Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

DEDICATED to Ex-PBKs.
For those who wish to narrate their experiences about the BKs and PBK 'Advanced Knowledge' and post views about their NEW beliefs.
Post Reply
xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 10 Oct 2019

गीता में जो 'कृष्ण' का नाम डाला है वह आया कहाँ से शास्त्रों में?

कोई बड़ा आदमी (लार्ड) था उस (कृष्ण) नाम का, उस समय जब यह शास्त्र लिखे गए थे| या उससे थोड़े पहले|फिर शास्त्रकारों ने गीता में उसका नाम डाल दिया| 13.10.68 की मुरली (पु.1 मध्य में )पढ़के यही लगता है| हमने यह भी सुना है कि 'कृष्ण' की कथा को बौद्धि ग्रांथो ('जातक कथाएं') से उठाया हुआ है| उनका कोई पूर्वज हुआ होगा| असली कहानी में तो सिंपल बातें लिखी गई थी| इन लोगों ने उसको बढ़ा-चढ़ा के लिखा और उसे हिन्दुओं का भगवान् बना दिया अपने फायदे के लिए|

Link ((स्कैन मुरली) : http://PBKs.info/Streaming/MP3/bma/orgl ... -10-68.pdf
रिवाइज्ड (12.9.2019) : http://www.bkmurlitoday.com/2019/09/bra ... Hindi.html
Lord_krishn_mu.PNG
शास्त्रों में तो झूठी बातें लिख दी है| फिर भी ड्रामानुसार 'कृष्ण' की ही महिमा होगयी न| उस बड़ा आदमी का नाम भी 'लार्ड कृष्ण' था और जो दुनिया का पहला पहला आदमी हुआ है उसका नाम भी 'कृष्ण' ही रहा, जिसके अंतिम जन्म में ही भगवान् शिव ने उसको ब्रह्मा बनाके, उसमें प्रवेश करके ज्ञान सुनाया| शास्त्र लिखनेवालों का 'favourite' आदमी तो भले 'राम' है, लेकिन ड्रामा ने 'कृष्ण' को ही गीता का भगवान् बना दिया, जो हिन्दुओं का 'धर्म ग्रन्थ' के रूप में माना जाता है, है नहीं वैसे| दुर्गति भी जरूर हुई गीता से| बातें तो सब झूठी है उसमें, ज्ञान कहा है उसमें| लेकिन सब ड्रामा|

कुछ मुरलियों में यह बताया है कि कोई एक ग्रुप था शास्त्र बनाने वालों का जिन्होंने रिसर्च करके शास्त्र लिखें है| कुछ चीजें साक्षात्कार के आधार पर भी लिखी गई है| इसका मतलब यह नहीं कि रिसर्च करने से कोई संगमयुग या सतयुग-त्रेता का हिस्ट्री मिला होगा| मुरली में बताया 'देवताओं की कोई भी चीज पतित मनुष्यों को मिल न सकें', ख़ास करके जो हीरे-जवाहरात आदि थे|

उसी तरह 'चाणक्य' भी वास्तव में कोई हुआ ही नहीं| उस समय 'संस्कृत' भाषा ही नहीं थी वास्तव में जो दिखाते की चाणक्य ने संस्कृत में 'अर्थशास्त्र' लिखा, 'चाणक्य नीति' वगैरा| लेकिन, उस तरह का कोई आदमी था जिसका नाम चाणक्य भी नहीं था| वह तो कोई 'हिन्दू' या 'वैदिक धर्म' या 'ब्राह्मण धर्म' वालों का नहीं था| इन्होने उसकी कहानी चुराई, बढ़ा-चढ़ा के उसको 'चाणक्य' बना डाला और उसे 'ब्राह्मण' के रूप में दिखा दिया अपना फायदे के लिए| वैसे ही सब शास्त्रों की बात है| 'महिषासुर', 'राजा बलि',' 'हिरणस्य कश्यप' वगैरा सब अच्छे अच्छे लोग थे| जो वास्तव में 'हिस्ट्री' में हुए है| इन लोगों ने उनको असुर बना दिया और जो वास्तव में खुद असुर थे, खुद को देवता बना डाला शास्त्रों में|
इस मुरली में जो विदेशियों (Foreigners) की बात आई है, वह वास्तव में द्वापर-कलयुग के विदेशियों (Foreigners) की बात है| जो उस बड़ा आदमी को जानते थे, जो कोई कृष्ण हुआ था भारत के हिस्ट्री में| या फिर शास्त्र पढ़के उन्होंने जाना होगा कृष्ण के बारे में| लेकिन सतयुग का कृष्ण की बात नहीं है| 'लार्ड' शब्द अंग्रेजी है ना, उन्होंने ही टाइटल दिया होगा|

