Q&A: PBK Murli discussions

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 12 Oct 2014

वार्तालाप नं 612, दिनांक 10.08.2008, बैंगलोर
भाग-3


समय: 19.42-22.26
जिज्ञासु:- जो शुरू-शुरू की अव्यक्त वाणियाँ हैं ब्रह्मा सम्प़न्न बन गया, सम्पन्न स्टेज प्राप्त कर लिया। ऐसा कैसे?

बाबा:- क्या? बोलने वाला कौन है? (जिज्ञासु – ब्रह्मा की आत्मा।) तो ब्रह्मा की आत्मा जितना जानती है उतना ही बोलेगी या उससे उपर बोलेगी? (जिज्ञासु:- लेकिन शिवबाबा की याद रहती है ना।) हाँ, शिव बाबा की याद में तो है लेकिन जो शिव बाबा की याद में है वो उतना ही बोलेगी जितनी उसकी स्टेज है या उस स्टेज से ऊँचा बोलेगी? (जिज्ञासु - माना बेसिक नालेज की स्टेज से बोलेगी।) देवतायें जो बोलेंगे वो भाषा और शिवबाबा जो बोलेंगे वो भाषा दोनों में अन्तर होगा या नहीं होगा? (किसी ने कहा- होगा।) क्या अन्तर होगा? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ जी, वो सिर्फ धारणा तक सीमित रहेंगे। योग की सिद्धि में नहीं पहुंचते देवतायें इस जीवन में। और वो ज्ञान की सिद्धि पर भी नहीं पहुँचते। जब तक प्रवेश न करें बीज रुप आत्माओं में। बीज रुप आत्माओं का आधार लेने के बाद ही उनको सिद्धि मिलेगी। और उतनी ही मिलेगी जितनी बीज रुप आत्मा को सिद्धि मिलेगी। उससे जास्ती नहीं मिलेगी। भागीदार हो जाते हैं। पुरुषार्थ में भी भागीदार हैं। जैसे राम कृष्ण की आत्मायें जन्म-जन्मांतर की साथी हैं। इस सृष्टि रुपी रंगमंच पर एक रचयिता का पार्ट बजाती है तो दूसरा रचना का पार्ट बजाती है। बाप और बच्चे कम्पनी या दुकान के साझीदार हैं या नहीं हैं? साझीदार हैं।
जिज्ञासु:- राम कृष्ण की आत्माओं को जैसे लागु होता है वैसे हरेक एक बीज रुप और आधारमूर्त आत्मा ओं को ...
बाबा:- बिल्कुल। सब रचयिता और रचना का कनेक्शन है। एक रचयिता है कन्ट्रोलर और उनमें दूसरा रचना है कन्ट्रोल्ड होने वाला। तो क्या बनना अच्छा है? रचयिता बनना अच्छा है।
जिज्ञासु:- जब तक आत्मा 84 जन्मों का ...
बाबा:- पूरा चक्र न लगाए...
जिज्ञासु:- पूरा चक्र न लगाए और जीत भी ले।
बाबा:- एक्सपीरीयन्स्ड नहीं बनेगी तो जीत कहाँ से पायेगी?
जिज्ञासु:- वो खुद ही जीत लेगा तो प्रकृति जीत कहेंगे।
बाबा:- हाँ जी, हाँ जी।

समय: 22.30-23.51
जिज्ञासु:- बाबा शास्त्रों में गायन और महिमा सभी दिखाते हैं न वो संगमयुग की है न बाबा बोलते हैं। छोटा बच्चा कृष्ण को दिखाते हैं न?

बाबा:- कृष्ण को छोटा दिखाते हैं। उसकी महिमा जास्ती है। जो बड़ा कृष्ण है उसकी पूजा जास्ती दिखाते हैं या कम दिखाते हैं? चरित्र ज्यादा छोटे बच्चे के दिखाये हैं या बड़े बच्चे के दिखाये हैं? छोटे बच्चे के दिखाये हैं। माना जब छोटा है... क्या? तब उसने पुरुषार्थ किया है। जो पुरुषार्थ किया है वो कलंक प्राप्त करने का पुरुषार्थ है या कलंको से परे हो गया? सुनते हुये न सुनना। है तो छोटा बच्चा लेकिन जो छोटे बच्चे को कंलक लगते हैं मक्खन चुराया, गोपियों को भगाया, बच्चे पैदा किये, ऐसे-ऐसे जो गंन्दे-2 कलंक लगाए हैं, उन कलंकों पर ध्यान नहीं दिया। ऐसी स्टेज बनार्इ है बचपन में। तो उसका गायन है।

समय: 23.56-25.54
जिज्ञासु:- बाबा, संगमयुग में बाप के साथ रहना बहुत अच्छा है न?

बाबा:- अरे! फिर साकार में आने का फायदा ही क्या है? साकार में आता किसलिये है? अरे! जगदम्बा ने, जगदम्बा का इतना उंच पद प्राप्त कर लिया, ये किस आधार पर कर लिया? साकार में संग का रंग सबसे जास्ती किसने लिया? जगदम्बा ने लिया। तो सबसे जास्ती मेला किसका बड़ा लगता है? जगदम्बा का मेला बड़ा लगता है। अब वो संग का रंग बच्ची के रुप में लिया, जगदम्बा बच्ची भी है कि नहीं है? बच्ची के रुप में लिया, माँ के रुप में लिया या पत्नी के रुप में लिया, या कोर्इ भी रुप में लिया लेकिन संग तो लिया न। तो संग का रंग जरुर लगता है। और संग का रंग लगता है तो शक्ति भी मिलती है कि नहीं मिलती है? मिलती है। कोर्इ-2 बच्चे अनुभव भी करते हैं मोबाइल से, कान से इतनी दूर से कनेक्शन होता है और निराकारी स्टेज अनुभव में आने लगती है। सब भूल जाते हैं। क्या याद रह जाता है? इससे क्या सबित हुआ? एक बाप याद रह जाता है और सारी दुनिया जो नीचे गिराने वाली है वह भूल जाती है ।

समय: 26.04-26.59
जिज्ञासु:- बाबा, भक्तिमार्ग में वेदकाल में अष्ट दिगपालों को दिखाया है।

बाबा:- आठ दिगपाल कोर्इ दूसरे थोड़े ही हैं।
जिज्ञासु:- प्रश्न और है। और पुराण काल में ब्रह्मा, विष्णु, शंकर को ऊँचा दिखाया है।
बाबा:- हाँ, वो 8 दिगपालों में सबसे उंची स्टेज वाले तीन हैं। 8 दिगपाल भी उन तीनों को उंचा मानते हैं। लेकिन दिगपाल जो हैं वो फर्स्ट कैटेगरी के हैं तीन में से या सेकेण्ड विष्णु या ब्रह्मा की कैटेगरी के हैं? शंकर की कैटेगरी के हैं। (जिज्ञासु:- इसीलिए उसको पुरातन माना जाता है।) हाँ जी।

समय: 27.02-31.41
जिज्ञासु:- वार्तालाप में बोला है कोर्इ भोग भोगते भी पवित्र बनते हैं, कोई योग से पवित्र बनते हैं, कोर्इ सज़ा खा करके पवित्र बन जाते हैं ।

बाबा:- तो दोनो बातों में अंतर क्या है? अरे! एक सज़ा खा के पवित्र बनते हैं और एक ऐसा ग्रुप है जो अपना पुरुषार्थ करके पवित्र बनते हैं आठ। तो दोनों बातों में अंतर क्या पड़ जाता है? (किसी ने कहा- भोग भोगते माना क्याा?) जो सज़ायें भोग करके पवित्र बनते हैं उनका पद कम हो जाता है। जितनी जास्ती सज़ायें उतना पद कम हो जाता है। (किसी ने कहा- भोग माना सज़ा।) सज़ा हो गर्इ। सज़ा का फल मिल गया। सज़ा भी भोगते हैं, पवित्र भी बनते हैं लेकिन नुकसान क्या हो जाता है? पद नीचा हो जाता है। तो सज़ायें कम खाना अच्छा है या जास्ती सज़ायें खाना अच्छा है? और बिल्कुल सज़ाएं न खाना अच्छा है या थोड़ी बहुत सज़ायें खाना जरुरी है? :D
दूसरा जिज्ञासु:- बाबा आठ को ही सज़ा नहीं मिलेगी ना बाकि सबको सज़ा मिलती है।
बाबा:- तो पुरुषार्थ करना चाहिए ना नष्टोमोहा होने का, कि मेरा-मेरा? प्रेक्टिकल जीवन मंग भी तो ज्ञान में आने के बाद वो बात देखने में आनी चाहिए न। खुद भी अनुभव करें और देखने वाली दूसरी आत्मायें भी अनुभव करें कि इनका जीवन नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा है। ज्ञान में आने के बाद भी चिपक्कू रहे जैसे बन्दरिया बच्चे को पेट से महीने भर तक चिपकाये रहती है, तो फिर नष्टोमोहा कैसे साबित होंगे? जबकि मुरली तो ठोक-ठोक के रोज बताती है। क्या बताती है? (किसी ने कहा- नष्टोबमोहा।) नहीं। नष्टोमोहा स्मृतिलब्धा वो तो आखरी लक्ष्य है लेकिन रोज की मुरली में एक बात बतायी गर्इ है। एक शिवबाबा दूसरा न कोर्इ। अभी कितना भी मेरा-मेरा कर लें लेकिन अंत में क्या कहेंगे? क्या करेंगे? मेरा कार्इ नहीं। द्रोपदी अन्त में क्या कहती है? एक शिवबाबा दूसरा न कोर्इ। सब बेकार हैं। सारे ही स्वार्थी हैं, अपने लिए मरने वाले हैं मान मर्तबे में।
दूसरा जिज्ञासु:- वो दिन कभी आयेगा?
बाबा:- कभी आयेगा! आज बुला लो। अरे! जो आठ पुरुषार्थी होंगे वो अभी प्रत्यक्ष नहीं हो रहे हैं क्या? उन्होंने बुलाया कि नहीं बुलाया वो दिन? (जिज्ञासु – बुलाया।) तो दूसरे बुलाय सकते हैं, हम नहीं बुलाय सकते? अरे! नष्टोमोहा वाली जो स्टेज है जो दूसरो को भी देखने में आये, कोर्इ उंगली न उठा सके कि ये नष्टोमोहा नहीं हैं।
तीसरा जिज्ञासु:- टाइम तो लगता है ना बाबा?
बाबा:- जितना ज्याटदा टाइम लगेगा उतना घाटा रहेगा। (किसी ने कहा- वो तो है।) फिर? आठ के लिये तो अभी बोल दिया है कि इतना लम्बा टाइम नहीं लगेगा जितना और मणकों को टार्इम लगता है लम्बा।
तीसरा जिज्ञासु:- आठ से भी और मणकों को ज्याइदा लगता है?
बाबा:- हाँ, ये जल्दी-जल्दी प्रत्यक्ष होंगे। जिनको नंबर लेना है ले लो। 
तीसरा जिज्ञासु:- बाबा ये भी कहते हैं 100 कि माला शीघ्र बन जाती है। 8 की माला बनना मुश्किल है।
बाबा:- हाँ, उस समय बोला अभी तो नहीं बोला? जब से अष्टदेवों की बात शुरु हुर्इ है तब से तो नहीं बोला। पहले बोला।

Disc.CD No. 612, dated 10.08. 2008, at Bangalore
Part-3


Time: 19.42-22.26
Student: In the initial Avyakt Vanis it has been mentioned that Brahma became perfect, he achieved the perfect stage.

Baba: What? Who is the speaker? (Student: The soul of Brahma.) So, will the soul of Brahma speak only to the extent it knows or will it speak more than that? (Student said: But it is in the remembrance of ShivBaba, isn’t it?) Yes, it is certainly in ShivBaba’s remembrance, but will the one who is in ShivBaba’s remembrance speak only to the extent it has achieved the stage or will it speak higher than its stage? (Student: It means he will speak in the stage of basic knowledge). Will there be a difference between the language of the deities and the language that ShivBaba speaks? (Student: There wil be.) What will be the difference? (Student said something.) Yes. They (deities) will be limited only to [the topic of] dhaaranaa. Deities do not achieve accomplishment (siddhi) in Yoga in this life. And they do not achieve accomplishment in knowledge until they enter the seed form souls either. They will achieve accomplishment only after taking the support of the seed form souls. And they will achieve accomplishment only to the extent those seed form souls [whose body they enter] achieve [accomplishment]. They will not [achieve accomplishment] more than that. They become partners. They are partners in making purushaarth as well. For example the souls of Ram and Krishna are companions for many births. On this stage like world, one plays the role of the creator and the other plays the role of the creation. Are a Father and children partners in a company or shop or not? They are partners.
Student: So, just as it is applicable to the souls of Ram and Krishna, every seed form and root form souls...
Baba: Definitely. There is a connection between every creator and creation. One is the creator, the controller and the other is the creation, the one who is controlled. So, what is it better to become? It is better to become a creator.
Student: Until the soul ... the cycle of 84 births…
Baba: ... completes its cycle...
Student: It should complete the cycle as well as gain complete victory.
Baba: How can it gain victory unless it becomes experienced?
Student: When he himself gains victory then he will be called conqueror of nature.
Baba: Yes, yes.

Time: 22.30-23.51
Student: Baba, Baba says that all the praises and glories in the scriptures pertain to the Confluence Age, don’t they? Krishna is shown as a small child, isn’t he?

Baba: Krishna is shown to be young. He is praised more. Is the older Krishna shown to be worshipped more or is he worshipped less? Are the acts (caritra) of the young child shown more or [are the acts] of the older child shown more? They have been shown [more acts] of the young child. It means when he is small... What? He made purushaarth at that time. Is it the purushaarth of bearing disgrace (kalank) or has he gone beyond disgraces? Not hearing while listening. He is a small child, but he did not pay attention to the dirty accusations levelled against him that he stole butter, made the gopis ( herd girls) to elope, gave birth to children. He achieved such a stage in the childhood. So, he is praised.

Time: 23.56-25.54
Student: Baba, it is good to be with the Father in the Confluence Age, isn’t it?

Baba: Arey! Then what is the use of His coming in a corporeal form? Why does He come in a corporeal form? Arey! Jagdamba achieved such a high postion of Jagadamba; on what basis did she achieve it? Who was coloured by the company in the corporeal form the most? Jagdamba. So, whose biggest fair is organised t? A big fair of Jagdamba is organized. Well, whether she was coloured by the company in the form of a daughter; is Jagdamba also the daughter or not? [Whether] she was coloured [by the company] in the form of a daugher, in the form of a mother, in the form of a wife or in any other form, but she was certainly coloured, wasn’t she? So, the colour of the company is definitely applied. And when the colour of the company is applied then do you also receive the power or not? You receive it. Some children experience through mobile; they get a connection [with the Father] through the ear from such a long distance and they start experiencing the incorporeal stage. They forget everything. What do they remember? What does it prove? They remember the one Father and forget the entire world that brings downfall.

Time: 26.04-26.59
Student: Baba, in the path of Bhakti, in the Vedic period, the eight digpaal (protectors/guards of eight directions) have been depicted.

Baba: The eight digpaal are none else.
Student: The question is not complete. In the Pauranic period Brahma, Vishnu and Shankar have been depicted to be higher.
Baba: Even among those eight digpaals three [personalities] are in the highest stage. The eight digpaals also consider those three to be high. But do the eight digpaals belong to the first category among the three or do they belong to the second category of Vishnu or the category of Brahma? They belong to the category of Shankar. (Student: This is why they are considered ancient.) Yes.

Time: 27.02-31.41
Student: It has been said in a discussion that some become pure by enjoying pleasures, some become pure through Yoga and some become pure by suffering punishments too.

Baba: So, what is the difference between both? Arey! One kind [of souls] become pure by suffering punishments and the other group is such that they become pure by making purushaarth; the eight [deites]. So, what is the difference between both the ways? (Student: What does ‘by enjoying pleasures’ mean?) The postion is reduced in case of those who become pure by suffering punishments. The more the punishments [they suffer] the more the reduction in their postion [takes place]. (Student: Pleasure means punishment.) It is a punishment. They received the punishment as a result [of actions]. They suffer punishments as well as become pure. But what is the loss? The postion is reduced. So, is it good to suffer less punishment or more punishments? And is it better to suffer no punishment or is it necessary to suffer punishments to some extent?
A second student: Baba, only the eight [deities] don’t suffer punishments, the rest suffer punishments.
Baba: So, you should make such a purushaarth to become nashtomohaa , shouldn’t you? Or should you [say:] My, my ? That thing should be visible even in the life in practice after entering the path of knowledge, shouldn’t it? He should experience it himself and the other souls who see him should also experience that his life is nashtomohaa smritilabdhaa . If someone sticks [to the lokik relatives] even after entering the path of knowledge - just as a female monkey keeps its [dead] child stuck to her abdomen (body) for a month - how will he be proved to be detached? Whereas the Murli says strictly everyday. What does it say? (Someone said: Nashtomohaa.) No. Nashtomoha smritilabdhaa, that is the final goal. But one point is mentioned in the Murlis everyday. One ShivBaba and no one else. Someone may say ‘my my’ to any extent now, but what will they say in the end? What will they do? No one is mine. What does Draupadi say in the end? One ShivBaba and no one else. Everyone is useless. Everyone is selfish. They are the ones who work hard for themselves, for their own respect and honour.
The second student: When will that day come?
Baba: When will it come! Bring it today. Arey! Are the eight purushaarthis not being revealed now? Did they bring that day or not? (Student: They brought it.) So, when others can bring, can’t we bring? Arey! The stage of nashtomohaa should be visible to others as well. Nobody should be able to raise a finger that this one is not nashtomohaa.
Third student: Baba, it takes time, doesn’t it?
Baba: You will suffer more loss if you take more time. (Student: That is true.) Then? It has been said for the eight that it will not take as much long time for them that it takes for others [to be revealed].
The third student: Do the beads other than the eight take more time?
Baba: Yes. They will be revealed in a quick succession. Whoever wants to take the number (rank) can take it. 
The third student: Baba also says that the rosary of hundred is formed soon. It is difficult to form the rosary of the eight.
Baba: Yes, it was said at that time. It was not said now, was it? It has not been said ever since the topic of the eight deities has started? It was said earlier. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 13 Oct 2014

वार्तालाप नं 612, दिनांक 10.08.2008, बैंगलोर
भाग-4


समय: 31.45-34.27
जिज्ञासु:- बाबा अभी छोटी मम्मी विदेश में है न।

बाबा:- तो? अच्छे-2 जो पुरुषार्थी और अच्छे-2 जो भारत के जहीन बच्चे हैं, अच्छे-अच्छे पढ़ार्इ लिखार्इ पढ़ने वाले हैं, वो सब विदेश में जा रहे हैं या स्वदेश में हैं? (जिज्ञासु-विदेश में जा रहे हैं।) तो ऐसे ही वो भी अच्छा बच्चा है। जो बाप को प्रत्यक्ष करने वाले हैं विदेशी, उनकी सेवा में लगा हुआ है। हाँ, तो आप पूछने वाले क्या थे?
जिज्ञासु:- ब्राड ड्रामा में उसका पार्ट क्या होगा?
बाबा:- अरे! ऊँचा काम करेगा तो राजधानी में ऊँचा पद नहीं मिलेगा? सबसे ऊँचा काम क्या है? बाप को प्रत्यक्ष करना।
दूसरा जिज्ञासु:- स्थूल विदेशी बाप को प्रत्यक्ष करेंगे या भारत के विदेशी?
बाबा:- जो भारत के विदेशी हैं वो स्थूल नहीं है? (जिज्ञासु - स्थूल में हैं।) स्थूल में हैं न। (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) तो क्या हुआ? जो आखरी प्रत्यक्षता होगी वो दुनिया के 500 करोड़ के हिसाब से होगी या भारत के अन्दर ही होगी? जो भारत के अन्दर प्रत्यक्षता होनी थी वो तो हो रही है।
दूसरा जिज्ञासु:- माना ये अपनी नम्बर से करेंगे वो अपने नम्बर से करेंगे।
बाबा:- हाँ जी।
जिज्ञासु:- एक सी.डी. में बताया बाबा कि भारत के विदेश से स्वदेशी ...।
बाबा:- स्वदेशी जल्दी प्रत्यक्ष होंगे?
जिज्ञासु:- उन लोग ही बाप को प्रत्यक्ष करेंगे, स्वंदेशी।
बाबा:- स्वदेशी प्रत्यक्ष करेंगे? विदेशी नहीं करेंगे ऐसा कहीं बोला? माताजी को कोर्इ नर्इ पढ़ार्इ पढ़ाने लगा। (कोर्इ ने कहा - स्वदेशी आने से जल्दी-जल्दी निकलेगा।) हाँ, भारत के जो हैं मूढ़ बुद्धि वो विदेशों की खोज को, अविष्कार को जल्दी मानते हैं या भारतवसियों के अविष्कार को जल्दी मानते हैं? विदेशियों के अविष्कार को मानते हैं। उनकी टेंडेन्सी ऐसा बन गर्इ। घर का जोगी जोगिया और आन गांव का सिद्ध। घर की मुर्गी दाल बराबर। विदेश से आवाज निकलेगी तब दिल्ली उसको रिसीव करेगी। भारत में आवाज निकलेगी नहीं मानेंगे।

समय: 34.49-45.32
बाबा:- एक प्रश्न आया है जो शारीरिक मेहनती तबक्का है, चाहे भारत में हो और विदेश में हो, शारीरिक मेहनती बहुत हैं। मेहनतकश हैं और बहुत मेहनत करते हैं, वो कौन हैं? भारत के किसान। कौन? भारत के किसान। ऐसे मजदूर वर्ग भी है। लेकिन मजदूरों से भी जास्ती मेहनत करने वाले कौन हैं? भारत के किसान और ज्यादा घाटे में कौन हैं? भारत के किसान ही ज्यादा घाटे में हैं। आज कहीं बड़े-बड़े ऑफिस में चले जाओ, कोर्इ बड़े-बड़े कल-करखानों में चले जाओ, कहीं भी जाकरके देखो, जो ज्यादा मेहनत करने वाले होंगे वो घाटे में रहते हैं या फायदे में रहते हैं? (सभी ने कहा-घाटे में।) उनसे और ज्यादा काम लिया जाता है। जो गुण्डे बन करके रहते हैं, मेहनत कुछ नहीं करते और ही दूसरे के उपर अधिकार जमाते रहते हैं वो फायदे में रहते हैं। ऐसी हालत आज के भारत के किसानों की है। बहुत मेहनत करते हैं। लेकिन किसानों के उपर कर्जा चढ़ता ही चला जाता है। (कोर्इ ने कहा- सरकार तो माफ कर रहा है ना अभी।) सबका माफ होता है क्या? कि जिनकी चालू हालत है, जो चालू हैं उन्हीं का माफ होता है?

किसान की स्थिति भारतवर्ष में गिरती जा रही है या उठती जा रही है? भारत में 70 परसेन्ट किसान हैं वो 70 परसेन्ट किसान साहूकार बनते जा रहे हैं या और ही गरीबी की रेखा से नीचे होते जा रहे हैं? किसान ज्यादा भुखमरी से मर रहे हैं या दूसरे वर्ग वाले ज्यादा भूखमरी से मर रहे हैं?
(किसीने कहा – किसान।) तो प्रश्न है किसान सबसे जास्ती मेहनत करते हैं। तो बेहद के अर्थ में किसान कौन हैं? (किसी ने कहा- प्रेक्टिकल पार्टी।) नहीं, प्रेक्टिकल पार्टी तो है, प्रेक्टिकल पार्टी में क्या शारीरीक मेहनत करने वाले नहीं हैं क्या? कौन हैं? (किसी ने कुछ कहा।) कया? चन्द्रवंशी? वो शारीरीक मेहनत ज्यादा करते हैं? ज्ञान सुनाने की मेहनत नहीं करते? (किसी ने कहा- करते हैं, फिर भी दूसरे धर्मों से दबाया जा रहा है।) हाँ, जो बेसिक में हैं, वहां से भी दबाये जा रहे हैं और एडवांस ज्ञान तो वो पकड़ते ही नहीं। उन किसानों की बात छोड़ दो वो भी हद में हैं या बेहद में? बेसिक वाले जो किसान हैं उनको हद के किसान कहेंगे या बेहद के किसान कहेंगे? (किसीने कहा – बेहद के।) बेहद के कहेंगे? उन्हें बेहद का ज्ञान है? (कोर्इ ने कहा - दुनिया के हिसाब से...) हाँ, दुनियां के हिसाब से और यहाँ ब्राह्मणों के दुनिया के हिसाब से?

जो बेहद के किसान हैं उनकी भी यही हालत है। कर्मणा सेवा बहुत करते हैं लेकिन कर्मणा सेवा का जो उजूरा मिलना चाहिए, वो उजूरा उनको प्राप्त नहीं होता है। जो मजदूर तबक्का है उनमें कन्ट्रोलर भी बैठे हुए हैं। लेकिन किसानों में कोर्इ के उपर कन्ट्रोल करने की टेडेन्सी नहीं है। अपनी मेहनत करते हैं, अपना कमाते हैं, और कर्ज के ऊपर कर्ज चढ़ाते चले जाते हैं। उनको न ज्ञान का पेय उतना मिलता है और न याद का भोजन उतना मिलता है । वो कौन सा तबक्का है? अच्छा, ब्राह्मणों में अधर कुमार भी हैं, कुमार भी, कुमारीयाँ भी हैं, अधर कुमारियाँ भी हैं। सबसे जास्ती मान मर्तबा लेने वाला ग्रुप कौन सा है? चारों में? कुमारियाँ। र्इश्वर के तरफ से भी उनको बहुत प्रिफरेन्स मिलता है और जो ब्राह्मण परिवार है वो भी उनको बहुत रिगार्ड देता है। लेकिन जो निकलने वाले जिज्ञासु हैं जिनको बाबा ने कहा है सार, मक्खन वो कुमारियों के द्वारा ज्यादा निकल रहे हैं या अधर कुमारियों के द्वारा ज्यादा निकलते हैं?


(किसीने कहा – कुमारियों के द्वारा।) हे! मुरली में रिजल्ट दे दिया है। अन्दर वाले रह जावेंगे और बाहर वाले ले जावेंगे। और भी बोला हुआ है माताएं कृष्ण के मुख में मक्खन देती हैं। ये बोला अधर कुमार देते हैं? अधर कुमार अगर करेंगे भी मक्खन निकालने की सेवा, सेवाधारी बच्चे निकालेंगे भी वारिसदार तो उनको अपने कन्ट्रोल में करने की ज्यादा हुज्जत रहती है क्योंकि स्वभाव से ही दुर्योधन हैं। या तो कुमारियों, की माताओं की सेवा करेंगे तो उनको अपने प्रभाव में लेने की ज्यादा हुज्जत करेंगे कि हमारे कन्ट्रोल में बनी रहें। तो सबसे ज्यादा घाटे में चारो में से कौन हैं? अरे! अधरकुमार? अधरकुमारों को तो अपनी गृहस्थी का चक्कर लगा रहता है। वो ज्ञान की खेती ज्यादा कर पाते हैं या उनके मुकाबले कुमार ज्यादा स्वतंत्र हैं? कुमार ज्यादा स्वतंत्र हैं। लेकिन उनको प्रिफरेंन्स कुछ भी नहीं मिलता। ऐसे भी नहीं उनको सरेण्डर करके समझा जाए। क्या? बाबा उनको क्या कहते हैं? अपन को सरेण्डर खुद समझो। सरेण्डर माने नहीं जायेंगे। क्योंकि खग्गाै मछली का पार्ट बजाने वाले हैं। आज बड़े तेजी से तैर रहे हैं ज्ञान के तेल में लेकिन कब उखड़ करके बाहर गिर पड़ें ये पता ही नहीं चलता।

तो सेवा शारीरीक मेहनत सबसे जास्ती कुमार कर रहे हैं। ज्ञान की भी करते हैं, ज्ञान की खेती भी करते हैं, लेकिन प्रिफरेन्स उनको कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाता। इसलिये रिजल्ट क्या होता है? कुमारियाँ परसेन्टेज में ज्यादा जिन्दा हैं ज्ञान में। अधर कुमारियाँ भी ज्यादा जिन्दा हैं, भले बन्धन में हैं, अधर कुमार भी ज्यादा जिन्दा रहते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा माया मौत किनकी लाती है? कुमारों की। और दुनिया में भी सबसे जास्ती मरते कौन हैं? किसान मरते हैं न, जो ज्यादा शारीरीक मेहनत करने वाले हैं। वो ही मर रहे हैं। भुखमरी से भी मर रहे हैं। और अभी तो अकाल पड़ने वाला है। क्या होगा अकाल में? एक बूंद पानी का भी नहीं मिलेगा। माया ऐसी हालत बनाय देगी। एक-एक अन्न का दाना के लिए लोग तरसेंगे। नोटों की गड्डियाँ काम नहीं आवेंगी।


Disc.CD No. 612, dated 10.08. 2008, at Bangalore
Part-4


Time: 31.45-34.27
Student: Baba, now the junior mother is in the foreign countries (videsh), isn’t she?

Baba: So? Are all the nice purushaarthii, the intelligent children of India, the students who study well going abroad or are they living in swadesh ? So, similarly she is also a nice child. She is engaged in serving the foreigners who are going to reveal the Father. Yes, so what were you asking?
Student: What will be her part in the broad drama?
Baba: Arey! If someone performs a high task, then will he not get a high postion in the capital? What is the highest task? To reveal the Father.
Another student: Will the physical videshis (foreigners) reveal the Father or the videshis of India?
Baba: Aren’t the videshis of India physical? (Student: They are physical.) They are in physical, aren’t they? (Student said something.) So, what happened? Will the final revelation take place from the point of view of a world of five billion (500 crores) or will it take place only in India? The revelation that was to take place in India is taking place.
The other student: It means that these (videshis of India) and those (foreigners abroad) will reveal [the Father] on their time.
Baba: Yes.
Student: Baba it is said in a CD that from the foreign of India, the Indians…
Baba: Will the swadeshis be revealed soon?
Student: They, the swadeshis themselves will reveal the Father.
Baba: Will the swadeshis reveal Him? The videshis will not reveal Him? Has this been said anywhere? Someone has started teaching a new knowledge to mataji. (Someone said: When the swadeshis come, the revelation will take place faster.) Yes, do the ignorant people of India accept the inventions, discoveries of the foreign countries sooner or do they accept the inventions of the Indians sooner? They accept the inventions of the foreigners [soon]. It has become their tendency. A prophet is seldom honoured in his own land. The chicken cooked at home is like a curry of pulses. Delhi will receive the sound when it comes from the foreign countries. When the sound emerges in India, they won’t accept it.

Time: 34.49-45.32
Baba: A question has been asked. The physically hardworking section, whether it is in India or abroad, they work very hard through their body. They are hard working people and they work very hard; who are they? The farmers of India. Who? The farmers of India. In a way there is the labourer class as well. But who works harder than the labourers? The farmers of India. And who suffers more loss? The farmers of India themselves suffer more loss. Nowadays you may go to any big office, any big factory, you may go anywhere and see, do those who work hard suffer loss or do they reap benefits? (Everyone said: They suffer loss.) They are made to work even more. Those who act like bullies (gunde), who do not make any effort and keep dominating others, they reap benefits. This is the condition of today’s farmers of India. They work very hardbut keep on accumulating debts. (Someone said: The Government is exempting [them] from the loan, isn’t it?) Is it exempted in case of everyone? Or is it exempted only in case of those in a good working order?

Is the condition of the farmers in the India deteriorating or is it rising? 70 percent of the Indian population is farmers. Are those 70 percent farmers becoming prosperous or are they going below the poverty line? Are the farmers dying of starvation or are the people of the other sections dying of starvation more?
(Someone said: The farmers.) So, the question is that the farmers work hard the most. So, who are the farmers in the unlimited? (Someone said: Practical party.) No, the practical party is certainly there; are there not people who work hard physically in the practical party? Who are they? (Someone said something.) What? The Chandravanshis? Do they work hard physically more? Don’t they make the efforts to narrate knowledge? (Student: They make, even then they are being supressed by the other religions, aren’t they?) Yes, those are in the basic [knowledge] are also suppressing them. And they do not grasp the advance knowledge at all. Leave the topic of those farmers. Are they also in the limited [farmers] or in the unlimited [farmers]? Will the farmers in the basic knowledge be called the limited farmers or the unlimited farmers? (Someone said: The unlimited farmers.) Will they be called the unlimited [farmers]? Do they have the unlimited knowledge? (Someone said: From the point of view of the world...) Yes, from the point of view of the world and what about the point of view of the Brahmin world here?

The unlimited farmers are also facing the same condition. They do a lot of physical service, but they do not receive the returns (ujuraa) for the physical service that they should receive. There are controllers sitting even among the labourers class. But there is no tendency of controlling someone among the farmers. They make their own efforts; they earn their own income and they go on accumulating debts. They neither get much water of knowledge nor much food of remembrance. Which is that section? Acchaa! There are adharkumaars (men who are married and lead a pure life), kumaars (bachelors), kumaaris (virgins) as well as adharkumaaris (women who are married and lead a pure life) among the Brahmins. Which group receives the maximum respect and honour among all the four? The kumaaris. They receive a lot of prefercence from God. And the Brahmin family also gives a lot of regard to them. But the students who emerge [in knowledge], for whom Baba has said that they are the essence, the butter, are they emerging through the kumaaris or through the adharkumaaris more?


(Someone said: Through the kumaaris.) No. The result has been given in the Murli: The insiders will lag behind and the outsiders will take away [the inheritance]. It has also been said that the mothers put the butter in Krishna’s mouth.  Has it been said that the adharkumaars put it? Even if the adharkumaars do the service of taking out the butter, even if they bring [the serviceable heir children in knowledge], they attempt to bring them under their control because they are Duryodhans by nature. If they serve the virgins or mothers, they will attempt more to bring them under their influence [they think] they should remain under our control. So, who suffers the maximum loss from among the four [groups]? Arey! Adharkumaars? Adharkumaars are worried about their household. Are they able to plough the fields of knowledge more or are the kumaars more independent when compared to them? Kumaars are more independent. But they do not get any preference at all. It is not that they are considered to be surrendered either. What? What does Baba tell them? Consider yourself to be surrendered. They will not be considered to be surrendered because they play the part of a khaggaa fish . They swim very swiftly today in the oil of knowledge. But one cannot know when they will fall out of it.

So, it is the kumaars who are doing the maximum service and physical hard work. They serve through knowledge as well, they do the farming of knowledge as well, but they do not receive any preference. This is why what is the result? Kumaaris are alive in knolwedge in a greater percentage. Many adharkumaaris are also alive although they are in bondage; many adharkumaars also remain alive, but whom does Maya kill the most? The kumaars. And who die the most in the world? The farmers die, don’t they? They do more physical hard work. It is they who are dying. They are dying of starvation as well; and there is going to be a drought now. What will happen in the drought? You will not get even a drop of water. Maya will make your situation like this. People will long for a single grain of food. Bundles of notes will be of no use.
... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 14 Oct 2014

वार्तालाप नं 612, दिनांक 10.08.2008, बैंगलोर
भाग-5


समय: 45.36-50.35
जिज्ञासु:- युगादि का बेहद में क्या अर्थ है?

