Q&A: PBK Murli discussions

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 10 Sep 2014

वार्तालाप-624, निलंगा, दिनांक 07.09.08
भाग-5


समयः 31.05-34.06
जिज्ञासुः सूर्य की कलाएं कम नहीं होती हैं। इसी तरह आज भी 16 कला संपूर्ण आत्माएं मौजूद होंगी?

बाबाः सूर्य की कलाएं कम नहीं होती हैं। जैसे बाप ज्यादा ताकतवर होता है या बाप से पैदा होने वाले बच्चे जो वंश (परं)परा में पैदा होते रहते हैं वो भी ताकतवर उतने ही बने रहते हैं?
जिज्ञासुः बाप के बेटे सब एक ही होते हैं ना।
बाबाः एक ही जैसे होते हैं? आज से 400 वर्ष पहले जो मनुष्य थे वो ज्यादा पावरफुल नहीं थे? थे ना? (जिज्ञासु – थे।) महाराणा प्रताप की तलवार उठाते नहीं बनती । म्युजियम में रखी हुई है। तो कहाँ पहले के मनुष्य, पहले के बाप और कहाँ उनके बच्चे, दर बच्चे, दर बच्चे पैदा होते गए। गाल चुपुट्टी बनते गए। आँखें अंदर धंसती गईं। तो 84 जन्मों में कितना पतन हुआ है।

माने बाप में ज्यादा ताकत होती है या बच्चे में ज्यादा ताकत होती है? बाप में ज्यादा ताकत होती है। रचयिता ताकतवर होता है। रचना उतनी ताकतवर नहीं हो सकती। इसलिए सूर्य सबका बाप है। उसमें जितनी ताकत है उतना सूर्यवंशी बच्चों में ताकत नहीं हो सकती। तो जो सूर्यवंशी बच्चे इस दुनिया में हैं वो भी संग के रंग में आ गए। कोई बड़े राजा का बच्चा संग के रंग में आ जाए, महाराजा का बच्चा संग के रंग में आ जाए और गरीब आदमियों के बच्चे भी उसी संग के रंग में आ जाएं तो ज्यादा सत्यानाशी कौन बनेगा?
(किसी ने कुछ कहा - राजा का बच्चां।) (उत्तर देने वाले से-) उन्हें बताने दो ना। (जिज्ञासु –राजा।) राजा का बच्चा ज्यादा सत्यानाशी बनेगा, ज्यादा पतित बनेगा। तो ऐसे ही है। भल सूर्यवंशी बच्चे तो हैं, ऊँचे ते ऊँच बाप के बच्चे हैं, लेकिन संग के रंग में आने से नीच ते नीच बन गए। उतनी पावर नहीं रही। सत्या नाश हो गया। सत्य में ताकत होती है। असत्य बन गए। झूठों के संग में आते-आते झूठे बन गए। भारत सबसे जास्ती झूठखंड बन गया। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार कौनसे देश में चल रहा है? (जिज्ञासु – भारत।) अभी तो और भ्रष्टाचार बढ़ेगा। गवर्मेन्ट ही भ्रष्टाचारी होती जा रही है तो यथा राजा तथा प्रजा भ्रष्टाचारी बनती जा रही है।

समयः 34.32-40.16
जिज्ञासुः बाबा, बाप की याद में बंदूक कैसे चलाते हैं?

बाबाः कैसे चलाते हैं ये प्रश्न नहीं। बंदूक चलाना कोई बड़ी बात नहीं है। उंगली घुमाई और बंदूक चल गई। लेकिन बंदूक चलाने वाले की बात है। जो बंदूक चलाने वाला है, उसका भाव क्या है बंदूक चलाने के पीछे? देश कि रक्षा का भाव है या स्वाार्थ का भाव है? अगर देश की रक्षा का भाव है तो बंदूक चलाने वाला स्वर्ग में जाएगा। क्योंकि परमार्थी है या स्वार्थी है? (सभी ने कहा – परमार्थी।) परमार्थी है। अगर खुद की रक्षा के लिए ही सिर्फ, स्वार्थ के लिए बंदूक चलाई और हत्या कर दी किसी की तो नरकगामी होगा या स्वर्गगामी होगा? नीचे घराने में जाके जन्म मिलेगा। पतित बन जावेगा।
दूसरा जिज्ञासुः पर कभी-कभी बाबा तो स्वार्थ अच्छे के लिए भी तो होता है।
बाबाः स्वार्थ!
दूसरा जिज्ञासुः नहीं, जैसे...
बाबाः स्व का माने अपनी आत्मा के लिए सिर्फ। दूसरों का कल्याण नहीं देखा। दूसरों का नुकसान हो चाहे फायदा हो, हमें इससे कोई मतलब नहीं। हमारा काम बन जाए। हमारे रथ का फायदा हो जाए। स्व का जो रथ है ना स्व माने आत्मा। इस आत्मा का जो रथ है उस स्व के रथ का कल्याण हो जाए। दूसरा चाहे गड्ढे में जाए, चाहे मर जाए। इससे कोई मतलब नहीं।
दूसरा जिज्ञासुः यानी खुद की रक्षा करने के लिए ये बात बोली।
बाबाः हाँ। तो खुद की रक्षा करने... खुद की रक्षा वो है, जैसे किसी ने आक्रमण कर दिया। कोई हमारी हत्या करने के लिए ही आ रहा है तो खुद की रक्षा करने के लिए हम भाग गए। अपने को बचा लिया। तो ये क्या खराब काम हुआ? ये कोई खराब काम थोड़े ही हुआ। ये तो अच्छा है। जीवन को बचाना। जीवन दिया किसने? ड्रामा प्लैन अनुसार हमको जीवन कुदरती मिला हुआ है। इस दुनिया में कोई जीवन लेने और देने की ताकत थोड़े ही रखता है। तो जीवन की सुरक्षा करना, ये हमारी आत्मा का धर्म है। और संगमयुग में तो ये जीवन और ही ज्यादा वैल्युएबल । जीवन रहेगा तो पुरुषार्थ बढ़िया रहेगा। और शरीर छूट गया? फिर जब तक समझदार नहीं बनेंगे, ज्ञान को समझने लायक नहीं बनेंगे तब तक का तो जीवन बेकार चला गया।
तीसरा जिज्ञासुः बाबा, रात में चोर लुटेरे डाकू अस्त्र-शस्त्र लेकर आए। अपनी बचाव के लिए बंदूक चलाई तो...?
बाबाः बंदूक रखी किसलिए? अरे, बंदूक किसलिए रखी? चलाएंगे तो बाद में। रखी किसलिए? बंदूक या तमंचा किसलिए रखा? नेगेटिव संकल्पों के कारण रखा या पाजिटिव संकल्पों के कारण रखा? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) हाँ, हम जो बात पूछ रहे हैं, उसका जवाब दो। उसके पीछे संकल्प किस तरह के हैं, बंदूक रखने के पीछे? (जिज्ञासु – सुरक्षा।) सुरक्षा? सुरक्षा भाग के भी तो हो सकती है।
जिज्ञासुः घर से रात में भाग कैसे सकते?
बाबाः हाँ, हाँ।
जिज्ञासुः दरवाजा बन्द् है।
बाबाः आप एक बंदूक उठायेंगे एक आदमी। वो दस आदमी आ जाएंगे तो आप कैसे बचेंगे? पूर्व जन्मों के हिसाब से ही हर कार्य होता है। पूर्व जन्मों में जो कर्म किये हैं, तब ही ऐसा होगा। हमने पूर्व जन्म में और इस जन्म में अच्छे कर्म किये हैं तो हमारा ऐसा हश्र नहीं हो सकता। अभी विनाश आने वाला । विनाश सामने खड़ा हुआ है। बंदूक हाथ में ले करके हम जीत पाएंगे? बोलो। अरे! जो विनाश सामने खड़ा हुआ है महाभारी महाभारत युद्ध में जो मारकाट होने वाली है हिन्दुस्तान में, उसमें हम बंदूक, एक बंदूक हाथ में लेकरके हम अपनी सुरक्षा कर पाएंगे, अपने परिवार की? नहीं कर पाएंगे। यही तो बात है कि भगवान आकरके योगबल सिखाता है। ऐसा योगबल हो कि जिसको हम, जो सामने आये और उसको हम देखें और उसका वायब्रेशन चेंज हो जाए। ये रही बंदूक आँखों की। जब आँखों से प्यार की बंदूक चल सकती है और सामने वाला मर सकता है, तो उल्टे वायब्रेशन की बंदूक नहीं चल सकती?

Disc.CD No.624, dated 07.09.08 at Nilanga
Part-5


Time: 31.05-34.06
Student: The celestial degrees of the Sun do not decrease. Similarly, will there be souls complete with 16 celestial degrees present even today?

Baba: The celestial degrees of the Sun do not decrease. For example, is the Father more powerful or do the children who are born from the Father in his family line equally powerful?
Student: All the children of the Father are alike, aren’t they?
Baba: Are they alike? Weren’t the people 400 years ago more powerful? They were, weren’t they? (Student: They were.) People are unable to lift the sword of Maharana Pratap. It is kept in the museum. So, what a difference between the people of the past, fathers of the past and their children in the successive generations! The cheeks have continued to become flat. The eyes have gone inside. So much downfall has taken place in the 84 births!

It means does the Father have more power or does the child have more power? The Father has more power. The creator is powerful. The creation cannot be so powerful. This is why the Sun is everybody’s Father. The Suryavanshi children cannot have as much power as He has. So, even the Suryavanshi children who exist in this world have come in the colour of the company. If the child of a great king comes in the colour of the company, if the child of an emperor comes in the colour of the company and if the children of a poor person are also coloured by the same company, who will bring more ruination?
(Someone said: The child of a king.) (To the student who answered :) Let him (the one who asked the question) speak. (Student: King.) A king’s child will bring more ruination, he will become more sinful. So, it is the same thing [here]. Although they are the Suryavanshi children, the children of the highest Father, yet they became the lowest by coming in the colour of the company. They did not have so much power. They were ruined (satyaa naash). Truth (satya) has power. They became untrue. They became false by coming in the company of the false people. Bhaarat (India) became the most false land (jhuuthkhand). Which country is experiencing corruption the most? (Student: India.) Now, the corruption will increase more. The government itself is becoming corrupt; so, as the king so the subjects are becoming corrupt.

Time: 34.32-40.16
Student: Baba, how can we fire the gun in the Father’s remembrance?

Baba: The question is not how you fire the gun. Using a gun is not a big deal. You turn your finger (pull the trigger) and the gun is fired. But it is about the person firing the gun. The person who is firing the gun, what is the intention behind firing the gun? Is there the intention to safeguard the country or is there the intention of selfishness? If the intention is to safeguard the country, the person firing the gun will go to heaven because is he parmaarthii (altruistic) or swaarthi (selfish)? (Everyone said: Parmaarthii.) He is parmaarthi. If he fired the gun only for his own safety, for selfish motives and killed someone, then will he go to the hell or heaven? He will be born in a low clan. He will become sinful.
A second student: Baba, but sometimes selfishness is also for good.
Baba: Selfishness!
The second student: No, for example...
Baba: For swa means only for our soul. We did not pay attention others’ benefit. It is of no concern to us whether it brings harm or benefit to others. Our work should be done. Our Chariot (rath) should be benefited. The Chariot of swa; swa means the soul. The Chariot of this soul, the Chariot of swa should be benefitted. It doesn’t matter whether the other person falls in pit or dies; it is of no concern to us.
The second student: I meant about protecting the self.
Baba: Yes. As regards self defence... Self defence means... suppose someone attacked you. Someone is coming to kill us; so, we ran away to protect ourselves. We saved ourselves. So, this is not a wrong task. It is not a wrong task. It is good to save your life. Who has given you life? We have received this life naturally as per the drama plan. Nobody has the power to give or take life in this world. So, to protect our life is the duty of our soul. And in the Confluence Age, this life is even more valuable. If there is life, the purushaarth will be good. And what if you leave the body? Then until you become intelligent, until you become capable of understanding the knowledge, the life will go waste.
A third student: Baba, if thieves, looters and dacoits come with weapons at night and we fire the gun to protect our self then…?
Baba: Why did you keep the gun?  Arey, why did you keep the gun? You will use it later but why did you keep it [in the first place]? Why did you keep a gun (banduuk, tamancaa)? Did you keep it because of negative thoughts or because of positive thoughts? (Student said something.) Yes, reply to the question that is being asked. What kind of thoughts are there behind keeping the gun? (Student: Defence.) Defence? Defence can also be ensured by running away [from the house].
Student: How can we run away from the house at night?
Baba: Yes, yes.
Student: The door is closed.
Baba: You, one person will hold one gun. If ten people come, how will you save yourself? Every task is performed according to the account of the past births itself. It will happen like this only if you have performed such deeds in the past births. If we have performed good actions in the past births and this birth, we cannot meet this fate. Now the destruction is nearing, destruction is standing ahead. Will we be able to gain victory by holding a gun in our hands? Speak up. Arey! The destruction that is standing ahead, the bloodshed that is going to take place in the massive Mahabharata war in India, will we be able to save our self, our family by holding a gun in our hands? We will not be able to [do this]. This is the difference, that God comes and teaches the power of Yoga. There should be such power of Yoga that we see someone who comes in front of us and his vibrations change. This is the gun of the eyes. When the gun of love can be fired through the eyes and the person in front of us can die, then can’t the gun of opposite vibrations be fired? ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 11 Sep 2014

वार्तालाप-624, निलंगा, दिनांक 07.09.08
भाग-6


समयः 40.29-42.06
जिज्ञासुः बाबा, जो आत्महत्या करते है उनकी गति क्या होती है?

बाबाः आत्महत्या करने का संकल्प ही परमात्म संकल्प के विरोधी है। आत्मा की हत्या होती ही नहीं कभी। क्या? जीव हत्या होती है। तो जीवन लेना और जीवन देना हमारे हाथ में होना चाहिए? ये लॉ को अपने हाथ में उठाने वाली बात नहीं हुई? लॉ अपने हाथ में उठाना चाहिए? (जिज्ञासु – नहीं) नहीं। न अपनी हत्या करने का संकल्प आए कभी भी, कर्म में आना और वाचा में आना, किसी को धमकी देना वाचा से, ये तो दूर की बात। न दूसरों को मारने का संकल्प आना चाहिए, वाचा में आना चाहिए, कर्मणा में आना चाहिए। ये बहुत नेगेटिव संकल्प है। जीवन लेना और जीवन देना ये ड्रामा के बस में है। जीयदान देने वाला ईश्वर है। जो भी आत्महत्या करने वाले हैं वो सब भूत-प्रेत बनते हैं। अपना ही कल्याण नहीं कर सके तो दूसरों का कल्याण क्या करेंगे?

समयः 42.21-43.52
जिज्ञासुः बाबा, भक्तिमार्ग में संत ज्ञानेश्वर ने रेडे के मुँह से वाणी चलाई।

बाबाः रेडा का मुँह कैसा होता है?
दूसरा जिज्ञासुः भैंसा।
बाबाः भैंसा। भैंसे के मुख से वाणी चलाई?
जिज्ञासुः वेद वाणी चलाई।
बाबाः भैंसे के मुख से वेदवाणी चलती है?
जिज्ञासुः चलाई। संत ज्ञानेश्वर ने।
बाबाः आपने विश्वास कैसे कर लिया? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) आपने विश्वास कैसे कर लिया? ये बात सच्ची कैसे मान ली? दूसरे ने कह दी और आपने सच्ची मान ली? ये ही तो मुरली में रोज़ सुनाया जा रहा है कि भक्तिमार्ग में होती है अंधश्रद्धा। अगर सच्ची बात है तो अभी दिखाओ। ये प्रैक्टिकल करके दिखाओ – भैंस के मुँह से वेदवाणी सुनाओ। कोई का सुनवा के दिखाओ। कोई ऐसा संत ज्ञानेश्वर का बच्चा है तो वो सुना के दिखाए। (जिज्ञासु ने कुछ कहा) हर बात को क्यों मानना?
तीसरा जिज्ञासुः पोपट बोलता है...।
बाबाः पोपट तो रटा-रटाया बोलता है। बुद्धि की बातें बोलता है क्या पोपट? पोपट को जैसा रटा दिया जाएगा, वैसा बोलता रहेगा।

समयः 44.06-44.49
जिज्ञासुः पार्थ शब्द का अर्थ क्या है बाबा? पार्थ।

बाबाः पार्थ। पृथ्वी। पृथ्वी माने माता। पृथु राजा का नाम जिसने पृथ्वी के ऊपर राज्य किया। वो पिता हो गया। पृथ्वी माता हो गई। और पृथ्वी का पुत्र पृथा। कन्या का नाम हो गया। पार्थ पुरुष का नाम हो गया, बच्चे का नाम हो गया। जैसे भरत का पुत्र भारत।

समयः 44.57-46.55
जिज्ञासुः बाबा, दिव्य चक्षु माना क्या?

बाबाः ये चक्षु होते हैं स्थूल चक्षु। और एक दिव्य चक्षु होता है जिसे कहते हैं तीसरी आँख। वो भी दो प्रकार की होती है। एक होती है साक्षात्कार वगैरह करते हैं दिव्य चक्षु से। वो उतनी पावरफुल और स्थायी रहने वाली चीज़ नहीं है। लेकिन ज्ञान के आधार पर जो दिव्य चक्षु पक्का हो जाता है, आत्मा का तीसरा नेत्र खुल जाता है सदैव के लिए वो पक्का दिव्य चक्षु है। यज्ञ के आदि में भी बहुतों को साक्षात्कार हुए थे सिंध हैदराबाद में। साक्षात्कार होते गए और ज्ञान में आते गए। वो टिके हुए हैं या हवा हो गए? हवा हो गए। लेकिन ज्ञान के आधार पर जिनका बुद्धि रूपी तीसरा नेत्र खुलेगा, दिव्य चक्षु खुलेगा वो दिव्य चक्षु वाले देवता बन जावेंगे। देवताओं में ही दिव्य गुण होते हैं। वो देवताएं दो प्रकार के होते हैं। एक चन्द्रवंशी और एक सूर्यवंशी। सूर्यवंशियों में ज्ञान का तीसरा नेत्र होता है और चन्द्रवंशियों में प्योरिटी के आधार पर उनको भगवान साक्षात्कार कराता रहता है। जैसे राधा वाली आत्मा जहाँ कहीं भी होगी साक्षात्कार करती रहती है और खुश होती रहती है। ज्ञान भल बुद्धि में नहीं है।

समयः 47.05-49.12
जिज्ञासुः बाबा, आज की मुरली में गुरुओं के बारे में बाबा ने कहा है – इन गुरुओं ने तो हमारी सत्यानाश कर दी है।

बाबाः हाँ, जी।
जिज्ञासुः और भारत की भी कर दी है।
बाबाः हाँ।
जिज्ञासुः तो ये भारत कौन?
बाबाः भारत एक तो देश का नाम है, स्थान का नाम , जहाँ रहते हैं मनुष्य। और हमारी सत्यानाश कर दी है, ये ब्रह्मा बाबा अपनी तरफ से बोले। कभी ब्रह्मा की आत्मा भी इंटरफियर करके बोलती है? हाँ। तो वो बोलती है तो कहती है हमारी सत्यानाश कर दी। और भारत की भी सत्यानाश। सबसे जास्तीँ सत्यानाश हमारी हुई या भारत की हुई? ज्यादा सत्यानाश किसकी होती है?
जिज्ञासुः फिर भारत ये शब्दब किसके लिए?
बाबाः भारत माने माता। भारत माने पिता। भरत पुत्र को भारत कहा जाता है। जिसने भरण-पोषण किया वो ही भरत हुआ।
जिज्ञासुः भरत शिवबाबा है।
बाबाः हाँ, जी। विष्णु को कहा जाता है भरत। भरण-पोषण करने वाले को। विश्व भरण-पोषण कर जोई, ताकर नाम भरत आस होई। ब्रह्मा के चार पुत्र हुए मानसी। उनमें एक मानसी पुत्र का नाम... वो तो शास्त्रों के आधार पर सनत, सनातन, सनंदन, सनत कुमार हुए। लेकिन रामायण में उनके नाम क्या हैं? राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न। ये चार धर्मों के चार बीज हैं। उनमें एक का नाम भरत है। उस भरत ने जरूर विश्व पिता का पालन-पोषण किया है एडवांस के आदि में। तो विश्वपिता का पालन पोषण कर दिया माना सारे विश्व का पालन-पोषण कर लिया। तो इसलिए उसका नाम भारत पड़ गया।

Disc.CD No.624, dated 07.09.08 at Nilanga
Part-6


Time: 40.29-42.06
Student: Baba, what will be the fate of those who commit suicide (aatmahatyaa)?

Baba: Aatmahatyaa. The very thought of committing suicide is against the thought of the Supreme Soul. A soul (aatmaa) can never be killed (hatyaa). What? A living being can be killed. So, should taking life or giving life be in our hands? Is it not taking law into our hands? Should we take law into our hands? (Student: No.) No. Neither should the thought of killing ourselves ever arise - doing it in actions and bringing it in words; warning someone through words is a far off topic - nor should killing others come in our thoughts, words or actions. This is a very negative thought. Taking life and giving life is in the control of the drama. It is God who gives life. All those who commit suicide become ghosts and spirits. When they could not bring benefit to themselves, what benefit will they bring to others?

Time: 42.21-43.52
Student: Baba, saint Gyaneshwar made a buffalo (redaa) narrate Vani in the path of Bhakti.

Baba: How is the mouth of a redaa?
A second student: Buffalo.
Baba: Buffalo (bhainsaa). He made a buffalo narrate Vani?
Student: He made it narrate the Vedvaani.
Baba: Does a buffalo narrate the Vedvaani?
Student: Saint Gyaneshwar made him narrate it.
Baba: How did you believe it? (Student said something.) How did you believe it? How did you believe this to be true? The other person told you and you accepted it to be true? This itself is being narrated in the Murli daily that there is blind faith in the path of Bhakti. If it is true, show it [to me] now. Do it in practice and show [me]. Make a buffalo narrate the Vedvaani. Prove it by making someone do so. If there is any child of Saint Gyaneshwar let him do so. (Student said something.) Why should you accept everything?
A third student: A parrot (popat) speaks…
Baba: A parrot speaks whatever it has learnt by heart. Does a parrot speak anything wise? A parrot will keep speaking whatever it is made to learn by heart.

Time: 44.06-44.49
Student: Baba, what is the meaning of the word ‘Paarth’? Paarth.

Baba: Paarth. Prithvi (Earth). Prithvi means mother. Prathu is the name of a king who ruled over the Earth. He is the Father. Prithvi is the mother. And Prithvi’s son is Prathaa. It is the name of a virgin. Paarth is the name of a man, of a son. For example, the son of Bharat is Bhaarat.

Time: 44.57-46.55
Student: Baba, what is meant by divine eyes (divya chakshu)?

Baba: These eyes are the physical eyes. And one thing is divine eyes which is called the third eye. They are also of two kinds. One thing is visions (saakshaatkaar) etc. that people have through the divine eyes. It is not something that is very powerful and permanent. But the divine eyes that become fixed on the basis of knowledge, the third eye of the soul that opens forever are the real divine eyes. Also, in the beginning of the Yagyamany people had visions in Sindh Hyderabad. They had visions and they continued to enter [the path of] knowledge. Are they still present or have they vanished? They have vanished. But those whose third eye like intellect, divine eyes will open because of knowledge will become the deities with divine eyes. Only the deities have divine virtues. Those deities are of two kinds. One [kind] is Chandravanshis and the other is Suryavanshis. Suryavanshis possess the third eye of knowledge. And God keeps giving visions to the Chandravanshis because of their purity. For example, wherever the soul of Radha is, she has visions and she keeps becoming happy; although she does not have the knowledge in her intellect.

Time: 47.05-49.12
Student: Baba, in today’s Murli Baba has said about the gurus: These gurus have ruined us.

Baba: Yes.
Student: And they have [ruined] Bharat (India) as well.
Baba: Yes.
Student: So, who is this Bharat?
Baba: On one side Bharat is the name of a country, a place where human beings live. And ‘they (gurus) have ruined us (satyaanaash)’ were the words said by Brahma Baba. Does Brahma’s soul also interfere and speak sometimes? Yes. So, when it speaks, it says ‘[they] have ruined us’. And [they] have ruined Bharat as well. Who was ruined the most, us or Bharat? Who is ruined more?
Student: The word Bharat refers to whom?
Baba: Bharat means mother and Father. Son of Bharat is called Bhaarat. The one who gave sustenance is himself Bharat.
Student: Bharat is ShivBaba.
Baba: Yes. Vishnu is called Bharat. The one who gives sustenance. Vishwa bharan poshan kar joi, taakar naam Bharat as hoi (The one who sustains the world is named Bharat). Brahma had four sons born through his thoughts. The name of one of them ... According to the scriptures they were Sanat, Sanaatan, Sanandan, Sanat Kumar. But what are their names in the Ramayana? Ram, Lakshman, Bharat, Shatrughna. These are the four seeds of the four religions. Among them, one is Bharat. That Bharat has definitely sustained the World Father in the beginning of the advance [party]. He sustained the World Father means he sustained the entire world. That is why he was named Bharat. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 12 Sep 2014

वार्तालाप-624, निलंगा, दिनांक 07.09.08
भाग-7


समयः 49.25-52.46
जिज्ञासुः बाबा, गणपति, गणेशजी की इतनी महिमा गाते हैं और इतना खर्चा करते हैं और बाद में पानी में क्यों5 डाल देते हैं?

