Q&A: PBK Murli discussions

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 16 Nov 2014

वार्तालाप-632, सीहोर (म.प्र.), दिनांक 20.09.08
भाग-3


समयः 22.39-23.50
जिज्ञासुः बाबा, कहते हैं जिसके अंदर भक्तिमार्ग के संस्कांर होंगे, उनको शरीर छोड़ना पड़ेगा।

बाबा: हाँजी।
जिज्ञासु: कब की बात है?
बाबाः अभी की ही बात है। अभी संगमयुग की ही बात है।
जिज्ञासुः जैसे बाबा कहते हैं कि तोड़ निभाना है।
बाबाः हाँ, तोड़ निभाना माना जो लौकिक संबंधी हैं उनसे तोड़ के नहीं रखना है। कार्य व्यवहार में उनके साथ ऐसे सहयोग करना है जो ये न समझें कि इन्होंने हमसे तोड़ लिया जिन्दगी का नाता क्योंकि उनको भी तो ज्ञान में लेना है। जो अपना और अपने परिवार का, अपने संबंधियों का ही कल्याण नहीं कर सकता वो दुनिया का कल्याण कैसे करेगा? पहले अपनी जाति का कल्याण करना होता है ना।

समयः 23.50-25.54
जिज्ञासुः बाबा, माता गुरु बिना उद्धार नहीं हो सकता। इसका क्लेरिफिकेशन।

बाबाः माता अव्वल नंबर कौन है? (जिज्ञासु: जगदंबा।) बस। जगदम्बा माता है या जगदम्बा में भी माता का पार्ट बजाने वाली सहनशक्ति की देवी कोई और आत्मा है, ब्रह्मा। वो जब तक संपन्न स्टेज न धारण करे और बाप की सहयोगी पूरी न बने तब तक कोई का भी कल्याण नहीं हो सकता। स्वर्ग के गेट नहीं खुल सकते।
जिज्ञासुः बाबा, स्वर्ग के गेट तो, बाबा कहते हैं कि जो स्वेस्थिति में चला गया, वो स्वीर्ग में चला गया।
बाबाः हाँ, पहले तो आत्मा ही स्वर्ग में, स्वस्थिति में जाएगी ना कि शरीर चला जाएगा? (किसी ने कहा – आत्मात जाएगी।) पहले आत्माओं का ऐसा संगठन बने कि वो खुशनुमा नज़र आएं। उनके संगठन रूपी जो माला है वो देखने में आए लोगों को कि इनके संस्कार आपस में मिले हुए हैं। कभी आपस में टकराते नहीं है।
दूसरा जिज्ञासुः लेकिन बाबा टकराहट तो बहुत ही हो रही है।
बाबाः बहुत ही टकराहट हो रही है तो जरूर बाप के बच्चे नहीं बने हैं। अभी रावण के बच्चे हैं तो आपस में लड़ते हैं।
जिज्ञासुः जब एक परिवार बनेगा फिर अलग-अलग दिशाओं में भाग रहे हैं (बाबाः हाँ, जी।) एक बनके रहना चाहिए।
बाबाः पता कैसे लगेगा कोई दूसरे धर्म में कनवर्ट होने वाला है या नहीं? हँ? आखरीन तक लड़ाई लड़ते रहेंगे तो पता चल जावेगा कि ये अपने धरम के नहीं हैं। ये बाप की औलाद नहीं हैं 84 जन्म लेने वाले। ये टकराने वाली आसुरी आत्मा है।

समयः 26.00-26.38
जिज्ञासुः बाबा, अधिक खुशी हो तो भी आँखों से आँसू आ जाते हैं।

बाबाः अच्छी बात है ना।
जिज्ञासुः ऐसा क्यों बाबा?
बाबाः जो खुशी होती है बहुत दिन के बाद कोई मिलता है तो खुशी आती है ना। तो आँखों में आटोमेटिक आँसू आते हैं। रोता है। बाबा से भी बहुत लंबे समय तक बिछुड़ी हुई जो आत्माएं हैं, इस जनम में पहली बार मिलती हैं तो उनको आँसू आ जाते हैं क्योंकि बेहद की खुशी मिल गई।

समयः 26.47-27.50
जिज्ञासु: ये सुख-दु:ख का ड्रामा बना हुआ है। सुख-दु:ख तो दिखाई देनेवाली चीज़ तो होती नहीं है।

बाबाः अनुभव करने की चीज़ नहीं होती? (जिज्ञासु: अनुभव की होती है। ।) हाँ। (जिज्ञासु: फिर आत्मायें सुखी महसूस क्यों नहीं करती? दु:ख महसूस क्यों करते है?) क्योंकि दुःख की दुनिया है, दुःख का राज्य है। रावण का राज्य है या राम राज्य है? ये दुःखधाम है या सुखधाम है? (सबने कहा: दुःखधाम।) तो दुःखधाम में क्या अनुभव करेंगे? दुःख का ही अनुभव करेंगे। सुखधाम राम बनाता है, दुःखधाम रावण बनाता है। अनेक की मत से बनता है दुःखधाम। और एक की मत पर चलने से बनता है सुखधाम।

समयः 28.06-29.38
जिज्ञासुः बाबा, मुरली में बोला है तुम बच्चों के ये आँसू विजयमाला के दाने बनेंगे।

बाबाः हाँ, जी। खुशी के आँसू आते हैं तो खुशी के आँसू क्या बनावेंगे? वायब्रेशन खुशी का बनता है या दुःख का वायब्रेशन बनता है? सुख का वायब्रेशन बनता है। जो सदैव सुख का वायब्रेशन में डूबा रहेगा वो जरूर विजयमाला में आवेगा क्योंकि संगमयुग जो है उसमें ये राज़ भरा हुआ है। संगमयुग है मौजों की दुनिया। लेकिन जो भी ज्ञान में चलने वाले हैं, सदैव मौज में रहते हैं? रहते हैं? नहीं रहते। तो अज्ञान है या ज्ञान है? अज्ञानी हैं तो दुःखी होते हैं। अगर ज्ञान बुद्धि में अच्छी तरह बैठा हुआ है, आत्मा बने हैं, तो हर परिस्थिति को हर समस्या को ज्ञान के आधार पर साल्व कर लेंगे। परिस्थिति पर स्वस्थिति से विजय प्राप्त कर लेंगे।

समयः 29.40-30.12
जिज्ञासुः बाबा, जब रोज़े रखते हैं मुसलमान लोग तो रात को 4-5 बजे खाना खा लेते हैं। फिर रोज़ा कैसा...?

बाबाः :D वो तो हिन्दुओं में भी चलता है। उपवास रखते हैं तो कहीं आलू खा लेते हैं। कहीं फल खा लेते हैं। तो उनका कैसे चलता है? अरे मुसलमान हैं तो मुसलमानों जैसा ही उनका उपवास होगा।

समयः 30.15-31.50
जिज्ञासुः बाबा, बिना भय के प्रीत पैदा नहीं होती है। बिन भय होय न प्रीत गुंसाई, ऐसा बोला है ना। तो सबके लिए ऐसा ही होता है?

बाबाः एक विस्तार की बात बता दी जनरल बात। स्पेशल आत्माओं के लिए ये बात नहीं है। जो स्पेशल पुरुषार्थ करने वाले हैं वो कितने हैं? आठ। वो तो जबसे ज्ञान में आए होंगे, ज्ञान में आने मात्र से ही उनका देहधारियों से मोह नष्ट होने लगता है। ईश्वरीय सेवा में ही अपने को जुटाए रखते हैं। वो जनरल बात बताई।
जिज्ञासुः तो भय के कारण जो प्रीत पैदा होगी वो तो स्वार्थयुक्त हो गई ना।
बाबाः स्वार्थी है ना सारी दुनिया। सारी दुनिया क्या है? स्वार्थी है या परमार्थी है? सुर नर मुनि सबकी यह रीति। स्वार्थ लागी करैं सब प्रीति। सब स्वार्थ के आधार पर प्यार करते हैं।
जिज्ञासुः हद की दुनिया में माना लौकिक दुनिया में...
बाबाः लौकिक दुनिया में भी है तो अलौकिक दुनिया में भी है।

समयः 32.00-33.05
जिज्ञासुः बाबा, जैसे गीतापाठशाला में मुरली चलती है। उसके बाद सब भाई और माताएं प्वाइंट सुनाते हैं और उसका अर्थ क्लीयर करते हैं। क्या ये उचित है या नहीं?

बाबाः वेरिफिकेशन कौन देगा? (जिज्ञासु: अपने से जो सिनियर... ) वेरिफाय कौन करेगा क्या सच्चा है क्या झूठा है?
जिज्ञासुः यानि ऐसा होता है जैसे क्लास चली, बाबा के प्वाइंट तो लगभग समझ में आते हैं, लेकिन फिर भी कोई प्वाइंट्स ऐसे होते हैं जो अपने को क्लीयर नहीं हो पाते।
बाबाः हाँ, तो जो क्लीयर नहीं होता है और किसी ने क्लीयर कर दिया, क्लास में ढ़ेरों ने क्लीयर नहीं किया। तो जिसने क्लीयर कर दिया, वो स्वार्थ बुद्धि के आधार पर क्लीयर किया या निस्वार्थ बुद्धि से क्लीयर किया होगा? (जिज्ञासु – स्वार्थ।) फिर? इसलिए जो डिस्कशन है वो बेकार हो जाता है। फिर अनेक मतें पैदा हो जाएंगी। गुरुडम शुरु हो जाएगा।

समयः 33.06-34.08
जिज्ञासुः बाबा, बेहद में बाइस्कोप देखना माना क्या?

बाबाः बाइस्कोप माना जो फिल्म है वो एक तो टीवी में देखते हैं। टीवी में तो घर-परिवार के ही लोग बैठे होते हैं। वो घर-परिवार ज्ञानियों का भी हो सकता है। ज्ञानियों अज्ञानियों का मिक्स भी हो सकता है। उसमें वायब्रेशन इतने ज्यादा खराब नहीं होते। लेकिन जो सिनेमा हॉल में फिल्म दिखाई जाती है उसमें बड़े-बड़े गंदे लोग आ जाते हैं। उनके वायब्रेशन बुद्धि को खराब करेंगे या अच्छा बनावेंगे? (किसी ने कहा – खराब।) सबकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। इसलिए उसको कहते हैं बाइस्कोप। ऐसे तो फिल्म घर में भी बैठ करके नहीं देखना चाहिए।

समयः 34.10-35.08
जिज्ञासुः जो प्रापर्टी झगड़े से ली है वो झगड़े में ही खराब हो जाती है। ये बेहद में कैसे होगा?

बाबाः आगे चलके झगड़े होंगे, बढ़ेंगे या घटेंगे? (जिज्ञासु – बढ़ेंगे।) फिर? झगड़े बढ़ते जा रहे हैं प्रापर्टी के या कम होते जा रहे हैं? (जिज्ञासु – बढ़ते जा रहे हैं।) इतने-इतने झगड़े बढ़ेंगे, इतनी-इतनी बीमारियाँ बढ़ेंगी कि न हॉस्पिटल रहेंगे और न कोर्ट रहेंगे।
जिज्ञासुः ब्राह्मणों की प्रापर्टी तो प्यूरिटी है ना?
बाबाः ब्राह्मणों की प्रापर्टी तो प्यूरिटी है। तो?
जिज्ञासुः तो वो कैसे खलास होगी?
बाबाः वो कैसे खलास होगी? जिन्होंने प्योरिटी का निर्वहन नहीं किया होगा, एक बाप से संग नहीं जोड़ा होगा, अनेकों के संग के रंग मं रंग रहे होंगे तो प्यूरिटी खंडित की या अखण्ड रही? खण्डित कर दी। फल भी वैसा ही मिलेगा।

समयः 35.14-36.55
जिज्ञासुः जैसे क्लास चलता है, संगठन क्लास चल रहा है मधुबन में और सभी लोग मोबाईल लेकरके आते हैं।
(बाबाः हाँ, जी।) तो कहीं से फोन आता है तो क्लास में ही बात करने लग जाते हैं। तो उनका मधुबन में जमा करवाना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?
बाबाः अच्छी बात तो यह है कि अपना मोबाईल बंद करके रखें, अपने आप ही। (जिज्ञासु – नहीं करते हैं।) बंद करके नहीं रखते हैं तो एक टाइम ऐसा भी आएगा कि आर्डर निकालना पड़ेगा कि जो भी अंदर आते जाएं उनका मोबाईल लेते जाओ। कई मिनी मधुबनों में ऐसा चल भी रहा है।
जिज्ञासुः कभी क्लास चलता है और वो बात करना शुरू कर देते हैं वहीं बैठे-2।
बाबाः हाँ, तो टीचर का रिगार्ड नहीं है ना। अपने धंधेधोरी का रिगार्ड ज्यादा है। इससे क्या साबित हुआ? (जिज्ञासु - बाप के बच्चे नहीं हैं।) बाबा ने तो मुरली में यहाँ तक कहा है कि जब मुरली सुनते हैं तो कोई दूसरा काम नहीं करना चाहिए। दत्तचित्त होकरके मुरली सुनना है, एकाग्र होकरके। इसीलिए पहले याद में बैठाया जाता है ताकि बुद्धि एकाग्र हो जाए। एकाग्र हुई बुद्धि में ज्ञान की बातें अच्छी बैठेंगी।
दूसरा जिज्ञासुः बाबा प्वाइंट्स नोट भी नहीं करना चाहिए?
बाबाः क्यों नहीं नोट करना चाहिए? जिनको याद नहीं रहता है वो नोट करें। बुद्धि रूपी डायरी जिनकी तीखी नहीं है तो नोट भी नहीं करेंगे तो रिवाइज़ कैसे करेंगे?

समयः 36.58-37.45
जिज्ञासुः अभी जो करोड़पति हैं वो अंत में गरीब बन जावेंगे - एक मुरली में बोला।
(बाबाः हाँ, जी।) तो बाबा वो ज्ञान से कैसे गरीब बन जावेंगे ?
बाबाः ज्ञान से कैसे टैली करेंगे? उल्टा-उल्टा ज्ञान सुनाएंगे तो गरीब बन जाएंगे। ज्ञान देह अभिमान को खतम करने के लिए हैं या देह अभिमान को बढ़ाने के लिए है? (जिज्ञासु: खत्म करने के लिए।) अगर कोई देह अभिमान को बढ़ाने वाला ज्ञान सुनाता है तोड़-मरोड़ के तो रिजल्ट क्या होगा? (जिज्ञासु - ज्ञान उड़ जावेगा।) हाँ। अपना भी सत्यानाश होगा। औरों का भी सत्यानाश होगा।

Disc.CD No.632, dated 20.09.08 at Sehore (M.P.)
Part-3


Time: 22.39-23.50
Student: Baba, it is said that those who have the sanskaars of Bhakti (devotion) will have to leave their body.

Baba: Yes.
Student: It is about when?
Baba: It is about the present time itself. It is about now the present Confluence Age itself.
Student: For example, Baba says that we have to maintain relationships.
Baba: Yes, to maintain the relationships means that you should not break away from the lokik relatives. You should cooperate with them in your dealings in such a way that they shouldn't think that you have broken the relationship of life with them because they too have to be brought to [the path of] knowledge. How can the one who cannot bring benefit to himself, to his family and his relatives themselves, bring benefit to the world? First you have to bring benefit to your community, haven’t you?

Time: 23.50-25.54
Student: Baba, liberation (uddhaar) cannot be attained without the mother guru; please give the clarification for this.

Baba: Who is the number one mother? (Student: Jagadamba.) That is all. Is Jagdamba the mother or is there some other soul who plays the part of the mother, the devi of the power of tolerance even in Jagdamba? It is Brahma. Until he attains the perfect stage becomes helpful to the Father completely, nobody can be benefited. The gates of heaven cannot be opened.
Student: Baba, as regards the gates of heaven, Baba says that the one who has attained the stage of the self (swasthiti), has gone to heaven.
Baba: Yes, it is the soul that will go to heaven, will go in the stage of the self (swasthiti) first, won’t it? Or will the body go [there]? (Someone said: The soul will go.) First, such a gathering of souls should be formed that they (all those in that gathering) should appear joyful. Their rosary like gathering should be visible to the people, [it should be visible to them] that their sanskaars are harmonized with each other. They never clash with each other.
Second student: But Baba, a lot of clash is taking place.
Baba: When a lot of clash is taking place, definitely, they have not become the Father's children. They are still Ravan's children; so, they fight with each other.
Student: When one family has to be formed, all are running in different directions. (Baba: Yes.) They should remain united.
Baba: How will you know whether someone is going to convert to other religion or not? If they keep fighting till the end, we will come to know that they do not belong to our religion. They are not the Father's children who have 84 births. They are demonic souls who clash [with each other].

Time: 26.00-26.38
Student: Baba, tears come in the eyes when we are very happy and when we are very sorrowful as well.

Baba: It is a good thing, is not it?
Student: Baba, why is it so?
Baba: As regards happiness, if you meet someone after many days, you feel happy, don't you? So, tears come in the eyes automatically. You cry. Even the souls who have been separated from Baba for a long time and meet [Him] for the first time in this birth, tears come in their eyes because they receive unlimited happiness.

Time: 26.47-27.50
Student: This drama of happiness and sorrow is preordained. Happiness and sorrow are not something that can be seen.

Baba: Aren’t’ they something that can be experienced? (Student: They are something that can be experienced.) Yes. (Student: Then why do the souls don’t experience happiness? Why do they experience sorrow?) It is because, it is the world of sorrow, the kingdom of sorrow. Is it the kingdom of Ravan or the kingdom of Ram? Is this the Abode of Sorrow or the Abode of Happiness? (Everyone said: Abode of Sorrow.) So, what will you experience in the Abode of Sorrow? You will experience only sorrow. Ram creates the Abode of Happiness and Ravan creates the Abode of Sorrow. Many opinions lead to the formation of the Abode of Sorrow and when we follow the opinion of the One, it leads to the formation of the Abode of Happiness.

Time: 28.06-29.38
Student: Baba, it has been said in the Murli that these tears of you children will become the beads of the Vijaymaalaa (the rosary of victory).

Baba: Yes. The tears of joy that come… so, what will the tears of joy lead to? Does it lead to the formation of vibrations of joy or the vibrations of sorrow? It leads to formation of vibrations of joy. The one who always remains immersed in the vibrations of happiness, will definitely come in the Vijaymaalaa because there is secret in the Confluence Age. The Confluence Age is a world of enjoyment (maujon ki duniyaa). But do all those who follow knowledge always experience joy? Do they? They do not. So, is it ignorance or knowledge? If they are ignorant they feel sorrowful. If the knowledge has sat in the intellect properly, if they have become souls, then they will solve (overcome) every circumstance, every problem with the help of the knowledge. They will gain victory over paristhiti (circumstance) through swasthiti (stage of the self).

Time: 29.40-30.12
Student: Baba, the Muslims observe fast (roza). So, they eat food at 4-5 pm in the night. Then how is it a fast?

Baba: :D That happens among the Hindus as well. When they observe fast (upvaas), sometimes they eat potatoes, sometimes they eat fruits. So, how do they manage? Arey, when they are Muslims, their fast will be just like the Muslims.

Time: 30.15-31.50
Student: Baba, love [for God] doesn’t develop unless they have fear. It is said, ‘there cannot be love without fear’, isn’t it? So, is this applicable to everyone?

Baba: It was said on the whole, in general. This is not applicable to the special souls. How many [souls] make special purushaarth? Eight. Ever since they will have entered the path of knowledge, as soon as they enter the path of knowledge, their attachment for the bodily beings is gradually removed. They keep themselves busy only in the service of God. So, a general topic was mentioned.
Student: So, the love that develops because of fear is full of selfishness, [is not it?]
Baba: So, the entire world is selfish, is not it? How is the entire world? Is it selfish (swaarthi) or is it charitable (parmaarthi)? [It is said:] Sur, nar, muni, sabki yah riiti; swaarath laagi karein sab priiti . Everyone loves out of selfishness.
Student: In the limited world, i.e. in the lokik world...
Baba: It is the case in the lokik world as well as in the alokik world.

Time: 32.00-33.05
Student: Baba, the Murli is played in the Gita paathshaalaa. And after that all the brothers and mothers narrate points [of that Murli] and make their meanings clearer. Is this correct or not?

Baba: Who will give the verification? (Student: Our Seniors…) Who will verify, what is true and what is false?
Student: I mean it happens in this way: when the class is played, almost all the points [narrated] by Baba are understood still, there are some points which are not clear to us.
Baba: Yes, so the [points] which were not clear and someone made it clear; numerous persons in the class did not make it clear. So, the one who made it clear, did he make it clear out of a selfish intellect or will he have made it clear with a selfless intellect? (Student: With a selfish intellect.) Then? This is why the discussion goes to waste. Different opinions will arise. Gurudom will begin.

Time: 33.06-34.08
Student: Baba, what is meant by seeing bioscope in the unlimited?

Baba: Bioscope means films. One way to watch it is on the TV. [While watching it on] TV, only the members of the family are sitting. That family can be of knowledgeable persons. It can also be mixed [i.e.] with the knowledgeable as well as ignorant persons. In that case, the vibrations are not spoilt to that extent. But in case of the films shown in the cinema hall, very dirty people come there. Will their vibrations spoil the intellect or will they make it good? (Someone said: Bad.) Everyone's intellect becomes corrupt. This is why it is called bioscope. In a way, films should not be watched even while sitting at home.

Time: 34.10-35.08
Student: The property that has been obtained through [having] disputes will be destroyed in the disputes itself. How will this happen in the unlimited?

Baba: Will disputes take place in future, will they increase or decrease? (Student: They will increase.) Then? Are the property disputes increasing or decreasing? (Student: They are increasing.) The disputes will increase so much, the diseases will increase so much that neither there will be hospitals nor will there be courts.
Student: The property of Brahmins is purity, is not it?
Baba: The property of Brahmins is purity. So?
Student: How will that be destroyed?
Baba: How will that be destroyed? Those who have not maintained purity, those who will not have established connection with the One Father, those who will be coloured by the company of many, did they ruin purity or did it remain constant? They ruined it. They will also receive the fruits [of the deeds performed] accordingly.

Time: 35.14-36.55
Student: When the class is conducted, when the sangathan class (gathering) is going on in the Madhuban, everyone brings his mobile.
(Baba: Yes.) So, when they receive a phone call from somewhere, they start talking in the class itself. So, should [their phone] be collected at Madhuban or not?
Baba: It is better if they keep their mobiles switched off voluntarily. (Student: They don't.) If they do not switch it off, a time like this will also come when an order will have to be issued that the mobiles of all those who come inside [the Madhuban] should be collected. It is also going on like this in many mini madhubans.
Student: Sometimes, when the class is going on, they start talking sitting there itself.
Baba: Yes so, they do not have regard for the Teacher, do they? They have more regard for their occupation. What does it prove? (Student: They are not the Father's children.) Baba has said to this extent in the Murli that when you are listening to the Murli, you should not do any other work. You should listen to the Murli attentively, with concentration. This is why you are made to sit in remembrance first, so that the intellect becomes focused. Topics of knowledge will sit properly in the focused intellect.
Another student: Baba, should we not even note the points?
Baba: Why shouldn't you note? Those who cannot remember [the points] should note it down. If those whose diary like intellect is not sharp do not even note it down, then how will they revise [those points]?

Time: 36.58-37.45
Student: It was said in a Murli that those who are millionaires now, will become poor in the end.
(Baba: Yes.) So Baba, how will they become poor with respect to the knowledge?
Baba: How will they become poor with respect to the knowledge? If they narrate opposite knowledge, they will become poor. Is the knowledge meant to finish body consciousness or to increase body consciousness? (Student: To finish it.) If someone narrates knowledge that increases body consciousness by misinterpreting it, then what will be the result? (Student: The knowledge will vanish.) Yes. He himself will be ruined as well as the others will be ruined. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 17 Nov 2014

वार्तालाप-632, सीहोर (म.प्र.), दिनांक 20.09.08
भाग-4


समयः 37.47-42.08
जिज्ञासुः बाबा, गीता पाठशाला में कम से कम कितना टाइम क्लास करना चाहिए?

बाबाः आधा घण्टा याद। सबको पूछना है कि ज्यादा से ज्यादा कितना टाइम दे सकते हैं?
जिज्ञासुः बाबा, जो आता है और 15 मिनट बाद चले जाता है। हमारे पतिदेव को चाय बनाना है, फलाना करना है। क्लास में बैठती ही नहीं है। कैसे...?
बाबाः वो पंक्चुअल नहीं है। वो पंक्चुअल स्टूडेन्ट की लिस्ट में नहीं है बाबा की दृष्टि में। (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) हाँ, हाँ, ठीक है, जो पंक्चुअल नहीं है वो पद भी ऐसा ही पावेंगे। बाबा की पढ़ाई जो रेगुलर पढ़ेंगे, और पंक्चुअल पढ़ेंगे, रेगुलर माना रोज़ क्लास में आना। अगर दूर रहते हैं तो सप्ताह में दो बार आएँ, एक बार आएं, लेकिन आएं जरूर। उनको कहेंगे रेगुलर। बहुत दूर रहते हैं तो महीने में एक बार तो जरूर आएं।
जिज्ञासुः नहीं, एक ही गांव में रहती हैं और गीतापाठशाला ऐसे हैं कि सब आत्माएं आसपास में ही रहते हैं। तो कोई ये कहते हैं कि हमारा लड़का मना करता है, हमारे पतिदेव गुस्साe हो जाते है। तो बाप आए है, उनको जानते भी है, अच्छेद से चलते भी है। इसके बाद जब बाबा यहाँ आते है, सीहोर, तो भी उनको टाइम नहीं मिलता है। कहते है, हमारी समस्याछ है, पैसा नहीं है या टाइम नहीं है।
बाबाः हाँ तो ज्ञान का महत्व और बाप की पहचान जितनी गहराई से बैठी होगी उतना ही फॉलो करेंगे ने। उनको नाक पकड़ के चलाएंगे? (जिज्ञासु: नहीं ऐसे तो नहीं बाबा। मुँह से तो बोलते ही है, मतलब अच्छाै बोलते है...) बोलने से कोई फायदा नहीं। सहज-सहज चलने दो। हमारा जो ज्ञान योग है वो सहज ज्ञान, सहज राजयोग है। किसी के ऊपर कोई जोर जबरदस्ती नहीं। जो काम दूसरे नहीं करते हैं वो हम पक्का होकरके करके दिखाएं।
दूसरा जिज्ञासुः तो फिर बाबा, डेढ़ घंटे की क्लास हो जाएगी।
बाबाः आधा घंटा याद में बैठें। एक घंटा मुरली चलाएं। आधा घंटा जो डिस्कशन का क्लास है वो सुन लें। इतना तो बहुत काफी है। अगर सब कहते हैं हम दो घंटा टाइम नहीं दे पाएंगे तो आधा घंटा याद में बैठें। आधा घंटा मुरली सुनें। आधा घंटा डिस्कशन सुन लें। (यदि) क्लास के सभी लोग कहते हैं डिस्कशन में हमें इतना मज़ा नहीं आता है, हम नहीं सुनना चाहते हैं तो कभी-कभी डिस्कशन का क्लास चला दे ।
दूसरा जिज्ञासुः जैसे बाबा डिस्कशन का क्लास शाम को होता है।
बाबाः ठीक है।
दूसरा जिज्ञासुः एक घंटे का वार्तालाप होता है।
बाबाः वो तो सबके ऊपर, आने वाले स्टूडेन्ट्स के ऊपर है ना।
तीसरा जिज्ञासु: बाबा, एक घंटा योग और एक घंटा मुरली चला सकते है ना।
बाबा: एक घंटा योग जब रखोगे, सामने बाबा तो होता नहीं है। सामने टी.वी. होती है। और बुद्धि लोगों की इधर-उधर चलती रही तो वायब्रेशन खराब होगा क्लास का या अच्छा बनेगा? (जिज्ञासु - खराब।) इसलिए कम करो लेकिन अच्छा करो।
चौथा जिज्ञासुः बाबा, कई लोग जरा-जरा में रूठ करके अपने घर चले जाते हैं।
बाबाः क्या? (सबने कहा: नाराज़ हो जाते है, गुस्साो हो जाते है।) जरा-जरा में? (सबने कहा: नाराज़ हो जाते है।) नाराज़ हो जाते है? (किसी ने कहा: हाँ, चले जाते है।...) तो जितना संतुष्ट कर सको उतना करो। ब्राह्मण परिवार के लिए जो जितना मरेगा, सहन करेगा, उतना पद की प्राप्ति करेगा। यहाँ सहन करेगा, वहाँ सहन कराने के निमित्त बनेगा।

समयः 42.14-43.52
जिज्ञासुः बाबा, क्लास हम 5 बजे से 7 बजे तक करते हैं तो...

बाबाः 5 बजे सर्दियों में अंधेरा होता है।
जिज्ञासुः हाँ बाबा, और हमारा घर भी दूर है।
बाबाः हाँ, तो अंधेरे में क्लास नहीं करना।
जिज्ञासुः तो बाबा बोलते हैं कि दो घंटा क्लास करना चाहिए। तो फिर घर जाते हैं तो घरवाले डांटते हैं, हम दो घंटा क्लास करते है तो।
बाबाः हाँ, हाँ, तो उतना काम करो जितना घरवाले न डांटें।
जिज्ञासुः बाबा तो बोलते दो घंटा क्लास करो। फिर कैसे करें?
बाबाः अरे बाबा बोलते हैं। बाबा ये भी तो बोलते हैं कि घरवालों से तोड़ निभाओ।
जिज्ञासुः तो बाबा चार बजे से नहीं कर सकते?
बाबाः चार बजे अंधेरा होता है। कन्याएं भी क्लास में आती हैं। कन्याओं को अकेला छोड़ा जा सकता है क्लास में जाने के लिए? (जिज्ञासु - नहीं।) फिर? इसलिए जब झुटपुटा होता है, दूर का आदमी साफ दिखाई पड़ता है चेहरा, उस समय क्लास शुरू होना चाहिए।
जिज्ञासुः फिर बाबा दो घंटे की तो नहीं कर पाएंगे।
बाबाः तो न करो। जितना सहज रूप से कर सकते हो उतना करो। बाकी घर में जाके पुरुषार्थ कर लो।
जिज्ञासुः पांच बजे तो काम पे जाना होता है।
बाबाः हाँ, हाँ, तो अपने काम में लग जाओ। (क्लास) छोड़ दो। रोटी दाल बनाना शुरू कर दो। 

समयः 43.59-45.20
जिज्ञासुः बाबा, तीजा का उपवास छोड़ने से ...?