बाबा:- नया युग आदि होता है, तो नये युग का नाम क्या है? नये युग का नाम क्या है? सतयुग। और सतयुग की आदि सन् 36 से मानी जाए या उससे पहले ही तारीख शुरु हो जाती है? (किसी ने कहा- 18 से शुरू हो जाती है।) हाँ, पहले से ही नर्इ तवारीख शुरु हो जाएगी नर्इ दुनिया की। यानि पहले ही नर्इ दुनिया का फाउन्डेशन और उद्घाटन हो जाता है। उसकी यादगार में हम क्या मनाते हैं? पहला महीना का नाम क्या है? चैत्र मास। तो हमारा ये भी युगादि है। चेत जाओ। चैत्र मास में क्या हो जाओ? चेत जाओ। चैतन्य आत्मा बन जाओ। मुर्दापन खत्म हो जाये।
जिज्ञासु:-गुड़ और नीम का पत्ता उसका बेहद का अर्थ क्या है?
बाबा:- गुड़ और नीम का पत्ता, क्या मतलब? क्या करते हैं उसका? गुड़ और नीम को क्या करते हैं? युगादि में नीम का पत्ता कडुआ और गुड़, माने मीठा...। (किसीने कहा- इमली) और खट्टा। खट्टा भी , मीठा भी और कडुआ भी। मुँह खट्टा कर दिया, मुँह मीठा कर दिया। वाह भाई! कहते हैं न। और कडुआ मुँह हो जाता है कडुई चीज खाने से। तो कैसे मुँह करते हैं?

तो ये तीन प्रकार के बच्चे भी हैं। तीन प्रकार के रंग देने वाले है दुनिया में, कोर्इ खट्टा मुँह कर देंगे। कोर्इ ऐसे पुरुषार्थी भी हैं जो मीठा मुँह करेंगे। क्या? कोर्इ कडुआ मुंह करेंगे, कोर्इ मीठा मुँह करेंगे, कोर्इ खट्टा मुँह कर देंगे। अच्छे बच्चे कौन से हुए? जो मीठा मुँह करें। तो तीन प्रकार के हैं। हमारी ब्राह्मणों के दुनिया में ही होंगे या बाहर होंगे? ब्राह्मणों के दुनियां में ही होंगे। कौन-2?
(कोर्इ ने कहा- सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी।) सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी और? (किसी ने कहा- इस्लाोम।) नहीं इस्लाम वंशी कैसे? (कोर्इ ने कहा- सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी मीठा बनाने वाले हैं।) सूर्यवंशी मीठा बनाने वाले हैं? (कोर्इ ने कहा- अन्त में तो रिजल्ट होगा ।) नहीं।

तीन पार्टियाँ हैं एडवांस पार्टी में। एक प्रैक्टिकल पार्टी मुख मीठा कर देगी। क्या? प्योरिटी में मिठास होता है या इम्प्योरिटी में मिठास होता है? प्योरिटी में मिठास होगा। मीठा मुंह करेंगे। एक है असल फर्रख्खाबादी। कैसा मुंह कर देंगे? कड़वी दवार्इ है। कडुआ मुंह कर देंगे। ऐसे पेड़ों में सबसे ज्यादा अच्छा वायब्रेशन बनाने वाला कौन सा पेड़ है? नीम। हैं तो अच्छार्इ के लिये लेकिन जब उनको चबाया जाता है तो कैसे लगते हैं? बहुत कड़वे लगते हैं। हैं गुणदायी। ऊपर से कडुए और अन्दर से फायदेमन्द। सबसे जास्ती फायदेमन्द। और एक हैं मुंह खट्टा कर देंगे। ऐसी-2 परिक्षायें लेने के निमित्त बनेंगे कि सारा संगमयुग का पुरुषार्थ बेकार नज़र आयेगा।


समय: 50.42-52.30
जिज्ञासु:- बाबा, अमृतवेले में बाबा को याद करना हो तो इमर्ज करके याद करना चाहिए, मिनी मधुबनों में याद करना चाहिए या कम्पिल में याद करना चाहिए, कौन सा अच्छा है बाबा?

बाबा:- एक बात और रह गर्इ, सम्मुख बैठ करके अमृतवेले याद किया जाय सो ज्यादा अच्छा या कम्पिल में याद किया जाय या दूसरे मधुबन में याद किया जाए या घर में बैठ करके अमृतवेले इमर्ज करके याद किया जाए वो अच्छा? आपने बढ़िया ते बढ़िया क्यों छोड़ दिया? (जिज्ञासु-सन्मुरख हमेशा नहीं मिलता है ना।) दुनिया में अप्राप्त कौन सी वस्तु है? ब्राह्मणों के खजाने में ऐसी कोर्इ चीज नहीं है जो अप्राप्त हो।
दूसरा जिज्ञासु:- बसप्पा भार्इ को साथ में टूर लगाना है।
बाबा:-अच्छा-2 । हाँ जी । टूर भी थोड़े दिन का होता है या सदा काल का होता है? (जिज्ञासु – थोड़े दिन का।) तो फिर? चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात। आखरी ट्रेन चलेगी और उस आखरी ट्रेन चलते समय जिनको ट्रंक काल आवेगा और बाप के पास पहुँच जावेंगे वो स्टेज तो सदाकाल के लिए ऊँची स्टेज हो जावेगी।

समय: 52.38-53.03
जिज्ञासु:- बाबा, माउंन्ट आबू में घर बनाना बहुत फायदा है न अभी?

बाबा:- हाँ, लो! जहां भगवान आकरके पढ़ार्इ पढ़ाता हो वो भगवान का जो घर है वो ऊँची स्टेज वाला नहीं है? तो वहाँ रहने वालों की ऊँची स्टेज नहीं बनेगी? बनेगी।

समय: 53.25-56.01
जिज्ञासु:- बाबा, भक्तिमार्ग में कहते हैं मनमथ आकरके शंकर की तपस्या बन्द कर देता है। इसका बेहद में अर्थ क्या है?

बाबा:- मनमथ, मनमथ माने काम देव। कामदेव आकरके शंकर की परीक्षा लेता है। परीक्षा तो सबकी होती है। अकेले शंकर की होती है क्या? नहीं। परीक्षा तो काम देव सबकी लेता है। लेकिन विशेष बात क्या है? जो सबमें नहीं होती है एक शंकर में होती है? क्या होती है? परीक्षा तो सबकी हो भले लेकिन परीक्षा का रिजल्ट काम देव भस्म हो जाय। जल भुन के राख हो जाए। क्या? ऐसा कर्म करे जो काम देव जल करके, भुन करके राख हो जाए, भस्म हो जाए। राख, कुछ भी न कर सके। ऐसी स्टेज बनाय लेना।
दूसरा जिज्ञासु:- फिर भी अन्त में कहा जाता है रति माँग लेते हैं शंकर से। रति पति के लिये फिर मांग करती हैं।
बाबा:-तो कार्इ मांगता है तो उसे देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए? अरे! कोर्इ भिखमंगा है भगवान के सामने जा करके भीख मांगता है तो उसे कुछ न कुछ देना चाहिए या नहीं देना चाहिए? देना चहिए। तो उसे भी मिल जाता है। होई है काम अनंग। क्या? चलो हमने जिंदा कर दिया। (जिज्ञासु- द्वापर के बाद।) हाँ, नर्इ दुनिया में होगा लेकिन अंग नहीं होगा। काम विकार की मार करने वाला वहां अंग काम ही नहीं करेगा। काम विकार होगा नहीं तो सतयुग में बच्चे पैदा होंगे कि नहीं होगें? होंगे। कैसे होंगे? अनंग स्टेज होगी।

Disc.CD No. 612, dated 10.08. 2008, at Bangalore
Part-5


Time: 45.36-50.35
Student: What is the unlimited meaning of yugaadi?

Baba: What is the name of the New Age that begins? What is the name of the New Age? The Golden Age (Satyug). And should the beginning of the Golden Age be considered from the year 1936 or does the date begin even before that? (Someone said: It begins from 18.) Yes. The new date of the new world will begin already before . It means that the [laying of the] foundation for the new world and its inauguration takes before itself. What do we celebrate in its memorial? What is the name of the first month? The month of Caitra. So, this is also the beginning of our age (yugaadi). Become conscious (cet jaao). What should you become in the month of Caitra? Become conscious . Become a living soul (caitanya aatmaa). The corpse like nature (murdaapan) should end.
Student: What is the unlimited meaning of jaggery (gur) and neem leaves?
Baba: Yes, what is meant by jaggery and neem leaves? What is done with it? What is done to jaggery and neem? In yugaadi... the neem leaves [means] bitter and jaggery means sweet ... (Someone said: Tamarind.) …and sour. There is sourness, sweetness as well as bitterness. People say “you have made the mouth sour; you have made the mouth sweet, wow, brother!” (Baba is showing with facial expressions), don’t they? And how do they make their face when the mouth becomes bitter, when they eat a bitter thing?

So, there are three kinds of children as well. They give three kinds of colours to the world; some will make your mouth sour; some are such purushaarthi who will make the mouth sweet. What? Some will make the mouth bitter; some will make the mouth sweet and some will make the mouth sour. Who are the nice children? The ones who make the mouth sweet. So, there are three kinds [of children]. Will they be in our Brahmin world itself or will they be outside? They will be in the Brahmin world itself. Who all [are they]?
(Someone said: Suryavanshi , Chandravanshi) Suryavanshi, Chandravanshi and...? (Someone said: Islamvanshis .) No. How are they the Islamvanshis? (Student: Suryavanshis, Chandravanshis make the mouth sweet.) Are the Suryavanshis the ones who make [the mouth] sweet? (Student: The result will be [good] in the end, won’t it?) No.

There are three parties in the Advance Party; one is the practical party that will make the mouth sweet. What? Does purity have sweetness or does impurity have sweetness? There will be sweetness in purity. They will make the mouth sweet. One kind [of people] are the true Farrukhabadi (residents of Farrukhabad). How will they make the mouth? It is a bitter medicine. They will make the mouth bitter. As such, which tree among the trees creates the best atmosphere? The neem [tree]. It is for goodness. But when it is chewed, how does it taste? It tastes very bitter. It is beneficial. They are bitter outwardly, but beneficial inside. They are the most beneficial ones. And the other kind [of people] is such that they will make the mouth sour. They will become instruments to test us in such ways that the entire purushaarth of the Confluence Age will appear to be a waste.


Time: 50.42-52.30
Student: Baba, when we remember Baba at Amrit Vela , should we bring Him [in front of us] and remember, should we remember Him at the mini-Madhubans or in Kampil? Which one is better, Baba?

Baba: One more topic was left; Is it better to remember Him sitting face to face at Amrit Vela or is it better if you remember Him at Kampil , at other Madhubans or bring [ Him] in front of you at Amrit Vela sitting at home? Why did you leave the best option? (Student: We don’t find Him face to face always, do we?) Which is the thing that is unachievable in the world? There is nothing that is unachievable in the treasury of the Brahmins.
Another student: Brother Basappa wants go on tour with [Baba].
Baba: Acchaa, Acchaa. :D Yes. Does the tour also last for a few days or forever? (Student: For a few days.) So? It is moonlight for four days and then a dark night again. The last train will start; those who get a trunk call (telegram) when the last train starts and will come to the Father, that stage will become the high stage forever.

Time: 52.38-53.03
Student: Baba, it is very beneficial to build a house at Mount Abu now, isn’t it?

Baba: Yes, lo! The place where God comes and teaches, God’s house in a high stage? So, will those who live there not achieve a high stage? They will achieve.

Time: 53.25-56.01
Student: Baba, it is said in the path of Bhakti that Shankar’s tapasya was stopped by Manmath. What is its unlimited meaning?

Baba: Mammath. Manmath means the deity of lust (kaamdev); Kaamdev comes and tests Shankar; everyone is certainly tested. Is it Shankar alone? No. Kaamdev tests everyone. But what is the specialty that is not present in everyone but in Shankar alone? What is it? Everyone undergoes the test, but the result of the test should be that Kaamdev is reduced to ashes. He should be burnt to ashes. What? He should perform such actions that Kaamdev is burnt to ashes. Ash. He should not be able to do anything. He should achieve such a stage.
Another student: However it is said in the end that Rati takes him back from Shankar. Rati requests for her husband [to be brought back to life].
Baba: If someone asks [for something], then should he be given that or not? Arey! If a beggar seeks alms from God, then should he be given something or not? He should be given [something]. So, she gets it, too. Lust becomes bodiless (Kaam anang). What? [Shankar says:] Alright, I brought him back to life. (Student: After the Copper Age...) Yes, he will be present in the new world; but the organ will not be present. The organ that causes the attack of lust will not at all work there. The vice of lust will be there. Otherwise, will children be born in the Golden Age or not? They will be born. How will they be born? The stage will be [like the one] without a body. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 15 Oct 2014

वार्तालाप नं 612, दिनांक 10.08.2008, बैंगलोर
भाग-6


समय: 56.16-01.02.42
बाबा:- एक प्रश्न आया है- सदैव निश्चय बुद्धि होने के लिए क्या करें?
उत्तर:-
(किसी ने कहा- बाप की याद।) लेकिन याद भी कौन करेगा? हो अनिश्चय बुद्धि, घड़ी-2 उसको बाप के पार्ट के उपर अनिश्चय आता हो, ऐसा कैसा बाप हो सकता है। बाप भी ऐसा होता है क्या? तो याद करेगा या बुद्धि दूर भगेगी? वो तो बुद्धि दूर भाग जायेगी। याद में भी विजयी कौन होगा? जो निश्चय बुद्धि होगा वही विजयी होगा। तो निश्चयबुद्धि कैसे हुआ जाय? क्या करें जो निश्चय बुद्धि हो जाए? (कोर्इ ने कहा- मुरलीधर से प्यार माना मुरली से प्यार।) हाँ। नहीं, प्यार भी तो उसी से होता है जिसके गुण बुद्धि में बैठें। और जिसके अवगुण बुद्धि में बैठेंगे उससे प्यार पैदा होगा? नहीं होगा। तो निश्चय बुद्धि कैसे बने सवाल ये है।
जिज्ञासु:- बाबा के मुरली में तो अवगुण नहीं होंगे । मुरली से प्यार माना मुरलीधर से प्यार।
बाबा:- मुरली किसे कहते हैं? (जिज्ञासु-बाबा की बात, श्रीमत।) अरे! बाबा को नहीं पहचाना तो मुरली कैसे? कागज की मुरली को मुरली कहें? (जिज्ञासु-कागज़ की हो या सी.डी हो...) अच्छा! कागज की हो तो भी चलेगा? (किसी ने कहा- वो भी थर्ड क्लास मुरली कहा जायेगा।) तो थर्ड क्लास मुरली अगर बी.के. लोग पढ़ते हैं उनका प्यार हो जाय कागज की मुरली से तो काम चल जायेगा? (किसीने कहा- कागज की मुरली से प्याीर नहीं चलेगा।) तो फिर? बात खत्म हो गर्इ। मुरली से प्यार माना मुरलीधर से प्यार। और मुरली भी फर्स्ट क्लास चाहिए। क्या? थर्ड क्लास और सेकेण्ड क्लास नहीं। फर्स्ट क्लास मुरली कौन सी है? जो सन्मुख मुख के सामने प्रेक्टिकल साकार में आकरके बाप सुनावे। तो साकार में बाप सुनाय रहा हो उस बाप के उपर पहचान होनी चहिए कि नहीं? (सभी ने कहा-होनी चाहिये।) तो मुख्य बात है पहचान। क्या? ऐसी पक्की पहचान जो दुनिया में कोई हमको डिगा न सके। पक्का निश्चय बुद्धि। जितनी गहरी पहचान होगी उतना जास्ती निश्चय बुद्धि होगा।

तो मूल बात किस बात के ऊपर आयी? ज्ञान का फाउन्डेशन पक्का हो। जितना जिसका ज्ञान का फाउन्डेशन पक्का होगा, खुद समझने वाला होगा और दूसरों को भी समझाने वाला होगा। समझने वाले की निशानी क्या? वो दूसरों को जरुर समझायेगा। जो भी सामने आवेगा उसे कनविन्स करेगा। तो अगर बहुतों को कनविन्स करता है तो इससे साबित होता है खुद भी निश्चय बुद्धि है या नहीं है? है। तो विजयते की लिस्ट में आयेगा। माना ज्ञान का दर्पण बहुत पावरफुल होना चाहिए। और ज्ञान का दर्पण, जो मन बुद्धि है वो पावरफुल, निर्मल कैसे बनेगा? जितना अर्पणमय होंगे अर्पण माने क्या-2 अर्पण? तन भी पूरा अर्पण, ऐसे नहीं नाक दे दी, कान दे दिया, और अंगों को छुपा के रख लिया। तो पूरा अर्पणमय हुआ या नहीं हुआ? नहीं हुआ। पूरा ही अर्पणमय। तन भी पूरा अर्पण, धन भी पूरा अर्पण, ऐसे नहीं करोड़ों रुपया दे दिया और बैंक बैलेन्स में थोड़ा सा, खाने पीने के लिए थोड़ा तो रखें, अकाल पड़ने वाला है, महंगार्इ बढ़ने वाली है। तो सम्पूर्ण समर्पण कहेंगे? नहीं।

तो जितना अर्पणमय, उतना दर्पण पावरफुल बनेगा। इसके लिये बेसिक में भी फिकरा बनाया हुआ है क्या? भूल गए? जहां हमारा तन होगा वहां हमारा मन होगा। तन की सेवा जहाँ कहीं लगायेंगे, कारखाने में लगायेंगे तो कारखाना ही याद आयेगा। कपड़े की दुकान में काम करेंगे तो रात में सोते-सोते भी कपड़े फाड़ेंगे। ये नियम है। जहाँ हमारा तन होगा वहां हमारा मन होगा। और जहां हमारा धन होगा सारी जिन्दगी की कमार्इ या बापदादे से मिला हुआ धन किसी करखाने में हमने झोंक दिया तो बुद्धि कहां जायेगी? कारखाने में ही जायेगी। भगवान की याद में बुद्धि नहीं जायेगी। अगर र्इश्वरीय सेवा में लगावेंगे तो र्इश्वरीय सेवा में जावेगी। र्इश्वर याद आवेगा। ये नियम है जितना अर्पणमय उतना दर्पण पावरफुल बनेगा।


समय: 01.02.45-01.06.02
बाबा:- तीसरा प्रश्न आया है कुश्या का अर्थ क्या है?
उत्तर:- आज एक शब्द आया है मुरली में कुश्या । क्या ? कुश्या माना जिनको बहुत कोसा जाये। कोसना माने गालियाँ देना। इस दुनिया में सबसे जास्ती गाली कौन खाता है? शिवबाबा। तो जितना बड़ा कुश्या बनेगा उतना बड़ा प्राप्ति करने वाला भी बनेगा। क्या? अगर लोक लाज में दबा रहेगा। अरे, क्या लोग कहेंगे, भई हम नहीं, हम नहीं ऐसा करेंगे। तो लोक लाज में जो दबा रहने वाला है वो कुश्या की लिस्ट में आवेगा? नहीं आवेगा। तो प्राप्ति भी नहीं करेगा। लोक लाज बाहर की दुनिया की भी होती है लोक लाज ब्राह्मणों की दुनिया में भी होती है। ब्राह्मणों की दुनिया का जो लोक है, जो संसार है, जो ब्राह्मणों की दुनिया का संसार है, जो वर्तमान अभी ब्राह्मणों की दुनिया का संसार है, वो भस्म होने वाला है या रह जायेगा? वो भी भस्म होने वाला है। कितने बचेंगे? आठ ही बचेंगे। तो बुद्धि में आना चाहिए की आठ हमारी महिमा करेंगे या ग्लानी करेंगे? अगर हम ऐसा कर्म करें जो आठ के द्वारा हमारी महिमा हो जाये, तो हम नर्इ दुनिया के मालिक बनेंगे।

नहीं तो ये सारी पुरानी दुनिया जो ब्राह्मणों की देखने में आ रही है सब भस्म होने वाले हैं। भस्म होने वाली दुनिया की लोक लाज रखनी है या जो आने वाली 8 की नर्इ दुनिया सामने खड़ी है, बुद्धि में भी आती है बात उसकी लोक लाज रखनी है? नर्इ दुनिया की लोक लाज रखनी है भले छोटी दुनिया होगी। तो कुश्या बनना अच्छा है या बुरा है? जितनी ज्यादा कुश्या बनेंगे, जितना ज्यादा कोसेंगे लोग हमको गालियां देंगे, उतना हम कलंकीधर के बच्चे कलंकीधर डबल सिरताज बनेंगे। चिन्ताल नहीं करनी चाहिए कि लोग क्या कहेंगे। लोग तो सब, ये लोक ही भस्म हाने वाला है। भस्म होने वाले लोक की दुनियां में हम क्यों चिन्ता करें? जो दुनिया सामने खड़ी है उसकी लाक लाज का ध्यान रखें, वो र्इश्वरीय दुनिया है। र्इश्वरीय रचना है उसको महत्व दें।


समय: 01.06.31-01.08.55
बाबा:- अगला प्रश्न आया है- जो ज्ञान में चलते-चलते शरीर छोड़ देते हैं, मर जाते हैं, उनकी शूटिंग क्या होती है? ज्ञान में चलते-चलते शरीर छोड़ते हैं तो अज्ञानियों के घर में जन्म लेंगे या ज्ञानियों के घर में जन्म लेंगे? अज्ञानियों के यहाँ जन्म लेंगे। जब तक दुबारा जन्म लेकरके ज्ञान न लें तब तक प्रजा वर्ग में रहेंगे या राजार्इ परिवार की शूटिंग होगी? प्रजा वर्ग में चले जावेंगे। ये शूटिंग होती रहेगी।

एक तो हुआ हद का मरना, एक होता है...
(किसी ने कहा- बेहद का मरना।) बेहद का मरना क्या होता है? अनिश्चय बुद्धि बन जाते हैं, ज्ञान छोड़ देते हैं। उनकी क्या शूटिंग होगी? (कोर्इ ने कहा- चाण्डाल बनेंगे।) हाँ चाण्डाल भी प्रजा वर्ग है। चाण्डाल वो बनते हैं जो सरेण्डर हो जाते हैं और सरेण्डर हाने के बाद दुष्कर्म करते हैं श्रीमत के बरखिलाफ और ज्ञान से टूट पड़ते हैं, बाप में अनिश्चय बुद्धि हो जाते हैं और जो कुछ दिया है वो सब वापस कर लेते हैं। तन भी वापस, धन भी वापस, मन भी वापस, तो प्रजा तो बनते हैं लेकिन कौन सी प्रजा बनते हैं? चाण्डाल। फोर्थ क्लास प्रजा बनते हैं। शूटिंग उनकी भी होती है। क्या? चाहे हद की मौत मरें और चाहे बेहद की मौत मरें। इसलिए कोर्इ भी मौत मरना अच्छा नहीं है चाहे 80 साल, 90 साल की बुढ्ढ़ा-बुढ़िया हो, एडवांस में चल रहा हो , तो भी क्या इच्छा करनी चाहिए? जिन्दा बने रहे, बाबा को याद करता रहे। ओम् शान्ति।

Disc.CD No. 612, dated 10.08. 2008, at Bangalore
Part-6


Time: 56.16-01.02.42
Baba: A question has been asked. What should we do in order to have faith forever?
Answer:
(Someone said: Remember the Father.) But who will remember as well? If someone is the one with a doubting intellect; if he has doubt regarding the Father’s part every moment [and thinks:] how can this person be the Father? Is even the Father like this? So, will he remember [the Father] or will his intellect run far away from Him? The intellect itself will run far away. Who will be victorious in remembrance as well? The one who has a faithful intellect, only he will become victorious. So, how should we become the one with a faithful intellect? What should we do to have a faithful intellect? (Someone said: Love for the Murlidhar, means love for the Murli.) Yes. No, the one whose virtues sit in the intellect will be loved. And will love emerge for the one whose bad traits sit in the intellect? It won’t. So, the question is how to have a faithful intellect?
Student: There won’t be bad traits in Baba’s Murli. Love for the Murli means love for the Murlidhar.
Baba: What is meant by Murli? (Student: Whatever Baba says, the Shrimat.) Arey! How will you [recognize] the Murli if you haven’t recognized Baba himself? Should the Murli printed on a paper be called the Murli? (Student: Whether it is the paper Murli, CD…) Acchaa! Is it OK even if it is a paper Murli? (Someone said: That will still be called a third class Murli.) So, if the BKs read that third class Murli, if they develop love for the paper Murli, then will it do? (Student: Love for the paper Murli won’t do.) So, the topic ends there. Love for the Murli means love for the Murlidhar. And the Murli should also be first class. What? It should not be the third class and second class [Murli]. Which is the first class Murli? [It is] the one which the Father narrates face to face, in practice, in a corporeal form when He comes. So, should you recognize the Father who is narrating [the Murli] in a corporeal form or not? (Everyone said: We should.) So, the main topic is recognition.What? There should be such firm recognition that nobody in the world should be able to shake us. [We should have] a firm faithful intellect. The deeper the recognition you have, you will be the one with a faithful intellect to that extent.

So, what is the main topic? The foundation of knowledge should be firm. The more someone’s foundation of knowledge will be firm, if he himself understands [the knowledge] and explains it to the others; what is the indication of the one who understands? He will definitely explain it to the others. He will convince whoever comes in front of him. So, if he convinces many, then it proves that he himself has a faithful intellect or not? He has. Then, he will be included in the list of the victorious ones. It means that the mirror of knowledge should be very powerful. And how will the mirror of knowledge, the mind and intellect become powerful, pure? The more you are surrendered (arpanmay); what is meant by arpan (surrendering)? What is to be surrendered? The body should also be surrendered completely; it shouldn’t be the case that you surrendered your nose, your ears and hid the other parts of the body. So, did you surrender yourself completely or not? You didn’t. You should surrender [yourself] completely. The body as well as wealth should be surrendered completely. It shouldn’t be like this that you give away millions of rupees and [kept] a little bank balance [ thinking:] let me keep at least a little bank balance for eating and drinking; drought is going to start, prices are going to rise; so, will that be called surrendering [yourself] complete ? No.

So, the more someone is surrendered, the more the mirror will become powerful. For this a proverb has been coined in the basic [knowledge] as well. What? Did you forget it? Our mind shall be wherever our body is. Wherever you invest the service of your body, if you invest it in a factory, then only the factory will come to the mind. If you work in a cloth shop, then you will tear clothes even while sleeping in the night. This is the rule. Our mind will be wherever our body is. And wherever we keep our wealth… the lifelong earnings or the wealth received from the Father or grandfather in a factory, then what will the intellect think of? It will think of the factory itself. The intellect will not go towards God’s remembrance, if we use it in God’s service, then it will be busy in God’s service. We will remember God. This is the rule. The more someone is surrender, the more the mirror will become powerful.


Time: 01.02.45-01.06.02
Baba: Another question has been asked: What is meant by kushyaa?
Answer: Today a word has been mentioned in the Murli: kushyaa. What? Kushyaa means the one who is cursed a lot. To curse means to abuse. Who faces the maximum insults in this world? ShivBaba. So, the bigger kushyaa someone becomes the greater attainments he will achieve. What? If he is suppressed under public honour (lok-laaj) [thinking:] Arey, what will the people say? I will not do this. So, will the one who remains suppressed under [the burden of] public honour be included in the list of kushyaa? He will not. So, he will not achieve attainments either. The public honour is related to the outside world as well as the Brahmin world. Is the world of Brahmins, is the present world of the Brahmins going to turn into ashes or will it survive? That is also going to turn into ashes. How many will survive? Only eight will survive. So, it should come to your intellect that will the eight praise you or will they defame you? If we perform such actions that the eight praise us, then we will become the master of the new world.

Otherwise, this entire old world of Brahmins which is visible is going to be burnt to ashes. Should we care for the public honour (lok-laaj) of the world that is going to turn into ashes or should we care about the public honour of the forthcoming new world of eight that is in front of us, [about which] it comes in the intellect as well? We should care about the public honour of the new world, although it will be a small world. So, is it good to become kushyaa or is it bad? The bigger the kushyaa we become, the more the people insult us, the more we children of Kalankidhar (the one who bears accusations) will become kalankidhar, double crowned ones. We should not worry about what people will say. All these people, this world itself is going to be burnt to ashes. Why should we worry about the world that is going to be burnt to ashes? The world that is standing in front of us we should care for its public honour. That is God’s world. That is God’s creation. We should give importance it.


Time: 01.06.31-01.08.55
Baba: Another question has been asked: What is the shooting of those who leave their body, die while following the knowledge? If someone leaves his body while following the path of knowledge, will he be born in the house of ignorant people or will he be born in the house of knowledgeable people? They will be born in the house of ignorant people. Until they are reborn and obtain the knowledge, will they be included in the subjects’ category or will they perform the shooting of the royal family? They will go to the subjects’ category. This shooting will continue.

One thing is dying in the limited and the other is…
(Someone said: Dying in the unlimited.) What is meant by dying in the unlimited? When someone becomes the one with a doubting intellect and leaves the knowledge, what shooting does he perform? (Someone said: They will become caandaal.) Yes, chaandaal are also included in the subjects’ category. Those who surrender and perform wicked actions against the Shrimat and break away from the knowledge , have a doubting intellect towards the Father and take back whatever they have given, they take back the body, the wealth as well as the mind, so they do become prajaa (subjects), but what kind of prajaa do they become? Caandaal. They become fourth class prajaa. Their shooting also takes place. What? Whether they die a limited death or an unlimited death. This is why it is not good to die in any manner. Even if someone is an aged person of 80, 90 years, and is following the advance knowledge, what should he desire? He should remain alive and keep remembering Baba. Om Shanti. (Concluded.)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 23 Oct 2014

वार्तालाप नं 613, दिनांक 11.08.2008, मैसूर
भाग-1


समय: 00.09-04.06
जिज्ञासु:- बाबा, रुद्रमाला के 108 मणके राजा बनते हैं और बेसिक के मणके भी कोर्इ-कोर्इ राजा बनते हैं?

बाबा:- कोर्इ-कोर्इ क्या? वो 8 नारायण ही बनते हैं।
जिज्ञासु:- फिर कोर्इ नहीं बनते? द्वापर कलयुग में भी कोर्इ नहीं बनते?
बाबा:- वो भी जब कृष्ण जैसी आत्मा की तरह कनवर्ट हो जाये, संग का रंग लेते-लेते तब ही होंगे। जैसे नारायण के साथ लक्ष्मी है। सूर्यवंशी कब बनती है? सूर्यवंश और चन्द्रवंश की भाव स्वभाव संस्कार मर्ज हो जावें। क्योंकि प्रवत्तिमार्ग है न। चन्द्रगुप्त राजा बनेगा, विक्रमादित्य राजा बनेगा। कैसे बनेगा? कृष्ण वाली सोल ही तो विक्रमादित्य राजा बनती है। बनाने वाला भी चाहिए।
जिज्ञासु:- पर उनको कन्ट्रोलिंग पावर किसने सिखाया?
बाबा:- अभी तो सीख रहे हैं। अभी प्रवेश करके कन्ट्रोलिंग पावर सीख नहीं रहे हैं? बेसिक में थे, ब्रह्मा बाबा की सोल, जो आया सो कन्ट्रोल करता चला गया, अपने प्रभाव में लेता चला गया। सब धर्म वाले आये, माँ की गोद में राज्य किया, तो कन्ट्रोल किया ना। अभी बाप सतयुग की बादशाही दे देते हैं। राजयोग सिखाते हैं। राज़ भरा हुआ है।
जिज्ञासु:- और विदेश में जो राजा बनते हैं वो भी 108 मणके में हैं?
बाबा:- नहीं।
जिज्ञासु:- तो वो कब सीखते हैं ?
बाबा:- वो तो हिंसक राजायें बनते हैं।
जिज्ञासु:- सभी हिंसक राजायें हैं।
बाबा:- सभी हिंसक राजायें हैं। द्वापरयुग से तो हिंसा ही हिंसा होती चली आर्इ है। हिटलर ने क्या किया? मुसोलिनी, नेपोलियन बोनापार्ट। विदेशियों में भी महत्वाकांक्षी थे। विश्व के उपर राजार्इ करेंगे। और भारतवासियों में भी महत्वाकांक्षी हुये। लेकिन उन्होंने रास्ता गलत अपनाया। हिंसा का रास्ता अपनाया। और बाप आकरके अहिंसक रास्ता बताते हैं।
जिज्ञासु:- पर वो भी राज्य करते हैं।
बाबा:- वो राज्य करते हैं तो उनको रुहानी बाप से राजार्इ थोड़े ही मिलती है। उनको किससे मिलती है? बेहद का जिस्मानी बाप उनको राजार्इ देता है।
जिज्ञासु:- पर वो भी राजा बनते हैं।
बाबा:- हिंसक राजा बनते हैं।

समय: 04.13-05.50
जिज्ञासु:- बाबा, नम्बर वन नारद ब्रह्मा बाबा है क्या?

बाबा:- नम्बर वन हर बात में कौन है? (किसी ने कहा-बाप है।) दुनिया की ऐसी कोर्इ बात नहीं जो तेरे पर लागू न होती हो। वो कौन है? (किसी ने कुछ कहा।) फिर? नारद क्या करता था? नार माना ज्ञान जल, द माने देने वाला, क्या देता था? ज्ञान जल देता था। खुद क्योंा नहीं स्व र्ग में बैठता है, काहे के लिये नर्क में भटकता था? बाबा भी प्रश्न पूछते हैं- तुम्हारा बाप आया हुआ है हैविनली गाड फादर, तो तुम नर्क में क्यों भटकते हो? स्वर्ग मंत क्यों नहीं बैठे हुए हो?
जिज्ञासु:- ले‍किन वो तो प्रजापिता के लिये ...
बाबा:-हाँ, तो प्रजापिता के लिए... माना कोर्इ कमी है न। याद का पुरुषार्थ करना पड़ता है। क्यों करना पड़ता है? सम्पन्न है तो याद का पुरुषार्थ करना पड़े? (किसी ने कुछ कहा।) फिर? (जिज्ञासु- लेकिन वो बाप समान बन जायेगा न।) वो तो सभी बन जायेंगे। ऐसी कौन सी आत्मा है जो सम्पूर्ण नहीं बनेगी? (जिज्ञासु-लेकिन 100 परसेन्ट?) हाँ, अपने-2 नंबर पर सभी बन जायेंगे। तो अव्वल नंबर नारद कौन हुआ? (जिज्ञासु- प्रजापिता।)

समय: 05.53-07.33
जिज्ञासु:- बाबा, कंस ने सात नारायण को कोस लिया? यहां कंस कौन है?

