैठेगी और वो कौनसी आत्माएं होंगी ट्रिब्युनल में बैठने वाली?
बाबाः सबसे पहले प्रत्यक्षता कौनसी मूर्तियों की होती हैं? (जिज्ञासु - पहले ब्रह्मा की, सेकेण्ड शंकर की।) पहले ब्रह्मा की प्रत्यक्षता होती है? बाप अकेला आता है, दुकेला आता है या तीन मूर्तियों के साथ ही साथ आता है? (सभी ने कहा - तीन मूर्तियों के साथ।) तो एक मूर्ति कैसे प्रत्यक्षता होगी? तीनों मूर्तियों की इकट्ठी प्रत्यक्षता होती है या एक की प्रत्यक्षता होती है? (सभी ने कहा – तीनों।) तीनों मूर्तियां इकट्ठी प्रत्यक्ष होती हैं। पुरुषार्थ भले आगे-पीछे हो लेकिन प्रत्यक्षता बाप के साथ-साथ तीनों मूर्तियों की होती है। तो कौनसी तीनों मूर्तियां पहले प्रत्यक्ष हुईं? अष्ट देव भी बाद में प्रत्यक्ष होते हैं। पहले? पहले तीन मूर्तियों का पार्ट प्रत्यक्ष हो जाता है। हुआ कि नहीं? दो-तीन लोग बोल रहे हैं। (सभी ने कहा – हुआ।) हुआ। तो जो तीन मूर्तियाँ पहले-पहले प्रत्यक्ष होती हैं, आदि सो अन्त। जवाब मिला?
जिज्ञासु: हाँ।

समयः 26.24.27.07
जिज्ञासुः बाबा, बाबा ने बोला है मुरली में तीन चीज़ें आपको हमेशा परेशान करेगी। चंचल, भटकती बुद्धि, पुराने संस्कार। इसका अर्थ क्या है?
बाबाः चंचल?
जिज्ञासुः भटकती बुद्धि, पुराने संस्कार।
बाबाः चंचलता। बुद्धि की चंचलता, मन की चंचलता।
जिज्ञासुः भटकती बुद्धि, पुराने संस्कार।
बाबाः हाँ। तो तीन ही तो आत्मा में हैं शक्तियां। तीनों ही शक्तियाँ तंग करने वाली हैं अगर विकृति भरी हुई है तो। वो विकार खत्म हो जाएगा और तीनों तंग करने वाले बनेंगे या सहयोगी बनेंगे? सहयोगी बन जाएंगे।

समयः 27.12-28.32
जिज्ञासुः बाबा अंतर्मुखता माना क्या?
बाबाः अंतर्मुखता का मतलब ये नहीं है कि बोलना बंद कर देना तो अंतर्मुखी हो गया। बोलना बंद भी कर देगा तो अंदर से मन के संकल्प चलते रहेंगे। और दुनिया के वायब्रेशन खराब करते रहेंगे। तो अंतर्मुखता हुई या बहिर्मुखता हुई? भयंकर बहिर्मुखता हो गई क्योंकि सूक्ष्म में ज्यादा ताकत होती है या स्थूल में ज्यादा ताकत होती है? सूक्ष्म में ज्यादा ताकत होती है। तो मन से, संकल्पों से बहिर्मुखी बनना वो तो बहिर्मुखता ही हो गई। असली अंतर्मुखता वो है जो मन के संकल्प भी बिन्दु में समा जाएं। वाचा भी न चले। बिन्दु में वाचा समा जाए और कर्मेन्द्रियों की सारी शक्तियाँ कहाँ समा जाएं? बिन्दु ही याद आए। दूसरी कोई भी इन्द्रिय और उसका सुख याद न आवे। उसको कहेंगे सच्ची अंतर्मुखता।
दूसरा जिज्ञासुः निराकारी अवस्था उसी को कही कहेंगे?
बाबाः वो ही निराकारी, निर्विकारी, निरहंकारी है।

Disc.CD No.619, dated 21.08.08 at Nagpur
Part-3


Time: 20.42-22.10
Student: Baba, in the picture of the Ladder three mothers and four brothers have been depicted. And in the picture of the Trimurti four mothers and four brothers have been depicted. So, who is that fourth mother?
Baba: Going to heaven is not a big deal. What? Even the souls belonging to the subjects' category will go to heaven. But it is a big deal to remain the helpers of those who are to become Lakshmi and Narayan. How will there be the picture of those who created the thought of spoiling the settled home of God the Father during the shooting period? This is why only three [mothers] are depicted. As for the rest the subjects will come in heaven. The souls, which are the seeds of the four religions and their followers, will also come. Going to heaven is not a big deal. This is why all the four souls have been depicted in the picture of the Trimurti.

Time: 22.05-24.50
Student: Baba, Ram becomes God and Ravan becomes devil. So, what is this purusharth of becoming Ravan from Ram?
Baba: There is nothing in this world that is not applicable to you. What? There is no role in the world that is not applicable to you. If the world of heaven is Mine, then is the world of hell not Mine? So, when the seed of the heavenly world as well as the hellish world is the same, then the one Father who is the seed; the seed is present in the beginning as well. What will he be in the beginning of the path of Bhakti as well? Will the seed be there or not? Who will become the first devotee? The same seed. He himself will become the first Vaishya(A member of the merchant class). Will Adam, Eve become the first vicious people or will someone else become [that]? Adam and Eve themselves will become vicious first of all. They will not become adulterous (vyabhichaari), but what will they become? They will become vicious. They will be the ones who enjoy the poison of vices. So, whatever [happens] in the beginning [happens] in the end. What does ‘the end’ mean? When all the 5 billion, 7 billion, human souls show their miracles and give up, the miracle of establishment, sustenance and destruction, when that task is not accomplished through anyone, then that soul accomplishes his task in the end. This is why it has been said that the Father has come only to increase the sins. You children don't have the power to increase the sins to the extent that it reaches the extreme level and then ends. This is why the Father has to show mercy so that it reaches the extreme level soon and then ends. You will just keep crawling. :D

Time: 24.55-26.20
Student: Baba, [it is said that] the Tribunal will sit. When will that happen? When will it sit, how will it sit and which souls will sit as the Tribunal?
Baba: Which personalities are revealed first of all? (Student: First it is Brahma and second is Shankar.) Is Brahma revealed first? Does the Father come alone, does He come with one person or does He come along with the three personalities? (Everyone said: With three personalities.) So, how can one personality be revealed [first]? Are all the three personalities revealed simultaneously or is one personality revealed? (Everyone said: All the three.) All the three personalities are revealed together. Though they make purushaarth(Spiritual effort) before or later, what about their revelation? All the three personalities are revealed along with the Father. So, which three personalities were revealed first? The eight deities are also revealed later on. First? First the roles of the three personalities are revealed. Were they revealed or not? Two- three people are answering. (Everyone said: They were revealed.) They were revealed. So, the three personalities which are revealed first of all; as the beginning so the end. Did you get the answer?
Student: Yes.

Time: 26.26-27.07
Student: Baba, Baba has said in the Murlis that three things will always bother you. Inconstant, wandering intellect and old sanskars. What does it mean?
Baba: Inconstant?
Student: Wandering intellect, old sanskars.
Baba: Inconstancy (cancalta). Inconstancy of the intellect, inconstancy of the mind.
Student: Wandering intellect, old sanskars.
Baba: Yes. There are only three powers in the soul. All the three powers bother us if there is defect (vikruti) in us. When the vices end, will the three [powers] bother us or will they become helpful? They will become helpful.