बाकी ऐसे नहीं कि, संगमयुग में विलायत वाले (Foreigners) उसको जानते है| न ही संगमयुग में 'कृष्ण' है, न ही संगम की बातें द्वापर-कलयुग में विलायत वालों (Foreigners) को याद रहती है| न ही संगमयुग के पुरुषार्थी जीवन के कोई यादगार बनते है| यह सब PBKs के गलत फहमियां हैं| इस बात को 'सच्ची गीता' में कैसे दिखाया देखो पु.142 में, टॉपिक का नाम देखो क्या दिया, 'संगमयुगी राधा-कृष्ण के फुटकर पॉइंट्स'|
lord_krishn-sg.PNG
lord_krishn-sg.PNG (48.82 KiB) Viewed 96 times

स्कैन मुरली में ठीक से नहीं दिखता है तो रिवाइज्ड (12.9.2019) पढ़ो| लेकिन रिवाइज्ड मुरली में कुछ बातें बदली हुई| जैसे "भारतवासियों से सुनते हैं", स्कैन में शायद "भारतवासियों ने सुनकर देखते हैं" लिखा है| इससे थोड़ा अर्थ भी बदल जाता है| पता नहीं दोनों में कौनसा सही है| इसको बाद में देखेंगे| लेकिन मूल बात समझने कि है 'लार्ड कृष्ण' कोई आदमी हुआ करता था जिसका नाम शास्त्रों में बस डाल दिया है| ऐसे नहीं कि कोई संगम के बारें में उनको कुछ पता था|

इसी तरह रिवाइज्ड में जो "इसको कहा जाता है अन्धेर नगरी..." आता है, इससे पहले के 2 लाइन उड़ा दिया है, जो स्कैन में मिलेंगे|

mbbhat
BK
Posts: 3257
Joined: 19 Jun 2008
Affinity to the BKWSU: BK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: I am a Bk and a writer. I have been benefited a lot by the knowledge given in BK institution. I also have materials written totally on logic without BK knowledge. Anyone can get them as attachments for free by email.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by mbbhat » 10 Oct 2019

1)When Baba says in the above Murli - "Krishn ko toh koyi bhee jaan lenge. Sab vilaayatvaaley bhee unko jaanthay hain = Anyone can know about Krishn. All the foreigners know about Krishn".- SM 13-01-68 (1)

In the above sentence, from the words- "ANYONE CAN KNOW", mostly, ShivBaba is implying - ANYONE CAN BECOME AWARE OF" . That is all.

That is- anyone can get some sort of awareness or feeling of Krishn. Because history of Krishna is written; may be not fully true. But, at least to some extent, one can understand that Krishna was a great person. Hence they might have given the title LORD to Krishna also. One can guess at least something from the scriptures.

2)But, no-where history or biography of ShivBaba is written. No one knows how the incorporeal being can come to this world. Baba has even said- "ShivPuraan hai, lekin sachchi2 Shivpuraan toh Gita hai = There is Shivpuraan. But the real Shivpuraan (history of Shiv is Gita)".

So- by reading Shivpuraan one cannot guess anything about Shiv. Because in Shivpuraan Shiv is shown as a corporeal personality Shankar having a wife just one Parvati, and a son Ganesh.

3)Hindus have depicted God's incarnation as taking birth in mother's womb and also like animals! To such a low extent, the incarnation has been brought down.

4) And- we can see clearly the other religions do not have any idea of how incorporeal God can incarnate. Even though they clearly say- God is incorporeal, they have no imagination of incarnation. Hence their reach is only to the prophets.

That is what baba may be saying- No one knows about Shiv.

5) For example- baba says here - http://bk-pbk.info/viewtopic.php?f=40&t ... 256#p54256 It is remembered - God teaches RajYoga through Brahma.

Where it is said/remembered?
-----------
6)I do not think there had been some different person having same name Krishna, and that have been taken by foreigners.

But, your churning is good/OK. Kindly continue.

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 11 Oct 2019

Thank you brother mbbhat.