बाबाः हाँ, इतनी पूजा करते हैं गणेशजी की, हनूमानजी की।
जिज्ञासुः खर्चा भी करते हैं।
बाबाः गणेशजी की बहुत पूजा करते हैं। देवियों की बहुत पूजा करते हैं और पूजा करके बाद में? पानी में डुबोय देते हैं। नहीं डूबते हैं तो पाँव से दबाके डुबो देते हैं। (जिज्ञासु – हॉं। क्यों।?) इसलिए कि यहाँ शूटिंग ही ऐसी होती है। ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनिया में जिनको भगतलोग देवी समझ करके बैठ जाते हैं... इस दुनिया में देवी होगी, कोई देवी है? देवी कोई नहीं। लेकिन समझ क्या लेते हैं? ये गंगा देवी है। ये यमुना देवी है। ये सरस्वती देवी है। तो ऐसी भावना बैठ जाती है और उनकी भगवान की तरह पूजा करने लग पड़ते हैं। अपने बाल बच्चों को दूध नहीं पिलाएंगे, सारा धन माल ले जा करके उन देवियों के अर्पण कर देंगे।

तो ऐसी जो पूजा करते हैं और लास्ट में जब भगवान प्रत्यक्ष होता है तो उनको पता चल जाता है कि ये तो देवियां नहीं, देवियों के रूप में राक्षसियाँ हैं। ये गणेशजी नहीं हैं, गणेश के रूप में कोई जानवर है। जानवर भगवान है। भगवान बनके बैठा हुआ है। तो फिर डूबीजा-डूबीजा नहीं करेंगे, क्या करेंगे? उनसे मोह नष्ट हो जाता है। गुरुओं को मारो गोली। फिर उनको ज्ञान की गोलियाँ दागना शुरू कर देते हैं। तो डूबेंगे कि बचे रहेंगे? डूब जाते हैं। अरे जब भगवान मिल गया तो भगवान के बच्चे को क्यों भगवान मान लिया? भगवान एक होता है कि भगवान के बच्चे, दर बच्चे जितने भी होते हैं वंशानुक्रम में सब भगवान हो जाते हैं?
(जिज्ञासु-एक होता है।) कांग्रेस पार्टी वाले क्या समझ रहे हैं नेहरूजी से ले करके अब तक? उनकी वंशावली में जो पैदा होगा वो ही शासन सत्ता संभालने की योग्यता रखता है। बाकी कोई भी योग्यता रखने वाला नहीं है। ऐसी अंधश्रद्धा बैठी हुई है ना। ये अंधश्रद्धा रखने का भी कारण क्या है? अरे शूटिंग कहाँ होती है? (जिज्ञासु – संगमयुग पर।) यहाँ संगमयुग में शूटिंग होती है। ज्ञानीतू आत्मा एक के प्रभाव में रहेगी। जो अज्ञानी है वो अनेकों के प्रभाव में आते रहते हैं।

समयः 52.58-54.31
जिज्ञासुः बाबा, शिवबाबा कहते हैं आशीर्वाद अक्षर भक्तिमार्ग का है।

बाबाः आशीर्वाद? हाँ।
जिज्ञासुः वास्तव में तो आशीर्वाद से भक्तिमार्ग में कोई प्राप्ति नहीं होती है।
बाबाः ज्ञान मार्ग में आशीर्वाद से तो कोई प्राप्ति नहीं होती।
जिज्ञासुः भक्तिमार्ग में भी नहीं होनी चाहिए ना?
बाबाः भक्तिमार्ग में आशीर्वाद करते हैं, गुरू लोग आशीर्वाद करते हैं और वो साबित हो जाता है। यहाँ बाप कहते हैं, यहाँ आशीर्वाद की कोई बात नहीं, यहाँ तो पढ़ाई है। पढ़ाई में जो जितना पढ़ाई पढ़ेगा उसको उतना आशीर्वाद खुद ही मिल जावेगा।
जिज्ञासुः लेकिन बाबा, वास्तव में तो अपने कर्म से ही प्राप्त होता है ना?
बाबाः होता है। लेकिन भावना क्या बैठी हुई है? भावना का भाड़ा भक्तिमार्ग में मिलता है या नहीं मिलता है? भक्तिमार्ग में भावना बैठी हुई है। गुरू ने ऐसा बोल दिया, ऐसा आशीर्वाद दिया इसीलिए ऐसा हो गया। भाव प्रधान विश्व रचि राखा। अभी भावना हमारी अंधश्रद्धा की नहीं है। हमारा तो सच्चा श्रद्धा विश्वास है। उसमें अंधा शब्द नहीं जोड़ा जा सकता। हम भगवान को भी मानते हैं तो तौल लेते हैं, जान लेते है तब भगवान को मानते हैं।

समयः 54.38-59.22
जिज्ञासुः 14 वर्ष वनवास में रहने के बाद भी सीता को राज्याभिषेक होने के बाद जंगल में जाना पड़ा। सीता को।

बाबाः सीता को?
जिज्ञासुः 14 वर्ष वनवास में रहने के बाद ...।
बाबाः वो है कहाँ की बात?
जिज्ञासुः रामायण की बात।
बाबाः रामायण की बात है किस समय की बात?
जिज्ञासुः संगमयुग की।
बाबाः तो संगमयुग में जो बातें हुई हैं वो ही बातें वहाँ बताई गई हैं शास्त्रों में।
जिज्ञासुः राज्याभिषेक होने के बाद और भी जाना पड़ा।
बाबाः हाँ, हाँ। शूटिंग एक बार होती है कि बार-बार होती है? आत्मा को एक बार तपाया जाता है या बार-बार तपाया जाता है? संगमयुग में तो बार बार तपाया जाता है। ये शूटिंग अंत तक चलती ही रहेगी।

98 से एडवांस की दुनिया में पाण्डवों को देश निकाला मिलता है। 14 वर्ष कब होंगे पूरे?
(जिज्ञासु – 2012) 2012 में 14 वर्ष पूरे होते हैं। तो कांटों का जंगल हुआ ना। कांटों के जंगल में, कांटों के जंगल में भ्रमण करना पड़े या महल बनाके एक जगह रहना पड़ेगा? भ्रमण करना पड़े। ये शूटिंग पूरी हो जाएगी फिर प्रैक्टिकल शूटिंग होगी या नहीं होगी? (जिज्ञासु – होगी।) होगी। जब तक नई दुनिया न बने तब तक ये शूटिंग चालू रहेगी। क्या?
दूसरा जिज्ञासुः पेपर में लिखा हुआ है 2012 में पूरे सृष्टि का विनाश।
बाबाः पेपर में किसने लिखा?
दूसरा जिज्ञासुः शास्त्र।
बाबाः पूरी दुनिया विनाश होगी तो ब्राह्मणों की दुनिया के विनाश की बात आई है या बाहर की दुनिया विनाश हो जाएगी? (जिज्ञासु – ब्राह्मणों की दुनिया।) लेकिन अखबार में लिखने वालों ने क्या समझ लिया? (जिज्ञासु – बाहर की दुनिया।) बाहर की दुनिया विनाश हो जाएगी। ऐसा कुछ होने वाला नहीं है।

सारी बाहर की दुनिया सन् 76 में खतम हो जाए, 80 में खतम हो जाए… जैसे मुसलमान लोग 80 के बाद, 1980 के बाद कोई तवारीख नहीं मानते। उनके शास्त्रों में कोई जिकर नहीं है। उनकी चौदहवीं सदी पूरी हो जाती है। तो समझते हैं दुनिया का विनाश हो जावेगा। उस विनाश के टाइम पर हमारे पैगम्बर प्रत्यक्ष होंगे। पैगम्बर प्रत्यक्ष हुए? नहीं हुए? वो इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट जिनमें प्रवेश करते हैं वो अपने ब्राह्मणों की दुनिया में प्रत्यक्ष नहीं हैं?
(जिज्ञसु- है।) तो कहाँ की बात और कहाँ अर्थ लगाया हुआ है। ऐसे ही शास्त्रों का भी हुआ। शास्त्र जब शुरुआत में, द्वापर की आदि में लिखे गए थे तो सतोप्रधान थे या तमोप्रधान थे?(जिज्ञासु – सतोप्रधान।) दुनिया की हर चीज़ पहले सतोप्रधान होती है। शास्त्र भी सतोप्रधान थे। फिर मनुष्यों की बुद्धि विकारों को भोगते-भोगते जैसे जैसे विकारी बनती गई उनका अर्थ उल्टा कर दिया। तो सारी बातें उल्टी बैठी हुई हैं बुद्धि में। समझते हैं 10 सिर वाला कोई रावण था। चार भुजाओं वाला कोई विष्णु था। 4 मुखों वाला कोई ब्रह्मा था। 6 महीने सोने वाला कोई कुंभकर्ण था। तो ये विकारी बुद्धी का कमाल है या ईश्वरीय बुद्धि है? विकारी बुद्धि का कमाल है। कोई पूछता भी नहीं ये कैसे हो सकता है। ओम शांति।

Disc.CD No.624, dated 07.09.08 at Nilanga
Part-7


Time: 49.25-52.46
Student: Baba, Ganapati, Ganeshji is praised so much, so much is spent after him, [still] why is he put into water later on?.

Baba: Yes, Ganeshji, Hanumanji are worshipped so much.
Student: They also spend [money].
Baba: Ganeshji is worshipped a lot. Devis are worshipped a lot. And after worshipping ...? (Students: They put them in water.) They drown them in water. If they don’t sink, they push them with legs and make them sink. (Student: Yes. Why?) It is because the shooting itself takes place in such a way here. The ones whom the devotees consider as devi in the Confluence Age world of Brahmins… will there be devis in this world; is anyone a devi? Nobody is a devi. But what do they think? This one is Ganga Devi. This one is Yamuna Devi. This one is Saraswati Devi. So, they (the devotees) have such feelings and they start worshipping them (the devis) like God. They will not feed milk to their children; they will go and offer their entire wealth to those devis.

So, those who worship in this way... and when God is revealed in the end, they come to know that these are not devis but witches in the form of devis; this is not Ganeshji, he is some animal in the form of Ganesh. He is an animal like God. He is sitting as God. So, if they won’t drown them, what else will they do? They lose attachment for them. To hell with the gurus! Then they start shooting the bullets of knowledge at them. So, will they sink or survive? They sink. Arey, when you have found God, why did you consider God’s child as God? Is there one God or are all the children in the genealogy of God Gods?
(Students: He is one.) What are the members of the Congress Party thinking [about the genealogy] of Nehruji till today? Only the one who is born in his genealogy (vanshaavali) has the capability to rule. Nobody else has the capability. They have such blind faith? What is the reason for having this blind faith as well? Arey, where does the shooting take place? (Student: In the Confluence Age.) The shooting takes place here in the Confluence Age. A knowledgeable soul will remain under the influence of the One. Those who are ignorant keep coming under the influence of many [people].

Time: 52.58-54.31
Student: Baba, ShivBaba says: The word ‘aashirwaad’ (blessings) is of the path of Bhakti.

Baba: Aashirwaad. Yes.
Student: Actually, nothing is achieved through blessings in the path of Bhakti.
Baba: Nothing is achieved through blessings in the path of knowledge.
Student: Nothing should be achieved in the path of Bhakti either, shouldn’t it?
Baba: In the path of Bhakti [people] give blessings, gurus give blessings and it proves to be true. Here, the Father says: Here, there is no question of blessings. Here, it is the study. During studies, the more someone studies, the more blessings he will automatically receive.
Student: But Baba, actually one achieves [attainments] through his own actions, doesn’t he?
Baba: They do. But what is the feeling? Do you get the return of your feelings in the path of Bhakti or not? [People] have faith in the path of Bhakti: The guru said like this, he gave this blessing; that is why it happened so. Bhaav pradhaan vishwa raci raakhaa (your world is created according to the intentions with which you perform deeds). Now our feelings are not of blind faith. Our faith and belief is true. The word ‘andhaa’ (blind) cannot be added to it. When we accept God... we accept Him only after we judge Him, know Him.

Time: 54.38-59.22
Student: Even after the exile of 14 years in the forest Sita had to go to the forest again after the coronation [of Ram].

Baba: Sita?
Student: After living in exile for 14 years ...
Baba: It is about which time?
Student: It is about the Ramayana.
Baba: To which time does the topic of the Ramayana pertain?
Student: To the Confluence Age.
Baba: So, whatever has happened in the Confluence Age has been described in the scriptures there.
Student: She had to go [to forest] again even after the coronation [of Ram].
Baba: Yes, yes, does the shooting take place once or many times? Is the soul heated up [in the fire of Yoga] once or many times? It is heated up many times in the Confluence Age. This shooting will continue to take place till the end.

Pandavas were banished from the world of the advance [party] from 98. When will the 14 years complete?
(Student: 2012.) 14 years complete in 2012. So, it is a jungle of thorns, isn’t it? Will you have to roam in the jungle of thorns, or will you have to live at one place building a palace? You will have to wander. Will the practical shooting take place or not when this shooting is over? (Student: It will take place.) It will take place. Until the new world is created this shooting will continue. What?
Another student: It is written in the newspaper that the entire world will be destroyed in 2012.
Baba: Who has written it in the paper?
Another student: The scriptures.
Baba: ‘The entire world will be destroyed’, is it about the destruction of the Brahmin world or will the outside world be destroyed? (Student: The world of Brahmins.) But what did the people who wrote [this] in the newspapers think? (Student: The outside world.) The outside world will be destroyed. No such thing is going to happen.

If the entire outside world ends in the year 76, 80… for example, the Muslims believe that there is no date after 1980. There is no mention [of any date after that] in their scriptures. Their fourteenth century is completed [in 1980]. So, they think that the world will be destroyed. [They think:] at that time of destruction our Prophet (paigambar) will be revealed. Was their Paigambar revealed? Wasn’t he revealed? Aren’t the ones in whom those [religious fathers like] Abraham, Buddha, Christ enter revealed in our Brahmin world?
(Student: They are.) So, it is in some other context and they have applied it to some other context. Similar was the case with the scriptures. When the scriptures were written in the beginning, in the beginning of the Copper Age, were they satopradhaan or were they tamopradhaan? (Student: Satopradhaan.) Everything in the world is satopradhaan at first. The scriptures also were satopradhaan. Then, as the intellect of the human beings went on becoming vicious by experiencing the pleasure of vices, they interpreted them (the scriptures) in a wrong way. So, all the topics have sat in their intellect in a wrong way. They think that there was some Ravan with 10 heads. There was some Vishnu with four arms. There was some Brahma with four heads. There was some Kumbhakarna who slept for six months. So, is it a wonder of the vicious intellect or is it a Divine (Ishwariya) intellect? It is a wonder of the vicious intellect. Nobody even asks how it is possible.
Om Shanti.
(Concluded.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 19 Sep 2014

वार्तालाप नं 611, दिनांक 24.08.2008, टी.पी.जी.
भाग-1


समय- 00.58-01.44
जिज्ञासु:-बाबा अष्ट लक्ष्मी अलग है, अष्ट देवी अलग है।

बाबा:-अष्ट देव हैं तो उनकी अष्ट देवियाँ भी हैं और आठ नारायण हैं सतयुग के। तो उनकी आठ लक्ष्मी भी हैं। सतयुग में नारायण कितने होगें? 8 नारायण होगें। तो लक्ष्मी भी कितनी होंगी? 8 लक्ष्मी होंगी। और?
जिज्ञासु:- धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, देवी लक्ष्मी...
बाबा:-हाँ-हाँ, वो तो चाहे गिनाते चले जाओ।

समय- 01.54-10.35
जिज्ञासु:- बाबा, महाभारत में दिखाया है कि खुद इन्द्र ने कर्ण के पास जा करके कवच, कुंडल मांगा ना।

बाबा:-किसके पास जाके?
जिज्ञासु:-कर्ण के पास ।
बाबा:-कुन्ती ने?
जिज्ञासु:- इन्द्र ने।
बाबा:-इन्द्र ने जा करके दान मांगा।
जिज्ञासु:-खास अर्जुन के लिये ही मांगा ना?
बाबा:-वो उसका बच्चा था ना।
जिज्ञासु:-इन्द्र में भी ऐसा ममत्व होता है तो ये तो ...।
बाबा:-ये कहानियाँ कहाँ की हैं? जब इन्द्र देवता सम्पूर्ण बना , देवता बन गया उस समय की कहनी है या जब अधूरा था तब की कहनी है? कहानी कहाँ की है? अधूरा है तो मांगता भी है। जब सम्पूर्ण है तो थोड़े ही मांगेगा। इन्द्र देवता कहा गया है, क्योंकि उन्हें तो पता ही नहीं है संगमयुग का और स्वर्ग का लिखने वालों को। अभी हमको तो पता चल गया इन्द्र देवता भी यहीं है और कर्ण भी यहीं है। जब तक यही नहीं समझा कि कर्ण कौन है, तो इन्द्र देवता का भी भ्रम पैदा होता रहेगा।

कर्ण को महादानी दिखाया गया है। देवताओं को महादानी नहीं दिखाया गया। कर्ण नाम क्यों पडा़? कर्ण माने क्या होता है? अरे कर्ण माने क्या? कान। ये नाम क्यों पड़ा? अरे नाम किसलिए पड़ता है? काम के आधार पर। देवताओं में कोर्इ ऐसा देवता है जिसके कान बहुत बड़े-2 होते हैं?
(किसी ने कहा- गणेश।) गणेश। कान बड़े-2 होते हैं ना। इसका क्या मतलब हुआ? मतलब हुआ कि सुनना और सुनाना जास्ती होता है। इसलिये कान बड़े-बड़े दिखाये गये हैं। तो कर्ण वाली आत्मा भी ज्ञान को सुनने वालों में सबसे जास्ती आगे और सुनाने वालो में भी सबसे जास्ती आगे। ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनियां में ये किसका पार्ट है? जिसके कान सबसे पहले सुनते हैं, जो सबसे ज्यादा सुनाता है और सबसे ज्यादा सुनता भी है और पक्ष कौरवों का लेता है या पाण्डवों का पक्ष लेता है? कौरवों का पक्ष लेता है। सब कुछ जानते हुये भी सारा ज्ञान सुनते हुए भी, सुनाते हुये भी, पक्ष फिर भी किसका लेता है? कौरवों का पक्ष लेता है। ये भी जान जाता है कि कौरव और पाण्डव दोनों के बीच में धर्म-अधर्म का युद्ध है। अपने को कुन्ती पुत्र भी समझ लेता है। अन्दर से जानता है कि पाण्डवों में मैं बड़ा भ्राता पाण्डव हूँ। फिर भी कर्मों में परिवर्तन नहीं हो पाता। ऐसा संग का रंग लग जाता है। ऐसा बड़ा महारथी, ऐसा बड़ा महादानी, पाण्डवों में कोर्इ दिखाया नहीं गया।

कर्ण की, क्रार्इस्ट की, कृष्ण की राशि मिलती है कि नहीं मिलती है? राशि भी एक ही है। नाम, मान, शान चाहने वाले कौरवों के पक्ष में जाते हैं या पाण्डवों के पक्ष में जाते हैं? कौरवों के पक्ष में जाते हैं। पाण्डव तो अपने पुरुषार्थ को भी गुप्त रखते हैं। नाम, मान, शान, पद, मर्तबा सब उनका गुप्त होता है। क्रिश्चियन्स् को तो दिखाया ही जाता है दिखावा करने वाला। और क्रिश्चियन्स् और क्रार्इस्ट फालो किसको करते हैं? किसको फालो किया? कृष्ण को फालो किया। ब्रह्मा का प्रैक्टिकल जीवन जो लौकिक में और अलौकिक में था, वो दिखावा करने वाला जीवन था या यथार्थ को गुप्त रखने वाला था
? (किसी ने कहा कुछ कहा।) गुप्त् रखने वाला था? (किसी ने कहा- नहीं, नहीं, दिखाने वाले।) दुकान में भी जब धन्धा-धोरी करते थे, तो सोने, चांदी के, हीरों के माल बनाते थे। था कम कीमत का परन्तु कैसी डब्बीा में दिखाते थे? बढ़िया फर्स्टक्लास डब्बीन में शो करके दिखाते थे। आज की दुनियां में, लौकिक धन्धे-धोरी में, लखापति, करोड़पति कौन बनता है? दिखावा करने वाला बनता है या एक दाम बोलने वाला बनता है? दिखावा करने वाला। एक भागीदार भी था, हीरों की छोटी सी दुकान थी दुनिया के झूठे बाजार में। उसकी दुकान क्यों नहीं चली? क्यों गरीब बन करके रहा? क्या करण था? सच्चार्इ थी। कलयुगी दुनियां में सच्चार्इ का बोल-बाला नहीं हो पाता।

Disc.CD No. 611, dated 24.08. 2008, at T.P.G.
Part-1


Time: 00.58-01.44
Student: Baba, the eight Lakshmis and the eight devis are different.

Baba: There are eight deities so there are their eight devis (female deities) as well. And there are eight Narayans of the Golden Age. So, they have eight Lakshmis as well. How many Narayans will there be in the Golden Age? There will be eight Narayans. So, how many Lakshmis will there be as well? There will be eight Lakshmis.
Student: Dhan Lakshmi, Dhaanya Lakshmi, Devi Lakshmi…
Baba: Yes, they can be counted as many as you wish.

Time: 01.54-10.35
Student: Baba, it is shown in the Mahabharata that Indra (the king of the deities) himself went to Karna (a Kaurava warrior) and asked him for [his] armour and earrings, didn’t he?

Baba: Who did he go to?
Student: Karna.
Baba: Kunti?
Baba: Indra went and sought donation.
Student: He sought [donation] especially for Arjun, didn’t he?
Baba: He (Arjun) was his (Indra’s) child, wasn’t he?
Student: If even Indra has such attachment, so this...
Baba: To which time do these stories pertain? Is this the story of the time when the deity Indra became complete, when he became a deity or is it a story of the time when he was incomplete? It is a story of which time? He seeks [donation] when he is incomplete. When he becomes complete he will not seek [donation]. Indra has been called a deity because those writers do not at all know about the Confluence Age and heaven. Now we have certainly come to know that the deity Indra as well as Karna are present here itself. As long as you don’t understand who Karna is, you will continue to have confusion about the deity Indra as well.

Karna is shown to be a great donor (mahaadaani). Deities have not been shown to be mahaadaani. Why was he named Karna? What is meant by Karna? Arey, what is meant by Karna? Ears. Why was he given this name? Arey, why is a name kept? [It is kept] on the basis of the task [performed]. Is there any deity among the deities who has very big ears?
(Someone said: Ganesh.) Ganesh. He has big ears, hasn’t he? What is meant by this? It means that he listens and narrates a lot. This is why he is shown to have big ears. The soul of Karna also is ahead of everyone else in listening to the knowledge and he is ahead in narrating it as well. Who plays this part in the Confleunce Age Brahmin world? The one whose ears listen first of all, the one who narrates the most and also listens the most. Secondly, does he side with the Kauravas or with the Pandavas? He sides with the Kauravas. Even after knowing everything, listening to the entire knowledge as well as narrating it, he sides with whom? He sides with the Kauravas. He is also aware that a war of dharma (religion) and adharma (irreligiousness) is being fought between the Kauravas and the Pandavas. He also realizes that he is the son of Kunti. He knows from within that he is a Pandav (son of Pandu), the eldest brother among the Pandavas. Yet he is unable to change his actions. He is coloured by the company in such a way. None among the Pandavas has been shown to be such maharathi (great warrior) and mahadaani (great donor).

Do the horoscopes of Karna, Chirst and Krishna match or not? The zodiac sign is also the same. Do those who seek name, respect, and pride side with the Kauravas or with the Pandavas? They side with the Kauravas. The Pandavas keep even their purushaarth (spiritual effort) secret. Their name, respect, pride, position, honour, everything is hidden. Christians are anyway shown to be the ones who show off. And who do the Christians and Christ follow? Whom did they follow? They followed Krishna. Was the practical life of Brahma in the lokik and the alokik a life of showiness or was it a life of keeping the reality in secret?
(Someone said something.) Was he the one who kept [the reality] in secret? (Someone said: No, he was the one who made a show of it.) Even when he used to do business at the shop, he used to manufacture golden, silver and diamond jewelry. They used to cost less, but in what kind of a box did he display them? He used to display them in nice, first class boxes. In today’s world, in the lokik business, who becomes millionaire and multimillionaire? Does the one who shows off become [millionaire] or does the one who sticks to one price become [millionaire]? It is the one who shows off. There was the partner as well. He had a small shop of diamonds in the false market of the world. Why was he unable to run his shop? Why did he remain poor? What was the reason? He had truthfulness [in him]. In the Iron Age world truth is not successful. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 20 Sep 2014

वार्तालाप नं 611, दिनांक 24.08.2008, टी.पी.जी.
भाग-2


समय- 10.47-16.48
जिज्ञासु:- आज बाबा ने कहा कि पहले नारायण तो देवता बनता है। फिर कहते वक्ते लक्ष्मी का नाम पहले क्यों आता है बाबा?