Time: 27.12-28.32
Student: Baba, what is meant by antarmukhta (introspectiveness)?
Baba: Antarmukhta (introvertness) does not mean that if you stop talking you are introvert. Even if someone stops talking, thoughts will keep emerging in the mind. And they will keep spoiling the vibrations of the world. Is that introspectiveness or extroversion (bahirmukhta)? It is dangerous extroversion because is a subtle thing more powerful or is a physical thing more powerful? A subtle thing is more powerful. So, becoming extrovert through the mind, through the thoughts is certainly extroversion. True introspectiveness is that where the thoughts of the mind also merge in the point. One should not even speak. The words should merge in the point. And where should all the powers of the karmendirya(Parts of the body used to perform actions) merge? One should remember only the point. Any other indriya(Part of the body) and its pleasure should not come to the mind. That will be called true introspectiveness.
Another student: Will that itself be called the incorporeal stage?
Baba: That itself is incorporeal, vice less, egoless [stage]. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 12 Apr 2014

वार्तालाप-619, नागपुर, दिनांक 21.08.08
उद्धरण-भाग- 4


समयः 28.36-29.30
जिज्ञासुः बाबा, एब्राहम लिंकन पैसे से गरीब था या बुद्धि से गरीब था?
बाबाः बाबा ने जो भाषा बोली है उस भाषा से तुमने क्या समझा?
जिज्ञासुः ज्ञान से।
बाबाः ज्ञान से नहीं। ज्ञान उस समय था ही नहीं। इब्राहिम लिंकन का जब जन्म हुआ तब ज्ञान था या दुनियां में अज्ञान ही था?
जिज्ञासुः अज्ञान था, लेकिन उसकी तुलना मैंने बुद्धि से की ।
बाबाः फिर वो ही बुद्धि से। अरे! वो किस बात का बुद्धिमान हुआ? क्या लक्ष्मी-नारायण बन गया?
जिज्ञासुः लक्ष्मी-नारायण नहीं बना लेकिन वो देश का राष्ट्रपति तो बन गया।
बाबाः राष्ट्रपति बन जाने से क्या दुनियां को उसने स्वर्ग बनाया या नर्क का फाउन्डेशन डाल दिया?
जिज्ञासुः नर्क का फाउन्डेशन।
बाबाः तो फिर काहे के लिए बुद्धिमान कहते हो उसे? माने बुद्धिमानों की बुद्धि शिवबाबा फेल हो गया, इब्राहिम लिंकन जीत गया?

समयः 29.34-31.07
जिज्ञासुः ब्रॉड ड्रामा माने क्या?
बाबाः ड्रामा जो बना बनाया है उसको कहते हैं ड्रामा। क्या? पुरुषार्थ उसे कहते हैं जो हम करते हैं। हमारी मुठ्टी में पुरुषार्थ के बीज समाए हुए हैं। हम चाहें तो पुरुष माना आत्मा, अर्थ माना लिये। आत्मा के लिए अच्छे से अच्छा भी कर सकते हैं और बुरे से बुरा भी कर सकते हैं। आत्मा अपने लिए शत्रु और अपने लिए मित्र बन जाती है। और ड्रामा? ड्रामा में तो डर ही भरा हुआ है। और कहाँ से आता है डर? माँ से आता है डर या बाप से आता है? बाप से आता है डर? महाकाली है जो डर पैदा कर देती है। नहीं तो दुनियां में कोई डरने वाला नहीं है। बाप तो प्यार का सागर बन करके आता है। कोई भी पार्ट ऐसा नहीं बजाता जिससे बच्चों को डर पैदा हो जाए।

समयः 31.12-39.26
जिज्ञासुः बाबा, आप मुझे सपने में दिखे।
बाबा: जोर से बोलो। (सभी लोग हँस रहे हैं।) हँसने में सारा गड़बड़ कर देते हैं।
बाबाः क्या बोला?
दूसरा जिज्ञासुः आप मुझे सपने में दिखे।
जिज्ञासु ने कुछ कहा।
बाबाः जय सियाराम। ☺ कान बहरे हो गए। ये आगे वालों के ही कान बहरे हो गए। अरे, कोई दूसरा बता दो पीछे से।
तीसरा जिज्ञासुः बाबा, ये कहना चाहती है आप मुझे सपने में दिखे। आपके हाथ में खाली कटोरा था। मैंने कहा खाली कटोरा क्यों है? मैंने दिया और वो भरा। फिर आपने खाली कटोरा कैसे दिया?
बाबाः इसलिए दिया कि माताएं जब ज्ञान देंगी तब ज्ञान का प्रभाव निकलेगा या भाई लोग जब तक ज्ञान सुनाते रहेंगे तब प्रभाव निकलेगा? ज्ञान तो भगवान पुरुष में ही प्रवेश करके देता है। लेकिन उसका प्रभाव कब निकलेगा? जब लक्ष्मी निकले, लक्ष्मियां निकलें, भारत माताएं निकलें, जिनको कहा जाता है शिवशक्ति अवतार। गधेड़ियाँ न हों। नर्क का दरवाज़ा खोलके बैठने वाली न हों। तो प्रभाव निकलेगा ज्ञान का और प्रैक्टिकल में प्रभाव निकलेगा। पुरुषों के बस का कुछ है नहीं। उनके तो चोले को टाइटल दे दिया भगवान ने। क्या? सब पुरुष दुर्योधन-दुःशासन है। तो उनका कटोरा खाली है या भरा हुआ है? है तो भले सिल्वर का कटोरा। ☺ आपका सपना सच्चा है या झूठा है? माताजी बोलो। सपना समझ में नहीं आया? ए लो माता ने सपना देख लिया और समझ में नहीं आया। ☺ शोभा माता इनको समझा दो।
दूसरा जिज्ञासुः सपना सच्चा है।
बाबाः कह रही हैं सच्चा है? कि आप कह रहे हैं? आपको तो सपना हुआ ही नहीं। आप तो सपना देखते नहीं प्रैक्टिकल में।
तीसरा जिज्ञासुः बाबा, मैं अपना एक सपना बताती हूँ।
बाबा: अरे! ☺
तीसरा जिज्ञासुः जब मैं बेसिक में आई बाबा, पहले दिन मुझे सपने में ऐसा दिखा - कृष्ण बंसी बजा रहा था और उसके आस-पास गोपिकाएं रास खेल रही थी। और मैं एडवांस में आई बाबा तो पहले दिन आप आए मेरे घर में और मेरे घर का लाल लाईट निकाल के चले गए। मैं बोल रही थी बाबा मेरे घर का लाईट दे दो। आप बोल रहे थे मुझे लाईट लेके जाना है। मैं आपके पीछे-पीछे बहुत दूर तक आई मगर आपने पीछे मुड़कर देखा ही नहीं बाबा।
बाबाः लाल लाईट ले गए? ☺
तीसरा जिज्ञासुः इसका क्या राज़ है बाबा?
बाबाः भक्तिमार्ग में ब्रह्माकुमार-कुमारी लाल लाईट को याद करते हैं या परमधाम को याद करते हैं?
तीसरा जिज्ञासुः पहले मैं बिन्दु को ही याद करती थी।
बाबाः हँ! बिन्दु को याद करो, चाहे लाल लाइट को याद करो, वो भक्तिमार्ग है या ज्ञानमार्ग है? भक्तिमार्ग है। ज्ञानमार्ग क्या है? लाल-लाल शिवलिंग। जो लिंग है निराकारी स्टेज की यादगार जिसमें ज्ञान ही ज्ञान भरा हुआ है। ज्ञान की आभा, लाइट भरी हुई है। ऐडी से ले करके चोटी तक जीवन कैसा हो जाता है? ज्ञानमय जीवन हो जाता है। कर्मेन्द्रियाँ कहाँ रमी हुई हों? ज्ञान में रमी हुई हों। वाचा कहाँ रमी हुई हो? ज्ञान में रमी हुई हो। और मन के संकल्प भी? ज्ञान में रमे हुए हों। उसको कहते हैं शिवलिंग, लाल लाइट का गोला जिसको हाथ, पांव, नाक, आँख, कान नहीं दिखाए जाते। न दिखाने का मतलब क्या हुआ? ऐसे जीवन में आचरण करना जैसे कान हैं ही नहीं। अखबारों में, रेडियो में, टेलीविजन में, चारों ओर ग्लानि ही ग्लानि, लेकिन एक कान से सुना दूसरे कान से निकाल दिया। जैसे ज्ञान सुनने के लिए ही कान हैं। सुनाने के लिए ही इन्द्रियाँ हैं। और वास्तव में अज्ञान सुनने के लिए इन्द्रियां नहीं हैं। तो वो लाल लाइट का गोला हो गया हमारा घर। लाल लाइट का मतलब ये नहीं है कि स्थूल रूप में लाल लाइट घर में जलाके बैठ गए तो हम परमधाम में बैठ जाएंगे। ये तो वो ही बात हो गई जैसे सन्यासियों ने निर्वाण को पसन्द किया। क्या चाहते हैं? निर्वाण को चाहते हैं। तो जो निर्वाण को चाहने वाले हैं वो परमधाम को ही तो पसन्द करते हैं। परमधाम को पसन्द करते हैं तो चुनरी कैसी पहन लेते हैं? लाल चुनरी पहन लेते हैं। अब चाहे लाल चुनरी पहल लो और चाहे लाल लाइट लगा दो । बात तो एक ही हो गई। तो वो भक्तिमार्ग की लाल लाईट भगवान उठा ले गए। अब आप पीछे-पीछे दौड़े। तो ऐसे थोड़े ही दे देंगे। पहले ज्ञान को समझो कि लाल लाइट क्या है? जिसके लिए मुरली में बोला है घर को याद करो। फिर बोला है बाप को याद करो। फिर बोला है स्वर्ग को याद करो। फिर बोला है मामेकम् याद करो। अरे, चार-चार को याद करें कि एक को याद करें? (जिज्ञासु - एक को याद करें।) फिर एक कैसे हुआ? उस एक में परमधाम भी समाया हुआ है, उस एक में स्वर्ग भी समाया हुआ है। अरे स्वर्ग तो स्वर्ग, स्वर्ग से भी ऊँचा सुख है गोपियों का। क्या सुख है? अतीन्द्रिय सुख पूछना हो तो गोप-गोपियों से पूछो। स्वर्ग में तो ज्ञान ही नहीं होगा। और यहाँ तो ज्ञान भी होगा। स्वर्णिम संगमयुगी सुख जो बाप से डायरेक्ट मिलता है। और सतयुग के सुख? डायरेक्ट बाप से नहीं मिलेंगे। इसलिए ये लाल लाईट और लाल लाईट का अर्थ क्या है, उन दोनों में बहुत अंतर है। टिकना चाहिए।

