Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 16 Apr 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2691, दिनांक 05.11.2018
VCD 2691, dated 05.11.2018
प्रातः क्लास 20.9.1967
Morning Class dated 20.9.1967
VCD-2691-extracts-Bilingual

समय- 00.01-22.09
Time- 00.01-22.09


प्रातः क्लास चल रहा था - 20.9.1967. बुधवार को चौथे पेज में दूसरी-तीसरी लाइन चल रही थी। बात चल रही थी क्रियेटर किसको कहा जाता है। क्रियेशन करने वाला। क्रियेटर और क्रियेशन। रचयिता और रचना। निराकार को कहेंगे या साकार को कहेंगे? हँ? क्रियेटर तो साकार ही होगा ना क्योंकि साकारी सृष्टि है तो साकार क्रियेटर होगा। घड़ा साकार है तो कुम्हार भी साकार होगा। तो शिवबाबा भी क्रियेटर है ब्रह्मा द्वारा। हँ? कौनसे ब्रह्मा द्वारा? हाँ, शिवबाबा जिसे कहा गया वो तो जरूर शिव ग्रांडफादर बनता है उसमें तो शिवबाबा कहते हैं। तो निराकार शिव साकार बना ना। हँ? परन्तु वास्तव में तो शिव सदा निराकार है। भले प्रवेश करता है तो भी निराकारी स्टेज में रहता है। तो जिसमें प्रवेश करता है वो हुआ ब्रह्मा। नाम देते हैं ना। जिसमें प्रवेश करते हैं उसका नाम ब्रह्मा देते हैं। बाकि जिसमें पहले प्रवेश करते हैं तो कहेंगे परमब्रह्म। तो क्रियेटर तो एक होगा या अनेक होंगे? एक होगा। हँ? तो वो एक ब्रह्मा जिसे परमब्रह्म कहा जाता है, गीता में महतब्रह्म कहा है, महत कहो परम कहो, बात तो एक ही है। बाकि और मनुष्यों के द्वारा जो ब्रह्मा नामधारी हैं; तो देखो ये भी छोटे-छोटे ब्रह्मा हैं जैसे, कौन? छोटे-छोटे ब्रह्मा कौन है? हँ? वो छोटे-छोटे ब्रह्मा सारे ही दाढ़ी-मूँछ वाले हैं? हाँ, जो ब्रह्मा के चार मुख दिखाए जाते हैं ना जो ब्रह्मा सो विष्णु की चार भुजाएं बनते हैं, तो जो भुजाएं हैं वो जड़त्व बुद्धि हैं या अपने आप चलने वाली चैतन्य हैं? हँ? जडत्व बुद्धि हैं ना।

तो बताया, वो उतनी विशालबुद्धि नहीं है, हँ, तो ये छोटे-छोटे ब्रह्मा हैं। जो ब्रह्मा सो विष्णु की चार भुजाएं बनते। अब चार भुजाओं को चलाने वाला भी तो कोई होगा ना चैतन्य। हँ? तो वो विष्णु का एक मुख ही दिखाया जाता है। चार मुख नहीं दिखाए जाते; न पांच मुख नहीं दिखाए जाते। तो जो छोटे-छोटे ब्रह्मा हैं इनको भी अभी पार्ट मिला हुआ है। हँ? कुछ पार्ट होगा ना ऊँचा-नीचा। मिला हुआ है। अभी ऐसे नहीं कहेंगे। अभी संगमयुग में, पुरुषोत्तम संगमयुग में ऐसे नहीं कहेंगे कि शिवबाबा इन छोटे-छोटे ब्रह्माओं के द्वारा क्रियेट करते हैं नई दुनिया को। ऐसे कहेंगे? हँ? नहीं कहेंगे। न इनके द्वारा क्रियेट कराते हैं। ऐसे कोई कहेंगे? हँ? कि इन छोटे-छोटे ब्रह्माओं के द्वारा जो इतनी विशालबुद्धि ही नहीं हैं, जडत्वमयी बुद्धि है, बाप को पहचान ही नहीं सकते जल्दी। हँ? तो ऐसे कोई कहेंगे कि ये क्रियेटर हैं नई दुनिया के? ये बिच्छू-टिंडन? ओहो। नहीं। बाबा, बिच्छू-टिंडन नहीं। हँ? ये तो उन्होंने शास्त्रों में दिखाय दिया है। दिखाया है। क्या? शंकर के वीर्य से बिच्छू-टिंडन पैदा हुए। हँ? शंकर तो है ही मिक्स। हँ? कि प्योर है? मिक्स है। उसको कहते ही हैं शंकरण। हँ? एक आत्मा, दो आत्मा कि तीन आत्मा? तीन आत्माओं का संकरण है ना। हँ? कोई शरीरधारी आत्मा। जैसे, बताया ना त्रिमूर्ति है - ब्रह्मा की मूर्ति। अब ब्रह्मा तो विष्णु बन जाते हैं। तो दो रह गई मूर्तियाँ। ब्रह्मा की मूर्ति और शंकर की मूर्ति।

तो ब्रह्मा का पार्ट बजाने वाली आत्मा सतयुग का कृष्ण और शंकर का पार्ट बजाने वाली आत्मा राम। ये दो ही आत्माएं तो प्रसिद्ध हैं ना भारत में, हँ, जिन्हें भक्तों ने भगवान समझ लिया है। हँ? तो ये उन शास्त्रकारों ने बैठकरके शास्त्रों में लिखा है। हँ? कि जब शंकर पार्वती के पिछाड़ी फिदा हुआ, उसके पीछे दौड़ा, हँ, तो जो वीर्य निकल पड़ा, उससे बिच्छू-टिंडन पैदा हो गए। हँ? किसके पीछे दौड़ा? पार्वती के पीछे दौड़ा। पार्वती माने पार लगाने वाली। तो ये गपोड़े हैं। हैं ना? हैं तो गपोड़े। नहीं तो कहाँ से ये ग्लानि निकली? हँ? कि जिसको भारतवासी कहते हैं देव-देव-महादेव। सब देवताओं से महान देवता। बड़ा देवता। हँ? और उसकी ऐसी ग्लानि कर दी - वाह रे देवता। हँ? चलते-फिरते ऐसा कर देता है! ये सभी ग्लानि कि ये क्या बच्चे हैं अभी। हँ? कौनसे बच्चे? हँ? ये सभी अभी संगमयुग में जो पुरुषार्थी बच्चे हैं, ये क्या हैं? ये सभी बिच्छू-टिंडन बने हैं। कौन? किनको बताया बिच्छू-टिंडन? हँ? किनको बताया? बिच्छू-टिंडन बने हैं। तो बिच्छू से ही बिच्छू-टिंडन पैदा होगा ना। हँ?


(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, पुरुषार्थी तुम्हारा शंकर नहीं है? हँ? बोलो। पुरुषार्थी शंकर नहीं है? वो जो छोटे-छोटे चार ब्रह्मा हैं, वो ही पुरुषार्थी हैं? नहीं? अरे! शंकर है कि नहीं? हँ? लेकिन वो तो उसकी ग्लानि कर दी है। ऐसे है थोड़ेही। हँ? ये सभी जो-जो छोटे-छोटे ब्रह्मा हैं ना ये सब बिच्छू-टिंडन बने हैं इस समय में। इस समय में। किस समय में? हाँ, संगमयुग में। हँ? इन चारों में सबसे जास्ती पावरफुल कौन है? हँ? एकदम काला बिच्छू। (किसी ने कुछ कहा।) प्रजापिता काला बिच्छू है? वाह भैया! हँ? कहते हैं बिच्छू जब बिच्छुनी से बच्चा पैदा करता है, तो बच्चे कैसे निकलते हैं? पेट फाड़ के निकलते हैं। ऐसे बच्चे सत्यानाशी पैदा होते हैं। उसका बुद्धि रूपी पेट ही फट जाता है। तब वो बच्चे पैदा होते हैं। हँ? कौनसे बच्चे? जिनको बताया बिच्छू-टिंडन बने। हँ? तो इस समय की बात है। तो उनका नाम कर दिया है कि शंकर और पार्वती। हँ? ऐसे है ना। अब है तो शायद उनका ही लिखा हुआ है। क्या?

अब वो चाहे चार ब्रह्मा नामधारियों में जो भुजा के रूप में विष्णु को दिखाए जाते हैं वो कोई पावरफुल से पावरफुल भुजा हो। कौनसी है? कोई भुजा सबसे पावरफुल है? कौनसी? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) इस्लामी पावरफुल भुजा है? (किसी ने कुछ कहा।) गधा पावरफुल भुजा है? गधा। वो गधा होता है पावरफुल? गधा पावरफुल होता है? हँ? अरे! सारी दुनिया के ऊपर राज्य कौन करता है? कौनसा मुख करता है? जगदम्बा। हँ? तो बताया कि जो मुख्य भुजा है वो ही ऐसा पार्ट बजाती है। कैसा? हँ? कैसा पार्ट बजाती? बिच्छू-टिंडन पैदा होते हैं। क्योंकि शंकर को तो जगतपिता कहा है ना। हँ? तो जगतपिता काहे से बच्चा पैदा करेगा? हँ? किससे? जगतमाता से करेगा। तो जगतमाता कहो, हँ, जगतअम्बा कहो, बात एक ही हुई क्या? नहीं? नहीं हुई? एक ही बात हुई। तो जब सबसे पावरफुल भुजा, चार भुजाओं में से, जो पहले मुख थी ब्रह्मा के चार, वो ही ऐसी है। तो जो बाकि ब्रह्मा हैं छोटे-छोटे वो कैसे होंगे? हँ? वो कैसे होंगे? अरे! दुखदायी होंगे या सुखदायी होंगे? हँ? अरे, बाप को पहचानेंगे तब सुखदायी बनेंगे कि बाप को पहचानने से पहले ही सुखदायी बन जाएंगे? हँ? अगर पहले ही सुखदायी बने होते तो वो 63 जनम में सुखदायी बन जाते। बने कभी? बने? अरे, बने क्या? बने? कहाँ कौनसे जनम में बन गए सुखदायी? हँ? कौनसे जनम में सुखदायी बने? बने होंगे कभी ऐसे ही अनुमान है। अनुमान से भले नुकसान हो जाए। हम तो मानेंगे। क्या? हँ? बोलो।

गउएं होती हैं कि नहीं? हँ? गउएं होती हैं। कोई जैसे मुख्य-मुख्य गउओं के नाम क्या हैं? मालूम है? दूध बहुत देती हैं। जैसे बाबा बोलते हैं कमला गउ। हँ? जरूर अच्छी होगी। क्या नाम दिया? कमला गऊ। मुरली में बोला ना। और वो कहते हैं कामधेनु गऊ। सब कामनाएं पूरी करने वाली। हँ? कामधेनु गऊ। तो उसकी बच्ची भी तो कोई होगी। हँ? कौन? नंदिनी। हाँ। है तो नंदिनी। वो नंदिनी नाम जो है वो संपूर्ण स्टेज का है कि अपूर्ण स्टेज का है? संपूर्ण स्टेज का नाम है। उससे पहले? हँ? उससे पहले सुखदायी होगी या दुखदायी? हँ? दुखदायी कैसे? हँ? दुखदायी कैसे? हँ? दुखदायी। कैसे?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, बाप का साथ नहीं है इसलिए दुखदायी? अरे? ये कैसे मालूम बाप का साथ नहीं दिया? बाप माने शिव बाप या मनुष्य सृष्टि का बाप? हँ? उसे नारायण कहो, शंकर नारायण कहो बात तो एक ही है। पैदाइश तो साथ-साथ होती है कि नहीं? हँ? अरे, नारायण, लक्ष्मी की पैदाइश साथ-साथ होती है कि आगे-पीछे होती है? साथ ही साथ तो होती है। भले एक-दो सेकण्ड का अंतर हो। साथ ही तो कहेंगे। हँ? अरे, सतयुग में तो होंगे ही जुड़वाँ बच्चे नई दुनिया में।

तो शुरुआत कहाँ से होनी चाहिए? हँ? पुरुषोत्तम संगमयुग से शुरुआत होनी चाहिए ना। तो वो जो साथी बच्चा पैदा हो रहा है जिसको कहते हैं लक्ष्मी। तो लक्ष्मी, लक्ष्मी बनने से पहले, उसका नाम क्या है? लक्ष्मी बनने से (पहले)। लक्ष्मी तो बड़ी होती है तब नाम होता है ना। हँ? वो शादी-वादी हो जाती है तब लक्ष्मी नाम पड़ता है, हँ, और उससे पहले? अरे, ये तो पूरा ढिंढ़ोरा पीट दिया।
(किसी ने कुछ कहा।) राधा। हँ? राधा बच्ची। तो कौनसे कुल से आती है? कौनसे कुल से आती है? चन्द्रमा के कुल से। चन्द्रवंश से आती है। तो चन्द्रमा कभी अधूरा, कभी अंधेरा, कभी पूरा। तो बच्चे कैसे होंगे? हँ? कभी सुखदायी, कभी दुखदायी। अब वो राधा को तो ये तो पता नहीं होगा। क्या? राधा को ये पता होगा किसकी बच्ची है? अरे, ज्ञान चन्द्रमा ब्रह्मा की बच्ची तो है ना। हँ? अब जो छोटे होते हैं वो तो बड़ों को ही फालो करते हैं। नहीं करते? करते हैं। तो ब्रह्मा क्या करते रहे? हँ? एक-एक बच्चों को दृष्टि देते रहे। तो, और चन्द्रवंश में तो चन्द्रमा ही ऐसे कर रहा है तो बच्चे नहीं करेंगे? हाँ। तो वो जो बच्ची है, हँ, बच्ची तो पवित्र होती है ना। होती है कि नहीं? पवित्र होती। वो बच्ची भी ऐसे ही करेगी कि नहीं? हँ? करेगी।

तो चलो बच्ची तो फिर भी पवित्र है। हँ? और उसको तो इस बात का, इस बात का पता ही नहीं है; क्या? कि संग का रंग किसी को लगेगा। लगेगा? हँ? इन्द्रियों का संग का रंग लगता है ना। लगता है। तो जो दृष्टि लेने वाले हैं उनकी क्या हालत होगी? उनकी हालत अच्छी होगी या खराब होगी? हँ? खराब नहीं होगी? हाँ, जरूर खराब होगी। अरे, कोई भगवान का प्रैक्टिकल पार्ट थोड़ेही है? है क्या? हँ? कि इन्द्रियां लड़ाए रहो और औरों को कोई असर ही न पड़े किसी। हाँ, वो तो एक शंकर की पार्वती के लिए गायन है। क्या? कि वो ऐसी पार लगाने वाली शख्सियत है, आत्मा है कि वो कभी खुद नहीं डूबती व्यभिचार में। क्या? डूबती नहीं है। लेकिन दूसरों को क्या पता? दूसरों को इस बात का पता है? हँ? नहीं। तो उनकी हालत खराब होती है कि अच्छी होती है? हालत खराब होती है। तो जो आसुरी प्रकृति के होंगे वो तो फिदा होंगे ना फिर? संगात् संजायते कामाः कामात् क्रोधो अभिजायते। (गीता 2/62) संग करने से, इन्द्रियों का संग करने से कामना पैदा होती है और कामना की पूर्ति नहीं होती है तो आसुरी संस्कार वालों को बड़ा गुस्सा आता है। और बाबा ने तो बोल दिया सब दुर्योधन-दुःशासन। तो गुस्सा आएगा कि नहीं? हँ? गुस्सा आता है। गुस्सा आता है क्योंकि पूर्ति होती नहीं है, जो उन्हें चाहिए तो फिर उल्टा-पुल्टा कुछ भी काम करते हैं। तो बताया, इस समय सब दुखदायी हैं।

A morning class dated 20.9.1967 was being narrated. It was the second, third line of the fourth page on Wednesday. The topic being discussed was that who is called creator. The one who causes creation. Creator and creation. Rachayita (creator) and rachnaa (creation). Will the incorporeal be called [the creator] or will the corporeal be called? Hm? The creator will be corporeal only because when the world is corporeal, then the creator will be corporeal. If the pot is corporeal, then the potter will also be corporeal. So, ShivBaba is also a creator through Brahma. Hm? Through which Brahma? Yes, the one who was called ShivBaba definitely becomes Shiv, the grandfather in him, then he is called ShivBaba. So, the incorporeal Shiv became corporeal, didn’t He? Hm? But actually, Shiv is forever incorporeal. Although He enters, yet He remains in an incorporeal stage. So, the one in whom He enters is Brahma. The name is coined, isn’t it? The one in whom He enters, He names him Brahma. As regards the one in whom He enters first he will be called Parambrahm. So, will the creator be one or many? He will be one. Hm? So, that one Brahma who is called Parambrahm, he is called Mahatbrahm in the Gita; call him mahat or param, it is one and the same. As regards other human beings holding the title of Brahma; so, look, they are also like small Brahmas; who? Who are the small Brahmas? Hm? Are all those small Brahmas with beard and moustache? Yes, the four heads of Brahma, which are depicted, who become the four arms of Vishnu from Brahma, so, do the arms have an inert intellect or are they self-propelling, living? Hm? They have an inert intellect, don’t they?

So, it was told that they do not have such broad intellect, hm, so these are small Brahmas who become four arms of Vishnu from Brahma. Well, there must be a living one who controls the four arms. Hm? So, Vishnu is shown to have only one head. Four heads are not shown; neither are five heads shown. So, the small Brahmas have also got their part now. Hm? There must be a high or low part, will there not be? They have got it. Now it will not be said so. Now in the Confluence Age, in the Purushottam Sangamyug it will not be said that ShivBaba creates the new world through these small Brahmas. Will it be said like this? Hm? It will not be said. Neither does He create through them. Will anyone say so? Hm? That through these smaller Brahmas, who do not have such broad intellect, have an inert intellect and cannot recognize the Father quickly at all. Hm? So, will anyone say that these are creators of the new world? These scorpions and insects? Oho! No. Baba, not scorpions and insects. Hm? They have shown this in the scriptures. They have shown. What? Scorpions and insects were born through the semen (veerya) of Shankar. Hm? Shankar is anyways mix. Hm? Or is he pure? He is mix. He is called Shankaran (hybrid). Hm? One soul, two souls or three souls? He is a hybrid of three souls, isn’t he? Hm? An embodied soul. For example, it was told that there is Trimurti – Brahma’s personality (moorty). Well, Brahma becomes Vishnu. So, two personalities are left. Brahma’s personality and Shankar’s personality.

So, the soul playing the part of Brahma, the Krishna of the Golden Age and the soul of Ram playing the part of Shankar. These are the only two souls famous in India, hm, whom the devotees have considered to be God. Hm? So, those writers of scriptures sat and wrote in the scriptures. Hm? That when Shankar lost his heart to Parvati, ran after him, hm, then the semen that dropped gave birth to scorpions and insects. Hm? Behind whom did he run? He ran behind Paarvati. Paarvati means the one who takes you across (paar lagaaney vaali). So, these are boasts, aren’t they? They indeed are boasts. Otherwise, where did this defamation emerge from? Hm? The one whom the residents of India call Dev-Dev-Mahadev. The greatest deity among all the deities. Big deity. Hm? And he has been defamed like this – Wow deity! Hm? He does like this while moving around. What kind of children are these who defame like this now? Hm? Which children? All these purusharthi children now in the Confluence Age; what are they? All these have become scorpions and insects. Who? Who were described as scorpions and insects? Hm? Who was described? They have become scorpions and insects. So, scorpions and insects will only be born from a scorpion, will they not be? Hm?

(Someone said something.) Yes, is your Shankar not a purusharthi (effort-maker)? Hm? Speak up. Is Shankar not a purusharthi? Are those four small Brahmas alone purusharthis? No? Arey! Is Shankar [a purusharthi] or isn’t he? Hm? But he has been defamed. It is not so. Hm? All these smaller Brahmas have become scorpions and insects at this time. At this time. At which time? Yes, in the Confluence Age. Hm? Who is most powerful among these four? Hm? Completely black scorpion. (Someone said something.) Is Prajapita the black scorpion? Wow brother! Hm? It is said that when a he-scorpion gives birth to a young one through the she-scorpion, then how do the young ones emerge? They emerge by tearing apart the abdomen. Such ruining children are born. Its intellect-like abdomen gets torn. Then those children are born. Hm? Which children? Those who were said to have become scorpions and insects. Hm? So, it is about this time. So, they have been named Shankar and Parvati. Hm? It is so, isn’t it? Well, it is perhaps written by them only. What?

Well, be it any most powerful arm among the four Brahma titleholders who are depicted in the form of arms of Vishnu. Which one? Which arm is most powerful? Which one? Hm?
(Someone said something.) Is Islamic one the powerful arm? (Someone said something.) Is donkey the powerful arm? Donkey. Is that donkey powerful? Is the donkey powerful? Hm? Arey! Who rules over the entire world? Which head rules? Jagdamba. Hm? So, it was told that the main arm plays such a part. What kind? Hm? What kind of part does it play? Scorpions and insects are born. It is because Shankar has been called Jagatpita (Father of the world), hasn’t he been? Hm? So, how will Jagatpita give birth to children? Hm? Through whom? Through Jagatmata (Mother of the World). So, call her Jagatmata, call her Jagdamba, is it one and the same? No? Is it not? It is one and the same. So, the most powerful arm, the first head among the four arms, the four heads of Brahma itself is like this, then, how will the other smaller Brahmas be? Hm? How will they be? Arey! Will they cause sorrows or will they cause happiness? Hm? Arey, will they cause happiness if they recognize the Father or will they become givers of happiness before recognizing the Father? Hm? Had they become givers of happiness beforehand, then they would have become givers of happiness in 63 births. Did they ever become? Arey, did they become? Did they become? In which birth did they become givers of happiness there? Hm? In which birth did they become givers of happiness? They must have become at some point in time; that is a guess. Guessing may cause loss. We will believe. What? Hm? Speak up.

Are there cows or not? Hm? There are cows. What are the names of the main cows? Do you know? They produce a lot of milk. For example Baba says Kamala cow. Hm? She must definitely be good. What was the name assigned? Kamala cow. It has been said in the Murli, hasn’t it been? And they say Kamdhenu cow. The one who fulfills all the desires. Hm? Kamdhenu cow. So, she must have a daughter. Hm? Who? Nandini. Yes. She is indeed Nandini. Is that name Nandini a name of the perfect stage or of an incomplete stage? It is a name of the complete stage. Before that? Hm? Before that will she be a giver of happiness or a giver of sorrows? Hm? How is she a giver of sorrows? Hm? How is she a giver of sorrows? Giver of sorrows. How?
(Someone said something.) Yes, is she a giver of sorrows because she does not have the company of the Father? Arey? How do you know that she did not side with the Father? Does Father refer to Father Shiv or the Father of the human world? Hm? Call him Narayan, call him Shankar Narayan, it is one and the same. Are they born together or not? Hm? Arey, are Narayan and Lakshmi born together or one after the other? They are born together only. There may be a difference of one or two seconds. They will be said to be [born] together only. Hm? Arey, there will be only twins in the Golden Age in the new world.

So, from where should a beginning be made? Hm? The beginning should be made from the Purushottam Sangamyug, shouldn’t it be? So, that companion child who is getting birth, who is called Lakshmi; So, what is her name before becoming Lakshmi? Before becoming Lakshmi. Lakshmi is the name when she grows up, isn’t it? Hm? The name Lakshmi is assigned when she gets married; and before that? Arey, a complete announcement has been made.
(Someone said something.) Radha. Hm? Daughter Radha. So, from which clan does she come? From which clan does she come? From the clan of the Moon. She comes from the dynasty of the Moon (Chandravansh). So, the Moon is sometimes incomplete, sometimes dark, and sometimes complete. So, how will the children be? Hm? Sometimes they are givers of happiness and sometimes givers of sorrows. Well, that Radha will not know this. What? Will Radha know whose daughter she is? Arey, she is the daughter of the Moon of knowledge Brahma, isn’t she? Hm? Well, the young ones follow the elders only. Don’t they? They do. So, what did Brahma used to do? He used to give drishti to each and every child. So, and when the Moon himself is doing so in the Moon dynasty, then, will the children not do? Yes. So, that daughter; hm, a daughter is pure, isn’t she? Is she or isn’t she? She is pure. Will that daughter also do so or not? Hm? She will.

So, okay, daughter is however pure. Hm? And she does not know about this topic at all; what? That someone will be coloured by company. Will he be? Hm? The colour of company of the organs is applied, isn’t it? It is applied. So, what will be the condition of those who take drishti? Will their condition be good or bad? Hm? Will it not deteriorate? Yes, it will definitely deteriorate. Arey, is it a practical part of God? Is it? Hm? That you keep on connecting the organs and it will not have any effect on others. Yes, that is famous for only one Parvati of Shankar. What? That she is such a personality, such a soul, who enables you to sail across that she herself never sinks in adultery. What? She does not sink. But do others know? Do others know about this? Hm? No. So, does their condition worsen or improve? They condition worsens. So, those who have a demoniac nature will lose their heart [to her], will they not? Sangaat sanjaayate kaamah, kaamaat krodho abhijaayate. (Gita 2/62) Desires emerge when you keep company, when you keep company of the organs. And when the desires are not fulfilled, then those with demoniac sanskars become very angry. And Baba has already said that all are Duryodhans and Dushasans. So, will they become angry or not? Hm? They become angry. They become angry because they are unable to fulfill their requirements; so, then they do something opposite. So, it was told that at this time everyone is a giver of sorrows.

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नोटः यह केवल एक प्रारूप है। उक्त वीसीडी के संपूर्ण मूल पाठ या मूल आडियो, वीडियो के लिए www.adhyatmik-vidyalaya.com देखिये।
Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 19 Apr 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2692, दिनांक 06.11.2018
VCD 2692, dated 06.11.2018
प्रातः क्लास 20.9.1967
Morning Class dated 20.9.1967
VCD-2692-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-15.18
Time- 00.01-15.18


आज प्रातः क्लास है - 20.9.1967. बुधवार को चौथे पेज की अंतिम लाइनों में बात चल रही थी - ये है ही वर्ल्ड यूनीवर्सिटी। विश्व विद्यालय। ये समझते हो। और साथ में ये यूनीवर्सिटी को चेंज किया जाता है। चेंज किया जाता है तो क्या नाम रखा जाता है? हँ? आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय। अभी वो तो यूनिवर्सिटी तो आसुरी यूनिवर्सिटी कहेंगे ना। वो माने कौनसी यूनिवर्सिटी अभी? हँ? अभी माना 2018 में क्या साबित हो गया? वो यूनिवर्सिटी जो है जिसको चेंज करने की बात बाबा ने बताई। हाँ, ब्रह्माकुमारी यूनिवर्सिटी तो आसुरी यूनिवर्सिटी कहेंगे ना। क्यों कहेंगे आसुरी यूनिवर्सिटी? हँ? क्योंकि आसुरी काम करने लगे ना। असुरों का काम क्या है? असुरों का काम है - स्वयं उपलब्धि नहीं कर पाते, तो फिर जो उपलब्धि कर लेते हैं उनको दुख देते हैं। उनपे हमले करते हैं। हँ? वो आसुरी यूनिवर्सिटी वालों ने दिल्ली में राजधानी नहीं जमा पाई। हँ? ढ़ेर सारे सेंटर्स बनाय लिए। लेकिन सब आपस में असुर झगड़ रहे हैं। एक में भी, 80 साल हो गए कहेंगे या तो कहेंगे 70 साल हो गए ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय को स्थापन किये हुए लेकिन आज तक भी, हँ, सारे दिल्ली वाले एक स्टेडियम नहीं बना पाए अपना। क्या? वो ही भ्रष्टाचारी प्रजातंत्र सरकार से स्टेडियम लेते हैं और दिखावे की सेवा करते हैं।

तो वो तो आसुरी यूनिवर्सिटी हो गई। हँ? हाँ। तो ये हुई ईश्वरीय यूनिवर्सिटी। क्या? ये माने कौनसी? आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्व विद्यालय। अभी वो लोग तो अपन को ऐसे नहीं कहते हैं। वो लोग माने कौन लोग? हँ? कि आसुरी यूनिवर्सिटी है हमारी। कौन नहीं कहते हैं? हाँ, वो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय जो लिख रहे हैं ना, हँ, भ्रष्टाचारी गोर्मेन्ट में भी उनको परमीशन दे दी कि हाँ, तुम लिख लो। बुद्धु बनाने के लिए दुनिया को। अच्छा, तुम विश्व अलग कर दो, विद्यालय अलग कर दो। वाह! बस इतना कर दो। बाकि आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्व विद्यालय के लिए, हँ, तुम नहीं लिख सकते। तुम विश्वविद्यालय शब्द दोनों शब्द हटाओ। हँ? वाह भैया! तो वो कोई अपनी आसुरी यूनिवर्सिटी नहीं समझते हैं। इसलिए भ्रष्टाचारी गोर्मेन्ट के अंडर में आ गए ना वर्ल्ड रिन्यूअल ट्रस्ट बनाके। तो वो अपन को देखते हैं कि हाँ, हमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय है। तो वो नहीं समझते आसुरी यूनिवर्सिटी।

20.9.1967 बुधवार को प्रातः क्लास का पांचवां पेज। वो परन्तु कुछ कर थोड़ेही सकते हैं। क्या? कि वो समझें या न समझें। हम क्या कर सकते हैं? क्योंकि यहाँ तो है भगवानुवाच। और वहाँ तो भूत-प्रेत उवाच है या भगवानुवाच है? हँ? यहाँ क्या है? हँ? अरे, जो कन्वर्ट होने वाले ब्राह्मण कम कला के देवता बनते हैं सतयुग, त्रेता में, वो द्वापरयुग से दूसरे धर्मों में कन्वर्ट होते हैं ना। कम कलाओं वाले माना नीची कुरियों के ब्राह्मण। तो ये तो है कि यहाँ है भगवानुवाच। इसलिए भगवान तो सारी दुनिया का कल्याण करता है ना। इसलिए वास्तव में ये वर्ल्ड यूनिवर्सिटी है। गीता के अक्षर हैं। क्या? गीता में ढ़ेर सारे ऐसे-ऐसे श्लोक लिखे हुए हैं आसुरी संप्रदाय के ऊपर। हँ? आसुरी संप्रदाय हैं। तो आसुरी संप्रदाय की जो भी कैरेक्टर्स हैं और जो भी उनकी रचना है वो सभी आसुरी यूनिवर्सिटियां वगैरा-वगैरा सब अल्पकाल क्षणभंगुर सुख देने वाली हैं। अभी थोड़े समय की बात रह गई है। क्या? उसके बाद क्या होगा? सब यूनिवर्सिटियाँ सारी उखड़ने लगेंगी। टूटने लगेंगी। खेल खलास। क्षणभंगुर सुख देने वाली। कैसा क्षणभंगुर सुख? यूनिवर्सिटी से बड़े-बड़े ऊँचे-ऊँचे एक्ज़ाम पास करके निकलते हैं, देह अभिमानी सांढ़े बनकरके, हँ, बनते हैं ना। और फिर क्या काम करते हैं? बड़ी ऊँची पोस्ट पे बैठ जाते हैं दुनियावालों की नज़र में। और ढ़ेर सारा पैसा मिलता है उनको। कितने समय तक? हँ? कितने सालों तक लेंगे? हँ? कितना सुख लेंगे? क्षणभंगुर सुख। अरे, कहाँ बाप आकरके राजयोग द्वारा राजाई स्थापन करते हैं। हँ? जो राजाई लगभग 100-200 साल, 300 साल निकाल दो ज्यादा से ज्यादा और सारा 5000 वर्ष राजाओं का ही राज्य चलता है। तो उसे क्षणभंगुर सुख कहेंगे? हँ? बिल्कुल नहीं कहेंगे।

तो ये तुमको है 21 जन्म का सुख देने वाली, हँ, ईश्वरीय यूनिवर्सिटी। हँ? ऐसा सुख जिसमें दुख का नाम-निशान नहीं होगा। हँ? हाँ। तो, तो ईश्वरीय विश्वविद्यालय तो एक ही होता है ना बच्ची। हँ? कि अनेक होते हैं? हँ? उस यूनिवर्सिटी का कनेक्शन उस यूनिवर्सिटी से नहीं। उस यूनिवर्सिटी का कनेक्शन उस यूनिवर्सिटी से नहीं। हँ? उनके सरपरस्त चलाने वाले अलग और उनके सरपरस्त चलाने वाले अलग। और ये तो एक ही यूनिवर्सिटी है। यहाँ तो एक ही क्या है? चलाने वाला एक ही है। ईश्वर आकरके विश्वविद्यालय खोल रहे हैं। हँ? आकरके खोलते हैं। ऐसे नहीं परमधाम में निराकारी दुनिया में बिन्दी बनके बैठे रहेंगे, हवा में उड़ती रहेगी बिन्दी फुदुक-फुदुक के खोल देगी। नहीं। क्या? आकरके विश्वविद्यालय खोलते हैं। अरे, कहीं तो पहला विश्वविद्यालय खोला होगा ना। हाँ। जो बोला ना अब देखेंगे दुनिया के कौनसे कोने से आवाज़ निकलती है? कौनसे कोने से प्रत्यक्षता होती है। तो वो कोना तो तुम बच्चों को पता चल गया ना। हाँ।

तुम जानते हो इस यूनिवर्सिटी से सारे विश्व का कल्याण होना है। क्या कहा? इस एक यूनिवर्सिटी। उनकी तो दुनिया में जितने देश उससे ज्यादा यूनिवर्सिटी। एक भारत में ही देखो कितनी यूनिवर्सिटीज़ खुल गईं। एक बनारस में देखो कितनी यूनिवर्सिटी। हिन्दु बनारस यूनिवर्सिटी अलग। संस्कृत विश्वविद्यालय अलग। अरे। क्या मुसीबत लगाई हुई है। एक-एक शहर में इतनी-इतनी यूनिवर्सिटी। और फिर पूरे भारत देश में तो कितनी यूनिवर्सिटियाँ होंगी। उनको संचालन करने वाला मुखिया एक होता है क्या? नहीं। तो तुम जानते हो कि सारे विश्व का कल्याण तो इस एक ही यूनिवर्सिटी से होना है। तो कहेंगे ना इसको। क्या? विश्वविद्यालय। क्या? सारे विश्व का एक ही विद्यालय। इसलिए उसकी यादगार जो उसका सरपरस्त है, मुखिया है, उसकी यादगार कहाँ दिखाई गई है? उसकी यादगार दिखाई गई है काशी विश्वनाथ। क्या? हँ। काशी शब्द क्यों लगाते हैं? क्योंकि काशी नगरी से ही एकता की शुरुआत होती है। एक संगठन। क्या? वो बीज रूप आत्माओं का संगठन कहाँ से शुरु होता है? काशी नगरी से।

तो इसको कहेंगे विश्वविद्यालय। फिर वो भक्तिमार्ग में, अज्ञान मार्ग में वो भी ऐसे ही नाम लगाते जाते हैं। कॉपी की है यहाँ की। क्या? गीता में लिखा है ना – मम् वर्तमानुवर्तन्ते मनुष्या पार्थ सर्वशः। (गीता 4/11) गीता में भगवान ने कहा कि इस दुनिया में जो भी मनुष्य हैं मेरे रास्ते का ही अनुगमन करते हैं। क्या? तो मैंने ऐसी यूनिवर्सिटी खोली तो दुनियावालों ने भी क्या कर दिया? हाँ, कॉपी कर रहे हैं विश्वविद्यालय बनाने की। तो जो कॉपी होती है वो ओरिजिनल होती है या डुप्लिकेट होती है? हँ? डुप्लिकेट होती है ना। तो रांग और राइट अभी तुमको समझ मिली है। क्या? कौनसी यूनिवर्सिटीज़ रांग हैं और कौनसी यूनिवर्सिटी राइट है? अरे! इस झूठ की दुनिया कलियुग में तो कलियुग के अंत में जब कल्पांत होगा तो भगवान ही आकरके हैविनली गॉड फादर हैविन की स्थापन करेगा ना। हँ? तो हैविन ही सत्य है ना। सचखंड क्या हुआ? इस दुनिया में सचखंड सतयुग ही हुआ ना। तो कौन स्थापन करेगा? हँ? अभी तक कोई ने स्थापन कर पाया? ढ़ाई हज़ार वर्ष में कोई ने एक दुनिया बना पाई जहाँ एक ही राजा हो, एक ही राज्य हो, एक ही धर्म हो, एक ही भाषा हो। किसी ने बनाई? किसी ने नहीं बनाई। बन ही नहीं सकती। हँ?

तो कोई भी मनुष्य इस सृष्टि पर नहीं है जो राइट और रांग को समझता हो कि राइट यूनिवर्सिटी कौनसी है और रांग यूनिवर्सिटी कौनसी है? अगर होता तो आवाज़ उठाता। हँ? अरे भाई! तुम क्यों दुनिया भर का गड़बड़ करते हो? ये इतना तुमने निकाला। क्या? यू.जी.सी.। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन। हँ? वहाँ से तुमने फर्रे निकलवाए। ये हमारे यहाँ नूंध नहीं। अरे! तुमसे कोई पैसा लेता है? ग्रांट लेता है? ग्रांट एक पैसे की नहीं लेता है और तुम अपने लिस्ट में से क्या निकालोगे? तुम्हारे हम आधीन थोड़ेही हैं? इसलिए बाबा ने भी बोल दिया। तुम बच्चे डरो मत। लिखो यूनिवर्सिटी। लिखो विश्वविद्यालय। क्या? क्या करेंगे? क्या जेल में डाल देंगे? क्या हमने ओफेन्स किया सो हमें जेल में डाल देंगे? किसको डाल देंगे? हँ? जिसको डाल देंगे, जिसने शुरुआत की, जिसने फाउण्डेशन डाला, तुम उसको तो तुम नाक रगड़-2 के पकड़ नहीं पा रहे हो। हँ?

तो कोई भी रांग एंड राइट को नहीं समझता है। क्योंकि राइट एंड रांग को समझाने वाला एक ही राइटियस चाहिए। क्या करने वाला? समझाने वाला। कैसे समझाएगा? फूं करेगा और समझ जाओगे? हँ? क्या? हँ? ऐसे आँख से देखा और समझ जाओगे? नहीं। अरे, इतनी वायब्रेशन की पावर अभी मनुष्यों में कहाँ है? जो दृष्टि से देखने मात्र से ही समझ जाएं कि हाँ इनकी आत्मिक दृष्टि है, इनकी हमारे ऊपर प्यार की दृष्टि है या नहीं है। कोई समझेगा? बिल्कुल नहीं समझते। ऐसे तो रोज़ ही देखते रहते हो एक-दूसरे को। हँ? और जो आज के योगी हैं, हँ, शूटिंग करने वाले, सफेद कपड़े वाले सन्यासी वो तो आँखें ऐसे फाड़-फाड़ के एक-दूसरे को देखते रहते हैं। कुछ असर पड़ता है? हँ? कुछ नहीं असर पड़ता। क्योंकि जो राइटियस है समझाने वाला वो साकार में चाहिए या सिर्फ निराकार ज्योतिबिन्दु चाहिए? हँ? ‘एक ही’ का मतलब ही है जरूर एक शख्सियत होनी चाहिए। राइट और राइटियस होते ही हैं बाप। क्या? क्या कहा? हँ? घर-घर में बाप होता है कि नहीं? हँ? कोई घर में रांग बाप, रांग धंधे करता है, अपने बाल-बच्चों की जिंदगी खराब कर रहा है। और कोई बाप राइटियस होता है। तो बाप तो रांग और राइटियस होते ही हैं। अच्छा चलो, वो हद की दुनिया के हद के परिवारों की बात छोड़ो। वसुधैव कुटुम्बकम् में ले लो। तो जो सारी वसुधा को एक कुटुम्ब परिवार बनाता है वो तो राइटियस ही होगा ना। वो तो एक ही भगवान है। हँ? उसको ट्रुथ कहा जाता है अंग्रेजी में। ट्रुथ माने? सत्य। हिन्दी में भी क्या है – सत्यम, शिवम, सुन्दरम। हिन्दी में भी कहते हैं। तो ट्रुथ को ही सच कहा जाता है। और सच को ही राइटियस कहा जाता है। क्या? झूठ को कभी राइटियस नहीं कहा जाता। झूठ को फिर क्या कहा जाता है? झूठ को कहा जाता है अनराइटियस। (क्रमशः)

Today’s morning class is dated 20.9.1967. The topic being discussed in the last lines of the fourth page on Wednesday was – This is a world university. Vishwa vidyalay. You understand this. And along with that this University is made to change. When it is made to change, then what is it named? Hm? Adhyatmik Ishwariya Vishwavidyalay (Spiritual Godly University). Now that university will be said to be a demoniac university, will it not be? ‘That’ refers to which university now? Hm? ‘Now’ means what was it proved in 2018? Baba mentioned about changing that university.Yes, Brahmakumari university will be called a demoniac university, will it not be? Why will it be called a demoniac university? Hm? It is because they started performing demoniac tasks, didn’t they? What is the task of the demons? The task of the demons is that- They are unable to achieve attainments themselves; so, then they cause sorrows to those who achieve attainments. They attack them. Hm? Those people of that demoniac university could not establish their capital in Delhi. Hm? They established numerous centers. But all the demons are fighting with each other. Even a single person among them; it will be said that it has been 80 years or it will be said that it has been 70 years since Brahmakumari Vishwavidyalaya was established, but till date, hm, they could not build a stadium of their own in entire Delhi. What? They take stadiums from the same unrighteous democratic government and do ostentatious service.

So, that is a demoniac university. Hm? Yes. So, this is Godly University. What? ‘This’ refers to which one? Adhyatmik Ishwariya Vishwa Vidyalaya. Now those people do not say like this about themselves. ‘Those people’ refers to which people? Hm? That ours is a demoniac university. Who doesn’t say? Yes, those who are writing ‘Prajapita Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya’, hm, the unrighteous government has also given them permission that yes, you write in order to fool the world. Achcha, you separate ‘Vishwa’ and ‘Vidyalaya’. Wow! Do this much. As regards Adhyatmik Ishwariya Vishwa Vidyalaya, hm, you cannot write. You remove both the words Vishwa and Vidyalaya. Hm? Wow brother! They do not consider themselves to be a demoniac university. This is why they came under the unrighteous government by establishing the World Renewal Trust. So, they observe themselves that yes, ours is a Godly University. So, they do not consider it to be a demoniac university.