Some Murli points:
int_points.PNG

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 11 Oct 2019

असली त्रिमूर्ति में कौन है?

तो जैसे दीक्षित जी बताते कि " 'गीता' भी पहले 'निराकारवादी' थी, मतलब पहले द्वापर के अदि में गीता में 'शिवशंकर भोलेनाथ का नाम था" जो विदेशियों ने रिसर्च करके बताया है, बाद में अधूरे ब्राह्मणों (माना BKs) ने द्वापर में 'बाप के बदली बच्चे' नाम डाल दिया, 'मतलब' 'कृष्ण' का नाम डाल दिया" वगैरा| और बताते कि "इसकी शूटिंग भी यहाँ हो जाती है संगम में, जो BKs बाप (सेवकराम) को घूम कर देते है| फिर कागज़ की मुरली में पहले जो 'शिवबाबा याद है' लिखते थे, जिसको BKs ने 'पिताश्री' करके लिखना शुरू कर दिया, माना कृष्ण का नाम डालने की शूटिंग होगयी"|

देखा, क्या बातें बनाई है! झूठ ही सही, लेकिन क्रिएटिविटी देखो| हम लोग 50 जन्म लेके प्रैक्टिस करेंगे तो भी ऐसा झूठ नहीं बोल पाएंगे| अरे! इन्होने 63 जन्म यही किया होगा| संस्कार पक्के हुए पड़े है|

13.10.68 की मुरली में तो क्लियर बता दिया विदेशी भी 'लार्ड कृष्ण' को मानते थे, उसके बाद 'गीता' में नाम डाला 'कृष्ण’ का शास्त्र बनाने वालों ने|

उसी तरह चाणक्य को बहुत मानते है PBKs| हमने खुद पूरा सीरियल 15 बार देखा होगा कम से कम| वह भी झूठी निकली| बाकि सारे भक्तिमार्ग के सीरियल तो झूठे है ही, जिन्हे PBKs मुरली से भी ज्यादा मान देते है|

इसी तरह त्रिमूर्ति भी झूठी बनाई भक्तिमार्ग में| बाबा हमेशा कहते रहते मुरली में "यह भक्तिमार्ग के चित्र कोई एक्यूरेट नहीं है, 'विष्णु' का, 'त्रिमूर्ति' का भी"| फिर यह भी बताते कि लेकिन इन चित्रों के बिना समझाना बहुत मुश्किल है"| ख़ास करके '30.1.68' कि मुरली में बताया हुआ है| 'प्रजापिता' को सूक्ष्मवतन में दिखाने वाले भी भक्तिमार्ग वाले है (BKs नहीं) जो 'दक्ष प्रजापति' की कहानी सतयुग कालक्रम में दिखाया शास्त्रों में|

फिर असली त्रिमूर्ति क्या है जैसे मुरली में बताया हो?

"वास्तव में त्रिमूर्ति में होना चाइए 'ब्रह्मा', 'विष्णु' और 'शिव' न की 'शंकर'| अब 'शिव' को कैसे दिखाए (जो निराकार है)? इसीलिए शोभा के लिए 'शंकर' को रख दिया (भक्तिमार्ग में)"| गड़बड़ किया ना| इसीलिए बार बार यह भी बोलते है मुरली में "त्रिमूर्ति में शिव को उड़ा दिया"| तो अब हमें शंकर को उड़ाना चाइए|

और क्लियर किया मुरली में "त्रिमूर्ति माना 'शिव' ने 'ब्रह्मा' में प्रवेश करके पढ़ाया और उसको 'विष्णु' बनाया"| कहानी ख़त्म| 'तो उसमें सिर्फ पढ़नेवाले, पढ़ानेवाला और एम-ऑब्जेक्ट", बस यही त्रिमूर्ति है असली| कुछ मुरली में और क्लियर किया- "त्रिमूर्ति में जो ब्रह्मा दिखाया है, उसके saath सरस्वती भी आजाती है (जो दिखाया नहीं भक्तिमार्ग में)"| और बताया "ब्रह्मा के साथ सारे ब्राह्मण ((9 लाख) भी आजाते उसमें"|