बाबा:- सुना नहीं? भूल गए? कृष्ण ही कंस बनता है राम ही रावण बनता है। तो यज्ञ के आदि में बेसिक नालेज में कोई सात नारायण वाली आत्मायें रही ना। जो बेसिक नालेज में माया रावण से कोस ली गर्इ। विकारी बन करके रह गर्इ। कृष्ण बच गया। क्या? वो उसके कुसावे में, वो सरेण्डर नहीं हुआ। बाकी को तो, सातों नारायण को सरेण्डर करके रख लिया।
जिज्ञासु:- लेकिन वो अंत में कंस का...
बाबा:- मुरली में तो कहीं बोला नहीं है कि कुमारों को सरेण्डर होना है। श्रीमत के बरखिलाफ काम हो गया न। कुमारों के लिये तो बोला है कि कुमार जो चाहे सो कर सकते हैं। इतनी ताकत है कुमारों में।
जिज्ञासु:- ब्रह्मा बाबा के पीरीयड में भी कुमारों को सरेण्डर किया?
बाबा:- हुये न। क्या विश्व किशोर भाऊ नहीं था? विश्वररतन दादा नहीं थे? अच्छे-अच्छे कुमार थे।

समय: 07.39-09.35
जिज्ञासु:- बाबा, चार अष्टदेव सूर्यवंश से और चार चन्द्रवंश से बनेंगे।

बाबा:- वो तो सम्पूर्ण माला की बात है।
जिज्ञासु:- तो फिर सूर्यवंशी मणका पाँचवा मणका से आठवाँ मणका ...
बाबा:- अष्टदेव नहीं कहेंगे उनमें तो देवियाँ निकलेंगी।
जिज्ञासु:- तो अलग ही नम्बर है क्या?
बाबा:- नम्बर अलग नहीं है। प्रवृत्ति मार्ग के हो जायेंगे। माला जो है वो प्रवृत्तिमार्ग की है।
जिज्ञासु:- बाकी चार लोग हैं न उसका कोर्इ नम्बर नहीं है क्या अष्टदेव में?
बाबा:- असली अष्टदेव तो वास्तव में सूर्यवंशी ही हैं, परन्तु वो चन्द्रवंशी भी सूर्यवंशी बन जाते हैं।
जिज्ञासु:- तो वो ये पद लेंगे।
बाबा:- फिर तो वो लास्ट सो फास्ट चले जाते हैं।
जिज्ञासु:- इसका मतलब लक्ष्मी माँ भी अष्टदेवी में आती है?
बाबा:- देव कहा जाता है, देवी नहीं कही जाती ।
जिज्ञासु:- अष्ट देव का पद वो भी पायेंगे?
बाबा:- हँ।
जिज्ञासु:- कैसे बाबा? सिर्फ सूर्यवंशी हैं रुद्रमाला के मणके जो एडवांस में हैं जो डायरेक्ट बाप से ज्ञान सुनते हैं वही ये पद पायेंगे ऐसा है ना।
बाबा:- बाप के सिमरणी के माला के मणके बनना अच्छा है या विजयमाला के मणके बनना अच्छा है? (जिज्ञासु - बाप के सिमरणी के।) क्यों? क्योंकि वो पूर्वज हैं। चन्द्रवंशियों को पूर्वज कहेंगे या सूर्यवंशियों को पूर्वज कहेगें? (जिज्ञासु- सूर्यवंशियों को।) लेकिन सूर्यवंशी भी पूर्वज तब बनते हैं जब प्रवृत्तिमार्ग के हो जाते हैं। ज, ज माने जन्म लेने वाले। जन्म लेने वाले होंगे तो जन्म देने वाले भी तो होंगे। ऐसी ही पूर्वज बन जावेंगे? उनकी वंश परम्परा चलेगी तभी तो पूर्वज कहे जायेंगे। (जिज्ञासु – प्रवृत्तिमार्ग।) हाँ, तो प्रवृत्ति में होना जरुरी है।

समय: 09.38-10.48
जिज्ञासु:- बाबा, 2018 में सारे अष्ट देव प्रत्यक्ष हो जायेंगे। उसका मतलब सिर्फ चार सूर्यवंशी प्रत्यक्ष हो जायेंगे या आठ सूर्यवंशी प्रत्यक्ष हो जायेंगे?

बाबा:- आठों ही सूर्यवंशी प्रत्यक्ष होंगे। साथ-साथ उनकी सहयोगिनी शक्तियां भी प्रत्यक्ष होंगी। प्रवृत्तिमार्ग के होंगे या निवृत्तिमार्ग के होंगे? प्रवृत्तिमार्ग के होंगे। पूरा परिवार होगा। परिवार की पहली इकार्इ होगी।
जिज्ञासु:- प्रत्यक्ष उनके ग्रुप में होंगे या इधर आने के बाद प्रत्यक्ष होंगे वो लोग?
बाबा:- जब तक रुद्रमाला के मणके विजयमाला में एड न हों तब तक प्रवृत्ति पूरी होगी? नहीं होगी। ये तो सूर्यवंशियों, चन्द्रवंशियों की प्रवृत्ति है। सूर्यवंशी भी वो जो अपने को मर्ज कर दें।

समय: 10.55-12.02
जिज्ञासु:- बाबा, अभी रुद्रमाला के दो सीट बाकी है।

बाबा:- हाँ, अभी दो का नाम डिक्लेयर हैं। नाम डिक्लेयर है काम थोड़े ही डिक्लीयर है अभी। नाम जब जिन्दगी पूरी हो जाती है तब नाम रखा जाता है या शुरु शुरुआत में ही नाम रखा जाता है? (किसी ने कहा- काम पूरा होने पर।) नहीं। काम पूरा होता है तब नाम नहीं रखा जाता है। नाम तो शुरुवात में ही रख दिया। अब काम करके दिखाओ तब संसार में नाम बाला हो। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर ये प्रत्यक्ष तो पहले हो गए। इनका पार्ट ब्रह्मा का है, इनका विष्णु का है, इनका शंकर का है। झण्डे के तीनों कपड़े तो डिक्लेयर हो गए। लेकिन क्या पार्ट भी डिक्लेयर हो गया? (किसीने कहा- नहीं।) कब होगा? जब विश्व विजय करके दिखलावे। किया धरा कुछ नहीं कुर्सी पे बैठ गए।

समय: 12.10-14.37
जिज्ञासु:- बाबा, दिति और अदिति सुरुची और सुनीति वो जगदम्बा माँ और लक्ष्मी माँ की यादगार है या माया बेटी और जगदम्बा का?

बाबा:- नहीं, नहीं, नहीं। सुरुची कहते हैं जो अपनी रुचिपूर्वक ज्यादा काम करे। स्व रुची, अपनी रुची से करे। श्रीमत के आधार पर उतना ध्यान न दे। और सुनीति वह है जो नीती नियम पूर्वक, जो भी भगवान के बनाए हुये नीति नियम हैं उनके पूर्वक कार्य करे। वो सुनीति है। तो दो ही हैं। जिन्होंने लक्ष्मी, महालक्ष्मी बनने का पुरुषार्थ किया। कौन-कौन? एक जगदम्बा और एक छोटी माँ। उन्हीं को अलग-2 नामों से, अलग-2 कामों से, अलग-2 रुपों में उनकी कथा कहानियां बनाय दी हैं। सुरुचि, सुनीति उत्तानपाद राजा की रानियां थीं। काम्पिल्य नगर में दिखाय दी। कश्यप ऋषि ने जो सृष्टि रची तो उनको भी प्रजापिता ब्रह्मा के रुप में दिखाय दिया है। उनके भी दो रानियाँ दिखार्इ हैं दिति-अदिति। दिति कहा जाता है खण्डित को और अदिति कहा जाता है जिसकी प्यूरीटी, पुरुषार्थ अखण्ड रहा। जो खण्डित हो गया तो दैत्य पैदा हो गए। दिति से दैत्य और अदिति से अद्वैत पैदा हुये। जिन्होंने किसी दूसरे को नहीं माना। एक शिव बाबा दूसरा न कोर्इ। और दैत्यों ने? दैत्यों ने दो-दो बाप बनाय लिये।
जिज्ञासु:- लेकिन कलईमगल वार्तालाप में आपने उसके साथ प्रेमकान्ता नाम को जोड़ा था ना। एक पेपर को फाड़कर आपने दिखाया।
बाबा:- दिति?
जिज्ञासु:- हां दिति के बारे में।
बाबा:- क्या?
जिज्ञासु:- वो माया बेटी ।
बाबा:- वो सब उनकी औलादें हैं।

Disc.CD No. 613, dated 11.08.2008, at Mysore
Part-1


Time: 00.09-04.06
Student: Baba, 108 beads of the Rudramaalaa become kings and do some of the beads of the basic [knowledge] also become kings?

Baba: Why some? Eight [of them] become Narayans.
Student: Doesn’t anyone [of them] become [kings] except them (the Narayans)? Don’t they become [kings] in the Copper and the Iron Ages either?
Baba: When they too convert like the soul of Krishna while taking the colour of the company, they will become [kings]. For example, there is Lakshmi along with Narayan, when does she become Suryavanshi ? It is when the nature and sanskaars of the Suryavansh (the Sun dynasty) and the Chandravansh (the Moon dynasty) merge to become one. It is because it is a path of household, isn’t it? Chandragupt will become a king; Vikramaditya will become a king; how will he become that? It is the soul of Krishna itself that becomes king Vikramaditya. The one who makes [him so] is also required.
Student: But who taught them the controlling power?
Baba: They are learning now. Are they not learning the controlling power by entering? When the soul of Brahma Baba was in the basic [knowledge]; whoever came, controlled him, cast an influence over him. The souls of all the religions came; they ruled on the lap of the mother; so they controlled him (Brahma Baba), didn’t they? Now the Father gives you the emperorship of the Golden Age. He teaches Raja Yoga. It contains secret (raaz).
Student: Are those who become kings in the foreign countries also included in the 108 beads?
Baba: No.
Student: So, when did they learn that?
Baba: They become violent kings.
Student: All kings are violent.
Baba: All kings are violent. From the Copper Age onwards there was violence and only violence. What did Hitler, Mussolini, Napoleon Bonaparte do? There were ambitious people (mahatwaakaankshi) among the foreigners as well. [They thought:] we will rule over the world. And even among the Indians there have been ambitious people. But they adopted the wrong path. They adopted the path of violence. And the Father comes and shows the non-violent path.
Student: But they rule, too.
Baba: They do rule, but they don’t get the kingship from the Spiritual Father. From whom do they get [it]? The unlimited physical Father gives them the kingship.
Student: But they become kings, too.
Baba: They become violent kings.

Time: 04.13-05.50
Student: Baba, is Brahma Baba the number one Narad?

Baba: Who is No.1 in every aspect? (Student: The Father.) There is nothing in the world that is not applicable to you. Who is that [soul]? (Student said something.) Then? What did Narad do? Naar means the water of knowledge. Da means giver; what did he used to give? He used to give the water of knowledge. Why didn’t he himself sit in heaven? Why did he wander in hell? Baba also asks a question: When your Father, the heavenly God the Father has come, why do you wander in hell? Why are you not sitting in heaven?
Student: But for Prajapita...
Baba: Yes, it is [applicable to] Prajapita, it means there is a shortcoming, isn’t there? He has to make the purushaarth to remember [the Father]. Why does he have to make purushaarth? Will he have to make purushaarth to remember if he is perfect? (Someone said something.) Then? (Student: But, he will become equal to the Father, will he not?) Everyone will become that. Which soul will not become complete?
Student: But 100 percent ...?
Baba: Yes, everyone will become [complete] at their own time. So, who is the No.1 Narad? (Student: Prajapita.)

Time: 05.53-07.33
Student: Baba, Kansa killed the seven Narayans? Who is Kansa here?

Baba: Did you not hear [about this]? Did you forget? Krishna himself becomes Kansa and Ram himself becomes Ravan. So, in the beginning of the Yagya in the basic knowledge there were the souls of the seven Narayans, who were killed by Maya Ravan in the basic [knowledge], who became vicious, weren’t they? Krishna survived. What? He was not killed by him (Kansa); he did not surrender himself. The remaining seven Narayans were made to surrender themselves.
Student: But in the end Kansa...
Baba: It has never been said in the Murli that kumars (bachelors) should be surrendered. A task against the Shrimat was performed, wasn’t it? It has been said for the kumars that they can do whatever they wish. Kumars have such power.
Student: Were kumars surrendered during Brahma Baba’s period as well?
Baba: They did, didn’t they? Wasn’t there Vishwa Kishore Bhau? Wasn’t there Dada Vishwaratan? There were nice kumars.

Time: 07.39-09.35
Student: Four of the eight deities will be from Suryavansh and four from Chandravansh.

Baba: That is about the complete rosary.
Student: So, then as regards the Suryavanshi beads, from the fifth bead to the eighth bead...
Baba: They (the Chandravanshis) will not be called the eight dev (male deities); the devis (female deities) will emerge from among them.
Student: So, are their numbers separate?
Baba: Their numbers are not separate. They will become those of the household path. The rosary is of the household path.
Student: Don’t the remaining four get any number (rank) among the eight deities?
Baba: The true ashtdev (eight deities) are only the Suryavanshis; but those Chandravanshis also become Suryavanshis.
Student: So they will obtain these ranks.
Baba: Then they go fast coming at last.
Student: So, does it mean that mother Lakshmi is also included among the eight deities?
Baba: They called dev (male deities) not devis (female deities).
Student: Will they also obtain the position of eight deities?
Baba: Hm.
Student: How is it so, Baba? Only the Suryavanshis, the beads of the Rudramaalaa, who are in the advance [party], those who listen to the knowledge directly from the Father, only they obtain this position. It happens this way, doesn’t it?
Baba: Is it better to become the beads of the rosary that is remembered by the Father or is it better to become the beads of the Vijaymaalaa ? (Student: [The rosary] that the Father remembers.) Why? It is because they are the ancestors (puurvaj). Will the Chandravanshis or the Suryavanshis be called the ancestors?
Student: The Suryavanshis.
Baba: But the Suryavanshis also become ancestors only when they belong to the household path. Ja, ja means those who are born. When there are those who are born, there will be those who give birth as well. Will they simply become the ancestors? They will be called ancestors only when their dynasty continues. (Student: The household path.) Yes, so, it is necessary for them to be in the household path.

Time: 09.38-10.48
Student: Baba, all the eight deities will be revealed in 2018. Does it mean that only four Suryavanshis will be revealed or will all the eight Suryavanshis be revealed?

Baba: All the eight Suryavanshis will be revealed. Along with them their cooperative powers (shaktis) will also be revealed. Will they belong to the household path or to the path of renunciation? They will belong to the household path. There will be an entire family. That will be the first unit of a family.
Student: Will they be revealed in their group or will they be revealed after they come here?
Baba: Will the household be complete until the beads of the Rudramaalaa are added to the Vijaymaalaa? It will not. This is a household of the Suryavanshis and the Chandravanshis. And Suryavanshis are those who merge themselves [with the Sun].

Time: 10.55-12.02
Student: Baba, now only two seats of the Rudramala are free.

Baba: Yes. Now the name of two [souls] have been declared. The name has been declared. The task [performed by them] has not been declared now. Is the name kept when the entire life is over or is the name kept in the beginning itself? (Student: When the task is complete.) No. The name is not kept when the task is completed. The name was kept in the beginning itself. The name will become famous when you perform the task now. Brahma, Vishnu and Shankar were revealed already before that this one plays the part of Brahma, this one plays [the part of] Vishnu; this one plays [the part of] Shankar. All the three cloths of the flag were declared. But is [their] part also declared? (Someone said: No.) When will it take place? It is when they conquer the world and show. :D They did nothing and simply sat on the seat.

Time: 12.10-14.37
Student: Baba, are Diti and Aditi or Suruchi and Suniti the memorial of mother Jagdamba and mother Lakshmi or is it of daughter Maya and Jagdamba?

Baba: No, no, no. The one who works more with her own interest (ruchi) is said to be Suruchi. Swa (self) ruchi (interest); the one who does things according to her own interest. She does not pay much attention to Shrimat (God’s directions). And Suniti is one who acts according to the policies and rules, according to the policies and rules set by God. She is Suniti. So, there are only two [souls] who made purushaarth to become Lakshmi and Mahalakshmi. Who are they? One is Jagdamba and the other is junior mother (choti Maa). They have made their stories with different names, tasks and in different forms. Suruchi, Suniti were the queens of King Uttanpad. They were shown in the town of Kampil (Kampilya nagar). Sage Kashyap created the world; so he has been depicted in the form of Prajapita Brahma, too. He is also shown to have two queens (wives), Diti and Aditi. Diti means khandit (unsteady). And Aditi means the one whose purity, purushaarth remained akhand (constant). The one who became unsteady gave birth to demons. Diti gave birth to daitya (demons). And Aditi gave birth to adwait (non-dualistic), those who did not accept anyone else. One ShivBaba and no one else. And the demons made two fathers [their].
Student: But in Kalaimagal discussion, you had connected the name of Premkanta with her (Diti). You showed it by tearing a paper.
Baba: Diti?
Student: Yes, about Diti.
Baba: What?
Student: Daughter Maya.
Baba: All of them are her children. ... (to be continued.)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 24 Oct 2014

वार्तालाप नं 613, दिनांक 11.08.2008, मैसूर
भाग-2


समय: 14.42-17.09
जिज्ञासु:- बाबा, हम पुरुषार्थ में उल्टा सीढ़ी चढ़ते हैं।

बाबा:- पुरुषार्थ में उल्टी सीढ़ी चढ़ते हैं।
जिज्ञासु:- हमको पता लग सकता है कि हम कलयुग का सीढ़ी क्रास किये और...
बाबा:- ...त्रेता की सीढ़ी में चढ़ गए?
जिज्ञासु:- वो तो पता पड़ सकता है। पर कलियुग का सीढ़ी क्रॉस करने पर...
बाबा:- व्यभिचारी पना खत्म हो जाता है। व्यभिचारी ज्यादा बनते हैं कलयुग में। और द्वापर में इतने व्यभिचारी नहीं होते। दो राज्यों में भारतवर्ष में झगड़े भी नहीं होते थे उस समय द्वापर में। जब से मुसलमान आना शुरु हुए हैं तब से लड़ार्इ झगड़े शुरु हुए। सबसे पहला आक्रमण भारत में हुआ है मोहम्मद बिन कासिम का 1200 वर्ष पहले। तब से ये लड़ार्इ झगड़े और मारा मारी और युद्ध शुरु हो गए जोर से।
जिज्ञासु:- व्यभिचारी मतलब किस तरह का व्यभिचार खतम होता है?
बाबा:- अनेक रानियाँ रखीं राजाओं ने। यथा राजा तथा प्रजा। बुद्धि भटकती है अनेकों में। सम्बधियों में बुद्धि भटकती है कि नहीं भटकती है? नहीं तो संबंध तो सुख देने के लिये होते हैं। संबंध होते हैं सुख देने के लिये और संबंध सुख देने के बजाय दुख दें उन्हीं में बुद्धि भटकती रहे तो फायदा क्या हुआ? राजाओं की भी ढ़ेर सारी रानियां, उनमें बुद्धि भटकने लगी। टू मेनी क्वीन्स। तो राज्य चलायेंगे में या राज्य का चौपट कर देंगे? राज काज में ध्यान जायेगा या रानियों में ही ध्यान ढेर सारा चला जायेगा? राज काज सारा चौपट कर दिया। नहीं तो राजा का मुख्य काम है अपनी प्रजा को खुश रखना, सुखी रखना।

समय: 17.21-20.15
जिज्ञासु:- बाबा, आठ के अलावा सभी लोग बर्फ में दबे रहते हैं?

बाबा:- आठ के अलावा सभी बर्फ में दबे...?
जिज्ञासु:- अष्ट देव के अलावा। धर्मराज का दण्ड वो नहीं पाते हैं न।
बाबा:- धर्मराज का दण्ड नहीं पाते हैं बाकी आत्मा उनकी पहले से ही उड़ जाय और शरीर बर्फ में दबा रहे तो हर्जा क्या है? ये भी तो हो सकता है कि उन्होंने अपने पुरुषार्थ से अपने शरीर को स्वयं ही त्याग दिया। और वो तो ऐसे पुरुषार्थी हैं जो दूसरों में प्रवेश करके भी पार्ट बजायेंगे। इन एटम बम्ब बनाने वालों में थोड़े ही हिम्मत है कि एटम बम्ब फोड़ सकें। पावरफुल आत्मायें उनमें प्रवेश करेंगी और प्रवेश करके उनकी बुद्धि को घुमाय देंगी। और ताबड़तोड़ विनाश होगा। वो निकल के फिर वापस आ जायेंगी। तो जिनमें पहले से ही ताकत है शरीर को छोड़ने की या शरीर को ग्रहण करने की, वो तो शरीर पहले से ही छोड़ देंगे। पहले से ही जैसे... (किसी ने कुछ कहा।) हाँ।
जिज्ञासु:- आठ के लिये, बाकी सभी बर्फ में ...
बाबा:- वो भी बर्फ में दबेंगे। आठ भी बर्फ में दबेंगे। आठ के शरीर भी बर्फ में दबेंगे। आत्मा स्वतंत्र हो जावेगी।
जिज्ञासु:- फिर बाकी सभी का?
बाबा:- सभी भी दबेंगे लेकिन जब दबेंगे तो उनकी आत्मा भी रहेगी। छटपटायेंगे थोड़ा समय।
दूसरा जिज्ञासु:- एक को छोड़ के सब बर्फ में दबेंगे न।
बाबा:- एक को क्यों? आठ को छोड़कर। आठ भी, आठ के भी शरीर तो बर्फ में ही रहेंगे सुरक्षित। क्या? हाँ, आठ के शरीर भी बर्फ में सुरक्षित रहेंगे। बड़े-2 भूकम्प आयेंगे, सारी पृथ्वी हिलेगी, डुलेगी, पृथ्वी की धुरी ही जब चेन्ज हो जायेगी तो कुछ बचेगा क्या? कुछ नहीं बचेगा।
जिज्ञासु:- लेकिन उनमें से एक लाख को शालीग्राम बच्चे कहते हैं ना। उनका क्या?
बाबा:- उनका यही पार्ट है कि वो अपना शरीर रहते-2 ही पाँच तत्वों के उपर कन्ट्रोल प्राप्त करने वाले होंगे नम्बरवार। एक जैसे नहीं होंगे। उनमें फर्स्ट क्लास, अव्वल नम्बर, 100 परसेन्ट कन्ट्रोल करने वाले होंगे आठ। बाकी नंबरवार।
जिज्ञासु:- बाकी साढ़े तीन लाख बच्चे?
बाबा:- वो तो दूसरे-2 धर्म के हैं। दूसरे धर्म के बीज हैं कि नहीं? हाँ।

समय: 20.18-22.05
जिज्ञासु:- बाबा, सूर्यग्रहण के समय अल्ट्रावायलेट रेज निकलती है, ऐसा बोलते हैं न, वो बुरा असर करती है।

बाबा:- हाँ, कहते हैं सूर्य ग्रहण जब पड़ रहा हो तो देखना नहीं चाहिए।
जिज्ञासु:- सूर्य को नहीं देखना चाहिए।
बाबा:- हाँ, सूर्य ग्रहण पड़ेगा, सूर्य को देखा तो दोष लग जाय, आखों का कोर्इ अन्धा हो सकता है। यहाँ ज्ञान में भी सूर्य को ग्रहण लगा हुआ हो...। (बहुतों ने कहा- सूर्य को ग्रहण नहीं लगता।) लगता नहीं है। वो तो याद में रहता है लेकिन अगर कोर्इ देखे तो देखने वाले की बुद्वि खराब होगी या सूर्य की बुद्वि खराब होगी? देखने वाले की बुद्वि खराब हो जावेगी। अंधा हो जायेगा ज्ञान का। बहुत हैं जो पड़े-2 यही देखते रहते हैं। (जिज्ञासु ने कुछ कहा होगा।) सूर्य से रेज नहीं निकलता। स्थूल में रेज-वेज कुछ नहीं निकलती। सूर्य तो आग का गोला है। उसके बीच में तो चन्द्रमा आ गया पृथ्वी और सूर्य के बीच में। चंद्रमाँ तो दुर है आग का कहां से निकलेगी? जैसे सूर्य पहले तपता है। वैसे चन्द्रमा सामने आ गया तो भी उतना ही तपेगा।
जिज्ञासु:- सूर्य में कुछ भी चेंज नहीं होता बाबा?
बाबा:- सूर्य में कुछ भी चेंज नहीं होता। परछाया जो है चन्द्रमा की, वो पृथ्वीवासियों के उपर पड़ती है। (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) हाँ, ज्ञान चन्द्रमा यहाँ ब्रह्मा है। ब्रह्मा के परछाया के अन्दर जो-जो आत्मायें आ जाती हैं, ब्रह्मा बाबा के प्रभाव में जो-जो आत्मायें आ जाती हैं, वो फिर अज्ञान अंधेरे में आ जाती हैं।

समय: 22.10-22.58
जिज्ञासु:- बाबा, महाविनाश के समय हिमालय पहाड़ भी पिघल जाता है न? वो नहीं रहेगा सतयुग में ऐसे बताया ना।

बाबा:- सब कुछ टूट-फूट होगी।
जिज्ञासु:- तो उस समय वो सारा पानी जो है बर्फ में अभी हिमालय पहाड़ में ...
बाबा:- हिमालय पहाड़ में तो कुछ भी पानी नहीं है कुछ भी बर्फ नहीं है। बर्फ के मीलों ऊँचे, किलोमीटर ऊँचे पहाड़ तो नार्थ पोल और साउथ पोल में हैं। वो अभी धीरे-2 फट रहे हैं। हिमालय पर उतनी बर्फ नहीं है। बहुत थोड़ी बर्फ है। उनके मुकाबले साउथ पोल और नार्थ पोल में बहुत ऊँचे-2 पहाड़ हैं बर्फ के।

समय: 23.05-28.15
जिज्ञासु:- बाबा, लक्ष्मी माँ हर जन्म में, द्वापर और कलयुग में, शम्भु को ही वरती है मतलब...

बाबा:- नहीं हर जन्म में नहीं। ये रगर है, ये उनका प्रतिज्ञा है, कि वरण करुँगी तो उसी को करुँगी अगर वरण नहीं करुँगी तो सन्यासिनी होकर रहूँगी। कुंवारी हो करके रहूँगी।
जिज्ञासु:- और जब वो पुरुष बनती है...
बाबा:- हाँ, पुरुष का जन्म लेगी तब वो स्त्री बनेगा।
जिज्ञासु:- राम वाली आत्मा स्त्री बनता है।
बाबा:- हाँ, राम वाली आत्मा स्त्री बनेगी तो भी उसी के साथ सानिध्य होगा।
जिज्ञासु:- राम वाली आत्मा...
बाबा:- के साथ सानिध्य होगा।
जिज्ञासु:- पर उस समय भी वो बिना वर के रह जाती है क्या बाबा?
बाबा:- काहे के लिये? वो मिल रहा है ना साथ ।
जिज्ञासु:- न मिले तो?
बाबा:- ऐसे कैसे, ये क्या बात हो गर्इ?
जिज्ञासु:- जब वो स्त्री बनती है...।
बाबा:- यहाँ जैसे संकल्प होंगे वैसा ही तो वहाँ होगा।
जिज्ञासु:- जब स्त्री बनती है कभी-2 ऐसा भी हो सकता है वो राम वाली आत्मा पुरुष नहीं मिलता है।
बाबा:- क्यों नहीं मिलता?
जिज्ञासु:- वो कुवांरी बन जाते हैं।
बाबा:- तो कुवांरी रहेगी।
जिज्ञासु:- उसी तरह जब वो पुरुष बनती है...
बाबा:- तो पुरुष तो अक्सर करके सन्यासी बनके रहते हैं। वो क्या बड़ी बात हो गर्इ? अभी ब्रह्माकुमारियाँ सन्यास धर्म की हैं या प्रवृत्तिमार्ग की हैं? उनके ज्यादा संस्कार कौन से हैं? (किसीने कहा – सन्यास धर्म के।)
जिज्ञासु:- ऐसा भी हो सकता हैं।

बाबा:- होता ही है।
जिज्ञासु:- और हमेशा उन दोनों में भी सेम ऐज होना चाहिए?
बाबा:- कोर्इ जरुरी नहीं है।
जिज्ञासु:- क्योंकि वरने के लिये एक बच्चा, एक बुढ्ढा नहीं होना चाहिए।
बाबा:- 16 साल की कुमारियाँ रही हैं और 60-60 साल के राजायें रहे हैं। क्या बड़ी बात हो गर्इ?
जिज्ञासु:- ऐसा भी हो सकता है?
बाबा:- हाँ।
जिज्ञासु:- पर वो मर्यादा पुरुषोत्तम ...
बाबा:- मर्यादा पुरुषोत्तम सतयुग, त्रेता में होते हैं न कि द्वापर कलयुग में मर्यादायें होती हैं? द्वापरयुग में तो सारी मर्यादायें टूट जाती हैं।
जिज्ञासु:- वो जब पुरूष बनती है लक्ष्मी माता वो भी दो-2 तीन रानियाँ रखती है?
बाबा:- जो यहाँ चरित्रवान होगा वो वहां दुर्गादास नहीं बनेगा? जो यहाँ संगमयुग में चरित्रवान बनने का प्रैक्टिकल पार्ट बजायेगा वो वहाँ द्वापर कलियुग में चरित्रवान नहीं होगा? (जिज्ञासु: होगा।) फिर? होगा। दुर्गादास का पार्ट बजाता है। मुसलमानों की ढेर र की ढेर रानिया हरम में मिल भी गर्इ तो भी उनको उठाकरके कहाँ पहुँचा दिया? मुसलमानों के देश में पहुँचा दिया।
जिज्ञासु:- तो दुर्गा दास का पार्ट किसका है बाबा?
बाबा:- जो चरित्रवान राजायें होंगे उन्हीं का होगा।
जिज्ञासु:- राम वाली का या?
बाबा:- राम वाली आत्मा दुष्चरित्र है दुनिया की सबसे ज्यादा या चरित्रवान् है?
जिज्ञासु:- दुष्चरित्र है।
बाबा:- पतित से पतित है या अधूरी पतित है? अरे!
जिज्ञासु:- पतित है।
बाबा:- पतित है। फिर? मार्यादा पुरुषोत्तम का पार्ट वास्तव में राम वाली आत्मा बजाती है या जो सीता वाली आत्मा है वो बजाती है?
जिज्ञासु:- तो दुर्गादास का पार्ट सीता वाली आत्मा का है।
बाबा:- बिल्कुल। बड़ी माँ कौन बनेगी? जगदम्बा। वो तो हो गर्इ दुर्गा और वो अपनी दासी किसको बनायेगी? घर-घर में तो होता है। सास होती है रानी और बहू क्या बनके आती है? दासी बनके आती है। तो वहाँ दुर्गादास नहीं होगा क्या?
दूसरा जिज्ञासु:- राज माता और राज लक्ष्मी।
बाबा:- हाँ, राज लक्ष्मी तो छोटी होती है न। राजमाता को ज्यादा मान देना पड़ता है। अरे! एडवांस ज्ञान है एडवांस ज्ञान सबसे ज्यादा किसमें है? रुद्रमाला में कन्याओं माताओं के बीच में सबसे ज्यादा ज्ञान किसमें है? जगदम्बा में। और जो लक्ष्मी निकलेगी। क्या कोर्इ दुर्योधन-दु:शासन से ज्ञान लेगी क्या? किससे लेगी? (जिज्ञासु: जगदम्बा से।) जगदम्बा से ही लेगी। तो कोर्इ जिससे ज्ञान लेता है उसका क्या बन जाता है। अपने को नीचा समझता है या ऊँचा समझता है? भले ऊँचा हो बाबा ने तो बोला है कोर्इ ब्रह्माकुमारी राजाकुमारी बनेगी, कोर्इ प्रजाकुमारी बनेगी। यहाँ जिसने दुर्गादास का पार्ट बजाया होगा वो वहां भी दुर्गादास का पार्ट बजाता है।

Disc.CD No. 613, dated 11.08. 2008, at Mysore
Part-2


Time: 14.42-17.09
Student: Baba, we climb ladder while making purushaarth.

Baba: We climb ladder while making purushaarth.
Student: Can we know whether we have crossed the steps of the Iron Age and...
Baba: ... climbed the steps of the Silver Age?
Student: We can know about it but when we cross the steps of the Iron Age…
Baba: …the adulterous nature ends. [People] become more adulterous in the Iron Age. They are not so much adulterous (vyabhicaari) in the Copper Age. At that time so many fights did not take place between two kingdoms in India. The fights and quarrels have started ever since the Muslims arrived. The first attack was carried out in India by Mohammed Bin Qasim 1200 years ago. From that time these fights and quarrels, beating and killing and wars have started with full force.
Student: Adultery refers to which kind of adultery that comes to an end?
Baba: The kings kept many queens. As is the king, so are the subjects. The intellect wanders in many. Does the intellect wander in the relatives or not? Otherwise, relationships are for giving joy. Relations are for giving happiness and instead of giving happiness, if the relationships give sorrow and the intellect keeps wandering in them, then what is the benefit? The kings also kept many queens. Their intellect started wandering in them. Too many queens. So, will they run the kingdom or will the spoil the kingdom? Will they pay attention to the kingdom or will all their attention be diverted to the queens? They spoilt the entire administration. Otherwise, the main task of the king is to keep his subjects happy, to keep them joyful.

Time: 17.21-20.15
Student: Baba, all the people except the eight remain buried under the ice.

Baba: Except eight others are buried in ice…?
Student: Except the eight deities. They don’t suffer the punishments of Dharmraj (the Chief Justice), do they?
Baba: They do not suffer the punishments of Dharmaraj, but what is the harm if their soul goes away beforehand and the body remains buried under the ice? It can also be possible that they leave their body voluntarily through their own purushaarth. And they are such purushaarthiis , who will also enter others and play their part. Those who produce atom bombs do not have the courage to explode them. Powerful souls will enter them and turn their intellect. And then the destruction will take place in a quick sucession. They (the powerful souls) will come out and return [to their body]. So, those who already have the power to leave the body and then take it on will leave their body beforehand. It is as if beforehand... (Someone said something.) Yes.
Student: That is about the eight, the rest will be in ice...
Baba: They will also be buried in ice. The eight will also be buried. The bodies of the eight will also be buried under ice. The soul will become independent.
Student: What about the rest?
Baba: Everyone else will also be buried. But when they are buried, their soul will also be in them. They will experience restlessness for some time.
Another student: Except the one, all the others will be buried in the ice, won’t they?
Baba: Why [except] the one? Except the eight. The body of the eight will also remain safe in ice itself. What? Yes, the body of the eight will also remain safe in ice. Big earthquakes will occur; the entire Earth will shake and quake. When the axis of the Earth itself changes, will anything survive? Nothing will survive.
Student: But among them one lakh children are called shaaligraams , aren’t they? What about them?
Baba: Their part is such that they will control the five elements at different levels (number wise) while being in their body itself. They will not be alike. Among them those who come in first class, those who come first, those who control [the five elements] hundred percent will be the eight [souls]. The rest are numberwise.
Student: The rest 450 thousand children?
Baba: They belong to the other religions. Are there the seeds of other religions or not? Yes.

Time: 20.18-22.05
Student: Baba, it is said that ultraviolet rays emerge [from the sun] at the time of the solar eclipse (suryagrahan), they cause a bad effect.

Baba: Yes, it is said that when it is the solar eclipse, you should not see [the sun].
Student: You should not see the sun.
Baba: Yes, if you see the Sun when the solar eclipse occurs, you will accrue sin; someone may even become blind. Even here in this knowledge, when the Sun is eclipsed… (Students: The Sun is not eclipsed.) It is not eclipsed. He does remain in remembrance, but if someone sees [him], then will the observer’s intellect be spoiled or will the Sun’s intellect be spoiled? The observer’s intellect will be spoiled. He will become blind to knowledge. There are many who lie and keep seeing just this. (The student must have said something.) Rays do not emerge from the sun. No rays emerge from the physical [sun]. The sun is a ball of fire. The moon came in between; between the earth and the sun. The moon is far, from where will the rays emerge? Just as the sun burns earlier, similarly, if the moon comes in front of it, it will burn to the same extent.
Student: Does nothing change in the sun, Baba?
Baba: Nothing changes in the sun. The shadow of the moon falls on the residents of Earth. (Student said something.) Yes, here, the Moon of knowledge is Brahma. All the souls that come under the shadow of Brahma, all the souls that come under the influence of Brahma Baba come in the darkness of ignorance.

Time: 22.10-22.58
Student: Baba, even the Himalaya melts at the time of the great destruction, doesn’t it? It is said that it won’t remain in the Golden Age.

Baba: Everything will be destroyed.
Student: So, at that time all that water which is in the form of ice on the Himalaya now...
Baba: There is no water, no ice on the Himalaya; there are miles, kilometers high mountains of ice on the North Pole and the South Pole. They too are gradually melting now. There is not so much ice on the Himalayas. There is very little ice. When compared to that there are very high mountains of ice on the North Pole and the South Pole.