20.9.1967. Fifth page of the morning class. But they cannot do anything. What? Whether they understand or don’t understand. What can we do? It is because here it is the words of God (Bhagwaanuvaach). And there is it the words of ghosts and devils or is it the words of God? Hm? What is it here? Hm? Arey, the Brahmins who convert, become deities with fewer celestial degrees in the Golden Age and Silver Age convert to other religions from the Copper Age, don’t they? ‘Those with fewer celestial degrees’ means Brahmins of lower categories. So, it is sure that here it is the words of God. This is why God causes benefit to the entire world, doesn’t He? This is why actually this is a world university. These are words of the Gita. What? Numerous such shlokas (verses) have been written on the demoniac community. Hm? They are demoniac community. So, all the characters of the demoniac community and their creation, all those demoniac universities, etc. give temporary, momentary happiness. Now it is a matter of some more time. What? What wil happen after that? All the universities will start uprooting. They will start dismantling. The drama ends. Those that give momentary happiness. What kind of momentary happiness? People pass big, high exams from universities becoming body conscious bulls; they become, don’t they? And then what do they do? They occupy very high posts in the eyes of the people of the world. And they get a lot of money. For how long? Hm? How many years will they take? Hm? How much pleasure will they extract? Momentary pleasure. Arey, on the one hand the Father comes and establishes kingship through rajyog. Hm? That kingship; substract 100-200 years, 300 years at the most and for the rest of the 5000 years there is a rule of kings only. So, will it be called a momentary pleasure? Hm? It will not at all be called.

So, this is a Godly University which gives you happiness for 21 births. Hm? Such happiness which does not contain any trace of sorrows. Hm? Yes. So, so, the Godly University is only one, isn’t it daughter? Hm? Or are there many? Hm? There is no connection of that university with that university. There is no connection of that university with that university. Hm? The controllers of that one are different and the controllers of that one are different. And this is only one university. What is only one here? The controller is only one. God has come and is opening a University. Hm? He comes and opens. It is not as if He will sit like a point in the Supreme Abode, in the incorporeal world; the point will keep on keep on flying in the air and open [the university] by jumping around. No. What? He comes and opens a university. Arey, He must have opened the first university somewhere, hadn’t He? Yes. It was said that now we will see the corner of the world from which the name spreads. From which corner does the revelation take place? So, you children have come to know about that corner, haven’t you? Yes.

You know that the entire world is going to be benefited through this University. What has been said? This one University. As regards theirs’, there are more universities than the number of countries in the world. Look, in one India itself so many universities have been opened. Look, in one Benares (Varanasi) itself there are so many universities. Hindu Benares University is different. Sanskrit University is different. Arey! Such a problem has been created. There are so many universities in each city. And then there must be so many universities in the entire nation India. Is there one head, who controls them? No. So, you know that the entire world is going to be benefited only through this one University. So, it will be called, will it not be? Vishwavidyalay (University). What? Only one school (vidyalay) of the entire world (vishwa). This is why its memorial, its controller, its head, where is his memorial shown? His memorial has been shown as Kashi Vishwanath. What? Hm. Why is the word Kashi added? It is because the unity begins from the Kashi Nagari itself. One gathering. What? Where does that gathering of seed-form souls start? From the city of Kashi.

So, this will be called a university. Then on that path of Bhakti, on the path of ignorance they also keep on adding such names. They have copied from this place. What? It has been written in the Gita – Mam vartamaanuvartante manushya paarth sarvashah. (Gita 4/11) God has said in the Gita that all the human beings in this world follow My path only. What? So, when I opened such University, then what did the people of the world also do? Yes, they are copying the establishment of University. So, is the copy original or duplicate? Hm? It is duplicate, isn’t it? So, now you have understood what is wrong and what is right. What? Which universities are wrong and which university is right? Arey! In the world of falsehood, in the Iron Age, in the end of the Iron Age, when the Kalpa (cycle of 5000 years) is to end, then God Himself, the Heavenly God Father will establish heaven, will He not? Hm? So, heaven itself is true, isn’t it? What is the land of truth (sachkhand)? In this world the Golden Age alone is the land of truth, isn’t it? So, who will establish? Hm? Could anyone establish so far? Could anyone establish a world in 2500 years where there is only one king, only one kingdom, only one religion, only one language? Did anyone establish? Nobody established. It cannot be established at all. Hm?

So, there is no human being in this world who understands right and wrong as to which the right university is and which is the wrong university? Had there been anyone he would have raised the voice. Hm? Arey brother! Why do you make all the fuss? You brought out so much. What? UGC. University Grant Commission. Hm? You caused orders to be issued from there. This is not allowed by us. Arey! Does anyone take money from you? Does anyone take grant? If someone does not take a paisa worth of grant and how can you remove him from your list? Are we under you? This is why Baba has also said. You children should not fear. Write University. Write Vishwavidyalay. What? What will they do? Will they put you in jail? What is the offence that we have committed that you will put us in jail? Whom will you put? Hm? The one whom you will put, the one who started it, the one who laid the foundation, you are unable to catch him despite rubbing your nose (i.e. despite best efforts). Hm?

So, nobody understands wrong and right. It is because only one righteous is required to explain right and wrong. The one who does what? The one who explains. How will He explain? Will you understand as soon as he blows wind? Hm? What? Hm? Will you understand if he throws a glance like this with his eye? No. Arey, do the human beings now have such power of vibrations that they understand just by a glance that yes, their vision is soul conscious vision, this person has an eye of affection for me or not? Will anyone understand? They do not understand at all. You keep seeing each other everyday. Hm? And today’s yogis, hm, those who perform the shooting, the white-robed sanyasis keep on seeing each other with their eyes wide open. Does it have any effect? Hm? It does not have any effect because is the righteous one who explains needed in corporeal form or is just an incorporeal point of light required? Hm? ‘Only one’ means that definitely a personality should be there. The Father Himself is right and righteous. What? What has been said? Hm? Is there a Father in every house or not? Hm? In some houses a wrong Father pursues wrong occupations and spoils the life of his children. And some fathers are righteous. So, there are fathers who are wrong and righteous. Achcha, okay, leave the topic of that limited world and limited families. Take the case of vasudhaiv kutumbkam (one world family). So, the one who makes the entire Earth (vasudha) one family (kutumb) will be righteous only, will he not be? That is only one God. Hm? He is called the Truth in English. What is meant by truth? Satya (truth). What is in Hindi also? Satyam (true), Shivam (benevolent), Sundaram (beautiful). It is said in Hindi also. So, truth is called ‘sach’ [in Hindi]. And truth itself is called righteous. What? Falsehood is never called righteous. What is falsehood then called? Falsehood is called unrighteous. (Continued)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 21 Apr 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2692, दिनांक 06.11.2018
VCD 2692, Dated 06.11.2018
प्रातः क्लास 20.9.1967
Morning Class dated 20.9.1967
VCD-2692-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 15.19-29.48
Time- 15.19-29.48


तो अभी एक बाप की सर्विस उठानी चाहिए ना। हँ? दुनिया में घर-घर में ढ़ेर सारे बाप बैठे हैं। उनकी सर्विस उठानी चाहिए ना। उनकी सेवा करनी चाहिए? नहीं। अरे, उनकी साथ छोड़ दो। देश-देशांतर में आज दुनिया में ढेर धर्मों का राज्य चल रहा है। उन धर्मों के धरमपिताएं हैं। हँ? तो उन सब धरमपिताओं की बात माननी चाहिए? हँ? उनकी बात मानने से दुनिया स्वर्ग बनेगी? बन गई ढ़ाई हज़ार साल में? हिस्ट्री क्या कहती है? नहीं। अरे, हरेक मनुष्य को तुमको राइटियस बनाना है। क्या कहा? हँ? तुमको माने? हँ? तुमको माने कितनों को? हरेक मनुष्य को। कितने मनुष्य हैं? इस दुनिया में कितने मनुष्य हैं? ज्यादा से ज्यादा 500-700 करोड़। तो हरेक को तुमको राइटियस बनाना है। किससे कहा? किससे कहा? ब्रह्माकुमार-कुमारियों से कहा जो अपने बाप को ही नहीं जानते? तो बाप कहेंगे कैसे? बाप तो कहते हैं मैं इस ब्रह्मा से भी बात नहीं करता। क्या? मैं तुम बच्चों से बात करता हूँ। बात किससे की जाती है? जो काम पूरा करे, बात माने, हँ, बात समझे तो उससे बात की जाए। बात समझता ही नहीं, बेसमझ बच्चा है बच्चाबुद्धि। तो उसके अन्डर में पढ़ने वाले सब बच्चे ही बच्चे होंगे ना।

तो ये काम तुम बच्चों को करना है। क्या? किन बच्चों को करना है? हँ? राइटियस बनाने का काम किन बच्चों को करना है? ओहो! हँ? रुद्रमाला के बच्चों को करना है। और रुद्रमाला के बच्चों में भी बोल दिया आठ राजाइयाँ स्पष्ट देखने में आवेंगी ब्राह्मण परिवार में। धत्! तुम्हारा भला हो। हँ? आठ राजाइयां। कौन-कौनसी आठ राजाइयां? अव्वल नंबर सूर्यवंशी राजाई। दोयम नंबर; हँ? चन्द्रवंशी राजाई। त्रैयम नंबर इस्लामवंशी राजाई। चौथा नंबर बौद्धीवंशी राजाई। पांचवां नंबर क्रिश्चियन वंशी राजाई। छठा नंबर सन्यास धरम की भी तो राजाई नहीं होती। लेकिन वो तो ऐसे ही रहते हैं ना जैसे राजा। क्या? गद्दी जमा के बैठते हैं ना। उनके सामने कोई की, कोई की हिम्मत है? कोई उल्टा-पल्टा कुछ करे? जो बोलेंगे सो ही करना पड़ेगा। तो वो है सबसे पावरफुल। क्या? राजाई का नाम भी नहीं है। राजा कोई है भी नहीं। और बेताज बादशाह बनके बैठे हैं। किसको फालो करने वाले? किसको फालो करने वाले? क्या नाम है उनका? शंकराचार्य। आहा! शंकराचार्य। अरे, शंकराचार्य तो चार-चार हैं। चार-चार कैसे होंगे? हँ? शंकर दुनिया में एक ही होगा देव-देव-महादेव या ढ़ेर सारे हो जाएंगे? नहीं। ये तो एक की बात है जिसको उन्होंने फालो किया है भक्तिमार्ग में चार-चार शंकराचार्यों ने। तो छठा ये। और सातवां? हाँ, सातवां हुआ मुस्लिम धर्म। हँ? तो वो भी बाप है। ये सारे ही बाप हैं इस दुनिया में। फिर? सिक्ख धर्म। ये क्या? आठ राजाइयां हैं। बाकि? आर्य समाजियों ने जो राजाई स्थापन की वो तो प्रजातंत्र शासन हो गया। क्या? प्रजातंत्र शासन कोई भगवान आकरके प्रजा बनाने के लिए आते हैं कि राजा बनाने के लिए आते हैं? भगवान राजयोग सिखाकरके राजा बनाता है कि प्रजा बनाता है? हँ? क्या बनाता है? राजाएं बनाता है। हँ? क्षणभंगुर उनकी राजाई नहीं चलती है। भले राजाएं तमोप्रधान भी हो जाते हैं कलियुग के अंत में। हँ? तो भी उनकी राजाई लंबे समय तक चलती है।

तो वो जो आठ धरम हैं, आठों धर्मों में तुमको राइटियस बनाना है। आठों धर्मों की जड़ें भी हैं सृष्टि रूपी वृक्ष में। हँ? और आठों धर्मों की जड़ों के बीज भी हैं इस सृष्टि रूपी वृक्ष में। तो किसको बोल रहे हैं तुमको राइटियस बनाना है? तुमको माने किसको राइटियस बनाना है? हँ? हर एक मनुष्य को राइटियस बनाना है। ये तुम्हारी जिम्मेवारी है। किसको बोला? हँ? ... को बोला। (20.47) वो अकेला चना भाड़ फोड़ेगा? हँ? अकेला चना भाड़ फोड़ता है क्या? नहीं। अरे, बताया उसके साथी कोई होंगे ना। हँ? भुजाएं, विशाल भुजाएं हैं। कैसी विशाल? आठों दिशाओं में अपनी भुजाओं फैलाकरके राज्य चलाती हैं। तो वो अष्ट देव हैं जो जगतपिता के सर के ऊपर वो आत्माएं आठ माला रूपी संगठन के रूप में सर के ऊपर चढ़ी बैठी हैं। बाप को जिन बच्चों से ज्यादा प्यार होता है तो कहाँ चढ़ा लेते हैं? हँ? मारे प्यार के सर के ऊपर चढ़ा लेते हैं।

तो समझा? तुम बच्चों को राइटियस बनाना है हर एक मनुष्य को इस दुनिया में। ये तुम्हारी जिम्मेदारी है। समझा ना? जो राइटियस मुक्तिधाम में आत्मा बनती है ना; क्या? किनकी जिम्मेदारी बताई? जो राइटियस मुक्तिधाम; अनराइटियस मुक्तिधाम कौनसा होता है? हँ? कोई अनराइटियस मुक्तिधाम भी होता है? एक धाम है राइटियस मुक्तिधाम। राइटियस मुक्तिधाम का मतलब क्या हुआ? क्या दो मुक्तिधाम हैं? हाँ हैं। हँ? राइटियस मुक्तिधाम वो है जिसमें वो ही आत्माएं रहती हैं जो दुनिया की चमकती हुई सितारे के रूप में दिखाई देती हैं। सितारे हैं ना परमधाम के, वो आसमान के, वो हैं जड़ सितारे। और ये हैं धरती के सितारे नौ लाख। हँ? तो परमधाम इसी सृष्टि पर उतार लेते हैं। हँ? क्या? ऐसे नहीं इस सृष्टि को छोड़ के जाना है। वो छोड़ के जाने वाले नहीं हैं। न आत्मा से न शरीर से। शरीर भी इसी सृष्टि में रहेगा। हँ? भले बर्फ में दबा रहे कोई हर्जा नहीं। फ्रिज में चीज़ सुरक्षित करने के लिए रख दी जाती है ना। तो बस रखी रहेगी थोड़े समय़। कोई हर्जा नहीं।

तो ये राइटियस मुक्तिधाम में आत्मा बनती है। आत्मा माने 100% आत्मा या 99% आत्मा हो और 1% देहभान भरा हुआ हो तो आत्मा कहेंगे? नहीं। 100%. ये जो तुम बच्चे रुद्रमाला के बच्चे हो ना, हँ, 9,16,108 आत्माएं हो ना। ये सारी की सारी आत्माएं, हँ, तुम राइटियस मुक्तिधाम में आत्मा बन जाती हो। जो राइटियस बनेंगे तो वो उस राइटियस मुक्तिधाम में जाएंगे। और जो राइटियस बनेंगे, नहीं बनेंगे तो कहाँ जाएंगे? अनराइटियस मुक्तिधाम। वो कौनसा है? अनराइटियस मुक्तिधाम वो है जहाँ पड़े-पड़े 5000 साल तक भी सोते रहते हैं कोई-कोई। क्या? हँ? सतयुग के आदि से लेकरके कलियुग के अंत तक पड़े-पड़े क्या करते हैं? हँ? सोते ही रहते हैं। उनमें भी नंबरवार। कोई द्वापर के अंत तक सोते रहते हैं, कोई त्रेता के अंत तक सोते रहते हैं, कोई सतयुग के अंत तक सोते रहते हैं। सोते रहते हैं का मतलब? पूरा आत्मा अभिमानी नहीं बन पाते। कुछ न कुछ आत्मा में देहभान भरा रहता है। पूरी पढ़ाई नहीं पढ़ते हैं, आत्माअभिमानी बनने की, तो ऐसी कमजोरी रह जाती है।

तो ये बताया कि जो राइटियस बनेंगे, हँ, क्या? अनराइटियस नहीं बनेंगे, अनराइटियसपना छोड़ेंगे तो उस मुक्तिधाम में, राइटियस मुक्तिधाम में जावेंगे। और बाकि सब? बाकि सब कहाँ जाएंगे? भले सतयुग की आदि से आने वाली आत्मा ही क्यों न हो; कौन? जिसको भक्तिमार्ग वाले; क्या? भक्तों ने क्या किया? गीता का भगवान कृष्ण को बनाय दिया। अरे, 16 कला संपूर्ण जो बनने वाला है, उसको बताय दिया भगवान। हँ? भगवान तो आकरके नर को नारायण 16 कला संपूर्ण बनाता है; क्या? कि खुद बनता है 16 कला संपूर्ण? अरे, वो तो कलातीत है, वो तो सूर्य है। सूर्य कला में बंधा होता है क्या? हँ? तो जो राइटियस बनेंगे वो मुक्तिधाम में जाएंगे। और फिर जीवनमुक्ति में भी आएंगे। ऐसे नहीं कि जीवनमुक्ति में नहीं जाएंगे। जाएंगे। बाकि ये है कि जब बाप आते हैं, आत्माओं का बाप आते हैं, तो जो पूरी आत्मा नहीं बनते, थोड़े बहुत आत्मा बन जाते हैं, तो उनको भी आत्मिक स्थिति का वर्सा कुछ न कुछ मिल जाता है। भले, अंतिम जनम में, कलियुग के अंत में वो आत्माएं उतरेंगी अनराइटियस परमधाम में जहाँ अनराइटियस ही सारे इकट्ठे होते हैं आत्माएं। क्या कहा? वहाँ से उतरेंगी तो कुछ न कुछ जीवनमुक्ति भोगेंगी जरूर। लेकिन तुम बच्चे राइटियस मुक्तिधाम में ही जाएंगे। जाएंगे नहीं, आएंगे।

तो वास्तव में तुम क्या करते हो? हँ? तुम ऐसा क्या करते हो जो राइटियस मुक्तिधाम में ही जाते हो? ये जो सृष्टि है ये जो सब जीवनबंध में हैं, तुम उनको क्या करते हो? तुम बच्चे जीवनबंध में रहने वालों को क्या करते हो? जीवनमुक्ति में ले जाते हो। क्या? जीवन में भी रहो और मुक्तिधाम में रहो। जीवन में रहते-रहते, जिन्दा रहते-रहते शरीर से दुख-दर्दों से मुक्त रहो। भले एक दिन के लिए भी कोई रहेंगे, चलो, और भी थोड़े समय के लिए रहेंगे, लेकिन रहेंगे जरूर। मतलब तुम बच्चे राइटियस बाप को पहचानते हैं तो राइटियस मुक्तिधाम में जाते हैं। राइटियस बाप कौन? अनराइटियस बाप कौनसा? दो बाप बता दिये। दोनों बेहद के बाप हैं। हैं कि नहीं? एक आत्माओं का बाप, एक मनुष्यों का बाप। तो दोनों में से राइटियस कौन है, अनराइटियस कौन है? हँ? किसको पहचानेंगे? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) धरमगुरु अनराइटियस को पहचानेंगे? लो। अनराइटियस धरमगुरु कौन हैं? (किसी ने कुछ कहा।) साकार बाप को पहचानेंगे? साकार बाप तो दुनिया में ढेर हैं। घर-घर में साकार बाप बैठे हुए हैं। अरे, अरे बताओ ना। हँ? (किसी ने कुछ कहा।) परमब्रह्म कोई बाप होता है? वो तो है ही परम माने बड़ा, ब्रह्म माने अम्मा। वो तो बड़ी अम्मा है, बाप थोड़ेही है। हँ? (किसी ने कुछ कहा।) शिवबाबा। क्या? कब कहा जाता है सुप्रीम सोल शिवबाबा? जब साकार तन में प्रवेश करता है। स्त्री चोले में साकार में कि पुरुष चोले में? कब बनता है बाप? हँ? पुरुष चोले में। वो पुरुष चोले में प्रवेश करता है, तो उसको कहा जाता है शिवबाबा। अगर स्त्री चोले में प्रवेश करे तो क्या शिवबाबी नहीं कह सकते? हँ? कहेंगे कि नहीं? अरे, बांबी में तो सांप घुस जाएगा। बांबी-वांबी की बात छोड़ो। (क्रमशः)

So, now you should take up the service of one Father, shouldn’t you? Hm? There are numerous fathers sitting in every home in the world. You should you take up their service, shouldn’t you? Should you serve them? No. Arey, leave their company. There is a rule of numerous religions in the world in different countries. There are founders of those religions. Hm? So, should you accept the words of all those founders of religions? Hm? Will the world become heaven by accepting their words? Did it become in 2500 years? What does the history say? No. Arey, you have to make every human being righteous. What has been said? Hm? What is meant by ‘you’? Hm? ‘You’ refers to how many? Every human being. How many human beings are there? How many human beings are there in this world? At the most 500-700 crores. So, you have to make each one righteous. To whom did He say? To whom did He say? Did He say to the Brahmakumar-kumaris who do not know their Father at all? So, how will they say ‘Father’? The Father says that I do not talk even to this Brahma. What? I talk to you children. To whom does one talk? One talks to someone who accomplishes the task, obeys you, hm, understands the topic. If someone does not understand the topic at all, if a child is unintelligent, has a child-like intellect, then all those studying under him will be children only, will they not be?

So, you children have to perform this task. What? Which children have to do? Hm? Which children should perform the task of making others righteous? Oho! Hm? The children of the Rudramala have to do. And even among the children of the Rudramala it has been said that the eight kingships will be clearly visible in the Brahmin family. Damn! God bless you. Hm? Eight kingships. Which eight kingships? Number one Suryavanshi kingship. Second number; hm? Chandravanshi kingship. Third number Islamvanshi kingship. Fourth number Bauddhivanshi kingship. Fifth number Christianvanshi kingship. Sixth number Sanyas religion does not have a kingship, but they live like kings, don’t they? What? They sit by establishing their thrones (seats), don’t they? Does anyone have courage in front of them? Can anyone do anything opposite? You will have to do as they say. So, they are most powerful. What? There is no name of kingship. There is no king as well. And they are sitting as uncrowned kings. The ones who follow whom? The ones who follow whom? What is his name? Shankaracharya. Aha! Shankaracharya. Arey, there are four, four Shankaracharyas. How will there be four? Hm? Will there be one Shankar, Dev-Dev-Mahadev or will there be numerous? No. This is about one whom they, the four-four Shankaracharyas have followed on the path of Bhakti. So, this is the sixth one. And seventh? Yes, seventh is Muslim religion. Hm? So, he is also a Father. All these are fathers in this world. Then? Sikhism. What is this? There are eight kingships. Remaining? The kingship that the Aryasamajis established is a democratic rule. What? As regards democratic rule, does God come to make you subjects (praja) or does He come to make you kings? Does God teach rajyog and make you king or subjects? Hm? What does He make? He makes you kings. Hm? Their kingship is not momentary. Although kings become tamopradhan in the end of the Iron Age. Hm? Yet their kingship continues for a long time.

So, those eight religions; you have to make them righteous in all the eight religions. There are roots also of the eight religions in the world tree. Hm? And there are seeds of the roots of all the eight religions in this world tree. So, whom is He saying that you have to make them righteous? Whom do you have to make righteous when it is said ‘you’? Hm? You have to make every human being righteous. This is your responsibility. To whom was it said? Hm? It was said to….. (20.47). Does that single corn become a popcorn? Hm? Does a single corn become popcorn? No. Arey, it was told that he will have some companions, will he not have? Hm? There are arms, huge arms. How big? These arms spread in all the eight directions and rule. So, there are the eight deities, the souls which are sitting on top of the head of the Father of the world in the form of a rosary-like gathering of eight. Where does a Father make those children whom he loves more to sit? Hm? Out of love, he makes them sit on his head.

So, did you understand? You children should make each human being righteous in this world. This is your responsibility. Did you understand? The soul which becomes in righteous abode of liberation (muktidhaam). What? Whose responsibility was it mentioned to be? The righteous muktidhaam; Which one is the unrighteous muktidhaam? Hm? Is there any unrighteous muktidhaam also? One abode is righteous muktidhaam. What is meant by righteous muktidhaam? Are there two muktidhaams? Yes, there are. Hm? Righteous muktidhaam is that where only those souls live which are visible as shining stars of the world. There are stars of the Supreme Abode; those are non-living stars of the sky. And these are the nine lakh stars of the Earth. Hm? So, they bring the Supreme Abode down to this world. Hm? What? It is not as if you have to leave this world. They are not going to leave. Neither through the soul, nor through the body. The body will also remain in this world only. Hm? It may remain buried under the ice; it doesn’t matter. Things are kept in the fridge for preservation, aren’t they? So, that is it; it will remain there for some time. It doesn’t matter.

So, this soul becomes in righteous muktidhaam. Does soul mean 100% soul or will a soul be called a soul if it is 99% soul and if there is 1% body consciousness? No. 100%. You children who are children of the Rudramala, hm, you are 9,16,108 souls, aren’t you? All these souls, hm, you become soul in righteous muktidhaam. Those who become righteous will go to that righteous muktidhaam. And those who become righteous; if they do not become, then where will they go? Unrighteous muktidhaam. Which one is that? Unrighteous muktidhaam is that where some keep on sleeping for 5000 years. What? Hm? What do they do lying there from the beginning of the Golden Age to the end of the Iron Age? Hm? They keep on sleeping. There are numberwise among them also. Some keep on sleeping till the end of the Copper Age; some sleep till the end of the Silver Age. Some keep on sleeping till the end of the Golden Age. What is meant by ‘keep on sleeping’? They are unable to become completely soul conscious. There is body consciousness in the soul to some extent or the other. They do not study the complete knowledge of becoming soul conscious; so, such weakness remains.

So, it was told that those who become righteous; what? If you do not become unrighteous, if you leave unrighteousness, then you will go to that muktidhaam, to the righteous muktidhaam. And all others? Where will all others go? Even if it is the soul that comes from the beginning of the Golden Age iself; who? Whom the people on the path of Bhakti; what? What did the devotees do? They made Krishna the God of Gita. Arey, the one who is to become perfect in 16 celestial degrees was described as God. Hm? God comes and makes nar (man) as Narayan perfect in 16 celestial degrees; what? Or does He Himself become perfect in 16 celestial degrees? Arey, He is beyond celestial degrees (kalaateet); He is the Sun. Is the Sun bound in celestial degrees? Hm? So, those who become righteous will go to the muktidhaam. And then they will also come to jeevanmukti. It is not as if they will not go to jeevanmukti. They will go. It is sure that when the Father comes, when the Father of souls comes, then those who do not become a complete soul, become soul to some extent, then they also get the inheritance of soul conscious stage to some extent or the other. Although in the last birth, in the end of the Iron Age, those souls will descend to the unrighteous Supreme Abode, where all the unrighteous souls gather. What has been said? When they descend from there, then they will definitely experience jeevanmukti (liberation in life) to some extent or the other. But you children will go to the righteous muktidhaam only. You will not go, you will come.

So, what do you do in reality? Hm? What such thing do you do that you go only to the righteous muktidhaam? What do you do this world, to all these people who are in jeevanbandh (bondage of life)? What do you children do to those who live in jeevanbandh? You take them to jeevanmukti (liberation in life). What? Lead a life also and remain in muktidhaam as well. Remain free from sorrows and pains physically while living your life, while being alive. Although some may live even for a day, okay, some may live for a shorter time, but they will definitely live [in jeevanmukti]. It means that you children recognize the righteous Father, so you go to the righteous muktidhaam. Who is the righteous Father? Which is the unrighteous Father? Two fathers were mentioned. Both are unlimited fathers. Are they or are they not? One is the Father of souls; one is a Father of human beings. So, who is righteous and who is unrighteous among both of them? Hm? Whom will you recognize? Hm?
(Someone said something.) Will you recognize the unrighteous religious gurus? Look. Who are unrighteous religious gurus? (Someone said something.) Will you recognize the corporeal Father? There are numerous corporeal fathers in the world. Corporeal fathers are sitting in every home. Arey, arey, speak up, will you not? Hm? (Someone said something.) Is Parambrahm a Father? He is Param, i.e. big/senior, Brahm means mother. He is the senior mother; he is not the Father. Hm? (Someone said something.) What ShivBaba? When is it said Supreme Soul ShivBaba? When He enters in a corporeal body. In a female body in a corporeal form or in a male body? When does He become a Father? Hm? In a male body. When He enters in a male body, then He is called ShivBaba. If He enters in a female body, then can’t you call Him Shivbabi? Hm? Will you call or not? Arey, a snake will enter in a snake-hill (baambi). Leave the topic of baambi-vaambi. (Continued)
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 22 Apr 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2692, दिनांक 06.11.2018
VCD 2692, Dated 06.11.2018
प्रातः क्लास 20.9.1967
Morning Class dated 20.9.1967
VCD-2692-extracts-Bilingual-Part-3

समय- 29.49-43.50
Time-29.49-43.50


तो, तो तुम बच्चे सारी दुनिया को रावण राज्य से छुड़ाकरके ये 500 करोड़ आदमी वो सभी तो नहीं आ जाएंगे सतयुग में? सब आ जाएंगे? नहीं। सवाल ही नहीं पैदा होता। हैं तो नंबरवार ना। क्या? नंबरवार हैं। नहीं। वो सब नहीं आ जाएंगे। ये तो फिर तुमको इस झाड़ का, ड्रामा का सारा राज़ समझाया जाता है। क्या? ये ड्रामा कैसे बना हुआ है? हँ? वो झाड़ का राज़ जो है वो गीता में, जो मनुष्यों की लिखी हुई गीता है उसमें नहीं समझाया गया। नाम तो दिया है सृष्टि वृक्ष का - अश्वत्थ वृक्ष। क्या? नाम तो एक्यूरेट दिया है। क्या नाम दिया है? अश्व इत्थ। स्थिर कर दिया। किस अश्व को स्थिर कर दिया? जो मन रूपी घोड़ा है, जो हर मनुष्य के अन्दर बहुत चंचलता दिखा रहा है उसको स्थिर कर दिया। क्या? मन रूपी घोड़े को स्थिर कर दिया तो उस वृक्ष का नाम हुआ; क्या? चार अवस्थाओं से गुजरने वाला वृक्ष, चार सीन में गुजरने वाला ड्रामा का वृक्ष, वो ऐसे बना हुआ है। कैसे? राजयोग से बना हुआ है। हँ? क्या सिखाया जाता है राजयोग में? हँ? कि जो वृक्ष की बीज रूप आत्माएं सुधर जाएंगी तो सारा वृक्ष सुधर जाएगा। और बीजरूप आत्माओं में भी कौन सुधर जाएंगी? जो बोला - एक भी पावरफुल ग्रुप तैयार होने पर (किसी ने कुछ कहा।) आठ सुधर जाएंगे इकट्ठे ही? जब आठ इकट्ठी सुधर जाएंगी तो फिर आठ राजाइयां अलग-अलग क्यों चलेंगी ब्राह्मणों की दुनिया में, स्पष्ट देखने में आवेंगी? हँ? आठ राजाइयां? हँ? नहीं। वो थोड़ेही इकट्ठी चलती हैं? एक चलेगी कि सब चलेंगी इकट्ठी? एक।

तो एक भी पावरफुल ग्रुप तैयार होने पर, हँ, एक ग्रुप दूसरे ग्रुप को खींचते हुए अंत में 108 की माला का संगठन एक हो जाएगा। हँ? क्या कहा? 12-12 के कितने ग्रुप? नौ ग्रुप। तो 12 नेमा 108 हुए ना। हँ? तो 12 नेमा 108 में 8 ग्रुप को लिया। 9 ग्रुप को नहीं लिया। 9वें को क्यों नहीं लिया? अरे? वो रतन होते हैं ना। नंबरवार होते हैं कि एक जैसी कीमत के होते हैं? नहीं। तो नौ रतन हैं चैतन्य। उनमें एक रतन ऐसा है। कैसा? वैल्यूलैस। उसको क्या कहते हैं? पुखराज। हाँ। तो वो पुखराज को छोड़ दिया। ये वैल्यूलैस को अगर अंदर डाल देंगे तो और तो ये सबको नास्तिक बना देगा। क्या करेंगे? हँ? ये नहीं सुधरता जल्दी। चलो, इधर फटा एटम बम। उधर फटा एटम बम्ब। इधर फटा। पीछे फिटा। चारों दिशाओं में बम्ब फटने लगते हैं तब, हँ, अब तो हम, अब तो हम भी गए, अब बचेंगे नहीं। ओ गॉड फादर, तू ही सच्चा है। लो। तब मानते हैं। तब तक टकराते रहते हैं। क्या? बात-बात में टकराएंगे। छल छिद्र कपट करेंगे। क्या? हाँ। कहेंगे शास्त्रीजी महाराज, प्राइम मिनिस्टर आफ इंडिया के। आ जाओ। हम तुम्हें बुलाते हैं। आ जाओ। ताशकंद मं आ जाओ। हम तुम्हारी बात करानी है सबकी इकट्ठी। वाह! बुलाय लिया। और बुलाने के बाद फिर क्या किया? हँ? बुलाने के बाद, उनके जो भैया हैं ना, बड़े भैया, उन्होंने, उन्होंने उनको खतम करवाय दिया चाल चलके। विष दिलवाय दिया। तुमने अपने देश में बुलाया तो तुम्हारा काम है ना उनकी डॉक्टरी जांच करवाना उस शरीर की और पता लगाना ये कैसे हुआ? वो कुछ नहीं। वापस भेज दिया। जाओ। अपने देश में ले जाओ। ये बुद्धू भारतवासी। क्या? माताएं। क्या? माताएं बुद्धू होती हैं कि होशियार होती हैं? बुद्धि कैसी होती है? हँ? सीमित होती है कि विस्तार की बुद्धि होती है? हँ? ये जो धरमपिताएं आते हैं ना। ये माताओं की बुद्धि एकदम चकनाचूर कर देते हैं। ये तो शिव बाप है, हँ, कन्याओं-माताओं को शक्ति बनाता है तो उनकी बुद्धि विशाल हो जाती है।

तो अभी तुम्हारी, तुमको ये राज़ समझ में आ गया। क्या? कि ये सृष्टि चक्र कहो, या सृष्टि वृक्ष कहो या ड्रामा कहो, ह्यूज ड्रामा ये कैसे बना हुआ है, किसने बनाया और कब बनाया? ड्रामा को भी अभी तुम बच्चे विचार करेंगे ना। क्या? हँ? ड्रामा को विचार करेंगे? कि अपनी आत्मा के बारे में विचार करेंगे? कि मेरी आत्मा एक्टर ने कैसे-कैसे इस सृष्टि रूपी इस बेहद के ड्रामा में कैसे-कैसे पार्ट बजाए हैं वो याद करेंगे या पूरे ड्रामा को याद करेंगे? क्या करेंगे? हं?
(किसी ने कुछ कहा।) हँ? आत्मा को याद? ड्रामा को याद नहीं करेंगे? हँ? अभी ड्रामा के बारे में विचार नहीं करेंगे? हँ? पहले ड्रामा के बारे में करेंगे कि आत्मा के बारे में? (किसी ने कुछ कहा।) पहले आत्मा के बार में? हो जाएगा? हँ? पहले आत्मा के बारे में विचार हो जाएगा? हँ? अरे, ड्रामा पूरे 5000 वर्ष का। क्या? हँ? आत्मा, हरेक आत्मा पूरे 5000 वर्ष पार्ट बजाती है? हँ? नहीं। अरे बीजरूप आत्माएं भी पूरे 5000 वर्ष पार्ट नहीं बजाती हैं। ऐसे थोड़ेही कि बेहद के जो राइटियस परमधाम है उसमें से सब इकट्ठे उतरी आएंगी? नहीं। सवाल ही पैदा नहीं होता।

तो ड्रामा को पहले तुम बच्चे विचार करेंगे। क्या? ये ड्रामा कैसे बना हुआ है? तो ड्रामा में भी; क्या? पहले से लेकरके अंत तक आते जाएंगे। क्या? ड्रामा में नंबरवार आएंगे कि इकट्ठे उतर पड़ेंगे धड-धड-3? हँ? जैसे टिड्डियों का दल आता है ना। टिड्डी होती है ना। इकट्ठी आसमान में उड़ती हुई आती हैं और खेतों में बैठ जाती हैं सारा खेत सफाचट कर देती हैं। तो टिड्डी मिसल इकट्ठे उतरि आएंगे या नंबरवार आएंगे? और टिड्डी भी कोई तो आगे-आगे जाती होगी। हँ? कोई पीछे-पीछे। तो उनमें भी नंबर होते हैं। तो पहले से लेकर अंत तक आते जाएंगे। उसपे विचार करेंगे कि नहीं करेंगे? कौन है पहले? अभी विचार नहीं किया। विचार करेंगे। क्या? पहले तो बाप होता है कि पहले बच्चे होते हैं? हँ? हाँ, बाबा कहते भी हैं - बच्चे, तुम्हारा बाप आया हुआ है। तो बच्चे क्या समझते हैं? हाँ, बिन्दी आई हुई है। हमारा बाप बिन्दी आई हुई है। लड्डू। बिन्दी क्या करेगी फुदुक-फुदुक के? हँ? बिन्दी भी जब साकार शरीर धारण करेगी तभी तो कुछ करेगी और कराएगी।

मैं करन-करावनहार हूँ। बोला कि नहीं? क्या? मैं उस तन में प्रवेश करके करता भी हूँ। क्या करता हूँ? ज्ञान सुनाता हूँ। हँ? सुनाता हूँ कि नहीं? और सिर्फ सुनाता नहीं हूँ कि तुम्हें वेदवाणी सुनाय दी। बस हो गया काम। नहीं। क्या करता हूँ? और क्या करता हूँ? हँ? और कुछ करता हूँ कि नहीं? बस, ज्ञान सुना के चला जाता हूँ? हँ? कुछ भी।
(किसी ने कुछ कहा।) गति-सद्गति पहले हो जाएगी? ज्ञान सुनाके चले जाएं और फिर गति, गति-सद्गति सीधी कर दें, जैसे ब्रह्माकुमारियों की गति सद्गति हो गई। कैसे-कैसे उल्टे-उल्टे काम कर रही हैं। हँ? वो तथाकथित ब्रह्माकुमार-कुमारियां, उनकी गति-सद्गति हो गई? कहेंगे, हाँ, हमारी हो गई। चलो माउंट आबू। हम तुम्हें देखो दिखाएं स्वर्ग कैसा होता है। हाँ, बड़े बढ़िया-बढिया महल-माड़ियाँ, सफाई-वफाई सब झकाझक आय-हाय-हाय। स्वर्ग दिखाएंगे। जो जाने वाले हैं ना बच्चाबुद्धि, हाँ, वाकई अगर स्वर्ग लगा पड़ा है तो यहाँ लगा पड़ा है। वो भी ऐसे कहते। प्रधानमंत्री भी जाएगा तो भी वाह बड़ी प्रशंसा करके आ जाएगा। अखबारों में उनकी प्रशंसा छप जाएगी कि दुनिया में कोई अगर संस्था है जिसमें कभी दो फाड़ें नहीं हुए हैं तो वो एक दुनिया में एक ही संस्था है ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय। है तुम्हारा भला हो। अरे, तुम अंदर घुस के तो देखो। तब तुम्हें पता चले। दूर ही दूर से आए, लड्डू-पेडा खाए, हँ, मान-मर्तबा लिया, ऊँची कुर्सी पर बैठे और बस फिदा हो गए। अरे, बाप रे।

तो क्या विचार करना है? हँ? ड्रामा के ऊपर? कि पहले से लेकरके अंत तक आते जाएंगे। हँ? पहले कौनसा ग्रुप आएगा? कौनसे वंश के आएंगे पहले? सूर्यवंशी आएंगे? हाँ, सूर्यवंशी आएंगे। तो सूर्यवंशियों में भी नंबरवार होंगे या सब इकट्ठे उतरि आएंगे? हँ? मुक्ति-जीवनमुक्ति में नबंरवार जाएंगे कि इकट्ठे उतरेंगे? नंबरवार। तो पहला कौन? हँ? पहला कोई होगा कि नहीं विचार करेंगे कि कर लिया है? अरे, होगा जब देखा जाएगा। सब करेंगे विचार तो हम भी कर लेंगे पीछे से। क्या? किसका विचार? कि इस सृष्टि का बाप आया हुआ है। जगतपिता आया हुआ है। जगत का। हँ? पिता आया हुआ है? हँ? पिता तो औरंगजेब का भी आया। ससुरे को मार-मूर के जेल में डाल देंगे नहीं तो। क्या? ऐसे पिता जाने कितने आते हैं दुनिया में। ऐसे भी तो होते हैं। बात कुछ भी नहीं मानेंगे। बाप बार-बार बोलते रहते हैं। शिव बाप क्या बोलते हैं ब्रह्मा के तन में? बच्चे, तुम्हारा बाप आया हुआ है। बाप-बाप चिल्लाते रहो। बिन्दी समझेंगे बाप आया। है लड्डू। हँ? बिन्दी खा लो, लड्डू हो गया। अरे, बिन्दी भी, बाप कहते हैं, कि मैं बिना साकार के कुछ भी कर नहीं सकता। और साकार भी परमानेन्ट चाहिए, मुकर्रर रथ चाहिए कि टेम्परेरी छोटे-छोटे रथ चाहिए? हँ? आज पार्ट बजाया कल गायब हो गए? हँ? ऐसे चाहिए? नहीं। परमानेन्ट। जबसे उस रथ में आता हूँ, आदि से लेकरके अंत तक उसी रथ में पार्ट बजाता हूँ। क्या? हाँ, अगर दूसरों में भी आएंगे ना तो ऐसे नहीं है कि उस रथधारी को छोड़करके आ जाएंगे। नहीं। वो सूक्षम में उसको इमर्ज करके, सूक्ष्म शरीर भी आएगा साथ में और आत्मा भी साथ में आएगी। अगर छोड़ के आ जाएं तो मुकर्रर रथ कहा जाएगा? हँ? नहीं कहा जाएगा।

तो पहले से लेकर अंत तक आते ही जाएंगे, पार्ट बजाते जाएंगे। फिर नंबरवार आते जाएंगे ना बच्चे। तहाँ तक कि पिछाड़ी में जो कुछ भी रहा-कुहा होगा, हँ, सो आ जाएंगे। पिछाड़ी में माने कब? 500-550 करोड़ की तो बात करते हैं, मनुष्य हैं। अरे, बकने दो साले को, हरामजादा आया हुआ है, हँ, आराम से सो जाओ। क्या कहा? हँ? पिछाड़ी में जो कुछ भी रहा कुहा होगा सो आ जाएंगे। पिछाड़ी में कितने आ जाएंगे जो रहा कुहा? रहा कुहा का मतलब क्या है? हँ? जो भी एक्स.वाइ.जेड है प्रजावर्ग की आत्माएं हैं, राजा तो कभी बनने का सवाल ही नहीं। तो वो भी आ जाएंगे। ओमशान्ति। जाओ, सो लो जाके। (समाप्त)

So, so, you children liberate the entire world from the kingdom of Ravan; but will all these 500 crore people come to the Golden Age? Will everyone come? No. The question does not arise at all. They are numberwise, aren’t they? What? They are numberwise. No, all of them will not come. Then you are explained the entire secret of this tree, the drama. What? How is this drama made? Hm? That secret of the tree has not been explained in the Gita, in the Gita written by the human beings. The world tree has indeed been named as Ashwath vriksh. What? The name has been coined accurately. What is the name assigned? Ashwa itth. It was made constant. Which horse (ashwa) was made constant? The mind like horse, which is showing a lot of inconstancy in every human being was made constant. What? When that horse-like mind was made constant, then the name of that tree was coined; what? The tree that passes through four stages, the tree of the drama which passes through four scenes is made like this. How? It is made through Rajyog. Hm? What is taught in Rajyog? Hm? That when the seed-form souls of the tree reform then the entire tree will reform. And even among the seed form souls who will reform? It has been said that even if one powerful group gets ready;
(Someone said something.) Will the eight reform together? When the eight will reform at the same time then why will eight kingships continue, become clearly visible in the world of Brahmins separately? Hm? Eight kingships? Do they exist simultaneously? Will one kingship exist [at a time] or will all of them exist [at the same time]? One.