बाबा:- लक्ष्मी की 63 जन्म की प्योरिटी है। बनी-बनार्इ बन रही और अब कछु बननी नाय। 63 जन्म की जो प्योरिटी है वो 63 जन्म की प्योरिटी संन्यासियों वाली है या गृहस्थी जीवन वाली है? जो प्योरिटी है ना वो संन्यासियों वाली प्योरिटी है जब तक ज्ञान न मिले। और जब ज्ञान मिल जाता है तो बात समझ में आती है। परन्तु ये नियम बना हुआ है जिसमें जन्म-जन्मांतर की प्योरिटी के संस्कार होंगे वो आत्मायें जब एडवांस में सहयोगी बन जावेंगी जैसे संन्यासी... बड़े-2 संन्यासी जब निकलेंगे तो तुम बच्चों की विजय हो जावेगी। तो जिनसे प्राप्ति करनी होती है उनको मान देना चाहिए, आगे रखना चाहिए। कोर्इ खराब बात है क्या माताओं को आगे रख देने में? अच्छी बात है ना। लेकिन राधा का नाम पहले, कृष्ण का नाम बाद में। ये राधा और कृष्ण सुधरे हुए मनुष्य हैं या भगवान-भगवती हैं? सुधरे हुये मनुष्य हैं। राम-सीता नहीं कहते हैं, सीता-राम कहते हैं। सीता का नाम पहले। ये सीता राम सुधरे हुये मनुष्य हैं या भगवान-भगवती हैं? दुनियां भले भगवान-भगवती मानती हो लेकिन वास्तविकता क्या है? ये भगवान-भगवती नहीं हैं। जहाँ भगवान-भगवती का सवाल आता है वहां पार्वती का नाम पहले और शंकर का नाम बाद में नहीं आता। क्या कहते हैं? शंकर-पार्वती कहा जाता है। भगवान को सदैव आगे रखना होता है। भगवती को सदैव बाद में रखना होता है।

प्योरिटी चाहे जितनी भी हो, भगवान पवित्रों के लिये आता है या अपवित्रों के लिये आता है? अगर पवित्र आत्माओं के लिये ही भगवान आता हो फिर तो जो साधु संन्यासी हैं उनको उंच पद मिलना चाहिए। उनको रुद्रमाला में आना चहिए जो शिव की माला है। रुद्रमाला बड़ी या विजयमाला बड़ी? विजयमाला का मणका बनना खुशनसीबी नहीं है। वो राजयोग नहीं सीखते, अभी भी विजयमाला के मणके राजयोग नहीं सीख रहे हैं। कौन सीखते हैं? रुद्रमाला के, रुद्र के डायरेक्ट बच्चे हैं, वो ही राजयोग सीखने वाले हैं। पवित्रता बड़ी चीज़ है लेकिन प्योरिटी से भी बड़ी चीज़ याद है या प्योरिटी ही बड़ी चीज़ है? याद सर्वोपरि चीज़ है। ज्ञान, येाग, पवित्रता की धारणा और सेवा इसमं, अव्वल नम्बर वन सब्जेक्ट कौन सा है? याद। धारणा में पास, सेवा में पास, सब सब्जेक्टों में पास और योग में फेल, तो क्या कहा जावेगा? फेल ही कहा जावेगा। और सब सब्जेक्ट्स में फेल हो जाए... बूढ़ी-बूढ़ी मातायें याद में पास हो जावेंगी। बन्धन में रहने वाली मातायें याद में पास हो जावेंगी और सेवा में भी फेल, धारणा में भी फेल और ज्ञान में भी फेल, लेकिन याद में पास हो जावेंगी तो क्या कही जावेंगी पास या फेल?
(किसी ने कहा- पास।) पास कही जावेंगी। याद में जो पास हो जावेंगे अन्त में उनके अन्दर ज्ञान स्वत: ही समा जावेगा। ये परिवर्तन कि वण्डरफुल बात देखने में आवेगी। बूढ़ी-बूढ़ी मातायें भी दुनिया वालों को जो ज्ञान सुनायेंगी वो अच्छे-अच्छे ज्ञानी नहीं सुना पायेंगे।

समय- 17.17-18.36
बाबा:- एक प्रश्न आया है - एडवांस ज्ञान में चलने वाले भी शरीर छोड़ रहे हैं उनके 84 जन्म पूरे हुये या नहीं हुये?

उत्तर:- क्या कहें? अभी वो विकार से जन्म नहीं लेंगे? एडवांस ज्ञान में चलने वाले जो शरीर छोड़ रहे हैं उनका विकारी जन्म होगा या नही होगा? 84वें जन्म का बाप मिलेगा या नहीं मिलेगा? नहीं मिलेगा? मिलेगा। और जब 84वें जन्म का बाप मिलेगा, एक जन्म कम रह गया तो भक्ति पूरी हुर्इ या नही हुर्इ? क्या कहें? आखरी जन्म की भक्ति पूरी हुर्इ या अधूरी हुर्इ? क्या कहें? (किसी ने कहा- पूरी हुई।) पूरी हो गर्इ 83 जन्मो में ही? (किसी ने कहा- अधूरी।) अधूरी रह गर्इ भक्ति। अधूरी भक्ति रह गर्इ है इसलिये तो शरीर छोड़ना पड़ा। नहीं तो शरीर क्यों छोड़ना पड़े?

समय- 18.41-20.44
जिज्ञासु:- बाबा, कृष्ण अष्टमी बेहद में क्या अर्थ है?

बाबा:- राम की नवमी मनार्इ जाती है और कृष्ण की अष्टमी मनार्इ जाती है। इसका मतलब ये हुआ कि सतयुग में आठ नारायण होते हैं। आठ नारायणों का सतयुग में जन्म होने के बाद आठवें नारायण का जो वर्सा लेता है वो नौवें नंबर का राम नवमी की यादगार मनार्इ जाती है। उसकी शूटिंग कहाँ होती है? संगमयुग में। संगमयुग में राम वाली आत्मा जब एडवांस में आती है उस समय, 8 नारायण ज्ञान में पहले से ही तैयार होते हैं। उनमें से सात कृष्ण जैसे बच्चे कंस के कुसावे में आ जाते हैं। कंस उनको कोस लेता है। विकारों की दुनियां में ढकेल देता है कंस। और कृष्ण बच जाता है। कृष्ण वाली आत्मा जो है वो राम की बुद्धि रुपी टोकरी में सुरक्षित हो जाती है। इसलिये आठ नारायणों का जन्म होने के बाद, आठ नारायणों की प्रत्यक्षता होने के बाद, जिनका कनेक्शन अष्टदेवों से है नौवां नम्बर राम की प्रत्यक्षता होती है। तो राम नवमी मनाते हैं।

समय- 20.50-22.18
जिज्ञासु:- बाबा श्वासों-श्वास में याद और सेवा का मतलब क्या है?

बाबा :- जो भी श्वास आये, जो भी श्वास जाये उसमें देखना है हमने सेवा क्या की? याद रही कि नहीं रही? ऐसा हो सकता है या नहीं हो सकता है? श्वांस ली, श्वांस छोड़ी, हर श्वांस लेने में और छोड़ने में सेकेण्ड-सेकेण्ड बाप की याद रह सकती है या नहीं रह सकती है? रह सकती है। तो जहाँ याद होगी वहाँ सेवा होगी या नहीं होगी? (किसी ने कहा-ज़रूर होगी।) सेवा तो जरुर होगी। तो हर श्वास में याद भी समार्इ हुर्इ हो। सेवा भी समार्इ हुर्इ हो। डिससर्विस न समार्इ हुर्इ हो। कोर्इ वाचा ऐसी न निकले जो देहभान में निकल जाये और डिससर्विस हो जाये। अपनी आत्मा की डिससर्विस हो जाये, चाहे दूसरी आत्माओं की डिससर्विस हो जाये। उसे नहीं कहेंगे श्वासों-श्वास याद।

Disc.CD No. 611, dated 24.08. 2008, at T.P.G.
Part-2


Time: 10.47-16.48
Student: Today Baba said that Narayan becomes a deity first. Then while saying why does Lakshmi’s name come first?

Baba: Lakshmi has purity of 63 births. Whatever was predetermined is being enacted and nothing new is to be enacted now. Is the purity of 63 births a purity of the sanyasis or of the household life? The purity is a purity of the sanyasis, unless she gets the knowledge. And when she gets the knowledge then she understands the topic. But there is a rule that when the souls who have the sanskaars of purity of many births become helpful in the advance [party]... like the sanyasis; when the big sanyasis emerge then you children will become victorious. So, respect should be given to those from whom you have to receive attainments and they should be kept ahead. So, is it bad to keep the mothers ahead? It is good, isn’t it? But Radha’s name is taken first and the name of Krishna [is taken after her]. Are Radha and Krishna reformed human beings or God (Bhagwaan) and Goddess (Bhagwati)? They are reformed human beings. They don’t say, Ram Sita. They say, Sita Ram. Sita’s name comes first. Are these Sita Ram reformed human beings or are they God and Goddess? Although the world believes [them] to be God and Goddess, what is the reality? They are not God and Goddess. When the question of God and Goddess arises then Parvati’s name does not come first and Shankar’s name does not come later. What do they say? Shankar Parvati. God is to be always kept ahead. Goddess is to be always kept after [Him].

However much purity someone may have, does God come for the pure ones or for the impure ones? If God comes only for the pure souls, the sages and sanyasis should get a high postion. They should be included in the Rudramala (the rosary of Rudra) which is Shiva’s rosary. Is the Rudramala greater or is the Vijaymala (the rosary of victory) greater? It is not a big fortune to become a bead of the Vijayamala. They do not learn Raja Yoga. Even now the beads of the Vijaymala are not learning Raja Yoga. Who learn it? They are the beads of the Rudramala, the direct children of Rudra who learn Raja Yoga. Purity is a great thing, but is remembrance greater than purity or is only purity great? Remembrance is supreme. Among knowledge, remembrance (Yoga), assimilation of purity and service which is the number one subject? Remembrance. If someone passes in dhaaranaa, passes in service, if he passes in all the subjects but fails in remembrance, then what will he be called? He will be called just a failure. And if someone fails in all the [other] subjects; the aged mothers will pass in remembrance. The mothers in bondage will pass in remembrance. If they fail in service, dhaaranaa as well as knowledge, but pass in remembrance, then what will they be called? Passed or failed?
(Someone said: Passed.) They will be callled passed. Those who pass in remembrance, knowledge will automatically emerge in them in the end. This wonderful aspect of transformation will be visible. Good knowledgeable people will not be able to narrate the knowledge that the old mothers will narrate to the people of the world.

Time: 17.17-18.36
Baba: A question has been asked: Those who are following the advance knowledge are also leaving their body. So have they completed 84 births or not?

Answer: What will be said? Will they not be born through vices now? Will those who follow the advance knowledge and are leaving their body have birth through vices or not? Will they get a Father of the 84th birth or not? Will they not get [a Father]? They will. And when they get the Father of the 84th birth, they fell short of one birth; was their Bhakti over or not? What will be said? Was the Bhakti of their last birth over or was it incomplete? What will be said? (Someone said: It was over.) Was it over? In just 83 births? (Someone said: Incomplete.) The Bhakti remained incomplete. The Bhakti was incomplete that is why they had to leave the body; otherwise why will they have to leave the body?

Time: 18.41-20.44
Student: Baba, what is the unlimited meaning of Krishna ashtami?

Baba: Ram’s navami and Krishna’s ashtami is celebrated. It means that there are eight Narayans in the Golden Age. After the birth of eight Narayans in the Golden Age, the one who takes the inheritance of the eighth Narayan, Ramnavami is celebrated as a memorial of that ninth number [Narayan]. Where does its shooting take place? In the Confluence Age. When the soul of Ram comes in the advance [knowledge] in the Confluence Age, at that time the eight Narayans are already present in the [Yagya of] knowledge. Among them seven Krishna like children are killed by Kansa . Kansa kills them. He pushes them in the world of vices. And Krishna is saved. The soul of Krishna becomes safe in the basket like intellect of Ram. This is why after the birth of eight Narayans, after the revelation of eight Narayans, who are connected with the eight deities, the ninth one, Ram is revealed. So, Ram navami is celebrated.

Time: 20.50-22.18
Student: Baba what is meant by remembrance and service in every breath?

Baba: You should check every inhaled and exhaled breath what service you did. [You should check:] Did we remember [Baba] or not? Can it be possible or not? You inhaled, you exhaled; during every inhalation and exhalation can you remember the Father every second or not? You can. So, will service take place where there is remembrance or not? (Someone said: It will definitely take place.) Service will definitely take place. So, there should be remembrance as well as service in every breath. There should not be disservice. You should not speak any word which is spoken under the influence of body consciousness and causes disservice, either the disservice of your own soul or the other souls. That will not be called remembrance in every breath. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 21 Sep 2014

वार्तालाप नं 611, दिनांक 24.08.2008, टी.पी.जी.
भाग-3


समय- 22.20-27.46
जिज्ञासु:- बाबा, आदि में बाबा ने युगल में आकर के सुनने-सुनाने और समझने-समझाने का पार्ट बजाया। तो आदि सो अन्त होना चाहिए ना। तो अन्त में ये पार्ट कैसे होता है?

बाबा:- आदि कब और अन्त कब?
जिज्ञासु:- ये तो संगम का ही है ना।
बाबा:- संगम में 100 साल का संगम। और उसमें एक संगम है सामान्य और एक संगम है पुरुषोत्तम संगमयुग जहाँ से नम्बरवार पुरुषों में उत्तम बनने वाली आत्मायें प्रत्यक्ष होती हैं। पहले तो ये समझना पड़े कि आदि संगम कौन सा और अंत संगम कौन सा| अंत माने सम्पन्न। और आदि माने सम्पन्न तो था, क्योंकि तीनों मूर्तियाँ उस समय मौजूद हैं आदि में भी। तीन मूर्तियों में एक मूर्ति है छोटी माँ, एक मूर्ति है बड़ी माँ, और एक मूर्ति है बाप। मूर्ति माना ही साकार। आपके प्रश्न का मूल क्या है?
जिज्ञासु:- ... में भी सुनना और सुनाना, समझना-समझाना ये पार्ट हाता है क्या?
बाबा:- सुनना-सुनाना पहले होता है, समझना-समझाना मध्य में होता है। और सुनने के साथ समझना-समझाना...। समझने-समझाने में तो अन्तर होगा लेकिन सुनने के साथ समझना भी कभी-कभी हो जाता है। अगर बुद्धिमान है, एक कान से सुनता जावेगा और साथ-साथ समझता भी जावेगा। वो आदि में हुआ लेकिन प्रैक्टिकल करना नहीं हो पाता। सुनना और समझना साथ-साथ हो सकता है लेकिन प्रैक्टिकल करने में टार्इम लगेगा। वो अन्त की बात है। जहाँ सुनना भी हो जाता है सुनने-सुनाने वाली शख़्सियत भी मौजूद है जिसे कहते हैं बड़ी माँ। क्या? सुनती है और सुनाती भी है। सुनने में और सुनाने में उससे जास्ती तीखा कोर्इ होता ही नहीं। इसलिये कहा जगदम्बा। जगदम्बा सो लम्बी जीभ वाली क्या बनती है? महाकाली बनती है। उससे बड़ी वाचा की देवी और कोर्इ होती ही नहीं। वाचा चलाने में उससे कोर्इ नम्बर आगे नहीं ले सकता। परन्तु धारणा में पीछे रह जाती है।

तो धारणा में आगे जाने वाली भी कोर्इ देवी है। जिसको कहते हैं, अव्यक्त वाणी में जिसके लिये बोला है पहली अव्यक्त वाणी में, भारत माता शिव शक्ति अवतार अन्त का ये नारा है। तो अन्त में तीनों ही बातें सम्पन्न हो जाती हैं। सुनने-सुनाने वाली भी मिलती है, समझने-समझाने वाला भी मिल जाता है और प्रैक्टिकल जीवन में सबसे पहले धारणा करने वाली भी वहाँ मौजूद होती है। ये तीनों मूर्तियाँ आदि में भी मौजूद थीं। शिव अकेला नहीं आता है। तीनों मूर्तियों के साथ आता है। और अन्त में भी जब प्रत्यक्षता होगी तो सुनने-सुनाने वाली मूर्ति भी होगी, समझने-समझाने वाली जो निमित्त मूर्ति है वो भी होगी और प्रैक्टिकल करने-कराने वाली मूर्ति भी मौजूद होगी। उसे कहेंगे अन्त। नहीं तो कलयुग में और सतयुग के आदि में कोर्इ अन्तर ही न रहे।


समय- 27.57-31.18
बाबा:- प्रश्न आया है- एडवांस में जो अचानक शरीर छोड़ते हैं उनको तुरन्त शरीर मिलेगा या भटकना पड़ेगा?
उत्तार:- अचानक शरीर छोड़ने वालों में भी दो तरह के होते हैं। एक तो होते हैं जैसे युद्धभूमी में युद्ध करते-2, सत्य-असत्य के लिये युद्ध करते हैं न। तो युद्ध करते-2 जो शरीर छोड़ते हैं उन्होंने अपने लिये शरीर छोड़ा या अपने देश के लिये शरीर छोड़ा? परकल्याण के लिये शरीर छोड़ा या स्वार्थ के लिये शरीर छोड़ा?
(किसी ने कहा- परकल्याण के लिए शरीर छोड़ा।) तो उनको सूक्ष्म शरीर का बन्धन बंधना चाहिये या नहीं बंधना चाहिए? नहीं बंधता है। ऐसे ही यहां ज्ञान में जो स्वार्थ के लिये शरीर छोड़ते हैं, हठ में आ जाते हैं, अगर हमको ये चीज़ नहीं मिलेगी , हम प्राण छोड़ देंगे, हमको ये व्यक्ति नहीं मिलेगा तो हम प्राण छोड़ देगें। तो ऐसे हठ पूर्वक जो शरीर छोड़ते हैं स्वार्थ के लिये उनको सूक्ष्म शरीर के बन्धन में बंधना पड़ता है। और जो परमार्थ के लिये शरीर छोड़ते हैं अचानक उनको सूक्ष्म शरीर के बन्धन में नहीं बंधना पड़ता है।

और जो सूक्ष्म शरीर के बन्धन में बधंते हैं उनको पुरुषार्थ करने का वो समय, जिसमें उन्होंने सूक्ष्म शरीर से कार्य किया है उसमें न पाप बनता है और न पुण्य बनता है। पुरुषार्थ करने का समय नहीं बनता। लेकिन आत्मा जो है वो अनुभवी तो बनती है। क्या? वो अनुभव के संस्कार ले जा करके दुबारा जन्म लेती है। और जन्म ले करके लास्ट से फास्ट पुरुषार्थ करती है। इसलिये एडवांस में आने वाले अगर यदा-कदा सूक्ष्म शरीर धारण भी करते हैं तो उनको उतना घाटा नहीं है, जितना बेसिक में चलने वाले शरीर छोड़ते हैं अचानक उनको घाटा होता है। उनका तो एक या आधा जन्म ही कम हो जावेगा। और इनको तो पूरे 84 जन्म मिलते हैं।


Disc.CD No. 611, dated 24.08. 2008, at T.P.G.
Part-3


Time: 22.20-27.46
Student: Baba, in the beginning Baba came in a couple and played the part of listening and narrating and understanding and explaining; so, whatever took place in the beginning should happen in the end, shouldn’t it? So, how does this part take place in the end?

Baba: When is the beginning and when is the end?
Student: It is about this Confluence [Age] itself, isn’t it?
Baba: There is hundred years Confluence Age. And in that, one Confluence (sangam) is ordinary and the other is Purushottam Sangamyug (Elevated Confluence Age), where the souls which become elevated among all the souls (purush) at different levels are revealed. First you will have to understand which the initial confluence is and which the last confluence is. Last means complete and initial means ... it was certainly complete because all the three personalities are present at that time, in the beginning as well. One personality among the three personalities is the junior mother; one personality is the senior mother and one personality is the Father. Personality (muurti) itself means corporeal. What is the root of your question?
Student: Does the part of listening and narrating, understanding and explaining take place ... as well?
Baba: Listening and narrating takes place first. Understanding and explaining takes place in the middle and as regards understanding and explaining along with listening... There will be a gap between understanding and explaining, but sometimes understanding takes place along with listening. If someone is intelligent, he will go on listening through one ear and simultaneously understand as well. That happened in the beginning, but doing it in practice does not happen. Listening and understanding can take place simultaneously, but it will take time to do it in practice. That is about the end. When listening also takes place... The personality that listens and narrates is present. She is called the senior mother (bari Maa). What? She listens as well as narrates.There is nobody sharper than her in listening and narrating. This is why she is called Jagdamba. What does Jagdamba with a long tongue become? She becomes Mahakali. There is no other devi of words greater than her. Nobody can achieve a higher number (rank) than her in speaking. But she lags behind in dhaaranaa.

So, there is also a devi who goes ahead in dhaaranaa. For her it has been said in the Avyakt Vani, the first Avyakt Vani that Mother India, the incarnation of Shiva shakti (consort of Shiva) is the slogan of the end. So, all the three tasks are completed in the end. There is the one who listens and narrates, the one who understands and explains and the one who does dhaaranaa in the life in practice first of all is also present there. All these three personalities were also present in the beginning. Shiva does not come alone. He comes with all the three personalities. And when the revelation takes place even in the end, then the personality that listens and narrates, the personality that is instrument for understanding and explaining as well as the personality which does [the work] in practice and enables others to do it in practice will also be present. That will be called the end. Otherwise there will not be any difference between the Iron Age and the beginning of the Golden Age.


Time: 27.57-31.18
Baba: A question has been asked: Will those who leave their body suddenly in the advance [party] get a body immediately or will they have to wander?
Answer: Even among those who leave their body suddenly there are two kinds [of people]. One kind of people is those like the people who fight in a battlefied; people fight a war for truth or untruth, don’t they? So, did those who leave their body while fighting a war leave their body for themselves or for the sake of their country? Did they leave their body for the benefit of others or for selfish reasons?
(Someone said: They left the body for the benefit of others.) So, should they be bound in the bondage of the subtle body or not? They are not bound. Similarly, here in the knowledge, those who leave their body for selfish reasons, those who become obstinate [and say:] If we do not get this particular thing, we will leave our body, if we do not get this particular person, we will die, so those who leave their body obstinately like this, for selfish motives have to be bound in the bondage of the subtle body. And those who leave their body for the benefit of others suddenly do not have to be bound in the bondage of the subtle body.

And as regards those who are bound in the bondage of the subtle body, they neither accrue sin nor merit in the time of making purushaarth, when they worked through the subtle body. Their time is not passed in making purushaarth. But the soul does become experienced. What? It is reborn with the sanskaars of experience. And after being born, it makes fast purushaarth despite coming in the last [period]. This is why, if those who follow the advance [knowledge] take on a subtle body by chance, they do not suffer as much loss as those who leave their body suddenly while following the basic [knowledge]. In their case (of those who leave their body following the basic knowledge) one or half birth will be totally reduced. And these ones (those who leave their body following the advance knowledge) have the complete 84 births.
... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 22 Sep 2014

वार्तालाप नं 611, दिनांक 24.08.2008, टी.पी.जी.
भाग-4


समय- 31.21-33.27
जिज्ञासु:- सूक्ष्म शरीर लेना भी हिसाब-किताब के अनुसार ही होता है ना बाबा?

बाबा:- पूर्व जन्मों में कोर्इ न कोर्इ हिसाब किताब बांधा है।
जिज्ञासु:- सूक्ष्म शरीर तो लिया है हिसाब-किताब के अनुसार ही तो फिर जो कर्म होता है उसके अनुसार...
बाबा:-जिसके शरीर में प्रवेश होके कर्म होता है।
जिज्ञासु:- उसका लेप-क्षेप तो उस आत्माश को नहीं लगता है...
बाबा:- जिसका अपना शरीर ही नहीं है उसको लेप-क्षेप नहीं लगेगा। लेप-क्षेप उसको लगता है जिसका अपना शरीर है। सूक्ष्म शरीर मिलता ही इसलिये है कि सूक्ष्म शरीर धारण करने वाली जो आत्मा है उसके पाप कर्मों का बोझा ज्यादा न चढ़ने पाए। जितने भी सूक्ष्म शरीर धारण करने वाली विधर्मी आत्मायें हैं वो सब 84 जन्म लेने वाली हैं या कम जन्म लेने वाली हैं? कम जन्म लेने वाली हैं। सूक्ष्म शरीर के बन्धन में आना ये कोर्इ अच्छी बात नहीं है। ब्रह्मा जैसी आत्मा को भी घाटा पड़ गया। क्या घाटा पड़ गया? जो प्राप्ति हुर्इ, भले सतयुग के महाराजा बन गए लेकिन संगमयुग में जो भगवान से डायरेक्ट प्राप्ति होनी चाहिए, भगवान से ज्ञान लेना चाहिए वो ज्ञान डायरेक्ट में नहीं ले सके। माना सूक्ष्म शरीर जो धारण करने वाली जो आत्मायें हैं वो अपना लक्ष्य पूरा नहीं धारण कर पातीं। कमी रह जाती है।

समय- 33.39-42.38
बाबा:- (प्रश्न पढ़ते हुए) राजा हरिश्चन्द्र को क्या बनना पड़ा? चाण्डाल बनना पड़ा। तो ये किस आत्मा का पार्ट है?
उत्तर:- (किसी ने कहा- रूद्रमाला का।) रुद्रमाला में तो ढ़ेर आत्मायें हैं। ये पार्ट किसका है? शास्त्रों में तो सतयुग के आदि में राजा हरिश्चन्द्र का राज्य दिखाया है। (किसी ने कहा- आदि में विश्वममहाराज था अंत में चाण्डातल बनेगा।) जो चाण्डाल का पार्ट है वो किसका है? पहले-पहले चाण्डाल कौन बनता है? जो पहला-2 ब्राह्मण सो पहला-2 देवता, जो पहला-2 देवता सो पहला -2 क्षत्रीय, जो पहला क्षत्रीय सो पहला वैश्य, जो पहला वैश्य सो पहला शूद्र और शूद्रों में भी आखरीन में सारे मुर्दों को मारने वाला कौन? आखरीन में सारी दुनिया मुर्दा होगी या नहीं होगी? (जिज्ञासु – ज़रूर होगी।) ऐसा कौन सा टाइम होता है जब सारी दुनिया मुर्दा होती है, सब कब्रदाखिल होते हैं? कब्रदाखिल का गायन कौन से धर्म में है? मुस्लिम धर्म में कब्रदाखिल का गायन है। उनके यहां चैादहवीं सदी जब पूरी होती है उसके बाद कोर्इ तारीख ही नहीं है। ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनियां में सारी दुनियां कब्र दाखिल कब होती है? सब मिट्टी में देहभान की मिट्टी में दब के मर जाते हैं। कोर्इ जिन्दा नहीं रहता। तब अल्लाह ताला आ करके कब्र में से एक-एक को जगाते हैं। वो कौन सा टाइम है? अरे! अज्ञान की नींद में से कब से जगना शुरु होता है? 76 से। उस समय दुनिया वालों की तो बात ही छोड़ दो। जो ज्ञान में चलने वाले ब्राह्मण हैं वो भी सब क्या हो जाते हैं? मुर्दा हो जाते हैं। सब देहभान की मिट्टी में दबे हुए होते हैं।