बाबाः किसका उपवास करते हैं? (सभी ने कहा – तीजरे की।) हाँ, जी। (किसी ने कहा – कह रहे है कि छोड़़ दे क्या ? ।) बाबा कुछ भी छोड़ने के लिए मना नहीं करते। बाबा तो कहते हैं भक्तिमार्ग में... अगर बुद्धि ज्ञान में नहीं अटकती है तो खूब भक्ति करो। जब ज्ञान बुद्धि में बैठ जाएगा तो भक्ति के सारे आडंबर छूट जाएंगे। इसलिए कोई को भक्ति करने के लिए मना ही नहीं करना।
जिज्ञासु: बाबा, ऐसा कहते है कि तीज का उपवास छूटना नहीं चाहिए। शरीर रहे जब तक करना।
बाबाः शरीर रहे तब तक करना? (जिज्ञासु - हाँ।) किसने कहा?
जिज्ञासुः बाबा भक्तिमार्ग में।
बाबाः भक्तिमार्ग वालों की बातें माननी हैं? मुरली में तो नहीं कहा। (जिज्ञासु – नहीं।) फिर बाबा मना भी नहीं करते। तुम्हें करना अच्छा लगता है तो करो। खूब करो। दूसरों को भी भक्ति करने के लिए कभी मना नहीं करना चाहिए।

समयः 45.25-45.55
जिज्ञासुः बाबा ये क्लास चलता है तो उसमें कोई अपने पर्सनल कार्य के लिए उठ जाता है। तो इसमें बाबा का डिसरिगार्ड होता है। तो जैसे मधुबनों में सेवाधारियों को उठना पड़ता है यज्ञ सेवा के लिए…

बाबाः पर्सनल काम जरूरी है। घर में लड़का बीमार पड़ा है, हॉस्पिटलाइज़्ड है। तो काम देखा जाता है ना। उस समय छुट्टी लेकरके टीचर की चला जाए।

समयः 45.58-47.03
जिज्ञासुः बाबा, माताएं पूछना चाहती हैं कि गीतापाठशाला बाजू में ही हैं, मतलब डर नहीं है कुछ। तो जा सकती है चार बजे से क्लास करने ?

बाबाः गीतापाठशाला?
जिज्ञासुः मतलब डर नहीं है कोई भी। जा सकती हैं कि नहीं अगर चार बजे से क्लाहस करना चाहे?
बाबाः डर नहीं है?
जिज्ञासुः पास में ही है।
बाबाः हाँ, अरे तुम्हारे अकेले के लिए ही सोचना है क्या? जो दूर से आते हैं उनके लिए नहीं सोचना? इतनी स्वार्थबुद्धि? (किसी ने कहा – ये कह रही है कि दूर से नहीं आती।) उनका कहना है कि क्लास नज़दीक है तो हम क्लास जल्दी कर सकते हैं कि नहीं? तो अपने ही लिए सोचना है? जो दूर से आते हैं उनके लिए नहीं सोचना है? (किसी ने कहा – हाँ, वो कह रही है दूर से कोई नहीं आता।) ऐसी कोई बात नहीं है। दूर से भी आते हैं, नज़दीक से भी आते हैं।
जिज्ञासुः बाबा सब पास ही में हैं।
बाबाः क्या पास में है?
जिज्ञासु: सब आत्माायें।
बाबा: अरे एक आदमी के लिए दरवाज़ा-दरवाज़ा सामने होगा। सबके लिए सामने होगा क्या?

समयः 47.10-47.52
जिज्ञासुः बाबा, भक्तिमार्ग की परंपरा को भाइयों ने सबसे ज्या दा छोड़ा, मातायें धीरे-2 छोड़ती है लेकिन ज्ञान में मातायें सबसे तेज़ है।

बाबाः ज्ञान में? ज्ञान में तेज़ है या प्यूरिटी में तेज़ है?
जिज्ञासुः प्यूरिटी में तेज़ है।
बाबाः ज्ञान में तो रावण भी बड़ा तीखा था। क्या? ज्ञान में तीखा होना बड़ी बात नहीं है। लेकिन ज्ञान को प्रैक्टिकल जीवन में धारण करना बड़ी बात है।
और करो भाईयों का झण्डा ऊँचा।


समयः 47.53-49.48
जिज्ञासुः बाबा, कहा है कि जगदम्बा को योग का दान देना है।
(बाबाः ठीक है।) लेकिन बाबा तो कहते हैं कि जगदम्बा तो डब्बा है।
बाबाः हँ? तुम्हारी नज़र में जगदम्बा कौन है? (जिज्ञासु - बड़ी माँ।) तुम्हारी नज़र में जगदम्बा देहधारी है या कोई आत्मा है?
जिज्ञासुः बाबा तो कहते है, ये ब्रह्मा ही तुम्हारी जगदम्बा है।
बाबाः फिर काहे के लिए जगदम्बा-जगदम्बा, डब्बा-डब्बा हिलाय पड़े हो? जो सन्यासी होते हैं उनकी बुद्धि कहाँ पड़ी रहती है? जो माला घुमाते हैं ना। तो गउमुख में एक कपड़ा होता है ऐसा, उसमें हाथ डाला और राम-6, बुद्धि सारी, बुद्धि रूपी हाथ सारा गउमुख में पड़ा रहता है। गऊ का मुख सुन्दर लगता है ना। उसी को ही याद करते हैं। अब उसमें प्रवेश करने वाली आत्मा जगदम्बा है या वो गऊमुख जगदम्बा है? (जिज्ञासु - आत्मा।) सहनशक्ति किसने धारण की? (जिज्ञासु - ब्रह्मा ने।) ब्रह्मा ने सहनशक्ति धारण की। माता की मुख्य भूमिका ही है सहनशक्ति धारण करने की।
जिज्ञासुः जहाँ बीजरूप स्टेज में ब्रह्मा की सोल पढ़ाई पढ़ रही है...
बाबाः अरे, ब्रह्मा की सोल अभी मुख्य रूप से कहाँ पार्ट बजा रही है? हँ? (जिज्ञासु - एडवांस में।) हाँ, एडवांस में तो है। कोई, कोई तन है मुकर्रर कि नहीं? हँ? (जिज्ञासु - प्रजापिता।) प्रजापिता? प्रजापिता जगदम्बा है? (जिज्ञासु - प्रवेश करके पढ़ाई पढ़ रही है।) वो पढ़ाई पढ़ता है लेकिन जगदम्बा, पढ़ाई पढ़ाने वाला बाप है कि जगदम्बा है? (जिज्ञासु - बाप है।) हाँ, प्रवेश किसमें करता है मुख्य रूप से? (जिज्ञासु - जगदम्बा में।) जगदम्बा में।

Disc.CD No.632, dated 20.09.08 at Sehore (M.P.)
Part-4


Time: 37.47-42.08
Student: Baba, what is the minimum duration of organizing class in the Gita paathshaalaa?

Baba: Remembrance for half an hour. It should be asked to everyone, how much time can they devote at the most?
Student: Baba, [some] come and depart after 15 minutes [and] say: I have to prepare tea for my husband; I have to do this and that. They do not sit in the class at all. How…?
Baba: They are not punctual. They are not in the list of punctual students from Baba's point of view. (Student said something.) Yes, yes, alright, those who are not punctual will also get a post accordingly. Those who study Baba's knowledge regularly and punctually… regular means to come to the class daily. If they live far away, then they should come twice a week [or] once a week, but they should come without fail. They will be called [to be] regular. If they live very far away, they should definitely come once in a month.
Student: No, they stay in the same village and the Gita paathshaalaa is located in such a place that all the souls live nearby. So, some say that their son stops them [from coming], their husbands scold them. They do know that the Father has come, they also follow [the knowledge] properly, but later, when Baba comes here, in Sehore, they do not get time. They say: we have this problem, we don’t have money, we don’t have time.
Baba: Yes, so, they will follow only to the extent they will have understood the importance of knowledge and recognized the Father. Will you make them walk by holding their nose (forcibly)? (Student: No Baba, it is not so. They do say through their mouth, I mean, they say: [this knowledge is] good…) There is no use of [just] saying. Let them follow [the knowledge] easily. Our knowledge and Yoga is easy knowledge, easy Raja Yoga. There is no compulsion on anyone. We should firmly perform the tasks that others do not perform and set an example.
Second student: So Baba, the class will be for one and a half hour.
Baba: Sit in remembrance for half an hour. Play the Murli for an hour. Listen to the discussion class for half an hour. This much is more than enough. If everyone says that they will not be able to devote two hours, then sit in remembrance for half an hour, listen to the Murli for half an hour [and] listen to discussion for half an hour. If everyone in the class says that they do not enjoy the discussion much, they do not want to listen to it then, play the discussion class occasionally.
Second student: Baba, for example, the discussion class is played in the evening.
Baba: Okay.
Second student: There is the discussion class for one hour.
Baba: So, it depends on everyone, it depends on the students who come, doesn't it?
Third student: Baba, we have Yoga for one hour and Murli [class] for one hour, can’t we?
Baba: When you organize Yoga for an hour, Baba is certainly not in front of you. The TV is in front of you. And if the intellect of people keeps wandering here and there, will the vibrations of the class be spoilt or will it become good? (Student: It will be spoilt.) This is why organize [the class] for lesser time but do it properly.
Fourth student: Baba, many people get displeased over trivial reasons and go to their house.
Baba: What? (Everyone said: They are displeased, they become angry.) For trivial reasons? (Everyone said: They get displeased.) They get displeased? (Someone said: Yes, and they go away…) So, satisfy them as much as possible. Whoever sacrifices [himself] for the Brahmin family to whatever extent; the more someone tolerates, the higher the post he will achieve. The one who tolerates here (in the Confluence Age) will become the instrument to make them tolerate there (in the broad drama).

Time: 42.14-43.52
Student: Baba, if we attend the class from 5 to 7 [AM]...

Baba: During the winters, it is dark at 5 AM.
Student: Yes Baba, and my home is far away as well.
Baba: Yes, so don't attend the class when it is dark.
Student: But Baba says that we should attend class for two hours. So, when I return home, the members of my family scold me if I attend the class for two hours.
Baba: Yes, yes, so perform the task [of attending class] to the extent the family members don't scold you.
Student: Baba says that we should attend class for two hours. Then, how should we manage?
Baba: Arey, Baba says [so]. [But] Baba also says that you should maintain relationship with the members of the family.
Student: So Baba, cannot it (the class) be organized from 4 AM?
Baba: It is dark at 4 AM. Virgins also come to the class. Can the virgins be allowed to go to the class alone? (Student: No.) Then? This is why when it is dawn, when the face of people is clearly visible from a distance; the class should start [at that time].
Student: Then Baba we will not be able to attend [the class] for two hours.
Baba: So, don't attend. Do as much as you can do easily. And make the remaining purushaarth after going home.
Student: We have to go to work at 5 AM.
Baba: Yes, yes, so start doing your work. Leave [the class]. Start cooking roti and daal. 

Time: 43.59-45.20
Student: Baba, if we stop observing the fast of tiij ...?

Baba: Which fast? (Everyone said: Of Tiijra.) Yes. (Someone said: She is asking, should she stop observing it.) Baba does not forbid you to leave anything. In fact, Baba says, in the path of Bhakti… if the knowledge doesn’t sit in your intellect then, do a lot of Bhakti. When the knowledge sits in the intellect, all the ostentations of Bhakti will vanish. This is why you should not at all stop anyone from doing Bhakti.
Student: Baba, they say that we should never stop observing the fast of tiij; we should observe it until we are alive.
Baba: You should observe it as long as you are alive? (Student: Yes.) Who said this?
Student: Baba, in the path of Bhakti.
Baba: Should you listen to the people of the path of Bhakti? It isn’t said in the Murli, is it? (Student: No.) And Baba does not stop you either. If you like doing [Bhakti] then do it; do a lot [of Bhakti]. You should not stop others from doing Bhakti either.

Time: 45.25-45.55
Student: Baba, when the class is going, some get up for their personal tasks. So, this brings the disregard of Baba. So, for example, the sevadharis (servants) have to leave for the purpose of the service of the Yagya.
..
Baba: If the personal task is important, [if someone’s] son is sick at home; he is hospitalized [then he will have to leave]. So, the task is seen, is not it? At that time, he can take leave from the teacher and depart.

Time: 45.58-47.03
Student: Baba, the mothers want to ask that the Gita paathshaalaa is located next door; I mean there isn’t any kind of fear. So, can they go to attend the class from 4 AM?

Baba: Gita paathshaalaa?
Student: I mean to say there is no kind of fear. Can they go or not if they wish to attend the class from 4 AM?
Baba: There is no fear?
Student: It is located nearby.
Baba: Yes, arey, should you think only about yourself? Shouldn't you think of those who come from distant places? You have such a selfish intellect! (Someone said: She is saying that [the mothers] don’t come from distant places.) She wants to ask that [the place of organizing] the class is located nearby; so can she organize the class early or not? So, should she think [only] about herself? Shouldn't she think of those who come from distant places? (Someone said: Yes, she is saying that no one comes from distant places.) It is not so. People come from distant places as well as nearby places.
Second student: Baba, everyone lives nearby.
Baba: Who are nearby?
Student: All the souls [who come for the class].
Baba: Arey, the doors can be nearby in case of one person. Will it be next door for everyone?

Time: 47.10-47.52
Student: Baba, the brothers have renounced the traditions of the path of Bhakti the most, [while] the mothers renounce it gradually; still, the mothers are the sharpest in knowledge.

Baba: In knowledge? Are they sharper in knowledge or in purity?
Student: They are sharper in purity.
Baba: Even Ravan was very sharp in knowledge. What? It is not a big thing to be sharp in knowledge. But it is a big thing to assimilate the knowledge in the life in practice. Raise the flag of brothers higher. :D

Time: 47.53-49.48
Student: Baba, it has been said that Jagdamba should be given the donation of Yoga.
(Baba: It is correct.) But Baba says Jagdamba is a box.
Baba: Who is Jagdamba in your eyes? (Student: The senior mother.) Is Jagdamba a bodily being or a soul in your eyes?
Student: Baba says, this Brahma himself is your Jagdamba.
Baba: Then why do you uttering Jagdamba-Jagdamba, box-box? Where is the intellect of the sanyasis focused? They rotate the rosary, don't they? So, there is gaumukh , a cloth like this (Baba is showing the shape); they put their hand in it and utter Ram-Ram-Ram-Ram-Ram-Ram. Their intellect, their hand like intellect remains completely in the gaumukh. The face (mukh) of a cow (gau) appears beautiful, doesn't it? They remember only that. Well, is the soul that enters her Jagdamba or is that gaumukh (the body) Jagdamba? (Student: The soul.) Who assimilated the power of tolerance? (Student: Brahma.) Brahma assimilated the power of tolerance. The very main quality of a mother is to assimilate the power of tolerance.
Student: The place where the soul of Brahma is studying the knowledge in the seed form stage…
Baba: Arey, where is the soul of Brahma mainly playing the part at present? (Student: In the advance [party].) Yes, it is no doubt in the advance [party]. [But] does it have any permanent body or not? (Student: Prajapita.) Prajapita? Is Prajapita Jagdamba? (Student: It is studying the knowledge after entering.) It studies the knowledge, but Jagdamba… is it the Father who teaches or is it Jagdamba who teaches? (Student: The Father.) Yes, in whom does he (the soul of Brahma) enter mainly? (Student: In Jagdamba.) In Jagdamba. ... (to be continued)

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Post by arjun » 18 Nov 2014

वार्तालाप-632, सीहोर (म.प्र.), दिनांक 20.09.08
भाग-5


समयः 49.53-50.42
जिज्ञासुः बाबा, जैसे गीतापाठशाला दूर पड़ती है।

बाबाः हाथ तो उठा दो । हाँ।
जिज्ञासुः घर पे रोज़ मुरली सुनते हैं तो वो क्लास में नहीं आता है? क्लास में नहीं आता है? जैसे घर पे रोज़ मुरली सुन रहे हैं पाँच बजे। तो गीतापाठशाला में नहीं जा पाते। (बाबाः हाँ।) रोज़ की क्लास में नहीं आएगा?
बाबाः नहीं आते। हाँ। रोज़ क्लास में नहीं जाते हैं। घर में ही मुरली पढ़ लेते हैं। तो?
जिज्ञासु: रोज़ की क्लास में नहीं मानी जाएगी?
बाबा: अरे कभी बाई चांस हुआ, घर में पढ़ ली तो दूसरी बात है। रोज़ ही अगर ऐसा करते हैं इसका मतलब परिवार का महत्व ही नहीं है।
जिज्ञासुः दूर पड़ता है ना बाबा। रोज़-रोज़ नहीं जा पाते।
बाबाः अच्छा तो सप्ताह में एक बार जाओ।
जिज्ञासुः सप्ताह में जाते हैं एक बार।
बाबाः हाँ, तो जाओ ना।

समयः 50.48-53.12
जिज्ञासुः बाबा, 2012 के अंत में प्रकृति की धुरी चेंज होगी।

बाबाः 2012 के अंत में क्या होगा?
जिज्ञासुः परिवर्तन हो जाएगा। धुरी चेंज होगी।
बाबाः प्रकृति का परिवर्तन हो जाएगा?
जिज्ञासुः माना देवताओं की तरफ, जो असुरों की तरफ है वो देवताओं की तरफ बुध्दि हो जाएगी।
बाबाः किसकी?
जिज्ञासुः ऐसा एक वाणी में बोला है।
बाबाः किसकी बुद्धि हो जावेगी देवताओं की तरफ?
जिज्ञासुः जगदम्बा।
बाबाः कोई तो आत्मा ऐसी होगी जो परिवर्तन की शुरुआत करेगी। अरे कोई होगी कि नहीं? वो ब्रह्मा की ही आत्मा है। हाँ।
जिज्ञासुः ये तो बोला कि बारह के अंत में...
बाबाः किसने बोला?
जिज्ञासुः वार्तालाप में आया है।
बाबाः वार्तालाप में आया, तो बोला किसने? वो 2012 की बात दुनियावी लोगों की बात है या मुरली की बात है? (जिज्ञासु - मुरली की।) मुरली की बात है?
जिज्ञासुः नहीं। धुरी चेंज होगी, प्रकृति का परिवर्तन होगा।
बाबाः हाँ, ये हो सकता है जो उन्होंने काल्कुलेशन निकाला है दुनियावालों ने कि 2012 में परिवर्तन होगा। सृष्टि जो है परिवर्तन को प्राप्त होगी, पृथ्वी की धुरी बदल जावेगी। तो पृथ्वी माता तो कौन है? सारी पृथ्वी नहीं चेंज हो जावेगी। पहले आत्मा चेंज होगी या पाँच तत्वों की पृथ्वी चेंज होगी? आत्मा चेंज होगी। तो पृथ्वी का पार्ट बजाने वाली आत्मा कौन है? (जिज्ञासु- जगदम्बा।) जगदम्बा है। तो उसकी मेंटेलिटी चेंज होगी। ये भी हो सकता है। बाकी ऐसे नहीं सारी दुनिया या सारी पृथ्वी चेंज हो जाएगी। (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) बिल्कुल होगा। अगर उनका काल्कुलेशन उनके हिसाब से सही है तो यही परिवर्तन हो सकता है। ये नहीं कि स्थूल 5 तत्व चेंज हो जावेंगे। या स्थूल रूप में पृथ्वी की धुरी चेंज हो जावेगी।

समयः 53.17-54.26
जिज्ञासुः महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण बताया।
(बाबाः हाँ, जी।) इसका क्या मतलब? इतने बड़े-बड़े महारथी रहते हुए।
बाबाः इसका यही मतलब है कि तुम सब द्रौपदियाँ हो। सब द्रौपदियों के जीवन में जब फाइनल परीक्षाएं होंगी तो ऐसी परीक्षाएं आएंगी। घरवाले भी सहयोगी नहीं बनेंगे। बाहरवाले भी सहयोगी नहीं बनेंगे। धर्मगुरु, आचार्य, पण्डित, पुजारी, मौलवी, कोई सहयोगी नहीं बनेंगे। द्रौपदी ने किसको पुकारा आखिर? (किसी ने कहा – भगवान को।) भगवान से जिनकी लौ लगी हुई होगी, भगवान सहयोगी बनेगा और इज्जत बचाएगा। एक द्रौपदी की बात नहीं है। तुम सब द्रौपदियाँ हो।
क्या हुआ? सब लोग चिंता में पड़ गए क्या?

समयः 54.33-56.22
जिज्ञासुः बाबा, भक्तिमार्ग में ... की पूजा में जो दालों का उपयोग किया जाता है उनमें तुवर की दाल को क्यों फेंक दिया जाता है?

बाबाः तुवर की दाल का प्रयोग नहीं किया जाता है? (जिज्ञासु: जी हाँ।) ये तो नई बात बताई। और सब दालों का प्रयोग करते हैं? तुवर की दाल का प्रयोग नहीं करते? अच्छा? तुवर की दाल ज्यादा गरम तो नहीं होती? हाँ। ऐसे तो नेचुरोपेथी के डॉक्टर कहते हैं दाल खाना ही नहीं चाहिए। (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) दाल, चावल, आलू। दाल, चावल और आलू। चावल ठण्डा है और इतना ठंडा है कि जो आलू गरम है और दाल गरम है उसको बराबर कर देगा। और जल्दी बन जाता है। पुरुषार्थ करने में ज्यादा टाइम नहीं देना पड़ेगा। हाँ। पचने में भी आसान रहेगा। ये एक जनरल बात बताई है। (ऐसे नहीं) जो मधुमेह के मरीज़ हैं वो भी खाना शुरु कर दें।

समयः 56.23-57.36
जिज्ञासुः बाबा, जो बड़े-बड़े तीर्थ स्थान बने इनका बेहद में क्या अर्थ है?

बाबाः क्या बने हैं?
जिज्ञासुः बड़े-बड़े तीर्थ स्थान जो बने हैं (बाबाः हाँ।) उसका बेहद में क्या अर्थ है?
बाबाः पार लगाने वाला स्थान। क्या? पार लगाने वाला स्थान। दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ स्थान कौनसा है? माउंट आबू। फिर जो गीतापाठशालाएं हैं, मिनीमधुबन हैं, जो वहाँ तक नहीं पहुँच पाएंगे, इतना बुद्धि में ज्ञान नहीं बैठा है, तो मिनीमधुबन तक तो आ सकते हैं, गीतापाठशाला तक तो आ सकते हैं। तो वो ही उनका तीर्थ स्थान हो गया। बुद्धि को किनारे लगाने वाला स्थान। तीर माना किनारा। गीतापाठशाला में आते हैं तो चारों तरफ से बुद्धि खिंच करके एक परमात्मा में लगाई जाती है कि नहीं? लगाई जाती है। तो जहाँ जिस स्थान में बुद्धि सेट हो गई वो तीर्थ स्थान हो गया उस आत्मा के लिए।

समयः 57.38-59.31
जिज्ञासुः बाबा, जैसे विचार-सागर मंथन करने से रत्न निकलते भी है और कुछ अनुभव भी होते है। क्या उसको बाप से वेरिफाय करवा कर शेयर करना चाहिए या डायरेक्टव शेयर करना चाहिए?

बाबाः विचार सागर मंथन करने से जो रतन निकलते हैं उन रतनों को वेरिफाय कराना तो अच्छी बात है। खराब बात तो नहीं है। ऐसा न हो कि हमने विचार सागर मंथन करके जो काल्कुलेशन निकाला है उसमें कोई त्रुटि रह गई हो। और हम अपनी मनमत पर उल्टा काम करने लगें। और दूसरों से कराने लग पड़ें। तो बाबा के सामने बैठकरके क्लीयर कर लेने में क्या हर्जा है? नहीं तो बहुत ऐसे हैं जो राजयोग सिखाने लग पड़ते हैं कन्याओं माताओं को। बाबा मुरली में कहते हैं एक बाप ही राजयोग सिखाय सकता है। तो ये जो विचार सागर मंथन हुआ ये वेरिफाय कराने योग्य है या नहीं है? (जिज्ञासु - है।) है, लेकिन नहीं कराते हैं. क्योंेकि नीयत खराब है। अंदर चोरी भरी हुई है। चोरी के संस्कार भर गए हैं इस्लाम धर्म में कई जन्म के तो वेरिफाय नहीं कराते। बहुत दिन के बाद आपने ये बात पूछी है। अच्छी बात पूछी या खराब बात? अच्छी बात है।

समयः 59.40-01.01.37
जिज्ञासुः बाबा, कोई माताएं भट्ठी कर चुकी हैं। लेकिन कुछ समय से बाबा से मिल नहीं पाई हैं उनके पारिवारिक स्थिति के कारण। लेकिन अगर वो बाबा को स्थूबल सेवा भेजना चाहती हैं तो हम ले या नहीं ले?

बाबाः अगर रेग्युतलर माताएं हैं, भट्ठी करने के बाद।
जिज्ञासुः क्लास नहीं कर रही हैं बाबा। वो घर में ही बाबा की सी.डी छुपके सुनती हैं , उनके हस्बैंड लाइक नहीं करते। लेकिन वो उनकी लगन बहुत है, बाबा को याद करती हैं और सेवा भी भेजी है उन्होंने तो उसको एक्सेप्ट करना चाहिए?
बाबाः अरे कम से कम मोहल्ले-पड़ोस में तो दो आत्माओं का सुनाय सकती हैं?
जिज्ञासुः हाँ, वैसे वो आपस में (क्लास) करती हैं...
बाबाः आपस में सुनाकरके दो आत्माओं, चार आत्माओं का संगठन तो बैठकरके कर सकती हैं एक जगह?
जिज्ञासुः हाँ, वो करती हैं।
बाबाः हाँ। उसकी डायरी बना लें। उस डायरी में रोज़ साईन करें। प्रूफ हो जाएगा कि हाँ भई रोज़ क्लास करती हैं।
जिज्ञासुः अभी वर्तमान में उन्होंने सेवा भेजी है बाबा वो...
बाबाः वो ही तो कहा - प्रूफ होना चाहिए। धन की सेवा ही सब कुछ बड़ी होती है या ज्ञान की सेवा भी बड़ी है? (जिज्ञासु – ज्ञान की।) हाँ तो ज्ञान की सेवा भी करने वाला होना चाहिए ना। बांधेली माताओं को भी छूट है। जो साल, छह महीने से भट्ठी करने के बाद लगातार क्लास कर रही हैं, वे ईश्वरीय सेवा में धन अर्पण कर सकती हैं।
जिज्ञासुः शुरू में तो बाबा रहा उनका लेकिन अभी पिछले कुछ समय से वो नहीं कर पा रही हैं।
बाबाः कोई बात नहीं। माताओं की मनसा तो अच्छी होती है।
जिज्ञासुः मनसा तो अच्छी है बाबा।
बाबाः मनसा सेवा, अव्यभिचारी सेवा करें। ओम् शांति।

Disc.CD No.632, dated 20.09.08 at Sehore (M.P.)
Part-5


Time: 49.53-50.42
Student: Baba, if the Gita paathshaalaa is far away.

Baba: At least raise your hand. Yes.
Student: If we listen to the Murli at home every day, is it not counted as a class? Is it not counted as class? For example we listen to the Murli at home daily at 5 AM. We are unable to attend the class at the Gita paathshaalaa. (Baba: Yes.) Will it not be considered as the daily class?
Baba: You don’t go. Yes. You don't attend the class [at Gita paathshaalaa] every day. You read the Murli at home. So?
Student: Will it not be considered to be daily class?
Baba: Arey, if it happens by chance, if you read [the Murli] at home, it is a different thing. If you do like this every day, it means that there is no importance of the [Brahmin] family at all.
Student: Baba, it is far away. We are unable to go there daily.
Baba: OK, then go once in a week.
Student: We go once in a week.
Baba: Yes, then go.

Time: 50.48-53.12
Student: Baba, [the inclination of] the axis of the earth will change in the end of [the year] 2012.

Baba: What will happen in the end of 2012?
Student: Transformation will take place. [The inclination of] the axis will change.
Baba: The nature will change?
Student: I mean to say her intellect which is towards the demons [at present] will incline towards the deities.
Baba: Whose?
Student: It has been said in a Vani (Murli).
Baba: Whose intellect will incline towards the deities?
Student: Jagadamba.
Baba: There will be some soul like this who commences [the process of] transformation. Arey, will there be [someone] or not? It is the soul of Brahma himself. Yes.
Student: It was told that in the end of [two thousand] twelve…
Baba: Who said?
Student: It was mentioned in a discussion.
Baba: If it was mentioned in a discussion then who said it? Is the topic about 2012 mentioned by the worldly people or is it a topic of Murli? (Student: Of Murli.) Is it a topic of Murli?
Student: No. the change in [the inclination of] the axis, the change of nature.
Baba: Yes, it can be possible that the calculation made by the people of the world, that the transformation will take place in 2012, the world will transform, [the inclination of] the axis of the earth will change. So, who is the Mother Earth? The entire earth will not change. Will the soul change first or will the earth made up of the five elements change [first]? The soul will change. So, which soul plays the part of the earth? (Student: Jagadamba.) It is Jagadamba. So, her mentality will change. This can be possible. But it is not that the entire world or the entire earth will change. (Student said something.) It will definitely happen. If their calculation is correct from their point of view then this is the only transformation that is possible. It is not that the five physical elements will change or that the axis of the earth will change physically.

Time: 53.17-54.26
Student: Stripping of Draupadi (chiirharan) has been shown in the [epic] Mahabharata.
(Baba: Yes.) What does it mean? So many big mahaarathis (great warriors) were sitting there.
Baba: It just means that you all are Draupadis. When the final exams take place in the life of all the Draupadis, they will face such tests that neither the members of family nor those from the outside [world] will become helpful. Nobody from among the religious gurus, acharya (teachers), pandits (learned ones), pujaaris (priests), maulvis (teachers) will become helpful. Whom did Draupadi call at last? (Someone said: God.) Only God will become helpful and save the honour of those who are absorbed [in the remembrance] of God. It is not about just one Draupadi. You all are Draupadis.
What happened? Has everyone started worrying?


Time: 54.33-56.22
Student: Baba, in the path of Bhakti, in the worship of…, among the pulses used for the worship, why is the pigeon pea pulse thrown away?

Baba: The pigeon pea pulse is not used? (Student: Yes.) You said a new thing. All the other pulses are used? The pulse of pigeon pea is not used? Acchaa. Is the pulse of pigeon pea hotter in nature? Yes. As such, the naturopathy doctors say that you shouldn't eat pulses at all. (Someone said: Baba has said: pulses, roti, potatoes and rice…) Pulses, rice, potatoes. Pulses, rice and potatoes. Rice has a cold nature and it is cold to such an extent that it will neutralize the hot nature of potatoes and pulses. And it can be cooked quickly. You will not have to spend more time to make purushaarth [in cooking it]. It will also be easy to digest. But this was said in general. [Otherwise,] the diabetes patients will also start eating it.

Time: 56.23-57.36
Student: Baba, what is the unlimited meaning of the big pilgrimage centers that have been built?

Baba: What have been built?
Student: The big pilgrimage centers that have been built. (Baba: Yes.) What is its unlimited meaning?
Baba: The place that brings you across. What? The place that brings you across. Which is the biggest pilgrimage center of the world? Mount Abu. Then the Gita paathshaalaas, the mini madhubans… those who will not be able to reach there (Mount Abu); if the knowledge has not sat in their intellect to that extent, so they can at least reach the mini madhuban, they can at least reach the Gita paathshaalaa. So, that itself will be the pilgrimage center for them. [Tiirth means] the place which brings the intellect to a destination. Tiir means shore. When you go to the Gita paathshaalaa, is the intellect drawn from everywhere and focused on the one Supreme Soul or not? It is focused. So, the place where the intellect is set becomes the pilgrimage center for that soul.