Time: 23.05-28.15
Student: Baba, mother Lakshmi marries only Shambhu in every birth, in the Copper Age and the Iron Age; it means…

Baba: No, not in every birth. It is her desire, her vow: if I marry, I will marry only him; if I do not marry [him], I shall remain a sanyasi, I shall remain a virgin.
Student: And when she becomes a male.
Baba: Yes, he (the soul of Ram) will become a female when she is born as a male.
Student: The soul of Ram becomes a female.
Baba: Yes, even when the soul of Ram becomes a female, she will have his company.
Student: The soul of Ram...
Baba: ... [she] will have his company.
Student: But at that time also does she remain without a husband, Baba?
Baba: Why? She is having his company, isn’t she?
Student: What if she doesn’t get [his company]?
Baba: How can that be possible? What is this?
Student: When she becomes a female...
Baba: It will happen in accordance with the thoughts that are created here.
Student: When she becomes a female, sometimes it can also happen that the soul of Ram does not get the body of a male.
Baba: Why doesn’t he get it?
Student: She remains a virgin.
Baba: Then, she will remain a virgin.
Student: Similarly, when she becomes a male...
Baba: The males generally remain sanyasis. That is not a big issue. Now, do the Brahmakumaris belong to the Sanyas religion or to the household path? Which sanskaars do they have more?
Student: This can also be possible.
Baba: It does happen like that.
Student: And should their age be the same always?
Baba: It is not necessary.
Student: It is because in order to get married, it should not be that one is a child and the other is an old person.
Baba: There have been 16 years old virgins and 60 years old kings [getting married]. What is a big deal in it?
Student: This can also be possible, but maryaadaa purushottam ...
Baba: Are they maryaadaa purushottam in the Golden and Silver Ages or are there codes of conduct (maryaadaa) in the Copper and the Iron Ages?
Student: In the Copper Age when...
Baba: All the codes of conduct break in the Copper Age.
Student: When mother Lakshmi becomes a male then does she too have two-three queens?
Baba: Won’t the one who is well-charactered (caritravaan) here become Durgadas there? Won’t the one who plays the part of being well-charactered in practice in the Confluence Age here be well-charactered there in the Copper and the Iron Ages? (Student: He will.) Then? He will. She plays the part of Durgadas. Even if he got numerous Muslims queens in harem, where did he send them? He sent them to the country of the Muslims.
Student: So, who plays the part of Durgadas, Baba?
Baba: It will be played by those who are well charactered (caritravaan) kings.
Student: The soul of Ram or..?
Baba: Is the soul of Ram the most ill-charactered (dushcaritra) soul of the world or is it well-charactered?
Student: Ill-charactered.
Baba: Is it the most sinful or is it incompletely sinful? Arey!
Student: It is sinful.
Baba: It is sinful. Then? Is it the soul of Ram or the soul of Sita who plays the part of [being] maryaadaa purushottam in reality?
Student: So, the soul of Sita plays the part of Durgadas.
Baba: Definitely. What will the senior mother become? Jagdamba. She is Durga and whom will she make her daasi (maid)? It happens in every home; the mother-in-law is the queen and what does the daughter-in-law come as? She comes as the maid. So, will there not be Durgadas there?
Another student: Queen mother (raajmaataa) and queen (raajlakshmi).
Baba: The queen is junior, isn’t she? The queen mother has to be given more respect. Arey! There is the advance knowledge. Who possesses advance knowledge the most? Among the virgins and mothers of the Rudramaalaa who has knowledge the most? Jagdamba. And when Lakshmi emerges, will she obtain knowledge from any Duryodhan-Dushasan ? From whom will she obtain it?
Student: From Jagdamba.
Baba: She will obtain it only from Jagdamba. So, if someone obtains knowledge from someone, then what does he become for him? Does he consider himself to be low or high? Although he is high... Baba has said that some Brahmakumari will become a princess (raajaa kumaari) and some Brahmakumari will become a subject (prajaa kumaari).The one who will have played the part of Durgadas here, plays the part of Durgadas there as well. ... (to be continued.)

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Post by arjun » 25 Oct 2014

वार्तालाप नं 613, दिनांक 11.08.2008, मैसूर
भाग-3


समय: 28.17-28.45
जिज्ञासु:- बाबा, एक सी.डी में नारायण ही लक्ष्मी को ज्ञान देते हैं अन्त में ऐसे बोला न।

बाबा:- लक्ष्मी को ज्ञान देता कौन है?
जिज्ञासु:- नारायण।
बाबा:- नारायण कहाँ से आता है? नारायण के पास ज्ञान कहा से आता है? शिवबाबा से आता है। तो शिवबाबा जो नारायण है वो ज्ञान किसको देता है? लक्ष्मी बड़ी या महालक्ष्मी बड़ी? महालक्ष्मी है पहले।

समय: 28.48-30.47
जिज्ञासु:- बाबा, लक्ष्मी माँ मुस्लिम रानी भी बनती है क्या?

बाबा:- लक्ष्मीा ? वो क्यों बनेगी?
जिज्ञासु:- क्योंकि आपने बताया शाहजहाँ की पत्नीी मुमताज बेगम वो लक्ष्मी का यादगार है ऐसा। लक्ष्मी का पार्ट।
बाबा:- वो ताज है जिम्मेवारी का ताज।
जिज्ञासु:- पवित्रता का ताज।
बाबा:- हाँ जिम्मेवारी का ताज, पवित्रता का ताज धारण किसने किया?
जिज्ञासु:- लक्ष्मी ने।
बाबा:- हँ। जो सच्चा प्यार है, वो दिखाया गया है उसका मॉन्यु्मेंट यादगार बनार्इ गर्इ है ताजमहल।
जिज्ञासु:- मुमताज महल बेगम ।
बाबा:- जगदम्बा का पार्ट है?
जिज्ञासु:- नहीं, लक्ष्मी माँ का।
बाबा:- हाँ बिल्कुल। प्यार का पार्ट है न।
जिज्ञासु:- लेकिन वो मुस्लिम रानी भी बनती है लक्ष्मी?
बाबा:- तो क्या हुआ? साथ किसका देना है?
जिज्ञासु:- बाप का ही साथ। लेकिन हम तो समझे थे सिर्फ हिन्दु धर्म में ही राजपूत रानी...
बाबा:- अच्छा! स्वधर्म में रहे तो साथ दे और दूसरे धर्म में चला जाये तो साथ न दे तो सच्चा साथी हुआ? सच्चा साथी हर स्थिति में साथ देगा या कभी साथ देगा, कभी नहीं देगा? (किसीने कहा – हमेशा साथ देगा।)
जिज्ञासु:- तो क्वीन विक्टोरिया भी उसी का पार्ट है।
बाबा:- विक्टोरि यह। यह रही जीत। कहाँ से आती है? कलकत्ते से आती है या बम्बर्इ से आती है? वहां उसका यादगार बना दिया गया इण्डिया गेट। कहाँ? बम्बर्इ में। गेट हो गया लक्ष्मी के आने का।

समय: 30.56-32.37
जिज्ञासु:- बाबा, कृष्णु की आत्मा विक्रमादित्य के अलावा और कौन-2 बनता है?

बाबा:- अब ये तो क्या बाबा बताते है बैठकरके? एक-2 का पार्ट बोर्ड पर बैठकर बतावेंगे? वो तो स्वत: ही टार्इम आवेगा तो राम कृष्ण की आत्मायें अपने मुख से अपना ही पार्ट बतावेंगी, सिद्ध करके बतावेंगी।
जिज्ञासु:- 18 के बाद ...
बाबा:- 18 के बाद भी होगा।
जिज्ञासु:- बताने का पार्ट।
बाबा:- बिल्कुल। अभी नहीं पता चल रहा है क्या?
जिज्ञासु:- मुझे नहीं मालूम।
बाबा:- क्यों? तुलसीदास का पार्ट किस आत्मा का है? अपनी-2 कथा कहानियाँ अपने शास्त्रों में बैठ लिखी है मुरली में बोला । अपनी-2 कथा कहानियाँ बैठ शास्त्रों में लिखी है। तो रामायण किसने लिखी? तुलसी दास ने। तो तुलसीदास कौन सी आत्मा हुये? राम के चरित्र के बारे में राम वाली आत्मा के अलावा और कोर्इ बता सकता है गहरार्इ? वो ही आत्मा बैठ करके रामायण लिखी।
जिज्ञासु:- नहीं दादा लेखराज आत्मा के बारे में पुछ रहा हूँ।
बाबा:- सूरसागर। सूरसागर किसने लिखा?
जिज्ञासु:- सूरदास ने।
बाबा:- सूरदास ने लिखा, सूरदास कौन सी आत्मा हुर्इ?
जिज्ञासु:- कृष्ण।
बाबा:- किसके चरित्र है सूरसागर में? कृष्ण के चरित्र है। कृष्ण की आत्मा सूरदास बनी।

समय: 32.40-34.02
जिज्ञासु:- बाबा आप आल इण्डिया टूर करते रहते हैं। ऐसा टार्इम आ सकता है क्या कि आप नार्थ इण्डिया में ही रहे साउथ इण्डिया में नहीं आए?

बाबा:- नार्थ इण्डिया वाले कहते हैं साउथ इण्डिया में ही बाबा बैठे रहते हैं। साउथ इण्डिया वाले कहते हैं बाबा नार्थ इण्डिया में ही बैठे रहते हैं।
जिज्ञासु:- नहीं फ्युचर की बात कर रहा हूँ।
बाबा:- सदा एक जैसा सबका समय थेाड़े ही होता है। ये तो अपना बुद्धियोग का पार्ट है जिसका बुद्धियोग ज्यादा तीखा होता है बाबा उधर ही चला जाता है।
जिज्ञासु:- इसका मतलब साउथ इण्डिया के लोग बहुत एट्रेक्ट करते हैं।
बाबा:- एक लोहे का गोला है, एक चुम्बक का गोला है। जहां लोहा ज्यादा होगा चुम्बक अपने आप उधर ही खींच जाएगा। उधर लोहा कम है तो चुम्बक भारी लोहे की तरफ खिंचेगा या हल्की लोहे की तरफ खिंचेगा? याद कौन करता है? दु:खी याद करते हैं या सुखी याद करते हैं? जो ज्यादा दु:खी होते हैं वो ज्यादा याद करते हैं, भावना से खींचते हैं। बाबा खिंच जाता है उधर।

समय: 34.07-35.21
जिज्ञासु:- सेवकराम अपना शरीर छोडने के बाद कितना देर के बाद दूसरा जन्म लेता है?

बाबा:- एक सेकेण्ड में।
जिज्ञासु:- ऐसा नहीं। मेरा मतलब ऐसा नहीं है। सेवकराम अपना शरीर छोड़ता है, छोडने के बाद दूसरा शरीर लेने के लिये एक वर्ष होता है या 2-3 साल होता है?
बाबा:- चार महीने होते हैं जन्म लेने में।
जिज्ञासु:- ऐसा ही हुआ क्या?
बाबा:- हाँ जी। कोर्इ भी आत्मा शरीर छोड़ती है...
जिज्ञासु:- वो जनरल बात है...
बाबा:- जनरल ही बात है उसके जीवन में भी जनरल बात है। एक्स्ट्रा आर्डिनरी बात थोड़े ही है। वो आत्मा भी जब शरीर छोड़ती है तो चार महीने पहले से निर्जीव पिण्ड तैयार होता है माँ के पेट में और जब चार महीने का पाँच महीने का हो जाता है तो आत्मा शरीर छोड़ के प्रवेश कर जाती है। उधर शरीर छोड़ा उधर एक सेकेण्ड में प्रवेश। फिर चार-पाँच महीने और पेट में वो चैतन्य आत्मा पकती है परिपक्व होने के बाद जन्म हो जाता है।

समय: 35.23-35.44
जिज्ञासु:- बाबा, मार्इ-बाप माना क्या? केवल माता या दोनों माता-पिता?

बाबा:- मार्इ बाप माने बाप, बाप है माँ, माँ है। साथ ही साथ बोला गया माने मार्इ बाप माने बाप दादा दोनों हैं। एक ही शरीर में।

समय: 35.49-37.21
जिज्ञासु:- बाबा परमधाम में सब आत्मायें चारों ओर घूमते रहेंगे...

बाबा:- घूमते रहेंगे ?
जिज्ञासु:- या उल्टा वृक्ष की तरह एक जगह में ही टिकेंगे?
बाबा:- नहीं। परमधाम कोर्इ ऐसे थोड़े ही कि इस डायरेक्शन में ही है या इस डायरेक्शन में है या इस डायरेक्शन में है या नीचे है। (किसी ने कहा- चारो ओर।) हाँ, माना जो आत्मा जितनी ज्यादा बुद्धि में तीव्र होगी वो उतना ही पृथ्वी के वायब्रेशन से दूर हो जायेगी। जितना बुद्धि में मंद होगी उतना पृथ्वी के वायब्रेशन के नजदीक होगी।
जिज्ञासु:- लेकिन वहाँ घूमते नहीं रहेंगे।
बाबा:- घूमते रहने की क्या बात है? नजदीक और दूर रहने की बात है।
जिज्ञासु:- उसी जगह टिकेगी।
बाबा:- हाँ जी। आत्मा कोर्इ ऐसी चीज थोड़े ही है जो पकड़ में आ जाये कि एक जगह टिक जायेगी। आत्मा जब सम्पन्न बनती है तो कभी-2 याद में ऐसे भी बैठे अनुभव होता है कि हमें चारों तरफ के वायब्रेशन का पता चलता है। इधर का भी पता चलता है ये हरकत क्या कर रहा है उधर का भी पता चलता है कि क्या हरकत कर रहा है। तो आत्मा में सर्वज्ञता आती जाती है। चारों तरफ की चैतन्य स्थिति रहती है। कभी डल हो जाती है आत्मा। अपने ही स्वरुप में टिकना मुश्किल हो जाता है।

समय: 37.32-39.08
जिज्ञासु:- बाबा, ये बताया है जितना स्थापना उतना विनाश।

बाबा:- जितना-2 तीव्रता से स्थापना होती जायेगी उतना-2 विनाश होता जायेगा। आठ की स्थापना होगी पहले-पहले। पहला-2 परिवार की इकार्इ स्थापना हुर्इ तो विनाश भी ज़रूर होगा। उतना ही विनाश होगा स्थूल रुप से दुनिया में।
जिज्ञासु:- और स्थापना सम्‍पन्‍नता 2036 में पती है?
बाबा:- पूरी स्थापना हो जावेगी। 4.5 लाख जो है और उन 4.5 में प्रवेश करने वाली आत्मायें सब सम्पन्न स्टेज को प्राप्त हो जावेंगी 9 लाख।
जिज्ञासु:- तो ये जो बम्ब तैयार हुआ पड़ा है बाबा वो भी सम्पन्नता को 2036 तक...
बाबा:- ...प्राप्त करते रहेंगे।
जिज्ञासु:- और अविष्कार होते ही जाते हैं।
बाबा:- अविष्कार होते ही जा रहे हैं। तीव्रता बढ़ती ही जा रही है।
जिज्ञासु:- वैसे ये सारे साइन्स का सब्जेक्ट में होता है। मेडिसिन ...
बाबा:- मेडिसिन में भी आगे बढ़ रहे हैं। तीव्रता से ऐसी-2 दवार्इयाँ निकाल रहे हैं एक ही दवार्इ से सारी बिमारियां ठीक हो जाए। अभी तो टार्इम लगता है। एक ऐसा भी टार्इम होगा कि कोर्इ भी दवार्इ दी और तुरन्त ठीक।

Disc.CD No. 613, dated 11.08. 2008, at Mysore
Part-3


Time: 28.17-28.45
Student: Baba, in a CD it has been said that it is Narayan who gives knowledge to Lakshmi in the end, hasn’t it?

Baba: Who gives knowledge to Lakshmi?
Student: Narayan.
Baba: Where does Narayan come from? Where does Narayan receive knowledge from? It comes from ShivBaba. And whom does ShivBaba who is Narayan give knowledge to? Is Lakshmi senior or Mahalakshmi senior? Mahalakshmi is first.

Time: 28.48-30.47
Student: Baba, does mother Lakshmi become a Muslim queen too?

Baba: Lakshmi? Why will she become that?
Student: It is because you said that Mumtaz Begum, wife of Shahjahan is a memorial of Lakshmi. It is Lakshmi’s part.
Baba: That taaj (crown) is a crown of responsibility.
Student: The crown of purity.
Baba: Yes, who wore the crown of responsibility, the crown of purity?
Student: Lakshmi.
Baba: Yes. The true love has been shown; its memorial has been built as a monument, the Tajmahal.
Student: Mumtaz Mahal Begum.
Baba: Is it Jagdamba’s part?
Student: No, it is of mother Lakshmi.
Baba: Yes, definitely. It is a part of love, isn’t it?
Student: But does she, i.e. Lakshmi become a Muslim queen as well?
Baba: So, what? Whom should she give company?
Student: She should give company to the Father. But we thought that [she becomes] only a Rajput queen in Hinduism.
Baba: Acchaa! If someone gives company [to someone] if he is in swadharma (one’s own religion) and does not give company if he goes to another religion, then is he a true companion? Will a true companion give company [to someone] under every circumstance or will he give company on some occasions and will not give company on some other occasions? (Someone said: He will always give company.)
Student: So, the part of Queen Victoria also is her part.
Baba: Victory yah. This is the victory. Where does she come from? Does she come from Kolkata or from Bombay? There a memorial has been built in the form of the India Gate (Gateway of India) for her. Where? In Bombay. It is the gate of Lakshmi’s arrival.

Time: 30.56-32.37
Student: Baba, what all does the soul of Krishna become apart from Vikramaditya?

Baba: Well, does Baba say all this? Will He tell [you] everyone’s part [writing it] on a board? Automatically a time will come when the souls of Ram and Krishna will reveal their parts; prove their part through their own mouth.
Student: After 18…
Baba: It will happen after 18 as well.
Student: The part of revealing [parts].
Baba: Definitely. Are you not getting to know [the parts] now?
Student: I don’t know.
Baba: Why? Which soul plays the part of Tulsidas? They have written their own stories in their scriptures this has been said in the Murli. They have written their own stories in the scriptures. Who wrote the Ramayana? (Student: Tulsidas.) Tulsidas. Which soul is Tulsidas? Can anyone except the soul of Ram tell in depth about the character of Ram? The same soul wrote the Ramayana.
Student: No, I am asking about the soul of Dada Lekhraj.
Baba: Soorsagar. Who wrote Soorsagar?
Student: Soordas.
Baba: Soordas wrote it. Which soul is Soordas?
Student: Krishna.
Baba: Whose acts are mentioned in Soorsagar? There are acts of Krsihna. Krishna’s soul became Soordas.

Time: 32.40-34.02
Student: Baba, you are touring all over India; can such a time come when you will stay only in North India and not come to South India?

Baba: North Indians say that Baba sits only in South India and the South Indians say that Baba sits only in North India. :D
Student: No, I am talking about the future.
Baba: Anyone doesn’t experience the same kind of time always. This is a part of the connection of one’s own intellect. The sharper the connection of the intellect of someone is, Baba goes to that very place.
Student: It means that South Indians attract Him a lot.
Baba: There is a ball of iron and there is a ball of magnet. Where there is more iron, the magnet will be pulled there automatically. If the iron is less there, then will the magnet be pulled towards the heavy iron or the light iron? Who remembers [the Father]? Do the ones who are sorrowful remember [Him] or do the ones who are happy remember [Him]? Those who are more sorrowful remember [Him] more. They pull [Baba] through their feelings so, he gets pulled towards that place.

Time: 34.07-35.21
Student: Sevakram, after leaving his body, after how long is he reborn?

Baba: In a second.
Student: Not that. I don’t mean that. Sevakram leaves his body; after leaving his body does it take one year or two-three years to take another body?
Baba: It takes four months for the birth to take place.
Student: Did it happen the same?
Baba: Yes, when any soul leaves its body...
Student: That is a general topic...
Baba: It is a general topic. There is a general topic in his life as well. It is not anything extraordinary. Even when that soul leaves its body, the inert foetus becomes ready four months earlier in the mother’s womb. And when it grows four or five months old, then the soul leaves its [old] body and enters [the foetus]. It leaves the body there and enters [the foetus] in a second. Then that living soul incubates in the womb for another four-five months; after it becomes matured, it is born.

Time: 35.23-35.44
Student: Baba, what is meant by maai-baap? Does it refer to just the mother or both the mother and the Father?

Baba: Maai-baap means, baap is the Father and Maa is the mother. It was said together. So, maai baap means both Baap and Dada are in the same body.

Time: 35.49-37.21
Student: Baba, will all the souls be moving around in the Supreme Abode or…

Baba: Moving around?
Student: Or will they remain static at one place in the form of an upside down tree?
Baba: No, the Supreme Abode is not something like it is only in this direction or in this direction or in this direction or below. (Student: It is everywhere.) Yes, the sharper the intellect a soul has the farther it will be from the vibrations of the Earth. The duller the intellect it has, the closer it will be to the Earth’s vibrations.
Student: But they will not be moving around there.
Baba: It is not something about moving around. It is about being close and far away.
Student: They will remain stable at the same place.
Baba: Yes. The soul is not a thing that can be caught so that it will remain stable at one place. When the soul becomes complete, then sometimes we also feel during remembrance that we come to know about the vibrations around us. We come to know about this place, what this person is doing and we come to know about that place also, what that person is doing. So, the soul goes on attaining knowledge about everything. It remains attentive in all the directions. Sometimes the soul becomes dull. It becomes difficult for it to be stable in its form.

Time: 37.32-39.08
Student: Baba, it has been said that the destruction will take place to the extent the establishment takes place.

Baba: The faster the establishment takes place, the faster the destruction will take place. The establishment of eight will take place first. When the establishment of the first family unit takes place then the destruction will also take place. Destruction will take place to the same extent in a physical form in the world.
Student: Does establishment complete in 2036?
Baba: Complete establishment will take palce. All 9 lakh (900 thousand) souls, i.e. 4.5 lakh (450 thousand) [who give birth] and 4.5 lakh (450 thousand) souls who enter them attain the perfect stage.
Student: Baba, so, till 2036 these bombs which have been prepared...
Baba: ... will also continue to be perfect.
Student: Further inventions continue to take place.
Baba: Inventions continue to take place. Their speed is increasing.
Student: The same thing happens in case of all the subjects of science. Medicine...
Baba: They are progressing in medicine too. They are fast inventing such medicines that cure all diseases. Now it takes time. Such a time will also come when you give one medicine and the person will be cured immediately. ... (to be continued.)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 26 Oct 2014

वार्तालाप नं 613, दिनांक 11.08.2008, मैसूर
भाग-4


समय: 39.12-40.03
जिज्ञासु:- बाबा, संवत एक-एक-एक, 2018 से शुरु होता है और 36 तक वो खतम होता है । सिर्फ 18 वर्ष का वो पिरियड है क्यात?

बाबा:- खत्म होने का पता थोड़े ही चलेगा।
जिज्ञासु:- बाद में वो डेट्स ही नहीं रहेंगे न।
बाबा:- डेट वहाँ होती है, तवारीख वहां तैयार की जाती है, दिन वहाँ गिने जाते हैं जहाँ दुख होता है। जहाँ दुख ही नहीं है वहाँ कोर्इ डेट क्यों गिनेगा, दिन क्यों गिनेगा?
जिज्ञासु:- केवल 18 साल बहुत दु:ख का दिन है।
बाबा:- बहुत दु:ख, 2500 साल के बराबर हो जायेगा।
जिज्ञासु:- और फिर द्वापर से शुरु होते हैं डेट्स।
बाबा:- हाँ जी। जब दुनिया में दुःख शुरु होता है तब दिन गिनना शुरु कर कर देते हैं।

समय: 40.05-42.53
जिज्ञासु:- बाबा, मनुष्य के स्मृ ति में कैसे आ गया कि कलयुग शुरु हुआ?

बाबा:- मनुष्य के बुद्धि में आता ही नहीं। मनुष्य कहाँ जानते थे कि कब कलयुग शुरु हुआ, कब द्वापर शुरु हुआ। (किसीने कहा – शास्त्रों में...) शास्त्रों में तो हजारों साल का कल्प लिख दिया है।
जिज्ञासु:- पर वो कैसे जाना कि अब कलयुग शुरु हुआ है?
बाबा:- किसी ने नहीं जाना। ये तो बाबा ने आकर बताया 1250 वर्ष का कलियुग। शास्त्रों में भी लिखा हुआ है लेकिन शास्त्रों में शास्त्रकारों ने लफड़ा कर दिया है। देवताओं के वर्ष का गुणा कर दिया 365 का। हजारों, लाखों वर्ष हो गया।
जिज्ञासु:- पर सभी ज्योतिषि, पूर्वज सभी बताते हैं हम कलियुग में हैं, कलियुग में हैं।
बाबा:- वो तो अभी 1200 वर्ष से ज्यादा दुःख आने लगा न, तब से अनुभव करने लगे कि कलियुग है। कलियुग में ज्यादा पाप होते हैं, ज्यादा दुःख होता है।
जिज्ञासु:- पर जब ये चेन्ज हुआ तो उनको पता नहीं पड़ा?
बाबा:- उनको पता नहीं है। दुनिया में किसी को पता नहीं कि चार युगों का डिविजन क्या है। ये तो बाबा आकरके बताते हैं।
जिज्ञासु:- पता नहीं मतलब जब द्वापर खत्म होकर ये कलयुग शुरु हुआ...
बाबा:- तो किसी को पता नहीं।
जिज्ञासु:- किसी को पता नहीं था?
बाबा:- नहीं, जब ज्यादा दुख पड़ता है तो पुतले जलाये जाते हैं माना ये हिस्ट्री अगर निकाली जाये रावण कब से जलाना शुरु हुआ, तो उसकी हिस्ट्री निकलेगी कि हाँ रावण को जलाने का शुरुवात जो है वो कलियुग के शुरुआत में हुर्इ।
जिज्ञासु:- जब औरंगजेब आया तब से दुख हुआ।
बाबा:- औरंगजेब अभी 500 साल के अन्दर हुआ है।
जब मोहम्मद गोरी ने आक्रमण किया, मोहम्मद बिन कासीम ने जब से आक्रमण किया लूट-लपोट करना शुरु किया तब से लोग ज्यादा दुखी हुये हैं।

जिज्ञासु:- वैसे ही जब द्वापर शुरु होता है किसी को भी पता नहीं चलता है द्वापर में हैं हम?
बाबा:- द्वैतवाद होता है शुरु तो द्वैतवाद में किसीको क्या पता चलेगा? कोर्इ कुछ कहेगा, कोर्इ कुछ कहेगा।
जिज्ञासु:- तो सतयुग में तो पता होता है हम सतयुग में हैं?
बाबा:- न सतयुग में यें पता होता है कि हम नीचे गिरने वाले हैं। बस सुख ही सुख है सुख ही सुख रहेगा। शरीर छोड़ते भी है तो ये थोड़े ही पता चलता है कि हम नीचे गिर रहे हैं। सारी खुशी ही उड़ जाए।

समय: 43.00-46.14
जिज्ञासु:- बाबा, ये पढ़ार्इ का एम ऑब्जेक्ट सारी दुनिया को पढ़ाना है या सिर्फ कृष्ण बच्चे को पढ़ाना है?

बाबा:- एक की पढ़ार्इ पूरी हुर्इ तो सब की पढ़ार्इ पूरी हो जायेगी। एक के पतित बनने से सब पतित हो जाते हैं, एक के पावन बनने से सब पावन हो जाते हैं।
जिज्ञासु:- और बाबा कहते हैं सभी को बच्चे-बच्चे पर सिर्फ कृष्ण बच्चे को ही प्यार करता है।
बाबा:- ऐसी क्या बात है? कृष्णा बच्चे को ज्यादा प्यार करता है?
जिज्ञासु:- सिर्फ उसी को ही जन्म देता है।
बाबा:- उसी को जन्म देता है? जन्म कौन देता है शिवबाबा देता है क्या?
जिज्ञासु:- नहीं साकार देता है।
बाबा:- तो फिर? साकार में और निराकार में तो बहुत फर्क है। साकार हद में बंधा हुआ है और निराकार? वो तो सदैव बेहद का है। हद का हद का ही बच्चा पैदा करेगा न।
जिज्ञासु:- तो उनका बच्चा बनने का हकदार कौन बनते हैं बाबा?
बाबा:- किनका?
जिज्ञासु:- साकार राम के 63 जन्म होते हैं न बाबा। उन जन्मों में उसका बच्चा...
बाबा:- राम-कृष्ण की आत्मायें तो बच्चा और बाप बनती ही रहती है ना।
जिज्ञासु:- दूसरे कोर्इ नहीं बनते?
बाबा:- नहीं। और भी बनते हैं नम्बरवार। जो पढ़ार्इ पढ़े। पढ़ार्इ पढ़करके जो नजदीक आ जाये।
जिज्ञासु:- उसका भी शूटिंग अभी हाती है?
बाबा:- बिल्कुल अभी शूटिंग हो रही है। जो बात को माने बच्चा वो जो बाप का फरमान बरदार हो, र्इमानदार हो, वफादार हो, आज्ञाकारी हो। बाप की बात ही नहीं मानता, तो बच्चा काहे का। ये तो मोह हो गया।
जिज्ञासु:- तो अभी जो फरमानदार होते हैं, ईमानदार होते हैं वो ही उनका बच्चा़ बनते हैं?
बाबा:- हाँ, अभी शूटिंग हो रही है।
जिज्ञासु:- वो ही उनका लौकिक दुनिया में 63 जन्मों में बच्चे बनेंगे?
बाबा:- बच्चे बनेंगे।
जिज्ञासु:- तो राम बाप का सभी बच्चे ऐसे ही होते हैं? ईमानदार ...?
बाबा:- सभी के बच्चे, सभी ऐसे ही होते हैं। बच्चा वो जो बाप की बात माने। रचना वो जो रचयिता के कन्ट्रोल में हो। कन्ट्रोल में है नहीं, मेरा बच्चा, मेरा बच्चा, मेरा बच्चा। ये तो अज्ञान हो गया। मोह हो गया।
जिज्ञासु:- तो हमारा बाप किस आधार पर मिलता है बाबा? हमारा माँ-बाप किस आधार पर हमको मिलते हैं?
बाबा:- आज्ञाकारी, वफादार, फरमानवरदार, इमानदार इनके आधार पर।
जिज्ञासु:- वो तो राम बाप की बात है।
बाबा:- सभी का है। सभी के लिये वही नियम है। लव जाता है।
दूसरा जिज्ञासु:- ये भी हिसाब किताब है न बाबा?
बाबा:- हिसाब किताब बनाता कौन है? बनाते तो हमी हैं खुद।

समय: 46.16-49.28
जिज्ञासु:- बाबा, ये प्रश्न पूछना और आप उत्तर देना कब तक चलता रहेगा? 18 तक या 36 तक?

बाबा:- जब तक आत्मा में इतनी पावर नहीं आती है, जो परम आत्मा है परम पार्टधारी है जब तक उसमें इतनी पावर नहीं आती है कि दृष्टि से देखने मात्र से ही शांत कर दे।
जिज्ञासु:- आप अलग-अलग आत्मा को बता रहे हैं ...?
बाबा:- सभी की बात।
जिज्ञासु:- एक आत्मा में ऐसी पावर होनी चाहिए...?
बाबा:- एक आत्मा हीरो पार्टधारी ऐसी तैयार हो जाये कि जैसे किसी को देखा... देखे भी नहीं, सिर्फ वायब्रेशन मात्र से ही दूर से बैठे-बैठे उसको शांत कर दे। आजकल तो कम्प्यूटर चल पड़ा है। विलायत में बैठ करके वायब्रेशन फेंकता रहे कम्प्यूटर के द्वारा, इन्टरनेट से चारों तरफ अपनी विरोधी भावनायें फैलाता रहेगा। तो उनको चाहे तो दूर बैठे भी शांत कर दे। ऐसी पावर आ जाये आत्मा में।
जिज्ञासु:- तब तक पूछताछ होता रहेगा?
बाबा:- तब तक चलता रहेगा। कान्सन्ट्रेशन से ही पावर आयेगी।
जिज्ञासु:- ये सब 2018 के अन्दर ही खत्म होगा?
बाबा:- खत्म नहीं होता है, वो तो एक आत्मा की बात हुर्इ। फिर नम्बरवार ढ़ेर सारी आत्मायें तैयार होंगी।
जिज्ञासु:- तो 18 से 36 तक...?
बाबा:- 36 तक ये काम चलता ही रहेगा। पारसनाथ का जो गायन है। पार्श्वब, पार्श्वी माने नजदीक। जो भी नज़दीक आये वो ही चेन्ज हो जाये। बोलने की दरकार ही नहीं। वाचा से तो चेन्ज होते भी नहीं उतने। वाचा तो स्थूल है। वाचा से ज्यादा श्रेष्ठ तो, ज्यादा शक्तिशाली दृष्टि है। दृष्टि से भी ज्यादा पावरफुल वृत्ति है। वायब्रेशन। दुनिया में चारों तरफ घनघोर विनाश हो रहा होगा उस समय न वाचा काम आयेगी न दृष्टि काम आयेगी। कैसे परिवर्तन होगा? वायब्रेशन से। इतना तीव्र वायब्रेशन फैलाया जायेगा चारों तरफ दुनिया में, जिसको बचना होगा वो बचेगा, ठहरना होगा वो ठहरेगा। जैसे उन्होंने शक्तिमान सीरियल बनाया है। देखा? नहीं देखा? शक्तिमान सीरियल बनाया है। जहाँ-जहाँ पहुँचता है वहाँ-वहाँ शांति हो जाती है।

समय: 49.42-50.36
जिज्ञासु:- बाबा, अकाल कब पड़ेगा?

बाबा:- जब ज्यादा पाप बढ़ेगा, अति होगी पापों की।
जिज्ञासु:- वो तो 18 के बाद ही होगा।
बाबा:- तब तक विनाश शुरु हो जायेगा, अकाल घोषित हो जायेगा तब तक।
जिज्ञासु:- तब तक ये बारिश ये सभी ...?
बाबा:- ये तो दुनिया में हमेशा बढ़ते ही चले आये हैं। अतिवृष्टि होना, अनावृष्टि होना, ये तो चलता ही चला आया, ये क्या बड़ी बात। आज इस देश में हो गया, कल उस देश में हो गया, परसों उस देश में हो गया। सैकड़ों देश हैं। क्या फर्क पड़ता है? चारों तरफ घनघोर होने लगे।
जिज्ञासु:- द्वापर में भी अतिवृष्टि, अनावृष्टि होता रहता है क्या?
बाबा:- शुरुआत हो जाती है। वहाँ तो प्रकृति फिर भी सात्विक स्टेज में रहती है।

समय: 50.40-51.07
जिज्ञासु:- बाबा, एक माता जी ने पूछा। आत्मा की रोशनी आँखों से निकलती है। ऐसे देख सकते हैं।

बाबा:- दृष्टि की तीव्रता का पता चलता है।
जिज्ञासु:- लेकिन जो अन्धे होते हैं न उसका कैसे?
बाबा:- उनका वायब्रेशन से पता चलता है। उनका वायब्रेशन तीखा होता है।

समय: 51.10-51.29
बाबा:- पाटिल कहाँ गया?