तो पहले-पहले कोर्इ मुर्दे में तो जान फूंकी होगी? कौनसे में जान फूंकी जाती है? राम वाली आत्मा। जो पूछा है कि सत्य हरिश्चन्द्र चाण्डाल बनता है और बाबा ने जवाब एक ही वाक्य में दे दिया, दुनिया की ऐसी कोर्इ बात नहीं जो तेरे ऊपर लागू न होती हो। अरे! दुनिया में ढ़ेरों ऐसे हैं जिनका चाण्डाल का पार्ट होता है। जन्म-जन्मान्तर के चाण्डाल बनते हैं (या) सिर्फ एक ही जन्म में चाण्डाल बनते हैं? (किसी ने कुछ कहा।) अच्छा! मुर्दों को जलाने वाले हर जन्म में नहीं होते? जन्म-जन्मान्तर चाण्डाल होते हैं। उन सब चाण्डालों का पहला बाप कोर्इ तो होता होगा? उनका भी कोर्इ बीज होगा कि नहीं होगा?
(किसीने कहा – होगा।) दुनियां के बड़े-बड़े राजाओं का कोर्इ बीज है। दुनियां के जितने भी ब्राह्मण हैं उनका भी कोर्इ बीज है। दुनियां के जितने बडे़ देवताये हैं उन 33 करोड़ देवताओं का भी कोर्इ एक बीज है। तो चाण्डालों का भी कोर्इ बीज होगा, बाप होगा या नहीं होगा? वो तो सारी दुनियां का बाप है। तो चाण्डालों का बाप नहीं बनना चाहिए? खराब बात हो जायेगी क्या? जैसे ब्रह्माकुमारियां कहती हैं कि राम सीता फेल हो गए। क्या? राम सीता फेल हो गए तो उनको दास दासी बनना पड़ेगा। ये दास-दासी बनना अच्छी बात हुर्इ या खराब बात हो गर्इ? (किसी ने कहा- अच्छीा बात है।) क्यों? दास-दासी बनना तो बहुत खराब बात है। अरे! दुनिया की सारी आत्मायें अपने बच्चों की दास-दासी बनती हैं। तो राम-सीता भी अगर सतयुग के आदि में जो प्रिंस-प्रिसेज पैदा होते हैं, उनके माँ-बाप में रुप में दास-दासी फर्स्ट क्लास बनते हैं। तो खराब बात हो गर्इ क्या? बहुत अच्छी बात हो गर्इ।

ड्रामा है, ड्रामा में कोर्इ गधे का पार्ट बजाता है गाय, बैल, भैंस की जूठी बची हुई घास खा लेता है, खाता है गधे का पार्ट बजाने वाला। कोर्इ महाराजा का पार्ट बजाता है, बजाता है ना। अगर महाराजा का पार्ट बजाने वाला बढ़िया पार्ट न बजावे और लोग तालियाँ बजा देवें और गधे का पार्ट बजाने वाला हूबहू आवाज़ वैसी ही करे और हूबहू गधे की तरह एक्ट करे, लोग वाह-वाही करे। तो अच्छा पार्ट हुआ (या) खराब पार्ट हुआ? गधे का पार्ट बजाने वाले को इनाम मिलेगा या महाराजा का पार्ट बजाने वाले को इनाम मिलेगा? गधे का पार्ट बजाने वाले को इनाम मिल जावेगा। ऐसे ही ये दुनिया एक रंग मंच है रंग मंच पर जिसको जो पार्ट मिला हुआ है वो अपना पार्ट बढ़िया करके बजावे। चाण्डाल का पार्ट हो तो भी, दास-दासी का पार्ट हो तो भी और महाराजा, महारानी का पार्ट हो तो भी अव्वल नम्बर वन पार्ट बजाकर दिखावे, तो कहेंगे हीरो पार्टधारी। और हीरो पार्टधारी हो और खुदा न खास्ता उसको कोर्इ नीचा पार्ट बजाना पड़े, पार्ट बजाने वाले ऐन मौके पर बीमार पड़ जाते हैं ना। पड़ते हैं कि नहीं? पड़ते हैं। तो गधे का पार्ट बजाने वाला बीमार पड़ गया और हीरो पार्टधारी मौजूद है, फ्री है, उसको वो पार्ट दे दिया जाय और वो कहे हम नहीं बजा पायेंगे तो हीरो पार्टधारी कहा जायेगा? नहीं कहा जावेगा।


Disc.CD No. 611, dated 24.08. 2008, at T.P.G.
Part-4


Time: 31.12-33.27
Student: Baba, someone gets a subtle body only because of his karmic accounts, doesn’t he?

Baba: He has created some karmic acount in the past births.
Student: He has taken a subtle body because of karmic accounts, then the actions performed according to it....
Baba: The actions are performed by entering some body.
Student: That soul is not affected [by the actions]...
Baba: The one who does not have a body of his own will not be affected [by the actions]. The one who has his own body is affected [by the actions]. Someone gets a subtle body only because the soul that takes on the subtle body should not accrue more burden of sins. Do all the vidharmi souls that take on a subtle body have 84 births or fewer births? They have fewer births. It is not good to be bound by a subtle body. Even a soul like Brahma suffered loss. What loss did he suffer? The attainment that he made; he may have become the Maharaja (emperor) of the Golden Age but [he could not obtain] the direct attainments from God that he should have obtained in the Confluence Age, he could not obtain the knowledge directly from God that he should have obtained. It means that the souls that take on a subtle body are unable to achieve their aim completely. There remains a shortcoming [in them].

Time: 33.29-42.38
Baba: (Baba reads a question.) What did King Harishchandra have to become? He had to become a caandaal . So, which soul plays this part?
Answer: (Someone said: [The soul] of the Rudramala.) There are numerous souls in the Rudramala. Who plays this part? The kingdom of King Harishchandra has been depicted in the beginning of the Golden Age in the scriptures. (Someone said: In the beginning he was the World Emperor and at the end he will become caandaal.) Who plays the part of caandaal? Who becomes the first caandaal? The first Brahmin becomes the first deity, and the one who is the first deity becomes the first Kshatriya (warrior), the first Kshatriya becomes the first Vaishya and the first Vaishya becomes the first Shudra ; and among the Shudras also who creamates all the dead bodies in the end? Ultimately, will [the people of] the entire world become corpses or not? (Student: They will definitely become.) At which time does the entire world become a corpse, [when] does everyone enter a grave? In which religion is it famous [that people] enter the grave? It is famous in the Muslim religion [that people] enter the grave. There is no date for them after the fourteenth century ends. When does the entire world enter the grave in the Confluence Age Brahmin world? Everyone dies by being buried under the soil of body consciousness. Nobody is left alive. Then Allah Tala (God) comes and wakes up everyone from the grave. Which time is it? Arey? When do souls start awakening from the sleep of ignorance? From 76. Leave the topics of the people of the world at that time. What do all the Brahmins following the path of knowledge become? They become corpses. Everyone is buried under the soil of body consciousness.
So, He would have breathed life into some corpse first of all? In which corpse is life breathed? The soul of Ram. It has been asked: Satya Harishchandra becomes a caandaal. And Baba gave the reply in only one sentence. There is nothing in this world that is not applicable to you. Arey, there are numerous people in the world who play the part of caandaal. Do they become caandaals for many births [or] do they become caandaal in only one birth? Acchaa! Are there not people who burn the dead bodies in every birth? There are caandaals in every birth. There must be the first Father of all those caandaals? Will there be a seed of even them or not? There is a seed of the big kings of the world.There is a seed of all the Brahmins of the world as well. There is a seed of all the great deities of the world, those 33 crore (330 million) deities as well. So, will there be a seed, a Father of the caandaals as well or not? He is the Father of the entire world. So, should he not become the Father of the caandaals? Will it be something bad? Just as the Brahmakumaris say that Ram and Sita failed... What? Ram and Sita failed. So, they will have to become servants and maids. Is it good to become servants and maids or is it bad?
(Someone said: It is a good thing.) Why? It is a very bad thing to become servants and maids! Arey! All the souls of the world become servants and maids for their children. So, if Ram and Sita also become the first class servants and maids in the form of parents for the prince and princess who are born in the beginning of the Golden Age, is it a bad thing? It is a very good thing.

There is a drama; someone plays the part of a donkey in a drama. The person playing the part of a donkey eats the grass left over by cows, bulls, buffaloes. Someone plays the part of an emperor; he plays, doesn’t he? If the person playing the part of an emperor does not play the part well and people [simply] clap. And if the person playing the part of a donkey produces exactly the same sound [a donkey produces] and acts exactly like a donkey and people praise him, then is it a good part or a bad part? Will the person playing the part of a donkey get the prize or will the person playing the part of the emperor get the prize? The person playing the part of a donkey will get the prize. Similarly, this world is a stage. Everyone should play the part assigned to him well. Even if it is the part of a caandaal, a servant or a maid, an emperor or an empress, he should give the best performance; then he will be called a hero actor. [Suppose] someone is a hero and if by chance he has to play a low part... [Some] actors fall ill at the last moment, don’t they? Do they [fall ill] or not? They do fall ill. So, if the person playing the part of a donkey falls ill and the hero actor is present, he is free, he is given that part [to play], and if he says that he will not be able to play that part, then will he be called a hero actor? He will not be called so.
... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 23 Sep 2014

वार्तालाप नं 611, दिनांक 09.08.2008, जयनगर
भाग-5


समय-00.14-03.49
जिज्ञासु:- बाबा, स्वर्ग का रचयिता आया लेकिन बच्चों को नर्क का अनुभव है तो क्याव उनका पुरूषार्थ वीक है?

बाबा:- इसलिये तो बाबा कहते हैं हैविनली गॉड फादर आया हुआ है तो हम नर्क में क्यों बैठे हैं? कारण कुछ होगा या नहीं होगा? (किसी ने कहा- ज्ञान की कमी है।) ज्ञान की कमी है? माना बाप को पहचाना नही हैं? (किसी ने कहा- कम्पलीट निश्चय नहीं है।) अगर कोर्इ ने नहीं पहचाना, बाप को अगर कोर्इ ने पहचाना ही नहीं, तो फिर स्वर्ग आयेगा ही नहीं। बाप तो कहते हैं नम्बरवार पुरुषार्थ करने वाले बच्चे हैं। नम्बरवार खुशी में रहने वाले बच्चे हैं। संगमयुग मौजों का युग है या नर्क के दुःखों में रहने का युग है? (किसी ने कहा- मौजों का युग।) तो मौज में कोर्इ है ही नहीं। माना बाप जो श्रीमत देते हैं उस श्रीमत पर पूरा-पूरा चलते नहीं हैं, कुछ न कुछ अवज्ञायें करते जरुर हैं इसलिये सुख का अनुभव नहीं कर पाते। सोचने की बात है। करोड़पति बाप का बच्चा हो फिर पैसे-2 के लिये मोहताज हो, तो लोग क्या समझेंगे? बाप के कन्ट्रोल से बाहर है। यही हालत है। बाप आया हुआ है, स्वर्ग का रचयिता है, बच्चे नर्क में हैं, दुखों का अनुभव कर रहे हैं। कारण क्या है? अभी बाप के बच्चे ब्राह्मण बने ही नहीं हैं। इसलिये बोला अन्त में सबको अनुभव होगा। क्याप? अतीन्द्रिय सुख गोप-गोपियों से पूछो। अभी तो निश्चय-अनिश्चय के चक्र में डोला खाते रहते हैं। जैसे बोला कि ज्ञान नहीं है, पूरी बाप की पहचान नहीं है कि बाप है क्या, तो अवज्ञायें करते रहते हैं।

समय-04.02-06.08
जिज्ञासु:- बाबा, आत्मा शरीर छोड़ने के बाद कुछ देख सकती है और कुछ सोच सकती है क्या?

बाबा:- शरीर छोड़ने के बाद कोर्इ शरीर में प्रवेश करके देख भी सकती है, सोच भी सकती है।
जिज्ञासु:- सूक्ष्म शरीर के द्वारा देख सकती है, कुछ सोच सकती है क्या?
बाबा:- सूक्ष्म शरीर भी तो प्रवेश करता है।
जिज्ञासु:- बिना प्रवेश करके?
बाबा:- बिना प्रवेश किये सिर्फ अपने घोड़े को पहचान लेती है। जैसे शिवबाबा आता है तो दुनियां को कैसे देखता है? प्रवेश करता है तो देखता है।
दूसरा जिज्ञासु:- बाबा, लेकिन और आत्मायें जब मनुष्य शरीर छोड़ते हैं तो उनको सूक्ष्म शरीर तो है न बाबा?
बाबा:- सूक्ष्म शरीर होता है।
दूसरा जिज्ञासु:- सूक्ष्म शरीर से दूसरों की बातें नहीं सुन सकते हैं बाबा?
बाबा:- सूक्ष्म शरीर से दूसरों की बातें नहीं सुन सकते? फिर प्रवेश करने की क्या दरकार?
दूसरा जिज्ञासु:- बातें भी नहीं कर सकते?
बाबा:- अरे! :D
जिज्ञासु:- सूक्ष्म शरीर होते हैं ना ।
बाबा:- हाँ, सूक्ष्म शरीर है, लेकिन कोर्इ-कोर्इ को अनुभव होता है कि ये बोल रहा है। आवाज सुनार्इ पड़ती है। वो भय का भूत होता है। अगर सुनार्इ पड़े तो सबको सुनार्इ पड़े। कोर्इ को सुनार्इ पड़ती है कोर्इ को नहीं सुनार्इ पड़ती है।

समय-06.15-08.45
जिज्ञासु ने कुछ पूछा।

बाबा:- 64 जोगनी प्रसिद्ध है।
जिज्ञासु:-63
बाबा:-ये तो सुना नहीं। 64 जोगनियाँ प्रसिद्ध हैं।
जिज्ञासु:-उसमें तीन को अलग करके बहुत मान्याता देते हैं।
बाबा:-तीन को बहुत मान्यता देते हैं? तीन तो जोगनियाँ हैं ही खास। रुद्रमाला जो पहचानने वाले हैं वही जोगी विशेष होते हैं या और दूसरे होते हैं? और रुद्रमाला में तीन देवियाँ ही तो मुख्य हैं। सरस्वती, लक्ष्मी, और जगदम्बा।

समय-08.49-12.26
जिज्ञासु:-बाबा, लौकिक मंन्दिरो में मूर्तियों को पंचामृत से अभिषेक करते हैं। पंचामृत आत्माओं का निशानी होते हैं या... इसका बेहद का अर्थ क्या है?

बाबा:-पाँच अमृत हैं। अमृत किसे कहा जाता है? अमृत तो ज्ञान ही है। जो आत्मा मुर्दे से सालिम बन जाती है। पत्थर बुद्धि से पारस बुद्धि बन जाती है। तो पाँच अमृत हैं। एक तो गौ का घृत। घृत कहा जाता है याद को। जितनी याद करेंगे बुद्धि शुद्ध बनती जायेगी। दूसरा दूध को। ये ज्ञान दुग्धन है, गाय का दूध श्रेष्ठ माना जाता है। बाबा भी कहते हैं कन्याओं- माताओं के मुख से ज्ञान अच्छा होता है सुनना। वो चाहे गंगा हो और चाहे वैष्णवी देवी हो। फिर मिष्ठान्न को कहते हैं मीठा। बाबा भी कहते हैं ऐसा पुरुषार्थ करो जो खूब मीठे बनो, नाम मात्र को भी कडु़आपन न रहे। अगर भरपूर मीठे बन गए तो जैसे नारायण बहुत मीठे हैं वैसे ही नारायण को सब प्यार करते हैं। नारायण के सबसे संस्कार मिल जाते हैं। और कोर्इ ऐसा नहीं जिसके साथ पूरे संस्कार सबसे मिल जाते हों । नारायण को सब पंसद करते हैं। तो किसलिये करते हैं? बहुत मीठा है। ब्रह्मा बाबा को सब पसंद क्यों करते थे सामने आके? बहुत मीठा था।

तो मिठास भी चाहिए, दूध भी चाहिए, घृत भी चाहिए और शहद भी डालते हैं। क्या? शहद कहाँ से आता है? जो मधुमक्खियाँ होती हैं उनमें प्योरिटी की पावर बहुत होती है। इतनी प्योरिटी की पावर होती है कि संगठित हो करके छोटे से घर में कितनी ढ़ेर की ढ़ेर इकट्ठी हो जाती हैं। यूनिटी की पावर है। उस यूनिटी की पावर से जो चीज तैयार करती हैं वो शहद है। साधारण मिठास से भी बहुत ऊँची किस्म की चीज़ है। तो ये पाँच चीज़ें हैं, जो डाली जाती हैं, इकट्ठी कर देते हैं तो कहते हैं... पंचगव्य जैसे होता है वैसे ही पंचामृत कहा जाता है।


समय-12.34-15.46
जिज्ञासु:- बाबा, अभी तक पिछले एक जन्म का भी याद नहीं आ रहा है। 84 जन्म कब याद आएगा?

बाबा:- आपको याद नहीं आ रहा है या राम, कृष्ण आत्माओं को भी नहीं याद आ रहा है। क्यों? राम, कृष्ण की आत्माओं को, जगदम्बा को, लक्ष्मी को उनको याद आ रहा है कि नहीं याद रहा होगा? उनको याद आ रहा होगा। तो उनका नम्बर लगे पहले 84 का चक्र समझने का। फिर हमारा भी लगेगा कि नहीं लगेगा? हमारा भी लगेगा। या हम आगे? (जिज्ञासु – नहीं।) तो जब हम आगे नहीं हैं। पुरुषार्थ में हम पीछे हैं तो नम्बर भी हमारा पीछे लगेगा।
जिज्ञासु:-कौन सा आधार पर ये 84 का चक्र याद आयेगा बाबा?
बाबा:-ज्ञान के आधार पर ही याद आयेगा। ज्ञान के ऐसे-ऐसे प्वाइन्ट्स बुद्धि में बैठ जायेंगे जिन पर मंथन करने से अपने पार्ट खुलेंगे। अभी तो बोला स्वदर्शन चक्र घुमाना है। अगर 84 के चक्र को जानना है तो क्या करना है? स्वदर्शन चक्र घुमाना हैं। हमारी आत्मा को 84 के चक्र में देखना है कहाँ-कहॉँ, कैसे-कैसे पार्ट बजाया , इसी मंथन में लगे रहें। बजाय इस मंथन में लगे रहने के, एक जन्म के पेट पूर्ति के चक्कर में लगे रहते हैं। अरे मन शीशा कैसे बनेगा? मन निर्मल कैसे बने? जितना गुड़ डालेगें उतना मीठा बनेगा। क्या? इश्वरीय सेवा में जितना तन अर्पण करेंगे, धन अर्पण करेंगे, मन की ताकत अर्पण करेंगे, सगे-संम्बधियों की ताकत अर्पण करेंगे सब कुछ अर्पण करेंगे तो मन क्या बनेगा? मन दर्पण बनेगा। जो अर्पणमय, सो दर्पणमय। मन पावरफुल बनाना है तो क्या करना है? सब कुछ तेरा। अपनी चिन्ता नहीं। तो मन जरुर पावरफुल बन जावेगा। मन को ही आत्मा कहा जाता है। मन, बुद्धि ही तो आत्मा है।

समय-15.52-16.29
जिज्ञासु:- बाबा, बाप को पहचानने का संस्कार सबमें कैसे बनाना है?

बाबा:- बनी बनार्इ बन रही, अब कछु बननी नाय। 63 जन्म में जितना भगवान की तरफ दूसरों के चित्त को मोड़ने का प्रयास किया है और अपने चित्त हो जितना भगवान की तरफ मोड़ने का प्रयास किया है वो ही संस्कार यहां भी उदित होते रहते हैं।

Disc.CD No.611, dated 09.08.2008, at Jaynagar
Part-5


Time: 00.14-03.49
Student: Baba, the creator of heaven came, but children experience hell. Is their purushaarth weak?

Baba: That is why Baba says that if the heavenly God the Father has come, why are we sitting in hell? Will there be any reason or not? (Someone said: There is lack of knowledge.) There is lack of knowledge? It means they have not recognized the Father? (Someone said: They don’t have complete faith.) If no one has recognized, if no one has recognized the Father at all, then heaven will not come at all. The Father says that there are children who make numberwise (more or less) purushaarth. There are children who remain in joy number wise. Is the Confluence Age an age of joy or an age to live in the sorrow of hell? (Someone said: Age of joy.) But nobody is in joy at all. It means that they do not follow the Shrimat given by the Father completely. They definitely violate some [Shrimat]. This is why they are unable to experience happiness. It is something to think about. If someone is a millionaire’s child and he is needful for every single paisa , then what will people think? He is out of his Father’s control. It is the same situation [here]. The Father has come. He is the Creator of heaven. Children are in hell. They are experiencing sorrow. What is the reason? Now they have not at all become the children of the Father, the Brahmins. This is why it has been said that everyone will experience in the end: Ask the gop-gopis about the supersensuous joy. Now they keep swinging in the cycle of faith and doubt. For example, it was said that if there is lack of knowledge, if there isn’t the complete recognition of the Father ‘who the Father is’, then they keep disobeying [the Father].

Time: 04.02-06.08
Student: Baba, can a soul see and think anything after leaving its body?

Baba: It can see as well as think by entering some body after leaving its own body.
Student: Can it see and think through the subtle body?
Baba: The subtle body also enters [someone].
Student: [Can it do this] without entering [someone]?
Baba: Without entering it just recognizes its horse (the body which it has to enter). For example, when ShivBaba comes, how does He see the world? He sees when He enters [someone].
Another student: Baba, but when a human soul leaves its body it has a subtle body, doesn’t it?
Baba: It has a subtle body.
The other student: Baba, Can’t it listen to the words of others through the subtle body?
Baba: It can’t listen to others’words through the subtle body? Then where is the need to enter [someone]?
The other student: Can’t it even speak?
Baba: Arey!
Student: It has a subtle body, doesn’t it?
Baba: Yes, it has a subtle body, but some people experience that someone is speaking. They hear sounds. That is a ghost of fear. If it is audible, it should be audible to everyone. It is audible to someone and not audible to someone else.

Time: 06.15-08.45
Student asked something.

Baba: 64 Joginis are famous.
Student: 63.
Baba: I have not heard about this. 64 Joginis are famous.
Student: Three [Joginis] are separated from the rest and given a lot of respect.
Baba: Three [Joginis] are given a lot of respect? Three Joginis are anyway special. Do those who recognize the Rudramala are especially Jogis or anyone else? And only the three devis are important in the Rudramala. Saraswati, Lakshmi and Jagdamba.

Time: 08.49-12.26
Student: Baba, in the lokik [world] Pancaamrit is poured on idols in temples. Does the Pancaamrit represent souls or ... what does it mean in the unlimited?

Baba: There are five (paanc) kinds of nectar (Amrit). What is meant by Amrit? The knowledge itself is Amrit (nectar) [through which] a soul transforms from a corpse into the one [with a] mature [intellect]. It changes from the one with a stone like intellect (pattharbuddhi) into the one with a Paaras like intellect (Paarasbuddhi). So, there are five nectars. One is the ghee (ghrit) prepared from cow [milk]. Ghee means remembrance. The more you remember [the Father], the more the intellect will go on becoming pure. Second is milk. This is the milk of knowledge. Cow milk is considered to be superior. Baba also says that it is good to listen to knowledge from the mouth of virgins and mothers, then whether it is Ganga or Vaishnavi Devi. Then the sweetmeat is said to be sweet. Baba also says, ‘Make such purushaarth that you become very sweet; there should not be bitterness even for name sake’. If you become completely sweet, then just as Narayan is very sweet... so everyone loves Narayan, Narayan’s sanskaars match with the sanskaars of everyone. There is nobody else whose sanskaars match completely with everyone. Everyone likes Narayan. So, why do they like him? He is very sweet. Why did everyone like Brahma Baba when they came in front of him? He was very sweet.

So, sweetness is required, milk is required, oil is required and honey is also added [to Pancaamrit]. What? Where does honey come from? Honey bees have a lot of the power of purity. They have such power of purity that so many of them gather collectively in a small house. It is the power of unity. The thing that they prepare with that power of unity is honey. It is much higher than ordinary sweetner. So, these are the five things that are added, mixed. So, just as there is pancgavya (five liquids), similarly [this is] called Pancaamrit.


Time: 12.34-15.46
Student: Baba, we are still unable to recollect even one of our past births. When we recollect our 84 births?

Baba: Are you unable to recollect them or are the souls of Ram and Krishna unable to recollect them, too?  Why? Are the souls of Ram and Krishna, Jagdamba, Lakshmi recollecting them or not? They must be recollecting them. So, first it is their number to understand the cycle of 84 [births]. After that will it be our number or not? We will also understand. Or will we be ahead? (Student: No.) When we are not ahead, when we are lagging behind in purushaarth, then our number will also be behind.
Student: Baba, what is the basis for recollecting the cycle of 84 [births]?
Baba: You will recollect it only on the basis of knowledge. Such points of knowledge will sit in the intellect that churning on those points will reveal our parts. It was said just now that you have to rotate the swadarshan cakra (discus of self-realization). If you want to know the cycle of 84 [births], then what should you do? You have to rotate the swadarshan chakra. You have to see your soul in the cycle of 84 [births] that where and what kind of parts it played. You should remain busy in this very churning. Instead of remaining busy in this churning, you remain busy in filling the stomach for one birth. Arey, how will the mind become a mirror? How will the mind become pure? The more jaggery you add, the sweeter it will become. What? The more you sacrifice your body, wealth, the power of mind, the power of the relatives and everything in God’s service, then what will the mind become? The mind will become a mirror. The one who is dedicated (arpanmay) is like a mirror (darpanmay). What should you do if you have to make your mind powerful? [You should think:] Everything is yours. If there is no worry about the self, the mind will definitely become powerful. The mind itself is called the soul. The mind and intellect itself is the soul.

Time: 15.52-16.29
Student: Baba, how can we bring the sanskaars of recognizing the Father in everyone?