Time: 57.38-59.31
Student: Baba, by churning the ocean of thoughts gems [of knowledge] emerge as well as we have some experiences. Should we share them [with others] after verifying them with the Father or can we directly share them [with others]?

Baba: It is good to get the gems [of knowledge] that emerge from the churning of ocean of thoughts verified. It is certainly not bad. It should not happen that there is some fault in the calculation you have made by churning the ocean of thoughts. And you start performing opposite actions based on the opinion of your mind and start making others to perform [such tasks]. So, what is the harm in clearing them by sitting in front of Baba? Otherwise, there are many who start teaching Raja Yoga to the virgins and mothers. Baba says in the Murli: Only the One Father can teach Raja Yoga. So, the churning of the ocean of thoughts that took place, is it worth verifying or not? (Student: It is.) It is; but they do not get it verified; because their intention is bad. They have a secret intention within. They have the sanskaars of theft of the Islam for numerous births; so they do not get it verified. You have asked this after many days. Did you ask a good question or a bad question? It is a good question.

Time: 59.40-01.01.37
Student: Baba, there are some mothers who have undergone bhatti. But they have not been able to meet Baba since some time because of their family circumstances. But if they want to send physical service to Baba, should we take it or not?

Baba: If the mothers are regular after undergoing bhatti.
Student: Baba, they do not attend classes. They secretly listen to the CDs (classes) of Baba at home [because] their husbands don't like it. But they are very devoted. They remember Baba and have also sent service; so should it be accepted?
Baba: Arey, they can at least narrate [knowledge] to two souls in the suburb and neighborhood?
Student: Yes, in a way, they organize [classes] among themselves.
Baba: They can at least narrate to each other [in their neighbourhood] and hold a gathering of two-four souls at one place?
Student: Yes, they do that.
Baba: Yes. They should prepare a diary for it. They should sign in that diary every day. There will be a proof [showing:] yes, they attend the classes every day.
Student: Baba, they have presently sent service...
Baba: That is what was said: There should be a proof [of attending the classes]. Is just the service through wealth everything, is it a big service or is the service of [giving] knowledge also big? (Student: Of knowledge.) Yes, so they should also be the ones who do the service of knowledge, shouldn't they? Bandheli mothers (mothers in bondage) also have liberty. Those who have been attending classes continuously for a year or six months after undergoing bhatti, they can offer money in the service of God.
Student: Baba, they were [regular] in the beginning, but now, they are unable to attend [the classes] since some time.
Baba: It doesn't matter. The mind of the mothers is certainly good.
Student: Baba, their mind is good.
Baba: They can do service through the mind, an unadulterated service. Om Shanti. (Concluded)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 23 Nov 2014

वार्तालाप-633, दिनांक 21.09.08, सतना-1
भाग-1


समयः 00.08-16.55
जिज्ञासुः बाबा नाग और इच्छा.धारी होते हैं। वो कैसे होते हैं?

दूसरा जिज्ञासुः इच्छाधारी होते है नाग, नागिन।
बाबाः अरे, सर्प, नाग होते हैं, इच्छाधारी नाग होते हैं - ये मनुष्यों की बात है, जो सर्प की तरह कर्म करने वाले हैं, विषैले हैं; उनकी बात है या जानवर सर्पों की बात है? तो ऐसे ह्यूमन सर्प ब्राह्मणों की दुनिया में ही बैठे हुए हैं, जो शंकर के गले का हार बनते हैं। शंकर को सर्प लिपटे हुए दिखाए जाते हैं ना। इसलिए गायन है चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग। वो परम हंस का पार्ट है, हीरो पार्टधारी का पार्ट है जिसके वातावरण में चारों ओर सर्प ही सर्प रहते हैं। परन्तु बड़ी मस्ती में रहता है, ध्यान मुद्रा में। विष्णु को भी शेषशायी दिखाते हैं। कहाँ आराम से सोया हुआ है? सर्पों की शैया पर सोया हुआ है। नहीं तो बिस्तर में सर्प घुस जाएगा, कोई देख ले तो आधे तो प्राण निकल जाएंगे।

शास्त्रों में जो भी बातें आई हुई हैं, उनका अर्थ स्वयं परमपिता परमात्मा आकरके बताते हैं शास्त्रों का सार ब्रह्मा के द्वारा। इसलिए ब्रह्मा के मुख से जो सार स्वरूप वाणी निकलती है वो वेदवाणी कही जाती है। सबसे पुराने ते पुराने शास्त्र कौन हैं? वेद। विद माना जानकारी। जानकारी का भण्डार है परमात्मा की वाणी। परन्तु उसके अर्थ को जो विकारी मनुष्य हैं उन्होंने शास्त्र लिख-लिखकरके विकृत कर दिया। जो-जो शास्त्रकार आए वो मनुष्य ही थे या भगवान थे? देवता नहीं थे। शास्त्रों की भी ढ़ाई हज़ार साल की हिस्ट्री मिल रही है। पहले-पहले शास्त्र भी सतोप्रधान थे। दुनिया की हर चीज़ पहले सतोप्रधान होती है, फिर तमोप्रधान होती है। तो शास्त्रों में जो वैध हैं वेद वो वेदवाणी वास्तव में ब्रह्मा के मुख से सृष्टि के आदि में निकली है। और सृष्टि का आदि होता ही तब है जब सृष्टि पुरानी तमोप्रधान हो जाती है। पुराने मकान को गिराया जाता है या नए मकान को गिराता है कोई? पुराना मकान गिराया जाता है। बाग भी पुराना हो जाता है तो काट करके नया लगाया जाता है। ऐसे थोड़ेही कि सतयुग में भगवान आ गए, त्रेता में भगवान आ गए, द्वापर में भगवान आ गए, कलियुग में भगवान आ गए क्योंकि शास्त्रों में लिखा हुआ है सम्भवामि युगे-युगे। अरे, ये लिखा किसने? मनुष्य ने लिखा या भगवान ने लिखा?

कोई भी धरमपिता आता है तो बैठकरके किताब लिखता है या मुँह से डायरेक्ट बोलता है? क्या करता है? मुख से डायरेक्ट बोलता है। बाद में, वर्षों के बाद फिर उसकी बोली हुई वाणी को ग्रंथित किया जाता है ग्रंथों में। जैसे गुरु नानक ने जो कुछ बोला, तो कई वर्षों के बाद गुरु ग्रंथ साहब लिखा गया। क्राइस्ट ने जो कुछ बोला, वो वर्षों के बाद जब उनकी जेनेरेशन बहुत बढ़ गई क्रिश्चियंस की तब बाइबल बना। मोहम्मद ने जो कुछ बोला, जब मुसलमानों की संख्या लाखों की तादाद में हो गई तब कुरान बनाई गई। ऐसे ही भगवान जब आते हैं तो आकरके कोई किताब लिखते नहीं हैं। कोई शास्त्र नहीं लिखते। वो तो मुख से आकरके अपने बच्चों को समझाते हैं। बच्चे कौन? जो ब्राह्मण बच्चे बनते हैं। उनको प्यार से समझाते हैं - बच्चे, तुम एक आत्मा हो, तुम्हारी जाति मनुष्य जाति है। जैसे बीजों की जाति होती है ना। गेहूँ का बीज, बाजरे का बीज, आम का बीज। जैसा बीज होगा वैसा उसका वृक्ष दिखाई पडेगा, बनेगा। ऐसे तुम भी मनुष्य आत्मा हो। ये मनुष्य आत्मा जब गर्भ में प्रवेश होती है तो गर्भ मनुष्य जाति में ही प्रवेश करती है। मनुष्य जाति का गर्भ होता है। ऐसे नहीं कि आम का बीज बोया जाएगा तो वो पीपल बन जाएगा। सवाल ही पैदा नहीं होता। उसमें मनुष्य जाति के जन्म-जन्मान्तर के संस्कार हैं।

भगवान आवेंगे तो मनुष्य का रूप धारण करके आवेंगे या जानवरों का रूप धारण करके आवेंगे? अरे जानवरों में तो बुद्धि ही नहीं होती है ज्ञान को समझने की। भगवान सृष्टि का उद्धार ज्ञान के आधार पर करता है या कोई आधार बनता है?
(सभी ने कहा - ज्ञान।) और ज्ञान मनुष्य ही समझेगा, जिसको मन होगा वो ही मनन-चिंतन-मंथन करके ज्ञान को समझेगा। और जानवरों में तो मन-बुद्धि की ताकत होती ही नहीं। वो ज्ञान को कैसे समझेगा? तो शास्त्रों में जो लिख दिया है वो विकारी मनुष्यों ने लिखा है और शास्त्रों के हज़ारों वर्ष के बाद, सैंकड़ों वर्ष के बाद उनकी व्याख्याएं होती रही। विकारी मनुष्यों के द्वारा। सब मनुष्य जो हैं, जो भी इस सृष्टि पर हुए, देव, देवात्माओं को छोड़करके। इस द्वैतवादी युग से, द्वापरयुग से सभी मनुष्य देह अभिमानी हो गए। आत्मिक स्थिति वाले नहीं रहे। तो देह अभिमानी जो होंगे वो तो स्वार्थी होंगे। स्वार्थ के आधार पर शास्त्र लिखे गए। और इनके अर्थों की जो व्याख्या हुई है वो भी विकृत हो गई।

भगवान बाप को क्यों आना पड़ता है? इसीलिए आना पड़ता है कि जो ज्ञान जल है, उसकी गति है। जो ऊपर से आएगा वो कहाँ जाएगा? नीचे जाएगा। ऊँच ते ऊँच है भगवान बाप। सृष्टि के आदि में जो ज्ञान देता है वो नीचे उतरते-4 गंदी नदियाँ बन जाता है। कितने शहरों का कचड़ा पड़ता है। और वो कचड़े से प्रदूषण फैलेगा या वातावरण शुद्ध होगा? प्रदूषण फैलता रहता है। ये इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट, जितने भी धर्मपिताएं आए, ये पहले-पहले जो ज्ञान सुनाते हैं उसमें भी कुछ सात्विकता होती है। बाद में इनके जो फालोअर्स हैं, इनकी सुनाई हुई बातों का अर्थ का अनर्थ करके धर्म को अधर्म में कनवर्ट कर देते हैं। विधर्मी ही बन जाते हैं। रूस के क्रिश्चियंस की तरह अधर्मी बन जाते हैं। हैं रशियंस भी क्रिश्चियंस परन्तु वो बाइबल को और गिरिजाघर को मानते ही नहीं।

तो जैसे दुनिया की हर चीज़ सतोप्रधान से तमोप्रधान बनती है भगवान का सुनाया हुआ ज्ञान भी जब भगवान इस सृष्टि पर प्रैक्टिकल में तीन मूर्तियों में प्रत्यक्ष होता है तो सात्विक होता है। बाद में आत्माओं की बैटरी शरीर के सुख भोगते-भोगते डिस्चार्ज होती रहती है। सतयुग में 16 कला संपूर्ण बैटरी थी आत्मा रूपी । त्रेता में 14 कला संपूर्ण रह जाती है। द्वापर में 8 कला, कलियुग में आते-आते-आते अंत में कलाहीन आत्माएं हो गई। एक भी आत्मा नहीं है जो मनसा वाचा कर्मणा सदैव किसी को सुख देने वाली हो। कोई हो यहाँ बैठा हो तो बोले। सब तमोप्रधान बन जाते हैं। सब आत्मा रूपी बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है। ताकत ही नहीं रहती। सुख भोगने की भी ताकत नहीं रहती। कहाँ देवताएं 24 घंटे का सुख भोगते थे। आनन्द स्वरूप कहा जाता है। भगवान को तो टाइटिल ही देते हैं सत-चित-आनन्द स्वरूप। सदैव आनन्द में रहने वाला। विष्णु। मंगलम् भगवान विष्णु। सदैव मंगलकारी है। आज कोई आत्मा ये अनुभव करती है कि मैं सदैव मनसा से, मनसा के संकल्पों से, वाचा के महावाक्यों से, कर्मेन्द्रियों के कर्मों से सदैव सुख स्वरूप रहता हूँ और दूसरों को सुख ही सुख देता हूँ। एक भी आत्मा इस मनुष्य सृष्टि पर नहीं है। जब मनुष्य ही नहीं है, जो मनुष्य मन-बुद्धि वाला प्राणी है, सबसे जास्ती इन्द्रियां मनुष्य में होती है। जितनी जास्ती इन्द्रियाँ हैं उतना ही ज्यादा सुख और दुख भोग सकता है। जानवरों में उतनी इन्द्रियाँ नहीं होती हैं। तो जानवर न उतना सुख भोगते हैं और न दुःख भोगते हैं।

दुनिया में सागर में, नदियों में कितनी मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। आज दुनिया में खाने के लिए अनाज नहीं पैदा करते हैं लोग। कारखानों वाली दुनिया बन गई है। कारखानों में माल पैदा हो रहा है, पैसा कमाया जा रहा है। खाने-पीने की वस्तुएं तो अब बनाई ही नहीं जा रही है। दुनिया के स्टॉक में अन्न बहुत थोड़ा रह गया है। इसलिए महंगाई बढ़ती जा रही है। तो दुनिया के लोग क्या खाते हैं? ज्यादा पेट किस चीज़ से भरते हैं? मछलियों से। मछलियों में इन्द्रियाँ बहुत कम होती हैं कि मनुष्यों की तरह ज्यादा इन्द्रियाँ होती हैं? इसलिए उनको जब काटते हैं तो उनको दुःख भी कम होता है। और मनुष्य को जब काटा, उंगली भी काटी जाएगी तो? कितना दुःख अनुभव होता है। इस मनुष्य सृष्टि पे मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर सबसे जास्ती सुख भोगता है। देव योनि में सतयुग त्रेता में राम-कृष्ण के राज्य में देवात्माओं ने बहुत सुख भोगा। मनुष्य ही देवता बनते हैं अच्छे कर्म करने से। अच्छे कर्म तो भगवान ही आकरके सिखाता है। गीता में भी लिखा हुआ है - मैं कर्म, अकर्म, विकर्म की गति समझाता हूँ। कैसे कर्म करना चाहिए, कैसे कर्म नहीं करना चाहिए। अरे सांप जैसे कर्म करोगे तो क्या बनोगे? सांप ही बनोगे ना। तो सांप नहीं बनते हैं। क्या? सांप जैसे मनुष्य बन जाते हैं।


Disc.CD No.633, dated 21.09.08, Satna-1
Part-1


Time: 00.08-16.55
Student: Baba, there are icchaadhaari snakes. How are they so?

Another student: The snakes are icchaadhaari.
Baba: Arey, there are snakes, cobras, icchaadhaari snakes; is it about the human beings who are poisonous, who perform poisonous acts like snakes or is it about the animal snakes? So, such human snakes are sitting in this very world of Brahmins who become garlands around the neck of Shankar. Snakes are shown to be clung to Shankar, aren’t they? This is why it is famous: candan vish vyaapat nahi lipte rahat bhujang (although snakes remain clung to the sandalwood tree, it does not become poisonous). It is the part of the Supreme Soul (param hans), it is the part of the hero actor; snakes and only snakes live around him. But he remains in his own intoxication in a meditative posture (dhyaan mudra). Vishnu is also shown to be sleeping on a snake bed (sheshshaiyaa). Where is he sleeping comfortably? He is sleeping on a bed of snakes. Otherwise, if a snake creeps in the bed and someone sees it, then he will be half dead on seeing it.

The Supreme Father Supreme Soul Himself comes and narrates the meanings of all the topics mentioned in the scriptures; He narrates the essence of scriptures through Brahma. This is why the Vani (Murli) that that is narrated through the mouth of Brahma in the form of essence is called the Ved Vani. Which are the oldest scriptures? Ved. Vid means information. The Vani of the Supreme Soul is a storehouse of information. But the vicious human beings have deformed its meanings by writing scriptures. All the writers of scriptures (shaastrakaar) who came, were they human beings or God? They were certainly not deities. The history of the scriptures for 2500 years is also available. In the beginning, the scriptures were also satopradhaan . Everything in the world is initially satopradhaan then, it becomes tamopradhaan . So, the Vedas among the scriptures…, that Ved Vani actually came out through the mouth of Brahma in the beginning of the world. And the [new] world begins only when this world becomes old and tamopradhaan. Is an old house demolished or does anyone demolish a new house? An old house is demolished. When a garden also becomes old, [the plants] are cut and new [plants] are planted in it. It is not that God comes in the Golden Age, in the Silver Age, in the Copper Age and in the Iron Age [just] because it has been written in the scriptures: sambhavaami yuge yuge (God comes in every age). Arey, who wrote this? Did the human beings write this or did God write this?

Whichever religious Father comes, does he sit and write a book or does he speak directly through his mouth? What does he do? He speaks directly through the mouth. Later on, after many years, the words spoken by him are written in books (granth). For example, whatever Guru Nanak spoke, it was written after many years later [in the form of] Guru Granth Sahib . Whatever Christ spoke, was made into Bible when the generation (population) of the Christians increased a lot after many years. Whatever Mohammad spoke, was made into Koran when the number of Muslims increased to lakhs (hundred thousands). Similarly, when God comes, He does not write any book after coming. He does not write any scripture. In fact, He comes and explains His children through the mouth. Who are the children? Those who become Brahmins, the children. He explains to them lovingly: Children, you are a soul; your species is the species of human beings. For example, there are categories of seeds, aren’t there? [There are] the seeds of wheat, seeds of millet (baajraa), seeds of mango; as is the seed, so shall be the tree that appears [out of it], that grows from it. Similarly, you are human souls. When this human soul enters the womb, it enters the foetus of a human species itself. It is the foetus of a human species. It is not that if you sow a mango seed, it will grow into a fig tree (piipal). This question does not arise at all. It (the human soul) contains the sanskaars of human species for many births.

When God comes, will He take on the form of a human being or will He take on the form of animals when He comes? Arey, the animals do not have the intelligence to understand the knowledge at all. Does God bring about the true liberation of the world through knowledge or through something else?
(Everyone said: [Through] knowledge.) And it is only a human being who will understand the knowledge. Only the one who has mind will understand the knowledge after thinking and churning. And the animals do not have the power of the mind and intellect at all. How will they understand the knowledge? So, whatever is written in the scriptures, it has been written by the vicious human beings and thousands, hundreds of years after the scriptures were written, their interpretations were made by vicious human beings. All the human beings who existed in this world except the deities, the deity souls, became body conscious from the dualistic age, from the Copper Age. They no more remained the ones with a soul conscious stage. So, those who are body conscious will certainly be selfish. The scriptures were written out of selfishness and the explanations of their meanings were also deformed.

Why does God the Father have to come? He has to come because of this very reason that… the water of knowledge has a direction [of flowing]. When it flows from above, where will it go? It will go downwards. God the Father is the Highest on high. The knowledge that He gives in the beginning of the world falls (degrades) continuously and changes into dirty rivers. The garbage of so many cities is added to it. And will that garbage spread pollution or will the atmosphere become pure? The pollution keeps spreading. All the religious fathers like Abraham, Buddha, Christ who came, there is trueness (saatviktaa) to some extent even in the knowledge that they narrate in the beginning. Later on, their followers misinterpret the meanings of their words and convert dharma (religion) into adharma (irreligion). They almost become vidharmis. They become irreligious like the Christians of Russia. Even the Russians are Christians, but they do not believe the Bible and Church at all.

So, just as everything in the world changes from satopradhaan to tamopradhaan, the knowledge narrated by God is also true (saatvik) when He is revealed in this world through the three personalities in practice. Later on, the battery of the souls continues to discharge while enjoying the pleasures of the body. The battery in the form of soul was complete with 16 celestial degrees in the Golden Age. It remains complete with 14 celestial degrees in the Silver Age. It has eight celestial degrees in the Copper Age [and] by the arrival of the Iron Age, the souls have become devoid of celestial degrees in the end. There is not even a single soul who always gives happiness to others through the thoughts, words and actions. If there is any such person sitting here, he may speak up. Everyone becomes tamopradhaan. All the batteries in the form of souls are discharged. There is no power left [in them] at all. It does not have the power to enjoy happiness either. What a difference there is between the deities who used to enjoy happiness for 24 hours [and the human beings today]! They are called anand swaruup (embodiment of bliss). God is indeed given the title ‘Sat-chit-anand swaroop’ (the embodiment of truth, life and bliss). He is Vishnu, the one who always remains happy. [It is said:] Mangalam Bhagwan Vishnu. He is always auspicious. Does any soul experience that it is always an embodiment of bliss through the mind, through the thoughts of the mind, through the words of speech, through the actions of the karmendriyaan and give happiness and only happiness to others? There is not a single soul [like this] in the human world. When there aren’t any human beings like this… human being is a creature with mind and intellect. A human being has the maximum number of indriyaan in him. The more the number of indriyaan someone has, he can experience happiness and sorrow to that extent. Animals do not have these many indriyaan. So, animals neither experience much happiness nor much sorrow.

In the world, so many fishes are caught from the ocean, from the rivers. Today, people do not produce grains to eat. It has become a world of factories. Materials are being manufactured in the factories [and] money is earned through it. Eatables and drinks are not at all being produced. The stock of grains left in the world is very less. This is why the prices are rising higher. So, what do the people in the world eat? What do they fill their stomach with more? By [eating] fishes. The number of indriyaan in fishes is very less; or do they have more indriyaan like the human beings have? This is why when they (the fishes) are cut, they experience little sorrow. But what happens when even a finger of a human being is cut? He experiences so much sorrow. Human being is the only living creature in the human world who experiences happiness the most on this world stage, in the divine birth. The deity souls enjoyed a lot of happiness in the Golden and Silver Ages, in the kingdom of Ram and Krishna. The human beings themselves become deities by performing good actions. God alone teaches good actions when He comes. It has been written in Gita as well: I explain the dynamics of karma (actions), akarma (the actions which don’t have any result) and vikarma (wrong actions). [I explain:] what kind of actions should be performed and what kind of actions should not be performed. Arey, if you perform actions like snake, what will you become? You will certainly become snakes, won’t you? So, they do not turn into snakes [in reality]. What? They become snake like human beings.
... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 24 Nov 2014

वार्तालाप-633, दिनांक 21.09.08, सतना-1
भाग-2


समयः 17.00-29.34
जिज्ञासुः बाबा, एक फोटो में हमने देखा है कि जगदम्बा अम्माा जो है वो मुण्डों की गले में माला पहने हुए हैं।
(बाबाः हाँ, जी।) और शंकरजी उनकी गोद में पड़े हुए हैं। ये कैसी बात है बाबा?
बाबाः वास्तव में परमपिता परमात्मा शिव जब इस सृष्टि पर आते हैं, तो वो पहले-पहले जो वाक्य निकलता है वो ब्रह्मा के द्वारा निकलता है या शंकर के द्वारा निकलता है या विष्णु के द्वारा प्रैक्टिकल कर्म होता है? (जिज्ञासु - ब्रह्मा के द्वारा।) ब्रह्मा द्वारा। और ब्रह्माकुमारियाँ तो दादा लेखराज को ब्रह्मा समझती हैं। लेकिन दादा लेखराज तो ब्रह्मा नहीं है। वो तो टाइटलधारी ब्रह्मा हुए। असली ब्रह्मा तो कोई और था। जिसके मुख से ज्ञान की बात सुनकर के पहला ब्राह्मण तैयार हुआ दुनिया का। इसलिए कहा जाता है जो पहला ब्राह्मण सो पहला देवता। जो पहला देवता सो पहला क्षत्रीय। जो पहला क्षत्रीय सो पहला वैश्य। जो पहला वैश्य सो पहला शूद्र। मैं शूद्रों को आकरके ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण बनाता हूँ।

तो पहला ब्राह्मण किसके द्वारा पैदा हुआ? आदि ब्रह्मा स्त्री चोला था या पुरुष चोला था? स्त्री चोला था। उस स्त्री चोले में भगवान बाप शिव ज्योति बिन्दु ने प्रवेश करके जो बात सुनाई वो बात ज्ञान की बात थी। भले सुनाने वाली उस मूर्ति ने स्वयं उसे समझा या न समझा, वो बड़ी माँ का पार्ट हो गया। बड़ी माँ, कौन है? ये प्रकृति ही बड़ी माँ है। प्रकष्ठ रूपेण कृति। कृति माने रचना। जो रचना भगवान की प्रकष्ठ कृति है ऐसी विशेष रचना है जिसकी रचना में भगवान बाप ने ऐडी से लेकरके चोटी तक की सारी ताकत लगा दी। इतना संग का रंग, इतना मिलन-मेला भगवान के साथ और कोई भी मनुष्यात्मा ने नहीं मना पाया। इसलिए जगदम्बा का मेला दुनिया में सबसे बड़ा मेला लगता है। क्यों लगता है? क्योंकि जो मिलन मेला है, जितना जगदम्बा ने मनाया होगा उनके साथ उतना मिलन मेला और किसी ने सब संबंधों से नहीं मना पाया। और, और वो ही जगदम्बा... ब्राह्मण है ना। जगदम्बा भगवान की बच्ची भी तो बनती है। जगदम्बा बच्ची भी तो बनती है ना। तो जब बच्ची बनती है, रचना बनती है, तो पत्नी के रूप में होती है पहली रचना या बच्चों-बच्चियों के रूप में होती है?
(जिज्ञासु – पत्नी के रूप में।) हाँ। पहली रचना जो होती है पत्नी होती है। इसलिए प्रकृतिपति कहा जाता है।

तो जगदम्बा प्रकृति का रूप है। धरणी का रूप है। प्रकृति के 5 तत्वों में धरणी ही मुख्य है। वो धरणी में पांचों ही तत्व समाए हुए हैं। इसलिए जब वो विकराल रूप धारण करती है। कौन? जगदम्बा महाकाली बनती है। तो भगवान शिव की जो दूसरी मूर्ति शंकर है उसके विनाश का कार्य को संपन्न कर देती है। वो महाकाल की महाकाली है। वो किसका विनाश करती होगी? असुरों का विनाश करती होगी, अधर्मियों का विनाश करती होगी, विधर्मियों का विनाश करती होगी या श्रेष्ठ आत्माओं का विनाश करेगी?
(सभी ने कुछ कहा।) जैसे गीता में अक्षर आए हैं विनाशाय य दुष्कृताम्। दुष्ट कर्म करने वाले हैं, अधर्मी हैं, उनका विनाश करता हूँ। किसके द्वारा? शंकर द्वारा विनाश गाया हुआ है। लेकिन शंकर नहीं करता। शंकर द्वारा का मतलब ये है शंकर ऐसी निराकारी स्टेज में एक संकल्प में टिकने की ताकत रखता है कि शिव शंकर भोलेनाथ की जो शक्तियाँ हैं वो शक्तियाँ ऐसा पार्ट बजाती हैं कि असुरों का संहार हो जाता है। सृष्टि का विनाश प्यूरिटी से होता है या इम्प्योरिटी से होता है? अपवित्रता से होता है विनाश।

ये कलियुगी दुनिया में इम्प्यूरिटी इतनी बढ़ जाती है कि सारी सृष्टि का विनाश निश्चित हो जाता है । अति का अंत हो जाता है। वो अति ताकतवर आत्मा करेगी या साधारण आत्मा करेगी? तो ये महाकाल, जैसे महाकाल का पार्ट है विषपायी। विषय वासनाओं का क्या करता है? पान करता है। मनुष्य मात्र में जितनी भी विषय वासना, विकार भरे हुए हैं, उनका बरबस दान ले लेता है। स्वेच्छा से दान करें तो भी ठीक, और स्वेच्छा से दान न करें तो भी विकारियों की सृष्टि इस दुनिया में रहेगी नहीं। विकारी स्वभाव संस्कार सब खलास होने वाले हैं। ये विषय विकार काम विकार को कहा जाता है। एक ही देवता है जिसके लिए गायन हुआ है - काम दहन। काम विकार का क्या कर दिया? भस्म कर दिया। बाकी काम देवता, ऐसा मनुष्य नहीं है। क्या? अपने अंदर जो कामुक वृत्तियाँ हैं मनुष्य के अंदर वो राजयोग के द्वारा उन कामुक वृत्तियों को भस्म कर दिया। और गाया हुआ है होइहे कामो अनंग। जो नई सृष्टि होगी उसमें वो काम वासना वाली मार करने वाली हिंसक इन्द्रियाँ काम नहीं करेंगी। वो भ्रष्ट इन्द्रियों का कार्य क्षेत्र है जिनसे आज की सृष्टि पैदा हो रही है बिच्छु-टिण्डनों की सृष्टि। वो सृष्टि नहीं होगी पैदा। क्यों? क्योंकि वहाँ काम की मार करने वाली इन्द्रियाँ ही नहीं होंगी सतयुग और त्रेता में जहाँ हे कृष्ण नारायण का राज्य होता है, राम का राज्य होता है।

वहाँ श्रेष्ठ इन्द्रियों से संतान होती है। श्रेष्ठ इन्द्रियों में भी सबसे श्रेष्ठ इन्द्रियाँ कौनसी हैं?
(सभी ने कहा - आँख।) नेत्र। जैसे व्यास को दिखाया गया है। व्यास ने जो सृष्टि पैदा की कुरुवंश में वो कौनसी सृष्टि थी? भ्रष्ट इन्द्रियों की सृष्टि थी क्या? (किसी ने कुछ कहा) हाँ। आँख के प्यार से। आँख के स्नेह से जो दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है। प्यार से कोई को भी मारा जा सकता है। द्वेष से कोई मरे न मरे। तो ये आँखें इन्द्रियों में सबसे श्रेष्ठ इन्द्रियाँ हैं। दो प्रकार की इन्द्रियाँ होती हैं। एक कर्मेन्द्रियाँ और दूसरी ज्ञानेन्द्रियाँ। कौनसी श्रेष्ठ हैं? ज्ञानेन्द्रियाँ श्रेष्ठ हैं। और उन ज्ञान इन्द्रियों की जो पैदाइश होती है उस पैदाइश की भी मान्यता आज भी भारत में चली आ रही है। हमारे भारत का जो श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ पक्षी है राष्ट्रीय पक्षी, कौन माना जाता है? (सभी ने कहा - मोर।) क्यों? क्योंकि उसकी देह अभिमान की पूँछ, मार करने वाला देहअभिमान नहीं होता है। इतनी श्रेष्ठ पूँछ है कि वो ऐसा ज्ञान का डांस करती है जो सबको देखने में तबीयत प्रसन्न हो जाती है। ये मोर ही ऐसा एक प्राणी है उदाहरण देने के लिए कि देवताओं की सृष्टि श्रेष्ठ इन्द्रियों की, श्रेष्ठाचारी देवताएं थे। देवताएं भ्रष्टाचारी नहीं होते। वो श्रेष्ठाचारी देवताएं श्रेष्ठ इन्द्रियों के, मुख के प्यार से संतान पैदा होती थी। भ्रष्ट इन्द्रियों से संतान पैदा नहीं होती थी उस समय। इसलिए जिसका आदि अच्छा होगा उसका अंत भी अच्छा होगा।

आज की संतान की पैदाइश में पुरुष को भी कमजोरी आ जाती है। स्त्री को भी दुःख होता है। पैदाइश की शुरुआत में ही जब दुःख होता है तो मनुष्य जब मरेगा तो दुःख पैदा नहीं होगा? कितने घाबड़े आते हैं। हर मनुष्य आज की मौत से डरता है। देवताओं की ऐसी मौत नहीं होती है। उनको अमर कहा जाता है। ऐसा नहीं कि वो शरीर छोड़ते नहीं हैं। लेकिन इच्छा मृत्यु होती है। जब चाहें शरीर को छोड़ें और जब तक न चाहें शरीर को न छोड़ें। लंबी आयु वाले हों।


Disc.CD No.633, dated 21.09.08, Satna-1
Part-2


Time: 17.00-29.34
Student: Baba, I saw a photo in which mother Jagdamba was wearing a garland of skulls around her neck.
(Baba: Yes.) And Shankarji was on her lap. Baba, what is this?
Baba: Actually, when the Supreme Father Supreme Soul Shiva comes in this world, does the first sentence comes out through [the mouth of] Brahma or through Shankar or are actions performed by Vishnu in practice? (Student: Through Brahma.) Through Brahma; and the Brahmakumaris consider Dada Lekhraj to be Brahma. But Dada Lekhraj is not Brahma [in reality]. He is the titleholder Brahma. The real Brahma was someone else. It was after listening to knowledge through his mouth that the first Brahmin of the world became ready. This is why it is said that the first Brahmin becomes the first deity. The first deity becomes the first Kshatriya . The first Kshatriya becomes the first Vaishya . The first Vaishya becomes the first Shudra . I come and make the Shudras into Brahmins through Brahma.