जिज्ञासु:- पाटिल भार्इ का कोर्इ जायदाद का रजिस्ट्रेशन आज ...
बाबा:- होने वाला है?
जिज्ञासु:- होने वाला है इसलिये गाँव गये। उसको पता नहीं था।

समय: 51.34-53.04
जिज्ञासु:- बाबा, याद करने के टार्इम में बीच में झुटका आता है।

बाबा:- ज्यादा पाप चढ़ गया।
जिज्ञासु:- फिर याद करते हैं।
बाबा:- हाँ, कोर्इ पुण्य उदय हो जाता है सो जगा देता है।
जिज्ञासु:- पहली याद एड होती है?
बाबा:- और क्या? ऐड क्यों नहीं होगी? पूरा ही सो जाये पाँव फैला के तो कट हो जायेगा।
जिज्ञासु:- पूरा नहीं बाबा ...
बाबा:- तब तक बैठे-बैठे हिम्मत कर रहे हैं न, याद करने की। हिम्मते बच्चे मददे बाप।
जिज्ञासु:- तो पहले की याद, बाद में की हुई याद में ऐड होता है ?
बाबा:- एड तब तक होता रहेगा जब तक पुरुषार्थ करते रहेंगे। लम्बी तान के सो गये, कट हो जायेगा। इसलिये अमृतवेला अच्छा हो। ऐसे नहीं कि सारा अमृतवेला कर लिया और आखिर मे आके सो गये।
जिज्ञासु:- ऐसे नहीं बाबा, करते करते पाँच मिनट ऐसा झुटका आ जाता है ना।
बाबा:- तो बैठे रहते है न तो तब तक पुरुषार्थ हुआ न। हिम्मत तो कर रहे हैं बैठे रहने की।
जिज्ञासु:- बैठते हैं झुटका आ जाता है।
बाबा:- पाप कर्म बढ़ रहे हैं न। सौ गुना पाप कर्म बढ़ रहा है ।

Disc.CD No. 613, dated 11.08. 2008, at Mysore
Part-4


Time: 39.12-40.03
Student: Baba, Era 1.1.1 starts from 2018 and ends in 36. Is it just for a period of 18 years?

Baba: You will not come to know about its ending.
Student: No, later there will not be any date at all, will there?
Baba: Dates exist, records are maintained and days are counted where there is sorrow; why will someone count the dates and days where there is no sorrow?
Student: So, there are days of extreme sorrow for 18 years.
Baba: There is extreme sorrow. It will be equal to [the sorrow in] 2500 years.
Student: And then the dates start from the Copper Age.
Baba: Yes. When sorrow starts in the world, then counting of days begins.

Time: 40.05-42.53
Student: Baba, how did it come in the intellect of the human beings that the Iron Age has started?

Baba: It does not come in the intellect of the human beings at all. The human beings did not know when the Iron Age began or when the Copper Age began. (Someone said: In the scriptures...) In the scriptures, the age of a cycle (Kalpa) has been mentioned to be of thousands of years.
Student: How did they come to know that now the Iron Age has started?
Baba: Nobody came to know it. It is Baba who came and said that the Iron Age is 1250 years old. It has been written in the scriptures also, but the writers of the scriptures have created confusion in the scriptures by multiplying the years of the deities with 365. It became thousands and lakhs of years.
Student: But all the astrologers, our ancestors say that now they are in the Iron Age.
Baba: People have started experiencing more sorrow for 1200 years. It is since then that they started feeling that it is the Iron Age; there are more sins, more sorrow in the Iron Age.
Student: But don’t they know when it changed [from Copper Age to Iron Age]?
Baba: They do not know; nobody in the world knows what the division of the four ages is; Baba comes and tells [us] this.
Student: Nobody knows, means that when the Copper Age ended and the Iron Age started...
Baba: ... then nobody came to know.
Student: Nobody knew?
Baba: No, when the sorrow increase a lot, then effigies are burnt; it means that if you take out the history about since when did people start to burn Ravan, then the history will come out that yes, the burning of Ravan began from the beginning of the Iron Age.
Student: Sorrow started from the time Aurangzeb arrived.
Baba: Aurangzed existed in the last 500 years. When Mohammad Gori attacked, ever since Mohammed Bin Quasim attacked and started to plunder [India], people have become more sorrowful.
Student: Similarly, when the Copper Age begins then nobody knows that they are in the Copper Age.
Baba: When dualism begins, then what will someone come to know in dualism? Someone will say something and someone else will say something else.
Student: So, do people know in the Golden Age that they are in the Golden Age?
Baba: They don’t know in the Golden Age that they are going to fall either. [They think:] There is just happiness and there will be just happiness. Even when they leave their body, they do not know that they are falling. [If they come to know this] the entire joy will vanish.

Time: 43.00-46.14
Student: Baba, is the aim and objective of this knowledge to teach the entire world or is it to teach just child Krishna?

Baba: When the study of one is over then everybody’s study will be over. When one becomes sinful, all become sinful. When one becomes pure, all become pure.
Student: Baba calls everyone children, but He loves only the child Krishna.
Baba: Why is it so that [you think] He love only child Krishna more?
Student: He gives birth only to him.
Baba: He gives birth only to him? Who gives birth [to him]? Does ShivBaba give birth [to him]?
Student: No. The corporeal one gives birth.
Baba: So, then? There is a lot of difference between the corporeal one and the incorporeal One. The corporeal one is bound in limits and the incorporeal One is always unlimited. The limited one will give birth only to a limited child, won’t he?
Student: So, who becomes entitled to become his child, Baba?
Baba: Whose?
Student: Corporeal Ram has 63 births, hasn’t he, Baba? [Who becomes] his child in all those births?
Baba: The souls of Ram and Krishna keep becoming child and Father, don’t they?
Student: Don’t others become [his children]?
Baba: No, others also become that before or after [according to their purushaarth]. Whoever studies the knowledge, whoever studies and comes close [to him to whatever extent will become his child].
Student: Does its shooting also take place now?
Baba: Definitely its shooting is taking place now. The one who obeys the words [of the Father], the one who is compliant to the Father, the one who is honest, loyal, obedient is a child. How can the one who does not obey the Father’s words at all be His child? This is attachment.
Student: So, those who are obedient, honest children now only they become his children?
Baba: Yes, the shooting is taking place now.
Student: Will only they become his children in the 63 births in the lokik world?
Baba: They will become his children.
Student: So, are all the children of Father Ram just like this? Honest...?
Baba: Children of everyone; all are just like this. The one who obeys the Father is a child. The one who remains under the control of the creator is the creation. If he (the creation) is not under control, [and still someone says:] My child, my child, my child. [Then] this is ignorance. It is attachment.
Student: So, on what basis do we get our Father, Baba? On what basis do we get our parents?
Baba: On the basis of being obedient, loyal, compliant and honest.
Student: It is about the Father Ram…
Baba: It is for everyone. The rule is the same for everyone. [They are born] wherever their love goes.
Another student: This is a karmic account, too, isn’t it, Baba?
Baba: Who creates the karmic accounts? We ourselves create it.

Time: 46.16-49.28
Student: Baba, how long will this asking of questions [by the students] and giving answers by you continue? Till 18 or till 36?

Baba: As long as the soul does not get this much power; until the Supreme Soul, the one who plays the supreme part does not attain the power to such extent that he calms down someone just by seeing him.
Student: Are you talking about other souls…?
Baba: It is about everyone.
Student: Should one soul have such power ...?
Baba: One soul, the hero actor should become such that whoever he sees… not even seeing, he should calm down someone sitting far away just through vibrations; nowadays the computer has started. Someone may keep spreading vibrations through computer sitting in a foreign country; someone may keep spreading opposite feelings through the internet everywhere; so he (the supreme actor) should be able to calm them down sitting far away. The soul should attain such power.
Student: Will the questioning and answering continue till then?
Baba: It will continue till then. The power will come only through concentration.
Student: Does all this finish within 2018?
Baba: It does not end; it is about one soul. Then numberwise (one after the other), numerous souls will get ready.
Student: So, from 18 to 36...
Baba: This task will continue till 36. Paarasnath is praised. Paarshva means close. Whoever comes close [to him] should be transformed. There [shouldn’t be the] need to speak at all. Also, [people] don’t change through words to that extent. Words are physical. Drishti is more elevated, more powerful than words. Vibrations are more powerful than vision (drishti). When there is fierce destruction everywhere in the world, at that time neither words will be of any use nor will vision be of any use. How will the transformation take place? Through vibrations. Such strong vibrations will be spread everywhere in the world that the one who is to be saved will be saved and the one who has to stay will stay. For example they have prepared the serial Shaktimaan. Did you see it? Did you not see it? The serial Shaktiman has been made; peace is established wherever he goes.

Time: 46.42-50.36
Student: Baba, when will the drought start?

Baba: When the sins increase more, when the sins reach the extreme level.
Student: That will be only after 18.
Baba: Destruction will start by then; drought will be declared by then.
Student: Till then the rains, all this....
Baba: All these [calamities] have always been increasing in the world. Too much rain, too less rain; this has always been happening. What is the big issue? Today it happens in this country; tomorrow it happens in that country; the day after tomorrow, it happens in another country. There are hundreds of countries; what difference does it make? [At the time of destruction] there will be heavy [rainfall] everywhere.
Student: Does too much rainfall and less rainfall take place in the Copper Age as well?
Baba: It begins. There, the nature is still in a pure stage.

Time: 50.40-51.07
Student: Baba, a mother has asked a question: The soul’s light comes out through the eyes. You can see it in that way.

Baba: The intensity of the vision can be known.
Student: But what about those who are blind?
Baba: It can be known through their vibrations. Their vibrations are strong.

Time: 51.10-51.29
Baba: Where did Patil go?
Student: Patil Bhai has gone for a registration work today...
Baba: Is it going to take place?
Student: It is going to take place. That is why he went to the village. He didn’t know.

Time: 51.34-53.04
Student: Baba, we dose off at the time of remembrance.

Baba: The sins (paap) have increased more. :D
Student: We remember again.
Baba: Yes, when a merit (punya) comes up, then it wakes you up.
Student: Does the remembrance made earlier add up to it?
Baba: Why not? Why will it not be added up? If someone sleeps completely streaching out his legs, then it will be cut off.
Student: Not completely, Baba.
Baba: Until then you are showing the courage to remember while sitting, aren’t you? If the children show courage, the Father will help.
Student: So, does the remembrance made earlier add up to the remembrance made later?
Baba: It will go on adding up until you keep making purushaarth (the spiritual effort). If you sleep with your legs stretched out, then it will be cut off. This is why the amritvelaa (remembrance at early morning hours) should be good. It shouldn’t be that you complete the amritvelaa and then go to sleep in the end.
Student: Not like that, Baba. We doze off for five minutes while remembering.
Baba: So, you continue to sit, don’t you? Until then you made purushaarth, didn’t you? You are at least showing courage to sit.
Student: We sit [but] we feel sleepy.
Baba: The sins are increasing, aren’t they? The sins are increasing hundred fold. ... (to be continued.)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 27 Oct 2014

वार्तालाप नं 613, दिनांक 11.08.2008, मैसूर
भाग-5


समय: 53.12-54.16
जिज्ञासु:- बाबा, जमुना के कण्ठे पर स्वर्ग स्थापन होगा। बेहद में यहाँ चैतन्य जमुना का क्या पार्ट होगा स्वर्ग की स्थापना में?

बाबा:- एडवांस के आदि में जमुना... कण्ठा माना किनारा । जमुना थी या नहीं थी? या दूर थी? नजदीक थी। माना फाउंडेशन पड़ा। अभी दूर है नजदीक है? दूर है, तो कण्ठा नहीं है। फिर नजदीक होगी।
जिज्ञासु:- तो उसका ही नाम पड़ता है? वो आगे है?
बाबा:- स्थूल में भी ऐसे ही है। पहले दिल्ली में जब स्थापना हुर्इ तो जमुना स्थूल भी नजदीक थी और स्थूल जमुना के कण्ठे पर सीलमपुर से शुरुआत हुर्इ, शाहदरा से। तो जमुना का कण्ठा था ना। अभी? अभी तो पूर्व की बात पश्चिम में चली गर्इ।

समय: 54.24-55.35
जिज्ञासु:- एडवांस के लोग अगर शरीर छोड़ते हैं तो क्या वो दूसरा शरीर लेते हैं क्या अभी ?

बाबा:- एडवांस वाले भी दो तरह से शरीर छोड़ते हैं। एक तो अकाले मौत में भी शरीर छोड़ रहे हैं और एक नेचुरल मृत्यु भी होती है।
जिज्ञासु:- नेचुरल मृत्यु हुई तो क्या वो दूसरा शरीर लेता है या...?
बाबा:- तुरन्त, तुरन्त शरीर लेता है। अकाले मौत होगी ...
जिज्ञासु:- नेचुरल डेथ हुआ तो दूसरी शरीर लेने का कब तक ये चलता रहता है 18 तक या 36 तक?
बाबा:- चलता ही रहेगा।
जिज्ञासु:- 18 के बाद भी शरीर छोड़ने के बाद वो दूसरा शरीर लेता है?
बाबा:- बाद में पैदा होंगे वो चमत्कारी बच्चे पैदा होंगे। एक साल के उमर में ही बहुत कुछ करके दिखायेगें। जैसे आज कल दो-दो, तीन-तीन, चार-चार साल के बच्चे कम्प्यूटर में बैठ करके चमत्कार दिखा रहे हैं।
जिज्ञासु:- ऐसा ही होता है।
बाबा:- हाँ।

समय: 55.41-56.43
जिज्ञासु:- बाबा, जब अन्त में महाविनाश होगा तो ग्रेनार्इट पत्थर से बना सबसे मजबूत पहाड़ माउन्ट आबू भी पिघल जाता है एटामिक विस्फोट से।

बाबा:- हाँ।
जिज्ञासु:- पर एक ऐसा अजूबा, स्वर्ग का निर्माण जो बाबा जमुना के कण्ठे पर दिल्ली में करेंगे वो कैसे...?
बाबा:- वहाँ पाँच तत्वों का असर नहीं होगा वायब्रेशन के आधार पर। ऐसी आत्माओं का संगठन तैयार होगा जैसे की पाँच उगंलियो की मुट्ठी बंध जाती है। (किसी ने कहा – पाँच पाण्डव।) हाँ, तो संगठन मजबूत हो जाता है। ऐसा पाण्डवों का पावरफुल संगठन बनेगा, किला बनेगा, कि एक भी विकारी उसमें प्रवेश कर न सकें।
जिज्ञासु:- तो एटामिक विस्फोट का भी कोर्इ असर उनको नहीं लगेगा?
बाबा:- जब वायब्रेशन ही कन्ट्रोल कर लिया तो प्रकृति सहयोगी बनेगी वहाँ या विरोधी बनेगी?

समय: 56.50-57.31
जिज्ञासु:- बाबा, ये एडवांस वालों में भी सूक्ष्म शरीर रहेगा क्या?

बाबा:- अभी क्या अचानक मौत नहीं हो रही है एडवांस वालों की? एडवांस वालों में दूसरे धर्म की आत्मायें नहीं हैं? अरे! एडवांस वालों में दूसरे धर्म के छिलके वाले बीज नहीं हैं? (जिज्ञासु-हैं।) तो फिर वो उस तरह का पार्ट बजायेंगे या नहीं बजायेंगे?
जिज्ञासु:- वो भी शरीर में प्रवेश करके पार्ट बजायेंगे क्या?
बाबा:- बजाते हैं। बजाते हैं, बजा रहे हैं।

समय: 57.31-58.49
जिज्ञासु:- बाबा, कर्ण कन्यां से पैदा होता है बेहद में इसका अर्थ क्या है?

बाबा:- यज्ञ के आदि में ब्रह्मा वाली आत्मा ने जन्म लेने की शूटिंग की होगी कि नहीं ब्रह्मा के रुप में? अरे! ब्रह्मा के रुप में किसी से जन्म लिया होगा या नहीं लिया होगा?
जिज्ञासु:- माता के द्वारा ...।
बाबा:- माता के द्वारा मिला होगा।
जिज्ञासु:- लेकिन कन्या तो नहीं होती न वो।
बाबा:- गीता माता कन्या नहीं है?
जिज्ञासु:- यज्ञ के आदि में गीता माता, माता थी न?
बाबा:- अरे, ज्ञान में आने के बाद की बात है ज्ञान में आने के बाद कन्या है माता है?
जिज्ञासु:- कन्या।
बाबा:- कन्या है। फर्स्ट क्लास कन्या है। यज्ञ के आदि में शूटिंग हुर्इ होगी कन्या से जन्म लेने की, पवित्र आत्मा से जन्म लेने की तो सतयुग आदि में भी पवित्र से जन्म लेगा कृष्ण या अपवित्र से जन्म लेगा? पवित्र से ही जन्म लेगा। राधा और कृष्ण दोनों का जन्म किससे होगा? शूटिंग पीरीयड में जिससे हुआ होगा सतयुग में भी उसी से होगा।

समय:58.55-1.08.03
जिज्ञासु:- बाबा] जगदम्बा को लेखराज ब्रह्मा ने साक्षात्कार का हिसाब बताया वो कहाँ बताया बाबा? वो कल्क]त्ताब के दुकान में बताया या सेवक राम के घर में बताया? कहाँ बताया?

बाबा:- ये कोर्इ धन्धे-धोरी के स्थान में थेाड़े ही होता है, फैमेली इकट्ठी होती है वहाँ?
जिज्ञासु:- तो कहाँ बाताया बाबा?
बाबा:- ये तो फैमेली की बात है न। तीन आत्मायें जो हैं वो तो फैमेली हैं न। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।
जिज्ञासु:- तो किसकी घर में बताया?
बाबा:- किसके घर में बताया? किसी दूसरे के घर में बतायेंगे बैठ के?
जिज्ञासु:- नहीं बाबा, दो मातायें थी, दो अलग मकान थी या एक ही मकान में दो ...?
बाबा:- माने ऐसा नहीं हो सकता कि वो दोनों मातायें प्यार से मिल करके बैठकरके बातें करें?
जिज्ञासु:- बैठ के बातें करने की बात अलग है पर...
बाबा:- वायब्रेशन श्रेष्ठ होना चाहिए या वायब्रेशन भ्रष्ट होना चाहिए फाउन्डेशन का?
जिज्ञासु:- श्रेष्ठ होना चाहिए।
बाबा:- तो श्रेष्ठ ही होगा।
जिज्ञासु:- तो एक ही मकान में वो तीनों रहते थे?
बाबा:- जो आदि में विष्णु होगा वो अन्त में विष्णु होगा या नहीं होगा? होगा। तो आदि में कोर्इ आत्मायें थी जो संस्कार आपस में मिलते हों? ब्रह्मा और यशोदा, दादा लेखराज और यशोदा के संस्कार तो आपस में नहीं मिले। यशोदा चली नहीं ज्ञान में ठीक से।
जिज्ञासु:- पर जब लेखराज ब्रह्मा ने साक्षात्कार का बात बताया तब सेवक राम दुकान में था?
बाबा:- सेवक राम दुकान में था या घर में था या...
जिज्ञासु:- वो नहीं था उस वक्त।
बाबा:- क्यों नहीं था, तो बतायेगा कौन?
जिज्ञासु:- नहीं बाबा जब लेखराज ब्रह्मा साक्षात्कार का बात बताये, माता को बताया...
बाबा:- लेखराज ब्रह्मा, ये देखना है कि किसके नजदीक ज्यादा थे?
जिज्ञासु:- गीता माता।
बाबा:- गीता माता के नजदीक ज्यादा थे? अपनी बड़ी बहन के नजदीक ज्यादा नहीं थे?
जिज्ञासु:- नहीं थे।
बाबा:- अच्छा!
दूसरा जिज्ञासु:- ऐसा हुआ तो उसको ही बोल सकते हैं ना।
बाबा:- अच्छा! सुनो।
जिज्ञासु:- क्या-क्या होगा?
बाबा:- क्या-क्या होगा? यज्ञ के आदि में कोर्इ तो युगल ऐसा होगा। जो आदि में था सो अन्त में होगा। जिस समय बाबा को नर्इ दुनिया का फाउन्डेशन डालना है। तो कौन होगा वो युगल?
तीसरा जिज्ञासु:- लक्ष्मी नारायण।
बाबा:- लक्ष्मी नारायण। वो कौन थे?
जिज्ञासु:- ब्रह्मा बाबा का बड़ी बहन।
बाबा:- बड़ी बहन और बहनोर्इ। वो आखरी जीवन में भी सात्विक जीवन था। सच्चे हीरों की दुकान बैठ करके चलाते थे। आखरी जीवन में भी सच्चार्इ थी। लेकिन थे पतित। सबसे ज्यादा पतित कौन था? अरे अन्त में आके सबसे ज्यादा पतित भी कौन होगा? राम वाली आत्मा। तो पत्नियाँ रखेगा कि नहीं ज्यादा? (किसी ने कहा- रखेगा।) फिर? दादा लेखराज का जो नजदीक आना वो किसके नजदीक आयेगा? बड़ी माँ के नजदीक आयेगा कि छोटी माँ के नजदीक आयेगा? या भागीदार के नजदीक आयेगा अपनी बात कहने के लिये? किसके पास आकर के उसको हिम्मत पड़ेगी?
जिज्ञासु:- छोटी माँ।
बाबा:- छोटी माँ कें पास?
जिज्ञासु:- मतलब जो नजदीक है उसके पास जाते हैं।
बाबा:- तो कौन नजदीक है? सारे जिन्दगी लौकिक जीवन में ज्यादा नजदीक कौन था? ब्रह्मा बाबा ने अपने बड़ी बेटी किसके पास रख दी?
तीसरा जिज्ञासु:- वैष्णवी देवी।
बाबा:- वैष्णवी देवी के पास रखा। तो नजदीक था तभी तो रखा। अगर आत्मीयता न होती तो अपने लड़की को उनके पास क्यों रख देता? निर्मलशान्ता दादी को कहाँ रखा?
जिज्ञासु:- राधा बच्चीन के पास।
बाबा:- फिर?
दूसरा जिज्ञासु:- वो तो ठीक है बाबा लेकिन साक्षात्कार का डिटेल...
बाबा:- वो तो जिसके नजदीक होगा उसी को तो पहले सुनायेगा जा के न। अच्छा इतना तो बुद्धि में आ गया कि ये तो सारे झूठे हैं गुरू, गोसाईं वाराणसी के पण्डितों तक। ये तो उन्होंने दिल में सोचा कि हमारी दुकान का जो भागीदार है वो बहुत होशियार है, सच्चा आदमी है। उसकी सच्चार्इ की, उनकी पण्डितार्इ की धाक तो जमी हुर्इ थी उनकी बुद्धि में। तब तो कलकत्ता याद आया। तो किसके घर पहुचेंगे? बहनोर्इ के घर ही पहुँचेंगे। और बहनोर्इ और बहन दोनों में से ज्यादा नजदीक उनके कौन था? बहन ही ज्यादा नजदीक थी। उसको पहले सुनाया।
दूसरा जिज्ञासु:- लेकिन कोर्स में बताया कि गीता माता को पहले सुनाया।
बाबा:- हाँ, तो गीतायें भी तो दो हैं एक है गीता कि दो हैं? कितनी हैं? गीतायें भी दो हैं। एक सुनने सुनाने का फाउण्डेशन डालने वाली। नहीं है? और एक गीता वो है जो प्रैक्टिकल प्योरिटी की भासना कराने वाली है।
दूसरा जिज्ञासु:- तो दोनों मातायें वहाँ मौजूद थी?
बाबा:- तभी तो त्रिमूर्ति बनेगी। एक माता हो मौजूद, एक माता मौजूद न हो तो त्रिमूर्ति कैसे बनेगी? दोनों मातायें मौजूद थीं और प्रजापिता भी मौजूद था। छोटी माँ ने बात बड़ी माँ को बतार्इ होगी।
दूसरा जिज्ञासु:- पहले छोटी माँ ने ही सुना ...
बाबा:- दादा लेखराज ज्यादा नजदीक किसके थे?
दूसरा जिज्ञासु:- अपनी बहन के।
बाबा:- बहन के नजदीक थे। तो सुनाया कि हमारी तो हिम्मत पड़ नहीं रही है ये बात बहनोर्इ को बताने की, तुम बता देना। तो जिस समय बताया उस समय वो बड़ी माँ भी थी साथ में।
तीसरा जिज्ञासु:- गीता माता।
बाबा:- गीता माता। तो तीनों के बीच में वो बात आर्इ। उसमें बड़ी माँ ने हिम्मत की सेवक राम को सुनाने की। छोटी माँ हिम्मत नहीं कर पार्इ। बड़ी माँ ने हिम्मत की, हिम्मत करके सुनाया कि दादा लेखराज को ऐसे-ऐसे साक्षात्कार हुये। उन्होंने ऐसे-ऐसे अनुभव किया। यहाँ-वहाँ भटकते रहे। कहीं उनको समाधान नहीं मिला। इन साक्षात्कारों का क्या अर्थ है? मतलब क्या है? क्यों हुये? उसी समय शिवबाबा ने प्रवेश कर लिया। तो सुनने सुनाने की शूटिंग भी बड़ी माँ के द्वारा हुर्इ। क्या? बोल-2 करने की शूटिंग किसके द्वारा हुर्इ?
तीसरा जिज्ञासु:- बड़ी माँ के द्वारा।
बाबा:- बड़ी माँ के द्वारा। और समझने और समझाने की शूटिंग किसके द्वारा हुर्इ? ( किसी ने कहा :- छोटी माँ के द्वारा।)

अरे! बाप के द्वारा समझने और समझाने की शूटिंग हुर्इ। और धारण करने की शूटिंग किसके द्वारा हुर्इ? छोटी मम्मी । छोटी मम्मी ने उन बातों को अन्दर-2, अन्दर-2 आत्मािसात कर लिया। बोल-2 करने वाला तो सुनायेगा, सुनेगा और सबको बुल- बुल बलबला देगा। खुद के जीवन में वो धारणा हो या न हो। वो ही पार्ट अभी भी है। बड़ी माँ अभी जीभ निकाल करके सारी दुनिया में ज्ञान को फैलायेगी। सब ध्यान से सुनेंगे। लेकिन प्रैक्टिकल जीवन में क्या करेगी? शंकर जी की छाती पर लात रखेगी। बेइज्जती करेगी पूरी अच्छी तरह से। ज्ञान तो सुनायेगी लेकिन ज्ञान ग्लानी का होगा या ज्ञान होगा? ग्लानी का ज्ञान होगा। दुनिया वाले ग्लानी ज्यादा सुनते हैं प्यार से, रमक से या ज्ञान ज्यादा रमक से सुनते है? ग्लानी को बड़ी रमक से सुनते हैं। ड्रामा बना हुआ है।

समय: 01.08.07-01.09.10
जिज्ञासु:- बाबा, सेवक राम की अचानक मौत हो गयी, हत्या् की गई। फिर भी उसको सूक्ष्म शरीर नहीं मिलता तुरन्त जन्मम...

बाबा:- एक योद्धा युद्ध में लड़ता है, शरीर छोड़ देता है अचानक, गर्दन कटी, अचानक शरीर छोड़ दिया। उसको स्वर्ग मिलेगा या नर्क मिलेगा या भूत-प्रेत बनेगा? (किसी ने कहा- स्विर्ग।) श्रेष्ठ जगह जन्म लेगा ना। ऐसे ही है। ये भावना की बात है। उस समय जब विस्फोट हुआ यज्ञ के आदि में, भागी तो उस समय भी। मक्खन चुराया, गोपियों को भगाया, ये सब कंलक किसके ऊपर लगे ? पहले ब्रह्मा के उपर लगे या पहले बाप के उपर लगे? बाप के उपर लगे। उसने तो सच्चार्इ से मुकाबला किया। जो सच्चार्इ से मुकाबला करेगा वो भूत-प्रेत बनेगा, नर्क में जन्म लेगा या श्रेष्ठ जगह जन्म लेगा? श्रेष्ठ जगह जन्म लेता है।

समय: 01.09.15-01.11.12
जिज्ञासु:- बाबा सात नारायण को सात जन्म में गद्दी मिलती है, वैसे ही 16000 प्रिंस प्रिंसज जो बनते हैं उनको भी कहीं न कहीं ...?

बाबा:- उनको भी नम्बरवार गद्दी मिलेगी। गद्दी कहाँ होती है प्रिंस प्रिसेंज को? जो राजा बनते हैं, उनको गद्दी मिलती है प्रिंस-प्रिंसेज तो, उनको लकब मिल जाता है। राजकुमार, राजकुमारी।
जिज्ञासु:- लेकिन सात नारायण तो राजा नहीं थे न। वो 108 के माला में नहीं हैं फिर भी उनको गद्दी मिलता है न?
बाबा:- प्रवेश नहीं करते हैं? जैसे ब्रह्मा की सोल नारायण बनती है, वो प्रवेश करके पार्ट नहीं बजाती हैं। तो आधा हिस्सा लेती नहीं है? पहले जो नर-नारायण बनने वाला है उसका बच्चा बन गर्इ न। तो ऐसे ही दूसरा नारायण भी किसका बच्चा बनेगी? (जिज्ञासु- कृष्ण ) कृष्णब का? नहीं, नहीं। जिसमें प्रवेश करेंगे उसके द्वारा वो हिस्सा लेंगे कि नहीं अपना? इन्सप्रेटिंग पार्टी कौन है? वो हैं इन्सप्रेटिंग पार्टी कि नहीं? (जिज्ञासु – हाँ।) तो उमंग उत्साह बढ़ाते हैं तो उसका हिस्सा नहीं मिलेगा? सारा हिस्सा इन्जीनियर ही ले जायेंगे क्या? या मकान बनाने वाले मजदूर ही सारा हिस्सा ले जायेंगे? मकान मालिक को कुछ नहीं मिलेगा बिचारे को? बनाने के लिये प्रेरित कौन करता है? (किसी ने कहा- इन्सप्रेटिंग पार्टी।)
दूसरा जिज्ञासु:- बाबा, सात नारायण ही इन्सप्रेटिंग पार्टी वाले हैं?
बाबा:- इन्सप्रेंटिग पार्टी वाले सात नारायण ही क्यों हैं? उनका कुल व गोत्र बहुत बड़ा है। सात नारायण ही प्रवेश करके पार्ट बजायेंगे? और नहीं प्रवेश करके पार्ट बजायेंगे?
दूसरा जिज्ञासु:- और भी प्रवेश करेंगे।
बाबा:- हं।

समय: 01.11.15-01.12.40
जिज्ञासु:- बाबा, आदि में बाप एक तरफ और बच्चे एक तरफ हो गए।

बाबा:- बच्चे नहीं। एक आत्मा एक तरफ और सारी दुनिया दूसरी तरफ माने जो यज्ञ के अन्दर थे वो भी विरोधी बन गए।
जिज्ञासु:- बाबा अभी अन्त में भी होगा?
बाबा:- बिल्कुबल होगा। होगा नहीं तो माला कैसे बनेगी? नम्बर एक, नम्बर दो, नम्बर तीन। नम्बर नहीं बनेंगे?
जिज्ञासु:- माला बनने के लिये ऐसे...
बाबा:- विनाश भी होना जरुरी है। माला बनती है तो पहले फूल तोड़े जाते हैं कि नहीं? बिना तोड़े माला बन जायेगी? (जिज्ञासु: नहीं।) तो फिर? यज्ञ के आदि में तो माला बनते-2 टूट गर्इ। क्योंकि ज्ञान पूरा नहीं था। और अभी? अभी तो ज्ञान पूरा है। अच्छी तरह से समाया हुआ है बुद्धि में। तो इसलिये माला बनते-2 अभी, कुछ आत्मायें रह जायेंगी टूटेंगी नहीं। कितने होंगे? 8 होंगे।

समय: 01.12.41-01.13.33
जिज्ञासु:- बाबा, कन्नड़ में कुमार व्यास कवि का नाम बहुत बाला है। कुमार व्यास कन्नड़ कवि है।

बाबा:- कन्नड़ में कविता करने वाले...
जिज्ञासु:- कुमार व्यास उसका महाभारत बहुत प्रसिद्ध है ।
बाबा:- कुमार व्यास महाभारत।
जिज्ञासु:- कुमार व्यास भारत। वो किसका पार्ट है?
बाबा:- महाभारत जिन्होंने-2 लिखा है जिन्हानें महाभारत को चौड़ा चकरा कर दिया, विस्तार में ला दिया है, उनमें वो भी है। पहले महाभारत सिर्फ एक लाख श्लोकों का था। अभी तो बढ़ा कर के चार लाख श्लोकों का कर दिया, साढ़े चार लाख। पूरी लार्इब्रेरी ही भर जाती है महाभारत से।

Disc.CD No. 613, dated 11.08. 2008, at Mysore
Part-5


Time: 53.12-54.16
Student: Baba, heaven will be established on the banks of river Yamuna. What part will the living Yamuna play here in the establishment of heaven in the unlimited?

Baba: In the beginning of the advance [party], Yamuna… kanthaa means bank. Was there Yamuna or not? Or was she far away? She was close. It means that the foundation was laid. Is she far or close now? She is far so it is not the bank. Again she will come close.
Student: So, her name is given? She is ahead.
Baba: It is the same in a physical sense as well. Initially, when the establishment took place in Delhi, the physical Yamuna was also close and the beginning took place on the banks of the physical Yamuna from Seelampur, Shahadara. So, there was the bank of Yamuna, wasn’t there? Now the topic of the east has shifted to the west.

Time: 54.24-55.35
Student: When someone leaves his body in the advance [party], does he get another body now?

Baba: People in the advance [party] too leave their body in two ways; on the one hand they are leaving body through untimely death and natural death also takes place.
Student: If someone dies a natural death, then does he take on another body or…?
Baba: Immediately, he takes on a body immediately. If it is an untimely death...
Student: How long will souls continue to take on another body in case of natural death? Till 18 or till 36?
Baba: It will keep continuing.
Student: Does someone get another body even if he leaves his body after 18?
Baba: Those who are born after that will be miraculous children. They will do many things just at the age of one year. For example, nowadays, two, three, four years old children work on the computers and show miracles.
Student: It happens just like that.
Baba: Yes.

Time: 55.41-56.43
Student: Baba, when the great destruction takes place in the end, then the strongest granite mountain of Mount Abu also melts due to the atomic explosions.

Baba: Yes.
Student: But the wonder of heaven, which Baba will create on the banks of Yamuna in Delhi, how will that…?
Baba: There will not be an effect of the five elements there on the basis of vibrations. A gathering of souls will get ready just as the five fingers of the hand are folded and a fist is formed. (Someone said: The five Pandavas.) Yes, so the gathering becomes strong. Such a powerful gathering, fort of the Pandavas will get ready that not even a single vicious person will be able to enter it.
Student: So, will it not be affected by the atomic explosions?
Baba: When they control the very vibrations then will nature become a helper or an opponent there?

Time: 56.50-57.31
Student: Baba, will those who follow the advance [knowledge] also get a subtle body?

Baba: Aren’t those who follow the advance [knowledge] now meeting untimely deaths? Aren’t there souls belonging to other religions among those who follow the advance [knowledge]? Arey! Aren’t there the seeds with the husk of other religions among those who follow the advance [knowledge]? (Student: There are.) So, will they play that kind of a part or not?
Student: Will they also play a part by entering?
Baba: They play. They play, they are playing.

Time: 57.31-58.49
Student: Baba, Karna is born from a virgin what is its unlimited meaning?

Baba: In the beginning of the Yagya will the soul of Brahma have performed the shooting of being born in the form of Brahma or not? Arey! Will he have been born from someone as Brahma or not?
Student: He [was born] through a mother, wasn’t he?
Baba: He will have [been born] through a mother.
Student: But she was not a virgin.
Baba: Is Mother Gita not a virgin?
Student: Mother Gita was mother in the beginning of the Yagya, wasn’t she?
Baba: Arey, it is about the time after entering the path of knowledge; after entering the [path of] knowledge is she a virgin or a mother?
Student: A virgin.
Baba: She is a virgin. She is a first class virgin. If the shooting of been born through a virgin, through a pure soul will have taken place in the beginning of the Yagya, then will Krishna be born through a pure one or an impure one in the beginning of the Golden Age also? He will be born just through a pure one. Through whom will both Radha and Krishna be born? They will be born in the Golden Age from the same [parents] through whom they were born in the shooting period.