So, even if one powerful group gets ready, hm, one group will pull the other group and in the end the gathering of the rosary of 108 will become one. Hm? What has been said? How many groups of 12 each? So, 12 divided [by 8] are 108, aren’t they? Hm? So, eight groups were included in 12 divided by 108. 9 groups were not taken. Why wasn’t the ninth one included? Arey? They are gems, aren’t they? Are they numberwise or do they have the same price? No. So, nine gems are living. Among them one gem is like this. How? Valueless. What is it called? Topaz (Pukhraj). Yes. So, that Pukhraj was left. If this valueless one is put inside, then he will make everyone atheist. What will you do? Hm? This one does not reform quickly. Okay, one atom bomb explodes here. One atom bomb explodes there. It explodes here. It explodes at the back. When bombs start exploding in all the four directions then, hm, now we, now we too are gone; now we will not be saved. O God Father! You alone are true. Look. Then they believe. Until then they keep on clashing. What? They will clash in every topic. They will cheat and deceive. What? Yes. They will say – Shastriji Maharaj, the Prime Minister of India. Please come. We invite you. Come. Come to Tashkent. We want you all to discuss together. Wow! They called him. And after calling him, what did they do? Hm? After calling him, their brother, their big brother played a trick and got him killed. He got him poisoned. When you called him to your country, then it is your duty to get the body checked by doctors and to find out how that happened? Nothing of that sort happened. They sent them back. Go. Take him to your country. These foolish Indians. What? Mothers. What? Are mothers foolish or intelligent? How is their intellect? Hm? Is it limited or is it a broad-intellect? Hm? These founders of religions come, don’t they? They ruin the intellect of the mothers completely. It is the Father Shiv who makes the virgins and mothers a shakti (personification of might); so, their intellect becomes broad.

So, now you have understood this secret. What? That call it a world cycle or call it a world tree or call it a drama, a huge drama, how was it formed? Who made it and when was it made? Now you children will think of the drama also, will you not? What? Hm? Will you think of the drama? Or will you think of your soul that how did I, the actor played parts in this unlimited drama? Will you remember that or will you remember the entire drama? What will you do? Hm? (Someone said something.) Hm? Will you remember the soul? Will you not remember the drama? Hm? Will you not think about the drama now? Hm? Will you first think about the drama or about the soul?
(Someone said something.) About the soul first? Will it happen? Hm? Will you be able to think of the soul first? Hm? Arey, the drama is of entire 5000 years. What? Hm? Does a soul, does every soul play part for complete 5000 years? Hm? No. Arey, even the seed-form souls do not play the part for entire 5000 years. It is not as if all will descend simultaneously from the righteous Supreme Abode. No. The question itself does not arise.

So, you children will first think about the drama. What? How is this drama made? So, even in the drama; what? You will keep on coming from the beginning till the end. What? Will you come numberwise in the drama or will you descend simultaneously? Hm? Just as a swarm of locusts descends, doesn’t it? They come flying together in the sky and sit on the fields and gobble the entire field. So, will you descend like a swarm of locusts or will you come numberwise? And even among the locusts, some must be leading others. Hm? Some must be behind. So, there are numbers among them also. So, you will keep on coming from the beginning to the end. Will you think about that or not? Who are first? You haven’t thought about that yet. You will think. What? Is the Father first or are the children first? Hm? Yes, Baba also says – Children, your Father has come. So, what do the children think? Yes, a point has come. Our Father, the point has come. Laddu. What will a point do by jumping around? Hm? Even the point will do and enable something only when it assumes a corporeal body.

I am doer and enabler (karan-karaavanhaar). Has He said or not? What? I enter in that body and do as well. What do I do? I narrate knowledge. Hm? Do I narrate or not? And I don’t just narrate that I narrate the Vedvani to you. That is it; the task was completed. No. What do I do? What else do I do? Hm? Do I do anything else or not? Do I just narrate the knowledge and go away? Hm? Anything.
(Someone said something.) Will the gati-sadgati (liberation and ‘liberation in life’) happen beforehand? He narrates the knowledge and goes away and then gati-sadgati is done directly, just as the gati-sadgati of the Brahmakumaris happened. What all kinds of opposite tasks they are performing! Hm? Did those so-called Brahmakumr-kumaris achieve gati-sadgati? They will say, yes, we have achieved. Let’s go to Mount Abu. Look, we will show you how heaven is. Yes, big, nice palaces, cleanliness, everything is spic and span. We will show you heaven. Those with a child-like intellect who go there [say], yes, if there is heaven in reality, then it is here. They too say like this. Even if the Prime Minister goes there, he too will praise them a lot and come. Their praises will be published in the newspapers that if there is any institution in the world which has not seen division, then the only such institution in the world is Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalaya. God bless you. Arey, you intrude among them and then observe. Then you will know. You came from a distance, ate laddus and pedas (sweets), hm, received respect and position, sat on a high seat and got attracted. Oh Father!

So, what should you think? Hm? About the drama? That you will keep on coming from the beginning to the end. Hm? Which group will come first? Which dynasty will come first? Will the Suryavanshis come? Yes, the Suryavanshis will come. So, even among the Suryavanshis will they be numberwise or will everyone descend simultaneously? Hm? Will they achieve mukti-jeevanmukti numberwise or will they descend simultaneously? Numberwise. So, who is first? Hm? Will you think or have you already thought as to will there be anyone first or not? Arey, we will see whenever it happens. When everyone thinks then we will also think later. What? Think about whom? That the Father of the world has come. The Jagatpita has come. Of the world (jagat). Hm? Has the Father come? Hm? Even Aurangzeb’s Father came. We will beat him and put him in jail. What? So many such fathers come in the world. There are such ones also. They will not accept anything. The Father keeps on telling again and again. What does Father Shiv say in the body of Brahma? Children, your Father has come. You keep on shouting ‘Father, Father’. You will think that a point-form Father came. It is laddu (a spherical sweet). Hm? Eat the point, it became a laddu. Arey, even the point, the Father says that I cannot do anything without the corporeal. And should the corporeal also be permanent, permanent Chariot or are temporary, small chariots required? Hm? Those who play the part today and vanish tomorrow? Hm? Are such ones required? No. Permanent. Ever since I come in that Chariot, I play a part from the beginning to the end in that Chariot only. What? Yes, even if He comes in others, it is not as if He will leave that Chariot and come. He causes him to emerge in subtle form, the subtle body will also come and the soul will also come. If He leaves him and comes, then will he be called a permanent Chariot? Hm? He will not be called.

So, you will keep on coming from the beginning to the end and keep on playing your parts. Then you will keep on coming numberwise, will you not children? It will be to the extent that in the end whoever remains will come. ‘In the end’ refers to which time? He speaks about 500-550 crores as being human beings. Arey, let him keep on barking, a scoundrel has come, sleep comfortably. What has been said? Hm? In the end whoever remains will come. How many remaining ones will come in the end? What is meant by remaining ones? Hm? All the X, Y, Z, the souls of the subjects’ category, there is no question of their becoming kings at all. So, they will also come. Om Shanti. Go and sleep.
(End)
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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 25 Apr 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2693, दिनांक 07.11.2018
VCD 2693, Dated 07.11.2018
प्रातः क्लास 20.9.1967
Morning Class dated 20.9.1967
VCD-2693-extracts-Bilingual

समय- 00.01-20.00
Time- 00.01-20.00


प्रातः क्लास चल रहा था - 20.9.1967. बुधवार को पांचवें पेज के मध्य में बात चल रही थी - कि ड्रामा में पहले से लेकरके अंत तक आत्माएं आती जाएंगी, पार्ट बजाती जाएंगी। तो नंबरवार आते जाएंगे ना। और तहां तक आते जाएंगे कि पिछाड़ी में जो कुछ भी रहा-कुहा होगा तो सब आ जाएंगे। फिर ये खेल बन्द। फिर रिपीट। तो ये भी ऐसे ही है। ये ह्यूज ड्रामा एकदम बन्द नहीं होता है। ये चलता ही रहता है। ये जो टिक-टिक वाली घड़ी है ना ये तो सेकण्ड की है ना। टिक-3. बस। ये चलती रहती है। और गोया जैसे कि फिर से ये ड्रामा शूट होता जाता है। क्योंकि जो शूटिंग हो रही है वो नया है ना बच्ची। एवर न्यू। और ये भी है कि ये पुराना कभी होता नहीं है। ये ड्रामा कभी पुराना नहीं होता है। वो दुनियावी लोग जो इनसे ड्रामा बनाते हैं वो छोटे-छोटे ड्रामा बनाते हैं। वो तो विनाश हो जाते हैं। ये तो अविनाशी ड्रामा है। और वो तो नाटक भी विनाश हो जाते हैं। सब विनाश। बाकि ये बेहद का ड्रामा अविनाशी है। हँ? ये बेहद का अविनाशी नाटक कहो, खेल कहो, इसको कहा ही जाता है ये पार्टधारी। हँ? कौन पार्टधारी? ये पार्टधारी। हँ? तो अविनाशी पार्टधारी है। हँ? कौन है अविनाशी पार्टधारी? हँ? वो ड्रामा तो छोटे-छोटे होते हैं। विनाश हो जाते हैं। और ये तो अविनाशी है। अविनाशी ये, ये, ये खेल।

तो देखो ये अविनाशी खेल का मांडवा कितना बड़ा है। वो दुनियावाले तो विनाशी खेल खेलते हैं छोटे-छोटे मांडवे बनाते हैं। हँ? और उसमें तो छोटे-छोटे जो मांडवे बनाते हैं, बत्तियाँ, वो बत्तियाँ बिजली जलानी पड़ती है। हँ? और इसकी बत्तियाँ कौनसी हैं? हँ? इसकी बेहद की बत्तियाँ हैं। वो है नक्षत्र, सूर्य, चन्द्रमा। और ट्विंकल-ट्विंकल सितारे। तो ये बेहद का ड्रामा है। तो इस बेहद की पुरानी सृष्टि को फिर नया। और नया भी कैसा नया बनता है! देखो तो। हँ? तुम साक्षात्कार करेंगे कि कैसा नया बनता है? बाबा ने कहा था ना तुम जितना नज़दीक आते जावेंगे; हँ? किसके नज़दीक आते जावेंगे? हँ? तुमको साक्षात्कार बहुत होंगे। क्या साक्षात्कार होगा? यानि जो एम-आब्जेक्ट है ना, एम-आब्जेक्ट का साक्षात्कार होगा। तो तुमको अपनी एम-आब्जेक्ट मिलेगी जिसका तुमको बहुत खुशी होगी। तो पहले खुशी। हँ? आदि में बहुत खुशी। और फिर अंत में? अंत में रंज हो जावेगा। पिछाड़ी में। हँ? खुशी कब होगी? जब नज़दीक जावेंगे, जितना नज़दीक जावेंगे उस समय खुशी होगी जब साक्षात्कार करते रहेंगे। हँ? तो तुमको मालूम होगा; क्या? कि हम तो बहुत ऊँचा पद पाते हैं। हँ? ये दुनिया है ना। इन दुनियावालों के मुकाबले तो हमारा बहुत ऊँचा पद है। पर वो तो दुनियावाले कोई बहुत हल्का पद पाते हैं। हँ? कौनसी दुनियावाले? वो दुनियावाले। हँ? कितनी दुनिया बता दी? तुम्हारी ऊँच ते ऊँच दुनिया। इनकी दुनिया। और उनकी दुनिया। तो वो तो बहुत हल्का पद पाते हैं।

तो उस समय ये सब साक्षात्कार होंगे। सबको अपने-अपने पद का साक्षात्कार होगा। और फिर ड्रामा फिनिश। फिनिश हो जाएगा क्योंकि फिर पीछे जाएंगे ना। हँ? कहाँ जाएंगे? हँ? आत्माएं जो पार्टधारी हैं वो अपने-अपने चोले उतार करके घर जाएंगी ना। हँ? तो पीछे ये सब खलास हो जाएंगे। हँ? ये सब क्या? क्या-क्या सब खलास हो जाएगा? हँ? न ये खुशी की दुनिया रहेगी न दुख की दुनिया रहेगी। ये जो कुछ भी इन आँखों से देखते हो सब खलास हो जाएगा। फिर क्या होगा? हँ? फिर उनका ड्रामा शुरू होगा कि इनका ड्रामा शुरू होगा कि तुम्हारा ड्रामा शुरू होगा इस दुनिया में? हँ? हाँ, पहले-पहले तुम्हारा ड्रामा शुरू होगा। वो जो ड्रामा है ना वो अभी पूरा होता है तो रिपीट करना है। हँ? बस फिर उसको फुल स्टॉप। फिर दुबारा वो पार्ट बजाने का। हँ? फिर आएगा ना। तो वो पार्ट आकरके बजाएंगे। कौनसा पार्ट? हँ? कौनसा पार्ट आके बजाएंगे? हँ? जो कलप पहले बजाया था। क्या? हँ? देवता का पार्ट बजाएंगे। अच्छा?

कौनसी दुनिया में बजाएंगे? स्वर्ग में बजाएंगे? नरक में बजाएंगे? कौनसी दुनिया में बजाएंगे? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ। हूबहू वही पार्ट बजाएंगे। जरा भी फरक नहीं हो सकता। हँ? स्वर्ग में पार्ट बजाएंगे। अच्छा! स्वर्ग में भी तो नंबरवार हैं। हँ? नहीं? क्या-क्या नंबर हैं? हँ? अव्वल नंबर कौनसा है? हँ? हाँ। (किसी ने कुछ कहा।) स्वर्णिम? अच्छा? सोने का है? सोने का तो सतयुग में भी कहा जाएगा। (किसी ने कुछ कहा।) हाँ। सतयुग में भी सूर्यवंशी होते हैं। हँ? कौनसा पार्ट बजाएंगे? हँ? कौनसी दुनिया में? अरे, भगवान-भगवती की दुनिया में पार्ट बजाएंगे। उनसे ऊँचा तो कोई होता ही नहीं। वो पार्ट में जरा भी फर्क नहीं होता। हँ?

तो उस ऊँच ते ऊँच पद पाने के लिए तुम बच्चों को जितना हो सके; हँ? लिमिट है? कोई लिमिट नहीं? जितना हो सके इतना ऊँच पद पाने का पुरुषार्थ करना है। और ये पुरुषार्थ करना तो स्टूडेन्ट्स का काम है ना कि हम ऊँचा पद पाएं। तो उस ऊंच पद पाने के लिए पुरुषार्थ तो; क्या? देहार्थ नहीं। देहार्थ क्या होता? देह के अर्थ नहीं। पुरुषार्थ। पुरुष माने आत्मा के अर्थ पुरुषार्थ जरूर करना पड़ता है। तो ऐसे नहीं मूँझना चाहिए। क्या? कि ड्रामा में होगा तो करेंगे। ड्रामा अनुसार हमको ड्रामा कराना होगा तो कराएगा। अरे! ड्रामा कराएगा? हँ? अभी बताया, अभी ड्रामा का राज़ बताया ना। क्या बताया? हँ? ड्रामा कैसा है? हँ? भूल गए? अविनाशी ड्रामा है। तो ये ड्रामा बताया ना। भूल गए? अविनाशी ड्रामा है। और अविनाशी पार्टधारी है। हँ? वो अविनाशी पार्टधारी कौन है? हँ? अरे! कौन है अविनाशी पार्टधारी? शिवबाबा अविनाशी पार्टधारी है। तो हमको उस ड्रामा को पार्ट कराना होगा तो कराएगा। अरे! माने हम अपने आप नहीं करेंगे। वो कराएगा तब करेंगे। ऐसे? नहीं, नहीं बिल्कुल नहीं। आज से पक्का? हँ? आज से पक्का।

तो ड्रामा के ऊपर हम नहीं छोड़ेंगे। हँ? क्यों? उसका नाम ही क्या है? डरामा। पुरुषार्थ करो तो ठीक। नहीं तो फिर वो कैसी है अम्मा? और दुनिया में तो अम्मा बड़ा प्यार देती है। हँ? ये बड़ी ते बड़ी अम्मा, ये परमब्रह्म, आय हाय-हाय। तो पुरुषार्थ करना पड़ता है। हँ? क्या? कम्पलशन है। अगर नहीं किया तो ड्रामा कराएगा। ड्रामा को तो समझ गए ना। हँ? नहीं समझे? क्या समझे? हँ? समझ गए? जैसा काम वैसा नाम। क्या नाम? क्या नाम दिया? करावनहार।
(किसी ने कुछ कहा।) धर्मराज? अरे! बड़ी जल्दी याद आ गया। ऐसे क्यों कहते? हँ? धरमराज तो काला-कलूटा, कैसा लगता है बैंगन लूटा, मूंछो वाला काला-काला। हँ? ऐसे भी नहीं कि बुड्ढा-सुड्ढा हो गया। हँ? भैंसे पे सवार। कितना भयंकर! हँ? तो ऐसे नहीं समझना कि ड्रामा को कराना होगा तो कराएगा। हम तो, नहीं, हम तो जितना होगा। हँ? ये बात तो मुँह से निकलनी भी नहीं चाहिए। क्या? क्या बात? हँ? इस डरामा को कराना होगा तो कराएगा। अरे, ये तो मुँह से कहना भी बहुत रांग है। क्यों? बहुत क्यों रांग है? हँ? अरे! जो रांग कहते हैं या रांग करते हैं तो क्या रिजल्ट होता है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) हँ। पद ही भ्रष्ट हो जाता है? बस? पद तो बाद में पता चलता है कि हमारा पद भ्रष्ट हो गया। सज़ाएं जितनी ज्यादा मिलती हैं तो उतना पद क्या होता है? भ्रष्ट हो जाता है। तो सज़ाओं के आधार पर पद का पता चलेगा। लेकिन ये रांग हुआ कि राइट हुआ? ये तो बहुत रांग बात है। नहीं। हमको तो पक्का कर देना है। क्या? कि हमको तो पुरुषार्थ करना ही है। देहार्थ करने का टाइम अब ड्रामा में नहीं रहा।

A morning class dated 20.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the middle of the fifth page was that the souls will keep on coming and playing their parts in the drama from the beginning to the end. So, they will keep on coming numberwise, will they not? And they will keep coming until the end when all the remaining ones will come. Then this drama will end. Then it will repeat. So, this is also like this only. This huge drama doesn’t stop suddenly. This keeps on moving. This clock that produces the sound tik-tik shows seconds, doesn’t it? Tik-3. That is it. This keeps on moving. And it is as if the shooting of this drama continues. It is because the shooting that is taking place is new, isn’t it daughter? Ever new. And it is also true that this never becomes old. This drama never becomes old. Those worldly people who organize dramas organize small dramas. They are destroyed. This is an imperishable drama. And those dramas also get destroyed. All get destroyed. But this unlimited drama is imperishable. Hm? Call it unlimited drama, call it a play, it is called this actor. Hm? Which actor? This actor. Hm? This is imperishable actor. Hm? Who is imperishable actor. Hm? Those dramas are small ones. They are destroyed. And this is imperishable. This, this, this play is imperishable.

So, look, the tent (maandvaa) of this imperishable play is so big. Those people of the world enact perishable plays; they build small tents. Hm? And in those small tents that they build, they have to light those bulbs, those electric bulbs. Hm? And which are the bulbs of this one? Hm? This one has unlimited bulbs. That is a constellation, the Sun, the Moon. Twinkle-twinkle stars. So, this is an unlimited drama. So, this unlimited old world is made new again. And how does this new one also become new? Look. Hm? You will have visions as to how it becomes new. Baba had said that the more you come closer; hm? Closer to what? Hm? You will have a lot of visions. What visions will you have? It means that you will have visions of the aim-object. So, you will get your aim-object for which you will feel very happy. So, first joy. Hm? A lot of joy in the beginning. And then in the end? In the end there will be sorrow. In the end. Hm? When will there be joy? When you come close, the closer you go, you will have joy when you keep on having visions. Hm? So, you will come to know; what? That we achieve a very high post. Hm? This is a world, isn’t it? In comparison to these people of the world, our post is very high. But those people of the world achieve a very light (low) post. Hm? People of which world? People of that world. Hm? How many worlds were mentioned? Yours is a highest on high world. The world of these people. And the world of those people. So, they achieve a very light post.

So, at that time you will have all these visions. Everyone will have the vision of their post. And then the drama will finish. It will finish because then you will go in the end, will you not? Hm? Where will you go? Hm? The souls which are actors will remove their dresses and go home, will they not? Hm? So, later all these will perish. Hm? What all these? What all will perish? Hm? Neither this world of happiness will remain nor will the world of sorrows remain. Whatever you see through these eyes will all perish. What will happen after that? Hm? Then their drama will start or will the drama of these ones will start or will your drama start in this world? Hm? Yes, first of all your drama will begin. That drama is now about to be over; so, it has to be repeated. Hm? That is it; then a full stop will be applied to it. Then that part has to be played again. Hm? It will come again, will it not? So, you will come and play that part. Which part? Hm? Which part will you come and play? Hm? The one that you had played Kalpa ago. What? Hm? You will play the part of a deity. Achcha?

In which world will you play [your part]? Will you play in heaven? Will you play in hell? In which world will you play? Hm?
(Someone said something.) Yes. You will play exactly the same part. There cannot be any difference. Hm? You will play a part in heaven. Achcha! Even in the heaven they are numberwise. Hm? Is it not? What all numbers are there? Hm? Which is the number one? Hm? Yes. (Someone said something.) Golden? Achcha? Is it golden? Even in the Golden Age it will be called golden. (Someone said something.) Yes. There are Suryavanshis in the Golden Age as well. Hm? Which part will you play? Hm? In which world? Arey, you will play a part in the world of God-Goddess. There is nobody higher than them at all. There cannot be any difference in that part. Hm?

So, in order to achieve that highest on high post you children as much as possible; hm? Is there any limit? Is there no limit? As much as possible you should make efforts to achieve a high post. And it is the task of the students to make purusharth that we should achieve a high post. So, in order to achieve that high post the purusharth; what? Not dehaarth. What is dehaarth? Not for the body (deh). Purusharth. You have to make efforts for the sake of purush, i.e. the soul. So, you should not be confused like this. What? That we will do if it is ordained in the drama. As per the drama, if the drama is destined to enable, it will make us enact. Arey! Will the drama enable you? Hm? It was told just now; the secret of the drama was told just now, wasn’t it? What has been mentioned? Hm? How is the drama? Hm? Have you forgotten? It is an imperishable drama. So, it was mentioned to be a drama, wasn’t it? Did you forget? It is an imperishable drama. And the actor is imperishable. Hm? Who is that imperishable actor? Hm? Arey! Who is the imperishable actor? ShivBaba is the imperishable actor. So, if that drama has to make us play the part it will make us do. Arey! It means that we will not do on our own. We will do when it enables us. Is it so? No, no, not at all. Are you sure from today? Hm? Sure from today.

So, we will not leave on the drama. Hm? Why? What is its name itself? Darama. If you make purusharth, it is okay. Otherwise, how is that amma (mother)? And the mother gives a lot of love in the world. Hm? This biggest mother, this Parambrahm, aay, haay, haay. So, you have to make purusharth. Hm? What? It is a compulsion. If you do not make then the drama will enable. You have understood the drama, haven’t you? Hm? Did you not understand? What did you understand? Hm? Did you understand? As is the task, so is the name. What is the name? What name was assigned? Karaavanhaar (enaber).
(Someone said something.) Dharmaraj? Arey! You recollected very soon. Why is he called so? Hm? Dharamraj appears to be so dark like a brinjal and with black moustaches. Hm? It is not as if he has grown old. Hm? Sitting on a he-buffalo. So dangerous! Hm? So, do not think that if the drama has to enable, it will enable. We will; no, we will do as much as possible. Hm? These words should not even emerge from the mouth. What? What topic? Hm? If this daraama has to enable, it will enable. Arey, it is very wrong to utter even through the mouth. Why? Why is it very wrong? Hm? Arey! What is the result of those who speak wrong or do wrong, then? Hm? (Someone said something.) Hm. Does the post itself get spoilt? Is that all? The post is known later on that our post was spoilt. What happens to the post if you suffer more punishments? It is spoilt. So, one will know of the post on the basis of the punishments. But is this wrong or right? This is very wrong. No. We should firmly decide. What? That we have to definitely make efforts for the sake of the soul (purusharth). Now it is not the time to do for the sake of body (dehaarth) in the drama.
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 27 Apr 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2694, दिनांक 08.11.2018
VCD 2694, dated 08.11.2018
प्रातः क्लास 20.9.1967
Morning Class dated 20.9.1967
VCD-2694-extracts-Bilingual

समय- 00.01-17.12
Time- 00.01-17.12


प्रातः क्लास चल रहा था - 20.9.1967. बुधवार को छठे पेज के मध्य में बात चल रही थी – बुद्ध आएंगे। वो अपने समय में आएंगे। इस्लामी आएगा, वो इब्राहिम अपने समय पर आएगा। तो वो तो फिर रिपीट करेंगे। शूटिंग में भी रिपीट करेंगे। तो इसमें मुंझने की कोई बात नहीं है। विचार करो झाड़ में जबकि तुम कब आए थे। उन इब्राहिम, बुद्ध, क्राइस्ट के लिए तो वो कुछ कह भी नहीं सकते। वो माने कौन? हँ? कौन नहीं कुछ कह सकते वो? वो माने? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ। वो बाप जिनको समझाना है क्योंकि बाप से वापस जाने के लिए, हँ, जिसको मुक्ति कहते हैं। किसको मुक्ति कहते हैं? हँ? दुख-दर्दों से मुक्ति कहते हैं? तो वो मुक्ति का पता कैसे चलता है? हँ? उस मुक्ति में आगे-आगे जाता कौन है? हँ? जिसको मुक्ति कहते हैं वो तो ज़रूर बाप को याद करना पड़े। हँ? उस मुक्ति के लिए जरूर याद करना पड़े। किसको? जो पहले मुक्त होते हैं, तो मुख्य बात तो होती है ना बच्चों को। क्या? मूल बात होती है याद करने की। हँ?

तो याद करने के लिए बाबा ने समझाय दिया है कि ऐसे नहीं समझो कि बस यहाँ बाबा के पास आकरके बैठ जाना है। क्योंकि संगठन मिलेगा। नहीं। तुम घर में भी याद कर सकते हो। संगठन का हुजूम कितना भी बड़ा हो। यहाँ आकरके करेंगे तो क्या आधा घंटा, पंद्रह, बीस मिनट। परन्तु यहाँ बोझा तो बहुत भारी है। हँ? कौनसा बोझा? हँ? जबसे रावण आया तबसे पाप कर्मों का बोझा चढ़ना शुरू हुआ ना। बहुत भारी है। पाप शुरू हुए। कुछ तो जनम बाई जनम वो भोगते ही रहते हो। और जो बच जाते हैं वो जमा हो जाता है आगे के लिए। तो अभी जमा होते-होते सबको कहा जाता है। क्या? क्या कहा जाता है सबको? ये-7 सब पतित दुनिया है। सारी दुनिया आयरन एज्ड बनी पड़ी है। फिर क्या करें? हँ? सारी दुनिया आयरन एज्ड बनी पड़ी है तो फिर क्या करें? हँ? अब दूसरे तो मनुष्य नहीं ये समझते हैं तुम्हारे सिवाय कि ये आत्मा में ये खाद पड़ी है। हँ? दूसरे मनुष्य समझते हैं कौनसी आत्मा में कितनी खाद पड़ी है? कोई समझते थोड़ेही हैं। वो तो आत्मा को तो कहते हैं कि इसमें कोई संस्कार नहीं हैं। हँ? क्या कहते हैं? कि इस आत्मा में कोई संस्कार नहीं भरते हैं। किसमें भरते हैं? हँ? वो तो कहते हैं शरीर में भरते हैं। शरीर को गंगा स्नान करा लो। और हैं सारे संस्कार किसमें? शरीर में, देह में या आत्मा में? आत्मा ही खेलती है संस्कारों के द्वारा। हँ? जैसे-जैसे पूर्वजन्म के संस्कार वैसा ही खेल खेलती है। क्योंकि आत्मा ही तो अविनाशी है। हर जनम में वो शरीर तो पांच तत्वों का छूट जाता है। तो ये बात। क्या बात? हँ? ये बात बहुत अच्छी तरह से याद कर देना है बच्चों को। क्या याद कर देना है? हँ? कि संस्कार आत्मा में भरे होते हैं, देह में नहीं भरे होते हैं।

तो मैं तो अविनाशी आत्मा हूँ। हँ? अविनाशी आत्मा हूँ? किस हिसाब से कहा अविनाशी आत्मा? हँ? बाप भी हमारा अविनाशी है। हँ? ‘भी’ क्यों लगाया? इसीलिए लगाया कि तुम आत्माएं अविनाशी हो। हँ? ये सृष्टि रूपी रंगमंच पर तुम्हारा पूरा 84 जन्मों का पार्ट है। और बाप भी अविनाशी है। वो अविनाशी उसको तो नाम ही है अविनाशी ड्रामा। कौन वो अविनाशी? हँ? वो कौन अविनाशी? हँ? हाँ। मनुष्य सृष्टि का बीज। सारी प्रजा का पिता। सारी सृष्टि में कितनी प्रजा? 500-700-750 करोड़। सबका पिता। तो जो अविनाशी ड्रामा वो है अविनाशी बाप उसमें और तुम्हारे में कोई अंतर हुआ? कोई अंतर नहीं हुआ? हँ? गाते तो बहुत हैं – हम हैं आत्मा, तुम हो आत्मा। आपस में भाई-भाई। हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) वो आलराउंड पार्ट? तुम नहीं हो आलराउंड पार्टधारी? तुम भी तो 84 जन्मों के आलराउंड पार्टधारी हो ना। नहीं हो? फिर? फिर कोई अंतर है या नहीं है? हँ? वो जो अविनाशी ड्रामा का पार्ट जिसका है बाप का उसकी आत्मा में और तुम्हारी आत्मा में कोई अंतर है? हँ? बाकि कुछ न कुछ बरफ में दबे रहते हैं। और वो? बरफ-वरफ में कहीं नहीं दबता? क्या? ये जो बरफ है ना। वो भी तो पानी का रूप है ना। पानी जड़ तत्व है या चैतन्य तत्व है? हँ? जड़ तत्व। तो वो कोई जड़ के नीचे बंधता नहीं है। क्या? चाहे जल तत्व ही क्यों न हो। वो किसी के बंधन में दब करके रहने वाला नहीं है। और तुम आत्माएं तो तुम्हारा शरीर बरफ में दब जाता है। हँ?

अविनाशी बाबा ही आकरके इस अविनाशी ड्रामा का राज़ बताते हैं। हँ? ये अविनाशी खेल है ना। तो इसको कौन जानता है? हँ? कुछ अनुभव की भी बात होगी; नहीं होगी? हँ? हाँ। मेरी बात छोड़ दो। मैं तो आत्माओं का बाप इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर सदाकाल पार्ट बजाता ही नहीं हूँ। हँ? मुझे तो सदाशिव कहा जाता है। माना सदा ही कल्याणकारी। हँ? और आत्माएं तो कल्याणकारी और अकल्याणकारी। और आत्माएं तो अकल्याणकारी। और ये प्रजापिता भी? हँ? अरे? सदा कल्याणकारी ही है या अकल्याणकारी? लिखो।
(किसी ने कुछ कहा।) अकल्याणकारी। वो भी अंतिम जनम में अकल्याणकारी तो बनता है। अपना ही कल्याण नहीं कर पाता। तो दूसरों का करता है? हँ? करता है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) थोड़े समय वो शिव समान बनता है। हाँ, वो तो है। ये तो पूछा नहीं अभी। पूछा ये है कि इस बात पर विचार करो कि उसके शरीर में ऐसी क्या खास बात है, हँ, कि उसका शरीर बरफ में नहीं दबता? और तुम्हारा सबका? बरफ में दब जाता है। हँ? इसका कारण क्या है? कारण है कि पांच तत्वों का, स्थूल तत्वों का शरीर भले छूट जाता है लेकिन सूक्षम शरीर तो रहता है ना। जो अगले जनम में सूक्षम शरीर जो है, उस सूक्षम शरीर के आधार पर आत्मा अपना शरीर का निर्माण करती है। हर जनम में करती है कि नहीं? तो वो सूक्षम शरीर में वो सूक्ष्म आत्मा कुछ ऐसा पार्ट बजाती है; कैसा पार्ट? कि असत्य नहीं। क्या? सत्य को सदाकाल कहेंगे या अल्पकाल कहेंगे? हँ? सदाकाल कहेंगे। तो जो सत सदाकाल है मैं उसमें प्रवेश करता हूँ। किसमें? आत्मा में या शरीर में? हँ? अरे, रथ में प्रवेश करता हूँ कि उसकी आत्मा में प्रवेश करता हूँ? हँ? रथ में प्रवेश करता हूँ ना। हाँ।

तो ये खेल है। खेल का राज़ वो अविनाशी ड्रामा का पार्टधारी ही बताय सकता है क्योंकि उसी में मुकर्रर रूप से मुझे प्रवेश करना है। हँ? क्योंकि ये ड्रामा खेल है तो भी ये ड्रामा राइट खेल है या रांग खेल है? हँ? ड्रामा राइट है। कल्याणकारी है ना। हाँ। इस सृष्टि का चक्कर कैसे फिरता है वो भी राइट है। हँ? ये खेल कहो, ड्रामा कहो, वो भी राइट है। हँ? अविनाशी ड्रामा राइट है ना। और जो चक्कर फिरता है उसका तरीका, ये नहीं कि अब ये चक्कर बहुत खराब चल रहा है। हँ? सबका विनाश कराय दिया। सबके शरीरों को नष्ट कराय दिया। नहीं। जो भी चक्कर फिरता है उसमें भी राज़ है। हँ? क्या राज़ है? हँ? कुछ न कुछ सुधारने का राज़ है। नहीं तो सुधरेंगे नहीं।

तो ड्रामा अंग्रेजी अक्षर है। हँ? क्या? हिन्दी अक्षर नहीं है। क्या? क्या कहा? क्या अक्षर बताया? अक्षर बाबा कह देते हैं। अक्षर है कि शब्द है? हँ? हाँ।
(किसी ने कुछ कहा।) अल्फाज़? अरे? तो ब्रह्मा बाबा की भाषा में बोलना पड़े ना। ब्रह्मा बाबा तो इतनी हिन्दी नहीं जानते। तो ये ड्रामा अंग्रेजी का अक्षर है। हिन्दी का अक्षर नहीं है। अच्छा? ऐसे क्यों कहा? हँ? क्योंकि अंग्रेज लोग जो हैं ना वो इसका अर्थ जानते हैं। उनको समझाया जा सकता है कि वास्तव में जो पुराने ते पुरानी भाषा है, जो भगवान ने आके बोली थी, हँ, उसमें ड्रामा का क्या अर्थ लगाएंगे? डरामा। क्या? हँ? तो तुम्हारा अक्षर तुमने निकाला अंग्रेजों ने। तो उसमें तो होता है डरामा। माँ क्या करती है? डराती बहुत है। तो अंग्रेजी अक्षर है। इसलिए कभी-कभी तो उनको वो ही कह देना है। किनको? जो अविनाशी खेल है ना। उनको ड्रामा ही कह देना है। कभी-कभी कह देना है। क्योंकि जो अंग्रेजियत है वो सदाकाल रहती है इस दुनिया में? नहीं। तो ये सृष्टि चक्र फिरता रहता है।

A morning class dated 20.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the middle of the sixth page on Wednesday was – Buddha will come. He will come at his time. Islamic will come; that Ibrahim will come at his time. So, they will repeat again. They will repeat in the shooting also. So, there is no question of getting confused in this. Think as to when you had come in the Tree. You cannot say any such thing about those Ibrahim, Buddha and Christ. ‘Such’ refers to whom? Hm? Who cannot say any such thing? ‘Such’ refers to whom? Hm?
(Someone said something.) Yes. That Father who has to explain because from the Father, in order to go back, which is called mukti; what is called mukti? Hm? Is it called liberation from sorrows and pains? So, how does one get to know about that mukti? Hm? Who goes ahead in that mukti? Hm? That which is called mukti for that you will definitely have to remember the Father. Hm? You will definitely have to remember for that mukti. Who? Those who are liberated first; so, it is a main topic for the children, isn’t it? What? The main topic is of remembrance. Hm?

So, in case of remembrance, Baba has explained that do not think that you have to just come and sit near Baba here because you will get a gathering. No. You can remember even at home. The gathering may be however much large. If you come and remember here, then you may remember for half an hour, fifteen, twenty minutes. But here the burden is very heavy. Hm? Which burden? Hm? Ever since Ravan came, the burden of sins started accumulating, didn’t it? It is very heavy. Sins started. You suffer some of that birth by birth. And whatever remains gets deposited for future. So, now, while getting added like this, everyone is told. What? What is everyone told? This-7, all this is a sinful world. The entire world has become Iron-Aged. Then what should we do? Hm? When the entire world has become Iron-Aged, then what should we do? Hm? Well, people other than you do not understand that this alloy has been added to the soul. Hm? Do other people understand as to how much alloy has been mixed to which soul? They do not understand. They say about the soul that it does not contain any sanskar. Hm? What do they say? That no sanskars are recorded in this soul. In what are they recorded? Hm? They say that they are recorded in the body. Bathe the body in the Ganges. And in what are all the sanskars recorded? Is it in the body or in the soul? The soul itself plays through the sanskars. Hm? As are the sanskars of the past birth, so is the part that it plays accordingly. It is because the soul itself is imperishable. In every birth that body of five elements is lost. So, this is the topic. What topic? Hm? You children should remember this topic very nicely. What should you remember? Hm? That the sanskars are recorded in the soul and not in the body.

So, I am an imperishable soul. Hm? Am I imperishable soul? On what account was it said imperishable soul? Hm? Our Father is also imperishable. Hm? Why was ‘also’ added? It was added because you souls are imperishable. Hm? Your part is for complete 84 births on this world stage. And the Father is also imperishable. That imperishable; its name itself is an imperishable drama. Who that imperishable? Hm? Who that imperishable? Hm? Yes. The seed of the human world. The Father of the entire subjects. How many subjects (praja) are there in the entire world? 500-700-750 crore. Father of everyone. So, that imperishable drama is the imperishable Father; and is there a difference between him and you? Is there no difference? Hm? It is sung a lot – I am a soul, you are a soul. We are brothers. Hm?
(Someone said something.) That allround part? Are you not allround actor? You are also allround actors of 84 births, aren’t you? Aren’t you? Then? Then is there any difference or not? Hm? Is there any difference between that Father who has a part of imperishable drama in His soul and your soul? Hm? The rest remain buried under the ice to some extent or the other. And he? Doesn’t he get buried in ice anywhere? What? This ice, isn’t it? That is also a form of water, isn’t it? Is water a non-living element or a living element? Hm? Non-living element. So, he does not get bound under a non-living thing. What? Be it the element water. He is not going to remain pressed under the bondage of anyone. And the bodies of your souls get buried under the ice. Hm?

Imperishable Baba Himself comes and narrates the secret of this imperishable drama. Hm? This is an imperishable play, isn’t it? So, who knows about it? Hm? There must be an aspect about the experience also; will there not be? Hm? Yes. Leave about Me. I, the Father of souls, do not play a part permanently on this world stage at all. Hm? I am called Sadaa Shiv. It means forever benevolent. Hm? And souls are benevolent and non-benevolent. Other souls are non-benevolent. And this Prajapita also? Hm? Arey? Is he forever benevolent or non-benevolent? Write.
(Someone said something.) Non-benevolent. He too becomes non-benevolent in the last birth. He is unable to cause his own benefit. So, does he cause to others? Hm? Does he? Hm? (Someone said something.) He becomes equal to Shiv for some time. Yes, that is there. This is not what has been asked now. It has been asked that think about the aspect that what is the special thing in his body that his body does not get buried under the ice? And the bodies of you all? It gets buried under the ice. Hm? What is the reason? The reason is that although the body made up of the five elements, the physical elements is lost, yet the subtle body remains, doesn’t it? In the next birth, the subtle body, on the basis of that subtle body, the soul builds its own body. Does it or doesn’t it in every birth? So, that subtle soul plays such a part in that subtle body; what kind of part? Not untruth. What? Will truth be called forever or temporary? Hm? It will be called forever. So, the truth which is forever, I enter in that. In what? In the soul or in the body? Hm? Arey, do I enter in the Chariot or in his soul? Hm? I enter in the Chariot, don’t I? Yes.

So, this is a play (khel). The secret of the play can be narrated by the actor of that imperishable drama only because I have to enter in him alone in a permanent manner. Hm? It is because this drama is a play, yet is this drama a right play or a wrong play? Hm? The drama is right. It is benevolent, isn’t it? Yes. How the cycle of this world rotates is also right. Hm? Call it a play; call it a drama; that is also right. Hm? The imperishable drama is right, isn’t it? And the cycle that rotates, its method; it is not that now this cycle is rotating in a very bad manner. Hm? It caused everyone’s destruction. It caused the destruction of everyone’s body. No. There is a secret even in the cycle that rotates. Hm? What is the secret? Hm? There is some secret or the other of reforming us. Otherwise, we will not reform.