So, through whom was the first Brahmin born? Was the first Brahma in a female body or in a male body? He was in a female body. The topic that God the Father Shiva, the Point of light narrated after entering that female body was the topic of knowledge. It doesn’t matter whether the personality who narrated it herself understood it or not, she played the part of the senior mother. Who is the senior mother? This nature (prakriti) itself is the senior mother. [She is] the excellent form of creation. Kriti means creation. She is the excellent creation of God. She is such a special creation that God the Father invested His entire power from the head to the heel to create her. No human soul has been able to enjoy the colour of the company, to have meeting (milan melaa) with God to that extent. This is why Jagdamba's fair is the biggest fair that is organized in the world. Why? It is because nobody has been able to have a meeting with all the relationships to the extent Jagdamba had it. And the same Jagdamba… she is a Brahmin, is not she? Jagdamba becomes the daughter of God as well. Jagdamba also becomes the daughter, doesn’t she? So, when she becomes the daughter, a creation… is the first creation in the form of a wife or in the form of sons and daughters?
(Student: In the form of wife.) Yes. The first creation is the wife. This is why He is called Prakritipati (Husband of nature).

So, Jagdamba is the form of prakriti (nature). She is the form of the earth (dharni). Among the five elements of nature, the earth itself is the main element. All the five elements are contained in the earth. This is why when she takes on a ferocious form; who? [When] Jagdamba becomes Mahakali , she accomplishes the task of Shankar, the second personality of God Shiva [i.e.] the task of destruction. She is the Mahakali of Mahakaal . So whom will she destroy? Will she destroy the demons, will she destroy the adharmis (irreligious people), will she destroy the vidharmis or will she destroy the elevated souls?
(Students said something.) For example, these words have been mentioned in the Gita: vinaashaay Copper Age dushkritaam [meaning] I destroy those who perform evil actions, those who are irreligious. Through whom? Destruction through Shankar is famous. But Shankar does not do it [in reality]. ‘Through Shankar’ means Shankar has the power to become constant in incorporeal stage, [to become constant] in one thought that the shaktis (consorts) of Shiva Shankar Bholenath play such a part that the demons are destroyed. Does the destruction of the world take place through purity or through impurity? Destruction takes place through impurity.

Impurity increases to such an extent in the Iron Age world that the destruction of the entire world becomes certain. The extremity comes to an end. Will a powerful soul bring extremity or will an ordinary soul [bring extremity]? So, this Mahakaal… for example the part of Mahaakaal is to drink poison; what does he do with the vices? He drinks them. He forcibly takes the donation of all the vices and desires filled in the every human being. If they donate them voluntarily, it is good and if they do not donate them voluntarily even then the world of vicious people will not exist. All the vicious natures and sanskaars are going to perish. Lust is called vishay-vikaar. There is only one deity for whom it is famous that he burnt lust. What did he do to lust? He burnt it to ashes. As for the rest, there is no human being called the deity of lust (kaam devta). What? He (Shankar) burnt the lustful instincts within himself, within a human being into ashes through Raja Yoga. And it is sung: hoihe kaam anang (lust has become bodiless). In the new world, the violent indriya that provokes lust will not work. It is through the actions of the unrighteous indriya that today’s world, a world of scorpions and spiders is being created. That creation will not be created. Why? It is because the indriya that provokes lust will not at all exist there, in the Golden and the Silver Ages, where there is a kingdom of ‘Hey Krishna Narayan’, [where there is] the kingdom of Ram.

Children are born through the righteous indriyaan there. Which are the most righteous indriya even among all the righteous indriyaan?
(Everyone said: Eyes.) Eyes. For example, Vyas has been depicted. What kind of creation did Vyas create in the Kuru clan (kuruvansh)? Was it the creation [created] through the unrighteous indriya? (Someone said something.) Yes. [It was the world created] through the love of the eyes, through the affection of the eyes which is the biggest power in the world. Anyone can be killed through love. Someone may or may not die through hatred. So, these eyes are the most righteous indriyaan among all the indriyaan. There are two kinds of indriyaan. One is the karmendriyaan and the other is the gyaanendriyaan (the sense organs). Which are the righteous ones? The gyaanendriyaan are righteous. And as regards the creation created through the gyaanendriyaan, it is accepted in India even now. Which bird is considered to be the most righteous bird, the national bird of our India? (Everyone said: Peacock.) Why? It is because its tail of body consciousness… it does not have the body consciousness that hurts. It is such a righteous tail that everyone feels happy looking at the dance of knowledge performed [with it]. This peacock is the only living creature that can be mentioned as an example [to say that] the world of the deities was [a world created through] the righteous indriyaan; the deities were righteous. The deities are not unrighteous. Those righteous deities used to give birth to children through the righteous indriyaan, through the love of mouth. Children were not born through the unrighteous indriyaan at that time. This is why something that has a good beginning will also have a good ending.

Today, in the process of giving birth to a child, the man also feels weak and the woman experiences sorrow as well. When sorrow is experienced in the very beginning of the birth, will that human being not experience sorrow when he dies? He gasps so much! Every human being fears death today. Deities do not die this way. They are called immortal (amar). It is not that they do not leave their bodies but they die according to their wish. They can leave their bodies whenever they want and they remain alive as long as they wish. They have a longer lifespan.
... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 25 Nov 2014

वार्तालाप-633, दिनांक 21.09.08, सतना-1
भाग-3


समयः 29.39-39.05
जिज्ञासुः बाबा, महाविनाश के बाद सतयुग आएगा। ठीक है?

बाबाः महाविनाश जब होगा... जो साधारण विनाश है वो तो हमेशा होता ही रहता है। कभी यहाँ भूकम्प हुआ, कभी कहाँ भूकम्प हुआ। कभी यहाँ छोटा सा एटम बम फूट गया, कभी वहाँ फूट गया। कभी एक शहर नेस्तनाबूद हो गया, हीरोशिमा, नागासाकी, कभी वहाँ कुछ हो गया। ये तो होता रहता है। लेकिन महाविनाश, महामृत्यु ये टाइम जब आता है तब क्या होता है? हाँ, प्रश्न। पूरा नहीं हुआ आपका?
जिज्ञासु: धरती जलमग्न हो जाती है। आत्माकयें थोड़ी सी बचती है...
बाबा: सृष्टि जो है, जब विनाश होता है तो एटमिक विनाश के कारण भूकम्प आते हैं और भूकम्पों की गर्मी और एटमिक गर्मी के कारण जो नार्थ पोल है पृथ्वी का, उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव, जहाँ बर्फ के मीलों ऊँचे पहाड़ हैं, इतनी गर्मी के वायुमण्डल में वो पहाड़ फट जाते हैं, क्षीर-क्षीर होने लगते हैं। और वो बड़े-बड़े हिमखण्ड समुंदर में तै‍र के जाते हैं। एक गिलास पानी रखा हुआ है उसमें इतना बड़ा बर्फ का टुकड़ा डाल दो। तो पानी बाहर निकलेगा कि नहीं निकलेगा? (किसी ने कहा - निकलेगा।) ऐसे ये समंदर जोर से उछाल मारता है। और सारी पृथ्वी जगमग्न हो जाती है।

ये तो रही स्थूल विनाश की बात। लेकिन पहले हर कार्य स्थूल में होता है या सूक्ष्म में संपन्न होता है?
(सभी ने कहा – सूक्ष्म में।) पहले सूक्ष्म में संपन्न होता है। तो ब्राह्मणों की दुनिया में जो भगवान ज्ञान देते हैं, वो ज्ञान सतोप्रधान स्टेज वाला भी होता है। और वो ज्ञान ब्राह्मणों की ही मूढ़मति से तामसी स्टेज वाला भी बनता है। जैसे नदियाँ, सुखदायी भी हैं, और वो ही नदियों में जब बाढ़ आती है तो दुःखदायी हो जाती हैं। ऐसे ही ये सागर कहीं मीठा भी है और कहीं खारा भी है। ये इतनी बड़ी उछाल मारता है कि जितने भी मनुष्य सृष्टि में, खास करके ब्राह्मणों की मनुष्य सृष्टी में जो ज्ञानी आत्माएं हैं वो मनमत मिक्स करके ऐसा ज्ञान मिक्स करती हैं कि वो सारा ज्ञान जलमयी करा देता है। ऐसी जलमयी जब नदियों में होती है, बाढ़ आती है तो पानी में मिट्टी मिल जाती है या नहीं मिल जाती है? मिल जाती है। ऐसे ही ब्राह्मणों की दुनिया में वो देह अभिमान की मिट्टी मिक्स हो जाती है। और वो देह अभिमान की मिट्टी मिक्स होने के कारण सब विकारी बन पड़ते हैं। यहाँ तक कि जो अव्वल नंबर कुरी के ब्राह्मण हैं, सारी सृष्टि के बीज हैं, वो भी नंबरवार बन जाते हैं।

तो पहले ब्राह्मणों की दुनिया में विनाश होता है या बाहर की दुनिया में विनाश होता है? पहले ब्राह्मणों की दुनिया में विनाश होता है। ये विनाश होने वाला है। क्या? न बेसिक ब्राह्मणों की दुनिया बचेगी और न एडवांस ब्राह्मणों की दुनिया बचेगी। सबको संशय रूपी मृत्यु आएगी। संशय आ जावेगा। संशयात्मा विनश्यति। पद डाउन हो जावेगा। पद का विनाश होगा या आत्मा का विनाश होगा?
(सभी ने कहा - पद का।) पद का विनाश हो जावेगा। तो महाविनाश होता है। आपने स्थूल बात कही होगी कि सारी सृष्टि जलमग्न हो जाती है। हाँ, फिर? (जिज्ञासु – मुट्ठी भर आत्माायें बचती है ।) मुट्ठी भर बचेंगी। जब सारी सृष्टि जलमयी हो जाएगी तो थोड़े से बचते है। (जिज्ञासु – यहाँ के जो सुख-संपत्ति के साधन हैं वो भी सब समाप्तड हो जाते है ।) हाँ। जो योगी आत्माएं हैं वो दुनियावी साधनों के आधार पर जिन्दा रहती हैं या योग के आधार पर जिन्दा रहती हैं? (किसी ने कहा – योग के आधार पर।) उनकी योगवृत्ति इतनी गहरी हो जाती है कि श्वास जो लेते हैं, हवा, उस श्वास में ही पांचों तत्व समाए रहते हैं। आपने अनुभव किया होगा, जिन दिनों याद की अच्छी अवस्था रहती है उन दिनों भूख भी कम हो जाती है। टट्टी पेशाब भी कम हो जाती है। संकल्प भी कम हो जाते हैं। ऐसी बीजरूप स्टेज बन जाती है। अव्यक्त अवस्था बनती है।

तो जो महाविनाश की आखरी चरम सीमा होगी उस चरम सीमा में मुट्ठी भर जो आत्माएं बचेंगी सृष्टि की, वो योगबल के आधार पर उनको सुख- समृध्दि के साधनों की दरकार नहीं रहेगी। साधनों के आधार पर जो साधना की जाती है वो श्रेष्ठ साधना है या निष्कृष्ट साधना है?
(सभी ने कहा – निष्कृष्ट साधना है।) अभी हम सब कौनसी साधना कर रहे हैं? (किसी ने कहा – गाना बजाना।) साधन मिलेंगे तो अच्छा योग लगेगा। संगीत बजेगा तो याद करेंगे। लाल लाईट होगी तो अव्यक्त स्टेज बनेगी। संगठन में, ब्राह्मणों के संगठन में, माउंट आबू में जावेंगे तो अवस्था ऊँची रहेगी। नीचे की दुनिया में आ जावेंगे तो अवस्था नीचे गिर जावेगी। ये तो साधनों के आधार पर साधना हो गई। हमारी साधना ऐसी उच्च कोटि को पकड़ेगी, हमें दुनिया के सुख साधन, समृद्धि की दरकार ही नहीं रह जावेगी। हाँ, अब क्या कहते हैं? (जिज्ञासु – सतयुग में योग-साधना...) शुरु-शुरुआत में जो फाउण्डेशन संगमयुग में पड़ता है, स्वर्णिम संगमयुग का, वो इस दुनिया की कोई भी पुरानी चीज़ का आधार नहीं लेता। इन आँखों से जो कुछ भी पुरानी दुनिया देखते है - देह, देह के संबंधी और देह के भिन्न-भिन्न प्रकार के पदार्थ, वो सब खलास हो जाने वाले हैं।

तो संगमयुगी स्वर्णिम स्वर्ग, जो युग है, वो तो निराधार युग है। बाकी जो सतयुग का पहला जन्म होगा, वहाँ प्रकृति सब सुख मुहैया कराएगी। देह के हर प्रकार के सुख मुहैया कराएगी। अभी तो प्रकृति तमोप्रधान बनती जावेगी या सतोप्रधान बनेगी?
(सभी ने कहा – तमोप्रधान।) क्योंकि 500 करोड़ की जो सृष्टि है मनुष्यों की, वो जब तक विनाश को नहीं पावे तब तक जो प्रकृति का बड़ा रूप है, मूल रूप है, वो विकराल रूप धारण करता चला जावेगा। यहाँ तक कि ये बोला है कि ये शरीर रूपी जो प्रकृति है, ये शरीर के पांच तत्व सड़ते जावेंगे, और आत्मा? पावरफुल बनती जावेगी। समाधान हुआ? (जिज्ञासु ने हामी भरी।)

समयः 39.10-41.46
जिज्ञासुः बाबा, जो मुट्ठी भर आत्माएं बचेंगी, वो आत्माएं भी अपना शरीर छोड़ेंगी, कंचनकाया बनाएगी। जो आत्मा उसके अंदर होगी मन-बुद्धि से, परमधाम जाएगी...

बाबाः पहले परमधाम जाएगी। विनाश के टाइम सभी आत्माएं 500 करोड़, चाहे ज्ञान योग में चलने वाली हों, न चलने वाली हों; भगवान को नंबरवार पहचानने वाली हों, न पहचानने वाली हों, सबको अपना ये शरीर छोड़ना है। कोई स्वेच्छा से अपना शरीर छोड़ेंगे, बर्फ में शरीर सुरक्षित रहेंगे और वो बुद्धियोग से ऊपर जावेंगे। और कोई बुद्धियोग से नहीं जावेंगे। कैसे जावेंगे? शरीर, विनाश की मार से शरीर छूटेगा। हाय-हाय करके शरीर छोड़करके जावेंगे। हाँ।
जिज्ञासुः जैसे दो परमधाम बताए हैं बाबा ने, तो एक जड़ परमधाम है और दूसरा जो बनेगा परमधाम। जो योग में रहेंगी मन-बुद्धि से, वो परमधाम जो जाएंगी तो जो बना हुआ परमधाम होगा उसमें जाएंगी या जड़ वाले में जाएंगी ?
बाबाः पहले-पहले आत्मिक स्थिति में रहने वालों का संगठन तैयार होगा या 500 करोड़ मनुष्यात्माओं का परमधाम तैयार होगा? (सबने कहा - आत्मिक स्थिति वालों का।) जो आत्मिक स्थिति की पढ़ाई पढ़ रहे हैं उनकी ऐसी स्टेज बन जाएगी: मैं आत्मा, दूसरा मेरा बाप ज्योतिबिन्दु आत्मा। और कोई संकल्प नहीं। जैसे जड़वत् स्टेज बन जावेगी। जड़वत होंगे नहीं। (जिज्ञासु – उन आत्माैओं को उपर जो जड़ परमधाम होगा... ) जब इसी सृष्टि पर परमधाम बन गया तो ऊपर जाने की क्या दरकार है? उस समय तो 500 करोड़ की दुनिया भी रहेगी। और इस सृष्टि पर तुम बच्चे, वो बच्चे नहीं, ये बी.के बच्चे नहीं, तुम बच्चे परमधाम को इस सृष्टि पर उतार लेंगे। तो 500 करोड़ की दुनिया इस सृष्टि पर थोड़े ही उतार लेगी। किसके लिए बोला? तुम बच्चों के लिए।

Disc.CD No.633, dated 21.09.08, Satna-1
Part-3


Time: 29.39-39.05
Student: Baba, the Golden Age will arrive after the mega destruction (mahaavinaash).

Baba: When the mega destruction takes place… the ordinary destructions keep taking place constantly. Sometimes an earthquake occurs here; sometimes an earthquake occurs somewhere else. Sometimes a small atom bomb explodes here, sometimes it explodes there. Sometimes one city, like Hiroshima, Nagasaki is destroyed and sometimes something else happens there. This keeps happening. But what happens at the time of the mega destruction, [at the time] of great death? Yes, haven’t you completed your question?
Student: The earth submerges under water. A few souls remain…
Baba: When the destruction of the world takes place, earthquakes occur because of atomic explosions and because of the heat produced by earthquakes and the atomic heat the north pole of the earth, the northern pole and the southern pole, where there are miles high mountains of ice, those mountains break in an atmosphere of so much heat and they start melting. And big icebergs (himkhand) start floating in the ocean. If there is a glass full of water and if you put a big piece of ice in it, will the water flow out [of the glass] or not? (Student: It will.) Similarly, this ocean splashes with great force and the entire earth is submerged.

This was about the physical destruction. But does every task take place in the physical form first or in subtle form first?
(Everyone said: In the subtle form.) First it is accomplished in a subtle form. So, the knowledge that God gives in the world of Brahmins, that knowledge is in the satopradhaan stage and due to the foolishness of the Brahmins themselves that knowledge reaches the degraded (taamasi) stage as well. For example the rivers; they also give happiness and when the same rivers bring flood, they give sorrow as well. Similarly, this ocean is sweet at some places as well as salty at some places. It splashes with such a great force that all the human beings in the world, especially the knowledgeable souls in the human world of Brahmins mix the opinion of their mind in knowledge in such a way that the entire knowledge causes inundation. When the rivers overflow to such an extent, when floods occur, is mud mixed in the water or not? It is mixed. Similarly, in the world of Brahmins, that mud of body consciousness is mixed and because of the mixture of the mud of body consciousness, everyone becomes vicious. [They become vicious] to such an extent that the Brahmins of the number one category, the seeds of the entire world also become [vicious] number wise .

So, does the destruction take place first in the world of Brahmins or in the outside world? The destruction takes place first in the world of Brahmins. This destruction is going to take place. What? Neither the world of Brahmins in the basic [knowledge] nor the world of the Brahmins in the advance [knowledge] will survive. Everyone will die the death in the form of doubt. They will have doubt. The souls who have doubts are destroyed. Their status will degrade. Will their status be destroyed (ruined) or will the soul be destroyed?
(Everyone said: The status.) Their status will be destroyed. So, the mega destruction takes place. You must have said about the physical immersion of the entire world in water. Yes, then? (Student: A handful of souls are left.) Handful of [souls] will survive. When the entire world is inundated, a few [souls] survive. (Student: The materials of luxury that are present here will also be destroyed.) Yes. Do the yogi souls survive with the help of the worldly means or with the help of Yoga? (Someone said: With the help of Yoga.) The method of [performing] Yoga becomes so intense that the air they breathe itself contains all the five elements in it. You must have experienced that during the days when your stage of remembrance is good, you feel less hungry. The urge for passing stools and urine is also reduced. The [creation of] thoughts are also reduced. You achieve such a seed form stage. You attain an Avyakt (subtle) stage.

So, handful of souls of the world who survive in the climax of the mega destruction, they will not need the means of happiness and prosperity because of the power of Yoga. Is the sadhanaa (practice of Yoga) made with the help of saadhan (means) an elevated sadhanaa or is it an inferior sadhanaa?
(Everyone said: It is an inferior sadhanaa.) What kind of sadhanaa are we doing now? (Someone said: Playing songs.) If we get saadhan, we will have good Yoga (remembrance). If music is played, we will remember [Baba]. If there is red light, we will be able to attain an Avyakt stage. If we go to the gathering, the gathering of Brahmins, if we go to Mount Abu, our stage will remain high. If we come to the world below, our stage will fall. This is a sadhanaa based on saadhan. [But] our sadhanaa will reach such a high stage that we will not need the means of comfort and prosperity of the world at all. Yes, what do you say now? (Student: Yoga and remembrance in the Golden Age...) The foundation of the Golden Confluence Age that is laid in the beginning of the Confluence Age does not take the support of any old thing of the old world. The old world that we see through these eyes [i.e.] the body, the relatives of the body, and different things related to the body, everything is going to perish.

So, the Confluence Age Golden heaven [i.e. the Golden Confluence] Age is an independent age. As regards the first birth of the Golden Age, the nature will provide all the comforts there. It will provide every kind of comfort for the body. Will the nature continue to become tamopradhaan now or will it become satopradhaan?
(Everyone said: Tamopradhaan.) It is because unless the world of five billion human beings is destroyed, the big form, the original form of nature will continue to take on a fearsome form. It has been said to the extent that this nature in the form of body, these five elements of the body will continue to decay; and what about the soul? It will go on becoming powerful. Did you get the answer? (Student gave an affirmative nod.)

Time: 39.10-41.46
Student: Baba, handful of souls who survive will also leave their body and rejuvenate (kancankaayaa) [their body]. The souls in them (the bodies) will go to the Supreme Abode through the mind and intellect...

Baba: It will go to the Supreme Abode first. At the time of destruction, all the five billion souls, whether they are the ones who follow the knowledge and [practice] Yoga or not, whether they are the ones who recognize God more or less (according to the knowledge in them) or not, everyone has to leave his body. Some will leave their body voluntarily; their bodies will remain safe in the ice and they will go up (to the Supreme Abode) through the connection of the intellect. And some will not go [up] through the connection of the intellect. How will they go? They will leave their body because of the injuries caused in the destruction. They will make sounds of grief, leave their body and [then] go. Yes.
Student: For example, Baba has said about two kinds of Paramdhaam (the Supreme Abode). So, one is the inert Paramdhaam and the other Paramdhaam is the one that will be created [in this world]. Those who remain in Yoga through the mind and intellect, those who will go to the Paramdhaam, will they go to the Paramdhaam that is created or will they go to the inert Paramdhaam?
Baba: Will the gathering of those who remain stable in soul conscious stage get ready first or will the Paramdhaam of five billion human souls get ready [first]? (Everyone said: Of those who remain in soul conscious stage.) Those who are studying the knowledge of being in the soul conscious stage will attain this stage: I am a soul and secondly my Father is a point of light soul. There will be no other thought. The stage will become inert. It is not that we will be inert [in reality]. (Student: As regards those souls, the inert Paramdhaam above…) When the Paramdhaam is established in this very world, where is the need to go above? At that time, the world of five billion [human beings] will also exist. And in this world, you children…, not those children, not these BK children, you children will bring the Paramdhaam down to this world. So, the world of five billion [human beings] will not bring it down to this world. For whom was it said? [It was said] for you children. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 26 Nov 2014

वार्तालाप-633, दिनांक 21.09.08, सतना-1
भाग-4


समयः 41.48-01.02.52
जिज्ञासुः बाबा, जब ब्रह्मा बाबा को साक्षात्कार हुए, कलकत्ता गए तो बाबा बोलते हैं कि बड़ा भाई बाप समान होता है; प्रजापिता के लिए बताया कि बड़ा भाई बाप समान होता है और बड़ी बहन भी माँ समाना होती है। तो जाके दूसरी माता से बताया ब्रह्मा बाबा ने...

बाबाः ब्रह्मा बाबा ने क्या किया?
जिज्ञासुः दूसरी माता को बताया, जो दूसरी माता थी उसको बताया।
बाबा: हाँजी। बताया।
जिज्ञासु: तब बाबा बोले दूसरे नम्ब?र की ब्रह्मा हो गई छोटी माँ । और फिर बाबा बताते है दूसरे नम्ब र में कि बह्मा बाबा ने जाके अपने बहन को बताया और बहन ने बताया वेदान्ती बहन को और फिर...
बाबाः जानकी ने? (जिज्ञासु: वेदान्ती., छोटी मम्मीा ।) ऐसा है... (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) समझ लो पहले, समझ लो। कुछ गलतफहमी है इसलिए आप ऐसा बोल रहे हैं। ब्रह्मा बाबा का ज्यादा नज़दीकीपना... दोनों माताओं में से कौनसी माता के साथ उनका ज्यादा नज़दीकीपना बचपन से लेकरके रहा? दो माताएं थीं। एक माता ब्रह्मा बाबा की बड़ी बहन थी। और एक माता बड़ी बहन नहीं थी। तो बचपन से लेकर कौनसी बहन... बड़ी बहन माँ समान मानी जाती है। कौनसी बहन से ब्रह्मा बाबा को बचपन से लेकर ज्यादा स्नेह मिला? (जिज्ञासु - जो बहन नहीं थी।)

नहीं। माता तो थी दोनों। लेकिन एक माता उनकी बड़ी बहन थी। बड़ी बहन से उनको बचपन से प्यार मिला। और ब्रह्मा बाबा प्यार को तोड़ने वाली आत्मा तो नहीं है। तो जो साक्षात्कारों की बात है वो बहनोई को बताई होगी सीधा जाकर या बहनोई से बताने की हिम्मत ही नहीं पड़ी? किसको बताएंगे? (सभी ने कहा – बहन को बतायेंगे।) दोनों माताओं में से कौनसी माता ज्यादा नज़दीक थी? वो माता ज्यादा नज़दीक थी जो उनकी बड़ी बहन थी, लौकिक में। उसको बताया। और जो बड़ी बहन थी वो आखरी जन्मज में भी श्रेष्ठ संस्कारों वाली होगी , भारत माता के संस्कारों वाली होगी या विदेशियों से प्रभावित होने वाली होगी? (सभी ने कुछ कहा।) क्योंकि उसका आदि जन्मव जो है विष्णु स्वरूप जन्म ... (जिज्ञासु से) बैठ जाईये, यहीं बैठ जाईये। आदि जन्म‍ जो है वो विष्णु स्वरूप जन्म है। पहला जन्म आदि में विष्णु माना पति-पत्नी दोनों के संस्कार मिलकरके एक थे। तो आदि सो अंत। अंतिम जन्म में भी वो विष्णु समान संस्कारों से मिलने वाली आत्मा थी। ब्रह्मा और उनकी पत्नी यशोदा की तरह नहीं थी। अगर होती तो ब्रह्मा बाबा को ओम् राधे सरस्वती को यज्ञ का निमित्त बनाने की दरकार नहीं थी।

तो वो विष्णु स्वरूप, उसकी नाभि से ब्रह्मा निकला। शास्त्रों में दिखाते है, मुरली में भी बोला, विष्णु की नाभि से ब्रह्मा निकला। ये यहाँ शूटिंग होती है। वो विष्णु स्वरूप आत्माएं थीं जिनके संस्कार मिले हुए थे। लेकिन कलियुग के अंत में जो पत्नियाँ होती हैं, खास करके भारत माता जिसका टाइटल है, जिस आत्माे का; वो अपनी सौत को अपनी बहन के रूप में मानती है या सौतन के रूप में देखने वाली होगी? कभी भी सौतन के रूप में देखने वाली नहीं होगी - भारत माता जिसका टाइटल है। वो पति के सुख में अपना सुख मानने वाली होती है। पति जिस बात में सुखी उसी बात में पत्नी सुखी। कलकत्ते में ये परंपरा रहती है कलियुग के अंत में कि जो भी पैसे वाले होते हैं वो दो-दो, तीन-तीन पत्नियाँ रख लेते हैं। दूसरी पत्नी को घर मकान बनाकरके दे देते हैं, अलग रखते है । वो तो तब रखते हैं जबकि दोनों में झगड़ा होता है। अगर झगड़ा न हो तो आपस में मिलजुल करके भी रह सकती हैं। रह सकती हैं या नहीं रह सकती हैं? रह सकती हैं। तो जो दोनों बहनें आपस में बहन के रूप में रह रही हों और ब्रह्मा की बात, साक्षात्कार की, उनको सुनाई गई, ब्रह्मा बाबा की बड़ी बहन को तो पहले-पहले किसको सुनाएगी वो? अपने पति को सुनाएगी या उस बहन को सुनाएगी?
(जिज्ञासु – बहन को ।) बहन को सुनाया।

बहन जो है वो बुद्धि में तीखी थी। वो तो जगदम्बा का पार्ट है ना। जगदम्बा माना सारे जगत की अम्बा है; हिन्दूि, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, सबकी अम्बा। और भारत माता माने? सिर्फ भारतवासियों की माता। तो जो जगदम्बा का पार्ट है वो दूसरी माता का था। वो दूसरी माता को जो साक्षात्कारों की बात सुनाई गई वो माता बोलने में ज्यादा होशियार थी। और विष्णु की पार्टधारी वैष्णवी देवी बोलने में ज्यादा होशियार होती है या कर्म करने में ज्यादा होशियार होती है? प्रैक्टिकल जीवन में प्रैक्टिकल कर्म करके दिखाने में ज्यादा होशियार होती है। बोलने में ज्यादा होशियार नहीं। जीभ लम्बी नहीं होती है। तो जो लम्बी जीभ वाली थी जिसको महाकाली कहा जाता है, उसको वो साक्षात्कारों की बात सुनाई गई। और अंतिम जन्मज में जो पुरुष है वो पुरुष अति विकारी बन जाता है या कम विकारी बनके रहता है? अति विकारी। तो उसका जो विकारी स्नेह है वो औरस पत्नी के साथ ज्यादा रहता है या देह का संबंध दूसरी पत्नी के साथ ज्यादा रहता है? ज्यादा मुँहलगी पत्नी कौन होती है?
(किसी ने कहा – दूसरी वाली।) तो जो ज्यादा मुँहलगी थी उसने उस साक्षात्कार की बात को उस व्यक्ति से बोल दिया। और जिस समय बोला उस समय दोनों माताएं मौजूद थीं।