Time: 58.55-01.08.03
Student: Baba, Brahma Baba narrated about his visions to Jagdamba; where did he narrate it, Baba? Did he narrate it in the shop at Kolkatta or at Sevakram’s house? Where did he narrate it?

Baba: All this doesn’t take place at the place of business. Does the family gather there?
Student: So, where was it narrated, Baba?
Baba: It is about the family, isn’t it? The three souls are a family, aren’t they? Brahma, Vishnu and Shankar.
Student: So, at whose home did he narrate it?
Baba: In whose house did he narrate? Will he narrate at the house of anyone else?
Student: No, Baba. There were two mothers. Were there two separate houses or only one house ...
Baba: Can’t it happen that those two mothers sit together and talk affectionately?
Student: The topic of sitting and talking is different, but…
Baba: Should the vibrations be righteous or should the vibrations be unrighteous at the time of foundation?
Student: They should be righteous.
Baba: So, it will be righteous itself.
Student: So, did all the three use to stay in the same house?
Baba: Will the one who was Vishnu in the beginning be Vishnu in the end or not? He will be. So, there were some souls in the beginning whose sanskaars used to match. The sanskaars of Brahma and Yashoda, Dada Lekhraj and Yashoda did not match. Yashoda did not follow the knowledge properly.
Student: But when Lekhraj Brahma narrated about the visions, was Sevakram at his shop?
Baba: Whether Sevakram was at the shop or at home...
Student: He was no there at that time.
Baba: Why wasn’t he there? Then who will tell [the secrects]?
Student: No Baba, when Lekhraj Brahma narrated about the visions to the mother...
Baba: It should be observed that to whom Lekhraj Brahma was closer.
Student: Mother Gita.
Baba: Was he closer to Mother Gita? Was he not closer to his elder sister?
Student: He wasn’t.
Baba: Acchaa!
Second student: Had it been so, he should have told her, shouldn’t he?
Baba: Acchaa, listen.
Student: What all will happen?
Baba: What all will happen?  There must be such a couple in the beginning of the Yagya. Whatever happened in the beginning will happen in the end, at the time when Baba has to lay the foundation of the new world. So, who will be that couple?
A third Student: Lakshmi and Narayan.
Baba: Lakshmi and Narayan. Who were they?
Student: Brahma Baba’s elder sister.
Baba: The elder sister and the brother-in-law. He was leading a true life even in the last birth. He used to run a shop of true diamonds. There was truth in his last life as well. But he was sinful. Who was the most sinful? Arey, who will be the most sinful in the end? The soul of Ram. So, will he have more wives or not? (Someone said: He will.) Then? To whom will Dada Lekhraj come close? Will he come close to the senior mother or to the junior mother? Or will he come closer to the partner to speak about his visions? Coming close to whom will he have the courage [to disclose his visions]?
Student: The junior mother.
Baba: The junior mother?
Student: It means that he goes to the person who is close to him.
Baba: So, who is closer? Who was closer to him throughout his lokik life? To whom did Brahma Baba entrust his elder daughter?
The third student: Vaishnavi Devi.
Baba: He entrusted her to Vaishnavi Devi. So, he entrusted because he was close to her. If there was no relationship, why would he keep his daughter with her? Where did he keep Nirmalshanta Dadi?
Student: With daughter Radha.
Baba: Then?
The second student: That’s all right Baba, but the details of the visions....
Baba: He will go and narrate only to the one who is close to him, will he not? Acchaa, his intellect realized at least this much that all these gurus and saints, including the pandits of Varanasi are liars. He thought in his mind that the partner of his shop is very intelligent, he is a true person; his truthfulness, his erudition had left an impression on his intellect. That is why Kolkatta came to his mind. So, whose house will he reach? He will reach only the house of his brother-in-law (bahnoi). And between his sister and brother-in-law, who was closer to him? The sister herself was closer. He narrated to her first.
The second student: But it was told in the course that he narrated first to mother Gita.
Baba: Yes, so the Gitas are also two. Are there two Gitas or one Gita? How many are there? Gitas are also two. One of them is the one who lays the foundation of listening and narrating. Isn’t she that? And the other Gita is the one who makes [us] experience purity in practice.
The second student: So, were both the mothers present there?
Baba: Only then will the Trimurti (the three personalities) be formed. If one mother is present and the other mother is not present, then how will Trimurti be formed? Both the mothers were present and Prajapita was also present. So, the junior mother must have narrated the topic to the senior mother.
The second student: First it was the junior mother who listened...
Baba: To whom was Dada Lekhraj closer?
The second student: To his sister.
Baba: He was closer to his sister. He narrated to her: I am not able to gather courage to tell [this] to my brother-in-law; you, please tell him. So, when he narrated, at that time the senior mother was also with her.
The third student: Mother Gita.
Baba: Mother Gita. So, that topic arose in the presence of all the three. Among them, the senior mother showed the courage to narrate to Sevakram. The junior mother could not show courage. The senior mother showed courage and spoke: Dada Lekhraj had such and such visions. He had such and such experiences. He wandered at these places [but] did not get the solution anywhere. What is the meaning of these visions? What do they mean? Why did he have [visions]? At that very time ShivBaba entered her (the senior mother). So, the shooting of listening and narrating was performed by the senior mother. What? Through whom was the shooting of speaking performed?
The third student: Through the senior mother.
Baba: Through the senior mother. And through whom did the shooting of understanding and explaining take place? (Students: Through the junior mother.)
Arey! The shooting of understanding and explaining took place through the Father. And through whom did the shooting of assimilating it take place? The junior mother. The junior mother assimilated those topics within her. The one who speaks more will narrate to the others. He will listen to [something] and speak it out to everyone. It doesn’t matter whether he assimilates it in his own life or not. That part is being played even now. Now the senior mother will take her tongue out and spread the knowledge in the whole world. Everyone will listen [to her] attentively. But what will she do in the life in practice? She will place her leg on Shankarji’s chest. She will insult him completely. She will definitely narrate knowledge, but will the knowledge have defamation or will it be knowledge? It will be knowledge of defamation. Do the people of the world listen to defamation lovingly, with interest or do they listen to the knowledge with more interest? They listen to defamation with interest. This drama is preordained.

Time: 01.08.07- 01.09.10
Student: Baba, Sevakram met a sudden death, he was murdered. Even then, he doesn’t take on a subtle body, he is born immediately...

Baba: A warrior fights in a war and leaves his body suddenly; he was beheaded [and] he left his body suddenly. Will he get heaven, hell or will he become a ghost or spirit? (Someone said: Heaven.) He will be born in an elevated place, will he not? Similar is this case. It is about the feelings. At that time, when an explosion took place in the beginning of the Yagya, they (virgins and mothers) ran away [from their homes] then too. He stole butter, he made the gopis to elope – against whom were these allegations leveled? Were they leveled first against Brahma or against the Father? They were leveled against the Father. So, he truthfully faced them. Will the one who faces truthfully become ghost and spirit, will he be born in hell or will he be born in an elevated place? He is born in an elevated place.

Time: 01.09.15-01.11.12
Student: Baba, seven Narayans get the throne in the seven births; similarly, those who become 16000 princes and princesses also get [throne] somewhere or the other?

Baba: They too will get thrones sooner or later (according to their rank). The princes and princesses do no get a throne. Those who become kings, they get a throne; the princes and princesses get a title of prince and princess.
Student: But the seven Narayans were not kings, were they? They are not included in the rosary of 108; yet they get a throne, don’t they?
Baba: Don’t they enter [the Rudramala beads]? For example, the soul of Brahma becomes Narayan; does it not enter and play a part? So, doesn’t it take half of the share? It became the son of the one who transformed [himself] from a man to Narayan, the first Narayan, did it not? So, similarly, whose son will the second Narayan become? (Someone said: Of Krishna.) Of Krishna? No, no. Will they not take their share from the one whom they enter? Who is the insipirating party? Are they the inspirating party or not? (Student said: Yes.) They increase the zeal and enthusiasm. So, will they not get their share? Will the engineers themselves carry away the entire share? Or will the labourers who build the house take the entire share away? Will the poor house owner get nothing? Who inspires them to build? (Someone said: Inspirating party.)
Another student: Baba, do only the seven Narayans constitute the inspirating party?
Baba: Why will only the seven Narayans constitute the insipirating party? Their clan or family is very big. Will only the seven Narayans enter and play their part? Won’t the others enter and play their part?
The other student: Others will also enter.
Baba: Hmm.

Time: 1.11.50-01.12.40
Student: Baba, in the beginning the Father was on one side and the children were on the other side.

Baba: Not children. One soul was on one side and the entire world was on the other side; it means that those who were in the Yagya also became opponents.
Student: Baba, will that happen now in the end as well?
Baba: It will definitely happen. If it doesn’t happen, how will the rosary be formed? Number one, number two, number three. Will the ranks not be given?
Student: In order to form the rosary...
Baba: Destruction is also necessary. :D When a garland is prepared, are the flowers plucked [from the plants] first or not? Will the garland be prepared without plucking [the flowers]? (Someone said: No.) Then? In the beginning of the Yagya, the rosary was broken while it was being prepared because there wasn’t the complete knowledge. And now? Now there is the complete knowledge. It is nicely assimilated in the intellect. This is why some souls will remain while the rosary is being prepared now. They will not break away. How many will they be? They will be eight [deities].

Time: 1.12.41-01.13.33
Student: Baba, poet Kumar Vyas is very famous in Kannada. Kumar Vyas is a Kannada poet.

Baba: The one who wrote poems in Kannada
Student: Kumar Vyas, the Mahabharata he wrote is very famous.
Baba: Kumar Vyas Mahabharat.
Student: [It is named] Kumar Vyas Bharat. Whose part is it?
Baba: All those who wrote the Mahabharata, all those who have expanded it, he too is one of them. Mahabharata consisted of only one lakh shlokas (verses) initially. Now it has been expanded to four lakh shlokas, four and a half lakh [shlokas]. The entire library is occupied by Mahabharat. (Concluded.)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 04 Nov 2014

वार्तालाप-626, सातशंख, उड़ीसा, दिनांक 10.09.08
भाग-1


समयः 00.03-06.15
जिज्ञासुः (एक किताब बाबा को दिखाते हुए) बाबा, निलंगा से जो पुस्तक निकले हैं और उसमें लक्ष्मी-नारायण का जो फोटो दिया गया है तो बाबा ने बताया है कि विजयमाला का आह्वान करो। तो इस स्वरूप को याद करें? इस स्वrरूप का आवाहन करें?

बाबाः आपने जिस स्वरूप का फैसला किया हो, कि ये विजयमाला का हैड है, उसी का आह्वान करेंगे। शहद की मक्खियों का आवाहन करना है तो क्या करते हैं? रानी मक्खी को ले आते हैं। याद करना है तो एक बाप को याद करना है। बुद्धि ने निश्चय किया होगा तभी तो याद करेंगे। अगर निश्चय नहीं किया है कि बाप का अमुक व्यक्तित्व है, अमुक पर्सनालिटी है तो याद कैसे करेंगे? आवाहन भी तभी किया जा सकता है जब निश्चयबुद्धि हों। और तीन मूर्तियों का ज्ञान तो पहले ही दे दिया गया। उसमें ब्रह्मा की मूर्ति, उसको याद करने का सवाल ही नहीं। क्यों? पतित को याद करना है या पावन मूर्ति को याद करना है? ब्रह्मा तो दाढ़ी-मूँछ वाला। पतित है या पावन है? (किसी ने कुछ कहा) तो पतित को तो याद नहीं करना। वो तो तीन मूर्तियों में सबसे नीचे की मूर्ति है। जिसके मन्दिर भी नहीं बनाए जाते, मूर्तियाँ भी नहीं बनाई जातीं, पूजा भी नहीं होती। बाकी रह गई दो मूर्तियाँ। जिनमें एक है नई दुनिया में नारायण के रूप में प्रत्यक्ष होने वाला। और दूसरी मूर्ति है नारायणी के रूप में प्रत्ययक्ष होने वाली।

परन्तु याद दो को करना है या एक को करना है? एक को याद करना है। परन्तु जिस एक को याद करना है उस एक का कार्य व्यवहार अकेले से तो पूरा नहीं होगा क्योंकि हमारा प्रवृत्तिमार्ग है। हमारा कोई निवृत्तिमार्ग नहीं है। तो विजयमाला की हेड का आवाहन करना पड़े। जिनकी बुद्धि में त्रिमूर्ति का बैज बुद्धि-रूपी पॉकेट में पड़ा हुआ है उनको तो बाप को याद करना बहुत सहज है। और बाप के कार्य को संपन्न करने के लिए जो श्रेष्ठ सहयोगी भुजा है उस भुजा का आवाहन भी करना है। कौनसी श्रेष्ठ सहयोगी भुजा है? विष्णु। विष्णु को चार भुजाएं दिखाते हैं। दो लेफ्ट साईड की और दो राइट साईड की। परन्तु उन चार भुजाओं को चलाने वाला कौन है? चलाने वाला होगा तब ही तो भुजाएं चलेंगी कि अपने आप चल पड़ेंगी? तो जो चलाने वाला है उस बाप को याद करना है। उसकी याद में वो श्रेष्ठ आत्मा का आवाहन करना है। बाकी रही चित्र की बात। चित्र देने से कोई प्रत्यक्षता नहीं हो जाती है। ऐसे चरित्रवान हम बनें जो रुद्रमाला के मणके बनकरके विजयमाला में पिरोए जाने योग्य बनें। तो विजयमाला का सानिध्य प्राप्त कर सकेंगे। आवाहन के भी अधिकारी बन सकेंगे। और आवाहन सफल भी होगा। नहीं तो नहीं होगा।


समयः 06.19-10.58
जिज्ञासुः बाबा,पृथ्वी में तीन भाग जल और एक भाग स्थल होती है।
(बाबा- हाँ, जी) इसका बेहद का अर्थ क्या?
बाबाः इसका यही अर्थ है कि जो मिट्टी है वो एक भाग में दिखाई पड़ रही है। मिट्टी जिस से देह बनती है। और पानी तीन हिस्से में फैला हुआ है। उसको सागर कहा जाता है। सागर इतना विशाल है, उसका नाम ही है ज्ञान सागर। सागर बड़ा, ज्ञान सागर बाप बड़ा या पृथ्वी माता बड़ी? तो जो छोटा है वो बड़े में समा जाता है। ऐसा भी होगा जो नाम पृथ्वी पड़ा है – प्रथुलाति – माने जिसका विस्तार होता जाता है। वो पृथ्वी सागर में समा जाएगी। सिर्फ भारत जम्बू देश रह जाएगा। उस समय सागर तीन हिस्सा होगा या सारा ही का सारा सागर हो जाएगा? (जिज्ञासु – सारा) सारा ही सागर हो जाएगा। सारी पृथ्वी सागर में समा जाएगी। ये जितने भी विरोधी धर्म खंड हैं, विदेशी धर्म खंड हैं, वो सब सागर में समा जाएंगे। फिर पृथ्वी नाम मात्र को रह जाएगी। अभी दुनिया में पृथ्वी बहुत विस्तार को पाई हुई है क्योंकि सब धर्म की आत्माएं पृथ्वी की गोद में खेल रही हैं। उस समय सिर्फ भारत माता ही होगी। पृथ्वी का आकार बहुत सूक्ष्म रह जाएगा।

तो ऐसे नहीं है कि सदैव तीन हिस्सा ही सागर है। ऐसे समझें कि सारा ही सागर ही सागर है। पृथ्वी तो नाम मात्र को रहती है। जब नई सृष्टि की रचना होगी तो सारी पृथ्वी समन्दर में डूब जाएगी। ये बम्बई, ये मद्रास, ये कुछ भी नहीं बचेंगे। सागर बहुत विशाल है। सागर की थाह कोई ने नहीं पाई। इतना गहरा है। कोई नहीं जानता सागर की गहराई कितनी है। उसको कहा जाता है ज्ञान सागर बाप। और?


समयः 11.05-15.35
जिज्ञासुः बाबा, शिवबाबा का दिन खासकर सोमवार को क्यों रखा जाता है?

बाबाः पंखे की आवाज़ आ रही है। आपकी आवाज़ ही नहीं आ रही।
दूसरा जिज्ञासुः शिव बाप की पूजा सोमवार को ही क्यों करा जाता है?
बाबाः किसकी?
दूसरा जिज्ञासुः शिव बाप की पूजा।
बाबाः हाँ। सोम कहा जाता है चन्द्रमा को। चन्द्रमा अर्थात् सोम। और कहते हैं वार। जो शिव बाप है वो सबसे जास्ती कौनसे बच्चे को प्यार करता है? अरे, कौनसे बच्चे के आधार पर सारी सृष्टि का उद्धार रुका हुआ है? एक के पतित बनने से सब पतित हो जाते हैं। एक के पावन बनने से सब पावन हो जाते हैं।

एक ब्रह्मा की पढ़ाई पर सारा मदार चल रहा है। ब्रह्मा की पढ़ाई पूरी होगी तो ब्रह्मा सो क्या बन जाएगा? एक सेकण्ड में विष्णु बन जाएगा। औरों का ये गायन नहीं है। औरों को फिर भी टाइम लगेगा। अभी ब्रह्मा की आत्मा ही इतनी निश्चयबुद्धि नहीं है तो बच्चे भी? जो 500 करोड़ और पत्ते हैं वो भी उतने निश्चयबुद्धि नहीं हैं। अभी-अभी निश्चय अभी-अभी अनिश्चय। उस एक को निश्चय पक्का हो जावेगा तो नंबरवार? सभी का निश्चय पक्का हो जावेगा। इसलिए सोमवार प्रसिद्ध है। सोमवार के दिन शिव के ऊपर लोटी चढ़ाई जाती है। श्रावण का महीना जो होता है वो संगमयुग की यादगार है, ज्ञान बरसात की। उस ज्ञान बरसात के श्रावण के महीने में सोमवार के दिन लोटी चढ़ाई जाती है भक्तिमार्ग में। वो आत्मा जब निकलेगी तो 16000 नसें-नाड़ियाँ सब पावन बन जावेंगी। पूरा राजपरिवार ही पावन बन जावेगा। फिर यथा राजा तथा प्रजा, सारी सृष्टि की प्रजा पावन बनेगी। इसलिए सोमवार का पहला दिन है, महत्व का दिन है, शिव की पूजा का दिन है।

शिव बाप किसके द्वारा पहले प्रत्यक्ष होते हैं? प्रजापिता के द्वारा पहले प्रत्यक्ष होते हैं या ब्रह्मा के द्वारा पहले प्रत्यक्ष होते? शिव ज्योति बिन्दु को पहले ब्रह्मा में पहचाना गया या पहले प्रजापिता में पहचाना गया? ब्रह्माकुमार-कुमारी पहले या प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारी पहले? ब्रह्माकुमार-कुमारियों ने ब्रह्मा के अन्दर शिव बाप को पहचाना। शिव माना ज्योति बिन्दु। इसलिए सोमवार बहुत प्रसिद्ध है। पहला वार है।


समयः 15.39-16.32
जिज्ञासुः और बाबा, मम्मा का दिन बुधवार को क्यों रखा जाता है?

बाबाः हाँ, क्योंकि मम्मा जो है वो बुद्धि की देवी है। जो भी मुरली सुनाई जाती थी, उसकी गहराई को, एक-एक शब्द के हिज्जे को ब्रह्मा की आत्मा ज्यादा समझती थी, ब्रह्माकुमार-कुमारियों की आत्माएं ज्यादा समझती थीं या मम्मा ज्यादा समझती थी? ज्ञान मुरली की गहराई में ज्यादा जाने की ताकत किसकी थी? (जिज्ञासु – मम्मा) मम्मा की थी। तो वो बुद्धि की देवी है। इसलिए बुधवार कहा जाता है।

समयः 16.36-18.36
जिज्ञासुः बाबा, क्लास गीतापाठशाला में करना अच्छा है या घर में करना अच्छा है?

बाबाः गीता पाठशाला में क्लास करेंगे तो संगठन की पॉवर मिलेगी। संगठन में बैठ करके याद करेंगे तो स्मृति रूपी धागे कई इकट्ठे हो जावेंगे एक प्रकार की याद के। वो एक मोटी रस्सी बन जाती है। माया रावण के लिए रस्सी तोड़ना कठिन होगा या एक-एक धागे को तोड़ना कठिन होगा? रस्सी को तोड़ना माया रावण के लिए कठिन हो जाएगा। और अलग-अलग घर में बैठ करके याद करेंगे तो एक-एक को करके उमेठ देगी। इसलिए संगठन में रहकरके क्लास जरूर करना चाहिए। भक्तिमार्ग में भी हिन्दू हों, मुसलमान हों, सिक्ख हों, ईसाई हों, सब कहाँ इकट्ठे होते रहे? मन्दिर, मस्जिद, गिरिजाघर में इकट्ठे हुए ना। संगठन की ताकत रहती है। वैसे भी कहते हैं संघौ शक्ति कलौयुगे। कलियुग में आत्मा की शक्ति उतनी काम नहीं करती जितनी संगठन की शक्ति काम करती है। इसलिए संगठन का क्लास कभी नहीं छोड़ना चाहिए। नहीं तो आत्मा कमजोर बन जावेगी। पता भी नहीं चलेगा कि हम कमजोर बन गए।

समयः 18.47-20.36
जिज्ञासुः बाबा, घर में संगठन बनाना, इसमें ज्यादा मार्क्स हैं या कोई संगठन में अटैण्ड कर वायब्रेशन देना इसमें ज्यादा मार्क्स है?

बाबाः दोनों में ही मार्क्स हैं।
जिज्ञासुः ज्यादा मार्क्स किसमें है?
बाबाः अपने घर में, घर को लक्ष्मी-नारायण का मन्दिर बनाना ये भी कोई कम बात नहीं है। क्योंकि गीतापाठशाला बनावेंगे तो गीतापाठशाला वालों को लक्ष्य दिया हुआ है। गीतापाठशाला का नक्शा ऐसा बनाओ जैसे मधुबन का नक्शा बनाया हो। तो गीतापाठशाला का छोटा संगठन बड़े संगठन में भी परिवर्तित हो जाएगा। और जो जगह-जगह इधर-उधर संगठन होते हैं, उनका भी महत्व है। इसमें स्थान बदलते रहते हैं। उनमें कोई मधुबन बनेगा कोई नहीं बनेगा। लेकिन जिसने लक्ष्य रखा होगा कि हमको तो अपनी गीतापाठशाला को क्या बनाना है? मधुबन बनाना है। लक्ष्य धारण करेंगे तो लक्षण आ जावेंगे। संगठन भी श्रेष्ठ बन जावेगा।

Disc.CD No.626, dated 10.09.08 at Saatshankh, Orissa
Part-1


Time: 00.03-06.15
Student: (Showing a book to Baba) Baba, the book that has been published at Nilanga and the photo of Lakshmi-Narayan that has been printed in it… Baba has told us that we should invoke the Vijaymaalaa . So, shall we remember this form? Shall we invoke this form?

Baba: You will invoke the same form which you have decided as the head of Vijaymaalaa. When the honeybees are to be invoked, what do people do? They bring the queen bee. If you have to remember, you should remember the one Father. You will remember only if your intellect has faith. If you don’t have the faith that this particular personality is the Father, how will you remember? Invoking is possible only if you have a faithful intellect. And the knowledge of the three personalities has already been given. Among them, regarding the personality of Brahma, there is no question of remembering him at all. Why? Do we have to remember the sinful one or the pure personality? Brahma is the one with a beard and a moustache. Is he sinful or is he pure? (Someone said something.) So, you should certainly not remember the sinful one. He is the lowermost among the three personalities; His temples are not built, idols are not sculpted and he is not worshipped either. Two personalities remain. Among them one personality is revealed in the new world in the form of Narayan and the second personality is the one who is revealed in the form of Narayani (Lakshmi).

But do we have to remember two [personalities] or one [personality]? We have to remember the One. But the task of the One, whom we have to remember, will not be accomplished by Him alone because ours is the household path (pravritti maarg). Ours is not the path of renunciation (nivritti maarg). So, you have to invoke the head of the Vijaymaalaa. It is very easy to remember the Father for those, who have the badge of Trimurti in their pocket like intellect. And you also have to invoke the elevated helpful arm who is [the instrument] to accomplish the Father’s task. Who is the elevated helpful arm? Vishnu. Vishnu is shown with four arms. Two are on the left side and two are on the right side; but who controls those four arms? The arms will work only when there is a controller; or will they act on their own? So, we have to remember the Father who controls them. You have to invoke that elevated soul in His remembrance. As regards the picture, revelation does not take place [just] by giving the picture [to someone]. We should become so virtuous that we become the beads of the Rudramaalaa and then become worthy of being threaded in the Vijaymaalaa. Then we will be able to take the company (saanidhya) of the Vijaymaalaa. We will be able to become worthy to invoke them and the invocation (aavahan) will be successful as well. Otherwise, it won’t.


Time: 06.19-10.58
Student: Baba, the Earth consists of three fourth of water and one part of land.
(Baba: Yes.) What is its unlimited meaning?
Baba: It means that, the soil that we see in one [fourth] part [of the earth]... it is soil which makes the body. And water is spread in three fourth parts. It is called ocean. The ocean is so enormous; His (Shiva’s) very name is the Ocean of Knowledge. Is the ocean bigger, is the Ocean of Knowledge, the Father bigger or is the Mother Earth bigger? So, the smaller one merges [itself] into the bigger one. It will also happen that the earth, which has been named prithvi – prithulaati, meaning something that expands more and more - that earth will merge into the ocean. Only Bharat, the country Jambu (India) will be left. At that time, will the ocean comprise of three fourth parts or will it be ocean everywhere? (Student: [It will ocean] everywhere.) It will be ocean everywhere. The entire earth will merge into the ocean. All these opposing religious lands, the foreign religious lands will merge into the ocean. Then the earth (land) will be left for name sake. Now the earth has expanded a lot in the world because the souls of all the religions are playing on the lap of the earth. At that time (in the Golden Age) there will be just the mother India. The shape (area) of the land will be very subtle (little).

So, it is not that the ocean will always occupy three fourth [of the area]. You should think that it is ocean and only ocean everywhere. The land remains for name sake. When the new world is created, [almost] the entire earth will submerge in the ocean. This Bombay, Madras, nothing will be left. The ocean is very enormous. Nobody has been able to measure the depth of the ocean. It is so deep! Nobody knows how deep the ocean is. He is called the Ocean of Knowledge, the Father.


Time: 11.05-15.35
Student: Baba, why is ShivBaba’s day celebrated especially on Monday (Somvaar)?

Baba: The fan is producing a lot of sound. I am unable to hear you.
Another student: Why is the Father Shiva worshipped only on Mondays?
Baba: Who?
Another student: The Father Shiva’s worship.
Baba: Yes, the moon is called Som. Moon means Som. And it is said vaar (day). Which child does the Father Shiva love the most? Arey, the benefit of the entire world is held up because of which child? [It is said in the Murli:] When one becomes sinful everyone becomes sinful. When one becomes pure everyone becomes pure.

Everything depends on the studies of Brahma. When Brahma completes his studies, what will he become from Brahma? He will become Vishnu in a second. This is not famous for others. Others will take some time anyway. Now the soul of Brahma himself doesn’t have a faithful intellect to that extent; so the children also? The other 500 crore (five billion) leaves don’t have a faithful intellect to that extent either. Just now they have faith and the next moment they lose faith. When that one has firm faith then everyone will have firm faith sooner or later [according to the spiritual effort]. This is why Monday (Somvaar) is well-known. A pot [full of water or milk] is poured on Shiva on Monday. The month of Shraavan is a memorial of the Confluence Age, of the rain of knowledge. In that month of the rain of knowledge, [the month of] Shraavan, a pot [full of water or milk] is poured [on the Shivling] on Mondays in the path of Bhakti. When that soul comes, all the 16000 arteries and veins will become pure. The entire royal family will become pure. Then, as the king so the subjects of the entire world will become pure. This is why Monday is the first day [of the week], is an important day, it a day of the worship of Shiva.

Through whom is the Father Shiva revealed first? Is He revealed first through Prajapita or is He revealed first through Brahma? Was the Point of Light Shiva recognized in Brahma first or in Prajapita? Did Brahma Kumar-Kumaris come into existence first or did the Prajapita Brahma Kumar-Kumaris come into existence first? The Brahma Kumar-Kumaris recognized the Father Shiva in Brahma. Shiva means a point of light. This is why Monday is very famous. It is the first day.


Time: 15.39-16.32
Student: And Baba, why is Mama’s day observed on Wednesdays (Budhvaar)?

Baba: Yes, it is because Mama is the devi (female deity) of intellect. Did Brahma’s soul use to understand the depth, the meaning of every word of the Murli which was narrated more, did the souls of BrahmaKumar-Kumaris understood it more or did Mama understood [them] more? Who had the power to go deeper into the Murli of knowledge? (Student: Mama.) It was Mama. So, she is the devi of intellect. This is why it is called Budhvaar.

Time: 16.36-18.36
Student: Baba, is it good to attend classes at the Gita paathshaalaa or at home?

Baba: If you attend the class at the Gita paathshaalaa, you will receive the power of the gathering (sangathan). If you sit in a gathering and remember [the Father], many threads in the form of remembrance of the same kind will join together. It becomes a thick rope. Will it be difficult for Maya-Ravan to break a rope or to break each thread? It will be difficult for Maya-Ravan to break a rope. And if you remember separately sitting at home, she will defeat you one by one. This is why you should definitely attend classes in a gathering. Even in the path of Bhakti, whether they are the Hindus, the Muslims, the Sikhs or the Christians, where have they all been gathering? They gathered at the temples, mosques, churches, didn’t they? There is power in the gathering. It is also said, ‘Sanghau shakti kalauyuge’ (the power of a gathering works in the Iron Age). The [individual] power of a soul doesn’t work as much as the power of the gathering works in the Iron Age. This is why you should never miss the sangathan classes. Otherwise, the soul will become weak. You will not even come to know that you became weak.

Time: 18.47-20.36
Student: Baba, are more marks allocated just for forming a gathering at home or for giving vibrations by attending a gathering?

Baba: There are marks for both.
Student: Which one fetches more marks?
Baba: It is not a lesser achievement to make your home into the temple of Lakshmi and Narayan because if you establish a Gita paathshaalaa, then a goal has been set for those running a Gita paathshaalaa. Make the plan of the Gita paathshaalaa like that of a Madhuban, then the small gathering of the Gita paathshaalaa will transform into a big gathering as well. There is importance of the gatherings that are organized at other places, too. The places keep changing in this [way]. Among them some (Gita paathshaalaa) will become a Madhuban and some will not. But the one who has set a goal, ‘what do we have to make our Gita paathshaalaa? We have to make it into a Madhuban.’ If you set a goal (lakshya), you will acquire the qualities (lakshan) as well. The gathering will also become elevated. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 05 Nov 2014

वार्तालाप-626, सातशंख, उड़ीसा, दिनांक 10.09.08
भाग-2


समयः 20.43-21.45
जिज्ञासुः बाबा, आत्मा पवित्र बनेगी तो चेहरे पर चमक आएगा। और अंत तक ये शरीर सड़ता जाएगा और आत्मा पावरफुल बनती जायेगी। इन दोनों में विरोधाभास है क्या? पवित्र बनने से तो आत्मा में चेहरे में चमक आना चाहिए।

बाबाः आत्मा पावरफुल बनेगी तो जब आत्मिक स्थिति होगी तभी चेहरा सुन्दर दिखाई पड़ेगा। आत्मिक स्थिति नहीं होगी तो सड़ा हुआ शरीर और सड़ा हुआ चेहरा दिखाई पड़ेगा। ये संगमयुग है। चेहरे पर भी संगमयुग दिखाई पड़ता है। ऊँची स्टेज है तो चेहरा फूल जैसा खिल जाता है। अवस्था नीचे गिरती है, तो चेहरा लटक जाता है।

समयः 21.51-23.07
जिज्ञासुः बाबा, हफ्ता में जो सात वार है, तो सात वार नौ ग्रहों में से सात ग्रहों के नाम पर वार हैं। बाकी जो दो ग्रह हैं राहू और केतु उनका क्या यादगार है?

बाबाः वो तो राक्षस थे। मूल में देवता थे क्या? जो मूल में देवता ही नहीं थे, उनका गायन कैसे होगा?
जिज्ञासुः तो फिर जब नवग्रह की पूजा होती है तो उनका भी तो पूजा होती है।
बाबाः वो नवग्रह जो हैं वो घर-गृहस्थ है पूरा। उसमें बीज रूप आत्माएं भी हैं। आधारमूर्त आत्माएँ भी हैं। और उनमें प्रवेश करने वाले ऊपर से धर्मपिताएं जो आते हैं वो उनका भी समावेश हो जाता है। तब ग्रह कहा जाता है। अष्ट देव अलग हैं, नव रतन अलग हैं, और फिर वो सब मिलकरके नवग्रह बनते हैं।

समयः 23.12-25.16
जिज्ञासुः बाबा, ब्रह्मा का था करनहार का पार्ट फिर बाबा का करावनहार का पार्ट है। ... इस करावनहार पार्ट के द्वारा जिसका भक्ति का संस्कार है, भक्ति का संस्कार खतम क्यों नहीं किया जाता है? जब शरीर छोड़ता है...?

बाबाः अरे! 500 करोड़ को नारायण क्यों नहीं बना दिया जाता भगवान है तो? ये कोई बात हुई?
जिज्ञासुः जब कोई शरीर छोड़ते हैं तो बाबा को पूछने से बाबा कहते हैं कि उसका भक्ति का संस्कार था उसने शरीर छोड़ दिया।
बाबाः हाँ, हाँ, तो पुरुषार्थ करना न करना आदमी के अपने हाथ में है या भगवान के हाथ में है? अपने हाथ में है। इसमें भगवान क्या करेगा?
जिज्ञासुः करावनहार का पार्ट।
बाबाः करावनहार का पार्ट? सबको नारायण बना देगा क्या? 500 करोड़ नारायण बन जाएंगे क्या? करावनहार कहा जाता है कि नंबरवार कराएगा। बाकी ऐसे नहीं कहा कि सब नारायण बन जावेंगे और सब निरोगी बन जावेंगे। जो पुरुषार्थ करेंगे कराने वाले के कहे अनुसार वो बनेंगे। कराने वाला डायरेक्शन ही तो देगा। या मारपीट करेगा? (जिज्ञासु – डायरेक्शन देगा) डायरेक्शन को जो फालो करेंगे वो बनेंगे। भक्तिमार्ग मुर्दाबाद भी बनेंगे। ज्ञानमार्ग को जिन्दा करने वाला बनेंगे। बाप की बात ही नहीं मानेंगे तो ज़िन्दाबाद कैसे बनेंगे?

समयः 25.21-27.20
जिज्ञासुः बाबा, लौकिक बिजनेस में क्रेडिट देना और लेना ठीक बात है या नहीं?

बाबाः सब धंधों में है नुकसान सिवाय एक ईश्वरीय धंधे के। तो ये कैसे कहा जा सकता है कि लौकिक धंधे में कोई विजय प्राप्त करके दिखाएगा? आगे आने वाले समय में सब धंधों में चौपट आ जावेगा। सब धंधे नष्ट होने वाले हैं। अभी भी देखने में आ रहा है। जो सच्चाई से धंधा करेगा उसका धंधा तो बिल्कुल नहीं चल सकता। धंधा चौपट ही होता जा रहा है। कोई भी धंधा दुनिया का सच्चाई से करने वाला करोड़पति नहीं बन सकता। कोई बना हो तो बताओ। इसलिए लौकिक धंधों के द्वारा कोई भी प्रकार की दुनिया में क्रेडिट मिल जाए ये तो सवाल ही नहीं।
जिज्ञासुः बाबा लोन । लोन लेना-देना।
बाबाः लोन के लिए तो बता दिया – कर्ज मर्ज कहा जाता है। लोन, कर्ज बिना मांगे कर्ज मिल जाता है क्या? नहीं मिलता ना। तो मांगने से मरना भला। तो मांगने का तो काम ही खराब। चाहे चन्दा मांग लो, चाहे कर्ज मांग लो। बात तो एक ही हो गई।

समयः 27.26-28.37
जिज्ञासुः बाबा, बाप की परिचय बी.के में जाके करना चाहिए या सारी दुनिया में करनी चाहिए?