Disc.CD No.619, dated 21.08.08 at Nagpur
Part-4


Time: 28.39-29.30
Student: Baba, was Abraham Lincoln poor monetarily or intellectually?
Baba: What did you understand as per the language used by Baba?
Student: From the point of view of knowledge.
Baba: Not from the point of view of knowledge. There was no knowledge at that time at all. When Abraham Lincoln was born was there knowledge or was there just ignorance in the world?
Student: There was ignorance; but I compared it with his intellect.
Baba: Again you are saying, through the intellect. Arey, he was intelligent in what aspect? Did he become Lakshmi-Narayan?
Student: He did not become Lakshmi-Narayan, but he certainly became the President of a country.
Baba: By becoming the President, did he make the world heaven or did he lay the foundation for hell?
Student: He laid the foundation for hell.
Baba: So, why do you call him intelligent? Do you mean to say that the intellect of the intelligent ones, [i.e.] ShivBaba has failed and Abraham Lincoln has won?

Time: 29.34-31.07
Student: What is meant by broad drama?
Baba: The drama which is pre-determined is called drama. What? Purushaarth means [the effort] that we make. The seeds of purushaarth are in our fist. If we wish - purush means the soul and arth means for the sake of - we can do the best for the soul and we can also do the worst for it. A soul becomes its own enemy and friend. And what about the drama? There is only fear (dar) in drama. And where does this fear (dar) come from? Does it come from the mother or the Father? Does it come from the Father? ☺ It is Mahakali who creates fear. Otherwise nobody in the world fears. The Father comes as the Ocean of love. He does not play any part which may create fear in the children.

Time: 31.12-39.26
Student: Baba, I saw you in my dream.
Baba: Speak aloud. (Everyone is laughing.) They spoil everything by laughing.
Baba: What did you say?
A second student: I saw you in my dream.
Student said something.
Baba: Jai Siyaram. ☺ I have become deaf. These people sitting in the front have become deaf. Arey, someone from the back tell [me] [what the student wishes to ask].
A second student: Baba, she wants to say: I saw you in my dream. There was an empty bowl in your hand. I asked: Why is the bowl empty? I gave [something] and filled it up. Then, how did you have an empty bowl?
Baba: He gave [an empty bowl] because will there be an effect of knowledge when the mothers give it or [will there be an effect of it] as long as the brothers keep giving it? God gives knowledge only by entering a male. But when will it have an effect? It is when Lakshmi emerges, when the Lakshmis emerge, when the Mothers of India emerge, who are called the incarnation of Shivshakti. They should not be she-donkeys (gadhediyaan). They should not be the ones who open the gateway to hell. Then, there will be an effect of the knowledge. And it will have an effect in practice. Nothing is possible for the men. Their body has been given a title by God. What? All men are Duryodhans and Dushasans(Villainous characters in the epic Mahabharat). So, is their bowl empty or full? Although it is a silver bowl. ☺ Is your dream true or false? Mataji, speak up. Did you not understand the dream? Ye lo(An expression that expresses surprise), the mother saw a dream but did not understand it. ☺ Shobha mata, explain to her.
The second student: The dream is true.
Baba: Is she saying that it is true? Or are you saying that? You did not have the dream at all. You do not see dreams in practice.
A third student: Baba, let me tell you the dream I had.
Baba: Arey! ☺
The third student: When I entered the basic [knowledge], on the first day I had a dream that Krishna was playing the flute and gopikas ( herd girls) were dancing around him. And Baba, when I entered the the advance [knowledge], on the first day you came to my home and took the red light (casket of red light) with you. I was saying: Baba, please return the light of my house. You were saying: I have to take the light. I followed you for a long distance, but you did not look back at all Baba.
Baba: He took your red light?☺
The third student: What is its secret Baba?
Baba: Do the Brahmakumar-kumaris remember the red light or the Supreme Abode in the path of Bhakti?
The third student: Earlier I used to remember only the point.
Baba: Hm! Whether you remember the point, or the red light, is it the path of Bhakti or the path of knowledge? It is the path of Bhakti. What is the path of knowledge? Red Shivling(An oblong often black stone representing the form of Shiva worshipped in the path of Bhakti). The ling, which is full of knowledge, is a memorial of the incorporeal stage. It is full of the radiance (aabhaa), the light of knowledge. How is the life from head to toe? The life is full of knowledge. Where should the karmendriya be busy? They should be busy in knowledge. Where should the speech be busy? It should be busy in knowledge and the thoughts of the mind should also be busy in knowledge. That is called the Shivling, a ball of red light, which is not shown to have hands, legs, nose, eyes, ears. What is the meaning of not showing them? To perform such actions in life as if you don't have ears at all. Although there is defamation everywhere, in the newspapers, radio, television, he hears it through one ear and leaves it out through the other. It is as if the ears are meant only to listen to the knowledge. The indriya are meant only to narrate the knowledge. And the indriya are not meant to listen to ignorance in reality. So, that ball of red light is our home. Red light does not mean that... switching on the physical red light and sitting at home, is not sitting in the Supreme Abode. It is the same as the Sanyasis, who like nirvana (liberation). What do they want? They want nirvana. So, those who like nirvana like the Supreme Abode itself. When they like the Supreme Abode, what kind of a stole (chunri) do they wear? They wear a red chunri. Well, whether you wear a red chunri or put on the red light, it is one and the same. So, God took away that red light of the path of Bhakti. Now, you ran behind Him. So, He won’t simply give it back. First, understand the knowledge: what is meant by the red light? For which it has been said in the Murlis that you should remember the home. Then it has been said that you should remember the Father. Then it has been said that you should remember heaven. Then it has been said that you should remember Me alone (maamekam Yaad karo). Arey, should we remember four things or should we remember one? (Student: We should remember one.) Then how is it one? The Supreme Abode as well as heaven is contained in that one [personality]. Arey, leave aside heaven. The happiness of the gopis is higher than the comforts of heaven. Which happiness is it? If you wish to ask about the super sensuous ( atiindriya sukh), ask the gop-gopis. There will not be knowledge in heaven at all. And here, there will be knowledge as well. You receive the happiness of the Golden Confluence Age directly from the Father and what about the happiness of the Golden Age? You will not get it directly from the Father. This is why there is a vast difference between the [physical] red light and red light [in real sense]. You should become constant in it (the stage of the Supreme Abode). ... (to be continued.)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 13 Apr 2014