तो तीन आत्माएं हो गई। एक ने ब्रह्मा के बोले हुए साक्षात्कारों की बात को सुनाया। पहले सुना, बाद में सुनाया। और जब सुनाया उस व्यक्ति को तो... सुनने के साथ-साथ कोई बुद्धि से समझ भी सकता है या नहीं समझ सकता है?
(किसी ने कहा – समझ सकता है।) सुनने के साथ उसका रहस्य उसने समझा। अपने आप नहीं समझा। वो सुप्रीम सोल ने प्रवेश किया। किसमें? (किसी ने कहा – प्रजापिता।) नहीं। दोनों में प्रवेश किया। एक माता में प्रवेश किया जो बड़-बड़ बोलने वाली थी। सुनने और सुनाने की शक्ति जिसमें ज्यादा है। जिसकी यादगार में भारतवर्ष में लंबी जीभ दिखाई जाती है उस माता की। (सभी ने कहा – काली।) कहते हैं ना इसकी तो जीभ बड़ी लम्बी है। माना वाचा में इसको कोई हराय नहीं सकता। तो वो सुनने और सुनाने वाली हुई। सुनने-सुनाने का फाउण्डेशन उसको भक्तिमार्ग का फाउण्डेशन कहेंगे या ज्ञानमार्ग का फाउण्डेशन कहेंगे? (सभी ने कहा – भक्तिमार्ग।) ये भक्तिमार्ग का फाउण्डेशन पड़ गया उस आत्मा के द्वारा। इसलिए नाम पड़ता है जगदम्बा। सो महाकाली बनती है। सुनने-सुनाने का भक्तिमार्ग का फाउण्डेशन उसके द्वारा और फिर जिसको सुनाया गया उसमें परमात्मा शिव ने प्रवेश करके समझने और समझाने का फाउण्डेशन डाला।

तो समझने-समझाने को ज्ञान कहा जाता है। भक्त लोग क्या करते हैं? शास्त्र सुन लिए। दूसरों को सुनाय दिए। अर्थ को नहीं समझा। शास्त्रकार ने सुना दिया रावण को 10 शीश होते थे। तो सत वचन महाराज। हाँ, दस शीश होते थे। ये भी बुद्धि सोचने की नहीं कि दस शीश वाला पैदा होगा तो कैसे पैदा होगा? कुम्भकर्ण छह महीने सोता था। ये बुध्दि ही नहीं चलती कि अज्ञान नींद में सोने की बात है। स्थूल रूप में सोने की कोई बात ऐसी होती नहीं है। तो ढ़ेर सारी शास्त्रों में ऐसी बातें हैं जो भक्त लोग सुनते रहते हैं, सुनाते रहते हैं, उनके अर्थ को, गुह्य रहस्य को कोई नहीं समझते। क्योंकि भगवान ही आकरके सृष्टि के आदि काल में और तमोप्रधान सृष्टि के अंत काल में आके उसका रहस्य समझाता है। तो समझने-समझाने का फाउण्डेशन परमात्मा शिव ने उस व्यक्ति में डाला, जो राम वाली आत्मा होगी, जिसे सूर्यवंशी कहा जाता है। गीता में भी लिखा हुआ है यह ज्ञान मैंने सबसे पहले किसको सुनाया? सूर्य को सुनाया।
(जिज्ञासु – मैंने सुनाया...) मैंने माना शिव ने। (जिज्ञासु – माता के द्वारा।) माता ने ज्ञान सुनाया? सुनने-सुनाने को ज्ञान कहा जाता है क्या? अरे? अरे दादा लेखराज ब्रह्मा के द्वारा माउंट आबू में जो वाणियाँ चलीं, मुरलियाँ चली हैं, वो सिर्फ सुनने-सुनाने मात्र चली है या ज्ञान चला है? ज्ञान तो मनन-चिंतन-मंथन से निकलता है। क्या? अगर जो सुनने-सुनाने वाला है, मनन-चिंतन-मंथन ही नहीं करता तो उस ज्ञान का कोई मतलब नहीं रहता। जब उस ज्ञान की गहराई में ही नहीं जाएगा, ज्ञान सागर के तल्ले में ही नहीं जाएगा तो 84 जन्मों को आत्मा कैसे पहचानेगी।

भगवान तो आकरके पुरुषार्थ का अर्जन करने वाले अर्जुनों को 84 जन्मों का ज्ञान देते हैं क्योंकि आत्मा 84 के चक्र का पार्टधारी है। वो पार्टधारी ही कैसा जो कपड़े बदलता रहे जन्म-जन्मान्तर, शरीर रूपी वस्त्र बदलता रहे, परन्तु अपने पार्ट को ही न जानता हो? अभी हम सब बेवकूफ पार्टधारी हैं। कहते हैं हम आत्मा हैं परन्तु प्रैक्टिकल में 24 घंटे आत्मिक स्थिति नहीं रहती। देहभान में आ जाते हैं, घड़ी-घड़ी देहभान में आते हैं। इसलिए अपने जन्मों को नहीं जान सकते। तो सुनने-सुनाने का कार्य वो जगदम्बा का पार्ट बजाने वाली आत्मा के द्वारा हुआ। और समझने-समझाने का कार्य उस व्यक्ति के द्वारा हुआ जो राम वाली आत्मा होती है। ज्ञान का बीजारोपण करने वाली। जिनके लिए गाया हुआ है रामराज्य। क्या? भगवान राम आते हैं तो कौनसे राज्य की स्थापना करते हैं?
(सभी ने कहा – रामराज्य।) रामराज्य की स्थापना करते हैं जहाँ यथा राजा तथा प्रजा सब सुखी होते हैं। कोई दुःखी नहीं होता। अंश मात्र भी दुःखी नहीं होता। चौथाई कला में भी दुःखी आत्मा नहीं होती है। 16 कला संपन्न, सर्व गुण संपन्न, संपूर्ण अहिंसक, सब मर्यादा पुरुषोत्तम होते हैं।

तो ऐसी राम वाली आत्मा के द्वारा अंतिम जनम में वो ज्ञान का बीजारोपण करते हैं परमपिता परमात्मा शिव। समझने और समझाने का फाउण्डेशन होता है। परन्तु जो दूसरी दो माताएं हैं उनमें जो सुनने-सुनाने वाली है वो समझती है अन्दर से या जो दूसरी माता मौन रहने वाली है वो समझती है?
(सभी ने कहा – जो मौन रहती है।) जो मौन रहने वाली है वो ही समझती है। इसलिए मुरली में बोला है जो भारतवासी होते हैं उनको सरेण्डर होने में हृदय विदीर्ण होता है। और जो विदेशियों से प्रभावित होने वाले, विदेशी होते हैं वो झट सरेण्डर हो जाते हैं बिना सोचे समझे। तो दोनों माताओं में अगला जन्म लेकरके, जो अगला जन्म होता है वो भी ब्राह्मण परिवार में ही होगा या कहीं दूसरा होगा? (जिज्ञासु – ब्राह्मण परिवार में।) गीता में तो लिखा है ये ज्ञान कभी नष्ट नहीं होता। तो ब्राह्मण जो बना ब्रह्मा मुख की संतान वो अगर शरीर भी छोड़ दे तो अगला जन्म लेकरके फिर ब्राह्मण बनता है। पूर्व जन्म की जो प्रारब्ध है पुरुषार्थ की वो लेकरके आता है। उनमें से एक आत्मा, दो माताएं थीं ना। एक माता ज्ञान सुनती है तुरंत सरेण्डर हो जाती है। अपनी समझ से सरेण्डर नहीं होती। सुनाने वाले सुनाते हैं और वो सुनती है और सुनने सुनाने के आधार पर सरेण्डर हो जाती है। और जो भारत माता का पार्ट बजाने वाली है वो लंबा टाइम लगा देती है। लास्ट में जाकरके सरेण्डर होती है।

तो ऐसे नहीं है कि जगदम्बा ही बड़ी माँ है। वास्तव में बड़ा वो है जो प्रैक्टिकल जीवन में ज्ञान को धारण करके दिखावे। तो दोनों माताओं में से प्योरिटी के ज्ञान को... ज्ञान का मुख्य उद्देश्य क्या है? प्योरिटी। प्योरिटी के प्रैक्टिकल स्वरूप को कौनसी माता प्रत्यक्ष करती है जीवन में? भारत माता। इसलिए भारत माता शिव शक्ति अवतार अंत का यही नारा है। बीच में तो रुद्र माला प्रत्यक्ष होती है। उस रुद्र माला की जो मुख्य पुरुषार्थिनी स्त्री चोले वाली है वो महाकाली का पार्ट बजाने वाली है। महाकाली होगी तो अकेली होगी या साथ में महाकाल भी होगा?
(सभी ने कहा – महाकाल भी होगा।) महाकाल भी होता है। महाकाल शंकर को कहा जाता है। रुद्र कहा जाता है। इसलिए रुद्र ज्ञान यज्ञ गायन है। भगवान आकरके रुद्र में प्रवेश करके जो रौद्र रूप धारण करता है। इतना रौद्र रूप धारण करता है कि सारी दुनिया का विनाश कराय देता है। किसके द्वारा? रुद्र गणों के द्वारा। वो रुद्र गण पहले बाहर की दुनिया का विनाश कराते हैं, पहले अन्दर की ब्राह्मणों की दुनिया, कुम्भकरणों और रावण की दुनिया में विनाश होता है? जो कच्चे-पक्के ब्राह्मण हैं अधूरे पक्के उनका विनाश हो जाता है। इसलिए गायन है कि प्रजापति ने यज्ञ रचा। उस यज्ञ में सति ने अपना देह स्वाहा कर दिया। वास्तव में देह स्वाहा नहीं कर दिया। देहभान स्वाहा कर दिया। आत्माभिमानी बन गई। आत्मा को ही शक्ति कहा जाता है। शिव की शक्ति जो आत्मिक स्टेज में स्थिर हो जाती है।

Disc.CD No.633, dated 21.09.08, Satna-1
Part-4


Time: 41.48-01.02.52
Student: Baba, when Brahma Baba had visions, when he went to Calcutta, Baba says that the elder brother is equal to the Father; [Baba] said this for Prajapita that the elder brother is equal to the Father and the elder sister is equal to the mother. So, Brahma Baba went to the second mother and narrated her…

Baba: What did Brahma Baba do?
Student: He narrated [the visions] to the second mother, he narrated to the second mother who was there.
Baba: Yes; He narrated [the visions].
Student: Then Baba has said that the junior mother is the second Brahma and secondly Baba says that Brahma Baba went to his sister and narrated [the visions] and [then] the sister narrated it to sister Vedanti and then…
Baba: Janaki? (Student: Vedanti, the junior mother.) What happened is… (Student said something.) Understand it first; understand it. There is some misunderstanding; this is why you are saying this. As regards Brahma Baba’s closeness… which was the mother between the two mothers to whom Brahma Baba was close from his childhood? There were two mothers. One mother was Brahma Baba's elder sister and another mother was not the elder sister. So, from his childhood, which sister… the elder sister is considered to be equal to the mother. From which sister did Brahma Baba receive more affection since his childhood? (Student: The one who was not the sister.)

No. Both were mothers indeed but one mother was his elder sister. He received love from the elder sister since his childhood. And Brahma Baba is certainly not a soul who breaks [the relationship of] love. So, will he have narrated the topic of the visions directly to his brother-in-law or wouldn’t he have been able to gather courage to tell his brother-in-law at all? Whom will he tell? (Everyone said: He will tell [about it] to his sister.) Which mother was closer to him between the two mothers? The mother who was his lokik (worldly) elder sister was closer to him. He told [about the visions to] her. And as regards the elder sister, will she be the one with righteous sanskaars even in the last birth, will she be the one with the sanskaars of Mother India (Bharat mata) or will she be the one who is influenced by the foreigners? (Everyone said something.) It is because her previous birth, the birth as the embodiment of Vishnu… (To the student:) Please sit down; please sit here. Her previous birth is the birth as the embodiment of Vishnu. In the previous birth [i.e.] in the beginning [of the Yagya], they were Vishnu meaning the sanskaars of the husband and wife were harmonized. So, whatever happens in the beginning happens in the end. Even in the last birth, she was a soul who harmonizes sanskaars like Vishnu. She was not like Brahma [Baba] and his wife Yashoda. Had she (Yashoda) been like her (elder sister of Brahma Baba), there wouldn’t have been the need for Brahma Baba to make Om Radhe Saraswati the instrument of the Yagya.

So, Brahma emerged from the navel of that form of Vishnu. It is shown in the scriptures and it is also said in the Murli that Brahma emerged from the navel of Vishnu. This shooting takes place here. They (elder sister and brother-in-law of Brahma Baba) were the souls in the form of Vishnu whose sanskaars were harmonized. But as regards the wives in the end of the Iron Age, especially the soul whose title is Mother India; will she consider her husband's co-wife (sautan) as her sister or will she consider her as the co-wife? She, the one whose title is Mother India will never consider her as the co-wife. She accepts her husband's happiness to be her own happiness. The wife remains happy in whatever brings happiness to her husband. There is this tradition in Calcutta in the end of the Iron Age that all the prosperous people have two, three wives. They build a separate house for the second wife; they keep them separate. They keep them separate when there is quarrel between both [the wives]. If they do not quarrel, they can also live together. Can they or cannot they? They can. So, if both the sisters (wives) were living together as sisters and Brahma Baba narrated the topic of visions to the elder sister then, whom will she tell it first of all? Will she narrate it to her husband or to that sister?
(Student: To the sister.) She narrated it to the sister.

The sister had a sharp intellect. It is the part of Jagdamba, isn’t it? Jagdamba means the mother of the entire world. [She is] the mother of everyone, the Hindus, Muslims, Sikhs, Christians. And what is meant by Mother India? She is just the mother of Indians (Bharatwaasi). So, the part of Jagdamba was of the second mother. The second mother to whom the topic of visions was narrated was more skilled in speaking. And is the actor who plays the role of Vishnu, i.e. Vaishnavi devi more skilled in speaking or is she more skilled in performing actions? She is more skilled in performing actions in practice in the practical life. She is not more skilled in speaking. She is not a great talker. So, the topic of visions was narrated to the one who was a great talker, the one who is called Mahakali . And in the last birth, does a man become extremely vicious or does he remain less vicious? [He becomes] extremely vicious. So, does he have vicious love more for the legal wife or does he have more physical relationship with the second wife? Which wife is bolder?
(Someone said: The second wife.) So, the one who was more bold narrated the topic of visions to that person (brother-in-law of Brahma Baba). And when she narrated it, both the mothers were present.

So, there were three souls. One [of them] narrated the topic of visions told by Brahma. First she heard, and later she narrated [it] and when she narrated it to that person then… can someone also understand through the intellect while listening or not?
(Someone said: He can.) He understood its secret while listening. He did not understand it on his own. The Supreme Soul entered; in whom? (Someone said: Prajapita.) No. He entered both. He entered one of the mothers who was talkative, the one who has more power of listening and narrating. In the land of India, that mother is shown to have a long tongue in its memorial. (Students: Kali .) It is said, isn’t it? This person has a very long tongue . It means that nobody can defeat her in speech. So, she was the one who listened and narrated [the visions]. Will the foundation of listening and narrating be called the foundation of the path of Bhakti or the foundation of the path of knowledge? (Everyone said: The path of Bhakti.) This foundation of the path of Bhakti was laid by that soul. This is why she gets the name Jagdamba. She herself becomes Mahakali. The foundation of the path of Bhakti of listening and narrating [was laid] by her and the one to whom she narrated it, the Supreme Soul Shiva entered him and laid the foundation of understanding and explaining.

So, understanding and explaining is called knowledge. What do the devotees do? They listen to the scriptures. They narrate it to others. They do not understand the meaning. The writer of the scripture narrated that Ravan had ten heads. So, they said: Sat vacan Maharaj (Your words are true sir!) Yes, he had ten heads. They do not use the intellect even to think: how will someone with ten heads be born? [It is said,] Kumbhkarna used to sleep for six months. [But] it doesn’t come in their intellect at all that it is about sleeping in the sleep of ignorance. It is not about sleeping physically. So, there are numerous topics like this in the scriptures that the devotees (bhakt) keep listening and narrating [but] do not understand their meaning, their deep secrets because God Himself comes in [the confluence of] the beginning of the world and the end of the tamopradhaan world and explains its secret. So, the Supreme Soul Shiva laid the foundation of understanding and explaining in that person, who is the soul of Ram; he is called Suryavanshi. It has been written in the Gita as well: whom did I narrate this knowledge first of all? To the Sun.
(Student: ‘I’ narrated…) ‘I’ means Shiva... (Student: Through the mother.) Did the mother narrate knowledge? Is listening and narrating called knowledge? Arey! Arey, the Vanis [i.e,] the Murlis that were narrated through Dada Lekhraj Brahma in Mount Abu, were narrated just for the sake of listening and narrating or was the knowledge narrated? Knowledge emerges through thinking and churning. What? If the one, who listens and narrates, does not think and churn at all, then there is no use of that knowledge at all. If he does not go into the depth of the knowledge at all, if he does not go to the bottom of the Ocean of Knowledge at all then how will the soul recognize its 84 births?

God comes and gives the knowledge of the 84 births to the Arjuns who earn [the attainments through] purushaarth because a soul is an actor that plays [different] roles in the cycle of 84 births. What kind of an actor is he who keeps changing clothes every birth, who keeps changing the cloth like bodies, but does not know his part at all? Now, we all are foolish actors. We do say that we are a soul, but we do not remain in the soul conscious stage for 24 hours in practice. We become body conscious; we become body conscious again and again. This is why we cannot know our births. So, the task of listening and narrating took place through the soul playing the part of Jagdamba. And the task of understanding and explaining was performed through the person who is the soul of Ram. He is the one who sows the seed of knowledge. It is famous about him: Ram rajya (kingdom of Ram). What? When God Ram comes, which kingdom does he establish?
(Everyone said: The kingdom of Ram.) He establishes the kingdom of Ram where, as the king, so are the subjects; everyone is happy. Nobody is unhappy. No one experiences sorrow even a little. The soul does not experience sorrow even to the extent of 1/4th celestial degree. Everyone is complete with 16 celestial degrees, perfect with all the virtues, completely non-violent and maryaadaa purushottam .

So, the Supreme Father Supreme Soul Shiva sows the seed of knowledge through the soul of Ram in the last birth. It is the foundation of understanding and explaining. But between the two mothers, does the mother who listens and narrates, understand [the knowledge] from within or does the other mother who remains silent understands?
(Everyone said: The one who remains silent.) The one who remains silent herself understands. This is why it has been said in the Murli that the heart of the Indians breaks to surrender. And the videshis (foreigners), those who are influenced by the foreigners, surrender immediately without thinking and understanding. So, both the mothers are born again… will they be born again in the Brahmin family itself or somewhere else? (Someone said: In the Brahmin family.) It has been written in the Gita that this knowledge is never destroyed. So, even if the one who has become a Brahmin, the progeny [born through] the mouth of Brahma leaves the body, then after being reborn he becomes a Brahmin again. He brings with him the reward of purushaarth made in the past birth. One of the souls between them; there were two mothers, weren’t there? One mother listens to the knowledge and surrenders immediately. She does not surrender through her intelligence. The narrators narrate [the knowledge], she listens to it and she surrenders on the basis of listening and narrating. And the one who plays the part of Mother India takes a long time. She surrenders [herself] in the last.

So, it is not that Jagdamba herself is the senior mother. Actually, the one who imbibes the knowledge in practical life is senior. So, between both mothers, the knowledge of purity... What is the main objective of knowledge? Purity. Which mother practices the practical form of purity in her life? Mother India. This is why [it is said]: Mother India, incarnation as Shiv shakti is the very slogan of the end. It is the Rudramaalaa that is revealed in the middle. The main female purushaarthi in the Rudramaalaa, [the one] who has a female body plays the part of Mahakali. If there is Mahakali, will she be alone or will Mahaakaal also be along with her? (Everyone said: There will be Mahaakaal as well.) There is Mahaakaal as well. Shankar is called Mahaakaal. He is called Rudra. This is why Rudra Gyaan Yagya is famous. God comes, enters Rudra and takes on a fearsome form. He takes on such a fearsome form that he causes the destruction of the entire world. Through whom? Through the Rudragan . Do those Rudragan cause the destruction of the outside world first or do they cause the destruction of the inside world of Brahmins, the world of Kumbhakarna, Ravan and Meghnad ? The destruction is brought about in the Brahmin world. The weak Brahmins, the semi-real Brahmins are destroyed. This is why it is famous that Prajapati organized a Yagya. Sati sacrificed her body in that Yagya. Actually, she did not sacrifice her body, she sacrificed her body consciousness. She became soul conscious. The soul itself is called Shakti (power), Shiva’s shakti, who becomes constant in the soul conscious stage.
(Concluded)

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Post by arjun » 27 Nov 2014

वार्तालाप-634, दिनांक 21.09.08, सतना-2
भाग-1


समयः 00.01-06.43
बाबाः गायन है कि प्रजापति ने यज्ञ रचा। उस यज्ञ में सति ने अपना देह स्वाहा कर दिया। वास्तव में देह स्वाहा नहीं कर दिया। देहभान स्वाहा कर दिया। आत्माभिमानी बन गई। आत्मा को ही शक्ति कहा जाता है, शिव की शक्ति, जो आत्मिक स्टेज में स्थिर हो जाती है। अब माताजी, बताइये आप क्या पूछना चाहती हैं? समझ में आ गया कि नहीं? (माताजी – आ गया।) या एक कान से सुना, दूसरे कान से निकाल दिया?
जिज्ञासु: बाबा, ये...
बाबा: अरे माताजी से तो पूछ लेने दो। (माताजी से:) आपके प्रश्न का समाधान हुआ? (माताजी: हाँ बाबा।) हाँ। हो गया।
जिज्ञासुः बाबा, एक प्रश्न है।
बाबा: हाँ बोलो।
जिज्ञासु: बाबा हम दोनों विद्यार्थी एक ही क्ला(स के है। ये प्रश्न् हमारा भी था लेकिन इसमें मुंझान और बढ़ रही है। (बाबाः क्या ?) वो बात साफ नहीं हो रही बाबा। (बाबाः हाँ जी, हाँ जी।) बाबा एक मुरली में बोले दादा लेखराज जब प्रश्नफ जाके बताते है अपना, तो गीता माता से बतलाते है...
बाबाः गीता माता से... गीता माता जो है, जिसको हम माता कहते हैं। (जिज्ञासु – जी हाँ, बड़ी माता।) हाँ, वो माता सिर्फ शरीर है, डब्बा है या आत्मा भी है? (किसी ने कहा – आत्माा भी है।) तो दोनों माताओं में डब्बा का पार्ट बजाने वाली कौनसी है और आत्मा जो धारण करने वाली होती है वो कौन है?
जिज्ञासुः बाबा, ये प्रश्न नहीं है हम लोगों का। दोनों का प्रश्नफ एक साथ जुड़े हुए है। वो ये प्रश्नब है कि जो बच्चे पैदा होंगे राधा-कृष्ण जैसे...
बाबाः राधा-कृष्ण जो सृष्टि की आदि में बच्चेा पैदा होंगे...
जिज्ञासुः ...पैदा होंगे। तो एक मुरली में है हम लोगों ने सुना कि बड़ी माता को जाके दादा लेखराज बतलाते हैं अपनी बात।
बाबाः बड़ी माता माने कौन? जगदम्बा? (जिज्ञासुः जगदम्बा को।) नहीं। जगदम्बा से डायरेक्ट कनेक्शन उतना स्नेह का नहीं है, आंतरिक स्नेह का। देह का स्नेह होता है या आत्मिक स्नेह होता है? (किसी ने कहा – आत्मिक स्नेह।) हाँ? भारत माता से। जो भारत माता का पार्ट बजाने वाली है उसके साथ आत्मिक स्नेह नहीं होता दिल का स्नेह? (किसी ने कहा – होता है।) जो दूसरी पत्नी बनाई जाती है वो देह की पूर्ति के लिए बनाई जाती है या आत्मिक संतोष के लिए बनाई जाती है? कौनसे संतोष के लिए बनाई जाती है? अरे जो दूसरी शादी की जाती है, विकार में जाना माने शादी। दूसरी पत्नी जो बनाई वो दूसरी पत्नी विकारी धारणाओं को पोषण करने के लिए बनाई जाती है या दिल की भावनाओं का पोषण करने के लिए बनाई जाती है? (सभी ने कहा – विकारी भावनाओं...) तो दिल का स्नेह दोनों माताओं में से किससे था? (जिज्ञासु ने कुछ कहा।) बड़ी माता के साथ दिल का स्नेह? देह का स्नेह नहीं था? (जिज्ञासु जो बड़ी बहन थी...) हाँ, जो बड़ी बहन थी वो माता नहीं है? बड़ी माता कहा जाता है जगदम्बा को। जगदम्बा है बड़ी माता। बड़ी माता इसलिए कि सारी सृष्टि की माता है। दूसरे धर्म की जो दूसरी-दूसरी 500 करोड़ आत्माएं हैं वो सबकी माता है। उसे कहते हैं – जगद अम्बा। जगत् माने? 500 करोड़। और वो है सिर्फ भारत माता। जगत् माने? 500 करोड़। वैष्णवी शक्ति, वैष्ण0वी देवी है। उससे विष्णु कुल की स्थापना होती है। तो ये बात बदल दीजिए।
जिज्ञासुः प्रश्नन ये था बाबा कि एक मुरली में जो हम सुने हैं कि पहली माता से नहीं बताया। उनसे बताने में उनको झिझक लगती थी। बड़ी बहन माता समान होती है। तो उनसे डर लगता है, तो छोटी माता के पास जाके बताते हैं।
बाबाः छोटी मम्मी माने?
जिज्ञासुः छोटी मम्मी को बताते है।
बाबाः माना भारत माता?
जिज्ञासुः भारत माता को जाके बतलाते हैं।
बाबाः ठीक है।
जिज्ञासुः और फिर भारत माता के द्वारा जब उनको ज्ञान मिल जाता है दादा लेखराज को...
बाबाः ...उसे ज्ञान नहीं कहते। साक्षात्कारों को सुनाना कोई ज्ञान नहीं है। (जिज्ञासु: समझ और समझाने की बात है... ) जो भी माँ को जो सुनाया दादा लेखराज ने, अपनी बड़ी बहन को जो सुनाया, वो सुनना-सुनाना हुआ। और उस बड़ी बहन ने जो दूसरी माता को सुनाया, वो भी सुनना-सुनाना हुआ। (जिज्ञासु – बड़ी बहन भी छोटी माता को सुनाती है।) सुनाया। हाँ।
जिज्ञासुः वो प्रजापिता के पहले सुनाती है या बाद में सुनाती है?
बाबाः पहले ही सुनाती है। (जिज्ञासु – पहले सुनाती है?) हाँ, जी।
जिज्ञासुः तीसरे नंबर की ब्रह्मा जो बनती है, तीसरे नम्बर की जो ब्रह्मा... मुरली में बोली हुई वाणी है बाबा की। कि वो तीसरे नंबर की ब्रह्मा हुई।
बाबा: कौन?
जिज्ञासु: दूसरी माता, छोटी मम्मी, वो तीसरे नंबर की ब्रह्मा हुई। (बाबाः हाँ।) फिर दादा लेखराज जब पहले कन्व र्ट हो जाते है तो वो फिर बाद में पैदा होते है।
बाबाः देखो, ब्रह्मा के मुख से ज्ञान सुना तो ब्राह्मण पहला बना। इसके लिए बोला गया है, ब्राह्मण बने बिगर प्रजापिता था क्या? प्रजापिता माने 500 करोड़ की प्रजा, उसका पिता। वो पहला ब्राह्मण है सृष्टि का। वो पहला देवता बनता है। लेकिन वो ब्राह्मण जो है वो किसी ब्रह्मा के मुख से सुनेगा तभी तो मुख वंशावली ब्राह्मण कहा जाएगा। किसके मुख से सुना उसने? (जिज्ञासु – बड़ी माता।) बड़ी माता के द्वारा सुना। और पहला ब्राह्मण तब कहा जाएगा जब वो सुनने के साथ-साथ समझे भी। अगर समझे नहीं तो ब्राह्मण कहा जावेगा? (जिज्ञासु – नहीं कहा जावेगा।) ऐसे ही।

समयः 06.44-09.45
जिज्ञासुः बाबा, कर्मातीत अवस्था जो है...याद की यात्रा में रहते हैं जब, बाबा को याद करते हैं, उस वक्त यदि हमसे कोई गलत कार्य हो जाता है, क्या उसका पाप हमको लगता है कि नहीं लगता है?