इसीलिए बताया कई मुरलियों में "मुखियों का गायन होता है"| भक्तिमार्ग में भी, मुरली में भी नटशेल में समझाते है, फिर कहते तत्त्वं| मतलब जो भी लक्ष्मी-नारायण की पूजा होती है, उनको जो भी प्राप्ति होती है, उनको जो भी टाइटल मिलते है जैसे 'विश्व के मालिक' , वह हम सब के लिए भी है| 'कोई एक तो नहीं होगा ना' ऐसे आता ना मुरली में|

उसी तरह 9 लाख के बाद जो दुनिया है, उनका मुखिया है 'राम' की आत्मा| इसीलिए मुरली में जब जब फेल होनेवालों की बात आती है तो 'राम' का उदहारण लिया जाता है| ऐसे नहीं कि 'शिव' को 'राम' से दुश्मनी है ((बाबा दीक्षित को तो वह तब जानते ही नहीं थे) या सिर्फ 'राम' ही एक अकेला फेल होता हो, नहीं| यह मुखिया है, इसमें बाकि सब आगये| इसीलिए गायन है 'राम राजा, राम प्रजा, राम साहूकार'| अलग-अलग मुरलियों में यह भी बताते कि 'फेल होनेवाले त्रेता में राजा बनेंगे', 'फेल होने वाले सतयुग में दस-दासी बनेंगे', 'प्रजा बनेंगे' वगैरा| तो गायन हो जाता है मुखिया का| सिर्फ राम को ही बाण क्यों दिखाया? वह अकेला थोड़ी फेल होता है? मुखिया है|

यह भी बोला जो कुमारिका से एक मुरली में पूछा "मैं कहता हूँ शिवबाबा के 2 बच्चे हैं| एक 'ब्रह्मा' सो 'विष्णु' बन जाते| दूसरा बचा 'शंकर'| तुम शंकर को क्यों छोड़ देती हो?"| उसी मुरली में 'पहले यह पूछा, क्या 500 करोड़ मेरे बच्चे नहीं है? फिर कह दिया 2 बच्चे हैं'| कॉमन सेंस की बात है, 'शिव' के सिर्फ 2 बच्चे कैसे होंगे? सारी दुनिया उसके बच्चे है ना| तो मुखियों के रूप में बताया, उन 2 मुखियों में सारी दुनिया आगयी| नकली त्रिमूर्ति में भी मुखिया ही दिखाए गए है|

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 11 Oct 2019

एक और बात(Just a thought):

हिन्दू कौन? रावण कौन?

हिंदुओं के जो शास्त्र बने है, वह सिर्फ अपने फायदे के लिए बनाये है| इसीलिए उससे सारी दुनिया की दुर्गति होती है , सिर्फ भारत की नहीं| मुरली में बताया, विदेशी भी इनसे सीखते, लेकिन विदेशियों से खुद अच्छी अच्छी चीजें सीखते है भारतवासी|
अब 'कृष्ण' का जो नाम डाला, उसमें ट्रिक यह है कि 'जिस आदमी का नाम पहले से मशहूर है, विलायत तक'| कुछ सालों बाद उसका इस्तेमाल किया| जैसे 'ब्रांड अम्बस्सडोर्स' होते ना, advertaisement के लिए| बस वही|

दूसरी बात मुरली में बताया, 'हिन्दू' तो कोई धर्म ही नहीं है, यह तो सिर्फ देवताओं की ग्लानि करते है| इनका धर्म स्थापक कौन है? धर्मग्रन्थ कौनसा है (आजतक गीता को ऑफिशियली धर्मग्रन्थ नहीं मानते)? बाबा के हिसाब से, असली धर्म है 'बौद्ध', 'इस्लाम', 'क्रिस्चियन', 'सिक्ख' जिनके धर्म स्थापक है, धर्मग्रन्थ है, उनके आँखों के सामने धर्म स्थापन करते है आकर| तो उनके धर्म ग्रंथों में सच्चाई भी है| वह सब निराकार को मानते है| उन धर्मो में समानता को मानते है|

हमारा धर्म जब स्थापन होता तो हम सब नीचे ही रहते है पतित अवस्था में| बाकि जब क्राइस्ट आएगा तो उसके साथ कुछ साथिया भी ऊपर से आते है| उन धर्मग्रन्थ 100-200 साल बाद बनाते होंगे जो पहले बहुत छोटी होती है, बाद में वह भी बढ़ाते जाते, हिन्दुओं से सीखके| अब हमारा धर्मग्रन्थ और शास्त्र, 3000 साल बाद क्यों बनेंगे? उसमें क्या सच्चाई होगी? वह कोई धर्म ही नहीं| 'सन्यासियों' के लिए भी बाबा ने बोल दिया उनका भी कोई धर्म ही नहीं है| इससे सम्बंधित मुरली पॉइंट्स देते रहेंगे आगे|