वार्तालाप-619, नागपुर, दिनांक 21.08.08
उद्धरण-भाग- 5


समयः 39.31-51.15
जिज्ञासुः बाबा, शिवबाबा तीन मूर्तियों के साथ में आता है। आगे-पीछे तो आता नहीं मूर्तियों को साथ में लेकर। फिर मनुष्यात्मा जैसे उनमें नंबरवार क्यों गिर गए फिर?
बाबाः नंबरवार कहाँ गिर गया? कैसे गिर गया? समझाओ नंबरवार (कैसे) गिर गया। और गिरने की तो बात ही नहीं है। शिवबाबा गिरता है क्या?
जिज्ञासुः तीन पुरियों में नंबरवार नहीं गिरे क्‍या बाबा?
बाबाः नहीं। बच्चा पैदा होता है तो माँ-बाप दोनों के मेल से पैदा होता है या एक के मेल से पैदा होता है?
जिज्ञासुः दोनों के मेल से।
बाबाः तो ये भी ऐसे ही है। शिव है ज्योतिबिन्दु बाप आत्माओं का और वो शरीरधारी में प्रवेश करता है। तो जिस शरीरधारी में प्रवेश करता है वो चोला हो गया माता। तो दोनों साथ-साथ हुए या अलग-अलग हुए? (जिज्ञासु -साथ-साथ हुए।) साथ-साथ हुए। अब प्रैक्टिकल साकार दुनिया में आ जाओ। ब्रह्मा बाबा को साक्षात्कार हुए। और उन साक्षात्कारों को उन्होंने अपने किसी नज़दीकी को सुनाया कलकत्ते में जाकर या कि डायरेक्ट प्रजापिता को सुनाया? कोई नज़दीकी थी क्योंकि ब्रह्मा का पार्ट ही मुख्य रूप से बजाने का है माता का। तो माता माता से ज्यादा मेल करेगी या पुरुष से ज्यादा मेल करेगी? माता से। तो माताएं दो थीं। कलकत्ते में दो माताएं होना कोई बड़ी बात नहीं है। तो कौनसी माता के नज़दीक गए होंगे? उनके कौन नज़दीक रही होगी? अरे लौकिक जीवन में उनके कौन नज़दीक थी? उनकी बहन ज्यादा नज़दीक थी। बहनोई नज़दीक नहीं थे। कौन नज़दीक थी? बहन नज़दीक थी। तो बहन और बहनोई। सृष्टि के अंत में विष्णु रूप होने चाहिए या नहीं होने चाहिए? (जिज्ञासु - होने चाहिए।) क्योंकि आदि में विष्णु सो अंत में भी विष्णु। दादा लेखराज और उनकी पत्नी यशोदा उनके तो स्वभाव-संस्कार ही नहीं मिलते थे। अगर मिलते होते तो ओम राधे मम्मा को यज्ञ का निमित्त माता बनाने की क्या दरकारी थी? थी? नहीं थी। तो अपनी बहन को उन्होंने बताया जाकर। और बहन तो पवित्रता की देवी थी या दुनियां में कोई और भी माता ऐसी हो सकती है जो उससे ज्यादा पवित्र हो? अरे, जो आदि में विष्णु वो अंत में विष्णु। तो वैष्णो देवी कैसी होगी? (सभी ने कहा – पवित्र।) पवित्रता की देवी होगी । उस पवित्रता की देवी के लिए प्रजापिता परमेश्वर का रूप रहा होगा या नहीं रहा होगा? अंतिम जन्म में भी परमेश्वर का रूप रहा। और कलकत्ते में जो भी पुरुष मात्र थे, वो कलकत्ते की दुनियां का सबसे बड़ा वैश्यालय थी या नहीं थी? वैश्यालय थी। उस वैश्यालय में वैश्यालय का सबसे बड़ा बीज भी होना चाहिए या नहीं होना चाहिए? था। कलकत्ते के लोगों के लिए खास बोला हुआ है। दो-दो पत्नियाँ रखते थे। दूसरी पत्नी के लिए अलग घर बनाके रखते थे। तो दादा लेखराज ने अपनी बहन को बताया। और बहन तो उदारता की मूर्ति थी। वो उदारता की मूर्ति अपने लिए मरने वाली थी या अपने पति के सुख के लिए मरने वाली थी? पति के सुख के लिए मरने वाली थी। अगर पति को दूसरी पत्नी में सुख है तो उससे उसको खुशी बढ़ेगी या खुशी कम होगी? उसकी खुशी बढ़ गई। तो दूसरी पत्नि का मान देगी या नहीं देगी? देगी। दूसरी पत्नी को उसने बताया। तो दो गीताएं हो गईं। एक सच्ची गीता और दूसरी झूठी गीता। जो सच्ची गीता है उसको पहले-पहले ब्रह्मा ने सुनाया। वो सुनने-सुनाने वाली गीता बनी, गीता माता। और उसने दूसरी माता को सुनाया। जो दूसरी माता है वो प्रैक्टिकल जीवन बिताने वाली है या मुख का बड़-बड़ करने वाली है? (किसी ने कहा- प्रैक्टिकल जीवन ।) अच्छा, दूसरी माता? माताएं भी दो प्रकार की होती हैं। एक मुख से ज्यादा बड़-बड़ नहीं करती हैं और दूसरी ऐसी होती हैं कोई बात सुनी और फटाक से... उनके पेट में समाती नहीं। फटफट-फटफट, फटाफट सुनाना शुरू कर देती है। तो दूसरी माता ने प्रजापिता को बताया। जिस समय सुनाया प्रजापिता को उसी क्षण शिव ने प्रवेश किया। सुनने के साथ समझा भी जा सकता है या नहीं समझा जा सकती है? दोनों काम साथ-साथ हो सकते हैं। तो दोनों कार्य साथ-साथ हुए। प्रजापिता ने दूसरी माता से सुना भी और समझा भी। माना ज्ञान का बीजारोपण हो गया। इसलिए गीता में आया है - मैं जब आता हूँ तो किसको ज्ञान सुनाता हूँ? (जिज्ञासु – सूर्य।) सूर्य को ज्ञान सुनाता हूँ। वो ज्ञान सूर्यवंशी राम का पार्ट हो गया। फिर वो ज्ञान सुनाया गया। माने उन साक्षात्कारों का अर्थ सुनाया गया और समझाया गया। तो किसने-किसने सुना? सुनने वाले कितने थे? (किसीने कहा – दो।) दो नहीं थे। तीनों थे। प्रजापिता भी था। दोनों प्रजामाताएं भी थीं। तीनों ने एक साथ सुना। उनमें से तीनों ने समझा या नंबरवार समझा? नंबरवार समझा। तो ऐसे नहीं कहेंगे कि एक के बाद एक था। एक के बाद एक में प्रवेश किया। प्रवेश करना अलग बात और प्रत्यक्ष होना अलग बात। जब आया था तो भी तीनों के बीच में आया था। और संसार में जब प्रत्यक्ष होगा तो भी तीनों के बीच पहले प्रत्यक्ष होगा कि दुनियांवालों के बीच पहले प्रत्यक्ष होगा? तीनों के बीच प्रत्यक्ष होगा। अकेला बाप या अकेला माँ या अकेला बच्चा परिवार नहीं बनाता है। परिवार बनाने के लिए तीनों चाहिए। बाप भी चाहिए और माता भी चाहिए और जगदम्बा बच्ची भी चाहिए। जगदम्बा को बच्ची कहा जाता है कि नहीं? कहा जाता है। तो पहला-पहला ब्राह्मण कौन हुआ? (किसी ने कहा- प्रजापिता।) कैसे? ब्राह्मण बने बिगर प्रजापिता था क्या? ब्राह्मण बनने के लिए तो ब्रह्मा भी चाहिए। तो पहले नंबर का ब्रह्मा कौन हुआ? दूसरे नंबर का ब्रह्मा कौन हुआ? तीसरे नंबर का ब्रह्मा कौन हुआ? कौन हुआ? (किसी ने कहा - दादा लेखराज।) दादा लेखराज ब्रह्मा तो अम्मा होना चाहिए पहले। (किसी ने कहा - आदि माता।) आदि माता। इसलिए भक्तिमार्ग में पार्वती को भी आदि देवी कहा जाता है। क्योंकि प्रैक्टिकल जीवन संपन्न करने वाला कार्य पार्वती का है। प्योरिटी से ही प्रैक्टिकल होता है। महाकाली की प्योरिटी में और महागौरी की प्योरिटी में जमीन आसमान का अंतर होना चाहिए या नहीं होना चाहिए? होना चाहिए।
दूसरा जिज्ञासुः बाबा इसका मतलब जो पार्वती है वो ब्रह्मा बाबा ने जो साक्षात्कार सुनाए वो पार्वती माना आदि राधा को पहले सुनाया।
बाबाः किसने सुनाया?
दूसरा जिज्ञासुः साक्षात्कार का पहले जा करके उससे मिली ना वो। वो ही समझे ना?
बाबाः किसने सुनाया और किसने सुना?
दूसरा जिज्ञासुः ब्रह्मा बाबा ने आदि राधा को...
बाबाः ब्रह्मा बाबा ने किसी को भी सुनाया हो। ब्रह्मा बाबा तो ब्रह्मा नहीं है।
दूसरा जिज्ञासुः नहीं वो ब्रह्मा नहीं। माना पहले सुनाया उनको तो उन्होंने फिर दूसरी माता को...।
बाबाः हाँ, जी। उनके जो भी नज़दीकी होगा उसी को सुनायेंगे। प्रजापिता जो उनका बहनोई था वो ज्यादा नज़दीक था या उनकी बहन उनके ज्यादा नज़दीक थी?
दूसरा जिज्ञासुः उनकी बहन।
बाबाः बहन ज्यादा नज़दीक थी। तो बहन को सुनाया।
दूसरा जिज्ञासुः तो पहले बहन माना आदि राधा वाली आत्मा कि जगदम्बा वाली आत्मा बाबा?
बाबाः अब आप समझिये कि ब्रह्मा जैसे धारणावान आत्मा की बहन कैसी होगी? धारणावान ही होगी या बिना धारणा के होगी? (जिज्ञासु – धारणावान।) फिर?