बाबाः जो भी गलत कार्य किया जाता है उसका पाप क्यों नहीं लगेगा अगर सौ परसेन्ट याद नहीं होगी? याद होगी 100 परसेन्ट तो पाप नहीं लगेगा। और 100 परसेन्ट याद नहीं है पक्की, व्यभिचारी याद आती है बीच-बीच में तो पाप तो जरूर लगेगा। परसेन्टेज में जरूर लगेगा।
जिज्ञासुः बाबा, एक और चीज़ है दान की महिमा के बारे में। दान की महिमा होती है। (बाबाः हाँ, जी।) बाबा जब ज्ञान में चलते हैं तो ज्ञान में चलते हुए जो भी हम दान करते हैं... ज्ञान के पहले जो हमने दान किए... तो जब हम भगवान को पहचानते हैं बाबा, उसके बाद हम जो दान करते हैं... जब ज्ञान में चले उसका जन्म माना जाता है। मतलब हमने जन्म लिया, जब ज्ञान में चले तभी जन्म लिया।
बाबाः ब्रह्मा के मुख से सुना तो हम कच्चेि ब्राह्मण बन गए। क्या? पक्के ब्राह्मण सो देवता कहा जाता है। तो ब्रह्मा के मुख से सुनने मात्र से ही हम ब्राह्मण बन गए। अब वो कौनसी कुरी के ब्राह्मण बने वो अलग बात है।
जिज्ञासुः बाबा, एक और चीज़ है कि जो ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण हैं मतलब ब्रह्मा के मुख से जो ज्ञान निकला, वाणी को धारणा में उतारेंगे हमलोग, पवित्रता की बात आती है, प्योरिटी का धन जो है, जो भी है, तो मतलब उस ज्ञान को जब हम अपने जीवन में उतारते हैं तब ब्राह्मण कहलाएंगे।
बाबाः नहीं। जो ज्ञान को पहले-पहले जीवन में उतारे , प्रैक्टिकल जीवन में, वो ब्राह्मण जो है वो पक्का ब्राह्मण है।
जिज्ञासुः बाबा जो लोग ज्ञान में चलते हुए भी , ज्ञान में जो चलते हैं, ज्ञान सुनते भी हैं, उसके बाद भी ज्ञान को धारण नहीं करते हैं वो कौनसे ब्राह्मण हैं?
बाबाः कच्चे ब्राह्मण हैं।
जिज्ञासुः कच्चे ब्राह्मण है। तो बाबा जो कच्चे ब्राह्मण हैं, वो जब सतयुग से उतरेंगे, सतयुग के आते-आते, जो कच्चे ब्राह्मण हुए वो तो दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो जाते होंगे, बदल जाते होंगे।
बाबाः अगर अंत तक कच्चे ब्राह्मण रहेंगे, ब्रह्मा के मुख से निकली हुई बातों को 100 परसेन्ट धारण करने वाले नहीं बनेंगे तो मुरली में बोला है, जो दूसरे धर्म की आत्माएं होती हैं वो पूरा ज्ञान कभी धारण नहीं करेंगी। एक बात धारण करेंगी, दूसरी बात धारण नहीं करेंगी। एक बात ज्ञान की मानेंगी, दूसरी बात को नहीं मानेंगी। माने ज्ञान की सारी बातों को धारण नहीं करेंगी। कोई न कोई बातों का काट करती रहेंगी। इसलिए जो मानती ही नहीं हैं, वो चलने का तो सवाल ही नहीं है।

Disc.CD No.634, dated 21.09.08, Satna-2
Part-1


Time: 00.01-06.43
Baba: It is famous that Prajapati organized a Yagya. Sati sacrificed her body in that Yagya. Actually, she did not sacrifice her body, she sacrificed her body consciousness. She became soul conscious. The soul itself is called Shakti (power), Shiva’s shakti, who becomes constant in the soul conscious stage. Now mataji, say what do you want to ask? Did you understand or not? (Mother replied: Yes I have.) Or did you listen through one ear and leave it out through the other?
Another student: Baba, this…
Baba: Arey, let me ask mataji first. (To the mother:) Did you get the answer to your question? (The mother: Yes Baba.) Yes. It is done.
Student: Baba, I have a question.
Baba: Yes, speak up.
Student: Baba, both of us students are from the same class. I too had this question but the confusion is increasing even more. (Baba: What?) Baba a point is not getting clear. (Baba: Yes, yes.) Baba, it has been said in a Murli, when Dada Lekhraj goes to ask his question [about the vision], he goes and narrates it to Gita mata (mother Gita)...
Baba: To Gita mata... the mother Gita… the one whom we call mother. (Student: Yes, the senior mother.) Yes, is that mother just a body, [just] a box or does she also have a soul? (Someone said: She has a soul as well.) So, between both the mothers who plays the part of a box and who holds the soul?
Student: Baba, this is not our question. The questions of both of us are linked. The question is that the children like Radha and Krishna who are born...
Baba: Radha and Krishna, the children who will be born in the beginning of the world...
Student: …they will be born. So, we heard in a Murli that Dada Lekhraj narrates that topic [of visions] to the senior mother.
Baba: What do you mean by the senior mother? Jagdamba? (Student: To Jagdamba.) No. There is no direct connection of affection, of inner love with Jagdamba to that extent. Is there bodily love or spiritual love? (Student: Spiritual love.) Is it so? Doesn’t he (brother-in-law of Brahma Baba) have spiritual love, affection of the heart for the mother India, the one who plays the part of mother India? (Someone said: He has.) Does someone have a second wife for physical pleasures or for spiritual contentment? To fulfill which desire does someone has [a second wife]? Arey, when someone marries for the second time - to indulge in lust means to get married – the one whom he made his second wife, does someone have a second wife to fulfill the vicious desires or to fulfill the desires of the heart? (Students: [To fulfill] vicious desires.) So, for whom did he have the affection of the heart between both the mothers? (Student said something.) Did he have love of the heart for the senior mother? Didn’t he have physical love? (Student: The elder sister…) Yes. The elder sister [of Brahma Baba] is not the senior mother. Jagdamba is called the senior mother. Jagdamba is the senior mother. She is the senior mother because she is the mother of the entire world. She is the mother of all the 500 crore (five billion) souls of the other religions. She is called the World Mother (Jagad Amba). What is meant by jagat (world)? 500 crore [souls]. And that one is just the Mother India. She is Vaishnavi shakti, Vaishnavi devi. The establishment of the Vishnu clan takes place through her. So, change this topic.
Student: Baba, my question was that we have heard in a Murli that he (Brahma Baba) did not narrate [the visions] to the first mother. He hesitated to narrate it to her. The elder sister is equal to the mother, so, he was afraid of her; so, he goes and narrates [the visions] to the junior mother.
Baba: What do you mean by junior mummy?
Student: He narrates it to the junior mummy.
Baba: Do you mean Mother India?
Student: He goes and narrates to the Mother India.
Baba: It is correct.
Student: And when Dada Lekhraj gets the knowledge through Mother India...
Baba: …that is not called knowledge. Narrating the visions is not knowledge. (Student: understanding and explaining...) Whatever Dada Lekhraj narrated to the mother [i.e.] to his elder sister, it was [just] listening and narrating. And whatever that elder sister narrated to the second mother was also listening and narrating. (Student: The elder sister also narrates to the junior mother.) She narrated. Yes.
Student: Does she narrate to her before narrating to Prajapita or after narrating [to Prajapita]?
Baba: She narrates it to her at first. (Student: She narrates it to her first?) Yes.
Student: The one who becomes Brahma in the third place, the third Brahma… it has been said in Baba's Murli that she is the third Brahma.
Baba: Who?
Student: The second mother, the junior mother; she is the third Brahma. (Baba: Yes.) So, Dada Lekhraj converts first but he is born later.
Baba: See, he (Prajapita) listened to the knowledge from the mouth of Brahma so he became the first Brahmin. For this it has been said: Was he Prajapita without becoming a Brahmin ? Prajapita means the Father of the five billion subjects. He is the first Brahmin of the world. He becomes the first deity. But that Brahmin will be called a mukhvanshaavali Brahmin only when he listens from the mouth of Brahma. From whose mouth did he listen? (Student: The senior mother.) He heard through the senior mother. And he will be called the first Brahmin when he also understands along with listening. If he does not understand, will he be called a Brahmin? (Student: He will not.) It is the same case.

Time: 06.44-09.45
Student: Baba, as regards the karmaatiit stage ... when we are in the journey of remembrance, when we remember Baba, if we perform some wrong task at that time, do we accumulate sin or not?

Baba: If any wrong task is performed, why will you not accumulate sin if you are not in hundred percent remembrance? If you are in 100 percent remembrance, you will not accumulate sin. And if the remembrance is not 100 percent firm, if you have adulterous remembrance in between, you will definitely accumulate sin. You will definitely accumulate [sin] in percentage.
Student: Baba, there is one more thing about the glory of donation. There is glory of donation. (Baba: Yes.) Baba when we follow [the path of] knowledge, the donation that we make while following the path of knowledge ... the donations that we made before entering the [path of] knowledge… so Baba, the donations that we make after recognizing God… when we start following the [path of] knowledge it is called birth. I mean we are born when we follow the knowledge.
Baba: We become weak Brahmins when we listen through the mouth of Brahma. What? A firm Brahmin is called a deity. So, we became Brahmins just by listening through the mouth of Brahma. Well, the category of Brahmins to which we belong is a different topic.
Student: Baba, there is one more topic that those who are mukhvanshaavali Brahmins of Brahma, i.e. the knowledge that came out through the mouth of Brahma, when we imbibe that Vani (words narrated) in practice… regarding the topic of purity, the wealth of purity, so when we put that knowledge in our life [in practice], we will be called Brahmins.
Baba: No. The Brahmin who assimilates the knowledge first of all in his life, in the life in practice, is a firm Brahmin.
Student: Baba, those who follow the [path of] knowledge, those who listen to the knowledge and even while following the [path of] knowledge if they do not assimilate the knowledge, what kind of Brahmins are they?
Baba: They are weak Brahmins.
Student: They are weak Brahmins. So Baba, when those weak Brahmins descend from the Golden Age, while going from the Golden Age [to the next age] the weak Brahmins will convert to other religions.
Baba: If they remain weak Brahmins till the end, if they do not become the ones who completely imbibe the words that came out from the mouth of Brahma, then it has been said in the Murli that the souls belonging to the other religions will never imbibe the knowledge completely. They will imbibe one topic and they will not imbibe another topic. They will accept one point of knowledge and will not accept another point of knowledge. It means that they will not imbibe all the topics of knowledge. They will keep opposing some or other topic. This is why there is no question of following [the knowledge] for those who do not accept [the knowledge] at all. ... (to be continued)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 28 Nov 2014

वार्तालाप-634, दिनांक 21.09.08, सतना-2
भाग-2


समयः 09.46-11.30
जिज्ञासुः बाबा, एक और चीज है। जो84 जन्म लिए हैं, जो बीज हैं बाबा, जो बीज आत्माएं, वो हमारे एडवांस ज्ञान में हैं। बीज आत्माएं जो हैं...

बाबाः बीज आत्माओं में भी अलग-अलग किस्म के हैं। कोई का छिलका मोटा है, कोई बीज का। और कोई बीज का छिलका पतला है।
जिज्ञासुः बाबा जो एडवांस ज्ञान में हैं तो आप ने बोला है कि उनके देहभान के छिलके उतरेंगे जरूर।
बाबाः हाँ, नम्बरवार उतरेंगे।
जिज्ञासुः नंबरवार उतरेंगे।
बाबाः हाँ, कोई का छिलका पहले उतर जाता है और कोई का छिलका बाद में उतरेगा।
जिज्ञासुः बाबा, एक और चीज़ पूछनी है। भगवान को गरीब निवाज़ कहा जाता है। तो गरीब निवाज़ क्या हद की बात है या बेहद की बात है?
बाबाः अरे, भगवान आता है तो ब्रह्मा के द्वारा शूद्रों को ब्राह्मण बनाता है। तो वो शूद्र हद के गरीब होंगे या बेहद के गरीब होंगे? वो शूद्रों को क्या कहेंगे? (जिज्ञासु – गरीब।) वो हद के गरीब होंगे उनको उठाएगा या बेहद के गरीबों को उठाएगा? (किसी ने कहा – बेहद के गरीबों को।) शूद्र? वो तो हद के गरीब होंगे तभी तो गरीब निवाज़ गाया जाता है। अरे, प्रजापिता पहले शूद्र था? उसको भगवान ने उठाया पहले-पहले। तो हद का गरीब होगा या बेहद का गरीब होगा? बोलो। (जिज्ञासु – हद का।) हद का गरीब होगा। हाँ, जी।

समयः 11.58-22.05
जिज्ञासुः बाबा, ये पूछना चाहता हूँ कि चित्रकूट के घाट पर भयी संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसें, तिलक देत रघुवीर। इसका क्या मतलब होता है?

बाबाः इसका क्या मतलब? तुलसीदास कौन है? (जिज्ञासु – राम वाली आत्मा।) मुरली में बोला है अपनी-अपनी कथा-कहानियाँ शास्त्रों में लिख दी हैं। जिन आत्माओं ने जो-जो पार्ट बजाए ना वो अपनी कहानी अपने शास्त्रों में अपने ही हाथों लिखी है बैठकरके। अरे मनुष्यों ने ही शास्त्र बनाए ना। देवताओं ने या भगवान ने तो शास्त्र नहीं बनाए। तो शास्त्र बनाने वाली जो मनुष्यात्माएं थी वो पूर्व जन्म में देवताएं थी कि नहीं राम-कृष्ण की दुनिया में? (जिज्ञासु – थीं।) और देवता बनने से पहले ब्रह्मा मुख के ब्राह्मण थे। ब्रह्मा के मुख से ज्ञान सुनके ब्राह्मण बने। तो तुलसीदास की आत्मा कौन हो गई? (जिज्ञासु – राम वाली आत्मा।)

राम वाली आत्मा हो गई। अब राम वाली आत्मा के लिए ये बोला गया – चित्रकूट के घाट पर। कूट माने पहाड़। चित्र माने विचित्र। कैसा पहाड़? ये विचित्र पहाड़ है। ऐसा दुनिया में कोई पहाड़ नहीं है। क्या? वो पहाड़ जो होते हैं वो स्थूल पहाड़ हैं। ये कौनसा पहाड़ रहा होगा? (किसी ने कहा – विचित्र।) विचित्र का मतलब क्या हुआ? जिस पहाड़ का कोई चित्र नहीं है। विपरीत चित्र। वि माने विपरीत। माना ऐसा पहाड़ रूपी स्टेज वाला, जिस ऊँची स्टेज की पहाड़ पर तुलसीदास चंदन घिसैं। उन्होंने ज्ञान का चन्दन मंथन किया। तुलसीदास माने रामवाली आत्मा ज्ञान का मंथन करती है। तुलसीदास चंदन घिसें। चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। क्या? संत किसे कहा जाता है? सत शब्द से बनता है संत। क्या? जिन्होंने सत का अंत पाया, जो सत को सुनने में जिनकी बुद्धि लगी रहती है और सत सुनाने वाला कौन है? एक परमपिता परमात्मा ही सत सुनाता है। बाकी सब झूठे हैं। नंबरवार झूठे हैं। क्या? ये दुनिया कैसी है? झूठे लेना, झूठे देना, झूठे भोजन, झूठे चबैना। आज से 500 साल पहले तुलसीदास ने लिखा था - भये वर्ण संकर सबै। चाहे ब्राह्मण ही क्यों न हों लेकिन वर्णसंकर शूद्र हो गए। तो ब्राह्मण मनन-चिंतन-मंथन करते हैं या शूद्र मनन-चिंतन-मंथन करते हैं? ब्राह्मण मनन-चिंतन करते हैं।

तो चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। जो सत्य को चाहने वाले हैं, सत्य को पहचानने वाले हैं, गॉड इज़ ट्रुथ कहा जाता है। भगवान ही सत्य है। और कोई भी सत्य नहीं। उस भगवान को मानने जानने पहचानने वाले, सत्य को, जो हैं वो ही भगवान के सुनाए हुए ज्ञान को महत्व देते हैं। तो संतन की भीड़ लग गई। पूरा हाल भर गया। संतन की भीड़ लगी। क्या? असंतों की भीड़ नहीं लगी जिनकी ज्ञान की बातों से, सत्य क्या है उससे कुछ लेना-देना नहीं। भई संतन की भीड़। उस संतों की भीड़ में ज्ञान का चंदन घिसने का कार्य किसने किया सबसे जास्ती?
(किसी ने कहा - राम वाली आत्मा।) जो 84 का पूरा चक्कर लगाती है। आलराउंड पार्टधारी आत्मा है। और आत्माओं के एक-दो जन्म, एक-दो दिन, महीना-दो महीना, सप्ताह-दो सप्ताह, 100-200 वर्ष कम भी हो जावेंगे, लेकिन वो? आलराउंड 84 का चक्र लगाने वाली आत्मा है। तो वो ज्यादा मनन-चिंतन-मंथन करेगी वो ज्यादा अनुभवी होगी 84 जन्मों की या कोई दूसरी आत्मा 84 जन्मों की अनुभवी होगी? जो आलराउंड पार्ट बजाने वाला है वो ज्यादा अनुभवी होगा। तो जो अनुभवी होगा वो मनन-चिंतन-मंथन भी? सबसे जास्ती करता है।

तो कहा है तुलसीदास चंदन घिसे। ज्ञान का चंदन घिसना माना जो ब्रह्मा मुख से वेदवाणी सुनाई गई है उसका मनन-चिंतन-मंथन करके अपना बनाना। जैसे गाय घास खाती है। तो क्या करती है? चबाती है। अगर चबाएगी नहीं तो दूध नहीं बनेगा। कब दूध बनेगा? जितना चबाएगी। ऐसे ही ये ब्रह्मा के मुख से निकला हुआ ज्ञान बेसिक ब्राह्मण वाले कुमार-कुमारियां भी सुन रहे हैं। लेकिन वो चबाते नहीं हैं। ऐसे ही निगल जाते हैं। और जो चबाने वाले हैं वो? चित्रकूट के घाट पर जहाँ भई संतन की भीड़। तिलक देत रघुबीर। क्या? किसने तिलक दिया? रघुबीर ने तिलक दिया। अरे, भक्तों ने तो राम और कृष्ण को भगवान मान लिया है। वास्तेव में राम और कृष्ण भगवान हैं या देवता थे? 14 कला संपूर्ण, 16 कला संपूर्ण। अरे भगवान की कलाएं कम होती हैं क्या? भगवान तो 16 कला संपूर्ण देवता बनाने वाला है। वो कलाओं में कभी बंधने वाला नहीं है। वो कलातीत है। क्या? कलातीत कल्याण कल्पांतकारी कहा जाता है। तो भई संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसैं, तिलक देत रघुबीर। रघुवीर का मतलब क्या हुआ? रघु माने सूर्य। जो भी सूर्यवंशी हैं, जो भी हैं उनमें वास्तविक सूर्य का पार्ट बजाने वाली आत्मा कौनसी आत्मा है? शिव की आत्मा है या शंकर की आत्मा है? शिव की आत्मा है रघु। वो तिलक लगाती है विश्व की बादशाही।

जितने भी बैठे हुए हैं नंबरवार मंथन करने वाले हैं। जितना मंथन करने वाले हैं, ज्ञान का मंथन करके, ईश्वरीय ज्ञान को मथ करके जितना-जितना विशालबुद्धि बनते हैं, उतना अपने जन्मों को अर्जुन बनकरके जान जावेंगे। ज्ञानी तू आत्मा बनेंगे। अपनी आत्मा के 84 के पार्ट को जान जावेंगे।
(किसी ने पूछा – मंथन करते-2 अपनी जानकारी मिल जाएगी?) अपनी जानकारी अपने आप होगी या सबको एक-एक को शिवबाबा बताएगा? (किसी ने कहा – अपने आप होगी।) तुलसीदास चंदन घिसें तिलक देत रघुबीर। विश्व की बादशाही का तिलक भगवान देते हैं। माना शिव जो हैं क्या करते हैं? जो जितना मंथन करेगा, चिंतन करेगा, उसको विश्व की बादशाही का तिलक मिलेगा नंबरवार। एक जैसे विश्व के बादशाह नहीं बनते हैं। ऐसे तो दुनिया में सारे विश्व के ऊपर कंट्रोल करने के लिए आकांक्षा करने वाले बहुत हुए। हिटलर, नेपोलियन। सारे विश्व के ऊपर कंट्रोल करने के लिए आमादा थे। लेकिन रास्ता गलत अपनाया। हिंसा का रास्ता अपनाया। हिंसक युद्ध कराए। हिंसा से विश्व की बादशाही नहीं मिलती है। ये राजयोग बल है, जो भगवान ही आकरके सिखाता है। और राजयोग बल से बड़े ते बड़े राजा विश्व का महाराजा बनाता है। बना रहा है। जो राजयोग सीखेंगे वो नंबरवार बनेंगे।

Disc.CD No.634, dated 21.09.08, Satna-2
Part-2


Time: 09.46-11.30
Student: Baba, there is one more thing [to ask]. Baba, those who have 84 births, those who are seeds, the seed souls are in our advance knowledge. The seed souls…

Baba: There are different varieties among the seed souls as well. Some seeds have a thick husk. And some seeds have a thin husk.
Student: Baba, you have said that those who are in the advance knowledge, their husk of body consciousness will definitely be removed.
Baba: Yes, it will be removed number wise .
Student: It will be removed number wise.
Baba: Yes, the husk of some [seeds] is removed early and the husk of some [seeds] will be removed later.

Time: 10.26-11.30
Student: Baba, I want to ask one more thing. God is called Garibniwaaz (Friend of the poor). So, is He Garibniwaaz in the limited or in the unlimited?

Baba: Arey, when God comes, He transforms the Shudras into Brahmins through Brahma. Will those Shudras be poor (garib) in the limited or in the unlimited? What will those Shudras be called? (Student: Poor.) Will He uplift the poor ones in the limited or will He uplift the poor ones in the unlimited? (Someone said: The poor ones in the unlimited.) Shudra? They will certainly be poor in the limited, only then is He famous as Garibniwaaz. Arey, Prajapita was a Shudra first, [wasn’t he?] God uplifted him first of all. So, will he have been poor in the limited or in the unlimited? Speak up. (Student: In the limited.) He will be poor in the limited. Yes.

Time: 11.58-22.05
Student: Baba, I want to ask: ‘Chitrakoot ke ghaat par bhayi santan ki bhiir. Tulsidas candan ghise, tilak det Raghuvir’; what does it mean?

Baba: What does it mean? Listen. Who is Tulsidas? (Student: The soul of Ram.) It has been said in the Murli: everyone has written his life story in the scriptures. Whichever soul played whatever part, they themselves have written their life story with their own hands in their scriptures. Arey, it is the human beings who have prepared the scriptures, haven’t they? Neither the deities nor God has prepared the scriptures. So, were the human souls who wrote the scriptures deities in their previous birth, in the world of Ram and Krishna or not? (Student: They were.) And before becoming deities, they were Brahmins born through the mouth of Brahma. They became Brahmins after listening to knowledge through Brahma’s mouth. So, who is the soul of Tulsidas? (Student: The soul of Ram.)

It is the soul of Ram. Well, it has been said for the soul of Ram: Chitrakoot ke ghaat par (in the valleys of mount Chitrakoot). Koot means mountain. Chitra means vichitra (strange). What kind of a mountain? This is a strange mountain. There is no mountain like this in the world. What? Those mountains are physical mountains. Which mountain will this have been? (Someone said: Vichitra.) What is meant by vichitra? A mountain which does not have any picture (chitra). [It is] vipreet (opposite to) chitra. Vi means opposite. It means that it is such a mountain with high stage that Tulsidas rubs sandalwood (Tulsidas candan ghise) on that mountain. He [rubbed], he churned knowledge in the form of sandalwood. Tulsidas meaning the soul of Ram churns the knowledge. Tulsidas candan ghise. Chitrakoot ke ghaat par bhayi santan ki bhiir. What? Who is called a sant? Sant is derived from the word ‘sat’. What? Those who have attained the end of truth, those whose intellect remains busy in listening truth; and who narrates the truth? The Supreme Father Supreme Soul alone narrates the truth; everyone else is false in the world. They are false number wise . What? What kind of a world is this? Jhoothe lenaa, jhoothe denaa, jhoothe bhojan, jhooth chabenaa (giving, taking, eating and chewing, everything is false). 500 years ago Tulsidas had written: Bhaye varna sankar sabai. Even if they are Brahmins, they have become the ones with mixed blood, they have become Shudras. So, do the Brahmins think and churn or do the Shudras think and churn? It is the Brahmins who think and churn.

So, Chitrakoot ke ghaat par bhayi santan ki bheer (a crowd of saints gathered in the valley of Chitrakoot.) Those who like truth, those who recognize truth… it is said, ‘God is truth’. God alone is truth. Nobody else is truth. Those who believe, know and recognize God, [who know] the truth, only they give importance to the knowledge narrated by God. So, a crowd of saints gathered [there]. The entire hall was packed. :D A crowd of saints gathered. What? A crowd of the ones who are not saints (asant), [the ones] who have nothing to do with the topics of knowledge and what is the truth did not gather [there]. A crowd of saints gathered. Who performed the task of rubbing the sandalwood of knowledge the most in that crowd of saints?
(Someone said: The soul of Ram.) He passes through the complete cycle of 84 [births]. He is an all-round actor soul. In case of the others souls, one or two births, one or two days, one or two months, one or two weeks, 100-200 years can also be reduced, but what about him? He is a soul who passes through the complete cycle of 84 [births]. So, will he think and churn more, will he have more experience of the 84 births or will some other soul have the experience of 84 births? The one who plays an all-round part will be more experienced. So, the one who is experienced, he also thinks and churns the most.

So, it has been said: Tulsidas chandan ghise. To rub the sandalwood of knowledge means to think and churn the Ved Vani narrated through the mouth of Brahma and to make it ours. For example, when a cow eats grass, what does it do? It chews [the grass]. If it doesn’t chew it, milk will not be produced. When will milk be produced? The more it chews, [the more milk will it produce]. Similarly, the Brahmins in the basic [knowledge], the Brahmakumar-kumaris are also listening to the knowledge that came out of the mouth of Brahma, but they do not chew it (churn it). They simply gobble it down. And those who chew it... Chitrakoot ke ghaat par bhayi santan ki bhiir. Tilak det Raghuvir. What? Who applied the tilak ? Raghuvir applied the tilak. Arey, the devotees have considered Ram and Krishna as God. Were Ram and Krishna God or were they deities in reality? [They were] complete with 14 celestial degrees, complete with 16 celestial degrees. 0Arey, do the celestial degrees of God reduce? In fact, God is the one who makes us into a deity complete with 16 celestial degrees. He can never be bound in celestial degrees. He is beyond celestial degrees (kalaatiit). What? He is called Kalaatiit Kalyaan Kalpaantkaari. So, a crowd of saints has gathered, Tulsidas rubs the sandalwood and Raghuvir applies the tilak. What is the meaning of Raghuvir? Raghu means the sun. Among all the Suryavanshis, which soul plays the part of the Sun in reality? Is it the soul of Shiva or the soul of Shankar? The soul of Shiva is Raghu. It applies the tilak of emperorship of the world.

All those who are sitting [here] churn [the knowledge] number wise . The more they churn, the more they churn the knowledge, the knowledge of God and become the ones with a broad intellect (vishaal buddhi), the more they will become [like] Arjun and know their births; they will become knowledgeable souls, they will realize their parts in the 84 births.
(Someone asked: Will we get the information about ourself by churning?) Will we ourselves come to know about us or will ShivBaba narrate [about it] to each and every one? (Someone said: We will ourselves come to know it.) Yes, so, [it is said:] Tulsidas rubs the sandalwood and Raghuvir applies the tilak. God applies the tilak of emperorship of the world. It means, what does Shiva do? Whoever churns, thinks [over knowledge] to whatever extent, the tilak of emperorship of the world will be applied to him sooner or later (according to his spiritual effort). They do not become the emperors of the world to the same extent. In a way, there were many people [like] Hitler, Napoleon, who had the ambition to control the entire world. They were all set to control the entire world. But they adopted a wrong path. They adopted the path of violence. They caused violent wars to take place. The emperorship of the world cannot be obtained through violence. It is the power of Raja Yoga that God alone comes and teaches. And He makes us the biggest kings, the emperors of the world through the power of Raja Yoga; He is making [us into that]. Those who learn Raja Yoga will become [the emperors of the world] sooner or later (according to their spiritual effort). ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 29 Nov 2014

वार्तालाप-634, दिनांक 21.09.08, सतना-2
भाग-3


समयः 22.08-24.25
जिज्ञासुः बाबा, मुरली में आया है कि तुम बच्चे जो हैं बाद में प्रवेश करके सेवा करेंगे।
(बाबाः हाँ, जी।) तो बाबा एक आत्मा जो है, अगर सोल कानशस में, उसकी आत्मिक स्टेज होती है, तो एक में प्रवेश करती है या अनेक में प्रवेश करती है?
बाबाः आत्मा एक है या एक आत्मा के अनेक रूप हैं? हर आत्मा एक है। तो एक समय में एक में ही प्रवेश करके पार्ट बजावेगी या एक समय में अनेकों में प्रवेश करके पार्ट बजावेगी? (जिज्ञासु - एक में।) भक्तिमार्ग में समझ लिया है कि भगवान एक आत्मा है, परमात्मा है, आत्माओं में परम पार्ट बजाने वाली है, और वो सबमें प्रवेश होके पार्ट बजाती है। तो योगयुक्त होगा या योग भ्रष्ट होगा? अनेकों को याद करेंगे तो योगभ्रष्ट बन जावेंगे। भगवान सर्वव्यापी नहीं है। भगवान तो एकव्यापी होकरके कर्तव्य करता है। इसलिए उस एक को पहचान करके उसको याद किया जा सकता है। बुद्धि एकाग्र हो सकती है। अगर भगवान सबमें व्यापक हो जाए तो सबको याद करने से बुद्धि भ्रष्ट होगी या श्रेष्ठ बनेगी? व्यभिचारी बुद्धि बन जावेगी। इसलिए गीता में भी बोला है मामेकम् याद करो। मामेकम् नमस्कुरु। मेरे को ही नमस्कार करो, नमन करो, माना बुद्धि झुकाओ। और किसी के सामने बुद्धि झुकाने की दरकार नहीं है। जो औरों-औरों के सामने बुद्धि झुकाने वाले होंगे वो बड़े ते बड़े राजा नहीं बन सकते।

समय: 24.26-34.35
जिज्ञासु: बाबा, शंकर के गले में सांप दिखाते है और विष्णुर भी शेषनाग दिखाते है। वो सांप बड़ा दिखाते है और शंकर के पास छोटे-2 सांप दिखाते है। इसका क्याब अर्थ है?