So, the word drama is an English alphabet (akshar). Hm? What? It is not a Hindi alphabet. What? What has been said? Which alphabet was mentioned? Baba says uses the word ‘akshar’. Is it an alphabet or a word? Hm? Yes.
(Someone said something.) Alfaaz (word)? Arey? So, He will have to speak in Brahma Baba’s language, will He not have to? Brahma Baba doesn’t know that much Hindi. So, this drama is an English alphabet. It is not a Hindi alphabet. Achcha? Why was it said so? Hm? It is because the Englishmen know its meaning. They can be explained that actually how will you interpret ‘drama’ in the oldest language, which God came and spoke? Daraamaa. What? Hm? So, you Englishmen brought out your alphabet. So, in that it is daraamaa. What does Maa (mother) do? She frightens (daraati hai) you a lot. So, it is an English alphabet. This is why sometimes that should be called that only. What? The imperishable play should be called drama only. You should say sometimes. It is because does Englishness remain forever in this world? No. So, this world cycle keeps on rotating.
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नोटः यह केवल एक प्रारूप है। उक्त वीसीडी के संपूर्ण मूल पाठ या मूल आडियो, वीडियो के लिए www.adhyatmik-vidyalaya.com देखिये।
Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 29 Apr 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2695, दिनांक 09.11.2018
VCD 2695, Dated 09.11.2018
प्रातः क्लास 20.9.1967
Moring class dated 20.9.1967
VCD-2695-extracts-Bilingual

समय- 00.01-31.39
Time- 00.01-31.39


प्रातः क्लास चल रहा था - 20.9.1967. बुधवार को सातवें पेज के मध्यादि में बात चल रही थी –ये कोई रिद्धि-सिद्धि नहीं है पूजा करने की कि भई स्नान करना चाहिए, फलाना करना चाहिए। हाँ, ये जरूर है कि कोई आफिस में जाते हैं, टॉयलेट में जाते हैं तो फिर स्नान जरूर करके आना चाहिए। बाकि रात को उठकरके कोई प्रेशर थोड़ेही आ जाता है। उस समय लेवेट्री में नहीं जाते हैं तो कोई हर्जा नहीं है। हाँ, यहाँ आकरके सुन सकते हो। रात में भी यहाँ आकरके सुन सकते हो। और इस मंदिर में भी बिगर स्नान क्यों? क्योंकि वो भक्त लोग तो विकारों में भी जाते हैं। हँ? उनको तो लेट्रीन भी जाते हैं फिर भी नहीं जाना होता है। और यहाँ तो स्नान करना ही पड़ता है। बाकि रात में आ सकते हैं। वो रात जो बैठकरके याद करते हो वो भी कितना उत्तम कार्य करते हो। रात में भी याद करना, सुबह में भी याद करना।

ऐसे कोई कम्पलशन नहीं है कि स्नान करके पीछे प्रभु का नाम लेना चाहिए। नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं है। तुम कहीं भी उठते, बैठते, चलते, स्नान करते कहाँ भी याद कर सकते हो। ऐसे करते रहेंगे तो विनाश विकर्मों का होता रहेगा। तो तभी बाबा कहते हैं कि तुम वो लिख सकते हो कि बाबा मैं पैखाने गया, हँ, और वहां तो सभी सारा समय बाबा मैं दो मिनट, चार मिनट, पांच मिनट भी वहाँ ऐसे ही बैठा रहा। और बाबा हम स्नान करते हैं उसमें भी 5-7 मिनट लग जाते हैं। हम स्नान में भी बाबा को याद करते रहें तो अच्छा। हाँ, तो ऐसे-ऐसे सब कुछ लिख सकते हैं। हर बात में, कुछ भी करने जाओ तो याद करते रहो। उसमें कोई बंधन नहीं है। याद की यात्रा में कोई बंधन थोड़े ही रहता है?

अच्छा, चलो बच्ची टोली ले आओ। तुम तो पद्मापदम भाग्यशाली हो। अरे, सौभाग्यशाली नहीं पद्मापदम भाग्यशाली। और ये भी क्यों कहते हैं कि पैर में पदम? सो तो पांव में पदम देवताओं को ही दिखाते हैं। हँ? शूटिंग यहाँ होती है। ये बुद्धि रूपी पांव में कमल फूल समान रहने का विचार करते रहना है। रहना भी है। यहाँ नाम रखते हैं पदमपति। है तो दुनिया में ये नाम भी। परन्तु वो तो पदम बस अल्पकाल क्षणभंगुर सुख है ना। पीछे कोई पदमपति थोड़ेही जाके बनेंगे। हाँ, ये बाप, इनके पास तो बाप बैठा हुआ है। अभी कौन उठे? बाप उठे? तो वो तो ठीक नहीं है। ऐसे उनको तकलीफ नहीं देना चाहिए। तो फिर दूसरे को दे देते हैं। ब्राह्मणी तो कह दे पर ब्राह्मणी भी है तो ब्राह्मण भी हैं। नॉलेज तो ये वंडरफुल बच्ची है। और ये ब्राह्मणी भी सच-सच ब्राह्मण भी हैं।

और बाबा को सबसे मीठा लगता है साथ। वो जो कहते हैं ना राम नाम संग है। तो यहाँ तो बाबा की याद का साथ है। नहीं तो बाबा तो, बाबा तो कहते हैं, ये समझते हैं कि बाबा तो मेरे संग है। यहाँ एकदम मेरे साथ है। है ना? साथ बैठा हुआ है। तुम्हारे से तो फिर भी कुछ दूर होता है। हँ? तुम समझते हो कि हमसे तो कुछ दूर है। नहीं तो बाबा तो साथ है एकदम। जैसे मिले हुए हैं। इसलिए तुम भी कोई जानते हो, हँ, क्या? तुम जानते हो कि बापदादा, बापदादा। तो मिला हुआ है ना बच्चे। कितना मिला हुआ है नज़दीक में। तो भी ये बाबा कहते हैं कि मुझे याद जरूर करना पड़ता है उनको। जैसे तुम याद करते हो अंदर परन्तु बड़ा मुश्किल है। भूल जाता हूँ। और जिसको कहें कि भई स्थायी खुशी वो भी नहीं हो सकती है। जैसे तुम बच्चों को भी नहीं होती। उफ! फिकरात तो आती है ना बच्ची कि ये ऐसे हुआ, ये हुआ। हाँ, अल्पकाल थोड़े समय के लिए फिकरात आती है। जरूर बड़ी तीखी फिकरात आती है कि जब हम याद करें तब हम एक्यूरेट कर्मातीत अवस्था को पावें। इतनी बड़ी दुनिया में तुम सिर्फ ब्राह्मण हो तो ये विचार में आता है क्योंकि यानि हो तो ब्राह्मण जो साथ में रहते हैं, तो बाबा ही हमको बैठकरके ये सब कहते हैं कि मीठे-मीठे रूहानी बच्चों ऐसे कोई शिवोहम् कहने वाला कह नहीं सकते हैं। हँ? किसको कोई बड़े-बड़े आदमी को कह दे कि रूहानी बच्चों, तो वो कहेंगे कि क्या ये हमारा बाप है? ऐसा हो नहीं सकता है। लॉ नहीं है।

तो इसलिए बाप भी गुप्त है तो आत्माएं भी गुप्त हैं तो ये शरीर द्वारा बैठकरके आत्माओं को पढ़ाते हैं। और ये याद रख दो घड़ी-घड़ी मैं आत्मा हूँ, मैं आत्मा हूँ। मुझे बाप को याद करना है। मैं आत्मा हूँ। तो ये खूब सीखो अच्छी तरह से। तो बाप भी याद आए, विकरम भी विनाश हों। और तुम्हारा सारा पढ़ाई में सबसे बहुत मेहनत सब्जेक्ट है, तीखे में तीखा; हँ? कौनसा सब्जेक्ट है तुम्हारा? तीन कौनसे सब्जेक्ट हैं? तुम बताओ। 20.9.67 की प्रातःक्लास का आठवां पेज। और तुम पढ़े तो हो ना। शायद इंग्लिश भी होगी। हँ? किसी ने कहा - इंग्लिश, मैथ्स, साइंस। हाँ, गिनी जाती है। साइंस तो, अभी साइंस तो अभी आई हुई है साइंस। और ये तो बच्चों को बताया है कि तुम्हारी ये रीयल साइलेंस है। हँ? वो साइलेंस तो अभी आई है अल्पकाल के लिए। तो ये साइलेंस है याद में रहना है। और इसी को ही योग कहा जाता है। हँ? किसको योग कहा जाता है? साइलेंस में रहना माने? चुपचाप रहना? आवाज़ नहीं करना? अरे! बाहर से आवाज़ नहीं करते हैं। अंदर से तो संकल्प चलते ही रहते हैं इधर के, उधर के। तो बाप कहते हैं, न आवाज़ करना है, न संकल्पों में आना है। बस एक शिवबाबा दूसरा न कोई। तो इसी को साइलेंस, इसको योगबल कहा जाता है। इसको कहा जाता है शांति का बल। क्योंकि ये जो शिवबाबा है ना। हँ? कहा ही जाता है शिव बाबा। तो जरूर शरीर में आया हुआ है ना। और वो तो सदैव शांति में रहता है। तो उसको याद करेंगे तो शांति का बल आएगा ना। ये जो दुनियावाले मनुष्य तो बहुत बोलते हैं ना। ऐसे ही बोलते रहते हैं शांति-3 चाहिए हमको। अरे! तुम्हारी शांति में क्या है ऐसी बात जो शांति-2 मांगते हो?

तो अभी तुम बच्चों ने जाना है कि बाबा ये जो याद की यात्रा देते हैं ये है शांति की यात्रा। और वो जो दुनियावाले थ्री मिनट्स साइलेंस कहते हैं तो उनको तो कुछ भी पता नहीं है साइलेंस किसको कहा जाता है? बस चुप करके खड़े हो जाते हैं। और तुम्हारी साइलेंस तो ऐसी है जो साइंस के ऊपर भी जीत पहनती है। हँ? क्या जीत पहनती है? हँ? साइंस ने ये बिजली निकाली। क्या? तुम्हारी साइलेंस बिजली का स्विच आफ किये बगैर इस, इसको बंद कर देगी? इसको जलाएगी? जलाएगी? हँ? जलाएगी? अभी नहीं जलाएगी। नहीं। हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) नई सृष्टि साइंस नहीं बनाती है। हँ? नई सृष्टि साइंस नहीं बनाती है। वो तो ठीक है। लेकिन वो तो जानते नहीं हैं नई सृष्टि किसे कहा जाता है? हँ? वो तो जानते हैं हम सुख साधन उपलब्ध कर लेते हैं तो वो हमारे लिए नई सृष्टि हो गई। जिनके पास ये सुख साधन हैं तो उनके लिए नई सृष्टि। वो सुखी ज्यादा हैं। और जिनके पास ये साधन नहीं हैं उनको तो सहन करना पड़ता है।

तो अभी तुम तो जानते हो। तुम इस साइंस के ऊपर साइलेंस से जीत पहनते हो। और इस साइंस को तो माया कहा जाता है। हँ? क्या? क्यों? क्योंकि ये तो माया का पॉम्प एंड शो है थोड़े समय के लिए। और तुम्हारी साइंस तो, साइलेंस तो कितना काम करती है! आधा कल्प। ढ़ाई हज़ार वर्ष। तो ये जो नॉलेज है तुम्हारी, वो तो साइलेंस के लिए है। और वो तो उनकी मायावी नॉलेज है। आसुरी नॉलेज है। हँ? मायावियों को अपने स्वार्थ की चिंता रहती है। हँ? सारे दुनिया को साइंस के साधन मिल जाते हैं क्या? तुम्हारी नॉलेज से तो सारी दुनिया, नई दुनिया में सब सुखी होंगे। तो उनकी हुई आसुरी नॉलेज क्योंकि अपनी देह के सुख के लिए करते हैं। और ये है ईश्वरीय नॉलेज। कोई भी आत्माओं के सुख के लिए। तो नई दुनिया आएगी साइलेंस से तो वहाँ पशु-पक्षी सब सुखी होंगे ना। हँ? होंगे ना। और तुम्हारी ये जो साइंस है इससे पशु-पक्षी, जो और आत्माएं हैं कीड़े-मकोड़े सब सुखी होते हैं? नहीं होते।

तो ईश्वर समझाते हैं कि जो तुम्हारी शांति है, वो तो गोया के जैसे देह से डैथ हो गई। देह से मर गए। हँ? उनकी? उनकी साइलेंस क्या देह से मरना सिखाती है? नहीं। वो जो है साइलेंस तुम्हारी वो तो बहुत अच्छी है। और वो साइंस जो है वो तो आखरीन सबका मौत कर डालेगी। कैसे? हँ? उन्हें, साइंस वालों ने जो सबसे ज्यादा खर्चा किया है वो किसमें किया है? हँ? बॉम्ब बनाने में। और ये बिजली-विजली में तो थोड़ा सा खर्चा होता है। कोई इतना खर्चा थोड़ेही हुआ। तो साइलेंस तुम्हारी, हँ, जन्म-जन्मान्तर के लिए जीवन लाती है सुख का। हँ? वो तो जैसे कि दुनिया की डैथ है। वो साइंस वो तो सब मनुष्यों का मौत ले आती है।

तो अब तुम साइलेंस से साइंस पर जीत पहनते हो। हँ? कैसे? हँ? उन साइंसदानों में इतनी ताकत तो है नहीं कि अपनी बनाई हुई चीज़ को यूज़ कर सकें। हँ? देहभान है तो डर होगा कि नहीं? बहुत डर है। और तुमको तो जैसे देह रहेगी ही नहीं। रहेगी? तुम तो आत्मा हो। तो तुम इस देह को जैसे दूर से देखेंगे। हँ? कि ये जड़ देह है। और तुम्हारी आत्मा क्या करेगी? साइंसदान में प्रवेश कर जाएगी। और उनकी बुद्धि को घुमाय देगी। और क्या होगा फिर? जो इतनी बड़ी दुनिया सारी बहुत डर में बैठी हुई है कि क्या होगा इतने बड़े बॉम्ब बनाय रखे हैं। कहते हैं कई दुनिया खलास हो सकती है। अब तो मौत सामने खड़ा हुआ है। सब बहुत डरे हुए हैं। तो सबका डर खतम हो जाएगा। और तुम अमर बन जाते हो। साइलेंस से अमर बनते हो ना। इस साइंस से तो सबका डैथ हो जावेगा। इसलिए तुम, हँ, तुम क्या करते हो? तुम तो जीत पहन लेते हो। किसके ऊपर? साइंस के ऊपर। बाकि साइंस का भी विनाश हो जाता है और साइंस को मानने वाली जो इतनी सारी दुनिया है माया के चम्बे में आ गई वो भी सब खलास हो जावेंगे। हाँ, तुम्हारी साइलेंस को जो समझेंगे, वो तो बच जावेंगे ना। हँ? हाँ, बाकि का विनाश हो जाएगा।

अच्छा, मीठे-मीठे सीकिलधे रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप वा दादा का यादप्यार, गुडमार्निंग। रूहानी बापदादा और बच्चों का पहले-पहले यादप्यार स्वीकार हो। आज आशुदालाल की पार्टी आई है। ये पार्टी है ना सामने। पार्टी रिफ्रेश होकरके, विश्राम पाय करके, रिफ्रेश होकरके फिर ये वापस जाएंगे। और फिर जाय करके बच्चों को रिफ्रेश भी करेंगे। यहाँ से जाकरके मधुबन का समाचार भी सुनावेंगे। और जो ये रिफ्रेश हुए हैं उसका अनुभव भी सुनावेंगे। अच्छा, सभी बच्चों को खास करके जो सर्विसेबल बच्चे हैं उनको। तो वो तो सर्विसेबल बच्चे सब जानते हैं कि बॉम्बे में सर्विसेबल कौन-कौन हैं। नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार। हरेक अपने को बापदादा का यादप्यार स्वीकार करें।

अभी तुम जानते तो हो कि कौन अभी नमस्ते करते हैं। कौन करते हैं? हँ? बाप नमस्ते करते हैं। किसको करते हैं? रूहानी बाप है। तो रूहानी बच्चों को ही नमस्ते करेंगे ना। जो देहभान में रहते हैं उनको थोड़ेही करेंगे क्योंकि देहभान में रहने वाले तो नई दुनिया में नहीं आवेंगे। तो तुम बच्चों को नमस्ते करते हैं। ये बात किसने सुनी? रूहों ने, आत्माओं ने सुनी। और किसने कहा? परमपिता परमात्मा ने कहा। हँ? परमपिता परमात्मा ने कहा? एक ने कहा कि दो ने कहा? हँ? दो ने कहा। परमपिता अलग, परमात्मा अलग। दो ने इकट्ठा बोल दिया? हँ? दो ने इकट्ठा बोल दिया? दो कैसे इकट्ठे दो आत्माएं बोलेंगी? हँ? दो आत्माएं इकट्ठी बोलेंगी क्या? तो उसने भी शरीर द्वारा कहा। किसने? उसने किसको कहा? हँ? और हमने भी शरीर द्वारा सुना। और क्यों कहते हैं? हँ? रूहानी बच्चों के प्रति रूहानी बापदादा का, बाप का नमस्ते।

तो बोलते हैं कि हाँ, बाप तुम बच्चों को अपन से भी ऊँच बनाते हैं। कैसे? कैसे ऊंच बनाते हैं? हँ? अपन से ऊंच कैसे बनाते हैं? हँ? अरे, शिव बाप तो इस दुनिया में आते हैं, तुम बच्चों को पढ़ाते हैं। क्या? तो पढ़ाने वाला टीचर बड़ा हुआ या स्टूडेन्ट बड़े हुए? हँ? अरे, जो टीचर होते हैं उनकी इच्छा तो होती है ना कि मेरा पढ़ा हुआ स्टूडेन्ट मेरे से भी ऊँचा चला जाए। तो बाप भी ऐसे ही कहते हैं कि तुम बच्चे मेरे से भी ऊँच बनते हो। कैसे? कि मैं तो जिस धाम का वासी हूँ वहाँ तो सब तरह की आत्माएं रहेंगी। क्या? कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी, कम कलाओं वाले देवताएं रहेंगे कि नहीं? हँ? हाँ। जो कलाहीन मनुष्य आत्माएं, वो भी वहाँ रहेंगी। हँ? तो मुझको तो उनके बीच में रहना है। और तुम बच्चे? तुम कहाँ रहेंगे? हँ? तुम तो जो ऊँच ते ऊँच आत्माएं हैं इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने वाली उन आत्माओं के साथ रहेंगे। तो तुम ऊँचे हुए ना। क्या? अरे, हुए कि नहीं? हँ? अरे, टीचर की आस रहती है ना कि मेरे बच्चे मेरे से भी ऊँच बैठें।

तो तुम बच्चों ने सुना और बाप ने कहा नमस्ते। तो अपने से भी ऊँच बनाते हैं तभी तो कहते हैं। तो ऐसे रूहानी बच्चों के प्रति। कैसे रूहानी बच्चों के प्रति? जो 16 कला संपूर्ण बनने से भी ऊँच चले जाएं। कैसे ऊँच? हँ? देवताएं तो 16 कला संपूर्ण बनेंगे सतयुग में। और तुम बच्चे तो कैसे बन जाएंगे? कलातीत बन जावेंगे। हँ? सूर्य की कलाएं होती हैं क्या? सूर्य की कलाएं तो नहीं होती हैं। सूर्य तो कलाओं से भी ऊपर होता है। चन्द्रमा की कलाएं होती हैं। तो तुम बच्चे तो ज्ञान सूर्य के बच्चे हो गए ना। हँ? तो ऐसे सूर्यवंशी रूहानी बच्चों के प्रति रूहानी बाप की नमस्ते। ओमशान्ति। (समाप्त)

A morning class dated 20.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the middle portion of the seventh page on Wednesday was that this is not a riddhi-siddhi (supernatural powers) of worship that brother you should bathe and do such and such thing. Yes, it is true that if someone goes to office, goes to toilet, then one should definitely bathe and come. But does one experience pressure [to relieve oneself] in the night? At that time if you don’t go to the lavatory, then it doesn’t matter. Yes, after coming here you can listen. You can come and listen here in the night as well. And why without bathing in this temple as well? It is because those devotees indulge in lust as well. Hm? They do not bathe even after they go to the latrine. And here you have to definitely bathe. But you can come in the night. You sit and remember in the night; that is also such a good task that you perform. Remember in the night as well as morning.

There is no such compulsion that you should bathe and then utter the name of God. No. there is no such thing. You can remember anywhere while standing, sitting, moving, bathing. If you keep on doing like this, then the sins will keep on burning. So, that is why Baba says that you can write that Baba I went to latrine and there all the time Baba I sat there like this [in remembrance] for two minutes, four minutes, five minutes. And Baba it takes about 5-7 minutes for me to bathe. It is better if we keep on remembering Baba even while bathing. Yes, so you can write all such thing. In every topic, whatever you go to do, you keep on remembering. There is no bondage in it. Is there any bondage in the journey of remembrance?

Achcha, okay daughter bring tolii. You are multimillion fold fortunate. Arey, not just fortunate, but multimillion fold fortunate. And why is it said that there is lotus (padam) in the foot? It is the deities alone who are shown to be standing on a lotus. Hm? The shooting takes place here. you should keep on creating lotus-like thoughts in this foot-like intellect. You should also live. Here people have the name Padampati (multimillionaire). There are such names also in the world. But those multi millions are temporary, momentary pleasures, aren’t they? Will they become multimillionaires later? Yes, this Father, the Father is sitting with them. Who should stand up now? Should the Father stand up? That is not correct. You should not cause any trouble to Him. So, then it is given to others. We may say Brahmani, but there is Brahmani as well as Brahmins. Daughter, this knowledge is wonderful. And this Brahmani as well as true Brahmins are there.

And Baba finds the company to be the sweetest. They say that the name of Ram is with you. So, here Baba’s remembrance is with you. Otherwise, Baba, Baba says, this one thinks that Baba is with me. Here He is completely with me. He is, isn’t He? He is sitting together. He is a little distant from you. Hm? You think that He is a little distant from us. Otherwise Baba is completely together. It is as if they are joined. This is why some of you know, hm, what? You know that BapDada, BapDada. So, He is together, isn’t He children? He is so closely together. So, this Baba also says that I have to definitely remember Him. Just as you remember inside, but it is very difficult. I forget. And that which is called permanent joy also cannot be possible. Just as you people also don’t have. Uff! Daughter, there are worries, aren’t there children that this happened like this, this happened. Yes, one becomes worried temporarily for some time. Definitely one gets intense worry that we will achieve karmaateet stage when we remember [Him]. In such a big world it is you Brahmins alone; so this thought emerges because you are Brahmins who live with Him; so Baba Himself sits and tells all this that sweet, sweet, spiritual children; no person who says ‘Shivohum’ (I am Shiv) can say like that. Hm? If you address anyone, any big personality as spiritual children, then they will say, is this one my Father? This cannot be possible. It is not the law.

So, this is why the Father is also incognito and the souls are also incognito; so, He sits and teaches the souls through this body. And remember this every moment that I am a soul, I am a soul. I have to remember the Father. I am a soul. So, learn this very nicely. So, the Father should also come to the mind, the sins should also be destroyed. And in your entire study, the most difficult subject, the sharpest of all; Hm? Which is your subject? Which are the three subjects? You tell. Eighth page of the morning class dated 20.9.67. And you have studied, haven’t you? Perhaps English is also there. Hm? Someone said – English, Maths, Science. Yes, it is counted. As regards science, well science has emerged recently, science. And children have been told that this is your real silence. Hm? That silence (science) has emerged recently for a temporary period. So, this silence is to remain in remembrance. And this itself is called Yoga. Hm? What is called Yoga? What is meant by remaining in silence? To remain quiet? Not to create any sound? Arey! You don’t create sound externally. The thoughts of here and there keep on emerging inside. So, the Father says – Neither should you create noise nor should you create thoughts. Just one ShivBaba and none else. So, this itself is called silence, power of Yoga. This is called the power of peace. It is because this ShivBaba, isn’t He? Hm? He is called ShivBaba. So, definitely He has come in a body, hasn’t He? And He always remains in peace. So, if you remember Him, then you will get the power of peace, will you not? These people of the world speak a lot, don’t they? They simply keep on uttering – We want peace, we want peace, we want peace. Arey! What such thing is in your peace that you keep on seeking peace, peace?

So, now you children have come to know that the journey of remembrance that Baba gives is a journey of peace. And those people of the world speak about three minutes silence; so, they do not know anything as to what is meant by silence? They just stand in silence. And your silence is such that it gains victory over science as well. Hm? What victory does it gain? Hm? Science invented this electricity. What? Will your silence stop this without switching off the electric switch? Will it light it? Will it light? Hm? Will it light? It will not light now. No. Hm?
(Someone said something.) Science does not build a new world. Hm? Science does not build a new world. That is correct. But they do not know as to what is meant by a new world? Hm? They know that we arrange means of prosperity; so, that is a new world for us. For those who possess these means of prosperity, it is a new world. They are more prosperous. And those who do not have these means have to tolerate.

So, now you know. You conquer this science through silence. And this science is called Maya. Hm? What? Why? It is because this is Maya’s pomp and show for some time. And your science, silence works so much. Half a Kalpa. Two thousand five hundred years. So, this knowledge of yours’ is for silence. And theirs’ is illusive knowledge. It is demoniac knowledge. Hm? Illusive people worry about themselves. Hm? Does the entire world get the means of science? Through your knowledge the entire world, everyone will be happy in the new world. So, theirs’ is demoniac knowledge because they do for the pleasure of their body. And this is Godly knowledge. It is for the happiness of any souls. So, when the new world arrives through silence, then everyone including animals and birds will be happy, will they not be? Hm? They will be, will they not be? And through your science do the animals and birds and the souls of worms and insects become happy? They don’t.

So, God explains that your peace is as if one suffers death physically. One dies physically. Hm? Theirs? Does their silence teach you to die physically? No. Your silence is very good. And that science will ultimately bring everyone’s death. How? Hm? In which field have those people of science spent most amounts? Hm? In making bombs. And in this electricity a little amount is spent. It is not much expenditure. So, your silence brings life of happiness for many births. Hm? That [science] is like the death of world. That science brings the death of all the human beings.

So, now you conquer science through silence. Hm? How? Hm? Those scientists do not have the power to use the things produced by them. Hm? If there is body consciousness, will there be fear or not? There is a lot of fear. And in your case it is as if you will not have a body at all. Will you have? You are a soul. So, you will observe this body from a distance. Hm? That this is a non-living body. And what will your soul do? It will enter in a scientist. And it will turn their intellect. And then what will happen? Such a big entire world is sitting in fear that what will happen? Such big bombs have been produced. They say that many worlds can perish. Now the death is staring at you. Everyone is very frightened. So, everyone’s fear will end. And you become imperishable. You become imperishable through silence, don’t you? Everyone will suffer death through this science. This is why you, hm, what do you do? You gain victory. On whom? On science. But science is also destroyed and such a big world that believes in science and has come under the clutches of Maya will also perish. Yes, those who understand your silence will survive, will they not? Hm? Yes, all others will be destroyed.

Achcha, spiritual Baap and Dada’s remembrance, love and good morning to the sweet, sweet, long lost and now found spiritual children. Accept the first and foremost remembrance and love of spiritual BapDada and children. Today Aashudlal’s party has come. This party is in the front, isn’t it? The party will get refreshed, get rest, get refreshed and then go back. And then after going back, they will refresh the children also. They will go from here and narrate the news of Madhuban also. And these people who have been refreshed will narrate their experience as well. Achcha, all the children, especially the serviceable children. So, all those serviceable children know that who all are serviceable in Bombay. Numberwise as per their efforts. Each one should receive the remembrance and love of BapDada.

Now you know that who says Namaste now. Who says? Hm? The Father says Namaste. To whom does He say? He is the spiritual Father. So, He will say Namaste to the spiritual children only, will He not? He will not say [Namaste] to those who remain in body consciousness because those who remain in body consciousness will not come to the new world. So, He says Namaste to you children. Who heard this topic? The souls heard. And who said? The Supreme Father Supreme Soul said. Hm? Did the Supreme Father Supreme Soul say? Did one say or did two say? Hm? Two said. The Supreme Father is different, the Supreme Soul is different. Did two say together? Hm? Did two say together? How can two souls speak simultaneously? Hm? Will two souls speak simultaneously? So, He too said through the body. Who? To whom did He say? Hm? And we too heard through the body. And why does He say? Hm? Namaste of Spiritual BapDada, Father to the spiritual children.

So, He says that yes, the Father makes you children greater than Himself. How? How does He make you higher? Hm? How does He make you higher than Himself? Hm? Arey, Father Shiv comes to this world and teaches you children. What? So, is the Teacher who teaches higher or are the students higher? Hm? Arey, the teachers wish that the student who has studied from me should become higher than me. So, similarly the Father also says that you children become higher than Me. How? The abode whose resident I am, there will be all kinds of souls there. What? Will there be worms and insects, animals and birds, deities with fewer celestial degrees or not? Hm? Yes. The human souls devoid of celestial degrees will also live there. Hm? So, I have to live amidst them. And you children? Where will you live? Hm? You will live with the highest on high souls playing their parts on this world stage. So, you are higher [than Me], aren’t you? What? Arey, are you or aren’t you? Hm? Arey, teacher has a hope, doesn’t he that my children should sit on a seat higher than me?

So, you children heard and the Father said Namaste. So, He makes you higher than Himself; only then does He say. So, similarly, to the spiritual children. To what kind of spiritual children? To those who become higher than those with 16 celestial degrees. How high? Hm? Deities will become perfect in 16 celestial degrees in the Golden Age. And how will you children become? You will become kalaateet (beyond celestial degrees). Hm? Does the Sun have celestial degrees? The Sun doesn’t have celestial degrees. The Sun is beyond the celestial degrees. The Moon has celestial degrees. So, you children are the children of the Sun of Knowledge, aren’t you? Hm? So, Namaste of Spiritual Father to such Suryavanshi spiritual children. Om Shanti. (End)

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Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 01 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2696, दिनांक 10.11.2018
VCD 2696, Dated 10.11.2018
रात्रि क्लास 20.9.1967
Night Class dated 20.9.1967
VCD-2696-extracts-Bilingual

समय- 00.01-20.04
Time- 00.01-20.04


आज का रात्रि क्लास है - 20.9.1967. शुरुआत से वाणी कटी हुई है। अच्छा! बोलना। किसी ने कहा – जी। तुम बच्चों को तो यूं भी शुभ ही बोलना है। हँ? तुम बच्चों को। और कोई बच्चे, ये बच्चे, वो दुनियावी दूसरे धरम के बच्चे अशुभ बोलें तो चलेगा क्योंकि उनको तो शुभ दुनिया, शुभ वातावरण नहीं बनाना है। तुम बच्चों को तो यूं भी शुभ ही बोलना है। हँ? यूं भी माने? जो ऊँच ते ऊँच ब्राह्मण कुल के बने हो ना। ब्रह्मा की संतान। और ब्रह्मा (किसी ने कुछ कहा।) हँ? ब्रह्मा में भी ऊँच ते ऊँच ब्रह्मा की संतान, परमब्रह्म की संतान, तो तुमको तो कैसा बोलना है? शुभ ही बोलना है। दुनिया में वास्तव में सब अशुभ ही बोलते हैं। कहाँ? दुनिया में। माना स्वर्ग में नहीं बताया। हँ? हाँ। उसका नाम क्या रखा? दो निया। हँ? क्या? द्वैतवादी है या अद्वैतवादी है? द्वैतवादी है। तो वो तो दो-दो बातें करेंगे ना। अभी-अभी कुछ बोलेंगे। अभी-अभी कुछ बोलेंगे। वो तो हैं ही विधर्मी आत्माएं।

तो दुनिया में वास्तव में, हँ, वास्तव में, सब अशुभ ही बोलते हैं। और तुम? तुम क्यों बोलते हो शुभ? हँ? कारण क्या? क्योंकि तुमको बाबा ने शुभ ही बोलना सिखाया है। हँ? तुमको सिखाने वाला कौन है? शिवबाबा। तो जो शिवबाबा है वो कभी अशुभ होता है? अकल्याणकारी होता है? हँ? होता है? शिवबाबा? हँ? उसमें भी शुभ और अशुभ। हँ? किसमें भी? हँ? तुमको शिव बाबा ने शुभ ही बोलना सिखाया है। उसमें भी। उसमें भी माने किसमें भी? हँ? अरे? अरे, ये भी सोचने में देर लगती है। उसमें भी। अरे, बात किसकी हो रही है? शिवबाबा की।
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, उसमें भी अशुभ और शुभ। वो सोर्स जिसने शुभ बोलना सिखाया है उसमें भी दो हो गए। एक शुभ और एक अशुभ। अशुभ कैसे? हँ? एक पतित, एक पावन। फिर सिखलाया किसने? हँ? पावन ने सिखलाया है। जिसमें बैठके सिखलाया है, वो? वो पतित या पावन? पतित। तो दो हो गए। हँ? शुभ भी है और अशुभ।

अच्छा, सबसे तीखा अशुभ क्या है? हँ? बताओ। अरे! बताओ। नहीं पता है तो छोड़ दो।
(किसी ने कुछ कहा।) सबसे अशुभ, तीखा काम है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) विनाश? विनाश? हाँ? सबसे तीखा अशुभ। हँ? तीखा अशुभ तब हो जाता है; क्या? कब हो जाता है? जिस पतित में एवर प्योर शिव बैठता है; हँ? बैठता है कि नहीं? हाँ। परमानेन्ट बैठता है कायमी, तो तीखा अशुभ क्या? हँ? जब जिसके अन्दर प्रवेश करके बैठता है वो जन्म लेते-लेते पक्का बुद्धि में बैठ जाता है कि आत्मा सो परमात्मा, ईश्वर सर्वव्यापी। तब सबसे तीखा अशुभ हो जाता है कि हल्का? हँ? क्या हो जाता? तीखा अशुभ। ईश्वर सर्वव्यापी है। तो ये बात सबसे तीखा आसुरीपना हो गया ना। शुभ क्या है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) नहीं। सर्वव्यापी नहीं है। हँ? ईश्वर हमारा बाप है। और बाप कब है? हँ? ब्रह्मा के पांच मुख, चार मुख। और चारों में व्यापी हो जाए तो सर्वव्यापी कहा जाएगा या हमारा बाप कहा जाएगा? हँ? अरे, बाप जन्म देने वाला। कुतरिया को भी इतने बच्चे पैदा होते हैं ढ़ेर सारे सुअरिया को। होते हैं कि नहीं? हँ? नहीं? होते हैं। तो उनका सबका बच्चा एक होता है कि अनेक होते हैं सबका बाप? सबका बाप एक। अनेक हो सकते हैं कि नहीं? हँ? कुतरिया को अनेक बाप हो सकते हैं? नहीं हो सकते? अरे? अरे, जो कुत्ते पालने वाले कुत्ते कुतियां पालते हैं उनसे पूछना। जब वो काम विकार भोगते हैं तो एक-एक कुतिया के पीछे दो-दो कुत्ते लग जाते हैं। फिर लटक जाते हैं। क्या? लटक जाते हैं ना। तो फिर? दोनों से बच्चे पैदा नहीं हो सकता? हँ? दोनों से बच्चा पैदा नहीं होता? एक से पैदा होता है? क्यों? अरे! कुतरिया को तो ढ़ेर सारे बच्चे पैदा होते हैं। तो एक बाप कहा जाएगा कि दो बाप कहे जाएंगे? अरे, कुत्ता-कुतरिया को पता चलेगा? नहीं। उनको थोड़ेही पता चलेगा। जो वो तो जानवर हैं ना। बुद्धि तो उनकी चलती नहीं है। चलती किसकी है? मन जिसका होता है तो मनुष्य कहा जाता है।

तो बोला कि ईश्वर हमारा बाप है। हम जानवर हैं या मनुष्य हैं? हँ? हम? हम तो मनु्ष्य हैं ना। और मनुष्यों में भी भांति-भांति के होते हैं कि एक तरह का होता है? हँ? भांति-भांति के होते हैं। कोई तो जानवरों से भी बदतर। जानवर होते हैं ना जंगल में। हँ? उनका धंधा क्या है? चीर-फाड़ के, जितना ज्यादा पावरफुल होगा, क्या करेगा? खूनख्वार। खून खार। क्या मतलब? खून करेगा और खाएगा, पीयेगा। तो अब हमारा ईश्वर तो, हँ, हमारा ईश्वर हमारा बाप है, एक ही बाप। हँ? उनसे हमको वर्सा लेने का है। हँ? जब एक ही बाप है तो 'उससे' होना चाहिए? (या) 'उनसे' होना चाहिए? हँ? क्या होना चाहिेए? बाप एक तो
(किसी ने कुछ कहा।) उससे? अच्छा? माना शिव बाप तुम्हारा बाप नहीं है? एक ही बाप है ना। तो उससे वर्सा नहीं लेना है? हँ? एक ही बाप से वर्सा लेना है या दो से लेना है? हँ? दो से लेना है? ये लो, ये, ये क्या? अभी तो इतना समझाया। हँ? कि जानवर होते हैं वो तो उनको नहीं पता चलता एक बाप कौन है? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) मुक्ति-जीवनमुक्ति? अरे, बाप की बात हो रही है, वर्से की बात नहीं हो रही। वर्सा तो बाप से मिलता है। एक में आया है। तो एक आया। हँ? और एक में आया। तो दो हो गए ना। तुम्हारा बाप कौनसा है? हँ? जो आया वो या जिसमें आया वो या दोनों? हँ? दोनों? हँ? कम्बाइंड बाप से वर्सा लेना है? जैसे अभी मिसाल दिया कुतरिया का। हँ? कम्बाइंड से वर्सा लेना है? अरे! वर्सा एक से लेना चाहिए, एक बाप से, तो उसे कहा जाएगा मनुष्य, मनन-चिंतन-मंथन करने वाला। हँ? तो फिर ये क्यों कह दिया ईश्वर हमारा बाप है, उनसे हमको वर्सा लेने का है? हमको। क्या? तेरे को वर्सा लेना है ऐसा नहीं कहा। क्या? क्यों? तेरे को कहेंगे तो क्या एक से वर्सा लेगा या दो से वर्सा लेगा? उनसे माना एक या ज्यादा? उनसे माने ज्यादा। उससे माने एक।

तो हमको वर्सा लेना है। हँ? ब्रह्मा बाबा बोल रहे हैं कि उनसे हमको वर्सा लेने का है। देखो, नहीं तो वर्सा ही गुम हो जाता है। क्या? हमको। हमको माने एक को या दो को, चार को या अनेक को? हमको माने जरूर बहुत हैं लेने वाले वर्सा। तो उनके लिए बोला, उनसे वर्सा लेना है। किनसे? जहाँ दो इकट्ठे हो जाते हैं। इसका मतलब असली एक बाप वाला कौन हुआ? हँ? एक बाप से वर्सा लेने वाला कोई दुनिया में है या नहीं? कौन? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ। शंकर। ठीक है। उसका नाम? जो वर्सा लेता है बाप का, अव्वल नंबर वर्सा लेता है ना। तो वो तो पूरा ही वर्सा लेगा ना। हँ? बड़ा बच्चा है। कहते हैं ना देव-देव-महादेव। हँ? ब्रह्मा देव, विष्णु देव, और वो उनसे बड़ा महादेव। तीन देव तो सबसे बड़े कहे जाते हैं। उनमें भी बड़ा बच्चा कौन हुआ? शंकर हुआ ना। तो बड़ा बच्चा वर्सा लेता एक बाप से या ज्यादा बाप से लेता है? एक से लेता है। तो ये किनके लिए बोला - उनसे हमको वर्सा लेना है? हमको माने ढ़ेर हो गए कि एक? ढ़ेर हो गए। तो क्या बाकि सब जानवर हैं? अरे, आँखें बंद करके सोच रहे। हँ? इसमें आँखें बंद करके सोचने की बात थोड़ेही है? ये तो सीधी सी बात है। वो बाकि सब जानवर हैं क्या? नहीं? मनुष्य हैं? अरे?
(किसी ने कुछ कहा।) जानवर बुद्धि बनते हैं। अच्छा? वो पहला नहीं जानवर बुद्धि बनता जो एक बाप से वर्सा लेता है? नहीं बनता? वो जानवर बुद्धि नहीं बनता? हँ? अरे? फिर? ईश्वर सर्वव्यापी है वो इस स्टेज में आता है कि नहीं कभी? तो फिर? जब सर्वव्यापी बोला तो फिर वो कैसा हुआ? हँ? हँ? सबसे अशुभ हो गया कि शुभ हो गया? अरे? जानवर हैं, कीड़े-मको़ड़े हैं, इनको अशुभ कहेंगे या शुभ कहेंगे? क्या कहेंगे? शुभ तो देवताओं को कहेंगे। हाँ, मनुष्य पुरुषार्थ करके देवता बन जाता है तो शुभ कहा जाता है।

तो बताया उनसे हमको वर्सा लेना है। अच्छा, चलो ब्रह्मा बाबा ने बोला होगा। उनसे हमको वर्सा लेना है। तो उनका बोलना ठीक है। क्योंकि ब्रह्मा बाबा तो, ब्रह्मा बाबा तो, कितने करोड़ का मालिक है? कितने बच्चों को ब्राह्मण बनाता है? हँ? अरे? कितने बच्चों को ब्राह्मण बनाता है? सारी दुनिया को? माने उसमें जो अव्वल नंबर बच्चा है जो एक बाप से वर्सा लेता है उसमें वो भी आ गया कि नहीं? वो भी आ गया। तो ये भी ठीक है कि ब्रह्मा बाबा ने कहा होगा। क्या? कि उनसे हमको वर्सा लेना है। हँ? बाबा ने तो कहा ईश्वर हमारा बाप है। हँ? हमारा बाप है? वो तो ठीक है। सारी दुनिया का बाप तो एक ही है। एक है प्रैक्टिकल में? है? हँ? कि दूसरो-दूसरों को बाप बना के बैठ जाते?
(किसी ने कुछ कहा।) अभी नहीं है? अभी नहीं है भाई। क्या? अभी हमारा एक ही बाप है। अभी नहीं? अभी एक ही बाप नहीं? अभी ढ़ेर बाप हैं? अच्छा। चलो ढ़ेर बाप से कनेक्शन कर लो। हँ? चिट्ठी-चपाटी देते रहो, फोनबाजी करते रहो। कोई हर्जा नहीं। बहुत हैं बाप ना। तो उनसे निभानी तो पड़ेगी ना। नहीं तो वो नाराज़ हो जाएंगे। तो ठीक है।

देखो, नहीं तो वर्सा ही गुम हो जाता है। क्या? अगर ईश्वर को बाप नहीं माना। तुम बच्चे, जिनको शुभ बोलना है, मनुष्य हैं ना। तो मनुष्य को तो देवता बनना होता है। देवता बन सकते हैं कि नहीं? बन सकते हैं। तो उन शुभ बोलने वाले हम बच्चों को तो वर्सा लेना है। देखो, नहीं लेना है अगर एक बाप से वर्सा तो वर्सा गुम हो जाता है। माना? वर्सा एक बाप से मिलता है या दो बाप से वर्सा मिलता है? एक बाप से वर्सा मिलता है। अगर ये बुद्धि में नहीं रहा, नहीं पहचाना वो हमारा एक बाप कौन है तो वर्सा गुम हो जाता है।

Today’s night class is dated 20.9.1967. The Vani has been cut in the beginning. Achcha! Speak up. Someone said – Yes. You children should even otherwise speak auspicious (shubh) only. Hm? You children. If some other children, these children, those worldly children belonging to other religions speak inauspicious (ashubh) then it is okay because they don’t have to create an auspicious world, auspicious atmosphere. You children have to even otherwise speak auspicious words only. Hm? What is meant by ‘even otherwise’? You have become members of the highest on high Brahmin clan, haven’t you? Brahma’s children. And Brahma
(Someone said something.) Hm? Even among Brahmas, you are the children of the highest on high Brahma, the children of Parambrahm; so, how should you speak? You have to speak auspicious only. In the world actually everyone speaks inauspicious only. Where? In the world. It means that it was not mentioned in heaven. Hm? Yes. What was it named? Do niya (world). Hm? What? Is it dualist or monist? It is dualist. So, they will speak in two ways only, will they not? Just now they will speak something. Just now they will speak something else. They are vidharmi souls only.