Baba: Whatever was pre-determined is being enacted; nothing new is to be enacted now. The more you have made efforts to turn others’ mindtowards God in the 63 births and the more efforts you have made to turn your mindtowards God, the same sanskaars keep emerging here. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 24 Sep 2014

वार्तालाप नं 611, दिनांक 09.08.2008, जयनगर
भाग-6


समय- 16.37-20.17
जिज्ञासु:- बाबा, शकुन्तiला का क्ले रिफे‍केशन एक कैसेट में दिया है। शकुनि माने ज्ञान-योग कें पंख से उड़ने वाली।

बाबा:- चिड़िया। हाँ।
जिज्ञासु:- उनके अन्डर में रहने वाली, छत्र छाया में रहने वाली... शकुंतला का क्लेरिफिकेशन।
बाबा:- शकुनि माने पक्षी।
जिज्ञासु:- माना अष्टादेवों के अन्डर में रहने वाली?
बाबाः शकुनि माने पक्षी। पक्षी माने जो ऊँची उड़ान भरते हैं, ज्ञान-योग के पंखों से उड़ते हैं। ज्ञान योग के पंखों से जो उड़ते हैं उनके नीचे रहने वाली।
जिज्ञासु:- किसको लागू होता है बाबा?
बाबा:- अरे! शकुंतला की संतान कौन था? (किसी ने कहा- भरत।) भरत चक्रवर्ती राजा था न। उसके पिता का नाम क्या था? (किसी ने कहा- दुष्यंन्त।) दुष्यंत कौन है? शिव। तो शिवबाबा का प्रैक्टिकल रुप क्या है? अरे! शंकर। जो शंकर है वही शिवबाबा का प्रैक्टिकल रुप है। तो सबसे जास्ती ज्ञान योग के पंखों से उड़ने वाला कौन है? राम वाली आत्मा। उसके अन्डर में सबसे ज्यादा काम करने वाला कौन है? राम वाली आत्मा के श्रीमत पर सबसे जास्ती कौन चलता है? सबसे ज्यादा फालो कौन करने वाला है? छोटी मम्मी। तो शंकुतला हो गर्इ।
जिज्ञासु:- भरत माना?
बाबा:- भरत माना भरण पोषण करने वाला। सारे विश्व का भरण पोषण करता है। शिवबाबा कौन सी आत्मा को कहेंगे? शिव को कहेंगें या शंकर को कहेंगें? शिव को कहेंगें। तो शिव के अन्डर में चलने वाला राम वाली आत्मा है या लक्ष्मी वाली आत्मा है? (कोर्इ ने कहा - राम वाली आत्मा ।) राम वाली आत्मा शिव के अन्डर में पूरा चलती है? विष पीने वाले को पूरा पवित्र कहेंगें? पूरा अंडर में चलने वाला कहेगें? (किसी ने कहा- वैष्णवी देवी।) हाँ, वैष्णवी देवी। मुख्य ज्ञान का जो आर्डर, मुख्य आज्ञा है वो कौन सी है? पवित्र बनो, योगी बनो। योगी तो बना लेकिन पवित्र तो हुआ नहीं। पवित्र होने के लिये फिर किसका आसरा लेना पड़ता है? लक्ष्मी का आसरा लेना पड़ता है। तो ज्ञान योग के पंखो से उड़ने वाला हुआ शिवबाबा और उसके अण्डर में रहने वाली हुर्इ लक्ष्मी। और उसका बच्चा कौन हुआ? (किसी ने कहा- भरत।) भरत कौन हुआ भरण पोषण करने वाला विश्व का? ‘विश्व भरण पोषण कर जोर्इ’। (किसी ने कहा- राम वाली आत्माम।) हाँ, नारायण।

समय- 20.37-23.50
जिज्ञासु:- बाबा, मन, बुद्धि, संस्कार। संस्कार का क्याष अर्थ है? पूर्व जन्म का संस्कार, भविष्य का संस्कार...

बाबा:-पूर्व जन्म का संस्कार भविष्य का संस्कार? पूर्व जन्म का संस्कार तो... भविष्य का संस्कार तब बनेगा जब हम वर्तमान जन्म में कुछ कर्मों में एड करेंगे। तो भविष्य का बन जावेगा। पूर्व जन्म के संस्कारों के अनुसार हमें वर्तमान जन्म मिला। अच्छे संस्कार हैं तो अच्छा जन्म मिला। बुरे संस्कार हैं तो खराब जन्म मिलता है। और फिर इस जन्म में हम अच्छे कर्म करें तो आगे का जन्म अच्छा हो जायेगा, अच्छे संस्कार बन जावेंगे। जैसे अभी ब्राह्मण बन रहे हैं, ब्रह्मा के द्वारा जो श्रीमत मिल रही है उस श्रीमत को अगर हम फालो करते हैं तो हमारे अच्छे संस्कार पड़ेंगे। और जान करके भी, बूझ करके भी, समझ करके भी और फालो नहीं करते हैं तो हठयोगी, संन्यासी, ढीठ हुये या सहज राजयोगी हुए? हठयोगी हुए। हठयोगी, संन्यासी तो फिर स्वर्ग पाय नहीं सकते। दुखी होंगे। दुख के संस्कार हम ग्रहण करेंगे। दुखी दुनिया में जाकर जन्म लेंगे।

मन सोचता है, बुद्धि फैसला करती है। और फिर हम जो कर्म करते हैं उसका मन, बुद्धि के उपर असर पड़ जाता है। हमारी आत्मा खुद ही रियलाइज करने लग पड़ती है कि हम इस योग्य हैं या नहीं येाग्य हैं। बुरे कर्म करने से मन, मन रुपी दर्पण कैसा हो जाता है? मैला हो जाता है। उसमें खाद चढ़ जाती है। ज्यों-ज्यों अच्छे कर्म करते जाते हैं त्यों-त्यों दर्पण साफ होता रहता है। तो मन, बुद्धि के उपर जो असर पड़ता है अच्छे, बुरे कर्मों का वो ही संस्कार कहा जाता है। कोर्इ ज्ञान लेने के बाद भी संस्कारों में कोर्इ परिवर्तन नहीं हो रहा है। और ही ज्यादा बिगड़ैल बनते जा रहे हैं। कोर्इ का ज्ञान लेने के बाद तुरन्त परिवर्तन दिखार्इ देता है।


समय-23.53-26.58
जिज्ञासु:- बाबा, इस्लाम धर्म का बीज, उसको एक कैसेट में भरत बताया है । भरण पोषण करने वाला इस्लाम धर्म का बीज है करके बोला है।

बाबा:- वो भरत नाम पड़ गया है संगमयुगी एक्ट के अनुसार। शिवबाबा जब आता है, जिस मुकर्रर रथ में आता है, वो विश्व पिता है या नहीं? उस विश्व पिता का जो भरण पोषण करता है फाउण्डेशन के पीरियड में वो ही भरत बन जाता है। इसलिये उसका नाम पड़ गया भरत। सीढ़ी के चित्र में भी भारत को भीख देते हुए कौन दिखाया गया? कोर्इ विदेशी दिखाया गया न। तो विदेशियों में पहला-2 विदेशी कौन? इस्लाम धर्म। इसलिये विश्व भरण पोषण..., वैसे भी देखा जाय हिस्ट्री में तो दुनिया के उपर सबसे जास्ती राज्य कौन से धर्म ने किया? इस्लाम धर्म वालों ने किया। वो भरत का संस्कार उसकी सारी जनरेशन में समाया हुआ है। सारे विश्व के भरण पोषण करने वाले इस्लाम धर्म वाले बन गये। क्रिश्चियन्स का राज्य तो अभी 100-200 वर्ष के अन्दर दुनिया मंद फैला है। पहले तो सारी दुनिया में किनका राज्य था? इस्लामियों का ही राज्य था।
जिज्ञासु:-इस्लाहम और मुस्लिम के बीच में बहुत टकराव रहता है ना।
बाबा:- वो तो दुनिया में हर धर्म के दो छेड़े हो जाते हैं। क्या? कोर्इ भी धर्म है, किसी को भी उठा लो, देवी देवता सनातन धर्म को उठा लो –दो छेड़े हो गए सूर्यवंश और चन्द्रवंश। जब नर्इ दुनिया शुरु हुर्इ तो चन्द्रवंश था क्या? नहीं सुर्यवंश ही था। फिर दो छेड़े हो गए की नहीं? इस्लाम वंश के भी दो छेड़े हो गए इसी तरह। इस्लामी और मुसलमान। मुसलमान धर्म के भी दो छेड़े हो गए सिया और सुन्नी। बौद्ध धर्म के भी दो छेड़े हो गए हीनयान और महायान। तो ऐसे ही ये तो द्वैतवाद होता ही चला जाता है दुनिया में। एक से दो हो जाते हैं। एक रहता है तो सतोप्रधान। क्या? कोर्इ भी धर्म हो जब तक उसमें एकता है तब तक सतोप्रधान और जैसे ही द्वैत शुरु होता है वैसे ही तमोप्रधान होना शुरु हो जाता है।

Disc.CD No.611, dated 09.08.2008, at Jaynagar
Part-6


Time: 16.37-20.17
Student: Baba, the clarification of Shakuntala is given in a cassette. Shakuni means the one who flies with the wings of knowledge and Yoga.

Baba: Bird. Yes.
Student: The one who stays under its control, protection… the clarification of Shakuntala.
Baba: Shakuni means a bird.
Student: Does it mean she is the one who remains under [the control] of the eight deities?
Baba: Shakuni means a bird. Birds mean those who fly high, those who fly with the wings of knowledge and Yoga. [She is] the one who lives under [the control of] those who fly with the wings of knowledge and Yoga.
Student: Baba, whom is it applicable to?
Baba: Arey! Who was Shakuntala’s child? (Someone said: Bharat.) Bharat was an emperor, wasn’t he? What was the name of his Father? (Someone said: Dushyant.) Who is Dushyant? Shiva. So, what is the practical form of ShivBaba? Arey! Shankar. The one who is Shankar, he himself is the practical form of ShivBaba. So, who flies the most with the wings of knowledge and Yoga? The soul of Ram. Which soul works the most under him? Who follows the Shrimat of the soul of Ram the most? Who follows him the most? The junior mother. So, she happens to be Shakuntala.
Student: What is meant by Bharat?
Baba: Bharat means the one who maintains and sustains (bharan poshan karne vaalaa). He sustains the entire world. Which soul will be called ShivBaba? Is it Shiva or Shankar? Shiva. So, is it the soul of Ram or the soul of Lakshmi who works under Shiva? (Someone said: The soul of Ram.) Does the soul of Ram work under Shiva completely? Will the one who drinks poison be called completely pure? Will he be said to work under [Shiva] completely? (Someone said: Vaishnavi devi.) Yes, Vaishnavi devi. What is the main order, main direction of knowledge? Become pure, become a yogi. He did become a yogi, but he did not become pure. Whose support does he have to take in order to become pure? He has to take the support of Lakshmi. So, ShivBaba is the one who flies with the wings of knowledge and Yoga. And the one who remains under him is Lakshmi. And who is her child? (Someone said: Bharat.) Who is Bharat, the one who sustains the world? ‘Vishwa bharan poshan kar joi ’. (Someone said: The soul of Ram.) Yes, Narayan.

Time: 20.37-23.50
Student: Baba, mind, intellect and sanskaar. What does sanskaars mean? The sanskars of the previous birth, the sanskaars of the future [births]...

Baba: Sanskaars of the previous birth? Sanskaars of future? The sanskaars of the past birth… The sanskaars of the future will be created only when we add something in our actions in the present [birth]. Then it will become [a sanskaar] for the future. We have received the present birth as per the sanskaars of the previous births. If there were good sanskaars, we have a good birth. If the sanskaars are bad, then we have a bad birth. And then if we perform good actions in this birth, our future birth will become good, the sanskaars will become good. For example, we are becoming Brahmins now; if we follow the Shrimat that we are receiving through Brahma, we will assimilate good sanskars. And if someone does not follow [Shrimat] deliberatlely, despite understanding, then are they obstinate hathyogis, sanyasis or easy Rajyogis? They are hathyogis. Hathyogis, sanyasis cannot achieve heaven. They will become sorrowful. They will assimilate the sanskaars of sorrow. They will be born in the sorrowful world.

The mind thinks and the intellect decides. And then whatever actions we perform leave an influence on the mind and intellect. Our soul itself starts realizing whether we are worthy or unworthy for it. How does the mirror like mind become when we perform bad actions? It becomes dirty. It is covered with dirt. As we go on performing good actions, the mirror goes on becoming clear. So, the influence that is cast over the mind and intellect by the good or bad actions is called sanskaar. Some are unable to change their sanskaars despite obtaining knowledge. They are becoming spoilt even more. In case of some, the transformation is visible as soon as they obtain knowledge.


Time: 23.53-26.58
Student: Baba, in a cassette the seed of Islam was said to be Bharat. It was said, the seed of Islam is the one who maintains and sustains.

Baba: That name Bharat (brother of Ram) is kept as per the act performed in the Confluence Age. When ShivBaba comes, the permanent Chariot in which He comes; is he the Father of the world or not? The one who maintains and sustains the World Father, during the period of foundation, he himself becomes Bharat. This is why he was named Bharat. In the picture of the Ladder also who has been shown to be giving alms to Bhaarat (soul representing India)? A foreigner has been shown, hasn’t he? So, who is the first foreigner among the foreigners? Islam. This is why he maintains and sustains the world. Even, if you look at the history, which religion ruled over the world the most? The people of Islam [ruled]. That sanskaar of Bharat is present in his entire generation. The people of Islam became the sustainers of the entire world. The rule of the Christians has spread in the world within 100-200 years now. Initially who ruled over the entire world? It was a rule of the people of Islam themselves.
Student: A big conflict goes on between Islam and Muslims, doesn’t it?
Baba: Every religion of the world is divided into two parts. What? Be it any religion. Take any religion [for example]. Take the Ancient Deity Religion [for example] there are two branches Suryavansh and Chandravansh . Was the Chandravansh present when the new world commenced? No. There was only Suryavansh. So, did two parts emerge or not? Similarly, division took place in Islam dynasty as well. The people of Islam and Muslims. Muslim religion was also divided into two parts: Sia and Sunni. Buddhism was also divided into two parts Hiinyaan and Mahaayaan. This dualism continues in the world. One gives rise to two. When it (religion) is one, it is satopradhaan (pure). What? Be it any religion. As long as there is unity in it, it is pure and as soon as duality starts, it starts becoming tamopradhaan. (Concluded).

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 01 Oct 2014

वार्तालाप नं 614, दिनांक 13.08.2008, तिरूपति
भाग-1


समय:00.01-01.16
जिज्ञासु:- बाबा पतित पावन राम-सीता।

बाबा:- राम-सीता नहीं कहते, पतित पावन सीता-राम।
जिज्ञासु:- गंगा भी पतित-पावनी ?
बाबा:- गंगा पतित-पावनी जो कहते हैं वो भगत लोग कहते हैं या बाबा ने बताया?
जिज्ञासु:- शंकर के सिर के ऊपर एक कन्या है।
बाबा:- है। वो पतित पावनी तब तक है जब तक ज्ञान सागर बाप से सीधा कनेक्शन है। अगर कनेक्शन नहीं है, बाप की सेवा में लगी हुर्इ नहीं है, दुनियांदारी की सेवा में लगी हुर्इ है तो नदी नहीं, वो नाला हो जाती है। भक्तिमार्ग में गाते भी हैं राम तेरी गंगा मैली। जो बच्चे बहुत सेवा करते हैं बाप प्यार में आकर उन बच्चों को सर पर चढ़ाय लेते हैं। गंगा ने भी कभी बहुत सेवा की है।
जिज्ञासु:- बाप का टाईटिल भी लिया।
बाबा:- हाँ जी।

समय: 01.23-03.00
जिज्ञासु:- अभी-अभी बाबा ने बताया मुरली में, कुत्ते की पूँछ को बारह साल बांध के फिर छोड़ दिया तो वो उसी...

बाबा:- टेढ़ा ही हो कर निकलता है...
जिज्ञासु:- टेढ़ा ही निकलता है। क्या वो लार्इफ के बारे में बताया बाबा?
बाबा:- प्रैक्टााइस्ड हो जाता है।
जिज्ञासु:- कुत्ता का लाईफस्पैन है बाहर साल। तो उसका वास्ते में बाबा बताया या दूसरा कारण है?
बाबा:- हाँ। वो तो दुनियावी एक मिसाल दिया। बेहद में भी कोर्इ ब्राह्मणों, पाण्डवों के साथ कोई कुत्ते जैसी आत्मायें हैं। जब स्वर्गारोहण किया जाता है तो सबसे पहले कौन मरता है? (कोर्इ ने कहा – कुत्ता।) कुत्ता। बाद में दूसरे-2 पाण्डव हैं, वो भी मरते हैं, वो भी जाते हैं। कौन बचता है? धर्मराज बचता है। धर्मराज कोर्इ अकेला थोड़े ही है, उसके जैसी ढ़ेर सारी आत्मायें हैं जो स्वर्गारोहण में रहती हैं। बाकी का अपना-2 अस्तित्व समाप्त हो जाता है पहले से ही।

समय: 03.10-4.00
जिज्ञासु:- बाबा, सभी धर्मों में से नि‍कालकर 108 की माला बनती है ना। ऐसे ही दूसरे-2 धर्मों में भी माला घुमाते हैं। वो माला भी यही माला है या अलग-2 धर्मों से 108 मणके हैं?

बाबा:- दूसरे धर्म वालों ने फॉलो किसको किया है? दूसरे धर्म वालों ने जो फॉलो किया है वो किसको फॉलो किया है? बाप को ही फॉलो किया है। बाप के बच्चों को ही फॉलो किया और कब फॉलो किया है? शूटिंग पीरियड में ही। अभी शूटिंग पीरियड में लास्ट में दूसरे-2 धर्मों की आत्मायें भी निकलेंगी। धर्म पितायें भी निकलेंगे। वो सब किसको फॉलो करेंगी? ब्राह्मणों को फॉलो करेंगी।

समय: 4.05-05.22
जिज्ञासु:- ग्राम देवी होती है उन्हें सुहागन मातायें नहीं पूजतीं। हर एक साल में मेला करते हैं । वो देवी की घर में पूजा करते हैं। वो विधवा माता करती हैं क्यों बाबा?

बाबा:- विधवा मातायें? क्या करती हैं? पूजा करती हैं न। पूजा जिसकी की जाती है वो भी विधवा है क्या? वो तो विधवा नहीं है। विधवा होना अच्छा या सधवा होना अच्छा? (किसी ने कहा- सधवा होना ।) सधवा की पूजा की जाती है या विधवा की पूजा की जाती है? सधवा की पूजा की जाती है। जिसकी पूजा की जाती है वो है पूज्य। और जो पूजा करने वाला है वो है पुजारी। ऊँच बनना चाहिए। पूजा करने वाला भक्त थोड़े ही बनना है।

समय: 05.23-05.57
जिज्ञासु:- ये माता पूछती है बाबा एक-एक गांव में एक-एक देवी पूजी जाती है। वो सब देवियाँ किस वर्ण में आती हैं?

बाबा:- अरे, 33 करोड़ देवतायें हैं। कम हैं क्या? तो गांव भी ढ़ेर की ढ़ेर हैं। अभी वो देवी देवतायें गांव-2 में पुरुषार्थ कर रहे हैं कि नहीं? (जिज्ञासु- कर रहे हैं।) जब पुरुषार्थ करके सम्पन्न बनते हैं तो उनकी पूजा होती है। अभी का ही बात है।

समय: 06.02-08.11
जिज्ञासु:- नव ग्रह पूजे जाते हैं न बाबा?

बाबा:- नौ ग्रह? हाँ।
जिज्ञासु:- वो अष्ट देव है ना?
बाबा:- अष्ट देव तो हैं ही, वो तो मुखिया हैं। लेकिन वो अकेले हैं या उनका पूरा घर गृहस्थ है?
जिज्ञासु:- घर गृहस्थ है।
बाबा:- हाँ। जैसे राम वाली आत्मा है वो अकेली है या पूरा घर गृहस्थ है? शंकर को पूरा गृहस्थ दिखाते हैं या अकेला है?
जिज्ञासु:- शंकर को गृहस्थ दिखाते हैं।
बाबा:- गृहस्थ के रूप में दिखाया है ना। तो ऐसे ही जितने भी 108 हैं, वो सब गृहस्थी हैं। वो मिलकरके नव ग्रह बताये जाते हैं। उनका अपना-2 गृह घर गृहस्थ परिवार है। गृह में स्थित रहने वाले हैं। इसलिये नवग्रह कहा जाता है। उन ग्रहों में सबसे ऊँची स्टेज किसकी है? अष्टदेवों की।
जिज्ञासु:- उसमें राहू, केतु, शनि?
बाबा:- वो भी हैं।
जिज्ञासु:- अच्छा काम नहीं करते ना बाबा।
बाबा:- अच्छा काम करते हैं तो फिर उनको अच्छे रुप में गायन होना चाहिए।
जिज्ञासु:- पूजा होती है ना उनकी भी?
बाबा:- पूजा होती है तो थोड़ा उन्होंने पूजनीय काम किया होगा। उतना पूजनीय काम नहीं किया होगा जो सदैव उनकी महिमा हो। जिन्होंने सदैव पूजनीय काम किया उनकी सदाकाल की महिमा होती है। और ग्रहों की उतनी महिमा नहीं होती है। इसलिए उनको छोटा दिखाया जाता है। बृहस्तपति ने बड़ा काम किया है। तो उनको बड़ा दिखाते हैं।

Disc.CD No. 614, dated 13.08. 2008, at Tirupati
Part-1


Time: 00.01-01.16
Student: Baba, Pati-paavan Ram-Sita.

Baba: It is not said Ram-Sita, it is said Patit-paavan Sita-Ram.
Student: Is Ganga Patit-paavani too?
Baba: Do the devotees call Ganga Patit-paavani or did Baba say this?
Student: There is a virgin on the head of Shankar.
Baba: There is. She is Patit-paavani as long as she has a direct connection with the Ocean of Knowledge, the Father. If there is no connection, if she is not engaged in the Father’s service, if she is engaged in the worldly service, then she is not a river, she becomes a drain. It is also sung in the path of Bhakti: Ram teri Ganga maili (Ram! Your Ganges has become dirty). The Father makes those children, who serve a lot sit on his head out of love. Ganga has also served a lot at some time.
Student: She took the title of the Father as well.
Baba: Yes.

Time: 01.23-03.00
Student: Just now Baba said in the Murli that if a dog’s tail is tied even for twelve years and then it is let free…

Baba: It remains just bent ...
Student: It remains just bent. Is it about [the dog’s] life, Baba?
Baba: It becomes practiced.
Student: A dog’s lifespan twelve years; so, did Baba say about it or is there any other reason?
Baba: Yes. This is a worldly example. In the unlimited too, there are some dogs like souls along with the Brahmins, the Pandavas. When they proceed towards heaven, who dies first of all? (Someone said: The dog.) The dog. Later on, the other Pandavas also die and leave. Who survives? Dharmaraj survives. It is not Dharmaraj alone; there are many souls like him who go to heaven. The existence of the others ends well before.

Time: 03.10-4.00
Student: Baba, the rosary of the 108 is formed with [the souls of] all the religions, isn’t it? The [people of] other religions also rotate the rosary. So, is that rosary this very rosary or is it formed by the 108 souls of different religions?

Baba: Whom did the people of other religions follow? Whom did the people of other religions follow? They have followed the Father alone. They have followed just the Father’s children; and when did they follow? In the shooting period itself. Now the souls of other religions will also emerge in the last [period] in the shooting period. The religious fathers will also emerge. Whom will all of them follow? They will follow the Brahmins.

Time: 4.05-05.22
Student: There is a gram devi (village deity) whom the married women don’t worship. A fair of [that devi] is organized every year. She is worshipped at home. The widows worship her; why is it so, Baba?

Baba: Widows? What do they do? They worship her, don’t they? Is the one who is worshipped also a widow? She is not a widow. Is it good to be a widow (vidhwaa) or a sadhwaa ? Is a sadhwaa worshipped or a vidhwaa worshipped? Sadhwaa is worshipped. The one who is worshipped is worshipworthy. And the one who worships is a worshipper. You should become high. You don’t have to become a devotee who worships.

Time: 05.23-05.57
Student: This mother asks, Baba a devi (female deity) is worshipped in every village. In which category are they included?

Baba: Arey! There are 33 crore (330 million) deities. Are there few? So, there are numerous villages as well. Now, are those deities making purushaarth in every village or not? (Student: They are.) When they become perfect after making purushaarth, then they are worshipped. It is about the present time itself.

Time: 06.02-08.11
Student: Baba, the nine planets are worshipped, aren’t they?

Baba: Nine planets. Yes.
Student: They are the eight deities, aren’t they?
Baba: They are the eight deities anyway; they are the chiefs. But are they alone or do they have a complete household?
Student: They have a household.
Baba: Yes. For example, there is the soul of Ram. Is he alone or does he have a complete household? Is Shankar shown to be a householder or single?
Student: He is shown as a householder.
Baba: He is shown in the form of a householder, isn’t he? So, similarly, all the 108 [souls] are householders; all of them together are said to be the nine planets. They have their own household, family. They are the ones who live in household. This is why they are called the nine planets (nav grah). Among those planets, who is in the highest stage? The eight deities.
Student: What about Rahu, Ketu, Shani?
Baba: They also exist.
Student: They don’t perform good tasks, do they?
Baba: If they perform good tasks, they should be praised in a good form.
Student: But they are also worshipped, aren’t they?
Baba: If they are worshipped, then they must have performed some worshipworthy task. They might not have performed such worshipworthy task that they are glorified always. Those who have always performed a worshipworthy task are always glorified. The other planets are not glorified so much. This is why they are shown to be small. Brihastpati (Jupiter) has performed a big task. So, he is shown to be big. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 02 Oct 2014

वार्तालाप नं 614, दिनांक 13.08.2008, तिरूपति
भाग-2


समय: 08.28-10.19
जिज्ञासु:- ये माता पूछती है बाबा, कालहस्ती में, एक ग्राम देवी को साल में एक ही बार पूजते हैं।

बाबा:- जिन्दगी में?
जिज्ञासु:- एक साल में एक बार।
बाबा:- एक साल में एक बार, वो तो अच्छी बात ...। बात संगमयुग की है ना। पूरी साल की आवृत्ति हो जाती है। क्याe? तब पूजा होती है। ऐसे ही यहाँ पूरा कल्प व्यतीत हो जाता है, तब पूजनीय देवी देवतायें बनते हैं। उसकी यादगार में वहाँ भी पूरी साल खत्म होती है, एक बार पूजा होती है। कोर्इ ने अन्त में ही पुरुषार्थ किया है, तो अन्त में एक बार ही पूजा होगी। और जिन्होंने आदि से लेकरके अन्त तक पुरुषार्थ अच्छा किया है, तो उनकी सदैव पूजा होती है। लक्ष्मी नारायण के मन्दिर में एक बार पूजा होती है कि होती ही रहती है? होती ही रहती है। ये पूजनीय बनने के लिए पुरुषार्थ करने वालों की बात है। जिन्होंने सदैव पूजनीय बनने का पुरुषार्थ किया है, उनकी सदा की पूजा होती है। देवियों की साल में दो बार भी पूजा होती है। देवी पूजन एक बार होता है या दो बार होता है साल में?
जिज्ञासु:- साल में एक बार होता है ।
बाबा:- दो बार भी होता है। (किसी ने कहा- कोर्इ-2 को होता है।) हाँ, राम जन्म होता है तो भी, नौ देवी पूजन चलता है।

समय: 10.27-12.56
जिज्ञासु:- बाबा, त्रिशूलम्बाी माना कौन बाबा?