हिन्दू धर्म में सिर्फ ऊंच-नीच की बात है| अभी मान लो मैं हिन्दू हूँ और उसमें भी शूद्र हूँ| फिर भी अगर मैं गर्व से कहता हूँ कि 'मैं हिन्दू हूँ, मैं हिन्दू हूँ' तो मुझसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं होगा| मतलब 'मैं नीच हूँ' यह बात गर्व से कहना|

दूसरी बात, अगर मैं क्रिस्चियन या दूसरे धर्म में कन्वर्ट होता हूँ तो मुझे वहां समानता मिलेगी| इज्जत मिलेगी| अब सोचो, मैं क्रिस्चियन हूँ, हिन्दू धर्म में आना चाहता हूँ तो क्या मुझे ब्राह्मण वर्ण में शामिल करेंगे?

जितना हम जानते है, एक ब्राह्मण का बच्चा ही ब्राह्मण बन सकता है| इसी तरह का एक और धर्म है 'यहूदी' (Jews), वह भी हिन्दू धर्म का भाई है| इन धर्मों का विरोध करने के लिए बाकि धर्मों की स्थापना हुई| कई संत महात्मा आये 'कबीर','तुकाराम', 'बसवण्णा' वगैरा| बाद में इनकी हिस्ट्री भी घूम करके, उनका भी ब्रह्मणीकरण किया गया| 'अशोक' इतना बड़ा राजा जिसने 'बौद्ध' धर्म को विदेशों में पहुँचाया था, उसका हिस्ट्री किसीको पता नहीं था| रिसेंटली पता चला है| यादगार में देखो, 'अशोक चक्र' 'अशोक लांछन' सब बौद्ध धर्म के ही है आज भी|

वैसे बाकि धर्म भी सब तमोप्रधान बन गए अभी तो, सिक्खों में भी जातिवाद है शायद|

मुरली में बोला 'देश' के नाम पर भला कोई धर्म का नाम होता है (हिन्दू धर्म)? जो शायद मुग़लों ने या कोई विदेशियों ने दिया हुआ है|

बाकि जानकारी के लिए 'आर्यन्स' के ऊपर स्टडी करो, 'डीएनए' थ्योरी जो राखीगढ़ी पर हुई, और मुरली|

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 12 Oct 2019

13.10.68, जो पहले देखा था:

"कृष्ण को तो कोई भी जान लेंगे| सभी विलायत वाले भी उनको जानते है| लार्ड कृष्ण कहते है ना|....भारतवासियों ने सुनकर देखते है इनकी पूजा बहुत होती है तो फिर गीता में भी लिख दिया है कृष्णभगवानुवाच| अभी भगवान् को भला लार्ड कहा जाता है क्या| लार्ड कृष्ण कहते है| लार्ड का टाइटल वास्तव में बड़े आदमी को मिलता है| वह तो सभी को देते हैं| इंडियन का (को) बड़ा आदमी होगा तो उनको भी लार्ड कह देते है| ...अभी वह कहाँ वैकुण्ठ का पहला प्रिंस, और कहाँ यह कलयुगी पतित मनुष्य| इसको कहा जाता है अंधेर नगरी... कोई भी पतित को लार्ड कह देते|..."

इससे अभी यह पक्का होता कि लार्ड कृष्ण कोई बड़ा आदमी था| यह ऊपर के लाइन पूरा पढ़ने से समझ में आएगा| इसमें भी ख़ास,
"फिर गीता में भी लिख दिया है कृष्ण भगवानुवाच| अभी भगवान् को भला लार्ड कहा जाता है क्या| लार्ड कृष्ण कहते है| लार्ड का टाइटल वास्तव में बड़े आदमी को मिलता है”|
---भगवान् को लार्ड नहीं कहता कोई| मतलब, ऐसे नहीं कि गीता पढ़के बाद में विलायत वालों ने भगवान् कृष्ण को 'लार्ड' टाइटल दिया| नहीं, विलायत वालों ने 'लार्ड' टाइटल जिसको दिया था जो बड़ा आदमी था, उसको शास्त्रों में 'भगवान्' बना दिया|