So, in the world in reality, hm, in reality, everyone speaks inauspicious only. And you? Why do you speak auspicious? Hm? What is the reason? It is because Baba has taught you to speak auspicious only. Hm? Who teaches you? ShivBaba. So, is ShivBaba inauspicious at any time? Is He inauspicious? Hm? Is He? ShivBaba? Hm? There is auspicious and inauspicious in that also. Hm? In what also? Hm? ShivBaba has taught you to speak auspicious only. In that also. ‘In that also’ refers to what else also? Hm? Arey? Arey, does it take time to think of this as well? In that also. Arey, whose topic is being discussed? ShivBaba.
(Someone said something.) Yes, inauspicious and auspicious in that also. That source which taught you to speak auspicious, there are two in that also. One auspicious and one inauspicious. How inauspicious? Hm? One is sinful and one is pure. Then who taught? Hm? The pure one has taught. What about the one in whom He sat and taught? Is he sinful or pure? Sinful. So, there are two. Hm? He is auspicious as well as inauspicious.

Achcha, what is most inauspicious? Hm? Speak up. Arey! Speak up. Leave it if you don’t know.
(Someone said something.) Is lust most inauspicious, intense? Hm? (Someone said something.) Destruction? Destruction? Yes? Most intensely inauspicious. Hm? It becomes most inauspicious at that time; what? When does it become? The sinful one in whom the ever pure Shiv sits; hm? Does He sit or not? Yes. He sits permanently, so, what is most inauspicious? Hm? When He sits in someone by entering in him, it sits in his intellect while getting rebirths that the soul itself is the Supreme Soul, God is omnipresent. Then does it become most inauspicious or light? Hm? What does it become? Most inauspicious. God is omnipresent. So, this topic is most demoniac nature, isn’t it? What is auspicious? Hm? (Someone said something.) No. He is not omnipresent. Hm? God is our Father. And when is He our Father? Hm? There are five heads, four heads of Brahma. And if He is present in all the four, then will He be called omnipresent or will He be called our Father? Hm? Arey, the Father gives birth. A *****, a she-pig also gives birth to so many offspring. Does it or doesn’t it? Hm? No? They have. So, do they all have one child or do they have many fathers? Everyone’s Father is one. Can they have many or not? Hm? Can a ***** have many fathers (husbands) or not? Can’t she have? Arey? Arey, ask those who rear dogs, rear dogs and bitches. When they enjoy the vice of lust, then two-two dogs follow one *****. Then they hang up. What? They hang-up, don’t they? So, then? Can’t pups be born through both? Hm? Aren’t pups born through both? Are they born through one? Why? Arey, will the dog and ***** know? No. How will they know? They are animals, aren’t they? Their intellect does not work. Whose intellect works? Those who have mind are called manushya (human being).

So, it was said that God is our Father. Are we animals or human beings? Hm? We? We are human beings, aren’t we? And even among the human beings, are there human beings of different kinds or of one kind? Hm? They are of different kinds. Some are worse than animals. There are animals in the jungle, aren’t there? Hm? What is their occupation? To tear apart; the more powerful it is, what will it do? Khoonkhwar (blood-thirsty). Khoon khaar. What does it mean? It will kill and eat, drink [blood]. So, now our God, our God is our Father, only one Father. Hm? We have to obtain inheritance from them (unsay). Hm? When there is only one Father, then should it be ‘from Him’ (us say)? [or] should it be ‘from them’ (unsay)? Hm? What should it be? When the Father is one
(Someone said something.) From Him? Achcha? Does it mean that Father Shiv is not your Father? There is only one Father, isn’t it? So, don’t you have to obtain inheritance from Him? Hm? Do you have to obtain inheritance from only one Father or from two? Hm? Do you have to obtain from two? Look, this; what is this, this? It was explained so much just now. Hm? Those animals do not know as to who is one Father? Hm? (Someone said something.) Mukti-jeevanmukti? Arey, the topic of the Father is being discussed. The topic of the inheritance is not being discussed. Inheritance is received from the Father. He has come in one. So, One has come. Hm? And He has come in one. So, there are two, aren’t there? Who is your Father? Hm? Is it the one who came or is it the one in whom He came or both? Hm? Both? Do you have to obtain inheritance form the combined Father? For example, an example of a ***** was given. Hm? Do you have to obtain inheritance from the combined? Arey! You should obtain inheritance from one, from one Father; then he will be called a human being who thinks and churns. Hm? So, then why was it said that God is our Father and we have to obtain inheritance from them. We. What? It was not said that you have to obtain inheritance. What? Why? If it is said ‘you’, then will he obtain inheritance from one or from two? ‘From them’ refers to one or more? ‘From them’ means more. ‘From Him’ means one.

So, we have to obtain inheritance. Hm? Brahma Baba is speaking that we have to obtain inheritance from them. Look, otherwise the inheritance vanishes. What? We. Does ‘we’ refer to one or to two, to four or to many? ‘We’ means that definitely there are many who obtain inheritance. So, it was said for them that we have to obtain inheritance from them. From whom? The place where two gather. It means that who is the true person with one Father? Hm? Is there anyone in the world who obtains inheritance from one Father or not? Who? Hm
? (Someone said something.) Yes, Shankar. It is correct. What is his name? The one who obtains inheritance of the Father; he obtains number one inheritance, doesn’t he? So, he will obtain complete inheritance, will he not? Hm? He is the eldest child. It said ‘Dev-Dev-Mahadev’, isn’t it? Hm? Brahma, the deity, Vishnu, the deity; and Mahadev, he is higher than them. Three deities are said to be the senior most. Even among them, who is the eldest child? It is Shankar, isn’t it? So, does the eldest child obtain inheritance from one Father or from more fathers? He obtains inheritance from one. So, for whom was it said that we have to obtain inheritance from them? ‘We’ refers to numerous or one? There are numerous. So, are the rest animals? Arey, you are thinking with your eyes closed. Hm? Is there anything to close the eyes and think in this? This is a simple thing. Are all others animals? No? Are they human beings? Arey? (Someone said something.) They develop animal-like intellect. Achcha? Doesn’t he who obtains inheritance from one Father develop an animal-like intellect? Doesn’t he? Doesn’t he develop an animal-like intellect? Hm? Arey? Then? Doesn’t he ever come to the stage of believing that God is omnipresent? So, then? When he said [God is] ‘omnipresent’ then how is he? Hm? Hm? Is he most inauspicious or auspicious? Arey? There are animals, worms and insects; will they be called inauspicious or auspicious? What will they be called? Deities will be called auspicious. Yes, a human being makes purusharth and becomes a deity; then he is called auspicious.

So, it was told that we have to obtain inheritance from them. Achcha, okay Brahma Baba must have told that we have to obtain inheritance from them. So, his utterance is correct because Brahma Baba, Brahma Baba is a master of how many crores? How many children does he make Brahmins? Hm? Arey? How many children does he make Brahmins? The entire world? It means that the number one child among them, who obtains inheritance from one Father, is he also included among them or not? He is also included. So, this is also correct that Brahma Baba must have said. What? That we have to obtain inheritance from them. Hm? Baba said that God is our Father. Hm? Is he our Father? That is correct. The Father of the entire world is one. Is there one in practical? Is he? Hm? Or do you make others as fathers and sit?
(Someone said something.) Is he not now? Brother, he is not now. What? Now we have only one Father. Not now? Don’t you have one Father now? Do you have numerous fathers now? Achcha. Okay, have connection with numerous fathers. Hm? Keep on sending letters, keep on making phone calls. It doesn’t matter. There are many fathers, aren’t there? So, you will have to maintain relationship with them, will you not? Otherwise, they will get angry. So, it is correct.

Look, otherwise the inheritance itself vanishes. What? If you do not accept God as Father. You children, who have to speak auspicious, are human beings, aren’t you? So, human beings have to become deities. Can you become deities or not? You can become. So, we children, who have to speak auspicious, have to obtain inheritance. Look, if you don’t have to obtain inheritance from one Father, then the inheritance vanishes. What does it mean? Do you get inheritance from one Father or from two fathers? You get inheritance from one Father. If this does not remain in your intellect, if you don’t recognize that who is our one Father, then the inheritance vanishes.

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Note: This is just a draft. For the complete text, Audio and Video of the above VCD please visit – www.adhyatmik-vidyalaya.com

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 04 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2697, दिनांक 11.11.2018
VCD 2697, Dated 11.11.2018
रात्रि क्लास 20.9.1967
Night Class dated 20.9.1967
VCD-2697-extracts-Bilingual

समय- 00.01-17.12
Time- 00.01-17.12


रात्रि क्लास चल रहा था - 20.9.1967. एक पेज के मध्य में बात चल रही थी – याद की यात्रा में कच्चे होने के कारण जो भी बोलेंगे वो मीठा नहीं बोलेंगे। तुम्हारी वाणी में खींच नहीं होगी। तो जरूर तुम बच्चे जो इतने यहाँ आए हुए हो, तो यहाँ आये हो तो जरूर यहाँ बाबा के मीठे बोल तो सुने हो। मीठे बोल कौनसे हैं? चलो आओ। आकरके बेहद के बाप से वर्सा लो। देखो कितने मीठे बोल हैं। और कौनसा वर्सा लिये हो? हँ? वर्सा तो नंबरवार है ना। हँ? बाप से जो वर्सा लेंगे वो नंबरवार तो हैं। विष्णुलोक का वर्सा जिसे कहते हैं वैकुंठ का वर्सा। फिर है 16 कला संपूर्ण सतयुग का वर्सा। फिर है उतरती कला का सतयुग। कम कलाओं वाले सतयुगी देवताओं का वर्सा। उसके बाद त्रेता में तो चन्द्रवंशी हैं। सतयुग में सूर्यवंशी होते हैं नंबरवार। त्रेता में चन्द्रवंशी। राम फेल हुआ ना। और फेल तो सब होते हैं। कोई पहले फेल होते हैं। कोई बाद में फेल होते हैं। तो कौनसा फेल होना अच्छा? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) पहले फेल होना अच्छा? वाह भाई। हँ? बाद में, बाद में फेल हुए, सारा सत्यानाश हो गया। पुरुषार्थ करने का टाइम ही नहीं रहा। हँ? पहले फेल होना अच्छा या बाद में फेल होना अच्छा? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) पहले? हाँ। पहले फेल होंगे तो ब्राह्मण बनेंगे और ब्राह्मण बनेंगे तो कुछ टाइम तो मिलेगा ना पुरुषार्थ करने का। गैलप कर लेंगे। कोई तो गैलप कर लेंगे। कोई? कोई फिर भी नहीं गैलप कर पाते। तो पूछा – कौनसा वर्सा लियो? अब ऐसा वर्सा लियो। कैसा? ऐसा। तो फिर ऐसे गुण भी धारण करो।

तो बोलना ही ऐसा अच्छा मीठा हो जो सबको दिल से लगे। हँ? दिल से लगे? माना? दिल पसन्द हो? हाँ। बोलना पसन्द आए। ऐसे-ऐसे सौ परसेन्ट फर्स्टक्लास थे। क्या? ऐसे नहीं कि 100 परसेन्ट फर्स्टक्लास थे नहीं। कब? हँ? कब थे? हँ? अरे, हाँ, आदि में। आदि माने? ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शुरू हुआ तब आदि में? 1947 में? हँ? आदि में माने?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, 1936-37 से ओम मंडली वाला नाम का ज्ञान यज्ञ शुरु हुआ ना। तो उसमें सौ परसेन्ट फर्स्टक्लास थे। हँ? अभी सभी सौ परसेन्ट थर्डक्लास हैं। कबकी वाणी है? हँ? अरे, ये वाणी कबकी है? 1967 की। बोला – अभी सभी 100 परसेन्ट थर्ड क्लास हैं। और देखो दुनिया में तो फर्स्टक्लास से भी ऊपर आजकल एयर कन्डीशन्ड है। फर्स्टक्लास, सेकण्डक्लास और एयर कंडीशन्ड भी थर्ड क्लास। थ्री टायर होता है ना। हँ? हाँ। तो ऐसे कहते हैं ना खास। क्या? जो एयर कंडीशन्ड है फर्स्टक्लास, दी बेस्ट इसको कहा जाता है। कहते हैं ना गुड, बैटर, बैस्ट।

तो ये एकदम डीप। क्योंकि किसको भी मालूम नहीं है कि हम कोई ये बन सकते हैं। किसको भी मालूम नहीं है? अरे, जिन ऋषियों-मुनियों ने वेद-शास्त्र लिखे थे, वेद लिखे थे ना। हँ? उससे भी पहले श्रीमद भगवत गीता लिखी थी ना। तो वो भी नहीं जानते क्या, हँ, कि हम कोई ये बन रहे हैं। क्या? हँ? हाँ। विष्णुलोक में जाने वाले ये लक्ष्मी-नारायण जिनका कम्बाइन्ड रूप विष्णु दिखाया जाता है। उनकी बुद्धि में आएगा ही नहीं क्योंकि कलप पूर्व की बात है ना जब महाविनाश हो गया था। हँ? टोटल सृष्टि का विनाश हो गया। कोई नहीं बचा। सब खलास हो गए। एक ही बचा। कौन? मनुष्य सृष्टि का बाप। एक ही बचा। अच्छा? सृष्टि तो दो से पैदा होती है कि एक से पैदा होती है? तो फिर एक ही बचा क्या विष्णुलोक में? वहाँ भी दो कैटागरी की आत्माएं हैं। एक रुद्रमाला और एक विजयमाला। दोनों का कम्बिनेशन होता है। क्या? रुद्रमाला किसकी माला है? रुद्रमाला किसकी माला? तुम बच्चों की माला। है ना। हाँ। तुम बच्चों की माला? तुम बच्चों की माला माने क्या? हँ? कौनसे जानवरों की माला? हँ? हँ? अरे, बाबा आके नई दुनिया की रचना करते हैं रावण राज्य से, हँ, टक्कर लेने के लिए, रावण राज्य का विनाश करके, हँ, नई दुनिया की स्थापना करते हैं ना। तो रावण से टक्कर लेते हो ना तुम बच्चे? हं? नहीं लेते? टक्कर तो लेते हो। तो बाबा ने कौनसी सेना चुनी? बंदरों की सेना। क्यों? हँ? बंदरों की सेना क्यों चुनी? हँ? क्यों चुनी? क्योंकि जो सबसे ज्यादा विकारी होते हैं, हँ, हर विकार में सबसे ज्यादा, काम में, क्रोध में, लोभ में, अहंकार में, पांचों विकारों में एक्स्ट्रीम। तो उनको सुधार के फिर क्या करते हैं? हँ? नई दुनिया में, देवताओं की दुनिया में जाने लायक बनाते हैं। विष्णु है ना सबसे ऊँचा देवता।

तो दुनियावाले शास्त्रकारों की समझ में ये बात नहीं आ सकती है कि ये कोई बन्दर जैसे ये बन सकते हैं मन्दिर लायक देवता। और ये बात तुम भी जानते हो। जानते हो कि नहीं? हँ? नहीं जानते हो? अच्छा? जानते हो कि बरोबर हम दी बेस्ट बन रहे हैं। हँ? क्या बन रहे हैं? दी बेस्ट माना क्या बन रहे हैं? हाँ, विष्णुलोक में नंबरवन दुनिया में जाने वाले बन रहे हैं। बेस्ट दुनिया है। कैसे बेस्ट है? त्रेता से भी बेस्ट, सतयुग से भी बेस्ट। दोनों को मिलाके कहा जाता है स्वर्ग। तो, हाँ, कलातीत दुनिया में जा रहे हैं। वहाँ, हँ, कर्मेन्द्रियों के सुख की भी दरकार नहीं। कर्मेन्द्रियों का सुख कैसा है? पाप बनाने वाला है या पुण्य बनाने वाला है? पाप बनाने वाला है। हँ? और अल्पकाल का भी है। अल्पकाल का होता जाता है। क्योंकि द्वापरयुग में तो फिर भी आत्मा में ताकत रहती है। द्वापर की शुरुआत में 8 कला होती है ना आत्मा। तो ताकत तो रहती है ना। तो फिर भी पावरफुल होते हैं आत्मा, तो शरीर भी पावरफुल होते हैं। होते हैं कि नहीं? तो ज्यादा सुख भोगेंगे, कम सुख भोगेंगे कलियुग के मुकाबले? हँ? ज्यादा ही सुख। तो उसे क्षणभंगुर नहीं कहेंगे। कब कहेंगे?

क्षणभंगुर सुख तब कहा जाता है जब कहते हैं काग विष्टा समान। क्या? काग विष्टा? काग का नाम क्यों लिया? हँ? काग का नाम इसलिए लिया कि जो स्वर्ग में देवताओं ने सुख भोगा था, हँ, उससे बचा-बचाया प्राकृतिक सुख; प्रकृति माने शरीर; प्रकृति का पुंज क्या है? देह। हाँ, तो वो जो बचा-बचाया सुख द्वापरयुग के मनुष्यों ने भोगा। हँ? हाँ। और फिर उन, जो मनुष्य थे ऋषि-मुनि, मनुष्य ही थे ना दाढ़ी-मूँछ वाले, उन्होंने जो सुख भोगा द्वापर में, उससे भी नीचे आकरके कलियुग शुरु होता है तो शुरु-शुरुआत में तो चार ही कलाएं होती हैं लेकिन बहुत जल्दी वो चार कलाएं भी खलास हो जाती हैं। कलाहीन हो जाता है। तो सुख भी कैसा बचेगा? हँ? कैसा बचेगा? शरीर कैसे हो गए? खोखले हो गए कि दमदार रहे? आँखें अंदर धंस गई। देवताओं की आँखें कितनी बढ़िया आँखें बाहर होती हैं। विशाल नेत्र कहे जाते हैं। हँ? देवी को कहते हैं विशालाक्षी। हँ? देवता को कहते हैं विशालाक्ष।

तो देखो, कलियुग में आकरके जब कौओं का राज्य होता है; क्या? कौआ माने? कौरव। क्या अर्थ हुआ? कौ माने कौवा, रव माना शोरगुल। कौओं की तरह शोरगुल करने वाले। कांव-कांव की रेस करते हैं। नाम क्या हुआ? कांग्रेस। उनका राज्य होता है ना। तो बस काग विष्टा समान सुख रह जाता है। कोई दम नहीं उस सुख में। भोगा, भोगा, न भोगा।

तो बताया कि ये दुनिया में दुनियावी गुड, बैटर, बेस्ट होती है। तो सुख भी गुड, बैटर, बैस्ट होता है। तो ये, ये अक्षर-अक्षर मुख से निकलने चाहिए उनके। किनके? हँ? जो सच-सच बन रहे हैं। क्या सच-सच बन रहे हैं? हँ? किसके राज्य में आने वाले? हँ? किसके राज्य में आने वाले? लक्ष्मी-नारायण के राज्य में। लक्ष्मी-नारायण तो आठ होते हैं सतयुग में। हँ? वो कितनी कलाएं उनकी कम हो जाती हैं। विष्णु के राज्य में आने वाले? नहीं सचसच बन रहे हैं। तो कहना चाहिए जिनकी कथा घर-घर में होती है भारतवर्ष में। होती है कि नहीं? तो वो सत्यनारायण के राज्य में आने वाले हम यथा राजा तथा प्रजा सच-सच बन रहे हैं। और फिर पुरुषार्थ भी कैसा? सच-सच (या) झुठ-झुठ? हँ? कदम-कदम पे झुठ। कैसा पुरुषार्थ? कदम-कदम पे सच होना चाहिए। बोलना भी मीठा, बिल्कुल ही बोलना मीठा।

A night class dated 20.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the middle of the first page was – Being weak in the journey of remembrance whatever you speak will not be sweet. There will not be any attraction in your speech. So, definitely you children who have come here in such numbers, so, when you have come here, then definitely you have heard the sweet words of Baba here. Which are the sweet words? Okay come. Come and obtain the inheritance from the unlimited Father. Look, the words are so sweet. And which inheritance have you obtained? Hm? The inheritance is numberwise, isn’t it? Hm? Those who obtain inheritance from the Father are numberwise. The inheritance of the abode of Vishnu which is called the inheritance of Vaikunth (Confluence Age heaven). Next is the inheritance of the Golden Age perfect in 16 celestial degrees. Then is the Golden Age with decreasing celestial degrees. The inheritance of the Golden Age deities with fewer celestial degrees. After that there are Chandravanshis in the Silver Age. There are numberwise Suryavanshis in the Golden Age. There are Chandravanshis in the Silver Age. Ram failed, didn’t he? And everyone fails. Some fail early. Some fail later on. So, which failure is better? Hm?
(Someone said something.) Is it better to fail early? Wow brother. Hm? If you fail later, then everything is ruined. There is no time for purusharth at all. Hm? Is it better to fail in the beginning or is it better to fail in the end? Hm? (Someone said something.) In the beginning? Yes. If you fail in the beginning, you will become Brahmins. And if you become Brahmins you will get some time to make purusharth, will you not? You will gallop. Some will gallop. Some? Some are still not be able to gallop. So, it was asked – Which inheritance should you obtain? Now obtain such inheritance. Of what kind? Like this. So, then inculcate such virtues also.

So, the speech itself should be so nice and sweet that it touches everyone’s heart. Hm? Touches the heart? What does it mean? Should it be to the liking of the heart (dilpasand)? Yes. The speech should be liked. You were hundred percent first class like this. What? It is not as if you were not 100 percent first class. When? Hm? When were you? Hm? Arey, yes, in the beginning. What is meant by beginning? Is it in the beginning when the Brahmakumari Ishwariya Vishwavidyalay started? In 1947? Hm? What is meant by ‘in the beginning’?
(Someone said something.) Yes, the Gyan Yagya named Om Mandali started in 1936-37, didn’t it? So, you were 100 percent first class in it. Hm? Now everyone is hundred percent third class. It is a Vani of which time? Hm? Arey, this Vani is of which time? Of 1967. It was said – Now everyone is 100 percent third class. And look, in the world now-a-days there is air conditioned which is higher than first class. First class, second class and third class even in air conditioned. There are three tier, aren’t there? Hm? Yes. So, it is said like this especially, isn’t it? What? The first class air conditioned is called the best. It is said – Good, better, best, isn’t it?

So, this is completely deep. It is because nobody knows that we can become this. Doesn’t anyone know? Arey, the sages and saints who wrote the Vedas and scriptures; they had written the Vedas, hadn’t they? Hm? Even before that they had written the Shrimad Bhagwat Gita, hadn’t they? So, they too do not know; what? Hm? That we are becoming this. What? Hm? Yes. These Lakshmi and Narayan who go to the abode of Vishnu are shown in the combined form of Vishnu. It will not strike their intellect at all because it is about the Kalpa ago when mega destruction had taken place, hadn’t it? Hm? Total destruction of the world had taken place. Nobody survived. Everyone perished. Only one survived. Who? The Father of the human world. Only one survived. Achcha? Is the world born through two or through one? So, then did only one survive in the Vishnulok? There are two categories of souls even there. One is Rudramala and one is Vijaymala. Combination of both takes place. What? Whose rosary is the Rudramala? Whose rosary is the Rudramala? It is the rosary of you children. Isn’t it? Yes. Rosary of you children? What is meant by rosary of you children? Hm? Rosary of which animals? Hm? Hm? Arey, Baba comes and creates a new world to counter the kingdom of Ravan; He establishes the new world by destroying the kingdom of Ravan, doesn’t He? So, you children clash with Ravan, don’t you? Hm? Don’t you? You do clash. So, which army did Baba choose? An army of monkeys. Why? Hm? Why did He choose the army of monkeys? Hm? Why did He choose? It is because they are most vicious, hm, most vicious in every vice, in lust, in anger, in greed, in attachment, in ego; extreme in all the five vices. So, what does He do by reforming them? Hm? He makes them worthy of going to the new world, to the world of deities. Vishnu is the highest deity, isn’t he?

So, the worldly writers of scriptures cannot understand the topic that these monkey-like people can become deities worthy of worship in temples. And you also know this topic. Do you know or not? Hm? Don’t you know? Achcha? You know that definitely we are becoming the best. Hm? What are we becoming? What are we becoming when we say ‘the best’? Yes, we are becoming the ones who are going to the abode of Vishnu in the number one world. It is the best world. How is it best? It is best when compared to the Silver Age, best when compared to the Golden Age. Both are collectively called heaven. So, yes, we are going to the kalaateet world (a world beyond celestial degrees). There is no need for the pleasure of the organs of action there. How is the pleasure of the organs of action? Does it cause sins or does it cause punya (fruits of noble actions)? It causes sins. Hm? And it is also temporary. It goes on becoming temporary. It is because there is power in the soul in the Copper Age. The soul has 8 celestial degrees in the beginning of the Copper Age, doesn’t it? So, it does have power, doesn’t it? So, however the souls are powerful, so the bodies are also powerful. Are they or are they not? So, will they enjoy more pleasure or less pleasure when compared to the Iron Age? Hm? More pleasure. So, that will not be called momentary. When will it be called [momentary]?

It is called momentary when it said to be like the faeces of a crow (kaag vishtaa). What? Kaag vishtaa? Why was the name of a crow (kaag) uttered? Hm? The name of a crow was uttered because the natural pleasure (praakritik sukhh) that remained after the happiness that the deities had enjoyed in heaven; prakriti means body; what is the accumulation (punj) of nature? Body. Yes, so the people of the Copper Age enjoyed that remaining pleasure. Hm? Yes. And then those human beings, the sages and saints, they were human beings only with beard and moustache; they enjoyed pleasure in the Copper Age; after descending from even that level when the Iron Age starts then in the very beginning there are only four celestial degrees, but very soon those four celestial degrees also vanish. One becomes devoid of celestial degrees. So, what kind of pleasure will remain? Hm? What kind of pleasure will remain? How did the bodies become? Did they become empty or did they remain strong? The eyes buried deeper into the sockets. The eyes of the deities were so nice; the eyes protrude. The eyes are said to be large eyes (vishaal netra). Hm? Devi is called Vishaalaakshi (the female deities with big eyes). Hm? Devata is called Vishaalaaksh (the male deities with big eyes).

So, look, when there is a rule of crows after coming to the Iron Age; what? What is meant by crow (kauvva)? Kaurava. What is the meaning? Kau means kauvva (crow), rav means noise. Those who create noise like crows. They run the race of crowing. What is the name? Congress. It is their rule, isn’t it? So, that is it; a pleasure like the faeces of crow remains. There is no strength in that pleasure. It is one and the same if one enjoys that pleasure or not.

So, it was told that in this world the worldly good, better, best exists. So, the pleasure is also good, better, best. So, these, these words should emerge from their mouths. From whom? Hm? Those who are becoming in reality. What are they becoming in reality? Hm? Those who are going to be included in whose kingdom? Hm? Those who are going to be included in whose kingdom? In the kingdom of Lakshmi-Narayan. There are eight Lakshmi-Narayans in the Golden Age. Hm? Their celestial degrees decrease so much. Those who come in the kingdom of Vishnu? No, they are becoming in real sense. So, it should be said that the ones whose story is narrated in every home in the Indian region. Is it narrated or not? So, we are the ones who are going to come in the kingdom of that true Narayan; we are truly becoming those subjects who are like the king. And then how is the purusharth as well? True [or] false? Hm? There is falsehood in every step. What kind of purusharth [should you make]? There should be truth in every step. The speech should also be sweet; you should talk very sweetly.

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 06 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2698, दिनांक 12.11.2018
VCD 2698, Dated 12.11.2018
रात्रि क्लास 20.9.1967
Night Class dated 20.9.1967
VCD-2698-extracts-Bilingual

समय- 00.01-20.00
Time- 00.01-20.00


रात्रि क्लास चल रहा था - 20.9.1967. पहले पेज के मध्यांत में बात चल रही थी सत्यनारायण की कथा की। क्योंकि भारत में तो सब झूठी ही सत्य नारायण की कथा सुनाते हैं। अभी जो सुनते रहते हैं वो भी तो आएंगे ना। हाँ, वो भी फिर ऐसे ही कहेंगे कि आगे हम झूठी कथाएं सुन रहे थे। अभी हम एक ही सच्ची कथा सुनते हैं। तो कौनसी सच्ची कथा बताई थी? कथा कहो, बायोग्राफी कहो, जीवन कहानी कहो, हँ, हाँ, सच्ची-सच्ची कथा तो शिवबाबा ही सुनाते हैं। बाप के सिवाय बाप का परिचय कोई दे भी नहीं सकता। तो जाते हैं ये। और बच्चे भी अपनी तोतली बातों से बहुत समझाय सकते हैं। क्योंकि ये जो चक्कर है तुम्हारे आगे वो चक्कर वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी बिल्कुल अच्छी तरह से दिखलाते हैं। वर्ल्ड की हिस्ट्री जॉग्राफी। वो जो सीढ़ी है वो तो सिर्फ भारत की ही बात सुनाते हैं। और ये भारत तो, चक्कर भारत के ऊपर ही तो है। ये चक्कर है सुदर्शन चक्कर जिसको कहा जाता है ये सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग वाला। ये सारे ही दुनिया के चक्कर को समझाते हो। तो भारत के चक्कर को और ये दुनिया के चक्कर को।

तो दुनिया कोई भारत में ही तो नहीं है ना। तो सिर्फ सीढ़ी काम में नहीं आएगी। देखो, जिज्ञासु तो बोलेगा कि क्या ये सिर्फ भारत की बातें सुनाई हैं? अब, सिर्फ भारत की बातें सुनावेंगे, सीढ़ी के चित्र के ऊपर तो फिर वो कहेंगे कि हम लोग कहाँ गए, हँ, जो दूसरे देशों के हैं? 20.9.67 की रात्रि क्लास का दूसरा पेज। तो फिर ये चक्कर सुनाना पड़े कि देखो अभी इस्लामी, बौद्धी, क्रिश्चियन, वो भी तो हैं ना इस दुनिया में। फिर वो झाड़ भी दिखलाना पड़े। देखो, इस झाड़ में तो सभी हैं। क्योंकि ये है भारतवासियों को समझाने के लिए सीढ़ी का चित्र जिन्होंने 84 जन्म लिए हैं सच-सच। और फिर से तुमको बहुत सहज समझाया जाता है कि अभी तो 84 का चक्कर पूरा हुआ। और फिर से नंबरवन से शुरू होना है। तो ये है तुम्हारा लीप जन्म। संगम का एक्स्ट्रा जन्म है। इसको कहा जाता है लीप युग। भक्तिमार्ग में लीप मास होते हैं ना।

अभी देखो, अंबा का मेला कितना लगता है। बुद्धि नहीं है। माता को ही बुद्धि में रखा हुआ है। अरे, अंबा है तो बाबा कहाँ है? बाबा बिगर कोई अंबा थोड़ेही होती है। अंबा से थोड़ेही वर्सा मिलता है। वर्सा तो बाबा से मिलता है। तो उन अंबा के पुजारियों को इतनी भी बुद्धि नहीं है कि हम बाबा को ढ़ूंढ़ें। क्योंकि ये ब्रह्मा तो अम्मा है ना। अम्मा से थोड़ेही कुछ मिलेगा। अम्मा कहाँ से लाएगी? बाबा की बात है। परन्तु वो बाबा है कहाँ? इतनी बुद्धि नहीं चलती। बाप कहते हैं बुद्धि नहीं है। समझ नहीं कुछ पाते हैं कि बाप के बिगर वर्सा नहीं मिल सकता है। बाकि तो पाई-पैसे का सुख तो बहुतों से मिलता रहता है। अम्मा से भी मिलता रहता है। गरभ में भी अम्मा के पेट में पलते हैं ना। बचपन में गोद में भी खेलते हैं। सारा जीवन तो नहीं कहेंगे ना। तो सारी जीवन के लिए तो वर्सा चाहिए।

ये तो बच्चे जानते हैं कि अभी यहाँ बेहद का सुख हमको लेना है। हद के माँ-बाप से हद का सुख मिलता है। बेहद का बाप है तो बेहद का सुख देगा। आत्मा तो बेहद में है ना। देह का बाप एक जन्म का सुख देगा। देह को कहेंगे हद में एक जनम के लिए। आत्मा तो अनेक जन्मों से कनेक्टेड है ना। तो ये बाप ही जानते हैं कि मुझे वर्सा कैसे देना है। बच्चों को समझाते हैं कि तुम कैसे पूरा वर्सा ले सकते हो। तो वो समझाती है, कहती है ऐसे ले सकते हो। ऐसे ही लेने का पुरुषार्थ करना चाहिए। और गरीबों को तो और भी सहज है वास्तव में। क्योंकि यहाँ देखो आते भी बहुत गरीब हैं। हँ? बेहद के बाप से वर्सा लेने के लिए गरीब ही आते हैं ना। तो अभी उन गरीबों को भी क्या करना है? हैं तो गरीब ना बाकि करना क्या है? बाप को याद करना है। उसमें कोई खर्चा तो नहीं है। और यहाँ से वहाँ भी जाने की दरकार नहीं है। उस दुनिया में।

कई बच्चियां कहती हैं कि हम तो कुछ मुख से बोल नहीं सकते हैं। अच्छा, कोई बात नहीं। नहीं बोलो। अपन को आत्मा तो समझेंगे ना। कि ये भी नहीं समझेंगे? अगर अपन को आत्मा नहीं समझते हैं तो ये समझाने से बाप कहते हैं कि तुम आत्मा हो पहले। शरीर तो बाद में। हँ? माँ के पेट में भी पहले क्या? शरीर कि आत्मा?
(किसी ने कुछ कहा।) शरीर? ये तो बात गलत हो गई। बाबा तो कहते हैं पहले आत्मा। अरे, शरीर भी कैसे बनता है? कोई लुंजुम बनता है, कोई पुंजुम बनता है। हँ? कोई बच्चा स्वस्थ पैदा होता है। बचपन से ही स्वस्थ। हँ? तो ये, ये जो बात है, शरीर अच्छा या बुरा, हँ, इन्द्रियां भरपूर, तो इसका आधार क्या हुआ? आत्मा हुई ना। जो आत्मा, वो तो नहीं आती है पहले गरभ में। परन्तु उसके वायब्रेशन्स से, आत्मा के जैसे कर्म हैं उन कर्मों के हिसाब से, (बाबा ने किसी को कहा - छोटा-छोटे दिखाई नहीं पड़ता है), वो उनका शरीर तैयार होता रहता है। तो ये शरीर तो विनाशी है। अविनाशी चीज़ सदाकाल है। शरीर तो बनता है फिर बिगड़ जाता है। और आत्मा तो है ही है।

तो पहले अपन को आत्मा समझो। और आत्मा के बाप परमपिता को याद करो। तो अगर अपन को आत्मा भी नहीं समझेंगे तो फिर कहेंगे वो तो जंगली जानवर। क्योंकि देह समझते हैं तो जानवर थोड़ेही अपन को आत्मा समझेंगे। हँ? वो तो जानवर ही हुए ना। इसलिए तो इनको नहीं समझते हैं। किनको? आत्मा को। तो अपन को आत्मा समझना है। तो है तो बरोबर। हँ? क्योंकि इस दुनिया में तो फॉरेस्ट है। फॉरेस्ट में तो जानवर ही रहते हैं। अपन को आत्मा समझ ही नहीं सकते क्योंकि ये जो बाहर में जो मनुष्य रहते हैं उनको पता ही नहीं है कि हम क्या हैं? तो वो दुनियावी मनुष्य तो जैसे जंगली जानवर हैं। तो उनको मनुष्य से देवता बनाना कितना मेहनत का काम है। और इसके लिए बाप आकरके कितनी युक्तियाँ बताते हैं कि अपन को आत्मा समझो। प्रैक्टिस करो। 63 जनम देह समझते आए। तो आदत पड़ी हुई है देह समझने की, याद करने की। बार-बार बुद्धि देहधारियों में चली जाती है। अब बनना है देवता, मनुष्य से। हँ? कहते भी हैं मानुष से देवता किये करत न लागी वार। तो प्रैक्टिस करेंगे तब ही तो देवता बनेंगे क्योंकि देवताएं तो सदाकाल अपन को आत्मा समझते हैं या देह समझते हैं? हँ? वो तो सदाकाल अपन को आत्मिक स्थिति में रहते हैं।

तो मनुष्य को कहा ही जाता है, हँ, आज के मनुष्यों को कहा जाता है कि ये बन्दर से भी बदतर। हँ? क्योंकि बन्दरों की बुद्धि एक ठिकाने टिकती थोड़ेही है। हँ? इधर नज़र जाएगी, उधर नज़र जाएगी। तो बन्दर भी नहीं रखते हैं। कहते हैं बन्दर से भी बदतर। तो मनुष्यों को बन्दर से भी बदतर रखा हुआ है। अच्छा, अब ये बताओ कि मनुष्यों में सबसे जास्ती बन्दर, बदतर कौन है? हँ? कौन ठहरा? ये जो सर्वव्यापी का नॉलेज निकाला है; निकाला है ना? तो ये तो बहुत नुकसान कर दिया है बच्चे। क्योंकि मैं तो इस सृष्टि पर आता हूँ तो एकव्यापी होकर आता हूँ। और वो उन्होंने चित्र भी बनाय दिये हैं। कहते हैं अर्जुन के रथ में आया। और रथ माने शरीर कहा जाता है ना। तो एक ही रथ में आया ना। उन्होंने कह दिया सर्वव्यापी है। तो देखो, एक में याद करना उससे बुद्धि, मन एकाग्र होगा या सर्वव्यापी कहने से, समझने से एकाग्र होगा? हँ? सर्वव्यापी कह देने से सबकी बुद्धि भटक गई। तो कितना नुकसान हो गया। हँ? देखो, भारत का कितना सारा नुकसान कर दिया! हँ? और ऐसे को फिर यहाँ भक्तिमार्ग में देखो पूजते हैं। हँ? किनको पूजते हैं? हँ? अरे, जिन्होंने सर्वव्यापी बताय दिया कि मेरे में है, तेरे में है, सर्वव्यापी है। तो ऐसे सत्यानाशियों को देखो बैठकरके पूजते हैं। सन्यासियों की पूजा करते हैं ना। पंडित, विद्वान, आचार्यों के कितना मान करते हैं। तो बाप अब बैठ करके समझाते हैं। किसमें बैठ करके समझाते हैं? हँ? एक में बैठकरके समझाते हैं। सुनाते तो हैं भले बहुतों में लेकिन एक में बैठकरके समझाते हैं बच्चे। और आखरीन में तो वो सब समझ जाएंगे जिन्होंने सर्वव्यापी बताय दिया।

A night class dated 20.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the middle portion of the first page was about the story of Satya (True) Narayana. It is because everyone in India narrates only the false story of the True Narayana. Well, those who keep on listening will also come, will they not? Yes, they will also say like this only that earlier we were listening to false stories. Now we listen to only one true story. So, which true story was narrated? Call it a story, call it a biography, call it a life story, hm, yes, truest story that is narrated is of ShivBaba only. Nobody except the Father can give the introduction of the Father. So, these people go. And children can explain a lot with their lisper (totali baatein). It is because this Cycle in front of you, that Cycle shows the history-geography of the world very nicely. History-geography of the world. That Ladder narrates only the topics of India. And this Bhaarat, this Cycle is based on Bhaarat only. This Cycle is the Sudarshan Chakkar, which is called the one with the Golden Age, Silver Age, Copper Age, and Iron Age. You explain about the cycle of this entire world. So, the cycle of India and the cycle of the world.

So, the world is not limited to just India, is it? So, just the Ladder will not be useful. Look, the student will tell that have you narrated only the topics of India? Well, if you narrate only the topics of India, on the picture of the Ladder, then they will say that where were we people left out, hm, those who belong to other countries? Second page of the night class dated 20.9.67. So, then you will have to narrate this cycle that look, now there are the Islamic people, the Buddhists, the Christians also in this world, aren’t they? Then that Tree will also have to be shown. Look, everyone is included in this Tree. It is because this picture of the Ladder is for explaining to the residents of India who have truly got 84 births. And you are explained very easily once again that now the cycle of 84 is about to be over. And the number one [birth] is to start again. So, this is your leap birth. It is the extra birth of the Confluence Age. This is called the Leap Age. There are Leap months on the path of Bhakti, aren’t there?