बाबा:- तीन शूल की अम्बा, कौन-2 तीन शूल हैं? शूल माने बाण, कांटा। शूल माने कांटा। तीन शूल कौन-कौन हैं? ब्रह्मा, विष्णु और शंकर। ये कलियुग के अन्त में आकरके तीनों बड़े-2 कांटे बन जाते हैं। इन तीनों की अम्बा, ब्रह्मा, विष्णु, शंकर की अम्बा कोर्इ है भक्तिमार्ग में? अरे! भूल गए? ब्रह्मा, विष्णु, शंकर की भी अम्बा है कोई। (किसी ने कहा- जगदम्बार।) नहीं। जगदम्बा तो खुद ही उन तीन की लिस्ट में आ जाती है। अभी तीन देवतायें प्रत्यक्ष होने वाले हैं कि नहीं शरीर से? उनमें जगदम्बा होगी या नहीं होगी? नहीं होगी? होगी। तो वो तो खुद ही तीन देवताओं की लिस्ट में है। फिर उसकी भी अम्बा।

त्रिशूलम्बाी माने तीन शूल, ब्रह्मा, विष्णु, शंकर। ब्रह्मा के रूप में एक देवता, बड़ी अम्बा के रूप में एक देवता माने जगदम्बा। विष्णु के रूप में एक देवता माने वैष्णवी देवी। और शंकर के रूप में एक देवता, दुनिया का सारी दुनिया का विनाश करेगा, संघार करेगा तो कितना बड़ा कांटा है। सबको दुख होगा कि नहीं होगा?
(किसी ने कहा- होगा) तो तीन कांटों की अम्बा। भक्तिमार्ग में एक माता है जो तीन देवताओं की भी अम्बा कही जाती है। भूल गए? अनुसुइया। बच्चा बना दिया। तीनों देवताओं को क्या बना दिया? बच्चा बना दिया। तो तीनों की अम्बा हुई ना। उसका नाम रख दिया है... (किसी ने कहा- अनुसुइया।)

समय: 13.06-19.02
जिज्ञासु:- ये अनुसुइया कौन है बाबा?

बाबा:- अरे! सूर्यवंश का हेड कौन है? सूर्यवंश की मुखिया आत्मा कौन है? अरे! सूर्यवंश का मुखिया सूर्य। सूर्य पार्ट किसका है? ज्ञान सूर्य पार्ट साकार में किसका है? शंकर। शिवबाबा। एक तो वो हो गया। दूसरा है वैष्णवी। वो भी पार्ट है ना। न्यूट्रल रहने वाला। एडवांस पार्टी में अगर वो वैष्णवी देवी आ जाये तो सब चक्कर खत्म हो जायेगें कि नहीं? हो जायेंगे। लेकिन वो नहीं आ रही है। तो दुख बढ़ रहा है, घट रहा है? दुख बढ़ रहा है। वो भी शूल हो गर्इ। कांटा हो गर्इ। और जगदम्बा, ब्रह्मा, बड़ी अम्मा। वो इस समय एडवांस पार्टी की जो भी ब्राह्मणों की दुनियां है उसकी वृद्धि कर रही है, या उससे अलग हो चुकी? अलग हो गर्इ। महाकाली का रूप धारण कर लिया। तो एडवांस पार्टी वालों को अनिश्चय रुपी मृत्यु में ले जायेगी या निश्चय बुद्धि बनायेगी? अनिश्चय रुपी मृत्यु में ले जायेगी। तो शूल हुर्इ की नहीं हुर्इ? (किसी ने कहा- शूल हुई।) तीनों हैं।

जगदम्बा माने सारे जगत की अम्बा। माने सब धर्म वालों की अम्बा या एक धर्म वाले की अम्बा? सब धर्म वालों की अम्बा। और वैष्णवी? सूर्यवंशी है वो अभी? सूर्य को पहचानती है? पहचानती ही नहीं। राधा चन्द्रवंश की होगी या सूर्यवंशी की होगी? चन्द्रवंशी होगी। तो चन्द्रवंशियों की मुखिया, वो सूर्यवंशियों का मुखिया। तो तीनों वंशों के जो तीन मुखिया हैं उनको भी ज्ञान में खींच लेने वाली, सूर्यवंशी बनाने वाली कोर्इ होगी या नहीं होगी? या ब्रह्मा, विष्णु, शंकर, ये तीन जो शूल दिखाए जाते हैं त्रिशूल में, उनका सत्यानाश हो जायेगा? संसार में इतना भारतवर्ष का नाम है - विश्व विजय करके दिखलावे झण्डा उंचा रहे हमारा। तो तीन आत्माओं का झण्डा संसार में बुलंद होगा या गढ़ढे में जायेगा? बुलंद होगा। लेकिन कब बुलंद होगा? जब इन तीनों की पालना करने वाली, तीनों तो अभी नहीं हैं एडवांस पार्टी में। लेकिन तीनों की पालना करने वाली वो अनुसुइया अभी भी है ज्ञान में। वो पालना कर रही है। क्या? इसलिये शंकर जी की एक नगरी प्रसिद्ध है। कौन सी नगरी? काशी नगरी। जब असुर सारी पृथ्वी को पाताल में ले के जा रहा था, तो काशी नगरी छिटक गर्इ। पाताल में नहीं गर्इ। सारी सृष्टि पाताल में चली गर्इ।

अभी ऐसा होने वाला है। ढ़ेर सारे अनिश्चय बुद्धि बनेंगे। एक काशी नगरी बचेगी। इसलिये भक्तिमार्ग में एक कहावत बना दी है, काशी में जो मरेंगे वो स्वर्ग में जावेंगे। और बाहर जो मरेंगे वो नर्क में जावेंगे। जवाब मिला ? क्या ?

जिज्ञासु:-मिला बाबा।
बाबा:-क्या जवाब मिला?
जिज्ञासु:-अनुसुइया का पार्ट।
बाबा:-हाँ, अनुसुइया का पार्ट क्या है? तीनों देवताओं की पालना देने वाली। (किसी ने कहा- वैष्णनवी देवी।) वैष्णावी देवी?
जिज्ञासु:-वैष्णइवी देवी है बाबा?
बाबा:-वो तो खुद ही एक देवता है तीनों देवताओं में से।

समय: 19.09-20.46
जिज्ञासु:- बाबा एक माता पूछती है कालाहस्ती मन्दिर में सर्प दोष का पूजा करते हैं ज्यादा लोग, साँप का पूजा । किसलिये?

बाबा:- हाँ, श्री काल, श्रेष्ठ् काल, महाकाल कौन है? काल-काल महाकाल, कालों का काल, ये किसका पार्ट है? पार्ट है न। तो उसके गले में, उसके सर के ऊपर, उसकी भुजाओं में, उसकी कमर में कौन लपेटे हुए हैं? (किसी ने कहा- सर्प।) पूजा उनकी करनी पड़ेगी कि नहीं? वो फन उठाये बैठे हुए हैं। पास जाओगे तो बुरी दृष्टि ले के गए, तो फन मारेंगे कि नहीं मारेंगे? तो पूजा करो पहले उनकी। अरे! उन सर्पों की पूजा करने वाली बात समझ में नहीं आ रही है क्या जो कानाफूसी कर रहे हो? कमर में काम विकार है, शंकर के। तो जो नजदीक जायेंगे उनको वो फूं करके मारेगा कि नहीं मारेगा? (जिज्ञासु – मारेगा।) पूजा करोगे कि नहीं करोगे? सर झुकाओगे या सामना करोगे? सर झुकाना पड़े या सामना करना पड़े? (किसी ने कहा- सामना करना पड़े।) सामना करना पड़े? सर झुकाना पड़ेगा। माना पूजा करना पड़गी।

Disc.CD No. 614, dated 13.08. 2008, at Tirupati
Part-2


Time: 08.28-10.19
Student: Baba, this mother is asking that in Kalahasti a gram devi is worshipped only once a year.

Baba: Once in a life time?
Student: Once in a year.
Baba: Once in a year. That is good... The topic pertains to the Confluence Age, doesn’t it? When an entire year is completed then worship takes place. Similarly, here, when the entire Kalpa (cycle) is completed, then you become worshipworthy deities. In its memorial, they worship once when the entire year is over. Some have made purushaarth only in the end; so, the worship will take place only once in the end. And those who have made good purushaarth from the beginning to the end are worshipped always. Does worship take place in the temple of Lakshmi-Narayan only once or does it take place always? It takes place always. It is about those who make purushaarth to become worshipworthy. Those who have always made purushaarth to become worshipworthy are worshipped always. Devis are also worshipped twice a year. Does the worship of devis take place once or twice a year?
Student: It takes place once a year.
Baba: It takes place twice a year as well. (Student: It happens in case of some devis.) Yes, even when Ram’s birthday is celebrated, the nine devis are worshipped.

Time: 10.27-12.56
Student: Baba, who is Trishulamba?

Baba: Mother of three shuul; which are the three shuul? Shuul means arrow, thorn. Shuul means thorn. Which are the three shuul? Brahma, Vishnu and Shankar. In the end of the Iron Age they become big thorns. Is there any mother of all these three [deities]: Brahma, Vishnu and Shankar in the path of Bhakti? Arey! Have you forgotten? There is a mother of Brahma, Vishnu and Shankar too. (Someone said: Jagadamba.) No. Jagadamba herself is in that list of three [deities]. Are three deities going to be revealed now through the body or not? Will there be Jagdamba among them or not? Will she not be? She will be. So, she herself is in the list of three deities; so, she (Trishulamba) is the mother of her as well.

Trishulamba means… three shuul [i.e.] Brahma, Vishnu, Shankar. One deity in the form of Brahma; one deity in the form of the senior mother, i.e. Jagdamba. One deity in the form of Vishnu, i.e. Vaishnavi Devi. And one deity in the form of Shankar. He will destroy the entire world; so, he is such a big thorn. Will everyone feel sorrowful or not?
(Student: They will.) So, she is the mother of three thorns. There is a mother in the path of Bhakti who is said to be the mother of even the three deities. Did you forget? Anusuiya. She made them her children. What did she make all the three deities? She made them children. So, she is the mother of all the three, isn’t she? She has been named... (Someone said: Anusuiya.)

Time: 13.06-19.02
Student: Baba, who is this Anusuiya?

Baba: Arey! Who is the head of the Sun Dynasty? Who is the chief soul of the Sun Dynasty? Arey! The head of the Sun Dynasty is the Sun. Who plays the part of the Sun? Who plays the part of the Sun of Knowledge in a corporeal form? Shankar. ShivBaba. One is he. The second one is Vaishnavi. That is also a part, isn’t it? The one who remains neutral. If that Vaishnavi Devi comes in the Advance Party, then will all the problems end or not? They will. But she is not coming. So, is the sorrow increasing or decreasing? Sorrow is increasing. She is also a shuul, a thorn. And Jagdamba, Brahma, the senior mother. Is she bringing increase in the [population of the] Brahmin world of the Advance Party at present or has she separated from it? She has separated. She took on the form of Mahakali. So, will she take the people of the Advance Party towards the death in the form of doubts or will she enable them to become the one with a faithful intellect? She will take them towards the death in the form of doubts. So, is she a thorn or not? All the three are [thorns].

Jagdamba means the mother of the entire world. Does it mean the mother of people belonging to all the religions or just one religion? The mother of people belonging to all the religions. And Vaishnavi? Is she a Suryavanshi now? Does she recognize the Sun? She does not recognize at all. Will Radha be from the Moon dynasty or from the Sun dynasty? She will be from the Moon dynasty. So, she is the head of the Chandravanshis and he is the head of the Suryavanshis. So, will there be someone who brings to knowledge even the three heads of the three dynasties and makes them Suryavanshi or not? Or will these three shuul, Brahma, Vishnu and Shankar, which are shown in the trident (trishuul), be destroyed? India is so famous in the world; vishwa vijay karke dikhlaave jhandaa uunchaa rahe hamaaraa (May our flag, which conquers the world, be held high.) So, will the flag of the three souls rise high in the world or will it fall into a pit? It will rise high. But when will it rise high? It is when the one who sustains all the three [deities]; all the three [deities] are not present in the Advance Party at present, but the Anusuiya who sustains all the three is still in knowledge. She is doing the sustenance. What? This is why one of the towns of Shankarji is famous. Which town? Kashi nagari. When a demon was taking the entire Earth to the nether world (paataal), the town of Kashi separated. It did not go to paataal. The entire world went to paataal.
Baba: Now such a thing is going to happen. Numerous people will become the ones with a doubting intellect. One Kashi nagari will survive. This is why a saying has been made in the path of Bhakti: those who die in Kashi will go to heaven. And those who die outside [Kashi] will go to hell. Did you get the reply? What?

Student: We got it, Baba.
Baba: What reply did you get?
Student: Anusuiya’s part.
Baba: Yes, what part does Anusuiya play? She sustains all the three deities. (Someone said: Vaishnavi devi.) Vaishnavi devi?
Student: Baba, Is she Vaishnavi devi?
Baba: She herself is a deity among the three deities.

Time: 19.09-20.46
Student: Baba, a mother is asking: Many people perform sarpa dosh puujaa (worship done to remove the ill-effect of snake-bite) in Kalahasti temple. A worship of snakes. Why?

Baba: Yes, Shri Kaal; who is the elevated Kaal, Mahaakaal? Kaal-Kaal-Mahaakaal, Kaalon ka kaal ; who plays this part? It is a part, isn’t it? Who are entwined around his neck, on his head, his arms, and his waist? (Someone said: Snakes.) Will they have to be worshipped or not? They are sitting with their hoods up. If you go near them, if you go with an evil eye (evil intention), then will they hiss at you or not? So, first worship them. Arey! Are you not able to understand the topic of worshipping those snakes that you are whispering in each others’ ears? There is the vice of lust around the waist of Shankar. So, will it hiss at those who go near it or not? (Student: It will.) Will you worship it or not? Will you bow your head or will you face it? Will you have to bow you head or will you have to face it? (Someone said: We will have to face it.) Will you have to face it? You will have to bow your head. It means you will have to worship it. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 03 Oct 2014

वार्तालाप नं 614, दिनांक 13.08.2008, तिरूपति
भाग-3


समय: 20.52-27.17
जिज्ञासु:- बाबा, ये माता जी पूछती है त्रेतायुग में राम सीता जन्म लेते हैं न। किसके द्वारा जन्म लेंगी?
बाबा:- त्रेता युग में जन्म लेते हैं या इन सब आत्माओं का जन्म संगमयुग में होता है?
जिज्ञासु:- यहाँ ऐसा होता है बाबा। लक्ष्मी नारायण संगमयुग के, फर्स्ट राम सीता होते है न। वो किसके द्वारा जन्म लेगी? सतयुग में होने वाले से जन्म लेते हैं या साहूकार से जन्म लेते हैं? किसके द्वारा जन्म लेते हैं?
बाबा:- यंहा शूटिंग पीरीयड में राम सीता वाली आत्मायें जब बेसिक में आती हैं तो किससे जन्म लेती हैं? ब्रह्मा सरस्वती से। तो वही वहां भी ब्रह्मा... अभी सतयुग के आदि में ब्रह्मा सरस्वती वाली आत्मायें किससे जन्म लेती हैं? यज्ञ के आदि में कोर्इ राम सीता वाली आत्मायें थीं। उनसे जन्म लिया ब्रह्मा सरस्वती ने। तो उनके बच्चे हो गए न। तो ये शूटिंग शूट हो गर्इ। तो कहाँ बच्चे बनेंगे? सतयुग के आदि में ब्रह्मा सरस्वती बच्चे बनेंगे। ऐसे ही यहाँ शूटिंग हो जाती है। एडवांस पार्टी की जब शुरुआत होती है तो राम सीता वाली आत्मायें मम्मा-बाबा के शरीर छोड़ने के टार्इम पर ज्ञान में आती हैं कि नहीं आती हैं? मम्मा वाली आत्मायें, बाबा वाली आत्मायें भी होती हैं। और राम सीता वाली आत्मायें भी आ जाती हैं। तो उनका जन्म किससे होता है? वो ज्ञान में आना जो है उनका किसके निश्चय बुद्धि के आधार पर होता है? वो अपने ब्राह्मण परिवार में सबसे श्रेष्ठ किसको मानती हैं? ब्रह्मा सरस्वती को श्रेष्‍ठ मानती हैं। उन्हीं के आधार पर उनका जन्म होता है। ज्ञान में जन्म किससे होता है? अरे, मम्मा बाबा ने जब शरीर छोड़ा 65-68 में तो उसके बाद ब्राह्मणों की संगमयुगी दुनिया में कौन विशेष आत्मायें आ गर्इ? आदि वाली आत्मायें राम सीता दुबारा जन्म लेके आ जाती है ना। तो किसका बच्चा हुर्इ? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) ब्रह्माकुमारियों का बच्चा हुर्इ?
जिज्ञासु:- ब्रह्मा का ज्ञान लेती है ना, बाबा।
बाबा:- ज्ञान ब्रह्मा का लेती हैं। ब्रह्मा को मानती हैं ना कि ब्रह्माकुमारियों को मानती हैं?
जिज्ञासु:- ब्रह्मा कुमारियों को नहीं मानती हैं।
बाबा:- तो फिर माँ-बाप कौन हुये उनके?
जिज्ञासु:-ब्रह्मा सरस्वती।
बाबा:-ब्रह्मा सरस्वती माँ-बाप हुये, तो शूटिंग हो गर्इ। त्रेतायुग जब होगा तो वही ब्रह्मा सरस्वती फिर उनको जन्म देंगे। कभी वो माँ बाप, कभी वो बच्चे, कभी वो बच्चे, कभी वो माँ बाप, ये उल्टम पल्टा हर युग में चलता ही रहता है। द्वापरयुग शुरु होगा तो वहाँ तो बाप ही गुरु होता है। राजा विक्रमादित्य की आत्मा कौन सी आत्मा है? ब्रह्मा। किसका बच्चा बनेगा? जरूर प्रजापिता वाली आत्मा उसका गुरू बन करके बैठी होगी। जो उनको बतायेगी राजा विक्रमादित्य को कि ऐसे-ऐसे मन्दिर बनाओ। मन्दिर में इस-इस तरह से पूजा करो। तो गुरू बनके बैठी न। सतयुग, त्रेता में गुरू अलग से तो होता ही नहीं। कौन गुरू होते हैं वहाँ? माँ-बाप ही गुरू होते हैं। माना त्रेता के अन्त में जो सतयुग के आदि में राजा था, ब्रह्मा उर्फ कृष्ण वाली आत्मा, सतयुग का महाराजा, स्वर्णिम संगमयुग का महाराजा नहीं, सतयुग का महाराजा वो ही सतयुग के आदि जन्‍मों में नीचे उतरते, उतरते, उतरते, उतरते आखरी जन्म में प्रजा बन जाता है। कौन? ब्रह्मा बाबा वाली आत्मा। बड़ा साहूकार बनता है। और उस बड़े साहूकार के यहां राम वाली आत्मा जन्म लेती है। जब वो बड़ा साहूकार शरीर छोड़ेगा तो सारी साहूकारी किसके हाथ में आ जायेगी? राम वाली आत्मा के हाथ में साहूकारी आ जाती है। उस समय जो आखरी नारायण होता है लोन लेना पड़ता है उसको, किससे? उस समय का सबसे बड़ा साहूकार होता है राम वाली आत्मा। उससे लोन लेता जाता है। अपनी राजार्इ चलाता जाता है। लोन लेते-2 सारी राजार्इ एक टार्इम ऐसा आता है कि सारी राजार्इ डूब जाती है लोन में। राम वाली आत्मा क्या बन जाती है? (किसी ने कहा- साहूकार) साहूकार तो थी ही। राजा बन जाती है। त्रेता में वो राम राजा कहा जाता है और जो आखरी नारायण है वो सतयुग की राजार्इ खत्म। उसके बाद कोर्इ भी राजा नहीं बनता। तो वो सतयुग की राजार्इ गवांने वाला महाराजा है। जैसे आर्य समाजी जब अन्त में आते हैं, कलयुग के अन्त में, तो राजार्इ खत्म कर देते हैं, या राजार्इ चलती रहती है? राजार्इ खत्म कर देते हैं। उनका पार्ट ही है। आर्य समाजियों का। तो जरूर आर्य समाज धर्म में कनवर्ट होने वाली आत्मा है कोई जो नारायण बनती है आखरी जन्म में, सतयुग में। आठवाँ नारायण। वो सारी राजार्इ चट्ट करने के निमित्त बन जाती है। इसलिये गायन है राम राजा, राम प्रजा, राम साहूकार।

समय: 27.27-32.08
जिज्ञासु:- सुब्रह्मण्यम स्‍वामी और विनायक।
बाबा:- विनायक माने गणेश।
जिज्ञासु:- शंकर पार्वती के दो बच्चे हैं।
बाबा:- हाँ, जगतपिता के दो बच्चे।
जिज्ञासु:- तो परीक्षा लेने के बाद विनायक रहता है माता पिता के साथ। सुब्रह्मण्यम स्वामी अलग होकर वो पहाड़ पर रहता है। क्यों ऐसा जाता है वो?
बाबा:- वो ऊँची स्टेज में जायेगा तब तो स्वर्ग के देवतायें उसकी पूजा करेंगे। अगर वो नीची स्टेज में रहे तो स्वर्ग तो ऊपर है कि नीचे है? स्वर्ग में रहने वाले देवतायें भी ऊपर हैं, स्वर्ग भी ऊपर है। तो देवतायें जिसकी पूजा करते हैं पहले-2 वो और ऊपर होना चाहिए कि नीचे होना चाहिए? ऊपर जाता है पहाड़ पे। पहाड़ माने ऊँची स्टेज। इसलिये उनको पहाड़ पे दिखाया है। वो स्वर्ग के देवताओं का भी पूजनीय है। पहले-2 पूजा देवताओं में किसकी होती है? प्रथम पूजनीय कौन है? गणेश। ज्ञान का देवता है। ज्ञान से बनता है स्वर्ग और अज्ञान से बनता है नर्क। तो ज्ञान का देवता हो गया गणेश। वो सतयुग त्रेता का अधिनायक हो गया जैसे। और उसके मुकाबले एक दूसरा देवता और है। वो भी शंकर का बच्चा है। वो स्वर्ग का देवता तो नहीं है। क्या? क्या नाम है उसका? षण्मुख, छ: मुख वाला। हाँ। छ: मुख वाला क्यों कहा गया? उसका नाम है कार्तिकेय। क्या? कार्तिकेय नाम है तो कुछ काम करता होगा न। वो तिक-2 बहुत करता है। ज्ञान की बातों की तिक-2 बहुत है। क्या? क्या तिक-तिक है? कभी एक मुख से बोलता है, कभी दूसरे मुख से, कभी तीसरे मुख से, कभी चौथे मुख से, कभी पाँचवें, कभी छठे मुख से। वो छ: मुख कौन-कौन से हैं? कभी इस्लाम धर्म की बातें बोलता है, कभी बौद्धी धर्म की बात बोलता है, कभी क्रिश्चियन धर्म की बात बोलता है, कभी संन्यास धर्म की बात बोलता है, कभी मुस्लिम धर्म की बात बोलता है और कभी सिक्ख धर्म की बात बोलता है। माने एक जगह पक्का नहीं रहता। ये अभी पार्ट बजा रहा है। क्या? वो ज्ञान की तिक-तिक करने वाला, हर धर्म की ज्ञान की तिक-तिक करता है। वो अभी पार्ट बजा रहा है। एडवांस ज्ञान में भी शुरु में चलता है फिर बाद में और-2 धर्मों की तिक-2 करने लग पड़ता है। कभी मन्दिर में जाके झांझ बजायेगा, कभी गिरजाघर में जायेगा, गुरूद्वारे में जायेगा। हर जगह चक्कर काटता है। इसलिये द्वापर और कलियुग में जो अनेक प्रकार के धर्म हैं उनका मुखिया कार्तिकेय को दिखाया है।

Disc.CD No. 614, dated 13.08. 2008, at Tirupati
Part-3


Time: 20.52-27.17
Student: Baba, this mother is asking that Ram -Sita are born in the Silver Age, aren’t they? Through whom will they be born?
Baba: Are they born in the Silver Age or are all these souls born in the Confluence Age?
Student: Baba, it happens here like this. Lakshmi and Narayan of the Confluence Age become the first Ram and Sita, don’t they? Through whom will they be born? Are they born through someone in the Golden Age or through a prosperous person? Through whom are they born?
Baba: When the souls of Ram and Sita enter the basic [knowledge] here in the shooting period, through whom are they born? Through Brahma and Saraswati. Brahma will be there as well. Now in the beginning of the Golden Age, through whom are the souls of Brahma and Saraswati born? In the beginning of the Yagya there were some souls of Ram and Sita. Brahma and Saraswati were born from them. So, they are their children, aren’t they? So, this shooting took place. So, where will they become children? In the beginning of the Golden Age Brahma and Saraswati will become children. Similarly, the shooting takes place here. When the Advance Party starts, do the souls of Ram and Sita enter the path of knowledge when Mama and Baba leave their body or not? There are souls of Mammas as well as Babas. And the souls of Ram and Sita also come. Through whom are they born? Having a faithful intellect towards whom do they enter the path of knowledge? Whom do they consider the most elevated in their Brahmin family? They consider Brahma Saraswati to be elevated. They are born only from them. Through whom are they born in knowledge? Arey, when Mama-Baba left their body in 65-68, then which special souls entered the Confluence Age Brahmin world? The souls of the beginning [of the Yagya], i.e. Ram and Sita are reborn and enter [the path of knowledge], don’t they? So, whose children are they? (Student said something.) Are they the children of Brahmakumaris?
Student: Baba, they take the knowledge of Brahma, don’t they?
Baba: They take the knowledge of Brahma. Do they believe in Brahma or Brahmakumaris?
Student: They don’t believe in Brahmakumaris.
Baba: So, who are their parents?
Student: Brahma-Saraswati.
Baba: Brahma and Saraswati are their parents. So, the shooting took place. When the Silver Age begins then the same Brahma and Saraswati will give birth to them. Sometimes they (Brahma-Saraswati) are parents and they (Ram-Sita) are children; sometimes they (Ram-Sita) are children and they (Brahma-Saraswati) are parents; this continues in every age by turns. When the Copper Age begins then the Father himself is the guru there. Which soul is the soul of King Vikramaditya? Brahma. Whose child will he become? Definitely the soul of Prajapita might have become his guru. He will tell him, King Vikramadiya: Build a temple in this way. In the temple worship [God] this way. So, he became his guru, didn’t he? There is no separate guru at all in the Golden Age and the Silver Age. Who are the gurus there? The parents themselves are the gurus. It means that in the end of the Silver Age, the one who was a king in the beginning of the Golden Age, i.e. Brahma alias the soul of Krishna, the Mahaaraajaa (emperor) of the Golden Age, not the Mahaaraajaa of the Golden Confluence Age, but the Mahaaraajaa of the Golden Age, while experiencing downfall during the eight births of the Golden Age becomes a subject in the last birth. Who? The soul of Brahma Baba. He becomes a very prosperous person. And the soul of Ram is born in the house of that very prosperous person. When that prosperous person leaves his body, who will get all the wealth? The wealth comes in the hands of the soul of Ram. The last Narayan at that time has to take a loan; from whom? [From] the most prosperous person of that time, i.e.the soul of Ram. He keeps taking loan from him to run his kingdom. Taking the loan, a time comes when the entire kingship drowns in the loan. What does the soul of Ram become? (Someone said: A prosperous person.) He was already a prosperous person. He becomes a king. Ram is called a king in the Silver Age and the last Narayan loses the kingship of the Golden Age. After him nobody [from his generation] becomes a king. He is an emperor who loses the kingship of the Golden Age. For example, when the Arya Samajis come in the end, in the end of the Iron Age, then do they end the kingship or does kingship continue? They end the kingship itself. The very part of the Arya Samajis is like this. So, there is definitely a soul who converts to the Arya Samaj religion that becomes Narayan in the last birth in the Golden Age. The eighth Narayan. He becomes instrument to lose the entire kingship. This is why it is sung: Ram raajaa, Ram prajaa, Ram saahuukaar(Ram is the king, the subject as well as the prosperaous person).