---दूसरी बात, गीता वैसे द्वापर में काफी बाद में बानी थी, रामायण, महाभारत सबके बाद| लगभग कलयुग के नज़दीक| लेकिन इस मुरली में बाबा कलयुग के मनुष्य को भी लार्ड कह देते वगैरा बता रहे बार बार| दिमाग में रखने की बात है फिलहाल| आगे क्लियर होगा गीता कलयुग में ही बानी थी या उससे पहले|

लेकिन एक बात समझ में आगया इस मुरली से, इसको समझने में हमे 2 दिन लगे|
मतलब मुरली हिंदी में ही है सब फिर भी समझना मुश्किल हो रहा है| कल वाला पोस्ट में हमने यह भी लिखा था कि शायद शास्त्र पढ़के उन्होंने कृष्ण को जाना होगा और लार्ड टाइटल दिया होगा विलायत वालों ने| लेकिन बात बहुत सिंपल थी|
ऐसे में BKs मुरली पढ़ना और भी डेंजर है| वैसे ही टाइम लग रहा है हमें, ऊपर से BKs के changes| इस मुरली में और भी काफी changes मिलें इसी 5-6 लाइन में|

लेकिन कल वाला पोस्ट में एक मुरली पॉइंट है 16.7.63 की, उसमें यह बताया कि कोई ग्रुप ने यह सब बनाया| यह ग्रुप ने एक लाइफ में सब तो नहीं बनाया होगा शायद| फिर कौनसा ग्रुप होगा? उसीमें एक order बताया, जिन्होंने गीता बनाई, गीता के साथ भागवत , उसके साथ महाभारत, फिर उसके साथ रामायण भी उसी ग्रुप ने बनाया| इसका मतलब पहले गीता फिर भागवत फिर महाभारत फिर रामायण, ऐसा तो नहीं होगा शायद| फिर भी ध्यान में रखने की बात है, आगे क्लियर होगा|

इसी पॉइंट में बताया, व्यास भगवान् ने कृष्ण भगवानुवाच के साथ, उनके चरित्र भी उसने लिखें है| ग्लानि किया आखिर, उसमें भी उसका फायदा रहा होगा या उस ग्रुप का|

हमने यह भी सुना था कि बौद्धों के जातक कथाओं से कृष्ण की story उठाके बढ़ा-चढ़ा के लिखा गया|
मुरली में तो बाबा ने उस गीता को कभी सपोर्ट नहीं किया| यहाँ तक बोला 'सर्वव्यापी का ज्ञान गीता से निकला है', 'उसमें आटे में लून मिसल सच्चाई है', '5% भी सच नहीं है' वगैरा|
व्यास को तो बाबा हमेशा धोते रहते| असल में व्यास भी हम बच्चे हैं बताया| उसने नाम धार लिया 'व्यास भगवान्'|

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 12 Oct 2019

shastr1.PNG
shastr1.PNG (286.52 KiB) Viewed 39 times
shastr2.PNG
shastr2.PNG (117.45 KiB) Viewed 39 times
LINK (S.M.9.8.1964): http://PBKs.info/Streaming/MP3/bma/scan/150.pdf

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 12 Oct 2019

Interesting point:
एक मुरली (शायद 1962 की कोई) में बताया, "कोई नुज़ियम (शायद, नास्त्रोदामूस नहीं) की भविष्यवाणी में भी लिखा है, 8 ग्रह मिलें थे (या मिलेंगे) और महाभारत लड़ाई लगी थी"|

मुरली ढूँढ़के बताएँगे बाद में| लेकिन बाबा दीक्षित ने इसका अर्थ लगाया कि 8 ग्रह आपस में टकराएंगे| इसका बेहद में भी बता दिया, ब्राह्मणों की दुनिया में 8 अलग-अलग रजाइयां आगे चल स्पष्ट दिखाई देंगे शूटिंग पीरियड में और वह आपस में टकराएंगे| जो एकदम बकवास है| बेहद में छोडो, हद में ही गलत अर्थ लगाया|

मुरली में बताया 8 ग्रह मिलेंगे| टकराएंगे नहीं बताया, जो उन्होंने गलत अर्थ निकाल लिया इसका| सोचो, टकराएंगे तो वह कभी वापस बन पाएंगे? हमेशा के लिए ड्रामा ही ख़त्म हुआ| कितनी अज्ञान की बात बता दी| कोई खिलौना समझ रखा है ग्रहों को|