बाबाः पहले घर का सुधार या पर का सुधार? आप ब्राह्मण बने कि नहीं बने? बन गए? चुप हो गए। अरे, शूद्र परिवार में हैं या ब्राह्मण परिवार में हैं? आपका परिवार कौनसा है? (सभी – ब्राह्मण परिवार) तो पहले अपने परिवार के लिए सोचेंगे या दूसरों को खैरात बांटते फिरेंगे? अपने घर के बच्चे भूखों मरते रहें और दूसरों को खैरात बांटते फिरें। ये होशियारी है क्या? उसको होशियारी कहेंगे? अपने घर में आग लगती रहे और दूसरों के घर में आग बुझाने चले जाएं, अपने घर में बच्चे आग में झुलसते रहें तो उसको होशियारी कहेंगे क्या? अरे हाँ, ना, कुछ तो बोलो। (जिज्ञासु – नहीं) नहीं।

समयः 28.38-28.57
जिज्ञासुः राजा राम सूर्यवंशी होते हैं, परन्तु रघुवंशी क्यों कहते हैं?

बाबाः रघु सूर्य को कहा जाता है। रघुवंशी अर्थात् सूर्यवंशी।
जिज्ञासुः रघुपति राघव राजा राम कहते हैं।
बाबाः हाँ, रघुपति राघव राजा राम।

समयः 28.58-31.14
जिज्ञासुः बाबा, अभी बाहर दुनिया में विनाश के लिए बहुत हलचल चल रहा है।
(बाबाः अच्छा?) इसमें कितना सत्यता है?
बाबाः अच्छा? अगर बाप की बातें सुनते रहेंगे तो बाप सत्य दिखाई देगा। और बाप की बातें छोड़ करके दुनिया की बातें सुनते रहेंगे टीवी में, अखबारों में फिर दुनिया ही सत्य दिखाई पड़ेगी।
जिज्ञासुः नहीं, बाबा तो मुरली में बता दिया।
बाबाः बाबा तो बताते हैं लेकिन विश्वास तो नहीं होता। दुनिया की बातें सुनने की 63 जन्म की आदत पड़ी हुई है। तो दुनिया की बातें ज्यादा अच्छी लगने लगती है। उनमें ज्यादा विचार मंथन चलता है। बाबा की बातों में विचार मंथन चलता ही नहीं?
जिज्ञासुः बाबा, चलता है, लेकिन ये जो अभी हलचल चल रहा है...
बाबाः अरे मालूम है कि सारी दुनिया पतित बनाने वाली है या पावन बनाने वाली है? (जिज्ञासु – पतित) तो कैसी बातें सुनाएगी? झूठी बातें सुनाएगी या सच्ची बातें सुनाकरके सचखण्ड बनाएगी? अरे? (जिज्ञासु – झूठ बातें सुनाएगी।) तो फिर झूठों की बातें क्यों सुनना?

एक बाप सच्चा बाकी सारी दुनिया झूठी। तो एक से सुनना चाहिए, एक की बातों पर विचार करना चाहिए, मनन-चिंतन-मंथन करना चाहिए या सबकी बातें सुनना चाहिए?
(सभी – एक) 63 जन्मों से दस मुँह की बातें सुनते-सुनते कौनसे संप्रदाय बन गए? रावण संप्रदाय बन गए। अभी भी बनना है क्या? एक कान से सुनते जाएँ दूसरे कान से निकालते जाएं। सुनते हुए न सुनो। देखते हुए न देखो। अभी तो आगे चलकरके दुनिया में पता नहीं क्या-क्या अफवाहें उड़ेंगी। बाप के बारे में ही ऐसी-ऐसी अफवाहें उड़ायेंगे जो बाप कलंक वाला साबित हो जाएगा। और उन कलंकों को धारण करके बच्चे अपना सत्यानाश कर बैठेंगे।

Disc.CD No.626, dated 10.09.08 at Saatshankh, Orissa
Part-2


Time: 20.43-21.45
Student: Baba, when the soul becomes pure, the face will shine. And [it has also been said that] this body will keep decaying till the end and the soul will keep becoming powerful. Is there any contradiction in these two [statements]? When the soul becomes pure, the face should shine if it becomes pure.

Baba: When the soul becomes powerful means the face will appear beautiful only when we are in the soul conscious stage. If there is no soul conscious stage, the body and the face will appear to have decayed. This is the Confluence Age. The Confluence Age is visible on the face as well. If the stage is high, the face blooms like a flower. When the stage goes down, the face falls.

Time: 21.51-23.07
Student: Baba, the seven days of the week are named after seven planets out of the nine planets. What is the memorial of the remaining two planets: Rahu and Ketu ?

Baba: They were demons. Were they originally deities? How can those who were not at all originally deities be praised?
Student: So, when the nine planets are worshipped, they (Rahu and Ketu) are worshipped, too.
Baba: As regards the nine planets, it is a complete household. It includes the seed form souls as well. It includes the root souls as well. And the religious fathers who come from above and enter them are also added to them. Then they are called planets (grah). The eight deities are different, the nine gems are different and then all of them together constitute nine planets.

Time: 23.12-25.16
Student: Baba, Brahma’s role was of karanhaar (the one who acts himself) and then Baba’s role is of karaavanhaar (the one who makes others act). Why aren’t the sanskaars of Bhakti of any person removed through this part of karaavanhaar? When someone leaves the body…..

Baba: Arey! If He is God, why aren’t 500 crore (five billion) [souls] made into Narayan? What a this question?
Student: When someone leaves the body and if Baba is asked about him, he says that he had the sanskaars of Bhakti, so he left his body.
Baba: Yes, yes, so, to make or not to make spiritual efforts (purushaarth) is in the hands of a person himself or is it in the hands of God? It is in his hands. What will God do in this?
Student: [What about] karaavanhaar’s part?
Baba: Will [the one who plays] the part of karaavanhaar, make everyone into Narayan? Will the 500 crore [souls] become Narayan? He is called karaavanhaar because He will make [the souls] do [purushaarth] sooner or later, but it is not that everyone will become Narayan and everyone will become free from diseases (nirogi). Those who make purushaarth as per the directions of the One who makes them [do purushaarth] will become [Narayan]. The One who makes them do [purushaarth] will only give directions. Or will He beat them? (Student: He will give directions.) Those who follow the directions will become [Narayan]. They will defunct the path of Bhakti too. They will make the path of knowledge live long. If they do not accept the Father’s words at all, how will they live long (zindabaad)?

Time: 25.21-27.20
Student: Baba, is it okay to sell on credit or to buy on credit in worldly businesses?

Baba: There is loss in all the businesses except the business of God. So, how can it be said that someone will become successful in the lokik (worldly) business? In future, all the businesses will suffer loss. All the businesses are going to be ruined. It can be seen even now that the one who does business truthfully cannot run his business at all. The businesses are suffering loss. No one who does business truthfully can become a millionaire. Tell me if anyone has become [a millionaire]. This is why there is no question at all of receiving credit (profit) through any kind of lokik businesses in the world.
Student: Baba, loan. Taking and giving loan.
Baba: As regards loan it has been said that [taking] loan (karz) is called a disease (marz). Does someone get loan without asking [for it]? He doesn’t, does he? So, it is better to die than to seek. So, the task of seeking itself is bad; whether you seek contributions, whether you seek loan, it is the same thing.

Time: 27.26-28.37
Student: Baba, should the introduction of the Father be given to the BKs or to the entire world?

Baba: Should the home be reformed first or should others be reformed [first]? Did you become a Brahmin or not? Did you? You became silent. Arey, are you in a Shudra family or in a Brahmin family? Which is your family? (Everyone said: Brahmin family.) So, will you first think about your own family or will you wander about distributing alms to others? The children in your home die of hunger and you wander about distributing alms to others, is this intelligence? Will this be called intelligence? If your own house is on fire and you go to put out fire in others’ houses, while the children at your house are scorching in fire, then will this be called intelligence? Arey, say yes or no, [say] something. (Student: No.) No.

Time: 23.38-28.57
Student: King Ram is a Suryavanshi ; but why is he called Raghuvanshi?

Baba: The Sun is called Raghu. Raghuvanshi means Suryavanshi.
Student: It is said – Raghupati Raaghav Raaja Ram.
Baba: Yes, [it is said:] Raghupati Raaghav Raaja Ram.

Time: 28.58-31.14
Student: Now a lot of commotion is going on in the outside world about [the topic of] destruction.
(Baba: Acchaa?) How far is it true?
Baba: Acchaa? If you keep listening to the Father’s words, you will find the Father to be true. And if you leave aside the Father’s words and keep listening to the news about of the world on TV, in the newspapers, then the world alone will appear true to you.
Student: No, Baba has said in the Murli…
Baba: Baba does say but you don’t believe it. You are used to listen to the worldly topics for 63 births. So you start liking the worldly topics more. You think and churn about them more. You don’t think and churn on Baba’s words at all.
Student: Baba, we do, but the commotion that is going on now….
Baba: Arey, you know that…, does the entire world make you impure or pure? (Student: Impure.) So, what kind of topics will it narrate? Will it narrate false topics or will it narrate true topics and create the land of truth (sackhand)? Arey? (Student: It will narrate false topics.) Then why should you listen to the words of the false people?

The One Father is true and the rest of the world is false. So, should you listen to the One, should you think and churn on the topics [said by] the One, or should you listen to the topics [said by] everyone? (Everyone said: [We should listen to the topics said by] the One.) For 63 births, while listening to the topics [said through] ten mouths, we became the members of which community? We became the members of Ravan’s community. Do you want to become [that] now too? We should listen through one ear and leave it through the other. Do not listen [even] while listening; do not see [even] while seeing. No one knows what rumours will spread in the world in future. People will spread such rumours about the Father Himself that the Father will be proved to be the stained one (kalankwaalaa). And the children will ruin themselves by assimilating those stains (kalank) [in their intellect]. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 06 Nov 2014

वार्तालाप-626, सातशंख, उड़ीसा, दिनांक 10.09.08
भाग-3


समयः 31.24-33.41
जिज्ञासुः बाबा, मुरली में बोला है कि माँ बच्चों को बाप का परिचय देती है। और फिर ये भी मुरली में आता है कि बाप ही खुद आकर बच्चों को अपना परिचय देता है।

बाबाः बाप परिचय तो देता है। लेकिन बाप निराकार शिव है ना। परिचय देने वाली आत्मा कौन है? निराकार शिव है परमपुरुष और वो परमपुरुष जिसमें प्रवेश करता है वो 5 तत्वों का पुतला है, माता है या नहीं है? शिव के लिए पहली-पहली माता कौन है जहाँ आकरके ज्ञान का बीज डालता है? शरीरधारी। तो वो कौन है शरीरधारी? अरे पहला-पहला शरीरधारी कौन है जिसमें शिव आकरके ज्ञान का बीज डालता है बुद्धि रूपी धरणी में? प्रजापिता। तुम्हारे सवाल का समाधान हुआ? क्या? क्या प्रश्न था?
जिज्ञासुः बाप खुद आकर अपना परिचय देता है।
बाबाः हाँ। बाप जो है वो शिव बाप माता का आधार लेता है कि नहीं लेता है? 5 तत्वों के पुतले का आधार लेता है कि नहीं लेता है? वो 5 तत्वों का पुतला, वो प्रकृति माता का पुतला हुआ कि नहीं हुआ? शिव बाप के लिए पहली-पहली माता कौन हुई? जिसके बुद्धि रूपी धरणी में ज्ञान का बीज डाला वो ही उसकी पहली माता हो गई। पत्नी हो गई। ये प्रवृत्ति हो गई साकार और निराकार की। तो माता के बगैर तो उद्धार है ही नहीं। ज्ञान भी देगा बाप आकरके तो माता का आधार लेना पड़े।

समयः 33.46-36.46
जिज्ञासुः महाभारत में अर्जुन ने द्रौपदी को मैरेज किया था।

बाबाः क्या किया? अर्जुन ने द्रौपदी को क्या किया?
जिज्ञासुः शादी।
बाबाः शादी किया। हाँ। स्वयंवर किया।
जिज्ञासुः स्वयंवर किया। और नागकन्या उलूपी और चित्रांगदा और सुभद्रा को मैरेज किया था। मैं प्रश्न पूछता हूँ, उलूपी और चित्रांगदा के लिए और कोई सेम पुरुषार्थी नहीं था? इक्वल पुरुषार्थी?
बाबाः क्या पूछ रहे हैं (ये)? क्या पूछ रहे हैं बोलो भाई। अरे अर्जुन को एक पत्नी नहीं थी। अर्जुन को अनेक पत्नियाँ थीं। तो प्रश्न क्या है?
जिज्ञासुः प्रश्न है – सुभद्रा और द्रौपदी के लिए अलग कोई सेम और इक्वल पुरुषार्थी नहीं था?
दूसरा जिज्ञासुः अलग से पुरुषार्थी नहीं मिला क्या?
बाबाः अलग कहीं पुरुषार्थी?
दूसरा जिज्ञासुः अलग से ही पुरुषार्थी माना...
बाबाः सुभद्रा अलग है, सुंदर भद्र कल्याणकारी। सुन्दर कल्याणकारी माने सुभद्रा। और द्रौपदी। ध्रुव पदी। जिसका पद ध्रुव है। कोई कितना भी सोचे उल्टा-सुल्टा कि गई कि गई। पतित हुई कि हुई। लेकिन बाप कहते हैं नैया डोलेगी लेकिन डूबेगी नहीं। ऐसा द्रौपदी का पार्ट है। वो पार्ट सुभद्रा का नहीं है। सुभद्रा से तो कुल चलता है। एक ही जैसा पुरुषार्थी नहीं हो सकते दोनों। सुभद्रा का बच्चा कौन हुआ? अभिमन्यु हुआ। द्रौपदी के तो पाँचों मारे गए।

समयः 36.54-38.58
जिज्ञासुः बाबा, जहाँ जीत, वहाँ जन्म।

बाबाः हाँ, जहाँ जीत, वहाँ जन्म होता है।
जिज्ञासुः तो सतयुगी कृष्ण जो संगमयुगी नारायण से जन्म लेता है, वो कौनसा काम करके दिखाता है जो नारायण को जीत लेता है?
बाबाः 69 से पहले ब्रह्मा वाली आत्मा ज्ञान में जीवित रही, ज्ञान यज्ञ को चलाया या राम वाली आत्मा ज्ञान को, यज्ञ को चलाती रही? कौन फेल हुआ, कौन पास हुआ? (जिज्ञासु – राम फेल।) राम फेल हो गया, और राम वाली आत्मा जब यज्ञ को छोड़करके चली गई तो जीत किसने पाई? (जिज्ञासु – कृष्ण वाली आत्मा) कृष्ण वाली आत्मा ने जीत पाई। तो जहाँ जीत वहाँ जन्म। वो ब्रह्मा की सोल राम वाली आत्मा के ऊपर जीत पाई तो अगला जन्म जो लेगी वो किससे लेगी? जिसके ऊपर जीत पाई उसके यहाँ जन्म लेगी।
जिज्ञासुः लेकिन वो तो सदाकाल के लिए जीत नहीं पाई। शरीर छोड़ दिया।
बाबाः शरीर छोड़ दिया तो क्या हुआ? लेकिन अगला जन्म जो मिलेगा वो उस जीत के आधार पर मिलेगा या बिना जीत के आधार पर मिलेगा? जीत पाई तो जन्म मिला। ऐसे जो भी बच्चे पैदा होते हैं वो पूर्व जन्म में अपने माँ-बाप के कर्मों के ऊपर जीत पाते हैं। तो माँ-बाप को उनकी टट्टी पेशाब साफ करनी पड़ती है। सारा जीवन कमाई करके उन बच्चों को सौंप देनी पड़ती है। अर्थात् सभी माँ-बाप उन जीत पाने वाले बच्चों के दास-दासी बन करके रहते हैं जीवन में। इसलिए कहा जाता है जहाँ जीत, वहाँ जन्म।

समयः 39.06-40.05
जिज्ञासुः बाबा, प्यूरिटी से यूनिटी बनता है। तो आज के जो राजनेताओं का संगठन बनता है...

बाबाः वो उनकी यूनिटी दिखाई पड़ती है तुम्हें?
जिज्ञासुः उनका भी संगठन।
बाबाः उनकी यूनिटी दिखाई पड़ती है? कि आज यूनिटी बनाते हैं और कल तोड़ देते हैं? यूनिटी स्थायी चाहिए या टूटने वाली चाहिए? पति-पत्नी की यूनिटी है। है कि नहीं? (जिज्ञासु: है।) तो विदेशियों की पति-पत्नी की यूनिटी अच्छी है या भारतवासियों की पति-पत्नी की यूनिटी अच्छी है? (सबने कहा: भारतवासी।) तो यूनिटी भी तो स्थायी होनी चाहिए ना। यूनिटी स्थायी होगी तो साबित होता है प्यूरिटी भी स्थायी होगी। तो आज के राजनेताओं की यूनिटी कहेंगे? आज इस पार्टी में हैं, कल? कल दूसरी पार्टी में दिखाई पड़ते हैं। उनकी काहे की यूनिटी?

समयः 40.09-41.22
जिज्ञासुः बाबा, जो बाहर दुनिया से डायरेक्ट इस ज्ञान में आते हैं एडवांस में...

बाबाः वो पूर्व जन्म में ब्रह्माकुमार बने हैं तब आते हैं।
जिज्ञासुः तो बाहरवालों को ज्ञान देने से क्या...?
बाबाः वो बाहरवाले थोड़े ही हैं। इस एडवांस ज्ञान में कोई भी नया नहीं आता। पूर्व जन्म में ब्रह्माकुमार बना है तो ज्ञान को पकड़ता है। नहीं तो बड़े-बड़े ब्रह्माकुमार नहीं समझ पाते हैं एडवांस ज्ञान को।
जिज्ञासुः तो बाबा ने बोला कि पहले घरवालों का सुधार फिर...
बाबाः हाँ, इसलिए जो स्वतः ही आकरके ज्ञान लेवें वो हमारे घर के बच्चे हैं। उनको ठोकर नहीं मारना कि हम तुम्हें ज्ञान नहीं सुनाएंगे, बाबा ने मना कर दिया। (जिज्ञासु ने कुछ कहा) हमारे परिवार का होगा तो स्वतः ही आकरके ज्ञान ले लेगा। हमें भटकने की भी दरकार नहीं पड़ेगी। एक शब्द सुनाएंगे और फट से पकड़ लेगा। हमारे कुल का नहीं होगा तो रोज़ सुनाते रहो। उसकी बुद्धि में बैठेगा ही नहीं।

Disc.CD No.626, dated 10.09.08 at Saatshankh, Orissa
Part-3


Time: 31.24-33.41
Student: Baba, it has been said in the Murli, the mother gives the introduction of the Father to the children. And then this is also mentioned in the Murli that the Father Himself comes and gives His introduction to the children.

Baba: The Father does give introduction but the Father is incorporeal Shiva, isn’t He? Which soul gives the introduction? The incorporeal Shiva is Parampurush (the Supreme being). And is the one in whom that Parampurush enters an effigy of five elements, is it a mother or not? Who is the first mother (wife) for Shiva in whom He comes and sows the seed of knowledge? The bodily being. So, who is that bodily being? Arey, who is the first bodily being in whom Shiva comes and sows the seed of knowledge, in the land like intellect? Prajapita. Did you get the answer to your question? What? What was your question?
Student: The Father Himself comes and gives His introduction.
Baba: Yes. Does the Father Shiva take the support of a mother or not? Does He take the support of the effigy of five elements or not? Is that effigy of five elements, an effigy of the Mother Nature or not? Who is the first mother (wife) for the Father Shiva? The one in whose land like intellect the seed of knowledge was sown, he himself is His first mother, [first] wife. This is a pravritti of the corporeal one and the incorporeal one. So, there is no liberation (uddhaar) without the mother at all. Even when the Father comes and gives the knowledge, He has to take the support of the mother.

Time: 33.46-36.46
Student: Arjun married Draupadi in the Mahabharata.

Baba: What did he do? What did Arjun do to Draupdi?
Student: Marriage.
Baba: He married her. Yes. He was chosen in the swayamvar .
Student: He was chosen in the swayamvar. And he also married naagkanya (daughter of a snake king) Ulupi and Citrangada and Subhadra. I ask a question, wasn’t there any similar purushaarthi for Ulupi and Chitrangada? Equal purushaarthi?
Baba: What is he asking? Tell [Me] brother, what is he asking? Arey, Arjun did not have one wife. Arjun had many wives. So, what is the question?
Student: The question is – Wasn’t there any separate, similar and equal purushaarthi for Subhadra and Draupadi?
Second student: Did they not find a separate purushaarthi [as their life partner]?
Baba: Any separate purushaarthi?
Second student: A separate purushaarthi meaning…
Baba: Subhadra is separate; [Subhadra means] sundar (beautiful), bhadra (good) [meaning] kalyaankaari (beneficial). Beautiful and beneficial means Subhadra. And Draupadi [means] Dhruv padi: the one whose position is fixed. However much someone thinks in an opposite way that she is as good as gone, it is as if she has become impure completely but the Father says: The boat will shake but it will not sink. Such is the part of Draupadi. Subhadra does not play such part. Subhadra is responsible for the continuation of the clan. Both cannot be equal purushaarthi. Who is Subhadra’s child? Abhimanyu. But all the five [sons] of Draupadi were killed.

Time: 36.54-38.58
Student: Baba, someone is born where he has gained victory.

Baba: Yes, someone is born where he has gained victory.
Student: So, what task does the Golden Age Krishna, who is born to the Confluence Age Narayan perform because of which he gains victory over Narayan?
Baba: Before 69, did the soul of Brahma remain alive in the path of knowledge, did he run the Yagya of knowledge or did the soul of Ram continue to run the Yagya of knowledge? Who failed and who passed? (Student: Ram failed.) Ram failed. And when the soul of Ram left the Yagya and went away who gained victory? (Student: The soul of Krishna.) The soul of Krishna gained victory. So, he is born where he gained victory. That soul of Brahma gained victory over the soul of Ram; so, through whom will he be born in the next birth? He will be born in the family of the one on whom he gained victory.
Student: But he did not gain victory forever. He left his body.
Baba: What happened if he left his body? Will he have the next birth based on that victory or will he have it without considering that victory? He gained victory; so, he is born. Similarly, all the children who are born gain victory over the actions of their parents in their past birth. So, the parents have to clean their faeces and urine. They have to earn throughout the life and hand over [the income] to those children, it means that throughout their life, all the parents remain as the servants and maids of the children who gained victory [over them]. This is why it is said that someone is born where he has gained victory.

Time: 39.06-40.05
Student: Baba, purity leads to unity. So, the gathering of today’s political leaders that they form…

Baba: Does it appear to be their unity to you?
Student: They also have a gathering.
Baba: Do they appear to be united? Or do they form unity today and break it tomorrow? Should the unity be stable or should it be breakable? There is the unity of a husband and a wife. Is it or not? (Student: It is.) So, is the unity of the husbands and wives in the foreign countries good or is the unity of the husbands and wives of India good? (Everyone said: Of the Indians.) So, the unity also should be stable, shouldn’t it? If the unity is stable, it proves that the purity will also be stable. So, will today’s political leaders be said to be united? Today they are in this party and tomorrow? Tomorrow they are seen to be in another party. How are they in unity?

Time: 40.09-41.22
Student: Baba, those who come directly to this advance knowledge from the outside world…

Baba: They come because they had been Brahmakumars in the previous birth.
Student: So, by giving knowledge to the outsiders, will….
Baba: They are not outsiders. No new [soul] comes to this advance knowledge. He grasps the knowledge if he was a Brahmakumar in the previous birth. Otherwise, [even] big Brahmakumars are unable to understand the advance knowledge.
Student: So, Baba has said that first we should reform the members of the family then…
Baba: Yes. This is why those who come voluntarily and obtain the knowledge are the children of our family. They should not be rejected by saying: We will not narrate the knowledge to you; Baba has prohibited us. (Student said something.) If he belongs to our family, he will come voluntarily and obtain the knowledge. There will not be any need for us to wander either. If we narrate one word [of knowledge] he will grasp [it] immediately. If he doesn’t belong to our clan, then [even] if you keep narrating [the knowledge to him] every day it will not at all sit in his intellect. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 07 Nov 2014

वार्तालाप-626, सातशंख, उड़ीसा, दिनांक 10.09.08
भाग-4


समयः 41.27-42.16
जिज्ञासुः सभी गांवों में ग्राम देवता के मन्दिर क्यों रखते हैं?

बाबाः ग्राम देवता के? (जिज्ञासु: ग्राम देवी।) ग्राम देवी भी होती है, ग्राम देवता भी होता है। तो हर गांव में ज्ञान की चर्चा हुई है या नहीं हुई है संगमयुग में?(जिज्ञासु – हुई) भारत के गांव-गांव में ज्ञान की चर्चा करने वाले देवी-देवताएं हर गांव में हुए कि नहीं हुए? जो ब्राह्मण हुए वो ब्राह्मण सो क्या बनते हैं? देवता बनेंगे। तो ग्राम देवी और ग्राम देवता हर गांव में होने चाहिए। यादगार चली आ रही है।

समयः 42.23-45.15
जिज्ञासुः बाबा, वार्तालाप 496 में कहा गया है कि अष्ट देव का जो पहला जोड़ा है, मणका है, वो सारे संसार में प्रत्यक्ष होगी। अष्ट देव का जो पहला जोड़ा है योगीराज और योगिनी, ये सारे संसार में लक्ष्मी-नारायण के रूप में प्रत्यक्ष होंगे।

बाबाः लक्ष्मी-नारायण के रूप में प्रत्यक्ष होंगे? लक्ष्मी-नारायण के रूप में कैसे प्रत्यक्ष होंगे? लक्ष्मी दूसरे कुल से होगी या सूर्यवंशी कुल से होगी? (सभी ने कहा – दूसरे कुल से।) जोड़ा कैसे बना दिया? जोड़ा ही जोड़ा तुम्हें दिखाई पड़ता है सारी दुनिया में। भाई-बहन दिखाई नहीं पड़ते? रुद्रमाला के मणके भाई-बहन हैं या जोड़ा है? (जिज्ञासु – भाई-बहन) भाई-बहन हैं। उनका जोड़ा कैसे? लक्ष्मी-नारायण कैसे बन जाएंगे?
जिज्ञासुः सारे संसार में प्रत्यक्ष होंगे तो फिर...
बाबाः तो अष्ट देवों के रूप में प्रत्यक्ष होते हैं। आठ जो फरिश्ते हैं, वो मुसलमानों में भी गाये जाते हैं। क्रिश्चियंस में भी गाए जाते हैं। आठों में बड़ा से बड़ा जबराइल कहा जाता है। जबराइल फरिश्ता। बहुत जबरदस्त है। तो उसकी, उसके साथ जो सहयोगी होगी रुद्रमाला में विशेष वो भी तो पावरफुल होगी।

शास्त्रों में दिखाते हैं सारी सृष्टि को राक्षस पाताल पुरी में ले गया। लेकिन काशी नगरी बच गई। काशी नगरी को पातालपुरी में नहीं ले जा सका क्योंकि वहाँ से नई सृष्टि का फाउण्डेशन पड़ता है। अगर वो भी पातालपुरी में चली जाएगी तो नई सृष्टि का फाउण्डेशन कैसे पड़ेगा? बाकी ऐसे नहीं कि वो कोर्इ नारायणी बन जाती है। लक्ष्मी तो एक ही कुल से आयेगी या दूसरे कुल से आती है? भारत में परंपरा क्या है? पत्नी दुसरे कुल से आती है या अपने कुल से आती है? दूसरी कुल से आती है। तो ये तो दोनों रुद्र माला के मणके हैं। एक ही कुल के हैं। ये युगल जोड़ी कैसे बन सकती है? युगल जोड़ी की तो बात ही नहीं। स्त्री-पुरुष का चोला है। तो भाई-बहन कहे जा सकते हैं। लक्ष्मी-नारायण का पद थोड़े ही बन सकता?


समयः 45.17-46.08
जिज्ञासुः बाबा, ज्ञान में भक्ति का अंश जरा भी होगा तो शरीर छोड़ना पड़ेगा। अभी हम ज्ञान में चल रहे हैं। हम कैसे जानेंगे थोड़ा-थोड़ा भक्ति हमारे अन्दर है?

बाबाः तुम्हारे नज़दीक रहने वाले होंगे वो समझेंगे कि ये श्रीमत की कितनी बरखिलाफी करते हैं? श्रीमत की बरखिलाफी करना माना भक्ति। कोई में ऐसा संस्कार होता है कि किसी बात में श्रीमत की बहुत बरखिलाफी करने लग पड़ते हैं। वो संस्कार उनसे छूटता ही नहीं। तो 100 परसेन्ट वो भक्ति का संस्कार अगर आ जाता है तो शरीर जरूर छोड़ना पड़ेगा।

समयः 46.14-48.40
जिज्ञासुः बाबा, हर चीज़ चार अवस्था से पसार होता है।
(बाबाः हाँ, जी) तो इस प्रकार ये ज्ञान क्या अंतिम स्टेज में तमोप्रधान बनेगी या...
बाबाः अभी नहीं बन रहा है? तुम्हारा पुरुषार्थ पहले जैसा है, जैसे एडवांस में आए थे या कुछ डाउन हो गया? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) क्यों हो गया? किसलिए डाउन हो गया? क्योंकि पहले सतोप्रधान ज्ञान था। जब शुरुआत में आए थे ज्ञान में। और अभी? अभी तमोप्रधान होता जा रहा है।
जिज्ञासुः अभी बाबा बोले कि अंत में ऐसा ज्ञान होगा...।
बाबाः दुनिया की आबादी बढ़ती जाती है तो वायब्रेशन बिगड़ता है या सुधरता है? बिगड़ता है। ये एडवांस की भी आबादी जैसे-जैसे जितनी जास्ती बढ़ती जावेगी उतना ज्ञान के प्वाइंट विस्तार को पाते जाते हैं। और विस्तार में सार होता है या बीज में सार होता है? बीज में सार होता है। शुरु-शुरुआत की एडवांस की कैसटें निकाल के सुनो, उनमें कितना फोर्स था और अभी तो वीडियो चल पड़ा है। दोनों को टैली करो। ज्यादा फोर्स कौनसी वाणी में है? जो पुरानी कैसटें हैं उनमें ज्यादा फोर्स है।

अभी तो वायब्रेशन फैलते जा रहे हैं। संगठन में एक, एक तरह की बात सोचता है, तो दूसरा दूसरे तरह की बात सोचता है। एक ही प्वाइंट को लेकरके एक, एक अर्थ निकालता है दूसरा दूसरे तरीके का अर्थ निकालता है। तो ज्ञान तमोप्रधान बन रहा है या सतोप्रधान बन रहा है?
(जिज्ञासु – तमोप्रधान।) शास्त्र भी द्वापर के आदि में जब लिखे गए थे तो सतोप्रधान थे। बाद में जैसे-जैसे मनुष्य विकारी बनता गया, शास्त्रों का इंटरप्रेटेशन विकारी हो गया। दुनिया की हर चीज़ पहले सतोप्रधान होती है। बाद में तमोप्रधान होती है।

समयः 48.48-49.57
जिज्ञासुः बाबा, एक बार कोई पतित कारणे अकारणे बन जाता है तो उसे पावन की लिस्ट में कबसे गिना जाएगा? भट्ठी करने के बाद या बाबा से माफीनामा लिखने के बाद?

बाबाः गल्ती होती है उसका परिहार क्या बताया? गल्ती होती है तुरन्त बाबा को लिख करके देना। जितना लेट करते जाते हैं उतना गल्ती और ज्यादा विस्तार को पाती जाती है। लिखकरके देंगे तो लिखते ही लिखते आधा माफ हो जाता है। अब ऐसे नहीं कि बार-बार लिखकरके देते रहें। वो भी नियम बना हुआ है। एक बार माफ, दूसरी बार माफ। बहुत करके तीन बार माफ होगा। बार-बार तो माफ नहीं होता रहेगा। फिर अवस्था नीचे गिरेगी या नहीं गिरेगी? गिरेगी।

Disc.CD No.626, dated 10.09.08 at Saatshankh, Orissa
Part-4


Time: 41.27-42.16
Student: Why there is a temple of the village deity in every village?

Baba: Of the village deity (graam devtaa)? (Student: The devi [female deity] of the village.) There is a devi of the village as well as there is a devtaa (male deity) of the village. So, did the discussion of knowledge take place in every village in the Confluence Age or not? (Student: It has taken place.) Were there deities who discussed the knowledge in every village of India or not? Those who became Brahmins transform into what from Brahmins? They become deities. So, there should be a graam devi and a graam devtaa in every village. The memorial has continued.

Time: 42.23-45.15
Student: Baba, it has been said in discussion [CD No.] 496 that the first couple, the first [two] beads among the eight deities will be revealed in the entire world. The first couple among the eight deities, Yogiraj and Yogini, they will be revealed in the entire world in the form of Lakshmi-Narayan.

Baba: They will be revealed in the form of Lakshmi-Narayan? How will they be revealed in the form of Lakshmi-Narayan? Will Lakshmi belong to another clan or will she be from the Suryavanshi clan? (Students: From another clan.) How did you make a couple of them? Do you see only couples in the entire world? Don’t you see brothers and sisters? Are the beads of the Rudramaalaa (the rosary of Rudra) brothers and sisters [among themselves] or are they couples? (Student: Brothers and sisters.) They are brothers and sisters. How can they form a couple? How will they become Lakshmi and Narayan?
Student: When they are revealed in the entire world, then...
Baba: They are revealed in the form of the eight deities. The eight angels (farishte) are praised among the Muslims. They are praised among the Christians as well. Gabriel is said to be the biggest [angel] among the eight. The angel Gabriel; he is very powerful. So, his special helper in the Rudramaalaa will also be powerful.

It is shown in the scriptures that a devil took the entire world to the nether world (paataal puri) but the city (nagari) of Kashi was saved. He couldn’t take Kashi nagari to the paataal puri because the foundation of the new world is laid there. If she too goes to the paataal puri then how will the foundation of the new world be laid? As for the rest, it is not that she becomes Narayani . Will Lakshmi come from the same clan or from a different clan? What is the tradition in India? Does the wife come from another clan or from the same clan? She comes from a different clan. So, these two (Yogiraj and Yogini) are the beads of the Rudramaalaa. They belong to the same clan. How can they form a couple? There is no question of their being a couple. They are in a female and a male body. So, they can be called as brother and sister. They cannot attain the position of Lakshmi and Narayan.


Time: 45.17-46.08
Student: Baba, even if there is a trace of Bhakti in [someone who follows] knowledge, we will have to leave his body. Now we are following the knowledge. How can we know whether there is a little Bhakti in us?

Baba: Those who live close to you will understand, to what extent you violate Shrimat (elevated directions). To violate Shrimat means to do Bhakti. Some have such sanskaars that they start violating Shrimat a lot in a particular topic. They are not at all able to leave that sanskaar. So, if they assimilate that sanskaar of Bhakti 100 percent, they will definitely have to leave their body.