Now look, the fair of Amba is organized so much. They do not have intellect. They have kept the Mother alone in their intellect. Arey, if there is the Mother, then where is Baba (Father)? Can there be a mother without a Father? Does one get inheritance from the mother? The inheritance is received from the Father. So, the worshippers of that Amba do not even have the intellect that they should search for Baba. It is because this Brahma is a mother, isn’t he? Will one get anything from the mother? Where will the mother bring from? It is about the Father. But where is that Baba? Their intellect doesn’t work this much. The Father says they do not have intellect. They are unable to understand that one cannot get inheritance except from the Father. One keeps on getting pleasure worth pie-paise from many. You keep on getting from the mother as well. You get sustenance in the womb of the mother’s abdomen, don’t you? You also play in her lap in the childhood. It cannot be said so for the entire life, can it be? So, inheritance is required for the entire life.

Children know that now we have to obtain the unlimited joy here. We get limited happiness from the limited parents. When He is the unlimited Father, then He will give unlimited joy. The soul is in an unlimited sense, isn’t it? The physical Father will give happiness for one birth. Body will be said to be for one birth in a limited sense. The soul is connected to many births, isn’t it? So, this Father alone knows as to how I have to give inheritance. He explains to the children that how you can obtain the entire inheritance. So, He explains, says that you can obtain like this. You should make purusharth to obtain like this only. And it is actually easier for the poor. It is because look, here it is the poor ones who come more. Hm? It is the poor alone who come to obtain inheritance from the unlimited Father, don’t they? So, what should those poor also do now? They are poor, aren’t they? But what should they do? They have to remember the Father. There is no expenditure in that. And there is no need to go from here to there as well. In that world.

Many daughters say that we cannot speak anything through the mouth. Achcha, it doesn’t matter. Don’t speak. You will consider yourself to be a soul, will you not? Or will you not think even this much? If you do not consider yourself to be a soul, then the Father explains that you are first a soul. Later a body. Hm? What are you first in the mother’s womb as well? Body or soul?
(Someone said something.) Body? This is a wrong thing. Baba says – first [you are] a soul. Arey, how is the body also formed? Some become weak. Hm? One child is born healthy. Healthy from the childhood itself. Hm? So, this topic, good or bad body, hm, with complete organs, so, what is the basis for that? It is a soul, isn’t it? The soul doesn’t enter into the womb first. But through its vibrations, as are the actions of the soul, on the basis of those actions (Baba said to someone – I can’t see small letters.) their body continues to be formed [in the womb]. So, this body is perishable. The imperishable thing is forever. Body is created and then destroyed. And the soul is always there.

So, first consider yourself to be a soul. And remember the Father of the soul, the Supreme Father. So, if you don’t consider yourself to be even a soul, then it will be said that he is a wild animal. It is because when you consider yourself to be a soul, then will the animals consider themselves to be souls? Hm? They are animals only, aren’t they? This is why they do not understand this. What? The soul. So, you should consider yourself to be a soul. So, it is correct. Hm? It is because there is a forest in this world. Only the animals live in the forest. You cannot consider yourself to be soul at all because these people who live outside do not know at all as to what they are. So, those worldly human beings are like wild animals. So, it is such a difficult task to make them deities from human beings. And for this the Father comes and narrates so many tacts that consider yourself to be a soul. Practice. You have been considering yourself to be a body since 63 births. So, you have been habituated to considering, remembering yourself to be a body. The intellect is diverted towards the bodily beings again and again. Now you have to become deities from human beings. Hm? It is even said – It does not take time to transform from human being to deity. So, you will become a deity only when you practice because do the deities consider themselves to be a soul forever or do they consider themselves to be a body? Hm? They remain forever in soul conscious stage.

So, it is said for the human beings, hm, today’s human beings that they are worse than monkeys. Hm? It is because the intellect of the monkeys does not remain stable. Hm? Their eyes will look here and there. So, they are not even considered to be like monkeys. It is said – Worse than monkeys. So, human beings have been placed in a category worse than monkeys. Achcha, now tell as to who is more monkey, worst among the human beings? Hm? Who is it? This knowledge of omnipresence [of God] that has been invented; it has been invented, hasn’t it been? So, this has caused a lot of harm children. It is because when I come in this world I come in one person (ekvyaapi). And they have prepared pictures as well. It is said that He came in the Chariot of Arjun. And the body is called a Chariot, isn’t it? So, He came only in one Chariot, didn’t He? They said that He is omnipresent (sarvavyaapi). So, look, will the intellect, mind become focused by remembering Him in one or will it become focused by calling Him omnipresent? Hm? By calling Him omnipresent, everyone’s intellect has been scattered. So, so much harm has been caused. Hm? Look, such a loss has been caused to Bhaarat! Hm? And look, such ones are then worshipped here on the path of Bhakti. Hm? Whom do they worship? Hm? Arey, those who described Him to be omnipresent that He is in me, He is in you, He is omnipresent. So, look, people sit and worship such persons who cause ruin. They worship the Sanyasis, don’t they? They respect the pundits, scholars, acharyas so much! So, now the Father sits and explains. In whom does He sit and explain? Hm? He sits in one and explains. Although He narrates through many, but children He sits in one and explains. And ultimately all those who have described Him to be omnipresent will understand.

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 08 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2699, दिनांक 13.11.2018
VCD 2699, Dated 13.11.2018
प्रातः क्लास 21.9.1967
Morning Class dated 21.9.1967
VCD-2699-extracts-Bilingual

समय- 00.01-21.43
Time- 00.01-21.43


आज का प्रातः क्लास है - 21.9.1967. सद्गुरुवार को रिकार्ड चला - तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो, तुम्हीं हो बंधु, सखा तुम्हीं हो। मीठे-मीठे रूहानी बच्चों ने ये गीत सुना। पूछा - किसने सुना? हँ? क्या जवाब मिलेगा? किसने सुना? हँ? बच्चों ने सुना। मीठे बच्चों ने सुना। जितनी ब्रह्माकुमार-कुमारियां मीठे होते हैं ना ऐसे मीठे बच्चों ने सुना। हँ? कैसे मीठे बच्चों ने गीत सुना? हँ? ब्रह्माकुमार-कुमारियां ब्रह्मा का पार्ट तो ... है ही कृष्ण का पार्ट। क्रिश्चियन्स से राशि मिलाई जाती है। बाहर से मीठे-मीठे, अन्दर से काले-काले। मीठे-मीठे बच्चों ने सुना? हाँ। रूहानी मीठे-मीठे बच्चों ने सुना। कैसे बच्चों ने सुना? सिर्फ मीठे नहीं, मीठा तो पता नहीं लगेगा। ऊपर से मीठे-मीठे बोल देते हैं। और अन्दर से खार भरा पड़ा है। मीठे-मीठे रूहानी बच्चों ने गीत सुना। रूहानी बच्चों ने इस जिस्मानी कर्मेन्द्रियों से सुना। हँ? क्या कहा? सुना तो लेकिन काहे से सुना? हँ? क्योंकि बाबा जब मीठे-मीठे रूहानी बच्चे कहते हैं तो वो तो बिन्दु आत्मा देखते हैं। शिव बाप क्या देखते हैं? बिन्दु आत्मा।

तो इन रूहानी बच्चों ने, हँ, इस जिस्मानी कर्मेन्द्रियों से सुना। ये कौनसी जिस्मानी कर्मेन्द्रियां हैं जिनसे सुना बच्चों ने? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) ये आँखें सुनती हैं? आँखों से इशारा कर दिया। ये कान, स्थूल कान सुनते हैं। अच्छा? हाँ, कर्मेन्द्रियों से सुना। क्या? जिस्मानी कर्मेन्द्रियों से। हँ? सही-सही बताओ किससे सुना? हँ? कर्मेन्द्रियां जो हैं वो जड़ हैं या चैतन्य हैं? हँ? जड़ हैं। तो ये जड़ कैसे सुनाएंगी? बिन्दु शिव तो सुना ही नहीं सकता। तो ये कर्मेन्द्रियां कौनसी हुईं? कर्मेन्द्रिय नहीं कहा। एक कर्मेन्द्रिय। (किसी ने कुछ कहा।) आत्मा के द्वारा सुना? (किसी ने कुछ कहा।) आत्मा से सुना? आत्मा तो बिन्दी है। वो कैसे सुनाएगी? हँ? सुनना-सुनाना जड़ इन्द्रियों से होता है। यही ना। हँ? हाँ? नहीं समझ में आ रहा है बाबा क्या कहना चाहते हैं? (किसी ने कुछ कहा।) मन? मन से सुना? अच्छा? ठीक है मन का कंट्रोल कर्मेन्द्रिय; यहाँ तो कर्मेन्द्रियों की बात हो रही है ना। मन की बात थोड़ेही हो रही है? मन कर्मेन्द्रिय है? कर्मेन्द्रियों से सुना। नहीं समझ में आ रहा है। अरे?

भगवान का विराट रूप दिखाते हैं ना। तो उसमें कान कौन-कौन हैं जिनसे सुना? एक लेफ्टिस्ट कान एक राइटियस कान। अब तो बता दो इतना क्लीयर कर दिया।
(किसी ने कुछ कहा।) राम-कृष्ण की आत्माओं से सुना। कृष्ण वाली आत्मा लेफ्टिस्ट कहेंगे कि राइटियस कहेंगे? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) लेफ्टिस्ट। क्यों भई? ऐसे क्यों कह दिया? मीठा नहीं बोलती थी क्या? हँ? जो सुनने-सुनाने वाली कर्मेन्द्रिय होती है कान, हँ, महाभारत में नाम दे दिया कर्ण। कर्ण माने कान। तो मीठी नहीं थी? हँ? मीठी कर्मेन्द्रियों से नहीं सुना? हँ? हाँ। हाँ, पक्ष में चाहे किसके भी हो। लेकिन मिसाल दिया कि राइटियस है कि लेफ्टिस्ट है? लेफ्टिस्ट कर्मेन्द्रियां जो होती हैं वो, वो ब्रह्मा बाबा थी ना। हँ? ब्रह्मा बाबा को बताया ना लेफ्टिस्ट। तो ब्रह्मा बाबा कृष्ण की आत्मा है ना। है ना? हाँ। सतयुग में 16 कला संपूर्ण कृष्ण बनके जन्म लेगी। तो वो आत्मा; कृष्ण वाली आत्मा, किससे राशि मिलाई जाती है? क्रिश्चियन्स से राशि मिलाई जाती है। तो वो कैसे होते हैं? हँ? वो कैसे होते हैं? लेफ्टिस्ट होते हैं। कैसे? लेफ्टिस्ट कैसे? हँ? लेफ्टिस्ट होते हैं? कैसे? लेफ्ट तो अच्छा नहीं माना जाता। हँ? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ। अन्दर बाहर एक नहीं हैं। यही तो कहना चाहते? हाँ। विदेशी, विधर्मी हैं। न स्वदेशी हैं न स्वधर्मी हैं। विदेशी भी हैं और विधर्मी भी हैं।

तो विदेशी-विधर्मी तो उतने अच्छे नहीं होते। उनसे तो अच्छे स्वदेशी हों और स्वधर्मी हों। जैसे बुद्ध धर्म क्या है? इस्लाम धर्म क्या है? स्वदेशी भी है और स्वधर्मी भी है। तो वो नहीं चाहिए? विदेशी विधर्मी नहीं चाहिए। हाथ हिलाय दिया नहीं चाहिए। ठीक है नहीं चाहिए। ठीक है।
(किसी ने कुछ कहा।) इस्लाम है? अच्छा? हाँ, विधर्मी तो है विदेश में भी है। तो ठीक है। वो क्रिश्चियन्स जो निकले हैं, वो कौनसे धर्म से निकले? कौनसे धरमवालों ने क्रिश्चियन्स को जनम दिया? हँ? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, इस्लाम नहीं, देवता वालों ने जन्म दिया। हँ? देवता थे। फिर, देवताएं तो द्वापर में आ गए तो इस्लामी बन गए। कहाँ रहे देवता? इस्लामी कैसे स्वदेशी-स्वधर्मी होंगे? इस्लामियों को कौन बता रहा स्वधर्मी-स्वधर्मी? ना। उनको स्वदेशी और स्वधर्मी थोड़ेही बताया इस्लामियों को? ये तो इस्लाम धरम जो है वो इब्राहिम आता है भारतवर्ष में। भारतवर्ष में वो आत्मा, सोल उतरती है क्योंकि भारत में होते हैं देवी-देवताएं। कोई विदेश में होते हैं क्या? नहीं। तो भारत में उतरती हैं। लेकिन उतरती है का मतलब ये थोड़ेही कि भारत में जन्म लिया तो भारतीय हो गए। हँ? उनका सारा जीवन चरित्र देखा जाएगा ना उन आत्माओं का। हँ? वो विदेश में अपना राज्य जमाती हैं कि भारत में जमाती हैं? भारतवासी तो उन्हें भगाय देते हैं। भगाते हैं कि नहीं? क्यों? क्यों भगाय देते हैं? कुछ कारण होगा। क्या कारण? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, व्यभिचारी होते हैं। क्या? क्या? वि अभि चारी। वि माने विशेष। अभि माने चारों तरफ के। आचरण करने वाले। ऐसे नहीं इधर ही आचरण करें, उधर ही करें, उधर ही करें। आचरण जानते हैं क्या होता है? कर्मेन्द्रियों से जो कर्म किये जाते हैं उनको कहते हैं आचरण। तो लेफ्टिस्ट हुए या राइटियस हुए? लेफ्टिस्ट हो गए।

तो वो उनकी औलाद कौनसा धरम बनता है? हँ? कुछ नहीं? कुछ नहीं बता रहे।
(किसी ने कुछ कहा।) बौद्धी धरम उनकी औलाद बनता है? अच्छा? बौद्धियों ने उनको फालो किया? हँ? बौद्धियों ने ज्यादा फालो किया? हँ? इस्लामियों को किसने फालो किया? क्रिश्चियन्स ने ज्यादा फालो किया। हँ। क्योंकि बौद्धी कहें तो बौद्धी धरम तो भारतीय है। भारतीय धरम जो हैं पवित्रता को, ब्रह्मचर्य को विशेष महत्व देते हैं या कम महत्व देते हैं? हँ? कम देते हैं? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, वो तो बहुत महत्व देते हैं। भारतीय धर्म हैं तो देते हैं कि नहीं? देते हैं। जो विदेशी धर्म हैं वो ब्रह्मचर्य को, अव्यभिचार को उतना महत्व नहीं देते। हँ? एक शादी की। फटाक से दूसरी शादी कर ली। तीसरी कर ली। चौथी कर ली। और क्रिश्चियन्स में तो कोई सवाल ही नहीं। मुसलमानों में, इस्लामियों में तो फिर भी लिमिट है। कितनी लिमिट है? हाँ। चार की लिमिट है। चार बार करो। हँ? तो चार शादियां कर लो। ठीक है। लेकिन क्रिश्चियन्स? वो तो उनको फालो करने वाले, उन्होंने तो लिमिट ही तोड़ दी। तो वो पूरे लेफ्टिस्ट हो गए। और कृष्ण ने किसको फालो किया? इस्लामियों को फालो किया या क्रिश्चियन्स को फालो किया? क्रिश्चियन्स को फालो किया। तो जो क्रिश्चियन्स को फालो किया तो लेफ्टिस्ट हुए, पक्के लेफ्टिस्ट हुए कृष्ण कन्हैया जी महाराज सतयुग के 16 कला संपूर्ण कि राइटियस हुए? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, लेफ्टिस्ट हुए।

तो दिखाया है कि जो कर्ण है ना - कर्ण माने कान। किसकी औलाद था? हँ? कर्ण किसकी औलाद था?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, कुछ पता नहीं। हँ? (किसी ने कुछ कहा।) कर्ण कुमारी का औलाद था? हाँ, बिल्कुल था। कुंती कुमारी थी ना। है ना। कुंती कुमारी थी। और कृष्ण, कृष्ण जो है वो भी क्या हुआ? किसकी औलाद? हँ? किसकी औलाद? (किसी ने कुछ कहा।) वसु? वसु? हाँ। वसु कह सकते हैं। देवकी की औलाद। देवताओं की अम्मा। हाँ। सूर्या भी कह सकते हैं सूर्यपत्नी। ठीक है। तो जो ज्ञान सूर्य है और उसकी पत्नी है वो तो भारत में ज्ञान सूर्य तो किसको कहा जाता है? हँ? शिव ज्ञान सूर्य है ना। ज्ञान की रोशनी सबसे ज्यादा देता है ना। शिव की आत्मा। तो उसका बच्चा कौन है? हँ? शंकर। उसका नाम गीता में दे दिया विवस्वत्। है राम वाली आत्मा। तो राम को सूर्यवंशी कहते हैं ना। इसलिए विवस्वन नाम हो गया। हँ? तो वि माने विशेष। हँ? वसु माने धन-संपत्ति, जिनके पास बहुत हो, उन्हें कहते हैं वसु। विवस्वान। तो सबसे ज्यादा धन-संपत्ति तो शिव के पास। तो वसु हो गया ना। हुआ कि नहीं? और उसका बच्चा हुआ बड़े ते बड़ा बच्चा; कौन? हँ? वसु का बच्चा? अरे? वसु तो भगवान है ना। तो उसका बच्चा कौन हुआ? देवता। वासुदेव नहीं वसुदेव। क्या? लेकिन शास्त्रकारों ने नाम डाल दिया; किसका? हँ? जो कृष्ण के बाप का नाम डाल दिया वसुदेव। कौनसे कुल का था? कहते हैं यादव कुल का था। तो शंकर यादव कुल का हुआ कि नहीं? हँ?

तो वसुदेव माने देवता तो है। भगवान तो नहीं कहेंगे। हमेशा भगवान रहता है? हँ? भगवान तो नहीं रहता। क्या हो जाता है? शैतान हो जाता है कि नहीं? अरे? अरे? दुनिया को जो वसु माने धन-संपत्ति, देव माने देता है। वो शैतान भी बनता है कि नहीं आखरी जनम में? शंकर। अरे! शंकर वाली आत्मा दुनिया में ऐसे कोई, दुनिया में ऐसे कोई, अरे, ऐसा कोई है दुनिया में जो सबसे बड़ा शैतान माने रावण बनता है? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) ऐसे कोई बात नहीं जो तेरे ऊपर लागू न हो। वो तो ठीक है। शंकर के ऊपर; शिव का बच्चा है ना। उसके ऊपर दुनिया की सारी बातें लागू होती हैं। क्या? उसे कृष्ण कह सकते हैं कि नहीं? हां। और भगवान का बच्चा है, हँ, तो कृष्ण बच्चा भी है। कृष्ण माने आकर्षित करने वाला। सारी दुनिया को, सारी दुनिया की आत्माओं को, मनुष्यात्माओं को आकर्षित करता है कि नहीं? आकर्षित करता है।

तो इस दुनिया में प्रैक्टिकल पार्ट बजाने वाला सूर्य कौन हुआ? हँ? अरे?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, राम तो त्रेता का कहा जाता है। हाँ, शिवबाबा कह दो। तो प्रैक्टिकल पार्ट बजाने वाला शिवबाबा। लेकिन शिवबाबा क्या 16 कला संपूर्ण सतयुग वाले कृष्ण को जन्म देता है? हँ? देता है? अच्छा? वो दो नंबर का शिवबाबा होता है जो सतयुग में जन्म देता है कि अव्वल नंबर का असली बाबा होता है? क्या? बात किसकी हो रही है? तो शिवबाबा की बात बताई कि जिसे हम शिवबाबा कहते हैं, हँ, जिसका बच्चा कृष्ण बताया ना, तो सतयुग में कृष्ण बच्चा होगा 16 कला संपूर्ण। शिवबाबा का। जिसे तुमने शिवबाबा कहा। तो शिवबाबा, दो नंबर का शिवबाबा डुप्लिकेट या अव्वल नंबर का बाबा शिवबाबा, ओरिजिनल क्योंकि शिव बाप कहते हैं कि मैं तो बाप ही हूँ आत्माओं का। मेरा दूसरा कोई संबंध नहीं। जब शरीर में प्रवेश करता हूँ तो मैं ग्रैण्डफादर, शिवबाबा भी बन जाता हूँ।

तो अब बताओ, शिवबाबा का बच्चा बताया संगमयुगी कृष्ण 16 कला संपूर्ण। वो तो वो खुद ही हो गया। कौन? शंकर वाली आत्मा। जिसे पट्ट सोया हुआ पड़ा दिखाते हैं। त्रिशूल और डमरू और ये हाथ में पकड़े पड़ा हुआ है। सोता है तो भी हाथ में पकड़े हुए; छोड़ता नहीं। हँ? हाँ। तो बच्चे के रूप में दिखाते हैं कि नहीं? शिव का बच्चा है। लेकिन वो शिव का जो पार्ट सोता हुआ दिखाया है, हाथ में पकड़ा हुआ है त्रिशूल को; त्रि माने तीन, शूल माने बाण। तीन तरह के ज्ञान बाण। तो वो पार्ट वास्तव में शिवबाबा का है, ओरिजिनल शिवबाबा या डुप्लिकेट शिवबाबा का है? हँ? किसका पार्ट है जो सोया बच्चा पड़ा है? शंकर के रूप में माथे पे चन्द्रमा भी दिखाया है, हँ, त्रिशूल भी दिखाया है, डमरू भी दिखाया है। हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) डुप्लिकेट? अच्छा? संगमयुग में जो कृष्ण बच्चा है वो डुप्लिकेट है? अँहँ? देव नहीं पूछ रहे? शिवबाबा पूछ रहे? शिवबाबा को, जो असली शिवबाबा है, उसको देव, देवता कहेंगे या भगवान कहेंगे? क्या कहेंगे? हँ? हाँ, ओरिजिनल तो सोता ही नहीं। अरे भई, कृष्ण की बात हो रही है। संगमयुगी कृष्ण की बात हो रही है ना। तो संगमयुगी कृष्ण जो शंकर को दिखाया है, सो रहा है त्रिशूल और डमरू हाथ में ले करके वो, वो जो बच्चा है, बच्चाहीबुद्धि कहेंगे ना। सो रहा है माने अज्ञान नींद में सो रहा है ना। तो उसके द्वारा शंकर का पार्ट कौन बजाता है? कौनसी आत्मा? (किसी ने कुछ कहा।) हाँ, शिव ही तो बजाता है ना। तो वो शिवबाबा कहा जाता है।

अब भले चित्रकारों ने चित्र बनाया। तो वो चित्र जिस चित्रकार ने बनाया और जो देखते हैं भई किसका चित्र है तो क्या कहेंगे? शिवबाबा का चित्र है। ऐसे ही कहेंगे ना। उन्हें तो ये पता ही नहीं है कि वो डुप्लिकेट शिवबाबा है कि असली शिवबाबा है। और हमें तो पता चल गया कि वो जो पार्टधारी है, संगमयुग में होता है। सतयुग में तो, त्रेता में तो, द्वापर में तो वो उस तरह का होता ही नहीं बच्चे के रूप में। होता है क्या? नहीं। तो वो जो शंकर के रूप में पार्टधारी है कि सोते हुए भी बुद्धि रूपी हाथ में त्रिशूल पकड़ा हुआ है। और डमरू भी लटका हुआ है। हँ? वो पार्ट कौनसी आत्मा का है? हँ? शिवबाबा का है। तो वो डुप्लिकेट शिवबाबा का है या असली शिवबाबा का है? इसकी बुद्धि ही नहीं चलती। ऐसे देख रहा है आँखें फाड़-फाड़ के।
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, ओरिजिनल शिवबाबा का पार्ट है वो। क्या? कहते हैं देव देव महादेव। वो भी मैं ही हूँ। वो तो असली हो गया संगमयुग में। अब? सतयुग में जो कृष्ण को जन्म देता है वो असली शिवबाबा है या शिव समान माना डुप्लिकेट है? जैसे कोई कागज़ की कॉपी निकाली जाती है, तो डुप्लिकेटर में से निकाली जाएगी तो क्या कहेंगे? डुप्लिकेट कि ओरिजिनल? डुप्लिकेट। तो शिव समान को डुप्लिकेट कहेंगे (या) ओरिजिनल कहेंगे? क्या कहेंगे? डुप्लिकेट कहेंगे ना। हां।

Today’s morning class is dated 21.9.1967. The record played on Thursday (Sadguruwaar) was – Tumhii ho mata, pita tumhi ho, tumhi ho bandhu, sakhaa tumhii ho (You are my mother as well as Father; you are my relative and you are my friend as well). Sweet-sweet, spiritual children heard this song. It was asked – Who heard? Hm? What reply will be received? Who heard? Hm? Children heard. Sweet children heard. The Brahmakumar-kumaris who are sweet, such sweet children heard. Hm? What kind of sweet children heard the song? Hm? Brahmakumar-kumaris; Brahma’s part is Krishna’s part. The zodiac signs are matched with that of the Christians. Externally sweet, internally dark. Did sweet-sweet children hear? Yes. Spiritual, sweet-sweet children heard. What kind of children heard? Not just sweet; one will not be able to know about sweetness. Some speak sweetly outwardly. And there is salt (anger) filled inside. Sweet-sweet, spiritual children heard the song. Spiritual children heard through these physical organs of action. Hm? What has been said? You did hear, but through what did you hear? Hm? It is because when Baba says ‘sweet, sweet, spiritual children’ then He observes the point-like soul only. What does Father Shiv observe? Point-like soul.

So, these spiritual children, hm, heard through these physical organs of action. Which are these physical organs of action through which the children heard? Hm?
(Someone said something.) Do these eyes hear? You made a gesture through the eyes. These ears, the physical ears hear. Achcha? Yes, you heard through the organs of action. What? Through the physical organs of action. Hm? Tell correctly as to how did you hear? Hm? Are the organs of action non-living or living? Hm? They are non-living. So, how will these non-living things narrate? Point-like Shiv cannot narrate at all. So, which are these organs of action? He did not say organs. One organ. (Someone said something.) Did you listen through the soul? (Someone said something.) Did you listen through the soul? The soul is a point. How will it narrate? Hm? Hearing and narrating takes place through the non-living organs. This is true, isn’t it? Hm? Yes? Are you not able to understand what Baba wants to tell? (Someone said something.) Mind? Did you hear through the mind? Achcha? It is correct that the mind controls the organs of action; here, the topic of the organs of action is being discussed, isn’t it? Is the topic of the mind being discussed? Is mind an organ of action? He heard through the organs of action. You are not able to understand. Arey?

The gigantic form of God is depicted, isn’t it? So, who all are the ears in it through which He heard? One is a leftist ear and one is a righteous ear. Tell at least now after it has been made so clear.
(Someone said something.) He heard through the souls of Ram and Krishna. Will the soul of Krishna be called leftist or righteous? Hm? (Someone said something.) Leftist. Why brother? Why was it said so? Did it not used to speak sweetly? Hm? The organ of action which listens and narrates, the ear, hm, which was named Karna in the Mahabharata. Karna means ear. So, was it not sweet? Hm? Did He not hear through the sweet organs of action? Hm? Yes. Yes, he may have been on any side. But an example was given that whether he is righteous or leftist? Leftist organ of action was Brahma Baba, wasn’t he? Hm? Brahma Baba was described to be leftist. So, Brahma Baba is the soul of Krishna, isn’t he? Isn’t he? Yes. He will get birth in the Golden Age as Krishna perfect in 16 celestial degrees. So, that soul; with whom is the zodiac sign of the soul of Krishna matched? The zodiac sign is matched with the Christians. So, how are they? Hm? How are they? They are leftist. How? How are they leftist? Hm? Are they leftist? How? Left is not considered to be good. Hm? (Someone said something.) Yes. They are not one inside out. Do you want to say this? Yes. They are videshis, vidharmis. They are neither swadeshi nor swadharmi. They are videshis as well as vidharmis.

So, the videshis, vidharmis are not so good. Better than them is to become swadeshis and swadharmis. For example, what is Buddhism? What is Islam? It (Buddhism) is swadeshi as well as swadharmi. So, don’t you want that? You don’t want videshi-vidharmi. You waved your hand to indicate that I don’t want. Okay, you don’t want. Okay.
(Someone said something.) Is it Islam? Achcha? Yes, it is vidharmi and also in videsh (abroad). That is correct. From which religion did those Christians emerge? People of which religion gave birth to Christians? Hm? (Someone said something.) Yes, not Islam, the deities gave birth. Hm? They were deities. Then, when the deities came to the Copper Age, then they became Islamic people. Did they remain deities? How will Islamic people be swadeshi-swadharmi? Who is describing Islamic people to be swadharmi-swadeshi? No. Were they, were the Islamic people described as swadeshi-swadharmi? As regards Islam, Ibrahim comes in the Indian region. That soul descends [from the Soul World] in the Indian region because there are deities in India. Do they exist in the foreign countries? No. So, they descend in India. But ‘it descends [in India]’ doesn’t mean that they became Indians just because they got birth in India. Hm? The entire life’s character of those souls will be observed, will it not be? Hm? Do they set up their kingdom in the foreign country or in India? The residents of India chase them away. Do they chase them away or not? Why? Why do they chase them? There must be a reason. What is the reason? (Someone said something.) Yes, they are adulterous (vyabhichaari). What? What? Vi abhi chaari. Vi means vishesh (special). Abhi means ‘those who act in all directions’. It is not as if they act in this side only, they act in that side only or they act in that side only. Do you know what is meant by aacharan (activity)? Whatever actions are performed through the organs of action are called activity. So, are they leftist or righteous? They are leftist.

So, which religion becomes their progeny? Hm? Nothing? You are not telling anything.
(Someone said something.) Does Buddhism become their progeny? Achcha? Did the Buddhists follow them? Hm? Did the Buddhists follow them more? Hm? Who did Islamic people follow? Christians have followed more. It is because if you say Buddhism then Buddhism is Indian. Do the Indian religions give special importance to purity, to celibacy (brahmacharya) or do they give less importance? Hm? Do they give less [importance]? (Someone said something.) Yes, they give a lot of importance. If they are Indian religions do they give or not? They give. The foreign religions do not give that much importance to celibacy, to non-adultery. Hm? They marry once. They get married for the second time immediately. They marry for the third time. They marry for the fourth time. And there is no question at all among the Christians at all. There is however a limit among the Muslims, among the Islamic people. What is the limit? Yes. There is a limit of four. Marry four times. Hm? So, marry four times. It is okay. But the Christians? Those who follow them have broken the limit itself. So, they are complete leftists. And whom did Krishna follow? Did they follow the Islamic people or did they follow the Christians? They followed the Christians. So, if he followed the Christians, is he leftist, firm leftist, Krishna Kanhaiyya Ji Maharaj of Golden Age perfect in 16 celestial degrees or is he righteous? (Someone said something.) Yes, he is a leftist.

So, it has been shown that Karna; Karna means ears. Whose child was he? Hm? Whose child was Karna?
(Someone said something.) Yes, you don’t know anything. Hm? (Someone said something.) Was Karna the son of a virgin? Yes, he definitely was. Kunti was a virgin, wasn’t she? Is it not? Kunti was a virgin. And what was Krishna as well? Whose child? Hm? Whose child? (Someone said something.) Vasu? Vasu? Yes. You can call him Vasu. Child of Devaki. Mother of deities. Yes. You can call her Suryaa also; wife of Surya (Sun). It is correct. So, the Sun of Knowledge and his wife; who is called the Sun of Knowledge in India? Hm? Shiv is the Sun of Knowledge, isn’t He? He gives the most light of knowledge, doesn’t He? The soul of Shiv. So, who is His child? Hm? Shankar. He has been named Vivasvat in the Gita. Actually it is the soul of Ram. So, Ram is called Suryavanshi, isn’t he? This is why he got the name Vivaswan. Hm? So, Vi means vishesh (special). Hm? Vasu means wealth and property; those who have a lot are called Vasu. Vivasvaan. So, Shiv has the maximum wealth and property. So, He is Vasu, isn’t He? Is He or is He not? And His child is the eldest child; who? Hm? Vasu’s child? Arey? Vasu is God, isn’t He? So, who is His child? Deity. Not Vaasudev; Vasudev. What? But the writers of the scriptures have named; whose? Hm? The name of Krishna’s Father has been coined as Vasudev. To which clan did he belong? It is said that he belonged to the Yadava clan. So, does Shankar belong to the Yadava clan or not? Hm?

So, Vasudev means that he indeed is a deity. He will not be called God. Does he remain God always? Hm? He does not remain God. What does he become? Does he become Satan or not? Arey? Arey? The one who gives vasu i.e. wealth and property to the world. Does he become Satan also in the last birth or not? Shankar. Arey! The soul of Shankar; is there anyone, is there anyone in the world who becomes the biggest Satan, i.e. Ravan? Hm?
(Someone said something.) There is no such thing that is not applicable to you. That is correct. To Shankar; He is Shiv’s child, isn’t he? All the topics of the world apply to him. What? Can he be called Krishna or not? Yes. And he is the child of God, hm, so, Krishna is a child as well. Krishna means the one who attracts. Does he attract the souls, the human souls of the entire world, the entire world or not? He attracts.

So, who is that Sun who plays a practical part in this world? Hm? Arey?
(Someone said something.) Yes, Ram is said to belong to the Silver Age (Treta). Yes, call him ShivBaba. So, ShivBaba, who plays a part in practical. But does ShivBaba give birth to the Krishna of the Golden Age perfect in 16 celestial degrees? Hm? Does he give birth? Achcha? Is the one who gives birth in the Golden Age number two ShivBaba or number one true ShivBaba? What? Whose topic is being discussed? So, the topic of ShivBaba was mentioned that the one whom we call ShivBaba, hm, whose child was said to be Krishna, so, there will be child Krishna of ShivBaba perfect in 16 celestial degrees in the Golden Age. The one whom you called ShivBaba. So, as regards ShivBaba, is it number two duplicate ShivBaba or number one original Baba, ShivBaba because Father Shiv said that I am the Father of the souls. I don’t have any other relationship. When I enter in a body, then I also become grandfather, ShivBaba as well.

So, now tell, ShivBaba’s child was said to be Confluence Age Krishna perfect in16 celestial degrees. That is he himself. Who? The soul of Shankar. The one who is shown to be lying on the floor. He is holding Trishul (trident) and Damru (a small drum) in his hands. Even while sleeping he holds them in his hands; he does not leave. Hm? Yes. So, is he shown in the form of a child or not? He is Shiv’s child. But that part of Shiv which is shown to be sleeping and holding Trishul in his hands; tri means three, shool means arrow. Three types of arrows of knowledge. So, is that part actually of ShivBaba, the original ShivBaba or of duplicate ShivBaba? Hm? Whose part is of the child who is sleeping? In the form of Shankar the Moon has also been shown on the forehead, hm, Trishul has also been shown, and a damru has also been shown. Hm?
(Someone said something.) Duplicate? Achcha? Is the child Krishna in the Confluence Age duplicate? Amhm? Is He not asking about the deity? Is He asking about ShivBaba? Will ShivBaba, the true ShivBaba be called a deity or God? What will he be called? Hm? Yes, the original one doesn’t sleep at all. Arey brother, the topic of Krishna is being discussed. The topic of the Confluence Age Krishna is being discussed, isn’t it? So, the Confluence Age Krishna who has been shown as Shankar and is sleeping with a Trishul and Damru in his hands, the child will be said to have a child-like intellect only, will he not be? He is sleeping, i.e. sleeping in the sleep of ignorance, isn’t he? So, who plays the part of Shankar through him? Which soul? (Someone said something.) Yes, Shiv Himself plays, doesn’t He? So, He is called ShivBaba.

Well, although the painters painted the picture. So, the painter who painted that picture and who see that brother, whose picture is it, then what will you say? It is ShivBaba’s picture. They will say like this only, will they not? They do not know at all whether he is a duplicate ShivBaba or true ShivBaba? And we have come to know that that actor exists in the Confluence Age. He is not at all like a child in that form in the Golden Age, in the Silver Age, in the Copper Age. Does he exist in that form? No. So, he is the actor in the form of Shankar that he has held the Trishul in his intellect like hand even while sleeping. And the damru is also hanging. Hm? Which soul’s part is it? Hm? It is of ShivBaba. So, is it of the duplicate ShivBaba or of the true ShivBaba? The intellect of this person doesn’t work at all. He is looking with his eyes wide open.
(Someone said something.) Yes, it is the part of original ShivBaba. What? It is said – Dev Dev Mahadev. I alone am that as well. That is the true one in the Confluence Age. Now? Is the one who gives birth to Krishna in the Golden Age the true ShivBaba or is he equal to Shiv, i.e. duplicate? For example, a copy of a paper is taken, so, when it taken out of the duplicator, what will it be called? Duplicate or original? Duplicate. So, will the one equal to Shiv be called duplicate or original? What will he be called? He will be called duplicate, will he not be? Yes.
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 10 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2700, दिनांक 14.11.2018
VCD 2700, Dated 14.11.2018
प्रातः क्लास 21.9.1967
Morning Class dated 21.9.1967
VCD-2700-extracts-Bilingual

समय- 00.01-20.17
Time- 00.01-20.17


प्रातः क्लास चल रहा था - 21.9.1967. सतगुरुवार को पहले पेज के मध्यांत में बात चल रही थी, मध्यादि में कि अभी रावण राज्य तो सारी पृथ्वी पर है। राम राज्य सारी पृथ्वी पर तो नहीं है। क्योंकि तुम विश्व के मालिक बनते हो तब तो आसमान, धरती, सूर्य, वगैरा जो भी हैं, वो सब तुम्हारे हाथ में आ जाते हैं। तो उसको कहेंगे राम राज्य। सो भी तुम सारे विश्व के मालिक बनते हो। और रावण राज्य को कहें तो भी तुमको ही कहेंगे विश्व के मालिक बनते हो। हाँ, ये समझ की बात जरूर है जो बच्चों को समझाई गई है कि जब रावण राज्य है तो बहुत हैं। हाँ, 500 करोड़। और जब राम राज्य है तब थोड़ेही। फिर आहिस्ते-आहिस्ते करके वृद्धि को पाते हैं। और वृद्धि को तो रावण राज्य में भी पाते हैं। वहाँ तेजी से वृद्धि होती है क्योंकि ऊपर से आत्माएं ऊँची स्टेज से आती रहती हैं। परमधाम से आती हैं ना, परे ते परे धाम। और फिर रावण राज्य में बहुत आ जाते हैं। क्यों आ जाते हैं? क्योंकि विकार बढ़ जाते हैं ना। सब मनुष्य विकारी बन जाते हैं। और रामराज्य में तुम निर्विकारी मनुष्य बनते हो।

तो सारी कहानी मनुष्यों की है ना। जानवरों के लिए तो नहीं कहेंगे। नहीं। उनकी कहानी नहीं। फिर इसमें कहेंगे कि राम भी बेहद का मालिक तो रावण भी बेहद का मालिक। ठीक है ना। अभी तो ये बच्चे समझते हैं कि इतने मनुष्य तो रावण भी बेहद का मालिक। ठीक है ना। अभी तो ये बच्चे समझते हैं कि इतने मनुष्य तो सतयुग में नहीं होते। वहाँ सतयुग में तो थोड़े होते हैं। परन्तु जब तुम्हारा रामराज्य होता है, तो कितने होते हैं? हँ? सतयुग में तो थोड़े होते हैं। अच्छा? रामराज्य में तुम विश्व के मालिक नहीं बनते हो? हँ? अभी तो कहा – रावण का बेहद का मालिक बनता है। हँ? तो तुम बेहद के मालिक नहीं बनते हो क्या? सारी विश्व की राजाई तुमको नहीं मिलती है? हँ? ये तो है कि सतयुग में तो थोड़े होते हैं। बाकि बाप जब आते हैं, तो रामराज्य स्थापन करते हैं ना। हँ? तो क्या तुम बच्चों का राज्य बेहद का राज्य नहीं है? हँ? नहीं है? हँ? साढ़े चार लाख के ऊपर नहीं है? हँ? सारे विश्व के ऊपर राज्य। तब तो कहा जाता है विश्वनाथ, जगन्नाथ। बाकि सतयुग में तो इतने मनुष्य नहीं होते हैं।

और इस समय में बहुत होते हैं कि अनेक धर्म होते हैं। तो तुम्हारा फुल कंट्रोल कौनसे धरम पर होता है? और जिन पर कंट्रोल नहीं होता है तो क्या वो मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा नहीं लेते तुमसे? हँ? बाप आए हैं तो सारी दुनिया को मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा देते हैं ना। तो बाप साकार में आए हैं। जिस साकार में आते हैं उसके द्वारा ही तो मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा मिलता है। भले अनेक धर्म हैं। तो आगे-पीछे कंट्रोल में आते हैं या नहीं आते हैं? हँ? हाँ। तो ये हुआ कि विनाश बरपा होता है और विनाश आत्माओं का तो होता नहीं। देह से कर्म करते हैं तो देह का विनाश होता है। गाया हुआ है अनेक धर्म विनाश। एक सतधर्म की स्थापना। हँ? और उसी की पालना। तो अभी तुम जान गए हो कि जिसकी पालना होती है उनकी जनसंख्या कितनी होती है? हँ? उनकी जनसंख्या साढ़े चार लाख। हँ? कि नौ लाख?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, होंगी वो आत्माएं लेकिन प्रवेश करके पार्ट बजाएंगी ना। उनका अपना शरीर तो नहीं होगा ना।

तो कहेंगे इस समय आसुरी अनेक धरम हैं। ढ़ेर के ढ़ेर धर्म हैं। इसलिए तुम बच्चों को गीता में भी बताया सर्व धर्मान् परित्यज्य। क्या? सब धर्मों को छोड़ दो। मामेकम शरणम ब्रज। सब धर्मों को छोड़ेंगे तो उनके धरमपिताओं को भी छोड़ना पड़े। हँ? सिर्फ मेरी शरण में आ जा। तो सब तो नहीं आवेंगे। हँ? सब मेरी शरण में आवेंगे क्या? आवेंगे? आवेंगे? हँ? सब आवेंगे? सब शरण में आ जाएं तो सब पालना लेंगे। पूरी शरण में आते हैं क्या? पूरी श्रीमत को पहचानेंगे? पहचानेंगे नहीं। नहीं पहचानेंगे तो कुछ न कुछ पाप करम तो करते ही रहेंगे। देखो ये कितने धरम हैं, मठ हैं, पंथ हैं। बाबा ने तो इस झाड़ के ऊपर सब समझाया है।