Disc.CD No.619, dated 21.08.08 at Nagpur
Part-5


Time: 39.31-51.15
Student: Baba, ShivBaba comes with three personalities. He does not come early or late with them. Then, why did they fall down number wise like the human souls?
Baba: They did not fall down number wise. How [are you saying that] they fell? Explain [to us] how they fall number wise? And there is no question of falling at all. Does ShivBaba fall down?
Student: Didn’t they fall number wise in the three levels [of the Subtle Region]?
Baba: No. When a child is born, is he born through the union of both the mother and the Father or is he born through [just] one?
Student: Through the union of both.
Baba: So, this is also like that. Shiva is a point of light, the Father of the souls and He enters a bodily being. So, the bodily being whom He enters is the mother. So, are both of them together or separate? (Student: They are together.) They are together. Now, come to the practical corporeal world. Brahma Baba had visions. And he narrated the visions to one of his close relative in Kolkata. Or did he narrate it directly to Prajapita? There was someone close to him because the part played by Brahma is mainly of a mother. So, will a mother be closer to a mother or will she be closer to a male? To a mother. So, there were two mothers. It is not a big deal to have two wives in Kolkata. So, to which mother will he have been close? Which mother will have been close to him? Arey, who was close to him in the lokik life? His sister was closer to him. The brother- in- law was not close. Who was close? The sister was close. So, should the sister and the brother-in-law be a form of Vishnu in the end of the world or not? (Student: There should be.) It is because whoever is Vishnu in the beginning is Vishnu in the end as well. As regards Dada Lekhraj and his wife Yashoda, their nature and sanskars did not use to match at all. If they matched, what was the need to make Om Radhe Mama the mother instrument for the Yagya? Was there? There wasn't. So, he went and told his sister. And was the sister a devi(Female deity) of purity or can there be a mother who is purer than her in the world? Arey, the one who is Vishnu in the beginning will be Vishnu in the end. So, how will Vaishno devi be? (Everyone said: Pure.) She will be the devi of purity. For that devi of purity would Prajapita have been a form of Parmeshwar (God) or not? Even in the last birth he was a form of God [for her]. And all men in Kolkata; was Kolkata the biggest brothel in the world or not? It was a brothel. Should the biggest seed of brothel be present in that brothel or not? He was present. It has been said particularly for the people of Kolkata that they kept two wives. They had a separate house for the second wife. So, Dada Lekhraj told his sister. And the sister was an embodiment of generosity. Was that embodiment of generosity the one who would die for herself or was she the one who sacrificed herself for the happiness of her husband? She was the one who sacrificed herself for the happiness of her husband. If the husband's joy lies in having a second wife, then will that increase her joy or will her joy decrease? Her happiness increased. So, will she give respect to the second wife or not? She will. She narrated [the visions] to the second wife. So, there were two Gitas. One is the true Gita and the other is the false Gita. Brahma narrated to the true Gita first of all. She became the Gita, Mother Gita who listens and narrates. And she narrated to the other mother. Does the other mother lead a life [by putting things] in practice or does she [just] speak through the mouth? (Someone said: Practical life.) Acchaa? The other mother? Mothers are also of two kinds. One kind of mothers do not speak much. And the other [kind] is such that as soon as they listen to something they immediately... they cannot keep it to themselves. They start narrating it [to others] immediately. So, the other mother narrated to Prajapita. Shiva entered Prajapita as soon as she narrated to him. Can someone understand along with listening or not? Both tasks can happen simultaneously. So, both tasks took place simultaneously. Prajapita listened to the other mother and at the same time understood it. It means that the seed of knowledge was sown. This is why it has been mentioned in Gita: When I come, to whom do I narrate the knowledge? (Student: Sun.) I narrate the knowledge to the Sun. That part of knowledge is of Suryavanshi(Belonging to the Sun dynasty) Ram. Then, that knowledge was narrated. It means that the meanings of those visions were narrated and explained. So, who listened to it? How many [people] listened to it? (Student: Two.) They were not two. All the three were there. Prajapita as well as both Prajamatas (mothers of the subjects) were present. All three of them listened simultaneously. Among them did all the three understand or did they understand number wise(According to their capacity)? They understood number wise. So, it will not be said that it (the entrance) was one after the other; he entered them one after the other. To enter and to be revealed are different things. Even when He came, He came amidst all the three. And even when He is revealed in the world, will He be revealed among all the three first or will He be revealed among the people of the world first? He will be revealed among all the three. The Father alone, the mother alone or the child alone does not constitute a family. All the three are required to form a family. The Father, the mother as well as daughter Jagdamba are required. Is Jagdamba called a daughter or not? She is called. So, who is the first Brahmin? (Someone said: Prajapita.) How? Was he Prajapita without becoming a Brahmin? Brahma is also required in order to become a Brahmin. So, who is the No.1 Brahma? Who is the No.2 Brahma? Who is the No.3 Brahma? Who is it? (Student: Dada Lekhraj.) Dada Lekhraj Brahma should be the mother first. (Student: The first mother.) The first mother (aadi mata). This is why in the path of Bhakti Parvati is also called Aadi Devi (the first female deity) because to put it (knowledge) in the life in practice is the task of Parvati. Something takes place in practice only through purity. Should there be a world of difference between the purity of Mahakali (the darkest one) and the purity of Mahagauri (the fairest one) or not? There should be.
Another Student: Baba, does it mean that Brahma Baba first of all narrated about the visions to Parvati, i.e. Adi Radha.
Baba: Who narrated [them]?
Another Student: About the visions... First he went and met her, did not he? She herself understood, did not she?
Baba: Who narrated and who listened to it?
Another Student: Brahma Baba narrated to the first Radha...
Baba: Brahma Baba may have narrated to anyone. Brahma Baba is not Brahma.
Another Student: No, he is not Brahma. I mean to say that he narrated to her first.
Baba: Yes. He will narrate only to the one who is closer to him. Was Prajapita, his brother-in-law closer to him or was his sister closer to him?
Another Student: His sister.
Baba: The sister was closer. So, he narrated to the sister.
Another Student: So, was the sister the soul of Adi Radha or Jagdamba?
Baba: Now, understand it yourself, how would the sister of Brahma, a virtuous (dhaarnaavaan) soul be? Will she be virtuous (dhaarnaavaan) or without virtues less? (Student: Virtuous.) Then? ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 14 Apr 2014

वार्तालाप-619, नागपुर, दिनांक 21.08.08
उद्धरण-भाग- 6


समयः 51.26-54.50
जिज्ञासुः बाबा, ब्रह्मा की सोल जो है वो जगदम्बा में पार्ट बजाती है तो जगदम्बा के शरीर को डब्बा कहा गया है। तो जगदम्बा की जो सोल है वो फिर कैसा पार्ट बजाती है?
बाबाः माँ किसको कहा जाता है? धरणी माता को कहा जाता है? माताओं में सबसे बड़ी माता कौन जो धारणा का पार्ट बजाने वाली संसार में साबित होती है? बड़ी माँ जिसको कहते हैं वो या बड़ी माँ में प्रवेश करने वाली आत्मा? मुरली में भी बोला है वास्तव में ये ब्रह्मा तुम्हारी जगदम्बा है, परन्तु तन पुरुष का है इसलिए माताओं के चार्ज में इनको कैसे रखा जाए? इसलिए ओम राधे मम्मा को निमित्त बनाय दिया है। तो असली जगदम्बा कौन हुई? (जिज्ञासु – ब्रह्मा।) ब्रह्मा। क्योंकि प्रैक्टिकल जीवन में पार्ट किसने बजाया सहनशीलता का? अगर सहनशीलता की बात, सर्वगुणों का राजा सहनशीलता को आगे रखा जाए तो कौन ऐसी आत्मा है दुनिया में दिखाई पड़ती है, ब्राह्मणों की दुनिया में जिसने सहनशीलता का सबसे जास्ती पार्ट बजाकर दिखाया? कोई उंगली नहीं उठा सकता। जगदम्बा कहें या ब्रह्मा कहें? ब्रह्मा कहेंगे।
जिज्ञासुः माना उनकी जो सोल है बाबा वो उसका ना के बराबर पार्ट है?
बाबाः किसका?
जिज्ञासुः जगदम्बा की ओरिजिनल सोल जो है।
बाबाः सुनने-सुनाने को महत्व देंगे या धारण करने कराने को महत्व देंगे? (सभी ने कहा – धारण करने।) आप किसको महत्व दे रहे हैं? या शक्ल सूरत को महत्व देंगे? सन्यासी लोग तो गऊ मुख में हाथ डाल करके राम-2 जपते रहते हैं। बुद्धि कहाँ रहती है? बुद्धि रूपी हाथ कहाँ रहता है? मुख में रहता है। तो ये तो अच्छी बात नहीं हुई। मुख से कहना राम-राम और अन्दर से वो ही अपनी अम्मा, परिवार की जो माता है वो ही याद आती रहे अंत तक जिंदगी में तो उनको सच्चा सन्यास कहेंगे? कि झूठे सन्यासी हुए? मन से याद करते रहें और तन से त्याग दें, संसार को दिखाने के लिए कि हम बड़े पवित्र हैं। मन से वो ही घर-गृहस्थ याद आता रहे, तो झूठा हुआ या सच्चा हुआ? झूठा ही तो कहेंगे।