Time: 46.14-48.40
Student: Baba, everything passes through four stages.
(Baba: Yes.) So, similarly, will this knowledge become tamopradhaan in the last stage or…
Baba: Is it not becoming [tamopradhaan] now? Is your purushaarth the same as before, when you entered [the path of] advance [knowledge] or has it gone down a bit? (Student said something.) Why? Why has it gone down? It is because, earlier the knowledge was satopradhaan when you entered [the path of] knowledge in the beginning. And what about now? Now it is becoming tamopradhaan gradually.
Student: Baba has said that in the end the knowledge will be such ...
Baba: When the population of the world increases continuously, do the vibrations spoil or do they improve? They spoil. The more the population in the advance [party] increases, the points of knowledge will go into expanse. And is there essence in expanse or is there essence in the seed? There is essence in the seed. If you take the cassettes of the advance [knowledge] of the early period and listen to them, there was so much force in them (in those Murlis) and now videos have come up. Compare both of them. Which Vanis (Murlis) have more force? There is more force [in the Vanis] in old cassettes.

Now the vibrations are spreading. In a gathering one person thinks in one way and another person thinks in another way. For the same point [of knowledge], one person gives one kind of interpretation and another person interprets it in a different way. So, is the knowledge becoming tamopradhaan or satopradhaan?
(Student: Tamopradhaan.) Even the scriptures were satopradhaan when they were written in the beginning of the Copper Age. Later on, as the man became more and more vicious, the interpretation of the scriptures became vicious. Everything in the world is initially satopradhaan. Later on it becomes tamopradhaan.

Time: 48.48-49.57
Student: Baba, if a person becomes impure due to some or other reason, then from when will he be counted in the list of [those who are] pure? Is it after doing bhatti or after writing the letter of apology (maafiinaamaa) to Baba?

Baba: What solution has been mentioned for any mistake that has been committed? Whenever a mistake is committed, give it in writing to Baba immediately. The more you delay [in writing], the mistake goes on multiplying. If you give it in writing then half of [the sin] is forgiven while writing. Well, it should not be that you keep giving it in writing again and again. A rule has been made for that as well. It will be forgiven once, it will be forgiven twice; at the most it will be forgiven thrice. It will certainly not be forgiven again and again. Then will the stage fall or not? It will fall. Acchaa, the time is over. (Concluded)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 14 Nov 2014

वार्तालाप-632, सीहोर, दिनांक 20.09.08 (म.प्र.)
भाग-1


समयः 00.00-02.17
बाबा: हाँ जी।
जिज्ञासुः बाबा, जो आत्माएं जन्म-मरण के चक्कर में आती हैं वो भी गर्भ में भृकुटी के मध्यञ में प्रवेश करती हैं।
बाबा: हाँ जी।
जिज्ञासुः और सुप्रीम सोल शिव जो मुकरर्र रथ में प्रवेश करते है वो भी भृकुटी के मध्य में प्रवेश करते है। फिर दोनों में क्या अंतर है?
बाबाः दोनों में ये अन्तर है कि वो बने-बनाए शरीर में प्रवेश करते हैं, शिव। और जो माँ के अन्दर गर्भ तैयार होता है वो बना-बनाया नहीं है। जब बीज पड़ता है तो उस बीज से वो गर्भ तैयार होता है 4-5 महीने में। तो अंतर पड़ जाता है। और बाप जिस मुकर्रर तन में प्रवेश करते हैं वो सारी सृष्टि के आदि का पुरुष है, आत्मा है। बाकी जो आत्माएं हैं वो आदि की आत्माएं नहीं कही जा सकती। आदि में सो अंत में। वो आलराउंड पार्टधारी है। और आत्माएं आलराउंड पार्ट उतना नहीं बजा सकती। जो ऊँचा है जरूर ऊँचे में प्रवेश करेगा। इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट भी प्रवेश करते हैं। क्या पहले नारायण में प्रवेश कर सकेंगे? नहीं। जिस नंबर का धर्मपिता, उसी नंबर के नारायण वाली आत्मा में प्रवेश कर सकता है। और शिव बाप तो है ऊँच ते ऊँच धर्मपिता। ऊँच ते ऊँच बाप। तो किसमें प्रवेश करेगा? ऊँच ते ऊँच बाप में ही प्रवेश करेगा। हाँ, जी।

समयः 02.21-05.05
जिज्ञासुः बाबा, महाभारत में भीष्म पितामह को अर्जुन प्रिय था। जबकि बड़ा भाई युधिष्ठिर था। युधिष्ठिर प्रिय क्यों नहीं था, अर्जुन प्रिय क्यों था?

बाबाः हाँ। बाप को ज्ञानी तू आत्मा ज्यादा प्रिय है या कोई दूसरी आत्मा प्रिय है? (जिज्ञासु - ज्ञानी तू आत्मा।) वो भी बाबा है कौरव संप्रदाय का। क्या? कौरव संप्रदाय में बड़े ते बड़ा कौन है? भीष्म पितामह। वो भी बाप को फालो किया है। बाप ज्ञानी तू आत्माओं को पसन्द करता है। युधिष्ठिर को ज्ञानी तू आत्मा नहीं कहेंगे। युधिष्ठिर का पार्ट किसका है? ब्रह्मा बाबा का। उनको ज्ञानी तू आत्मा नहीं कहेंगे। धर्म की धारणाएं उनमें ज्यादा थीं। ज्ञान रत्नों से, ज्ञान के बाणों से बुद्धि रूपी तरकस भरा हुआ अर्जुन का ही था। जो सबसे जास्ती पुरुषार्थ का अर्जन करता है। यूँ तो प्रवेश होने के कारण एक ही पर्सनालिटी युधिष्ठिर है, एक ही पर्सनालिटी अर्जुन है। अर्जुन अर्थात् जिसके तन में, जिसके शरीर रूपी रथ में भगवान बाप प्रवेश करता है। ऐसे नहीं कहते हैं कि युधिष्ठिर में प्रवेश करते हैं। युधिष्ठिर का रथ निमित्त बना हुआ नहीं है बाप के रूप में पार्ट बजाने का। धारणा करने वाली माता ज्यादा होती है या बाप धारणा करने में ज्यादा आगे होता है? माँ होती है। माताओँ में प्यूरिटी अधिक होती है। युधिष्ठिर कहो, ब्रह्मा कहो, वो धारणावान् माता का पार्ट है।

समयः 05.11-06.32
जिज्ञासुः सतोप्रधान आत्मा दुःख नहीं भोगती है।
(बाबाः हाँ, जी।) जो आत्माएं अभी पावन बनती जाती हैं, वो भी...
बाबाः ...कौनसी आत्मा अभी पावन बन गई?
जिज्ञासुः जो भी आत्माएं पावन बनेंगी...।
बाबाः बनेंगी। जो पावन बनेंगी उनका चेहरा हमेशा खुला हुआ दिखाई पड़ेगा। सदैव खुशनुमा दिखाई देंगी। सबसे पहले पावन कौन बनेगा? नंबरवार ब्रह्मा हैं। नंबरवार ब्रह्मा सो? क्या बनते हैं? विष्णु बनते हैं। तो जब ऐसी स्टेज पकड़ेंगे तो चेहरा खुशनुमा दिखाई पड़ेगा सदैव देखने वालों को या कभी चेहरा लटका हुआ दिखाई पड़ेगा? खुशनुमा दिखाई पड़ेगा।
जिज्ञासु: बाबा, उनमें ऐसी क्याक क्वाकलिटी आ जाती है जो वो दु:ख महसूस नहीं करते?
बाबा: आत्मा संपूर्ण बननी है तो उसमें प्यूरिटी आ जाएगी या नहीं आ जाएगी? और जहाँ प्यूरिटी है वहाँ पीस एंड प्रासपर्टी स्वतः ही आ जाती है।

समयः 06.48-08.29
जिज्ञासुः बाबा, बाबा बोलते हैं कि एडवांस पार्टी में जो मेरे बच्चे होंगे उनको हार्ट अटैक नहीं आएगा?

बाबाः मेरे बच्चे होंगे तब ना। (जिज्ञासु - लेकिन आ गया बाबा।) मेरे होंगे तब ना। मेरे बच्चे माना? मेरे बच्चे माना क्या? कौन कहने वाला है? सुप्रीम सोल कहने वाला है। सुप्रीम सोल के बच्चे आत्मिक स्थिति वाले होंगे या देह अभिमान वाले होंगे? (किसी ने कहा: आत्मिक स्थिति वाले।) आत्मिक स्थिति वालों का तो मरण होने का सवाल ही नहीं। जिनमें भक्तिमार्ग के संस्कार रह जावेंगे उनको शरीर जरूर छोड़ना पड़ेगा? कोई भी संस्कार जीवन में अगर 100 परसेन्ट स्टेज को पहुँच जाता है तो शरीर छूट जाता है।
जिज्ञासुः तो बाबा अगर घर में गीता पाठशाला चल रही है।
बाबाः उससे क्या होता है? गीतापाठशालायें वाले ढ़ेर होते हैं पढ़ाई पढ़ाने वाले। पढ़ाई पढ़ाने वाले सब राजा बन जावेंगे क्या? ब्रह्माकुमारियाँ कोई राजा बन जावेंगी, कोई प्रजा बन जावेंगी। कोई प्रजाकुमारी कोई राजाकुमारी। ऐसे बहुत से पढ़ाने वाले हैं जो सिर्फ सतयुग में जाके टीचर बन जावेंगे। बस। राजा रानी परिवार में जन्म भी नहीं लेंगे। तो प्रजावर्ग के हुए या राजा हुए? (जिज्ञासु – प्रजावर्ग के।) और?

समयः 08.37-11.03
जिज्ञासुः बाबा,
(बाबाः हाँ, जी।) जो आत्मा गर्भ गृह में प्रवेश होके जन्म से पहले वो पिंड छोड़ देती है। जो आत्मा...
बाबाः जन्म लेने से पहले ही शरीर छोड़ देती है। हाँ।
जिज्ञासुः वो आत्मा किस कर्म से संबंध रखती है
बाबाः उनका जितना हिसाब-किताब है उस माता के साथ उतना हिसाब-किताब पूरा करके वो शरीर छोड़ देगी। दुःख-सुख देने का हिसाब-किताब होता है ना पूर्व जन्मों का। तो हिसाब-किताब पूरा हुआ और शरीर छोड़ा।
दूसरा जिज्ञासुः जैसे कोई आत्मा है शरीर छोड़ने के बाद ज्यादा से ज्यादा समय सूक्ष्म शरीर में रह सकती है?
बाबाः हर आत्मा सूक्ष्म शरीर में नहीं रहती है। सूक्ष्म शरीर वो ही आत्मा धारण करती है जिनके ऊपर पापों का बोझा ज्यादा चढ़ जाता है। इसलिए ज्यादा पाप न करें इसलिए थोड़े या लम्बे समय तक उनको सूक्ष्म शरीर में रहना पड़ता है।
दूसरा जिज्ञासुः वो ज्यादा पाप नहीं करेंगी...
बाबाः न पाप कर पाएंगी न पुण्य कर पाएंगी।
दूसरा जिज्ञासुः फिर भी कितना समय? 13 दिन रहती है क्या?
बाबाः 13 दिन तो क्या दो दिन भी रह सकती हैं।
दूसरा जिज्ञासुः जैसे कार्य क्रम करते हैं 13 दिन तक।
बाबाः वो कार्यक्रम तो भक्तिमार्ग की बातें हैं।
दूसरा जिज्ञासुः नहीं वो बताते हैं 13 दिन…
बाबाः वो बताते हैं सो सब सच्चा होता है क्या?
दूसरा जिज्ञासुः नहीं तो इसमें क्या सच्चा3ई है?
बाबाः सच्चाई ये है कि हर आत्मा जो है जो अचानक शरीर छोड़ती है वो थोड़े समय तक ये लम्बे समय तक सूक्ष्म शरीर धारण कर सकती है। जिन-जिन आत्माओं के साथ उसका हिसाब-किताब होगा उनके साथ उन्हें तंग करती रहेगी। और हिसाब-किताब पूरी करती रहेगी।
दूसरा जिज्ञासुः और अगर कुछ नहीं करती है तो समझ लो उसने जन्मह ले लिया?
बाबाः हाँ, सुख-दुःख नहीं भोगती है।
दूसरा जिज्ञासुः नहीं अगर दूसरों को परेशान नहीं करती है, कुछ नहीं करती है, तो क्याउ उसने जन्मञ ले लिया?
बाबाः वो ब्रह्मा बाबा जैसी आत्माएं होती हैं, उनको फरिश्ताई आत्मा कहा जाता है। वो बहुत थोड़ी है।

Disc.CD No.632, dated 20.09.08 at Sehore (M.P.)
Part-1


Time: 00.00-02.17
Baba: Yes.
Student: Baba, the souls who pass through the cycle of birth and death also enter in the middle of the forehead (bhrikuti) in the womb.
Baba: Yes.
Student: And the Supreme Soul Shiva also enters the middle of the forehead of the permanent Chariot. Then what is the difference between both?
Baba: The difference between both is, He [i.e.] Shiva enters a readymade body. And the foetus that develops in the mother’s womb is not a readymade [body]. When the seed is sown, the foetus develops from that seed within four-five months. So, it makes a difference. But the permanent body that the Father enters is the first man, [the first] soul in the beginning of the entire world. All the other souls cannot be called the souls of the beginning. Whoever happens in the beginning, the same happens in the end. He is an all-round actor. The other souls cannot play an all-round part to that extent. The One who is the highest will definitely enter someone who is high. Abraham, Buddha, Christ also enter [someone]. Will they be able to enter the first Narayan? No. As is the number (rank) of the religious Father, he can enter the Narayan of the same number (rank). And the Father Shiva is the highest religious Father. He is the highest on high Father. So, whom will He enter? He will certainly enter the highest Father. Yes.

Time: 02.21-05.05
Student: Baba, [it is shown] in Mahabharata [that] Arjun was the dear to Bhishma Pitamah . But Yuddhishthir was the elder brother. Why wasn’t Yudhishthir dear, why was Arjun dear [to him]?

Baba: Yes. Is the knowledgeable soul dearer to the Father or is some other soul dear? (Student: Knowledgeable soul.) He (Bhishma Pitamah) is also the Baba of the Kaurava community. What? Who is the eldest in the Kaurava community? Bhishma Pitamah. He has also followed the Father. The Father likes the knowledgeable souls. Yudhishthir will not be called a knowledgeable soul. Who plays the part of Yudhishthir? Brahma Baba. He will not be called a knowledgeable soul. He had the virtues related to the religion more. It was Arjun alone whose quiver like intellect was full of the gems of knowledge, arrows of knowledge. He earns (the attainments through) purushaarth (spiritual effort) the most. From the point of view of entrance [of Shiva] the same personality is Yudhishthir as well as Arjun. Arjun means the one in whose body, Chariot like body God the Father enters. It is not said that He enters Yudhishthir. The Chariot of Yudhishthir is not the instrument to play the part of the Father. Does the mother assimilates [the knowledge] more or is the Father more ahead in assimilating [the knowledge]? The mother is ahead. The mothers have more purity. So, call him Yudhishthir, call him Brahma, it is the part of a virtuous mother.

Time: 05.11-06.32
Student: A satopradhaan soul does not experience sorrow. (Baba: Yes.) The souls who become pure now, they too...

Baba: …Which soul has become pure now?
Student: The souls who will become pure...
Baba: They will become. The faces of those who become pure will always appear to be delighted. They will always appear to be joyful. Who will become pure first of all? There are Brahmas one higher than the other (numbervaar). What do they become from Brahmas who are numbervaar? They become Vishnu. So, when they achieve such a stage, will the face appear to be always joyful to the observers or will the face ever appear to have fallen? It will appear to be joyful.
Student: Baba, what quality appears in them so that they don’t experience sorrow?
Baba: When the soul becomes complete, will [the quality of] purity appear or not? And where there is purity, peace and prosperity come there automatically.

Time: 06.48-08.29
Student: Baba, Baba says that those who are my children in the Advance Party, will not have heart attack?

Baba: Only if they are My children. (Student: But Baba, [someone] had it.) Only if they are My children. 'My children' means… What is meant by 'My children'? Who is says this? The Supreme Soul says this. Will the children of the Supreme Soul be the ones with a soul conscious stage or with body consciousness? (Someone said: Soul conscious stage.) There is no question of the death of those with a soul conscious stage at all. Those in whom the sanskaars of the path of Bhakti remain will definitely have to leave their body. If any of the sanskaars reaches 100 percent stage in the life, they have to leave the body.
Student: So, Baba, a Gita paathshaalaa is functioning at his home.
Baba: So what? There are many who run the Gita paathshaalaa, who teach the knowledge. Will all those who teach become kings? Some Brahmakumaris will become a king and some will become subjects. Some are prajaa kumari (daughter of the subjects) and some are raajaa kumari (princess). There are many such teachers who will just become teachers in the Golden Age. That is all. They will not even have birth in the family of the king and the queen. So, do they belong to the subject category or are they kings? (Student: They are of the subject category.)

Time: 08.37-11.03
Student: Baba,
(Baba: Yes.) The soul who enters the womb and leaves the foetus before being born; the soul who…...
Baba: …leaves the body before being born. Yes.
Student: What are the karmic accounts of that soul in relation [to the mother]?
Baba: It will leave the body after settling the karmic accounts with the mother. There are karmic accounts of the past births of giving sorrow or happiness, aren’t there? So, as soon as the karmic accounts are settled, it leaves the body.
Second student: For example there is a soul. After leaving the body how long can it remain in a subtle body?
Baba: Every soul does not remain in a subtle body. Only those souls who accumulate burden of sins more take on a subtle body. So, to avoid them from performing more sins, they have to live in a subtle body for a short or long period.
Second student: If it does not commit more sins…
Baba: It will neither be able to commit sins nor noble actions.
Second student: Still, for how long [does it remain in the subtle body]? Is it for 13 days?
Baba: Leave aside [the topic of] 13 days, it can even stay [in a subtle body] for just two days.
Second student: For example they perform the rituals for 13 days.
Baba: Those rituals are the topics of the path of Bhakti.
Second student: No, they tell that for 13 days...
Baba: Is all what they sat true?
Second student: No then, what is the truth in this?
Baba: The truth is that every soul who leaves the body suddenly, can take on a subtle body for a short or long period. They will keep troubling and settling their karmic accounts with the souls with whom they have karmic accounts.
Second student: And if it does not do anything, then should we think that it has taken birth?
Baba: Yes, it does not experience happiness or sorrow.
Second student: No, if it does not trouble others, if it does not do anything [to others], does it mean that it has taken birth?
Baba: They are souls like Brahma Baba; they are called angelic souls. They are very few. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 15 Nov 2014

वार्तालाप-632, सीहोर, दिनांक 20.09.08 (म.प्र.)
भाग-2


समयः 11.04-12.17
जिज्ञासुः बाबा, सतयुग में भी टीचर्स की आवश्यकता होती है क्या?

बाबाः क्यों? वहाँ पढ़ेंगे लिखेंगे नहीं? आर्ट नहीं बनाएंगे? संगीत नहीं सीखेंगे? अरे वो मुरली बजाएंगे कि नहीं बजाएंगे? फिर क्या बात? चित्रकला, चित्रकला एक कला है ना सीखने की। अच्छे-अच्छे चित्र बनाते रहेंगे। नहीं तो ये चित्र कहाँ से आये लक्ष्मी-नारायण के, देवताओं के जो द्वापरयुग में तैयार हुए? जो जो राज बनते गए उनके चित्र बनाते गए।
दूसरा जिज्ञासुः बाबा, वहाँ तो बोलते हैं कि सब रायल बुद्धु होंएंगे, फिर चित्रकला कैसे बनाएंगे?
बाबाः वो बुद्धु होना, चित्रकला बनाना ये कोई बड़ी बात है? चित्रकला बनाना ये कोई बड़ी बात है? चित्रकला बनाने के लिए होशियार होना चाहिए? बुद्धिमान होना चाहिए?

समयः 12.20-13.02
जिज्ञासुः बाबा, शिवबाबा की बारात जब परमधाम को जावेगी तो पशु, पक्षी, कीट, पतंगों की आत्माएं भी जावेंगी या नहीं जावेंगी?

बाबाः सब आत्माएं जाएंगी। कोई भी आत्मा बचेगी नहीं। आत्मिक स्थिति में स्थित होने वाले भी जाएंगे और जो आत्मिक स्थिति में स्थित नहीं हुए होंगे वो धर्मराज की सज़ाएं खाकरके भी जाएंगे। कोई बुद्धियोग से जावेंगी और ढ़ेर की ढ़ेर शरीर छोड़करके जावेंगी।

समयः 13.08-14.40
जिज्ञासुः पावन आत्मा दु:ख नहीं भोगती है, सुख ही भोगती है हमेशा।
(बाबाः हाँजी।) वैसे शिव तो सदा ही पावन है। फिर वो तो...?
बाबाः सदा ही पावन कौन है सिवाय शिव के? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) शिव सदा ही पावन है, लेकिन, लेकिन वो तो शरीर ही धारण नहीं करता। तो जो शरीर जिसका अपना है ही नहीं वो जरूर न पुण्य करता है न पाप करता है। पुण्य करेगा तभी तो सुख भोगेगा। पाप करेगा तभी तो दुख भोगेगा। शिव तो ऐसी तुरीया आत्मा है जो ऐसी आत्मिक स्टेज में रहकरके कर्म करता है कि न पाप बनने देता है न पुण्य बनने देता है। वो सदैव साक्षी है। हम जो भी मनुष्यात्माएं हैं या और जो भी प्राणी मात्र हैं वो सुख-दुख देते हैं। इसलिए उनको सुख-दुःख भोगना पड़ता है। (जिज्ञासु: तो क्याय सदा ही शांति में ही रहती है?) सदैव शान्ति में रहता है। यहाँ आता है, पतित दुनिया में आता है, पतित तन में आता है तो भी? शान्त रहता है या अशान्त रहता है? तो भी शान्त रहता है।

समयः 14.42-16.25
जिज्ञासुः बाबा, जैसे बाबा ने लक्ष्य दिया है नर से नारायण बनने का और नारी से लक्ष्मी बनने का। तो हर आत्मा अपना-अपना पुरुषार्थ कर रही है उसी लक्ष्य के लिए। तो उसको ये महसूस कब होगा कि वो नारायण बन गया है? या वो लक्ष्मी बन गई है? उसे सर्टिफिकेट कौन देगा?

बाबाः वो सारी सृष्टि जो भी प्रजा है इस मनुष्य सृष्टि में वो सब सर्टिफिकेट देगी कि ये हमारा विश्वपिता है। सबको अनुभूति होगी ये हमारा बाप है। नारायण पार्ट ही ऐसा है। जब प्रत्यक्ष होगा तो जिसके भी संपर्क-संसर्ग-संबंध में आवेगा उनको कल्याण का अनुभव होगा या अकल्याण का अनुभव होगा?
जिज्ञासुः एक नारायण की तो बात बाबा सही है। लेकिन बाबा ने तो सभी को ये लक्ष्य दिया है।
बाबाः सभी नारायण नंबरवार हैं। एक 100 परसेन्ट होता है बाकी नंबरवार होते हैं।
जिज्ञासुः नहीं, मेरा प्रश्नल ये है कि वो आत्मा कैसे एहसास करेगी?
बाबाः वो आत्मा सबसे प्रूफ मिलेगा, सबसे वेरिफिकेशन मिलेगा। जो सामने आवेगा वो खुश हो जावेगा। सामने आने मात्र से ही, दो शब्द सुनने मात्र से ही, दृष्टि पड़ने मात्र से ही सुख की अनुभूति होगी।

समयः 16.26-16.58
जिज्ञासुः बाबा, बता रहे हैं कि चार साल बाद तक प्रलय हो जाएगा।

बाबाः कौन बता रहे हैं? (जिज्ञासु - टी.वी. में बताते है।) और लोगों ने कुछ नहीं बताया। जिन लोगों ने बताया उन लोगों पे विश्वास क्यों कर लिया? (जिज्ञासु: सही है या झूठ है?) आपको क्या लगता है? (जिज्ञासु: हमें झूठ लग रहा है।) क्यों बोल रही हो? जो झूठी बात है उसको भरी सभी में बोलने की भी क्या दरकार? आपके ऊपर प्रभाव पड़ा है इसलिए भरी सभा में बोल रहे हैं इसलिए कि बाबा वेरिफाय करें कि सही है कि झूठी है?

समयः 17.00-18.50
जिज्ञासुः बाबा जैसे कोई-कोई ब्राह्मण आत्माओं की ये धारणा बन गई है कि ड्रामा बना-बनाया है। तो फिर हम पुरुषार्थ क्यों करें? जो हमारा पद बना हुआ है वो बन जाएगा।

बाबाः खाना क्यों खाते हो? पानी क्यों पीते हो? उसके लिए तो बड़ी जल्दी पहुँच जाएंगे। थाली लेकरके किचन में झट घुस जाएंगे। पुरुषार्थ क्यों करते हो खाना खाने का? हँ?
जिज्ञासुः ...जो हमें बनना होगा, पद पाना होगा...
बाबाः हाँ, हाँ, तो खाना होगा तो अपने आप मुँह में चला जाएगा। काहे के लिए कमाई करना? क्यों धंधा-धोरी करना? उसके लिए नहीं सोचेंगे। पुरुषार्थ करने के लिए सोचेंगे। जब बना बनाया ड्रामा है तो हम काहे के लिए पुरुषार्थ करें? जो ड्रामा है वो मालूम है क्या ड्रामा बनने वाला है? जब मालूम ही नहीं है तो अच्छा सोचो, अच्छा करो, अच्छा बोलो तो अच्छा ही होगा। नेगेटिव करेंगे, नेगेटिव बोलेंगे, नेगेटिव सोचेंगे तो बुरा ही हो जाएगा।
जिज्ञासुः जब हम बोलते हैं कि अमृतवेला करो और बाबा को याद करो तो बोलती हैं, ये तो वैसे ही होगा जैसे ड्रामा में ।
बाबाः हाँ, तो उनका यही ड्रामा है। उनके ड्रामा में यही लिखा हुआ है। इसलिए पुरुषार्थ नहीं करते। जब ड्रामा में होगा तो पुरुषार्थ करने लग पड़ेंगे।

समयः 18.55-20.42
जिज्ञासुः बाबा, शंकर को विष पीते हुए क्यों दिखाया गया है?

बाबाः इसलिए दिखाई पड़ा है क्योंकि कोई विष पी नहीं सकता। एक ही ऐसा है जो विष को पचाय सकता है। और किसी देवता में, 33 करोड़ देवताएं हों या कोई भी 500 करोड़ मनुष्य हों, उनमें से कोई में भी इतनी ताकत नहीं है कि विषय-विकारों के विष को पचाय सकें। थोड़ी भी ग्लानि होती है मुँह मुरझाय जाता है। (जिज्ञासु – कंठ में...।) कंठ में रखने का मतलब है उनके दिल में वो बात असर नहीं करती। औरों के दिल में वो बात असर कर जाती है। दिल खराब हो जाता है। पुरुषार्थ चौपट हो जाता है। पहले तो समझना है विष किसको कहा जाता है? विष कहा ही जाता है व्यभिचार को। पराई स्त्री, पराये पुरुष का सेवन ही विष है। और भगवान का तो पार्ट है सभी के संग के रंग में आना। सबका विष पीने के बावजूद भी वो निर्विष रहता है। और?

समयः 20.41-21.45
जिज्ञासुः बाबा, कुछ-2 आत्माएँ ऐसे तुलना करती हैं कि बाबा का जो पार्ट है विषय विकारों का विष पीने का, तो वो अष्ट देव भी प्रैक्टिकल में ये सब काम करेंगे।

बाबाः अष्ट देव कहेंगे? ऐसा कौनसी मुरली में कहा है कि अष्ट देव विष पीते हैं? (जिज्ञासु – बाप समान बनना है बोलते है।) मुरली में कहा है? (जिज्ञासु – नहीं।) जब मुरली में कहा ही नहीं है तो मानती क्यों? मुरली में तो ये कहा है शंकर जैसा, शंकर को फालो करेंगे तो नीचे गिरेंगे। शंकर को फालो नहीं करना है। फालो किसको करना है? ब्रह्मा को फालो करना है। ब्रह्मा ने जैसे कर्म किये, ब्रह्मा ने जैसी वाचा उच्चारी, ब्रह्मा ने जैसे दूसरी आत्माओं के प्रति संकल्प किये, शुभ भावना, शुभ कामना की ऐसा हमको भी करना है। अगर उल्टा करेंगे तो पुरुषार्थ डाउन होगा या नहीं होगा? पुरुषार्थ डाउन हो जाएगा।

समयः 21.46-22.35
जिज्ञासुः बाबा, काम को देव क्यों कहा गया है जबकि वो तो पतन का बीज है?

बाबाः काम देव बनता है सतयुग त्रेता में। द्वापर कलियुग में देवता नहीं है। देव कहाँ होते हैं? देव तब है जब होइये कामो अनंग। वो काम का अंग काम ही नहीं करता। शीतल इन्द्रियाँ हो जाती हैं। तब उसको कहते हैं कामदेव। बाकी द्वापर कलियुग में देव थोड़ेही होते हैं। ये तो भक्तिमार्ग में कह दिया है।

Disc.CD No.632, dated 20.09.08 at Sehore (M.P.)
Part-2


Time: 11.04-12.17
Student: Baba, is there the need of teachers in the Golden Age as well?

Baba: Why? Will they (the deities) not read and write there? Will they not draw art? Will they not learn music? Arey, will they play the flute or not? Then why do you have a question? Painting is an art to be learnt, isn’t it? They will draw nice pictures. Otherwise, from where did these pictures of Lakshmi-Narayan, of the deities come, that were prepared in the Copper Age? The pictures of all those who became kings were prepared.
Another student: Baba, it is said that everyone will be royal fools (buddhu) there; then how will they draw paintings?
Baba: Is it a big thing for a fool to draw paintings? Should someone be intelligent, clever to draw paintings?

Time: 12.20-13.02
Student: Baba, when ShivBaba’s marriage party (baaraat) goes to the Supreme Abode, will the souls of the animals, birds, insects, and moths also go or not?

Baba: All the souls will go. No soul will be left behind. Those which become constant in soul conscious stage will go as well as those which haven’t become constant in the soul conscious stage will go after suffering the punishments of Dharmaraj (the Chief Justice). Some will go through the connection of the intellect and numerous souls will leave their bodies and go.

Time: 13.08-14.40
Student: A pure soul does not experience sorrow, it always experiences happiness. (Baba: Yes.) So, Shiva is always pure. Then He…..?

Baba: Who is ever pure except for Shiva? (Student said something.) Shiva is always pure, but, He does not take on a body. So, the One who not at all has a body of His own, definitely, He neither performs noble actions nor sins. He will experience happiness only if He performs noble actions. He will experience sorrow only when He commits sins. In fact, Shiva is such a unique (turiya) soul who performs actions while being in a soul conscious stage in such a way that He neither accumulates sins nor merits. He is always a detached observer (saakshi). All of us human souls or the other living creatures give happiness or sorrow. This is why we have to experience happiness and sorrow. (Student: So, does He always stay in peace?) He always remains in peace. He comes here, in this world, He comes in a restless world, He comes in a sinful world, a sinful body, yet? Does He remain peaceful or does He remain restless? He remains peaceful anyhow.

Time: 14.42-16.25
Student: Baba, Baba has given the aim to transform from a man to Narayan and from a woman to Lakshmi. So, every soul is making his purushaarth (spiritual effort) to achieve that very aim. So, when will he realize that he has become Narayan or that she has become Lakshmi? Who will give him the certificate?

Baba: The entire world, all the subjects in this human world will give a certificate that this is our World Father. Everyone will experience: this one is our Father. The very part of Narayan is such [that] when he is revealed, will anyone who comes in his contact, connection and relation, experience benefit or harm? They will experience benefit.
Student: Baba, it is correct for one Narayan but Baba has given this aim to everyone.
Baba: All the Narayans are number wise . One [Narayan] is 100 percent. The rest are number wise.
Student: No, my question is that how will that soul realize?
Baba: That soul will get proof from everyone; he will obtain verification from everyone. Whoever comes in front of him will become happy. Just by coming in front of him, just by listening two words [from him], just by his one look, people will experience joy.

Time: 16.26-16.58
Student: Baba, people are telling that there will be pralay after four years.

Baba: Who is telling this? (Student: It is shown on TV.) Didn’t other people say anything? Why did you believe the people who said this? (Student: Is it true or false?) What do you feel? (Student: I feel that it is false.) Then, why are you speaking about it? What is the need to even narrate the topic that is false in a packed gathering? You are influenced by it; this is why you are speaking [about it] in a packed gathering so that you could have it verified from Baba: whether this topic is true or false?

Time: 17.00-18.50
Student: Baba, some Brahmin souls have developed this practice [with the thought:] this drama is pre-determined, then why should we make purushaarth? We will attain the position that is pre-determined.

Baba: Why do they eat? Why do they drink water? They reach very fast for that. They will immediately enter the kitchen with a plate. Why do they make purushaarth to eat?
Student: …whatever we have to become, whatever post we have to achieve…
Baba: Yes, yes, then whatever has to be eaten will enter their mouth automatically. Why should they earn [money for that]? Why should they do business? They will not think [in this way] for that. They will think [this] with regards to making purushaarth: when the drama is pre-determined, why should we make purushaarth? As regards the drama, do they know what is going to happen in the drama? When they don’t know at all, they should think good, do good, speak good then, only good will happen. If they perform negative [acts], speak negative [words], have negative thoughts, then it will only result in [something] bad.
Student: No, just like when we say them to do (remember at) amritvelaa and remember Baba, they say: it will happen if it is in the drama.
Baba: Yes, so their drama is just this. This itself is written in their drama this is why they don’t make purushaarth. They will also start making purushaarth, when it is fixed in the drama [for them].

Time: 18.55-20.42
Student: Baba, why is Shankar shown to be drinking poison?

Baba: He is shown like this because nobody can drink poison. There is only one [deity] who can digest poison. No other deity, whether they are the 33 crore (330 million) deities or any of the 500 crore (5 billion) human beings, none of them have the power to digest the poison of vices. Their face withers if they are defamed even a little. (Student: In the throat...) Keeping it (the poison) in the throat means, that topic [of defamation] does not affect his heart. That topic affects the heart of others. The heart feels bad. The purushaarth is ruined. First you have to understand, what does poison (vish) mean? Adultery (vyabhicaar) is called vish. Having pleasure with the wife or husband of someone else, itself is called poison. And it is God’s part to come in the colour of the company with everyone. Despite drinking the poison of everyone, He remains free from poison (nirvish).

Time: 20.41-21.45
Student: Baba, some souls compare Baba's part of drinking the poison of vices [with the eight deities and say] that the eight deities will also perform all these tasks in practice?

Baba: The eight deities will do… in which Murli has it been said that the eight deities drink poison? (Student: People say that they have to become equal to the Father.) Has it been said in the Murli? (Student: No.) When it has not been said in the Murli, why do you believe it? In fact, it has been said in the Murli that if you follow Shankar you will fall. You shouldn’t follow Shankar. Whom should you follow? You have to follow Brahma. The actions that Brahma performed, the kind of speech Brahma spoke, the thoughts that Brahma created for other souls, the way he had good wishes and good feelings [for them], we too should do the same. If we act in the opposite way, will the purushaarth go down or not? The purushaarth will go down.

Time: 21.46-22.35
Student: Baba, why is Kaam (desire) called a dev (deity) even though it is the step towards downfall?

Baba: Kaam becomes a deity in the Golden and the Silver Ages. He is not a deity in the Copper and the Iron Ages. Where do the deities exist? Deities exist when lust is bodiless (hui hai kaam anang.) That organ of lust does not work at all. The indriyaan become calm. It is then that he is called Kaamdev (deity of lust). As for the rest, deities do not exist in the Copper and the Iron Ages. This has been said in the path of Bhakti [that Kaam is a deity]. ... (to be continued)

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