Time: 27.27-32.08
Student: Subrahmanyam Swami and Vinaayak.
Baba: Vinayak means Ganeshji.
Student: These are the two children of Shankar and Parvati.
Baba: Yes, these are the two children of the World Father.
Student: So, after their (Subrahmanyam Swami and Vinayak’s) test Vinayak stays back with his parents. Subrahmanyam Swami (elder brother of Vinayak) goes to a mountain and resides there; why does he go away?
Baba: He will be worshipped by the deities of the heaven only when he achieves a high stage. If he remains in a low stage then... is the heaven above or below? The deities living in heaven are above and heaven is also above. So, should the one whom the deities worship first of all be at an upper level or a lower level? [This is why] he goes to the mountains. Mountain means a high stage. This is why he is shown on a mountain. He is worshipworthy for the deities of heaven as well. Among the deities who is worshipped first of all? Who is worshipped first of all? Ganesh. He is a deity of knowledge. Heaven is created through knowledge and hell is created through ignorance. So, the deity of knowledge is Ganesh. He is like a leader of the Golden and the Silver Ages. And when compared to him there is another deity; he is also a child of Shankar. He is not a deity of heaven. What? What is his name? Shanmukh, the one with six heads. Yes. Why was he said to have six heads? His name is Kartikey. What? When his name is Kartikey, he must have performed some task, mustn’t he? He does a lot of tik-tik (he speaks a lot). He talks a lot about the topics of knowledge. What? How does he talk a lot? Sometimes he speaks through one mouth, sometimes through another mouth, sometimes through the third mouth, sometimes through the fourth mouth, sometimes through the fifth mouth and sixth mouth. Which are the six mouths? Sometimes he speaks [about] the topics of Islam. Sometimes he speaks about Buddhism, sometimes about Christianity, sometimes about the Sanyas religion, sometimes about the Muslim religion and sometimes he speaks about the Sikh religion. It means that he does not remain constant at one place. He is playing that part now. What? The one who talks about knowledge, the one who talks about the knowledge of every religion is playing a part now. He also follows the advance knowledge in the beginning and the later he starts talking about other religions. Sometimes he will play cymbals in the temple, sometimes he will go to a church, sometimes he will go to a gurudwara. He wanders everywhere. This is why Kartikey has been shown to be the head of the different kinds of religions in the Copper Age and the Iron Age. ... (to be continued.)

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arjun
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Post by arjun » 04 Oct 2014

वार्तालाप नं 614, दिनांक 13.08.2008, तिरूपति
भाग-4


समय: 32.10-34.00
जिज्ञासु:- राम के साथ लव कुश भी युद्ध करते हैं बाबा।
बाबा:- हाँ। जैसे राम को भगवान मान लिया है भक्तिमार्ग में ऐसे शंकर को भी भगवान मान लिया है। शंकर के भी दो बच्चे दिखा दिये। राम को भी दो बच्चे दिखा दिये। वास्तव में शंकर है संगमयुग का। क्या? इसलिये उनके दो बच्चे हो गए। एक हो गया स्वर्ग का अधिकारी, मुखिया और एक हो गया नर्क का मुखिया। इसी तरह राम है त्रेतायुग में दिखाया हुआ है। भक्तिमार्ग वाले कहाँ मानते हैं राम को? त्रेतायुग में। तो त्रेतायुग के बाद दो बच्चे पैदा हुए - एक लव और एक कुश। कुश माने कांटा। लव है इस्लाम धर्म का मुखिया। क्या? और कुश। कुश माने कांटा। वो है क्रिश्चियन धर्म का मुखिया। ये लव और कुश दो बच्चे हैं और दोनों इस्लामी और क्रिश्चियन के जो मुखिया हैं वो अभी प्रैक्टिकल में लड़ार्इ राम के साथ लड़ रहे हैं, निन्दा कर रहे हैं। सद्गुरु निंदक ठौर न पावे। इसलिये राम की गद्दी जब होती है तो राजगद्दी में गद्दी के ऊपर उनको जगह नहीं मिलती है। कहाँ जगह मिलती है? दास दासी की जगह मिलती है।

समय: 34.08-36.24
बाबा:- भाषा न जानने के कारण बहुत कानाफूसी करनी पड़ती है।
जिज्ञासु:- क्या बोलना है सोचते हैं।
बाबा:-हाँ, तो बाबा तो बोल रहे हैं न। तेलगु लो चेप्पु। ☺
जिज्ञासु:- राहू केतु की पूजा करते हैं बाबा। क्यों बाबा?
बाबा:- वो भी तो नवग्रह हैं। हाँ। उन्होंने भी तो कभी-2 पूजनीय कार्य किया है। ऐसे थोड़े ही सब एक जैसी पवित्रता का पालन करते हैं 100 परसेन्ट। थोड़ी बहुत उन्होंने भी पवित्रता की उपासना की है, पवित्र रहे हैं ज्ञान में चलने के बाद। इसलिये उनकी भी पूजा होती है। शनिदेव की पूजा होती है कि नहीं? (किसी ने कहा- होती है।) हाँ, तो शुरु शुरुआत में पूजा होती है कि लास्ट में होती है? (किसी ने कहा- लास्‍ट में होती है।) लास्‍ट में होती है। थोड़ा बचा बचाया तुम भी ले लो। पहले-2 पूजा किसकी होती है? पहला-2 दिन कौन सा है? सूर्यवार, तो ज्ञान सूर्य है उसके बाद दूसरा कौन है? चन्द्रवार। तो चन्द्रमा ने जरूर विशेष पुरुषार्थ किया होगा। ज्ञान चन्द्रमा ब्रह्मा है ना। तो ब्रह्मा की आत्मा भी विशेष पुरुषार्थ करती है। इसलिये सबसे ज्यादा जो पुरुषार्थ करने वाला ज्ञानसूर्य का पार्टधारी है वो संगमयुग में विश्व का मालिक बनता है और सतयुग में उसका बच्चा सोम, सोम माने चन्द्रमा। वो मालिक बनता है। ऐसे ही फिर नम्बरवार हैं।

समय: 36.27-37.44
जिज्ञासु:- बाबा, ये भाई पूछ रहे हैं भक्‍त कनप्‍पा दोनो आंखे निकाल के शिवलिंग को दे देता है।
बाबा:-दोनो आँखें? दोनो आँखें निकाल के शिव बाबा को दे देता है, अर्पण कर देता है? तो सूरदास कौन है? सूरदास ने क्या किया? अपनी दोनो आँखें निकाल के खलास कर दी। सूरदास पार्ट किसका है? (किसी ने कहा- बाप।) सूरदास... बाप अंधा है? ब्रह्मा की रात गार्इ जाती है या प्रजापिता की रात गार्इ जाती है? (किसीने कहा- ब्रह्मा की।) तो प्रजपिता को अंधा क्‍यों कह दिया? गुस्सा आ रही है क्या? ☺

समय: 38.12-39.22
जिज्ञासु:- बाबा, शंकर के पाँच मुख दिखाया गया है।
बाबा:- हाँ। शंकर पार्ट किसका है? ब्रह्मा का पार्ट है या प्रजापिता का पार्ट है? प्रजापिता का पार्ट है। (किसीने कुछ कहा।) हाँ, हाँ शंकर किसका पार्ट है? प्रजापिता का पार्ट है शंकर। सारे जगत का पिता। हाँ। तो उसका टाइटिल ब्रह्मा में है या नहीं है? ब्रह्मा नामधारियों में प्रजापिता का टाइटिल है या नहीं है? वो भी तो ब्रह्मा है। ब्रह्मा को कितने मुख दिखाये जाते हैं? पाँच मुख। पंचानन कहते हैं इसलिये पाँच मुख भी दिखाये जाते शंकर को। चौमुखी महादेव भी है कम्पिल में मंन्दिर बना हुआ है। कहीं शंकर को पांच मुख भी दिखाए हैं।

समय: 39.49-43.52
जिज्ञासु:- बाबा ये बूढ़ी माता पूछ रही है भक्तिमार्ग में द्रोपदी को पाँच पति दिखाते हैं न उसका बेहद का मतलब ?
बाबा:- भक्तिमार्ग में जो पंडित, विद्धान, आचार्य हुए, शास्त्र लिखने वाले हुए, वो सब देहभानी थे या आत्मा अभीमानी थे? देह अभिमानी थे। जो देहधारी हैं वो देह की प्रक्रिया से पैदा होते हैं या बिना देह की प्रक्रिया के पैदा होते हैं? देह की कोर्इ प्रक्रिया है। वो देह की प्रक्रिया करते हैं तो देहधारियों का जन्म होता है। उन्होंने समझा कि द्रौपदी भी ऐसी हुर्इ होगी। लेकिन द्रौपदी तो यज्ञ कुण्ड से पैदा होती है, अग्नि से पैदा होती है या देह के प्रक्रिया से पैदा होती है? अग्नि से पैदा हुर्इ। तो देहअभिमानी शास्त्रकारों ने द्रौपदी को भी देहधारियों की तरह समझ लिया औरत। द्वापरयुग में जितनी भी स्त्रियाँ होती हैं वो सब वैश्यालय की रहने वाली हैं या शिवालय की रहने वाली हैं? कहाँ की वासी हैं? सब वैश्यालय की वासी हैं। तो द्रोपदी को भी उन्होंने क्या समझ लिया? वो भी वैश्या होगी। अगर वैश्या होती तो इतनी भरी सभा में इतना मुकाबला कर पाती? सब कौरवों की और यादव की ऐसी तैसी करके रख दी। ये सतीत्व की ताकत पर कर दिया या पाँच-2 पतियों की ताकत पर कर दिया? पाँच पतियों की बात नहीं है। ये तो जैसे ब्रह्माकुमारियाँ पाँच सेंन्टरों में ट्रान्सफर की जाती हैं, तो वहाँ कोर्इ न कोर्इ भार्इ मुखिया होते हैं चलाने के लिये। तो क्या वो पति होते हैं? पति तो नहीं होते हैं। हाँ, रक्षा करते हैं उनकी। फिर सब ब्रह्माकुमारियाँ भी एक जैसी नहीं होती। कोर्इ तो उन भार्इयों के आधीन ही हो जाती हैं। तो क्या सब आधीन हो जाती होंगी? सब तो आधीन तो नहीं होती। जो आधीन नहीं होती वो ही सच्ची सती, साधवी, द्रौपदी या सीता या लक्ष्मी के पार्ट के रूप में संसार में प्रत्यक्ष होती है। अगर आधीन हो गर्इ तो समझ लो अपनी आत्मा को मार दिया। अगर जीवन में पक्की धारणा है एक शिवबाबा दूसरा न कोर्इ। हम किसी की नहीं मानेंगे। किसकी मानेंगे? एक बाबा की मानेंगे तो द्रोपदी हैं। उसका नाम ही है ध्रुवपदी। कैसा पद पाने वाली? ध्रुव पद है। उसका पद ऐसे ही निश्चित है, पक्का है जैसे ध्रुव का पद निश्चित था। ऐसे ही द्रौपदी का भी पद निश्चित है। नैया डोलेगी लेकिन डूबेगी नहीं। सारी दुनिया कहेगी डूब गर्इ, डूब गर्इ, डूब गर्इ, खलास हो गर्इ। बाबा कहते हैं वो नर्इया डोलेगी फिर भी, फिर भी विषय वैतरणी नदी के पार जायेगी।

समय: 43.57-46.40
जिज्ञासु:- बाबा, ये माता जी पुछती है दक्षिणामूर्ति कौन है? शिवालय में जाने के पहले-2…
बाबा: दरवाजे पर?
जिज्ञासु: दरवाजे पर पहले-2 दक्षिणामूर्ति...
बाबा:-हाँ, एक दायें हाथ की ओर होती है और एक बांये हाथ की ओर होती है। तो दो मूर्तियाँ होती हैं। दक्षिणायन और उत्तरायन। क्या? कैसी-2? दक्षिणायन और उत्तरायन। उत्तर अच्छा होता है या दक्षिण अच्छा होता है? (किसी ने कहा- उत्‍तर।) भीष्म पितामह ने कब शरीर छोड़ा था? जब सूरज उत्तरायन हो गया। उत्तर दिशा में आ गया तब शरीर छोड़ा। माने दक्षिण में रहते हैं राक्षस और उत्तर में रहते हैं देवतायें। उत्तर में है कैलाश पर्वत। उत्तरायन माने श्रेष्ठ है। इसलिये दो द्वारपाल दिखाये हैं एक दक्षिण मूर्ति , एक उत्तर मूर्ति ।
दूसरा जिज्ञासु:- बालाजी टेम्‍पल में जय विजय द्वारपाल हैं।
बाबा:-वो ही। उन्हीं का नाम जय विजय है। एक की जय होती है, एक की विशेष जय होती है। क्या? जय माने सिर्फ जय हुर्इ, विशेष जीत नहीं हुर्इ। एक ऐसे हैं जिनकी विशेष जीत होती है। विशेष जीत किनकी होती है? वो है पाण्डव। दक्षिणायन। क्या जीत होती है पाण्डवों की? जीते जी स्वर्ग में जाते हैं। तो जीते जी स्वर्ग में जाना वो विशेष जीत है या शरीर छूट गया फिर ब्रह्माकुमार कुमारियों की तरह शरीर छोड़ करके स्वर्ग में गए वो जीत अच्छी है? जीते जी जाये वो विजय होगी। एक जय और एक का नाम विजय। इसलिये उनका नाम पड़ता है दक्षिण मूर्ति और उत्तर मूर्ति। चलो बन्द करो अब। उठा पटक हो गई।

Disc.CD No. 614, dated 13.08. 2008, at Tirupati
Part-4


Time: 32.10-34.00
Student: Baba, Luv and Kush also fight with Ram.
Baba: Yes. Just as Ram has been considered to be God in the path of Bhakti, Shankar has also been considered to be God. Shankar has also been shown to have two children. Ram has also been shown to have two children. Actually, Shankar belongs to the Confluence Age. What? This is why he has two children. One is the ruler of heaven, its chief and the other is the chief of hell. Similarly, Ram has been shown in the Silver Age. Where do the people of the path of Bhakti believe Ram to have existed? In the Silver Age. So, two children were born after the Silver Age; one was Luv and the other was Kush. Kush means thorn. Luv is the head of Islam. What? And Kush; Kush means thorn; he is the head of Christianity. Luv and Kush are two children; and the heads of the people of Islam and the Christians are now fighting against Ram in practice. They are defaming him. The one who defames the Sadguru does not find accomodation. This is why, when Ram’s coronation takes place, they do not find a place on the royal throne. Where do they get a place? They get the position of servants and maids.

Time: 34.08-36.24
Baba: As you don’t know the language, you have to whisper a lot in each other’s ears.
Student: We think what we should speak.
Baba: Yes, so Baba is saying, isn’t he? - Speak in Telugu (Telugu lo ceppu). ☺
Student: Baba, why are Rahu and Ketu worshiped?
Baba: They are also among the nine planets. Yes. They have also performed worshipworthy tasks sometimes. It is not that everyone assimilates purity equally, 100 percent. They have also adored purity to some extent, after entering the path of knowledge they have remained pure. This is why they are also worshipped. Is Shanidev (Saturn) worshipped or not? (Someone said: He is.) Yes. So, is he worshipped in the beginning or at last? He is worshipped in the end. May you, too, be worshipped a little. Who is worshipped first of all? Which is the first day? Suryavaar (Sunday); so, he is the Sun of Knowledge; who comes after him? Chandravaar (Monday). So, the Moon must have made special purushaarth. Brahma is the Moon of knowledge, isn’t he? So, the soul of Brahma also makes special purushaarth. This is why the actor playing the role of the Sun of Knowledge who makes the maximum purushaarth becomes the master of the world in the Confluence Age. And in the Golden Age, Som, His child ... Som means the moon. He becomes the master. Similarly, the others are number wise(They become the master according to their spiritual effort).

Time: 36.27-37.44
Student: This brother is asking, the devotee Kanappa takes out both of his eyes and offers them to the Shivling.
Baba: Both eyes? Does he take out both of his eyes and gives them, offers them to ShivBaba? So, who is Surdas? What did Surdas do? He took out both of his eyes and destroyed them. Who plays the part of Surdas? (Someone said: The Father.) Surdas… is the Father blind? ☺ Is Brahma’s night famous or is Prajapita’s night famous? (Someone said: Brahma.) Then, why did you say Prajapita to be blind? Are you feeling angry? ☺

Time: 38.12-39.22
Student: Baba, Shankar is shown to have five heads.
Baba: Yes. Who plays the part of Shankar? Is it the part of Brahma or is it the part of Prajapita? It is Prajapita’s part. (Someone said something.) Yes, yes. Who plays the part of Shankar? Prajapita plays the part of Shankar. He is the Father of the entire world. Yes. So, is his title prefixed to Brahma or not? Is the one with the title of Prajapita included among those who are named Brahma or not? He is also a Brahma. How many heads is Brahma shown to have? Five heads. He is called Pancaanan (five headed). This is why Shankar is also shown to have five heads. There is also a four-headed Mahadev. His temple is in Kampil. At some places Shankar has been shown to have five heads as well.

Time: 39.49-43.52
Student: Baba, this old mother is asking that Draupadi is shown to have five husbands in the path of Bhakti, isn’t she? What is its unlimited meaning?
Baba: The pandits (erudite men), scholars, aacaaryas (teachers), writers of scriptures who were in the path of Bhakti; were they all body conscious or soul conscious? They were body conscious. Are bodily beings born through the process of the body or without the process of the body? There is a process of the body. When they follow the procedure of the body, then bodily beings are born. They thought that Draupadi must have also been like that. But Draupadi is born from a Yagya kund (pit for sacrificial fire), from fire or through the process of the body? She was born through fire. So, the body conscious writers of the scriptures have considered Draupadi also to be a woman like [other] bodily beings. Are all the women of the Copper Age the ones who live in a brothel or in Shivaalay (the house of Shiva)? Where are they the residents of? All are the residents of brothel. So, what did they think of Draupadi, too? She must have also been a prostitute. Had she been a prostitute, would she have been able to face such a big gathering? She disgraced all the Kauravas(The descendants of Kuru) and Yadavas(The descendants of Yadu) . Did she do this on the basis of her power of satitwa (loyalty towards husband) or did she do that on the basis of the power of five husbands? It is not about five husbands. For example Brahmakumaris are transferred to five centers; so, there is one or other brother to run the center. So, are they husbands? No. They are not husbands. Yes, they protect them (the Brahmakumaris). Then all Brahmakumaris are not alike. Some become subordinates to those brothers. So, will all of them become their subordinates? All do not become subordinates. Those who do not become subordinates are revealed in the world in the form of true sati, saadhwi(A faithful and devoted wife), Draupadi, Sita or Lakshmi. If they become subordinates, then you can think that they have killed their soul. If they have a firm belief in their life: one ShivBaba and no one else, I will not listen to anyone; whom will I obey? I will obey one Baba. Then, they are Draupadi; her name itself is Dhruv padi. What kind of a postion (pad) does she achieve? Her’s is dhruv pad (fixed position). Her position is fixed, firm just as the postion of Dhruv (Pole Star) was fixed. Similarly, Draupadi’s postion is also fixed. The boat will shake, but it will not sink. The entire world will say that it has sunk, it has sunk, it has sunk. It has perished. [But] Baba says: That boat will shake, yet it will go across the river of vices.