समयः 54.52-55.25
जिज्ञासुः बाबाजी, दादा लेखराज की बहन छोटी मम्मी थी कि बड़ी मम्मी थी?
बाबाः आप सोचिये। दादा लेखराज जैसी श्रेष्ठ आत्मा जो पुरुष तन लेने वाली है, सहनशक्ति का आगार है, उसकी बहन कैसी होगी? (जिज्ञासु – छोटी मम्मी।) तो फिर समझो। उसमें पूछने की क्या बात है?

समयः 55.33-57.40
जिज्ञासुः बाबा, यज्ञ के आदि में 300 कन्याओं का माताओं का जो संगठन था उस वक्त दोनों माताएं भी थी और ब्रह्मा बाबा उस संगठन के टाइम वतन से डायरेक्शन बुलवाते थे या प्रोग्राम बुलवाते थे। वो कैसे क्‍योंकि जब ब्रह्मा बाबा भी यहीं थे, माताएं भी थी तो ऊपर से प्रोग्राम?
बाबाः सपने में और साक्षात्कार में प्रैक्टिकल और इम्प्रैक्टिकल का अंतर कहा जाए या नहीं कहा जाए? जो सपना होता है और जो साक्षात्कार होता है एक ही जैसा होता है या थोड़ा-थोड़ा अंतर होता है? थोड़ा अंतर है। साक्षात्कार खुली हुई आँखों से भी हो सकता है। और सपना? बंद आँखों से सोने के टाइम होता है। ये ही अंतर है। बाकी कोई अंतर नहीं है। इसलिए बोला है अंत समय में भी स्वप्न और साक्षात्कार की लीला बहुत चलेगी। आदि में भी सिंध, हैदराबाद में स्वप्न और साक्षात्कार की लीली चली थी। अभी तो एक, दो माताएं बोलती हैं हमको ये सपना आया। हमको वो सपना आया। लास्ट में तो बहुत बोलेंगे। साक्षात्कार से ही जैसे कि प्रत्यक्षता होने लगेगी।
दूसरा जिज्ञासुः बाबा, जो दादियां हैं, साक्षात्कार होता है उनको वो दिन में ही साक्षात्कार होता है क्या?
बाबाः दिन में ही?
दूसरा जिज्ञासुः जागृत अवस्था में ही?
बाबाः रात में साक्षात्कार नहीं होता है क्या? दिन में भी साक्षात्कार होता है, रात में भी होता है लेकिन जागृत अवस्था में होता है।

समयः 57.43- 57.57
जिज्ञासुः बाबा, कल्पना शक्ति कहा जाता है। कल्पना क्या है?
बाबाः जो पूर्व जन्मों की बातें हैं, वो आत्मा में आती रहती हैं संकल्पों में, उसी को संकल्पना कहा जाता है।

समयः 58.01-58.40
जिज्ञासुः बाबा, ड्रामा को साक्षी हो करके देखना है।
बाबाः और क्या?
जिज्ञासुः माना कैसे बाबा?
बाबाः और क्या? उसमें उलझ जाना है?
जिज्ञासुः साक्षी माना कैसे?
बाबाः साक्षी का मतलब है कोई बात में उलझना नहीं। उलझना है तो ज्ञान की बातों में उलझना है। श्रीमत की बातों में उलझना है। बाकी जो बीत गया उन बातों में बुद्धि को उलझाना उससे नुकसान हो सकता है। फायदा नहीं हो सकता। जो बीता सो ड्रामा। भविष्य में जो होने वाला है उसको ज्ञान की दृष्टि से देखना। ड्रामा नहीं समझ के बैठ जाना।

समयः 58.44-59.40
जिज्ञासुः दादी संदेश लेके जाती है बोलते है मोहिनी दीदी को देखा , प्रकाशमणि दादी को देखा, कैसे देखती है बाबा वो?
बाबाः स्वप्न में आप कैसे देखते हैं? अभी-अभी तो बताया कि स्वप्न में और साक्षात्कार में खास कोई अंतर नहीं है।
जिज्ञासुः जब भोग लगाते हैं...
बाबाः हाँ। आप सपने में भोग लगाते हैं कि नहीं कभी?
जिज्ञासुः खाते हैं क्या बाबा वो?
बाबाः अरे, आप सपने में खाते हैं कि नहीं?एक ही बात को बार-बार क्यों पूछना?
दूसरा जिज्ञासुः बाबा तुरीया आत्मा माने क्या अलग होता है ?
बाबाः हाँ, जी।
जिज्ञासुः बोलते हैं वतन में जाते हैं। कैसे वतन में जाते हैं?
बाबाः आप सपने में कैसे जाते हैं? जो बाबा बोलेंगे वो तो सुनेगी ही नहीं माता। अपनी बात बोले चली जाएगी।

समयः 59.42-01.00.10
जिज्ञासुः बाबा, लक्ष्मी वाली आत्मा जो है उसको साक्षात्कार की चाबी के आधार से निश्चय होगी ऐसे कहा। ये कैसे बाबा?
बाबाः अव्वल नंबर भक्तिन कौन है?
जिज्ञासुः लक्ष्मी वाली आत्मा।
बाबाः फिर? पति परमेश्वारय नमो नमः कौन करेगी अंत तक? उसको जो रतन मिलेंगे वो किससे मिलेंगे?
जिज्ञासुः नारायण से।

समयः 01.00.14-01.01.31
जिज्ञासुः बाबा, सहनशीलता और समाने की शक्ति जो है ये ही शक्तियों में भावना का जो परसेन्टेज है वो किस आधार से है? माना संस्कार के आधार से होता है क्या बाबा?
बाबाः दुश्मन ने दुश्मनी की, नुकसान कर दिया और उसकी दुश्मनी को माफ कर दिया। दुश्मन को अपना दोस्त भी बना लिया। अपने नज़दीक भी रख लिया। वो हुआ समाना। क्या? ऐसा समाने का काम बी.के वाले नहीं करते हैं। क्या? एडवांस पार्टी में ऐसा समाना भी होता है। जो एक बार बी.के से बाहर निकल गए या निकाल दिए गए उनको दुबारा वो अपने में समाकर नहीं रख सकते। उसको कहेंगे समाने की शक्ति नहीं है। और जिसमें सहनशक्ति नहीं होगी उसमें समाने की भी शक्ति नहीं होगी। सहन शक्ति होगी तभी समाने की शक्ति होगी।

Disc.CD No.619, dated 21.08.08 at Nagpur
Part-6


Time: 51.26-54.50
Student: Baba, the soul of Brahma plays a part in Jagdamba; so the body of Jagdamba has been called a box; so, what kind of a part does the soul of Jagdamba play?
Baba: Who is called mother? The mother is called the Earth. Who is the senior most mother among the mothers, the one who is proved to be the one who plays the part of dharana(Assimilating divine virtues) in the world? Is she the one who is called the senior mother or the soul which enters the senior mother? It has been said in the Murli too: Actually, this Brahma is your Jagdamba, but she has a male body, this is why how can he be kept in charge of the mothers? This is why Om Radhe Mama has been made instrument. So, who is the true Jagdamba? (Student: Brahma.) Brahma. It is because who played the part of tolerance in the life in practice? If the topic of tolerance, if the king of all virtues, [i.e.] tolerance is kept ahead, then which soul is seen in the world of Brahmins who played the part of tolerance the most? Nobody can raise a finger [against him]. Is it Jagdamba or Brahma? It will be said to be Brahma.
Student: Baba, does it mean that her soul plays a negligible part?
Baba: Who?
Student: The original soul of Jagdamba.
Baba: Will you give importance to listening and narrating or to imbibing and enabling others to imbibe? (Everyone said: To imbibe.) What are you giving importance to? Or will you give importance to the appearance? The sanyasis keep chanting the name of Ram by putting their hand in the mouth of a cow (gaumukh). Where does their intellect remain? Where does their hand like intellect remain? It remains in the mouth. So, this is not something good. To utter Ram-Ram through the mouth and to remember the same mother, who is the mother of the family from within the whole life, then will it be called true sanyas (renunciation)? Or are they false sanyasis? If they keep remembering [the household] through the mind and renounce it through the body to show to the world that they are very pure; if they remember the same household through the mind, is it false or true [sanyas]? It will be said to be just false.