अच्छा, तो अब ये जानते हो कि अब ये दशहरा आता है। कितना हरा? दस सिर को हरने वाला दसहरा। और 10 सिर में 10 तरह की मन-बुद्धि होगी कि एक तरह की होगी? एक को तो फालो करते नहीं हैं। जानते ही नहीं हैं। तो उन सिरों का हरण होता है। हँ। तो ये रावण को फिर भी जैसे; कैसे? कैसे हरण करते हैं? जलाय देते हैं। क्यों जलाते हैं? हँ? क्योंकि जलाने के बाद तो उनका नाम निशान खतम। तो एक बार जलाते हैं कि बार-बार जलाना पड़ता है?
(किसी ने कुछ कहा।) हाँ, एक बार जलाने से जलता ही नहीं। तो ये ऐसे ही जलाते रहेंगे। हँ? जैसे कल्प पूर्व में जलाया था। पर ये तो भक्तिमार्ग में तो, भक्तिमार्ग में हद का जलाना होता है। हँ? काहे में जलाते हैं? हद की आग में जलाते हैं। हँ? ये जो जितने पाप कर्म करने वाले होते हैं ना, हँ, श्रीमत को पूरा नहीं पहचानते हैं, नहीं जानते तो पाप कर्म करते हैं। और पाप कर्म करते हैं तो उनके पापों को कैसे जलाया जाता है? हँ? वो तो स्थूल आग में जलाते हैं। तुम क्या करते हो? हँ? जैसे कोई भूत-प्रेत किसी में प्रवेश करता है तो तुम क्या करते हो? आग में बैठा देते हो? नहीं। क्या करते हो? हँ? योगाग्नि में तुम रहते हो तो उनको जलन महसूस होती है। क्या? वो तुम्हारी योगाग्नि में टिक नहीं सकते। तो तुम्हारा है बेहद का जलाना। क्या? उनका है हद का जलाना।

तो तुम्हारी तो सारी बातें बेहद की हैं। वो सब हैं हद की बातें। क्या? जो दुनियावाले रावण का बुत बनाते हैं और वर्ष-वर्ष जलाते रहते हैं; तुम बच्चों में भी कोई जलाते हैं क्या? तुम ब्राह्मण बच्चों में कोई बच्चे हैं जो जलाते हैं रावण को? बाप आते हैं तो भी जलाते हैं क्या? अरे?
(किसी ने कुछ कहा।) नहीं जलाते? अच्छा? अच्छा? तो अच्छे से ध्यान देना चाहिए क्या हो रहा है दुनिया में। वो तथाकथित ब्रह्माकुमार-कुमारी, हँ, जितने भी टंट-घंट होते हैं भक्तिमार्ग में, रावण राज्य में, वो सब त्यौहार मनाते हैं कि नहीं मनाते हैं? हँ? तो रावण को जलाते हैं कि नहीं जलाते हैं? हँ? हाँ। क्योंकि वो आत्माएं जो सतयुग में, स्वर्ग में थीं, कम कलाओं वाले देवताएं थे, कन्वर्ट हो गए, तो कन्वर्ट होने के बाद फिर जितना-जितना प्रभाव में आते-जाते हैं, तो उनसे प्रभावित होकरके वैसे ही करम करते हैं। विधर्मियों से प्रभावित होते हैं ना। तो वो भी हद की दुनिया में जैसे आ जाते हैं।

तो बाप ने समझाया कि ये तो सिर्फ यहाँ इस दुनिया में जलाते हैं। हँ? और ऐसे बहुत ही देश हैं जहाँ, हँ, जहाँ रावण नहीं जलाते हैं। हँ? हर देश में जलाते हैं क्या? नहीं। हाँ, जहाँ-जहाँ ये भारतवासी लोग पहुँचे हैं ना वहाँ अगर उनकी कुछ संख्या जास्ती होगी तो वो जलाते हैं। नहीं तो थोड़े से होंगे किसी देश में तो क्या जलाएंगे? 50, 25 होंगे तो वो फिर क्या रावण को जलाते होंगे? हँ? क्योंकि भक्तिमार्ग में रावण को जलाते हैं। रावण को जलाने का दिखावा करते हैं कि जलाते हैं? सचमुच जलता है क्या? नहीं। वर्ष-वर्ष जलाते रहते हैं। हँ? कबसे जलाते आए हैं ये पता ही नहीं। बाप क्या बताते हैं कबसे जलाते हैं? हँ?
(किसी ने कुछ कहा।) हँ? द्वापर से जलाते हैं? वाह! अरे, द्वापर। हर युग पहले सतोप्रधान होता है कि हर युग पहले तमोप्रधान हो जाता है? पहले सतोप्रधान होती है हर चीज़। तो सतोप्रधानता में तो बुद्धि भी? सतोप्रधान रहती है। तो वहाँ थोड़ेही जलाते हैं? कलियुग में भी एकदम शुरुआत में तो सात्विक कलियुग ही होगा ना। तो तब जलाते हैं जब बहुत कोई दुख देते हैं तो रावण को जलाते हैं। पुतला जलाते हैं ना। हँ? आज दुनिया में भी कहाँ कोई सरकारें बहुत दुख देती हैं तो वो उन नेताओं का पुतला बना करके मिनिस्टरों का जलाते हैं। तो बहुत होते हैं तब जलाते हैं। एफिजी बनाते हैं।

तो अभी ये आता है उत्सव इसका। किसका? रामायण में दिखाया है ना। रावण के जलाने का भी उत्सव है। जिसको भक्तिमार्ग में कहते हैं दशहरा। हरण कर लिया। हँ? रावण ने क्या किया? हँ? अरे? तुमने तो रावण के दस सिरों का हरण किया तो उसकी यादगार में दशहरा मनाते हैं। रावण ने कुछ किया? तुम्हारा बिगाड़ा क्या? क्या किया? हँ? रावण ने, हाँ, जो तुम्हारा राज्य होता है ना उस राज्य में, हँ, तुम्हारा क्या राज्य होता है? तुम्हारा नई दुनिया में राज्य होता है ना। तो नई दुनिया में राज्य होने से पहले तुम रावण को जलाय देते हो। हँ? जलाय देते हो तो क्या होता है? हं? हाँ, राम राज्य आता है। रामराज्य में तुम जो सीताएं हो, वो सब रावण की जेल से नंबरवार छूट जाती हो। तो जरूर रावण ने तुम सीताओं का हरण किया होगा ना। हँ? कबसे हरण किया? हँ? हरण तो द्वापरयुग से ही किया। द्वैतवादी द्वापरयुग आता है। दो-दो धर्म, दो-दो राज्य, दो-दो भाषाएं, दो-दो कुल, दो-दो मतें चलती हैं तो प्रभावित हो जाते हैं। तो देखो, ये सब बेहद की बातें भी हैं। उनका तो दशहरा हद का है।

A morning class dated 21.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the middle portion, in the beginning of the middle portion of the first page on Thursday was that now the kingdom of Ravan exists in the entire world. The kingdom of Ram is not on the entire Earth. It is because only when you become masters of the world that everything including sky, Earth, Sun, etc. come into your hands. So, that will be called the kingdom of Ram. That too you become the masters of the entire world. And even if you talk of the kingdom of Ravan, you will alone be called the master of the world. Yes, it is definitely a topic to be understood that has been explained to the children that when there is a kingdom of Ravan, there are many. Yes, 500 crore. And when there is a kingdom of Ram there are very few. Then gradually they increase in numbers. And they grow in numbers in the kingdom of Ravan as well. There the numbers grow quickly because the souls keep on coming from above in a high stage. They come from the Supreme Abode, the farthest abode. And then many come in the kingdom of Ravan. Why do they come? It is because the vices increase, don’t they? All the human beings become vicious. And you become viceless human beings in the kingdom of Ram.

So, the entire story is of the human beings, isn’t it? It will not be said for the animals. No. Not their story. Then it will be said in it that Ram is also unlimited master and Ravan is also unlimited master. It is correct, isn’t it? Now these children understand that there are so many human beings; so, Ravan is also an unlimited master. It is correct, isn’t it? Now children understand that so many human beings do not exist in the Golden Age. There are a few in the Golden Age. But when there is your kingdom of Ram, how many exist? Hm? There are a few people in the Golden Age. Achcha? Don’t you become masters of the world in the kingdom of Ram? Hm? Just now it was said – Ravan becomes the unlimited master. Hm? So, don’t you become unlimited masters? Don’t you get the kingship of the entire world? Hm? It is sure that there are a few in the Golden Age. But when the Father comes then He establishes the kingdom of Ram, doesn’t He? Hm? So, isn’t the kingdom of you children unlimited kingdom? Hm? Isn’t it? Hm? Is it not over four and a half lakhs? Hm? Rule over the entire world. Only then is he called Vishwanath, Jagannath (Lord of the world). But there are not so many human beings in the Golden Age.

And at this time there are many religions. So, on which religion do you have full control? And those on whom you do not exercise control, do they not obtain the inheritance of mukti (liberation) and jeevanmukti (liberation in life) from you? Hm? The Father has come; so, He gives the inheritance of mukti and jeevanmukti to the entire world, doesn’t He? So, the Father has come in a corporeal form. The corporeal in whom He comes, one gets the inheritance of mukti and jeevanmukti through him only. Although there are many religions, yet do they come under the control sooner or later or not? Hm? Yes. So, the destruction takes place and the destruction of the souls doesn’t take place. When you perform actions through the body, then the body is destroyed. It is sung that many religions are destroyed. One true religion is established. Hm? And the same is sustained. So, now you have come to know as to what the population of the one which is sustained is. Hm? Their population is four and a half lakhs. Hm? Or is it nine lakhs?
(Someone said something.) Yes, those souls will be present but they will enter and play their parts, will they not? They will not have their own body, will they?

So, it will be said that at this time there are many demoniac religions. There are numerous religions. This is why you children have been told in the Gita also – Sarva dharmaan parityajya. What? Leave all the religions. Maamekam sharanam braj (Come to the asylum of Me alone). If you leave all the religions then you will have to leave the founders of their religions also. Hm? Just come to My asylum. So, all will not come. Hm? Will everyone come to My asylum? Will they come? Will they come? Hm? Will all come? If all come to My asylum, then everyone will obtain sustenance. Do they come under complete asylum? Will they recognize the complete Shrimat? They will not recognize. If they do not recognize, then they will keep on commiting some or the other sins. Look, there are so many religions, sects and branches. Baba has explained everything on this Tree.

Achcha, so, now you know that now this Dussehra comes. How many were defeated? Dussehra which abducts (defeats) ten heads. And will ten heads have ten kinds of mind and intellect or will they have one kind of mind and intellect? They do not follow one. They do not know at all. So, those heads are abducted (defeated). Hm. So, however, this Ravan; how? How is he defeated? He is burnt. Why is he burnt? Hm? It is because after burning his name and trace will perish. So, is he burnt once or is he required to be burnt again and again?
(Someone said something.) Yes, he is not burnt just by burning once. So, they will keep on burning like this. Hm? Just as they had burnt in the previous Kalpa. But on this path of Bhakti, on the path of Bhakti they burn in a limited sense. Hm? In what do they burn? They burn in the limited fire. Hm? All these who perform sinful actions, do not recognize the Shrimat completely, do not know; so, they commit sins. And when they commit sins, then how are their sins burnt? Hm? They burn in physical fire. What do you do? Hm? For example, when a ghost or devil enters in someone, then what do you do? Do you make him sit in fire? No. What do you do? Hm? You remain in the fire of Yoga, so they experience burning sensation (jalan). What? They cannot remain constant in your fire of Yoga. So, your burning is in an unlimited sense. What? Theirs’ is burning in a limited sense.

So, all your topics are in an unlimited sense. All those are limited topics. What? The effigy of Ravan that people of the world make and burn year after year; does anyone among you children also burn? Are there any children among you Brahmin children who burn Ravan? Do they burn even after the Father comes? Arey?
(Someone said something.) Don’t they burn? Achcha? Achcha? So, you should pay close attention as to what is happening in the world. Do those so-called Brahmakumar-kumaris follow all the rituals of the path of Bhakti in the kingdom of Ravan, celebrate all the festivals or not? Hm? So, do they burn Ravan or not? Hm? Yes. It is because those souls which were in the Golden Age, in heaven, were deities with fewer celestial degrees, had converted, so, after being converted, the more someone gets influenced, then they perform similar actions by being influenced by them. They are influenced by the vidharmis, don’t they? So, it is as if they also enter the limited world.

So, the Father has explained that it is only here in this world that they burn. Hm? And there are many such countries where Ravan is not burnt. Hm? Do they burn in every country? No. Yes, wherever these Indians have reached, if their number is a little more, then they burn. Otherwise, if their number is very small in a country, then will they burn? If there are just 50 or 25 will they burn Ravan? Hm? It is because Ravan is burnt on the path of Bhakti. Do they show-off that they are burning Ravan or do they really burn? Does it burn in reality? No. They keep on burning every year. Hm? They do not know since when have they been burning. What does the Father say about the time since when you have been burning? Hm?
(Someone said something.) Hm? Do they burn from the Copper Age? Wow! Arey, Copper Age. Is every Age satopradhan initially or does every Age become tamopradhan initially? Everything is initially satopradhan. So, in a stage of satopradhaanata (purity) how is the intellect as well? It remains satopradhan. So, do they burn there? Even in the Iron Age, in the very beginning, the Iron Age will be pure only, will it not be? So, they burn [Ravan’s effigy] when someone causes a lot of sorrows; then they burn Ravan. They burn the effigy, don’t they? Hm? Even in today’s world some governments cause a lot of sorrows; so, the effigies of those leaders, the ministers are prepared and burnt. So, they burn when their number is more. They prepare effigies.

So, now this festival comes now. Whose? It has been shown in Ramayana, isn’t it? There is a festival of burning Ravan as well. It is called Dussehra on the path of Bhakti. He abducted. Hm? What did Ravan do? Hm? Arey? You abducted the ten heads of Ravan; so, in its memory Dussehra is celebrated. Did Ravan do anything? Did he cause you any harm? What did he do? Hm? Ravana, yes, in your kingdom, hm, what is your kingdom? Your kingdom is in the new world, isn’t it? So, before your rule in the new world, you burn Ravan. Hm? What happens when you burn him? Hm? Yes, the kingdom of Ram arrives. In the kingdom of Ram, you, who are Sitas, you all get freed numberwise from the jail of Ravan. So, definitely Ravan must have abducted you Sitas, did he not? Hm? Since when did he abduct? Hm? He abducted from the Copper Age only. Dualist Copper Age arrives. Two-two religions, two-two kingdoms, two-two languages, two-two clans, two-two opinions start; so you get influenced. So, look, all these are unlimited topics as well. Their Dussehra is in a limited sense.

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arjun
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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 12 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2701, दिनांक 15.11.2018
VCD 2701, Dated 15.11.2018
प्रातः क्लास 21.9.1967
Morning Class dated 21.9.1967
VCD-2701-extracts-Bilingual-Part-1

समय- 00.01-30.50
Time- 00.01-30.50


प्रातः क्लास चल रहा था - 21.9.1967. सद्गुरुवार को दूसरे पेज के आदि में बात चल रही थी – एक होती है सिमरनी की माला और दूसरी होती है विजयमाला, विष्णु की जो पूजी भी जाती है। तो फिर, और, वो जो सिमरने की माला सिमरनी है, वो जब विजयमाला में एड होती है तो पूजी भी जाती है। बाबा ने मिसाल दिया कि जैसे यहाँ खीर का पेड़ा बनाते हैं तो उसे नाक भी देते हैं, आँख भी देते हैं। बोलते हैं ये है रुंड। ये छोटी होती है माला। वो विष्णु के गले में तो बाप ने समझाया बहुत अच्छी तरह से।

अभी ये आते हैं तुम्हारा ये उत्सव दशहरे का। पीछे आएगी दीपमाला, तो बरोबर मनाएंगे तो जरूर ना बच्ची। ये दीपमाला क्यों मनाते हैं? क्योंकि ताजपोशी होती है देवताओं की। हँ? कौनसे देवताओं की पहले ताजपोशी होती है? हँ? किनकी यादगार में दीपावली मनाते हैं? भक्तिमार्ग में तो कहते हैं कि राम-सीता की ताजपोशी होती है। बाबा कहते हैं इनकी ताजपोशी होती है। ये इनकी खुशी का, ताजपोशी जब होती है तो कोरोनेशन बहुत बत्तियाँ जलाते हैं। तो एक तो वो ताजपोशी की बत्तियाँ जलाते हैं। दूसरा फिर कहा जाता है घर-घर में दीपमाला। तो घर-घर में माना ये घर। कौनसा घर? ये शरीर रूपी घर। तो बरोबर ये भक्ति करते-करते-करते ये ज्योत इनकी झांकी हो जाती है। तो फिर उसको अंधियारा कहा जाता है। तो समझा बच्चों ने अब ये घोर अंधियारा है। उसमें कोई दीपमाला तो हो ही नहीं। तो कहेंगे ये तो आर्टिफिशियल दीपमाला। ऐसे भी नहीं है कि कोई कोरोनेशन होते हैं। इसलिए वो आतिशबाजी करते हैं। हाँ, ये जरूर है कि जब कोरोनेशन होते हैं, तो आतिशबाजी और ये दीपमाला सब जगह जगते हैं। सब देशों में। तो समझो तो दीपमाला होती है। यहाँ बैठकरके ये दीपमाला जगते हैं। लक्ष्मी को बुलाते हैं। तो नहीं, ये उत्सव भक्तिमार्ग का है। ये है सभी रांग उत्सव। जो भी राजा बैठते हैं वहाँ तख्त पर तो उनका कोरोनेशन डे मनाया जाता है। और फिर वो बड़ी धूमधाम करते हैं।

तो बाप ने समझाया तुमको समझाना भी है वहाँ। तो ये तो है फाल्ट है हद के। बातें हैं सारी बेहद की। ये दशहरे का राज़ सच्चा-सच्चा क्योंकि इस समय में घर-घर में ये आत्मा की ज्योति अंधियारी है। तो तुम बच्चे ज्योति जगाने आते हैं ना। इसलिए मनुष्य समझते हैं कि जो ज्योति जगाने आते हैं हमारी ज्योति फिर उसमें जाकरके जगाने वाली बड़ी ज्योति में मिल जाएगी। तो उसको दीवा भी कहते हैं। बाबा ने समझाया था ना जो ब्रह्म समाजी होते हैं उनके मन्दिर में सदैव ज्योति जगती है। तो वो समझते हैं जैसे बटरफ्लाइ या परवाने ज्योति के ऊपर फेरी पहन करके फिदा हो जाते हैं ना, वैसे वो ऐसे ही समझते हैं कि हमारी भी जो आत्मा है वो उस ज्योति में ज्योति समाय जाएगी। समझते हैं उस बड़ी ज्योति में मिल जाती है। तो इसके ऊपर से दृष्टांत बनाया है कि ये जो परवाने हैं वो ज्योति के ऊपर जल मरते हैं। अभी यहां जल मरने की तो बात नहीं है। अभी नहीं है।

तुम आते हैं, ये तो तुम जानते हो कि तुम आयकरके ये पुराने माशूक, पुराने आशिक। और तुम तो आधा कल्प के आशिक हो माशूक के। जो माशूक के ऊपर फिदा हो जाते हैं। आधा कल्प के आशिक हो तो फिदा हो जाते हो। तो कोई जलने तो नहीं लग पड़ते हो। नहीं। जैसे वो आशिक होते हैं, माशूक को, आशिक को, तो ये आशिक माशूक बनने हैं। आशिक-माशूक बन जाते हैं दोनों। इसमें वो नहीं है। ये तो सदैव माशूक है। और ये जो आशिक, जो भक्तिमार्ग में ढ़ाई हज़ार साल से याद करते रहते हैं, कि हे माशूक तुम आ जाओ। हम तुम्हारे ऊपर बलि चढ़ेंगे। और जब तुम आ जाओगे, तुम्हारे सिवाय और कोई को याद नहीं करेंगे। तो जो पक्के-पक्के आशुक-माशूक हैं, उनकी तो कहानियाँ बन जाती हैं ना। नाम हो जाते हैं। हँ। तो ये तो कोई जिस्मानी लव तो नहीं है ना बच्चे। वो तो उनका जिस्मानी लव होता है और पवित्रता का लव होता है। एक दो को आशिक हो देखता रहता है। सिर्फ देखता है। और कुछ भी नहीं। बस उनकी तो देखने से ही तृप्ति हो जाती है। और यहाँ तो एक है माशूक। आशुक तुम सब हो। सब बाप को याद करते हैं। और कोई न कोई गति से याद करते हैं। और उनके मुख से निकल ही पड़ता है। ऐसे बहुत हैं भल जो नेचर को मानते हैं। फलाने को मानते हैं। ये करते हैं। परन्तु नहीं। नाम निकल जाते हैं उनके भगवन, हे राम, हे गॉड। ऐसे जरूर निकलता है मुख से। फिर भले कुछ भी मानते हों।

तो बाप आकरके सभी आशिकों का माशूक बनते हैं। ये आशिक को क्यों पुकारते हैं? आशिक हो क्यों पुकारते हैं? कि आकरके हमारा दुख दूर करो। वो जो आशिक-माशूक हैं वो ऐसे नहीं एक-दो को कहते हैं कि हमारे दुख दूर करो। नहीं। वो तो ऐसे ही सिर्फ देखते रहते हैं। वो आशिक माशूक ऐसे होते हैं। माशूक और आशिक। दोनों एक दूसरे को देखते रहते हैं। 21.9.67 की वाणी का तीसरा पेज। ये बैठकरके देखो कुछ भी करेगा, याद करते हैं। याद करते हैं तो आके सामने खड़ा हो जाएगा। बस खड़ा उसे जैसे देखते रहेगा। जैसे भक्तिमार्ग में होते हैं ना बच्ची। बहुत ऐसे आशिक और माशूक होते हैं। और भक्ति में आशिक भी बहुत-बहुत हैं। कोई किसका आशिक है, कोई किसका आशिक। कोई भगत का हनूमान भी तो माशूक है ना। अब उस हनूमान के बताओ कितने आशिक होंगे? ढ़ेर के ढ़ेर होंगे हनूमान के। अच्छा, गणेश के कितने आशिक होंगे? हाँ, ये होंगे ना। और वो एक माशूक।

तो देखो, सब माशूक के चित्र बनायकरके हरेक आशिक वो आपस में मिल जाते हैं। फिर माशूक का चित्र बनायकरके उनकी पूजा वगैरा कर-करके और वो भी माशूक को जाकरके डुबोय देते हैं। ऐसे है ना। अब उसका तो कोई अर्थ ही नहीं निकलता है। हँ? अर्थ नहीं निकलता है? हँ? अर्थ तो तुम बच्चों को निकलता है कि यहाँ संगमयुग में जो आत्माएं एक माशूक को पहचानती हैं फिर माया कारणे-अकारणे उनको बरगलाय लेती है। बरगलाय लेती है तो फिर वो रफूचक्कर हो जाते हैं। तो जैसे जिस माशूक को पहले पकड़ा ना उसको डुबाय दिया। ग्लानि करते हैं ना फिर। अब यहाँ तो ये बात है नहीं। क्योंकि ये तो बहुत सलोना माशूक है ना। इसको सलोना कहा जाता है। और वो एवर गोरा है। गोरा ही माशूक है क्योंकि ये कभी सांवरा बनता ही नहीं है। तो एवर गोरा होने के कारण ये आकरके सबको आकरके गोरा बनाते हैं। मुसाफिर है ना। और शोभनीक मुसाफिर है। तो ये है तो मुसाफिर फिर भी तुम भी मुसाफिर हो मीठे बच्चे। तुम भी वहाँ से आयकरके दूर देश से इस देश में आकरके पार्ट बजाते हो ना। किस देश से आकरके पार्ट बजाते हो? तुम्हारा भी दूर देश है। वो मनुष्य जो नाटक रचते हैं वो तो उसी देश के होते हैं, उसी देश में नाटक रचते हैं। फिर जाकरके कपड़ा-वपड़ा घर में जाकरके यहीं उतारते हैं। और तुम तो देखो कहाँ से नंगे आए हो और यहाँ आकरके तुमने कपड़े पहनकरके घड़ी-घड़ी पार्ट बजाया है।

अभी तो तुम बच्चों को ये पार्ट मुख्य याद में है कि बरोबर हमने इतना जन्म यहाँ आकरके नंगे और ये शरीर धारण करके और पार्ट बजाया है। तो तुम बच्चों को नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार याद रहता है बहुत अच्छी तरह से क्योंकि तुम नंबरवार त्रिकालदर्शी भी बन गए। क्योंकि इस बेहद के ड्रामा के आदि, मध्य, अंत को भी जान गए। और ये भी जान गए कि ये रचता कौन है? रचना को जान गए ना। तो जान गए तो तुम बच्चे हो गए आस्तिक। वो तो जानते ही नहीं हैं। तो क्या कहेंगे? नास्तिक। तुम हो आस्तिक कुमार और कुमारी। तो इनको ऐसे कहेंगे। क्योंकि हैं प्रजापिता ब्रह्माकुमार और कुमारी। हँ? तो जो प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारी हैं तो तुमको कहेंगे आस्तिक कुमार और कुमारी। फिर तुम रचना के आदि, मध्य, अंत को भी जानते हो। तो आस्तिक हो, त्रिकालदर्शी हो। तो सभी आस्तिक, त्रिकालदर्शी ब्रह्माकुमार और आस्तिक त्रिकालदर्शी ब्रह्माकुमारियाँ।

तो तुमको अभी ये जो टाइटल सभी मिले हैं, जैसे टाइटल्स मिलते हैं ना कोई-कोई को। बहुतों को वहाँ से जगदगुरु का टाइटल मिलता है, फलाना, टीरा। सरस्वती का टाइटल मिलता है। बहुत ही हैं जो ये बनारस की कॉलेज है ना जहाँ बहुत शास्त्र पढ़ते हैं, उनको बहुत मिलते हैं। तो फिर उनको भी तो टाइटल मिलते हैं ना। और तुमको तो सबसे अच्छा टाइटल मिला हुआ है। हँ? कौनसा मर्तबा का? सुदर्शन चक्रधारी का टाइटल मिला हुआ है। और ये तो बड़ा मर्तबा है ना। हाँ, गुड्डू ये बड़ा मर्तबा है। हँ? शिवबाबा को कोई मर्तबा हो सकते हैं? मनुष्य को हो सकते हैं, ब्राह्मणों को। कि शिवबाबा को भी? शिवबाबा को नहीं होता ये मर्तबा। ब्राह्मणों को होता है। क्यों? कौनसा मर्तबा शिवबाबा को नहीं होता? हँ? क्या? स्वदर्शन चक्रधारी का मर्तबा शिवबाबा को नहीं होता। वो तो कोई चक्कर लगाता ही नहीं जन्म-जन्मान्तर। लगाता है? नहीं। तो ये मनुष्यों का मर्तबा होता है। शिवबाबा को नहीं। तो दीदी ऐसे है ना? कोई ने कहा शिवबाबा को भी है। हँ? शिवबाबा को ही है। ये गुड्डू कहती है – नहीं। चलो बच्चे, तुम ही सुदर्शन चक्रधारी ब्राह्मण हो। या सुदर्शन चक्रधारी शिवबाबा भी है? हँ? ब्रह्मा बाबा किसे कहते हैं शिवबाबा? हँ? बिन्दी बाबा को कहते हैं निराकार को? तो किसी ने कहा – शिवबाबा भी है। तो भई तुम कैसे कहते हो कि शिवबाबा भी है? ब्राह्मण हैं सुदर्शन चक्रधारी या शिवबाबा है? किसी ने कहा – शिवबाबा भी है। हँ? शिवबाबा है? वो भी है और ब्राह्मण भी हैं। क्यों? किसी ने कहा – क्योंकि वो बनाता है। जो क्योंकि आत्मा होती है ना सुदर्शन चक्रधारी शरीर के साथ।

तो बाप भी तो इसमें आकरके तुम बच्चों को समझाते हैं। समझाते हैं तो तुमको सुदर्शन चक्रधारी बनाते हैं। क्योंकि शिव न होवे तो तुमको कैसे बनावे? हँ? क्या? स्वदर्शन चक्रधारी। हँ? तो उनको ये ज्ञान है ना स्वदर्शन चक्कर। यानी सृष्टि के चक्कर के आदि, मध्य, अंत का ज्ञान है। बाप कहते हैं मेरे में ज्ञान है ना। तो पहले तो मैं आत्मा। जिसको तुम परमात्मा कहते हो। हँ? तुम कहते हो। यहाँ तो हम आकरके जैसे कि आत्मा बना हूँ। परन्तु ये तो बच्चे जानते हैं ना कि ये तो सुप्रीम आत्मा है, ऊँचे ते ऊँची आत्मा है। ऐसे कहते हैं ऊँचे ते ऊँचा भगवन्त। अभी जब ऊँचे ते ऊँचा भगवन्त कहा जाता है, हँ, तो कोई देह थोड़ेही बनते हैं? हँ? देह कहते हैं? नहीं। ऊँचे ते ऊँचा भगवन्त आत्मा को कहा जाता है। हँ? आत्मा को कहा जाता है? परमात्मा को नहीं कहा जाता? हँ? अरे? वो कोई आत्मा ही तो है जो ऊँचे ते ऊँचा बनती है। हँ? सुप्रीम सोल को ये थोड़ेही कहेंगे कि बनती है। बनती है माना पहले नहीं था। तो जब ही ऊँचे ते ऊँच आत्मा को भगवन्त कहा जाता है तो ऊँची ते ऊँची तो आत्मा ही ठहरी ना।

तो देखो बच्ची ये वो ही आत्मा है। हँ? मैं नहीं। वो ही आत्मा जिसको ऊँचे ते ऊँचा कहा जाता है। हँ? दूर क्यों कर दिया? हँ? क्योंकि वो सुप्रीम अभी प्रत्यक्ष नहीं हुआ है। वो ही आकरके तुम बच्चों को फिर सुप्रीम बनाते हैं। हँ? अभी बन गए कि बनाएंगे? हँ? किससे बनाते हैं सुप्रीम? हँ? किससे माने? कोई से टैली किया? यही। सुदर्शन चक्रधारी बनाय करके। हँ? अपनी आत्मा का चक्कर बुद्धि में याद आता है तो जिसको जास्ती और पहले याद आता है तो वो आत्मा समझती है कि हमारा सुप्रिमेसी का पार्ट है इस सृष्टि चक्र में। क्योंकि सुदर्शन चक्रधारी सिवाय आत्मा के तो बन नहीं सकते। हँ? लेकिन कौनसा आत्मा? हँ? वो आत्माएं ये जो ब्राह्मण तन में वास करती हैं। और इस समय हैं। और ये आत्मा तुम्हारी जब शूद्र घर में थी तो विकारी थी। तब तो नहीं जानती थी। अब तुम आकरके जान गई हो कि तुम किसके द्वारा सुदर्शन चक्रधारी बनती हो। वो ही स्वदर्शन चक्रधारी बाप द्वारा। हँ? फिर वो ही कर दिया। हँ? कौनसा वो ही सुदर्शन चक्रधारी बाप? हँ? भविष्य में परमपिता द्वारा जो इस शरीर में बैठकरके तुमको सुदर्शन चक्रधारी बनाते हैं, त्रिकालदर्शी भी बनाते हैं। (क्रमशः)

A morning class dated 21.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the beginning of the second page on Thursday was – One is a rosary of remembrance (simarni ki mala) and the other is Vijaymala of Vishnu which is also worshipped. So, then, and, when the rosary of remembrance, Simarni is added to the Vijaymala, then it is also worshipped. Baba gave an example that just as you prepare the Peda (a sweet) of milk here, you make a nose as well as eyes in it. You say that this is a head (rund). This is a small rosary. The Father has explained very nicely about that in Vishnu’s neck.

Now your festival of Dussehra arrives. Later the Deepmala will come; so, you will definitely celebrate, will you not daughter? Why is this Deepmala celebrated? It is because the coronation (taajposhi) of deities takes place. Hm? Coronation of which deities takes place first? Hm? In whose memorial is Deepawali celebrated? On the path of Bhakti it is said that coronation of Ram and Sita takes place. Baba says that their coronation takes place. Their joy; when coronation takes place, then they light a lot of bulbs during the coronation. So, on the one hand they light the bulbs for coronation. Secondly, it is said a series of lamps (deepmala) in every house. So, in every house means this house. Which house? This body like house. So, while doing Bhakti their light diminishes. So, then that is called darkness. So, children have understood that this is complete darkness. There cannot be any Deepmala in that. So, it will be said that this is artificial Deepmala. It is not as if any coronation takes place. This is why they burst crackers. Yes, it is definite that when coronation takes place, then this bursting of crackers and this lighting of lamps takes place everywhere. In all the countries. So, it is as if Deepmala takes place. You sit here and light these lamps. You call Lakshmi. So, no, this festival is of the path of Bhakti. All these are wrong festivals. All the kings who sit there on the throne, then their coronation day is celebrated. And then they organize it very grandly.

So, the Father has explained that you should explain there. So, these are limited faults. All the topics are in an unlimited sense. The secret of Dussehra is truest because at this time this light of the soul is dark in every home. So, you children come to light the lamps, don’t you? This is why human beings think that the one who comes to light our lamps, then our light will go and merge in that big light which comes and lights us. So, that is called a deeva (lamp) also. Baba had explained, hadn’t He that a lamp keeps on burning in the temple of the Brahma Samajis always. So, they think that just as butterflies or insects (parvaaney) fly around the fire and sacrifice themselves in it, similarly, they think that the light of our soul-like light will also merge into that light. They think that it merges into that big light. So, an example has been given that the insects burn and die on the light (fire). Well, there is no question of burning and dying here. It is not now.

You come; you know that you come and this is an old beloved (maashook) and old lovers (aashik). And you have been a lover of the beloved since half a Kalpa. You sacrifice yourself on the beloved. You have been His lovers since half a Kalpa, so you sacrifice yourself. So, you do not start burning yourself. No. Just as there are those lovers of the beloved, so, these are to become lovers and beloved. Both become lover and beloved. That is not there in this one. This one is forever a beloved. And these lovers who have been remembering on the path of Bhakti since 2500 years saying – O beloved! You come. We will sacrifice ourselves on You. And when You come will not remember anyone except You. So, the stories of those who are firm lovers and beloved are written, aren’t they? They become famous. Hm. So, children, this is not physical love. That is their physical love and love of purity. They keep on seeing each other like a lover. They just see. Nothing else. They feel satisfied just by seeing. And here there is one beloved. You all are lovers. Everyone remembers the Father. And they remember with one or the other speed. And it emerges from their mouths. There are many who believe in nature. They believe in something. They do this. But, no. They utter the name; O Bhagwan! O Ram! O God! It definitely emerges like this from their mouths. Then they may believe in anyone.

So, the Father comes and becomes the beloved of all the lovers. Why do they call the lover? Why do they call as lovers? Come and remove our sorrows. Those lovers and beloved do not ask each other to remove their sorrows. No. They just keep on gazing like this. Those lovers and beloveds are like this. Beloved and lover. Both keep on gazing at each other. Third page of the Vani dated 21.9.67. Look, he will sit and do anything; she remembers. When she remembers, he comes and stands in front of her. He just stands and gazes at her just as if happens on the path of Bhakti, isn’t it dughter? Many such lovers and beloveds are there. And in Bhakti there are a lot of lovers. Someone loves someone; someone loves someone else. For some devotees Hanuman is also a beloved, isn’t he? Well, tell, how many lovers does that Hanuman have? There must be numerous [lovers] for Hanuman. Achcha, how many will Ganesh have? Yes, they will be there, will they not be? And that one beloved.

So look, each lover (devotee) prepares the picture of the beloved (the deity) and they all gather together. Then they make the picture of the beloved, worship him/her and then they go and immerse the beloved [the deity’s idol in water], don’t they? It is like this, isn’t it? Well, one cannot derive any meaning out of it. Hm? Doesn’t one derive any meaning? Hm? You children can derive a meaning that the souls recognize one beloved in the Confluence Age here and then Maya misleads them due to one reason or the other. When it misleads then they run away. So, then it is as if the beloved whom they had caught earlier, they immersed him. They then cause defamation, don’t they? Well, this topic doesn’t exist here. It is because this one is a very beautiful beloved, isn’t He? This one is called beautiful (salona). And He is ever fair (gora). The beloved is fair only because this one doesn’t ever become dark at all. So, because of being ever fair He comes and makes everyone fair. He is a traveler (musaafir), isn’t He? And He is a handsome traveler. So, although this one is a traveler, yet you are also travelers O sweet children. You also come from there, from the distant country and play a part by coming to this country, don’t you? To which country do you come and play your part? Your country is also distant. Those human beings who enact the drama belong to the same country; they enact drama in the same country. Then they go and change their robes in the house here itself. And look, you have come naked from which place and after coming here you have worn the clothes and have played the part again and again.

Now you children mainly remember this part that definitely we have come naked for so many births and assumed this body and played our part. So, you children remember very nicely numberwise as per your purusharth because you have also become numberwise trikaaldarshii (knower of the three aspects of time) because you have come to know of the beginning, middle and end of this unlimited drama. And you have also come to know that who is this creator? You have come to know of the creation, haven’t you? So, when you have come to know you are theists (aastik), aren’t you? They do not know at all. So, what will they be called? Atheists (naastik). You are Aastik Kumars and Kumaris. So, these will be called so. It is because you are Prajapita Brahmakumars and Kumaris. Hm? So, those who are Prajapita Brahmakumars and Kumaris; so, you will be called Aastik Kumars and Kumaris. Then you also know the beginning, middle and end of the creation. You are theists, trikaaldarshis. So, you all are theists, trikaaldarshii Brahmakumars and theist trikaaldarshii Brahmakumaris.

So, all these titles that you have received now; for example, some get titles, don’t they? Many get the title of Jagadguru, etc. from there. They get the title of Saraswati. There are many who get many from these colleges of Benares where they study a lot of scriptures. So, then they get titles, don’t they? And you have received the best title. Hm? Which position? You have received the title of Sudarshan Chakradhari. And this is a big position, isn’t it? Yes, Guddu, this is a big position. Hm? Can ShivBaba have any position? Human beings, Brahmins can have. Or does ShivBaba also have? ShivBaba doesn’t have this position. Brahmins have. Why? Which position does ShivBaba not have? Hm? What? ShivBaba doesn’t have the position of Swadarshan Chakradhari. He doesn’t pass through the cycle birth by birth. Does He? No. So, this is a position of the human beings. Not ShivBaba. So, Didi, it is like this, isn’t it? Someone said ShivBaba also has. Hm? ShivBaba alone has. This Guddu says – No. Okay children, you alone are Sudarshan Chakradhari Brahmins. Or is ShivBaba also Sudarshan Chakradhari? Hm? Whom does Brahma Baba call as ShivBaba? Hm? Does he call a point, incorporeal Baba? So, someone said – ShivBaba also is. So, brother, how do you say that ShivBaba is also [Sudarshan Chakradhari]? Are the Brahmins Sudarshan Chakradharis or is ShivBaba that? Someone said – ShivBaba is also [Sudarshan Chakradhari]. Hm? Is ShivBaba [Sudarshan Chakradhari]? He as well as the Brahmins [are Sudarshan Chakradhari]. Why? Someone said – It is because He makes. It is because the soul is Sudarshan Chakradhari along with the body.

So, the Father also comes in this one and explains to you children. He explains, so, He makes you Sudarshan Chakradhari. It is because if Shiv isn’t there, then how will He make you? Hm? What? Swadarshan Chakradhari. Hm? So, He has this knowledge of Swadarshan Chakkar. It means that He has the knowledge of the beginning, middle and end of the Cycle. The Father says that I have knowledge, don’t I? So, first I am a soul, whom you call Supreme Soul. Hm? You call. Here I have come and become a soul. But children know that this is Supreme Soul, the highest on high soul. They say – Highest on high God. Well, when He is called the highest on high God, then is it the body which becomes? Hm? Is He called a body? No. The soul is called the highest on high God. Hm? Is the soul called? Isn’t the Supreme Soul called? Hm? Arey? It is a soul only which becomes highest on high. Hm? Will it be said for the Supreme Soul that it becomes. ‘It becomes’ means that He was not earlier. So, when the highest on high soul is called God, then it is the soul which is highest on high, isn’t it?