बाबाः हाँ, कहते हैं ना गले पड़ गया। क्या? मिले न फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली। भगवान जब इस सृष्टि पर भगवान बनके आता है तो उसे फूल नहीं मिलते। क्या मिलते हैं? (सभी ने कहा - कांटे।) बड़े ते बड़े कांटे मिलते हैं। बहुत दुःख देने वाले विकारी। सबसे जास्ती विकारी कौनसा जानवर होता है? (जिज्ञासु - बन्दर।) बन्दर। तो भगवान बन्दरों की सेना ले लेते हैं। बन्दरों जैसे विकारी। बन्दरों में काम विकार कितना होता है? ऊँची डाल पर चढ़करके, सबके सामने काम विकार भोगता है। इतना विकारी होता है। क्रोध इतना होता है कि अगर चने डाल दिये जाएं फैलाके और डंडे डाल दिये जाएं तो आपस में इतना लड़ते हैं कि खूनखान कर देते हैं। ये भी नहीं देखते ये हमारा बच्चा है, ये हमारी अम्मा है, क्या है? लोभी इतने होते हैं कि एक छोटी सी मटकी में चने डाल दो, जिसका मुहरा छोटा हो मटकी का मुँह छोटा हो, उसमें वो हाथ डाल देगा और मुट्ठी भर लेगा। तो तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक वो मटकी टूट नहीं जावेगी। वो बुद्धि रूपी हाथ फंस गया तो फंस गया। वो मटकी को अपने आप नहीं फोड़ेगा। मटकी अपनेआप भले टूट जाए। और भूंगरों को भी नहीं छोड़ेगा।

मोही इतना होता है कि अगर बच्चा मर जाए तो महीनों तक उसकी खाल को अपने पेट से लिपटा करके रखती है बंदरी। बन्दरी ही क्यों लिपटा के रखती है? बन्दर क्यों नहीं लिपटा के रखता? क्योंकि अभी जो बन्दरियाँ हैं उनमें मोह ज्यादा है या बन्दरों में ज्यादा मोह है? जो पुरुष पार्ट बजाने वाले बन्दर हैं राम की सेना के उनमें ज्यादा मोह है या बन्दरियों में ज्यादा मोह है?
(सभी ने कहा – बं‍दरिया।)सलिए बोला है माताओं का अगर मोह विकार खत्म हो जाए तो समझो माताएं विजयी हो गईं। और अहंकार बन्दर में इतना होता है कि हाथी भी सामने से गुज़रेगा तो उसके सामने भी घुडक मारेगा..खौ...। अरे कहाँ हाथी और कहाँ छोटा सा बन्दर।

तो ऐसे-ऐसे कामी, क्रोधी, लोभी, मोही, अहंकारी जो भारतवासी हैं बीज रूप आत्माएं इस सृष्टि की इतनी पावरफुल हैं भगवान के डायरेक्ट बच्चे बनने वाले हैं, भगवान दुनिया में ऊँच ते ऊँच है, राजाओं का राजा बनाने वाली इतनी सर्वशक्तिवान आत्मा है भगवान तो उसके बच्चे कम पावरफुल होंगे या ज्यादा पावरफुल होंगे? ज्यादा पावरफुल तो होते हैं लेकिन वो ही बच्चे... राजा महाराजा के बच्चे अगर कुसंग में आ जाएं तो राजा महाराजा के बच्चे ज्यादा बिगड़ते हैं या कोई गरीब आदमी के बच्चे ज्यादा बिगड़ते हैं?
(सभी ने कहा - राजा-महाराजा के।) ज्यादा खतरनाक कौन बन जाते हैं? (सभी ने कहा - राजा-महाराजा के।) राजा-महाराजा का बच्चा जो है बहुत खतरनाक, बहुत बिगडैल बन जाता है। ऐसे ही ये भगवान के बच्चे बन्दर हैं। राम की सेना कही जाती है। बाकी ऐसे नहीं है कि भगवान ने कोई बन्दरों की सेना ली। मनुष्य ही बन्दर मिसल बन जाता है।

तो उन्होंने लिख दिया है मनुष्य 84 लाख योनियों में जाता है। अरे मनुष्य 84 लाख योनियों में नहीं जाता है, 84 लाख योनियों जैसे कर्म करने लग पड़ता है। सूरत मनुष्य की और सीरत बन्दरों जैसी हो जाती है। बाकी ऐसे नहीं है कि भगवान ने आकरके बन्दरों को पढ़ाई पढ़ाई, भगवान ने आकरके घोड़े का अवतार लिया, घोड़ों को पढ़ाई पढ़ाई, हैग्रीव अवतार लिया, भगवान ने आकरके मछली का अवतार लिया - मत्स्यावतार, मछलियों को पढ़ाई पढ़ाई, राजयोग सिखाया, ऐसा कुछ नहीं है। ये मनुष्यात्माओं के चरित्र हैं जिन्होंने ऐसे-ऐसे पार्ट बजाए हैं। सूअर का अवतार लिया। सूकर अवतार दिखाय दिया। अरे भगवान को मनुष्य पढ़ाने के लिए नहीं मिले? सूअर पढ़ाने के लिए मिला? अरे पढ़ाई पढ़ने वालों में जो-जो मनुष्य थे, उन मनुष्यों में से भी सूअर की जाति के मनुष्य ऐसे थे। जो काहे में लोटते हैं? कीचड़ में लोटते हैं। सूअर कहाँ लोटता है? लोट लगाता है कीचड़ में। ये विषय विकार क्या हैं? ये कीचड़ में लोट लगाने वाली बात है। कीचड़ में रमण करता है।

ऐसे जो विकारी मनुष्य हैं मनुष्य सृष्टि के इस्लाम धर्म की आत्माएं महाविकारी, एक स्त्री से तो उनका जिंदगी में काम चलता ही नहीं। इसलिए धरम में नूँध कर दी है कि चार-चार शादियाँ कर सकते हो। तो ऐसी मनुष्य जाति के जो प्राणी होते हैं उनमें से जो सबसे पावरफुल प्राणी हैं इब्राहिम, वो इब्राहिम ऊपर से जो आत्मा आती है आत्म लोक से उसका गायन है या ऊपर से आने वाली आत्मा जिन देवताओं में प्रवेश करके उनको कनवर्ट करती है उसका गायन है?
(जिज्ञासु - जिनमें प्रवेश करती है।) जिसमें प्रवेश करती है उसका गायन है। ये जितने भी धरमपितायें आए वो सीधे आके कोई बच्चा नहीं बन जाते हैं। परमधाम से जो आत्मा आएगी, पवित्र लोक से आएगी तो पवित्र आत्मा होगी या अपवित्र आत्मा होगी? पवित्र आत्मा होती है। पवित्र आत्मा गर्भ से जन्म नहीं ले सकती। इसलिए जो सतयुग त्रेता में जन्म लेते-लेते-लेते जो देवात्माएं नीचे उतरीं द्वापरयुग में उनमें से जो श्रेष्ठ आत्मा है लेकिन पढ़ाई कम पढ़ी है, पूरी पढ़ाई नहीं पढ़ी, ऐसी अधूरी पढ़ाई पढ़ने वाली आत्माओं में जो श्रेष्ठ है उसमें प्रवेश करती है। वो ही सूकर अवतार कहा गया।

बाकी भगवान कोई 24-24 अवतार नहीं लेते। 10-10 अवतार नहीं लेते जो दशावतार शास्त्रों में बताए गए हैं। जो गीता में लिखा हुआ है संभवामि युगे-युगे। हर युग में आता हूँ, चार युग में चार अवतार कह लो। फिर कहीं 10 अवतार कहीं 24 अवतार, ये क्या चक्कर है? भगवान तो सिर्फ जब ये सृष्टि रूपी मकान बहुत पुराना तमोप्रधान हो जाता है दुखदायी कलियुग बन जाता है, पापी युग बन जाता है, तब आते हैं, ऐसे नहीं कि द्वापर के अंत में कृष्ण का रूप धारण करके भगवान आया और पापी कलियुग की स्थाआपना करके चला गया। अरे, भगवान आवेगा तो सुख की दुनिया बनावेगा या पापियों की दुनिया बनावेगा? दुख की दुनिया बनाने के लिए भगवान आता है क्या? अरे लौकिक दुनिया का भी बाप होता है वो अपने बच्चों के लिए सुख देने के लिए नया मकान बना के जाता है या दुख देने के लिए जाता है? दुख देकरके बाप नहीं जाता। बाप हमेशा अपने बच्चों के लिए खुशी की सृष्टि रचता है। वो तो बेहद का बाप है।


Disc.CD No.634, dated 21.09.08, Satna-2
Part-3


Time: 22.08-24.25
Student: Baba, it has been mentioned in the Murli, you children will enter [the bodies of others] and do service in the end.
(Baba: Yes.) So Baba, when a soul is in the soul conscious stage, does it enter one [body] or many [bodies]?
Baba: Is a soul single or does a soul have many forms? Every soul is single. So, will it enter only one [body] at a time or will it enter many [bodies] and play the part simultaneously? (Student: [It will enter] one.) They have considered in the path of Bhakti that God is a soul, He is the Supreme Soul; He plays the supreme part among the souls and He plays His part by entering everyone. Then will He be yogyukt (perfect in Yoga) or yogbhrasht (have an adulterated Yoga)? If we remember many, we will become yogbhrasht. God is not omnipresent. God performs His task by becoming ekvyaapi (being present in one [being]). This is why we can recognize that One and remember Him. The intellect can be focused. If God becomes omnipresent then will the intellect become adulterated by remembering everyone or will it become elevated? The intellect will become adulterated. This is why it has been said in the Gita as well: Remember Me alone. Maameva namaskuru [meaning] greet (namaste) Me alone, bow the head meaning bow your intellect [in front of Me]. There is no need to bow your intellect in front of anyone else. Those who bow their intellect in front of others cannot become the biggest kings.

Time: 24.26-34.35
Student: Baba, snakes are shown around the neck of Shankar and Vishnu is also shown on [lying on] Sheshnaag (snake bed). That snake is big and the snakes shown around Shankar are small. What does it mean?

Baba: Yes, it is said: they hang around my neck (gale pad gayaa), isn’t it? What? [It is said:] when I did not find flowers, I befriended the thorns. When God comes in this world as God, He does not find flowers. What does He find? (Everyone said: Thorns.) He finds the biggest thorns, the vicious ones who give a lot of sorrow. Which animal is the most vicious? (Student: Monkey.) Monkey. So, God takes the army of monkeys. They are vicious like monkeys. Monkeys are so lustful! They climb on a high branch and enjoy lust in front of everyone. They are so vicious! They are so wrathful that if grams are thrown in front of them and if sticks are put before them, they fight with each other to the extent that they cause bloodshed. They do not even see whether [the one whom they are beating] is his son, mother or who is it. They are greedy to such an extent that if you put grams in a small pot with a narrow neck; they will put their hand in it and fill the fist with grams. They will not open the fist until the pot breaks. Once that hand like intellect has entangled, it remains entangled. It (the monkey) will not break that pot on its own. It doesn’t matter if the pot breaks on its own but it will not leave the grams.

It has so much attachment that if its child dies then the female monkey keeps its dead body clung to her abdomen for many months. Why does only the female monkey keep it clung to herself? Why doesn’t the male monkey keep it clung to himself? It is because do the female monkeys have more attachment or do the male monkeys have more attachment at present? Do the monkeys who play a male part in the army of Ram have more attachment or do the female monkeys have more attachment?
(Students: The female monkeys.) This is why it has been said that if the vice of attachment in the mothers is removed then think that the mothers have become victorious. And the monkey has so much ego that even if an elephant passes in front of it, it will growl at it as well. (Baba mimics the way of growling.) Arey, what a difference there is between an elephant and a small monkey!

So, the Indians who are lustful, wrathful, greedy, the ones with attachment, egotistic in this way, the seed form souls of this world are so powerful. They become the direct children of God. God is the highest one in the world. God is such an almighty soul who makes us into the king of the kings, so, will His children be less powerful or more powerful? They are certainly more powerful, but if the same children… if the children of kings and emperors fall in with bad company, are the children of kings and emperors spoilt more or are the children of a poor person spoilt more?
(Everyone said: [The children] of kings and emperors.) Who become more dangerous? (Everyone said: [The children] of kings and emperors.) The child of a king or an emperor becomes very dangerous, very spoilt. Similarly, these children of God are [like] monkeys. It is called the army of Ram. As for the rest, it is not that God took an army of monkeys [in reality]. Human being himself becomes like monkey.

So, they have written that human being passes through 84 lakh (8.4 million) species. Arey, a human being does not pass through 84 lakh species [in reality], he starts performing actions like [the creatures in] the 84 lakh species. They have a human face, but the behavior becomes like that of the monkeys. Well, it is not that God came and taught lessons to the monkeys, that God incarnated as a horse [and] taught lessons to the horses, that He incarnated as a horse (haigriiv avataar), that God came and incarnated as a fish [called as] matsyaavataar [and] taught lessons to the fishes, taught them Raja Yoga; there is nothing like that. It is about the acts of human souls who have played parts in this way. [It is said that] He incarnated as a boar (suar). They have shown sukaraavataar (boar incarnation). Arey, doesn’t God find human beings to teach? Did He find a pig to teach? Arey, even among the human beings who studied the knowledge, there were such human beings [with the character] of the species of pig. In what do they roll about? They roll about in mire. Where does a pig roll about? It rolls about in mire. What are these vices? It is rolling about in mire. It (the pig) delights in mire.

Such vicious human beings of the human world, the souls of the Islam religion are the most vicious ones. They aren’t satisfied with [just] one wife in their life at all. This is why they have made this rule in their religion that they can marry four times. So, the most powerful living being among those belonging to such human race [is] Abraham. Is the soul of Abraham who comes from above, from the Soul World famous or are the deities in whom the souls coming from above enter and convert them famous?
(Student: The ones in whom it enters.) The one in whom it enters is famous. All the religious fathers who arrived do not become a child directly. The soul that comes from the Supreme Abode comes from a pure abode, so will it be a pure soul or an impure soul? It is a pure soul. A pure soul cannot be born through the womb. This is why the deity souls who degraded in the Copper Age while having births in the Golden and the Silver Ages, among them, the soul who is elevated but has studied less, who didn’t study the knowledge completely… it enters the elevated soul among the souls who study incomplete knowledge. That itself is said to be the boar incarnation.

As for the rest, God doesn’t take 24 incarnations; He doesn’t take 10 incarnations that have been mentioned in the scriptures. It has been written in the Gita: Sambhavaami yuge yuge [meaning] I come in every age. You can say that [He takes] four incarnations in the four ages. Then somewhere [it is mentioned that there are] ten incarnations and at some other places it has mentioned that there are 24 incarnations; what is this? God comes only when this house like world becomes very old, tamopradhaan, sorrowful Iron Age, when it becomes a sinful age. It is not that God arrived in the form of Krishna at the end of the Copper Age and departed after establishing the sinful Iron Age. Arey, when Gold comes, will He create a world of happiness or will He create a world of sinful ones? Does God come to create a world of sorrow? Arey, even in case of the Father in the lokik world , does he build a new house to give happiness to his children and then goes or does he depart after giving sorrow? The Father doesn’t depart after giving sorrow. The Father always creates a world of happiness for his children. [And as regards Him], He (God) is the unlimited Father.
... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 30 Nov 2014

वार्तालाप-634, दिनांक 21.09.08, सतना-2
भाग-4


समयः 34.36-37.27
जिज्ञासु: बाबा, प्रश्न। अधूरा रह गया। शंकर के आस-पास सांप है छोटे-2 और विष्णुं के नजदीक बड़ा सांप है ।

बाबाः हाँ, गले में नहीं लटका है। (जिज्ञासु: नहीं, वो शेषनाग।) हाँ, वो आराम से लेटा हुआ है। (जिज्ञासु: तो वो कौनसा सांप है?) लेटा हुआ का मतलब ये है कि जो भी बड़े से बड़े सांप हैं जिसे शेषनाग कहो, वासुकी नाग कहो, जो अनेक फनों वाला है। क्या? कितने फन दिखाते हैं? पांच फन दिखाते हैं। वो ही रावण के रूप हैं। उनके ऊपर आराम से लेटता है। कोई चिन्ता नहीं। वो भी सुखदायी बन जाते हैं। क्या? कनवर्ट हो जाते हैं। जैसे जो भारतवासी दूसरे-दूसरे धर्मों में कनवर्ट होकरके कोई क्रिश्चियन बने, कोई मुसलमान बने, कोई बौद्धी बन गए। वो ही कनवर्ट होने वाली आत्माएं जब भगवान आते हैं वो देवी-देवता सनातन धर्म के कच्चे देवताएं बन जाते हैं, कम कला वाले, कम जन्म लेने वाले। उनके जो मुखिया हैं, वो ही सांपों के रूप में नीचे पड़े हुए दिखाए गए हैं। तो विष्णु में और शंकर में अंतर है।

शंकर के गले में पड़े हुए हैं। गले पड़ गए। क्या करें? मिले न फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली। ये गले पड़ गए हैं। इनको निबाह करना ही पड़ेगा। पूर्व जन्मों का हिसाब-किताब है। द्वापर-कलियुग में जन्म लिए ना। इन्हीं राजाओं के साथ जन्म लिए हैं जिन्होंने राजयोग सीख करके जन्म-जन्मान्तर राजाएं बने। ये राजाएं भारत के आपस में सबसे जास्ती मुड़मुटौल करते रहे हैं या प्यार से रहे हैं? भारत के राजाओं ने आपस में खूब मुड़मुटौल की। जब कोई विदेशियों का आक्रमण होता था तब उनकी आँखें खुलती थीं। और जो उस समय भारत का बड़ा राजा होता था उसकी शरण लेकरके, इकट्ठे होकरके लड़ाई लड़ते थे। नहीं तो ये सब आपस में एक-दूसरे को धोखा देने वाले हैं। भारत का नाम बदनाम करने वाले हैं। अगर ये भारतवासी राजाएं राम वाली आत्मा के पूर्वजन्मों में सहयोगी बनकरके रहे होते और विदेशियों से लगातार मुकाबला किया होता तो भारत की ये दुर्दशा नहीं होती। अभी भी ऐसे ही है।


समयः 37.43-43.00
जिज्ञासुः बाबा ने गारंटी दी है, जो बच्चे...में है उनका पूरा परिवार ज्ञान में चलेगा। तो परिवार में बाबा कौन-कौन शामिल हैं?...

बाबाः परिवार में जो भी खून होता है, एक परिवार के, जो भी एक घर में रहने योग्य होते हैं वो सब परिवार है। (जिज्ञासुः दूर-दूर रहें तो?) अगर परिवार के हैं, अगर कोई मुसीबत आ जाए तो कहाँ आएंगे? परिवार में ही आएंगे। वो परिवार है सारा। एक खून है। इसलिए जो भी अभी ज्ञान में चलने वाले है और डायरेक्ट भगवान को पहचाना हुआ है और भगवान के सन्मुख बैठ करके पढाई पढ़ते हैं, मानते हैं, जानते हैं, और चलने का प्रयास करते हैं उन बच्चों को ये वरदान मिला हुआ है - तुम्हारा पूरा का पूरा परिवार ज्ञान में चलेगा। क्यों चलेगा? इसीलिए चलेगा कि परिवार के लोग खूब अपोजिशन कर रहे हैं अभी। अपोजिशन करने के बावजूद भी भगवान ने तुम्हें डायरेक्शन दिया है - भूं-भूं करते रहो ज्ञान की। जैसे भ्रमरी भूं-भूं करके की़ड़े को आप समान बना लेती है, ऐसे ही तुम परिवार में रहते हो, सारा परिवार विरोध करता है, सारा मोहल्ला विरोध करता है, सब संबंधी विरोध करते हैं लेकिन फिर भी तुम ज्ञान की भूं-भूं करते रहते हो। तो उनके कान में तो पड़ता है ना। और कान में पड़ते हुए भी वो तुमको लात मारकरके विभीषण की तरह बाहर तो नहीं निकाल देते। ये तो चाहते हैं कि ये हमारे घर में रहें। चाहते हैं या नहीं चाहते हैं? (सभी ने कहा - चाहते हैं।) चाहते हैं। और तथाकथित ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ? वो तो तुम्हें लात मारकरके निकाल दिया। तो वो तो इतनी ग्रहण शक्ति उनमें है ही नहीं जो तुम्हारी बात को सुनें। ये कम से कम सुनते तो हैं, विरोध करते हैं तो कोई बात नहीं।
जिज्ञासु: नहीं बाबा, हमारा प्रश्नो ये है कि जो दूर रहते है...
बाबाः अभी बात पूरी नहीं हुई। तो जो सुनते हैं और फिर भी तुमको सहन करके अपने पास रखना चाहते हैं, जब संसार में भगवान की प्रत्यक्षता होगी तो सबसे पहले कौन मानेंगे? दुनिया वाले मानेंगे या तुम्हारे परिवार के लोग मानेंगे? (सभी ने कहा - परिवार के लोग।) परिवार के लोग पहले मानेंगे। क्योंकि उन्होंने पहले से ही तुम्हारी ज्ञान की बातों को सुना हुआ है, समझते भी हैं लेकिन मानते नहीं हैं अभी। अभी विश्वास नहीं बैठा हुआ है। जब विश्वास बैठ जावेगा, सूर्य निकल आवेगा उस समय अमृतवेला खतम हो जावेगा। अमृतवेला जो योगीजन पुरुषार्थ करते हैं वो पुरुषार्थ का फल मिलता है। अमृतवेले का महत्व ज्यादा है। ये ज्ञान सूर्य उदय होने वाला है। उदय होने से पहले अमृतवेला चल रहा है।

इस अमृतवेले में जो पुरुषार्थ कर लेंगे भगवान के बताए अनुसार वो ऊँच पद पाने वाले राजघराने में जन्म लेने वाले बनेंगे। कोई महाराजा बनेंगे, कोई महारानी बनेंगे, कोई राजा बनेंगे, कोई रानी बनेंगे। कोई प्रिंस बनेंगे, कोई प्रिंसेज़ बनेंगे। कोई राज्याधिकारी बनेंगे। अकेला राजा थोड़ेही राजाई करता है। करता है क्या? नहीं करता है। लेकिन जब सूर्य निकल आवेगा, सारे संसार में प्रत्यक्ष हो जावेगा फिर अमृतवेला खतम। तो वो परिवार के लोग पुरुषार्थ नहीं कर पाएंगे। झगड़े का माहौल दुनिया में पैदा हो जाएगा। महाभारी महाभारत गृहयुद्ध शुरु हो जाएगा। खून खराबे होंगे। हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई सब आपस में लडेंगे। तो पढ़ाई शांति के टाइम पर होती है या अशांति के टाइम पर होती है? अभी शांति का टाइम चल रहा है। तो अभी मानने के लिए तैयार नहीं हैं। लास्ट में मान तो लेंगे, लेकिन पुरुषार्थ? नहीं कर पाएंगे इसलिए प्रजा पद में आ जावेंगे। स्वर्ग में तो आवेंगे लेकिन ऊँच पद नहीं पावेंगे।

जिज्ञासुः जैसे हम घर-परिवार में पत्नी है, बच्चे हैं। और हमारे परिवार में भाई हैं, माता है। तो वो लोग गांव में रहते है, दूर रहते हैं। तो वो लोग आएंगे या नहीं आएंगे ज्ञान में? दूर रहते हैं, काफी दूर रहते हैं।
बाबाः तुम्हारा फर्ज क्या कहता है? पहले घर का सुधार करोगे या पर का सुधार करोगे? घर में आग लगी हुई हो तो कोई बाहर दूसरे के घर में पानी डालने जाता है? पहले अपने घर के परिवार में अपने बाल-बच्चों को आग से बचाता है। अब जान गए आप कि भगवान आके ज्ञान दे रहा है, दुनिया में आग लगने वाली है, तो आपका फर्ज क्या कहता है? घर में गांव वालों को जाके समझाना या नहीं समझाना? बस इतना कहके दूर हो जाएंगे कि वो तो दूर रहते हैं? आपको नज़दीक जाके सुनाना नहीं चाहिए? (जिज्ञासु: सुनाना चाहिए।) सुनाना चाहिए।

समयः 44.09-45.49
जिज्ञासुः बाबा, 2018 में जैसे बाबा ने बताया है संगमयुगी कृष्ण की प्रत्यक्षता होगी। तो उसके बाद 18 वर्ष फिर से लगते हैं इसी शरीर को कंचनकाया बनाने के लिए।

बाबाः कंचनकाया तब बननी शुरु होगी जब प्रकृति के 5 तत्व सतोप्रधान बनेंगे। ये शरीर प्रकृति का नमूना है। ये 5 तत्वों का शरीर है। ये सतोप्रधान बनना तब शुरु होगा जब 500 करोड़ की दुनिया जो है वो सतोप्रधान वायब्रेशन वाली बनेगी। तो 500 करोड़ की दुनिया सन् 36 तक रहेगी या नहीं रहेगी, 18 वर्ष तक? रहेगी ना। (जिज्ञासु: रहेगी।) तो वायब्रेशन दुनिया के गंदे रहेंगे या अच्छे बनेंगे? 2036 तक, जब तक एटम बम का इकट्ठा विस्फोट न हो... (जिज्ञासु - गंदे बनेंगे।) गंदे बनेंगे ना। तो गंदे वायब्रेशन में प्रकृति जो 5 तत्वों वाली है वो सतोप्रधान बनेगी कि और ही तमोप्रधान होती जाएगी? (सभी ने कहा - तमोप्रधान।) और ही तमोप्रधान होगी। तो ये शरीर सड़ते जावेंगे या सतोप्रधान बनेंगे? शरीर तो सड़ते जावेंगे, परंतु आत्मा योगबल से पावरफुल बनेगी।

Disc.CD No.634, dated 21.09.08, Satna-2
Part-4


Time: 34.36-37.27
Student: Baba, the question was left incomplete. Small snakes are shown around Shankar and the snake shown near Vishnu is big.

Baba: Yes, it is not hanging around the neck. (Student: No, the Sheshnaag.) Yes, he (Vishnu) is lying comfortably. (Student: Which snake is it?) He is lying on it means the biggest snake, call it Sheshnaag or Vasuki naag, it has many hoods. What? How many hoods are shown? Five hoods are shown. They themselves are the forms of Ravan. He (Vishnu) lies comfortably on them. There is no worry. They (the snakes) become pleasurable, too. What? They convert. For example, the Indians converted to other religions and some became Christians, some became Muslims and some became Buddhists. On the arrival of God, the same souls who have converted become the weak deities of the Ancient Deity Religion, the ones with fewer celestial degrees, the ones who have fewer births. Their heads themselves have been shown lying below in the form of snakes. So, there is a difference between Vishnu and Shankar.

They are hanging around the neck of Shankar. They have clung to him! What can he do? When he did not find flowers, he befriended the thorns. These ones have clung to him. He will have to carry on with them. There are the karmic accounts of the previous births. He had births in the Copper and the Iron Ages, didn’t he? He was born with these very kings who learnt Raja Yoga and became kings for many births. Have these kings of India been fighting with each other the most or have they been living affectionately? The kings of India fought with each other a lot. Their eyes used to open (they used to realize) when they were attacked by foreigners. And [then] they used to seek the asylum of the biggest king of India of that period and fought in unity. Otherwise, all these kings are the ones who cheat each other. They are the ones who defame India. Had these Indian kings been helpful to the soul of Ram in the past births and had they confronted the foreigners continuously, then India would not have reached this pathetic condition. It is the same condition even now.


Time: 37.43-43.00
Student: Baba has guaranteed that the children who are in…, their entire family will follow the [path of] knowledge. So Baba, who are included in the family?

Baba: The blood relations in a family, those who belong to the same family, all those who live in the same home are included in the family. (Student: What if they are living far away?) If they belong to the family… if any problem arises, where will they go? They will certainly go to the family. All of them are included in the family. They have a blood relation. This is why, all those who are following the knowledge now, those who have recognized God directly and study the knowledge by sitting face to face with God, those who accept [the knowledge], know it and make efforts to follow it, those children have received this boon: Your entire family will follow the knowledge. Why will it follow? It will follow because now, the people in the family are opposing a lot. Though they oppose, God has given you the direction to keep whispering the knowledge in their ears. Just as a bumblebee buzzes around a worm and makes it equal to itself, similarly, even if the family in which you live, every member in the family opposes you, every person in the suburb opposes you, all the relatives oppose you, keep narrating knowledge. So, it does fall in their ears, doesn’t it? And even if those topics fall in their ears, they do not kick you out [of the house] like Vibheeshan [was kicked out by Ravan]. At least, they want you to live in the home. Do they wish this or not? (Everyone said: They do.) They do. And what about the so-called Brahmakumar-kumaris? They kicked you out [of the centre]. So, they do not have so much grasping power at all to listen to your words. At least these people (family members) listen to you; it doesn’t matter if they oppose [you].
Student: No Baba, my question was that those who stay far…
Baba: The topic hasn’t completed yet. So, those who listen [to you] and yet tolerate you and want to keep you with them… when God is revealed in the world, who will believe [the knowledge] first of all? Will the people of the world believe it or will the family members believe it? (Everyone said: The members of the family.) The family members will accept first because they have already heard the topics of knowledge from you, they understand it as well, but they do not accept it at present. They don’t have faith now. When they have faith, when the Sun has risen, the [time of] amritvelaa will be over. The yogis who make purushaarth (spiritual effort) at amritvelaa obtian the fruits of purushaarth. There is more importance of amritvelaa. This Sun of Knowledge is about to rise. [The time of] amritvelaa, [the time] before the sunrise is going on.

Those who make purushaarth in this amritvelaa as per God’s directions will achieve a high post and be born in royal clan. Some will become emperor, some will become empress, some will become kings, some will become queens, some will become prince and some will become princess. Some will become royal officers. A king does not rule alone. Does he? He doesn’t. But when the Sun has risen, when it is revealed in the entire world, the [time of] amritvelaa will be over. So, those family members will not be able to make purushaarth. An atmosphere of fights will be created in the world. The massive civil war of Mahabharata will begin. Bloodsheds will take place. Hindus, Muslims, Sikhs and Christians, all will fight among themselves. So, do the studies take place when there is peace or when there is restlessness? Now a peaceful time is going on. They are not ready to accept now. They will certainly accept in the end, but what about purushaarth? They will not be able to make [purushaarth]; that is why they will achieve the post of subjects. They will no doubt go to heaven, but they will not achieve a high post.

Student: For example, there are wife and children in my family at home. And there are brothers, mothers in my family; those people live in the village, they live far off. Will they come in knowledge or not? They live far away, they live very far.
Baba: What is your duty? Will you reform the home first or will you reform others first? If the house is on fire, does anyone go outside to put out the fire in the house of someone else? First he saves the children in his family from fire. Now, you have come to know that God has come and is giving knowledge, the world is going to catch fire, so, what is your duty? Should you go to their house and explain the people in village or not? Will you refrain just by saying that they live far away? Should you not go to them and narrate? (Student: It should be narrated.) You should narrate.

Time: 44.09-45.49
Student: Baba, Baba has said that the Confluence Age Krishna will be revealed in 2018. Then after that it takes 18 years again to rejuvenate (kancankaayaa) the body.

Baba: The body will start to rejuvenate when the five elements of nature become satopradhaan . This body is a model of nature. This body is made up of five elements. It will start becoming satopradhaan when the world of 500 crores (five billion) [souls] will have satopradhaan vibrations. So, will the world of 500 crores exist till 2036, for 18 years [after 2018] or not? It will exist, will it not? (Student: It will.) So, will the vibrations of the world be dirty or will they become good? Until 2036, until the atom bombs are exploded all together… (Student: They will become dirty.) They will become dirty, won’t they? So, will the nature consisting of five elements become satopradhaan or will it continue to become tamopradhaan because of the dirty vibrations? (Everyone said: Tamopradhaan.) It will become even more tamopradhaan. So, will these bodies continue to decay or will they become satopradhaan? The bodies will certainly continue to decay, but the soul will become powerful through the power of Yoga. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 01 Dec 2014

वार्तालाप-634, दिनांक 21.09.08, सतना-2
भाग-5


समयः 45.51-47.42
जिज्ञासुः बाबा, जैसे कोई शरीर छोड़ता है तो वो आत्मा पुनर्जन्म लेती है। दूसरा जन्म जाकर लेती है। वह आत्मा कैसे गर्भ में प्रवेश कर लेती है? कैसे उसको पता चलता है, उस आत्मा को कि..?

बाबाः आत्मा को... कहीं बच्चा होता है, बच्चा बनकरके जब बड़ा होता है तब तक भी उसको पता कुछ भी नहीं चलता। अभी आप इतने बड़े हो गए। आपको कुछ पता चला क्या? ये कोई बात नहीं हुई। हाँ, ये है कि आदमी जब शरीर छोड़ता है तो शरीर छोड़ने से 4 महीने पहले से ही माँ का गर्भ उसके संस्कारों और वायब्रेशन के अनुसार तैयार होने लगता है। क्या? मनुष्य के शरीर छोड़ने से 4 महीने, 5 महीने पहले से ही कोई माता के गर्भ में उस आत्मा के वायब्रेशन के अनुसार, उस आत्मा के कर्मों के अनुसार, संस्कारों के अनुसार वो पिण्ड तैयार हो जाता है हाथ, पांव वाला, निर्जीव पिण्ड। क्या? अगर उसने टांग ज्यादा चलाई होगी, टांग से ढ़ेरों की हत्या कर दी होगी मार-मार के लातें तो लंगड़ा पैदा होगा। आँखों से दुष्कर्म करके, व्यभिचारी आँख बनाकरके बहुत-सी कन्याओं-माताओं को बहुत दुःख दिया होगा; आज इससे आँख लड़ाई उसको फंसाय लिया। फिर उसको छोड़ दिया। फिर दूसरे से आँख लड़ाई, उसको छोड़ दिया। तीसरे को छोड़ दिया। ऐसे मजे ले-लेकर के आँखों का बहुत दुष्कर्म कर दिया। तो कैसा पैदा होगा? अंधा पैदा होगा।

समयः 47.44-51.10
जिज्ञासुः बाबा, बाली और सुग्रीव दानों भाई था। लेकिन बाली जो है वो जिससे लड़ता था उसका आधा ताकत उससे आ जाता था। लेकिन राम को ज्यादा मानते थे सुग्रीव। और सुग्रीव लड़ते थे बाली से तो उसका आधा ताकत उसमें आ जाता था। ये कैसी बात है?