Time: 54.22-55.25
Student: Babaji, was Dada Lekhraj's sister the junior mother or the senior mother?
Baba: Think it yourself. How will the sister of an elevated soul like Dada Lekhraj, who takes a male body, who is the storehouse of the power of tolerance be? (Student: The junior mother.) So, understand it. What is there to ask in it?

Time: 55.33-57.40
Student: Baba, when there was a gathering of 300 virgins and mothers in the beginning of the Yagya, both the mothers were present there and Brahma Baba used to seek directions or programs from the Subtle Region. How was that possible? How did the programs come from above when Brahma Baba as well as the mothers were present there?
Baba: Should there be a difference of practical and impractical between dreams and visions or not? Is a dream and a vision the same or is there some difference? There is some difference. Someone can have visions through open eyes as well. And someone has dreams through closed eyes while sleeping. This is the difference. There is no other difference. This is why it has been said that even in the end the play (liila) of dreams and visions will take place a lot. Even in the beginning the play of dreams and visions took place in Sindh, Hyderabad. Now one or two mothers say: ‘We had this dream. We had that dream.’ In the last period many people will say [this]. It is as if the revelation will take place just through visions.
Another student: Baba, do Dadis have visions only during the day time?
Baba: Only during the day time?
The other student: In a conscious state (jaagrit avasthaa)?
Baba: Don't people have visions during the night? They have visions during day as well as night, but in a conscious state.

Time: 57.43- 57.57
Student: Baba, people speak of the power of imagination (kalpanaa shakti). What is meant by kalpanaa (imagination)?
Baba: The topics of the previous births keep emerging in the soul in the [form of] thoughts; that itself is called imagination (sankalpanaa).

Time: 58.01-58.40
Student: Baba, should see the drama as a detached observer (saakshi).
Baba: Is it not so?
Student: I mean to ask, how can we do that Baba?
Baba: Is it not so? Should we be entangled in it?
Student: What does saakshi mean?
Baba: Saakshi means we should not be entangled in any topic. If we have to be entangled, we should be entangled in the topics of knowledge. We should be entangled in the topics of Shrimat. Otherwise, to entangling your intellect in the topics of the past can do harm. You cannot be benefitted with it. Whatever has passed is drama. Whatever is going to happen in the future, you should see it through the eyes of knowledge. You should not consider it to be drama.

Time: 58.44-59.40
Student: When Dadi brings the trance messages (sandesh); [she says:] I saw Didi Mohini , Dadi Prakashmani ; how do they see that Baba?
Baba: How do you see [things] in dreams? Just now it was told that there is not much difference between dreams and visions.
Student: They offer Bhog(An offering of food made to deities).
Baba: Yes. Do you ever offer Bhog in your dream or not?
Student: Baba, do they eat it?
Baba: Arey, do you eat in dreams or not?Why do you ask the same question again and again?
Another student: Baba, does turiya soul mean something different?
Baba: Yes.
Student: They say that they go to the Subtle Region. How do they go there?
Baba: How do you go in dreams? The mother will not listen to whatever Baba says. She will speak whatever she wants to.

Time: 59.42-01.00.10
Student: Baba, it has been said that the soul of Lakshmi will have faith on the basis of the key to visions. How is it so?
Baba: Who is the No.1 female devotee (bhaktin)?
Student: The soul of Lakshmi.
Baba: Then? Who will sing: 'Pati parmeshwaraay namo namah' (I bow to God, the Husband.) till the end? From whom will she get the gems?
Student: From Narayan.

Time: 01.00.14-01.01.31
Student: Baba, what is the basis of the percentage of feelings (bhaavnaa) in tolerance (sahansheelta) and the power to assimilate (samaane ki shakti)? Baba, does it mean that it depends on the sanskars?
Baba: [Suppose,] an enemy showed enmity. He did harm. And his enmity was pardoned. The enemy was also made into a friend. He was kept close as well. That is called assimilating. What? The BKs don't perform this task of assimilating in this manner. What? Such assimilation also takes place in the Advance Party. The BKs can assimilate those who came out of the BKs once or were thrown out by them among themselves. For this it will be said, they do not have the power of assimilation. And the one who doesn’t have the power of tolerance will not have the power to assimilate either. They will have the power to assimilate only when they have the power of tolerance. (Concluded.)

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arjun
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Post by arjun » 19 Apr 2014

वार्तालाप-620, डेन्टल, दिनांक 31.08.08
उद्धरण-भाग- 1


समयः 00.01-02. 07
जिज्ञासुः बाबा, गीता में लिखा है कि आत्मा बिगर कर्म किये एक सेकण्ड भी नहीं रह सकती।

बाबाः आत्मा कर्म करती है?
जिज्ञासुः आत्मा कर्म किए बिना एक सेकण्ड भी नहीं रह सकती।
बाबाः आत्मा शरीर के साथ कर्म किये बिगैर नहीं रह सकती।
जिज्ञासुः आत्मा का आना-जाना है एक शरीर छोड़ के दूसरे शरीर में। तो उसके साथ सूक्ष्म शरीर होता है।
बाबाः ठीक है।
जिज्ञासुः तभी उसका दूसरे शरीरों में आना-जाना होता है।
बाबाः आना-जाना होता है।
जिज्ञासुः परमधाम में उसके पास सूक्ष्म शरीर होता नहीं।
बाबाः हाँ, नहीं होता।
जिज्ञासुः परमधाम में जब आत्मा रुकती है तो उसके साथ सूक्ष्म शरीर नहीं होता। तो वो आती है धरती पर तो कैसे आती है?
बाबाः ऐसा होता है – जैसे बीज धरती पर गिरता है तो जब तक धरती पे न गिरे तब तक वो उग नहीं सकता। ऐसे ही ये शरीर रूपी धरणी भी है। आत्मा भल परमधाम से आती है लेकिन वो जैसे कोई बीज होता है जड़वत् गिर गया, ऐसे आती है। वो कोई कर्म नहीं उसका साबित हो सकता जब तक शरीर में प्रवेश न करे। धरणी का आकर्षण अपने टाइम पर खींचता है।
जिज्ञासुः धरणी का आकर्षण खींचता है?
बाबाः हाँ।
जिज्ञासुः आत्माओं को खींचता है?
बाबाः आत्माओं को टाइम पर, समय की सुई, जैसे रिकार्ड चलता है और सुई जैसे-जैसे समय की सुई घूमती जाती है, रिकार्ड अपने आप बजता जाता है। ऐसे ही ये समय की सुई है। इसको कहते हैं काल, महाकाल। और ये पृथ्वी है घूमने वाली। लगातार घूमती रहती है। और ऊपर से आत्माएं आ करके सदैव अपने-अपने स्थान पर पार्ट बजाती रहती हैं।

समयः 02.08-06. 45
जिज्ञासुः बाबा, पहले होगा गीता जयन्ती, तब होगा शिव जयन्ती, फिर होगा कृष्ण जयन्ती।