So, look, daughter, this is the same soul. Hm? Not I. The same soul which is called highest on high. Hm? Why was it made distant? Hm? It is because that Supreme has not been revealed now. He Himself comes and makes you children supreme again. Hm? Have you become now or will He make? Hm? When compared to whom are you made supreme? Hm? What is meant by ‘when compared to’? Were you tallied with anyone? This one. By making you Sudarshan Chakradhari. Hm? When you remember the cycle of the soul in the intellect, then the soul which remembers more and realizes first that my part is of supremacy in this world cycle. It is because except the soul nobody can become Sudarshan Chakradhari. Hm? But which soul? Hm? Those souls which reside in this Brahmin body. And are present at this time. And when your soul was in a Shudra home, it was vicious. It did not know at that time. Now you have come and realized as to through whom do you become Sudarshan Chakradhari. Through the same Swadarshan Chakradhari Father. Hm? Again he said – ‘The same’. Hm? Which same Sudarshan Chakradhari Father? Hm? The one who makes you Sudarshan Chakradhari and also Trikaaldarshii through the Supreme Father by sitting in this body in future. (continued)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 14 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2701, दिनांक 15.11.2018
VCD 2701, dated 15.11.2018
प्रातः क्लास 21.9.1967
Morning Class dated 21.9.1967
VCD-2701-extracts-Bilingual-Part-2

समय- 30.51-58.04
Time- 30.51-58.04


तो बच्ची देखो ये कितनी अच्छी-अच्छी मीठी-मीठी बातें हैं। और ये ऐसी बातें तुम भी बैठकर सुनते हो तो खुशी होती है। बाकि जो बच्चे बाहरवाले भी आवें तो इनको अगर ऐसे भी बातें सुनावें तो वहाँ वो अजब खाकरके रहें। और फिर सुनकरके बोले – ये तो बहुत ऊँचा ज्ञान है। ऐसा ज्ञान तो कभी कोई सुनाय नहीं सकते। ऐसे कर-करके, हाँ, बस सुनकरके पीछे भल आना। तुम भी आकरके ऐसे बनाना। सुदर्शन चक्रधारी बनने से चक्रवर्ती राजा बन जावेंगे। सारे विश्व का बन जावेंगे। और सुना? अच्छी तरह से तुम लोगों ने सुनाया? पीछे वो जब बाहर जाते हैं ना तो बस माया इतनी जोर है, इतनी बलवान है कि वहाँ की बातें वहीं रह गईं। वैसे ही जब वो गर्भ से बच्चा निकलते हैं, देखो बच्चा; उसमें भी तो आत्मा है ना। आत्मा ही के लिए कहेंगे। आत्मा इस शरीर में ही रहती है और कहती है कि मुझे इस गर्भ जेल से निकालो। क्यों कहती है? हँ? त्राहि-त्राहि करती है मैं कभी पाप नहीं करूंगा। तो फिर भी देखो बाहर निकलती है और फिर वहाँ गर्भजेल की बात गर्भजेल में रह गई। क्या बात रह गई? हँ? जो अन्दर-अन्दर ये सोचती है कि हम कभी पाप नहीं करेंगे, वो बात वहाँ की वहाँ ही रह जाती।

तो ये भी तुम जैसे कि सुनते हो। जब भी सुनते हो प्रदर्शनियों में या उसमें या यहाँ; यहाँ तो नहीं है प्रदर्शनी, परन्तु वहाँ क्योंकि यहाँ तो बैठने ही उन्हें देते हैं जो अच्छी तरह से पढ़ा हुआ ब्राह्मण है। और फिर पवित्र रहता है। उनको सुनाते हो तो वो झट वहाँ सुना, अच्छा-अच्छा, बहुत अच्छा, बहुत अच्छा; कहेंगे ये नॉलेज तो बहुत अच्छी है। और ये जरूर सभी को समझनी चाहिए। अच्छा, फिर मैं पुरुषार्थ, यहाँ ही जाओ, यहाँ ही जाऊँगा, यहाँ ही जाऊंगा, ये करूंगा। और फिर दरवाजे के बाहर गया वहाँ, क्योंकि वो भी तो दरवाजा है ना। हँ? कौनसा? हँ? प्रदर्शनी में गया तो वहाँ भी तो दरवाजा है ना। ‘भी’ क्यों लगाया? गर्भजेल का भी दरवाजा है। तो बाहर निकलते हैं तो ये भी प्रदर्शनी से बाहर निकलते हैं वहाँ की वहां रही। परन्तु फिर भी बाबा कहते हैं कुछ न कुछ तो असर जरूर पड़ता है। तो उसका रिजल्ट क्या होगा? हँ? आगे चलकरके ऐसे नहीं समझो कि उन्होंने नहीं सुना, फिर कभी नहीं आएंगे। नहीं। तुम सोचते हो हम इतने को समझाते हैं। नहीं। थको मत। हँ? ये नहीं समझो कि नहीं सुना। फिर भी कभी आएंगे जरूर। मत समझो कि कभी नहीं आएंगे। कि हमने इतने को समझाया। नहीं। फिर भी आएंगे। और आएंगे और आते ही रहेंगे। और ये वृद्धि होती ही जाएगी झाड़ की। तो सो जब होगा तो तब बड़ा झाड़ हो जाएगा ना फिर, फिर तो सबको खींचेगा। ये तो ढ़ेर के ढ़ेर इनके ये संस्था में जाते हैं तो बड़े खुश होते हैं और बड़े पवित्र रहते हैं। खान-पीन इनकी बिल्कुल ही शुद्ध हो जाती है। तो बच्ची कितनी शुद्धि हो जाती है।

और जो वो गटर में पड़े रहते हैं तो यहाँ तो जैसे यहाँ आकरके हम निकालते हैं ना। पर उनका तो गटर से भी गटर। ये गटर का नाम ही है वेश्यालय। रौरव नरक। तो उसको क्या कहेंगे? जैसे नाली के कीड़े होते हैं ना। रौरियाते रहते हैं। एक दूसरे को काटते रहते हैं। उसने उसको काटा, फिर उसको काटा। तो ये कहेंगे रौरव वैश्यालय। रौरव इसलिए कहते हैं अति का रौरव। और गरुड़ पुराण तो बच्चों ने, कई-कई ने तो बच्चों ने तो सुना होगा, बुजुर्गों ने तो सुना होगा। या बुड्ढियों ने सुना होगा। ये भी तो शरीर बोलता है ना, बुड्ढा है। तो इसने भी ये सब सुना है गरुड़ पुराण। ये पुराने जो भी हैं ये सभी सुनते थे। तो उसमें रोचक बातें बहुत हैं। तो बाप समझाते हैं ये जो भी हैं वेद-शास्त्र, ग्रंथ, जो भी सुनाते हैं ये इतना रोचक उनको क्यों सुनाते हैं? हँ? कि मनुष्य डरते रहें। तो वो उस गरुड पुराण से ही निकला है; क्या? कि मनुष्य 84 लाख योनियों में जाते हैं। बिच्छु बनता है, टिंडन बनता है, नाग-बलाएं बनता है। क्योंकि उस विषय वैतरणी नदी में दिखाते हैं ना कि वो देखो, हँ, वो कितने गोते खाते रहते हैं सभी। मनुष्य भी वहाँ गोते खा रहे हैं, तो वो बिच्छू-टिंडन भी। तो वो ही गरुड पुराण में ये बातें दिखलाई हुई हैं। ये जो 84 जन्म की बातें ये सिद्ध करने के लिए गरुड पुराण बनाया हुआ है।

तो बाप कहते हैं कि देखो कि मैं तो ऐसी ये छी-छी विषय-वैतरणी नदी से निकाल करके तुमको क्षीर सागर में भेज देता हूँ। हँ? किसको? और कोई को नहीं। तुमको। और तुम्हारे लिए कोई नई बात तो है नहीं। कलप-कलप तुम क्षीर सागर में जाते हो। फिर अभी तो ये क्षीर सागर नहीं है ना। पीछे बोलता है तुमको सुखधाम में क्योंकि ये नाम बच्चों को बहुत सहज लगता है। सुखधाम। सिमरने में भी बहुत सहज, याद करने में भी सहज। कि हाँ ये हमने बहुत बिल्कुल अच्छी तरह से समझा कि बरोबर हम शांतिधाम के असुल निवासी हैं। हँ? शांतिधाम के असुल निवासी हैं? हम ही हैं? हँ? हमने ही अच्छी तरह समझा? पीछे आते हैं सुखधाम में पार्ट बजाने के लिए। शांतिधाम से आते हैं ना। पीछे 84 जनम का पार्ट बजाया। फिर हम जाते हैं शान्तिधाम। फिर आते हैं सुखधाम में। इसलिए बच्चों को बार-बार समझाते रहते हैं। भला ये सुखधाम और शान्तिधाम को याद करेंगे ना। वो दुखधाम को भूल जाओ। तो कितनी याद करने के लिए बाबा ने, हँ, कितने प्रकार दिये हैं।

21.9.1967 की प्रातः क्लास का पांचवां पेज। अच्छा। भला सुना ना तुमेव माता च पिता तुमेव। ये तो सभी भी कहते रहते हैं तुम मात-पिता हम बालक तेरे। तुम्हरी कृपा ते सुख घनेरे। तो वहाँ सुखधाम में सुख घनेरे तो होते ही हैं। सतयुग में होते हैं ना। और यहाँ इस दुनिया में तो दुख घनेरे होते हैं। और अभी तो ये सुख-दुख का संगम है ना इस समय में। तो ये भेंट पूरी होती है। हाँ, ये अच्छी भेंट है। यहाँ तो त्राहि-त्राहि करेंगे। तो जब त्राहि-त्राहि करेंगे तो अति का दुख। तो फिर सतयुग में, सतयुग की आदि में तो अति का सुख। तो अति सुख और अति दुख का ये खेल बना हुआ है। इसको, इसका भी खेल, अति सुख का भी खेल बताते हैं। हँ?

दिखाते हैं विष्णु अवतरण। हँ? या कृष्ण जन्माष्टमी। बात तो एक ही हुई ना। विष्णु अवतरण। हँ? विष्णु का क्या दिखलाते हैं? अरे, विष्णु तो जोड़ा ही लक्ष्मी-नारायण का। उसको ही कहा जाता है विष्णु अवतरण। तो वो विमान से जैसे कि सीधे आते हैं यहाँ। अभी सीधे ऊपर से कोई विमान से थोड़ेही आते हैं। ये तो श्री कृष्ण का भी उल्टा-सुल्टा अवतरण बताया है। अरे, अवतरते तो सभी हैं। कोई आत्माएं हैं ऐसी जो शान्तिधाम से अवतरती न हों? अवतरण तो सभी का होता है। हरेक आत्मा रूपी बच्चा सभी अवतरते हैं ऊपर से। परन्तु बच्चों के मुकाबले ईश्वर का अवतरण तो बहुत अच्छा माना जाता है। हँ? कहेंगे शिवबाबा का अवतरण हुआ। वो बच्चे देह, विचित्र। उसको चलचित्र नहीं कहेंगे। तो उनका ही है अवतरण। और उनका है सबसे सहज। क्या? अवतरण। जो आकरके भारत को स्वर्ग बनाते हैं। हँ? कौनसे सन् की वाणी है? 67 की। तो जो आकरके भारत को स्वर्ग बनाते हैं, हँ, अब कितने साल हो गए 67 से? 32-33 साल होने जा रहे हैं। आए नहीं? क्या कहेंगे? आए कि नहीं आए? हँ? शिवबाबा की बात हो रही ना। शिवबाबा आए कि नहीं आए? हँ? नहीं आए? आए? हँ? अरे, 67 की बात हो रही। मूँझते क्यों? नहीं आए।

देखो उनके आने का तुमको त्यौहार भी नहीं मनाने देते हैं। हँ? उस समय शिवरात्रि की, शिवजयंती की छुट्टी होती थी? नहीं होती थी। छुट्टी भी नहीं देते हैं। फिर कबसे छुट्टी देना शुरू किया? हँ? 76 से छुट्टी देने का शुरु हो गया। अभी? अभी देते हैं छुट्टी? सब जगह? तो सब, सारी दुनिया के अगर उनको मालूम होवे कि ये हमको मुक्ति देते हैं दुखों की दुनिया से और जीवनमुक्ति देते हैं, जीवन में रहते-रहते भी दुखों से मुक्ति। तो ये जानें तो सारे विश्व में त्यौहार मनावें उनका। उनका। किनका? उनका माने? शिवबाबा का। गॉड फादर का। मनाना चाहिए ना बच्ची। फादर है तो कुछ देता होगा ना। ये तो बेहद का फादर है तो बहुत कुछ बेहद का ही देता होगा। क्योंकि जभी हम सभी ब्रदर्स हैं और फिर ब्रदर्स एंड सिस्टर्स भी हैं। हँ? ब्रदर्स कैसे कहा? आत्मा-आत्मा भाई-भाई हैं। और ब्रदर्स सिस्टर्स कैसे कहा? हँ। जिसमें प्रवेश करते हैं तो उसको अम्मा बनाते हैं। तो माई-बाप दोनों हो गए ना। तो दोनों से दो ही - ब्रदर भी और सिस्टर भी। तो पहले क्या है? पहले तो उनके बच्चे हैं ना। कि बच्चियाँ हैं? पहले तो आत्मा रूपी बच्चे हैं।

तो ज़रूर हमको बाप की तो ज़रूर मनाना चाहिए। तब सबको बेहद की बाप की मनावें तब जब, जब उनको मालूम पड़े कि हाँ शिवबाबा ही हमारी सबकी सद्गति करते हैं। वो ही लिबरेटर हैं। लिबरेट करते हैं। तो फिर कहेंगे उनका जन्म कहाँ? मानेंगे वो भारत में। समझे ना? अभी उनका तो जन्म है भी। क्योंकि भारत में शिव जयन्ती मनाते भी हैं। परन्तु उनका किसी को कुछ मालूम न होने के कारण उनको ज्ञान कुछ भी नहीं है। किस बात का ज्ञान कुछ भी नहीं है? हँ? उनकी पहचान कुछ भी नहीं है। तो ये देखो पहचान नहीं है। तो ये हॉलीडे भी नहीं मनाय सकते। नहीं तो विवेक कहता है, लॉ कहता है, जबकि सबकी सद्गति करने वाला है, सर्व का लिबरेटर और गाइड है, तो उनकी जो जन्मभूमि है, वहाँ आकरके ये अलौकिक कर्तव्य करते हैं जनमभूमि में। तो उनका तो डे भी मनाना चाहिए। हँ? और तीर्थ यात्रा भी मनाना चाहिए। हँ? कब मनाएंगे? जब सब मानेंगे तो, हँ, तीर्थ यात्रा भी मनाएंगे। ठीक है ना बच्चे? कहाँ मनाएंगे? यहाँ आकरके। क्योंकि यहाँ भारत में ही तो यादगार मन्दिर सोमनाथ का है। बड़े ते बड़ा मन्दिर था। अगर कहें काशी का भी मन्दिर तो भी तो कहेंगे यहाँ ही है वो बडा मन्दिर। और नामीग्रामी मन्दिर है। तो मालूम किसी को नहीं है कि कोई शिवबाबा ने आकरके, हँ, हमारा ये लिबरेटर, गाइड बनने का काम किया। गाते हैं गॉड फादर इज़ लिबरेटर और गाइड। फिर इसका अर्थ भी समझें ना कि वो आकरके दुख से छुड़ाते हैं। ओमशान्ति। (समाप्त)

So, daughter, look, these are such nice, sweet topics. And when you also sit and listen to such topics then you feel joyful. But if outside children also come, and if you narrate such topics then they will wonder. And they would listen and say – This is a very high knowledge. Nobody can narrate such knowledge. After doing so, yes, after just listening, you may come later. You also come and make like this. By becoming Sudarshan Chakradhari you will become Chakravarti kings. You will become [kings] of the entire world. And did you listen? Did you people narrate nicely? Later, when they go outside, then Maya is so strong, so powerful that the topics of that place remains there. Similarly, when the child emerges from the womb, look, the child; there is a soul in it as well, isn’t it? It will be said for the soul only. The soul remains in the body only and says – Liberate me from this womb-like jail. Why does it say? Hm? It cries in despair and says – I will never commit sins. So, still, when it comes out and the topic of the womb-like jail remains in the womb-like jail only. What topic remains? Hm? It thinks inside that I will never commit sins; that topic remains there itself.

So, it is as if you listen to this as well. Whenever you listen in the exhibitions or in that or here; the exhibition is not here, but there because here only those who are well-educated Brahmins are allowed to sit. And then remains pure. When you narrate to them, then immediately they hear there, say that it’s nice, very nice, very nice; they will say – This knowledge is very nice. And this should definitely be understood by everyone. Achcha, then I will make purusharth; Go here only; I will go to this place only, I will go to this place only, I will do this. And then as soon as he steps out of the door there because that is also a door, isn’t it? Hm? Which one? Hm? When he went to the exhibition, then there is a door in that as well, isn’t it? Why was ‘also’ added? The womb-like jail also has a door. So, they come out of it; so, even here when they come out of the exhibition, then whatever they heard inside is left inside. But however Baba says that there is definitely some or the other effect. So, what will be its result? Hm? In future do not think that they did not listen; they will never come again. No. You think that we used to explain to so many people. No. Do not feel tired. Hm? Do not think that he did not listen. However they will definitely come at some point in time. Do not think that they will never come. Or that we explained to so many people. No. They will come again. And they will come and they will keep on coming. And this tree will continue to grow. So, when that happens then the Tree will grow big, will it not? Then it will attract everyone. Numerous people go to their institution; so, they feel very happy and lead a very pure life. Their food and drinks are completely pure. So, daughter, you become so pure.

And those who keep lying in the gutter, so, we come here and take them out of it, don’t we? But theirs’ is a gutter worst than a gutter. This name gutter itself is of brothel. Extreme hell (raurav narak). So, what will it be called? For example there are worms of the gutter, aren’t there? They keep on moving. They keep on biting each other. That one bit that one, and then he bit that one. So, this will be called extreme brothel. It is called extreme because it is most extreme. And children, many children must have heard Garud Puraan; the elderly men must have heard. Or the elderly women must have heard. This body also speaks, doesn’t it? It is old. So, this one has also heard all this Garud Puraan (a Hindu scripture). All these old ones used to listen. So, it contains a lot of interesting topics. So, the Father explains that all these Vedas, scriptures and books, whatever they narrate, why do they narrate in such interesting manner? Hm? So that people continue to fear. So, that has emerged from that Garud Puraan itself; what? That the human beings pass through 84 lakh species. One becomes a scorpion, one becomes a locust, and one becomes snakes and worms. It is because they show in that river of vices (vishay vaitarni nadi) that look everyone keeps on diving so much in it. Human beings are also diving there and those scorpions and insects as well. So, these topics have been depicted in the same Garud Puraan. The Garud Puraan has been written to prove the topics of these 84 births.

So, the Father says, look, I bring you out of such dirty river of vices and send you to the ocean of milk. Hm? Who? Not anyone else. You. And it is not a new topic for you. You go to the ocean of milk every Kalpa. Then now this is not an ocean of milk, is it? Later He says that I send you to the abode of happiness because children find this name very easy. The abode of happiness (sukhdhaam). It is very easy to chant, it is very easy to remember as well that yes, we have understood very nicely that definitely we are actually residents of the abode of peace (shaantidhaam). Hm? Are we actually the residents of the abode of peace? Are we alone? Hm? Have we alone understood nicely? Later you come to the abode of happiness to play the part. You come from the abode of peace, don’t you? Later you played a part for 84 births. Then we go to the abode of peace. Then we come to the abode of peace. This is why He keeps on explaining to the children again and again. You will remember this abode of happiness and the abode of peace, will you not? Forget that abode of sorrows. So, Baba has narrated so many methods to remember.

Fifth page of the morning class dated 21.9.1967. Achcha. You heard, didn’t you? Tumev mata cha pita tumev(You are my mother as well as Father). Everyone keeps on telling that you are our parents and we are your children. We get a lot of joy through your blessings. So, there is a lot of joy there in the abode of happiness. It is there in the Golden Age, isn’t it? And here in this world there is lot of sorrows. And now this is a confluence of happiness and sorrows at this time, isn’t it? So, this comparison is completed. Yes, this is a good comparison. Here they will cry in despair. So, when they cry in despair, then there will be extreme sorrow. So, then in the Golden Age, in the beginning of the Golden Age there is extreme happiness. So, this is a drama of extreme happiness and extreme sorrow. This play is also mentioned as a play of extreme happiness. Hm?

Vishnu’s incarnation is depicted. Hm? Or Krishna’s Janmashtami. The topic is one and the same. Vishnu’s incarnation. Hm? What is depicted in r/o Vishnu? Arey, Vishnu is a couple of Lakshmi and Narayan. That itself is called the incarnation of Vishnu. So, it is as if they come straight here. Well, do they come direct from above in an aeroplane? Shri Krishna’s incarnation has also been described to be in an opposite manner. Arey, everyone incarnates. Are there any such souls which do not incarnate from the abode of peace? Everyone incarnates. Each soul-like child incarnates from above. But when compared to the children the incarnation of God is considered to be very good. Hm? It will be said that ShivBaba’s incarnation took place. That children is body, vichitra (one without a picture). That will not be called chalchitra (motion picture). So, His alone is an incarnation. And His’ is the easiest one. What? Incarnation. He comes and makes India into heaven. Hm? It is a Vani of which year? Of 67. So, the one who comes and makes India heaven; hm, how many years have passed since 67? It is going to be 32-33 years. Did He not come? What will be said? Did He come or did He not come? Hm? ShivBaba’s topic is being discussed, isn’t it? Did ShivBaba come or not? Hm? Did He not come? Did He come? Hm? Arey, the topic of 67 is being discussed, isn’t it? Why do you feel confused? He did not come.

Look, you are not allowed to celebrate even the festival of His arrival. Hm? At that time did there used to be holiday for Shivratri, Shivjayanti? It did not used to be. They do not give even a holiday. Then, since when did they start giving a holiday? Hm? Holidays started from 76. Now? Is holiday given now? Everywhere? So, everyone, if the entire world comes to know that this one gives us liberation (mukti) from the world of sorrows and gives us liberation in life (jeevanmukti), liberation from sorrows while being alive, so, if they come to know this, then they would celebrate His festival in the entire world. His. Whose? His refers to whom? Of ShivBaba. Of God Father. It should be celebrated daughter, shouldn’t it be? When He is the Father, then He gives something, doesn’t He? This is unlimited Father; so, He must be giving many a things in an unlimited sense only. It is because when we all are brothers and then we are brothers and sisters as well. Hm? How did He say brothers? Souls are brothers. And how did He say ‘brothers and sisters’? Hm. The one in whom He enters, He makes him a mother. So, there is Mother as well as Father, isn’t it? So, both through both – Brother as well as sister. So, what is first? First are His sons, aren’t they? Or are they daughters? First there are soul-like sons.

So, definitely we should celebrate [the festival] of the Father. Then everyone; they will celebrate in respect of the unlimited Father when they get to know that yes, ShivBaba is the only one who causes the true salvation of every one of us. He alone is the liberator. He liberates. So, then it will be asked as to where is His birth? They will believe it to be in India. Did you understand? Now His birth is also there. It is because people also celebrate Shiv Jayanti in India. But as nobody knows anything about Him, they do not have any knowledge. What do they not know anything about? Hm? They do not know anything about His introduction. So, look, they do not have His introduction. So, they cannot celebrate His holiday as well. Otherwise, wisdom says, law says that when He causes everyone’s sadgati, when He is the liberator and guide of everyone, then His place of birth, He comes there and performs His alokik duty in the place of birth. So, His day should also be celebrated. Hm? And His pilgrimage should also be organized. Hm? When will you celebrate? When everyone believes then they will organize the pilgrimage as well. It is correct, isn’t it children? Where will they celebrate? After coming here. It is because the memorial temple of Somnath is located in India only. It was the biggest temple. Even if we talk of the temple of Kashi, then it will be said that that big temple is here itself. And it is a famous temple. So, nobody knows that ShivBaba came and performed the task of becoming our liberator and guide. People sing that God Father is liberator and guide. Then they should also understand its meaning that He comes and liberates us from sorrows. Om Shanti. (End)

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Re: Extracts of PBK Murlis - as narrated to the PBKs

Post by arjun » 16 May 2021

शिवबाबा की मुरली
ShivBaba’s Murli
वीसीडी 2703, दिनांक 17.11.2018
VCD 2703, dated 17.11.2018
प्रातः क्लास 21.9.1967
Morning Class dated 21.9.1967
VCD-2703-extracts-Bilingual

समय- 00.01-23.11
Time- 00.01-23.11


प्रातः क्लास चल रहा था - 21.9.1967. सद्गुरुवार को पांचवें पेज के मध्यांत में बात चल रही थी - जो क्रिश्चियन लोग गाते हैं गॉड इज़ लिब्रेटर और गाइड, तो इसका अर्थ भी समझें ना कि वो कैसे लिब्रेटर बनते हैं। लिबरेट करने के लिए दुख से छुड़ाय करके शांतिधाम में ले जाते हैं। परन्तु फिर झूठ लिखने से, सर्वव्यापी करने से और गीता को खंडन करने से देखो भारत का कितना महत्व उड़ जाता है। जबकि भारत में ही बाप आकरके स्वर्ग स्थापन करते हैं, हैविन स्थापन करते हैं। और भारत को ही निमित्त बनाते हैं। क्योंकि निमित्त तो साकार को कहा जाता है। शिव बाप, हैविनली गॉड फादर, सुप्रीम सोल, वो तो सदा निराकार है। जैसे तुम बच्चे आत्माएं ज्योतिबिन्दु हो। बिन्दु माने निराकार। बिन्दु को कितना भी छोटा बनाया जा सकता है। तो अति सूक्ष्म ज्योतिबिन्दु आत्माएं, तुम्हारा बाप ज्योतिबिन्दु का ज्योतिबिन्दु।

निराकार बाप सदा निराकारी स्टेज वाला है। भल साकार सृष्टि में आता है, और आता भी कलियुग के अंत में है, जबकि सारा भारत, भारत के सारे ही भारतवासी एकदम जड़जड़ीभूत हो जाते हैं। कितना दुखी हो जाते हैं। दुनियावालों की दृष्टि में उनका महत्व ही उड़ जाता है। परन्तु जो बेहद का ड्रामा बना हुआ है, चार सीन वाला, सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग, ये ड्रामा कल्याणकारी है। ऐसे नहीं है कि अभी कलियुग के अंत में नहीं आते हैं। वो तो आते ही तब हैं जब वृष्णिवंशी जो यादव शास्त्रों में गाए हुए हैं उनके द्वारा बुद्धि रूपी पेट में से मिसाइल्स, एटम बम्ब निकल पड़ते हैं। और वो चतुर्थ विश्वयुद्ध कराने के निमित्त बन जाते हैं। सारी दुनिया में कलियुग के अंत में उन यादवों का वर्चस्व हो जाता है। और भारतवासियों का वर्चस्व खलास हो जाता है।

तो भारतवासी सतयुग के आदि में सबसे ऊँच थे। भारत सोने की चिड़िया था। परन्तु आज जडत्वमयी भारतवासियों ने भारत को जड़ जमीन समझ रखा है जबकि शास्त्रों में जितने भी नाम हैं सब काम के आधार पर। अब जड़ जमीन थोड़ेही कुछ काम करती है। ये तो भारत नाम का कोई व्यक्तित्व है। जो भरत की संतान कहा जाता है। भरत माना ही भरण-पोषण करने वाला। उसको विश्वनाथ नाम दे दिया है शास्त्रों में। रामायण में नाम भरत दे दिया है। और दिखाय दिया है कि जो राम भगवान जिनको समझते हैं, वो त्रेता वाला राम भगवान। उनका, छोटे भाई का नाम भरत रख देते हैं। ये नहीं समझते हैं कि वो जो राम के चार भाई हैं, वो ही चार आत्माएं इस विश्व में जो चार मुख्य धर्म फैलते हैं उनके बीज हैं। और उनमें से जो राम वाली आत्मा है वो ही कलियुग के अंत में निराकार शिव बाप का आधार बनती है। कैसे बनती है? निराकार शिव बाप प्रवेश करते हैं। जिसमें प्रवेश करते हैं उसके लिए गायन है कि भारत में भगवान आते हैं। और देशों में क्यों नहीं आते? क्योंकि और देशों में ब्रह्मचर्य का, पवित्रता का उतना मान नहीं है जितना भारत में आज भी पवित्रता की, ब्रह्मचर्य की मान्यता है।

खास करके वो निराकार शिव बाप सुप्रीम सोल जिन कन्याओं-माताओं को शिव शक्तियां बनाते हैं, उन शिव शक्तियों की कलियुग के अंत में देखो क्या हालत हो जाती है। उन कन्याओं-माताओं को शास्त्रों में गऊ का रूप दे दिया है। वास्तव में गऊ तो जानवर होती है। अब भगवान कोई आकरके जानवर गउओं को चराएगा क्या? हँ? भगवान, जो ऊँच ते ऊँच आत्मा है इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने वाली, वो सुप्रीम सोल तो मनुष्यों को आकरके सारी सृष्टि के आदि, मध्य, अंत का ज्ञान सुनाएगा या जानवरों को सुनाएगा? नहीं। वो तो इस सृष्टि पर आकरके भारत की कन्याओं-माताओं को जो ज्ञान सुनाता है, उस ज्ञान को सुनने में कन्याएं-माताएं ही सबसे आगे जाती हैं। लौकिक दुनिया में भी देखो, कन्याएं-माताएं अच्छी पढ़ाई पढ़ती हैं या पुरुष ज्यादा अच्छी पढ़ाई पढ़ते हैं? हँ? वर्चस्व भले दुनिया में पुरुषों का है, पुरुषों का राज्य है, लेकिन पढ़ाई पढ़ने में कन्याएं ही आगे जाती हैं। क्यों जाती हैं आगे? कारण? क्योंकि पवित्र बुद्धि होती हैं। और खास करके कन्याओं-माताओं की तो खास पवित्र बुद्धि होती है क्योंकि और देशों में कन्याओं की इतनी सुरक्षा नहीं करते हैं जितनी भारत में करते हैं। क्योंकि भारतवासियों में अभी भी ये भावना भरी हुई है कि यही कन्याएं भारत की देवियों के रूप में पूजी जाती हैं। क्या? भले कहते हैं उनको देवी माता लेकिन जो चित्र बनाते हैं उन चित्रों में कोई भी माता के रूप में नहीं दिखाई देती। क्या? कहते हैं ना धरती माता। पृथ्वी माता। उसका तो शास्त्रकारों ने ही अर्थ किया है - पृथ्व्याति इति पृथ्वी। जो विस्तार को पाती है, चौड़ी हो जाती है, उसको पृथ्वी कहा जाता है। अब कन्याएं थोड़ेही विस्तार को पाती हैं जब तक माता न बने।

और शिव बाप आते हैं तो उन कन्याओं-माताओं को, वो जो विकारी माताएं बन जाती हैं, द्वैतवादी द्वापरयुग में जबसे दो-दो धर्म, दो-दो राज्य, दो-दो भाषाएं, दो-दो कुल इस सृष्टि पर विधर्मियों के द्वारा पनपते हैं तबसे उन माताओं की दुर्गति ही होती है। इसलिए कहते हैं कि धरणी माता का भार जब बहुत बढ़ जाता है, पापों का बोझ चढ़ जाता है, धरणी पर रहने वाले मनुष्यों के द्वारा तो भगवान इस सृष्टि पर आते हैं धरणी का बोझ उतारने के लिए और उन कन्याओं-माताओं को खास निमित्त बनाते हैं। उनमें भी माताओं के ऊपर तो कंट्रोल होता है पतियों का। कन्याएं तो स्वतंत्र होती हैं। और वो कन्याएं पवित्र होने के कारण जो परमपवित्र, एवरप्योर सुप्रीम सोल गॉड फादर गाया हुआ है उसकी वाणी को जल्दी समझ लेती हैं, जल्दी ग्रास्प करती हैं। सिर्फ सुनती ही नहीं। उनको समझाया जाए तो समझती भी हैं। बशर्ते कि देहधारी धर्मगुरुओं के चुंगल से छूट जाएं तो।

बताया कि उन कन्याओं-माताओं को शास्त्रों में, गउओं के रूप में क्यों दिखाय दिया? इसलिए दिखाय दिया कि ये भारत की ही कन्याएं-माताएं हैं जिनको जिस खूंटे से जीवन में बांध दिया जाता है, जीवन भर सीधी-सादी बन कर उसी खूंटे से बंधी रहती हैं। और सभी जानवरों के बीच में गाय तो खास करके भारतवासी; भारत की जो गउएं हैं, भले यादगार रूप में जानवर गउएं हैं क्योंकि शास्त्रों में लिख दिया है कृष्ण ने जानवर गउओं को चराया। अब उन जानवर गउओं की बात नहीं है। ये भारत की वो शुद्ध ज्ञान का दूध देने वाली कन्याओं-माताओं की बात है जिन्होंने ईश्वरीय ज्ञान में अपनी मनमत के आधार पर मिक्सचरिटी नहीं की थी। फिर भी बाप आते हैं तो उन शक्तियों को, शिव शक्तियों को निमित्त बनाकर, सारी दुनिया की सब मनुष्यात्माओं की सद्गति करते हैं। आते ही हैं गति सदगति देने के लिए। लिबरेटर और गाइड बनकरके रास्ता बताते हैं। तो फिर सब तो नहीं सुधरते हैं। हँ?

कलियुग के अंत में ये सारी दुनिया के प्राणीमात्र, सिर्फ मनुष्यों की बात नहीं है, सब तामसी बन जाते हैं, क्योंकि ये नियम है इस सृष्टि का कि जो भी आत्माएं आत्मलोक से उतरती जाती हैं इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर और उत्तरोत्तर जनसंख्या की वृद्धि होती जाती है। सतयुग आदि से जो आत्माएं जन्म लेती आई हैं वो भी जन्म-मरण के चक्र में आती रहती हैं और आत्मलोक से आने वाली आत्माएं जो ढ़ेर की ढ़ेर की तादाद में, ज्यादा से ज्यादा तादाद में लगातार उतरती रहती हैं, वो भी एड हो जाती हैं सृष्टि रूपी रंगमंच पर। तो बहुत जनसंख्या की कलियुग के अंत में वृद्धि हो जाती है। और दुख-दर्द बढ़ेगा या घटेगा? श्रेष्ठ आत्माएं सतयुग में देवात्माएं थोड़ी होती हैं और कलियुग के अंत में सुप्रीम सोल बाप आते हैं, हँ, भारत को खास स्वर्ग बनाते हैं, और जो विदेशी धर्मखंड हैं और उन धरमखंडों में रहने वाली मनुष्यात्माएं हैं, वो उतना पहचान नहीं पाती हैं। उनको श्रद्धा-विश्वास कलियुग के अंत में आकरके उखड़ जाता है क्योंकि जो द्वैतवादी द्वापरयुग से अलग-अलग धर्मों की आत्माएं आती हैं धरमपिताएं, वो इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर अपने को ही सर्वेसर्वा साबित करती हैं। जबकि सच्चाई तो ये है, यही वास्तविकता है कि उन धरमपिताओं के देह अभिमानियों के आने के बावजूद भी ये सृष्टि दुख की ओर बढ़ती जाती है, तामसी बनती जाती है, दुखदायी बनते जाते हैं। और मनुष्य दुखदायी बनेंगे तो मनुष्य के ऊपर सारे प्राणी निर्भर हैं। मनुष्यों को मन-बुद्धि होती है तो वो वायब्रेशन बना सकते हैं, वातावरण बनाते हैं। जैसा वातावरण मनुष्य बनाएंगे वैसे अन्य प्राणीमात्र भी बनते जाते हैं।

तो ये किसकी बुद्धि में नहीं बैठता कि इस दुनिया की हर चीज़, चाहे देवात्माएं हों, चाहे मनुष्यात्माएं हों, ऋषि-मुनि हों, राक्षसी आत्माएं हों, जो सिर्फ दुख देती हैं, वो सब चार अवस्थाओं से गुज़रती हैं सतयुग से लेकर के कलियुग के अंत तक। जैसे शास्त्रों में भी लिखा हुआ है कि सतयुग 16 कला संपूर्ण होता है, त्रेता 14 कला संपूर्ण होता है, द्वापर 8 कला संपूर्ण होता है ज्यादा से ज्यादा और कलियुग ज्यादा से ज्यादा आरंभ में 4 कला संपूर्ण और अंत में कलाहीन हो जाता है। तो बात किलियर हो जाती है कि जैसे चन्द्रमा की कलाएं घटती जाती हैं, रोशनी कम होती जाती है, ऐसे इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने वाली आत्माएं युगानुसार उत्तरोत्तर सतोप्रधान से सतोसामान्य, रजो और तमो में गिरती रहती हैं। तामसी बनते हैं तो बहुत दुखी हो जाते हैं। खुद भी दुखी होते हैं और दूसरों को भी बहुत दुख देते हैं। कलियुग के अंत में ही भगवान को आना होता है सुप्रीम सोल गॉड फादर को क्योंकि जन्म-मरण के चक्र से न्यारा होने के कारण इस चार युगों वाली सृष्टि के आदि, मध्य, अंत को जानता है।

A morning class dated 21.9.1967 was being narrated. The topic being discussed in the end of the middle of the fifth page on Thursday was – the Christians sing – God is liberator and guide; so, they should understand its meaning as well that how He becomes a liberator. In order to liberate He frees you from sorrows and takes you to the abode of peace. But then look, India’s importance vanishes so much by writing lies, by making [God] omnipresent and by negating the Gita. Whereas the Father comes only in India and establishes swarg, establishes heaven. And He makes Bhaarat itself instrumental because the corporeal is called instrument. Father Shiv, the Heavenly God Father, the Supreme Soul is forever incorporeal. Just as you children are points of light; point means incorporeal. The point can be made howevermuch small. So, most subtle point of light souls; the Father of you, the points of light is a point of light.

The incorporeal Father is forever in an incorporeal stage. Although He comes in a corporeal world, and He comes in the end of the Iron Age when the entire India, all the residents of India become completely dilapidated. They become so sorrowful. Their importance itself vanishes in the eyes of the people of the world. But in the unlimited drama of four scenes, the Golden Age, the Silver Age, the Copper Age, the Iron Age, this drama is benevolent. It is not as if He does not come now in the end of the Iron Age. He comes only when the Vrishnavanshi Yadavas, who are famous in the scriptures, through them, from their abdomen like intellect the missiles, atom bombs emerge. And they become instruments in causing the fourth world war. In the end of the Iron Age those Yadavas become dominant in the entire world. And the dominance of the residents of India ends.

So, the residents of India were the greatest in the beginning of the Golden Age. India was a golden bird. But today the inert residents of India have considered the non-living land to be India whereas all the names in the scriptures are based on the tasks performed. Well, does the non-living land perform any task? There is a personality named Bhaarat who is called the child of Bharat. Bharat itself means the one who sustains. He has been named Vishwanath in the scriptures. He has been named Bharat in the Ramayana. And it has been shown that the Ram whom people consider to be God, is the God Ram of Treta (Silver Age). His younger brother is named Bharat. They do not think that the four brothers of Ram are the four main souls in this world who are seeds of the four main religions which spread in the world. And from among them the soul of Ram itself becomes the base of the incorporeal Father Shiv in the end of the Iron Age. How does it become? The incorporeal Father Shiv enters. The one in whom He enters, it is famous for him that God comes in Bhaarat. Why doesn’t He come in other countries? It is because celibacy, purity is not accorded that much importance in other countries as much as there is importance of purity, celibacy in India even to this day.

Especially those virgins and mothers, whom that incorporeal Father Shiv, the Supreme Soul makes Shiv-Shaktis, look, what is the condition that those Shiv Shaktis reach in the end of the Iron Age? Those virgins and mothers have been given the form of cow in the scriptures. Actually cow is an animal. Well, will God come and take the animal cows for grazing? Hm? God who is the highest on high soul playing the part on this world like stage, will that Supreme Soul come and narrate the knowledge of the beginning, middle and end of the entire world to the human beings or to the animals? No. Whatever knowledge He narrates to the virgins and mothers of India after coming to this world, the virgins and mothers go ahead of everyone in listening to that knowledge. Look, even in the outside world, do the virgins and mothers study well or do the men study better? Hm? Although there is a dominance of men in the world, there is a rule of the men, but it is the virgins who gallop ahead in studying knowledge. Why do they gallop ahead? Reason? It is because their intellect is pure. And especially the intellect of the virgins and mothers is pure because virgins are not safeguarded as much in other countries as they are in India. It is because the residents of India still believe that it is these virgins who are worshipped in the form of Devis of India. What? Although they are called Mother Devi, but the pictures that they prepare, in those pictures none of them is visible as a mother. What? People say – Mother Earth, don’t they? Mother Earth. The writers of the scriptures have interpreted that as – Prithviyaati iti Prithvi. The one that undergoes expansion, becomes wide is called the Earth (Prithvi). Well, do the virgins expand [in size] until they become a mother?

And when Father Shiv comes, then those virgins and mothers, who become vicious mothers, ever since two religions, two kingdoms, two languages, two clans are started by the vidharmis in this world from the dualist Copper Age, those mothers undergo degradation. This is why it is said that when the weight of Mother Earth increases a lot, when the burden of sins increases through the human beings living on the Earth, then, when God comes in this world to remove the burden of the Earth and especially makes those virgins and mothers instruments. Even in that there is a control of husbands on the mothers (wives). Virgins are independent. And those virgins being pure understand, grasp easily the speech of the supremely pure, ever pure, Supreme Soul God Father, who is famous. They do not just listen. If they are explained, then they also understand subject to the condition that they become free from the clutches of the bodily religious gurus.

It was told that why were those virgins and mothers shown in the form of cows in the scriptures? They were shown because it is the virgins and mothers of India only who when tied to a tent-pin in their life, they remain tied to the same tent-pin throughout their life leading a simple life. Among all other animals especially the cow, the residents of India; the cows of India, although there are animal cows in a memorial form because it has been written in the scriptures that Krishna took animal cows for grazing. Well, it is not about those animal cows. It is about those virgins and mothers of India who produce pure milk of knowledge, who had not caused mixturity in the Godly knowledge on the basis of their mind’s opinion. However, when the Father comes, He makes those Shaktis, the Shiv Shaktis instruments and causes the true salvation of all the human souls of the entire world. He comes only to cause gati-sadgati. He shows the path as a liberator and guide. So, then all do not reform. Hm?

In the end of the Iron Age, all the living beings of the entire world; it is not just about the human beings; all become degraded because it is a rule of this world that all the souls which keep on descending from the Soul World on this world stage and the population keeps on increasing successively. The souls which have been getting birth from the beginning of the Golden Age also keep on passing through the cycle of birth and death and the souls coming from the Soul World, which keep on descending in huge numbers, in maximum numbers, they also get added to this world stage. So, the population increases a lot in the end of the Iron Age. And will the pains and sorrows increase or decrease? The number of righteous souls, the deity souls is less in the Golden Age and in the end of the Iron Age when the Supreme Soul Father comes, hm, especially transforms India into heaven and the foreign religious lands and the human souls living in those religious lands are unable to recognize that much. They lose devotion and faith in the end of the Iron Age because the souls of different religions, the founders of religions who come from the dualist Copper Age prove themselves to be protagonists (sarvesarva) while the truth is, the reality is that despite the arrival of those founders of religions, the body conscious ones, this world keeps on moving towards sorrows, goes on becoming degraded, people keep on becoming givers of sorrows. And when the human beings become givers of sorrows, then all the living beings are dependent on the human beings. Human beings have mind and intellect, so they can build vibrations, build an atmosphere. As is the atmosphere that human beings build, so do other living beings go on becoming.

So, it doesn’t sit in anyone’s intellect that everything in this world, be it the deity souls, be it the human souls, be it the sages and saints, be it the demoniac souls, who give only sorrows, all of them pass through four stages from the Golden Age to the end of the Iron Age. For example, it has been written in the scriptures also that the Golden Age is perfect in 16 celestial degrees, the Silver Age is perfect in 14 celestial degrees, the Copper Age is perfect in 8 celestial degrees at the most and the Iron Age is at the most perfect in 4 celestial degrees in the beginning and becomes devoid of celestial degrees in the end. So, the topic becomes clear that just as the celestial degrees of the Moon keep on decreasing, just as its light keeps on decreasing, similarly, the souls playing their part on this world stage keep on successively falling from satopradhan to satosamanya, rajo and tamo as per the Ages. When they become degraded, then they become very sorrowful. They become sorrowful themselves and they give sorrows to others as well. God, the Supreme Soul God Father has to come only in the end of the Iron Age because being free from the cycle of birth and death He knows the beginning, middle and end of the world consisting of four Ages.

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