Time: 43.57-46.40
Student: Baba, this mother is asking: Who is Dakshinamuurti? Before going to Shiva’s temple…
Baba: At the door?
Student: At the door, first there is Dakshinamurti...
Baba: Yes, one is on the right. And the other is on the left. So, there are two idols. Dakshinaayan(The winter solistice; the sun’s movement towards the south of the equator) and uttaraayan(The summer solistice; the sun’s northward progress). What? What kind [of idols]? Dakshinaayan and uttaraayan. Is the north or the south good? (Someone said: North.) When did Bhishma Pitamah(A character in the epic Mahabharata) leave his body? He left his body when the Sun was uttaraayan, when it came to the north. It means that demons live in the south. And the deities live in the north. There is Mount Kailash in the north. So, uttaraayan means elevated. This is why two gatekeepers (dwaarpaal) have been shown; one is the Dakshinamuurtii (the idol standing southwards), the other is the Uttarmuurtii (the idol standing northwards).
Another student: Jay, Vijay are the gatekeepers at Balaji temple.
Baba: It is the same thing. Their very names are Jay, Vijay. One achieves victory (jay); the other achieves special victory (vishesh jay). What? Jay means just victory; it is not a special victory. One kind of people is those who achieve a special victory. Who achieve special victory? They are the Pandavas. Dakshinaayan. What victory do the Pandavas achieve? They go to heaven while being alive. So, is going to heaven while being alive a special victory or if someone leaves the body like the Brahmakumar-kumaris and then goes to heaven, is that a better victory? The one who goes [to heaven] while being alive is a special victory (vijay). One is Jay and the other is named Vijay. This is why they are named Dakshinmuurti and hassle Uttarmuurti. OK, stop it now. The disturbance has started. (Concluded.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 10 Oct 2014

वार्तालाप नं 612, दिनांक 10.08.2008, बैंगलोर
भाग-1


समय: 00.06-01.30
जिज्ञासु:- बाबा, आज की मुरली का पॉइन्ट है- बाबा जिस शरीर में आते हैं उन्हीं की भाषा कार्य में लाते हैं।

बाबा:- कार्य में लाते नहीं, बाबा बाप के रुप में जिस तन में आते हैं उन्हीं की भाषा बोलते हैं। सिन्धी या अंग्रेजी में नहीं बोलते हैं। हाँ जी।
जिज्ञासु:- ये बात बी. के. लोग से पूछने से क्या कहेंगे?
बाबा:- वो भी ये कहेंगे कि हिन्दी में ही तो बोली है मुरली। (किसी ने कुछ।) हिन्दी में नहीं बोली है? हिन्दी में ही तो मुरली बोली है। और वो जो जवाब देते थे लेटर्स का, ब्रह्मा बाबा, बच्चों के लेटर्स आते थे, उन लेटर्स का जो जवाब देते थे वो सिन्धी में देते थे या हिन्दी में देते थे? सिन्धी भाषा में देते थे। इससे क्या साबित होता है?
जिज्ञासु:- उनका मदरटंग सिन्धी था।
बाबा:- उनका मदरटंग ही सिन्धी था। वो हिन्दी जानते ही नहीं थे इतनी कि लिख सकें। हाँ।
जिज्ञासु:- इसलिए ये बात से साबित कर सकते हैं न?
बाबा:- बाप की पहचान इसमें समार्इ हुर्इ है।

समय: 01.48-03.24
जिज्ञासु:- बाबा, कुमारिका दादी ने शरीर छोड़ने के बाद प्रकृति से हाथ मिलाया कहते हैं।

बाबा:- हाँ, प्रकृति से हाथ मिलाय लिया, ऐसा संदेश में आया। हाँ, जी।
जिज्ञासु:- पहले अव्यक्त वाणी में आया हम र्इश्वरीय विश्वविद्यालय में बाबा को प्रत्ययक्ष करेंगे। वो दादी कहती है करके आया ना? तो फिर इन दोनों पॉइन्ट का फर्क क्या है?
बाबा:- दोनों पॉइन्ट फर्क क्यों होगा? र्इश्वरीय विश्वविद्यालय तो ये भी है।
जिज्ञासु:- कुमारिका दादी माना माया जो प्रकृति से हाथ मिलार्इ। तो हाथ मिलाने से बाबा कहते हैं वो दोनों मिलकरके अभी जो एडवांस के बच्चे हैं उनको हिलायेंगे।
बाबा:- हाँ, हिलायेंगे।
जिज्ञासु:- तो वो अपोजिट हो गया।
बाबा:- अपोजिट क्यों हो गया? जो कच्चे-2 होंगे वो हिलेंगे या पक्के-2 होंगे सो हिलेंगे? जो कच्चे होंगे सो हिल जायेंगे, अनिश्चय बुद्धि बन जायेंगें। बाकि जो पक्के होंगे उनका फाउन्डेशन नर्इ दुनियां का पड़ जावेगा। तो नर्इ दुनिया की प्रत्यक्षता होगी या नहीं होगी? होगी। (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) हाँ जी। हर बात में राज़ समाया हुआ है। संगमयुग में जो भी प्रैक्टिकल ड्रामा चल रहा है वो सब कल्याणकारी है। कुछ भी अकल्याणकारी नहीं है।

समय: 03.25-04.39
जिज्ञासु:- मुरली कां पॉइन्टा है रुमाल खोया तो सब कुछ खोया।

बाबा:- क्या खोया?
जिज्ञासु:- रूमाल।
बाबा:- हाँ, रुमाल भी अगर खो गया तो कभी अपने आपको भी खो देंगे। हाँ, तो पूछना क्या है?
जिज्ञासु:- इसका बेहद का अर्थ क्या है?
बाबा:- इसका बेहद का अर्थ है एक तो होता है हद का रुमाल जिससे चेहरा, मोहरा, हाथ वैगरा पोंछते हैं। एक है बेहद का रुह का माल। क्या? बेहद का रुह कौन सी है? आत्मा। और आत्मा का माल कौन सा है? पवित्र शरीर। अगर वो खो दिया तो क्या होगा? सब कुछ खो जावेगा। आत्मा का अपना अस्तित्व ही खो जाएगा।

समय: 04.41-09.04
जिज्ञासु:- बाबा, शंकर द्वारा इतना ज्ञान निकलता है तो भक्तिमार्ग में हमेशा तपस्या करते हुए क्यों दिखाते हैं?

बाबा:- क्या दिखाते हैं? (किसी ने कहा- तपस्या करते हुए।) अगर तपस्या ही नहीं करेंगे तो आत्मा तपेगी? जब आत्मा कुन्दन ही नहीं बनेगी, तपेगी ही नहीं तो ज्ञान कैसे निकलेगा? तो ज्यादा योगी होगा सो बाप के कार्य में ज्ञान में ज्यादा सहयोगी होगा या जो योगी नहीं होगा भेागी होगा वो ज्ञान में ज्यादा सहयोगी बनेगा? ज्ञान माने बाप की पहचान। बाप की पहचान देने में वो ही सबसे जास्ती सहयोगी होगा जो योगी सो सहयोगी। इसलिये शंकर को या ब्रह्मा के पहले पुत्र को योगीश्वर कहा जाता है। योगियों का र्इश्वर। अगर सागर के जल में गर्मी ही नहीं आवेगी तो सागर का जल भाप बन करके उपर उड़ेगा क्या? नहीं उड़ेगा। और भाप बनकर अगर उँची स्टेज में नहीं जावेगा तो ज्ञान की बरसात होगी क्या? नहीं होगी। ऐसे ही वो सागर बाप का बच्चा है। कौन? शंकर। ज्ञान सागर का बच्चा है।

तो योग की अग्नि जरुर चाहिए। जितनी अग्नि प्रज्जवलित होगी उतना वाष्पच बनेगा। भाप बनकर आत्मा ऊँची स्टेज में जोवगी उतना ही ज्ञान जल बरसावेगा। इसलिये शास्त्रों में दिखाया है विचार सागर मंथन का नाम बहुत बाला है। सागर मंथन हुआ। जब कोर्इ मटकी में जमाया हुआ दूध बिलोया जाता है तो मटकी के अंदर धमाचौकड़ी मचती है या नहीं मचती है? होती है। ऐसे ही जब सागर मंथन हुआ तो बड़े-बड़े एटम बम्ब सागर के अन्दर और पृथ्वी के अन्दर फटेंगे कि नहीं? फटेंगे। तो सारी पृथ्वी पर भूकम्प आवेंगे या नहीं आवेंगे? भूकम्प आवेंगे। इतने बड़े-बड़े भूकम्प आवेंगे तो समन्दर का जल क्या होगा? बर्फ बन जायेगा? गरम हो जायेगा। खौल जावेगा। सारा समन्दर आलोड़ित हो जावेगा। और ज्ञान का मक्खन, 84 जन्मों की कथा कहानी सबके दिल में उतरने लगेगी। अपने-अपने 84 जन्मों का साक्षात्कार बुद्धियोग से होने लगेगा। सार-सार उपर आ जावेगा।


Disc.CD No. 612, dated 10.08. 2008, at Bangalore
Part-1


Time: 00.06-01.30
Student: Baba, today’s Murli’s point is, the one in whom Baba comes He uses only his language.

Baba: He does not use it; Baba speaks only the language of the body in which He comes in the form of a Father. He does not speak Sindhi or English. Yes.
Student: If we ask the BKs, what will they say [about this]?
Baba: They will also say that the Murli has been spoken just in Hindi. (Someone said something.) Did he not speak in Hindi? He narrated the Murli just in Hindi. And the replies for letters that he used to give; Brahma Baba used to receive letters from the children; were the replies that he used to give for those letters written in Sindhi or in Hindi? He used to give it in Sindhi language. What does it prove?
Student: His mothertongue is Sindhi.
Baba: His mothertongue itself was Sindhi. He wasn’t so good at Hindi that he could write it.
Student: This is why through this point it can be proved, can’t it?
Baba: It contains the recognition of the Father.

Time: 01.48-03.24
Student: Baba it is said that after Kumarika Dadi left her body she joined hands with nature.

Baba: Yes, it has been mentioned in the message that she has joined hands with nature. Yes.
Student: It was mentioned in the first Avyakt Vani [narrated after she left her body] that she will reveal Baba in the Ishwariya Vishwavidyalaya. It was mentioned that Dadi said this, wasn’t it? So, what is the difference between both these points?
Baba: Why will there be a difference between both the points? This is also an Ishwariya Vishwavidyalay (University of God).
Student: Kumarika Dadi means Maya, who has joined hands with nature. So, when they joined hands, then Baba said that both of them will together shake the children in the Advance Party.
Baba: Yes, they will shake.
Student: So, that is opposite [to what was said in the Avyakt Vani].
Baba: How is that opposite? Will the weak ones shake or will those who are firm shake? Those who are weak will shake; they will lose faith. As regards those who are strong will lay the foundation for the new world. Will the revelation of the new world take place or not? It will take place. (Student said something.) Yes. There is a secret in every topic. Whatever drama that is going on in practice the Confluence Age is beneficial. Nothing is harmful.


Time: 03.25-04.39
Student: There is a Murli point: if you lose a handkerchief (rumaal), you will lose everything.

Baba: What do you lose?
Student: Handkerchief.
Baba: Yes, even if you lose a handkerchief, then you will even lose yourself some day. Yes, so what do you want to ask?
Student: What is its unlimited meaning?
Baba: Its unlimited meaning is that one is a limited handkerchief (rumaal) which is used to wipe the face, hands, etc. and the other is an unlimited maal (property) of ruuh (soul). What? Which is the unlimited ruuh? The soul. And what is the property of the soul? A pure body. What will happen if you lose it? You will lose everything. The existence of the soul itself will be lost.

Time: 04.41-09.04
Student: Baba, if so much knowledge emerges from Shankar, then why is he always shown doing tapasyaa in the path of Bhakti?

Baba: What do they show? (Someone said: Sitting in tapasyaa.) If he does not do tapasyaa at all, then will the soul heat up? When the soul does not become kundan (pure gold) at all, if it does not heat up at all, then how will the knowledge emerge? Will the one who is more yogi become more helpful in the Father’s task, in knowledge or will the one who is not yogi but bhogi (pleasure seeker) become more helpful in knowledge? Knowledge means the recognition of the Father. Only the one who is more yogi will be the most helpful in giving the introduction of the Father [as per the slogan] yogi so sahayogi (the one who is yogi is helpful). This is why Shankar or the first son of Brahma is called Yogishwar. Lord of the yogis. If the water of the ocean does not heat up, then will the water of the ocean evaporate and rise high? It will not rise. And if it does not evaporate and go to a high stage, will the rain of knowledge take place? It will not. Similarly, he is the child of the Ocean, the Father. Who? Shankar. He is the child of the Ocean of Knowledge.

So, the fire of Yoga is definitely required. The more the fire is ignited, the more it (water of knowledge) will evaporate. The soul will turn into vapour and rise to a high stage. It will bring the rain of knowledge to the same extent. This is why it has been shown in the scriptures that the name of the churning the ocean of thoughts is very famous. The ocean was churned; when the milk set as curd in a pot is churned, does turmoil take place in the pot or not? It takes place. Similarly, when the churning of the ocean takes place, then will big atom bombs explode within the ocean and on earth or not? They will explode. So, will there be earthquakes on the entire earth or not? Earthquakes will occur. When such big earthquakes occur, what will happen to the water of the ocean? Will it become ice? It will heat up. It will boil. The entire ocean will be stirred up. And the cream of knowledge, the story of the 84 births will start comming in the heart of everyone. They will start having the visions of their 84 births through the intellect. The essence will come to the surface.
...(to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 11 Oct 2014

वार्तालाप नं 612, दिनांक 10.08.2008, बैंगलोर
भाग-2


समय: 09.26-13.59
जिज्ञासु:- बाबा, सारी दुनिया के मालिक आदि से अन्त तक कोर्इ बनता है क्या?

बाबा:- सारी दुनिया का मालिक बनने के लिये प्रयत्न करने वाले कोर्इ हुये या नहीं हुये? आदि से अन्त तक सारी दुनिया के उपर कन्ट्रोल करने के लिए कोर्इ ने आदि से अंत तक इस ड्रामा में प्रयास किया या नहीं किया? किया तो बहुतों ने लेकिन सारी दुनिया का मालिक कोर्इ बन नहीं सका। उन्होंने क्या गलती की? बाहुबल का उपयोग किया। और भगवान बाप योगबल से विश्व की बादशाही देते हैं। तो जो पढ़ार्इ योग बल की पढ़ाते हैं वो पढ़ने वाले नंबरवार हैं या एक जैसे हैं? नंबरवार हैं। तो कोर्इ बच्चा ऐसा भी होगा न कि जो सौ परसेन्ट आता हो योग बल की पढ़ार्इ में। कोर्इ निकलता है या नहीं निकलता है? जिसने प्रश्न पूछा वो बताये।
जिज्ञासु:- वो आदि से अन्त तक बनता है क्या?
बाबा:- अरे! आदि से अन्त तक विश्व की बादशाही एक के ही हाथ में ही रहेगी? फिर दुनिया में नंबरवार कैसे बनेंगे? अगर एक के हाथ में ही विश्व की बादशाही रही तो एक ही एक हो जावेगा या नम्बरवार होंगे? नम्बरवार तो होंगे ही नहीं। ऐसे नहीं कि सतयुग में एक का ही राज्य रहता है। ब्रह्मा सरस्वती वाली आत्मायें जब सतयुग में पहले जन्म में राधा-कृष्ण बन करके लक्ष्मी-नारायण बनेंगी और शरीर छोड़ेंगी तो वो भी नीचे उतरते जावेंगे। उनको जन्म देने वाले भी नीचे उतरते जाते हैं। सदा एक सा समय किसी का सुना और नहीं देखा है। क्या? हाँ, पाँच हजार वर्ष के ड्रामा में ये हो सकता है कि कोर्इ आत्मा ऐसी भी हो जो सबसे जास्ती सुख भोगने वाली हो। तो वो साबित हो जाती है। सबसे जास्ती जन्म-जन्मान्तर की योगबल की विश्व की बादशाही या बाहुबल की विश्व की बादशाही भोगने वाली हो? योग बल की। ये हो सकता है। बाकि ऐसे नहीं हो सकता कि 84 जन्म में कोर्इ एक ही विश्व का बादशाह बना रहे। अगर एक ही बना रहे तो क्या होगा? फिर अंतिम जन्म में वो एक विश्व की बादशाही पाने के लिये प्रयास करेगा? उसको तो मिली हुर्इ है। इसलिये ड्रामा नहीं है। ड्रामा में नूंध ही नहीं है कि सदा काल एक जैसा समय किसी का बना रहे।

कभी सुख और कभी दुख जरुर होना चाहिए। कभी दिन और कभी रात जरुर होना चाहिए। एक भी मनुष्य ऐसा दुनिया में ऐसा नहीं हो सकता जो सारे ड्रामा में 84 चक्र में सुखी ही सुखी रहे। कभी दुखी न हो।


समय: 14.01-19.36
जिज्ञासु:- बाबा, एडवांस में रह करके जो भी शरीर छोड़ता है, वो फिर जन्म लेगा क्या? और जो बी.के. में जो भी आत्मायें हैं माना दादी, दीदी, जो शरीर छोड़ते हैं वो जन्म नहीं लेते हैं?

बाबा:- बी. के. में भी शरीर छोड़ते हैं और पी.बी.के. में भी छोड़ते हैं। तो अन्तर क्या है?
जिज्ञासु:- एडवांस में जो शरीर छोड़ता है वो शरीर के साथ लक्ष्मी-नारायण बनेंगे, यह लक्ष्य रखने से उनको शरीर मिलेगा।
बाबा:- अन्त मते सो गते। यहाँ तो उनकी बुद्धि में बैठा दिया गया ना। क्या बैठाया गया? कि सच्ची पढ़ार्इ कौन सी है? जो पढ़ार्इ का रिजल्ट इसी शरीर के साथ निकले। और शरीर ही छूट गया फिर प्राप्ति हुर्इ तो क्या फायदा हुआ?
जिज्ञासु:- वो तो ठीक है, फिर भी बी. के. में जो दादी, दीदी शरीर छोड़ते हैं उनको शरीर नहीं मिलता।
बाबा:- उनको शरीर इसलिये नहीं मिलता कि उनको सिखाने वाला जो बाप है ऊँच ते ऊँच उसको खुद ही शरीर नहीं मिला। तो उनको कहाँ से मिल जावेगा?
जिज्ञासु:- ठीक है बाबा। फिर भी यहाँ जिसका शरीर मिलता है उसको विकारी जन्म लेना पड़ता है?
बाबा:- विकारी जन्म क्यों लेना पड़ता है? विकारी जन्म लेने के बाद उनको पक्का ब्राह्मण जन्म मिलता है या नहीं मिलता है? (जिज्ञासु-मिलता है लेकिन शरीर विकारी मिलता है।) शरीर विकारी मिलता है। विकारी शरीर से ही पुरुषार्थ होगा या निर्विकारी शरीर से पुरुषार्थ होगा? विकारी शरीर से ही पुरुषार्थ होगा। बिना पुरुषार्थ के तो प्राप्ति ही नहीं होगी। प्राप्ति करने के लिये अंतिम जन्म का विकारी शरीर जरुर चाहिए।
जिज्ञासु:- वो तो ठीक है बाबा, ब्रह्मा हो या कोर्इ भी इन्स्पिरेटिंग पार्टी की आत्मा हो वो पहले ही ये स्थूल शरीर को जीत लेते हैं क्याि?
बाबा:- नहीं, जीत लेता हो तो फिर यहीं जन्म ले ले ना निर्विकारी। 36 से पहले ही निर्विकारी जन्म ले-ले न शरीर से। जीत कहां लेता है?
जिज्ञासु:- मतलब ये है जब वो विकारी शरीर नहीं लेते फिर से तो पुरूषार्थ को ...।
बाबा:- वो इस शरीर से, वो शरीर के द्वारा के द्वारा सिद्धि प्राप्त नहीं करेंगे इस दुनिया में।
जिज्ञासु:- शरीर के साथ सिद्धि प्राप्त नहीं करेंगे फिर भी उनको पुरुषार्थ तो सहज हो जाता है न। जब विकारी शरीर नहीं है तो सूक्ष्म शरीर से दूसरों के शरीर में प्रवेश हो करके?
बाबा:- जगंल में मोर नाचा किसने देखा? माना सूक्ष्म शरीर धारण करना श्रेष्ठ हुआ या स्थूल शरीर धारण करना श्रेष्ठ हुआ? (जिज्ञासु:- सूक्ष्म शरीर धारण करना श्रेष्ठ तो नहीं है।) श्रेष्ठ नहीं है न। उसको मानते हैं मुसलमान और क्रिश्चियन, फरिश्तों को मानते हैं, वो देवताओं को, साकार को नहीं मानते हैं और हम हिन्दु? (जिज्ञासु:-मानते हैं।) क्यों मानते हैं? क्योंकि यहीं इसी दुनिया में साकार चोला रहते-रहते हम सिद्धि को प्राप्त करें। ये ऊँची बात है।
जिज्ञासु:- ऊँची बात है फिर भी उनको पुरुषार्थ सहज लग जाता है न।
बाबा:- क्या सहज लग जाता है? उनका जन्म कम हो गया। आलराउण्ड पार्टधारी ही नहीं रहे, आलराउण्ड पार्टधारी ही नहीं रहे तो पूरा एक्सपिरियेन्स्ड आत्मा हुर्इ या नहीं हुर्इ? नहीं हुर्इ। इसलिये उनको बच्चा बनना पड़ेगा, बच्चा बुद्धि। अभी भी कैसे हैं? उनकी आत्मा बच्चा बुद्धि या सालिम सगिर बुद्धि है? बच्चा बुद्धि है। और हम? हम बच्चे सालिम बुद्धि हैं। तो कौन से बाप के बच्चा होना चहिए? बुद्धिमान बाप के बच्चे भी कैसे होना चाहिए? बुद्धिमान बच्चेे होना चाहिए। झण्डा ऊँच रहे हमारा।
जिज्ञासु:- 69 में जब ब्रह्मा बाबा ने शरीर छोड़ा तो उन्होंने पंच तत्वों को नहीं जीता था।
बाबा:- नहीं जीता, अभी भी नहीं जीता। पाँच तत्वों को जीतने वाली बात ही उनके बुद्धि में नहीं है कि इस शरीर के रहते-रहते हम पाँच तत्वों को जीतेंगे, प्रकृतिजीत बनेंगे। वो प्रकृतिपति है कि झूठे ही गीता का भगवान बनकर बैठ गए?
जिज्ञासु:- नहीं, अपनी प्रकृति का, अपने शरीर का।
बाबा:- अरे अपनी हो चाहे परार्इ हो, प्रकृति परार्इ होती है या अपनी होती है? अरे! प्रकृति परार्इ है या अपनी है? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) अरे जो हम पूछ रहे हैं उसका तो जवाब दो। प्रकृति को परार्इ कहेगें या अपनी कहेंगे? परार्इ है। फिर उसका क्या मोह? उनका तो मोह लगा रह गया इसलिये सूक्ष्म शरीर का बंधन पड़ गया। और हम तो ऐसा पुरुषार्थ करते हैं कि सूक्ष्म शरीर के बंधन से भी परे जावेंगे। एकदम ज्योतिबिन्दु।

Disc.CD No. 612, dated 10.08. 2008, at Bangalore
Part-2


Time: 09.26-13.59
Student: Baba, does anyone become the master of the entire world from the beginning to the end?

Baba: Were there any people who made efforts to become the master of the entire world or not? Did anyone make efforts to control the entire world in this drama from the beginning to the end? Many made efforts, but nobody could become the master of the entire world. What mistake did they commit? They used physical power (baahubal). And God, the Father gives the emperorship of the world through the power of Yoga (yogbal). So, the knowledge of the power of Yoga that He teaches, are the students [who study it] numberwise or alike? They are numberwise. So, there must also be a child who achieves hundred percent [marks] in the knowledge of the power of Yoga. Does anyone [like this] emerge or not? Let the one who has asked the question reply.
Student: Does he become [the master] from the beginning to the end?
Baba: Arey! Will the emperorship of the world remain in the hands of only one person from the beginning to the end? Then how will the people in the world be number wise (one after the other)? If the emperorship of the world remains in the hands of only one person, then will it be one and only one [emperor] or will there be number wise [emperors]? They will not be number wise at all. It is not that there is the rule of only one [soul] in the Golden Age. When the souls of Brahma and Saraswati become Radha Krishna and then Lakshmi Narayan in the first birth of the Golden Age and then leave their bodies, they will also degrade. Those who give birth to them also continue to fall. We have never heard of or seen anyone with all the days alike. What? Yes, it can be possible in the five thousand years drama that there may be a soul who experiences happiness the most. So, that [soul] proves to be [the master]. Will he be the one who enjoys the emperorship of the world the most, for many births through the power of Yoga or through the physical power? [Through] the power of Yoga. This can be possible. But it cannot be possible that only one [soul] remains the emperor of the world for 84 births. What will happen if only one [soul] continues to be [the emperor of the world]? Then, will that one [soul] make efforts to obtain the emperorship of the world in the last birth? He has already received it. This is why it is not fixed so in the drama. It is not at all fixed in the drama that someone has all the days alike [in his life].

Certainly there should be happiness sometimes and sometimes there should be sorrow. There should definitely be day sometimes and night sometimes. There cannot be even a single human being in world who remains happy and only happy throughout the drama in the cycle of 84 [births] and never becomes sorrowful.


Time: 14.01-19.36
Student: Baba, will anyone who leaves his body while being in the advance [party] be reborn? And the souls among BKs, i.e. Dadis, Didis who leave their body are they not reborn?

Baba: Yes. People leave their bodies in the BK as well as the PBK. So, what is the difference?
Student: The one who leaves his body in the advance [party] with the aim that he will become Lakshmi Narayan along with the body will receive a body again.
Baba: As the thoughts in the end, so shall be the fate. Here, it was made to sit in their intellect, wasn’t it? What was made to sit? What is the true learning (parhaai)? It is the learning where the result is achieved through this very body. And if the achievement is made after the body is lost, then what is the use of it?
Student: That is allright; however, the Didis, Dadis who leave their bodies in BK don’t receive a body.
Baba: They do not receive a body because the Father, the highest Father who taught them did not receive a body himself. So, how will they receive?
Student: That is allright Baba; the one who receives the body here has a vicious birth.
Baba: Why does he have a vicious birth? After having a vicious birth do they have a firm Brahmin birth or not? (Student: They receive but the body is vicious, isn’t it.) The body that they receive is vicious. Will the purushaarth (spiritual effort) be made only through the vicious body or through the viceless body? The purushaarth will be made through the vicious body itself. One cannot achieve anything without making purushaarth. The vicious body of the last birth is definitely required to make attainment.
Student: That is allright Baba; as regards Brahma or any soul of the inspiriting party does he gains victory over physical already before?
Baba: No. Had he gained victory, then he should have a viceless birth here itself, shouldn’t he? He should have a vice less body before [20]36 itself. He doesn’t gain victory over [it].
Student: I mean he does not have a vicious birth again then his purushaarth…
Baba: They will not achieve success through this body in this world.
Student: They will not achieve success through the body. Even then, their purushaarth becomes easier, doesn’t it? When they do not have a vicious body at all, then they will enter others’ bodies through their subtle body…
Baba: Did anyone see when the peacock danced in the jungle? It means that is it greater to take on a subtle body or is it greater to take on a physical body? (Student: Taking on a subtle body is not great.) It is not great, isn’t it? It is the Muslims and the Christians who believe in them; they believe in angels; they do not belive in the deities, the corporeal and what about us Hindus? (Student: We believe.) Why do we believe? It is because we want to achieve success while living in this very world through the corporeal body. This is a greater thing.
Student: It is a greater thing even then, their purushaarth is easier, isn’t it?
Baba: What is easier? Their number of births was lessened. They are not at all allround actors; when they are not at all allround actors, then did the soul become completely experienced or not? It did not. This is why he will have to become a child, the one with child like intellect; how is he even now? Does his soul have a child like intellect or a mature intellect? He has a child like intellect. And what about us? We children are with matured intellect. So, we should become children of which Father? How should the children of the intelligent Father be? They should be intelligent children. Our flag should remain high. :D
Student: When Brahma Baba left his body in 69, did he not conquer the five elements?
Baba: He did not conquer them. He has not conquered [them] now either. The topic of gaining victory over the five elements itself is not in his intellect that he will conquer the five elements while being in this body and become victorious over nature. Is he the conqueror of nature (prakritipati)? Or did he falsely become God of the Gita?
Student: No, [gaining victory over] his own body…
Baba: Arey, whether it is his own or whether it belongs to someone else; is nature alien (paraai) or one’s own? Arey, is nature alien or one’s own? (The student said something.) Arey, first reply to the question that is being asked. Will nature be called alien or one’s own? It is alien. Then why to have attachment to it? He continued to have attachment to it ; this is why he had to be bound in the bondage of the subtle body. And we make such purushaarth that we will go even beyond the bondage of the subtle body. We will completely become a point of light. ... (to be continued.)

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