बाबाः ज्ञान के साथ जयन्ती जुड़ी हुई है कि अज्ञान के साथ जयन्ती जुड़ी हुई है?
जिज्ञासुः ज्ञान के साथ।
बाबाः तो ज्ञान जब प्रजापिता के मुख से सुनाया जाएगा, तब ज्ञान होगा या माता के मुख से सुनाया जायेगा तब ज्ञान होगा? सुनना-सुनाना ज्ञान होता है या समझना-समझाना ज्ञान होता है? (सभी ने कहा – समझना-समझाना।) तो अब बताओ क्या कहना चाहते हो?
जिज्ञासुः बाबा, तो गीता माता की जयजयकार 2018 से पहले हो जायेगा?
बाबाः ना, पहले क्यों? शिव जयन्ती सो गीता जयन्ती।
जिज्ञासुः दोनों का कम्बाइन्ड स्वरूप एक ही होगा?
बाबाः अरे जब शिव आता है तो गीता माता नहीं होती है क्या मौजूद?
जिज्ञासुः बाबा वो तो बहुत थोड़ी आत्मायें जानती हैं।
बाबाः जानने से मतलब नहीं है। यहाँ तो असलियत से मतलब है।
जिज्ञासुः बाबा, जैसे 2018 से पहले जैसे संगमयुगी श्री कृष्ण प्रत्यक्ष होगा।
बाबाः शिव जब प्रत्यक्ष होगा तो तीन मूर्तियों के साथ प्रत्यक्ष होगा या अकेले ही प्रत्यक्ष हो जाएगा? उन तीन मूर्तियों में गीता माता होगी या नहीं होगी? (जिज्ञासु – होगी।) होगी।
जिज्ञासुः तो बाबा 2018 के बाद राम रावण बनेगा कि पहले बनेगा?
बाबाः लो। अरे राम की आत्मा पहला नंबर है तो जो आदि है सो अंत होगा या कोई बीच में दूसरा आ जाएगा?
जिज्ञासुः पहले होगा। सबसे पहले।
बाबाः सबसे पहले आदि है। तो अंत भी सबसे अंत में होगा कि पहले हो जाएगा?
जिज्ञासुः सबसे अंत में होगा।
बाबाः तो बस। 500-700 करोड़ मनुष्यात्माएं हैं। जब सब धरती पर उतर जाएं अपना करिश्मा दिखा दें और कोई भी विनाश की लीला न दिखा सके। सब धर्मपिताएं आते हैं स्थापना करते हैं अपने-अपने धर्म की। कोई भी विनाश का काम नहीं कर पाता। किसी में इतनी ताकत ही नहीं है। ये एक का ही काम है कि जब वो सक्रिय होता है तो प्रकृति को भी तोड़-मोड़ के रख देता है। प्रकृति भी सौ परसेन्ट तमोप्रधान हो जाती है और सारी दुनिया का ध्वंस हो जाता है। तो ये काम जड़ करता है या चैतन्य आत्मा करती है? (जिज्ञासु – चैतन्य आत्मा।) चैतन्य आत्मा करती है। शिव करता है या कोई और है जो करता है? (जिज्ञासु – शिव।) शिव करता है? (जिज्ञासु – माध्यम करता है।) हाँ। शिव तो सिर्फ कल्याणकारी है।
जिज्ञासुः बाबा, सुप्रीम सोल शिव जो है वो पार्ट 36 तक बजाएगा या ...
बाबाः तुम्हें कैसे पता चलता है कि पार्ट बजाता है कि नहीं बजाता है? जब संशय आता है तो बजाता है कि नहीं बजाता है? जब संशय आता है, तो सुप्रीम सोल उड़ जाता है। तो पता ही नहीं लगता है कब बजाता है और कब न हीं बजाता ? बैल के ऊपर सदैव सवारी होती है क्या? वो सुप्रीम सोल बच्चों में प्रवेश करके और सेवा का काम नहीं करता? और बच्चों में भी तो प्रवेश करके दुनिया में सेवा कर रहा है ना।
जिज्ञासुः तो जब राम रावण बनता है तो उसी टाइम ...?
बाबाः जब राम रावण बनता है तभी जो वैज्ञानिकों की बुद्धि इतनी खराब होती है और इतनी तामसी बनती है कि जिन एटम बम्बों को उन्होंने बनाया है, वो उनको छोड़ने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। तब तक उनमें इतनी ताकत नहीं है कि वो एटमिक एनर्जी का विस्फोट कर सकें धुंआधार। छोटा-मोटा विस्फोट तो अभी भी होता रहता है। ये कोई बड़ी बात नहीं है। जैसे दीवाली में पटाके छुड़ाते हैं बच्चे या दशहरे में छुड़ाते हैं तो पहले फट-4 होता रहता है। फिर बाद में क्या होता है? फटाक से सारा का सारा स्वाहा। फट-8, फटाका।

Disc.CD No.620, dated 31.08.08 at Dental
Part-1


Time: 00.01-02. 07
Student: Baba, it has been written in the Gita that a soul cannot remain without performing actions even for a second.

Baba: Does a soul perform actions?
Student: A soul cannot live without performing actions even for a second.
Baba: A soul cannot remain without performing actions while living in a body.
Student: A soul comes and goes. It leaves one body and enters another body. It has a subtle body.
Baba: It is correct.
Student: Only then does it enter other bodies and leave them.
Baba: It comes and goes.
Student: It does not have a subtle body in the Supreme Abode.
Baba: Yes, it doesn’t.
Student: When a soul stays in the Supreme Abode, it does not have a subtle body with it. So, how does it come on Earth?
Baba: It happens like this. For example, when a seed falls on the Earth... until it falls on the Earth, it cannot grow. Similar is the case with this land like body. Although the soul comes from the Supreme Abode, it comes just like a non-living seed that falls [on land]. None of its actions can be seen until it enters a body. The attraction of the Earth pulls it at the destined time.
Student: Does the attraction of the Earth pull it?
Baba: Yes.
Student: Does it pull the souls?
Baba: [It pulls] the souls at their destined time. The needle of time... Just as a record is played, as the needle, the needle of time moves, the record plays automatically. Similarly, this is the needle of time. It is called kaal (time/death), mahakaal (the great death). This Earth rotates. It keeps rotating continuously. And the souls always keep coming from above at their designated place and play their parts.

Time: 02.08-06. 45
Student: Baba, first Gita Jayanti (Birthday of Gita) takes place, then Shiv Jayanti will take place; then Krishna Jayanti will take place.

Baba: Is the jayanti (birth) connected with knowledge or with ignorance?
Student: With knowledge.
Baba: So, will it be knowledge when it is narrated through the mouth of Prajapita or will it be knowledge when it is narrated through the mouth of the mother? Is listening and narrating called knowledge or is understanding and explaining called knowledge? (Everyone said: To understand and explain.) So, now tell us what you wish to say.
Student: Baba, will the mother Gita be hailed before 2018?
Baba: No, why before? Shiv Jayanti is Gita Jayanti.
Student: Will the combined form of both be the same?
Baba: Arey, is not mother Gita present when Shiva comes?
Student: Baba very few souls know it.
Baba: Knowing doesn’t matter. Here, it is the truth that matters.
Student: Baba, for example, first the Confluence Age Shri Krishna will be revealed from 2018.
Baba: Will Shiva be revealed with the three personalities or will He be revealed alone? Will mother Gita be included in those three personalities or not? (Student: She will be.) She will be.
Student: So, Baba will Ram become Ravan after 2018 or before that?
Baba: Lo! :D Arey, the soul of Ram is No.1; so the one who is in the beginning will be in the end or will someone else emerge in between?
Student: The one who is in the beginning. First of all.
Baba: He is the first one in the beginning. So will he be the last one in the very end or will he be that earlier?
Student: He will be in the very end.
Baba: So, that's all. There are 5-7 billion human souls. When all of them descend on the Earth and show their miracles and when none of them is able to show the drama of destruction... All the religious fathers come and establish their respective religions. Nobody is able to perform the task of destruction. Nobody has such power at all. This is the task of only the one; when that one becomes active, he destroys the nature as well. Even the nature becomes hundred percent tamopradhan and the entire world is destroyed. So, does a non-living thing perform this task or does a living soul perform this task? (Student: A living soul.) A living soul performs this task. Does Shiva perform it or is there someone else who performs it? (Student: Shiva.) Does Shiva perform it? (Student: The medium performs it.) Yes. Shiva is only beneficial.
Student: Baba, will the Supreme Soul Shiva play His part till 36….
Baba: How do you know whether He plays part or not? [Do you think] He plays part or not when you have a doubt? :D (Ironically :) When you have doubts, the Supreme Soul flies away. So, you do not come to know at all when He plays part and when He doesn't. Does He ride on the bull always? Doesn't that Supreme Soul enter the children and do the work of service? He is entering the other children too and doing service in the world, isn’t He?
Student: So, the time when Ram becomes Ravan...
Baba: It is only when Ram becomes Ravan that the intellect of the scientists becomes so spoilt and degraded that they become ready to even explode the atom bombs that they have prepared. Until then they do not have the power to explode that atomic energy one after another. Small explosions keep taking place even now. This is not a big issue. For example, when children burst crackers on Diwali (the festival of lights) or Dussehra, then initially they burst them one after the other fat-fat-fat-fat. Then what happens in the end? Everything is burst immediately. fat-fat-fat-fat-fat-fat-fat-fat, fataakaa (noise made by crackers). ... (to be continued.)

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