फिर, इस पर थोड़ा रिसर्च करके पता चला कि 'ग्रह' मिलेंगे का मतलब alignment की बात है| हिंदी में 'संरेखित'| मतलब उनकी धुरी तो फिक्स्ड रहेगी सूरज से| लेकिन एक लाइन में जैसे एक-एक नीचे एक आजायेंगे|

अभी भी जो भूकंप होते है, रिसर्च करने वाले इस alignment के आधार पर ही बताते कब कितने परिमाण का भूकंप आ सकता है| सुना है, कभी 2 या 3 ग्रह भी align हो जाये या जभी हुए थे, तो विनाश का तांडव मचता है धरती पर| कुदरती आफदाएँ जैसे भूकंप वगैरा होते हैं|


दूसरी एक बात- S.M.2.9.62 में एक बात आई (ऊपर वाली बात से इसका कुछ लेना देना नहीं है),
----------------------------------------------------------------------------------------------------
2.9.62.earthquake.PNG
इंटरनेट में ढूँढा तो, ध्यान देने वाली बात है, 2.9.63 में कश्मीर में भूकंप आया था| मतलब सिर्फ 62 की जगह 63, बाकि 2 सितम्बर को ही हुआ लेकिन 1963 में|

अब गलती से मुरली को 63 का बना दिया टाइप करते वक़्त? या, या फिर यह कोई पुरानी बात है, मतलब पुरानी मुरली है जो 1962 में रिवाइज्ड हुआ| जिसको असली मुरली के रूप में दिखा दिया हो और तारीख ठीक से मैच करने की कोशिश की हो उस कश्मीर वाली भूकंप के साथ, लेकिन उसमें थोड़ी गड़बड़ी हुई हो, यह सोचने की बात है|

क्योंकि, इससे पहले भूकंप 1960, 1956 में गुजरात में, फिर 1954,1950 वगैरा में आया भारत में|1962 में भी गुजरात में आया जो शायद जनवरी में |

अभी इनका एनालिसिस करके कुछ ख़ास समझ में नहीं आया अभी तक| करना भी बेकार है|BKs ने क्या झोल किया है क्या पता| मुरली में रात को 3.30 बजे बताया, मतलब सवेरे| 1956 का भूकंप 9 बजे सुबह आया (UTC 15.32)|

इस लिंक में देख लो: https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_e ... s_in_India

Wikipedia पर भी 100% भरोसा नहीं कर सकते| कुछ बातें ऊपर-नीचे भी होंगे|

अब अगर यह रिवाइज्ड है तो असली मुरली कब चली थी? क्या असली ब्रह्मा 1962-63 तक था या उससे पहले ही गया था? जो ऑडियो कैसेट मिले हैं वह तो 1963 से चलाना शुरू किया|

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 13 Oct 2019

combined1.PNG
combined2.PNG

xpbk
Posts: 106
Joined: 09 Sep 2019
Affinity to the BKWSU: ex-PBK
Please give a short description of your interest in joining this forum.: To explore, discuss and share the knowledge.

Re: Interesting Murli points - to understand Knowledge in another perspective

Post by xpbk » 13 Oct 2019

Dilwada_1.PNG
Dilwada_2.PNG

कुछ और मुरलिया :
4.12.68, रात्रि , पु.1 अंत
15.1.69, प्रा. पु.3 आदि
18.12.68, प्रा. पु.3 मध्य (इसमें थोड़ा आगे बताया, देवतायें वाममार्ग में गए तो निशानियां दिखाया बहुत मंदिरों में| दूसरी मुरलियों में इस बात पर जगन्नाथ मंदिर का उदाहरण दिया है)
23.4.62, प्रा. पु.3 मध्य (एक ही पढाई से कोई सूर्यवंशी बन जाते , कोई कम पढ़ते तो चंद्रवंशी)
29.10.67 प्रा. पु.2 मध्य

इसके अलावा, गूगल करो 'देलवाड़ा bk Murli Hindi' या 'दिलवाड़ा bk Murli Hindi' तो रिवाइज्ड मुरली मिलेगें| पेज के अंदर भी फिर सर्च कर सकते हो CNTRL+F करके 'देलवाड़ा' टाइप करो|

Post Reply

Who is online

Users browsing this forum: No registered users and 2 guests