बाबाः बाली का लड़का कौन था? (जिज्ञासु - अंगद।) अंगद। जिसने अपना अंग-अंग ईश्वरीय सेवा में अर्पण कर दिया। तो अंगद किसका लड़का है? बाली का। बाली ने अपने भाई का सारा राज्य हरण कर लिया। पत्नी का भी राज्य हरण कर लिया। किसने? बाली ने। और बाली को ये वरदान दे दिया। क्या? कि जो सन्मुख होकरके लड़ेगा, माने सामना करेगा उसकी आधी ताकत खत्म हो जावेगी। यहाँ मुरलियों में भी बाबा ने बोला है, बाप का तो कब सामना नहीं करना चाहिए। क्या? जो बाप का पार्ट है प्रजापिता, मनुष्य सृष्टि का हीरो पार्टधारी, शंकर, उसका अगर कोई वाचा से, क्रोध की दृष्टि से, कर्मेन्द्रियों से विरोध करता है तो क्या रिजल्ट आयेगा? उसकी आधी ताकत, जो विरोध करने वाला है, उसकी आधी ताकत का उसी समय हरण हो गया। माने वो कभी विजयी नहीं हो सकता। इसलिए फिर राम ने क्या किया? राम ने सात ताड़ों को सामने रखा। जो सात ताड़ के वृक्षों को एक बाण से ढावेगा वो बाली को मार सकता है। ताड़ के वृक्ष बहुत ऊँचे होते हैं। लेकिन छायादार नहीं होते। ये जो सात विधर्मी नारायण हैं ये ग्रेट फादर्स माने जाते हैं मनुष्य सृष्टि में । बहुत ऊँचे माने जाते हैं। लेकिन सुख की, शांति की छाया दुनियावालों को नहीं दे सकते। इनको सामने रखकरके उसका वध किया जाता है।

समयः 51.11-52.48
जिज्ञासुः बाबा, जैसे कोई आत्मा शरीर छोड़ती है, शरीर छोड़ने के 4 महीने पहले उसका पिण्ड बन जाता है। आत्मा को कैसे पता चलता है कि हमारा वही पिण्ड है?

बाबाः अरे तुम्हें अभी मालूम पड़ा? पूर्व जन्म की कोई भी बात किसी को मालूम पड़ती है क्या? (जिज्ञासु: फिर कैसे उधर पहुँच जाती है?) अपने संस्कारों के अनुसार पहुँचती है। अपने संस्कारों के अनुसार जिस माता के गर्भ में पहुँचना होगा वो हिसाब-किताब उसने पूर्व जन्म में ही बांध लिया। जहाँ जीत वहाँ जन्म। वो जो माता निमित्त बनेगी, माँ-बाप निमित्त बनेंगे, जिन माँ-बाप को उस आत्मा का बच्चा बनने के बाद टट्टी-पेशाब साफ करनी पड़ेगी, ऐसा कर्मबंधन उन माँ-बाप ने पूर्व जन्म में बांध लिया है। बच्चे माँ-बाप के दास-दासी बनते हैं या माँ-बाप बच्चों के दास-दासी होते हैं? (सभी ने कहा - माँ-बाप।) सारी जिंदगी की कमाई बच्चों को सौंप देते हैं। जन्म देते समय, पालना करते समय, पढ़ाई पढ़ाते समय, धन कमाते समय बच्चों के लिए कितना दुःख भोगते हैं। पूर्वजन्म से ही ये प्रारब्ध लाता है।

समयः 52.49-57.45
जिज्ञासुः बाबा, ब्रह्मा के मुख से जो वाणी निकली उसे वेदवाणी कहा जाता है। तो फिर ये उपनिषद् जो लिखी गयी, ये?

बाबाः वेद पुराने ते पुराने हैं। वेद के बाद तुरंत उपनिषद् नहीं बने। व्याख्या उपनिषदों के रूप में नहीं हुई। वेदों से निकले आरण्यक, उनसे निकले ब्राह्मण, उनसे निकले उपनिषद्। उसके बाद बने हैं पुराण। ये एक दूसरे की व्याख्याएं होती रहीं। क्या? जैसे ब्रह्मा के मुख से जो वाणी निकली, उस मुख से निकली हुई वाणी को व्याख्या की जाती है। अव्वल नंबर के ब्राह्मण के द्वारा व्याख्या की जाती है। तो जो व्याख्या है उनको ब्राह्मण कहा गया। फिर उस व्याख्या को जो गहरे से गहरा फालो कर लेते हैं प्रैक्टिकल जीवन में वो आरण्यक कहे गए। आरण्यक माने जंगल। तुम बच्चों की विजय कब होगी? जब सन्यासी निकलेंगे तब तुम्हारी विजय हो जावेगी। उस ज्ञान की गहराई को जिन सन्यासियों ने जन्म-जन्मान्तर पवित्रता धारण की है वो उस ज्ञान की गहराई को गहराई तक पकड़ेंगे। और गहराई तक पकड़ने के कारण वो जो व्याख्या करेंगे बाबा की वाणी की वो आरण्यक कही जाती है।

बाद में फिर बनते हैं उपनिषद्। उप माने नज़दीक। नज़दीक बैठ करके ज्ञान दिया जाता है। जैसे कठोपनिषद्। एक गुरु और एक समझने वाला चेला। प्रजा कब बनती है? और वारिसदार कब बनता है? एक बैठ करके एक को समझाएगा, सात दिन का कोर्स देगा, फोर्स भरेगा, तो क्या बनेगा? वारिसदार बनेगा। बाप का बच्चा बनेगा। राजाई का हकदार बनेगा। अगर प्रदर्शनी कर दी और ढ़ेरों के ढ़ेर आ गए और प्रदर्शनी में समझ करके चले गए। वो क्या बनते हैं? वो प्रजा बन जाते हैं। तो ऐसा भी टाइम आवेगा कि एक बैठ करके एक को सात दिन तक समझावेगा। दूसरे की दृष्टि, वृत्ति, वाचा, उसका व्यभिचार नहीं लगेगा। क्योंकि जब कोई किसी को समझाता है ज्ञान तो दृष्टि से दृष्टि भी मिलानी पड़ती है। वो दृष्टि अव्यभिचारी होनी चाहिए या व्यभिचारी होनी चाहिए?
(सभी ने कहा – अव्यभिचारी।) वाचा। शिष्य प्रश्न पूछेगा, जो समझाने वाला है वो जवाब देगा। किताबें और शास्त्र तो लिमिटेड होते हैं। वो प्रश्नों का समाधान नहीं करते। रामायण पढ़ लो। सबके अलग-अलग प्रश्न आयेंगे रामायण पढ़ने के बाद। उन प्रश्नों का समाधान रामायण की किताब करेगी? नहीं करेगी। कोई भी शास्त्र हो। वो प्रश्नों का समाधान नहीं करेगा। सन्मुख बैठकरके अगर सच्चा ज्ञानी ब्राह्मण होगा तो हर प्रश्न का समाधान करेगा। कोई शास्त्र रिफर करने की जरूरत नहीं। क्योंकि ईश्वरीय ज्ञान शास्त्रों से नहीं आता है। ज्ञान सागर बाप से आता है। तो उपनिषद बने । फिर बाद में उपनिषदों की व्याख्या पुराण बने। ढ़ेर सारे पुराण हैं। अच्छाो, टाईम हो गया।

Disc.CD No.634, dated 21.09.08, Satna-2
Part-5


Time: 45.51-47.42
Student: Baba, for example, if anyone leaves the body, that soul is reborn. It takes another birth. How does that soul enter the womb? How does that soul come to know…?

Baba: As regards the soul, suppose there is a child [and] when that child grows up, even then he doesn’t come to know anything. You have grown so big; did you come to know anything? This is not sensible. Yes, but it is true that when a person leaves his body, then four months before leaving the body, the foetus starts developing in [the next] mother’s womb according to the sanskaars and vibrations [of that soul]. What? Four [or] five months before a person leaves his body, the foetus, the non-living foetus with hands and legs develops in the mother’s womb in accordance with the vibrations, in accordance with the actions, sanskaars of that soul. What? If he has used his leg more, if he has killed many people with his legs by kicking them continuously, then he will be born lame. If he has given sorrow to many virgins and mothers by committing evil actions through the eyes, by making the eyes adulterous; [for example,] today, he exchanged glances with one girl and trapped her [in his love]; then he left her. Then he exchanged glances with another girl and he left her. He left the third girl [after doing the same]. He enjoyed pleasure through the eyes in this way and committed evil actions a lot; so, how will he be born? He will be born blind.

Time: 47.44-51.10
Student: Baba, Bali and Sugriiv were brothers. But with whomever Bali used to fight, half the strength [of the opponent] used to come in him. But Sugriiv had a lot of faith in Ram. And when Sugriiv used to fight with Bali, half of his strength was transferred to him (Bali). How is it so?

Baba: Who was Bali’s son? (Student: Angad.) Angad. The one who dedicated every part of the body (ang) in the service of God. So, whose son is that Angad? Bali’s son. Bali seized the entire kingdom of his brother. He seized the kingdom of his wife as well. Who? Bali. And Bali received this boon. What? That whoever fights with him being face to face, i.e. whoever confronts him will lose half of his strength. Baba has said here, in the Murlis as well: you should never face the Father. What? What will be the result if someone opposes the one who plays the part of the Father, Prajapita, the hero actor of this human world, Shankar through words, through vision, through the karnendriyaan ? He [meaning] the opponent will lose half his strength at that very moment. It means, he will never be victorious. This is why, what did Ram do? Ram stayed [behind] seven palm trees in front of him. [It is said:] The one who makes seven palm trees fall down with [just] one arrow can kill Bali. Palm trees are very tall, but they do not provide shade. These seven vidharmi Narayans are considered to be the great fathers in the human world. They are considered to be very great. But they cannot provide the shade of happiness and peace to the people of the world. [Bali] is killed by keeping them in front.

Time: 51.11-52.48
Student: Baba, for example, a soul leaves the body; four months before it leaves the body, the foetus for it is formed. How does the soul come to know which is its foetus?

Baba: Arey, did you come to know [about your soul]? Does anyone come to know about his past birth? (Student: Then how does it reach there (that womb)?) It reaches there as per its sanskaars. It has already formed karmic accounts in the previous birth with the mother in whose womb it has to enter as per its sanskaars. [It is said:] someone is born where he gains victory. The mother who becomes instrument, the parents who become instrument, the parents who will have to clean the excrements of that soul when it is born as their child, those parents formed such karmic accounts [with that soul] in the past birth . Do the children become the servants of parents or are the parents the servants of their children? (Everyone said: The parents.) They entrust the earnings of the entire life to their children. They suffer so much sorrow for the children while giving birth [to them], while sustaining them, while teaching them, while earning money. [The child] brings this reward [of his deeds] from the previous birth itself.

Time: 52.49-57.45
Student: Baba, the Vani (Murlis) that came out from the mouth of Brahma is called Ved Vani. Then, what about these Upanishads that were written?

Baba: Vedas are the most ancient. Upanishads were not written immediately after the Vedas. They were not interpreted in the form of Upanishads. Aaranyaks emerged from the Vedas [and then] the Brahmanas emerged from the Aaranyaks; Upanishads emerged from the Brahmanas. After that the Puranas were written. They were clarified one after the other in this way. What? For example, the Vani that came out from the mouth of Brahma. Now, the Vani narrated through that mouth is clarified. It is clarified by the number one Brahmin. So, the clarifications are called Brahmanas. Then, those who follow those clarifications in the deepest way in their practical life are called Aaranyaks. Aaranyak means jungle. When will you children gain victory? You will become victorious when the Sanyasis come [in knowledge]. The Sanyasis who have assimilated purity for many births will grasp the depth of this knowledge to the deepest extent. And because of grasping it deeply, the clarifications that they give for Baba’s Vani is called Aaranyak.

Later on the Upanishads are written. ‘Up’ means near. The knowledge is given by sitting close. For example, the ‘Kathopnishad’; there is one guru and [just] one disciple to understand. When are subjects formed and when are inheritors formed? When one [person] sits and explains [only] one [person], when he gives him the seven days course, fills force in him, then what will he (the listener) become? He will become an inheritor, he will become the Father’s child [and] he will become the one to have the right for kingship. If an exhibition is held, many come [there] and go away after understanding [the clarifications given] in the exhibitions, what do they become? They become subjects. So, one such time will also arrive when one [person] will sit and explain to one [person] for seven days. There won’t be the adulteration of the vision, vibrations and speech of the second person. It is because when someone explains knowledge to someone else, he also has to look into his eyes; should that vision be unadulterated or should it be adulterated?
(Everyone said: Unadulterated.) [In case of] speech; the student will ask questions and the teacher will reply them. The books and the scriptures have limited [knowledge]. They don’t have answers for the questions. Read the Ramayana; everyone will have different questions after reading the Ramayana. Will the book of Ramayana have answer for those questions? It will not. It may be any scripture, it won’t have answers for the questions. If he is a true knowledgeable Brahmin, he will sit in front and answer every question. There won’t be the need to refer (study) any scripture because the knowledge of God is not obtained from the scriptures. It is received from the Ocean of Knowledge, the Father. Thus, the Upanishads were formed. Later, the clarifications of those Upanishands were written into Puranas. Many Puranas [were written]. Acchaa, the time is over. (Concluded)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 08 Dec 2014

Disc.CD No.1000, dated 29.06.10, Jorsymbol (Nepal)
Part-1


Time: 00.26-04.20
Baba: Yes.
Student: Baba, for example, the soul of Mahatma Buddha enters the body of Siddhartha Gautam in the Copper Age and plays the part…
Baba: The soul in the Copper Age…?
Student: The soul of Mahatma Buddha enters the body of Siddhartha Gautam and spreads the Buddhist religion.
Baba: Yes.
Student: Later, when Siddhartha Gautam has left the body, there are two souls. One soul enters the womb and where does the other soul go?
Baba: The other soul also enters the womb. That [soul] also becomes degraded (taamasi) because of coming in the colour of the company.
Student: The soul of Mahatma Buddha…
Baba: The satopradhaan soul of Mahatma Buddha comes from above, the Supreme Abode (Paramdhaam). But the one with whom it comes in the colour of the company, is he the Supreme Father Supreme Soul? Is he ever pure? Or is he the ever sinful one of that period? Arey, Abraham comes from above in the beginning, in the very beginning of the Copper Age. Who is the ever sinful soul of that period? Abraham, the ever pure one of that period comes from above. In whom does he come? Will he come in the ever sinful one or will he come in the pure one? He comes in the sinful one. So, will he (Abraham) fall or will he rise high because of coming in the colour of his company? He falls. The Supreme Father Supreme Soul is ever pure. So, despite coming in a sinful body, He isn’t affected at all. He doesn’t come in the cycle of birth and death. It is the same [in the case] of Siddhartha; he is the most sinful soul of that period. Siddhartha is the most sinful soul of that period; the soul of Mahatma Buddha, the purest soul of that period enters him. But does it enter [the one who is] ever pure?
Another student: Baba, the intention of his question is…
Baba: Let him speak.
Student: Later, the soul of Mahatma Buddha enters the womb.
Baba: It is because it became ever sinful by staying with the ever sinful one. That is why he will have to take birth through the womb. Don’t you understand? (Student: I have understood.) Yes.
Student: Where will it play the part afterwards?
Baba: In the Buddhist religion.
Student: No. [The soul] of Mahatma Buddha.
Baba: [The soul] of Siddhartha?
Student: [The soul] of Mahatma Buddha.
Baba: He will be in the Buddhist religion. It is he who has established that religion. So, the one who establishes the religion also sustains it. (To another student:) Yes, now tell about what was his intention?
Another student: The soul of Mahatma Buddha enters Siddhartha, doesn’t it? The body which it enters, do both the souls stay together at that time?
Baba: If not together, will they remain separate?
Another student: Will his soul (the soul of Siddhartha) disappear after the entrance [of the soul of Mahatma Buddha] or will his activities also…
Baba: Arey, it will remain in that very [body]. Why will it live in other [body]?
Another student: It will certainly stay in that body but will it show its activities or not?
Baba: Who?
Another student: The soul of Siddhartha.
Baba: The soul of Siddhartha shows its activities but it (the soul of Mahatma Buddha) captures it.

Time 04.25-05.10
Student: Baba, will the 4.5 lakh (450 thousand) Suryavanshi souls become the deities through this very body in the Golden Age?

Baba: Yes, this body will definitely remain. Initially, the body [will be] tamopradhaan ... it has been said [in the Murli]: the body will continue to decay and the soul will become more and more powerful. The powerful souls will leave the decayed body in ice. When the soul again descends from above (the Soul World), the ice will automatically be removed at that time and it will enter the same body and then play the part.
Student: Will the same [souls] become deities in the Golden Age?
Baba: They will become deities.

Time: 05.10-05.55
Student: Baba, the Christians say, when Christ comes, he will take us along with him. Then those who are [buried] in ice…

Baba: Those who are firm Christians, they won’t accept [the knowledge even] when God narrates it. They will not accept even if Brahma descends [to the earth]. When will they accept? They will accept when the soul of Christ understands this knowledge.
Another student: Will the Christians accept [the knowledge]?
Baba: Christians, yes. Those who are the firm Christians, those who never convert, they will not accept now. Unless their religious fathers accept [this knowledge], they are not going to accept it.

Time: 06.03-07.45
Student: The virgins, sisters and mothers who surrender to Baba…

Baba: What do they do to Baba? (Someone said: They surrender.) Yes.
Student: ... they are called ‘the Queen of Jhansi’.
Another student: Men call them ‘the Queen of Jhansi’.
Baba: Yes.
Student: Baba, what is the meaning of ‘the Queen of Jhansi’?
Baba: What is the meaning of ‘the Queen of Jhansi’?
Another student: The virgins and mothers who surrender to Baba, people call them as ‘the Queen of Jhansi’.
Baba: Why?
Another student: What is the meaning of it?
Baba: How will all become ‘the Queen of Jhansi’? Will everyone [from among them] be able deceive the English people to the extent the Queen of Jhansi deceived them? Yes, this is possible that if the Queen of Jhansi takes on a fearsome (vikraal) form and performs the dance of destruction (taandav) before the demons, if she takes on the form of Mahakali , she can have small or big arms, she can have small and big fingers; the fingers also become the helpers as well as the arms become the helpers. Some become helpers in righteous [tasks] and some become helpers in the leftist [tasks]. Some arms are above and some arms are below. So, they can be helpers in this way but there will be just one Queen of Jhansi. ... (to be continued)

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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 09 Dec 2014

Disc.CD No.1000, dated 29.06.10, Jorsymbol (Nepal)
Part-2


Time: 07.50-09.53
Student: As regards the decaying of the body… has it been said about [decaying of the body] through diseases or for what has it been said?

Baba: The body at present… is the atmosphere of the world, the vibrations [of the world] spoiling or is it reforming? Are the vibrations of human beings spoiling or are they reforming? And is the number of human beings increasing or is it decreasing? (Someone said: It is increasing.) And will it continue to increase till the end or will it decrease? Will the vices continue to increase or will they decrease? They will increase more and more. So, will the five elements of the world become more tamopradhaan or will it become satopradhaan? (Someone said: It will become tamopradhaan.) The food and the water is becoming so much contaminated now itself. So, when this contaminated food and water will reach the degraded stage by leaps and bounds, will the bodies decay or will they reform? (Someone said: They will decay.) No matter, how many medicines they prepare, no matter how many injections they prepare, no matter how doctors are employed, no matter how many hospitals they increase, it (the body) is not going to reform. It will worsen more and more. What is it that will reform? If you want to reform anything, you can reform the soul through the presence of the Supreme Soul. Those who make purushaarth (spiritual effort), their soul will continue to become powerful. The bodies will anyhow decay. The powerful soul will be able to extract service even through the decayed body. That is why it has been said that when the old souls come in the service field, even they will grow wings of service. They will fly.

Time: 09.54-12.22
Student: Many times we remain in this (remembrance). If we have any disease, people say: you people are yogi, you follow Baba’s knowledge; you shouldn’t have any disease.

Baba: We are also patients but we are not concerned about food and drinks like you. You are dying in its concern so much! (Someone asked: Baba when will we fly?) When you come in [the field of] service? (Someone said: Even now we are doing service, aren’t we?) Now you are busy in the household [affairs]. [There is the feeling of] my, my, my, my, my. (Someone said: Shall we leave the household?) What? (Someone said: Should we leave the household and do [service]?) Why don’t you have household in the unlimited? Have you found the household of the unlimited Father or have you found it in the limited? (Someone said: We have found [the household of] the unlimited Father.) Then? And are there split ups in the limited households, are the split ups increasing or are they decreasing? All the householders who are sitting here, reply this by your experience, are split ups increasing in the household, are the hearts breaking or are they joining even after coming in the knowledge? They are breaking. Swans and herons won’t be able to live together. Whichever soul belongs to whichever category, it will stay happy only when it lives with the soul of that category. Mud will mix up with mud; milk will mix up with milk. When the rivers of blood start flowing, like it happened in the year 1947, everyone will run away to save their heads. Who is our son, who is our daughter, who is the mother, who is [our] aunt, who is housewife, they will forget everything.
Another student: Baba, will we forget ShivBaba also?
Baba: You will forget ShivBaba? Only you can be that person. You alone can be that. [Only] you can be the person who has such thought. No. No. No. 

Time: 12.26-14.16
Student: Baba runs alone?

Baba: No, no. Hang two-four [people] around your neck, [keep them] in your flanks and go. Baba has said a good number of times: the child will not remain your child. He is not that now either. The Father will not remain the Father, the brother will not remain the brother. All the relations are breaking and they will continue to break in the future. After going to the Supreme Abode (Paramdhaam), only one relation will be left. What? It was said today as well. What? Souls are mutually brothers. It is not about that Paramdhaam. [It is about] which Paramdhaam? The Paramdhaam which you will bring down on this world. You will see everyone only as souls who are mutually brothers. You will not see anyone as the sister either. You will attain such a high stage. Well, the atmosphere of this world is certainly spoiling. No one can reform it. The environment of the world of Brahmins will continue to improve. Even in the world of Brahmins, they are number wise .

Time: 14.20 to 16.22
Student: Baba, when we run Gita paathshaalaa, it happens like this in the Gita paathshaalaa ... Baba has said that if someone doesn’t come [for classes] for more than two months, it means he has died. There (in the Gita paathshaalaa) some [people] come and some don’t. Should we go to every house to give the news about Baba’s arrival at a particular place at a particular time or should we give the news only to those who come there (to the Gita paathshaalaa)?

Baba: Those who stay nearby, you can contact them through mobile [phone].
Student: Some don’t come for one month. Some haven’t been coming since two-three months…
Baba: It has already been said that those who haven’t been coming for two months, those who don’t attend the class at all, those who don’t listen to Baba’s letter at all… Baba sends letter, [i.e.] Murli daily. Those who don’t have interest in listening at all, they don’t write letter to Baba either, they don’t even want to read or listen to the Murlis they receive at home, then will you give the message to the dead bodies, [to the ones] who have died?
Student: And should a sangathan class (gathering) be held at the place where there are not even five souls or not?
Baba: What is the use of holding sangthan class where there is no Gita paathshaalaa at all?
Student: It was a Gita paathshaalaa earlier...
Baba: Past is past. Now the unity has broken because of impurity. If [the level of] purity increases, the [level of] unity of the Gita paathshaalaa will rise and if [the level of] purity decreases, the unity of the Gita paathshaalaa will continue to break.
Student: They say that it (the sangathan) should also be held there for the service of new souls. [But] the place where we go, no new soul comes there, at the place where we are called [for service].
Baba: When they (those who call) do not do service at all, how will a new soul come there?
Student: Then should we hold [the sangthan] there or not?
Baba: Then why does the question of holding it arises? We Brahmins will go and gather at Baba’s house. What is the use of gathering at the place which is not all Baba’s house anymore?

Time: 16.28-17.12
Student: Baba, how to understand whether the percentage of remembrance is [of the level of] the Abode of Sorrow (Dukhadhaam), the Abode of Happiness (Shantidhaam) or the Abode of Peace (Shantidhaam)?

Baba: There is no need to remember [the Father] in the Abode of Happiness at all. There, we don’t recognize the Father at all so that we may remember Him.
Student: Baba, how should we estimate the percentage of remembrance [to know] it is of which stage?
Baba: Your happiness will increase. The more the percentage of remembrance increases, the mercury of joy will rise to the extreme point. Even if somebody wants to humiliate us, we will listen [to his words] through one ear and leave it out through the other. We will not at all be affected by the defamation. ... (to be continued)

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arjun
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Re: Q&A: PBK Murli discussions

Post by arjun » 10 Dec 2014

Disc.CD No.1000, dated 29.06.10, Jorsymbol (Nepal)
Part-3


Time: 17.20-21.00
Student: Baba, there is one question.
(Someone said: He hasn’t undergone bhatti.) ‘Om’ is a name of the Supreme Soul. [The people of] all the religions believe in this word.
Baba: What about the Supreme Soul?
Student: ‘Om’ is a name of the Supreme Soul.
Second student: They consider [the word] ‘Om’ as God. (Someone said: Let him say.)
Baba: Do you live in this suburb?
Third student: No, no. He hasn’t undergone bhatti.
Baba: Haven’t you undergone bhatti yet?
Third student: No, no.
Baba: Here, you have to take the seven days course at first. Later, you have to undergo bhatti and then you can sit in the class. Yes, that is why until you have become mature in bhatti, in the womb; what? Till then you haven’t become the child of the Father at all. (Someone said: He has undergone bhatti.) When? (Someone said: He has undergone bhatti.) Where did you undergo bhatti? (A mother said: Baba, he attends the class.) He attends the class but he hasn’t undergone bhatti, has he? So, first make him undergo bhatti and then allow him to sit in Baba’s class. [We] come to know, we come to know just by the speech whether someone is a child of God or not. ‘Om’ is called God because three letters are combined in it. Aa, U, Ma. Aa means Brahma, U means Vishnu, and ‘Ma’ means Mahesh. These are the three tasks of God the Father. The establishment of the new world takes place through Brahma, the destruction of the old world takes place through Mahesh (Shankar) and the new world that remains after the destruction has taken place, is sustained through Vishnu. These are the three elder children of the Father. The child is called the soul. He is called the piece of the heart. The soul of Father is held in the child. So, these three children are the three forms of the Supreme Soul Father; they are [together] called ‘Trimurti Shiva’. All the three souls are beneficial. They are not harmful even to the slightest extent in their task. That is why they are called Trimurti Shiva, the three personalities of Shiva. Every soul performs these three tasks. It establishes divine virtues in itself, destroys the bad traits and it sustains the good qualities [in itself]. The thing with these powers of establishment, sustenance and destruction [in itself] is called the soul. So the soul is also an embodiment of Aa, U, Ma – ‘Aum’. This is why they have said atma so Parmatma (the soul is equal to the Supreme Soul) in path of Bhakti (devotion).

Time: 21.04-22.54
Student: Baba, what is the meaning of Ekaadashi? Why do they fast on this day?

Baba: Ekaadashi means one plus ten equals to eleven. The eleventh day of the first half or the latter half of a month is called Ekaadashi. One plus ten equals to eleven ‘Rudragan ’. God especially brings about the task of destruction through these eleven Rudragan. These are the souls who sacrifice everything and become the instruments for the destruction of the world. They themselves become langotia and they make their entire group of the Rudramaalaa (the rosary of Rudra) langotia. That is why people fear that if they worship Shankarji, he will make them also bhabhutia.
Another student: Baba, what is the meaning langotia?
Baba: [It means] to wear [just] a loin-cloth; the one who has nothing with him. So, it is the fast of Ekaadashi which is especially observed by the eleven souls.

Time: 22.58-27.11
Student: Baba, the mothers who are illeterate, those who do not understand the knowledge that much either…

Baba: Literate? You are speaking about which studies? You are speaking about which studies? (Student: The knowledge…) Arey! Are you speaking about the studies of knowledge or are you speaking about the worldly studies? Which studies haven’t you studied? You are crying for which studies?
Student: There are some souls in the Gita paathshaalaa…
Baba: Leave that topic. First give the reply of what I am asking. You are crying for which studies?
Student: I am crying for Baba.
Baba: Are you crying for Baba? Arey! You are saying: Baba, I am illiterate. So for which studies are you crying? (Student: For knowledge.) Are you crying for the studies of knowledge? Hasn’t Baba taught you the study of knowledge?
Student: He has.
Baba: Why are you speaking lie? You are crying now: Baba, I am illiterate.
Student: Of remembrance...
Baba: You are illiterate in the studies of remembrance? It is good if you haven’t studied the worldly studies. In fact, Baba has forbidden [for this]; you should not study the worldly studies yourself nor should you make the children study it. If you make them study it, then the world is teaching the study of [becoming] adulterated. It will make you into dogs and bitches. Even in case of small children... it has been said in today’s Murli that there is no need to educate the small children either. Today, the small children are spoiling. Hundred percent of the potamails that are coming to Baba are of the small children. They become impure in their childhood itself. (Someone said: Baba, at least the brothers will have to study, won’t they?) Why? Do you want them to do job? Will you make them into doctors? Will you make them into surgeons? (Someone said: We want to educate them for the sustenance of body.) Sustenance of body; it means, those who are Brahmins, those who have become Brahmins, the children of the Father, their bodies are not being sustained, they have died. You will see in the future that all the businesses will stop. All the businesses are going to suffer loss. Which will be the only business that flourishes in the world? The business of the knowledge of God will flourish. The whole world will get involved in the business of knowledge. The stomach requires [only] two rotis for making purushaarth (spiritual effort). They have deposited money in the banks all over the world. Nothing will be useful.

(To the other students:) The brothers whose time is up may leave. This discussion of the ones with a doubtful intellect goes on and on. (Someone said: On one hand you tell [us] to ask questions and on the other hand you call us the ones with a doubtful intellect.) So should you keep the rubbish filled inside [you]? (Someone said: We will have to remove it.) So remove it. I am not talking about them (those who ask questions). I am talking about those for whom it is necessary to go home. Their buses are about to depart. (Someone said: Baba, we lock our homes and come, there are family members; so, we will have to go, won’t we?) Yes, you may go. Why are you sitting here? This discussion is going on for those who have rubbish filled in them, so that they can remove it and put in front of Baba. [So that] Baba may find a way out of them. Otherwise the rubbish will remain filled in them [and they will think:] Arey, it is necessary to educate the children. At least, sons should be educated otherwise, who will fill our stomach? Our teeth will fall, the hairs will turn gray, we will become old, who will sustain us? Baba says that all are [like] scorpions and spiders. No one will be there who sustain. The children today don’t sustain their parents. If you have that rubbish inside you, then remove it. ... (to be continued)

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